Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Apr 26 -गीता दर्शन "कर्मण्येवाधिकारस्ते": ब्रह्मांडीय न्याय प्रणाली और कर्म के प्रतिफल का रहस्य! Part - 2
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- 0:00कर्मन्ने वाधिकारस्ते माँ फले शुगर अच्छा पैंट शर्ट डाले ग्रीन
- 0:09शेप्ड व्यक्ति बाल बिखरे हुए मुँह के ऊपर धूल फंकी हुई मेरे पास आता
- 0:17है मुझे बोला। मैंने कहा भाई मैं कोई सेठ वगैरह
- 0:23नहीं, मैं तो तेरे जैसा ही हूँ, ये तो मुझे कोई यहाँ पर काम मिल
- 0:33जाएगा। मैंने कहा क्या काम कर सकते हो?
- 0:38या तो यही मजदूरी का ढोलूगा मैंने कहा ठीक है चल तू भी लग जा सट्टे
- 0:48में पैसा है चोरी का माल डांगों के गज।
- 0:57तो मैंने कहा चल तू फिर अच्छा कोई बात नहीं देने वाला और दे देगा जब
- 1:05उसने इतना दे दिया, मैंने तो मांगा भी नहीं तो यहाँ बात समझो।
- 1:16मैंने पंछियों का दर्द समझा और कर्ज लेकर मैंने चौगा डाला तो
- 1:24परमात्मा ने मेरी आत्मा की पुकार देखी, उसने मुझे स्वयं आके कहा तू
- 1:31मांगता तो है। अब मुझे ही तुम्हें देना पड़ेगा
- 1:39जा तुम छत से लगा ले फिर चूक गया तो फिर कहे कि तू आज लगा ले फिर
- 1:46लगा ले देने वाला ज्यादा बली है और उसको सबका ध्यान यह मेरी
- 1:53जिंदगी की। बीती हुई बातें हैं।
- 1:56किसी प्राणों करणों में लिखी हुई बातें नहीं, मेरे जीवन के साथ घटी
- 2:02हुई घटनाएं और बहुत बार व्याख्यात यज्ञ सा कर चुका हूँ, वह भी लकी।
- 2:14लेकिन क्या हुआ कि 4 दिन वह आता रहा, काम करता रहा जाता रहा?
- 2:20अब तुम्हारे सवाल का जवाब आ रहा है।
- 2:26लेकिन सांज सब मजदूर होते हैं, मिस्त्री भी होते हैं।
- 2:32अपनी दिहाड़ी लेने के लिए शायद उस वक्त मिस्त्री मजदूर की दिहाड़ी
- 2:3910 और ₹20 हुआ करती थी, मेरे हिसाब से ₹20 मिस्त्री ₹10।
- 2:55लेकिन वह मजदूर था कि सारे दिन काम करता और वह चला जाता साँझ को
- 3:05पैसा नहीं लिख जाता। 4 दिन के बाद मैंने कहा है यह आज
- 3:17फिर काम पर कल भी देखा, परसों भी रोज़ देखता हूँ लेकिन सांझ पैसे
- 3:22लेते वक्त ये नहीं आता, मैंने उससे पूछा।
- 3:35अरे भाई तुने काम तो मांगा लेकिन तू सांझ पगार लेने नहीं आता, अपनी
- 3:42मजदूरी दहाड़ी ये मजदूर लोग तो बेचारे रोज़ ताजा कमाते ताजा।
- 3:51तू नहीं आता चुप रहे क्या? मैंने कहा अच्छा तू बता आज 5 दिन
- 3:59हो गए, मैंने उसको पांच दिनों के पैसे दे दिए।
- 4:10ये ले? इनका कहाँ से आया?
- 4:20कहता कि मैं अयोध्या के पास से आया अप से।
- 4:29अब मैं उस शहर का नाम भूल गया। खैर, फिर वो दूसरे दिन फिर हो
- 4:45गया, मैंने उससे कहा के तू कुछ बड़ा भी है।
- 5:00यहाँ हिसाब किताब भी होता है। थोड़ा सा कहता मैं पढ़ा, मैंने
- 5:10कहा तू कितना पढ़ा है? मेरे दिमाग को शॉक लगा जब उसने
- 5:17कहा कि शेठ जी मैं मास्टर्ड ऑफ आर्ट्स एमए 1986 में एमए।
- 5:30मैंने कहा यह नौबत क्यों आई? कहता गरीबी का कारण है।
- 5:39मैंने कहा क्या उत्तर प्रदेश में इतनी गरीबी है?
- 5:49उत्तर प्रदेश में बहुत गरीबी? वहाँ चोरी डकैती भी बहुत है,
- 5:58मैंने कहा वहाँ तीर्थी भी बहुत है कहता है, कहा कैसे तीर्थ?
- 6:06जब वह व्यक्ति भूखा मरे, तो तीर्थों का क्या करना होता।
- 6:12अब हम तो यहाँ पंजाब में देखो मास्टर डिग्री है।
- 6:18हमारे पास नौकरी नहीं है। ये बहुत शुरू से मुझे पता चला कि
- 6:24बेरोजगारी आज ही से नहीं है। तेरा थोड़ा सा लेके आना इसकी तो
- 6:38मैंने उसको कहा तू इतना बड़ा लिखा है तो तेरे को मैं कुछ लिखित का
- 6:44काम दे देता हूँ, पहले दिन बताना था मुझे कहता नहीं बाबू जी सेठ जी
- 6:53हम तो सदा से ही ये। जाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।
- 6:56हमें वहाँ काम धाम नहीं मिलता। फैज़ाबाद ये बता रहे हैं कि
- 7:05फैज़ाबाद और बताना लल्लू सिंह हार गए थे बीजेपी के बीजेपी के 54,502
- 7:12से। 2024 फैज़ाबाद की सीट थी अयोध्या
- 7:22लल्लू सिंह बीजेपी के हार गए थे 2024 के लोकसभा इलेक्शन में
- 7:3054,500। 54,500 वोटर्स वहाँ का ये भैया था
- 7:40क्या? नाम था इसका नीला प्रशासन?
- 7:52तो दूसरे दिन से मेनू उसको कोई लिखित पड़ते, काम पे मज़दूरों का
- 8:00ख्याल रखा करो इनको सांझ को पैसे टके दे दिया करो, कोई सामान बाजार
- 8:08से ले के आना वो ले आया करो। इस दुकान से ले आया करो और पैसे
- 8:14मेरे नाम पे लिखवा दिया करो। फिर उसको मैंने ये काम सौंप दिया
- 8:21और उसको जो पहले 5 दिन के पैसे थे वो मैंने डबल करके दिए।
- 8:27मैंने कहा ये और। तू इतना पढ़ा लिखा है तेरा इतना
- 8:33हक नहीं बनता है, तेरा डबल हक बनता है और अब भी तुझे इससे भी
- 8:38ज्यादा पैसे मिलेंगे। इमामदार व्यक्ति उत्तर प्रदेश के
- 8:45लोग मेहनती, बिहार और उत्तर प्रदेश।
- 8:51क्योंकि मैंने आढ़त की दुकान भी की है।
- 8:54वहाँ बिहार से भी आते थे। उत्तर प्रदेश महंत कशोरी ईमानदार।
- 9:11इस बात से आप क्या समझें ये तुम्हारे प्रश्न का जवाब है।
- 9:20कर्मनेवा धिकार से माँ फलेशु कदा और जाते हुए मैंने उसको ₹5000
- 9:29दिया। मैंने कहा ये तू ले जा, अपूर्ण को
- 9:38और परमात्मा देगा। अब अपूर्ण को तो एक रास्ता मिल
- 9:45गया है ये नंबर का। उसने सिर्फ कर्म किया, साँझ जाते
- 9:58वक्त उसने पैसा नहीं अगर चुपके से निकल जाता कर मरने वाले का रसते
- 10:05उसने अपना कर्म किया और बड़े प्रेम से काम करता मेहनत।
- 10:12माँ फलीशु कदाचन। परमात्मा कभी किसी का हक नहीं
- 10:16रखा। आज मुझे लोग गालियाँ निकाल रहे
- 10:21हैं, महात्मा गाँधी ने ये नहीं किया, ये नहीं किया।
- 10:28अगर ऐसा कर देता तो 30 साल पहले आजादी मिल जाती।
- 10:39जब महल बन जाया करते हैं, मेरी बात को समझ लेना, जब महल बन जाया
- 10:48करते हैं तब तक तो कोई नहीं आता, कहीं काम ना करना पड़ जाए जब महल
- 10:55बन जाया करते हैं। वो हिसाब लेने वाले आजाय करते
- 11:03हैं। यह आज जो बीजेपी वाले आरएसएस वाले
- 11:10हिसाब लेने आते हैं, यह इसी बात का प्रमाण है।
- 11:18क्या खर्च किया, क्यों खर्च किया? ऐसा क्यों किया?
- 11:22ऐसा क्यों किया? ऐसा कर देते तो ऐसा हो जाता।
- 11:25भाई तो मैं कर लेती, तुम कहाँ गए थे, तुम्हारे बाप दादा कहाँ गए?
- 11:40गाँधी के नाम लिखा था कि गाँधी ने सब कुछ करा था, आज फिर रुक गए।
- 11:46ये बाबा फंस गए हैं अब तुम बचाओ, रात्रि को ही मुझे बाबा ने कहा।
- 11:55ये काम धंधा छोड़ ये तुम्हारे जैसा पिछले जनम में इन्होंने इनाम
- 12:05दिया था, वैसा ही ये अब इनाम दे देंगे।
- 12:13तुम अपनी अध्यात्म की बात उसमें निषेणा तो हो फिर गाँधी कभी पैदा
- 12:20नहीं होगा। कर मन ने वार्ड का रस्ते मा फले
- 12:27तो उस मजदूर ने 5 दिन काम किया लेकिन मेरे से पैसा नहीं मांगा
- 12:32उसने। तो क्या उसका पैसा डूब गया?
- 12:38नहीं क्या उसको उसकी मेहनत का फल नहीं मिला?
- 12:42मिला दुगना होके मिला तिगना होके मिला और मैं खुश भी हुआ और वह
- 12:49मजदूरी का काम करता करता। हवा के भीतर बैठा रहता, आराम से
- 12:55लेख तो करता रहता है ये चीज़ आ गई फला से आ गई वो चीज़ ले आया वो
- 13:00चीज़ ज्यादा बाहर का काम कर, कर्म कर फल की इच्छा न कर।
- 13:15यह इस कहानी से सीख लो, पता नहीं उसने कहाँ सिखाया मुझे बाद में
- 13:27पता चला। पता नहीं वो कहाँ सोता था ये मुझे
- 13:35बाद में पता चला लेकिन वो सारे दिन काम करता और ज़रा भी शिकन
- 13:43नहीं। उसकी कोई बीड़ी नहीं पीता था, आंत
- 13:48और से। ये यूपी के लोग बिहार के लोग
- 13:51बीड़ी वगैरह पीते हैं। जरदा उसमें कोई अब बैल नहीं थी।
- 13:59सीधा साधा 3035 के करीब का व्यक्ति।
- 14:145 दिन काम किया, पैसा नहीं मांगा तो क्या उसे नहीं मिला मिला?
- 14:30जितनी मजदूरी थी बाकियों को तो उतनी ही मिली जिन्होंने मांगा।
- 14:35और जिसने नहीं मांगा उसको चार गुना मिली।
- 14:41प्रसन्नता अलग है। मेरी आत्मा उसे देख कर बड़ी खुशी
- 14:45होती है, दुखी भी होती है कि मास्टर डिग्री?
- 14:56उत्तर प्रदेश में इसके लिए कोई नौकरी नहीं है।
- 15:01कहता सेठ जी, नौकरी तो बहुत है उस वक्त कांग्रेस का अर्थ।
- 15:13लेकिन नौकरी देने वाले अपने अपनों को नौकरी दे देते हैं।
- 15:18अंधा बाटे रेवड़ियां मुड़ मुड़ अपनों को ही दे क्या करें?
- 15:24हम गरीब रह जाते हैं, मैंने ये सारे वक्त देखे।
- 15:34तूफान मेरे ऊपर से गुजरें। ऐसे लोगों से मेरी मुलाकातें हुई
- 15:40हैं, इसलिए मैं इन चीजों को जानता हूँ।
- 15:47अब आपको समझ आ गए। उस मजदूर की तरह बेचारा दिहाड़ी
- 15:55करता था। सबसे छोटे कामों में गिना जाता
- 16:01है। मेहनत मजदूरी करना, दिहाड़ी धब्बा
- 16:05करना। और साँझ को पैसे फिर बाद में पता
- 16:18चला वो गुरुद्वारा जा के हमारे पंजाब में कोई व्यक्ति भूखा नहीं
- 16:29बाबा नानक के वो ₹30। 550 वर्ष से ज्यादा बीत गए, खत्म
- 16:38नहीं हो गए और हर गुरुद्वारा में लंगर चल रहा है।
- 16:46देशों में विदेशों में सब जगह खालसा पंथ पहुँच जाता है।
- 16:50खासा ऐड लेकिन बाबा नानक के वो ₹30 खत्म नहीं हो रहे और मैं
- 16:58तुम्हें एक बात बताऊँ ये ₹30 कभी खत्म होंगे भी नहीं, अगर बाबा
- 17:07नानक के सच्चे शिष्य बने रहे। अभी कुछ आवाजें मैंने सुनी।
- 17:16एक व्यक्ति मुझसे कह रहा था कि जब दूसरे धर्मों वाले हमारी कदर नहीं
- 17:21करते तो हम लंगर सिर्फ सिखों के लिए ही रखे।
- 17:25मैंने कहा वो ही आ गया ना? बीजेपी और आरएसएस वाला।
- 17:31बाबा नानक ने इंसान के भूखे पेटों को धृप्त किया था।
- 17:37तुम सिखों के पेटों को धृप्त करोगे, तुम्हें शर्म नहीं आती,
- 17:45तुम यहाँ से चले जाओ। उसने कोई जाति पूछी थी, उसने कोई
- 17:53धर्म सम्प्रदाय पूछा था। बाबा नानक ने कहा तुम भूखे हो तो
- 18:02मैं तुम्हें खाना करा देता हूँ, चलो मेरे साथ।
- 18:09पता नहीं वो कहाँ से आया? पता नहीं वो कौन थे, किस धर्म के
- 18:14थे, किस जाति के थे, लेकिन भूखे थे और भूखे का पेट भरना।
- 18:24सबसे बड़ा पुण्य होता है और ज़रा सोचना इतना विराट संसार बड़े से
- 18:35बड़ा 37 स्टाइलबर्ट आइंस्टीन, सराजक, न्यूटन, रदरबोर्ड, निकोला।
- 18:46एक रेत का ज़रा बना के दिखा दे तो मैं उन्हें वैज्ञानिक मान जाऊंगा।
- 18:55वो इसकी एटोमिक मॉलीक्यूलर कंस्ट्रक्शन तो बता सकते हैं।
- 19:00कैसे बना? पानी दो हाइड्रोजन की आटे एक
- 19:10ऑक्सीजन बस इतना बता दो लेकिन दट इस नॉट सफीशियंट ये है पर्याप्त।
- 19:21क्या तुम हाइड्रोजन का आइटम बना सकते हो?
- 19:26क्या तुम ऑक्सीजन का आइटम बना सकते हो?
- 19:30बात ये है और तुम उस परमात्मा को मानने से इसलिए इंकार कर देते हो
- 19:38कि वह इतना वृहद विराट है। कि तुम्हें समझ में नहीं आता कि
- 19:44उसने बनाया कैसे हुआ तो तुम आखिर में तुम्हारी खोपड़ी तिढ़ तिढ़
- 19:48करने लग जाते हो। फिर तुम कहते हो नहीं, वो है
- 19:53नहीं, क्योंकि मनुष्य मनुष्य की भाषा में सोचता है कितना कितना
- 20:00बड़ा आदमी होगा? जिसने ये बना दिया होगा वो कोई
- 20:03कुम्हार तोड़ी, कुछ चीतना है एनर्जी से युक्त, लेकिन तुम अपनी
- 20:15बुद्धि के हिसाब से सांचे कर लेते हो।
- 20:23और इसीलिए मैं श्रद्धा से बोलता हूँ इन आचारों के पीछे जो लगेगा,
- 20:34सुख पाने की नीयत से जाएगा, सुखी होगा।
- 20:41आखरी बात बोल देता हूँ सुखी तो ये आचार्य भी नहीं हो पाएं आरामदायक,
- 20:48सुविधाजनक तो होंगे। इनके बढ़िया से महल भी होंगे।
- 20:55इनके पास हर चीज़ की सुविधा भी होगी और उन सुविधाओं का सुख ये
- 21:00मानेंगे। लेकिन वह जो चीज़ जो परमात्मा की
- 21:05बात करता हूँ, मैं जैसे वैज्ञानिक होल तो लेगा के हेच टू ओह से
- 21:13मनप्पन दो एटम हाइड्रोजन एक एटम ऑक्सीजन।
- 21:22लेकिन वैज्ञानिक कभी नहीं खोज पाएगा।
- 21:26क्रियेट कर पाएगा, हाइड्रोजन का एक एटम और ऑक्सीजन का एक एटम बना
- 21:33नहीं पाएगा, क्रियेट नहीं कर पाएगा, बस यही बात मैं कहता हूँ।
- 21:39इन आचार्यों से इन सद्गुरुओं से इन आचार्यों से इन तथा कथित
- 21:49यूट्यूब के चैनल्स पर भविष्यवाणियां करने वालों से।
- 21:55कि तुम सुख के संसाधन जोड़, रोगे, ठगी, वग्गी मार के जूट वगैरह मार
- 22:00के पांच नाम बांट के राधे राधे करके, लेकिन नावों को डुबोते हुए
- 22:07तुम बीजा न पाओ, राधे राधे करते हुए नाव डूब जाए।
- 22:17जाओगे। कुंभ पर पुण्य लगेगा।
- 22:26लताड़े जाओगे भीड़ की संख्या में। और फिर तुम्हारे व्याख्या करने
- 22:34वाले बाबा बागेश्वर बड़े होशियार वो कहेंगे मोक्ष धाम मिल गया तो
- 22:45थोड़ा सा तुम मुझे इजाजत दे दो, मैं तुम्हें मोक्ष धाम बेच दू एक
- 22:49बार। भेजूंगा तुम्हारी इजाज़त से लिख
- 22:54तो लूँगा तुमसे उसी त्रिवेणी के संगप पर तुम्हें मोक्षदान में भेज
- 23:06दूंगा लिख के दे दो मुझे क्योंकि मैं।
- 23:15संविधान के भीतर चलने वाला व्यक्ति मुशकलात क्या आती है इस
- 23:22काम में? ये भी बता दो, व्हाटस दी
- 23:25ऑब्स्ट्रक्शन? तुम्हारा ये मन खोपड़ी मान ही
- 23:31नहीं सकती कि अगर मैं बिना पैसे दिए सारे दिन मेहनत करके हाथ तोड़
- 23:37के चला गया तो कोई परमात्मा नाम की चीज़ है, जो मुझे मेरा मुआवजा,
- 23:46मेरे परिश्रम का हक दे देगी। बस यही है सारी दुविधाएं तुम्हें
- 23:54उस अज्ञात शिक्षा का भरोसा इसलिए मैं परमात्मा का अनंता अनंत
- 24:02शुक्रगुजार हूँ के उसने मैं खरगोश काट के रहता हूँ।
- 24:08रैपोट को हमने क्लोरफोर सुंगाया बेहोश हो गया उसको मैंने अच्छे से
- 24:14चिरा और सब उसके भीतर से ये पुण्य होता है क्या?
- 24:27और डेक्रिमेशन कॉन्टेस्ट था, भाषण प्रतियोगिता थी, उस में इनाम जीता
- 24:35था मैं और यह घटना घटी। यह लीला थी परमात्मा।
- 24:45ऑल दी इवेंट सेल्फी डस्टा क्योंकि जिसने बनाया वो इतना वृहद है, वो
- 24:54ही चला सकता है। तुम नहीं चला सकते, जो बना सकता
- 24:59है वो ही चला सकता है, तुम चला नहीं सकते।
- 25:04और तुम्हें ये भ्रांति है कि बनाता तो वो है बनु तो गया खुद ही
- 25:11ठीक तो फिर काम भी खुद ही हो जाएगा अगर खुद ही बन गया अगर सैब
- 25:20हम हैं। प्रकृति तो सैबम ही समझलो के वो
- 25:27भी गुद ही जाएगा नहीं यहाँ नहीं करना तो हमें पड़ेगा दुविधा के
- 25:34मारे मारे लोग शंक्यात्मक वनस्थिति दुविधा में दोनों गए
- 25:39माया मिली नराम? तुम आखिर में डूब ही जाते हो तो
- 25:52मैंने यह कहानी इतने विस्तार से बैकग्राउंड बना के सच्ची कहानी
- 25:57है। बिलकुल अल अलफाज़ अलफाज़।
- 26:03मेरे जीवन के साथ इतना गरीब व्यक्ति रोजगार की तलाश में
- 26:10निकला। रोजगार मिला और शाम को कैसे नहीं
- 26:12लेके आते? खाना खाता है, गुरुद्वारा में
- 26:18सोता है, गुरुद्वारा में बाहर सो जाता है।
- 26:23इनकी आदत बढ़ जाती है। गरीब व्यक्तियों को डेवलप के पिलो
- 26:27नहीं जाए और उनको कोई डर, भय भी नहीं होता कि सांप काट जाएगा या
- 26:34बिच्छू काट जाएगा। तुम तो 1000 चीजों को देखकर फिर
- 26:39सोते हो। लेकिन इन गरीब व्यक्तियों को कोई
- 26:45शिकार नहीं होता है। वह चला गया उस व्यक्ति में एक
- 26:55ईश्वर प्रदत्त। डिटरमिनेशन रहा होगा ये कहाँ जाते
- 27:01हैं? बस सेठ का काम करके आया मिल ही
- 27:07जाए बस ऐसे ही अगर तुम तुम्हें विश्वास हो, उसने तो सेठ देखा।
- 27:18मेरे लिए लेकिन तुमने देखा मैंने देखा तो नहीं था वो देखा जा भी
- 27:27नहीं सकता जैसे आँखें देख सकती हैं, सुन नहीं सकती, कान सुन सकते
- 27:37हैं, देख नहीं सकते। जी वह बोल सकती है, टेस्ट ले सकती
- 27:41है लेकिन सांस नहीं ले सकती। नासिक का पुट खुशबू को दुर्गंध को
- 27:50ग्रहण कर सकती है लेकिन बोल नहीं सकती।
- 27:57ऐसे ही परमात्मा दिखता नहीं, उसका दर्शन वह पिया जा सकता है, वह
- 28:10पीने की चीज़ है। वह पीकर मदहोश होने की चीज़ है।
- 28:18इस मदहोसी के कारण ही तुम सारे दिन के थके मांदे सांझ तुम्हारे
- 28:25पांव ठेके की तरफ उठने शुरू हो जाती है।
- 28:30उस शराब का तो अता पता है नहीं। सब झूठे, पाखंडी जिन्होंने खुद ही
- 28:36नहीं पी परमात्मा का वर्णन करने में उलझे हुए हैं।
- 28:43दरअसल उनका निहित स्वार्थ और मंशा कुछ और है।
- 28:48धन कमाना, सम्मान कमाना, नाम कमाना।
- 28:52अपना नाम छोड़ जाना या कुछ ही बराबर इट इस।
- 29:01लेकिन जीस ढंग से परमात्मा ने मेरे जीवन की कहानी एक उपन्यास की
- 29:08तरह लिखी। आज भी मैं हैरान।
- 29:16उसने सबसे पहले नींव डाली, क्योंकि उसने 100 मंझला इमारत
- 29:22खड़ी कर दी। उसने एक ढांचे को मास्टर मास्टर
- 29:28बनाना। और मास्टर मास्टर ऐसे नहीं बना
- 29:34जितना ऊंचा वृक्ष को जाना होता है, उतनी जड़ें गहरी पाताल तक
- 29:40पहुंचानी होती है। तो उसने सबसे पहले मेरी जिंदगी
- 29:45में वो इंसिडेंट ले के आया। तुम इसे समझ नहीं सकते कि सब वो
- 29:57ही करता है। मुझे लोग कह देते हैं क्या मैं
- 30:00तुम्हे मार दूँ तो फिर वो मारेगा? मैंने कहा बिलकुल उसकी इच्छा के
- 30:07बिना मैं मर भी नहीं पाऊंगा। 810 बार मर चूका हूँ मैं, लेकिन
- 30:12मरो के रोहित जैसे लोग तो वहीं खड़े थे।
- 30:17मेरा पुत्र कुणाल भी वहीं खड़ा एक अन्य व्यक्ति था जिसने मुझे बजाया
- 30:26उसने मुझे निकाला था। इन सब का ये दर्शन है, इन सब का
- 30:37सहयोग है। आज अगर मैं कुछ बोल रहा हूँ तो
- 30:41परमात्मा ने इनसे भी काम लेना। अन्यथा मैं तो बड़ी नहर में जा
- 30:48रहा था वहाँ कुछ लोग फूल गिराने आए थे, रश बहुत जाता था, तो मैं
- 30:55छोटे वाली नहर में आ गया गहरी तो वह भी बहुत है 30 फुट गहरी।
- 31:08खैर, डूबने के लिए तो 30 फुट भी बहुत होती है।
- 31:17इस ढंग से उसने उपन्यास लिखा, अब कल ही मुझे एक।
- 31:24फ़ोन आया, किसी अंग्रेज व्यक्ति का फ़ोन आया तब मैंने आपकी बॉल को
- 31:34रस्सी पढ़ा। बाबा मैंने ज़िन्दगी में हजारों
- 31:41किताबें पढ़ीं। और कल सारी किताबें मैंने पढ़ ली,
- 31:45आग लगा दी। मैंने कहा क्यों क्या से बढ़िया
- 31:51किताब मुझे जिंदगी में पढ़ने को मिली धारा प्रवाह।
- 31:57जैसे ही मैंने प्रथम पृष्ठ शुरू किया।
- 32:01मैं स्लीप ही होता चला गया और मुझे पता ही नहीं चला कि किताब कब
- 32:06पूरी पड़ी है। ऐसा शानदार ढंग से अनुवाद किया
- 32:12गया अंग्रेजी किताब का। हालांकि मैं अंग्रेजी बोला नहीं,
- 32:19मैं बोला हिंदी में। लेकिन तरजमा करने वाले ने बखूबी
- 32:29तरजमा किया है। एक एक अलफाज़ में उसने मेरे भाग
- 32:36और मेरा जीवंत बोलना साकार कर दिया।
- 32:45कर्मण्य वाधिकार से मा फलेशु कदाचार ये इतनी कहानी कहने के लिए
- 32:52क्योंकि तुम कहानियों से समझते हो, कहानियों के विरक्त तुम्हें
- 32:57समझ नहीं आती बात तू सिर्फ कर्म कर जो तुझे उत्तरदायित्व मिला।
- 33:04मैंने उस मजदूर को उत्तर दायित्व दिया कि भाई तुने नीचे से जो
- 33:09सामान मिस्त्री मंगाए बोले ठीक है तू कर्तव्य कर्म कर कर मन्यवादिका
- 33:19रस्ते तू सिर्फ कर्म कर। माँ फलेशु गदाचन फल के वक्त जब
- 33:26मैंने पैसे देने होते थे तो मैं सबको बुला लेता आया हूँ, वहीं सब
- 33:34वक्त तो हो गया है। 5 मिनट पहले बुला लेता हूँ सबको
- 33:41कैसे? लेकिन मुझे पांचवें दिन ख्याल
- 33:45आया, जाके वह व्यक्ति सारे दिन काम करता तो मैं देखता हूँ, लेकिन
- 33:53पैसे लेने कभी नहीं आया यह क्या? ऐसा तो मजदूर मैंने कभी देखा ही
- 34:01नहीं। अन्यथा कुछ लोग तो वक्त से पहले
- 34:07ही आ जाते हैं। हमारा गांव दूर है, हमने साइकिल
- 34:13पर जाना है, अंधेरा घना हो जाएगा। आप सेठ जी हमें वैसे पहले से आधा
- 34:23घंटा सुबह जल्दी आ जाएंगे, लेकिन इस व्यक्ति ने काम किया यह मुझे
- 34:35नहीं जानता, जैसे तुम परमात्मा को नहीं।
- 34:40जैसे मैं प्रेमात्मा को नहीं जानता था, लेकिन उसकी कहानी, उसका
- 34:47उपन्यास, उसका नवे इस ढंग से लिखा गया बा तरतीब प्रभा कमर।
- 34:57एक एक इंसिडेंट उसने प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की ऐसी गाढ़ी कि
- 35:03जब तुम शांत लम्हों में बैठ जाओगे, फुर्सत के लम्हों में अपनी
- 35:09ही जिंदगी को देखोगे, दूसरों की जिंदगी की मूवी के ऊपर वक्त शक्ति
- 35:14और पैसे खराब मत कर। तुम्हारी अपनी ही जिंदगी प्रत्येक
- 35:20व्यक्ति की जिंदगी इतनी शानदार है, तुम उसी को देखो साक्षी भाव
- 35:27से तो तुम हतप्रभ रह जाओगे, इतनी शानदार तुम्हारी जिंदगी है।
- 35:35और तुम थिएटर्स में, मूवीज़ देखते फिरते हो।
- 35:38झूठी, जो सच में हुई नहीं, जो तो उनका धंधा है, तुम मनोरंजन करते
- 35:48हो। मैं तुम्हें कहता हूँ, एक बार
- 35:52अपनी ज़िन्दगी की रील को देखो, अच्छी तरह से तुम इच्छा की तरह रह
- 35:58जाओगे, इतनी सुंदर जिंदगी परमात्मा ने बनाई तुम दूसरों के
- 36:05दुखों में रोते हो, बगीचे में जा के लेकिन अपने।
- 36:10दुखड़ों से तुम्हें कभी रोना नहीं है?
- 36:15तुम्हारे बाप ने दो बच्चे जन्म दिए थे, अच्छा कमाया था, अच्छा सब
- 36:21कुछ बनाया था लेकिन तुम्हारा बाप ये जद करके क्यों बैठ गया कि मेरी
- 36:27बात मानोगे? मेरे बड़े भाई को बाप मानोगे,
- 36:31मेरे बड़े भाई को पांव छुओगे तो मैं तुम्हें अपनी जायदाद का
- 36:34हिस्सा दूंगा अन्यथा मैं तुम्हें ऐसे लोग मैंने देखे हैं।
- 36:43दुष्ट प्रवृति। महा दुष्ट प्रवृत्ति के लोग अरे
- 36:52भाई इस व्यक्ति ने कोई अग्रीमेंट दिया था तेरे साथ के मुझे जीवन दे
- 36:57दिया जहाँ और फेंक दिया के अंदर निरोध के अंदर इसको भी फेंक देता
- 37:06लेकिन नहीं। पुत्र तो दो चाहिए बाबा से वचन
- 37:10लेके गया है तो दो पुत्र पैदा किए आगे से मैं कह देता हूँ पुत्र तो
- 37:23कल ही मुझे। आपकी कृपा से बाबा तीन बेटियां
- 37:30थीं आपसे फरियाद की आज पुत्र मैं कहता हूँ, देखो इसका हिस्सा इसको
- 37:37वाजिब तौर पर दे देना अन्यथा बाप मुझे लगेगा।
- 37:46और मैं मुझे बाप लगेगा तुम्हें मेरा मैं तुम्हें भक्षुमा क्यों?
- 37:58क्योंकि मेरे प्रताप से ये आया मैं ये जो कढ़ी तब और तपस्या कर
- 38:04रहा हूँ। 14 वर्षों से एक स्थान पर बैठा भी
- 38:08न कुछ अन्न खाय तुम 1 दिन बैठ के या घोर तपस्चर्य का, जो परमात्मा
- 38:16मुझे फल देता है, मैं तुम लोगों में बांट देता हूँ तो मैं ये पाप
- 38:22नहीं कमाना चाहता। कि मेरे तेज बल से मेरे पुण्य
- 38:29प्रताप से मेरी तपस्या से अगर तुम्हें पुत्र प्राप्ति हुई है तो
- 38:36तुम उसका हक हक खा जाओ, ये कतई मंजूर नहीं है मुझे।
- 38:42और दूसरे को अगर तुम दोगे फली भूत उसके भी नहीं होगा फिर उनकी रूह
- 38:48कांप जाती है। करमने वादी का रसते माँ फली शू
- 38:56कदाक्ष शायद मेरी कहानी से। आज कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा
- 39:04जो समझ ना पाया हो कि इस शब्द का भगवान कृष्ण का वास्तव कर सके।
- 39:12मैंने बहुत बड़े बड़े डायमंड्स से मैंने बोला है लेकिन आज मैंने
- 39:20बड़े। कहानी के रूप में तुम्हें समझाया,
- 39:23जब तुम्हें समझ नहीं आया, मैं समझता हूँ तुम कहानियों से ज्यादा
- 39:27अच्छी तरह समझ जाते हो तो आज मुझे ये सुनने वाले ये सूक्ष्म भी
- 39:36गर्दन हिला रहे हैं। क्या समझाया बाबू?
- 39:40आज समझ आया बिलकुल समझाया कि तू सिर्फ कर्म कर उसको देखा तो नहीं
- 39:49है, लेकिन मेरे कहने से विश्वास कर ले, वह है मैंने उसे देखा है।
- 40:00मैंने उसे देखा है और मैं उसके होने पर लगाता हूँ मार्कस के ऊपर
- 40:07तुम विश्वास करोगे तो गच्चा खा जाओ, सुन लो मेरी बात ये तो
- 40:14सड़ेंगे ही दुःख में जीसको तुम नरक कहते हो?
- 40:21यह आचार्य सड़ेंगे नरक में दुख में, क्योंकि यह सही मार्ग पर
- 40:27नहीं है, मेरे पास आँखें हैं और इनको चलते हुए मैं देख रहा हूँ दे
- 40:33आर उन दा रोंगपात इसलिए डंग? की चोट पे कह सकता हूँ ये कभी उस
- 40:44आनंद को नहीं मान पाएंगे। सुख होगा, इनके पास सुविधा होगी,
- 40:50इनके पास एसो। आराम के साधन होंगे।
- 40:59जीस संस्था को मजबूत करने का ये मौका भर रहे थे।
- 41:07आपको और संस्था भी बड़ी मजबूत होगी लेकिन उसकी मालिकाना हक इनके
- 41:14पास। तो इनको सुख तो होगा और यही तो
- 41:23व्यक्ति की मुड़ता है। वह सुख के संसाधनों को आनंद समझे
- 41:31बैठता है, जबकि आनंद। बिलकुल सेपरेट थोड़ा सा भिन्न
- 41:42नहीं है वर्ण विपरीत है, सुख उत्तेजना देता है, आनंद निर
- 41:51उत्तेजित करता है। नॉन स्टेमलेशन ठहराव देता है।
- 42:01यह लोग कहेंगे आचार्य लोग कोई लक्ष्य नहीं है, बस भागते चले
- 42:10जाओ। मैं बड़ा हैरान कल एक छोटा सा
- 42:17क्लिप तो किसी बच्ची ने भेज दिया। उसने पूछा के आचार्य जी आप मुक्त
- 42:26हो गए के तब्बू क्या होती है संतर नागपुर।
- 42:37उसका झोलक और बेतरतीब बात कोई उसके भीतर किसी प्रकार की हारमानी
- 42:46नहीं है, लय बदता नहीं है बाद में।
- 42:52फिर उसके संतरे का छप्पो लेकर तुम्हारी आँखों में करो और हाँ
- 42:58हाँ हाँ कर मैंने कहा शाह बा आज पूरा समझ आया आचार्य जी।
- 43:09कुछ नहीं है। अपना काम करो, अपने कर्तव्य, कर्म
- 43:13करो, कहीं नहीं पहुंचना है, मुक्ति वगैरह कुछ नहीं होता।
- 43:18चरई वैती, चरई वैती। मैं समझ गया कि आज।
- 43:32वह सनातन की धरती दुखों का मूल केंद्र क्यों बन गई इसका मुख्य
- 43:43कारण मुझे समझा आया। पढ़े लिखे लोगों की क्वालिफिकेशन
- 43:49देखकर। तुम उनकी तरफ अट्रैक्ट हो जाते
- 43:54हो। तुम ओनली क्वालिफिकेशन देखते हो
- 43:59और फिर देखते हो उसका त्याग जो की त्याग सच्चा नहीं होता, त्याग
- 44:04करें। बुद्ध, त्याग, बुद्ध जैसा तप कहाँ
- 44:10किया? बुद्ध जैसा जाकर मांगा कैसे?
- 44:15इनका तो सब कुछ सेट होता है। टी में ये लेना है ब्रेकफास्ट में
- 44:22ये लेना लंच में ये लेना, दोपहरी की चाय में ये लेना।
- 44:28और डिन्नर में ये लेना और रात को सोते वक्त लेना ये सर लोगों के
- 44:33टाइम टेबल देखना मुझे एक सर ने टाइम टेबल दिखाया, मैंने कहा भाई
- 44:41मैंने हाथ जोमी मैंने कहा भाई। तेरा टाइम टेबल तुझे मोबारक हो हम
- 44:49तो टाइमलेसनेस की बात करते हैं तेरा टाइम तुझे मोबारक हो तू उठ
- 44:57जाया कर सुबह 5:00 बजे हम तो तब उठेंगे जब नींद खुले।
- 45:11हंस पायो मानसरो ताल तलैया क्यों डोल?
- 45:32ताल तलैया क्यों बोलें? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलें?
- 45:48मन मस्त हुआ फिर क्यों? हाँ हाँ हाँ बिलकुल।
- 46:08तुम्हें विश्वास नहीं है कि हम काम करेंगे और हमें अगर सेठ ने
- 46:13पैसे नहीं दिए तो कोई ऐसी एक्स्ट्रा आर्डिनरी शक्ति है जो
- 46:19हमें हमारा हक दे देगी? बस यही है तुम्हारे असले दुख का
- 46:27कार्य? और परमात्मा ने इस जीवन को ऐसी
- 46:32सुगंधा दी, फ्रॉम दी वेरी वेकन और उसका कारण पिछले जन्म की इसी
- 46:42प्रकार के कर्मकरण निःस्वार्थ भाव से।
- 46:46आखिर में तो तुम्हें पता लगा कि गाँधी ने जो भी किया, जैसा कर
- 46:54सकता था क्या अपना बैरिस्टर का बहुत बढ़िया साउथ अफ्रीका में
- 47:01धंधा चल रहा? वहाँ भी उसने यही काम किया।
- 47:06काले गोरे का झगड़ा था, वहाँ भी जेलों में गया।
- 47:12अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। फिर वहाँ से गोपालकृष्ण गोखले का
- 47:19पत्र गया कि यहाँ लीडर नहीं है कोई।
- 47:27और लीडर के बिना कभी फौज नहीं एक था साबरकर उसका ढंग गलत था उसने
- 47:40बल से। आज़ादी लेने की चेष्टा की लेकिन
- 47:46उसको पता नहीं था। मूर्ख को दो तिहाई धरती के माल के
- 47:50पास इतनी शक्ति और फौज है कि तेरी एक क्या करेगी?
- 47:56अगर जीस व्यक्ति में इतनी भी समझ नहीं है उसको तुम समझदार पाओ
- 48:00इसलिए सबसे बड़ा मूर्ख। मैं आज़ादी की लड़ाई में सावरकर
- 48:04को समझता हूँ, लेट कर दी उस व्यक्ति ने आज़ादी क्योंकि उसने
- 48:11माफी ना में मांग मांग कर ओहो, इतना जलील कर दिया हिंदुस्तानियों
- 48:19को महात्मा गाँधी और खुद शर्मशार हो गया।
- 48:26उसका स्टील का फौलादी जिस्म, उसकी बनाई हुई सारी धारणा इस व्यक्ति
- 48:34ने माफीनामे मांग वागकर धूल धूजृत कर दी एक व्यक्ति का।
- 48:42क्रियाकलाप सारे व्यक्तियों की धारणा के साथ जुड़ जाता है कि ऐसे
- 48:53ही सभी होंगे। माफीनामा मांगने वाले जैसे हम
- 48:58दाल, सब्जी। चावल उबालते हैं, उसमें से सारे
- 49:05चावल थोड़े से करते हैं, एक चावल का दाना निकाल देखा गल क्या ठीक
- 49:13है नहीं गला हम छोड़ देते हैं और थोड़ी देर के लिए रीत जाने तो।
- 49:21ऐसा ही अंग्रेजों के भीतर यह भाव वर्ग के हिंदुस्तानी कायाकल्प
- 49:30क्या करेगी महात्मा गाँधी की स्टील की फौलाद की?
- 49:37जो जार्ज पंचम के सामने वो खड़ा हो गया और गाँधी कहते हैं।
- 49:59महामालिक ओह मैं लॉर्ड, तुम मेरे वस्त्रों की फिक्र करते हो, तुम
- 50:11अपने जिस्म पे देखो, सारे भारतवर्ष के कपड़े तुमने ही पहने
- 50:17हैं। और जार्ज पंचों वा शौक जज और उस
- 50:26दिन का शौक रखा। उसने चारपाई पकड़ लिया।
- 50:30वह मर ही गया। ऐसे भीतर गए उस व्यक्ति के शब्द।
- 50:39कि वह मरने को मर गया सवस्थ नहीं हो पाया ये होती है फौलादी सीने
- 50:50मैं तुम्हें तर्क देकर ये बात कहता हूँ कि सब करने भारत की।
- 50:56आजादी को देरी कर दी क्योंकि एक संदेश गया कि सावरकर बार बार बसे
- 51:15तुम मुझे माफ़ कर दो, मैं तुम्हारे लिए काम करूँगा।
- 51:20जासूस बन के काम करो तुम मुझे क्षमा करके तो देखो इतने बार माफी
- 51:29नामा एक संदेश या अंग्रेजों के बीच में एक इंतजार का।
- 51:35आज भारतीय लोग कायर होते। क्या करेगा गाँधी का फौज?
- 51:42आदि से इस व्यक्ति ने भारत की आजादी को बहुत देर करवा दी और ऐसी
- 51:51छाप छोड़ के गया यह व्यक्ति तुम इसको मान दे दो, हमें कोई फर्क
- 51:57नहीं पड़ता। मैं कहता हूँ कि किसी भी व्यक्ति
- 52:02का हक वह जिसे मैं सुप्रीमो कहता हूँ।
- 52:09अज्ञात अज्ञे अननोन अननोन एवर वह रेखा नहीं करता।
- 52:20पिछले जन्म में अगर गाँधी ने जो किया आपसे कुछ नहीं मांगा।
- 52:24हालांकि सावरकर का पैगाम आया। उसके दूत के जरिए के।
- 52:30मोहन मोहन कहा कर मैं उसे विनायक कहा।
- 52:38उससे मुझे मोहन का मोहन गद्दी तुम्हारा हक तुम पैंट कोट डालो,
- 52:50गद्दी पर बैठ जाओ, बहुत बढ़िया रीड करबॉक्स मैंने कहा।
- 52:59मैंने गद्दी के लिए जो भी किया ठीक किया, गलत किया, थोड़ा किया,
- 53:0514 किया, गद्दी के लिए नहीं किया और मैंने अकेले ने नहीं किया।
- 53:12गर्म धड़ा भी था, नरम भी था, लूट गए, फांसी चढ़ गए इंडियन नेशनल
- 53:19आर्मी की स्थापना कर ली। सुभाष चंद्र बोस जैसे लोगों की
- 53:23शहादत को तुम क्यों भुलाती है? और किसने कहा कि गाँधी ने कहा कि
- 53:31मैंने आज़ादी दिलाई? ये तुम्हारी खुद की ही प्रोपेगंडा
- 53:35है। गाँधी ने तो अगर ये कहा होता तो
- 53:40वो छलांग लगा के गद्दी पे बैठ जाते।
- 53:46लेकिन गाँधी का कर्म बदला गया कि उसने कर्म किया कैसे था?
- 53:52ये होता है निष्काम कर्म कर बनने वाली का रास्ते सिर्फ कर्म किया
- 54:03उस मजदूर की तरह माँ फलेशु कदाचु। और उसको तुमने गोरियों से मार
- 54:09दिया। ठीक पटेल आए थे 1 दिन पहले पटेल
- 54:15कहते बापू मेरी सीआईडी गृह मंत्री थे।
- 54:21इन्टेलिजेन्स ये कहती है कि ये तुझे मार के छोड़ेंगे।
- 54:25तो गाँधी हास्य गाँधी ने कहा, मैंने सब काम कर दिया जो मैं करना
- 54:34चाहता था, अब एक काम बाकी है। पटेल कहता बापू क्या कहते वह?
- 54:47कि कोई मुझे मार दे आ गए और परमात्मा ने गाँधी की इच्छा पूरी
- 54:55मैं भी यही चाहता हूँ, इसलिए इतना बुलंदी से बोलता हूँ।
- 55:04लेकिन तुम ऐसे कायर हो की तुम आके मुझे गोलियों से भून नहीं देते,
- 55:13मेरी कोई कमजोरी नहीं ये तुम्हारी कायरता है, मैं दिन भर रात
- 55:19तुम्हारी छील उधारता हूँ। एक तुम ऐसे हो मैं जानता हूँ कि
- 55:25तुम पापी हो, तुम कायर हो, तुम भोगी हो, विलासी हो एपिस्टन का
- 55:33तुम चोर हो, गद्दार हो कातिल हो हत्या लुटेरे हो झूठ बोलकर तुमने
- 55:41सत्ता हत्या। उस व्यक्ति को गाड़ी निकालते हो
- 55:46जिसके पास सत्ता थी और उसने इंकार कर दिया।
- 55:49नहीं मैं बैठूंगा कैसे कॉम्पिटिशन करोगे?
- 55:57दोनों के बीच में कैसे मुकाबला कर पाओगे?
- 56:03मेरी दलील का किसी के पास कोई जवाब हो तो बता दे ना, मैं
- 56:10तुम्हें दलील दे के बताता हूँ कि कैसे आज़ादी लेट हुई, संदेश गलत
- 56:16चला गया कि भारतीय कवर्ड हो। काश सुभाष चंद्र बोस जैसे लोग जी
- 56:25उठाते और वो आजादी के जश्न को देख पाते।
- 56:33गाँधी ने आजादी के जश्न को देखा। और यही अंतिम इच्छा थी उनकी अपनी
- 56:39आँखों से निहार ली वो वक्त देख लिया अपनी आँखों से जब
- 56:48हिंदुस्तानी नाच रहे थे आंधी रात। ऐसा करम बिना सेकंड के मुझे क्या
- 57:07मिलेगा पता भी नहीं था और राज़ करने के लिए उन्होंने काम नहीं
- 57:12किया। उनका हृदय पिछला के मेरी माता
- 57:16गुलाम है। उन्होंने नारेबाजी नहीं की।
- 57:21उन्होंने सिर्फ शब्द नहीं बोले नमोनी सदा वत्सले मातृभूमि हम तो
- 57:31शब्दों को ही गुनगुना के। बस कर देता खून कोई और बिखेरेगा
- 57:41जो बात तुम्हारी चर चर चरेगा बातें भगाने का तुम योग्य नहीं
- 57:53हो। तुमने कोई ऐसा काम नहीं किया।
- 57:56राज़ गद्दियाँ तुम्हें माफी के नहीं आएंगी, जो विल हैव टु कमिट
- 58:02सुसाइड, वंड तुम अपने ही कर्मों के कारण मर जाओ।
- 58:12तुम्हें कोई मारने भी नहीं आएगा। हिरण्यकश्यप की तरह नरसिंहा कोई
- 58:18आएगा नहीं तुम्हें मारने तुम अपने कर्मों से ही मर जाओ अगर इस तरह
- 58:28से काम हो। तो परमात्मा ने गाँधी का हक नहीं
- 58:33रखा रखा, क्या कर्म किया था? मैंने इस जन्म में तो कोई नहीं।
- 58:41मैं तो खरगोश काट के आ रही लेकिन पिछले जन्मों के वो निष्काम कर्म।
- 58:48तमाम बंधनों को झट से तोड़ गया खाक में मिला गया सभी बंधन,
- 58:56मान्यताओं और मैंने कभी शास्त्रों का अध्ययन किया।
- 59:05उसने मुझे सही जो भीतर बैठा हुआ शास्त्र उसका अध्ययन करवाया।
- 59:11ये पढ़ो ये है सही पढ़ने वाली चीज़ इसको ही पढ़कर बाहर के
- 59:17शास्त्र लिखे गए ऋषि मुनियों के द्वारा तुम सीधे सीधे इस शास्त्र
- 59:23को पढ़ो। अगर किसी ने कोई कोताही की होगी
- 59:28बाहर के शस्त्र में जब हम गुलाम थे तब बहुत किताबों में तर्मिने
- 59:36की गई बिगाड़ दिए गए। वेद, उपनिषद को खराब कर दिया गया,
- 59:43उनके शब्दों को तोड़ मरोड़ दिया गया तो उस परम पिता परमात्मा ने
- 59:51उस विराट ने गाँधी के हक जितना बनता था।
- 1:00:01मैं शर्मशार हूँ, इतना तो मैंने किया नहीं था।
- 1:00:08धन्यवाद इतना तो मैंने किया नहीं था जितना उसने मुझे दे दिया।
- 1:00:18मेरा रोहन रोहन खुशबू से ग्रस्त नाचता है हर पल हर कड़ी सदा
- 1:00:26दिवाली है मेरी सदा होली है आठों वहर आनंद है मेरा।