Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Sep 25 - जपुजी साहिब पौड़ी-15 | मोक्ष का दरवाजा कब खुलेगा? अचेतन मन कैसे भरता है और खाली कैसे होगा?
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- 0:14मन्नै पांवि मोख द्वार मन्नै पर वार सिधर आइए बाबा जीके।
- 0:31जपजी साहब के पुत्र में पड़ी मन्ने पांवई मूर्ख द्वार बड़ा
- 0:45शानदार शब्द है। तुम कहते हैं मानो ये मान लो।
- 0:58कि परमात्मा है, यह मान लो कि तुम शरीर नहीं, तुम विचार नहीं हो,
- 1:11तुम भावनाओं नहीं हो। मान लो लेकिन बाबा कुछ और कहते
- 1:17हैं, तुम्हारे पथ पर दर्शक कहते हैं मान लो मान ने से मुक्ति हो
- 1:31जाएंगे, लेकिन बाबा कहते हैं मने पानी मोख दबा।
- 1:39मोक्ष का दरवाजा मिल जाएगा अगर तुम मन से पार ध्यान देना
- 1:50तुम्हारा मानना मन के भीतर रह के होता है मन से बाहर।
- 2:00रात जब सो जाते हो तो मन से बाहर हो जाते हो तो कहाँ तुम्हारी
- 2:04मान्यताएँ रह जाती हैं। रात सुसुक्ति के भीतर तुम्हारी
- 2:12कोई मान्यता शेष रहती। अलग से एक कोने में दुबक के रह
- 2:17जाती है और तुम मज़े से अपने में आनंद में लीन गहरी शक्ति का आनंद
- 2:25उठाते हैं, ध्यान देना सारी दुनिया ऐसी चीज़ में है मान लो।
- 2:39मान लो बाबा कैसे है मानना तो मन के अधीन ही हो जाएगा मन से ही तुम
- 2:49मन होगे तुम मन के बिना तुम मानोगे कैसे?
- 2:56मन से ही तो मानोगे? मन से ही शास्त्र पड़ोगे मन से ही
- 3:03गुरु की बात सुनोगे, लेकिन पापा कहते हैं मन के अधीन ही रहोगे अगर
- 3:18तुमने मन से माना। तो फिर मोक्ष का द्वार तुम ढूंढना
- 3:23मत मोक्ष तुम्हें मिलेगा नहीं मोक्ष यानी तुम आजाद नहीं हो
- 3:30पाओगे तुम निर्भर नहीं हो पाओगे तुम हर वक्त भारी भारी महसूस
- 3:35करोगे दबे दबे कुछ ले कुछ ले बाहर युक्त।
- 3:44फिर पहला शब्दों वही मन मन से पार हो जाओ।
- 3:55मन से पार होकर ही तुम्हें मोक्ष का दरवाजा मिलेगा।
- 4:03वंशित वार हो गए तो तुम्हारी सब मान्यताएँ जो तुमने थोप ली और
- 4:10थोपनी किसी के कहने से थी, किसी शास्त्र के बढ़ने से थी।
- 4:23कोई कहीं लिखी हुई बात तुमने पढ़ ली सुनी सुनाई बात तुमने माल ली
- 4:32जब तुम भीतर जाओगे तो तुम पाओगे अनंत अनंत मान्यताएँ तुम बड़ी
- 4:38बड़ी है तुम्हारे भितरा जी। तुम्हारा अचेतन एक वेस्ट प्रॉडक्ट
- 4:48का स्टोर हो गया है। जैसे हम कचरा घर में फालतू फालतू
- 4:53की चीजें फेंकते हैं। वैसे तुम्हारा अचेतन मन हो गया।
- 4:59तुमने भीतर न जाने क्या कुछ पटक लिया है और तुम कहते हो ये खजाना
- 5:08जैसे बच्चे इधर उधर से कंकड़, पत्थर रंगदार कांच के टुकड़े
- 5:15बंटे। थगान के ले आते हैं और जेब भर
- 5:18लेते हैं और वो मान के बैठ जाते हैं कि बस यही है संपत्ति अगर रात
- 5:30में तुम बच्चे की कितनी गहरी निद्रा में सोया बच्चे की जेब में
- 5:34हाथ मारोगे तो बच्चा फ़ोन करेगा नहीं।
- 5:37मेरी संपत्ति को मच्छी में उठ जाएगा वह ऐसे ही तुम तुम्हारी
- 5:45मान्यताओं को चीड़ छेड़ होने देते।
- 5:49जब कोई संत बोलता है तुम तुरंत उसके ऊपर रेक्षण करते हो।
- 5:53ये टिक के टिप्पणियां जो आती हैं। प्रवचनों के ऊपर ये तुम्हारी सब
- 5:59मानी हुई बातें हैं। ऐसा नहीं है कि तुमने सत्य को जान
- 6:04लिया है और बाबा तुम्हें एक अमूल्य सूत्र देते हैं।
- 6:16बाबा जानते हैं कि यह। तुम्हारी मान्यताएँ ही तुम्हारे
- 6:21ऊपर बोझ हैं, तुम हर वक्त मरे मरे से रहते हो।
- 6:25लदे लदे से ये भारी बोझ है। और बोझ क्या है ये पता लेकिन
- 6:35भारीपन है बहुत गहरा। ये सब तुम्हारी मान्यताओं का भार
- 6:40है। जब तुमने मान लिया किसी ने मान
- 6:44लिया कि परमात्मा है, किसी ने मान लिया कि परमात्मा नहीं है, लेकिन
- 6:49याद रखना दोनों ही मान्यताएँ हैं। तुम्हारी जो कहता है परमात्मा है
- 6:55नहीं तो उसने देखा। अगर परमात्मा देख लेता तो ये
- 7:00हालात थोड़ी होती तुम्हारे तुम खुशी से नाचते फिरते मीरा की तरह
- 7:06तुम खुशी से गाये न गाते प्रभु के सलागा के नानक की तरह तुम सुरती
- 7:13और कुंवर मंडूब जाते कबीर के। लेकिन ये तुम्हारी मान्यताएँ हैं
- 7:23कि परमात्मा है और बिना देखे जो तुम मान लेते हो।
- 7:29दट। इस ए वाइडन अपॉन युअर माइंड वह
- 7:33तुम्हारे दिमाग के ऊपर एक। वह तुम्हें मुक्त नहीं करता तो
- 7:40यहाँ बाबा करते हैं। बात मोक्ष की मुक्ति की और
- 7:45तुम्हारी मान्यताएँ तुम्हें भार युक्त करती हैं, भार ही नहीं
- 7:49करता। मनयपा में मोख द्वार अद्भुत सूत्र
- 8:00देते हैं। बाबा के मन की बात मन के वार हो
- 8:05जाओ की सारी मान्यताएँ मन के भीतर ही हैं।
- 8:11इस सारे कचरे को तुम छोड़ दोगे अगर मन के पार हो गए, क्योंकि
- 8:15सारा कचरा मन में पंड की तरह बंधा हुआ है।
- 8:20एक पोटली की तरह तुमने मन में सारी मान्यताओं को बांध लिया है,
- 8:24उसे ही हम अचितन मन कहते हैं। सारा भार मनुष्यता के भीतर
- 8:33मान्यताओं का भार है। अगर किसी दिन मनुष्य का सौभाग्य
- 8:40होगा तो वह सभी इन मान्यताओं से आज़ाद हो जायेगा।
- 8:47फिर कोई मान्यता न रहेंगी। सत्य होगा और सत्य का दर्शन होगा
- 8:53और सत्य तुम्हें निर्भार करता है। मान्यता तुम्हें भार देती है
- 9:02दर्शन सत्य दर्शन तुम्हें भार मुक्त कर।
- 9:10सत्य दर्शन कब होगा? पहली कौड़ी है या अभी हम करीब
- 9:15करीब बीच में आए हैं? पंद्रहवीं कौड़ी तो बाबा तो मैं
- 9:22कहते हैं कि मान्यताओं से मुक्त हो जाओ।
- 9:27यह तुम्हारे अचेतन पर भार हैं और सारा भार तुम्हारे ऊपर जो भी तुम
- 9:32महसूस करते हो दिन भर ये बीता हुआ ज़माना बीती हुई यादें आने वाली
- 9:45कल की कल्पनाएं। ये सब तुम्हारे मन के भीतर कूड़ा
- 9:50है, जिन का चयन छीन जाता है और सुहानी रातों की नींद छीन जाता
- 9:59है। तुम्हें याद आती हैं वो बातें जो
- 10:09आज कहीं नहीं समृति के अलावा। तुम्हारी समृद्धि में वो चीजें
- 10:16बैठी हैं और आज भी तुम उनसे चिपके हुए हो, वो तुम्हे दुखी कर रहे
- 10:22हैं। सुहाने चांदनी रातें।
- 11:00तुम्हारे प्यार की बातें। ंदे सुहाने चांदी रहा, हम सोने नहीं
- 11:26दे रहे कि ये नीत किसने लूट ली तुम्हारी।
- 11:31नींद, बड़ा खजाना और ये दुष्ट लोग तुम्हें ब्रह्म मुहूर्त का छलावा
- 11:39दिखा के तुमसे प्यारी प्यारी नींद छीन लेते हैं और आज उसके इफेक्ट्स
- 11:47साइड इफेक्ट्स आने शुरू होते हैं। सारा अमेरिका इनसोवनिया की बिमारी
- 11:53से जूझ रहा है। नींद नहीं आती, ये परमात्मा की
- 12:01प्रकृति की इनायत थी। मानवता के ऊपर भूख और नींद ये
- 12:07दोनों छिन गई। और ऊपर से ये दुष्ट गुरु ये रात
- 12:15को 1:30 बजे दर्शन देते हैं तो लू के पट्ठे मुझे ये बताओ, साँझ ढलते
- 12:25ही मैलाटॉन पैदा होना शुरू हो जाता है।
- 12:31तुम ही ज्यादा समझदार हो, ये मेलाटोनिन तुम्हें नींद पैदा करता
- 12:37है और प्रकृति चाहती है कि तुम सो जाओ, कंघे तुम्हें जगा लेते हैं।
- 12:48बाबा जी दर्शन। ज़रा बताओ माटी का कु तेरा कैसो
- 13:00नचती हैं कैसो नचती? डरियो फिरत है माटी का कैसो नच ते
- 13:20इनका हाल गोंगडपड़ी काले पीले मुक्कर के।
- 13:29मैंने ज़िन्दगी में दाढ़ी काली करते तो लोग देखे, लेकिन पीली
- 13:34करती। पहली बार तो जो किसी का चैन छीन
- 13:42ले, जो किसी का नहीं छीन ले, उससे बड़ा पाप ही कोई हो सकता है।
- 13:49आपने बहुत बार सुना होगा कि सो ही व्यक्ति को जगाना पाप होता है और
- 14:01जो नींद ही छीन ले वो कितना बड़ा पाप?
- 14:07आज तुम्हें पता नहीं। आज हिंदुस्तान ने वो अमीरी देखी
- 14:12नहीं, लेकिन जिन मुल्कों ने अमीरी देखी उनसे पूछो नींद की कीमत क्या
- 14:18है? मेरे पास रोज़ पैगाम आते हैं बाबा
- 14:25हमारी नींद छीन ली थी। यह प्रकृति की दांत है।
- 14:36आज तुम्हें गधे दे दिए गए डंडप के बड़े ऊंचे ऊंचे मलाएं रेशमी गधे
- 14:42नहीं तो छिंड दी गई हजारों प्रकार के स्वादिष्ट भोजन दे दिए गए।
- 14:50भूख छिंड दी गई। क्या करोगे?
- 14:56आराम छीन लिया गया, चैन छीन लिया गया, धन के अम्बार दे दिए गए क्या
- 15:06करोगे माथा के साओगे इनसे? इस वाघलपन ने तुम्हारा सब लूट
- 15:24लिया, तुम बेजान से मरे मरे से प्राणविहीन चले तो जा रहे हो
- 15:37लेकिन उस फुटबॉल की तरह चले जा रहे हो?
- 15:40जीसको 22 से खिलाड़ी जिधर कि को मार देते हैं, उधर ही चल पड़ता
- 15:46है। उसे पता है मैं नहीं जाना जिधर
- 15:53कोई धकेल देता है उधर चल जाता है। आज बाबा पर्ची निकालने के बाहर
- 15:59चले गए। लाखों का झूठ बैठे हैं, तुम्हें
- 16:01पता नहीं है ये सब दुखी लोगों का झुंड है।
- 16:04सुखी व्यक्ति कभी कहीं जाते हैं। हाँ हाँ, सुखी व्यक्ति कभी कहीं
- 16:15जाता नहीं। क्योंकि वो वहाँ चला गया जहाँ
- 16:20जाने के बाद कहीं और जाने की आवश्यकता से रह नहीं जाती वो वहाँ
- 16:26चला गया इसलिए सूखी व्यक्ति कभी कहीं नहीं जाता मैं कभी गया हूँ
- 16:3413 बरसो। तो जो कहाँ टूट गया?
- 16:40हॉस्पिटल ही जाना पड़ेगा, हॉस्पिटल तो यहाँ नहीं आ सकता,
- 16:46इट्स ए कंपलसरी लेकिन सुख के लिए नहीं किया।
- 16:54कारण वर्ष गया हूँ तुम जाते हो सूखा के लिए कोई वह वह पर्ची
- 16:58निकालेगा कोई वह वह रुद्राक्ष देगा।
- 17:04लाखों लोग मर जाते हैं। आज जिंदगी इतनी सस्ती हो गई हैं
- 17:11ना इन्हें शर्म आती हैं। नो आपको अकल आती है कोई तुम्हारी
- 17:18अकल छीन के ले गया बाबू? मन ने पांवई मोख गवार मन से पार
- 17:41हो जाओ पहली पोड़ी है ये पोड़ी का मतलब पहला रास्ता।
- 17:50और आखिरी रास्ता एक ही रस्सा है बाबा एक ही रस्सा तुम्हें बताते
- 18:01हैं यह बात अलग है के अलग अलग ढंगों से बताते हैं, बात वही है।
- 18:10कहले के ढंग अलहजान कभी कहते हैं, सुनीं कभी कहते हैं पंछ कभी कहते
- 18:20हैं मन्ने अलग अलग बात कहते हैं, ढंग अलग अलग बात वही।
- 18:33मने पामेई मोख दवा तुम्हारे भीतर जो कचरा भर है तुमने मान लिया है
- 18:41और तुम्हारे संत गुरु तुम्हारे मार्गदर्शक ये कहते हैं कि तुम
- 18:46मान लो मत मानना किसी चीज़ को। बोझ हो जाएगा।
- 18:52आपके वितरा क्षेत्र में कुछ भी मत मानना और ध्यान रखना जो तुमने देख
- 18:59लिया वो तुम्हारे अचेतन में बाहर नहीं बनता।
- 19:03वो तुम्हें मुक्त करता है तब एक में व्याख्या हाँ।
- 19:10दर्शन तुम्हें मुक्त करता है। मान्यता तुम्हें बोझिल करती है,
- 19:18दर्शन तुम्हें मुक्त करता है। मान्यता तुम्हें बोझिल करती है
- 19:27दर्शन। अनुभव से होता है।
- 19:30मान्यता मन से होती है इसलिए बाबा कहते हैं कि लाख उपाय कर लो,
- 19:44दर्शन के बिना तुम्हारी जौन सुद्र।
- 19:51तुम्हारे मन का बोझ उतरेगा नहीं, तुम दमंध में ही रहोगे, तुम्हारी
- 19:58ये गोल गांठ खुलेगा। उतर गए हो, उतर गए हो?
- 20:24मेरे मन का सं। वो तिर गए हो मेरे मन का संसार।
- 20:50ओह तेरे गयो मेरे मन का संसार। जब तू उधर।
- 21:06संसयात्मा वनिष्यति अगर संचय मुक्त होना चाहते हो तो एक ही ठंड
- 21:12है, एक ही हाल है, दर्शन कर लो, अनुभव कर लो, स्वयं मानो मत।
- 21:22उतर गए हों मेरे। मन का संसार जब तिरोधर हो सन पायो
- 21:40ठाकुर तुम सरनाई। मन से बाहर हो जाओ एक ही तरीका
- 22:11दूसरा कोई नहीं छोड़ो विज्ञान भैरोतंत्र को उलझ जाओगे तुम।
- 22:18मल्टीडाइमेंशनल हो जाओगे और तुम पहले से ही बहुत चितवा दी तुमने न
- 22:25जाने कितनी कितनी तरफ़ जाने की तरकीबें आजमानी, लेकिन हाथ कुछ
- 22:33नहीं पढ़ा। खाली के खाली हो तो बाबा कहते हैं
- 22:42देखो मन से बात अगर हल्का होना चाहते, आनंदित होना चाहते, सुखी
- 22:52होना चाहते। मज़े में रहना चाहते तो मान्यता
- 22:56होता। मन से पार होने का मतलब मान्यताओं
- 23:04को त्याग देना। मैं जब आपकी मान्यताओं को तोड़ता
- 23:09हूँ तो आपको बड़ा पसंद है, बड़े कॉमेंट्स आते हैं और मैं समझ जाता
- 23:16हूँ कि दुख तीरक पे हाथ रखते हैं बेटे के।
- 23:22मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो डाली, सैकड़ों कमेंट आई, उनकी आय
- 23:29मैं अच्छी तरह से जानता हूँ। दुनिया कितनी पहुंची है सारी
- 23:34दुनिया दुखी है तो पहुंचेगा खाप। जो सुखी है वो भूल रहा है कि
- 23:40मैंने ये देखा इसलिए बोल रहा है कि तुम ये जान लो कि सुख भी होता
- 23:48है। ना तो मेरी बिमारी है, ना कोई
- 24:00अपंग आवाहिज हूँ ना ऐसा नहीं कि मुझे भूख नहीं लगती।
- 24:0613 बरसों से खत्म हूँ भाई जीवित हूँ कैलोरीज का उत्पादन हो गया
- 24:12होता है इसलिए तो दो 2 घंटे बोल लेता हूँ।
- 24:17और भीतर के अंग प्रत्यंग बिलकुल सुजारू रूप से चालू, फिर भी मैं
- 24:23क्यों नहीं खाता कभी सोचा नहीं, लेकिन सोचने की आवश्यकता नहीं।
- 24:30क्योंकि तुम्हारे ये शांत तुम्हें मान्यताओं से मुक्त करेंगे तो तुम
- 24:34सोचने पे भी बस होगे, सोचने पे भी बस ये होने ही नहीं देते तुम्हारा
- 24:40ध्यान और तरफ ले जाते हैं। एक राजनीति करते अच्छे दिन।
- 24:54महंगाई घटाऊंगा भ्रष्टाचार मिटाऊंगा काला धन लाऊंगा, दिन
- 25:01सुखाले आ जाएंगे क्या सुंदर जीवन होगा तुम्हारा सब जवार दिखाने में
- 25:11दक्ष है ये बंदा। हमें कोई आपत्ति सन्तु को क्या?
- 25:17आपत्ति जीस बंदे ने बाहर ही नहीं जाना उसको क्या आपत्ति कोई राज़
- 25:24कर कोई बदले, कोई ना बदले। हम तो वोट डालने भी नहीं गए।
- 25:32लेकिन मैं बात करता हूँ कि सर्वोवरि हमारे पास जो सबसे
- 25:44ज्यादा महत्वपूर्ण वंदनीय जिसकी हम पूजा कर सकते हैं।
- 25:52उस स्थिति में पहुँच गए हो तुम और कमाल की बात ये है हैरानी की बात
- 25:58ये बंदा झूठ बोलता है। क्या क्या अच्छी बात है तुम उसे
- 26:20जो दे सकते थे दे दिया तुम भगवान तो बना नहीं सकते हो और अगर तुम
- 26:26भगवान भी बना दोगे और मूर्ख हो, तुम खुद ही भगवान हो जाओ, किसी को
- 26:32भगवान तुम बना कैसे सकते हो? तुम किसी को भगवान नहीं बना सकते।
- 26:40भगवान तो बस एक है वो एक है श्रद्धा से एक है वो तो बन गया
- 26:46कैसे बन गया उसे ही पता है ताकि अगर ना।
- 26:53कहीं ना जा रही जे को आँखें पांच छह पछताए उसकी बातें उससे ये होता
- 27:03है वह कैसे बन गया तुम किसी को भगवान नहीं बना सकते लेकिन तुमने
- 27:10जो तुम दे सकते थे हाथ काट के दे। अब ये कमाल की बात नहीं ना तो
- 27:192,00,00,000 रोजगार है छिन गए लोगों को भाई अब एक बात बताइए।
- 27:34इतने बड़े देश में जो धरती का सबसे बड़ा देश है, उस देश में
- 27:4380,00,00,000 लोगों को पांच किलो अनाज देना पड़े तो यह गर्व की बात
- 27:49है या शर्म की? उसके प्रधान सेवक को शर्म आनी
- 27:55चाहिए या गर्भ से छाती फूरकर 56 इंच हो जानी चाहिए?
- 28:15ये वो बोल रहा है जिसके ऊपर किसी चीज़ का कोई फर्क नहीं है।
- 28:22नैनम सिद्धांत शास्त्र नैनम दहति पर उख नहीं चयनम के लिए गन्ता को
- 28:28न सुसंती मार होता है। यह वो बोल रहा है जो मरता ना
- 28:35गलता, ना जलता, ना सूखता, ना बिरता।
- 28:39जो अजहर जो अमर वह बोल रहा है। यह बात शर्म की या गर्म और सच्चाई
- 28:55को दबाने में ये महत्ता की बात है तुम सच्चाई को दबाती हो, सारी
- 29:07दुनिया जानती। और तुम्हें शायद पता नहीं देना को
- 29:19हिसाब देना पाई पाई एक पाई पाई का हिसाब देना होता है, उसकी दरगाह
- 29:26में उसकी दरगाह में छोड़ो। आजकल तो इसी दरगाह में हिसाब देना
- 29:32पड़ रहा है। अरे भाई क्या बोल के आए थे, कुछ
- 29:39शर्म आती जनता ने अपना कर्तव्य निर्वाहण कर दिया।
- 29:52अब कोई कहता है वोट चोरी करके बन रहा है।
- 29:55अरे भाई दो बारी बन गया तीन बारी बन गया तो क्या सारी उम्र बैठा
- 29:58रहे, क्या जिंदगी भी तुम अमर हो जाएगा?
- 30:10राजनीतिक लोगों की बात इससे बड़ी पधवी जनता।
- 30:20आपको दे नहीं सकते जनता के बलबूते से बाहर और फिर तुम उनके ऊपर ऐसी
- 30:27ऐसी संगलियां डाल दो की तुम ये नहीं कर सकते, तुम वो नहीं कर
- 30:33सकते, तुम वो नहीं कर सकते। ये तो कानून न हुए, ये तो बंधन हो
- 30:42गए। तुम ये शब्द नहीं बोल सकते, तुम
- 30:47ये शब्द नहीं बोल सकते रे भाई। हमारे संविधान के अंदर हम बोल
- 30:52सकते हैं जो चाहते हैं बोल सकते हैं।
- 30:56बोलने का अधिकार तुमसे नहीं सुन रहे हो मन में पांवी मोख दवार
- 31:11तुम्हारी सभी मन से तुम्हारे मन के ऊपर बोझ अगर निर्भोज होना
- 31:22चाहती हूँ, टेंशन लेस होना चाहती हूँ।
- 31:26बर्डन बेस्ट होना चाहती हूँ तो बाबा क्या कहते हैं?
- 31:30मन से बात हो जाओ इस पोटली को उठा के फेंक दो अचेतन मन की पोटली को
- 31:36उठा के फेंक दो तुम खिस के जाओ थोड़ा अचेतन मन की पोटली से भरे
- 31:48हो जाओ। मुन्ने मन से पार बचाओ, अभी तक
- 31:56क्या है? अभी तक तुम इस सपोटली को अपनी
- 32:00संपत्ति समझकर सिर पर रखो, वह आचार्य हो, वह सर्व हो।
- 32:09ये डरते हैं कहीं हमारा ज्ञान शीजोफनिया ना हो जाए हम भूल ना
- 32:17जाए इसे संपत्ति समझते हैं वो क्यों?
- 32:24क्योंकि अगर ये छीन गया या भूल गए तो भी आप?
- 32:30और बाल, बच्चे और परिवार इनको कैसे बोलूं?
- 32:37ये आकांक्षाएं ये कल्पनाएं कैसे पूरी करेंगे?
- 32:51हमारी कुछ मजबूरियां हैं, ये छोड़ नहीं सकते मन में पांवई मोख द्वार
- 33:13अगर तुम हल्का होना चाहती हो, टेंशन लेस होना चाहती हो, काम
- 33:18होना चाहती हो? शांत होना चाहिए तो ओम शांति ओम
- 33:22शांति करने से कुछ नहीं उस स्तर पर पहुँच जाओ जहाँ शांति है गर्मी
- 33:32में बैठकर ठंड कह ठंड कह ठंड कह। जाप करने से ठंडक नहीं मिलती है,
- 33:40ठंडक मिलती है एयर कंडीशन्ड रूम में जाके एसी के सामने बैठ जाओ।
- 33:46ये है सही उपाय गर्मी के भीतर भरी गर्मी 50 डिग्री सेल्सियस।
- 33:56पसीना आ रहा और तुम जाप कर रहे ठंडक बहुत है, ठंडक बहुत है।
- 34:07ये है मान्यता सत्य क्या है? वहाँ से उठो एयर कंडीशन्ड रूम में
- 34:16बैठ जाओ, क्योंकि एयर कंडीशन्ड रूम है भाई तुम्हारी ही भीतर है,
- 34:23एक ऐसा तल मैं रोज़ बोलता हूँ जहाँ फिजाएं बहती हैं सुगंधी लिए
- 34:33हो। ठंडी, ठंडी, हल्की, हल्की मीठी
- 34:41मीठी शीतल शीतल महकी महकी सी हवाएं अदाएं वहाँ तुम पाओगे वहाँ
- 34:52चले जाओ। यहाँ बैठे बैठे ओम शांति का जापना
- 34:58करो ये लोग तुम्हें बुद्धि बना रहे हैं।
- 35:03राजनीतिक लोगों की ये भी राजनीति है बस लेबर लगा दिया।
- 35:16धार्मिकता का लेबर लगा दिया है और लेबर लगाने से कोई सत्य नहीं हो
- 35:22जाता। झूठ तो ओम शांति कहने से ठंडक
- 35:28बहुत है। ठंडक बहुत है ये कहने से ठंडक
- 35:31नहीं आएगी, शांति नहीं आएगी। तुम भरे पड़े हो गर्मी से।
- 35:37ये ब्रह्मकुमारियों से थोड़ी सी बात कह दो ऐसी छिड़ेंगी ये जब मर
- 35:50जाएगा ना बंदा तो जाके देख के आती है शमशान में कि हाँ अब मर।
- 35:59फिर पीछा जोड़ती है जाट मरे हो तब जानी है जब वो तेरे भी हो जाए ऐसे
- 36:12विश्वास मत कर लेना। मने पांवई मोख द्वार मने पर वार
- 36:24साधा। तुम मान के बैठे हो?
- 36:31बाबा कहते हैं मानो मत भाई जो मन तुम्हारा मान रहा है, उस पोटली को
- 36:38ही फेंक दो। थ्रू दी लगेज इन दी वर्ल्ड कुएं
- 36:47में फेंक दो, इसे लगेज कुएं में थ्रो कर दो।
- 37:02इसको पोटली कल कहानी सुनाई थी हमें गुरु डर रहा था सोने की।
- 37:09अरे ग्राम कब आएगा? सूरज तो छिप के गया, सूरज तो डाल
- 37:13क्या कहता गुरु जी चिंता मत करो भय का कारण तो मैं फेंकाया उसने
- 37:24जोड़े में हाथ हमारा। दूसरी ईंट भरी पड़ी थी।
- 37:29चेन्नई वाली सोने की ईंट गायब थी। तुम्हारे पास खोने को है तो कुछ
- 37:35नहीं। मान्यताओं के अलावा सोने की ईंट
- 37:46भी तुम्हारी मान्यता है। यह बात समझे ना?
- 37:49और माटी की ईंट भी। तुम्हारी मान्यता है दोनों ही
- 37:53मान्यता है, लेकिन तुमने एक को अधिमान दे दिया और दूसरे को
- 37:58अधिमान नहीं दिया। बस इता से ही, लेकिन दोनों बोझ
- 38:02हैं सोने की ईंट को रख लोगे सिर पे तो वो भी बोझ।
- 38:07एक क्विंटल सोना भी नहीं उठा पाओगे तुम गलती में और एक क्विंटल
- 38:14लोहा और एक क्विंटल मट्टी भी तुम नहीं उठा पाओगे सारे भार हैं चित
- 38:25पे सभी बोझ। माटी हो, माटी का ढेला हो या सोने
- 38:36और हीरे हो, सारे बोझ है, सारा भेट है तुम्हारी मान्यताएँ चाहे
- 38:42कुछ भी हो, चाहे परमात्मा की मान्यताएँ तुम कहते हो, नाम
- 38:45पवित्र हो जाएगा। गाने से जीव।
- 38:50अरे भाई नाम ही अपने आप में बोझ है, नाम ही बकवास ना नहीं ने तो
- 38:59तुम्हें रोक लिया ना? नहीं तो तुम्हारा मार्ग अवरुद्ध
- 39:03करता है। मन्ने परवार साधारण बाबा कहते हैं
- 39:17परिवार का सुधार हो जाता है। एक व्यक्ति अगर धरती पर को दिया
- 39:22जल जाए तो याद रखना सारी धरती के दिए जल सकते हैं।
- 39:28कोई ना जगन दे, कोई रास्ते में ऑस्ट्रक्शन बन जाए कोई ना जगाना
- 39:33चाहे उसकी मर्जी है तो मेरे पास बड़े कमेंट आए एनलाइटनमेंट के
- 39:39मैंने बाबा से कहा बाबा ही तो सभी पहुंचे हुए मैं किसके लिए बोलूं?
- 39:45देखिए ना कमेंट। बाबा कहते तुम बोलो जो अज्ञानी
- 39:52है, जो ज्ञानी है उनके लिए मत बोलो, ज्ञानियों को तो अंगूठा लगा
- 39:59दिया करो, ब्लॉक कर दिया करो, उनकी तो ऐसे ही गत बनाया करो।
- 40:06तो फिर से न आये तुम्हारे पास तुमने बाबा बांटना है।
- 40:11अमृत और अमृत बांटने वाले अलग ढंग के व्यक्ति होते हैं।
- 40:19तुम इनकी परवाह मत करो, तुम ज्ञानियों के लिए मत बोलो, तुम
- 40:24अज्ञानियों के लिए बोलो। बस उस दिन से मैंने अज्ञानु को
- 40:28बोल दिया शुरू कर दिया। ज्ञानी को गुंठ लगा, मने पर 12
- 40:42साधा है। ये विश्व एक प्रवाह है वसुधैव को
- 40:48गम भूकंप बाबा इतने। शूद्र नहीं बाबा इतनी संकीर्ण मति
- 40:57के नहीं है कि अपने परिवार को चार मेंबर, पांच मेंबर को ही वो
- 41:01परिवार कह दे नहीं तुम परिवार की अभी।
- 41:10सही डिफाइन नहीं कर सके। परिवार की डेफिनिशन नहीं दे सके
- 41:14परिवार का मतलब सारा संसार परिवार, एक व्यक्ति एक दिया जल
- 41:21गया तो सारा संसार तुम्हें पता नहीं जीस वक्त कोई व्यक्ति
- 41:27पहुंचता है। सारा अस्तित्व नाचता है क्या हुआ
- 41:33अस्तित्व से क्या संबंध उसका? क्योंकि वह भीतर से अस्तित्व ही
- 41:37है। एक दीया जला तो सारा अस्तित्व जला
- 41:45रोशनाई हुई। बिजलियाँ चमकीं आनंद, छ गया मह की
- 41:56मह की हवाएं, वहीं फिजाओं में हवाओं में अमृत वर्षा।
- 42:12खिसाई भाग एक व्यक्ति जब अनंतित होता है तो वह आनंद सारे विराट
- 42:23में फैल जाता है और सारा विराट को बाँट देता है वो आनंद।
- 42:28सारा विराट झूमता है, उस पर मन में परवार सिद्धार जो व्यक्ति मन
- 42:38से पार होते है, विश्व एक कुटुंब है, इतनी संकीर्णमती नहीं है पापा
- 42:45की? के अपने ही चार व्यक्तियों को
- 42:47परिवार कहते हैं। उसका परिवार तो बड़ा विशाल है।
- 42:51सारा संसार, सारा विराट, उसका परिवार जो भी उस स्थल पर पहुँच
- 42:58गया और अगर ये शब्द बोले गए। तो यह किसी राजनीतिक व्यक्ति ने
- 43:05नहीं बोले, न ही किसी सांप्रदायिक व्यक्ति ने बोले।
- 43:09यह उस तल से आए हैं। जीस तल पर जाकर व्यक्ति प्रबंध हो
- 43:13जाता है। वो कहता है वसुधैव कुतुम भोगम
- 43:20वसुधा। एक कुटुंब और एक वसुधा नहीं सभी
- 43:25वसुधाएं जितनी भी वसुधाएं हैं। लाखों, लाखों असंख जीतने भी हैं,
- 43:46सभी महत्त्व हो जाते हैं, सभी में खुशबू फैल जाती है, सबका सुधार हो
- 43:51जाता है तो बाबा कहते हैं मन्ने जो मन से वार हुआ।
- 43:58छलांग ले गया, अपने भीतर गया। फिर तो रास्ता बड़ा आसान है, एक
- 44:04ही अड़चन है मन से पार कैसे हो, जो दूसरी कोई अड़चन है ही नहीं।
- 44:10रास्ते में कोई अड़चन इस संबंध की पोटली को जो तुमने बांध रखा है,
- 44:20सिर पर रखी हुई हीरे जवाहरात समझ के?
- 44:22सोने की ईंटे समझ के इसको चलाते मत कुएं में फेंक दो तुम समझते हो
- 44:31हीरे मोती हैं लेकिन जो तुम्हें मिलेगा तो फिर पता चलेगा हीरे
- 44:36मोती कहाँ जो सुख छे जूते चुवारे? ना बल्क, ना बुखार जो वहाँ आनंद
- 44:45आएगा ना वो तुम्हारे हीरे जो आदत में नहीं है कोहिनूर में वो नहीं
- 44:55मने पर वारे साधारण जो व्यक्ति मन से पार हो गया।
- 45:02वह सारे विश्व का कल्याण करने में वह समर्थ हो गया और वह कंजूस नहीं
- 45:07है। कोई आए दीपक से दीपक की लोह बढ़ा
- 45:11ले और जला के चले गए। मन्ने।
- 45:19पामई मोख द्वार मने पर वारे साधार मने तारे तारे गुरु सिक्ख पहले
- 45:34तरना होता है स्वयं यहाँ लोग तरते खुद तो हैं।
- 45:38दूसरे को उतारने की बड़ी जल्दी करते हैं।
- 45:431 दिन में बैठे हैं ना, इनमें से कोई तरह नहीं अनिथा बाबा मुझे ही
- 45:49क्यों कहते है और कोई है ही नहीं। इतनी बड़ी शक्ति संसार की झूठ बोल
- 45:53सकती है और मैं बड़ा हराम है। बाबा कहती बोल 2020 में जब मेरे
- 46:01पास आए सब अभी जो ओशो बने बैठें, उस वक्त ओशो ने मुझे कहा कि तुम
- 46:10बोलो, मैंने कहा तुम वहाँ क्या छोड़ के आए?
- 46:15ओशो बोले मैं गलती भाग गया। मेरी गलतियों को तुम सुधार करो,
- 46:23खैर भाति लंबी हो जाएगी तुम्हारा वन पड़ा टूटेगा बच्चा पर मैं
- 46:30तुम्हारा मन तोड़ना नहीं चाहता अभी धीरे धीरे धीरे सुनार की
- 46:34थोड़ी मरूंगा धीरे। तो शिव कहने लगे पोलो बाबा मैंने
- 46:45कहा किसी और को बुला 35 वर्ष से रसमग्न हूँ, पी रहा है और पी रहा
- 46:54हूँ और जितना पी रहा हूँ। उतना और ज़रा सी दे दे साकी, कैसे
- 47:05रहूं चुप के मैंने पी ही क्या होश अभी तक है बाकी?
- 47:15और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी कैसे रहूं चुप के मैंने की क्या
- 47:26ओह अभी तक है बाकी और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी।
- 47:38बाबा और पी ले किसी और से कह दो जैसे सुबह की ठंडी ठंडी हवाएं,
- 47:46गर्मी का मौसम और शीतल हवाएं। सुबह तो नींद आ रही।
- 47:52और उसे कोई जगाये तो के किसी और को कह दो मुझे सो लेने दो, बड़ी
- 47:55प्यारी वो अमृत ऐसा वो अमृत ऐसा कि जितना पियोगे, पीने का दिल ही
- 48:06करता जाएगा और पिरु। और पीला दे सर की बाबा कहते हैं
- 48:18और कोई है नहीं बोलने के लिए मुझे 11,000 वोल्टेज नहीं सारे जो पूरा
- 48:30थर्मल होता है ना? उसका करंट लगा।
- 48:34और कोई नहीं है। पर ये जो बैठे हैं ये ये जो बैठे
- 48:41हैं ये इतने इतने लोग जो बैठे हैं यूट्यूब चैनल के ऊपर जो बकवास कर
- 48:48रहे हैं, वो क्या बाबा कहते हैं? सब झूठ हैं।
- 48:57अब कोई करेगा शंकर को, क्या तुमने पी है?
- 49:05पी है पी है तो औरों को पिलापोग लेकिन काश तुमने पी हो।
- 49:15क्योंकि लक्षण नहीं है। तुम कह दोगे हमने पी लक्षण पीने
- 49:24बाला अकेला मग्न हो के पीता है, अकेला पीता है।
- 49:32पर पीता ही चला जाता है। मुझे लोग कहते हैं बाबा 4:00 बजे
- 49:38से पहले तुम्हारी नहीं उतरती, मैंने कहा तुम शुक्र करो की 4:00
- 49:44बजे उतर जाती है ये ऐसी। कभी उतरती है नाम तुम्हारी नान का
- 49:56छिड़ी रहे दिन रात 4:00 बजे उतर जाती है ये तो हैरानी की बात है
- 50:03क्या करूँ? मजबूरी में आना पड़ता है बाहर?
- 50:10अब बाबा लगा गए मेरा कर्तव्य मुझे निभाना ही पड़ेगा निभा दिया मन
- 50:25में तरे तरे गुरु से। यूट्यूब पर बोलने वालो तुम्हारे
- 50:33लिए पैगाम है, तुम खुद तरो कली बंध कर लेती है, मुख को काहे को
- 50:42सुगंध को जमा करने को तो सुगंध पहले जोड़ती है और मुख वंध कर
- 50:49लेती है। आपने कली देखी तो?
- 50:51उसका मुख बंद होते हैं। पहले कृपाण बनो, पहले कंजूस बनो
- 50:57और कंजूस क्यों बनो? पहले जोड़ो अब डॉक्टर ऑपरेट करने
- 51:03से पहले पहले जोड़ता है, ना सीखता है।
- 51:09और जब सीख जाता है तो बांटता है, फिर सर्दी भी करता है काट कुछ
- 51:14करता है सरे तो तुम खुद नहीं हो, दूसरों को का खाकता रोवे बीजे
- 51:23लगाते फिरते हैं लोग दूसरों को। और वहाँ ट्रंप है वो भेड़िया डाल
- 51:30डाल के भेज रहा है चलो बेटा जब तुम्हारे मुखिया ने ठीक से बनाई
- 51:45नहीं उसके साथ उसके अहंकार को ललकार दिया और देखो राजनीतिक
- 51:50व्यक्ति चाहे छोटे या मुल्क का हो।
- 51:53चाहे बड़े हो जो सर्वोच्च पदियों पर है, वो अहंकार ही होता है हम
- 51:59इस बात को आप अहंकार जितना तुममें न बेटा, उतना ही अहंकार उसमें वह
- 52:11कैसे सहन कर सकता है? लेकिन उसके पास शक्ति बनी है,
- 52:18शक्ति संसारिक बनी, उसके पास डॉलर है, अपने पास रुपया है तो उसका
- 52:26अहंकार ऊँचा है, तुम्हें बेड़ियां डाल कर भेजेगा।
- 52:34और हम ज़रा भी लालाख नहीं दिखा पाएंगे मरे पी लिया हो जाएगा,
- 52:41लालाख ही नहीं करेंगे, मर्दी वाली कर लेंगे, मिर्च वाली नहीं करेंगे
- 52:50तो कोई तो बात है ना परदे की कुछ। जो छुपा रहे हो तुम और शांत इसे
- 52:57जानता है प्रशांत तुम्हारे कल्याण के लिए कुछ कहता है जानता है
- 53:05क्यों के लिए ये उसके लिए बड़ी आसान बात है वह सामूहिक।
- 53:12अचेतन में जाएगा और तुम्हारे अचेतन में देख लेगा तुमने क्या
- 53:16कबाड़ी की है? उसे कुछ छुपा नहीं छुपा सकते भी
- 53:22नहीं उसे कितनी ही चेष्ट कर लेकिन बस इतनी गनीम समझो कि संत का
- 53:28स्वभाव ऐसा होता ना। संत हृदय नवनीत समम नाम उसका हृदय
- 53:40तो नवनीत सा कोमर होता है और तुम्हे चोट नहीं पहुंचाना चाहता,
- 53:45बस थोड़ी सी चोट पहुंचा देता है, जिससे शायद तुम पिघल जाओ।
- 53:50शायद अकल आ जाए ले के तो कुछ जाना ही कोई नहीं ले के गया सिकंद्र भी
- 53:57खाली हाथ जाते हैं नकार इतना तकबुर जहाँ एक रोज़ फानी है तेरी
- 54:03से आला हो गुजरे न भारतीय कुछ नहीं।
- 54:09मन तरे तरे गुरु से पहले तो खुद करो फिर यूट्यूब पिया ना बेटा फिर
- 54:18तारना लोगों को और तुम तारोगे क्या तुम्हारी तो सांनिध्य
- 54:24तुम्हारी जो हवाओं को जो छू लेगा वो थर के।
- 54:34ऐसा नहीं है तुम्हारे आगोश में आने से ही व्यक्ति करेगा।
- 54:38तुम्हारी हवाओं को जो छू गया तुम्हारी शीतल हवाओं को जो छू गया
- 54:44एक बार दर्शन मात्र से आए तो छुर कैसे निकल जाते हैं गुरुदेव
- 54:51लेकिन? कोई ज़माना था जब पहुंचा हुआ आदमी
- 54:56पास से निकल जाता था तो कल्याण हो जाया करता था।
- 55:04आज नकली फूल है, प्लस की की फैक्टरी लगी फूल बना लो, देखावे
- 55:11के हैं भाई। धरती का गर्भ फड़ के नहीं आई,
- 55:19दिखावे के फूल हैं, कैसी बना लो, गेंदा बना लो, मोती बना लो, गुलाब
- 55:25का बना लो चमेली बना लो कुछ भी बना लो।
- 55:30छुर से निकल गई। बस दर्शन नकली फूल खिलाने वाले
- 55:48यही बाबा मुँह के ऊपर चोट मरते हैं मन में तरह पहले खुद करो।
- 55:57जब तुम तरोगे तो भीतर से कल्याण करने की तुम्हारी वृद्धि हो जाएगी
- 56:05और तुम कल्याण करने में समर्थ भी हो जाओगे।
- 56:07कुछ होना तो चाहिए ना बैठने के लिए कहीं जोड़ती है फिर बांटती
- 56:11है। तुमने जोड़ा तो है नहीं बांटने
- 56:16में लग गए और बांटने को तुम्हारे पास है क्या नाम है नाम से कभी
- 56:22कोई तरह नहीं तुम्हारे तुलसी तरह होंगे वो एक नंबर के उल्लू के
- 56:28पट्ठे से कभी तरह है? जाप करने से वक्त कभी कोई नहीं
- 56:35थरता ना कोई तरे मन में तरे तरे पुरुष जो मन से पार हो गया देखिए
- 56:47बड़ा सुंदर शब्द है जो मन से पार हो गया वह तरता है सबसे पहले तो
- 56:53खुद तुम अपने मन से। जब तुम मन से पार हो गए तो तुम
- 57:01दूसरे को उतारने में समर्थ होंगे। तरह पहले को करो तुम तैरना सीखोगे
- 57:10तुम तैरोगे पैर तो दूसरे को तैरना सिखाओगे।
- 57:17जब तुम्हें तैरना आता ही नहीं तो तुम दूसरे को तैर के बताओगे, क्या
- 57:25यह कोई थ्रोटिकल बात थोड़ी है? यह प्रैक्टिकल बात मन में तरे तरे
- 57:31गुर सिख। पहले गुरु खुद करता है, फिर अपने
- 57:40सिखों को अपने शिष्यों को और तुम्हारे पीछे अभी कल के वीडियो
- 57:48में मैंने रोहित ने डाल दिया के बस।
- 57:55अब दीक्षा हूँ क्या गलत किया अगर मैं नहीं बाहर उठा सकता, जितना
- 58:06उठा सकता हूँ उतना मैंने उठा लिया।
- 58:14तो आप क्यों तकलीफ में आ गए? कुछ लोग बड़ी तकलीफ में आए, जो हम
- 58:23ने दास तां अपनी सुनाई। आ क्यों रोए जो हमने दास्तां अपनी
- 58:48सुनाई। आप क्यों रोए चाहे तो हमारे दिल
- 59:01पे आई आप क्यों रोए? तबाही तो हमारे दिल पे आई, आप
- 59:20क्यों रोए? मैं जितना भार उठा सकता हूँ जीतने
- 59:33शिष्यों को मैं तार सकता हूँ उतने महीने इकट्ठे कर सत्य बोलना कोई
- 59:43गुणा है क्या? लेकिन दुनिया का?
- 59:54ऐसा ही ढंक है जो झूठ बोलता है, करोड़ों उसी से इकट्ठे कर लेता
- 59:58है। तुम्हें पता नहीं उसका कोई निहित
- 1:00:01स्वार्थ है इसलिए तो गद्दियाँ आगे की आगे डिस्ट्रीब्यूट हो जाती
- 1:00:05हैं। ले भाई बेटा इतना माल संवारे।
- 1:00:10ये सात पीढ़ियाँ जोड़ के ही हैं इसको बजा के रखना ढंग से।
- 1:00:17ऐसे ही नहीं पीढ़ियाँ चला करते हैं।
- 1:00:19ये कुछ है जो आगे बाँटा जाता है ट्रांसफर।
- 1:00:32सच्चा शिक्षक बोलिए कभी आपने कोई शिक्षक देखा, कोई ऐसा शिक्षक देखा
- 1:00:39जो कहते है मैं सारी दुनिया को पढ़ा दूंगा, जो अच्छा स्कूल होता
- 1:00:43है, निशानी सुनने। उसमें स्टूडेंट्स की लिमिट होती
- 1:00:49है। के भाई 20 से ज्यादा स्टूडेंट मैं
- 1:00:55नहीं पढ़ा पाऊंगा, जैसे एक माँ बाप को पता है कि हम कितने बच्चे
- 1:01:01पाल सकते हैं, एक बच्चा पाल सकते हैं, दो बच्चे पाल सकते हैं।
- 1:01:07अगर वो 20 बच्चे पैदा करते है तो क्या फिर कोई भी नहीं पढ़ेगा?
- 1:01:16तो 20 में से अगर कोई भी ना पढ़े तो इससे अच्छा तुम दो ही पाल लो,
- 1:01:20एक ही पाल लो। इट इस फार बेटर मैं कहता हूँ कि
- 1:01:34तुम मुझसे ही उम्मीद क्यों करते हो?
- 1:01:39तुम जमात पैदा करो, बुद्धों की तुम जमात पैदा करो, सिद्धों की
- 1:01:46तुम जमात पैदा करो। कृष्णा की।
- 1:01:51महावीरों की एक व्यक्ति नकबी तार सका है नकबी तार सका बस कुछ गिनती
- 1:02:05चुनती के दिए जला जाए तो मेहरबानी।
- 1:02:13वो भी मेहरबानी तुम्हारी ज्यादा क्योंकि गुरु तो पढ़ाने को तैयार
- 1:02:20ही था। गुरू पानी पिलाने को तैयार ही था।
- 1:02:28सदा से तुमने ही अंजलि बांधने की कोशिश ना की क्योंकि अंजलि बांधने
- 1:02:36में झुकना होता है और झुक ना पाए। तुम तुम्हारी रीढ़ की हड्डी सीधी
- 1:02:46ना होय। तुम्हारी दौड़ में किरला फसा ही
- 1:02:48रहा और अंजलि बाधने के लिए पानी पीने के लिए अंजलि बान होती है,
- 1:02:54जुगना तुमने सीखा नहीं कभी यही तकलीफ है तुम्हारी?
- 1:03:01मैं अच्छी तरह से परेशान था क्योंकि मैं इन गलियों में से
- 1:03:03गुजरा हूँ। यही गुरु की मैम है कि गुरु
- 1:03:07तुम्हारी ही गलियों में से गुजरा होता है, उसी रेड माटी से खेला
- 1:03:13होता है, लबड़ के आया होता है, उसमें से कोई विशिष्टता नहीं
- 1:03:19होती, वाल्मीकि में वही डाकू होता है या रत्नाकर?
- 1:03:23हेराफेरी करता था। डाकू मार काट करता था तुम्हारी
- 1:03:27जेबों को लूटता था आज समझ आ गई तत्व की हो गई है तुम्हारे जैसा
- 1:03:34तुम भी बन सकते हो मने तारे तारे गुरु सिक्ख सबसे पहले।
- 1:03:44यूट्यूब पर मुझे पता है तुम क्यों भगा रहे हो या तो तुम्हारे पास
- 1:03:49आनंद की कमी है या तुम्हारी वासनाएँ अभी परिपूर्ण से शांत
- 1:03:54नहीं हैं तुम कुछ न कुछ जाते हो तो तुम्हारा निहित स्वार्थ है।
- 1:04:01वो चाहे मान सम्मान हो, तुम्हारा चेहरा मुहुरा लोग ही जानें तुम
- 1:04:07इतने बड़े बलि हो तुम इतने बड़े धनमान हो तुम इतने बड़े औधि से
- 1:04:13युक्त हो कुछ ना कुछ वासनाएँ शेष रह गई मैं तकलीफ को अच्छी तरह से
- 1:04:18जानता हूँ। इसलिए तुम यूट्यूब पे आकर के मेरे
- 1:04:24को तो कुछ जानते हो कि चलो बाबा बन जाते हैं, ज्ञान भगाने लग जाते
- 1:04:33हैं ये ज्ञान ऐसे ही भगाते हैं लहसुन जो है।
- 1:04:41राक्षस के मर्ज से पैदा हुआ प्याज जो है वो भूतनी के गर्व से पैदा
- 1:04:48हुआ ऐसा ऐसा तुम पाखंड खिलाते हो, तुम्हारा ज्ञान तो पता लग ही गया।
- 1:04:57जिसकी आँखें हैं, जिसके समझ हैं जिसके कान है वह तो जान ही लेगा,
- 1:05:02तुम्हें प्रथम दृष्टि में ही जान लेगा कि तुम हो क्या, पहले तो
- 1:05:07तुम्हारे इस श्रृंगार में ही जान लेगा वो फिर कम क्यों?
- 1:05:11क्यों श्रृंगार क्या व्हाई मेकअप व्हाई?
- 1:05:19महावीर तो नगण हो जाते हैं, कोई मेकअप नहीं क्यों ये लगा रखी है?
- 1:05:28ये कहते हैं ये मन शांत रहता है मैंने मतलब तुम करो भी हो भीतर
- 1:05:34से। क्रोध ही हो तो ही तो लगाए ना
- 1:05:37शांत हो जाएगा जो लाल ही लगाई दिखाने के लिए देखो कितने लाल अरे
- 1:05:46भाई लाल तो सेब भी होता है सेब से या फिर लाली होती है ऐसे?
- 1:05:54गालों की लाली को दिखाते हुए सेब से ज्यादा लाली थोड़ी होती है।
- 1:05:59सदई लाल रहती है और तुम 2 दिन ज़रा बंद करके देखो, डायल से लाली
- 1:06:06कहीं जाए फिर पीलिया हो जाएगा। और पीली अभी क्या बस राधे राधे,
- 1:06:19अब राम राम गाना बंद कर दो राधे राधे सत्य है सत्य बोले सत्य है
- 1:06:28मने गुरु मने तारे तारे। पहले खुद उतरो ये डंग बताते हैं
- 1:06:39तारे गुरु सिख उसके बाद तारो जो तुम्हारी शरण में आए, गुरु के शरण
- 1:06:44में आए उनको तारो मने नानक पवही न बिख।
- 1:06:52जो मन से पार हो गया वह भिक्षा के लिए भोंकता नहीं करता, फिर समझना
- 1:07:03इसको बड़ा प्यारा शब्द है मन में नानक पवि ही न पीक।
- 1:07:10तो मन से पार हो गया वह भिक्षा के लिए भोगता नहीं भरता हम भिक्षा के
- 1:07:20लिए भोगता तुम्हारे हाथों में दिखते नहीं लेकिन हैं भिक्षा
- 1:07:27पात्र। अदृश्य भिक्षा पात्र है।
- 1:07:33प्रेमी प्रेमिका से प्रेम मांगता है।
- 1:07:37प्रेमिका प्रेमी से प्रेम मांगती है, दोनों के हाथों में भिक्षा
- 1:07:43पात्र है, लेकिन दोनों के पास प्रेम है।
- 1:07:50कोई लम्हा था जब दोनों के बीच परमात्मा उतरा था क्षण भर के लिए
- 1:07:58पल भरते थे तुमने उसको तो नज़रइंदाज़ कर दिया जो उतरा था।
- 1:08:07जो मिठास, जो आनंद, जो रस, जो शहद तुमने उस बंदे को पकड़ लिया, उस
- 1:08:14स्त्री को पकड़ लिया कि इससे मिला नहीं, इससे नहीं तुम दोनों के बीच
- 1:08:20में कुछ ऐसी घटना घटी। हाँ, तुम्हारी बहन भी जरूर मिलती
- 1:08:24है इसमें कुछ। रेंज मिलने के कारण कुछ ऐसा गठित
- 1:08:30हुआ कि प्रेम की उस रंग को तुम्हें उतरना पड़ा।
- 1:08:39फिर तुम एक दूसरे के संगनी डाल देते हो और फिर प्रेम नहीं मिलता।
- 1:08:44और तुम झगड़े करते हो पहले तो तुम प्रेम करते थे, आकाश के तारे तोड़
- 1:08:51दूंगा तारा भाई कितना भारी होता था यहाँ 50 कर लो भजन नहीं उठते
- 1:08:59और धरती का वजन कितना है तुम धरती ही नहीं उठा सकते।
- 1:09:03और तारे तो धरती से हजारों हजारों गुणा बड़े बारी कैसे तोड़ के ले
- 1:09:08आओगे तुम्हारे बाप का राजा उसकी बनाई चीज़ को कैसे तोड़ देगा?
- 1:09:15टूटती रहो ऐसे तो कोई धरती तोड़ के ले जाएगा कोई किसी ग्रह का
- 1:09:22प्रेमी। तो धरती को तोड़ के ले जायेगा
- 1:09:26नहीं, ऐसा नहीं होता। ये सब बकवासी है मने नानक पवि ही
- 1:09:39सबसे शांत रक्षक इस कौड़ी पंद्रहवीं कौड़ी तुम भिक्षा
- 1:09:49मांगते फिरते हो तुम्हें चैन चाहिए, तुम्हें सुकून चाहिए,
- 1:09:58तुम्हें सुरूर चाहिए, तुम्हें शांति चाहिए और फिर तुम ठगों के
- 1:10:04पास फंस जाते हो। और ठग कहते हैं ओम शांति ओम शांति
- 1:10:10कोई ठग कहता कोई ठग कहता, राम राम करते रहे उठते बैठते, चढ़ते फिरते
- 1:10:17राम राम करते रहे। ये सब ठग है।
- 1:10:24कोई पांच नाम दे देता है, कोई 1000 नाम दे देता है, कोई पूरा
- 1:10:28ग्रंथ ही पकड़ा देता है, इसको द्वार दरवाजे खंगाल देते हो।
- 1:10:37तुम भिक्षा पात्र तुम्हारे हाथ में बना ही रहता है, लेकिन ये
- 1:10:43भिक्षा पात्र रहता खाली। किसी के पास कुछ है ही नहीं,
- 1:10:51इसलिए बाबा कहते तुम पहले तरो तारे, तारे, गुर सिख फिर गुर
- 1:10:58सिखों को उतार जो तुम्हारी सरनमे आये, उनको तारना लेकिन पहले
- 1:11:06कुत्तों सरो। मन नानक का पानी है ना पैक, जिसका
- 1:11:13खजाना भरपूर हो गया, जो अटा फटा है, प्रेम से प्रेम के समुद्र में
- 1:11:21नहा रहा है अटकेलियां कर रहा है उस तीर से मैं अपने भीतर का है।
- 1:11:27और आनंद के रस को मान रहा है, वो भरा किसी से भिक्षा क्यों
- 1:11:33मांगेगा? वह जो समुद्र है, प्रेम से भरा
- 1:11:37पड़ा है और प्रेम ही रस है। अब कोई भी।
- 1:11:44अगर कोई व्यक्ति अक्कड़ से काम ना करे मैं तुम्हे एक फॉर्मूला समझा
- 1:11:48देता हूँ कोई तुम्हारा बॉस, कोई तुम्हारा इसलिए जो चरण चुम्बक
- 1:11:56होते है जीव से चरण चाट लो, कुछ नहीं बिगड़ता है जाके कुल्ली कर
- 1:12:02ले। लेकिन वो श्रद्धा के लिए तुम पर
- 1:12:08मेहरबान हो जाएगा। ये चरण चुम्बक बड़ी चीज़ होती है।
- 1:12:17मने नानक का पाबी ही ना देखा तुम्हें कोई भिक्षा नहीं डालता।
- 1:12:24मिठत नीली नान का गूंज चिंघियाएं नात नीचे नीचे डाउन टु अर्थ नीचे
- 1:12:33को ही फल लगा कर। तुम गर्दन के गुल्ले को निकालो।
- 1:12:45ये जो गर्दन का गुल्ला है ना ये दो हमारे मणके होते हैं, ऊपर वाला
- 1:12:53एटलस और नीचे वाला एक्सेस डॉक्टर लोग तो।
- 1:12:59जब लोग फांसी लगाते हैं तो ये अक्सेस टूट जाता है।
- 1:13:06इसी को मन का इस गुले को तुम्हीं को फांसी नहीं लगाना है।
- 1:13:13मूर को इस गुले को निकाल। यह तुम्हारा अहंकार का गुल्ला जो
- 1:13:24फंसा पड़ेगा ना जो गर्दन को नीचे नहीं होने दे इसको निकाल दो।
- 1:13:33अकड़ को निकाल दो जैसे ही अकड़ निकली सरल।
- 1:13:46वैसे ही आनंद था, मैं तुम्हें फॉर्मूला सुनता हूँ, अगर कोई ऐसा
- 1:13:51बॉस है तो जो तुम्हें तंग करता हूँ, बस सुबह जा के उसकी चरण
- 1:13:57स्पर्श करता हूँ, लेकिन चरण स्पर्श करने के लिए तुम्हें पहले
- 1:14:02अपनी। दोनों का गुल्ला निकालना।
- 1:14:06लेकिन चलो सर्कस ही कर लेना। आज कल सर्कस का ज़माना जल्द है
- 1:14:18जाकर चलने, स्पर्श कर लेना, चरण चिम्भ को बन जाना और देखो ये नय
- 1:14:24तो होगी कि नहीं? फिर वह बॉस तुमसे काम का मिलेगा,
- 1:14:32बाकियों के कर देगा सीटी प्रति गुण।
- 1:14:38उसको यह तकलीफ रहेंगी कि बाकियों ने क्यों नहीं लगाया?
- 1:14:41जिनके गुल्ले फंसे रहेंगे ना, वो तो लगाने से रहे।
- 1:14:53तुम मौका मत चूकना मत झुको जो हाथ तुम सुबह जाके चरणों को स्पर्श
- 1:15:00करते मत से पूरी एक्टिंग करते हम बस भागो भाग रहेगा तुमसे कम से कम
- 1:15:06काम रहेगा। ये तुम्हें मैं फॉर्मूला बता देता
- 1:15:12हूँ, बीच बीच में संसार में जीने के नियम भी बता देता हूँ।
- 1:15:19मन में नानक वही न बिक, जो मन से पार हो गया।
- 1:15:27वह भिक्षा के लिए भूकता नहीं करता।
- 1:15:29जगह जगह दर दर तुम दर दर खंवा प्रेम चाहिए, आनंद चाहिए, मुक्ति
- 1:15:36चाहिए, मोक्ष चाहिए बाहर है क्या है पता नहीं हम शांति से ही न
- 1:15:43जाते हैं चैन नहीं करार नहीं बेकरार।
- 1:15:51तू गाये जा, बेकरार दे तू गाये जा खुशियों से भरे ये तराने।
- 1:16:08जिसे सुन के दुनिया झूठ और झूठ दिल दीवाने।
- 1:16:27मन नानक पावनी ना फेंको द्वार दरवाजों पर तुम्हें जाकर अपने
- 1:16:37भिक्षापत्र फैलाने नहीं पड़ेंगे, भिक्षापत्र में तो बहुत थोड़ा सा
- 1:16:43प्रेम सुना सकता है, उसकी औकात ज्यादा नहीं।
- 1:16:49पियो पियो, समुद्र को पियो तुम भीतर समुद्र हो मुझे लोग पूछ लेते
- 1:16:59हैं बाबा आप 18 तारीख को मिलोगे? क्या बात है, दर्शन करने हैं?
- 1:17:06मैंने कहा दर्शन मैंने अपने इस पंचबोध के शरीर को करने के लिए
- 1:17:11थोड़ी कहा है दर्शन मैंने आपके भीतर जो खुदा बैठा है, आदम को
- 1:17:16खुदा मत कहो आजम खुदा, लेकिन खुदा के रूप से आजम।
- 1:17:24मैंने दर्शन उसके करने को कहा है, मैं सदा थोड़ी बना रहूँगा भाई
- 1:17:30मेरे को तो आज नहीं कल गोली मार देंगे, नहीं तो मौत तो मारी दे,
- 1:17:42मैं तो मौत का भक्ष्य हूँ। भोजन हो उसका, मैंने तुम्हें जो
- 1:17:49सिखाया उसको सीखो, दर्शन मेरे पंच बहुतेक शरीर के नहीं करने यहाँ से
- 1:17:57शुरुआत कर सकते हो। तुम देखो कैसे मौज में बैठे।
- 1:18:02बस यहाँ से सबक ले लेना, सुगंधी ले जाना और फिर उस सुगंधी को
- 1:18:08खंगालना जो आपके ही भीतर से आई। मेरे भीतर से आई और तुम्हें मैं
- 1:18:13कहता हूँ कि आपके भी भीतर से आएगी यहाँ आप मेरे दर्शन करने में मतलब
- 1:18:19फिर आपको कोई ऐसा बताएगा नहीं। फिर तो ऐसे गुरु आएँगे जो कहेंगे
- 1:18:26बस मेरे चरणों से रट जाओ कुछ ना करो मैं आऊंगा आखिर में तुम्हारी
- 1:18:31ऊँगली फोडूंगा सच खंड ले जाऊंगा ऐसे बरमाने वाले लोग आएँगे इनसे
- 1:18:35सावधान मैं तुम्हें कहता हूँ देखो इस पंच भौतिक शरीर।
- 1:18:41और मेरी बात को मैं चला जाऊंगा। 1 दिन सभी जाते हैं, तुम भिक्षा
- 1:18:49के लिए दर्शन करने बाबा दीक्षा दे दो बाबा क्यों हो जाए?
- 1:18:58मैं तुम्हें कहता हूँ कि मैंने सीखा दिया तुम्हें क्रय योग करो,
- 1:19:03ध्यान में उतरो, अपनी ही भीतर तुम्हारे भीतर ही मिलेगा।
- 1:19:07फिर तुम क्यों बाजिद हो कि मैं तुम्हारे शरीर के ही दर्शन करना
- 1:19:12चाहती हूँ? पगला गे हो गया?
- 1:19:20पर ये चेपु गुरु तो चाहेंगे ही की तुम उनके शरीर को जुबान दो लेकिन
- 1:19:25मैं तुम्हें मुख से करना चाहता हूँ सब चेपियों से मैं तुम्हें
- 1:19:29कहता हूँ तुम्हारे भीतर से मिले। मत बंधो तुम यहाँ आकर मेरे शरीर
- 1:19:35के दर्शन करने शरीर के दर्शन करने से तुम मुक्त नहीं हो पाओगे हाँ
- 1:19:41यहाँ जैसे गुलाब के गरीब जा के हम गुलाब को हाथ लगा के।
- 1:19:49जो गंदी कुछ दे नहीं तो भी बास सवास जैसे इतर बेचने वाला होता
- 1:19:54है, उसके पास क्रीप बैठ जाओगे तो तुम थोड़ी सी सुगंध अपने कपड़ों
- 1:19:59के साथ लगा के बस इतना सा हो जायेगा लेकिन सदा वो सुगंध बनी
- 1:20:03नहीं रहेंगी। सदा सुगंध पैदा करो अपने भीतर उतर
- 1:20:07के। मत जाओ यहाँ आना भी वनों में जाने
- 1:20:14का सामान है और गुरु तेग बहादुर कहते हैं काहे रे मन खोजन जा।
- 1:20:51सरबया की सदा हलेफा सब जगह है, वो सिर्फ यहीं नहीं है, हम अपने भीतर
- 1:21:03जाके रखो, वहीं मिलेगा सरबया। की।
- 1:21:10सदा आले पा तोहे संग समा काहे रे रे बन को जनजा?
- 1:21:37धन्यवाद।