Latest / Baba ji Vijay Vats / Ahmedabad Plane Crash में एक साथ मारे गए इतने सारे लोगों को कब तक मिलेगा अगला जन्म? आत्मा का रहस्य!
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- 0:02बाबा जी प्रणब एक छोटा सा प्रश्न जो अहमदाबाद।
- 0:19देर दुर्घटना में मारे गए हैं। क्या उनको नया शरीर मिल जाएगा?
- 0:32पर मिलेगा तो कब तक मिलेगा? मैंने आपसे एक प्रश्न तो पूछा।
- 0:40ज्ञानय किसी व्यक्ति से पूछने की आवश्यकता में समझता है।
- 0:45मैं जानता हूँ संबंधी हैं। सबसे पहले भी बहुत सी बातें मैंने
- 0:52पूछी हुई हैं और वो सत्य निकली। कृपया मुझे यह बताएं मेरा मन दुखी
- 1:07भाव होता है। यद्यपि उन मारे जाने वालों में से
- 1:12मेरा अपना कोई नहीं था, लेकिन नहीं जाने क्यों हृदय बड़ा दुखी
- 1:17है। और तुमने प्रश्न पूछ लिया है
- 1:30क्या? कोई हल्का प्रश्न नहीं है तो आइए
- 1:36इसकी गहराई में चलें। फिर समझाएंगे।
- 1:41अन्यथा लोग तो बहुत ऐसे हैं। आप इस मुहूर्त में जाइए।
- 1:45इस पेड़ को हाथ लगा के आ जाइए, घर आते ही तुम अरबपति हो जाओगे और
- 1:51कोई अरबपति नहीं हुआ। यह दृश्य तो मैं रोज़ देखता हूँ,
- 1:59अखंडों के मुड़ों के और इनकी ही न वृत्ति करता हूँ, अपने मूल
- 2:09उद्देश्य से न भटकता हुआ मैं इन पाखंडों का नवारण करता ही रहता
- 2:14हूँ। प्रकृति के संबंध में समझिए की
- 2:20प्रकृति हमारी गौरव है। प्रकृति हमारी नौकर है, हमारी
- 2:25सेवक है और परमात्मा ने प्रकृति को हमारे लिए पैदा किया।
- 2:33हम प्रकृति के लिए नहीं पैदा हुए, प्रकृति ने हमारे लिए उसको पैदा
- 2:38किया। प्रकृति को परमात्मा ने हमारे लिए
- 2:43पैदा किया, इसलिए प्रकृति हमारी सेविका है।
- 2:55अब आप मूल फॉर्मूला को समझ लीजिए तो आपको अन्य किसी से कुछ पूछने
- 3:00की जरूरत नहीं पड़ेगी। जैसे ही कोई व्यक्ति।
- 3:12अक्सीडेंटल मर जाता है उसे पता नहीं होता, मेरे शब्दों को ध्यान
- 3:22से समझना जैसे ही कोई व्यक्ति अक्सीडेंटल मर जाता है दुर्घटना
- 3:28में जो उसे पता नहीं होता। एक मौत दूसरी भी होती है जिसे हम
- 3:34कहते हैं सुसाइड जैसे जन्म नहीं करते हैं, जैसे अन्य अन्य व्यक्ति
- 3:44अन्य छोड़ दिया, खाना पीना छोड़ दिया, उन्हें पता होता है हम
- 3:49मरेंगे 1 दिन। और जो सुसाइड करता है वो नहीं
- 3:53होता है कि हम मरेंगे। ये दो कैटेगरी मैंने आपको समझाई
- 4:02अक्सीडेंटल डेथ में मरने वाले को पता नहीं होता कि मैं मरूँगा मेरा
- 4:11शरीर जाएगा। सुसाइड कमिट करने वाले को पता
- 4:16होता है कि मैं मरूँगा वो चाहे फिर बच ही जाए कि दो श्रेणियों
- 4:24मैंने विभक्त कर दी। एक को पता होता है कि मैं मर
- 4:32जाऊंगा, वह सुसाइड करने वाला है। एक को पता नहीं होता कि मैं मर
- 4:38जाऊंगा, फिर भी वह मर जाता है, वह अक्सीडेंटल होता है।
- 4:46अब इस बात को आपको समझाती हूँ, अच्छे से।
- 4:52जीस व्यक्ति को पता नहीं होता कि मैं मर जाऊंगा।
- 5:01आप ये समझिए कि वो सभी अड्यानी थे, उनमें से कोई अनलाइज्ड पर्सन
- 5:07नहीं था। था भी नहीं।
- 5:09मैंने पता कर लिया आपके प्रश्न आने से पहले।
- 5:24मैंने कल ही चौथे दिन क्योंकि ये घटना 12 तारीख को होगी।
- 5:33चौथे दिन पता कर लिया रसम चौथा इसीलिए मनाया जाता था ज्यादा से
- 5:40ज्यादा प्रकृति अक्सीडेंटल डेथ में।
- 5:444 दिन लेती है तुम्हें से देने के लिए जो भी व्यक्ति इस क्रैश में
- 6:00मरा है उसको प्रकृति ने नया जमा दे दिया है।
- 6:10प्रकृति का नियम यही है। तुम्हारी मान्यताएँ चाहे कितनी भी
- 6:15अनेक क्यों न हो। हिंदू की मान्यता है कि फिर फिर
- 6:20जन्म मिलते हैं। हजारों लाखों करोड़ों सिखों की भी
- 6:26यही मान्यता है। जेएनयू के भी है, बहुतों के भी है
- 6:30क्योंकि एक ही श्रृंखला के रूप में।
- 6:33लेकिन इस में इस्लामियत से ये नहीं है।
- 6:39ये होतियों में भी है क्योंकि वह अलग श्रृंखला है।
- 6:46उनका मानना है जानन नी जान ना तो सत्य में इस नातिन का है।
- 6:54वो जो उतरे नहीं भीतर वो सिर्फ मानेंगे और ये उनकी मजबूरी भी है
- 7:01तो इस शायद वाले भी थे। इस्लामियत वाली भी शायद होगी मुझे
- 7:08अलग अलग से पता नहीं, एक ही जन्म होता है, उसको दफन कर दो, क्या मत
- 7:16की राह आएगी और परमात्माओं ने जगाएगा, हिसाब मांगेगा।
- 7:25उनकी मान्यता लेकिन मैंने पहले ही कहा प्रकृति तुम्हारी मान्यताओं
- 7:32से नहीं चलती, तुम मान्यता कर लो कि मैं दसवीं मंजिल से छलांग लगा
- 7:40दूँ, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन हार्ट कुड़े टूट जाएंगे।
- 7:44प्रकृति अपना नियम तुम्हारे लिए नहीं बदलेगी।
- 7:51अब जो है वो सत्य है। प्रकृति ने चौथे दिन इन सबको शरीर
- 7:56दे दिया था। पहली बात तो तुम्हारे प्रश्न का
- 8:01जवाब यहाँ मिल गया तुम्हें। आगे सिर्फ थोड़े से शब्दों में
- 8:07मूलभूत सिद्धांतों की विवेचना करूँगा ताकि आगे के लिए भी तुम इस
- 8:14बात को अपने हृदय में रख सको। जब भी कोई मरता है।
- 8:23तो प्रकृति के जन्म देने का आधार क्या होता है?
- 8:28मैं तुम्हें बहुत गहरे रहस्य की जड़ों में ले जाऊंगा, तभी तुम्हें
- 8:32समझायेगा आधार होता है। तुम्हारी जल्द बजट क्योंकि
- 8:39अक्सीडेंटल हुआ है। यू वर इन दी लिविंग बॉडी आप जीवंत
- 8:52शरीर में थे अभी अभी और अभी अभी दुर्घटना घट गई।
- 9:00और बस कुछ क्षण ही लगे कि तुम्हारे शरीर का पहचान भी नहीं
- 9:08जल गए। इतना तेल था उसमें और जहाज के
- 9:15अंदर तेल बड़ा शुद्ध होता है। 1,00,000 लीटर के करीब।
- 9:21तेल था, उसमें बड़ी लंबी उड़ान भरनी थी।
- 9:25अहमदाबाद से लंदन तक ब्रिटिशरों में से बच कर जब व्यक्ति मरता है
- 9:37यानी उसको श्री छोड़ना होता है। दे ही जब देह से बाहर निकलता है,
- 9:48तुम समझा जाएगी। जिन्होंने मेरी पुरानी वीडियो
- 9:51सुनी हैं वो इस बात को बखूबी समझ जाएंगे।
- 9:55दे ही। जब देह से बाहर निकलता है उसको
- 9:59मृत्यु कहते हैं तो शरीर तो जल गया।
- 10:05शरीर तो इतना जल गया कि शायद तुम्हारे डीएनए भी सभी के मैच
- 10:11करके सबको डेड बॉडीज की पहचान न आए।
- 10:18लेकिन संभावना है कि कुछ लोगों को डीएनए मिल जाए।
- 10:24उनको उनकी बॉडी सौंप दी जाएगी और वो तो संस्कार कर लेंगे लेकिन
- 10:30बहुत हीरे लोग ऐसे होंगे। जिनके डीएनए मैच नहीं कर पाएंगे
- 10:35तो वहाँ बड़ी मुश्किल होती है तो आपको रूट में ले कर प्रकृति का
- 10:43सिद्धांत है। प्रकृति ने देह से अब कुछ नहीं
- 10:49लेना, क्योंकि वो तो जल गई। प्रकृति ने तुम से अब कुछ
- 11:00तुम्हारा हीला करना है, तुम्हारा उपाय करना है तुम दे ही से बाहर
- 11:05चले गए दे ही बाहर चला गया। तो प्रकृति ऐसे अक्सीडेंटल डेथ
- 11:12में व्यक्ति हड़बड़ा जाता है और वह पुकारना है चिल्लाता है मेरा
- 11:20घर कहाँ है, मेरा घर कहाँ है? मेरा शरीर कहाँ है?
- 11:25और जितनी जल्दबाजी होगी प्रकृति उतनी ही जल्दबाजी से तुम्हें शरीर
- 11:30मुहैया करा दें। जब आत्मा देखती है देह ही देखता
- 11:37है अपने शरीर को जला हुआ जला भुना तो उसे पहचान में नहीं आता।
- 11:45वह इतनी जल्दबाजी में होता है, वह खुद नहीं पहचान सकता।
- 11:49अपना शरीर जब तुम नहीं पहचान सकते तो वो कैसे पहचान लेगा?
- 11:54क्योंकि शरीर तो बिल्कुल जल गया, राख हो गया।
- 11:59बसुम हो गया काला पड़ गया कोई नैन नक्ष कुछ भी नहीं समझाता उसे तो
- 12:08यहाँ आप मूलभूत सिद्धांत को समझिए जो आत्मा जितनी जल्दबाजी करेगी
- 12:15हाय मेरा घर हाय मेरा घर। मेरा घर छूट गया कहाँ है घर मेरा
- 12:21प्रकृति उतनी ही जल्दी निपटा देगी।
- 12:25आपको न्यासित्य देंगे। यह प्रकृति का दायित्व है, इसलिए
- 12:30प्रकृति मैंने कहा आपकी नौकर है, आपकी सेविका है।
- 12:35यह परमात्मा ने आपकी सेवा के लिए बनाई है।
- 12:39नित्य प्रतिधन आपकी सेवा करती है। देखिए आप चलते हो आपको चलने में
- 12:44सहायता करती है। ये ग्रैविटेशन पोषण होता तो आप चल
- 12:48कैसे पाते? अब चाँद पर ग्रेविटेशन फोर्स धरती
- 12:56से आठवां हिस्सा है। यहाँ से गए हुए लोग वहाँ से ठीक
- 13:00चल नहीं पाएंगे, वे हवा ही हवा में कूदेंगे।
- 13:09तो ग्रेविटेशन फोर्स यह प्रकृति है।
- 13:13प्रकृति पल पल में आपकी सहायता करती है।
- 13:18आपने खाना खाया, प्रकृति काम करती है, हारमोंस बनाती है, पाचन करने
- 13:26वाली एंजाइम बनाती है सब। अपना फंक्शन जारी रखते हैं।
- 13:32हृदय धड़कता है, फेफड़ा श्वास लेता है, प्रकृति अपना काम करती
- 13:37है। अब प्रकृति जिसपे काम करना था वो
- 13:42शरीर ही गया। मूलभूत आधार चला गया।
- 13:48और तुम्हारी आत्मा इस फिराक में है मेरा शरीर कहाँ मेरा घर कहाँ?
- 13:54बस इसी जल्दबाजी के कारण प्रकृति अपना दायित्व निभाती है।
- 14:00उसे निभाना पड़ेगा क्योंकि वह आपकी सेबी का कितना काम करेगा?
- 14:08इसलिए जिन्होंने रसम चौथा बनाया, बड़े समझदार लोग थे वो आत्माएं
- 14:14जिन्हें घर की तलाश है, फिर आपकी नजरों में वो चाहे संतों चाहे
- 14:20दुष्ट हो, लेकिन प्रकृति को सब पता है।
- 14:26संत तो कभी नए घर की तलाशी नहीं करे।
- 14:31प्रकृति जानती है वह तो इतना ज्यादा ठहर गया है, वह कोई
- 14:38जल्दबाजी नहीं करेगा। बुद्ध की तरह वे कहेगा कोई बात
- 14:42नहीं देखेंगे। प्रकृति सुझाव देगी लेकिन वो कर
- 14:49रहे है जान जागृति चेतना की ज्यादा जागृति चेतना की यही निशान
- 14:57है। वह अपना गर्व बड़ी समझदारी से
- 15:00चुनता है। इसलिए उसको कितना ही वक्त लगे।
- 15:05कुछ डाइमेंशनल टाइम बदल जाता है। इस शरीर में वक्त और तरह से
- 15:15गुजरता है, शरीर से बाहर आकर वक्त और तरीके से गुजरता है।
- 15:22बड़ा धीमा हो जाता है। जैसे आप किसी जहाज में बैठ जाये,
- 15:30लाइट की रफ्तार से चली आप यात्रा करोगे 5 साल और पृथ्वी पर यात्रा
- 15:40हो जाएगी 50 साल की। जिन्हें आप छोड़ के गए थे उन्हें
- 15:44पाओगे। वो 50 साल ज्यादा बूढ़े हो गए और
- 15:47लाइट की रफ्तार में आप बैठोगे तो आपको सिर्फ 5 साल वक्त बदलता है।
- 15:54ये डाइमेंशनल गैप है ऐसे ही जब तुम भीतर चले जाते हो।
- 16:01वहाँ भी टाइम की व्यवस्था ऐसी है। वहाँ तो टाइम ठहर जाता है, वहाँ
- 16:09तो वक्त रुक जाता है। हवाएं रुक जाती हैं, फिजाएँ ठहर
- 16:15जाती हैं। वह मदहोशी के आलम में वक्त होता
- 16:21ही नहीं इसलिए रात को जब तुम सोते हो तुम्हें वक्त का पता नहीं चलती
- 16:28सारी रात वक्त चलता ही नहीं। बाहर की गाड़ियां चलती है मात्रा।
- 16:36तुम्हारे लिए तुम जीस स्थल पर गए थे वहाँ नहीं वक्त चलता वहाँ
- 16:41टाइमलैसनेस है, वहाँ टाइमलैसनेस है बाहर की घड़ियाँ कितनी ही चल
- 16:48रही हैं सटीक चल रही हैं सभी मोबाइल्स में वही वक्त आएगा सुबह
- 16:52उठोगे। लेकिन भीतर आप पाओगे वक्त ज़रा भी
- 16:57नहीं गुजरा है वक्त ठहर गया की तुम उस मुकाम पे पहुँच गए जहाँ
- 17:06वक्त लाचार है तुम्हारी प्रज्ञा। हमारा खिंचाव शरीर में कितना था?
- 17:20लोगों के आगे तुम क्या थे ये मायने नहीं रखता।
- 17:24प्रकृति से तुम कुछ छुपा नहीं सकते।
- 17:27बाहर के वस्त्र तुम बदल सकते हो भीतर का।
- 17:34कुछ भी मुकाम तुम बदल नहीं सकते प्रकृति से तुम्हारा कुछ नहीं
- 17:37झपता भीतर का अंग अंग वो जानती है जैसे ही तुम अक्सीडेंटल डेथ में
- 17:46मरे ये बड़े मज़े की बात है अक्सीडेंटल डेथ में त्वरित ही
- 17:52आपको घर मिल जाता है। और सुसाइडल डेथ में आपको बहुत देर
- 17:57पटकना भी पड़ सकता है। क्यों?
- 17:59ओके? आपको पता था कि आप मरोगे?
- 18:03अक्सीडेंटल में पता नहीं होता आपको सहस्ता से मौत आती है और
- 18:08कितनी देर लगी पता भी नहीं चल रहा मरने वालों को कि क्या हुआ?
- 18:13चीखे चलाये सर लेकिन आगे क्या होना है क्योंकि ये मौत उन्होंने
- 18:20देखी तो कभी है नहीं। सहसा मौत आ गई और उन्हें जम्प
- 18:26करना पड़ गया। शरीर से बाहर और बाहर शरीर के आते
- 18:30ही क्योंकि तुम शरीर के बाहर। रहने के व्यस्त नहीं हूँ तो फिर
- 18:36तुम चल आओगे, मेरा घर कहाँ है, मेरा घर कहाँ है, मेरा शरीर कहाँ
- 18:41है? प्रकृति तुम्हारी इस को देखती है
- 18:46और कुछ नहीं देखती तुम्हारी जीवेशना को देखती है।
- 18:54जो सुसाइड कर गया है उसकी जीवेशन तो खत्म है।
- 18:57करीब करीब उसको जीने की इच्छा नहीं।
- 19:01अब मुझे लोग प्रश्न पूछ लेते हैं जो व्यक्ति।
- 19:08सुसाइड कर लेता है। वो जन्मो जन्मो तक बहुत देर तक
- 19:12भटकता है। अब उसने कमिट ही सुसाइड इसलिए
- 19:16किया कि उसके जीने की इच्छा कदम होगी।
- 19:21एक बार की संत की तरह मिट जाती सदा के लिए, फिर तो वो उस मुकाम
- 19:26पे पहुँच जाता। लेकिन ये थोड़े से वक्त के लिए
- 19:32सहज सहसा प्रकोप आया। कोई हवा का झोंका जी वैष्णव के
- 19:44शून्य होने कहा और उस घड़ी में उसने अपना शरीर समाप्त कर लिया।
- 19:52जब शरीर समाप्त हो गया उसकी जीवेशणा खत्म थी।
- 19:58उसको इतनी जल्दी शरीर नहीं मिलेगा।
- 20:01ये है करण, क्योंकि उसने खुद ही शरीर को मारा।
- 20:08लेकिन एक्सीडेंटल डेथ में उसने खुद नहीं शरीर मारा।
- 20:12यह प्रकृति ने शरीर मारा, दुर्घटना घटी, दो चीजें टकराईं,
- 20:19कुछ ऐसा हुआ, शरीर छोड़ना पड़ गया, उसकी इच्छा नहीं थी।
- 20:25सुसाइड में उसकी इच्छा थी शरीर को छोड़ने की ये ये भीतर का फर्क आप
- 20:32समझ गए थे? ये है असली फर्क जो खुद से मरा
- 20:41उसने मरना ही था उसकी जीवेशन खत्म।
- 20:44लेकिन जो अक्सीडेंट में मरा उसको तो मौत याद चेते भी नहीं थे।
- 20:50वह तो स्वप्न ले रहा है लंदन के वहाँ जाऊंगा, वहाँ क्या करूँगा?
- 20:54आगे की प्लान बना रहा है और सहसा दुर्घटना घट रही उसकी जीवेशन खत्म
- 21:02नहीं हुई। इसीलिए देहे के मिट जाने के फौरन
- 21:07बाद वह उत्पात मचाएगा, फुटपाथ मचाएगा।
- 21:12मेरा शरीर तो कहाँ है, कहाँ गया और देखेगा, कहीं कोई समझ नहीं
- 21:18आएगा उसको शरीर देखता तो है, मैं कैसा हूँ?
- 21:22हजारों बार उसने आईने के सामने अपनी तस्वीर देखा है, रिफ्लेक्शन
- 21:27देखा है, लेकिन आज उसको उस जले हुए शवों में कुछ नजर नहीं आता कि
- 21:36मेरा कौन सा शरीर तो जल्दी मचाएगा, मेरा शरीर कहाँ है बताओ?
- 21:42और प्रकृति उसका तुत क्षण इंतजाम करती है।
- 21:46आपकी जीवन लेने की त्वरा अब इन शब्दों को आप सर्किल में ले रही
- 21:52हूँ। आपका जीवन लेने की त्वरा प्रकृति
- 21:57पूरा कर देती है। प्रकृति आपकी हर इच्छा पूरी करती
- 22:00है। इसलिए मैं कहता हूँ भ्रमण से कभी
- 22:03गलत चीज़ मत मांग लेना, क्योंकि भ्रमण आपकी बातों को रिकॉर्ड करता
- 22:08है और इतने गहरे से रिकॉर्ड करता है।
- 22:12तुम भूल जाते हो, लेकिन वह नहीं भूलता।
- 22:17तुम बोली हुई आवाज़ भूल जाते हो, लेकिन जिसमें रिकॉर्ड हुई वो कभी
- 22:21भूलता है। रिकॉर्डर भूलता है कभी जो भ्रमण
- 22:25एक रिकॉर्डर की भाँति है तुम्हारी सब बातें जो आपने सोंची मानसिक
- 22:30ज्वाचिक। जो आपने सोंची वो सब उसकी जहन में
- 22:36रिकॉर्ड है। वो नहीं बोलती इसलिए मैं सदा से
- 22:39कहता हूँ कभी ऐसी डिमैंड मत कर देना इस विश्व के आगे भ्रमण के
- 22:51आगे। क्योंकि वह पूरी करते अच्छी है या
- 22:57बुरी है ये विश्व को कुछ नहीं लेना देना।
- 23:03बस तुम चाहते हो और प्रकृति तुम्हारी वो तुम्हारी इच्छा को
- 23:09पूरी करते। तुम प्राइम मिनिस्टर बनना चाहते
- 23:12हो, तुम प्राइम मिनिस्टर की कभी ना कभी पूरी कर सकते हो, तुम
- 23:19धनपति होना चाहते हो, वो पूरी कर देगा, तुम्हें मान से मान चाहिए
- 23:23वो पूरी कर देगा, ऐसी पूरी कर देगा कि तुम तौबा कर लो।
- 23:28के बाज आए इस महोब्बत से उठा लो पान दान अपना अरे भाई ये भी कोई
- 23:33बात हुई जो आता है पांव को चूम लेता है जो आता है पांव को दो दो
- 23:38के पिता है ये क्या मूर्खता है तुम खुद ही तंग आ जाओगे ऐसे मान
- 23:47सम्मान से। जीवन की जितनी द्वारा होती है।
- 23:56शरीर छोड़ने के बाद अब ये सिद्धांत मूलभूत सिद्धांत आप
- 24:00सर्कल में लिख लेना कोई भी है वो साधारण व्यक्ति है।
- 24:07संत है अक्सीडेंट में मरा नेचुरल डेथ मरा या सुसाइड किया मरा किसी
- 24:15भी ढंग से, लेकिन मरने के बाद जो देह ही शरीर से बाहर गया, उसके
- 24:22जीने की त्वरा क्या है? क्या वो शरीर के बिना एक क्षण भी
- 24:27नहीं रह सकता? अगर ऐसा है तो प्रकृति उस हिसाब
- 24:32से जल्दी से उसको शरीर में या कराती है या बड़े जोड़े हैं।
- 24:40बड़े जोड़े हैं जिससे वो मैच करेगा।
- 24:44वहीं भटक देगा उसको हैलो भाई तुम्हारा शरीर भूख हो गया, वो तो
- 24:52क्वेश्चन पूछा था अहमदाबाद मैंने आपको जड़ से बता दिया।
- 24:56अहमदाबाद एयर क्रैश के बाद जो लोग मरे थे उनका क्या हुआ?
- 25:00क्या वो भटकते रहेंगे? बिलकुल नहीं भटकेंगे।
- 25:05अक्सीडेंटल डेथ में व्यक्ति भटकता है ही नहीं चौथे दिन ज्यादा से
- 25:12ज्यादा चौथे दिन प्रकृति उसको शरीर दे देती है।
- 25:19सहज मृत्यु में तो फिर भी 13 दिन लग जाते हैं।
- 25:26सहज मृत्यु में 4 दिन में बात बनती नहीं।
- 25:3113 दिन लग जाते हैं आमतौर से कहीं 11, कहीं 12, कहीं 13, कभी कभी
- 25:38ऐसा होता है कि कुछ महीने कुछ साल लग जाते हैं।
- 25:41वो कुछ एक्स्ट्रा आर्डिनरी आत्माएं होती है।
- 25:45परी शांत, धैर्यवान बड़ी शीतल, प्रतिकार ना करने वाली उन्हें कोई
- 25:55जल्दबाजी नहीं है शरीर की। तो प्रकृति तुम्हें जन्म देती है।
- 26:01अब इसको मूलभूत रूप से तुम समझ लेना तुम्हारे जीने की त्वरा
- 26:05कितनी है? बस ये मूल सिद्धांत आप लिख लो,
- 26:12जितनी त्वरा है तुम्हारी जितनी जल्दबाजी है कि हाय मेरा शरीर
- 26:17क्या? कहाँ गया उतनी ही जल्दी प्रकृति
- 26:22आपको पटक देगी। ये लो तुम्हारा शरीर, तुम तो भूख
- 26:25हुए के मूलभूत कारण मैंने आपको बता दिया।
- 26:38फिर भी उसके बाद मैंने आपके प्रश्न के बार पुत्र नाम नहीं
- 26:43बताया। प्रश्न के बाद मैंने अपने विधान
- 26:50से सब देखा तो मैंने पाया कि जो व्यक्ति दुर्घटना में मारे गए।
- 26:59चाहे पायलट थे, चाहे क्रू मेंबर थे, चाहे पैसेंजर थे, बच्चे थे,
- 27:06उनको सबको नया शरीर मिल गया तो आप निश्चिंत रहिए।
- 27:16आपने जो पूछा था मैंने उसका जुबाब सटीक सटीक विधि के द्वारा जो
- 27:28प्रकृति का नियम है ब्रमंडीय नियम के अनुसार आपको दे दिया।
- 27:35बहुत ही चिल्लाएंगे लोग जिनको पता नहीं वो अलग अलग अंदाज में अपने
- 27:41उत्तर देंगे। मैंने अपना उत्तर तुम्हें दे दिया
- 27:44है। उसका ढंग भी बता दिया।
- 27:46विश्लेषण भी कर दिया। जड़ों तक आपको समझा भी दिया है।
- 27:50सदार्य मृत्यु में भी ऐसा होता है।
- 27:53लेकिन वहाँ इतनी त्वरा नहीं होती है, आपको पता ही होता है का हो
- 27:57गया हूँ उसी का हो गया हूँ, मरना ही है।
- 28:00तुम स्वीकृत किए ही बैठे होते हो तो इतनी जल्दबाजी होती नहीं,
- 28:05इसलिए 13 दिन लग जाता।