Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Jul 25 - आओ, आज मैं तुम्हें "जीने का सलीका सिखा दूं" | इच्छाएं पूरी न होने का गहरा सत्य!
Transcript
- 0:06बाबा जी प्रणाम मुझे भी चमत्कार दिखा दो बाबा।
- 0:21परमात्मा मेरे दुखड़े क्यों नहीं सुनता?
- 0:36मैं बहुत परेशान हूँ, मेरी कोई भी इच्छा परमात्मा पूरी नहीं करता।
- 0:53अबोहर से भारतीय आओ पुत्र मैं तुम्हें आज जीने का सिलिका सिखाती
- 1:08हूँ। परमात्मा की सृजना में आनंद भरा
- 1:20पड़ा है। और तुम कहती हो कि दुख ही दुख है
- 1:32परेशान, कष्ट निवारण करो बाबा चमत्कार दिखाओ।
- 1:47तो आज तुम्हें मैं जीने का सलीका सीखा देता हूँ, प्रत्येक व्यक्ति
- 2:02जो मुझे सुनता है ये सभी के लिए। तुम दुखी क्यों एक शब्द कहा
- 2:22परमात्मा मेरी कोई इच्छा पूरी नहीं करता, मैं बहुत परेशान हूँ।
- 2:32बस यही दुख का सबब है, जिसने सर्जना बनाई।
- 2:50क्या यह सूरज हमारी इच्छा से निकलता है?
- 2:56क्या चाँद तारी, ग्रह नक्षत्रार्थ और यूनिवर्स की सभी घटनाएं
- 3:04तुम्हारी इच्छा से चलती है, क्या ये दिल तुम्हारी इच्छा से धड़कता
- 3:11है? क्या तुम्हारी इच्छा से सुबह होती
- 3:18है? शाम होती है तुम दुखी हो, परेशान
- 3:31हो, तुम इतने पढ़े लिखे हो तुम्हे ये समझ नहीं आता।
- 3:42कि मेरे दुःख का कारण क्या है, ज़रा खोज लो
- 3:55ज़रा सोच एक विराट की इच्छा, वृहद की इच्छा सृजन हार की इच्छा,
- 4:02जिसने सारी सृजना का निर्माण किया।
- 4:08और एक जीव की इच्छा क्षुद्र की इच्छा?
- 4:16दोनों की इच्छाओं में से किसका सम्मान होना चाहिए और किसकी इच्छा
- 4:20पूरी होगी? तुम दुखी हो पुत्री, इसीलिए के
- 4:32परमात्मा ने तुम्हारी कोई इच्छा पूरी नहीं की।
- 4:39सोचने के दो ढंग। कोई बहुत बड़ा राजा अपने
- 4:57महामंत्री के साथ जा रहा था। इन राजाओं को शिकार करने का बड़ा
- 5:03शोक होता है। अपने ही वस्त्रों को देखते
- 5:21खंगालते एक कटार उसकी ऊँगली को छू गई।
- 5:28कटार इतनी तेजधार वाली थी कि उसकी छोटी ऊँगली कट गई।
- 5:34पूरी की पूरी उसे तो दर्द भयानक हो रहा था।
- 5:45साथ में महामंत्री था, कुछ सैनिक जवान थे।
- 5:55इस घटना को देख के महामंत्री बोला हे राजन परमात्मा जो करता है ठीक
- 6:03करता है तो राजा को बड़ा गुस्सा है।
- 6:16अरे हम हो तो मरे जा रहे हैं, ये कहत है आगे परमात्मा जो करते ठीक
- 6:23करता इसको तोड़ दो जाओ जेल के अंदर बंद करो उसको इसको और इसके
- 6:33पूरे परिवार को बंद कर दो। इतना गुस्सा आया, मेरी अंगरी कट
- 6:41गई, अब वाहिज हो गया और ये शास्त्र वचन सुना रहा है ये भला
- 6:50कोई शास्त्र वचन सुनाने का वेला? अफ़सोस बनाते दुख दर्द में शरीर
- 6:57को होते इलाज करवातें ये कहते कि ईश्वर जो करता है ठीक करता है तो
- 7:10उसको जेल में बंद कर दिया गया जा सकता।
- 7:16जिंदगी जेल में रह के सर। यहीं जिएगा यहीं मरेगा तेरा खाना
- 7:24दाना बस यहीं पहुँच जाएगा। इतनी ही राय थी कि तुझे मृत्यु
- 7:28दंड नहीं देता क्यों? रजाओं की वक्त कैसे कायदे का नुम
- 7:34होगा? उन्हीं का फायदा उन्हीं का कानून
- 7:51वर्ष भर बीत गया। ये महामंत्री तो प्रेम से बैठता,
- 8:00आनंद से आँखें बंद कर लेता, ध्यान में मस्त हो जाता।
- 8:13पहुंचा नहीं था, लेकिन पहुंचने के करीब इस तरह की बातें वही लोग
- 8:21किया करते हैं जिनके वह सर्जन करता।
- 8:29करीब वो होता मालूम पड़ता है अन्यथा मार्क्स कभी ऐसी बातें
- 8:33नहीं करेंगे। चार बार कभी ऐसी बात नहीं कहेंगे।
- 8:42ऐसी बात तो लव से ही कर सकता है पर महात्मा जो करता है, ट्रिक
- 8:49करता है और भले के लिए करता है। तो राजा ने सोचा इसमें क्या भला
- 8:56होगा? अंग भंग हो गया।
- 9:00मैं राजा हूँ, ये मजाक उड़ा रहा है मेरा गना गुस्सा आया, बहुत
- 9:09गुस्सा आया। वर्ष भर बीत गया, दूसरा महामंत्री
- 9:15नियुक्त कर लिया। 1 दिन फिर शिकार चले चले, रस्ता
- 9:28भूल गए वो ही महामंत्री था, पांच चार सैनिक थे।
- 9:38घोड़े बग्घिया थीं, तिक्शन तलवारें थीं, धनुषवान थे और अचानक
- 9:52से। पांच 400 लोगों के झुंड ने उन्हें
- 9:56घेर लिया। बियाबान जंगल बीहड़ कोई भी नहीं
- 10:05था वहाँ रास्ता भटक गया था। पता नहीं कहाँ आ गया।
- 10:12कोई दिशा सूचक के यंत्र भी तो नहीं थे राजा को पकड़ा महामंत्री
- 10:22को पकड़ा और सेनाओं को सैनिकों को पकड़ा और ले गए अपने शिविर में
- 10:30वहाँ कोई प्रार्थना हो रही थी। हवन यज्ञ हो रहा था, मंत्र
- 10:38उच्चारण हो रहा था, बहुत से पंडित जन बैठे थे, बहुत सी जनता बैठी थी
- 10:45इनकी अपनी आहूतियों पे अहुतियाँ डाली जा रही हैं राजा को।
- 10:58महामंत्री को भी कुछ समझी जब पूर्ण होती हुई तो मुख्य पुजारी
- 11:08बोले बाली को भेंट किया जाए। तो उसके सेन के दौड़े बड़े करोड़
- 11:21राक्षस येस जाके राजा को पकड़ लिया चल राजा तो कब नहीं लगा?
- 11:35कहाँ रिच रहे तुम चलो तुम वहाँ मंदिर में ले गए माता महाकाली की
- 11:47मूर्ति, बाहर जीव निकली हुई है, हाथ में खंडा।
- 11:57दूसरे हाथ में नर मुंड अब देख के घबराए ये मैं कहाँ और मुझे क्यों
- 12:05लेके आया? लेकिन जैसे ही उसने जल छिड़कना
- 12:12शुरू किया। राजा के ऊपर गंगाजल छिड़का और
- 12:20मंत्र पढ़ने शुरू किया है अपवित्र को पवित्र का ओम अपवित्र हाँ
- 12:28पवित्र बा शरबाबिस्तान का? उसने कहा ये क्या हो रहा है मैं
- 12:40तो तो उसने पूछा पंडित जी से पंडित जी, ये क्या हो रहा है?
- 12:54कहते तुम अपनी अंतिम इच्छा बता दो, क्या है?
- 12:59बस तुम्हें बलि चढ़ाना है, माता के अब तुम्हारा अंतिम वेला आ गया
- 13:06और हमारे ये ऐसा रिवाज के मरते हुए व्यक्ति की अंतिम इच्छा जरूर
- 13:11पूरी की जाती है। बस एक इच्छा ना हो।
- 13:14की मुझे मारा न जाए। बाकी जो इच्छा आपकी पूरी अब उसकी
- 13:28जो जुबान तालुए के साथ लग गई खेंचरी मुद्रा ऐसे लगती है खेंचरी
- 13:35मुद्रा तुम तो लगाते हो? प्राकृतिक रूप से केशरी मुद्रा भी
- 13:43लगती है। ऐसे लगती है जब मृत्यु सामने हो
- 13:47तो केशरी मुद्रा लग जाती है फिर बोलती बंद हो जाती है।
- 13:53राजा हो या मंत्री हो या प्रजा हो।
- 14:06राजा ने कुछ नहीं कहा। मन हो गया बस जुबाँ सूखने लगी,
- 14:16कंठ सूखने लगा, मृत्यु का इंतजार अब कोई आएगा?
- 14:24उसका सिर दर्द से अलग कर देगा। सब समझ गया था राजा इतने में एक
- 14:36और ब्राह्मण आया। यह सिर से पांव तक उसके सारे
- 14:41अंगों को चेक करने लगा। वो देख रहा था कि इसका कोई अंग
- 14:48भंग तो नहीं क्योंकि अगर कोई अंग भंग हो तो वह अंग भंग वाले
- 14:56व्यक्ति को देवी उसकी भली परवाह नहीं करती।
- 15:03चेक कर रहा था। सम्पूर्ण तो है कहीं कोई छत भी तो
- 15:09नहीं गया। देखा एक छोटी ऊँगली में छोटी
- 15:24ऊँगली जब उसने देखा छोटी ऊँगली पूरे के पूरे ये थोड़ा सा कट भी
- 15:34होता है ना तो भी ये बली के योग्य नहीं था।
- 15:44तो उसने का मालिक जिनका राजा था, हाँ फटे से मालिक ये बली की योगी
- 15:53नहीं है यह व्यक्ति जो तुम पकड़ के लाये ये अधूरा है।
- 15:58आधा बली की योगी नहीं है। इसका एक अंग भंग है।
- 16:04राजा का तुझे हँसी शौक रखा? उसने कहा है ऐन वक्त पे अपनी यज्ञ
- 16:16सम्पूर्ण होगा। बलि चढ़ाते वक्त तुम्हे ये क्या
- 16:22दिखा? तुमने पहले छानबीन कर दी।
- 16:26किस व्यक्ति को पकड़ के लाए? राजा उठा उठकर उस राजा के पास
- 16:42गया, उसे पता नहीं था ये राजा उसके चरण स्पर्श किए।
- 16:48हाथ जोड़ के खड़ा हो गया गुनाह माफ़ करें, हमें पता नहीं था
- 16:54तुम्हारा अंग भंग है, तुम बलि के युग नहीं हो, तुम्हें छोड़ा जाता
- 16:58है तुम जाओ जहाँ के भी हो राजा तो प्रसन्न हो गया।
- 17:07हरदा। कमल की तरह खैल उठा, वो तो भागे
- 17:12बहुत से में महामंत्री कहने लगा, राजन ईश्वर जो करता है ठीक करता
- 17:24है। अगर ये अंगुली ना कटी होती तो आज
- 17:31पूरे के पूरे कट गए होते। अंगुली कटी तो आज सारा सीरियल बचा
- 17:47एक बिजली की तरह कौंधी आवाज पुराने महामंत्री की।
- 17:52ईश्वर जो करता है ठीक करता है राजन आज वो चरितार्थ हो गई थी।
- 18:01कहावत ईश्वर जो करता है ठीक होता है तो बड़ा हड़बड़ाया पसीना आ गया
- 18:11उसका। एक निर्दोष व्यक्ति को उसके
- 18:14परिवार समेत वर्ष वर्ष से मैंने कैद रखा है गुलामों की तरह जबकि
- 18:21वही बात उसने कही थी। वही बात इसने कही है आज लेकिन
- 18:27परिस्थितियां विपरीत थीं। उस वक्त मेरी ऊँगली कटी थी, आज
- 18:36मैं सारा ही कटता कटता बचा। उसने तो घोड़े छुड़ा लिए, अपने
- 18:45राज्य में आया। राजा ने महामंत्री को भगाया चलो
- 18:54भागो तुम अरबी घोड़े के ऊपर चढ़ते चाबी तुम्हारे पास है, उस
- 19:04महामंत्री का दरवाजा खोलो। बस मैं आया तुम्हारे कुछ उसके
- 19:12परिवार वालों का घर जो बंद कर रखा है उसे भी खोल दो।
- 19:16आजाद कर दो दरवाजे खुल गए। राजा जल्दी से पहुंचा।
- 19:27महामंत्री के कमरे में महामंत्री सिर नवाए बैठा था।
- 19:38राजा ने जाके महामंत्री के चरण स्पर्श कर लिया।
- 19:42चरणों में सिर फूट फूट के रोने लगा।
- 19:48बहुत रोया, बहुत रोया मौख दर्शक की तरह देखता रहा महामंत्री।
- 20:08सोच रहा था, अवश्य ही कुछ तो हुआ है।
- 20:19बहुत रो लिया सब गर्दों को बाहर निकल गया तो राजा ने हाथ जोड़ के
- 20:26माफी मांगी मुझे एक क्षमा का तो। तुम्हारी बात सच निकली।
- 20:35ईश्वर जो करता है, ठीक करता है और भले के लिए करता है।
- 20:51तुम आज से मुक्त हुए और मेरे राज़ दरबार के अंदर तुम्हारी पदोन्नती
- 21:00हुई तो मेरे बराबर बैठा ग्रुप है और यहाँ तक कि जब मैं चला जाऊं
- 21:08मेरे बाद। गद्दी के वारस भी तुम्हें घोषित
- 21:11कर दूंगा। बस यही तुम्हारा पुरस्कार और यही
- 21:23मेरा दंड। फिर उसने सारी कहानी सुनाई।
- 21:41महामंत्री ने राजा की चरण स्पर्श किया है।
- 21:46पुराना महामंत्री रोने लगा। राजा ने पूछा, तुम क्यों रो रहे
- 21:53हो? महामंत्री ने कब प्रभु?
- 22:00मैं इसलिए रो रहा कि जीस महामंत्री को तुम साथ ले गए थे
- 22:09उसका तो अंग भंग पहले ही उसका अंगूठा नहीं था बांक।
- 22:18लेकिन तुम न सही तुम्हें छोड़ देते मेरी भली ले लेते हैं तुम
- 22:24क्या बचे राजा ये तो मैं भी बच गया।
- 22:30ईश्वर जो कुछ करता है, अच्छा ही करते।
- 22:44जीने का एक ढंग तुम्हें सिखाती हूँ तुम उसकी विराट इच्छा के आगे
- 22:50शुद्र इच्छा को फंसाते हो। ज़रा सोचो करोड़ों हॉर्स पावर का
- 23:01इंजन। ये कोई गाड़ी दो हॉर्स पावर की
- 23:09गाड़ी से टकरा जाएंगे तो दो हॉर्स पावर की गाड़ी का क्या असर होगा?
- 23:19चक्रचूर हो जाएगी। खंड विखंड हो जाएगी, उसका नामो
- 23:24निशान भी ना मिलेगा। ऐसा ही तुम करते हो रोज़ उस विराट
- 23:31की इच्छा के आगे अपनी इच्छा को फंसा देते हो और वह अच्छी तरह।
- 23:45कि इसकी शुद्र इच्छा हो, यह जानता नहीं, यह गलत इच्छा कर रहा है।
- 23:53मैं जो कर रहा हूँ वह तुम्हारा पिता है।
- 24:00तुम्हारा दुश्मन नहीं, वह तुम्हारा जनक है तुम्हारी इस देह
- 24:11के ऊपर मन के ऊपर लगा हुआ सारा मटेरियल उसने अपने हाथों से
- 24:18निर्मित किया है। तुम उसके बच्चे हो और अपने ही
- 24:27बच्चों का बुरा कौन चाहेगा? राजा फिर होया ईश्वर जो करता
- 24:41बिलकुल अच्छा करता। उस दिन मेरी अंगुली कट गई।
- 24:45आज सारा ही कट जाता और महामंत्री भी रोया।
- 24:51प्रभु आपकी अंगुली तो कट गई थी लेकिन मैं तो सदा ही आपके साथ
- 24:55रहता हूँ फिर वो मुझे ही काट देता है।
- 25:00मैं भी बच गया आज। और जीसको तुमने महामंत्री बनाया,
- 25:06उसके पांव का अंगूठा पहले ही है, उसका आनंद वन्द पहले ही है।
- 25:14संसार की कहानी कैसे उसने रची? मनुष्य की क्षुद्र बुद्धि में
- 25:23आतन? तुम्हें जीने का सिलिका सीखा रहा
- 25:30हूँ बोही जुनान के अंदर एक समुद्र के किनारे पर छोटा बच्चा।
- 25:39छोटी प्याली रही है खड़ा समुद्र को खाली करने की फिराक में बैठा
- 25:50कहानी मैंने कई बार सुना दी लेकिन कहानी बड़ी महत्वपूर्ण है, रहस्य
- 25:58आत्मक भी है, रो रहा है। और सोक्रेट ही साथ है।
- 26:07श्वेत लहराती दाड़ी 70 साल की उम्र देखा बच्चा रोका है, उसके
- 26:21आंसू पोछे बेटा क्यों रो रहे हो? भूखे हो?
- 26:29भूखा तो हूँ तो फिर खाना ला दूँ नहीं और रो क्यों रहे हो?
- 26:39मैं इसलिए रो रहा हूँ कि मेरी इस। पात्र के अंत कोली के अंत यह
- 26:49समुद्र समर्थन सो क्रिटिस कहने लगा ऐसे ही मोर का हम भी तो हैं
- 27:01मन में सोचता है हम भी तो यही सोचते हैं कि हमारी छोटी सी
- 27:06खोपड़ी में। वह बरोट, बरोट समाचार तुमने अब
- 27:14इसकी वराटता जानी कहाँ है? अभी साईं से जू जू नए नए
- 27:19इन्वेंशन्स करेगी। तब तुम जानोगे उसकी वराटता को।
- 27:36एक पदार्थ होता है न्यूट्रॉन सस्पेंस मैटर तुम कभी सोच सकते हो
- 27:47कि एक छोटी चम्मच में। न्यूट्रन मैटर की एक छोटी चम्मच
- 27:55उसमें बाहर की तन 30 पोन पर लगाओ अंदाजा तुम जो भी अंदाजा लगाओगे
- 28:07गलत होगा। उस छोटी चम्मच में न्यूट्रॉन 10
- 28:16सेंस मीटर का जो भार होता है वो तुम जानकर चकित हो जाओगे वो भार
- 28:26होता है करोड़ों लाख टन। 31 स्पून फिल्मों करोड़ों लाख टन
- 28:36और वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर उस सबस्टेंस को अगर नहीं तो उठाया
- 28:42नहीं जा सकता अगर उस सबस्टेंस को धरती के ऊपर टी स्पून करके फेंक
- 28:50दिया जाए। तो धरती गर्क हो जाएगी, क्षत
- 28:55विक्षत हो जाएगी, इतना भार होता है उसमें एक चम्मच भर नाइट्रोजन
- 29:01मैट में तुमने अभी उसकी हकीकत को जाना नहीं।
- 29:10तुम अपने आप को बड़ा समझती हो, महान समझती हो, महत्त्व समझती
- 29:16हूँ, जबकि तुम्हारी अंकाक्षी बड़ी सूत्र भला तुम्हारी अंकांक्षाएं
- 29:24मायने का रखती हैं, मैं कहा करता हूँ।
- 29:32अमेरिका के प्रेसिडेंट को नोबेल पुरस्कार दे दो, शांति घर बैठ
- 29:36जाएगा, उसे और कुछ नहीं चाहिए, बस इतनी सी तमन्ना है तुम्हारी और एक
- 29:43प्राइम मिनिस्टर है उसको अवतार घोषित कर दो।
- 29:49बस वो घर बैठ जाएगा। इससे पहले रिटायर नहीं होगा इतनी
- 29:58सी शूत्र आकांक्षाएं अपेक्षाएं लेकर तुम जी रहे हो और इन
- 30:05आकांक्षाओं का कोई मूल्य नहीं है। तुमने कहा, पुत्री, वह मेरी कोई
- 30:14भी इच्छा पूरी नहीं करता अच्छा करता है, समझदार तुम्हारी इच्छा
- 30:24इसीलिए पूरी नहीं होती कि तुम मुर्ख हो।
- 30:29तुम्हारी इच्छा बिल्कुल ऐसी है जैसे छोटा बच्चा कहे ये 12 बार की
- 30:39पिस्टल मुझे दे दो लोडेड पिस्टल। क्या तुम उससे दे दोगे?
- 30:49कितनी जिद करेगा, रोएगा पैर पटकेगा हाथ पटकेगा आंसू बहाएगा चे
- 30:55लाएगा, हो हल्ला करेगा वो तो पात मचाएगा, लेकिन क्या तुम दे दोगे
- 31:01उसे? क्यों?
- 31:07क्योंकि बड़ा विनाशक है, इसे पता है।
- 31:16जीने का सलीका यह है कि तुम्हारी डिमॅंड्स तुम्हारी इच्छाएं।
- 31:23जो वह तृप्त नहीं करता तो अच्छा करता है क्योंकि तुम्हारी दृष्टि
- 31:31अल्प है और उसकी दृष्टि विराट की दृष्टि विराट है।
- 31:37ये बड़ा दूरगामी परिणामों को देखती है।
- 31:42अगर ऐसा हो गया। तो उसके परिणाम क्या होंगे?
- 31:48तुम शूद्र तकलीफों से डरते हो और वह विराट तकलीफों को आने नहीं
- 31:56देना चाहता। तुम्हें तुम्हारे सुख क्षुद्र
- 32:01लगते हैं। इसका प्रमाण है कि तुम जिंदा और
- 32:09ज़िन्दगी उसकी नियामत है। जे का कम पुरस्कार दिया, उसने
- 32:16सारे अंग सही सलामत सही गुर्दे काम करते सही हर्ट काम करता, सही
- 32:20ब्रेन काम करता। सही लंग्स काम करते सभी भीतर के
- 32:26बाहर के ऑर्गन सही काम करते हैं, यह न्यामत उसकी कम है ऊपर से रह
- 32:34गई तुम्हारी इच्छा। तुम्हारी इच्छा वो पूरी नहीं करता
- 32:42तो बिलकुल ठीक करता है। मैं भी देख रहा हूँ तुम्हारी
- 32:48इच्छाएं भी क्या हैं? कुछ भी नहीं।
- 32:52ये बिलकुल वही आकांक्षाएं हैं जैसे अमेरिका का प्रेसिडेंट कहे
- 32:56कि बस मुझे नोबेल शांति दे दो। ये क्या खाक मांगा उसने?
- 33:03उस वृहद सेंसर के मालिक से बहुत कुछ मांगा जा सकता था और तुमने
- 33:11शूद्र चीजों को मांगने में गवां दिया।
- 33:16मांगा भी तो क्या मांगा? तुम अपनी शुद्र इच्छाओं को उसकी
- 33:26वराट इच्छाओं से बढ़ा देते हो और चूर चूर हो जाती है।
- 33:30तुम्हारी इच्छाएं निश्चित ही चूर चूर क्योंकि वह महाबलिशादी है तुम
- 33:38तो एक जर्रा। मिट्टी का भी नहीं बना सकते और
- 33:43उसने इतनी सृजना बना दी जीसको देख देख कर तुम्हारी आँखें फटी रह
- 33:48जाती हैं, नाइट्रोजन में इतना बाहर है, तुम्हें पता है पूछना।
- 34:01सर्च मार्क क्या ऐसा होता है और अभी जैसे जैसे वैज्ञानिक खोजें
- 34:12करेंगे नई नई वैसे वैसे तुम्हारी आँखें फटेंगी उसकी सृजना में क्या
- 34:19कुछ है? अब तो तुमने तलाशा ही क्या है?
- 34:27अभी तो शुरुआत भर भी नहीं हुई। अभी तो बस सवेरा हुआ है, सूरज ने
- 34:34दम भरा है। थोड़ी सी लाली चमकी।
- 34:40अभी प्रकाश तो हुआ नहीं, अभी साइंस बचकाने मोड़ में है और अभी
- 34:47से गुराने लगे कुछ नहीं खोजा है तुम्हे उसने बना लिया और तुमने
- 34:56खोजा भी नहीं अब। और तुम अपने आपको उससे बदलना
- 35:01चाहते हो और तुम कभी कभी चैलेंज भी कर देते हो, करके क्या खाक
- 35:11करके दिखाओ और 4 दिन बाद तुम खाक हो जाओगी।
- 35:18फिर ये शब्द बोलने वाला रहेगा भी कर के दिखाएंगे।
- 35:24रहेगा कोई नहीं रहा। सब धरे के धरे रह जाते हैं।
- 35:40तुम्हारे वक्तव्य सब धरे के धरे रह जाते हैं।
- 35:47क्योंकि तुम्हारे वक्तव्य अहंकार के वक्तव्य परमात्मा जो करता है
- 35:56वह अब विराट की इच्छा होती है। और तुम जो मांगते हो, वह शूद्र की
- 36:02इच्छा होती है। शूद्र की इच्छा से विराट की इच्छा
- 36:06को बढ़ाना शुभ नहीं होता। तुम टूटोगे चिथड़े उड़ेंगे, कांच
- 36:12बिखरेगा और तुम लहूलुहान हो जाओगे।
- 36:24क्योंकि तुमने अपनी शुद्र इच्छा को विराट की इच्छा के साथ बढ़ाया।
- 36:34तुम कहते हो हमने ये मांगा था। और तुम कहती हो पुत्री मेरी इच्छा
- 36:40आजतक एक भी पूरी नहीं की उसने तो और किसने पूरा किया?
- 36:48आयतक ही जिंदा हो। जीवन से महंगी चीज़ कोई हो सकती
- 36:53है। उसने तुम्हें जिंदा रखा है।
- 37:01यह कोई कम का कमाल है, वह कमाल है।
- 37:07वह व्यक्ति को जीवन के सभी साधन महिया अपनाता है।
- 37:18फिर क्या करें? एनी इच्छाएं का बाबा ठहरा अभी मैं
- 37:25तुम्हें जीने की कला देता हूँ। बच्चे की कहानी पूरी हो जानी।
- 37:36शौर्य की सोच रहा है खड़खड़ा इस बच्चे के जैसे हालात वैसे ही तो
- 37:44हमारी हालत है यदि शरीर से हम बूढ़े हो गए, यही तो हम करते हैं।
- 37:54सोच ही रहा था कि उस बच्चे ने अपनी छोटी सी कोली समुद्र में
- 38:04फेंक दी। वह पात्र समुद्र में फेंक दिया।
- 38:12और कुछ अल्फ़ाज़ बोला सबकृतिज़ लिखते हैं कि उस बच्चे ने देखते
- 38:19ही देखते अपना वो प्याला समुद्र में फेंक दिया और बोला ठीक है।
- 38:31हम तो इस प्यारे में नहीं समा सकते लेकिन ये प्यारा तो आप में
- 38:37समा सकता है। ये लो संभालो अपना प्यारा सो
- 38:45क्रिटिस कहते की मुझे इज्जत कर लो।
- 38:50एक छोटे बच्चे ने मुझे कारण भी बता दिया और उसे निपटने का उपाय
- 38:56भी बता दिया। तुम दुखी क्यों हो?
- 39:00उसका कारण यही है कि तुम व्राट की इच्छा के आगे अपनी इच्छाएं को
- 39:06बढ़ा देते रहो और तुम्हारी इच्छाएं।
- 39:11विराट की दृष्टि में पूरी करने योग्य है नहीं, वो तुम्हें कुछ
- 39:15बड़ी इच्छा पूरी करना चाहता है, लेकिन ये अजीब सा फॉर्मूला बताया
- 39:29पूरी ज़िन्दगी की कशमकश का। हल सॉल्वेशन ऑफ यूर ऑल
- 39:38प्रॉब्लेम्स। तुम्हारी सभी समस्याओं को
- 39:44पूर्णतया सथाई हल क्या है? तुम्हारी इच्छाएं तो पूरी नहीं
- 39:50होती। नहीं आता इस सभ्याले में समुद्र
- 39:55लेकिन पहला समुद्र में खो तो सकता है ये तो बिल्कुल हो सकता है।
- 40:03गरिया में सागर समा नहीं सकता, लेकिन सागर में गगरिया तो समा
- 40:09सकती है। बस यही किया बच्चों ने और सो
- 40:14क्रिटिस देखते हैं कि मुझे जीवन को जीने का सलीका मैं बूढ़ा हो
- 40:20गया था, लेकिन मुझे जीने का सलीका नहीं रहा था।
- 40:26आज इस बच्चे ने छोटे से बच्चे ने मुझे जीवन जीने का सिलिका बता
- 40:31दिया। तुम अपनी इच्छाओं के प्याले को
- 40:39उसके समुद्र में एक आकार करता हूँ।
- 40:46तुम अपनी इच्छाओं को उसमें समाहित कर दो, यही वह बनाने ने कहा,
- 40:52ज्योतु दीपाव सोइ पली का अपने प्यालों को समुद्र में फेंक दो।
- 41:00तेरा पाना मीठा लग गया है बस यही इच्छा है मेरी और तू जो करेगा वो
- 41:08मुझे बहुत मीठा लगेगा। गुड़ की तरह शहद की तरह मीठा
- 41:13लगेगा। चॉकलेट कहते है, सारी समस्याओं का
- 41:21दुखों का निदान इसने क्षण में कर दिया।
- 41:25छोटा सा बच्चा की आँखों में आशिक है हृदय पीतन गया था आज वो गुत्थी
- 41:35घुल गई जीवन भर से उलझी हुई थी। मुझे मैं तो वो नहीं समझ सकता तो
- 41:46चलो मैं ही उसमें समझू वह तो मेरी इच्छा पूरी नहीं करता तो चलो मैं
- 41:57ही अपनी इच्छाएं को उसकी इच्छाओं में विलीन कर दूं, जो तो तो पा
- 42:02गया। स्वय बलीकार तू सदा सलामत, नरम का
- 42:16यही है आखिरी हाल और सुकरात जोके छोटे बच्चे के चरणों में सर।
- 42:29और शुक्रांत चरणों में से रख के खड़े मन ही मन में सोचते हैं
- 42:39बच्चे तो आज से मेरा गुरब हो गया है वापस मुड़ चले अपने घर के
- 42:49एथेंस क्यों उन गलियों में? जहाँ उनका ठिकाना था रहने का
- 42:55लेकिन थोड़ी दूर जाके मुड़कर देखा तो बच्चा नहीं था, गायब था
- 43:10वह इच्छा पूरी नहीं करता न करने का वह विराट अस्तित्व का मालिक
- 43:19विराट बुद्धि भी रखता है। उसकी समझ ज्यादा गहरी तुम्हारी
- 43:26समझ ऊपरे ऊपरे सतों के तुम्हारी समझ नेगलिजबल है, वह कोई समझ है
- 43:35ही नहीं तुम वास्तव में मनुष्य वास्तव में मूर्ख है।
- 43:43और मूर्ख की इच्छाएं कैसी होती है?
- 43:45मूर्खता से भरी होती है, बस नोबेल पुरस्कार दे दो, घर बार का खाना
- 43:55गाना अच्छा चला दो। डिक्लेर कर दो की मैं विष्णु का
- 44:05अवतार हूँ, इतनी सी इच्छा पूरी हो जाएगी।
- 44:18लेकिन तुम्हारी इच्छा कितनी भी पूरी हो जाए, वो इच्छाएं का पूरा
- 44:25होना भी तुम्हारे लिए दुख का सबब बनेगा।
- 44:29तुम्हारी इच्छा तो पूरी होनी ही नहीं चाहिए तो?
- 44:36प्रार्थना करते हे प्रभु गाहे बगाहे गलती से अगर मैं कुछ मांगू
- 44:43भी नहीं, उसे पूरी मत कर देना क्योंकि मैं क्षुद्र हूँ,
- 44:49मांगूंगा भी क्या, शुद्र ही तो मांगूंगा?
- 44:54सुद्र भला विराट को मांग कैसे हो सकता है?
- 44:57जब मुझे तुम्हारा विराट है तो वह पता नहीं मनुष्य भगवान को याद
- 45:05करता है, उसको याद करता है जिसका अता पता हो जबकि याद उसकी करनी
- 45:19होती है। जिसका कोई अता फता हो तुमने कभी
- 45:22देखा तो है नहीं भगवान सेब कैसा अंगूर कैसा आलू कैसा?
- 45:32इसलिए कभी तुमने देखा तभी तो याद कर पाती हूँ अगर देखा नहीं तो तुम
- 45:37याद कैसे करोगे? किसको याद करो ऊंट पठान याद कर
- 45:43बैठो इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ स्मरण नाम की बिमारी हो गई है
- 45:48तुम्हें यह एक बिमारी है इससे कभी किसी को कुछ मिला?
- 45:56सिर्फ अहंकार के ज्यादा बढ़ने के अलावा और कुछ हुआ तुम्हारे साथ
- 46:01तुमने सिर्फ बैंक बैलेंस कर दिया कि मैंने राम राम के बैंक में दो
- 46:07अरब राम के नाम जमा करा दिए। करा दो।
- 46:13उसी की जवान उसी की शक्ति से निकला हुआ राम तुम्हारा कैसे हो
- 46:19गया? उसी की दी हुई जीवा उपकरण उसका
- 46:26उसी की दी हुई शक्ति एनर्जी उसकी उसी के द्वारा बोला गया।
- 46:31राम। तुम्हारी संपत्ति कैसे हो गया?
- 46:34बताओ कभी सोचा तुमने ये सब इन्स्ट्रुमेंट उसके तुम्हारा क्या
- 46:45है? क्या उसने तो सब बनाया?
- 46:53तुमने तो सच में बनाया भी कुछ नहीं और कमाया भी कुछ नहीं सही
- 46:56देखो क्योंकि जो कमाया जाता है वो अंतिम में माटी में घर जाता है
- 47:04धड़। फिर तुम बोल नहीं पाते फिर तो मैं
- 47:19कहने की शक्ति भी खो देते हो अभी मैं मैं करते फिरते हो फिर लाते
- 47:28फिरते हो, लेकिन। वक्त आएगा।
- 47:35वक्त आता है सदा से सभी का वक्त आएगा जब बोलती बंद हो जाती है
- 47:44उसके बाद। उड़ जाण प्राण तेरे।
- 47:56फिर क्यों न बोल दा उड़ जा न प्राण।
- 48:07तेरे। फिर क्यों नहीं बोलगा होने वाली
- 48:21कुंजियाँ तो? फिर क्यों नहीं खोलगा?
- 48:29होने। वाली कुंजिया तुम फिर?
- 48:35क्यों नहीं खोलदा केथे तेरी आंकड़ा?
- 48:44के केथे अभिमान। किथे तेरी आंकड़ा किथे अभिमान
- 49:04हुए। फलदा भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान
- 49:17है मिट्टी दे। आ बंद आ।
- 49:27बंदेया तू कर करे। मानो ये।
- 49:35पल दा परोसा कोई। ना ऐसी तेरी जान।
- 49:46मिट्टी दे आबंद, यार। कहाँ सर ये आंकड़े कहाँ जो मूछों
- 49:57को बट जूता था, कहाँ वो तिल्ली वाले जूते हैं?
- 50:04कहाँ? कित्ते तेरिया?
- 50:11कड़ा ते कित्ते अभिमान और पालिता भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान मिट्टी
- 50:18देया बंधेया तू कादा करे मान प्रश्न फिर से सुन लो।
- 50:27मेन भी चमत्कार बखाओ बाबा जी पंजाबी में रब मेरी क्यों नहीं
- 50:33सुनता? मैं बहुत परेशान हूँ, मेरी कोई भी
- 50:39इच्छा रख पूरी क्यों नहीं करता बाबा जी?
- 50:47क्योंकि तुम्हारी इच्छाएं गलत हैं, बिलकुल वैसी जैसे बच्चा कहे
- 50:54यार बाल पर मुझे तुम्हारी इच्छाएं बिलकुल वैसी।
- 51:02मैं तुम्हें तख्तों ताज भी बिठाना चाहता हूँ और तुम कांटों की सेट
- 51:10पर सोना चाहती हो। अब क्या तुम्हारी इच्छाओं को पूरी
- 51:15कर दिया जाए? नहीं पूरा कर?
- 51:24वह जानता है मेरे इस बच्चे में क्या हुनर डाला मैंने मेरे इस
- 51:32बच्चे को मैंने क्या सौंपा और वक्त आने पे वो तुम्हें उसके
- 51:41योग्य बना देगा। तुम अभी से जद मत करो, तुम अभी से
- 51:47जल्दबाजी मत करो, वक्त आएगा तुम अपनी इच्छाओं को अगर पूरी ना हो
- 51:57तो रोना मत चलाना मत, शोर शराबा मत करना।
- 52:02बस वह जो करता है उसको स्वीकार कर लेना जो तुध पांव है तुम्हें
- 52:11अच्छा लगे, बुरा लगे ये अहंकार को अच्छा लगेगा, अहंकार को ही बुरा
- 52:16लगेगा लगने। तुम ज़रा भी डेगना मत तुम ज़रा भी
- 52:26सोचना मत, तुम कपना मत इच्छा वह पूरी नहीं करता तो उस विराट की
- 52:32कोई रजा और है तुम मानते हो शूद्र वह तुम्हें देना चाहता है विराट।
- 52:43इसलिए जीने का सिलिका बताऊँ पुत्र सभी श्रोताओं को जीने का सिलिका
- 52:50बता दूंगा कि तुम्हारी इच्छाओं को उसकी इच्छाओं में विलीन करता हूँ।
- 52:57उसकी इच्छाएं सर्वोपरि हैं। वह जैसा चाहेगा करवा लेगा।
- 53:04वो जैसा चाहेगा अब भी करवाता है इसलिए तुम दुखी हो, अब भी करवा
- 53:11रहा है वो अब भी तुम चाह रहे हो? कि ऐसा होना चाहिए।
- 53:20अब भी वो करवा रहा है जैसा होना चाहिए उसके मुताबिक ये संघर्ष में
- 53:27ही तुम दुखी हो इस संघर्ष के कारण दुख पैदा होता है।
- 53:36पूछ रहे हैं सूक्ष्म वाले। भारी पदार्थ न्यूट्रान मेटर क्या
- 53:44अंगद के पांव में लगा था जो उठाया नहीं गया?
- 53:49अंगद का पांव हिलाया नहीं गया। बिला शक टस से मस भी नहीं हुआ
- 53:56लेकिन। न्यूट्रॉन मैटर नहीं लगा क्योंकि
- 54:00न्यूट्रॉन मैटर इतना बड़ा होता है कि उसका पांव ही उसमें स्राक हो
- 54:06जाता है। धरती में स्राक हो जाता है उसका
- 54:12एक चम्मच न्यूट्रॉन मैटर। एक अरब टन के बराबर होता है।
- 54:19भारत एक अरब टन कैसे झेलेगा? एक अरब टन अंगद का पांव कैसे
- 54:29झेलेगा? ऐसी कोई टेक्नोलॉजी उस वक्त रही
- 54:33होगी, मैं नहीं समझती। न्यूट्रान बनता है इलेक्ट्रान और
- 54:41प्रोटॉन इन दोनों से मिलाकर लेकिन ऐसी संभावना नजर नहीं आती कि अंगद
- 54:49ने जर्रा भी एक जर्रा भी अपने पांव में लगा दिया होगा क्योंकि
- 54:53वो जर्रा भी इतना भारी होगा। यह धरती को फाड़ देगा ये संभावना
- 55:01नहीं है। कुछ और पदार्थ हो सकता है जो कि
- 55:0612 पदार्थ हो। सिर्फ न्यूट्रॉन मैटर ही इतना भरा
- 55:09नहीं होता और भी बहुत से पदार्थ होते हैं जो भरे होते हैं।
- 55:16हो सकता है उनमें से पीछे लगा लिया हो।
- 55:20वैसे अगर देखा जाए तो उसे आत्मबल ही कहा जाएगा।
- 55:24आत्मबल, संकल्प, शक्ति या सत्य का बल।
- 55:33उसके कारण ही अंगद का पांव नहीं उठ सका।
- 55:41नहीं वो मैंने गलत बोल दिया होगा। न्यूट्रॉन मैटर है ना कि
- 55:46नाइट्रोसेन मैटर है, न्यूट्रॉन मैटर, न्यूट्रॉन स्टार होते हैं।
- 55:53और न्यूट्रॉन से भरे होते हैं और न्यूट्रॉन बनता कैसे, इलेक्ट्रॉन
- 56:01और प्रोटॉन ये तीन ही चीजें होती हैं इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन,
- 56:05न्यूट्रॉन तो इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन।
- 56:09ये दोनों मिलकर न्यूट्रॉन बना देते हैं।
- 56:12और बड़ा कंजस्टेड हो जाता है वो लेकिन कंजस्टेड होने के साथ साथ
- 56:18हेवी बहुत हो जाता है, अत्यधिक हेवी हो जाता है।
- 56:22इससे अनुमान लगाइए आप एक चम्मच न्यूट्रॉन मैट्रिक एक अरब टन का
- 56:31हिसाब लगाते रहिए। इतना वजन हो सकता है इसका लेकिन
- 56:37इसको हम संकल्प शक्ति ही कहेंगे। भगवान राम की कृपा, सत्य की कृपा
- 56:46और संकल्प की शक्ति। उसकी यादों के दीप जलने दो,
- 57:00शब्दों से उसका उदघोष न करो, शब्द उसको न व्याठित कर सकते हैं, न
- 57:09इंगित कर सकते हैं। शाममजक आंसू बहती आ गई, शाममजक
- 57:31आंसू बहती। आ गई हर तरफ गम की उदासी, छ गई वी
- 57:51पु यादों। के जलाकर रो लिए आप के पहलू में
- 58:08आग रो ली। दास्तां सुनाकर रो लिए।
- 58:25आप के पहलू में। रो लिए।
- 58:42धन्यवाद।