Latest / Baba ji Vijay Vats / 31 Jan 25 - क्या मृत्यु पहले से ही तय है? Karma Philosophy! गीता का ज्ञान!
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- 0:18स्वामी चैतन्य कीर्ति मौर्य भगवान कृष्ण की गीता का ग्यारहवें ध्याय
- 0:38का 32 वर्ष लोक। और उसके बाद के श्लोक मुझे सदा ही
- 0:54उलझाए जाते हैं। इससे मैं एक मंत्र निकालता हूँ कि
- 1:08जो करता है परमात्मा करता है। लेकिन दृढ़ चित नहीं रह पाता
- 1:21क्योंकि इसमें कभी कभी अन्देशण आता है कि जो करते हो तुम करते
- 1:28हो, वह सिर्फ फल देता है। इस शंका का निवारण कीजिए बाबा
- 1:45चैतन्य स्वामी भगवान कृष्ण ग्यारहवें श्लोक के
- 2:00बत्तीसवें। ग्यारहवें अध्याय के बत्तीसवें
- 2:05श्लोक में कहते हैं कालवास में लोकाक्षय कृतप्रविधों मैं काल
- 2:19बनकर। लोगों का हनन करता हूँ।
- 2:31कॉलरूप मैं ही हूँ और बड़ी प्यारी बात कही है इसमें कृष्ण ने।
- 2:40सही पूछो तो अगर इस शब्द को गहराई से समझ लो, इसका अर्थ जान जाओ
- 2:54रिटर्न नहीं करना है। जैसे बच्चों को हम पढ़ाते हैं,
- 3:06ताजमहल सफेद है, संगेमरमर की मूर्ति है, सुंदर चित्रकारी है,
- 3:13फूल है, पत्तियाँ हैं, तने हैं। खबर है, ऐसे रचना नहीं है, देखना
- 3:24है और जब तुम ताजमहल के सामने जाकर खड़े हो जाओगे तो तुम्हें
- 3:34कुछ भी रटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 3:38जो देख लिया उसे रटने की जरूरत नहीं होती।
- 3:49आँखों से देखा अनुभव होता है और याद किया स्मृति से बुद्धि से
- 4:00अनुभव नहीं होता। पर छोटा रिटर्न तो होता है, किसी
- 4:06ने देखा होगा हमने नहीं देखा। कृष्ण कहते हैं मैं काल बनता हूँ।
- 4:22और आगे कहते हैं कि ये जो योद्धा खड़े हैं, तुम्हारे सामने भीषण
- 4:27हैं, द्रोण हैं, कर्ण हैं, जय द्रथ हैं, जीतने भी योद्धा खड़े
- 4:35हैं, इनका काल रूप बनकर मैं आया हूँ।
- 4:47भगवान कृष्ण उपदेश दे रहे हैं लगातार और यह उपदेश है तो अर्जुन
- 4:59के लिए काम आता है समस्त सृष्ट। अब हम मूल रूट पे आ जाएं दो तरह
- 5:13के कर्म होते हैं एक वह ज़रा गौर से समझ रहा हूँ बात को एक वह जो
- 5:22तुम करते हो एक कर्म वह जो परमात्मा करता है।
- 5:32जो कर्म तुम करते हो वह तुम्हारे हाथ में है और जो कर्म पर मत में
- 5:40करता है वह तुम्हारे हाथ में नहीं है सूरज को तुम चला नहीं सकते।
- 5:48ग्रह, नक्षत्र, तारों की गतियों को पता लगा सकते हो, बदल नहीं
- 5:53सकते। अगर बकरी है तो मरगी नहीं कर
- 5:57सकते। अगर अस्त है तो उदय नहीं कर सकते
- 6:05सारी सृजनाओं सारी सृष्टी बड़े सटीक।
- 6:11नियंत्रित ढंग से चल रही है पेड़, पौधे हूँ के नदियाँ, हूँ के
- 6:21हवाएं, हूँ के फल, फूल हूँ ये सब। उसके हुक्म से चलता है तो मैंने
- 6:36कहा दो तरह के कर्म हैं, एक कर्म तुम करते हो, इस प्रवचन को अच्छी
- 6:47तरह सुन लेना। अगर ये आपके अंत में प्रवेश कर
- 6:53गया तो फिर आगे की कोई बात सुनने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 7:01बस ये आखिरी प्रवचन होगा आपका गीता का।
- 7:07एक व्यक्ति का कल कमेंट आया, बाबा आपने जब समझाया जो करता परमात्मा
- 7:13करता उस दिन से मैं भीतर बैठा हूँ, एक कमरे में वर्ष भर हो गया।
- 7:24लेकिन कल मैं गीता पढ़ रहा था, एक शब्द ने बड़ा उलझा दिया तुम
- 7:34शब्दों के जंजाल में बड़े फंसते हो मेरे पास भी लोग आ जाते हैं,
- 7:45यथाशक्ति समझाने की चेष्टा करता हूँ।
- 7:51लेकिन जब वो समझ ही नहीं पाते और मैं ये समझ लेता हूँ कि ये समझना
- 7:58नहीं चाहते तो फिर मैं उन्हें क्या कहता हूँ?
- 8:02फिर मैं कहता हूँ राधे राधे करते रहो और मेरे पास कोई ऑप्शन ही
- 8:07नहीं आता है। और क्या कहूँ, कृष्ण की बात आप
- 8:16नहीं समझ सकोगे। कृष्ण कहते हैं, मैं काल रूप में
- 8:21बनकर आया हूँ जय दत्त के लिए, कर्ण के लिए।
- 8:26भीष्म के लिए द्रोण के लिए जो महारथी और कृष्ण बड़ी खतरनाक बात
- 8:35कहते हैं, कृष्ण भविष्यवाणी करते हैं, तू कहता है मैं युद्ध नहीं
- 8:44करूँगा। और बैठ गया है।
- 8:48गांडिव धनुष को फेंक मत कर कृष्ण कहते हैं, अगर तू युद्ध नहीं भी
- 8:55करेगा तो भी मैं काल रूप। इनको मारने के लिए आया हूँ, बड़ी
- 9:11जबरदस्त बात है यह अर्जुन का अहंकार नष्ट करने पर तुले हुए हैं
- 9:21तू नहीं करना चाहता मत कर। तू नहीं मारेगा इनको तो कृष्ण
- 9:31कहते हैं मैं मार रखे हैं ये कृष्ण कहते हैं इनका मैंने।
- 9:41पहले से ही हनन किया हुआ है। अब तुने तो सिर्फ सेहरा लेना है,
- 9:54उठ खड़ा हो, सेहरा ले ले, विजय तेरी होगी।
- 10:01तू जीतेगा जब मर जाएंगे क्योंकि मैंने इन्हें पहले से ही मार दिया
- 10:07है। इनके भाग्य में मैंने मृत्यु लिख
- 10:14दी है और तुम्हारे भाग्य में मैंने जीत लिख दी है।
- 10:22तो अर्जुन अगर तू नहीं भी उठेगा, तू नहीं भी, युद्ध करेगा तो कोई
- 10:30बात नहीं मत कर तू कहता है मैं भाग जाऊंगा, जंगलों में चला
- 10:37जाऊंगा, मुन्नी बन जाऊंगा। पत्ते फल फूल खा के गुज़ारा कर
- 10:43लूँगा, ठीक कर ले लेकिन ये तो मरेंगे, ये इसी क्षण में मरेंगे,
- 10:55इसी स्थान पे मरेंगे। यहीं मरेंगे, अभी मरेंगे ऐसे
- 11:11संकल्प कितना शब्द कृष्ण बोलते हैं और अर्जन सुनते हैं।
- 11:28अर्जुन मेरे द्वारा पहले से ही मारे गए इन योद्धाओं का तू हनन कर
- 11:42दे, तू इनको मार दे बड़ा सुंदर शब्द है।
- 11:46मेरे द्वारा पहले ही से मारे गए इन योद्धाओं को तू मार दे, ये
- 11:54कमाल की बात है ना और अगर तू नहीं मारेगा तो कोई बात नहीं।
- 12:03मरेंगे तो फिर भी ये लेकिन सिर्फ तुझे श्रेय नहीं मिलेगा क्योंकि
- 12:12ये मैंने मार रखे हैं अब थोड़ा सा हम पीछे लौटे, मैंने कहा दो
- 12:22प्रकार के कारण हैं। एक कर्म जो तुम करते हो और एक
- 12:29कर्म जो परमात्मा करता है इसको ऐसा समझो कि तुम एक विद्यार्थी हो
- 12:40परीक्षाएं हो रही हैं। और तुम परीक्षाओं में पेपर का हल
- 12:46कर रहे हो, वो तुम्हारा कर्म है, तुम जैसा भी चाहो लिख सकते हो
- 12:54जैसी भी बुद्धि हो वैसे लिखते भी हो और एक कर्म एक्जामिनर का भी
- 13:01है। जो तुम्हारे पेपर को चेक करता है
- 13:07वह किसी को जीरो नंबर देता है, किसी को पूरे बटा पूरे देता है।
- 13:16अब ये बताइए कि जो एक्जामिनर है। उसने कोई भेदभाव किया, तुम कहोगे
- 13:25नहीं किया उसने क्या किया? सिर्फ जो तुम पेपर करके आए थे
- 13:31उसका निरीक्षण किया। अगर उत्तर ठीक था तो उसने मार्क्स
- 13:37दे दिए अगर उत्तर गलत था। उसने मार्क्स नहीं दिया।
- 13:43बस ऐसा ही परमात्मा है। तुम कर्म करते हो, एक कर्म
- 13:50परमात्मा फिर करता है कर्मन्ने व अधिकारस्ते आगे माँ फलेशु कदाचन।
- 14:03परमात्मा का काम तुम्हारे कर्मों का फल देना है।
- 14:07तुम फल की इच्छा मत करो तुम सिर्फ पेपर देके आ जाओ, यही तुम्हारे
- 14:12हाथ में है। फल सटीक मिलेगा।
- 14:18क्योंकि वह बड़ा न्यायकारी है, फल में किसी प्रकार की कोई त्रुटि
- 14:26नहीं होगी, फल निष्पक्ष होगा। तू सिर्फ परीक्षा देय पेपर करा।
- 15:03रिज़ल्ट क्या आएगा, मार्क्स कितने मिलेंगे, इसका फिक्र मत कर।
- 15:08यही भगवान कृष्ण कहते हैं, कर्मण्ये वाद का रस्ते मा फलेशु
- 15:13कलश अपनी काबिलियत के हिसाब से तू पेपर दे आ, मार्क्स तो ठीक आएँगे।
- 15:23वह इतना न्यायकारी है? ना तो वहाँ रिश्वत चलती है, ना
- 15:31वहाँ सबार चलती है मैं ना वहाँ टर्न न टर्न चलता है कुछ नहीं
- 15:41चलता वह जो तुम मेज़ के नीचे से पकड़ते हो।
- 15:46ये वहाँ नहीं चलता एक करम तुम करते हो पेपर करना तुम्हारे हाथों
- 15:55में ठीक किया, गलत किया उसके मार्क्स परमात्मा दे देगा
- 16:08एकसामिनेर। कृष्ण कहते हैं, तू चिंता क्यों
- 16:12करता है? मार्क्स से ही में लेंगे मार्क्स
- 16:17का फिक्र मत कर तू फिक्र कर तू पेपर का पर एग्ज़ैम का पर
- 16:25एग्जामिनर का फिक्र न कर। एग्जाम का फिक्र कर अगर तुने सही
- 16:35जवाब दे दिए तो तुझे मार्क्स भी सही मिलेंगे एक्जामिनर के ऊपर शक
- 16:42न कर। कृष्ण कहते हैं, ये अर्जुन मैं
- 16:54लोगों का नाश करने के लिए महाकाल बनकर आया हूँ और ये जो सामने खड़े
- 17:04हुए योद्धा हैं। तेरे विरुद्ध युद्ध करने के लिए
- 17:09खड़े हैं। मैं इन सब को मारने के लिए आया
- 17:12हूँ और अगर तू युद्ध नहीं भी करेगा तो भी ये सभी मर जाएंगे।
- 17:26क्योंकि यह मेरे द्वारा मारे जा चूके हैं तो जो मेरे द्वारा मारे
- 17:38जा चूके हैं क्यों नहीं तू उनको मार के श्रेया अपने सर पे ले
- 17:43लेता? तू सिर्फ श्रेय ही ले सकता है।
- 17:52मार तो मैंने दिया है, तुझे श्रेय देना चाहता हूँ तू श्रेय लेना
- 18:00चाहता है तो उठ खड़ा हो गांडिव धनुष को उठा।
- 18:06और तीरों से बेनते हैं ये मेरे द्वारा पहले ही से मारे गए लोग
- 18:16बड़ा अद्भुत शब्द हैं। अब कुछ लोग पूछ लेते हैं मुझे
- 18:23बाबा? पहले से ही मारे गए लोग इसका मतलब
- 18:28जो करता है परमात्मा करता है नहीं यहाँ मैं कहूंगा नहीं आगे चलो।
- 18:44इतनी क्या जल्दी जल्दबाजी मत खाओ? ये गीता है अभी तो कृष्ण ये कह
- 18:57रहे हैं कि मैंने इनको मार दिया है, क्यों मार दिया है?
- 19:03क्योंकि इनके कर्म मारने योग्य थे।
- 19:11यह पेपर ही ऐसा देके आए थे कि इनको जो मार्क्स मिलना चाहिए था,
- 19:16वो जीरो और मैं जीरो करने के लिए आया हूँ।
- 19:24मैंने अपनी तरफ से कुछ नहीं किया। मैं इस वक्त काल बन कर आया हूँ।
- 19:32काल का मतलब एक्जामिनर तुमने क्या किया है यह चेक करने के लिए है और
- 19:41मैंने चेक किया। तो यह पाया कि जीरो यह जो सामने
- 19:49खड़े हुए योद्धा हैं, जो भी हैं चाहे वह मेरी नारायणी सेना के बीच
- 19:54में हो। आपको बता दूँ के कुरबों के पक्ष
- 20:03में। दुर्योधन ने नारायणी सेवा सेना
- 20:07मांगनी थी। भगवान कृष्ण की नारायणी सेना
- 20:13कुरबों की तरफ से युद्ध कर रही थी।
- 20:19दुष्ट लोग प्रत्येक शतरंज बिछाने में कोई शर्म नहीं करते।
- 20:25दुरौजन के मन में ये बात थी कि अगर कृष्ण लड़ेंगे भी तो अगर हमें
- 20:35मारेंगे तो अपनी नारायणी सेना को थोड़ी मारेंगे।
- 20:41तर्क है। और अगर अपनी नारायणी सेना को
- 20:45थोड़ी ही मारेंगे तो हमको भी क्यों मारेंगे?
- 20:48क्योंकि नारायणी सेवा सेना में ही हम खड़े होंगे।
- 20:53यह उसका तर्क था, लेकिन वहाँ तर्क कहाँ चलते हैं?
- 20:59उसने नारायणी सेना को भी मार दिया।
- 21:02क्योंकि वो कहते हैं कि नारायणी सेना भी मरने वाला काम किए थी।
- 21:09एक ही जहाज में मैंने सब बता दिया दुर्वोधन का भेजा फेर दिया।
- 21:22सुबह सुबह कृष्ण सोये हुए हैं। युद्ध की घोषणा हो गयी है।
- 21:30बस अब युद्ध होगा। कृष्ण कहने लगे पांच गांव दे दे।
- 21:39दुर्योधन कहता है युद्ध के बिना मैं सुई की नोंक के बराबर जगह
- 21:42नहीं दूंगा, युद्ध करो और ले जाओ तो शंख नाद पांच जन शंख नाद करके
- 21:51आते हैं कृष्ण बड़ी मजेदार कहानी। और कृष्ण स्वयं होते हैं और कृष्ण
- 22:02कहते हैं, मैं मेरी शर्त है, मैं शस्त्र नहीं उठाऊंगा।
- 22:08मैं युद्ध नहीं करूँगा और एक तरफ मैं और एक तरफ मेरी।
- 22:14नारायणी सेना दो पक्ष हो तुम जो चाहो मांग लो एक तरफ मैं अकेला
- 22:25हूँ और अकेला भी क्या युद्ध नहीं करूँगा?
- 22:30शस्त्र नहीं उठाऊंगा। और दूसरी तरफ मेरी नारायणी सेना
- 22:36बोलो क्या चाहिए? बड़ी चाल थी, शतरंज की जबरदस्त
- 22:45चाल थी। तो दुष्ट की बुद्धि फेर देते हैं
- 22:51भगवान जो आपको मैं दारू में दुख दे हूँ ताकि मती पहले हर ले जीसको
- 23:02दुख देना होता है, उसकी मती को फेर देते हैं, उसके निर्णय गलत हो
- 23:05जाते हैं। आए थे।
- 23:12पहले देव धन सिर की तरफ बैठ गए। अंहकारी सिर की तरफ ही बैठ गए,
- 23:22कृष्ण सोए पड़े हैं। मज़े से थोड़ा सा लेट ही उठते थे
- 23:28मेरी तरह। हसा, मत करो तुम, मैं भी 10:00
- 23:33बजे कहते हैं बाबा 10:00 बजे ब्रह्ममूर्त मैंने कहा यह
- 23:37ब्रह्ममूर्त जब मेरी आँख खुल जाए, तुम्हें पता नहीं सही तो मेरा
- 23:43ब्रह्ममूर्त 4:00 बजे होता है, आप मुझे कह देते हैं बाबा जल्दी से
- 23:47निपटा दिया होगा। ये सभी संत सुबह ब्रह्ममूर्त में
- 23:51निपटा देते हैं। मैंने कहा मेरा ब्रह्म जगता ही
- 23:544:00 बजे है, मैं क्या करूँ? उससे पहले मदहोशी में रहता है
- 24:03उससे पहले पीता ही रहता है। दो कुट पीला दे साकिया।
- 24:26बाकी मेरे तिरोड दे दो कुट पीला दे, बाकी मेरे तिरोड दे।
- 24:45दो कुट पेला। ये लोग कहते हैं बाबा आप फ़िल्म
- 24:54में गाने गा लेते हो, बीच में गीता कहाँ गीता कहाँ फिल्मी गाने?
- 25:00मैंने कहा यही तो गोरखनाथ ने कहा है हँसीबो खेलीबो घरीबो धियान
- 25:06नचीबो गाईबो करिबो धियान यही तो मज़ा है ज़िन्दगी का तुम रोईबो
- 25:17धोईबो गरीबों धियान ऐसा नहीं होगा।
- 25:22रोईबो धोइबो सनी होगा नचीबो गाईबो हँसीबो खेलीबो और वही ध्यान होता
- 25:35है। ध्यान करने में भी आनंद उठाओ और
- 25:38ध्यान का भी लाभ उठाओ। एक बंद दो का?
- 25:43आज तो सिर की तरफ बैठ गए। कृष्ण के जाके पहले ही आए थे तो
- 25:54उससे थोड़ा जल्दी जग जाते हैं। क्षमा कर ओह ब्राह्मूर तभी जग
- 26:01जाते हैं। जल्दी जाना है।
- 26:04विरोध दिन तो रात को सोया भी नहीं था और अर्जुन तो मज़े से सोया था।
- 26:10सुबह जाना था दोनों में कृष्ण से मांगने जाना था और कृष्ण ने कहा,
- 26:17एक तरफ मैं अकेला शस्त्र हीन युद्ध नहीं करूँगा।
- 26:25और दूसरी तरफ मेरी सेना नारायणी सेना जो चाहिए ले जाओ तो
- 26:33ब्रह्मवुत्र में आ गई। सिर के बल बैठ गए।
- 26:41इंतजार करने लगे हैं और मज़े से सोए पड़े हैं।
- 26:45कृष्ण शायद थक भी गए हों, मगता बनकर बैठना बड़ा मुश्किल है।
- 26:56राजा राजा है हस्तिनापुर का। मांगने के लिए आए हैं।
- 27:04हो सकता है मन में आया हो कि इसका गलत बंद ये उठ नहीं रहा, लेकिन
- 27:12क्या करें? उसके दरबार में आए प्रहर ही सामने
- 27:16खड़े हैं। अर्जुन बाद में आते हैं, पांव की
- 27:26तरफ बैठ जाते हैं। रावण जब मरने लगा तो राम ने का
- 27:32अभ्राता लक्ष्मण बड़ा विद्वान व्यक्ति है।
- 27:40चतुर्वेदों का ज्ञानी इससे कुछ ले ले जा रहा है।
- 27:53दुनिया से अलविदा पूछ ले, इससे कुछ बड़ा ज्ञानी है।
- 28:01मूर्ख है, लेकिन ज्ञानी कई ज्ञानी भी मूर्ख होते हैं।
- 28:08रावण की तरह ज्ञानी समझदार भी होते हैं और ज्ञानी मूर्ख भी होते
- 28:18हैं। अर्जुन बाद में आया, पांव की तरफ
- 28:24बैठ गया। लक्ष्मण ने पांव की तरफ बैठ के
- 28:35पूछा तो सब बता दिया रमन ने, लेकिन जैसे वो सिर की तरफ बैठा वो
- 28:44कुछ नहीं बोला। विद्वान की यही निशानी होती है,
- 28:55वह शिष्टाचार भी सखाता है, ज्ञान भी देता है।
- 29:05तो लक्ष्मण बैठ गया सर की तरफ कुछ नहीं बोला रबण लक्ष्मण गए भगवान
- 29:14राम के पास भैया बोल नहीं रहे हराम कहते मैंने देखा तू सर की
- 29:22तरफ बैठा था। मैं तो बैठा था, मृता हुआ व्यक्ति
- 29:27थोड़ा दी में बोलेंगे, सुन जाएगा, मुझे नहीं ज्ञानी पुरुष से ज्ञान
- 29:40लेने का तरीका सही नहीं है। पांव की तरफ बैठे।
- 29:44मैं थोड़ा ऊंचे बोल लेगा। इतना अशक्त नहीं हुआ है।
- 29:46अभी पांव की तरफ बैठा हूँ, हाथ जोड़ लिया, रावण ने आशीर्वाद
- 29:56दिया। खैर लक्ष्मण पूछता रहा यह प्रसंग
- 30:01अलग है। रावण बताता रहा अर्जुन बाद में
- 30:08आया, पांव की तरफ बैठ गया। ये कहते हैं इतने विस्तार से बता
- 30:18दो ये बता दो उस टूल पे बैठे कुर्सी पे बैठे मुझे तो सुनने
- 30:26वाले भी बड़ा आनंद लेते हैं। ये आनन्द का रस है पीओ जब तुम
- 30:34मुझे नहीं पता के स्टूल में बैठेंगे, कुर्सी में बैठे लेकिन
- 30:38बैठे पांव की तरफ अर्जुन और सिर की तरफ और कृष्ण उठे सहजता मैं।
- 30:50आंख खुली वो दृष्टि सबसे पहले आपने देखा होगा, पांव की तरफ जाती
- 30:56है, कौन बैठा है सामने सिर की तरफ नहीं जाती तो सामने देखा हर जगह
- 31:02बैठे भगवान बोले। साखा अर्जुन कैसे आए?
- 31:13सुबह सुबह कैसे आए? अर्जुन कहता प्रभु मुझे काफी देर
- 31:22हो गया। दुर्योधन बोल उठा, ये कृष्ण मैं
- 31:33पहले आया ये बाद में दरबारियों से पूछ लो ये तो बहुत बाद में आया,
- 31:41मैं काफी देर से बैठा हूँ अच्छा हाँ, मुझे नहीं दिखाई पड़े, तुम
- 31:48सिर की तरफ बैठे हो? अहंकारी व्यक्ति सर की तरफ ही
- 31:55बैठता है, इसलिए हमने एक शिष्टाचार बनाया।
- 31:59उसके भीतर वैज्ञानिक पद्धति भी थी, लेकिन यहाँ पर संघ बढ़ जाएगा।
- 32:06हम जब भी कोई शुभकाम जाते थे। तो बड़े बुजुर्गों के नमन करके
- 32:13जाते थे। पांव के हाथ लगा के जाते थे।
- 32:17बहुत से लोग आते हैं मेरे पास में शरारती स्वभाव है मेरे पांव को
- 32:22नहीं हाथ लगाते, सिर को हाथ लगाते हैं, आशीर्वाद दे के जाते हैं।
- 32:27मैं उन्हें प्रणाम कर देता हूँ, जो आशीर्वाद दिए मैं उनको प्रणाम
- 32:32किया, जो पांव छुए मैंने उन्हें आशीर्वाद दिया जो चाहे ले जाओ भाई
- 32:41जैसा करोगे जैसा मारोगे। यही तो भगवान का सिद्धांत है यही
- 32:50समझा रहा हूँ तुम्हें एक कर्म वो है जो तुम करते हो एक कर्म वो है
- 32:56जो वो करता है लेकिन ध्यान रखना उसका कर्म तुम्हारे कामों पे
- 33:01डिपेंड है। नई सी बात लगेंगी।
- 33:06तुम्हें उसका करम तुम्हारे करम पे डिपेंड है जैसे एग्जामिनर पे
- 33:15तुम्हारे पेपर करने का करम डिपेंड है क्योंकि उसमें तो मार्क्स देने
- 33:21हैं। उसका कर्म फल है, फल तुम्हारा
- 33:28कर्म कर्म है, कर्म तो उसका कर्म यानी फल तुम्हारे कर्म पे डिपेंड
- 33:35है। अच्छा ठीक है, मांगो मैंने कल ही
- 33:48कह दिया था एक तरफ मैं एक तरफ मेरी नारायणी से बात बोलो क्या
- 33:59लेना है दो 2 दिन कहते हैं मुझे नारायणी चाहिए।
- 34:09सीना मांगता हूँ मैं तथा तू अर्जुन को कहने लगे तेरे पास कोई
- 34:21ऑप्शन नहीं बचे। अर्जुन तेरे पास तो दूसरी ऑप्शन
- 34:26है जरूरी मजबूरी मैं ही हूँ बस अब तुम्हें तो मुझे ही लेना पड़ेगा
- 34:36यो कहते हैं प्रभु आपकी इच्छा जो बचा वो मेरा।
- 34:45और कृष्ण अर्जुन के होली है नारायणी सेना दुर्योधन की होली और
- 34:58प्रसन्न को आगे बढ़ें। एक कर्म तुम करते हो वो कर्म एक
- 35:04कर्म पर मात्मा करता है वो कर्म पर देखिए जैसे दीवार है दीवार के
- 35:13ऊपर गेंद पटक देते हो आप आपने तो कर्म किया गेंद को पटकने का।
- 35:21लेकिन दीवार ने कोई कर्म किया, दीवार ने कोई कर्म नहीं किया,
- 35:27सिर्फ आपके कर्म का फल उठा दिया, जैसा भी बनता था चलो चैतन्य,
- 35:35तुम्हारे पहले सवाल का जवाब मिल गया।
- 35:43तुम कहते हो इसका मतलब तो जो करता है परमात्मा करता है, बिल्कुल
- 35:48एकसमीनर के रूप में तो परमात्मा ही करता है, लेकिन देखो बाजी
- 35:53पिलटने वाली है आगे तुम यहाँ तक ठीक समझाओ यहाँ तक अपने भीतर हृदय
- 36:01के उतार लो। फिर आगे की व्याख्या आगे होगी।
- 36:08यहाँ तक तुम्हें समझे में आ गया होगा।
- 36:12इसलिए संत कहते हैं समाज सुधारक कहते हैं साधू कहते हैं।
- 36:24के फल की इच्छा न करो, अच्छा मिले क्योंकि फल की इच्छा करना बेकार
- 36:31है, कर्म अच्छे करो, फल अच्छा अपने आप में जाएगा देखो।
- 36:40अगर बीज अच्छी क्वालिटी का भोग है तो फल भी अच्छी क्वालिटी का और
- 36:47ज्यादा मात्रा का मिलेगा। हम सीड्स का काम करते थे तो सीड्स
- 36:55में ऐसा भी होता है कि इसका जो झाड़ है वह 40 मंथ निकलेगा।
- 37:00एक एकड़ में इसका 30 मन निकलेगा। इसका 50 मन निकलेगा।
- 37:08जीस तरह बीज, वैसा ही फल, उतनी मात्रा का फल ये श्रेष्ठ बीज है
- 37:16तो ज्यादा झाड़ देगा। और ये कमजोर बीज है क्वालिटी
- 37:20घटिया, वो कम देगा तो साधू कहते हैं, संत कहते हैं, धर्मोपदेशक
- 37:32कहते हैं, मार्गदर्शक कहते हैं कि तुम फल की फिक्र मत करो।
- 37:38पहला अर्थ तो ये बनता है कर मने बाद का रस्ते माफलेशुदा यहाँ पर
- 37:47भी हम आ जाए तो कृष्ण कहते हैं कि मैं कॉल बनकर तुम्हारे सामने खड़ा
- 37:51हूँ, इन लोगों का काल बनकर सामने खड़ा हूँ।
- 37:56जहाँ तक आपको समझाएगी, बड़े मज़े से समझाएगी क्योंकि ये वादे योग्य
- 38:05हैं। अगर किसी ने कतल किया है तो जज
- 38:11सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर। और सबूतों के आधार पर फैसला सुना
- 38:17देता है कि ही शुड बी है अंगडा तो जज ने कोई फल दिया या न्याय किया?
- 38:29जज ने फल नहीं दिया, न्याय किया आप उसे फल कह सकते हो?
- 38:39लेकिन कर्म उसने जो किया जैसा भी किया।
- 38:48रियर एस्टोफ रियर रियर एस्ट तो जज ने कह दिया ही शुड बी हैंक रहा।
- 38:58इसको फांसी दी जाती है। क्योंकि इसने कर्म ही ऐसा किया
- 39:03है। अब कृष्ण कहते हैं कि मैं काल
- 39:13बनकर खड़ा हूँ, इसकी भीतरी बात आपको समझा दी, काल बनकर क्यों
- 39:18खड़े हो क्योंकि इन्होंने कर्म ऐसे किए हैं।
- 39:27कि इनका न्याय बनता है। मृत्यु कैसे?
- 39:32जज कहता है ही शुड बी हैंग्ड वैसे ही मैं न्यायकारी बन के खड़ा हूँ।
- 39:45और मैं इन्हें मृत्युदंड दे दिए हैं।
- 39:49आप यहाँ समझ लेना यहाँ तक बात आपको समझ में आ जाएगी क्योंकि
- 39:56इन्होंने कर्म ही ऐसे किए हैं। मैं अपनी इच्छा से इन्हें फल नहीं
- 40:03दे रहा हूँ। इनके कर्मों की फल सब रूम फल ले
- 40:08रहा हूँ। यह बात तुम्हें समझ में आ जा कि
- 40:14बड़े मज़े से काल बनकर कब खड़ा होता है परमात्मा परमात्मा किसी
- 40:21का दुश्मन तो है नहीं, दयालु है। न्यायकारी भी है तो इन सभी ने
- 40:29कर्म ऐसे किए होंगे वो ज्यादत हो वो बिष में हो वो द्रुग्न हो
- 40:37उपकर्ण हो ये सभी व्यक्ति। वध के योग्य हो गए।
- 40:47न्याय ये कहता है इनके कर्मों के हिसाब से एकसमीनर ये कहता है कि
- 40:53इनके मार्क्स जीरो। इनको मृत्यु दंड देना चाहिए इसलिए
- 41:07मेरी कर्म व्यवस्था, मेरी न्याय व्यवस्था यह कहती है कि इन्हें
- 41:12मृत्यु मिले और मैं इन्हें मार चुका हूँ।
- 41:18मैंने इनके पेपर एग्जामिन कर लिए हैं।
- 41:22और इनका फल निकलता है मृत्यु दंडा मेरी तरफ से यह मर चूके हैं
- 41:32अर्जुन तुम सिर्फ यह कर सकते हो बाजी तो तुम्हारी हक मी।
- 41:40दशा दत्त भी तुमने बहुत सहा है लाक्शा गृह में जलाने की कोशिश
- 41:47दुर्योधन की और शकुण की और पता सबको था, ये सब एक ही झुंडली थी।
- 41:57ऐसा कैसे हो सकता है कि विषम पता नहीं पता था?
- 42:01पता था विद्रु को भी तो विद्रु ने एक जासूस भेज दिया विद्रु को सजा
- 42:09क्यों नहीं? मेरी बहुत लोग पूछ लेते है मुझसे
- 42:13विद्रु को सजा क्यों नहीं मिली? मैंने कहा विद्रोह ने बुरा किया
- 42:20ही नहीं वेधर सत्य के ऊपर चढ़ा न्याय प्रिय था।
- 42:36विद्रुर ने बचाने की चेष्टा की और विद्रुर ने ही भेजा संदेश
- 42:43युधिष्ठिर के पास कि ये है इनकी मंशा लाक्षागृह है, ये देखने में
- 42:50तुम्हें लगता है? कि कंकड़ पत्थर का बना है, लोहे
- 42:55का बना है नहीं, ये लाख का बना है इसमें तुम्हें सभी को जला के मार
- 43:00दिया जाएगा। कुंती समेत तो विद्वुल ने संदेश
- 43:05भेजा और जो संदेश ले के गया था। उसको भी बड़े ढंग से समझाया कि ये
- 43:13कभी लीक न करते। बाद उसे पता था कि इनमें से एक
- 43:20बड़ा समझदार व्यक्ति है। सहदेव ये बहुत समझदार था तो सहदेव
- 43:28के पास गया। वह जासूस कहता विदरु का संदेश कि
- 43:35जब जंगल में आग लग जाती है तो कौन बचता है?
- 43:39बस इतना ही कहा देख लेना क्या मतलब है?
- 43:42इसका सहदेव बड़े समझदार थे। सहदेव बैठे ध्यान में गए, भीतर
- 43:55शक्ति को एकाग्र किया और बात समझ में आ गई कि बिद्दुर जैसा व्यक्ति
- 44:04हमारा हितकारी। इस बात के भीतर अवश्य ही कोई
- 44:12हमारा हित छिपा है। जंगल में जब दवा नल भटक जाता है
- 44:20तो बचता कौन है? बताइए कौन बजता है?
- 44:25सहदेव बड़ा समझदार था। सहदेव ने समझा, परखा कौन बजता है
- 44:35तुम्हें बताता हूँ, बजता है चूहा और चूहा क्यों बजता है?
- 44:43क्योंकि चूहा धरातल पे नहीं रहता, चूहा बिल के भीतर घुस जाता है और
- 44:51इतनी गहरी बिल खोद लेता है वो कि आग उस तक पहुँच नहीं सकती तो
- 44:59सहदेव ने हिसाब लगाया वह बड़ा हिस्सा भी था।
- 45:05ज्योतिष का प्रकांड पंडित अगर महाभारत में कोई था तो सहदेव से
- 45:11बड़ा कोई ज्योतिष का प्रकांड पंडित है।
- 45:14मुझे बाबा बताया करते हैं सहदेव वास् दी बेस्ट एस्ट्रोलॉजिस्ट ऑफ़
- 45:22दट टाइम। भृगु के बाद अगर कोई
- 45:26एस्ट्रोलॉजिस्ट हुआ तो वह सहदेव हुआ।
- 45:41सहदेव के एस्ट्रोलॉजी के लिखे हुए कुछ पन्ने मैंने पड़े हैं, मेरे
- 45:46पास हैं। तो सहदेव ने हिसाब लगाया कि
- 45:53बिद्रुर ऐसे तो कोई बात निकालते नहीं।
- 45:56मोनी बाबा थे, बोलते ही नहीं थे। अगर स्पेशल दूध कोई भेजा है विशेष
- 46:08तो इसमें कोई कारण है तो उसे जाट से समझ में आ गया।
- 46:14कि यह जो ग्रह है, जब दिखने में पत्थर का लगता है पर है कोई ऐसी
- 46:20चीज़ जो जलने वाली है तो हम सरंग खोद लें और सरंग खोद कर आगे तक
- 46:29निकल जाए। अगर कोई ऐसी बात हुई।
- 46:33तो हम यहाँ से सुरंग खोद लेंगे दूर और वहाँ से निकल जाएंगे।
- 46:45यह प्रथा थी कि राजा बनने से पहले उस स्थान पर जाना होता था।
- 46:51यह उनकी पुश्तैनी जगह थी। यह लाक्षागृह उत्तर प्रदेश के
- 47:01बागपत जिले में बरनावा नाम का एक ग्राम था, जो के वर्णावत के नाम
- 47:12से भी प्रसिद्ध था। आज भी है।
- 47:17दुर्योधन ने उसी स्थान पर यह रक्षाग्रह का निर्वहन किया था।
- 47:23वहाँ पर जाना होता था। एक बार वहाँ उनका कोई कुल देवी या
- 47:28कुल देवता था। वहाँ प्रणाम करके परंपरा था,
- 47:32प्रणाम करके आना होता था और उसके बाद राजा अभिषेक करना होता था।
- 47:38वहाँ लक्षागृह का निर्माण कर दिया गया कि राजा साहब आके ढेरेंगे
- 47:43उसके बाद इनका राज़ तिलक होगा लेकिन असल थी प्लानिंग उनको जला
- 47:50के मार दे निक तो कौन थी समेत? सभी भाई आए थे।
- 47:57उस वक्त द्रोपदी नहीं थी क्योंकि शादी नहीं हुई थी।
- 48:02संभर नहीं रचा गया था पांचों मैडम और कुंती सभी रुके।
- 48:14इतने में सैनिक पहुँच गया, जो खबर है क्या है?
- 48:18तो दृश्य ने कहा ये महकमा सहदेव के पास है।
- 48:23सहदेव से बोला सहदेव ने बात सुनी है, समझ गया उसने भीम को बुलाया,
- 48:28सभी को बुलाया कि ऐसा करो इस पत्थर को उखाड़ो।
- 48:33एक पत्थर उखाड़ के सुरंग खो दो सुरंग इतनी गहरी खो दो, दूर तक खो
- 48:37दो जहाँ आग लगेंगी और जब आग लगेंगी हम उससे पहले ही निकल
- 48:45जाएंगे। संकेत उसे पता था क्या क्या
- 48:52मिलेंगे ये कोड वर्ड में समझा दिए थे सारी बातें बिद्दुर ने इसलिए
- 49:00बिद्दुर इतने प्रिय थे कृष्ण को धन के मेवे त्यागे साग बिदुर घर
- 49:08खाये। विद्र बड़े प्यारे व्यक्ति थे।
- 49:14भक्त विद्र नीती भी आती है। यह नॉन रिऐक्टिवनेस विद्रु नीती
- 49:23का ही एक अंग है। वह बच जाएगा।
- 49:28उसके दिमाग पे कोई बोझ नहीं होगा। बिद्रुर सारी उम्र खुशहाली में
- 49:32जीए, खुशहाली का मतलब खुश मिजाज़ प्रसन्न रहे हमेशा क्योंकि
- 49:39उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं किया। सभी ने रिएक्शन दिए अच्छे या बुरे
- 49:45लेकिन बिद्रुर ने कभी रिएक्शन नहीं दिया।
- 49:49विद्ध और नीती में नॉन रिएक्टिवनेस जिसकी मैं बात किया
- 49:53करता हूँ, जब कुछ भी कह जाए, तुमने रिएक्शन नहीं देना है।
- 50:03और सुख का ये मूल सिद्धांत है। अगर तुम सुखी रहना चाहते हो तो
- 50:10किसी की बात का कोई रिएक्शन मत करो, ना अच्छा ना बुराओ तो इन
- 50:17शब्दों को ठीक से फिर सुनो। मैं लोगों का नाश करने वाला
- 50:26महाकार हूँ इस समय इन लोगों को नष्ट करने के लिए मैं आया हूँ
- 50:37इसलिए जो प्रतिपक्षियों की सेना में।
- 50:41स्थित हुए योद्धा लोग खड़े हैं। वो सब अगर तू युद्ध भी न करेगा तो
- 50:47भी मरे जाएंगे क्योंकि मैंने उनकी मृत्यु निश्चित करती है।
- 50:57अतः है अर्जुन। तो उठ खड़ा हो तो जीत सेहरा ले
- 51:06राजगर राजसुख भोग बहुत से लोग कह देते हैं, एकृष्ण के लिए ला
- 51:17एकृष्ण के लिए ला नहीं यहाँ तक। तो कर्म ही प्रभावी है।
- 51:23सभी के कर्म भीष्म हो, द्रोण हो, जय द्रथ हो, दुर्योधन हो, कर्ण
- 51:31हो, सभी के कर्मों का फल यही बनता था और यक्सा बनता था।
- 51:38इस वक्त आकर फैल गया। लोग मुझे पूछ लेते हैं बाबा क्या
- 51:45ऐसे सामूहिक रूप से भी कर्म फैल जाते हैं?
- 51:48बिल्कुल फैल जाते हैं ये आपने देखा होगा अक्सीडेंट हो जाते हैं।
- 51:55500 लोग बैठे हैं, 200 लोग बैठे हैं, जहाज में क्रैश हो जाता है।
- 51:59सब मर जाते हैं, ट्रैन अक्सीडेंट हो जाता है, कुछ बच जाते हैं, कुछ
- 52:07मर जाते हैं, सामूहिक रूप से इनके कर्म मृत्यु देख दी गई थी।
- 52:13पहले तो मैं एक छोटी सी घटना बताता हूँ।
- 52:23बहुत वर्ष पहले की बात है जब पंजाब में विपत्ति का जल रहा था।
- 52:34कुछ लोग कुछ तत्व लोगों को मार देते हैं।
- 52:41बसों से उतार के मार देते हैं, गाड़ियों से उतार के मार देते
- 52:46हैं, गाड़ियों में घूमते हैं तो मेरा एक शिष्य नाम ले देता हूँ।
- 52:52अब तो बेचारे को गए, बहुत वक्त बीत गया, अब तो उसने नया जीवन भी
- 52:59ले लिया। और वो कहाँ उसने जन्म लिया वो
- 53:03मुझे पता है मेरा अक्सर उससे संपर्क होता है तो वो मेरे पास
- 53:11आया। मुझे कहने लगा उस्ता जी मुझे
- 53:13उस्ता जी कहता था। उसका शार्ट नेम था, बिट्टू।
- 53:20ये किसी क्लॉथ मर्चेंट का बेटा हमने नई दुकान ली है, वो दुकान
- 53:29खोल ली है, उसके लिए माल लेने जाना है।
- 53:34मुझे रात्रि को ही बाबा बता गए थे कि ऐसे ये कांड होगा।
- 53:43होगा तुमने कहना है कह देना लेकिन होगा और उस समय तुम्हारा प्रिय
- 53:53शिष्य 12,000 ठीक है। और होगा रात को 10 वाली ट्रैन में
- 54:02आभा एक्सप्रेस में हम बात तो बड़ी खतरनाक है लेकिन बाबा बता गए तो
- 54:11हो नहीं दिया। अभी बाबा बता गए पति कॉल आएगा
- 54:14शुरू हो गया है। 20 तारीख को बता के 30 तारीख को
- 54:19चूकना टूट गया। मेरा और अभी तक अभी मैं स्टिक
- 54:23लेके चलता हूँ तो वह मेरा शीशा आया मेरे पास
- 54:38दोपहर का वक्त था 1:02 बजे। मुझे कहने लगा, उस्ताद जी हमने
- 54:44सामने की दुकान ली है। बाबू राम सब जी वाले के उस कान
- 54:52में नया काम करना है अब और जाना है सामान लेने के लिए।
- 55:02वो सारे काम मेरे से पूछ के करता था या बता के करता था, मैंने कहा
- 55:12मत जाओ, मैंने कहा बस मत जाओ, कल चले आओ, आज जाना जरूरी है।
- 55:27पापा बोल रहे हैं पाई बोल रहा है बड़ा पिंकी मैंने कहा मत जाओ,
- 55:38मुझसे पूछने आ गए तो मत जाओ। कहते नहीं जाना तो पड़ेगा और बताओ
- 55:50अगर कुछ मैं कर सकता हूँ, मैंने कहा फिर तुम ऐसे करना एक बात को
- 55:55ध्यान रखना अपनी शर्त के गांठ लगा लो।
- 56:00ताकि याद आता रहे कहता लगा लूँगा बताओ मैं अलार्म लगा लूँगा, मैंने
- 56:10कहा तुम छह वाली गाड़ी से आ जाना। गाड़ी दो आती थी 1:06 बजे के करीब
- 56:16आती थी एक रात को 10:00 बजे के करीब अब आती थी।
- 56:23कहता ठीक ये ठीक है, दिन में सारी खरीदारी कर दूंगा।
- 56:27मैं अब 2 घंटे का काम है, 6:00 बजे वापस आ जाऊंगा, चला गया।
- 56:39वापस आ जाऊंगा, पक्का आ जाऊंगा। वह मेरी सब बातें मान लेता था
- 56:46लेकिन वो सुन चुक हो गई, चला गया। गाड़ी लेट हो गई।
- 56:53गाड़ी तक आया भी वो स्टेशन तक 5 मिनट पहले गाड़ी निकल गई।
- 56:59मजबूरी से रोकना पड़ा। दूसरी गाड़ी का इंतज़ार करने लगा।
- 57:08बसें उस वक्त जल्दी ही बंद हो जाती थी।
- 57:16थोड़ा सा वक्त नाजुक था, ठीक नहीं था।
- 57:27मैं तभी समझ गया वह नहीं आया और रात्रि को कबर बाला के पास एक
- 57:37कांड हुआ, जिसमें उसकी मृत्यु हो गई।
- 57:42ज्यादा नहीं घुमुंगा सुनने वाले की।
- 57:46आँखें डब डब आएंगी। चाहता था मैं रोक लूँ उसको चाहता
- 57:52था मैं बांध लूँ उसको लेकिन नहीं बनता क्या नहीं रुका और वो हो
- 58:00क्या? मेरे पास आया था, मैंने बात सारी
- 58:06बता दी थी, मत जाओ रोका था और बहुत ज़ोर से रोका था मत जाओ, जो
- 58:18होता है वह उसकी मर्जी से होता है।
- 58:25वक्त आ गया था। रोकने के बावजूद भी वह गया तो मैं
- 58:35देखता हूँ मैंने ज़िन्दगी में बहुत कुछ देखा है, भाइयों की
- 58:41मृत्यु देखी। बड़े भाई की मृत्यु जानता हुआ भी
- 58:48भाभी और माँ को बुलाया कि ये कल मर जाएगा, इसको बचा मैंने अबोहर
- 58:54जाना है, तुम इसको बचाए रखना किसी तरह शाम तक बचाए रखो, शाम को मैं
- 58:58आ जाऊंगा। अबोहर से गाड़ी मुझे लेने आ गई।
- 59:07और मैं गऊशाला से स्नान ध्यान करके वस्त्र बदल के जाने लगा और
- 59:13वह काम हो गया जिंदगी में क्या बताऊँ क्या ना बताऊँ निशोड़ बता
- 59:23देता। मरना जीवना आपके हाथ में नहीं
- 59:32कहाँ मरा 30 फुट 35 फुट गहरी नहर में गिर गया कहाँ मरा हालांकि
- 59:41बचाने वाले श्रेय लेना चाहते हैं, लेकिन मैं जानता हूँ मैं कैसे
- 59:46बचा। बचाने वाले आज तक श्रेय मांगते
- 59:54होंगे कि हमने बचाया लेकिन उनको ये नहीं पता कि बचाए तो रस्सी ने
- 1:00:01और रस्सी भेजी शेव ने और फिर अकेला आदमी बचा भी नहीं सकता।
- 1:00:09कैसे उतरता अगर पकड़ने वाले लोग ना होते और भी तो लोग से तो
- 1:00:15व्यक्ति मुँह रखा है, अपनी मूर्खता से ही काम लेता है,
- 1:00:27स्याणप नहीं चला करते? तुम्हारी इच्छा से कुछ नहीं होता।
- 1:00:37इससे आगे मेरी इच्छा थी कि आगे बोलूं लेकिन क्या करूँ?
- 1:00:45वक्त इतना कम है और आप? आप में सुनने का इतना वक्त कम है।
- 1:00:50आपके पास और भी काम करने होते हैं तो 1 घंटे की वीडियो बहुत होती
- 1:00:55है। अगर आप सुन ले तो अभी थोड़ा सा।
- 1:01:05एवरेज ड्यू डायरेक्शन बढ़ने लगा है, बहुत ज्यादा बढ़ गया है, करीब
- 1:01:12दुगना हो गया है और मैं कहता हूँ कि आप पूरी सुना करो।
- 1:01:18सुनने वाले तो दो दो बार भी सुनते हैं, चार चार बार भी सुनते हैं।
- 1:01:25लेकिन कुछ सिर्फ मुखड़ा देकर ही छोड़ देते हैं।
- 1:01:28मैंने कहा नहीं आप कैन्टेंट देखा करो कई बार मुखड़े नहीं ठीक बनते
- 1:01:34टाइटल ठीक नहीं आते, यहाँ तक मैं काल धूप हूँ।
- 1:01:44काल बन के आया हूँ ये जो सामने तेरे योद्धा खड़े हैं नारायणी
- 1:01:51सेना खड़ी है, जीतने महारथी हैं ये मर चूके हैं मेरे द्वारा मारे
- 1:01:59हुए इन लोगों को तू मार दे बड़ा अजीब शब्द है।
- 1:02:05तू श्रेय ले ले सिर्फ देखिए श्रे खुद नहीं लेते भगवान यहाँ समझ
- 1:02:10लेना करता वो है श्रेय नहीं लेता श्रेय कहते हैं अर्जुन से कि तू
- 1:02:21ले ले श्रेय। और तू राजपाट को भोग और कृष्ण
- 1:02:30जानते हैं कि भोगने से कौन भोंगा जाता है।
- 1:02:33कृष्ण से ज्यादा और कौन जानते हैं, कृष्ण तुम्हें यही सिखाते
- 1:02:39हैं। के अति का भोग भोगने के बाद भी
- 1:02:42भोग नहीं जाता है तो आज का प्रवचन बिलकुल साफ सुथरा मृत्यु निश्चित
- 1:02:57है, लेकिन ध्यान रखना वह मृत्यु तुम्हारे कर्मों का परिणाम है।
- 1:03:04कृष्ण कह देते हैं, मेरे द्वारा ये मारे गए हैं क्योंकि इन्होंने
- 1:03:10कर्म ही ऐसे किए हैं और मेरे विधान ने इनको मार दिए हैं।
- 1:03:17वो भीषण हो, वो द्रोण हो, वो जयद्रथ हो, वो दुर्दन हो।
- 1:03:22सब मार दिए गए। अर्जुन तू डर मत।
- 1:03:27ग्यारहवें अध्याय का 3200 आगे 33 और 34 इसकी बैठक में आगे करूँगा।
- 1:03:33वक्त बहुत हो गया है तो इनको मार दे।
- 1:03:40मैंने इनको मार दिया है और मैंने अपनी इच्छा से नहीं मारा है।
- 1:03:45मैंने एक्जामिनर की तरह इनके पर्चों के नंबर दिए।
- 1:03:50कर्म का फल दिया है और कर्म करना इनका अधिकार था।
- 1:03:54अच्छा करते, तुने अच्छे किए तो तू पचे जाएगा।
- 1:04:01इन्होंने बुरे किये तो इनका फर्ज जो बनता है तो मैंने दे दिया,
- 1:04:08मैंने इन्हें मार दिया है, तू श्रेय ले ले इनको मार के।
- 1:04:16तुम इसको कुछ भी कह लो, जो करता है, परमात्मा करता है, लेकिन अपनी
- 1:04:21मर्जी से नहीं करता, तुम्हारे कर्मों से करता है, अपनी मर्जी से
- 1:04:28करेगा तो वह हत्यारा होगा। तुम्हारे कर्मों का फल देगा तो वह
- 1:04:34हत्यारा नहीं। जज जो मृत्यु दंड देता है, वह
- 1:04:37हत्यारा थोड़ी होता है, उसे तो दुख होता है, वह तो यह लिखकर ही
- 1:04:43शुड बी हैंग्ड उस पिन को तोड़ देता है।
- 1:04:47यह मन्हूस है, पिन दुख से भी होता है।
- 1:04:53परमात्मा को तुम्हें मारने में कोई खुशी नहीं मिलती लेकिन
- 1:04:57तुम्हारे कामों को फल तो देना ही होता है क्योंकि वो न्याय कार्य
- 1:05:01है और जिसका बदबू है, उसके प्रति दयालुता भी बरतनी है।
- 1:05:07दोनों काम कर जाता है। श्री कृष्ण गोविंद हर श्री कृष्ण
- 1:05:22गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:05:38वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:05:47हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:06:06पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात।
- 1:06:20स्वामी सखा हमारे है ना थुनारा जन वासुदेव।
- 1:07:00हरे मुरारी हरे मुरारी हरे। मुरारी मुरारी हर हे मुर।
- 1:07:35श्री कृष्ण गोविन्द धरे मुरारी श्री कृष्ण गोविन्द हरे।
- 1:07:55मुरारी है। नात नारायण वासुदेव।
- 1:08:11आ सु दे हाँ फिर तो मात स्वामी सखा हमारे।
- 1:08:32सखा हमार। श्री?
- 1:08:40कृष्ण गोविंद हरे मयारी हे नाथ नारायण बसुदेव।
- 1:08:50श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:09:01गोविंद हरे मुरारी। हरे मुरारी हरे मुरारी पितुमात
- 1:09:18स्वामी सखा वारे पितुमात स्वामी सखा।
- 1:09:26हमार हे नाथ नारा जन वसुदेव श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ
- 1:09:43नारायण। वासुदेव हो।
- 1:09:59धन्यवाद।