Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Apr 26 - गोरख वाणी: शब्द से शून्य की ओर
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- 0:11गौरखवाणी का एक शब्द नाथ कहंता सब जग नाथ्य।
- 0:24गोर्ख कहनता गोई कलमा का घर मोहम्मद होता पहले मोवासोई मैं
- 0:40रोज़ ही कहता हूँ आपसे। गौरख कहते हैं कि शब्दों में कुछ
- 0:48नहीं धरा है अगर शब्दों में कुछ रखा होता है नाथ नाथ कहने से कोई
- 1:00गोर्ख नाथ नहीं होता। गौरख कहते हैं, अगर कलमा के शब्द
- 1:17ला इलाहा इलल्लाहा, मोहम्मद उर रसूल अल्लाह।
- 1:28अगर कलमा के शब्दों में कोई तंत्र होता हो, शब्दों के भीतर कुछ
- 1:37शक्ति होते हैं तो मोहम्मद जो कलमा को रचने वाले थे।
- 1:47उनकी मृत्यु न होती, बड़े तीखे वचन हैं नाथ कहंता सब जगन्नाथया
- 1:57गौर का कहंता गोई कलमा का गर्म मोहम्मद होता पहले मुवास हुई।
- 2:07अगर नाथ नाथ कहने से तुम मुर्ख नाथ हो जाओ तो फिर तो बड़ी आसान
- 2:20बात है। गोर्ख सीधे सीधे सिर पर वार करते
- 2:31हैं। सीधी गर्दन काटते हैं गौर कहते
- 2:38नाथ नाथ कहने से कोई जगत का स्वामी नहीं होता, जगन्नाथ नहीं
- 2:45बनता जगतनाथ नहीं बनता तो जगतनाथ कैसे बनता है?
- 2:55मरो हेजोगी मरो मरो मरण हे मीठा ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मर गोरख
- 3:08डीठा। नाच नाच करने से तुम गोरखनाथ नहीं
- 3:14हो, लेकिन अहंकार के मरने से तुम गौरव हो जाओगे।
- 3:24कलमा पढ़ने से ला ला ला ला मोहम्मद और रसो ला ला।
- 3:33कलमा पढ़ने से तो महमबत नहीं होते जब परमात्मा नहीं होते।
- 3:41अगर कलमा में इतनी ताकत होती तो महमबत क्यों मरते?
- 3:50गौरख कहते हैं, शब्दों में कोई ताकत नहीं होती, शब्द तो सिर्फ
- 3:58आपसी कानोबारिशेशन के लिए हमने बनाए हैं।
- 4:07यह हमारी रचना है। इसीलिए तो सभी देशों ने अपनी अलग
- 4:13अलग भाषाएं बना ली। हर 10 मील के ऊपर भाषा बदल जाती
- 4:18है। एक ही देश में कितने भाषाएं हैं?
- 4:23लेकिन क्या परमात्मा भी बदल जाता है?
- 4:25नहीं परमात्मा नहीं बदलता नाथ कहंता सब जग नाथ्या गोरख कहंता
- 4:34गोई कलमा का गढ़ महमद होता पहले मोबा सोई।
- 4:45बड़े थोड़े से शब्दों में व्यक्ति को सम्पूर्ण तत्व का ज्ञान दे
- 4:57दिया। ज्ञानी शब्दों को छोड़ दो।
- 5:04आज तो सारी दुनिया शब्दों में ही उलझी हुई है और यह नाम दान देना
- 5:11यह नाम का प्रसारण करना इस बात का सूचक है कि आपने उस रस को पिया
- 5:19नहीं। रस रस कहने से भी तुम रस को नहीं
- 5:29पी सकते। शराब की बोतल सामने पड़ी हो और
- 5:35तुम पैग बना के उड़े लो ना गलक गल से नीचे हल्क में ना उतार लो।
- 5:44तो वह तुम्हें मदहोशी में न ले के जा सकेगी।
- 5:52मैं रोज़ ही तुम्हें बोलता हूँ और आज गुरख का वचन भी आ गया।
- 6:00नाथ कहंता सब जगन्नाथ या गोरख कहंता गोई ना तो नाथ नाथ कहने से
- 6:08कोई जगन्नाथ होता है नाई गोर्ख गोर्ख कहने से कोई गोर्ख होता है?
- 6:19ना ही कलमा बढ़ने से कोई परमात्मा होता है।
- 6:25अगर कलमा पढ़ने से कोई परमात्मा हो जाता तो सबसे पहले मोहम्मद ही
- 6:32परमात्मा होता फिर परमात्मा का पैरोकार क्यों रहता वो?
- 6:41फिर परमात्मा का दूत क्यों रहता? वो वह परमात्मा का रसूल क्यों
- 6:50रहता? मोहम्मद उर रसूल अल्लाह अल्लाह का
- 6:55रसूल अल्लाह तो नहीं हुआ। कलमा पढ़ने से गौरख कहते हैं,
- 7:05कलमा पढ़ने से तुम रसूल तो हो सकते हो और लाह नहीं हो सकता है।
- 7:15पैसेंजर तो हो सकते हो। गॉड नहीं हो सकता है गॉड नहीं हो
- 7:24सकते, मैसेंजर हो सकते हो डाकिया तुम्हारे अगर डाक दिया जाता है
- 7:33उसे पता होता है डाक में लिखा क्या है?
- 7:38नहीं पता होता बस ऐसे ही तुम्हारे शब्द है तुम्हारे शब्द सिर्फ
- 7:46डाकिए का काम करते हैं। पोस्टमैन का इससे ज्यादा और कुछ
- 7:50भी नहीं इधर की चीजें। उधर डिस्ट्रीब्यूट कर देते हैं।
- 7:57एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित कर देते हैं।
- 8:03यही कह रहे हैं गौरव कहते हैं कि नाथ नाथ कहने से कोई जगन्नाथ नहीं
- 8:12होता, कोई परमात्मा का नाथ नहीं होता।
- 8:17और कलमा पड़ने से कोई अल्लाह नहीं होता अगर कलमा पड़ने से अल्लाह हो
- 8:23जाता कोई तो सबसे पहले हम मोहम्मद ही अल्लाह हो जाते।
- 8:30नात नात कहने से अगर कोई। परमात्मा हो जाता, नाथ हो जाता,
- 8:36जगन्नाथ हो जाता, जगत का स्वामी हो जाता तो सबसे पहले ये जो जो
- 8:47काण परवाए बैठे हैं नाथ ये परमात्मा हो गए होते कब के हो गए
- 8:51होते? काण परवाण से क्या होता है?
- 8:55कांत तो शरीर का एक हिस्सा है, उपकरण का एक हिस्सा है।
- 8:59यह है सर उपकरण इसका हिस्से है कम तत्व की बात यह है शब्दों को अभी
- 9:12जाप दो आज नहीं अभी अभी। नाउ एंड नाउ शब्दों का प्रे त्याग
- 9:24कर दो तुम कुछ भी शब्द जपरे हो, मैं तो रोज़ कहता हूँ लेकिन आज तो
- 9:32गोरख कहते हैं यह गोरख वाणी का? शब्द मैंने आपके सामने रखा,
- 9:42शब्दों को अभी त्याग दो, जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी त्याग
- 9:46दो, उतनी ही जल्दी तुम्हारा प्रथम पग परमात्मा की तरफ उठ जाएगा।
- 9:54मार्ग दिखने लगेगा तो मैं खाली होते ही मार्ग दिखने लगेगा।
- 9:59जैसे ही पलकों को ऊपर उठाओगे, भीतर देखने वाली आँखें हैं, यह
- 10:06नाम आँखों के ऊपर का पड़ता है, पलकें हैं।
- 10:16इन पलकों को उठा लो आँखें भीतर है पलकों का पर्दा आँखों को देखने
- 10:29नहीं देता फेंक दो शब्दों को। शब्द पलकों की तरह आँखें तुम्हारे
- 10:39पास हैं, देखने की क्षमता तुम्हारे पास है, रेटीना है लेकिन
- 10:49ये पलके। तुम्हारे देखने की क्षमतों को
- 10:57समाप्त कर देते हैं पलकों की गलियों में चेहरे, बहारों के
- 11:05हँसते हुए पलकों की गलियों में चेहरे।
- 11:14बहारों के हस्ते हुए हैं मेरे ख्वाबों के क्या क्या नगर इनमें
- 11:26बस्ते हुए हैं? ये उठे सुबह चले ये झुके शांडले
- 11:43ये उठे सुबह चले। ये झुके शाम ढरे मेरा जीना मेरा
- 11:57मरना इन्हीं पलकों के तले मेरा जीना।
- 12:07मेरा मरना इन्हीं पलकों के तले मेरा जीना मेरा मरना इन्हीं पलकों
- 12:18के तले जैसे ही तुम पलकों को उठा लोगे।
- 12:25ज़िन्दगी में यौवन लौट आएगा ये चेहरे की झुर्रियां ये मन का वेग
- 12:34संताप उद्वेग, यह कष्ट क्लिश यह दुख दर्द यह चिंता चिन्ताएं सब
- 12:43समाप्त हो जाएंगी। जैसे ही तुमने पलकों को उठाया, इन
- 12:53पलकों के नीचे न जाने कितने नगर बसे हुए हैं, ये पलके ही वादा है।
- 13:04और पलके क्या हैं? तुम्हारे नकली गुरुओं के द्वारा
- 13:09दिए गए शब्द पलके वो शब्द चाहे कोई भी हो गौर कहते हैं शब्दों को
- 13:17फेंक दो, अभी फेंक दो अभी नाउ एंड नाउ।
- 13:26और सोच विचार न करो, मैं तो रोज़ कहता हूँ और आज को रख कहते हैं
- 13:39मेरा जीना मेरा मरना। इन पलकों के तले अगर तो ये गिर न
- 13:45गिरि अगर तो ये ऐसे ही रह गए फिर तो तुम मरे मरे से जीओगे काइरों
- 13:55की तरह साहस विहीन। कोई जीने की तमन्ना नहीं, बस किसी
- 14:02तरह दिनों को धक्के दोगे? काश तुम्हारी पल क्यों उठ जाएं तो
- 14:10तुम्हें ज़िन्दगी का मज़ा आ जाए। ये उठें सुबह चले जैसे ये उठेंगे।
- 14:22वैसे ही सुबह हो जाएगी ये उठें सुबह चलें ये गिरे शाम ढले जैसे
- 14:35ये गिर गए तुम्हारे लिए शाम हो गई ज़िन्दगी की अंधेरा हो गया अंधकार
- 14:39हो गया सूर्य अस्त हो गया मेरा जीना।
- 14:45मेरा मरण इन्हीं पलकों के तल तुम्हारा सारा ज्ञान इन शब्द रूपी
- 14:56पलकों के पीछे है शब्दों को गिरा दो।
- 15:02शब्दों को फेंक दो, अभी फेंक दो मत जबो ये पलकों की तरह बाधा है
- 15:12और देखिए देर न लग गई बस तुम्हारी पलकों के उठने की देर है उतनी ही
- 15:19देर होती है। इसलिए गो रखे थे तुम अभी पहुँच
- 15:24सकते हो देर इस नो बैन देर इस नो बैरियर बट यू एंड गॉड क्या है
- 15:35बैरियर है पलकें पलकों को उठा लो। पलकी क्या है?
- 15:43शब्द शब्द का जाप हो, चाहे तुम्हारे मन का चलन हो, यह भी तो
- 15:49शब्दों में चलता है। यह भी तो भावनाओं में चलता है, यह
- 15:53भी तो विचारों में चलता है, यह भी तो संस्कारों में चलता है।
- 16:03यह भी तो विषयों में चलता है। गौरव कहते हैं, इन सब को पटक दो,
- 16:11इन सब से मुक्त हो जाओ और जैसे ही तुम मुक्त हो जाओगे, बड़ी मजेदार
- 16:18घटना घटेगी। तुम्हारा जीना तुम दुखी हो या तुम
- 16:27सुखी हो इट डिपेंड्स अपॉन यू अगर तुम पलकों को झुकी ही रहने दोगे
- 16:36तो उम्मीद मत रखना। कि कभी वसंत आएगा अगर तुम इन
- 16:45पलकों को उठा लोगे जो कि तुम्हारे ही बस की बात है तो सुबह सवेरा हो
- 16:53जाएगा। सूरज कितना भी निकला हो।
- 16:56अगर पलकें झुकीं तो तुम्हारे लिए अंधेरा है, सूरज ना भी निकलो तो
- 17:07बल्ब की रौशनी से भी काम चल जाएगा अगर पलकें उठीं।
- 17:18भेद कर ऋषियों ने कहा हे परमात्मय तमसो माँ ज्योतिर्गमय, हमें
- 17:26अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाओ हमें तमस्य रोशनाई की तरफ ले जाओ।
- 17:36जब तक ये पलकें झुकी हुई हैं, पलकों ने हमारी आँखों को डका हुआ
- 17:41है तुम्हारा सभी ज्ञान वास्तविक ज्ञान नहीं है, खोपड़ी का ज्ञान
- 17:49और वह परमात्मा का ज्ञान खोपड़ी से नहीं आता।
- 17:55उतर गयो मेरे मन का संशय, जब्त है दर्शन पायो आँखों से मिटता है
- 18:02अज्ञान आँखों की बल्कें उठती हैं तो अज्ञान का अंधेरा भी उठ जाता
- 18:10है आँखों की बल्कें झोंकती हैं। तो ज्ञान का उजाला भी झुक जाता है
- 18:20इन बातों को पले से बांध लेना इन पलकों को जो वादा है जो बैरियर
- 18:28हैं ऑब्स्ट्रक्शन हैं इनको उठा दो।
- 18:36और इनको उठाना कोई बहुत मुश्किल बात नहीं है।
- 18:41दिल के आईने में थी तस्वीरें यार दिल के आईने में थी तस्वीरें यार
- 18:48जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली तुम थोड़ा सा।
- 18:53पलकों को उठा लो चमकता दमकता ये गुलशन या बाहर ये फिजाएं ये
- 19:04हवाएं, ये महकता हुआ गुलशन का बाग बगीचा।
- 19:12ये बल खाती हुईं लहरें, ये सब तुम तो खली पड़ें फल खाती बेले बल
- 19:31खाती बेले मस्ती में खेलें। थपेड़ों से मिल के गले, बल, खाती
- 19:47बेलें मस्ती में खेलें। थपेड़ों से मिल के गले हैं नीले
- 20:04गगन के तले धरती का प्यार फले। ऐसे ही जग में ऐसे ही जग में आती
- 20:21है सुबह ऐसे ही शाम ठले ए। नीले गगन के तले धरती का प्यार
- 20:38फले बलखाती बेलें, मस्ती में खेलें थपेड़ों से मिल के गाले।
- 20:52पता कब चलेगा जब ये पलके उठ जाएंगी, देखने की क्षमता तुम्हें
- 21:00सदा ही मौजूद है बस ये पलके तुम्हें देखने नहीं देते हैं।
- 21:09यही कहते है गौरख गौरख कहते है ना तो कल में से कुछ होगा।
- 21:25ना नाच नाच कहने से तुम परमात्मा हो पाओगे ना कलमा पढ़ने से तुम
- 21:32अल्लाह हो पाओगे तो फिर कैसे हो पाओगे अल्लाह अहंकार को मिटाने
- 21:43से? और जैसे ही ये पलकें उठेंगी
- 21:49तुम्हें दिखाई पड़ेगा कि सूर्य तो सदा से है।
- 21:55एक मैं ही अभागा था जो इन पलकों को उठा के देख न पाया।
- 22:02आँखें भी सदा से मौजूद थीं। सूरज की रौशनाई भी सदा से मौजूद
- 22:07थीं, लेकिन मैं ही अभागा था कि इन पलकों को उठा न सका।
- 22:14मैं ही शब्दों में गुम होता रहा और जिम्मेदार हैं ये मूड गुरु।
- 22:23जो शब्द का प्रचार करते हैं वह तो शब्दातीत है।
- 22:28जो अक्षरों का प्रचार करते हैं वह तो अखरा नालों वखर है आज ही त्याग
- 22:35दो, अब ही त्याग दो। गोरख कहते हैं तुम अभी पाओगे।
- 22:42कि तुम परमात्मा होने शुरू होगा धन्यवाद।