Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Dec 24 - भूत प्रेत,कुल देवी- देवता, ब्रह्मा विष्णु महेश कौन हैं? देवताओं को कैसे बुलाएं?
Transcript
- 0:01गोबिंद लिनों गोबिंद लिनों मोलमाएं गोबिंद लिनों मैंने
- 0:15गोबिंद लिनों। मीरा के प्रभु गिरधरना गए, मीरा
- 0:27के प्रभु गिरधरना गए आवत प्रेम के मोह।
- 0:38आवत प्रेम के मोलमाई गोविन्द लिनो मैंने गोविन्द लिनो।
- 0:54गोबिंद लिनों गोबिंद लिनों, मोल माई गोबिंद लिनों मोल।
- 1:13मैं निगो बिंदलिनों। बहुत से सवार भूत प्रेत देवी
- 1:41देवता पित्तर। कुल देवता कुल देवी इनके बारे में
- 1:51आए हुए हैं ज्यादातर प्रश्न भूत प्रेत के बारे में।
- 2:03अभी नीदरलैंड से मेरा रात में कोई डेढ़ 2:00 बजे के करीब कोई आत्मा।
- 2:23आखिर उनके पास हो गई। कुछ टैच करने का प्रयास किया तो
- 2:35जाग गई। मेरा कहती तो मैंने अपने लॉकेट को
- 2:43हाथ लगाया, याद किया। और वह आत्मा भाग्य, ये क्या है?
- 2:59ऐसे बहुत से प्रश्न हैं सैकड़ों। की तादाद में ऐसे प्रश्न आइए हम
- 3:11बेस से चलते हैं भगवान कृष्ण का ये श्लोक जो दो श्लोक मैंने बोले
- 3:20नैनम् सेजन्ति शास्त्राण। और उससे अगला श्लोक, अक्षय देव,
- 3:28अपलेदेव अश्रुश, दूसरे अध्याय का तेईसवां और चौबीसवां श्लोक इसकी
- 3:41व्याख्या भी साथ साथ चलती रहेंगी। और क्योंकि इसी का मैं इंतजार कर
- 3:48रहा था इसी से संबंधित है पूरी मानव जाति का प्रश्न है, आप इसको
- 4:01ध्यान से सुनिएगा। मैंने एक शब्द का जिक्र किया दे
- 4:17ही सूक्ष्म शरीर को दे ही कहते। मैंने ये भी कहा कि सारी यात्रा।
- 4:32देहिक की यात्रा है देही एक अल्यूशन है देही एक भ्रम है,
- 4:44बिलकुल बहुरूप यह है अनुभव करने में लगता है जैसे मैं देही हूँ।
- 4:54यहीं से गड़बड़ शुरू हो जाती है। ये होते क्या हैं?
- 5:00देखिये ये विद्युतीय शरीर होते हैं जिनमें।
- 5:09समृतियाँ पिछले जन्म की वासनाएँ विकार कल्पनाएँ अंगकाक्ष है,
- 5:20अपूर्ण वासनय योजनाएं और आपके सभी दबी हुई।
- 5:30मानसिक वासनाएं इच्छाएं कि सब इसमें संग्रहित रहती हैं।
- 5:40इसको देही कहते हैं। इसी की यात्रा है कैसे बना देही
- 5:45ये भी मैंने बता दिया। एक से शुरू हुआ जड़ का मैं जड़ का
- 5:54होना जब मैं में रूपांतरित हो गया, वो बढ़ता ही गया।
- 6:03इधर कॉन्शसनेस लेवल बढ़ता गया। उधर कॉन्शसनेस लेबल भरते के साथ
- 6:18साथ दे ही भी भरता क्या? मानस का जामा मिल गया।
- 6:28यहाँ तक की यात्रा मैंने बता दी थी।
- 6:30आपको देही एक विद्युतीय शरीर है सूक्ष्म शरीर है।
- 6:44इन आँखों से ये देखा नहीं जाता। चर्मचक्ष्म से इसको देखने के लिए
- 6:54छठी इन्द्रियों की आवश्यकता होती है और इसे संभाषण करने के लिए भी
- 7:02छठी इन्द्रियों की आवश्यकता होती है।
- 7:10इसकी भाषा कुछ अलग है। जैसे मैंने कहा, लैंग्वेजेज तो
- 7:15बहुत है, चाइना है। पंजाबी, हिंदी, अंग्रेजी, तमिल
- 7:23वगैरह वगैरह। लेकिन कुछ ऐसी भाषाएँ हैं जो कॉमन
- 7:33है, मानव जाति की, मानव जाति की ही नहीं, सभी ग्रहों के किसी और
- 7:41लोक में चले जाओगे, वहाँ भी लोग प्रसन्न होते हैं तो हँसते हैं और
- 7:46दुखी होते हैं तो रोते हैं। भावना ग्रस्त होते हैं तो पिघलते
- 7:51हैं, रोते हैं, परम प्रसन्नता होती है।
- 7:56तो उछलते हैं, कूदते हैं ये कॉमन सिग्निफिकेंस।
- 8:11दे ही अब समझना जैसे मैंने उस दिन समझाया था कि जीरो वाट का भी बल्ब
- 8:23होता है और करोड़ों। अरबो भी होता है अगर बनाए जाए तो
- 8:39ऐसी देही छोटी वाट के भी होते हैं और बड़ी जबरदस्त वाट के भी होते
- 8:52हैं। मैंने ये भी कहा था कि ये आपको
- 8:55नुकसान नहीं पहुंचाता है। इसको थोड़ा सा हम समझ ले, ये
- 9:03समझने जैसी बात है आप बाजार में जा रहे हो सड़क पर।
- 9:13एक दिशा में आप जा रहे हो दूसरी दिशा में कोई अन्य व्यक्ति आ रहा
- 9:19है वह मुद्दों से नहाया नहीं है या उसके कोई रोग है रोग।
- 9:30जैसे कोढ़ घाव है, रिश्ता है और उस रिश्ते हुए घाव से बदबू निकलती
- 9:42है। मवाद से।
- 9:48तो इस शरीर में रात बढ़ी है, कोण भरा है और आप बिल्कुल सवस्थ हैं।
- 9:59आप के पास से ये व्यक्ति मवादग्रस्त शरीर वाला कोण से
- 10:06युक्त। बात से निकल जाता है।
- 10:10ज़रा ध्यान से सुनिया का समझा जाएगा।
- 10:16इस व्यक्ति की अपनी मजबूरी है। इसके शरीर को कोर्ट ने घेर लिया
- 10:26है। इसके शरीर से बदबू ही बदबू आती है
- 10:31और आप सुगंधित सेंटर लगा के चले एक दिशा से आप जा रहे हो।
- 10:38विपरीत दिशा से वो आ रहा है वो आपके पास से गुजर जाता है।
- 10:47जब गुजरता है तो मवाद की दुर्गन्ध सड़ाध वात भर में रह जाती है।
- 10:59पीछे वह गुजर जाता है। दुर्गंध छोड़ जाता है।
- 11:07अब मुझे बताना सोच के क्या उसने आपका कुछ बुरा किया है?
- 11:16नहीं, उसने आपका कुछ बुरा नहीं किया।
- 11:20वह मजबूर है। कोण ग्रस्त है?
- 11:25बस ऐसी ही बुरी आत्माएं होती हैं दे ही जिन्होंने पाप कर्म किए
- 11:30होते हैं। पाप कर्म, बदबू फैलातें हैं।
- 11:39और पुण्य करम सुगंधी फैलातें हैं। ध्यान से समझते जाना एक शब्द आपने
- 11:52पुण्य कर्म किए हैं। आपके भीतर से सुगंधी आ रहे।
- 11:57और सामने से आने वाला व्यक्ति उसने बहुत पाप किया है।
- 12:01कोई व्यक्ति करोड़ों लोगों को बेगुनाहों को गैस चेम्बर में मार
- 12:10दिया, जिनका कोई कशोर नहीं। यहूदी, पारसी, ईसाई, हिंदू,
- 12:18मुसलमान, सिख होना कोई अपराध नहीं है।
- 12:22ये तो जीने का एक ढंग है। कोई जैसे भी चाहि जीत सकता है तो
- 12:34वह व्यक्ति। बदबू छोड़ देता है और दूर तलक
- 12:42पीछे से आता है वो बदबू फैलाता हुआ जहाँ से गुजरेगा दुर्गंध फैला
- 12:48के जाएगा और बड़ी दूर तलक आपको दुर्गंध आती रहती है।
- 12:53आप नाक भी बंद कर लेते है। क्या हुआ?
- 13:02क्या उसने आपको कोई नुकसान पहुंचाया?
- 13:08क्या उसका नजरिया आपको नुकसान पहुंचाने का था?
- 13:13क्या उसकी मंशा थी कि वो आपको तंग करे, इरिटेट करे नहीं, उसकी
- 13:26मजबूरी है, उसने पाप कर्म ही इतने किए हैं कि पाप गर्मों की
- 13:33दुर्गन्ध। उसकी देही में भर गई है, वह जहाँ
- 13:45भी जाएगा दुर्गंध छोड़कर जाएगा और जो पुण्य क्रम है वह सुगंध है।
- 13:53आपने सैंटल लगा रखा है नहा धो के आए हैं।
- 13:56नए वस्त्र पहने हैं सुगंधित इत्र शिड़क लिए आप जहाँ जाओगे दूर तक
- 14:04सुगंधी को छोड़ते जाओगे। तो क्या आपने किसी को कुछ दिया
- 14:10आपके दायरे से जो गुजरेगा? वह अकारण ही खुश हो जाएगा और उस
- 14:22व्यक्ति के दायरे से जो गुजरेगा वह अकारण ही अक्षमात ही दुर्गंध
- 14:29युक्त हो जाएगा, दुखी हो जाएगा। तो क्या उसने दुर्गंध युक्त?
- 14:36देही ने आपको कुछ दिया, दुख दिया, नहीं दिया क्या आपने सुगंध युक्त
- 14:44होकर किसी को सुख दिया नहीं दिया बस दुष्ट में और देवी देवता?
- 14:57इन दोनों का उदाहरण मैंने दे दिया जिन्हें आप देवी देवता कहते हो,
- 15:04देवता का अर्थ ही है जो कुछ देता है, आपसे मांगता है ध्यान से
- 15:13समझना। देवता जो देता है दाता तेलिंदा
- 15:18थकपा जुगा जुगंतर खाई का देवता का अर्थ है जो आपको कुछ देता है और
- 15:31दुष्ट का अर्थ है। जो आपका कुछ बुरा अनिष्ट करता है
- 15:40अब देवता पास से गुजर जाए, आपका रोवा रोवा सुगंधमान हो जाएगा।
- 15:49मवादयुक्त कोण युक्त व्यक्ति पास से गुजर जाए।
- 15:54तो आप नाक भुज फोड़ लोगे क्या? उसने जानबूझ के ये किया नहीं,
- 16:00देवता ने भी जानबूझ के नहीं किया और दुष्ट ने भी जानबूझ के नहीं
- 16:08किया, उनकी मजबूरियां हैं। देवता के पास सुगंध सुगंध है,
- 16:15पुण्य कर्म है, दुष्ट के पास पाप ही पाप है, दुर्गंध ही दुर्गंध
- 16:25है। मैंने कहा कि आपका कुछ बिगाड़ते
- 16:32नहीं। इनकी मंशा नहीं होती, लेकिन पास
- 16:36से गुजर जाने पे आपने अकसमात कभी देखा होगा आप बैठे हो एक सुगंधी
- 16:45का झोंका आता है आप आस पास देखते हो कोई नहीं होता।
- 16:54और कभी कभी आप बैठे होते हो आपको दुर्गंध का झोंका आता है।
- 16:58बड़ी खतरनाक दुर्गंध का प्रत्येक व्यक्ति ने ऐसा महसूस किया होगा।
- 17:08आस पास कोई भाग बगीचा भी नहीं है। और आसपास कोई गटर वगैरह भी नहीं
- 17:15है, जो सुगंदी या दुर्गंध दे। लेकिन यह आई कहाँ से?
- 17:23आखिर तो आई क्योंकि आपकी नाशिकाओं ने इसे महसूस किया।
- 17:33तो ये आई वो सूक्ष्म देही रूह जिसे कहते थे वास्तव में रूह शब्द
- 17:40नहीं ये देही का? वो उनका है, रूह तो आत्मा है जो
- 17:49निर्लिप्त है। ना उसमें सुगंध है, ना उसमें
- 17:53दुर्गंध है, वह सबसे पार है अलेपा सर्वव्यापी सदा अलेपा तोहे संगत
- 18:09समाय, ये ऐसा उसका स्वरूप है। तब जिन्हें देवता कहते हो आप तो
- 18:23संट हल्का भी लगा हो सकता है संट बहुत भारी भी लगा हो सकता है
- 18:32हमारे शहर में। एक व्यक्ति को शोक शोक था।
- 18:36सेंट लगाने का न स्वार का काम करता था।
- 18:42जब वो पास से गुजर जाता तो करीब दो 3 मिनट तक सुगंध फैल ही रहे
- 18:49थे। इत्र लगा के जाता।
- 18:54न स्वर का काम करता था, न स्वर में इतर पड़ता है वो इतर उसे
- 19:01मालूम था ये ज्यादा बढ़िया है, ज्यादा देर तक काम करेगा वो सुगंध
- 19:06लगा के चलता था जब पास से गुजर जाता।
- 19:12तो सभी लोग उस सुगंध को देखते हैं और काफी देर तक वो बनी रहती है।
- 19:21बस देवता ऐसे ही होते हैं और दुर्गंध अगर बहुत देर तक आपको।
- 19:29इरिटेट करते रहे तो समझो कोई बहुत दुष्ट दे ही आपके पास से गुजर गए
- 19:37और देखा नहीं जा सकता नगन आँखों से और क्षति इन्द्रिय आपके पास है
- 19:43नहीं। यह इनका संक्षेप से डेफिनिशन हो
- 19:54गया। ये दे ही हैं जिन्होंने पाप किए
- 20:02हैं और दे ही हैं जो उन्हें पुण्य के।
- 20:08आप भी दे ही हो जो आपके भीतर है और ये जो सूक्ष्म मुझे सुन रही
- 20:16हैं, ये भी दे ही हैं। ध्यान रखना दे ही दुर्गंध और
- 20:24सुगंध क्योंकि कर्मों का जमावड़ा। सूक्ष्म शरीर में होता है, इसलिए
- 20:31सुगंध और दुर्गंध भी सूक्ष्म शरीर में होती है क्योंकि वह सुपर
- 20:40कंप्यूटर दे ही के भीतर सूक्ष्म शरीर में है और कर्म भी वही
- 20:49संग्रहित है। तो सुगंध तुम्हारे इस शरीर से
- 20:53नहीं आएगी। इस शरीर से जो आएगी वो शरीर के
- 20:56कारण आएगी। दुर्गंध जो आएगी वो भी शरीर के
- 21:00कारण आएगी। इसकी अलग सुगंध और दुर्गंध है
- 21:05लेकिन उस देही के कर्मों के कारण सुगंध और दुर्गंध है।
- 21:10ये तो तुम नहा लोगे, ठीक हो जाएगा।
- 21:14संदल छूट से नहा लोगे, चंदन से नहा लोगे, सुवंध बिखर जाएगा,
- 21:21लेकिन दे ही दे ही को बड़ा आंतरिक स्नान करना पड़ता है।
- 21:28इस दुर्गंध को मैटरने के लिए वो आंतरिक अभ्यास क्या है?
- 21:39जैसे जैसे भुक्तेगा ये दुर्गंध समाप्त हो जायेगा, अब ये वो हैं।
- 21:53एक और थोड़ा सा नियम संचालित न जो 50% तक की रोहे हैं उनके भीतर जो
- 22:11जागृति 50% तक हो गई है। 50 के आस पास देखो मेज़रमेंट बता
- 22:20रहा हूँ, यह फिगर नहीं है, मेज़रमेंट की एक्चुअल थोड़ा इधर
- 22:27उधर हो सकता है, आपको समझाने के लहज़े से बता रहा हूँ।
- 22:35इनको मूर्छित आत्माएं कहते हैं मूर्छित बेही।
- 22:43ये जब मरती हैं तो आमतौर से इसी तरह के लोग होते हैं।
- 22:51संसार में करीब 90 से पिचानवे या कई बार 99 परसेंट तक ऐसे ही लोग
- 23:03होते हैं जिनकी चेतना की कॉन्शनेस लेवल।
- 23:1050% से ऊपर नहीं गया होता। इनको हम मूर्छित रूप में कहते
- 23:16हैं। इनके मरने के बाद प्रकृति इन्हें
- 23:24ततः क्षण गर्व उपलब्ध करवा देती है।
- 23:29कुछ कुछ रुएँ इतनी ज्यादा कौन सी नेक्स्ट लेवल में डाउन होती हैं?
- 23:39जैसे 3020 अब ये बात ध्यान से समझ लेना आप रसम चौथा भी करते हैं?
- 23:51रसम तेरहवीं करते हैं। इनका अर्थ क्या है जो बहुत डाउन
- 24:02कॉन्शसनेस लेवल के होते हैं? 1020 30%।
- 24:07बिलकुल पशुता से अभी अभी आई है बस किसी तरह से मानव शरीर गुण मिल
- 24:14गया कॉन्सेस्नस लेवल बहुत डाउन है, अति मूर्छित रूही हैं, शरीर
- 24:23के लिए तरसती हैं शरीर छूटते ही उन्हें घर चाहिए।
- 24:28वो ओपन आसमान में नहीं रह सकती। ऐसी देही को ऐसी रूहों को प्रकृति
- 24:37तत्व कृष्ण गर्भ उपलब्ध करवा देते है।
- 24:42गर्भ बहुत है यहाँ थोड़ी सी बात। विस्तार बाद मैं करूँगा समझ लेना
- 24:53ये जो कहते हैं रिश्ते नाते पिछले जन्म में अगले जन्म में कोई बेटी
- 25:01बन के ले जाता है, कोई बेटा बन के दे जाता है।
- 25:06कोई बेटी बन के दे जाता है कोई बेटा बन के ले जाता है सब बकवास
- 25:13प्रकृति की गणना किसी और बिंदु से होती है, किसी और डायमेंशन से
- 25:21होती है वो तो मैं बाद में बताऊँगा।
- 25:23आप मुझे थोड़ा सा वक्त दें। मैं इसको खोल दूँ, फिर मैं उसके
- 25:29ऊपर जो बहुत कम लेवल की उन्नत आत्माएं हैं, कॉन्शसनेस लेवल बहुत
- 25:46कम है उनका यही 2030%। उनको प्रकृति, क्षण गर्भ उपलब्ध
- 25:54करवा देती है और वो मांगते भी हैं।
- 25:57गर्भ क्योंकि उन्हें बहुत ज्यादा मोह होता है, पशु श्रेणियों में
- 26:03से आए होते हैं, शरीर के साथ मोह बड़ा होता है।
- 26:07वह अपने आप को शरीर ही समझते हैं। तुम भी अपने आप को अभी शरीर ही
- 26:12समित दो, लेकिन मानव के जामे में समझा जा सकता है कि मैं शरीर नहीं
- 26:21पशु के जामे में समझा नहीं जा सकता बस यही मानव के विलक्षण का
- 26:27है। पशुता इतनी सोई हुई है कि पशुता
- 26:35की कॉन्शसनेस स्लेबर नहीं उठाई जा सकती है?
- 26:43लेकिन मनुष्य अपनी कॉन्शसनेस स्लेबर को उठा सकता है।
- 26:48जान सकता है वो एमआइ पशु नहीं जान सकता।
- 27:00मैंने कहा जीरो वाट का भी होता है, करोड़ वाट का भी होता है।
- 27:10ये जो करोड़ वाटके हैं, इनको हम कह सकते हैं।
- 27:15महादेव तो थोड़ा सा कम वाटते हैं, उनको आप छोटे देवता कह सकते हो,
- 27:25देखिये समझा रहा हूँ। ध्यान रखना सेबक मत जाना विष्णु
- 27:30ब्रह्मा की तरह दीज़ आर ऑल एनर्जी कोई जीरो लेवल की है, कोई करोड़
- 27:48लेवल की है और इनका पूजन किया जाए।
- 27:55यह मुड़ता है। जैसे आपके घर में बिजली होती है,
- 27:59वह एनर्जी होती है विद्युत उसको आप शोड शो किया पूजन करें ठीक है
- 28:09उसके तिलक करें। चावल उसके फेंके रोली मोली बांधे,
- 28:16उसके उसकी आरती गाएं। ये ठीक है नहीं, जब उड़ता है फिर
- 28:27जा। आप उसको गालियां निकालें, आप उससे
- 28:35डरें, ये ठीक है नहीं, ये भी ठीक है तब देवताओं का आह्वान करते हो।
- 28:49और भूत प्रेतों से राक्षसों से रहते हो भूत प्रेत क्या है?
- 28:55जिनका एनर्जी लेवल चाहे 50 तक है समझना बात को लेकिन उनके भीतर की
- 29:05किरणें। अब जब दूसरा मैटर आ गया, थोड़ा सा
- 29:09गहरा समझना पड़ेगा यहाँ पे। उनके भीतर की किरणें बड़ी दूषित
- 29:16आती हैं। कोई बहुत पुण्य करने वाला है।
- 29:25लेकिन वह मच्छी खा के आया है तो उसके मुँह में से बदबू कोई बहुत
- 29:34पाप करने वाला है। वो एलआइसी का रहा है, उसके मुँह
- 29:37में से सुगंध आएगा। बहुत से शराबी मैंने देखे हैं
- 29:43शराब पीने के बाद। इलायची पान खा लेते हैं तो इलायची
- 29:49खाते हुए पान खाते हो। जब मैं उन्हें देख लेता था, मैं
- 29:52कहता मैं समझ गया घरवाली चमटा उठा लेगी।
- 30:02उसको पता न लग जाए लेकिन घरवालिया बड़ी होशियार होती है।
- 30:08उनको तुम्हारी नृत्य करती हुई चाल बता देती है क्या फिर जनाब डूब
- 30:19आये वहाँ जाके? तुम जो लड़खड़ा के आते हो
- 30:24घरवालियां तुम्हारी चाल समझती है तुम्हारी बात नहीं वो तुम तो
- 30:28बोलते ही नहीं हो पीके तो तुम चुप हो जाते हो अंग्रेज बन जाते हो
- 30:38भीतर की तरंगें जैसे लासानी और आसानी तरंगें।
- 30:46कहा गया है। यह भी हो सकता है कि थोड़ा सा
- 30:53बुरा कर्म करने वाले ने कोई पाप भी किया होगा और पुन भी किया होगा
- 30:59और अच्छे कर्म करने वाले ने भी पाप भी किया होगा।
- 31:02पुन भी किया होगा। लेकिन लो लेवल की आत्माएं अगर
- 31:11पुण्य करती करती मर गईं तो उनके भीतर से बिल्कुल आखिरी।
- 31:22जो कर्म थे उनकी सुगंध आएगी। थोड़ी थोड़ी जो पुण्य आत्माएं
- 31:28प्राप्त करती करती मरते हैं, उनके भीतर से दुर्गंध आएगी।
- 31:32थोड़ी थोड़ी अब इन बातों को आप थोड़ा सा क्योंकि बातें अस्तित्व
- 31:39की हैं। समझा रहा हूँ।
- 31:42आपको शब्दों से बुद्धि से समझ आएगा नहीं, लेकिन इशारा जरूर हो
- 31:48जाएगा। देवता करोड़ वाट की बिजली है,
- 32:01उसकी पूजा नहीं करनी होती। रुद्रभिषेक नहीं करना होता बिजली
- 32:06का बिजली का कोई नवारण मंत्र नहीं जपना होता ये सब तुम्हारी बकवास
- 32:18है कोई पाठ पूजा नहीं, कोई किसी प्रकार का वाहन नहीं।
- 32:30ना ही आवाहन करने पे तुम इन्हें बुला सकोगे।
- 32:36फिर ये है क्या? ये गोरखधंधा क्या है?
- 32:41इससे समझो थोड़ा सा जैसे आपके घर में बिजली है।
- 32:51पंखे का बटन है, एसी का बटन है, रिमोट है हीटर का बटन है, गीजर का
- 33:01है, पानी के मोटर का है, रोम हीटर का है।
- 33:09बल्ब का है, ट्यूब का है, सबके अलग अलग बटन है बटन को जैसे ही आप
- 33:23ऑन करोगे पंखा चलेगा। गीजर के बटन कौन करोगे?
- 33:32गीजर चलेगा इसी का बटन कौन करोगे? इसी चलेगा ऐसे ही ये आव्हण मंत्र?
- 33:46इनके भीतर मंत्र कम नहीं करते हैं।
- 33:50ये थोड़ी सूक्ष्मता में मैं उतर जाऊं।
- 33:53अगर आप थोड़ा समझोगे तो टंकारी काम करते हैं टंकारी शब्द काम
- 33:59नहीं करते शब्दों के भीतर की टंकार।
- 34:07वो काम करती है जैसे आपको बताऊँ ओम ओम शब्द में और अल्लाह इस शब्द
- 34:21में जो काम करती है वो ओम। और अल्लाह ने काम करता है, काम
- 34:28क्या करती है? काम करती है, जो मकार की टंका है?
- 34:50अगर आप ब्लैक हॉल में जाओगे, सूर्य में जाओगे, शुक्र में जाओगे
- 34:57या अस्तित्व में जाओगे या अपने ही भीतर जाओगे।
- 35:05क्योंकि यथापिण्ड है तथा भ्रमण है।
- 35:08आपको बिल्कुल इसी तरह के मिलते जुलते कहता हूँ सेम हवाएं तो
- 35:13निकली नहीं सकती, आवाज़ सुनाई पड़ेगी वो टनकार परमात्मा।
- 35:23तक तुम पहुँच गए हो या उसको आवाहन करने का एक जरिया है।
- 35:30बटन को ओन कर देना बहुत बारीक बात है समझा पाऊँ तो मैं भी धन्यवाद
- 35:38हूँ और आप भी धन्यवाद। ये टंकारे काम करेंगे अल्लाह के
- 35:45भीतर का जब मैं कहता हूँ क्रियायोग के वक्त जब आप
- 35:50स्वास्थ्य छोड़ते हो अब उसमें आपने शार शब्द का इस्तेमाल किया?
- 36:00ये जो है है जब आप कहोगे हूँ इस्लाम धर्म में हूँ हूँ ध्वनि का
- 36:07प्रयोग किया गया ये तनकार तो ये कुंडलिनी के ऊपर चोट पहुंचाएगा आप
- 36:14ज़रा करके देखना जब आप स्वास्थ लेके छोड़ोगे ना यक लक्स छोड़
- 36:19दोगे। तो हू की आवाज आएगी ये हू की जो
- 36:28आवाज है, ये पकड़ ली इस्लाम ने जो मकान की आवाज है।
- 36:39ये पकड़ ली सनातन में लेकिन दोनों ही आवाजें आवाहन हैं।
- 36:48ये दोनों ही आवाजें गूंजती हैं। अभी तक हू की भी गूंजती है।
- 36:57और अंकार की भी होती है। ये मिक्सी से ना एक जब आप जाओगे
- 37:05वहाँ इनका मिक्स रूप मिलेगा। तुम्हें अब बोल के तो वो आता नहीं
- 37:10लेकिन आपको समझा रहा हूँ। ये डंकार कहीं कहीं अस्तित्व में
- 37:25तुम इस तरह की भी आवाज पाओगे? ये शंख की आवाज़ है ना?
- 37:36शंख में इस तरह की आवाज़ निकलती है इसलिए शंख को बजाया गया।
- 37:41सनातन में क्या था? ये टनकार से मिलता था।
- 37:47जिसे बुल्ले शाह कहते हैं जा ठकर दे डेरे बड़या, जिते व दे नाद
- 37:521000 या हजारों नादों में से मुख्य नाद ये शंख की आवाज़ भी
- 38:00मिलती है उनका हर्ष। और हूँ की आवाज भी मिलती है।
- 38:08अपने अस्तित्व के भीतर ये आवाज भी आती है।
- 38:12ये दोनों आवाजें आती हैं किसी ने वो पकड़ लिया, किसी ने आओ पकड़
- 38:17लिया आती दोनों है मिक्स रूप है, लेकिन।
- 38:25ये कहने की बात नहीं है ये अनुभव करने की, वहाँ जाना होता है वहाँ
- 38:34जाने से ही आप आनंद उठा सकते हो आप जब आप वहाँ जाओगे तो ये एक
- 38:42लक्षण बताया था संत पुरुषों ने। वो संत चाहे इस्लाम के रहे हो,
- 38:46सूफी रहे हो या वो सनातन के रहे हो, संत संत होता है, उनकी कोई
- 38:52जात नहीं होती। जात न पूछे साधकी पूछ ले जियो
- 38:56ज्ञान मोल करो तलवार का पड़ी रहने दो म्यान।
- 39:04आप थोड़ा सा और सूक्ष्म कर लो। बुद्धि को देवताओं को जब आवाहन
- 39:14करते हो जैसे एसी का बटन ऑन किया हो तो भरी गर्मी के अंदर आग बरस
- 39:23रही है, बाहर आपको शीतलता प्रदान करेगा।
- 39:30जब आप याद करोगे देवता को आवाहन करोगे तो ऐसे जैसे के बगीचा
- 39:38तुम्हारे पास आ गया होगा आपको सुगंधी आय।
- 39:47देवताओं में आसानी रंगें होती है और आपके हिसाब से मैं समझाऊं तो
- 39:54ये पाजिटिविटी का भंडार होते हैं। देवता ये जो कॉन्शसनेस लेवल है।
- 40:07ये नेगेटिविटी और पाजिटिविटी के आधार पर आसानी और आसानी रंगें
- 40:13बनाई गई जितना नेगेटिविटी का वॉल्यूम है।
- 40:27पैमाना है उतने ही लासानी तरंगें और जितना पॉज़िटिव टीका है, उतने
- 40:36ही आसानी तरंगें यानी आसानी तरंगें खुशबू, लासानी तरंगें।
- 40:43बदबू, दुर्गंध और आसनिक रंगें सुगंध।
- 40:51अब इसको समजते जाना बराबर बोल रहा हूँ।
- 40:53मैं कई कई भाषाओं में कई कई इशारों से समझा रहा हूँ तो मैं
- 41:00देवताओं को आप आवाहन करोगे? याद करोगे?
- 41:05ये है पहली बात तो मैं तुम्हें बता दूँ ये है लेकिन ये इस तरह
- 41:11नहीं है जैसे आप मानते हो देवी को चुन्नी, चिढ़ाओ पत्थर की मूर्ति
- 41:18को ठंड लगती है। देवी को साड़ी दिया हो ये सिर्फ
- 41:26तुम्हारी रिश्वत देने और लेने की, जो भीतर की तमन्नाएं हैं, जो
- 41:34संस्कार हैं वो यहाँ भी काम कर जाते हैं।
- 41:37देवताओं को भी आप रिश्वत दे दो, सारी उम्र रिश्वत लेते रहे हो?
- 41:42तो लाल लाल वाले बीर को भी दो चिरागम वालों को भी दे दो,
- 41:52खेत्रपाल को भी दे दो ये रिश्वत देने के डाक है, बकरा चढ़ा दो।
- 42:02शादी हुई तो बकरा दे दो बकरे ने क्या बिगाड़ा अभी शादी तुम्हारी
- 42:06हुई बेटा तुम्हारे हुआ बकरे ने क्या बिगाड़ा?
- 42:14उसको क्यों मार रहे हो? लेकिन मनुष्यता के पागलपन की हद
- 42:20कहाँ होगी? ये सब पागलपन की हदें हैं।
- 42:25समझ अब तुम्हें खुशी हुई है। अब बताने वाले ही ऐसे हैं तभी तो
- 42:33मैं कहता हूँ इनको लाला वाले, पालम वाले, इनको सबको फेंक दो।
- 42:38ये चिराग वगैरह तोड़ दो जिंदगी के।
- 42:47आईने को तोड़ दो। ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो
- 43:08इसमें अब कुछ। भी?
- 43:12नजर आता नहीं। कोई सागर दिल को बहलाता नहीं वे
- 43:31खुद ही मैं भी करा। आता नहीं कोई सागर दिल को बहनाता
- 43:50नहीं क्या बिगाड़ा? शादी तुम्हारे बेटे की हुई बलि
- 44:01देते हो तुम बकरे की यही देना होता है सर दे देते हैं ना सर
- 44:12जैसा ही हो तब वैसे ही उसके। मुंज होती है वैसी आँखें होती है,
- 44:18नाक भी बिच में देखता है तो ये लो मेरा सिर ले लो, सिर नहीं देता।
- 44:25लेकिन कबीर कहते हैं अगर आनंद को पाना जे तो प्रेम मिलन की चाह।
- 44:35अगर चाव है ना तुम्हें उस आनंद में डूबने का उस मौज मस्ती में
- 44:43कलोल करने का शीश तलीधर घर में रहो तो सिर को काट के तलीपे रख
- 44:52लो। और फिर मेरा घर तुम्हारे लिए आदर
- 44:55है। मानवता इतनी उड़ताओं में खो गई है
- 45:05कि उसने सारे कर्मकांड सत्यो को कर्मकांडों में बदल दिया है।
- 45:13था कुछ बना दिया कुछ जितनी ज्यादा सुगंध उतनी ज्यादा आसानी तरंग है
- 45:29जितनी ज्यादा दुर्गंध उतनी ज्यादा लासानी तरंगें।
- 45:35और जितनी ज्यादा सुगंध यानी पॉजिटिविटी अगर बात से गुजर जाए
- 45:40ना तो आपका मन खुशहाल हो जाएगा और वो पॉजिटिविटी आपको बल देगी।
- 45:49साहसिक आपको एंकरेज करेगी। जैसे ये मोटिवेटिव स्पीकर्स ये
- 46:00आपको शब्दों से एंकरज करते हैं। ये मोटिवेशन स्पीकर आपको कहानियों
- 46:06सुना देते हैं, वैसे ही देवता अगर पास से गुजर जाए।
- 46:12तो सच में आपके भीतर पॉज़िटिविटी का खजाना भर जाता है, जितनी
- 46:18ज्यादा पावर है, अब भगवान शंकर को भला हो गया।
- 46:23देव के सर्वोपरि पॉज़िटिविटी से भरे पड़े हैं, इसलिए महादेव कहते
- 46:29हैं बाकी देव। भगवान शंकर महान विष्णु को
- 46:36बुलाओगे, थोड़ी सी कम ब्रह्मा को बुलाओगे और कम तो फिर ये पास से
- 46:43गुजर गए ध्यान रखना ये हैं। ये सब हैं लेकिन ये नहीं कहते
- 46:55हमारी पूजा करो, कभी पावर ने कहा है मेरा सोर्स उपचार पूजन करो
- 47:02मेरा रुद्रभिशेक करो कभी बिजली ने कहा है एसी तुम्हारी कितनी सेवा
- 47:08करता है, फज? दिन भर रात के 2400 घंटे साल भर
- 47:12तुम्हारी सेवा करता है ये पानी की मोटर तभी कहा है मुझे भी तिलक कर
- 47:19जाओ, अक्षत फेंक जाओ, फूल फेंक जाओ नहीं कहा ये पंडितों की
- 47:23शरारतें हैं वो मुलभियों की शरारतें हैं ये पंडितों की
- 47:28शरारते। मनुष्य ने अपने लोभ के लिए न जाने
- 47:35क्या क्या परपंच रच लिए हैं और ये परपंच उनके लिए तो फायदा देते हैं
- 47:42लेकिन आपको गर्त में दखल देते हैं।
- 47:45मरते रहो, पीठते रहो। फिर अगर थोड़ी सी गलती हो गयी तो
- 47:50चिराग नहीं जलाया होगा। कुछ बुरा हो गया बुरा अच्छा
- 48:00ज़िन्दगी का खेल है भाई इसमें लाल वाला मलेर कोटला वाला कहाँ से घुस
- 48:07गया? तुम्हारे अपनी ज़िन्दगी के कर्म
- 48:11काम नहीं करते क्या? मैं अक्सर मजाक कर लिया करता था।
- 48:17दोस्तों से मैं कहता बहुत गर्मी पड़ रही है, हाँ लाइट नहीं है तो
- 48:26करू लाला वालों को फ़ोन अब बिजली घर में फ़ोन लगाता भाई लाइट छोड़
- 48:31दो। करू चिरागों वालो को फ़ोन लाख
- 48:37ज़ोर लगा ले तुम्हारा चिरागों वाला, और ये लाला वाला और
- 48:45मलेरकोटला वाला पंखा नहीं चलेगा ये हमारा लाला वालो तो वो है।
- 48:51जो पावर हॉउस में बैठा है और बटन को ऑन करेगा तो चलेगा फिर
- 48:57तुम्हारा एसी चलेगा फिर फिर चलेगा तुम अव्वल दर्जे के मूड बना दिया
- 49:07गया। भक्त जैसे जैसे बीतता जाता है,
- 49:21तुम्हारी मुर्जा गहरी होती जाती है।
- 49:23तुम्हारी मान्यताएँ गहरी होती जाती हैं।
- 49:27इनको तोड़ने वाला कोई आएगा आता है तुम टूटने वाले बन।
- 49:36तुम्हारे अंधकार को नाश करने वाला दिया आया करता है, लेकिन तुम्हें
- 49:43तैयार होना होगा अगर तुम उस दीपक को ही बुझाने की चेष्टा करोगे तो
- 49:50याद रखना, प्रकाश से वंचित हो जाओगे।
- 49:53इस प्रकाश ने बड़ा काम करना है। अपनी मान्यताओं के उलट तुम्हारे
- 50:01अंधेरे से उलट अगर दिया जलता है तो उसको बजाने की चेष्टा मत कर
- 50:07अगर बजाने की चेष्टा करोगे तो खुद ही अंधकार में सड़ोगे ना पर
- 50:13पाओगे, ना ना पाओगे। ना देख पांव अंधेरे से जूझते
- 50:18रहोगे जब हम देवताओं का आह्वान करते हैं, ये अच्छी रूह हैं ये
- 50:30ख्वाजा पीर पैगम्बर अच्छी रूह हैं।
- 50:35इनको जामुन बताते हैं तो ये हमारे पास से गुजर जाते हैं, बस दैट इज़
- 50:41सफीशियंट। ये तुम्हें पॉजिटिविटी आसानी
- 50:48तरंगों से युक्त भरे पड़े हैं। खजाने हैं।
- 50:53और ये पास से गुजरे और इनका गुजरना काफी है कि तुम्हें
- 51:00पाजिटिविटी से भर जाएंगे। जैसे ये मोटिवेटिव स्पीकर तुम्हें
- 51:05पाजिटिविटी से भर जाते है। तुम इतने इतने महान पुरुषों के
- 51:11कार्ड्स पढ़ते हो। घबराना मत, इतने इतने गाने सुनते
- 51:17हो, रात जीतने भी संगीन। रात जीतने बिसंगी न होगी सुबह
- 52:00उतने तिरंगे। घमना कर घर है बादल घनेरा किसके
- 52:20रोके? रुका है सबेरा रात भर का है, मैं
- 52:31है माँ अँधेरा। ये मोटिवेशनल स्पीकर तो मैं
- 52:39समझाते हैं, घबराओ। गिर गए हो कोई बात नहीं उठने की
- 52:45क्षमता है उठ जाओ लड़ो आखिर में जीत तुम्हारी हो गयी तो विपत्ति
- 52:58काल में इन पॉज़िटिव रोहों को आवहण करो।
- 53:06ये पास से गुजर जाना ही इनका काफी है।
- 53:15ये है पॉज़िटिव रंग है इनकी पूजा मत करना पूजा के नाम पर सब
- 53:20दुकानदारियाँ है ये जो सिर हिलाना।
- 53:23बाल खिला लेना, चिमटे मारना, बुआ के आवाज देना, खुद को जख्मी कर
- 53:30लेना, तुम भी तरस आता होगा लेकिन ये दुकान दर्ज?
- 53:42कई पहलवान भी अपने मुकधर छाती पे पेट पे जानबूझ के मरवाते हैं।
- 53:48क्यों सख्त हो जाती है चमड़ी? खाल उनकी गैंटेज जैसी हो जाती है।
- 53:53मोटी यह भैस है। अपने आप को दुखी कर मैं सुचिष्ट
- 54:09दुखी लोग हैं, एडिटिव हैं देवता और अक्षय दुष्ट इनकी व्याख्या
- 54:22मैंने की। पिछली सारी बातों को मैंने पहले
- 54:25बता दिया था ताकि मुझे पता था इस 22 में 23 में स्लोक पे आके
- 54:32अड़ेगी बात 23 में 24 में तो यहाँ सारी बातें क्लियर हो जाएंगी।
- 54:39ये काम है इसलिए मैंने पहले ही आसानी लासानी तरंगें बगैरत में
- 54:44साफ कर दी थी तो ये देवी देवता अब तो समझ गए हो गया।
- 54:55इनको रुद्रभिशेक करने की आवश्यकता नहीं।
- 54:59इनको सच्चे हृदय से पुकारो, पुकारना काफी से भी ज्यादा है मोर
- 55:10दैन सुफ्फिसिएंट और तुम रुद्रभिशेक।
- 55:20तो 1000 साल तक बैठे रहो या नहीं आए तो मैं कहता हूँ रात को मत
- 55:26जागना। इनके अर्थ कुछ और है।
- 55:30भगवान कृष्ण का ये शब्द लेके लोग रात भर जागते हैं, मेरा योगी
- 55:35जागता है जब तुम्हारा संसार सोता है तो फिर जागो पर योगी।
- 55:43तो देवताओं की आसानी, तिरंगें और दुष्कर्मों की लासानी तिरंगे
- 55:48तुम्हें स्ट्राइक करते हैं रिज़र्व वेव्स।
- 55:55ये तरंगें आपको जब स्ट्राइक करती हैं तो आपको झटका सा लगता है,
- 55:59हल्का सा मेरा तुम्हें लगा होगा। उस वक्त लासानी तरंगें आपके पास
- 56:06से गुजरी होंगी। और तुम्हें स्ट्राइक जैसा महसूस
- 56:14हुआ होगा, तुम्हें ऐसा लगा होगा कि जैसे किसी ने मुझे छुआ और
- 56:21तुमने बाबा का नाम लिया। मुझे पुकार और ये चली गई, मुझे
- 56:28पुकार ने से नहीं गई। तुम्हारी जागने से गई है तुम जाग
- 56:38गए तुमने हेजोल की ये पास से गुजरे थे, कई बार ठहर भी जाते है।
- 56:47सिर्फ गुज़रते हैं अब देखो मैं बोल रहा हूँ मैंने बहुत बर्फ़ से
- 56:51कहा ये हज़ारों, लाखों, लाखों की तादाद में सूक्ष्म रूही मुझे सुन
- 56:57रहे हैं। ये ठहर जाती हैं।
- 57:03अध्यात्म की बातें इन्हें पसंद हैं।
- 57:07और आप थियेटर्स में देखोगे जहाँ ये फिल्मों चलती है पोर्न वगैरह
- 57:12वहाँ ये दुष्ट आत्माएं होती हैं लालसानी तिरंगे ये क्यों स्थान
- 57:19अलग अलग बनाए गए? मंदिर बनाए गए वेश्या घर बनाए गए।
- 57:27इनकी तरंगे देखना आप जा के मैं आसानी और लासानी तरंगों पे सर्ज
- 57:33कर रहा था। मुझे क्या पता था ऐसा कुछ होता है
- 57:40तो मैंने कहा। मंदिर तो जाता था मंदिर के अंदर
- 57:45पाजिटिविटी क्योंकि जो आता है श्रद्धा भाव से आता है,
- 57:49पाजिटिविटी लेके आता है, आसानी तरंगें लेके आता है और कोई बैठता
- 57:55है, ध्यान में जाता है तो भी आसानी तरंगें निकलते हैं।
- 57:59पॉजिटिविटी निकलती है। ध्यान में पॉजिटिविटी निकलती है
- 58:02जिसे हम संकल्प कह देते हैं। ये सब बातें शब्द अलग अलग हैं।
- 58:07बात एक ही है आपको समझा रहा हूँ अलग अलग शब्दों से और ध्यान में
- 58:13बैठता है। तो संकल्प निकलता है जिसे हम
- 58:17पॉज़िटिविटी कहते हैं, संकल्प पॉज़िटिविटी और वो संकल्प की
- 58:25पॉज़िटिविटी तिवारी में भी जाते हैं।
- 58:30बस यही महत्त्व है। मंदिर का और कोई महत्त्व नहीं,
- 58:33यही महत्त्व है गुरुद्वारा का। जब हम गाते हैं तो आसानी तरंगें
- 58:40दीवारे पे जाते हैं। वो जो बैठने वाला भाई है,
- 58:46गुरुद्वारा में उसका शरीर भी पी जाता है इसलिए हम उनके चरण स्पर्श
- 58:51करते हैं। वहाँ पड़ी हुई प्रत्येक चीज़
- 58:54मूर्ति है, चाहे कुछ भी हो, हम नमस्कार करते हैं, शरना मृत लेते
- 58:58हैं क्योंकि वह पानी भी पवित्र हो गया होस्टिविटी से युक्त हो गया
- 59:04तरंगें ही पॉज़िटिव हैं, वहाँ सारी जो आता है, श्रद्धा भाव से
- 59:08आता है, कोई श्रद्धा से आता नहीं। अविश्वास से तो जाता ही नहीं, कोई
- 59:14अविश्वासी व्यक्ति तो मंत्र के भीतर ही प्रवेश नहीं करता।
- 59:17डूडी में तो श्रद्धा से युक्त होना एक अपोज़िट है और श्रद्धा
- 59:24लेकर आप जाते हो। चाहे आपने परमात्मा देखा हो ना
- 59:28देखा हो। लेकिन श्रद्धा की भावना अपने आप
- 59:31में एक पाजिटिविटी है तो पाजिटिविटी लेके जाओगे तो दीवारें
- 59:36पी जाएंगे वहाँ जो जाएगा श्रद्धा लेके जाएगा दीवारें और वहाँ जो सब
- 59:43चीजें उन पाजिटिविटी को पी जाएंगे तो जब आप।
- 59:50अपने धार्मिक स्थलों में जाओगे, गुरुद्वारा है, वो मस्जिद है,
- 59:55मंदिर है और चर्च है, पाजिटिविटी को लेके जाओगे, श्रद्धा को लेके
- 1:00:00श्रद्धा पाजिटिविटी का रूप है विश्वास भी पाजिटिविटी का रूप है।
- 1:00:09तो ये तरंगें जब भी जाएंगे तो वहाँ का सारा माहौल खुशनुमा हो
- 1:00:13जाएगा और खुशनुमा माहौल तो मैं पॉज़िटिव दे देगा।
- 1:00:21क्या कारण था कि संत कहते थे? जब तुमने कोई शुभ काम जाना है,
- 1:00:26यात्रा करनी है, कोई कॉम्पिटिशन पे जाना है तो माता पिता के चरणों
- 1:00:32के हाथ लगा के जाना वो आशीर्वाद देंगे।
- 1:00:35दट। इस पॉज़िटिव डे उस पॉज़िटिव को
- 1:00:39तुम पी जाओगे। और पाजिटिविटी से युद्ध हो गए।
- 1:00:44तुम जब एग्ज़ैम देने जाओगे, तो फ़ार बेटर कर पाओगे, बस ये
- 1:00:51विज्ञान था पीछे का, अगर किसी का शराब लेके जाओगे, दुरसी लेके
- 1:00:56जाओगे तो ज्यादा ठीक नहीं रहेगा। तुम गड़बड़ा जाओगे तुम्हारे मस्त
- 1:01:03क्योंकि नेगेटिविटी बेच में आके तो सुबह सुबह जब जाओ आज पेपर है
- 1:01:09तो भगवान के दर्शन करके जाओ मंदिर में जाओ क्यों वहाँ जाओगे वहाँ
- 1:01:13बर्फ़ पड़ा है पॉज़िटिव टेस्ट तो साथ थोड़ी सी पॉज़िटिविटी लेके
- 1:01:19आओगे। वो आपकी सहायता करेगी।
- 1:01:22ये कारण था बड़ो से आशीर्वाद लेके जाओ, ये भी सहायता करेगा।
- 1:01:30ये कारण थे पीछे का विज्ञान हम चुक गए चलो विज्ञान चुक जाओ कोई
- 1:01:35बात नहीं लेकिन ना पता हो कि जहर। मौत का कारण बनता है।
- 1:01:42फिर भी अगर बिना जाने भी तुम जहर पीरोगे तो मरोगे नहीं जानते कि
- 1:01:48बड़े बूढ़ों का पांव छूने से आशीर्वाद लेने से बहुत चुनौती आती
- 1:01:52है। काम सिद्ध होते हैं भगवान की
- 1:01:55मूर्ति के पास जाने से। पाजिटिविटी आती है और काम करना है
- 1:02:03पाजिटिविटी नहीं अगर हारते हो ना तुम तो नेगेटिविटी के कारण हारते
- 1:02:10हो? तुम देखना कभी तो मैं सर्च करता
- 1:02:18करता हूँ। तरंगों की सर्च करता करता लासानी
- 1:02:24आसानी तरंगों की सर्च करता करता दिल्ली, आग्रा वगैरह में मैं
- 1:02:30सामान लेने जाया करता था तो लासानी आसानी तरंगों को देखने के
- 1:02:37लिए। मंत्र तो मैंने देखे ही थे, मैं
- 1:02:42रेड लाइट एरिया में कोठे पर चला गया हूँ, अपनी आपबीती सुनता हूँ
- 1:02:48अब उनके लिए तो कोठे पर आने वाला सारा सब ग्राहक है, अब कोई इतनी
- 1:02:56तो अंतर्यामी है नहीं। कि वो जाने हैं कि यह व्यक्ति
- 1:03:00सिर्फ देखने आया है। लासानी तिरंगे कैसी?
- 1:03:05और जैसे ही मैं पूड़ियाँ चढ़ा मुझे दुर्गन्धनी शुरू हो गया।
- 1:03:10मैं जब ऊपर गया डुडी को क्रॉस भी नहीं किया था वहाँ की जो मालकिन
- 1:03:16होती है समझो के। वो खूब मोटी सी बैठी थी।
- 1:03:21उसने मुझे गर्दन से पकड़ लिया, कॉल कहाँ चले वो मैंने कहा कहीं
- 1:03:26नहीं चले मैं सिर्फ यहाँ देखने आया था क्या देखने आया था गालियां
- 1:03:31निकाली खूब जहाँ तेरी माँ बैठी है।
- 1:03:42निकाल ₹200 मैंने ₹200 लगा लिए, उससे जैसे मैं समझ गया, बस नीचे आ
- 1:03:53गया। चुप कर के भीतर जाने ही नहीं दिया
- 1:03:56उसने। ये होती है सिर्फ पुड़िया ही चढ़ा
- 1:04:06तो मंदिर भी जा खैर बैठे तो लुटेरे वहाँ भी है।
- 1:04:12यहाँ भी लुटेरे बैठे यहाँ और ढंग के लुटेरे बैठे।
- 1:04:16वहाँ उठन के बैठन तो ऐसा हुआ देवताओं का वहन करोगे तुम शुभ
- 1:04:26कामो में देवताओं का वहन करते हो। ओम गम गणपते रहे ना माँ बाप का
- 1:04:32है। सूर्यकोटि समप्रभा निर्भिकम कुरु
- 1:04:35में देव सर्वकार ये पाजिटिविटी है।
- 1:04:43तुम चाहते हो कि मेरे सब काम सुख शांति से संपन्न हो जाए।
- 1:04:52आप ध्यान करते हो गणेश का सबसे पहले थोड़ी सी बात समझा दो गणेश
- 1:05:02में पोसिटिविटी बहुत ज्यादा है। और गणेश का एक माइनस पॉइंट है।
- 1:05:13यह क्रोध भी बहुत जल्दी कर जाता है, इसलिए उसका विकट रूप तुमसे
- 1:05:21सहा नहीं जाएगा। तो इसलिए।
- 1:05:27देवता भी सबसे पहले गणेश की पूजा करते है।
- 1:05:30वह क्रोधी बड़ा है, लोग डरते भी है।
- 1:05:37बहुत से लोग तो चिरागों वालों का चिराग भी इसीलिए लगाते हैं, डरते
- 1:05:41हैं लेकिन ध्यान रखना डरने की बात पूछते हैं।
- 1:05:46तुम पंगा ही मत लो, मैं तो कहता हूँ क्यों बुलाते हो गणेश को अगर
- 1:05:52नहीं बुलाओगे अगर मंत्र गलत गलत पढ़ दिया तो फिर तुम तंग होगे
- 1:06:00लेकिन ये पास से गुजरेंगे सिर्फ और वो अपनी तरंगी छोड़ के जाएंगे।
- 1:06:10अगर इनके भीतर से आपके प्रति सहानुभूति यार ये प्यार आ रहा है
- 1:06:16तो आप भर जाओगे पॉज़िटिव से अगर इनके भीतर आपके प्रति नफरत आ रही
- 1:06:24है तो आप भर जाओगे। नफरत फैलाएंगी ये बुरी रोड है जो
- 1:06:32पापों के कारण दुर्गन्ध फैलाती है, इनका कसूर है।
- 1:06:38इन्होंने जिंदगी में पाप किए, शरीर छूट गए, अब अश्वरीय आत्माएं
- 1:06:44हैं, दैही हैं। जहाँ से गुजरेंगी बदबू आती है और
- 1:06:50लासानी तरंगें आपको भी घेर लेंगी। ये इनका सारा रूप है।
- 1:06:59ये विद्युत का प्रवाह है। जब आप इनको बुलाते हो भुलाने के
- 1:07:04विशेष मंत्र हैं, ये मंत्र नहीं मंत्र का मतलब फॉर्मूला होता है
- 1:07:09मंत्र ये नहीं होता बकरतुंडे महाकाय नहीं, ये कोई मंत्र नहीं
- 1:07:13है, इनके विशेष मंत्र हैं, इनके टनकार मंत्र होते हैं वो टनकार ही
- 1:07:20आप सूख जाते हो। खैर, ये बड़ा विस्तृत विषय है
- 1:07:30इसके बारे में फिर कभी अलग से बोलू तो बोलू लेकिन जीवन बड़ा
- 1:07:34छोटा है, किस किस पे बोलेंगे, किस किस को छोडूंगा।
- 1:07:40आज ये बड़ा हजारों व्यक्तियों का प्रश्नागत।
- 1:07:45इसलिए मैं मुझे खोलना पड़ा इस समय कि आज तो खोलना ही पड़ेगा।
- 1:07:55बेखहाल में अब तक मैंने जो बात आपको समझाई।
- 1:08:00अब आपकी समझ में आती होगी, लेकिन ना तो पूजा करनी है, ना इनकी आरती
- 1:08:06उतारनी है, कुछ नहीं करना। ये विद्युत का प्रवाह है, इनका
- 1:08:11उपयोग करना है। ऐसे ही शब्द मैंने प्रयोग कर
- 1:08:17दिया। न इनकी उपासना करनी है, न इनको
- 1:08:24आपने गालियां निकालनी है, न उपासना काम करेगी, न गालियां काम
- 1:08:30करेंगी। इनके ऊपर कोई फर्क नहीं है।
- 1:08:33बिजली को आप गालियां निकालते रहो, निकालते रहो।
- 1:08:36लेकिन बिजली कब आपको फायदा देगी जब आप उसका प्रयोग करोगे?
- 1:08:42उपयोग करोगे एसी में आपको ठंडक देगी।
- 1:08:46हीटर में आपको गर्मी देगी, लेकिन अगर हाथ लगाओगे तो शॉट मारेगा, मर
- 1:08:51जाओगे तो? तो कुछ ऐसे भी तरीके हैं मैं
- 1:08:56मंत्र जपने वालों को टंकार वालों को खास तौर से बता दूँ।
- 1:09:04अगर वो टंकार गलत हो गई तो आपने बिजली की नंगी तार को हाथ लगा
- 1:09:11दिया। तुम्हारे भीतर डाय का मतलब लासानी
- 1:09:16तरंगों से भर जाओगे और लासानी तरंगों से भरे जाने नेगेटिविटी से
- 1:09:22भरा व्यक्ति मरे से भी ज्यादा दुखी हो जाता है।
- 1:09:28मर के तो शांति मिल जाती है। तो अगर नंगी तार को हाथ लगाया, वो
- 1:09:34ही बिजली जो आपके 1000 कम आएगी नकन तार को हाथ लगाया तो आपको शॉट
- 1:09:41भी दे दिया तो ये टनकारों का उपयोग ऐसे ही मत करना।
- 1:09:51टनकारों को बड़ा ढंग से बोला जाता है और ये टंकारे ही काम करते हैं।
- 1:09:56शब्द नहीं काम करते हैं। जैसे मैंने कहा अल्लाह हूँ ये काम
- 1:10:07करे। ये आवाज आप अभी वैज्ञानिक ने भी
- 1:10:17प्रयोग किया है। वैज्ञानिक ने ब्लैक होल की आवाज
- 1:10:21को और सूरज की आवाज को रिकॉर्ड। तो ये टनकारे क्या होती है?
- 1:10:33किस तरह से मंत्र या स्तोत्र बोले जाते है, इनके टनकारों का कैसे
- 1:10:41उच्चारण करना है, ये शब्दों के साथ टनकार आएगी।
- 1:10:46अकेली टनकार भी आ सकती है। हमारे दूसरे चैनल पर बाबा जी
- 1:10:51सीक्रेट ऑफ एस्टोलॉजी में बहुत से स्त्रोतों और मंत्र वगैरह दिए हुए
- 1:10:59हैं। वो टनकार के साथ दिए गए हैं,
- 1:11:02बिल्कुल एक्यूरेट वैज्ञानिक सेंटीफिकली ढंग से।
- 1:11:10वो आपको पाजिटिविटी देंगे। बहुत से प्रत्यक्ष प्रमाण मेरे
- 1:11:17पास रोज़ आ जाते हैं कि बाबा ये लगातार हमारे घर में चलते हैं।
- 1:11:23जीस भी तरह की मुसीबत है। कोई दृढ़ता है तो हम कनक धारा
- 1:11:30सूत्र लगा लेते हैं। कोई साहस की कमी है, दुष्ट तंग कर
- 1:11:36रहे हैं, दुश्मन तो बगलामुखी लगा लेते हैं, घर में सुख शांति
- 1:11:41चाहिए। मस्तिष्क खराब हो रहे हैं, लाई
- 1:11:44झगड़े हो रहे हैं तो गायत्री लगा लेते हैं।
- 1:11:49आप दाएं आ रही हैं, विपत्तियाँ आ रही हैं तो गायत्री लगा लेते हैं।
- 1:11:54गायत्री महामंत्र गायत्री मंत्र जब मैं दीक्षा देता हूँ तो मंत्र
- 1:12:00साथ में देता हूँ आज कल। वो लिखा हुआ होता है उसमें वो
- 1:12:04शब्द ऐड कर दिया गया है जो 24 माह अक्षर विश्वमित्र जी ने निकाला
- 1:12:09था। दीक्षा के साथ वो गायत्री मंत्र
- 1:12:18भी मैं देता हूँ और कहता हूँ विपत्ति कार्य में पढ़ना इसको
- 1:12:20रोज़ नहीं। खैर, कई व्यक्ति भूल जाते हैं या
- 1:12:27नहीं पता होता तो अगर वह गायत्री मंत्र जो दीक्षित हैं सिर्फ
- 1:12:31दीक्षित हैं, वह गायत्री मंत्र मेरे से ले सकते हैं जहाँ आकर
- 1:12:38आश्रम में से। तो जैसे दुर्गन्धयुक्त व्यक्ति के
- 1:12:46पास से निकल गया। आभास हुआ ना तुम्हें कुछ बुरा सा
- 1:12:49लगा। ऐसे ही मीरा को टॅच लगा।
- 1:12:55उसकी वृद्धि कुछ कामों के प्रकार की होगी इस रोग की।
- 1:13:02वो टच देगी, स्ट्रोक देगी तो बिगाड़ कुछ नहीं सकती।
- 1:13:07बस इतना से निकल जाती है, जाती जाती स्ट्रोक दी जाती है, इनसे
- 1:13:13इनसे डरना नहीं। पहली बात तो ये आपका कुछ नहीं है
- 1:13:20क्योंकि इनके पास। सतलश्रीण नहीं है स्थलश्री तो
- 1:13:24आपको मार भी सकता है। इनके पास सूक्ष्म शरीर है जो
- 1:13:27विद्युत से युक्त है और विद्युत जो है वो लहरें दे सकता है।
- 1:13:32आपको सिर्फ लहरें आपको सिर्फ स्ट्रोक प्रदान कर सकती हैं।
- 1:13:39उस स्ट्रोक तुम्हें कई बार ऐसा भी लग सकता है कि मुझे कोई सहला रहा
- 1:13:43है। तुम्हारा सिर कोई कुछ कर रहा है,
- 1:13:47तुम्हारे पैरों से कोई चादर उठा रहा है इस प्रकार के बहुत से मेरे
- 1:13:52पास आए हैं और मैंने जब खंगाला तो ये पाया कि कुछ इस तरह की रूह है।
- 1:13:59पास से गुजरे और जाते जाते उनके जाने से तुम्हें लगा चादर ने किस
- 1:14:07के लिए तुम्हें लगेगा कि चादर कैसे रखे?
- 1:14:12चादर वही रहेंगी तो इस बात का आप ख्याल रखना।
- 1:14:19आसानी लसानी तरंगे पॉजिटिविटी, नेगेटिविटी देवता और राक्षस दुष्ट
- 1:14:28भूत प्रेत इनकी व्याख्या मैंने सेपरेशन से दे दी।
- 1:14:33आपको शुभ काम करना हो। तो पाजिटिविटी की जरूरत होती है
- 1:14:42किसी ने अशुभ काम करना, किसी का मर्डर करना आपने देखा होगा।
- 1:14:47अगर कोई कतल करने से जाने से पहले बेहोश हो जाता है और ये आत्माएं
- 1:14:54बेहोशी से भरी पड़ी हैं। इनको पुकारना पड़ता है।
- 1:14:57तुम शराब पी लेते हो ताकि थोड़ी देर के लिए तुम बेहोश हो जाओ, गला
- 1:15:02काटना आसान हो जाएगा, चाकू घोंपना आसान हो जाएगा, बुद्ध किसी का
- 1:15:06चाकू नहीं घोंप सकते, क्यों? क्योंकि जागृत है, मूर्छित नहीं
- 1:15:11है मूर्छित व्यक्ति मज़े से किसी का चाकू घोंप सकता है।
- 1:15:15मूर्च्छत व्यक्ति डिक्टेटर बनते हैं, ध्यान रखना इस बात का
- 1:15:21मूर्च्छत व्यक्ति डिक्टेटर ही बनते हैं और जितना बड़ा डिक्टेटर
- 1:15:27होगा, उतना बड़ा मूर्च्छत आत्मा होगा, दे ही उतनी ही मूर्च्छत
- 1:15:33होगी। जितना पुण्य आत्मा होगा वह त्याग
- 1:15:38करेगा, छोड़ सब त्याग देगा, वो वस्त्र भी त्याग देगा, महावीर की
- 1:15:45तरह खाना भी त्याग देगा, मिलेगा मिलेगा नहीं मिलेगा, नहीं मिलेगा,
- 1:15:50महलों को भी त्याग देगा ये पॉज़िटिव के संकेत है।
- 1:15:55नेगेटिविटी के संकेत हैं प्रीग्रह प्रीग्रह इसलिए पतंजलि ने जो
- 1:16:00बताया सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, प्रीग्रह, सोच, असंतोष, तप,
- 1:16:04स्वाध्याय, ईश्वर, प्राणाधान ये सब पाजिटिविटी को पैदा करते हैं
- 1:16:11नेगेटिविटी को। कम करते हैं।
- 1:16:16ये सारे रास्ते थे पाजिटिविटी को बढ़ाने के संकल्प को बढ़ाने के
- 1:16:21दूसरे शब्दों में थे आपको मोटिवेट करने के और मोटिवेशन इस दी कास्ट
- 1:16:28टु सक्सेस इट इस दी सक्सेस। अगर आप पॉज़िटिव हो तो आप किसी भी
- 1:16:38काम को बड़ी आसानी से कर सकते हो। अगर आप नेगेटिव आपको छोटा सा काम
- 1:16:43बड़ा भारी लगे तो सब ये नेगेटिविटी और पॉज़िटिविटी का खेर
- 1:16:50है। लेकिन हमने समाज में कुछ ऐसे
- 1:17:02हत्यारे पैदा कर दिए। हत्यारे ही जो खून चूसते हैं, जो
- 1:17:05गुमराह करते हैं परमात्मा तक जाने का रास्ता राधे राधे करते हो?
- 1:17:11अब क्या कहूं? मैं इस परमौन है, परम चुप्पी है
- 1:17:16और आनंद है और आनंद परम चुप्पी में ही मिलता है।
- 1:17:25बुद्ध की मूर्ति को देखोगे, बोलती हुई दिखेगी तुम्हें बिलकुल परमौन।
- 1:17:30और चेहरा शांत और ये कहेंगे राधे राधे करते रहो, हलचल मचाते रहो
- 1:17:37हमेशा इनके भीतर खुद हलचल होती है तो दूसरों को भी हलचल करने पर
- 1:17:43विवश करेंगे। नाक कट गई है इनकी।
- 1:17:47तो अकेले नहीं रह सकते तो अपने साथ से नक कट्टियों की जमात जमा
- 1:17:51कर लेंगे। लेकिन तुमने ये बेवकूफ़ नहीं करनी
- 1:17:55है। मैं तुम्हें आगाह करता हूँ या तो
- 1:17:59कोई ये कहे के शोर से मिल जाता है, ये तो कोई बात न हुई।
- 1:18:04फिर राधे राधे से मिल जाएगा और मैं कहता हूँ राधे राधे शोर है।
- 1:18:09मौन से मिलेगा पर मौन? फिर इनका बयान आता है कि नहीं?
- 1:18:16मौन से भी मिल जाता है तो इसका मतलब शोर से भी मिल जाता है।
- 1:18:21क्या बात है भाई क्यों? दोगली बातों में लोगों को उड़
- 1:18:23जाते हो? निज्य स्वार्थ के लिए लोगों को
- 1:18:27क्यों उलझते हैं? तुम सीधी सीधी बात करो ना, संत का
- 1:18:33दायित्व क्या होता है? संत का दायित्व ग्रह होता है,
- 1:18:38लोगों को गुमराह करना ही होता है। और जब तुम खुद ही गुमराह हो, खुद
- 1:18:46तुम्हें अभी रास्ता नहीं मिला तो तुम इस काम में आते क्यूँ हो?
- 1:18:50मास्टर हमेशा वही होना चाहिए जातम का जिसने खुद सारे तर्क खंगा लिए
- 1:18:55हो अपनी नगन आँखों से कोई कबीर मूर्ख थोड़ी थी जो कहते कि तुम
- 1:19:00कहते कागद की लेखी? और मैं कहता आंकन देख
- 1:19:15ऐसे ऐसे लोग हमने जमा कर लिए जो नेगेटिविटी ही फैलातें हैं।
- 1:19:20ये नेगेटिविटी है राधे राधे करो तुम राधे राधे करते रहो।
- 1:19:29कुछ नहीं विनाश के सिवा शक्ति जाया करोगे, बर्बाद करोगे उसी
- 1:19:37शक्ति से शक्ति को साथ लेकर याद रखना।
- 1:19:42अपने भीतर उतरने के लिए वृहद शक्ति की आवश्यकता होती है और ये
- 1:19:47लोग पांच नामों में और राधे राधे राम राम में खर्चे करवा देते हैं।
- 1:19:51आपकी वही शक्ति एक्स्ट्रा कहाँ से आएगी?
- 1:19:53आपके पास वही शक्ति है आपके पास जो आप खाना खाते हो वही शक्ति है।
- 1:20:00उसी को ये लोग खराब कर देते हैं। पांच इनाम जब लोग चढ़ जाओ, बांस
- 1:20:05पे उतरते रहो, बस यही काम करते रहो, व्यर्थ की शक्ति को वेस्ट न
- 1:20:14करो इसी शक्ति से। तुम अपने भीतर उतर सकते हो,
- 1:20:19क्योंकि अपने भीतर जाने के लिए भी वृहद शक्ति की आवश्यकता होती है।
- 1:20:24इसको जमा करो, जमा कैसे होगी? मौन से बढ़िया कोई रास्ता नहीं,
- 1:20:30सर्वश्रेष्ठ रास्ता है मौन मौन हो जाओ अब फिर वक्त बहुत हो गया है।
- 1:20:36करीब एक घंटा 20 मिनट हो गए हैं। आप ज्यादा सुन नहीं पाओगे, बहुत
- 1:20:42कुछ रह गया है अब ये भी रह गया है लेने देने का चक्कर ये है बेटा
- 1:20:50बनकर बेटी बनकर ले ले जाएगा पति बनकर पत्नी बनकर।
- 1:20:56ये सब कुछ रहेगा ये अगले प्रोफेशनल मैं बोलेंगे साफ करूँगा
- 1:21:00आज तक के लिए बस इतना ही। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरा।
- 1:21:17हिनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे।
- 1:21:32मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव पितमात स्वामी।
- 1:21:51सखा हमारे पिटमासू स्वामी सखा, हमारे अनाथ।
- 1:22:07नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:22:16कृष्ण गोविंद हर मुरारी। नाथ नारायण, वासुदेव पितमातृ,
- 1:22:39स्वामी सखा? हमारे पितमात स्वामी सखा, हमारे
- 1:22:58सखा, हमारे सखा हमारे अनाथ नारायण यन वासुदेव, श्री कृष्ण गो बिंद,
- 1:23:17हरे मुरारी। नाथ, नारायण वसु दे।