Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 July 25 - दीक्षा के बाद कर्म मुक्त जीवन कैसे होता है? कर्म व्यवस्था कैसे बदलती है दीक्षा के बाद?
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- 0:04बाबा जी प्रणम प्रश्न है हरि ओम ओशो बाबा जी प्रेम प्रणाम बाबा जी
- 0:13आप से दीक्षा के 10 दिन बाद? हमारे यहाँ कार्यालय में कर्मचारी
- 0:19यूनियन के इलेक्शन में वोट डालते समय बैलेट पेपर पर जैसे ही मेरी
- 0:26नजर पड़ी तो सिर के भीतर पीनियल कलैंड में धड़कन हुई और नजरें एक
- 0:34पार्टी के चुनाव चिन्ह पे। स्वतः ही खिंच गईं जैसे किसी
- 0:40बाहरी शक्ति ने ऐसा किया हो क्योंकि मैंने पहले से ही किसी
- 0:46अन्य पार्टी को वोट देना तय किया हुआ था लेकिन बैलट पेपर था।
- 0:57कि उससे चुनाव चिन्ह की तरफ मेरी आँखें गड गयीं थीं और जैसे ही
- 1:04मैंने जो तय करके आया था वहाँ पर मुहर लगाने की चेष्टा की।
- 1:09मैं कर न सका और मोहर को वहीं लगा दिया जो चुनाव चिन्ह मेरे सामने
- 1:25आया था। मुझे पश्चातापि मैंने।
- 1:32अपनी तय इच्छा के विपरीत जाके मोहर लगाई।
- 1:38लेकिन आज ऐसे चुनाव है। रिज़ल्ट आया तो पता चला कि जीसको
- 1:43मैंने वोट डाला था, वह दुगनी से ज्यादा वोटों से विजयी हो गया या
- 1:48क्या था बाबा? क्या सब कुछ पर ही प्रदान है?
- 1:56देखिए दो तलों से इस बात को समझना है अब ये पंगा खाना तो तुम्हारे
- 2:05संतों का पैदा किया हुआ है। भुगतना पड़ता है आने वाले बुद्धों
- 2:10को। ये कचरा फैलाया तुम्हारे
- 2:13मार्गदर्शकों ने, अभी तो तुम्हारे लिए सब तुम ही करते हो।
- 2:25ये तीन मुकाम हैं ध्यान से समझाना तीन मुकाम।
- 2:33पहला मुकाम है जहाँ तुम्हें ऐसा है कि सब तुम करते हो सब मैं करता
- 2:41हूँ मैं अपने जीवन को बना सकता हूँ।
- 2:48मैं अपने जीवन को बिगाड़ सकता हूँ, मैं जी सकता हूँ मैं मर सकता
- 2:53हूँ, मैं जला सकता हूँ, मैं मार सकता हूँ यह तल तुम्हारा है पहला
- 3:02तल पहले तल पर जो करते हो तुम? और जो करता है वह भोगता भी है।
- 3:16पहले तल पर तुम करते हो और तुम ही भोगते हो अब ज्ञान से सुनना ये
- 3:20कर्म व्यवस्था की अंतिम कड़ी है वहाँ से सो रहा है।
- 3:28हम खिस्कों के भीतर तुम मध्य में आ जाओ, मध्य में आ जाओ कुछ
- 3:37प्रकृति करती हैं, क्योंकि प्रकृति की अपनी व्यवस्थाएँ हम
- 3:41प्रकृति की व्यवस्था के अधीन चलने वाले प्रणी।
- 3:47इसलिए कुछ तो हम करते हैं जो हम कर सकते हैं और कुछ प्रकृति करती
- 3:55है क्योंकि व्यवस्था के खिलाफ़ हम जा नहीं सकते।
- 3:59लव रेपेटिशन तुम्हें धरती की तरफ खचता है तुम उड़ोगे कैसे?
- 4:04तुम्हारी इच्छा है उड़ जाऊं, लेकिन उड़ोगे तो धड़ाम से गिर
- 4:08पड़ोगे हार्ड पंप उठ जाये तो कुछ तुम करते हो, कुछ प्रकृति करती है
- 4:15लाओ ग्रेविटेशन प्रकृति करती है। उड़ने की आकांक्षा तुम्हारी थी
- 4:22तुम उड़ोगे प्रकृति तो मैं नहीं उड़ने देती।
- 4:24वादा पहुंचाएगा तो दूसरा स्टेज है कि कुछ तुम करते हो, कुछ परमात्मा
- 4:31करता है, तीसरी स्टेज है आफ्टर इनिशिएशन दीक्षा के बाद फिर तुम
- 4:39कुछ नहीं करते। तुम चाहोगे भी करना तो अभी न कर
- 4:44सकते हो क्या ये तुम्हारे भीतर जो एक अज्ञात चीज़ छोड़ दी गई तो
- 4:54हमें पता भी नहीं चला। मुझे लोग पूछ लेते हैं मैं अब
- 4:59क्या करूँ? मैंने कहा जो मैं करूँ वो तुम
- 5:04करो, मुझे कैसे पता चलेगा कि ये आप करवा रहे हो, मुझे कुछ सुनाई
- 5:11पड़ेगा। मैंने कहा भाई जो होगा वो मैं ही
- 5:15करवाऊंगा, ये समझ लेना। समझा आता नहीं बाबा ये समझ नहीं
- 5:24आया नहीं आएगा भी नहीं समझने की जष्टा भी मत करो पहला पड़ाव सब
- 5:29कुछ तुम करते हो और तुम ही भोंकते हो दूसरा पड़ाव।
- 5:34आधा प्रकृति करती आधा तुम करते हो फिर तुम कुछ भोंकते और कुछ नहीं
- 5:39भोंकते हो तीसरा पूरा आफ्टर इनिशिएशन तुम्हें ऐसा लगेगा कि
- 5:48मैंने कुछ किया लेकिन तुम्हें किया कुछ।
- 5:54तीसरा मैं करता हूँ अनन्या चिंतन तो माँ ऍम ये जाना है परिप्वस्त
- 6:02है अन्य नम भाव से जो व्यक्ति मेरे में चित्र लगा लेता है मुझे
- 6:08समर्पित हो जाता है। देशाम नृत्य भुगतानाम योग आक्षेम
- 6:13बाहम्यहम नृत्य प्रति के काम मैं करवाता हूँ उससे योग आक्षेमं
- 6:21बहाम्यहम तुम्हारे जीवन के सभी कार्यकलाप मैं कराता हूँ।
- 6:29यह तीसरी व्यवस्था है। आफ्टर इनिशिएशन तो वह जो पहला
- 6:36प्रश्न आया था वह मैं जानता होऊंगा कि यह व्यक्ति अभी खुद
- 6:43चलना चाहता है, इसलिए मैंने कह दिया होगा भागो यहाँ से कोई
- 6:48परमात्मा नहीं। तुम पागल हो गए हो के किस उम्र को
- 6:53खरीदने से हमें भेज दिया यहाँ और तुमने शायद सोचा होगा यह आदमी
- 7:01पागल है न तो बुलाता है किसी। ना आय हों, का सत्कार करता है, ना
- 7:09दीक्षा देता है, ना नाम दान देता है।
- 7:11कुछ भी तो नहीं करता है। लेकिन फिर फिर तुम 810 कूंचे फलोर
- 7:18के यहाँ पर आ गए। तब तक तुम बहुत सी भ्रांतियों को
- 7:27और जोड़ चूके थे, कुछ अपराधियों को तोड़ चूके थे।
- 7:32नैचुरली किसी नए के पास जाओगे, प्राणी टूटेगी, नई बन जाएंगे।
- 7:39फिर तुम मेरे पास आ गए, मैंने तुम्हें नहीं शेयर किया।
- 7:45लेकिन उसके बाद तुम कुछ न कर पाओगे।
- 7:50आफ्टर इनिशिएशन वॉटेवर यू विल डू यू विल नॉट डू आई विल डू दैट तुम
- 7:59कुछ नहीं करोगे मैं ही करूँगा। सर्व धर्माण प्रत्यक्षमह में कम
- 8:05शरणम व्रत अहम त्वांग सर्व पाप वैभव, मोक्ष स्वामी माँ सोचा
- 8:13आफ्टर इन शेषनगर तुम कुछ भी होगा वो कहोगे कि मैंने किया और तुम
- 8:19कहते रहना किया तुमने नहीं किया मैंने।
- 8:23आई ऍम रिस्पांस विथ हर दट। उसके लिए जिम्मेदारी मेरी
- 8:30तुम्हारी क्वेश्चन और मैं पूरी स्टेम पर लगा के जिम्मेदारी लेता
- 8:36हूँ इस बात की तुम कुछ भी करो मैं ही करूँगा।
- 8:41मैं ही करवाऊंगा, तुमसे तो मेरे हाथ का मोहरा तुमने मुझे सुपुर्द
- 8:49कर दिया, मैंने तुम्हें कनेक्शन दे दिया, अपनी उंगलियों के धागे
- 8:54से बांध ली ये कठपुतली अब तुम्हारी कोई इच्छा काम नहीं
- 8:59करेगा। अब काम करें कि मेरी अंगुली का
- 9:02इशारा यह इनिशिएशन के बाद की घटना है तुमने पूछा पुत्र मैं चाहता था
- 9:13किसी और को वोट देना वोट दिया गया किसी और को?
- 9:21जी क्या क्या सब कुछ प्रीफिक्स है नहीं?
- 9:28प्रकृति की तरफ से ये प्रीफिक्स नहीं प्रकृति तो तीनो ऑप्शन खुले
- 9:33रखती है चाहे तो तुम करो करता भोगता।
- 9:39चाहे आधा कर्ता भोगते, फिर जो तुमने किया उसको भोगोगे जो तुमने
- 9:45नहीं किया परमात्मा नहीं किया। पता नहीं कैसे हो गया वह तुम्हें
- 9:50नहीं भोगोगे और तीसरा, जब तुमने समर्पण कर दिया, तुम किसी के हाथ
- 9:55की कठपुतली बने? फिर वह करवाएगा और ध्यान रखना।
- 10:03यह संत व्यक्ति के हास की कठपुतली वनोगे तभी होगा, अन्यथा किसी ऐसे
- 10:12ऐसे ऐरे गरे नत्थू खरे समझा क्या? ऐरे गैरे नत्थू खैरे कहाँ से बना?
- 10:20तुम्हें पता है मैं महात्मा गाँधी की बड़े गाणें से बना ऐरा गैरा
- 10:27नत्थू खैरा नत्थू राम गोडसे ने कतल किया था, गोलियां मारी थीं।
- 10:36वहाँ से कहावत बनी, ऐरा गैरा नत्थू खैरा, नत्थू नत्थू रामगौड
- 10:42से इसको लोगों ने ऐरा गैरा कहा, अगर ऐसा ही कुछ होगा और उसके
- 10:52मारने से क्या होगा, कुछ भी तो नहीं होगा?
- 10:56सिर्फ वह टंगा और उसने टंगना ही था क्या हुआ?
- 11:04गाँधी तो आज भी जिंदा है और इस गाँधी को भी मार दोगे तो अब तुम
- 11:10कैसे मृत्यु गाँधी को मार दोगे? नहीं, गाँधी को नहीं मार्क पाओगे
- 11:18गाँधी की विचारधारा तो जीवित रहेंगी, वो तो अलग बात है।
- 11:22गाँधी ही जीवित रहेंगे, यह तुम्हें नहीं पता, ये शायद
- 11:26तुम्हें किसी ने बताया भी न हनीते अन्य माने शरीर हैं।
- 11:33गाँधी कभी नहीं मरता है, गाँधी का शरीर मरता है और न जाने कितने
- 11:42जन्मो में गाँधी जन्म है और आज तिलक वो कड़ी बरकरार।
- 11:52गाँधी सदा के लिए है जैसे हीरा सदा के लिए होता है गाँधी को नहीं
- 11:59मार पाओगे ऐरा गहरा नत्थू खैरा अगर तुम किसी एनलाइटन्ड व्यक्ति
- 12:08की शरण में चले गए, कैसे पहचान करें?
- 12:14एनलाइटन्ड व्यक्ति जिसकी कोई कामना बिल्कुल सीधे सीधे।
- 12:21तो मैं बताता हूँ 1000 बार बता चुका हूँ लेकिन हमारी खोपड़ी में
- 12:25उतरते हैं बात क्योंकि भरा पड़ा कचरा कचरे में से हीरा जाएगी तो
- 12:30कैसा जाये? खाली स्पेस नहीं हीरे को गुज़रने
- 12:34के लिए कचरा इतना भरा पड़ा है हीरा अभी तक जा नहीं सकता
- 12:38तुम्हारे। कैसे पहचान यह एनलाइटन है, जिसकी
- 12:46कोई कामना नहीं बची, जिसकी जीवेशणा नहीं बची, जिसने कुछ माना
- 12:54नहीं। जो कुछ खो नहीं सकता नहनते हनुमान
- 13:00शरीर वह मरता नहीं, उसकी सामग्री भर्ती वह नहीं मरता उसका जोड़ा
- 13:12हुआ सामग्री मरता। उसका जुड़ा हुआ मटेरियल मरता है।
- 13:18यह शरीर इतना थोड़ी था जब जन्मा इतना नहीं था और माँ के शरीर से
- 13:25भी माँ की कोख से भी जब जन्मा तो क्या उतना प्रविष्ट हुआ था माँ के
- 13:31शरीर में नहीं? माँ के शरीर से निकला तीन किलो
- 13:35वजन लेकिन जब माँ के शरीर में प्रवेश हुआ तब तो उसका वजन ही
- 13:41नहीं था, तब तो वह सपरम था, सपरम अंडाणु के साथ मिला और रचना शुरू
- 13:49हो के। फिर यह शरीर बना, शरीर बढ़ता रहा,
- 13:53बढ़ता रहा और फिर 1 दिन आ गया जब वह शरीर तीन किलो का होकर स्पर्म
- 14:01छोटा सा अंडाणु के साथ मिल गया। प्रकृति अपनी प्रोसेसर करती रही।
- 14:07इसे ही मैं मूर्खता कहता हूँ अरे मूर्खों परमात्मा ने इतना शानदार
- 14:11प्रदान किया, अगर कुछ ऐसा होता कि तुमने चलना कैसे तो बता ना देता
- 14:19हूँ, एक किताब नहीं घट सकता था इतनी सृजना करने वाला मालिक?
- 14:25एक किताब का सृजन नहीं कर सकता था लेकिन धर्मों नहीं से भी छुपाया।
- 14:35धर्मों को पता था कोई बिगड़ी खोपड़ी आएगी और वह प्रश्न पूछेगी
- 14:41कि क्या क्या परमात्मा? कोई किताब नहीं बना सकता था कि
- 14:46ऐसे ऐसे ऐसे जियो तो फिर हिन्दुओं ने कहा सनातन ने कहा परमात्मा ने
- 14:54वेद लिखा तुम्हारे लिए और जितनी गंदगी वेदों में भरी, इतनी कहीं
- 15:01नहीं मिलेंगे। हे परमात्मा मेरे खेत में रचना और
- 15:08पड़ोसी के खेत को निस्त नाबुध कर देना।
- 15:12यह ऋषि कहेगा या इर्श्यादो भक्ति कहेगा और पढ़ो तुम तुम्हारे वेदों
- 15:18में क्या है जिसका डंडोरा पीटते हो तुम?
- 15:23भेदों में ये लिखा है कि प्रभु मेरे खेत में वर्शन, मेरी गायें
- 15:30ही दूध दें, खूब घना सारा और पड़ोसी की गायें, दूध सूख जाएं या
- 15:36के मर जाएं। यह किसी विकृत मानसिकता का सबूत
- 15:42है या ऋषिता का सबूत है? यह किसी कृषालु व्यक्ति का सबूत
- 15:50है तो किसी इरशालु, द्वंद से ग्रस्त भय और ब्रह्म से युक्त
- 15:56व्यक्ति ने भेद लिखे। यह ज्ञान नहीं है, इसे मैं अज्ञान
- 16:02की पराकाष्ठा मानता हूँ। ईसाईयत ने कहा बाइबल लिखी है ओल्ड
- 16:14टेस्टमेंट यहूदी ने कहा। बाइबल लिखी, लेकिन बाइबल भी कहाँ
- 16:23लिखा है? ओल्ड टेस्टमेंट परमात्मा ने कहाँ
- 16:29लिखा नहीं तो कहता परमात्मा कहता मैं बड़ा क्रू खबरदार मेरी तरफ
- 16:36आंख मत उठा रही ना मैं आँखें निकाल दूँ।
- 16:38में बड़ा क्रोधी हूँ परमात्मा परम प्रेम सब बकवास और बाइबल में लिखा
- 16:49और गैलिलियो गैलिलिज कहा नहीं धरती घूमती है सूरज के आस पास और
- 16:56कैथलिक चर्च के। पादरियों ने कहा नहीं, नहीं नहीं,
- 17:00हमारे बाइबल में लिखा सूरज घूमता है, धरती के आस पास और हमारे
- 17:06बाइबल में लिखा गलत कैसे हो सकता है?
- 17:10ऐसे जैनियों ने लिखा, ये चंद्रमा, जिसके ऊपर नील आराम स्ट्रांग है।
- 17:17प्रथम पांव रखा वहाँ पर देवता निवास करते और कोई देवता नजर नहीं
- 17:22आया। तीन लोग उतरे वहाँ कोई देवता नहीं
- 17:30नजर आया, कोई ऊंची नीची जैसी सदियों से यहाँ कोई नहीं आया।
- 17:38और फिर जैन्यू से पूछा गया आप तुम्हारी देवता कहाँ है?
- 17:42नहीं नहीं इस चंद्रमा की बात थोड़ी है, वो तो कोई और चंद्रमा
- 17:46है, कौन सा चंद्रमा है भाई बताओ शनि के अपने चंद्रमा है, बृहस्पति
- 17:52के अपने चंद्रमा है, उनमें से कोई है क्या?
- 17:55लेकिन इन्हें कुछ पता नहीं। मूर्ख का धंधा है सबका तो बाइबल
- 18:02ने कहा कैथल के चर्च के पदार्थ में फादरियों ने कहा अरे गैली ली
- 18:09वो गैली ली यू? अरे टेलिंग ए लॉ।
- 18:15इट्स नॉट इन आवर होली बायबा हमारी बाइबल में लिख के पवित्र बाइबल
- 18:22में नहीं लिखी है, इसलिए तुम्हें नजरबंद किया जाता है।
- 18:27तुम नास्तिक हो तुम भ्रम फैला रहे हो।
- 18:32यानी कहने का मतलब बाइबल ही भ्रम मुक्त कर रही है और जितना बाइबल
- 18:38ने लोगों को भ्रम दिया, उतना शायद ही किसी किताब नहीं दी।
- 18:43वैसे तो सभी धर्मग्रंथ भ्रम ही देते हैं।
- 18:48छोड़। परमात्मा है बाइबल लिखी यह सिर्फ
- 18:57इस बात का परिणाम था कि कोई गूंटी खोपड़ी आएगी कुछ।
- 19:02इतनी सृष्टि बनाने वाला, इतनी ऐक्युरेसी लाने वाला, इतनी महीन
- 19:07संरचना को करने वाला क्या? एक रचना यह नहीं कर सकता कि मानव
- 19:12जिए तो कैसे जिए? तो गली लियो अपने घर में नजरबंद
- 19:19हो गया। उसने दीवारों के ऊपर चित्र बनाया।
- 19:24क्षेत्र बनाया बीच में धरती और उससे ऊपर एक बड़ा सा सूरज धरती से
- 19:33बहुत बड़ा है। सूरज और सूरज से बड़ा 1200 गुना
- 19:39बड़ा। ध्रुव तारा है, जिसे पोरब स्टार
- 19:43कहते है। बड़ी से बड़ी दुनिया पड़ी है
- 19:46परमात्मा की सृजना में। इस छोटे से तुम अपने आप को अपना
- 19:52होना कहते हो, यह मोड़ता नहीं तो और क्या है?
- 19:58तुम्हारी औकात यहाँ है क्या? बस तुमने सोचा नहीं सिर्फ मूर्ख
- 20:03सोचता नहीं कि मेरे पास कितना ज्ञान, वह यह समझ लेता है मेरे
- 20:08पास जितना ज्ञान है दट, इस सुफ्फिसिएंट फॉर लेकिन कहाँ
- 20:14सुफ्फिसिएंट है वो ज्ञान है ही नहीं, वो मुड़ता है।
- 20:20तो उसने एक चित्र बनाया और चित्र में सूरज बनाया, सूरज के आसपास
- 20:26धरती घूमती दिखाई और नीचे क्या लिखा नीचे लिखा एंड सेट ऐट मॉस और
- 20:34अभी भी ये घूम रही है। एंड स्टिल अक्ट और अभी भी है घूम
- 20:42रहे है गैलिजियो गैलिजियो उम्र के हमारे वाइबल के प्रणेता 350 साल
- 20:53बाद माफी मांगते हैं। गैलिजियो गैलिजिस क्षमा करते।
- 20:57गलती हो गई। गोमती तो पृथ्वी ही है।
- 21:01सूरज के आसपास मोबाइल में कहीं कोई गलती खा गए होंगे?
- 21:09देखिये तरम प्रचारकों के हिसाब से मैं एक बात बता दूँ।
- 21:16धर्म प्रचारक जो अंतिम सत्य बताएंगे वो तो सबका होगा एक अब ये
- 21:21बात ध्यान से सुन लेना वो ईसा हों, अब मुसा हों, कृष्ण हों,
- 21:30कबीर हों, नानक हों, जो अंतिम सत्य है।
- 21:35केंद्र। वो तो सबको एक बताएगा एक कोंकार
- 21:43मोहम्मद कहेंगे पैगम्बर कहेंगे अल्लाह एक?
- 21:55गोडिस वॅन शरय, संत सभ्यस्यानय एक मत वो एक मत किसपे होता है गोडिस
- 22:06वॅन अल्लाह एक है, एक ओंकार परमात्मा एक है।
- 22:15इस बात पर सभी सहमत होंगे। आगे भी शब्द कहा लोग समझ नहीं
- 22:20सकें सब सब सयाने एकमत जो सयाने हैं वो इस बात पर एकमत होंगे के
- 22:27परमात्मा एक है मूर्ख अपनों अपने, लेकिन उनके आगे जो होंगे।
- 22:35शिष्ट उनको कबीर कहते वो होंगे मूर्ख क्योंकि संत ने देखा अपनी
- 22:43नग्न आँखों से और नग्न आँखों से देखा हुआ जो बोला गया वह सिर्फ
- 22:49सत्यवय है। और नग्न आँखों से क्या देखा गया
- 22:54कि ब्रह्मात्मा एक एको अहं द्वितीय नास्त एको ब्रह्मा
- 23:00द्वितीय नास्त, वह एक अनल हक, मैं ही परमात्मा हूँ और मैं ही हूँ सर
- 23:08मन सुर नहीं यही कहा। सभी संतो ने एक ही बात कही सेंटर
- 23:14के प्रति केंद्र के प्रति सभी सयाने एकमत कबीर कहते हैं, इसके
- 23:21ऊपर तो सभी सयाने एकमत होंगे, लेकिन जो सयाने नहीं अमूर्ख हैं
- 23:25वो कहेंगे नहीं, परमात्मा दो हैं, तीन हैं, पांच हैं, 20 हैं 1000।
- 23:30अनंत हैं, समझा बहुत नहीं पागल हो गया मूर्ख अपना जैसे ही संत तू से
- 23:40अगली पीढ़ी आई व्याख्या मूर्ख जिसे हम कहते हैं फलोवर।
- 23:48तो कबीर कहते हैं फल और मुर्ख होते हैं।
- 23:52क्यों? उन्होंने अपनी आँखों से नहीं
- 23:54देखा, आँखों से नहीं देखा तो वह अंदाजी से कही और आँखों से देखी
- 24:01तो दर्शन होती है और अंदाजी से कहा अनुमान होता है।
- 24:06तो तुम खोपड़ी से अनुमान लगाओगे उसके प्रति जो खोपड़ी में आता
- 24:11नहीं, उस विराट के प्रति जो खोपड़ी में समाता नहीं।
- 24:18तो इसलिए कबीर कहते हैं मूर्ख अपना अपनी वह जो आगे की पीढ़ी
- 24:23आएगी। जो इन अव्यवस्थाओं को आगे बढ़ाएगी
- 24:27वो मुर्ख हो। बस इस बात को आप सभी धर्मों में
- 24:32डाल देना जिसने देखा प्रथम में उसने यही कहा अल्लाह एक है बस
- 24:41उसकी बात करो, आगे की बात। गुरु नानक ने कहा, एकों का ईसा ने
- 24:53कहा, गोडिस्बा और लविस्कोट प्रेम प्रमा प्रेम उसका रूप।
- 25:06सनाथन ने कहा एको ब्रह्म द्वितीय नास्त ब्रह्म दूसरा कोई नहीं और
- 25:16फिर उसका आदि वह सत्य है, चित्त है, चेतन है, आनंद है।
- 25:22एक उसके गुणों का ही लक्षण है, सत है, चित है, आयन है, श्रद्धा है
- 25:29और चेतन है। अब बहुत से नर्घकारी कह सकते हैं
- 25:32यह आकाश यह परमात्मा है, मैंने कैसे में चेतनता कहा है?
- 25:36दिखाओ अगर आकाश परमात्मा है? तो परमात्मा का स्वरूप तो तीन है,
- 25:44सत्य है, चित्त है, आनंद है, इसमें आनंद कहाँ है?
- 25:47दिखाओ तुम कहोगे सदा से है, चलो तुम्हारी एक बात पूरी हो जाए,
- 25:53लेकिन चेतन और फिर आनंद आकाश में कभी आनंद नजर आए तुम?
- 26:00आकाश में तुम्हें चेतनता नजर आई, कभी आकाश बोला, क्यों मूर्ख बने
- 26:05हो? क्यों लोगों का मूड बनाया?
- 26:09लेकिन चलता है यहाँ सब चलता है ना चेतनता है आकाश में।
- 26:16ना आनंद है आकाश में और ये दोनों चीजें तुम्हारे भीतर हैं चेतन का
- 26:22तुम्हारे वितर और आनंद भी तुम्हारे भीतर आनंद का जलना ही
- 26:26नहीं, आनंद का समुद्र है भीतर आनंद के खजाने हो तुम उस एक।
- 26:34एक का भरा हुआ वो एक तुम हो इसलिए मंसूर ने कहा अनुर हक वो मैं हूँ,
- 26:44सिर्फ मैं ही हूँ तो मूर्खों ने कहा कि किताब ले के जाओ और कह दो
- 26:51यह भगवान ने लिखी है। अरे पागल तुम 2000 साल पहले हुए
- 26:57तुम 1400 साल पहले हुए यह परमात्मा ने कैसे लिख दी?
- 27:02यह सनातन तो 67000 साल पहले ऋगवेद को अगर हम ठीक से समझें तो बस
- 27:09इतना सा ही नजर आएगा। ऋगवेद 7000 6000 8000 इसके आसपास
- 27:16लिखा गया और एक ऋषि ने नहीं लिखा। बहुत से अलग अलग ऋषियों की यह उपज
- 27:23है। उसको इकट्ठे कर लिया गया परवेद बन
- 27:27गया। लेकिन पुराना इतना नहीं जितनी
- 27:33धरती धरती को तुम 6,00,00,000 साल प्राण सनातन इसको अरबों वर्ष की
- 27:39पुरानी बताता है, लेकिन धारणाएं हैं सिर्फ सत्य किसी को पता नहीं।
- 27:49तो बाबा नानक कहते हैं सत्य किसी को भी नहीं पता, अगर सत्य पता
- 28:00होता पंडितों को लिख दिया होता पुराण सत्य पता होता मौलवियों को।
- 28:09तो लिख दिया होता। कुरान में सत्य का किसी को पता
- 28:13नहीं सत्य अछुवा सत्य दूर से देखा जा सकता है, बस छुआ नहीं जा सकता
- 28:24है। सत्य के भीतर प्रवेश हो जा सकता
- 28:28है। उसको व्याख्याय नहीं किया जा
- 28:30सकता। इसलिए जो लोग मुझसे कहते हैं
- 28:33परमात्मा के बारे में कुछ औरों में हाथ जोड़ लेता हूँ, नमस्कार,
- 28:40उसके बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकूंगा और तुम्हारे खिताब देने
- 28:47से। मैं ज़रा भी बाधित नहीं होता।
- 28:51तुम मुझे ज्ञानी कहो तुम मुझे अज्ञानी कहो, तुम भी मिट जाओ, मैं
- 28:55भी मिट जाऊंगा, उसे ज़रा भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 29:00आज तुम कितना ही कबीर को मान्य दे दो, कितना ही नानक को मान्य दे
- 29:04दो। इतना ही ईशा को पूछ लो ये सब
- 29:07फॉलोवर्स हैं उसके और फॉलोवर्स कबीर कहते हैं मूर्ख अपनों अपनी
- 29:15यही तो हुआ महावीर मरे कितने संप्रदाय हो गए दो तो पक्के पक्के
- 29:20हो गए स्वेतांबर हो गया, दिगंबर हो गया।
- 29:23वो तो मरे 20 से सम्प्रदाय हो गए, हजरत गए, शिया सुन्य हो गए।
- 29:32ये मूर्खों की करामात है। हजरत ने तो एक बात कही मूसा एक
- 29:38बोले ईसा एक बोले सनातन के ऋषिगण एक बोले।
- 29:44लेकिन आगे उनके शिष्य बाइफरकेट का ट्राईफरकेट का मल्टीफरकेट हो गए।
- 29:54तुम कहते हो मुझे क्या है? पहले तुम करते हो फिर कुछ तुम
- 30:00करते हो, कुछ परमात्मा करता है। सही पूछो तो 30 की एज तक तुम करते
- 30:07हो अगर मैं ठीक से एज वाइज इसको किताब दूँ, 30 की उम्र तक तुम
- 30:13करते हो? 3035 डालना शुरू होता है।
- 30:16गोडे काम नहीं करते, थोड़े भारी लगने लग जाते हैं तो फिर थोड़ा सा
- 30:20परमात्मा करता है। थोड़ा सा तुम करते हो और जैसे
- 30:25वृद्ध हो गए 70 सीखे हो गए। फिर सब कुछ परमात्मा करता है, वो
- 30:30भी तुम कुछ कर ही नहीं सकते हो ना हाथ हिला सकते हो ना हाथ हिला
- 30:34सकते हो ना कुछ बोल सकते हो, बोलते हो, जबान थर थरती है कांपती
- 30:39है, लड़खड़ा जाती है। फिर तुम कहते हो जो करता है,
- 30:42परमात्मा करता है, लेकिन यह शक्ति भी है जब तुम तीसरे तल पर
- 30:49पहुंचोगे पहले तो तुम करोगे सब तुम करोगे लेकिन तुम्हारा किया
- 30:53किराया सब मटिया में हो जायेगा फिर तुम कहोगे नहीं, परमात्मा भी
- 30:58बीच में अड़ी कडाता है। अर्जन डालता है, बाधा पैदा करता
- 31:02है, शिक्षण पैदा करता है। आधा तुम करोगे आधा प्रमात्मा
- 31:07करेगा, फिर तुम बिल्कुल आखिर में आ जाओगे।
- 31:10आखिर में तुम क्या कहोगे, मैं कुछ नहीं करता।
- 31:15सब परमात्मा करता है फिर उससे बिल्कुल आखिर में आ जाओगे ज्ञान
- 31:19के अंतिम तत्व में तो तुम कहोगे मैं ही नहीं हूँ, मैं ही नहीं यही
- 31:29सत्य है, तुम ही नहीं। आखिर में संत क्या देखता है?
- 31:37आखिर में संत यही देखता है, मैं नहीं जो है वही जिधर देखता हूँ,
- 31:44उधर तो ही तो है, हर जरिये में तो ही तो रोवरू है।
- 31:52या देखने की बात लिखा लिखी की है। नहीं देखा देखी बात लिखा लिखी की
- 32:02है नहीं तुमने लिखा लिखी पढ़ शास्त्र पढ़ लिए कोई लिख के गया
- 32:06होगा, किसी ने देखा होगा ओह अपनी बात को लिख गया।
- 32:11लेकिन देखा तुमने नहीं, तुमने लिखा हुआ पढ़ा तो रहीम कहते हैं
- 32:18लिखा लिखी की है नहीं देखा तीखी बात 2,00,000 टूलन मिल गए फीकी
- 32:26पड़ी बारात? जब शब्द और सुरती का मिलान हो
- 32:31जाता है, जब आत्मा और परमात्मा का मिलन हो जाता है, जब कूद और
- 32:35समुद्र में एकाकार हो जाता है तो उसी की बड़ी वरात सब कुछ बेकार हो
- 32:44जाता है। सब छूट जाता है तुम्हारा करा धरा
- 32:48सब खत्म। तुमने पूछा ये क्या हुआ?
- 32:53आफ्टर इनिशिएशन तुम करना चाहो क्योंकि मुद्दतों की तुम्हारी।
- 33:09ऐडिक्शन में तुम्हारा संस्कार है कि मैं करूँ और जैसे ही तुम
- 33:17करोगे, गुरु तुम्हें करने नहीं देगा।
- 33:21गुरु आड़े आएगा, गुरु तुम्हारा हाथ पकड़ेगा और स्टेम्प जहाँ
- 33:26लगानी है वहाँ लगा। तुम कुछ किया जाओ, तुम्हारा कुछ
- 33:32नहीं। तुम चिल्लाए, जाओ, चिल्लाए, जाओ
- 33:36और फिर रिज़ल्ट क्यों आया? तुम कहते हो कि दुगने से ज्यादा
- 33:42वोटों से वो जीता जहाँ मैंने स्टाम्प लगाई थी।
- 33:45और जहाँ मैं लगाना चाहता था, वो दुगने से ज्यादा वोटों से हार गया
- 33:51कि आधे वोट भी नहीं मिले उसे तो ये क्या है बाबा ये वही है, मैं
- 33:58चाहता था उसको जिता दूँ अब मैं जहाँ से बोलता हूँ उस तल को
- 34:04देखना। मेरे शब्दों को मत देखना, मैं जो
- 34:07चाहता हूँ वही करता हूँ तुम जो चाहते हो वह मैं होने नहीं देता,
- 34:16मैं जो चाहता हूँ वह मैं करता हूँ और वह तुमसे कराता हूँ तुम मेरे
- 34:22हाथों के कठपुतली। मैंने तुम्हें बनाया अपना खेल
- 34:28खेलने के लिए तुम्हारे मनोरंजन के लिए कहाँ बनाया मैंने तुम्हारे
- 34:35मनोरंजन के लिए मैंने कहाँ बनाया नान कवि से कर विचार।
- 34:42नानक देख देख कर हँसते हैं प्रसन्न अपनी ही सृजना को देख देख
- 34:48कर हंसते हैं नानक विकसित कर विचार अपनी ही सृष्टि को झूमता
- 34:55गाता नाचता चिल्लाता दुखी होता, रोता देखता है, विचार करता है।
- 35:03और प्रसन्न होता है। तुम सही कहते हो, परमात्मा दुःख
- 35:06नहीं होता। परमात्मा में दुख का ज़रा भी
- 35:08रक्षण नहीं है। परमात्मा परम प्रसन्नता का नाम जो
- 35:13सदा सदा प्रसन्न है, जो सदा सदा खुशहाल है, जो सदा सदा मस्त है।
- 35:22ओके बाय बाय ऑल दी इवेंट सर्जरी डिटेन्ड वॉटेवर इज़ गोइंग ऑन दट।
- 35:34इस प्रीडस्टाइन्ड जो भी कुछ हो रहा है, वह पहले से नियत।
- 35:40किया जा चुका है। लेकिन पहले पड़ाव को तुम नहीं
- 35:45मानोगे नहीं मानोगे? दूसरे पड़ाव पे तुम कहोगे आधा मैं
- 35:49करता आधा वो करता तीसरे पड़ाव पे सही तुम्हारे नेत्र भूल गए वह तुम
- 35:55देखोगे मैं कुछ नहीं करता वो ही करता।
- 35:57और फिर चौथे पड़ाव पे तुम पाओगे मैं ही नहीं हूँ कर करूँ रे कौन
- 36:03जब मैं ही नहीं हूँ करेगा कौन किसका मटेरियल किसका सरे काहे का
- 36:12घमंड? काहे का साधन, काहे का साध्य।
- 36:17किसका मटेरियल कौन धनपति, कौन गरीब कौन बीमार कौन सवस्थ कुछ भी
- 36:25नहीं जो है सब वही है उसके सिवा कुछ भी नहीं है।
- 36:32तुम कहीं भी चले जाओ, लेकिन मैं तुम्हें कहती हूँ वह।
- 36:38तुम्हारा अपना कोई सब बेगाने, बाहर सब बेगाने अगर अपने को खोजना
- 36:49है तो बाहर से मुड़ो अपने को खोजना बाहर नहीं मिलेगा।
- 36:57बेहतर मिलेगा मक्का खोजो मदीना खोजो तीर्थ खोजो गंगा सागर खोजो
- 37:04नहीं मिलेगा कहाँ मिलेगा तुम्हारे अंत समय मिलेगा।
- 37:15बाबा जी आपने कहा द्वंदातीत हो जाओ लेकिन आपकी बातों में खुद की
- 37:27बातों में द्वंदा नजारा आता है। बातों में द्वंद्व नजर आएगा
- 37:37क्योंकि बातों में शब्दावली है, लैंग्वेज है और लैंग्वेज जो शूद्र
- 37:43है, लैंग्वेज से वह विराट न प नहीं जा सकता।
- 37:51इसलिए द्वंद्व आना स्वाभाविक है। आपने कहा बाबा अपने चाचाजी के
- 37:58उदाहरण देखे। पंजाब नेशनल बैंक दिल्ली में
- 38:02मैनेजर हुआ करते थे। अपनी जेब में ठाकुर जी रखते आपके
- 38:11पास आए? आपने स्नान नहीं किया था तो कहते
- 38:16हैं कि ठाकुर जी अपवित्र हो गए, मुझे फिर से स्नान करना पड़ेगा,
- 38:20ठाकुर जी को स्नान करवाना पड़ेगा। क्या ठाकुर जी में परमात्मा नहीं
- 38:28है जब वह कण कण में व्याप्त है? ईशा वास्तुमगम सर्वमम जगत जगत तो
- 38:38क्या आपके चाचाजी के जेब में पड़ा हुआ स्त्री का वह ठाकुर परमात्मा
- 38:44नहीं है? मुझसे मत पूछो।
- 38:53मेरे चाचाजी को जर्रे जर्रे में वो नजर आया।
- 39:02सवाल ये करो सवाल ये ना करो कि जेब में पड़ा हुआ स्टील का वो
- 39:08टुकड़ा? ठाकुर जी जिसे तुम नाम देते हो,
- 39:14क्या उसमें परमात्मा नहीं है? मैं कहता हूँ क्या परमात्मा नज़र
- 39:18आ गया तुम्हें? उसमें?
- 39:22अगर नज़र आ गया तो कोई अड़चन नहीं है।
- 39:26फिर मूर्ति मूर्ति न रहेंगी। फिर पत्थर पत्थर न रहेगा, धन्ना
- 39:33जट के लिए पत्थर भगवान हो जाएगा क्योंकि पत्थर में भगवान देखा गया
- 39:39अगर मेरे चाचा को जेब में पड़ा हुआ ठाकुर जी?
- 39:46जरे जरे में समाहित परमात्मा दिख जाता हूँ तो एक शब्द ना बोलते
- 39:56हैं। क्या मेरे ठाकुर जी अपवित्र हो
- 40:00गए? इन्हें स्नान करवाना पड़ेगा।
- 40:04ठाकुर जी कभी अपवित्र होते, क्योंकि ठाकुर जी जितना गंगाजल
- 40:11में हैं, उतना ही तो गंदे नाली में जितना शुद्ध पवित्र, पावन,
- 40:20गौमुखी से निकला हुआ पानी है डेस्ट्रेड।
- 40:24उतना ही गंदा नाला भी तो पवित्र है तो ठाकुर जी का भी पवित्र
- 40:30अपवित्रता की बात नहीं होती। ठाकुर जी को मत कहो, बात तो
- 40:35तुम्हारी दृष्टि की है। क्या तुम्हारी दृष्टि ने देख लिया
- 40:40वह जो सर्व व्यापक है। वह सर्वव्यापक है।
- 40:45यह जान लिया कण कण में व्याप्त है, वह जरे जरे में समाहित है।
- 40:54वह उसी की तस्वीर है। सब जगह क्या तुमने जान लिया?
- 40:59अगर जान लिया होता तो एक शब्द ना बोलते मेरे चाचा जी।
- 41:03फिर बोलने के बजाय मैं मन रह जाता हूँ तो बोले मेरे ठाकुर जी
- 41:08अपहित्र हो गए और ठाकुर जी ही क्या जो अपहित्र हो जाए क्योंकि
- 41:14गंदे नाले में तो वही है और जिसने ठाकुर जी स्टील स्टील के ठाकुर जी
- 41:21में परमात्मा देख लिया। झरे झरे में परमात्मा देख लिया
- 41:25इच्छा वसुमेधम सरवम यतिगंज जगते आम जगते क्या वह गंदे नाले में
- 41:31ब्रह्मात्मा नहीं दो गिलापन मेरा कि मेरे चाचा का दो गिलापन मेरा
- 41:40कि तुम्हारे संतों का? मैं तो सीधी सीधी सी सरल बात करता
- 41:45हूँ, ज़रा भी तो उल्ट पुल्ट्री नहीं है, ज़रा भी तो द्वन्द नहीं
- 41:49है मैं तो द्वंदती तो की बात करता हूँ मैं तो जो कहता हूँ अपनी
- 41:53आँखों से देखा कहता हूँ शास्त्रों में लिखा लिखा नहीं कहता।
- 41:58जो खुद से जाना जो देखा जो अनुभव मैं वही तो बखान करता हूँ,
- 42:04तुम्हारी बात ठीक है पुत्र वह जरे जरे में विद्यमान है, लेकिन नजर
- 42:10आया नजर भी तो आना चाहिए। नजर आने के बाद ही परिवर्तन आया
- 42:16करता है जीवन में। वह परिवर्तन तो आया नहीं तो फिर
- 42:21तुमने दर्शन नहीं किया। सीधा सीधा अर्थ है, इसलिए ठाकुर
- 42:28जी तो कण कण में विद्यमान हैं, तुम्हें नजर आना चाहिए।
- 42:37तुम्हारे चरम चिशु हटकर दिव्य चक्षु मिल जाए।
- 42:40तुम और उन दिव्य चक्षु से नजर आता है वह कण कण में व्याप्त सत्ता
- 42:47तुम्हारा भ्रम हट जाता है। भ्रम तो तुम्हारा मिटा नहीं
- 42:50तुम्हारे ठाकुर तो? जिसकी ठाकुर जी मेरे न नहाने से
- 42:56पवित्र हो गए, वह भला गंदे नाले को परमात्मा कैसे कह पाएगा?
- 43:03तो स्पष्ट है कि उन्होंने ईश्वर की सर्वव्यापकता का दर्शन भी
- 43:11किया। पढ़ा होगा।
- 43:13सुना होगा गुरु से सुना होगा, शास्त्र से बड़ा होगा ये तो ठीक
- 43:18है नेकन खुद से दर्शन ने किया और क्रांति होती है खुद के दर्शन के
- 43:24बाद, इसलिए चचाई जी को मैं मूर्ख हो गया था मेरे जी।
- 43:32राम राम करते थे, लेकिन मैं मूड कहता हूँ क्यों?
- 43:38क्योंकि उन्होंने सत्य को देखा नहीं, सत्य को पढ़ा, सत्य को सुना
- 43:46लिखा लिखी की है। नहीं देखा देखी बात?
- 43:51न तो लिखने में आती, न सुनने में आती, न कहने में आती या तो देखा
- 43:58देखी बात वह सर्व व्याप्त है शब्दों से पढ़ के सुन के किसी को
- 44:08मान के गुरु। तुम मान मत लेना तुम अपनी नग्न
- 44:13आँखों से स्वयं देखना तो क्रांति घटित होगी।
- 44:17क्रांति का मतलब तुम दुख से निकलोगे और तुम्हारे रोम रोम में
- 44:22रस बहेगा। आनंद का यही क्रांति है राधा न
- 44:26छूट। राधा मधुवन के भीतर नाचे की।
- 44:35मधुवन में राधिका नाचे रहे मधुवन में।
- 44:46राधिका ना चेर गिरधर के मोरू रिया, बा ज र गिरधर के।
- 45:03मुरली आवाजे मधुबन में राधी का नाम से ले।