Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Nov 25 - स्वयं को जानने का पहला पड़ाव! कृष्ण के लक्षण देख कर तो लगता है कि खूब भोगना चाहिए! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:17अब कहते हैं बाबा जी और जाको को खर्च ना करो बचाओ।
- 0:32इस ऊर्जा को बचा के 1 दिन तुम स्वर्ण ऊर्जा के पास पहुँच जाओगे
- 0:45और संघ ही तुम ये भी कैसे हो? के भगवान कृष्ण और ऐसे ही कुछ
- 1:00पहुंचे हुए लोग बोलते हैं कि लक्षणों को देखो।
- 1:19इनके लक्षणों को देखकर तो लगता है कि हमें भोग नहीं चाहिए खूब,
- 1:29क्योंकि इन्होंने आठ विवाह किए। कृष्ण।
- 1:40और 10,000 100 16,100 लड़कियां छुड़ाईं नरका सुर के बंदी क्रश इन
- 1:57दोनों विरोधों को आप कैसे मिलाओगे?
- 2:09कृष्ण बेइन्तेहा खर्चा करते हैं काम ऊर्जा पर कृष्णा मूर्ति भी
- 2:20अच्छा करते हैं। और आप कहते हैं कि काम ऊर्जा को
- 2:34बचाओ, इस विरोध को कैसे पाटोगे कैसे भरोगे इस दरार को?
- 2:53मणि शंकर दरार है ही नहीं। बात को तुम समझे ऐसा समझो कि
- 3:20तुम्हें पढ़ाई के लिए। कोई शीष पद भी लेने के लिए
- 3:31तुम्हारे घरवाले माता पिता खर्चा बेचते हैं और तुम उन खर्चों को।
- 3:43अपनी पढ़ाई पूरी करने के बजाय अयाशी में खर्च कर दो घर वाले
- 3:54चाहते हैं कि तुम पढ़ लिख के कुछ अपने बेस्ट फ्रेन्ड हो जाओ।
- 4:03लेकिन तुम अयाशी पे खर्च कर देते हो, मूवीज़ देखते हो, काम ऊर्जा
- 4:12को खत्म करते हो के पास जाते हो। तो क्या होगा?
- 4:26पढ़ते हैं नहीं, मेहनत करते नहीं। जो पैसे किताबों के लिए मिले थे,
- 4:35वो तुमने वैशियों को लुटा दिया। फिर तुम्हारा क्या होगा?
- 4:52फिर तुम कहते हो कि लक्षण देखो बिलकुल मैं कहता हूँ लक्षण देखो
- 5:00लक्षण देखो, लेकिन लक्षण देखने की हिम्मत तुम्हारे बेहतर है कहाँ वो
- 5:06आँख नहीं है तुम्हारे। कृष्ण तो इतनी गोपियों के भीतर
- 5:13राज़ से रचाती हुई भी कहते हैं कि मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ, लेकिन
- 5:23उनके भीतर कौन सा तत्व है? जो बाल ब्रह्मचारी है, उनके वितरय
- 5:27सकून सा तत्व। जिसने जन्म से ले के आय तक शक्ति
- 5:33का राज़ नहीं किया वो किसी और तल की बात करते हैं।
- 5:45मैंने पहले भी कहा है कि संत बोलते बोलते बोलते बोलते।
- 5:55बहुत से तल पार कर लेता है सैकड़ों तल पार कर लेता है
- 5:59तुम्हें पता भी नहीं चलता, मैं सदा ही कहता हूँ पहले जोड़ों
- 6:08स्वार्थी। कोई भी डॉक्टर, कोई भी वकील कोई
- 6:25भी आप उसके पास जाते हो। उन्होंने पहले जोड़ा संत पहले
- 6:36जोड़ता है। आनंद को फिर बिखेरता है।
- 6:43कल ही पहले जोड़ती है मुख बंद करके फिर मुख खोल लेती है, फूल
- 6:49बनकर सुगंध को लुटाती है। लेकिन तुमने पुत्र मनीशंकर सवाल
- 7:02गलत पूछ लिया। इसका जवाब आड़े तिरछे मैं सदा ही
- 7:10देता रहा। घर से खर्चा आया पढ़ाई के लिए और
- 7:23तुमने एया की परवाह किया, पढ़े है?
- 7:30नहीं जिन पैसों की किताबें लेके आनी थीं।
- 7:36वो तुमने शौक में उड़ा दिए और फिर तुम्हारी चाहत, ये बहुत
- 7:57चाहतें पूरी होंगी तुम्हारी अगर तुम अपने पांवों पे आत्मनिर्भर हो
- 8:03जाओगे, आत्मनिर्भर तुम हो। सीधा रास्ता चलिए और सीधा रास्ता
- 8:14यही है कि कृष्ण ने वह मुकाम छू लिया जहाँ कितना ही खर्च करते
- 8:23जाओ। कम नहीं होता।
- 8:34इस शब्द को फिर सुन लो। कृष्ण ने वो मुकाम छोड़ लिया जहाँ
- 8:39कितना ही खर्च करते जाओ कम नहीं होता।
- 8:46पूर्ण मधः पूर्णमेगम पूर्णनाथ पूर्णमदक्षकते पूर्णस्य पूर्ण
- 8:52महागाय पूर्णमय बापस्य कृष्ण में से पूर्ण का पूर्ण निकाल लिया जाए
- 9:00तो कृष्ण पूर्ण ही पहचान। कृष्ण उस मुकाम पे पहुँच चुका है।
- 9:11अब अगर वह अपनी ऊर्जा को बिखेरते हैं बांटते हैं तो उससे उन्हें
- 9:21कोई फर्क नहीं पड़ता है। जिसने जान लिया मैं वह तत्व जो
- 9:32कटता नहीं जलता नहीं सूखता नहीं, गलता नहीं, बेगता नहीं।
- 9:44इसमें से कितना ही निकाल लो, कम नहीं होगा।
- 9:55वह परमदानी हो गया, लेकिन परमदानी होने से पहले वह मुकाम छू लो।
- 10:08अगर तुम उलटे राह चलोगे, पहले ऊर्जा को व्यय करोगे, फिर समझोगे
- 10:17के ऊर्जा के व्यय करने के पश्चात हम मनशाली हो जाए तो तुम गलत राह
- 10:23पे हो। प्रश्न ठीक है लेकिन उल्टा पुल्टा
- 10:32है मैं सीधी सीधी राह तुम्हें बताता हूँ तुम देखते हो उस ऑफिसर
- 10:42को उस पीएम को? जिसके एक बार के लंच और डिनर पे
- 10:48करोड़ों रुपए खर्च हो जाते हैं। जो बाहर जाता है तो उसके कमरे का
- 10:56खर्चा करोड़ों रुपए होता है, लेकिन ध्यान रखो तुम अभी प्राइम
- 11:05मिनिस्टर बनेंगे। तुम अभी मात्र वोट तुम अभी
- 11:17विद्यार्थी हो और यह बात यह शिक्षा।
- 11:26विद्यार्थी के लिए है सो हाथों से जोड़ो इकट्ठा करो उस कली की तरह
- 11:39जो सुगंध को इकट्ठा करती है मुखबन्ध करके।
- 11:45ज़रा भी खुशबू को बाहर नहीं फेंकते और फिर जब भर जाता है कली
- 11:57का पूरा अस्तित्व। तो मुख खुल ही जाया करता है, फिर
- 12:07बंटेगा तुम बंटोगे नहीं जब खुशबू का इतना ज़ोर होगा प्रेशर कुकर की
- 12:17तरह तो वाश पे निकलेगा। फिर तुम बांटोगे फिर बटेगा खुद ब
- 12:25खुद बटेगा यही लक्षण अगर तुमने आइकॉन बना लिया।
- 12:41इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ आइकन मत बनाना, एक किसी एक्टर वेक्टर को
- 12:48देखकर बाल खड़े मत करना सुअर की भांति तुमने अपनी निजता में ये न।
- 13:00और जोड़ना है। पहले जोड़कर अपने जीवन को
- 13:06स्वावलंबी बनाना है, अपने पांव पर स्टैंड होना है, एर्न करना है,
- 13:16एअर्निंग हैंड बनना है। खैर, जब इकट्ठा हो जाए प्रचुर
- 13:22मात्रा में तो बट तो जाएगा ही। बहुत से लोग हैं बिना कमाई बांटने
- 13:34की चेष्टा पे आज यूट्यूब बरफ पड़ा है।
- 13:40जिन्होंने वो तल छुआ नहीं। जीस तल पर अगर 100 में से 100 भी
- 13:48निकाल लिया जाए तो 100 ही बाकी बचता है।
- 13:52पूर्णस्य पूर्णमादाएं पूर्ण मेवा बशीर कहते।
- 13:56पूर्ण में से पूर्ण भी निकाल लिया जाए तो पूर्ण ही बचता है।
- 14:02वो 70 पर गए नहीं, अभी और बांटना शुरू कर दिया।
- 14:12क्या खाक बंटोगे? एक तरफ कैंसराइटिस का फोड़ा भरा
- 14:19हुआ है। मवाद से दूसरी तरफ सवस्थ शरीर भरा
- 14:25हुआ है। शुद्ध खून से मरीज को अगर तुम
- 14:31शुद्ध खून दोगे। ट्रांसफर करोगे तो उसका जीवन बच
- 14:37जाएगा। अगर मरीज को तुम कैंसराइटिस के
- 14:42घोड़े का मवाद ट्रांसफर करोगे तो वह मर जाएगा, इन्फेक्टेड हो
- 14:47जाएगा। आज ये जो बांट रहे हैं।
- 14:55कैंसर के फौड़े का मवाज बांट रहा है क्या तुम्हें इनसे चैन मिलता
- 15:02है ज़रा एकांत में, अपने घर के कोने में किसी उद्यान में?
- 15:13घर की छत पे आराम से बैठ के सूचना इतने सालों से मैं नाम जब्त कर
- 15:22रहा हूँ आनंद की एक भूत भी नहीं थी।
- 15:29कहीं कुछ गड़बड़ ज्यादा तो नहीं है?
- 15:32कहीं मुझे मार्ग गलत तो नहीं बताती?
- 15:37कहीं धोखा तो नहीं हुआ? कहीं विश्वासघात तो नहीं हुआ?
- 15:42यही होता है। देखिए जरूरत पहले पूरी जरूरत पहले
- 15:54उत्पन्न होती है। नेसेसिटी इस दी मदर ऑफ इन्वेंशन
- 16:00और जब जरूरत पैदा होती है तो जरूरत को पूरे करने का उपाय पैदा
- 16:06होता है। खोज लिया जाता है अगर तुम्हें
- 16:10गर्मी नहीं लगेंगी। तो तुम पंखे की खोज नहीं करोगे,
- 16:21अगर तुम्हें गर्मी नहीं लगेंगी, तो तुम पंखे की खोज नहीं करोगे।
- 16:28जरूरत पहले पूरी करने के लिए फिर खोजें होती हैं।
- 16:37जरूरत पहले होती है, खोज बाद में होती है।
- 16:44अपने प्रति ईमानदार बनो तभी तुम दूसरों के प्रति ईमानदार हो
- 16:51पाओगे। अपने प्रति ईमानदार बन पहले तुम
- 17:00जानो कि तुम वास्तव में दुखी हो अभी तो तुम इतने बेहोश हो कि तुम
- 17:11यह भी नहीं जानते कि हम वास्तव में दुखी हैं।
- 17:17जो कांटा हमें दर्द दे रहा है, हम उसको फूलों की सेज समझ रहे हैं।
- 17:27यह फूलों की सेज कल्पना की सेज है।
- 17:36आगे पीछे यह तुम्हें दर्द देगी, कष्ट देगी, वैसा देगी।
- 17:46अभी तुम इतने बेहोश हो कि तुम्हें एका भी नहीं पता।
- 17:53के वास्तव में हम अपने आप को सुखी तो समते हैं, लेकिन सुखी है।
- 18:03हम अभिनय कर रहे हैं, हम सर्कस कर रहे हैं सुखमुक्त दाढ़ी पीली कर
- 18:10ली जुड़ा केस कर लिया। इधर से शब्द चौराहे उधर से शब्द
- 18:18चौराहे चोरों की भाँति इकट्ठा किया उगल दिया।
- 18:32अभी तो इतने बेहोश हो कि मैं दुखी हूँ, ये भी तुमने नहीं जाना और
- 18:42यहीं से यात्रा शुरू होती है आनंद की।
- 18:51संतों ने कहा, लेकिन शुरू कहाँ से करोगे?
- 18:56अभी से यात्रा हमेशा वहाँ से शुरू होती है जहाँ पर तुम खड़े होते हो
- 19:03उस वक्त घर पे हो तो घर से यात्रा शुरू करोगे।
- 19:09कहीं बाहर प्रदेश में हो तो वहाँ से यात्रा शुरू करो, सबसे पहले नो
- 19:20दायसल अपने आप को जानो, अपने आप को जानो कि तुम दुखी हो, वास्तव
- 19:30में तुम दुखी हो। यह मैं सुखी हूँ, मैं सबसे ऊंचा
- 19:38हूँ मैं संपन्न हूँ, मैं छः बार कपड़े बदलता हूँ, मैं 2,00,000 का
- 19:46पैन रखता हूँ, मैं 5,00,000 का चश्मा पहनता हूँ।
- 19:51ये कल्पना में सुखी होने के तरीके हैं।
- 19:55जो व्यक्ति वास्तव में सुखी नहीं होता, इसे सर्कल में डालो।
- 20:01जो व्यक्ति वास्तव में सुखी नहीं होता, वह कल्पना में सुखी होने का
- 20:08प्रयास करता है। तुम देखना भूखे व्यक्ति को जिसने
- 20:13व्रत रखा हो या गरीबी के कारण खाना न मिला हो, उसको रात को सपने
- 20:19आएँगे। बहुत जन के पकवानों के मिठाइयों
- 20:24के बढ़िया बढ़िया दुकानें दिखेंगी उसे।
- 20:28सुसज्जित ना ना प्रकार के भोजन दे में कहावत है बिल्ली को चूहे के
- 20:40सपने और आएगा भी कैसे? चूहे का ही सपना आएगा।
- 20:52क्योंकि भूख ही सो गई है बिल्ली चूहा मिला नहीं गया अगर सन्तु ने
- 20:58कहा नो दाय सर तो इसका प्रथम पड़ाव शुरू होता है।
- 21:05तुम जानो क्या कल्पना में सुखी हो या वास्तव में सुखी हो?
- 21:13क्या ये जो फूल तुम्हें सूख रहे हो, जो यह वास्तव में धरती की कोख
- 21:19फाड़ के निकला या कि तुम्हारी किसी फैक्टरी में तैयार किया?
- 21:27वास्तव में इसमें जो खुशबू आ रही है?
- 21:30और धरती की कोख से खुश हो आई जा के तुम्हारे किसी इत्र की खुश हो
- 21:36आई। ये दोनों में बड़ा फर्क है।
- 21:40एक करित्रम है नैचुरली एक आर्टिफिशियल है और तुमने बनाया
- 21:46तुम्हारी फैक्टरी ने बनाया। नो दाय सर, अपने आप को जानो, यहाँ
- 21:58से शुरू होगा सफर और तुम अगर ईमानदार हो अपने प्रति।
- 22:07तो बिलकुल तुम जानोगे कि चाहे तुम नाम जप कर रहे हो, पाठ पाठ पूजा
- 22:15कर रहे हो, प्रार्थना कर रहे हो, क्षु प्रचार पूजन कर रहे हो,
- 22:23महाकाल को तुम कपूर चंदन। देसी घी का लेप कर रहे हो, लेकिन
- 22:29हो तुम लोग की और भीतर से दुखी ब्राह्मण पाथर के ऊपर कपू देसी
- 22:44घी। चंदन इसका लेपन करें तो वह सुखी
- 22:54नहीं हो जाएगा, बल्कि वह चढ़ाया हुआ पदार्थ व्यर्थ हो जाएगा।
- 23:03न खुदाई मिला, न बसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे पत्थर को भी
- 23:11कोई फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हारे कपूर, चंदन और घी के चनान से
- 23:19पत्थर तो जड़ है, शिवलिंग तो जड़ है।
- 23:26उसको स्नान कराओगे, मल मल के स्नान कराओगे, लेकिन कराएगा कौन?
- 23:32वह व्यक्ति जो दुखी है अभी सुखी व्यक्ति काहे कोई ये पंखे खाने
- 23:39करेगा? तुम दुखी हो, सुख की तलाश में हो
- 23:47और ये सुख के तलाश के तुमने उपाय खोज लिए, महाकाल को स्नान कराओ,
- 23:55गंगा में गोता लगाओ। फलां उपाय कर लो, फलां उपाय कर
- 24:02लो, इस सामंत्र का जाप कर लो इस गुरु की क्षण पकड़ लो लेकिन क्या
- 24:10तुम सुखी होए? प्रथम पोड़ी है अपने आप को जानो
- 24:16के मैं वास्तव में दुखी कल्पना के सब्ज़ भाग अपने आप को तो मत
- 24:21दिखाओ, कम से कम स्वयं से तो धोखा मत करो कल्पना के सब्ज़ भाग तुम
- 24:36पहले से ही बहुत दुखी हो। ऊपर से स्वयं को ही कल्पना के सब
- 24:42जवाब दिखाते हो कि मैं सुखी यही संत कहता है सबसे पहले तुम जानो
- 24:52के वास्तव में तुम हो कौन? और इसका पड़ाव शुरू होगा।
- 24:57सफर का पहला स्टेप कदम तुम जानोगे कि मैं दुखी हूँ ज़रा उतरो तो
- 25:07भीतर मेरे पास लोग आ जाते हैं। बाबा हम क्रिया योग करते हैं और
- 25:13अपने भीतर बैठते हैं। न कुछ करने में उतरते हैं।
- 25:18सुख समझता नहीं, भय आता है, क्रोध आता है, कम्पन आता है, काम उगता
- 25:26है, लोभ आता है, मोह आता है, यही तो तुम्हारी असली आता है।
- 25:36अभी तुम ये हो अभी और संत यही कहता है जहाँ हो वहीं से यात्रा
- 25:45शुरू हुआ करती है। हमेशा वो यात्रा चाहे पैदल करो,
- 25:51चाहे जहाज से करो। शुरू वहीं से होगी जहाँ से तुम हो
- 26:01कल्पनाओं के सब जवाब खुद को तो मत खओ ये खुद के साथ धोखा तुम्हारी
- 26:12जान ले लेगा। जब तुम शुरू में चलोगे तो तुम
- 26:26खोपड़ी में विराजगुन हो और खोपड़ी से हृदय की तरफ चलोगे।
- 26:33अपने भीतर तो रस्ते में यही कुछ आने वाला है जो तुमने दबाया।
- 26:46जो तुमने कॉम्प्रेस किया वही मिलेगा, तुम्हें कोई चीज़ कभी
- 26:55वैनिश नहीं होती, रस्ते में वही मिलेगा जो तुमने दबा लिया, गबरा
- 27:04के बाहर मत आ जाना। क्योंकि यहीं से शुरुआत होती है
- 27:11उस समय खाने की जहाँ कितना भी खर्च करो, ज़रा भी नहीं घटता।
- 27:22शुरू तो यहीं से करना पड़ेगा। धीरे धीरे धीरे धीरे नौ दाई सर का
- 27:35मतलब यही था, चलते जाओ, देखते जाओ गौरव में अपने भीतर ही तो जा रहे
- 27:44है, यहाँ डर का है जो कुछ आएगा। वो तुम्हारा ही दबाया हुआ था,
- 27:53सुप्रस किया हुआ था तुमने ज़रा देखो निहारो साक्षात करो
- 28:01साक्षात्कार करो, उसके दर्शन करो, तुमने क्या क्या दबाया?
- 28:08जो जो दबाया वो तुम्हारे सामने आएगा और इससे ज़रा भी न घबराओ नो
- 28:16दाई सर की शुरुआत यहाँ से होती है।
- 28:18पहला स्टेप फिर उससे आगे के मकान। यह तो बड़ा भय लगेगा क्योंकि
- 28:35तुमने सदा भय को दबाया, प्रकट नहीं किया, तुम्हें ऐसे व्यक्ति
- 28:42की जरूरत है, इसलिए मैं सदा ही कहता हूँ।
- 28:47गुरु बड़ा आवश्यक है जहाँ तुम भैय, क्रोध इन सब विचारों का
- 28:54जिक्र कर सको बेबाकी से और एक गुरु ही है जिसके सामने तुम कह
- 29:02सकते हो, नमाज़ से कह सकते हो, नपिता से कह सकते हो।
- 29:06गुरु से ही कह सकते हो, वह अनुभवी भी है, उसी से बताओ कि हमें क्या
- 29:14तकलीफ है। कुछ रोग ऐसे होते हैं।
- 29:29जो कच्चे बच्चे बता नहीं सकते हैं क्योंकि समाज उन्हें अलाउ नहीं
- 29:37करता और समाज से बेहूदा, वर्धा और गंदी व्यवस्था और कोई है।
- 29:50समाज महज और महज एक चीज़ सीखाता है दबाओ जो सही सही है असली असली
- 29:58है, वो दबाओ जो नकली नकली है फूंका फूंका है उसे उगाड़ो दिखाओ।
- 30:06लेकिन छुपाओगे कैसे? तुम्हारे भीतर वो तत्व में बैठा
- 30:13जो तुम्हारे जरे जरे की बात को जानता है, क्या उससे छुपाओगे
- 30:19नहीं, उससे तो नहीं छुप सकेगा? दुनिया को सुनाया नहीं जा सकता वो
- 30:26मजाक उड़ाएंगे और परिवर्तन जीवन का नियम कभी वाल्मीकि संत होते
- 30:39हैं और उनके आश्रम में। भगवान राम की धर्मपत्नी और उनके
- 30:46पुत्र पलते हैं लेकिन क्या उन पर छींटाकशी इस कारण से की जाए तो
- 30:54उससे पहले वो डाके मारते थे, बुरे व्यक्ति थे नहीं।
- 31:03परिवर्तन स्वभाव है, ऋतुएं भी बदलती हैं तो क्या सर्दी या गर्मी
- 31:09को गलत कह दिया जाए? बसंत को ही ठीक सर्वोपरि माना
- 31:13जाए। नहीं परिवर्तन नियम है संसार का
- 31:19और परिवर्तन। मानव के भीतर भी होते हैं गलतियाँ
- 31:25कर करते ही सीखता है, गिरते हैं शह सवार ही मैदानी जंग में गिरते
- 31:33हैं। शह सवार ही मैदानी जंग में वो बाल
- 31:37क्या गिरे जो घुटनों के बल चले। बच्चा क्या करेगा जो घुटनों के
- 31:42ऊपर चलता है। गिर गिर के सबरी जान, यही तो
- 31:53मनुष्यता है अगर गलती हो गई तो घबराहना मत यह ज़िन्दगी है और
- 32:00ज़िन्दगी का दूसरा अनम है मिस्टेक्स गलती।
- 32:05तुम गलती करोगे छुपाओ मत दबाओ मत तुम्हारे का हम सफर होना चाहिए और
- 32:14ध्यान रखना हम सफर हम सफर ऐसा न हो।
- 32:22जो तुम्हारे लू बोल जगा मेरे पास बहुत रोज़ शिकायतें आती हैं, फिर
- 32:28गुफाएं बना ले। तुम्हारी कमजोरियों का लाभ उठाना
- 32:33शुरू कर दे। तुम्हें ब्लैकमेल करने का डर लगा
- 32:39है? मेरे पास पीएलआर वालों से त्रशीत
- 32:47रोग बहुत आ जाते हैं। बाबा इनसे पीछे छिड़ाओ इन्होंने
- 32:51जो फीस ले ली वो तो ले ली, लेकिन जब अर्ध बेहोशी की हालत में ध्यान
- 33:00रखना। ये सिर्फ मन तक ही सीमित हैं, मन
- 33:03को ही सम्मोहित कर सकते हैं, इसे तुम भी संबोधित कर सकते हो।
- 33:07खुद सेल्फ एप्रोटाइज़ भी हो सकते हो।
- 33:11तुम एक आत्मबोध होता है। एक आत्म कल्पना भी हो सकती है तुम
- 33:34आत्म कल्पना में यह रहे हो आत्म बौद्धिक ज्येष्ठन हो जाएगा उस दिन
- 33:41तो तुम जितना बाँटोगे ज़रा भी कम नहीं होगा।
- 33:50एक हमसफर सच्चा होना चाहिए। माँ बाप बढ़िया हमसफर होते हैं,
- 33:59जिनके आगे अपने राज़ उगल दिए जाएं लेकिन गुरु उससे भी ज्यादा।
- 34:07बैशरते के गुरु लोभी लालची नहीं बैशरते के गुरु का मन टूट गया हो
- 34:19मन गल गया हो, देही गल गया हो। मन लोभी मनरालची मन चन चल मन चोर
- 34:28मन के मते नचा लिए पलक पलक मन और जिसने अपने मन को नहीं गलाया यानी
- 34:37अहंकार को नहीं गलाया, ऐसे को गुरु मत बना लेना और आज यूट्यूब।
- 34:43चैनल पर बर्बाद और मनुष्य हमेशा सस्ते उपाय ढंग ढूंढता है, पाप तो
- 34:53करता है, लेकिन उसकी इच्छा यह होती है कि मेरे पाप का फल दूसरा
- 34:59भोगले जब के विधान ऐसा है। कोई व्यक्ति दूसरे के पाप का फल
- 35:05नहीं फोक सकता। जीसको चोट लगेंगी, पट्टी उसे ही
- 35:09करानी पड़ेगी, दवा उसे ही खानी पड़ेगी, दर्द उसे ही होगा।
- 35:16तुम अपने भीतर जाओ। नो दाई सर्फ़ का पहला स्टेप है
- 35:21तुम्हें दुःख ही दुःख दिखेंगे। क्योंकि जो दबाया वो तुम्हारे
- 35:24सामने आएगा और उस पड़ाव पे आके तुम बड़े दुखी हो जाओगे, सुनाना
- 35:35भी जीने मुश्किल छुपाना भी। जिन्हें मुश्किल सुनाना भेज दे,
- 35:50मुश्किल छुपाना भी जिन्हें मुश्किल।
- 36:02तू ही बता है दिल ज़रा तू ही बता है दिल अफसाने कहाँ।
- 36:20जाएं। वह सनी कहाँ जाए?
- 36:22जो पैदा हो गए भीतर भीतर तुमने डर को, मौत को, लोग को, काम को,
- 36:31क्रोध को दबाया, क्योंकि तुम्हारे समाज में का तुम ब्रह्मचारी हो,
- 36:37यह दिखाओ। अपने काम को लोगों के आगे प्रकट न
- 36:42करो दबाव और तुम दबाते ही चले गए। तुम वीर हो इसलिए जो कहता है कि
- 36:53मैं मैं डरता नहीं, मैं सबसे बड़ा कायर होता।
- 37:00वह अपनी ही कमजोरियों के विरुद्ध उसका चेतन बोलेंगे के मैं डरतन
- 37:04भीतर छुपा हुआ अचेतन मन में डर अन्यथा महावीर कभी नहीं कहते के
- 37:10मैं डरतन गाँधी कभी नहीं कहते क मैं डरतन।
- 37:19गाँधी कहतवे गोली मार के देख लो रस्ता हूँ के ना?
- 37:24प्रशिक्षण ही कर लो पता चल जाएगा ये तो गौर से ही कहा करते हैं।
- 37:31मृत्यु के वक्त ऐसा पुलिस लेते हैं के गाँधी क्योंकि अहिंसावादी
- 37:36थे। इसलिए अगर तुमने मुझे फांसी दे दी
- 37:40तो उनकी अहिंसात्मक संघ रचना जो उन्होंने रची वो टूट जाएगा।
- 37:48सारा खंड विखंड हो जाएगा, उनका सिद्धांत टूट जाएगा।
- 37:57देखिए कैसी कैसी प्ले लेते हैं हत्यारे नवोदय सर यात्रा वहीं से
- 38:10शुरू होगी जहाँ तुम हो और तुम खुद को बहला नहीं सकते, बहका नहीं
- 38:17सकते। खुद को धोखा दे नहीं सकते, देने
- 38:23की कोशिश करते हो, लेकिन धोखा कहाँ दोगे?
- 38:26अपने आपको? इसलिए जीतने गुर बैठे हैं।
- 38:31ये माने बैठे हैं कि हम तो पहुँच गए तो मानने में अर्चन भी क्या
- 38:37है? कौन रोके है तुम्हें?
- 38:39मान लो भाई मान लो लेकिन माँ न लेने से कि मैं परमात्मा हो गया
- 38:46कोई हो तोड़ा जाएगा परमात्मा की उस असीम वैराटता विशालता।
- 38:58जहाँ पंख नहीं लगे, जहाँ तुमने उस विराट से कुछ छुआ नहीं, उसमें से
- 39:06गुजरे नहीं, उससे पहले तुम कल्पना मैं विराट हो सकते हो, बहुत भी
- 39:15सकते हो। अष्टावक्र वाणी, उपनिषद, गीता ये
- 39:23अनुभव की बातें हैं न कि बोलकर समझाने की।
- 39:26बोलने में तो वह आता ही नहीं और इशारा कभी बोलकर होता नहीं।
- 39:34इशारों में भी वो नहीं आता लेकिन इशारा बोलने से थोड़ा सा ज्यादा
- 39:39कारगर है। मैं कहता हूँ कि वो रहा चंद्रमा,
- 39:45कम से कम तुम्हें एक स्टेट दिशा तो मिल गई बेशर के तुम स्ट्रीट
- 39:51लाइन में देख लो। एक दिशा मिल जाती है।
- 39:55इशारे से शब्दों से दिशा भी नहीं मिलते।
- 40:02रिटर्न तो करते रहो, असल में मैं तुम्हें बताऊँ।
- 40:11जब तुम किसी धार्मिक संस्थान में जाते हो तुम्हारी भीतर की वासनाएँ
- 40:16कुछ और होती हैं परमात्मा वरमात्मा से तुम्हें कुछ नहीं
- 40:19लेना होता, राहतें और भी हैं। वसल की राहत के सवा और भी दुख हैं
- 40:32जमाने में मोहब्बत के। परमात्मा की मोहब्बत के सिवा और
- 40:38विद्ध को बड़े कैंसराइटिस है, घरवाल के गुर्दे खराब हो गए मेरे
- 40:48यहाँ दर्द होता है बैकबोन यह तकलीफ है इतने शरीर में हजारों
- 40:55रोग होते हैं। तुम आते हो इसलिए और शुरू में तुम
- 41:00शुगर कोटेड हो के आते हो। तुम्हें खुद ही नहीं पता के भीतर
- 41:07तो कुनीन छपा है और धीरे धीरे वो शुगर उघड़ता जाता है फिर कुनीन आ
- 41:13जाता है। बाबा बचा नहीं है।
- 41:21बाबा अभाव है धन का और बाबा तुम्हें समझाने आए हैं कि तुम वो
- 41:31हो जहाँ भी पन्नता छूती भी है, तुम कहती हो मैं रोगी हूँ।
- 41:39और बाबा तुम्हें समझाते हैं कि तुम बो हो जहाँ रोग भटकता भी
- 41:43नहीं। तुम कहते हो मृत्यु से बड़ा भय
- 41:47लगता है और बाबा कहते तुम बो हो जहाँ मृत्यु मृत्यु की छाया भी
- 41:54नहीं पहुंचती, मृत्यु की गरमाहट भी नहीं जाती।
- 41:59तुम बहुत हो तुम लेकिन तुम आते हो तुम अपनी इच्छणों को दबा के आते
- 42:11हो, शुगर को तड़ करके आते हो, गुरु के पास ऐसे माता न हो, सीधा
- 42:17सीधा ईमानदारी से देखना। मैंने कल ही एक बात बताई थी मेरी
- 42:25शिष्य किसी बहुत वकील बड़े वकील को लेके आ गए।
- 42:31कहती है बड़ा वकील भ्रम होता है, बड़ा बुरा कोई नहीं होता है।
- 42:37बड़ा तो एक ही है, सबका दांता अनंत विस्तार कण कण में छुपा हुआ
- 42:53उससे बड़ा कोई भी नहीं और ध्यान रखना जो खुद को बड़ा कहता है।
- 42:59अप्रत्यक्ष रूप से तुम परमात्मा को गाली निकालते हो, परमात्मा को
- 43:06छोटा करार देते हो, अपने आप को बड़ा कहते हो, तुम परमात्मा को
- 43:14बद्दी सी गाली निकाल देते हो, जिसकी समझ किसी को आती हों।
- 43:20तुम्हारा अहंकार अपने आप को बड़ा कहता है, बड़ा नामी गरामी वकील है
- 43:29अपने आप को बड़ा कहने वालो, जीस दिन तुमने अपने आप को देख लिया
- 43:37तुम पाओगे। तुम बड़े ही नहीं बल्कि तुम हो ही
- 43:44नहीं, यही है किनारा यही है फल सफ़ा यही होगा रिज़ल्ट जब तुम
- 43:56भीतर जाओगे। तुम सर्वरों के पास जाओगे तुम
- 44:04सागर के पास जाओगे जो आनंद से भरा पड़ा है और तुम्हें आनंद की एक
- 44:10बूंद भी अभी तक छुई नहीं इतनी भीड़।
- 44:20डेरों में, तीर्थ स्थानों में, आश्रमों में, गुरुओं के पास।
- 44:32क्या ये लोग पागल हो गए हैं? नहीं पागल नहीं है ये बहुत?
- 44:42मेनू शिव पाप कर बैठता है और जब पाप का फल आता है तो वो कहता है
- 44:47कोई और फिर गुरु बैठे हैं ऐसा जो कहते हैं, हाँ मैं तेरा पाप ठीक
- 44:53कर दूंगा। एहम तो हम सर्व पापे भव्य मोक्ष,
- 44:58श्याम हिमा सुचो तो कृष्ण कहते हैं मेरी शरण में आ जाओ कृष्ण के
- 45:08कहने का कल कुछ हो रहा है। उनका क्या होगा जो उस स्थल पर जाए
- 45:14बिना कह देते हैं कि मेरी शरण में आ जाओ मैं तेरे सारे पाप हर लूँ
- 45:22और पाप क्या हरनी उसे पापिन बना देते हैं, गुफाओं को निर्माण करते
- 45:28हैं। यहाँ सब गड़बड़ ज्यादा है दुनिया
- 45:40गरख रही है रोज़ ऐसा व्यक्ति जो कई कई हत्याओं में।
- 45:56और दोषों में दोषी पाया गया सजा येपता है, वह पैरोल पर ही हो जाता
- 46:05है। और जो बेचारा पेट भरने के लिए
- 46:10चोरी किया था, कोई ब्रेड वगैरह या जिसने कोई भी कुछ गुना नहीं किया
- 46:17वो जेलो में झड़ रहा है। ये तुम्हारा इंसाफ है।
- 46:26नो दायसेल्फ अपने आप को जानना। तो रास्ते में ये आएगा पहला पड़ाव
- 46:35तुमने जो दबाया सबसे पहले साक्षात्कार उसी चीज़ का होगा,
- 46:41वही आएगा। मार्ग में उसी से इंट्रोडक्शन
- 46:45करनी होगी। उसको स्वीकार करना होगा।
- 46:49यहाँ बाबा नानक का सूत्र का मायक जो तुद भाव है, सोई पालिका जो भी
- 47:00रास्ते में मिल गया उसका स्वागत करना ये मेरा ही दवाई मेरा ही को
- 47:07फल है, मैं ही भोगु। और दूसरा कोई भोग पाता भी नहीं।
- 47:13यहाँ सृष्टि का नियम बड़ा शानदार धोखा नहीं दे सकते।
- 47:17तुम सोचते हो तुम कि हम प्रकृति को परमात्मा को धोखा दे देंगे,
- 47:25लेकिन दे नहीं सकते। बस बीच में ये नकली गुरु आड़े आ
- 47:29जाते हैं। लाओ मुझे दे दो बात जहाँ तुम धोखा
- 47:35खा जाते हो कृष्णाकर कहते हैं कि मैं तुम्हें पाप से मुक्त कर
- 47:41दूंगा। वह कुछ तल दूसरा है।
- 47:46कृष्ण उस तल की बात करते हैं, बेशर्ते के तुम एक शर्त पहले रखते
- 47:52हैं सर्वधर्माण प्रतिज्ञा माम एकम शरणम् वृक्ष मेरी क्षण में आज और
- 48:02जब तू शाष्टांग दंडवत हुआ जब तुने तेरा अहंकार खोया।
- 48:10तुम्हारी तो गर्दन में गुल्ला फंसा रहता है।
- 48:12तुम झुकते तो है ही नहीं, लेकिन कृष्ण कहते हैं तू शाष्टांग दंडवत
- 48:18हो के मेरे समर्पित हो जा, समर्पण को फूंका, कर्मकांड मत बना भी के
- 48:25की तरह। जैन मुनियों की तरह साध्वियों की
- 48:28तरह यह फुके कर्म कांड है। बाहर से क्या दिया होगा?
- 48:374000 करोड़ 40,000 करोड़, लेकिन मन से कहाँ तक?
- 48:47ये अनशन वाले देखे तुमने बाहर बैठे होते हैं चालीसमा दिन अनशन
- 48:52का, लेकिन रात को चुपके से खा लेते हैं, चाहे सारी उम्र ये बैठे
- 49:00हो। बस ऐसे ही तुम्हारे मुनि और ऐसे
- 49:06ही तुम्हारे बी के ये धर्म तुम्हें कुराह पर डालते हैं।
- 49:11तुम्हारे समय को बर्बाद करते हैं और ये मानस छोला रोज़ नहीं मिलता,
- 49:18वह मुश्किल मिला है। इसका लाभ उठाना सीखो, अपने भीतर
- 49:26जाओगे तो यही कुछ मिलेगा जो तुमने छुपाया, उसे रूबरू होना ही
- 49:34पड़ेगा। एक मात्र ही।
- 49:39तरीका है यह बिना इसको लांघे आंख बंद करके, तुम गुजर नहीं सकते
- 49:56तुम्हें सब देख के जाना होगा सब भुगत के जाना होगा।
- 50:04नो दायसल और फिर तुम कहते हो कृष्ण तो लौटाते हैं और तुम कहते
- 50:14हो बाबा कि यौन ऊर्जा को संरक्षित करो, असल में तुम मज़ा लेना चाहते
- 50:22हो। अपनी भोगेंद्रियाँ का द्वारा और
- 50:27मसला कोई भी नहीं है। मैं तुम्हें साफ साफ बात तुम्हारे
- 50:31मन की बता देता हूँ क्योंकि तुम्हारे मन की बात मैं जानता हूँ
- 50:39घट घट के अंतस की जानत। वाले बड़े की पीर पछाड़ मैं जानता
- 50:45हूँ प्रश्न को तुम ब्रह्मचारी रह नहीं सकते, ब्रह्मचर्य को खो देते
- 50:54हो फिर बहाने ढूंढ़ते हो, तुम स्पष्ट क्यों नहीं मान लेते, तुम
- 51:00अपने को धोखा क्यों देते हो? तुम स्पष्ट कहो, मुझसे नहीं सा
- 51:05देता, भ्रम चढ़ अगर कोई उपाय है तो बता दो बाबा नहीं है तो मुझसे
- 51:13तो नहीं सकता, हर ले माई साहब कुंजिया तियाँ कर चली आओ सरदारी
- 51:20हमसे तो नहीं होता। बाज आए इस महब से उठा लो पानीदान
- 51:26अपना नहीं सकता, ठीक है, ज्यादा अच्छा रहेगा।
- 51:40सबसे पहले स्वीकार था। यहीं से तुम डर जाते हो नहीं यह
- 51:47पाप मैंने तो नहीं किया तो प्रकृति का दिमाग खराब, जिसने
- 51:53इतनी सर्जना बना दी, यह कोई कल्पना रखती है?
- 51:58तुम्हें शंकराचार्य जैसी कल्पना लगती है, ज़रा दीवार से टक्कर मार
- 52:03के देखो ना क्या जगत मिथ्य दीवार से टक्कर मारो पता चल जायेगा
- 52:11मिथ्य है कि क्या है ओके रे अरे बाप रे।
- 52:18मर गयो ये शंकराचार्य ये कह सकते हैं मूर्ख ब्रह्म सत्यम जगत
- 52:27मिथ्या नहीं नहीं ब्रह्म सत्यम जगत सत्यम ब्रह्म मिथ्या।
- 52:37ब्रह्म भी सत्य है क्योंकि वो है और उस जगत के कोणे कोणे में भी वो
- 52:43विराजमान है ईशावश्य में तुम सर्वम जगत के नीचे जगत है आम जगत,
- 52:49तो फिर मिथ्य कैसे हुआ मिथ्य हुआ कि तुमने जड़ को।
- 52:56चेतन समझ गया बस यह ब्रह्ममित्र जब तुम मूर्ति को जीवंत समझ लेते
- 53:02हो दो कौड़ी का ब्राह्मण उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर देता है।
- 53:07प्राण प्रतिष्ठा करने का तरीका तुम्हें मालूम नहीं तुम खुद ही
- 53:12जड़ हो। जड़ से सहयोगित हो, धन कमाते हो,
- 53:15पदवी कमाते हो, ये जड़ नहीं है, ये जड़ ही तो है जड़ को कमाते
- 53:21कमाते तुम जड़ हो गई संस्कारित हो गई तुमने इसको ही सत्य मान लिया।
- 53:34शंकराचार्य कहते हैं, जगत मिथ्या है, जगत मिथ्या नहीं है, ना
- 53:41ब्रह्म मिथ्या है, ना जगत मिथ्या है, जगत है जड़ में चेतन समझ लेना
- 53:49प्राण प्रतिष्ठा करके देखिए। यह भगवान राम की मूर्ति बना ली।
- 53:53अब इस में प्राण प्रतिष्ठा कर देते हैं।
- 53:55यह प्राण प्रतिष्ठा कल्पना की है। यह है है तो जड़ अन्यथा लूट रहा
- 54:09था गजनवी। और भगवान के पास सारे शस्त्र
- 54:15शस्त्र थे क्या बात हाथों का लकवा मर गया था, ऑडियो हो गया था क्यों
- 54:27नहीं चलाये तुम रक्षा करोगे भगवान की?
- 54:32और फिर तुम अपने हिसाब से शब्द कर लेते हो।
- 54:37धर्मों रक्षित ही रक्षा है, धर्म की रक्षा करो, वह तुम्हारी रक्षा
- 54:41फिर करेगा नहीं ये पार्टी की रक्षा करो भाई धर्म की ये पार्टी
- 54:46के मामले में सत्य है। धर्म तो खुद की रक्षा स्वयं ही
- 54:49करता है। बल्कि धर्म तो तुम्हारी रक्षा खुद
- 54:52ही करता है, धर्म की रक्षा नहीं करनी पड़ते।
- 54:57क्या परमात्मा की भी तो रक्षा करोगे?
- 55:02फिर परमात्मा तुम्हारे द्वारा रक्षित पदार्थ हो गया जैसे तुम
- 55:07पैसे की रक्षा करते हो। कैसे तुम जमीन जायदाद की रक्षा
- 55:11करते हो, वैसे ही तुम भगवान की रक्षा करोगे?
- 55:15फिर तो यह तुम्हारा मेड हो गया, मैन मेड हो गया, ये ठीक है,
- 55:20मूर्तियां मैन मेड हैं, उनकी रक्षा करो, पार्टीस मैन मेड हैं,
- 55:26उनकी रक्षा करो। लेकिन इनको भगवान मान लेना कल्पना
- 55:32है। ये भ्रम मिथ्या है।
- 55:37समझाना नहीं आया, खुद ही ना समझ थे, समझाना नहीं आया तो कुछ भी
- 55:47कहती है। ऐसा थोड़ा ही सत्य को उगाड़ जाता
- 55:53है, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ जिसे तुम सर्वज्ञानी मानते हो,
- 56:00सर्वोच्च ये सबसे बड़ा मूर्ख, अरबों खरबों लोगों को मूर्ख बना
- 56:06के आओ। परम सत्यम जगत जगत मिथ्या और फिर
- 56:15दलीलें देंगे, यह तुम्हारी सब दलीलें बेकार बकवास जीसको तुम जड़
- 56:24कहते हो? ये मित्रा है ज़रा उसमें टक्कर
- 56:27मार के देखो पता चलेगा जीसको तुम कहते हो यह चेतन है मूर्ति ज़रा
- 56:36उसको पानी पिलाके दिखा दो भोग लगाती हूँ तो पर्दा कर लेता हूँ।
- 56:43इसलिए करते हो के भक्तों का भ्रम न टूट जाए या भगवान खाते तो कुछ
- 56:47है नहीं। ये ड्रमेबाजी सर्कस करते हैं ये
- 56:52प्रसाद प्रसाद तो खुद के घर ले जाते हैं, वहाँ खाते हैं, भगवान
- 56:59थोड़ी खाता है, पर्दा इसलिए करते हैं।
- 57:02तुम कैसे हो भगवान को पर्दे की आवश्यकता है भगवान वो जो जिसके
- 57:06सामने पर्दा किया है नहीं जा सकता भगवान ट्रांसपेरेंट देख लेता है
- 57:12आर पार देख लेता है भगवान वो सत्ता व भगवत्ता।
- 57:19जो ट्रांसपेरेंट जो आर पार देखने में सक्षम है वो है भगवान उससे ही
- 57:24पैदा करोगे उससे पर्दा हो ही नहीं सकता तो तुम भोग लगाते हो पर्दा
- 57:31कर लेते हो पुजारी जानता है। कि जो मैंने सच बनाया था, वो
- 57:41वास्तव में झूठा था, अब ये खाएगा तो है नहीं।
- 57:46कुछ नाक को लगा लेते हैं अभी जब खाएगा नहीं चेतना नहीं तो सूंघेगा
- 57:50क्या वो ही चेतना टेस्ट वर्ष के ऊपर आकर टेस्ट बताती, वो ही
- 57:58चेतना? नाकों में जाके समैल बताती तुम
- 58:04क्यों उल्लू बनाने पे तुले हो लेकिन बनाने पे तुले क्या हो
- 58:09तुमने सारे भारत वश को उल्लू बना ही दिया और फिर कहते हो जूता
- 58:15उछालकर सनातन का अभियान नहीं सह गए।
- 58:18झूठ का हमेशा अपमान ही हुआ करता है, झूठ कभी अलंकृत नहीं हुआ
- 58:25करता। प्रमाणित हुआ करता है सदर और
- 58:29तुमने झूठी मूर्तियां बनाई और फिर तुम इच्छा रखते हो कि हम अलंकृत
- 58:36हो जाएं। नहीं होगे तुम अलंकृत, आज नहीं कल
- 58:39पिटोगे और आज तुम्हें पीटने वाला आ गया जो तुम्हारी कमर तोड़ देगा।
- 58:52बताओ ये पर्दा क्यों करते हो? मेरी सासु माता है, खाने से पहले
- 59:01भगवान के मंदिर में रख देती है खाना, इससे पहले भगवान खा लेंगे
- 59:07फिर मैं खाऊंगा, भगवान कहाँ खाते हैं?
- 59:10भगवान को भी खाने की जरूरत है। भगवान को किसी ईंधन की जरूरत नहीं
- 59:16है। बिना ईंधन बिना बाती और दिन भर
- 59:21रात चौबीसों घंटे चलता है और तुम उसे ईंधन में महिया कराओगे।
- 59:28भोजन तो एक ईंधन है। तुम्हारी कार पेट्रोल से चल सकती
- 59:34है, ईंधन से चल सकती है, तुम्हारा शरीर ईंधन से जल सकता है, लेकिन
- 59:39भगवान ईंधन से नहीं जलता। एक दिया मेरे प्राण वस्त है बिन
- 59:45बाती बिन तैर इक प्राणों के भीतर दिया जलता है उसे भगवान कहते हैं।
- 59:53न उसमें कोई बात ही न उसमें कोई तेल ईंधन की जरूरत नहीं।
- 59:57तुम्हारी भोग लगाने की क्या आवश्यकता है और वो खाता नहीं?
- 1:00:01इसलिए तुम परता कर लेते हो और सांझ को घर ले जाते हो।
- 1:00:14और बच्चों को तरह तरह के खाद्यान्न मिलते हैं।
- 1:00:19आप देखना पुजारियों के बच्चे सुंदर पड़े होते हैं।
- 1:00:25उसका कारण सब प्रकार के। स्वाद उचक लेते हैं, तीखा भी,
- 1:00:36मीठा भी, खट्टा भी, नमकीन भी, सब प्रकार का स्वादिष्ट वो खा लेते
- 1:00:43हैं। आप देखना पुजारियों के बच्चे
- 1:00:45सुन्दर होते हैं उसका कारण सर्वर रस को वो खा लेते हैं।
- 1:00:52भांति भांति के पदार्थ लेके आते हैं।
- 1:00:54लोग अपने घरों से बड़ी शरता से पकाते और तुम पर्दा करके भगवान को
- 1:01:00भोग लगाते तो जब के भगवान खाता नहीं, तुम्हें पता है छिद्र से।
- 1:01:14पटवारी क्षमा करना हम रजिस्ट्री करवातें हैं तो वहाँ इंतकाल के
- 1:01:23पैसे पहले ही जमा करवा लेते हैं। फिर पटवारी जब हम उसकी रसीद लेने
- 1:01:30जाते हैं इंतकाल फर्द की। जमा बनते की तो पटवारी अलग से
- 1:01:35पैसा मांगता है। मैंने एक पटवारी से पूछा जब तुम
- 1:01:42जमा करवा लेते हो, पहले अडवांस में तो फिर ये पैसा ये कहते, ये
- 1:01:49हमारी चाय पानी का खर्चा है। मैंने कहा चाय पानी तो भी इस रुपए
- 1:01:54की आ जाती है, फिर ये ₹1000 क्यों?
- 1:02:00वो कहते है ये तो बस ऊपर तक जाते है।
- 1:02:04मैंने कहा भगवान तक जाते है, कहता नहीं, ये तो ऊपर तक जाते है।
- 1:02:12क्या करें मैं तुम्हें एक सच बात बताऊँ वकीलों को जजों को जबाद
- 1:02:23बुरी लगेंगी, लेकिन मेरी हार्ड बीती है।
- 1:02:28मेरा के शिष्य भाई गाहे बगाहे मुझे बुला लेता हूँ, कोई
- 1:02:39जन्मपत्री मिलानी है, कोई बुरी घटना हो गई, कोई शादी वगैरह कोई
- 1:02:45मुहूर्त निकालना 1000 काम होते हैं।
- 1:02:49पर इन ज्यादा जो लोगों के तो ज्यादा होते हैं तो मुझे वो बना
- 1:02:56लेते हैं घर पे बड़ी सेवा शुरू से करते हैं स्पेशल एक रूम था उनका,
- 1:03:03एसी एयर कंडीशनर वहाँ बिठा देते हैं हर 15 मिनट में मेरे लिए।
- 1:03:09ठंडा गर्म आ जाता। वो जब जाने लगे तो कुछ छोटा मोटा
- 1:03:20काम किसी का चालान हो गया, ना जायज कर दिया।
- 1:03:25मैं भी कह देता था। देखिए ये चालान ना जायज।
- 1:03:30ये दीपावली के दिन किया है और पुलिस वाले कहने लगे भी जो हार तो
- 1:03:35हमारा भी है। मैंने कहा भाई सरकार तुम्हें
- 1:03:41नौकरी नहीं देती, तनख्वाह नहीं देती ये जो तुम यहाँ खड़े हो
- 1:03:44वर्दी डालकर। सरकार तुम्हें इसकी तनख्वाह नहीं
- 1:03:48देती। कहते देती है फिर तुम ये ये कहते
- 1:03:53त्यौहार की खुशी है तो ठीक है फिर खुशी मना लो।
- 1:04:01खुशी मनाने के लिए भी पीसा दो पास ही ठेका होता था।
- 1:04:08खुशी तुमने मनानी है जेब दूसरे की हल्की कर लो वह जाने लगा उसकी
- 1:04:16बदली हो गई मैं बिल्कुल सत्य बात बताता हूँ।
- 1:04:22मिर्ची लगेंगी। लगेंगे।
- 1:04:24लगे कोई बात नहीं, मैं कुछ ऐसा नहीं करता जो ये मुझे प्रताड़ित
- 1:04:33करते हैं। हाँ ये समनिंग कर सकते हैं, बुला
- 1:04:40सकते हैं, इनमें अधिकार हैं। वो जाने लगा।
- 1:04:44मुझे कहने लगा ₹50,000 आपने उस व्यक्ति का काम कहा था, मैंने वो
- 1:04:52आगे करवा दिया, फिर से कह के 50,000 हमने उसे 50,000।
- 1:05:04जज को ना उसने फैसला दिया ना उसने फैसला लिखा ना उसकी कोर्ट में था,
- 1:05:15किसी और व्यक्ति को कहा जो जज था। ये मैंने अपने हाथ से 50 तो मेरे
- 1:05:25पे अपराध लगना चाहिए क्योंकि रिश्वत देना भी जुर्म है और
- 1:05:32रिश्वत लेना तो जुर्म है तो मैंने अपने हाथों से 50 याद कर दिया
- 1:05:39यार। अगले दिन उन्हें रिटायर होना था।
- 1:05:46ऐसा घपला चलते हैं जब जजमेंट का ऐसा बुरा हाल है।
- 1:05:59दुखी पीड़ित। अन्यायग्रस्त व्यक्ति की आँखें
- 1:06:04आखिर में कहाँ लगती हैं? जाकर न्यायालय पर और जब न्यायालय
- 1:06:14ही ऐसा हो जाए तो फिर इस देश का क्या बनेगा?
- 1:06:25ऐसे भ्रष्ट व्यक्तियों को जो दूसरे को दंडित करते हैं, सजा
- 1:06:31करते हैं। सबसे पहले सजा इनको होनी चाहिए,
- 1:06:36लेकिन यहाँ हिम्मत नहीं है कोई किसी की शिकायत कर।
- 1:06:41चोर चोर मोसेरे भाई हमने भी उससे नाजायज काम दिया था।
- 1:06:48काम नाजायज नहीं था, बस काम ये था कि थोड़ा जल्दी कर दे और जानबूझकर
- 1:06:57देरी करते हैं। अभी मैंने रोहित की बात बताई।
- 1:07:02नेहा का लोन पास करने में बड़ी देरी कर दी।
- 1:07:04उसने डिले बिट स्क्रप्शन डिले करने का मतलब ही यह होता है।
- 1:07:20इनकी मुठ्ठी गर्म नहीं है, ठंडा खून बहता है, कहते है हाथ गर्म
- 1:07:24करो, थोड़ा काम हुआ नहीं है। अभी तक नहीं किया उन्होंने फाइल
- 1:07:31ना अनिल विज सामने आए। ना चीफ मिनिस्टर सैनी साहब सामने
- 1:07:36आए। मेरा वीडियो शायद उन तक पहुंचा भी
- 1:07:41न हो क्योंकि देश को संभालने में वक्त लग जाता है।
- 1:07:47वीडियो सुनने में कहाँ वक्त होता है?
- 1:07:50ओह विजय साहब अपना ही लगवा लेते हैं दरबार।
- 1:07:55और सैनी साहब को तो बहुत ही ज्यादा कम है और उसकी तो बात ही
- 1:07:59छोड़ो, ऊपर वाले की वो तो गप बनाने में ही लगा रहता है क्या कल
- 1:08:04क्या बोलना शाम को क्या बोलना यहाँ क्या कह के गए थे वहाँ क्या
- 1:08:09कहना और दोनों विरोधी बातें होती। इस मुल्क का उद्धार कैसा होगा?
- 1:08:17सभी मुल्कों का ऐसा ही हाल है। कुछ मुल्कों को छोड़कर नई प्रणाली
- 1:08:25ध्वस्त हो गई है और ध्वस्त क्यों हो गई है?
- 1:08:27अज्ञान के कारण तुम दुखी हो। और किसी ने तुम्हें कल्पना दिखा
- 1:08:38दी कि पैसा आ जाएगा, तुम सुखी हो जाओगे, दोषी हैं कौन?
- 1:08:48जिन्होंने तुम्हारी जेब से धन चुरा दिया ये अडानी, अंबानी जैसे
- 1:08:52लोग? जो सोने की पुशाके पहनकर आपको
- 1:08:58भ्रमित करते हैं कि हम सुखी अगर ये वास्तव में सुखी होते हैं, फिर
- 1:09:08दिखावा करने की आवश्यकता क्या थी? तो मैं एक लक्षण बताऊँ बताया तो
- 1:09:15बहुत बार है। जो व्यक्ति सच में सुखी हो जाता
- 1:09:19है वह दिखाओ, मैं नहीं करता हूँ तुमने देखा जब तुम जान पीते हो तो
- 1:09:29घर के कोने में बैठ जाते हो आराम से।
- 1:09:35वहाँ आराम से पैक डालता हूँ और गटक लेते हो।
- 1:09:40पता क्यों नहीं लगता? बस हम भी जब प्याला पीते हैं,
- 1:09:48मेरे को चौदहवीं वर्ष चल रहा है। 13 वर्ष हो गए समझना मज़े से जाम
- 1:09:55पी रहा हूँ घूंट पी रहा हूँ कुछ और पीने की जरूरत नहीं है, यहाँ
- 1:09:59तक के भोजन भी करने की जरूरत नहीं है, वह जाम ही इतना मजेदार है
- 1:10:06इसलिए तुम्हें कहता हूँ राह नहीं जाता।
- 1:10:08कहे बिना राह नहीं जाए कैसे कहूं? उसे कहा नहीं जाए कहे बिना राह
- 1:10:20नहीं जाए वो कहने में भी नहीं आता और कहा जाता भी नहीं।
- 1:10:27इसलिए कब से जगाई मार रहा हूँ पांच वर्ष से ज्यादा बीत गए, कहा
- 1:10:33वो जाता नहीं रहा, मुझसे जाता है लेकिन वो ये वो नगमा है जो बिन
- 1:10:41कहे रहा भी नहीं जाता। यह नगमा गुणगुनाना ही पड़ता है।
- 1:10:58जो दुबी का चाँद हो या। चौधरी का चाँद हो या आफताब हो यो
- 1:11:22भी हो तुम खुदा की कसम। लाजवाब हो चौधरी का चाँद हो या
- 1:11:44आफताब हो जो भी। ओह, तुम खुदा की कसम लाजवाब हो सो
- 1:12:04देने का चढ़ हो उस। का हुस्नू सवाद लाजवाब उसका
- 1:12:15हुस्नू सवाद लाजवाब आँखें हैं जैसे।
- 1:12:22मैक प्याले भरे हुए। चल रहे हैं।
- 1:12:33जैसे कानों के बादल घिरे हुए हैं जिसमें प्यार की।
- 1:12:51तुम वो शरद हो, मस्ती हो जिसमे प्यारी की।
- 1:13:25जो भी हो, तुम खुदा की कसम लाजवाबों।
- 1:13:47कैसी तारीफ करते शब्दों में तू आतन लग तुम्हें बोल नहीं सकते
- 1:14:05साजो से तू धुना नहीं जा सकता। तेरी मस्ती किसी धुन से निकलती
- 1:14:14नहीं है तुम वो शराब हो, मस्ती हो जिसमें प्यार का वो प्रारूप,
- 1:14:24प्यार का वो खजाना। प्यार का वो समुद्र है जिसमें
- 1:14:32मस्ती है नो दाय सर, यहाँ पहुँच जाओगे आखिर चलो पहले साक्षात्कार
- 1:14:44करो। साक्षात्कार उसी का होगा जो तुमने
- 1:14:48दबाया घबराना मत चलते चले जाना, जो दबाया वो तुम्हारे सामने आई
- 1:14:58उसे देखना उसे मानना जिसे समाज पाप कहता।
- 1:15:05उसे मानना कि हाँ, मैंने बात किया मानना छुटकारा है जैसे तुम मान
- 1:15:13लोगे कि हाँ, कन्फेशन ऑफ एरर लाइक ए ब्रूम दट सूट्स अरे डर्ट एंड
- 1:15:17मिक्स ए सर्प करीना थान बिफोर? ये झाड़ू की तरह है जो तुम्हारे
- 1:15:25सभी गंदगी को साफ करतेगी और फर्श से पहले से ज्यादा साफ सुथरा हो
- 1:15:29जाएगा। कन्फेस करो ठीक मैंने किया बस यही
- 1:15:36तुम मानने को तैयार नहीं तुम कहते हो नहीं मैंने डाका नहीं मारा,
- 1:15:40मैं तो दानी हूँ। मैं हूँ तो मुमकिन है मैं ये
- 1:15:50करूँगा मैं वो करूँगा मैं ये करूँगा, मैं वो करूँगा।
- 1:15:59अरबों की अरबों जिंदगानियों को तुम नर्क में धकेलकर के छह बार
- 1:16:07सूट बदलना ही इसकी कीमत है। अरबों की जिंदगी आग में जल गई।
- 1:16:17क्या उसकी कीमत बसीती सी है कि तुम विदेशों में जाके नाच डांस
- 1:16:23गाने देखो कालीन बिछाओ क्या सैल्यूट लेना सैल्यूट करना यही
- 1:16:32तुम्हारी शान और मर्यादा है नहीं? मस्ती हो जिसमे प्यारी की तुम हो
- 1:16:47शराब वो। तुमने वहाँ पहुंचना है तुम्हारे
- 1:17:10सारे। कर्म कांड, मान प्रतिष्ठा सभी
- 1:17:18सूचनाएं सभी उपाधियाँ अलंकार सभी गद्दियाँ बौनी पर जाएंगी पूर्ण
- 1:17:27नेगलिजबल। तुम वहाँ जाके पाओगे, काश ये मुझे
- 1:17:41पहले मिल जाता काश। मैं पहले यहाँ पहुँच जाता तो यह
- 1:17:54जो गम यह जो दर्द यह जो उचित कार यह जो रातों को जागना यह व्यर्थ
- 1:18:04था मुझे आज पता चला। मैं वो शराब हूँ खुद जिसे पीने से
- 1:18:13व्यक्ति मदहोश हो जाता है। फिर तुम बांटने के योग्य हो जाओगे
- 1:18:27अभी तुम कृष्ण हुए नहीं अभी तुम कृष्ण के तल पे गए नहीं अभी कभी
- 1:18:31नानक के तल पे गए नहीं। अभी वाटने वगैरह की बात मत करो
- 1:18:43अभी साक्षात्कार करो, वह जो तुमने दबाये अभी खर्च मत करो, अभी तो
- 1:18:54100 हाथों से जोड़ो फिर वक्त। जब तुम उस विशाल समुद्र के बीच
- 1:19:01में डूब जाओगे, अटकेलियां खाने लगोगे तो जी भर के बांटना और
- 1:19:11ध्यान रखना फिर बांटने का जियरा करेगा।
- 1:19:16अभी तो तुम्हारे हाथों से मुट्ठी भर चावल भी छोड़ा नहीं जाता, फिर
- 1:19:23वक्त ऐसा आएगा तुम चाहो या न चाहो ये गगरिया भर गईं और ऊपर से गगन
- 1:19:31मंडल से छलक रहा है वो। तुम चाहो न चाहो वह छलकेगा, उसमें
- 1:19:43पिता है। मस्ती हो जिसमे प्यारी की।
- 1:19:53तुम हो शराब हो, मस्ती हो जिसमे यार की तुम हो शराब हो।
- 1:20:14या। आफताबो जो भी हो तुम खुदा की कसम
- 1:20:28लाजवाब हो तुम खुदा की कसम खाते हो, ईमान बेच देते हो।
- 1:20:37घर परिवार चलाने के लिए झूठ कफ़र तोलते हो लेकिन वह ऐसा आलम है
- 1:20:43जहाँ जाकर तुम कहोगे खुदा की कसम तुम ला जो बाबा धन्यवाद।