Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Jan 26 - गुरु गोरखनाथ: मोहम्मद मोहम्मद ना कर काजी | बलि प्रथा और अहंकार | क्या दूध पीना मांसाहार है?
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- 0:14प्रणब कुंज बाबा जी जनस्पर्श गुरु गोरखनाथ का एक शब्द।
- 0:32कृपया उसे विस्तारित करने का कष्ट करें।
- 0:41मोहम्मद मोहम्मद, नकर काजी मोहम्मद का विष विचारम मोहम्मद
- 0:52हाथ करद जे होती लोहे छड़ी न सारम् प्रसुंदर शब्द है।
- 1:07गोरखनाथ तो धारु तलवार है, जतर जाएगी गाटेगी मोहम्मद मोहम्मद नकर
- 1:23काजी। गौरव कहते हैं तुम शब्दों का
- 1:33उच्चारण बंद कर दे, वो चाहे मोहम्मद मोहम्मद हो चाहे राम।
- 1:45चाहे शिव शिव हो, चाहे राज्य रहती हो, कृष्ण कृष्ण शब्द उच्चारण बंद
- 1:54करते मोहम्मद मोहम्मद नकर का जी। नाम उच्चारण बंद कर पहले नाम
- 2:07एग्ज़िस्टन्स को कहते है। नाम होद को कहते है नाम जो है
- 2:21उसको कहते है। प्रजेंस को कहते हैं एग्ज़िस्टन्स
- 2:28को कहते हैं विद्यामत्ता को कहते हैं जो विद्यमान है वो नाम है
- 2:40मोहम्मद मोहम्मद नकर काजी। मोहम्मद का विश विचार में मोहम्मद
- 2:52के विषय को विचार में लेके आओ राम राम नक् करो, राम के विषय को
- 3:07विचार में लेके आओ। राम जैसी मर्यादा साधो क्या?
- 3:29अगर पिता कोई आदेश दे या माता कोई आदेश दे तो बड़े को चाहिए कि छोटे
- 3:40के लिए त्याग कर दे और राम ने भरत के लिए त्याग कर दिया संघर्ष।
- 3:49और 14 वर्ष के लिए त्याग कर दिया। यद्यपि इसमें केकई की चाल थी और
- 3:59राम अच्छी तरह से समझते हैं लेकिन समझते हुए भी है।
- 4:05इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुष उत्तम कहा गया।
- 4:11जानते हुए भी कि राजनीतिक चाल छोटे के लिए राजपाट त्याग देते
- 4:23हैं, यहाँ बड़ी प्यारी बात है। और निकल के सामने आये थे।
- 4:29राम ये भी जानते हैं कि राजपाठ तो एक ही जंजाल है।
- 4:40राजपाठ से सुख नहीं मिलता जो आत्मज्ञान में आनंद आता है।
- 4:49वह राजपाट में नहीं आती, जो सुख पायो राम भजन मैं वो सुख ना ही
- 5:02अमीर में। तुमने हुक्म चलाना है या आनंद
- 5:11मानना है इस बात का पहले निर्णय कर लीजिए।
- 5:21संसार में जीने वाले प्राणियों। अध्यात्म के मार्ग पर चलने वाले
- 5:27प्राणियों, संसार पे एकाधिकार करने की चाहत रखने वाले प्राणियों
- 5:35पहले ये देख लो कि तुम्हारा मंतव्य क्या है जीने का बट श्योर
- 5:43टारगेट ऑफ लाइफ? क्या तुमने रस पीना है आनंद का?
- 5:52क्या तुमने हुकुम चलाना है? हकम बनना है कि आनंद का रस पीना
- 5:57है। दोनों काम तो ना हो सकेंगे, एक ही
- 6:02चुनना पड़ेगा। तो राम जानते हैं राजपाट तो जंजाल
- 6:14है जी का हर पल बिखराव, हर पल चेतना का बिखराव, आज वहाँ आग लगी
- 6:26है, आज वहाँ झगड़ा हुआ है। आज वहाँ आग लगी है।
- 6:32वहाँ गोली चली, वहाँ हत्या हुई, वहाँ लूट पड़ी तो राजपाट जी का
- 6:41जंजाल है और सभी लोग राजा के मुँह की तरफ देखते हैं।
- 6:48राजा सुलझाएगा और ठीक भी है, क्योंकि राजा के हाथ में सारी
- 6:56शक्ति हमने दे दी है। सारी शक्ति सारी सत्ता सारी
- 7:04संपत्ति राजा के पास में है। और राजा को भी समझना चाहिए मुझे
- 7:13लोगों ने इसे योग्य क्यों माना? क्या सभी का धन इकट्ठा करके एक
- 7:20व्यक्ति को देते हो? यही राजा का धर्म है जब वोट सबने
- 7:32दिया है, जब शक्ति सबने दी है अपनी तो क्या इसीलिए?
- 7:39कि सबका इकट्ठा करके एक व्यक्ति की गोजी में डाल दें।
- 7:44नहीं, राम अच्छी तरह समेटे है कि राजपाट जी का जंजाल है।
- 7:56हमारे वक्तों में ऐसा होता था। मैं श्री सत्संग सभा का मेंबर था।
- 8:06जब प्रधान का चुनाव होता तो सभी व्यक्ति भागते मज़े की बात है।
- 8:13जाने कहाँ गए वो दिन? इस दिल के आशियान में बस उनके
- 8:35ख्याल रह गए, वो तोड़ के दिल चल दिए, फिर हम अकेले रह गए।
- 8:48वो तोड़ के दिल चल दिए हम फिर अकेले रह गए, अकेले ही रह जाओगे।
- 8:56आखिर में ये धनमाल राजपाट यहीं पड़ा रह जाएगा, थोड़ी सी जिंदगानी
- 9:04है, पल दो पल का मेहमान होता है। तुम्हें हिंदू मुसलमान करने से
- 9:19फुर्सत न मिले तुम्हें हिंदू मुसलमान करने से फुर्सत न मिले,
- 9:29गद्दी पे बिठाया था समस्याओं को सुलझाने के लिए।
- 9:38कभी सुब्रमण्यम स्वामी कह रहे थे कि 4,00,000 हिंदू मंदिरों का
- 9:46कब्जा तुम्हारे हाथ में तो 3,00,000 मस्ज़िदों का क्यों?
- 9:53बस इनके दिमागों में यही शरारत घूमती रहती है।
- 10:00सुब्रमण्यम सोनू ऐसे दुष्ट हैं। जो लगाते भी नहीं और बजाते भी ऐसे
- 10:16मोरूक तरह का बंदा मैंने पहली बार देखा, मैंने अगर मार दिया तो फिर
- 10:26तू याद रख मारता है। मोहम्मद मोहम्मद नकर का, जी
- 10:36मोहम्मद का विश्व विचार मोहम्मद का विषय विचार उसके नाम को रिपीट
- 10:48मत कर। मोहम्मद तक पहुँच जहाँ कृष्ण बैठे
- 11:01वहीं मोहम्मद बैठे। ज़रा भी तो फासला नहीं है लेकिन
- 11:07अपने अंतश के अस्तित्व से अपनी खोपड़ी तक आने का।
- 11:13रस्ता बड़ा लम्बा है। मोहम्मद तुम्हारे अस्तित्व में
- 11:23विराजमान मोहम्मद वो तत्व है जो कभी कटता है।
- 11:32जो कभी जलता नहीं, जो मरता नहीं, जो गलता नहीं, जो सोचता है नैना
- 11:38सेदंती शस्त्रन नैना बाहती पांव का न चैनम किले देनतया को न सो
- 11:44सती मारुदा मोहम्मद मोहम्मद नकर, काजी मोहम्मद का विश्वविचारम।
- 12:00इस विषय की तरफ चल बाहर की विषयों की तरफ मत चल मोहम्मद हाथ करब जे
- 12:11होती लोहे छड़ी। न शारम गौरख कहते हैं कि मोहम्मद
- 12:21के हाथ में जो कद है छुरी है, वह जीव हत्या के लिए नहीं, मोहम्मद
- 12:31हाथ कद जे होती। लोहे छड़ी न सारम एक छड़ी शब्द है
- 12:40गढ़ी नी मोहम्मद हाथ करदी जे होती लोहे छड़ी न सारम मोहम्मद मोहम्मद
- 12:54नकर काजी। मोहम्मद विषय विचार मोहम्मद के
- 13:02विषय का विचार मोहम्मद की तरफ निकल मोहम्मद मोहम्मद का जाप न कर
- 13:10मोहम्मद की तरफ निकल यात्रा आरंभ कर यहाँ मोहम्मद बैठें।
- 13:17अब देखिये मोहम्मद की बात से समझा दूँ या राम की बात से समझा दूँ या
- 13:23राधा की बात से समझा दूँ? कोई फर्क भी तो नहीं पड़ता है
- 13:28क्योंकि यात्रा यात्रा का मार्ग पथ तो वही है, पथ वही है।
- 13:35जो तुम्हें ले जाएगा राधा की चेतना की तरफ, मोहम्मद के प्यार
- 13:42की तरफ और कृष्ण की सुरीली वंशी मन मोहक आवाज़ की तरफ, गुंजार की
- 13:50तरफ। पथ वही है।
- 14:01तुम जीस नाम से समते हो वही बोल दूंगा मैं मुझे कोई फर्क नहीं
- 14:06पड़ता। मोहम्मद मोहम्मद नकर काची मोहम्मद
- 14:12का विषम विचार में। मोहम्मद के विषय को विचार कर
- 14:18मोहम्मद की तरफ यात्रा कर वो तुम्हारे अंत में बैठा है।
- 14:26वो कहीं बाहर दरगाह में नहीं है, वो कहीं बाहर अजमेर शरीफ में
- 14:33नहीं। और न मालेरकोटला में है, न किसी
- 14:40मस्जिद में है। तो गोरख कहते हैं वह तुम्हारे
- 14:46अंतः के प्राणों में छिपा है। गहरे से गहरे प्राणों में वही तो
- 14:54है, गहरे से गहरे प्राणों में छिपा है मोहम्मद मोहम्मद मोहम्मद
- 15:05का नाम मत ले, रेप्यूटेशन मत कर। यह मार्ग गलत है।
- 15:12सही मार्ग पे आजा मोहम्मद विषम वचारम मोहम्मद की तरफ यात्रा कर
- 15:19राधे राधे करने वालों से विजय कहूंगा पुनःरूक्ति मत करो, राम
- 15:26राम करने वालों से भी कहूंगा डू नॉट रिपीट।
- 15:31पुनरुक्ति मत करो, कृष्ण की तरफ निकलो, राधा की तरफ निकलो।
- 15:37राधा वो चेतना है जो आपके अंत में विद्यमान है।
- 15:41मोहम्मद वो चेतना है जो आपके अंतर्मम में विद्यमान है।
- 15:46उसका नाम कोई भी रखलो क्योंकि उसका कोई नाम है नहीं।
- 15:54जो खोज करते हैं, वैज्ञानिक बना खोज से पहले उसका नाम होता है
- 16:02इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन अब मैंने विभीषाग्रंथी की बात
- 16:08कही। जो अभी वैज्ञानिक ने खोजी नहीं,
- 16:12जब वो खोज ही जाएगी तो वो क्या नाम रखेंगे उनको पता है लेकिन
- 16:17मैंने जो प्रसिद्ध है उससे घरो का भी जीवन है।
- 16:23वहाँ पर उसे विभीषा ग्रंथि कहते हैं।
- 16:27विभीषा ग्रंथि अब साइंटिस्ट से क्या नाम देंगे?
- 16:34यह तो हो जाने तो इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन खोजे पहले गए
- 16:40नाम बाद में रखेगा यही कहते हैं गौरव।
- 16:47तुम नामों को मत दोहराओ, तुम हज की यात्रा पर निकल जाओ, तुम मकाबा
- 17:06की तरफ निकल जाओ, तुम मकाबा काबा मत करो, बैठ के।
- 17:11यात्रा भी निकल जाओ और अंत में जब तुम पाओगे पक्ष तो एक ही था राम
- 17:18का, राधा का मोहम्मद का, लेकिन मंजिल के नाम तुमने बदल लिए थे,
- 17:30मंजिल भी वो ही है। मोहम्मद आनंद का सागर है।
- 17:37कृष्ण भी आनंद का सागर है और राधा नाम की चेतना भी आनंद का सागर है।
- 17:44उसी आनंद के सागर की तलाश में मानवता जूझ रही है, भटक रही है।
- 17:50भाग रही है कहाँ कहाँ नहीं दौड़ रही क्या क्या प्रयास नहीं कर रही
- 17:56सब कुछ लुटा देता है व्यक्ति लेकिन अब सुनिए बात।
- 18:08मोहम्मद हाथ करद जे होती। जो मोहम्मद के हाथ में कर्ज है
- 18:16मोहम्मद के हाथ में जो छुरी है वह बकरीद पे बकरे का मेमना काटने के
- 18:23लिए। नहीं तो तुम अपने स्वाद के लिए
- 18:28काट दो, वो ऐश्वर्यवेद यज्ञ के लिए भी नहीं है, वो भैंसे की बलि
- 18:43देने के लिए भी नहीं है। वो पशु बलि के लिए भी नहीं है।
- 18:47नरमेद के लिए भी नहीं है। किसी वक्त नरमेद भी चलता था।
- 18:53किसी वक्त व्यक्ति की चेतना इतनी उलझी हुई थी कि वह व्यक्ति को नर
- 18:59को भी मेद देती थी। नरमेद यज्ञ फिर अशवमेद यज्ञ घोड़े
- 19:06को? अलग अलग पशुओं को बलि दिया।
- 19:17क्या आज भी यह बलि की प्रथा शुरू है?
- 19:24ध्यान रखना। मैं इस बलि की प्रथा को समाप्त कर
- 19:30दूंगा, समाप्त कर दूंगा नहीं जैसे मनुष्य की हत्या का परिणाम भुगतना
- 19:36पड़ता है, वैसे ही पशु की बलि का परिणाम मैं रख दूंगा कानूनन।
- 19:44अगर आजीवन कारावास तो पशु की बलि दोगे तो आधा कारावास, 10 साल का
- 19:53कारावास। तुम्हारे झगड़ों, झूठों से कुछ
- 20:00नहीं बढ़ने वाला। तुम्हारे हाथों में कानून है, तुम
- 20:05बना के उन्हें देते लेकिन क्या करें?
- 20:08हम तो खुद ही खाते हैं, ये क्या खा के बनाएगा कानून?
- 20:17ये छिप छिप के खुद ही खाते हैं। अभी मुक्तेश्वर आनंद कहते हैं कि
- 20:27गाय का वध समाप्त कर दो कानून अन्यथा हम बिहार में अपने
- 20:36प्रतियोगी खड़े कर देंगे। कर दो भाई किया तो एक भी नहीं।
- 20:46ऐसे नहीं गाय के वध समाप्त होगा जैसे तुम चाहते हो तुम बुर्ख हो,
- 20:55तुम्हें पता है कैसे बदली जाएगी व्यवस्था व्यवस्था भागीदारी होनी
- 21:00चाहिए। तुम्हारी सत्ता में फिर बदली जाती
- 21:03है। तुम लाख गाँधी की गलतियाँ गिना
- 21:09दो, आज गाँधी अपनी गलती गिना नहीं चला है गाँधी ने क्या गलती की, वो
- 21:18गाँधी ही जानता है। तुम नहीं जानते।
- 21:22गाँधी ने अपने जीवन की एक ही गलती की क्या गलती की?
- 21:31गाँधी को सत्ता संभाल लेनी चाहिए? तो बाद में ख्याल आया सत्ता से
- 21:37मांगना क्यों है? जब वो सत्ता हम संभालने के योग्य
- 21:43हैं और सारी जनता राजी है कौन विरोध करता बड़ी से बड़े भयंकर
- 21:51तुम गलती हो गई गाँधी। तुम गाँधी की लाख गलतियाँ बना दो,
- 22:00वह गलती थी ही नहीं जो तुमने खोज लेकिन गाँधी खुद ही जानते हैं
- 22:06उन्होंने क्या गलती की अगर गाँधी ने ये गलती ना की होती।
- 22:16जवाहरलाल की जगह खुद बैठे होते जवाहरलाल को कोई और कोई काम
- 22:25मंत्रालय तो है नहीं। बड़े अच्छे वक्ता थे, जवाहरलाल
- 22:28विदेश मंत्रालय संभाल सकते थे। शौकीन भी थे।
- 22:36जहाजों का सफर अच्छा लगता था। पटेल तो जीस काम के थे, पटेल को
- 22:43तो उसमें थे फिर 1948 मन का बद नहीं होता, ना गोडसे की फांसी
- 22:50होती ये सारी घटनाएं खत्म हो जाती।
- 22:54एक गलती नहीं। इन सब गलतियों को अंजाम दिया।
- 23:03अभी किसानों का आंदोलन चला। मेरी पैनी दृष्टि थी।
- 23:07जब भी कभी मैं अपने अंतश के रस को भी के बाहर आ जाता हूँ तो मैं
- 23:12देखता हूँ ठीक चल रहे थे बिल्कुल ठीक चल रहे थे।
- 23:16लेकिन अंतिम छोर पे आके नहीं जाने किसी ने गलत पाठ पढ़ाया।
- 23:22दारा ही मुड़ दिए। जीत के करीब नहीं थे, जीत गए थे
- 23:33सरकार से क्यों कहते हो तुम? एमएसपी का कानून बनाओ, तुम सरकार
- 23:41ही क्यों नहीं बन जाती? मुझे ऐसी ही उम्मीद थी।
- 23:51यह जीत तो गए। मुझे कई दिन पहले समझा गया था कि
- 23:59जीत गए, लेकिन फिर कौन ऐसा व्यक्ति आया जिसने इस धारा का
- 24:05प्रवाह ही मुड़ दिया? निश्चित रूप से सत्ता तो नहीं थी,
- 24:10सत्ता का तो ख्वाबों ख्याल भी नहीं था।
- 24:14कि ये धारा मोड़ी भी जा सकती है। सत्ता ने पहले प्रयास कर दिए थे,
- 24:20फिर कौन था वह? कोई भीतर का जयचंद ही था।
- 24:28मैं अभी नाम नहीं बनूँगा उसका। जिसने किसानों के इतने ही शानदार
- 24:36ज़िन्दगी में कभी कभी इतना गहन आंदोलन हुआ करता है और वह बेला
- 24:45थी, अब बार बार नहीं होती, विकास में रुकावटें पड़ती हैं।
- 24:51हिंदुस्तान ठहर गया था। रोज़ रोज़ ऐसे आंदोलन न चलाए जाते
- 24:58हैं और न ही कामयाब होते हैं। बिल्कुल पीठ के ऊपर था किसान
- 25:04आंदोलन बस जीत गए थे समझो। गलती क्या हो गई?
- 25:11गलती ये हो गई क्या गलती हो गई? अब तुम सोचोगे क्या करना चाहिए
- 25:22था। उस वक्त उस वक्त ये मान करनी
- 25:27चाहिए थी कि संसद को बंद करो। वो कहते हैं, हमें तो चुना है तो
- 25:38चुना हमने ही है साहेब चुना हमने ही है, अगर चुना है तो तुमने वादे
- 25:49भी किये हैं। अगर चुना है तो तुमने वैद्य भी
- 25:56किया 2,00,00,000 रोजगार दूंगा, 15,00,000 हर के हिस्से में आ
- 26:05जाएंगे। काला धन वापस आ जाएगा, अच्छे धन
- 26:11आएँगे। किसानों की आयु दुगनी होगी।
- 26:19अगर चूना था तो किसी कारण से चूना था।
- 26:22भाई वो कारण तुम काहे भूल गए हो? करो।
- 26:32लोकसभा को अगर उस वक्त नेतृत्व मेरे हाथ में हो तो?
- 26:43लेकिन मैं मेरे को। क्योंकि मैं अध्यात्म की यात्रा
- 26:51पर चल रहा था। एक व्यक्ति एक वक्त में एक ही काम
- 26:55कर सकता है। अब तो मैंने आध्यात्मिकता का काम
- 26:59मेरा ग्रंथ पूरा हो गया है, मैं शोक से करता हूँ।
- 27:06जब कोई ऐसा प्रश्न आ जाए, मुझे लाजवाब लगता है तो उसका उत्तर
- 27:11देता हूँ, लेकिन तब मेरी मजबूरी थी तब मेरा बोलना अभी बाकी था।
- 27:232020 का यह वो समय था जब मुझे बाबा ने हुक्म दिया कि बोलो
- 27:29अध्यात्म भीषण संकट था, फंस गया मैं दोनों और।
- 27:41एक तरफ अध्यात्म की व्याख्या और अध्यात्म जितना गहरा है, आप अच्छी
- 27:50तरह से जानते हो। अध्यात्म तो ऐसा है कि आपका एक
- 27:58भी। एक भी तत्व आपका कहीं और नहीं
- 28:04भटकना चाहिए। ऐसा चित निर्मल और शुद्ध हो।
- 28:09फिर जातियों की व्याख्या हो सकती है और नवंबर के करीब।
- 28:17आंदोलन शुरू हुआ। 20 में 13 महीनों के बाद जब पीक
- 28:27पॉइंट पे पहुंचा किसान जीत गए थे। लेकिन किसी दुष्ट व्यक्ति की नजर
- 28:41रख गई, उसने व्यवधान रख दिया, वह भी मारा तो क्या?
- 28:56लेकिन वह काम जो सरकार करना चाहती थी।
- 29:00यह उस व्यक्ति ने कर दिया लेकिन उस वक्त भी मैं बोल रहा था मैं तो
- 29:14उसके बाद आज तक बोल रहा हूँ। मैंने तो अभी पिछले कुछ ही दिनों
- 29:20में अपना ग्रहण समाप्त किया तो मेरी मजबूरी थी।
- 29:28अन्यथा अगर मैं कमान संभाल लेता हूँ तो हम जीत चूके थे, हम क्या
- 29:36करते क्या न करते ये बातें अतीत की बातें दफन हो जानी चाहिए।
- 29:46कब्रों में नहीं उगाड़ नहीं चाहिए क्योंकि मैंने अगर कुछ बोला तो वह
- 29:55आपकी समझ में आ जाएगी। बात लेकिन अब मैं कोई राड़ छेड़ना
- 30:00नहीं चाहता, इतना अवश्य कहूंगा। किसानों ने मोर्चा फते कर लिया और
- 30:09वहाँ से एक समझाई बात की कि किसान जब चाहे मोर्चा फते कर सकते हैं
- 30:16और मैं किसान भाइयों से यूनाइट होने की अपील करूँगा।
- 30:22विदाउट। एनी डिफरेंस?
- 30:25अपने सब मतभेद भूल के यूनाइटेड हो जाओ, प्रत्येक वर्ग में सबसे
- 30:35ज्यादा मेहनत करने वाले तुम लोग। और मैं सत्यनिष्ठ व्यक्ति हूँ,
- 30:45यहाँ तक सत्यनिष्ठ हूँ की शराब की बात तो छोड़ो, मैं अन्न तक भी
- 30:53नहीं खाता। जो लोग कहते थे आप दूध पीते हो?
- 31:02दूत ओशो ने कहा कि यह तो मांसाहारी है।
- 31:07मैंने कहा कोई बात नहीं। ओशो से बड़ा मूर्ख और कौन धरती पे
- 31:13पैदा होगा? बहुत से मामलों में ओशो महा मूर्ख
- 31:19है। उन्हें ऐसी बातों पर बोलना ही
- 31:24नहीं चाहिए। चुप हो जाते हो अवश्य ये हर बात
- 31:30में टांग नहीं होती है, कह देते है की नहीं बोलेंगे?
- 31:39क्या वो सुना कभी दूध नहीं पिया लेकिन तर्क कैसे देते हैं?
- 31:48क्या आप गाय भैस का दूध चौते हो तो मैं आपसे पूछता हूँ जो गाय 40
- 31:54किलो दूध देती है? क्या वो बछड़ा पी सकता है?
- 31:5740 किलो मुझे इस बात का जवाब दे दो तर्कवादियो तर्कवादियो ओशो के
- 32:06शिशों मुझे इस बात का जवाब दे 240 किलो दूध देने वाली गहु।
- 32:13क्या बछड़ा 40 किलो दूध पी सकता है?
- 32:17तो कैसे बछड़े के लिए दिया गया वो दूध जब पी ही नहीं सकता तो जो
- 32:27व्यक्ति उसकी सेवा करता है, संभल करता है, सुसक्सा करता है उसको?
- 32:34वह पशु है पाश में बंधा हुआ है तो जो उसे पालता है वो उसको हत्या
- 32:45नहीं कर रहा। तुम ज़रा देखो उसको कहते हैं कि
- 32:50दूध पीने वाला व्यक्ति माशाहार होता है तो ज़रा देखो यही व्यक्ति
- 32:57कृष्ण पे भी बोल रहा है और कृष्ण तो खाते ही घी, मक्खन दूध है, दूध
- 33:06नहीं, घी, मक्खन ही तो उनका प्रिय आहार है।
- 33:09और यहाँ तक छोड़ो, वो तो खुद ही अपने गाय पालते हैं, उनका नाम ही
- 33:16गवाला है, गोपाल है गऊ को पालने वाला मुझे लोग कह देते हैं बाबा
- 33:28आप दूध पीते हो, दूध तो मांसाहारी है।
- 33:31तो मैंने कहा फिर ये समझ लो कि मैं मांसाहारी करता हूँ मुझे क्या
- 33:42इसमें आपत्ति है? ज़रा भी आपत्ति में मैं दूध पीता
- 33:47हूँ और दूध पीना मांसाहारी है तो मैं ठीक है, मांसाहारी करता हूँ।
- 33:53लेकिन आपके कहने से छोडूंगा, मैं क्यों?
- 33:59क्योंकि इसी पर मेरा आधार टिका है।
- 34:03तुम लाख चिल्लाते रहो। लेकिन कृष्ण की व्यवस्था इतनी
- 34:11शानदार थी तो मैं उससे सीखना चाहिए।
- 34:19मेरी सत्ता आते ही मैं उन लोगों को पुरस्कृत करूँगा।
- 34:27देखिये सत्ता आते ही धन की बराबरी तो खत्म।
- 34:34धन की असमानता समाप्त, धन की बराबरी का प्रयास समाप्त तो फिर
- 34:45क्या रह जाएगा? फिर व्यक्ति ऊँचा नीचा कैसे होगा
- 34:48ऊँचा नीचा तो फिर भी होगा। ओह दो से तारीफों से पुरस्कार से
- 35:02कोई वासु होगा तो कोई पीएनपी होगा, कोई लेखाकार भी होगा।
- 35:10कोई कोषाध्यक्ष भी होगा। सब के काम अलग अलग होंगे, फिर आप
- 35:19उनको ही छोटा बड़ा मानना शुरू कर दोगे।
- 35:26आज धन मुख्य रूप से है। फिर धन जब बराबर हो गया।
- 35:30तो फिर तुम ऐसे छोटा बड़ा मानोगे? इसको भारत रत्न का खिताब मिला।
- 35:36इसको पद्मश्री मिला। इसको पद्म विभूषण मिला, इसको
- 35:39पद्मभूषण मिला। हम उस व्यक्ति को सम्मानित
- 35:43करेंगे। यह व्यक्ति गौ को पालेगा।
- 35:52तो मैं शायद पता न हो, मैंने थोड़ी देर अर्थ का काम भी किया
- 35:56है। कमिशन और हम जब बेल बनाते थे उसके
- 36:02पीछे गऊशाला की पर्ची लगते थे। कुछ रुपए गऊशाला को दान देने ही
- 36:11पड़ते थे अनिवार्य था। यह एक अपूर्ण था उन गऊ के लिए जो
- 36:18लावारिस से छोड़ दी गई उनके बच्चों के लिए जिनका आज कोई काम
- 36:25नहीं है ट्रैक्टर के इस जमाने में।
- 36:28बैलों का क्या काम है? सांडों का क्या काम है?
- 36:31बैलों का क्या काम है? कल ही मुझे एक सुझाव आया कि बाबा
- 36:45आप रेप के व्यक्तियों को रेप के अभियुक्तों को खस्सी कर दो, उनके
- 36:54कोष निकाल दो। मैंने कहा, मूर्ख उसने अंड कोष से
- 37:01काम थोड़ी लिया है। उसने यौन अंगों से दुष्कर्म किया
- 37:08है और जीस अंग से दुष्कर्म किया है।
- 37:10हमको काट देंगे। सिर्फ खस्सी कर देने से सांड को
- 37:16बैल बना देने से नहीं चलेगा काम, सारा युनंग ये काट देंगे साथ में
- 37:25टेस्ट भी जाएंगे और साथ में उसका औजार भी जाएगा।
- 37:33अभी ये जो अंकिता भंडारी का उपद्रव चल रहा है, ये जानबूझ के
- 37:41नहीं हल कर पाते है। जानबूझ के क्या करती है?
- 37:51जीस व्यक्ति ने अपराध किया, वह कैबिनेट में क्यों बना हुआ है?
- 37:57क्या फिर भी तुम उसे वोट दोगे? हाँ कहते हैं, हम तो उसी को वोट
- 38:03देंगे तो फिर कुछ घुसेड़ दिया गया है ना धमाके में जो उससे भी
- 38:09ज्यादा प्रबल है। तो देखो बिल्कुल ठीक है तुम्हारी
- 38:15बात, मैं तुम्हारी इच्छा एक क्षण में पूरी कर सकता हूँ, लेकिन याद
- 38:21रखना तुम अंधभक्त 10 साल में तुम्हारा दिमाग ठिकाने आ जाए।
- 38:29मैं परिणाम भी जानता हूँ। मन्नू स्मृति को लागू करने का
- 38:34परिणाम क्या होगा? अच्छी तरह से जानता हूँ लेकिन मैं
- 38:38तुम्हें हिंदू राष्ट्र देके उसके बाद बात करूँगा, समझे नहीं समझे?
- 38:46और भी दुख हैं जमाने में मोहब्बत के समय।
- 38:51फिर सिखों को काली स्थान भी दे दूंगा।
- 38:55फिर बौद्धों को बौद्ध स्थान भी दे दूंगा।
- 38:57क्या ऐतराज़ अकेले हिंदू ही थोड़े ही रह रहे हैं?
- 39:02यहाँ भाई जो कहते हैं कि हम नहीं हैं हिंदू, सिख एक अरब को हम।
- 39:11कब से अनंतपुर साहब का मत कब से पास हुआ है, कब से पास हुआ है,
- 39:19बताओ तुम हिंदू राष्ट्र की मांग कर सकते हो।
- 39:23संविधान के तहत तो संविधान के तहत यूएपीए कैसे लगेगा?
- 39:29खालिस्तान की मांग करने वालों पर मेरी सत्ता आने के बाद अगर तुम
- 39:39चाहोगे हिंदू राष्ट्र बनाना तो मैं तुम्हें हिंदू राष्ट्र दे
- 39:43दूंगा, लेकिन अनुपात में दो दूंगा।
- 39:49मैं संख्या लूँगा और तुम देखना दलित स्थान सबसे बड़ा संख्या लेके
- 39:54जाएगा दलित स्थान तुम्हारे भू भाग का थ्री फोर्थ ले जाएगा क्योंकि
- 40:01है वो। तुम्हें शर्म तो नहीं आती लेकिन
- 40:12शर्म मैं दिला देता हूँ वक्त वक्त में दलित स्थान भी दूंगा, फिर
- 40:24बौद्ध स्थान भी दूंगा, जैन स्थान भी दूंगा।
- 40:28फिर तुम बाद में कहीं मर्जो होना है हो जाओ लेकिन एक बार इस राड को
- 40:33खत्म करो ताकि ये मूर्ख बंदे राज़ न कर सकें मैं तुम्हारे हिंदू
- 40:44राष्ट्र की कामना। तुम्हारा क्या है?
- 40:49तुम्हारी इच्छा तो ये भी हो सकती है के पाकिस्तान, बांग्लादेश सबको
- 40:54हिंदू राष्ट्र घोषित कर दो। तुम तो कहोगे वसुधै का कुटुंबकम
- 40:58वसुधा को ही हिंदू राष्ट्र घोषित कर दो।
- 41:06तो क्या वह ट्रंप होने देगा? उसने वेन्ज वाला को उठा लिया, वो
- 41:11तुमको भी उठवा लेगा। तुम कोई बहुत बड़े नहीं हो उसके
- 41:16लिए। जो सरकार पाकिस्तान के बीच में
- 41:22जाकर लादेन बिन लादेन को मार सकती है, उसके लिए तुम्हें उठाना क्या
- 41:29मुश्किल है? तुम्हारे भी तो बहुत से लोग बोल
- 41:36रहे हैं उनके पास। और तुम्हें उठा के बाद में कह दे
- 41:42कि यह व्यक्ति के भीतर ये यह रूप बोल से और मैं कौन सा नहीं जानती?
- 41:48बस ये गनीमत समझो कि मैं बोलता नहीं बोलेंगे बेटा मैं दूसरा शुभम
- 41:57मन में स्वामी हूँ। मैं सुब्रह्मण्यम स्वामी से
- 42:00ज्यादा जानता हूँ क्योंकि मैं त्रिका और दर्शन त्रिका लग गया
- 42:07हूँ, मुझे डॉग पूछ लेते हैं, फिर त्रिका लग गया हूँ तो फिर सभी
- 42:14बातें बाबा से क्यों नहीं पूछ लेते?
- 42:18इस बात का जवाब मैंने बहुत पहले से दिया।
- 42:231500 घड़ियाँ मिलती है हमें तीसरे नेत्र से झाँकने के लिए और
- 42:29घड़ियाँ करीब करीब समाप्त होने के कवार पे कुछ 150 घड़ियाँ बची हैं।
- 42:38क्या मैं इसी काम में समाप्त कर दूँ?
- 42:41कौन कब आया था, क्यों आया था, किस लिए आया था?
- 42:45ये बहुत वृहद काम बहुत वृहद समस्याएं भी आ सकती हैं।
- 42:49तो उन समस्याओं में फिर मैं क्या करूँगा?
- 42:51पल्ला गाढ़ के बैठ जाऊंगा। ऐसी ऐसी मूर्खता की बातें तुम कर
- 42:57तो सकते हो क्योंकि मूर्ख हो लेकिन मैं करूँगा नहीं ऐसा मैंने
- 43:04सदा ही अपनी शक्ति ठीक बात पे लगाई है मैंने जो चीज़ एआई से
- 43:11पूछी जा सकती थी। और तीसरे नेत्र से पूछना गवारा
- 43:17नहीं समझा। मैंने जो बात किसी मास्टर से पूछी
- 43:25जा सकती थी, वो मैंने एआई से पूछी या किसी से पूछी?
- 43:31मैंने अपने अंतर से नहीं पूछा, ना ही तीसरे नेत्र से पूछ के ज़रा
- 43:38सोचो क्या आप सब्जी लाने के लिए अपना लाकर खुला करते हो?
- 43:44जिसमे सोना पड़ा है, खोलते हो क्या नहीं क्यों नहीं खोलते?
- 43:53बाहर बाहर से काम चल जाए। लोकर का जो धन संपत्ति है वह बड़ी
- 43:59संकट वेला के लिए रखा गया है। यह 1500 घड़ियाँ जो 600 घंटा
- 44:06मिलता है। यह बहुत संकट कालीन अवस्था में
- 44:12पूछे जाने वाली घड़ियाँ हैं। जब ऐसा संकट आ जाए, तुम्हें कहीं
- 44:16से कोई समाधान न मिले तब अपने भीतर उतरो, तब इस वक्त का लाभ सही
- 44:31होता है। उत्तरकालिक है तुम तीसरा नेत्र भी
- 44:39खुला हुआ है, लेकिन ध्यान रखना तीसरे नृत्य की मर्यादा मैंने
- 44:46पहले समझा रखी है कि 600 घंटे मिलते हैं।
- 44:531500 घड़ियाँ मिलती हैं और वह मैं खर्च कर चुका हूँ।
- 44:58करीब करीब अब कुछ ही घड़ियाँ बाकी बची हैं।
- 45:07वो वक्त बीत गए जब की बातें मैं बताया करता हूँ तुम चैलेंज आज
- 45:11करते हो। मंगाओ लड्डू भाई मंगारे से किसी
- 45:16वक़्त अब लड्डू मंगाने में ही सारी शक्ति खत्म कर दूंगा मैं उस
- 45:22वक्त मैं थोड़ा हूँ रख पिता मोहम्मद मोहम्मद नकर काजी।
- 45:38मोहम्मद का विषम विचार मोहम्मद की तरफ यात्रा कर मोहम्मद मोहम्मद का
- 45:49नाम मत जप रेपेटिशन मत कर। अब ज़रा सोचो का जी तुम मोहम्मद
- 45:57मोहम्मद करते रहोगे मोहम्मद तो चेतना है वो तो तुम्हारा अंतर
- 46:02स्वरूप है अरे तुम सेब सेब करते हो?
- 46:08तुम खजूर खजूर करते हो क्या खजूर, खजूर या सेब सेब करने से?
- 46:15वृक्ष फल को झाड़ के आपकी झोली में गिरा देता है।
- 46:19नहीं, खजूर को तोड़ने के लिए उस वृक्ष के ऊपर चढ़ना पड़ता है।
- 46:31फिर खजूर को दौड़ना पड़ता है। सेब को तोड़ना पड़ता है, लाना
- 46:35पड़ता है वही यात्रा यही भी है लम्बा पेड़, खजूर चढ़े तो चाखे,
- 46:45प्रेम रस गिरे तो चक न छूट। अगर वो प्रेम रस रखना चाहते हो तो
- 46:55मोहम्मद मोहम्मद करो, मत मोहम्मद की यात्रा पे निकलो और मोहम्मद की
- 47:00यात्रा पे तुम निकल पाए निकलते क्यों नहीं बड़ा सुन्दर शब्द है
- 47:05ये गौर के शब्द बड़े प्यार है इसीलिए मैंने बिल्कुल अंत में
- 47:10लिया। तुम चढ़ते क्यों नहीं खुजूर के
- 47:18वृक्ष पर खुजूर चढ़ के तोड़ के क्यों नहीं खा लेते?
- 47:23क्यों नहीं आम के वृक्ष पर हाँ क्षमा करो सेब के वृक्ष पर सेब।
- 47:32आम क्यों नहीं तोड़ लाते तुम? क्योंकि उसमें तुम्हारा प्रयास
- 47:38लगेगा, जो बलि देनी होती है वह ही देनी होती है।
- 47:48तो आगे बड़ा सुन्दर शब्द लिखते हैं, गौरख मोहम्मद हाथ कर दीजिए
- 47:56होती लोहे चढ़ी नसार मोहम्मद के हाथ में जो तलवार दिखाते हो ना।
- 48:07उसे कर्ज कहते हैं मोहम्मद हाथ कर्ज न होती, लोहे छड़ी न सर वह
- 48:19बकरे की मैं अपने की बलि देने के लिए नहीं, वह किसी की आहूति नहीं
- 48:26मांगती। और क्या मांगती है वह तुम्हारी ही
- 48:29होती मांगती है उससे तुमने बकरी तो मनाली बकरे का मेमने का कतल कर
- 48:39दिया कोई लफा सा बकरा का बच्चा खरीद लिया पैसे से?
- 48:45और उसको हलाल कर दिया कल में पड़ पड़ के हलाल कर देते हो आप?
- 48:53लेकिन उसके पीछे की मंतव्य क्या है?
- 48:58मनुष्य क्या है तुम्हारी वही तो काम करती है सही अन्यथा ये बकरा?
- 49:05यह मेमना हलाल न होता, तुम्हारी मंशा है खुद स्वाद चखने की।
- 49:14हम गौरव कहते हैं, इस स्वाद को चखने के लिए तुम क्या क्या धर्म
- 49:19के सहारे नहीं लेते। हिंदू धर्म खतरे में?
- 49:25तुम क्या क्या सहारे नहीं लेते तुम ऊंट पटांग बातों का सहारा
- 49:39लेते हो, जिनमें कोई तंत्र और तत्व की बात ही नहीं है।
- 49:46मोहम्मद हाथ करम क़र्द जो होते हैं।
- 49:50जो हाथ में तलवार दिखाते हैं मोहम्मद के वह किसी को मारने के
- 49:57लिए नहीं, वह कर्ज किसलिए? वो कर्ज है सूचना।
- 50:08एक सिम्बोलिक अब्रीविएशन एक सिम्बोलिक रीफ्रिजेंटेशन एक
- 50:16प्रतीकात्मक किचन प्रतीकात्मक किचन किस चीज़ का आहूत कर दो
- 50:24किसको बकरे के माम्? अपने ईगो को अपने ही बनाए हुए
- 50:36इमेटेट इल्यूज़न को मैं कौन हूँ? यह जानकर तुम अपनी ही गर्दन को
- 50:47काट लो। बड़े मज़े की बात है, ज्ञानो के
- 50:53भी तुम के मैं कौन प्रयास भी तुमने किया कि मैं कौन और कटेगी
- 51:00भी तुम्हारी गर्दन, ये है आत्महत्या।
- 51:06तुम शरीर को मारकर तो दूसरे की ऐसा करते हो क्योंकि शरीर तुम हो
- 51:10ही नहीं, शरीर तो दूसरा है। यह तो एक उपकरण है।
- 51:18यह तो एक गढ़ाहुआ परमात्मा का संयंत्र है।
- 51:22यह यंत्र की भाँति काम करता है। यह तुम थोड़ी हो, यह तो दूसरा है
- 51:29मोहम्मद हाथ कर दिजे होती लोहे छड़ी न सारम यह घड़ी लिखा है गलती
- 51:35से लिखे का होगा यह छड़ी शब्द है, लोहे छड़ी न सारम।
- 51:43क्योंकि घड़ी तो उस वक्त होती नहीं है।
- 51:47घड़ी तो वक्त का एक पैमाना है। लोहे छड़ी न सार।
- 52:01यह तलवार जो है ये प्रतीकात्मक वचन है सिम्बोलिक अब्रीविएशन है
- 52:10किस लिए हाथ में दिया गया इससे अपनी ही गर्दन का?
- 52:24जेतों प्रेम मिलन की जा। प्रेम मिलन की चा शी तलीधर शी
- 52:57तलीधर। सीस तलीधर घर।
- 53:04मिर आं? हो, मुझे तो प्रेम मिलन की जा।
- 53:21यह जो तलवार है मोहम्मद के हाथ में यह बकरीद मनाने के लिए नहीं
- 53:27है ये हलाक कर दे अपना खुद का बनाया हुआ।
- 53:36स्वयं से निर्मित बनाया हुआ अहंकार ईगो को खत्म कर दे, यह
- 53:43परमात्मा ने नहीं बनाया। एक ही चीज़ परमात्मा ने नहीं
- 53:48बनाई, वो है ईगो, वो है अहंकार, वो तुम्हारी क्रिएशन है।
- 53:54बस तुम अपनी क्रिएशन को समाप्त कर दे, परमात्मा की बनाई क्रिएशन को
- 53:58समाप्त न करो, ये शरीर तो परमात्मा ने बनाया है, इसमें ज़रा
- 54:05भी तो तुम्हारा कुछ नहीं बता दो। अगर कुछ हो तो स्वरत्न से लेकर।
- 54:13अडानों से लेकर भोजन खाते हो, इतने बड़े हो जाते हो, तुम्हारा
- 54:21क्या है वायु तुम्हारी है, जिसके बिना तुम नहीं रह सकते या पेड़
- 54:26पौधे तुम्हारे हैं, जो वायु को साफ करते हैं या ये भोजन तुम्हारा
- 54:33है। जो सूरज की फोटान से ग्लोर फील
- 54:37बनाते हैं। क्या है तुम्हारा जो तुमने पैदा
- 54:41किया था तो गौरव कहते हैं कि तुम्हारा बनाया हुआ एक ही है।
- 54:52बाकी सब परमात्मा ने बनाया। तुम्हारा जो बनाया हुआ है उसको
- 54:57खाक कर दो इस तलवार से उसको काट दो यह एक वैसे रामकृष्णा परमहंस
- 55:08को मैंने कहानी बहुत बार समझाई। जब तोतापुरी कहने लगे कि अब बता
- 55:19कौन आ गया तेरे सामने कहता माता आ गई, माता आ गई, कहता हाँ आ गई
- 55:26प्रणाम करता हूँ हे माँ, हे जगत जननी माँ।
- 55:30तो मैं प्रणाम करता हूँ, वो कहता है परिणाम को छोड़ तो इसकी गर्दन
- 55:35उतार दे, गर्दन उतार दे उससे पहले बहुत बार लाचार हो के वापस आया था
- 55:45और सुबह जाना था तोतापुरी ने। उसने कहा अंतिम प्रयास अगर तू आज
- 55:55चूक गया तो कल सुबह मैं चला जाऊंगा, कल तेरी बस में से
- 56:05दीवाना। चला जाएगा शम्मर जाएगी, परवाना
- 56:18चला जाएगा कल तेरी बज़म से दीवाना चला जाएगा।
- 56:26क्षमा रह जाएगी, परवाना चला जाएगा आज की रात मेरे दिल की सलामी ले
- 56:32लें तू अगर पहुंचना चाहता है निर्भिकल्प समाधि में तो हे गदाधर
- 56:42हे रामकृष्णा पर मान। तो अभी से विकल्प समाधि में है,
- 56:47तो निर्विकल्प समाधि में नहीं और वहाँ तो बड़ा आनंद है, वहाँ भाग
- 56:55नहीं है अभी तू भाभाविष से युक्त है।
- 57:02अभी तू भाभा वेश के प्रेम और वत्सल्य से युक्त है।
- 57:09आ तुझे असली मंजिल पे ले चलो जिस्म दिन भर रात चौबीसों घंटे
- 57:18में। आनंद में छलांगें लगाता हूँ,
- 57:20नहाता हूँ मल मल के उस तीर तो राम किशन पर मनस ने जब तोतापुरी की
- 57:30नुहार देखी तो चक की तरह गया। तोतापुरी से पूछने लगा तुम ये
- 57:37लुत्फ। दिन भर रात कहीं जाते है नहीं ये
- 57:43क्या है और तुम्हारे बोलने का अंदाज तुम्हारी चाल ढाल कुछ बताती
- 57:53है कि निराला फिर ये क्या है? तोतापुरी ने कहा, यह निर्विकल्प
- 58:01समाधि है, तो रामकृष्णा का फिर मैं किस हाल में हूँ?
- 58:07कहते तुम अभी सविकल्प समाधि में हो, तो फिर क्या इससे आगे भी कोई
- 58:14होता है? हाँ होता है।
- 58:18तो क्या मैं वहाँ जा सकता हूँ? हाँ, बिल्कुल जा सकते हो वह क्या
- 58:22होता है, वह निर्विकल्प समाधि होती है, तो ठीक है, मुझे ले चलो
- 58:30तो ठीक है, चलो छह सात बार प्रयास किया।
- 58:37लेकिन ना कामयाब रहा अंतिम भक्त है सोतापुरी ने कहा संभल जा कल
- 58:45मैं चला जाऊंगा, तलवार उठा और माता की गर्दन काट दे माता तेरी
- 58:53कल्पना है तेरा दर्शन नहीं है। क्या बात है माता तेरी कल्पना है
- 59:05अच्छे दिन भी तुम्हारी कल्पना है ये सब जो भाग जो तुम दिखाते हो
- 59:12लोगों को। ये सब तुम्हारी कल्पना ही हैं
- 59:16यथार्थ इसमें कुछ भी नहीं ये तुम्हारे आंकड़े झूठे हैं ये
- 59:24तुम्हारे चौथे नंबर पे आ जाना। यह एक पाखंड हैं लोगों को लुभाने
- 59:33का। ज़रा बताओ तो मैंने पहले भी कहा
- 59:40था एक घर में दो व्यक्ति रहते हैं और उनकी कुल संपत्ति।
- 59:53जैसे तुम जीडीपी कैसे हो? वह ₹5,00,000 है, व्यक्ति दो रहते
- 1:00:04हैं, उसकी संपत्ति ₹5,00,000 महीना।
- 1:00:16और तुम्हारी संपत्ति ₹7,00,000 बिलकुल तुम जापान से आगे निकल गए,
- 1:00:27लेकिन वो लोग हैं दो। उनकी संपत्ति है ₹5,00,000 महीना,
- 1:00:33आमदनी और तुम्हारी आमदनी है ₹7,00,000 महीना वो हैं दो और तुम
- 1:00:44हो 2,00,000 फिर अमीर कौन हुआ बताओ मुझे?
- 1:00:49अंत भक्तो मंद बुद्धियो दिमाग लगाओ, सरल शब्दों में बोला जीडीपी
- 1:00:56का रस निकाल के बोला नहीं, चोट निकाल के बोला वो बंदे हैं दो
- 1:01:03उनके पास आता है ₹5,00,000 में। तुम्हारे पास आता है ₹7,00,000
- 1:01:11में ये जीडीपी है तुम बंदे हो 2,00,000 तो खुशहाल कौन है?
- 1:01:24बताओ ये झूठे आंकड़े हैं भाई तुम्हारे?
- 1:01:32तुम कहते हो हमने 5,00,000 को क्रॉस कर दिया, बिलकुल कर दिया।
- 1:01:36यह है सत्य लेकिन तुम कहते हो कि हम खुशहाल हो गए, यह गलत है,
- 1:01:45खुशहाल तो पुत्र मैं बनूँगा मोदी जी।
- 1:01:52जितनी सुंदर जागते डालनी है डाल लो, कपड़े छह बार बदलते हो।
- 1:01:5712 बार बदलना शुरू कर 2 दिन ही थोड़े रह गए हैं।
- 1:02:04बतलो कहीं मन में न रह जाए। क्या हमने ये तो जीडीपी लो जीडीपी
- 1:02:16को मैंने बड़े सहज शब्दों से भी हम जापान से आगे निकल गए और
- 1:02:23जर्मनी से भी आगे निकल जाएंगे। जर्मनी की संख्या कितनी जर्मनी की
- 1:02:28संख्या कितनी है बताओ? अब समझिए ठीक से बात जापान का
- 1:02:35जीडीपी 452 ट्रिलियन डॉलर और आबादी 12,00,00,000।
- 1:02:52आबादी 12,00,00,000 जर्मनी का जीडीपी 455 अंदाजा 100 1000
- 1:03:00ट्रिलियन डॉलर और आबादी 83 से 84,00,000।
- 1:03:111,00,00,000 भी नहीं और हिंदुस्तान के अगर तुमने जापान को
- 1:03:20क्रॉस कर दिया। 4.2 से ₹4.5 भी आ गए।
- 1:03:26मैं कहता हूँ पांच पर भी आ गए, पांच पर भी आ गए तो उसकी आबादी तो
- 1:03:3712,00,00,000 है। और जर्मनी को आप क्रॉस करोगे,
- 1:03:40जिसकी आबादी 83 84,00,000 है। 1,00,00,000 भी नहीं और आपके है
- 1:03:46140,00,00,100 46,00,00,146 करोड़ के पास इनकम है।
- 1:03:58अब तुम्हें शर्म नहीं आती है? जीडीपी का आंकड़े देते हैं।
- 1:04:02कैसे देश को बुद्धू बनाते हो? तुम एक घर में रहते हैं दो लोग और
- 1:04:13एक घर में रहते हैं 2,00,000 लोग। तो उस घर के पास जिसमे दो लोग है
- 1:04:23उसकी ₹5,00,000 एअर्निंग है और जिसमे 2,00,000 रहते है उसमें
- 1:04:347,00,000 की इन्कम है तो कौन सेट हुआ?
- 1:04:41थोड़ा दिमाग मंद बुद्धि हो, थोड़ा दिमाग लगाया हो, तुम्हारे लोग
- 1:04:51भूखे मरेंगे, वो लोग मज़े करेंगे क्योंकि बंदे दो हैं रुपए है उनके
- 1:04:58पास 5,00,000। तुम बंदे 2,00,000 हो, रुपए हैं
- 1:05:05तुम्हारे पास 7,00,000, तुम लड़ लड़ के मरोगे, यद्यपि अमीर हूँ,
- 1:05:11पैसा ज्यादा है, उसके पास पांच हैं, आपके पास साथ हैं, तो क्या
- 1:05:16अमीर हो गया? अरे खाने वाले कितने है भाई?
- 1:05:20उसके पास खाने वाले दो है, आपके पास 2,00,000 है, फिर कैसे बराबरी
- 1:05:26करोगे? जर्मनी की जनसंख्या लाखों में है
- 1:05:33और आपकी जनसंख्या अरब के पास अरब से पार चली है।
- 1:05:40ये झूठे आंकड़े दिखा के देश को भ्रम में नहीं डाल रहे तो और क्या
- 1:05:44कर रहे? ये भी तो बता दिया करो कि हम खाने
- 1:05:52वाले इतने हैं। जीडीपी तो बढ़ गए।
- 1:05:55ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्शन तो भरते है लेकिन खाने वाले कितने हो
- 1:06:02तुम? आमदनी तो बढ़ गई ठीक है क्या
- 1:06:09तुमने भझंडे का किला जीत लिया? बस ऐसी ही बातें करने वाले लोग
- 1:06:15हैं। ऐसे आपको बुद्धू बनाया जाता है।
- 1:06:25इस फेक हमारा शेयर बाजार बिलकुल फेक है।
- 1:06:34मैंने पहले लिखा था शेयर बाजार में पैसे मत रुकाओ।
- 1:06:37और शेयर बाजार में जो पैसा लगाता है, शेयर बाजार में जो पैसा लगाता
- 1:06:43है, जब शेयर बाजार डाउन होता है, अपनी छबी को बचाने के लिए वो कौन
- 1:06:49लगाता है? दो संस्थाओं एसबीआइ और एलआइसी
- 1:06:52इसमें भी पैसे मत लगाओ। क्योंकि इट एस फेक टोटली फेक इनसे
- 1:07:02पूछो आंकड़े क्या कहाँ लगाया है पैसा हुआ।
- 1:07:15तो काहे रखो मुझसे लोग पूछ लेते हैं कि फिर बाबा क्या करें?
- 1:07:21मैंने बहुत पहले कहा था जब सोना 60 के करीब था।
- 1:07:2960,000 के करीब। मैंने कहा छोड़ो इस शेयर को ये तो
- 1:07:38गोरखधंधा है। अभी गोरख का वज़न चल रहा है।
- 1:07:44ये गोरखधंधा है। ये तुम समझे न पोग यहाँ पर तो गलत
- 1:07:51लोग का भी है। जब चाहे उठा दें जब चाहे करा दें
- 1:07:58फिर इस गोरखधंधे से बाहर जाओ, कहाँ लगाएं पैसा?
- 1:08:06मैंने कहा तुम सो नो। भाग था उस वक्त 60 यार मेरी
- 1:08:11रिकॉर्डिंग कहीं न कहीं तुम्हें मिल जाएगा।
- 1:08:16मुझसे पूछा था, मैं डाइरेक्टली बातों का जवाब नहीं देता, ऐसी
- 1:08:20बातों का जवाब थोड़ा सा गो में फिरा के दे देता हूँ ताकि फिर मैं
- 1:08:26इस अनुभव में से गुजर चुका हूँ बाबा सवेरे के आवेगा।
- 1:08:31मेरे सट्टा नंबर बता दे कि अभी इन इन इन चीजों से तंग होकर मैं
- 1:08:38मैंने बोलना ही छोड़ दिया था क्योंकि मुझे पता है सुबह को आ
- 1:08:43जाएगा व्हाट विल हैपन? आई नो विथ सर्टेन्टी और पता कहाँ
- 1:08:56चलता है पता उस उत्तर पर जाकर चलता है।
- 1:08:59तो क्या मैं सिर्फ शनि का मुद्रा को पाने के लिए शाश्वत मुद्रा को
- 1:09:05खर्च कर दूँ? अब इस शब्द को आप ठीक से सुन।
- 1:09:11क्या मैं क्षणिक मुद्रा पाने के लिए शाश्वत मुद्रा को खत्म कर
- 1:09:16दूँ? शाश्वत मुद्रा सिर्फ तभी खर्ची
- 1:09:19जाती है जबकि उसकी आवश्यकता होती है।
- 1:09:24कितनी गंभीर संकट कानून है? तुम्हारे लिए कुछ गंभीर हो सकते
- 1:09:29हैं। बाबा मेरा तो बच्चा मर रहा है,
- 1:09:33उसके लिए गंभीर है, बिल्कुल गंभीर है, लेकिन हो सकता है मेरे लिए
- 1:09:37गंभीर ना हो। मैं देखूं तो मैं देखूं तो पाऊँ
- 1:09:42कि यह अंतिम घड़ी है, इसमें मैं कुछ भी नहीं कर सकता।
- 1:09:49और मैं चुप हो जाऊ क्योंकि परमात्मा की सृष्टि, उसकी वृहद
- 1:09:56सृष्टि भी तो अपना काम कर रही है। क्या मैं उसमें खलल बन जाऊं?
- 1:10:00नहीं अगर मैं उसको बदल सकता हूँ? तो अवश्य बदलूंगा, लेकिन मैं आपको
- 1:10:09बहुत बार कहा दो और दो क्या होते हैं चार, यह मैं बाबा से नहीं पूछ
- 1:10:15सकता। नहीं पूछता क्योंकि दो और दो और
- 1:10:19चार। मेरे बहुत से वक्त मैथमेटिशियन की
- 1:10:23मास्टर डिग्रिरिया हैं, उनसे पूछ लूँगा।
- 1:10:26अगर मुझे नहीं पता होगा तो एआई से पूछ लूँगा तो जर्मनी को आप जापान
- 1:10:37को आगे निकल गए हो, लेकिन आबादी आबादी कहा 12,00,00,000?
- 1:10:44कहाँ 146,00,00,000 तुम्हें आंकड़े देते हुए शर्म नहीं आती
- 1:10:50उता ही पैसा तुम उसके बराबर थोड़े से ऊपर उठ गए हो तो तुम अमीर हो
- 1:10:57गए हो। यह शगुन बनाने की घड़ी है यह
- 1:11:02नाचने की। खुशी मनाने की घड़ी है नहीं।
- 1:11:06यह खुद पर लांछन लगाने की घड़ी है कि हम तो इतने लोग हैं, अर्निंग
- 1:11:12अहेड हैं, लेकिन हम कारोबार नहीं देंगे, आपको हम पांच किलो अनाज
- 1:11:17देंगे, आपको हम कारोबार नहीं देंगे, मैं आपको कारोबार दूंगा।
- 1:11:24मैं आपको स्वावलंबी बनाऊंगा, क्योंकि कल को मैं एक टके का नमक
- 1:11:29खिला के कहूंगा। नमक हराम मत बजना।
- 1:11:33हमारी तो कहावतें ही ऐसी ऐसी है एक टके का नमक खिला के मैं कहूंगा
- 1:11:39नमक हराम मत मत जाना। यह उस वक्त की बातें हैं भाई जब
- 1:11:44इस गर्म देश में नमक बैन हुआ करता था और गाँधी जी ने नमक सत्याग्रह
- 1:11:49छेड़ा था। दांडी मार्च उस वक्त नमक हिलाली
- 1:11:56तो कुछ बात थी, चलो, लेकिन आज तो नमक आम है, टाटा करे।
- 1:12:01डली वाला ले लो, आम मिलेगा पाकिस्तानी नमक ले लो, खूब मिलेगा
- 1:12:10लेकिन शब्दों की मार ये ऐसी आग को मारते हैं कि तुम्हारी मंद बूती
- 1:12:16चक्र आ जाती है। और इसको तोड़ना मुझे अच्छी तरह से
- 1:12:20आता है। मोहम्मद मोहम्मद नकर काजी मोहम्मद
- 1:12:30का विश्व विचार है। उसके विषय को विचारो, उसकी तरफ
- 1:12:34चलो। मोहम्मद तुम्हारे भीतर बैठा उस
- 1:12:38चेतना को कहता है गोरखु जीसको वो खुद जान गए मरो हे जोगी मरो मरो
- 1:12:46मरण हे मीठा ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मर गोरखड़ीठा वे गोरखी
- 1:12:54मोहम्मद वह गोरखी कृष्ण है वह गोरखी मीरा वह गोरखी पल्टू है।
- 1:13:01वह गोरखी नानक है, वह गोरखी कबीर है, वहीं मोहम्मद है वहीं
- 1:13:08जर्जरुस्त है। वही ईसा है और प्रेम का सागर है
- 1:13:22वो मोहम्मद मोहम्मद नकन काजी मोहम्मद का भीष विचार है मोहम्मद
- 1:13:32हाथ कर दीजिये होती ये जो हाथ में तलवार है।
- 1:13:37यह बकरीद बनाने के लिए नहीं है अपना हंकार काटने के लिए जो तुमने
- 1:13:43खुद ही बनाया है तुमने इल्ल्यूश़न मैं कौन हूँ खुद ही बनाया है कि
- 1:13:52मैं शरीर हूँ, भावना ही हूँ विचार हूँ, इसको काट दो।
- 1:13:56इस तलवार का सहारा लिखें। जे तू प्रेम मिलन की चा शी स तली
- 1:14:03धर घर मेरेया मोहम्मद हाज करद जे होती लोहे छड़ी न सारा।
- 1:14:23नहीं नहीं, मेरी बातों को तुमने गलत समझा।
- 1:14:26मैं ये नहीं कहा कि अगर हम सत्ता में आए तो हम खालिस्तान बना
- 1:14:32देंगे, हम हिंदू राष्ट्र दे देंगे।
- 1:14:35हम भेद वाग में विश्वास नहीं रखते।
- 1:14:39हम यूनिफिकेशन में विश्वास रखते हैं।
- 1:14:44हम ना ही तमिल को, ना ही महाराष्ट्र को, ना ही खालसा को,
- 1:14:53ना ही बौद्ध को, ना ही जैन को वो सिर्फ आपको समझाने की बातें हैं।
- 1:15:00मैं ये नहीं कहता फिर हम आएँगे ही।
- 1:15:06अगर हमने ऐसा ही करना है तो फिर हम घर बैठे अच्छे भेद बुद्धि
- 1:15:13फैलाना बिल्कुल काम हमारा। हमारा काम है यूनाइटेड यूनिटी
- 1:15:21यूनिफिकेशन हम तो अखंड व्रत नहीं अखंड विषय हो जाते हैं।
- 1:15:30हमारा नजरिया नहीं है। हमारी तो ये बेहतरीन अभीवसा है।
- 1:15:37हमारी उत्कंठा है, हमारी प्यास है क्या?
- 1:15:41वसूद है वो कुटबकम तुम प्यार का सागर है।
- 1:15:58तुम प्यार का सागर है तेरी इक भूत के प्यार से हम।
- 1:16:13लोटा जो दिया तुमने लौटा जो दिया तुमने चले जाएंगे जहाँ से।
- 1:16:33हम तो प्यार का सागर है तो प्यार का सागर है।
- 1:16:49तेरी एक बूंद के प्यार से हम लौटा जो दिया तुने चले जाएंगे।
- 1:17:06जहाँ से हम तुम प्यार का सागर है हमारा मंतव्य है वसूद है टुकड़े
- 1:17:24टुकड़े करना नहीं। टुकड़े टुकड़े करना तो हमारी आज
- 1:17:33की जो सत्ता है वह कर रही है हिंदू मुस्लिम।
- 1:17:46ईसाई सीख टुकड़े टुकड़े करने के ऊपर बोल रहे हैं सारे दिन
- 1:17:54यूनिफिकेशन की कहीं कोई बात, प्रेम का कहीं कोई प्रार्थना और
- 1:18:00जैसे ही कोई व्यक्ति। सत्ता के विरुद्ध बोलता है तो
- 1:18:05यूपीए लगा देते हैं। सत्ता के विरुद्ध बोलना, देश के
- 1:18:10विरुद्ध बोलना देश और सत्ता में बड़ा फर्क है।
- 1:18:16देश के ऊपर जो काबिज है वो है सत्ता देश को जो चला रहे हैं वो
- 1:18:21है सत्ता। और सत्ता के हम सत्ता के चालानों
- 1:18:27चलाने के नियमों से हम खफा हैं। हम उनको ठीक नहीं मानते।
- 1:18:35या तो तुम बदल लो। हम बार बार तुम्हें कहे हैं।
- 1:18:42या तुम हट जाओ और अगर दोनों नहीं कर सकते या तो तुम बदल दो जो कह
- 1:18:51रहे हो बदल दो अच्छे दिन आएँगे। आए तो है ना खुद को अवतार घोषित
- 1:18:59करने की? इतनी जल्दबाजी क्यों?
- 1:19:03अरे भाई अवतार भी हुआ जा सकता है, लेकिन उसका मार्ग है अपने भीतर
- 1:19:08उतरना, वहाँ जाकर तुम्हारा अवतरण होगा।
- 1:19:14ऐसे गपबाजी, झूठ बोलना, फरेब करना, लोगों को लूटना, अपने ही
- 1:19:19लोगों को लूटना गलत है। लफ़ाजी कोरी लफ़ाजी से लूटना
- 1:19:26पड़ता है, हम यही कहते हैं, वी वांट यूनिफिकेशन हम एकता चाहते
- 1:19:33हैं हिंदू, मुस्लिमों के नहीं, समग्र विश्व।
- 1:19:38वसुधैव कुटुम्बकम ये हमारा माटो है, हम यहाँ जाना चाहते हैं, सभी
- 1:19:46मुल्क समाहित हो जाएं एक साथ उसको नाम कोई भी दे दो उसको नाम वैड दे
- 1:19:58दो उसको नाम विश्व दे दो। उसको नाम समग्र दे दो, कोई फर्क
- 1:20:04नहीं पड़ता, लेकिन यह लूट गिरी यह नेता गिरी।
- 1:20:10यह तानाशाही या अपने हुक्म के फरमान जारी करना तो गलत कि इनको
- 1:20:18हम गलत समझते हैं। इनको हम बदलने के लिए आए।
- 1:20:24इनको हम बदल दे हमारा मंतव्य यद्यपि ये नहीं है, हमारा मंतव्य
- 1:20:35है उस तल पर पहुँच जाना। जहाँ जाकर आप रस पान करते हो
- 1:20:42लेकिन क्या करे इसका बेस पेट है उस सत्ता तक तुम तब पहुँच पाओगे
- 1:20:53जब तुम्हारा पेट भरा होगा जब तुम्हारा शरीर ठंड से कांपेगा ना।
- 1:20:59जब तुम्हारा शरीर गर्मी के लोगों से बेहाल नहीं होगा तुम जब
- 1:21:07तुम्हारे पास सभी साधन हो गए जी मत रहने के अगर जीवन ही ना बचा।
- 1:21:15वो भूख से मर गए कि गर्मी से मर गए कि ठंडी से मर गए, लेकिन तुम
- 1:21:19तो मर गए, फिर पहुंचेगा कौन? उस तल पर अगर तुम मर ही गए तो फिर
- 1:21:25उस तल पर कौन पहुंचेगा? इसीलिए?
- 1:21:31हमारा ध्येय तो है अपने अंतर को छूना, लेकिन उसका प्रथम स्टेप जो
- 1:21:39है वो है भूखे भजन न होयेगा पाला। पेट भरा होना आवश्यक है तो पेट
- 1:21:49भरा होना हम। शुरुआत से इसका शुरू करते हैं।
- 1:21:56आपका पेट भरने से शुरू होगा आखिरी बात तो हमने बोल दी है हमारा
- 1:22:02ग्रंथ पूरा हो चुका है। आगे से तुम दिशा निर्देश ले सकते
- 1:22:06हो। जिनका पेट भरा हुआ है उनके लिए।
- 1:22:11मेरा ग्रंथ खुला है। आप शुरू से लेकर आखिरी कदम तक
- 1:22:18फ्रम दी फर्स्ट स्टेप टु रूफ वहाँ सब जान सकते हो सरलतम व्याख्या की
- 1:22:26है मैंने। जिनका पेट भरा हुआ है वो आराम से
- 1:22:33अपने घरों में बैठें, एकांत में बैठें और एकांत का लुत्फ उठे।
- 1:22:39जहाँ आपको किसी चीज़ की जरूरत है। सालिक छूट लैट में लेबा नसीना।
- 1:22:47एंड एन लेमेंटेड लट मर्डर स्टिल फ्रॉम?
- 1:22:50कीवर्ड एंड न टेस्टोम अगर ऐसा होना चाहते हो तो और तुम्हारा पेट
- 1:22:59भरा है, लेकिन बात तो खराब वहाँ होती है जब मैं धार्मिक उपदेश
- 1:23:05देता हूँ। और कमेंट्स में आती है कि बाबा
- 1:23:08पेट खा लिए भूखा ठंडी लग रही है। सर्दी ज़्यादा है, ऊनी वस्त्र
- 1:23:16नहीं, यह गर्मी बहुत है, लूएँ चल रही है, डिहाइड्रेशन हो गया है तो
- 1:23:24मुश्कलात पैदा होती है। जीवन को बचाना उस तल पर पहुंचने
- 1:23:32से ज्यादा जरूरी है। वाहन को बचाना, रथ को बचाना, रथ
- 1:23:37ठीक होना चाहिए, तब ही तुम वहाँ पहुँच पाओगे।
- 1:23:41अगर रथ ही गड़बड़ा गया तो तुम। वहाँ पहुंचने का साधन ही तुमने खो
- 1:23:46दिया, इसलिए हमें यह चैनल शुरू करना पड़ा।
- 1:23:52मजबूरी में अन्यथा मैंने अपना ग्रंथ आध्यात्मिक तो पूरा कर
- 1:23:56दिया। फिर भी अध्यात्म की बातें ज्यादा
- 1:24:01कदम पूछता हूँ, आपके प्रश्नों का जवाब देता हूँ।
- 1:24:03ये प्रश्न बहुत है, लेकिन हमारा अंतरिम लक्ष्य अंतिम लक्ष्य आपको
- 1:24:13उस अंतस्तर पे ले जाना है। जहाँ आनंद की फहार
- 1:24:36है? मैं ले चलूँ आओ हजूर तुमको
- 1:24:51सितारों पे ले चलूँ। दिलजुम जाए ऐसी बाहर ले चलूँ।
- 1:25:17आओ हजूर, सितारों पे ले चलो, दिल झुम जा ऐसी।
- 1:25:36बाहरों में ले चलूँ और हजूर और।