Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 May 25 - अगर चेतना के बिना शरीर जड़ है, तो क्या चेतना ही कर्मों के लिए जिम्मेदार है? सतोरी कैसे पाए?
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- 0:00बाबा जी प्राण रघुबीर चार चेतना जब जड़ शरीर में प्रवेश करती है
- 0:17तो शरीर कर्म करने में। सक्षम हो जाता है।
- 0:25चेतना के बिना शरीर कर्म करने में सक्षम नहीं हो पाता।
- 0:38तो क्या इसका अर्थ यह है कि चेतना के बिना शरीर काम नहीं कर सकता?
- 0:46तो सभी कर्मों का दायित्व चेतना पे है?
- 0:54सवाल पूरा सुन रहा है? प्रश्न चलते जाएंगे।
- 1:04यह एक अंत हीन कड़ी है, पर मैंने आपसे पहले भी कहा कि प्रश्न तो
- 1:11पूछो लेकिन प्रश्नों पर निर्भर ना हो जाओ।
- 1:19क्योंकि प्रश्नों के उत्तर सदा सही नहीं होते।
- 1:29प्रश्न तो बहुत बढ़िया है अभी तक। और ये प्रश्न दो तलों से पूछा जा
- 1:37सकता है। निस्संदेह ये प्रश्न बड़ा सुंदर
- 1:44है, सभी गुत्थियों को खोल देने वाला है।
- 1:50अब आइए। इस प्रश्न को हम डाइसेक्ट करते
- 1:55हैं, इसकी चीर फाड़ करते हैं, एनालिसिस करते हैं, देखते हैं
- 2:03इसके भीतर क्या है? चलिए तैयार हो जाइए।
- 2:16चेतना निकल जाती है। शरीर से शरीर जड़ हो जाता है, वह
- 2:21कोई कर्म नहीं कर सकता ठीक और जब चेतना आ जाती है तो इसलिए कर्म
- 2:28करने में समर्थ हो जाता है, ठीक। इसका मतलब तो साफ हुआ कि चेतना ही
- 2:37सब कर्मों के लिए जिम्मेदार है। बड़ा सुंदर काश ये अनुभव तो में
- 2:46हो जाता। काश यह अनुभव तुम्हें हो जाता
- 2:57चेतना के बिना कर्म नहीं होता और चेतना जब निकल जाती है, शरीर कोई
- 3:03कर्म नहीं कर सकता, वह एक डेड इंस्ट्रूमेंट हो जाता है।
- 3:09जब चेतना वापस लौटती है, शरीर में तो कर्म करने में समस्त होती है,
- 3:14इसका अर्थ क्या हर कर्म का जिम्मेदार चेतना को ठहरा दिया
- 3:18जाए? मेरा गहरा प्रश्न है और मैं
- 3:24तुम्हें कहता हूँ कि काश। तुम्हारे ये शब्द अनुभव में डाल
- 3:30जाते हैं व्यक्ति आखिर में जाके क्या पाता है?
- 3:36यही बात तो पाता है तुम जैसे ही बाहर से अपनी सारी डिटैचमेंट
- 3:44करोगे। मैं कहता हूँ सारी शक्ति को कछुए
- 3:49की तरह एकाग्र कर लो, बाहर से खींच लो, बुद्धि में ले आओ बुद्धि
- 3:56से भीतर हृदय में उतरो, हृदय से भीतर अपने अंतःस्थल में उतरो।
- 4:11तुम्हारे प्रश्नों से बिल्कुल मेल खाती बात मैं रोज़ बोलता हूँ, मैं
- 4:18तुम्हें कहता हूँ कि काश तुमने इस शक्ति का अनुभव कर लिया होता।
- 4:28तुम प्रश्न पूछ रहे हो, कोई हैरानी की बात नहीं है कि तुम
- 4:34सिर्फ खोपड़ी की कुजलाहट करें। मैं तुम्हें कहता हूँ कि काच ये
- 4:41तुम्हारा आत्म अनुभव बन जाता है। संत आखिर में क्या पाता है?
- 4:50और संत पहली इमेज रिफ्लेक्शन में क्या पाता है?
- 4:53जिसे सतोरी कहते हैं? सतोरी में संत यही पाता है कि एक
- 5:00बड़े हाथ? इस विश्व को नचा रहे हैं
- 5:07कठपुतलियों के तरह तो नाचक कौन कठपुतलियां कठपुतलियां नरजीव हैं
- 5:18के सजीव नरजीव हैं। सजीव कैसे हुईं?
- 5:23उन हाथों की हरकत के द्वारा सजीव हुईं ठीक यही तो क्षेत्र का काम
- 5:34है। क्षेत्र में जब शरीर में आती है
- 5:38तो तुम्हारे यंत्रों को निशाती है।
- 5:42और तुम इंद्र हो जाते उससे पहले तुम्हारी इंद्रियां तुम्हें
- 5:49निचाती थीं, तुम इंद्रियों के वश में थे, लेकिन जैसे ही तुम इंद्र
- 5:58हुए। तुमने इंद्रियों को नचाना शुरू कर
- 6:00दिया, हुकुम देना शुरू कर दिया, यही तो ब्रह्मचर्य है और
- 6:05ब्रह्मचर्य किसे कहते हैं? तुम तो साथ देती हो ब्रह्मचर्य को
- 6:10मैं तुम्हें कहता हूँ देख लो उस स्थल पे जाके अनुभव कर लो।
- 6:18कम से कम सतौरी तो देख लो सतौरी को तो तुम भगवान शंकर जिसका सेवन
- 6:30करते थे भंग। उसका सेवन करके भी सतौरे की झलक
- 6:40को देख सकते हो। बहुत से शिष्य हैं जो सतौरे की
- 6:47झलकों को देख रहे हैं, लेकिन एक बात को ध्यान में रखना कि इस भंग
- 6:55का प्रयोग अपनी सहन शक्ति के अनुसार कर तुम्हारे मस्तिष्क के
- 7:05भीतर एक रासायनिक परिवर्तन होगा। केमिकल ट्रांसफॉर्मेशन केमिकल
- 7:12चेंज वह तुम्हें उस स्तर पर ले आएगा।
- 7:17जहाँ तुम प्रबुद्धता की स्थिति में होते हो, यद्यपि ये नकली
- 7:22होगा, लेकिन सतोरे की झलक से ये तो पता चलेगा, कुछ है तुमने
- 7:33दूरबीन से देखा। जेम्स वेब से देखा या किसी भी
- 7:41दूरबीन से देखा, लेकिन दूरबीन एक यंत्र की तरह इस्तेमाल किया तुमने
- 7:48पार भ्रमण से पार कुछ देख लिया देखा किसी की सहायता से।
- 7:58वो फिर कोई भी टेलीस्कोप था हर्बल था या जेम्स वेव था, लेकिन क्या
- 8:06वो जेम्स वेव के द्वारा देखा गया? अनुभव के फलां तारा वहाँ पर है
- 8:13वहाँ पर है। क्या ये गलत था?
- 8:19नहीं, ये ठीक था लेकिन तुमने अपनी नग्न आँखों से नहीं देखा तो तुने
- 8:27किसका इस्तेमाल किया? टेरिस्कोप का इस्तेमाल किया वो
- 8:32हर्बल थी। यह जेम से थी।
- 8:38बस तुम आँखों से तो नहीं देख सकता है तो ईश्वर ने तुम्हें एक शानदार
- 8:46उत्सू दे दी थी जीसको आज हिंदुस्तान में बैन कर दिया गया।
- 8:53और बाहर के मुल्क जहाँ जानते ही नहीं थे, इसको जब जाना जब इसके
- 9:01इफेक्ट देखे तो आज वो ठेकों पर बिक रही है भांग?
- 9:12भगवान शंकर इस केनाबिस सटाइवा का जो उपयोग करते हैं, ऐसे ही हमारे
- 9:20धर्मशास्त्र भरे नहीं पड़े। जीस धरा पर आध्यात्मिकता का चरम
- 9:29विकास हुआ। अफसोस की बात है कि वहीं यह पौधा
- 9:37भांग बैन कर दी गई। दुख की बात है, अब कहाँ पैदा होते
- 9:44हैं? अब अंत भक्ति पैदा होते हैं।
- 9:49इसलिए मैं तुम्हें रोज़ कहता हूँ, किसी भी तरह से आप सतौरी का अनुभव
- 9:57करो। सतौरी में क्या होता है?
- 10:00यही जो प्रश्न आपने पूछा ये प्रश्न बिलकुल ठीक है।
- 10:07जड़ अपने आप से कुछ नहीं कर पाता। चेतना की मौजूदगी के बिना जैसी
- 10:15कठपुतली नहीं नाच सकती, कठपुतली को निचाने वाले के बिना फिर वह
- 10:25किसे राजा बनाता? किसे रानी किसे दास, किसे गुलाम?
- 10:31ये बाद की बातें हैं प्रथम दृष्टभ्या क्या है?
- 10:38प्रथम दृष्टभ्या ये बात है। कि इन कठपुत्रियों को नीचाने वाली
- 10:46कोई और ताकत है जो कठपुतलियों के दागों से बनी है, वो चेतना तुमने
- 10:55प्रश्न तो बड़ा गहरा किया है। पुत्र और उसकी व्याख्या भी उतनी
- 11:01ही गहरी होगी। और तुम्हें इसे उतनी ही गहराई से
- 11:04एकांत लम्हों में बैठकर आजादी से सुनना होगा भगवान शंकर को जिसका
- 11:20प्याला पीने की। एक लत समझो कह दो हमारे वस्त्रों
- 11:29के अनुसार लत तो नहीं है, ये आगाज मित्र है तुम्हें सिखाने के लिए।
- 11:42एक साधन की तरह उपयोग किया गया भगवान शंकर का कि शुरू शुरू में
- 11:49दर्शन करो और तुम्हें अगर शुरू में समझ आ गया कि वास्तविकता क्या
- 11:58है। जड़ नाचता है या चेतना न चाहती
- 12:02है, जबकि हल्का प्रश्न नहीं है। ये बड़ा विराट प्रश्न है और ये
- 12:09बुनियादी प्रश्न है। यही तो तुम्हारा दुर्भाग्य है और
- 12:17यही तो तुम्हारी इल्ल्यूशन है तुम कहते हो जड़ नाश्ता और संत कहते
- 12:24नहीं चेतना न जाती है, फिर तुम 1000 के प्रश्न बीच में ले आते
- 12:32हो? और उन प्रश्नों से तुम खिचड़ी बना
- 12:39लेते हो, खिचड़ी में सत्य उलझ के रह जाता है।
- 12:45फिर पता नहीं चलता कौन सा चावल, कौन सी मूंग की दाल और कौन कौन सी
- 12:52चीजें इसमें डालेंगे। सब खिचड़ी हो जाता है, अन्नकूट बन
- 12:57जाता है। विदेशियों ने इसका प्रभाव देखा और
- 13:12आज क्यों विदेशी ज्यादा पहुँच रहे हैं?
- 13:18आज क्यों हिंदुस्तान के लोग? इतनी मूडता फैलाई जा रही है आज
- 13:24क्यों हिंदुस्तान के लोग सिर्फ मूर्ति पर उज के रह रहे हैं आज
- 13:29क्यों बाहर के लोग उस निरंकार में जा विराजें?
- 13:35उसका एक अपरमुख कारण है कि उन्होंने किसी ना किसी।
- 13:40सहायिका के द्वारा जैसे हर्बल टेलीस्कोप के द्वारा, हम दूर पे
- 13:46हैं जड़ अपने आप से कर्म नहीं कर सकता।
- 14:02चेतना जब प्रवेश करती है तो कर्म जड़ करता है।
- 14:07प्रश्न बड़ा गजब का है, तो क्या सभी कर्मों के लिए जिम्मेदार
- 14:14चेतना को ही मान लिया जाए? यह ठीक नहीं।
- 14:18बिल्कुल ठीक है, लेकिन पुत्र यही तो भ्रम है तुम्हें यही तो भ्रम
- 14:26है, ये निकलेगा कब? सभी संत यही तो कहते हैं, तुम कुछ
- 14:30नहीं करते जो करता है? परमात्मा करता है तेरा बहुत से
- 14:41देख रहा हूँ क्या तुम्हारे प्रश्न का ये जवाब ठीक नहीं जो संतोनी थी
- 14:51चेतना निकली, शरीर कुछ नहीं कर सका।
- 14:57जैसे तुम मैं गया तो क्या तुम करते थे या वो करवाती थी जो निकल
- 15:07के। इस मायने में अगर देखा जाए नग्न
- 15:12आँखों से तो वह करवाती थी। इसके ऊपर बड़े तर्क उठेंगे, मैं
- 15:21ही तर्क दे दूंगा आपको बहुत बड़ी बात नहीं है।
- 15:24तर्क दे लेता बुद्धि का काम। बहुत से तर्क उठे कि उसकी मौजूदगी
- 15:37में काम होता है। प्रकाश की मौजूदगी में काम होता
- 15:48है। कैटेलाइट एजेंट की मौजूदगी में
- 15:53काम होता है, रासायनिक क्रिया होती है।
- 15:56बुद्धि कोई भी जवाब दे देगी, लेकिन क्या बुद्धि वास्तविकता को
- 16:02जानती है? इतने बड़ा संसार तुम इतने सहजी
- 16:15सहजी से बोल देते हो कि जैसे तुमने ही बनाया हो, तुम इतनी सरल
- 16:24व्याख्या देते हो। जैसे कि तुम नहीं बनाया हो बड़े
- 16:29आराम से तुम कह देते हो ये मड़ी मसानों को पूजने से क्या होगा?
- 16:37यह तुम्हारी बुद्धि की निर्मित है।
- 16:40सत्य तो ये है कि व्यक्ति को बोलना नहीं चाहिए।
- 16:45क्योंकि वह जानता नहीं और जो जानता है हो सकता है उससे ज्यादा
- 16:50और जानना भी बाकी एक ही सत्य है सर बड़ा फिलॉसोफिकल।
- 17:04सत्य ये प्रश्न है जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए इस बात को कृष्ण
- 17:16कहते है और कोई संत कहता हुआ मालूम पड़ता नहीं।
- 17:25संत बहुत इधर रह जाते हैं। बुद्ध कहते हैं अप दीपो भवा अपने
- 17:32दीपक के संबंध जो संत सही पहुंचे कृष्ण कहते हैं, मैं करता हूँ जो।
- 17:43कृष्ण क्या कृष्ण वो चेतना है सर वो पर जीसको हम ब्रह्मंड की चेतना
- 17:52कहते हैं जो अखंड है, जो कहीं से भी टूटता नहीं, सब जगह मौजूद है
- 18:01सर व्यापक है। सर्वश्रेष्ठ पान है।
- 18:05सर्वज्ञ शब्दों में वह आता नहीं है, इसलिए शब्दों से तुम बहस बाजी
- 18:16कर सकते हो, लेकिन शब्दों से जो बहस बाजी करेगा।
- 18:23वह हग्रत है, वह हार जाएगा, इसलिए मैं तुम्हें बार बार कहता हूँ
- 18:30शब्दों की ऊहापोह में लड़ाई झगड़े में उलझो मत तुम्हारे पास आँखें
- 18:38हैं। आँखों से अनुभव करो शक्ति क्या
- 18:43है? इसी प्रश्न के ऊपर तो आज दुनिया
- 18:48लड़खड़ा रह गई है। लव से कहता है जो करता है,
- 18:53परमात्मा करता है और जो करता है ठीक करता है।
- 18:57और जो करता है वो तुम्हारे भले के लिए करता है, तुम तो रोज़ पीटते
- 19:03हो, ये तो गलत हुआ, नहीं तो भगवान हमारे साथ अन्याय हो गए, फिर
- 19:09लाउसी ठीक या तुम ठीक दोनों में से एक ठीक दोनों तो ठीक नहीं हो
- 19:16सकते। तो लॉजी ही ठीक हैं।
- 19:23यद्यपि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है।
- 19:29सब है सयाने एक मत इनको। सयाना कहते हैं कबीर।
- 19:35मोर रखा अपना अपना बाकी सभी लोगों को मुर्खा कहते, जिन्होंने नग्न
- 19:41आँखों से देखा हो। जितनी दूर देखा हो, उसी ही को तो
- 19:45जान पाएंगे और जिन्होंने अपनी हर्बल टेलीस्कोप से जेम्स वेब से।
- 19:55इतनी दूर तक ब्रह्मांड ने उस पार देख लिया, वह भी तो सत्य देखा है
- 20:02किसी साधन का उपयोग करके सत्य को देख लेना तुम ऐसी नकली कहोगे नहीं
- 20:11तो कैनेवि से सटाइवर के द्वारा। जो अनुभव किया गया प्रथम दृष्टव्य
- 20:19प्रथम बार जो झलक मिली नानक को 13131313 उसे कहते हैं, सुतोरी यह
- 20:30एक झलक है सब तेरा सब तू करता। लेकिन आखिरी झलक बनती है साढ़े 17
- 20:38साल के बाद बा बनानी बस फिर तो वो चुप हो जाते हैं।
- 20:43फिर तो 1313 भी नहीं बोलते क्योंकि 1313 बोलने वाला मन हो
- 20:50गया। हो गया।
- 21:00कौन बोले जिसने उस मानसरोवर के भीतर डुबकी लगा ली?
- 21:10वह ताल दलिया को क्यों खोलेगा? जिसने हीरा, पालिया, कंकड़ पत्थर
- 21:17इकट्ठे क्यों करेगा और दो तल या तो संसार में तुम गुम हो जाओ।
- 21:29गद्दियों को पानी के मुकाबले में तुम अपनी जिंदगी को न्योछावर कर
- 21:33दो जिंदगी नहीं, जिंदगियों को न्योछावर करना पड़ेगा।
- 21:37बहुत ही जन्मो से तुम यही तो कर रहे हो, अलग अलग तरह के स्वाद
- 21:44बटोर रहे कभी तुमने धन कमाया। कभी गद्दी कमाई, कभी मान सम्मान
- 21:51कमाया, कभी बुद्धि की नॉलेज कमाई, कभी पदार्थ सुखसाधन।
- 22:02ये कमाने में तुम कई जिंदगियां खराब कर चूके हो।
- 22:08लेकिन क्या वो अंतिम सत्य मिले? जीसको पाने के बाद व्यक्ति तृप्त
- 22:15हो जाता है, ठहर जाता है और फिर उसे कुछ पाने की तमन्ना शेष नहीं
- 22:21रहती। सभी वासनाएँ इच्छाएं कल्पनाएं खो
- 22:34जाती हैं। क्या तुम वहाँ पहुंचे नहीं पहुंचे
- 22:40मैं बता देता हूँ। क्योंकि अगर पहुँच गए होते तो फिर
- 22:46मुझे सुनने वाला कोई नहीं होता। आज अगर तुम मुझे सुन रहे हो तो
- 22:52पक्का है कि तुमने अपने आप को नहीं सुना, जीस दिन तुम अपने आप
- 22:57को सुन लोगे। उस दिन मुझे सुनने की आवश्यकता
- 23:02नहीं रह जाएगी क्योंकि तुम जान लोगे, जिसे सुन रहे हैं वो मैं ही
- 23:08तो हूँ कल ही किसी ने प्रश्न किया तुम कहती हो बाबा वहाँ जाकर जो भी
- 23:17तुम सोचोगे वो जाएगा। बाबा कहते हैं जो मांगू ठाकुर
- 23:25अपने थे, सोई सोई ते और सभी संत कहते हैं तो फिर ये पाकिस्तान
- 23:33वालों के लिए तो मौत क्यों नहीं मांग लेते?
- 23:36वो चाइना अमेरिका वालों के लिए तुम मौत क्यों नहीं मान लेते?
- 23:39बस यहीं गड़बड़ हो जाती और तुम्हें लोग जवाब नहीं दे सकते
- 23:45क्योंकि वो झूठे हैं, पखंडी हैं, वो सर्कस ही हैं, वो सर्कस करके
- 23:51दिखाते हैं, तुम्हें वो तुम्हें लिख के बता देंगे।
- 23:55कि तुम किसलिए आए हो? यद्यपि ये किसी सोर्स के द्वारा
- 23:59जुटाया गया है। ये सत्य लोग नहीं है यह जैसे तुम
- 24:05झूठ कफर तूफान के द्वारा पापा ना निकने कहा पापा वह जन होवे इकट्ठी
- 24:11ये भी एक पाप है। तरह तरह के ढंग बना लिए गए।
- 24:17यह भी एक ढंग है। बाबा बागेश्वर मैं तो स्पष्ट
- 24:21बोलती हूँ कुछ कमना है, कुछ वासना है गरीबी में कटा जीवन अब गरीबी
- 24:32में नहीं काटना है। तो ठीक है अमीरी में काट लूँ
- 24:39लेकिन कल भी मैंने कहा था अमीरी मिल गई तो परमात्मा ने अगर दंडित
- 24:45करना है तो पदार्थ दे देगा, भूख छीन लेगा फिर क्या करूँ?
- 24:54इंटरनल के गद्दों, पिल्लोज तुम्हारे सामने पड़े होंगे।
- 24:59नींद नहीं आएगी। नींद तो उसके नियम थे छवि कुछ
- 25:06होगा, तुम्हारे पास सवस्थ नहीं होंगे।
- 25:13पर नियमत नहीं होगी। परमात्मा की शरीर कहीं से दुखेगा
- 25:17लाचार होगा। अगर उसने कष्ट देना है तो कुछ
- 25:22उसकी भी न्यामते हैं जो मुख्य हैं।
- 25:27सभी पदार्थ तुम्हारे सामने पड़े हैं।
- 25:31और पदार्थों को खाने की भूख ना हो तो क्या करो सभी बिछुने तुम्हारे
- 25:37पास हो, नींद खो जाए फिर क्या करोगे क्या मेलाटोन इन खालोगे
- 25:45सेलाटोन निकालोगे डोपवन खालोगे? उससे नींद आ जाएगी।
- 25:58तुम्हारे साइंटिस्ट सब बेकार हो जाते हैं, फेल हो जाते हैं।
- 26:03तुम्हारी ही साइंटिस्ट कहते हैं तुम जो आज ध्रुव तारा देखते हो वो
- 26:09सामने। दिखता है।
- 26:12उत्तर की तरफ वह यहाँ से करीब 447 प्वाइंट छः बिजली की रफ्तार से
- 26:27अगर चलना चाहे तो 447 प्वाइंट से अधिकतम और 390 न्यूनतम।
- 26:35इतने वर्ष लगेंगे और 2200 गुना बड़ा सूरज से तुम्हारा सूरज कितना
- 26:45बड़ा है? द्रव तारा जिसे तुम एक टमटमा तारा
- 26:49समेत हो, ये 2200 गुना पड़ा है सूरज से।
- 26:56और इसकी रौशनी को धरती पर आने में 390 से 447 प्वाइंट छः वर्ष लग
- 27:05जाते थे। बिजली की रफ्तार से चला जाए तो।
- 27:14क्या तुम जानते हो जो आज साँझ तुम तारा देखोगे वह तारा अभी भी वहाँ
- 27:21है बताओ नहीं जानते तो किसी साइंटिस्ट से पूछ लो क्या पक्का
- 27:31कह सकते हो तुम? वह जो तारा तुम आज देख रहे हो
- 27:41ध्रुव तारा, वह क्या वास्तव में तुम देख रहे हो यही तुम्हारा भर्म
- 27:49टूटता है वैज्ञानिक कहेंगे नहीं। शायद नहीं, और शायद रिकाज़ हुआ
- 28:00हुआ क्योंकि ध्रुव तारा जो तुम्हें अब दिख रहा है।
- 28:11यह करीब 440 वर्ष पुरानी तस्वीर है जो तुम आज देख रहे हो 440 वर्ष
- 28:22पहले था ये आज है की नहीं, पक्का नहीं।
- 28:30हो सकता है गायब हो गया हो, फिर भी तुम इसे 440 वर्ष तक देखते
- 28:36रहोगे। बड़े मज़े की बात है, क्या तुम
- 28:42सूरज को देख पाते हो जो अभी देख रहे हो?
- 28:49क्या तुम्हें पता है? ये जो अभी तुम देख रहे हो सूरज ये
- 28:54अभी का सूरज नहीं है ये 8 मिनट पहले का सूरज है, 8 मिनट पहले ये
- 29:05होगा तुम्हें 8 मिनट बाद पता लग गया।
- 29:10क्योंकि इसकी रेंज को तुम्हारे पास आते आते 8.15 मिनट लगते हैं।
- 29:18इन बारीकों को तुम समझ नहीं पाते सवाल पूछ लेते हो?
- 29:26सवाल बड़े गजब के होते हैं, लेकिन उत्तर कहाँ समझ पाते हो तुम रात
- 29:33को नग्न आँखों से देखना आसमान की तरफ क्या तुम रात को जो आसमान
- 29:41देखोगे? और जहाँ अब रात है, वहाँ जो आसमान
- 29:44में झांक के देखो, जो मुझे सुन रही है तुम आसमान में जो देख रहे
- 29:50हो, वह अभी है जो तुम देख रहे हो तुमसे पूछता हूँ।
- 30:00जो आसमान में तुम अभी देख रहे हो, क्या वो अभी है या मातृ इलुजन है?
- 30:10बिल्कुल इलुजन है, क्योंकि जो अब तुम देख रहे हो?
- 30:18वह बहुत पुरानी आकाशीय संगरचना है।
- 30:23बहुत प्राण हो सकता है। 400 साल प्राणी, 800 साल प्राणी
- 30:291000 साल प्राणी जो आज तुम्हारे ऊपर प्रभाव पड़ते हैं प्लेनेट के।
- 30:40किसी भी प्लेनेट के प्रभाव पड़ते हैं क्या वो अभी प्रभाव पड़ते
- 30:47हैं? अभी निकले हैं वहाँ से वह बहुत
- 30:54देर पहले के निकल चूके हैं। आज तुम उनकी जद में आये हो।
- 31:02सिर्फ यही बात तुम्हें समझनी होगी जो तुम समझने का प्रयास करते हो।
- 31:11यह विश्व तुम्हें समझ नहीं आएगा। आज एक ब्लैन्ड यहाँ से 100 वर्ष
- 31:21दूर है। प्रकाशवर्ष प्रकाश की गति से आते
- 31:29आते उसको शुभसर लग जाएंगे और तुम चले गए।
- 31:36कोई नया आ गया वहाँ से जो 100 साल पहले चला था प्रभाव वह आने वाले
- 31:44व्यक्ति पे पड़ेगा और तुम जानते भी नहीं हो और शायद वह प्लांट
- 31:50गायब भी हो गया। तो फिर तुम शक्ति क्या है?
- 31:55की जान कैसे सकोगे? जीस अपलैंड का प्रभाव 100 साल
- 32:01पहले चला। वह तुम्हें इफेक्ट करेगा 100 साल
- 32:10के बाद। और तब तक तुम यहाँ पर होगे के
- 32:15नहीं होगे, कोई पता नहीं यही उसकी शानदार संरक्षण है उसकी कड़ी हुई
- 32:24है। तुम देखते हुए भी ये समझ तो ये
- 32:30सत्य है जो मैं देख रहा हूँ। नहीं ले सकते।
- 32:34पूछो वैज्ञानिक से वैज्ञानिक कहोगे नहीं यह जो प्लेनेट के
- 32:40तुम्हारे ऊपर प्रभाव अब पड़ रहे हैं?
- 32:44यह जितनी दूर है वो तीन देर पहले के प्रभाव है।
- 32:48तुम्हारे तक आज पहुंचे हैं, ये बात अलग है।
- 32:53तुम्हें पता है सूरज का प्रभाव 8 मिनट बाद हमारे ऊपर पड़ता है।
- 32:588.25 मिनट बाद ऐसे ही जितनी दुरोता रहे 447.3।
- 33:11वर्ष बाद तुम्हारे पास आएगा इसके अंदर जो बटा और जो तारा तुम अभी
- 33:16देख रहे हो वो पक्का नहीं तुम कह सकते हो वो है ये बात तुम्हें
- 33:22हैरानी जनक पहलू में ले जाएगी और ये सत्य है।
- 33:29पूछो अपने तथा कथित वैज्ञानिक से क्या सत्य नहीं तुम प्लेनेट से
- 33:38इतना डरते हो ये एस्ट्रोलॉजिकल व्यवस्था को?
- 33:50अंकित करने वाले सूचित करने वाले लोग क्या जानते हैं कि यह प्रभाव
- 33:54अभी का जो बता रहे हैं नहीं, यह प्रभाव अभी का नहीं है।
- 34:04यह प्रभाव बहुत देर पहले का है। तुम कहते हो अस्त हो गया, तुम
- 34:10कहते हो उदय हो गया तो क्या ये अभी अस्त हुआ अभी उदय हो?
- 34:21ये बहुत दूर की व्यवस्था है तुम्हारे पास आती है बहुत देर
- 34:25बाद। इसी तरह एक प्रश्न है, सूक्ष्म का
- 34:31पशु आने वाली कठिनाई। आने वाली घटनाएं तुम्हें देर से
- 34:45पता लगेगा, लेकिन संत उस स्थल पर जाकर देख लेता है।
- 34:50ये बिल्कुल वैसे ही हुआ ना जैसे आज तुम्हें जो तारा दिख रहा है वह
- 35:01अगर अभी गुम है और 400 साल पहले। वह लुप्त हो गया तो 400 साल पहले
- 35:10जो देखने की क्षमता रखता है वो कहेगा ये लुप्त हो गया लेकिन तुम
- 35:15फिर भी कहोगे नहीं, हम देख रहे हैं नहीं, तुम नहीं देख रहे हो ये
- 35:21तुम्हारा इल्यूश़न है। ये जो भविष्यवाणियां हैं ये उस
- 35:27स्थल से जाकर देखी जा सकती हैं और बड़े मज़े से बताया जा सकता है।
- 35:36तुम्हें भी क्या पता है ये पक्का कह सकते हो कि तुम अभी हो।
- 35:44बताओ, मैं किसी कल्पना लोक में नहीं बोल रहा हूँ, मैं किसी
- 35:51स्वप्निल लोक से नहीं बोल रहा हूँ, मैं यहीं आपसे मुखातिब हूँ।
- 35:55अभी यह जो संत कहते हैं कितने वर्ष बाद यह हो जाएगा?
- 36:04इतने वर्ष बाद ये हो जाएगा ये क्या है?
- 36:08ये टाइम ट्रैवल है? बस तुम सिर्फ बुद्धि से व्याख्या
- 36:15करती है। साइंटिस्ट ने साइंटिस्ट ने उस
- 36:19स्तर पर जाकर नहीं देखा जहाँ से ये चीजें देखी जा सकती हैं।
- 36:24और ऐसा व्यक्ति भविष्यवाणियों में उल्लेख था क्योंकि आज जो बात कही
- 36:34गई वह उसने देखी और घटेगी। वो 400 साल के बाद।
- 36:43फिर वह भविष्यवाणी करेगा। आज से 400 साल बाद ऐसा होगा
- 36:48यद्यपि उसने देख आज ही लिया आज से 2000 साल बाद ये होगा।
- 36:55यद्यपि देख उसने अभी लिया। जहाँ सब गड़बड़ है, ये तुम्हारी
- 37:05नजरों का धोखा नहीं है, ये सत्य है अब तुम रात को आसमान में देखना
- 37:12चमकते हुए तारों को तुम बिल्कुल सत्य हो गई जी हैं।
- 37:17तस्वीर खेंच लो, लेकिन ये कहाँ है ये जैसा तुम देख रहे हो।
- 37:24इनमें से बहुत से तारीख सैकड़ों साल पहले खत्म हो गए।
- 37:31तुम्हें आज भी देख रहे है इसका अर्थ क्या है?
- 37:36इसका अर्थ है इसकी रौशनी पहुंचने में वक्त लग रहा है।
- 37:39तुम्हारे पास जैसे सूर्य की रौशनी पहुंचने में वक्त लग गया 8 मिनट
- 37:45का वैसे ही जितनी दूर कोई तारा है, वह उतनी दूर की खबर देता है
- 37:51कि आज तुम्हें खबर देता है कि यह है।
- 37:54लेकिन वो आज है के नहीं है, ये तुम पक्का नहीं कह सकते जब तारा
- 38:00तुम देखोगी, शाम को पाओगे बिल्कुल है लेकिन जैसे ही ये लुप्त हो
- 38:07जाएगा, उसके 400 साल बाद ये दिखेगा बाद तक।
- 38:13फिर अचानक तुम पाओगे ये लुप्त हो गया लेकिन ये दोनों बातें
- 38:17तुम्हारी गलत है। 400 साल बाद ये लुप्त नहीं हुआ,
- 38:21ये 400 साल पहले ही लुप्त हो गया था।
- 38:26यही है बुशवाणियां। फिर सत्य क्या है?
- 38:30सत्य उस तल से देखा जाता है जो मैं बार बार बोलता हूँ और तो मैं
- 38:36अपनी बुद्धि से डिनै कर देता हूँ। तुम कहते नहीं, तुम सयाने हो जाते
- 38:44हो, संतोषी सयाने तुम कैसे हो सकते हो?
- 38:53साइंटिस्ट कहेगा मैं जो बोलता हूँ ठीक बोलता हूँ लेकिन उसे नहीं
- 38:56पता। अभी बहुत से राज़ है जो उसने खोजे
- 38:59नहीं। जो संत को संत को पता है, संत से
- 39:03बड़ा ना तो कोई वैज्ञानिक है, ना कोई दोष दृष्टा है।
- 39:10न कोई सत्य को जानने वाला सत्य का द्योतक है, सही है संत वह सभी
- 39:19कूटों को देखता है और वह यह भी जानता है कि कब चीज़ कब हुई थी।
- 39:27आज दिख रही है। कब चीज़ आज दिख रही है कल नहीं थी
- 39:33और कल नहीं होगी। ये बड़ी गहरी गहरी गुंजलदार बात
- 39:38में तुम्हें बता रहा हूँ और तुम इस वीडियो को समझने के लिए
- 39:42तुम्हें बहुत बार कंगाल ना होगा। इसे जैसे जैसे विज्ञान के करेगा।
- 39:49वैसे वैसे इन बातों की सार्थकता तुम्हें नजर आएगी कि कभी कोई
- 39:54व्यक्ति इतने साल पहले बोला था। वह बोला कैसे?
- 40:00तुम तब भी नहीं जान पाओगे अगर तुम उस स्थल पर नहीं जा पाए।
- 40:07तो मैं बार बार तुमसे अनुरोध करता हूँ कि तुम एक बार इस बात को
- 40:13क्लियर कर लो जो कि उसके होने का थोड़ा सा प्रमाण मिल जाए।
- 40:21होगी तो झलक। जिसे मैं सितोरी कहता हूँ संतोनी
- 40:26सितोरी कहा बाबा नानक ने सितोरी कहा क्या कहा सितोरी मैं
- 40:341313131313। बाबा नानक गलत हैं या तुम गलत?
- 40:48जिसके बैग में डल रहा था सामान और समयता था, ये पागल हो गया।
- 40:55उसे नहीं पता था कि ये आज से आना हुआ।
- 41:01नानक उसदिन स्याने हो गए। जीस दिन 1313 की बात कही।
- 41:08उससे पहले नानक स्याने नहीं थे, तुम्हारी तरह थे नानक उसदिन
- 41:15स्याने हो गए और उसके बाद वक्त आया।
- 41:20साढ़े 17 वर्षी हुए थे जबकि वो बौद्धत्व को उपलब्ध हो और धीरे
- 41:27धीरे धीरे धीरे उन्होंने परम की यात्रा सुरक्षित और 1 दिन वह भी
- 41:33आया जब वह समुद्र में विलीन हो गए।
- 41:39लेकिन कुछ लोग ऐसे जिन्होंने आत्मज्ञान कर लिया बस वो मुक्त हो
- 41:46जाएंगे, उनकी बूंद समुद्र में मिल ही जाएगी और किसी कर्णावश कह रहे
- 41:53हैं तो तुम्हें मैं एक बात कहता हूँ, बार बार कह।
- 42:02कि तुम एक बार किसी तरह उससे थोड़ी की जरूरत है।
- 42:06सत्य क्या है जी जान लो क्योंकि अभी तुम्हारे पास आँखें नहीं हैं,
- 42:12अभी कोई कह देता है ये रंग हरा है।
- 42:18और 100 अंधे तुम्हारे पीछे लग जाते हैं।
- 42:20वो कहते हैं, हाँ हरा है, हरा है, हरा है और हरा वो होता है सारी
- 42:27दुनिया उसके पीछे लग जाती है। हाँ हरा है, एक कोई आंख वाला आ
- 42:32जाता है। तुम गिनती से प्रमाणिकता देखते हो
- 42:41और वह जो एक आता है जो कहता हरा नहीं ये तो गेरुआ है।
- 42:50तुम उसकी खाल नोचने को पड़ते हो गेरुआ के से जब इतने लोग मानते
- 42:55हैं भाई इतने लोग अंधे हैं, एक को दिख रहा है उसका क्या कसूर है
- 43:04बेचारे का और जो कहता है हरा है उसका भी कोई किशोर नहीं है, आँखें
- 43:08नहीं गिरती। उसमें रहम करो और जो कहते हैं
- 43:13गेरुआ है उसकी आँखें हैं उसे दिख रहा है, लेकिन तुम सारी दुनिया के
- 43:21लोग उस एक के पीछे पड़ जाते हो जो कहते हैं नहीं हरा नहीं है गेरुआ
- 43:26है और वह आँखों से देख कर बोलता है।
- 43:32तुम सारे लोगों की बेइज्जती हो जाती है और स्ट्रेंथ तो तुम्हारी
- 43:38ज्यादा है और तुम ऐसे टांग लेते हो, सोली दे देते हो, स्लीप चढ़ा
- 43:45देते हो? प्रत्येक व्यक्ति को अपना अनुभव
- 43:50बोलने का अधिकार तो है ना भाई कोई मूर्ख व्यक्ति आके कह दे कि तुमने
- 43:56ये प्रश्न मुझसे क्यों पूछा? चलो जी चलो ये कोई बात थोड़ी है
- 44:02ऐसे कैसे सृष्टि में न्यायिक व्यवस्था चलेगी?
- 44:07नहीं चले तुमने प्रश्न ही तो पूछा है, तुम जवाब दे दो नहीं जवाब आते
- 44:15तो कह दो भाई, मुझे नहीं पता ये भी नहीं कहना चाहते चुप ना हो जाओ
- 44:23ये तो कोई बात नहीं हुई। तुमने ही प्रश्न पूछ लिया चलो मैं
- 44:26जेल में डालता हूँ क्योंकि तुम्हारे पास अधिकार है, अधिकारों
- 44:33का गलत उपयोग करना उसका फिर तुम फल भोंकते हो फिर तुम कहते हो,
- 44:39हमने तो ऐसा कुछ नहीं किया भाई कुछ तो किया है।
- 44:43वो इतनी सृजना को रचने वाला पागल थोड़ी तुम्हें तो अभी तक ये भी
- 44:49नहीं पहुंचा की हाइड्रोजन कैसे और ऑक्सीजन कैसे बनाई, कार्बन
- 44:54डाइऑक्साइड का सी कैसे बनाया, एटम कैसे बना, उसकी तो छोड़ दो एटम
- 44:59कैसे बना वो ही नहीं पता तुम्हें। इलेक्ट्रॉन कैसे बना ये भी नहीं
- 45:03पता तुम्हें तुम परमात्मा के गले में हाथ डाल लेने की चेष्टा करते
- 45:10हो पता नहीं तुम्हें काका गप पूरा अड़ा नहीं आता तुम्हें?
- 45:24कोशिश करते हो? तुम परमात्मा के मालिक होने की और
- 45:28कभी नहीं हो सकोगे। मैं क्यों कहता हूँ, क्योंकि मैं
- 45:33जानता हूँ तुम एक कण भी तो नहीं बना सकते, तुम सूत का एक धागा भी
- 45:39तो नहीं बना सकते। बात बनाने की है उसके बाद चधरया
- 45:45तो कोई बन सकता है लेकिन क्या तुम बना सकते हो और तुम उसको बनाने
- 45:53वाले में आपत्ति करते हो? मैं यही बात तुम्हे समझाना चाहती
- 46:00हूँ। किसी तरह किसी तरह मैं यह बात
- 46:09बड़ी करूणा कारणिक दृष्टि से बोल रहा हूँ यह बिल्कुल वैसा है जैसे
- 46:17कोई मकान बना रहा है। और उसने नीम नहीं गोदी सीधा धरती
- 46:23के ऊपर ईंटों को चिन्ह शुरू कर दिया तो मैं कहूंगा कि ये गिरे दी
- 46:28भाई और वह व्यक्ति मेरे इस जवाब में मेरा ही कालर पकड़े।
- 46:39कैसे बुधु सारी दुनिया में हैं, कोई एक क्षेत्र नहीं जहाँ ये बुधु
- 46:47पाए जाते हैं। मैंने परमात्मा से पूछा शिव से
- 46:52पूछा कि जीस पर आप कुपित होते हो। उसको क्या दंड देते हो?
- 47:01हसनो तो बा बा बोलें लगन जिसपे मैं अति को भित होता हूँ उसे
- 47:08राजनीतिज्ञ बना देता हूँ उसे दिल्ली भेज देते उसे उस मुल्क की
- 47:19राजधानी में। बैठा देता हूँ।
- 47:23उल्लुओं का ठिकाना राजधानी में होता है।
- 47:29राजधानी में तुम देख लो सब उल्लू बैठे हैं।
- 47:40वो लोग तो एक ही बहुत होता है यहाँ इतने सारे उल्लू बैठे बर्बाद
- 47:46है गुलस्ता करने को बस एक ही उल्लू का फीता हर्षा, वे उल्लू
- 47:53बैठा है अंजाम गुलस्ता क्या? पुत्र तुमने स्वर्ग बहुत बढ़िया
- 48:04किया बात ठीक है पति की बात जिससे चेतना के निकल जाने से वास्तविकता
- 48:13सामने आ जाती है। यह जो जब जब बोल रहा था ये नहीं
- 48:20बोल रहा तो ये कौन बोल रहा जिसके निकल जाने से अब ये आहा भी नहीं?
- 48:31अब ये सांस भी नहीं लेते वो क्या है?
- 48:35जो निकल गया क्या वह करता था? हाँ, वह करता था, रही बात सभी संत
- 48:43तुम्हें समझाते हैं और तुम्हारी समझ में नहीं आती।
- 48:50जीस से चेतना के होते हुए तुम्हारी ये कुपड़ियाँ काम करती
- 48:54हैं। उसी चेतना के विपक्ष में तुम
- 48:59बोलना शुरू कर देते हो, हालांकि तुम्हें पता होता है जब ये चेतना
- 49:05निकल जाएगी, तुम निश्चित पड़े रह जाओगे, फिर तुम ये न बोल पाओगे,
- 49:10यह ठीक है, यह गलत है। बूढ़ जाण प्राण तेरे कोड जाण
- 49:25प्राण तेरे फिर क्यों नहीं बोल दा?
- 49:37उड़ जान प्राण तेरे फिर क्यों नी बोल दा होने वाली कुंजियाँ तू फिर
- 49:53क्यों नी? खोल दा किथे तेरी आंकड़ा, किथे
- 50:03अभिमान वे किथे तेरी आंकड़ा। देख के थे अभी मान ओय फलता भरोसा
- 50:22कोई ना ऐसी तेरी जान ओय मिट्टी दया बंधया।
- 50:33तू कादा करे मान होय फलदा भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान होय।
- 50:49मिट्टी देया बंदेया मिट्टी देया बंदेया तू गला करे मान होय पालता
- 50:59भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान है। उड़ जान प्राण तेरे फिर क्यों
- 51:09नहीं बोलदा होने वाली कुंजिया तू फिर क्यों नहीं घोलदा के मैं हूँ,
- 51:17तब क्यों नहीं कहता किथे तेरी आंकड़ा वह अंकार कहाँ है तेरा
- 51:25किथे अभी मानोय? पर का भरोसा कोई न ऐसी तेरी जान
- 51:30होए बेटी दे व दे तू कह दी परिमान यही सर ये संत कहते हैं, जब ये
- 51:39निकल जाता है तो फिर तुम कहाँ काम कर सकते हो और आज नहीं कल?
- 51:49विज्ञान इस बात को खोज लेगा कि चेतना के आने से ही गतिविधियों
- 51:57शुरू होती हैं। ये बात रद्द है कि कुछ लोग।
- 52:04उनका निहित स्वार्थ कुछ और होता है।
- 52:10बस वो कहते हैं कि आप संस्था को मजबूत बनाओ, मजबूत खुद होना चाहते
- 52:21हैं। संस्था के नाम के ऊपर आपको मूर्ख
- 52:33बनाती हैं, बस इनकी मुकाबले ज्यादा है।
- 52:39तार्किक शक्ति ज्यादा है। और तार्किक की शक्ति ज्यादा होने
- 52:43का मतलब यह नहीं कि अनुभव ज्यादा है, अनुभव और तार्क यह दोनों
- 52:50बिल्कुल विरोधी छोरों पे है। ज्यादा तार्किक व्यक्ति अनुभवी
- 52:56हो, यह जरूरी है। अनुभवी व्यक्ति तर्क दे सकता है,
- 53:06लेकिन तार्किक व्यक्ति अनुभव में नहीं जा सकता।
- 53:11तार्किक व्यक्ति अनुभव में जाने से पहले।
- 53:14जिससे तड़का आता है बुद्धि उसको छोड़ना होगा बुद्धि को छोड़कर
- 53:19जाना होता है उस मुकाम पर जहाँ उसी चेतना के दर्शन होते हैं और
- 53:27फिर जब वो बाहर आता है चेतना को शंक शंक लिए, तो वह महँ उतार के
- 53:32खो जाता है। फिर उसके तर्क का जवाब कोई नहीं
- 53:35दे सकता, क्योंकि उसके तर्क के साथ चेतना की शक्ति होती है और
- 53:43तुमने प्रश्न इतना गंभीर किया है। पुत्र प्रश्न बको ठीक है और यह
- 53:49अंतिम प्रश्न है? अगर देखा जाए तो?
- 53:52अंत में जाके व्यक्ति यही बोलते हैं क्या लौ से हो, कच्चा से हो,
- 54:02कृष्ण हो, कबीर हो, नानक हो, मीरा हो, छवि यही बोलते हैं।
- 54:12लाओ से चौंगा से करता है वह कृत्य और तुम उस चेतना को जानते तक हो,
- 54:28इसलिए मैं कहता हूँ इन दार्शनिक किताबों को।
- 54:36इनको गंदे नवलजन में नहीं फेंकना है तो गंगा बहुत पवित्र है।
- 54:44मैं ऐसे ही नहीं बोलता हूँ। मैं सत्य बोलता हूँ, सत्य का
- 54:51दर्शन करके बोलता हूँ के बहादों इनको गंगा में ये तुम्हारी खोपड़ी
- 54:58में सूचनाएं भर देंगी, लेकिन तुम नहीं मानते हो तुम इनको देखते हो?
- 55:06बड़े प्रश्न रोज़ आते हैं, प्रश्न तो तुम्हारे कभी खत्म नहीं होंगे,
- 55:09लेकिन काम के प्रश्न मैं ले लेता हूँ।
- 55:12प्रश्न तो मुझे बहुत आते हैं। पहले व्हाट्सएप पे आते थे, अब
- 55:18पत्रों में आते थे, लेकिन हर प्रश्न काम का हो ये जरूरी नहीं
- 55:24होता। इसलिए कृष्ण कहते हैं ये मेरी
- 55:27लीला है। राम कहते हैं ये मेरी लीला है,
- 55:36यहाँ बहुत सी घटनाएं घटेंगी। तुम रोओगे तुम हसोगे तुम बाप
- 55:42बेबोर हो जाओगे, तुम नाचोगे। तुम उदास भी हो जाओ बैराग भी आएगा
- 55:51सब कुछ होगा लेकिन यह सत्यम में नहीं होगा।
- 55:57बड़े कमाल की बात है। कृष्ण कहते हैं, मेरी लीला है और
- 56:02राम ने भी कहा। यह कृष्ण की लीला है।
- 56:06यह सत्य नहीं, यह रामलीला यह सत्य नहीं है।
- 56:14इसको लीला की तरह लो। खैर 1 मिनट यह सूक्ष्म का प्रश्न
- 56:23थोड़ा सुन ले। हाँ ये कहते हैं कि फिर कर्म
- 56:38थ्योरी को मिलाओगे कैसे? अगर ये लीला है तो कर्म थ्योरी जो
- 56:49आपने इतना प्रवचन देती है उसके साथ।
- 56:53इस प्रवचन को बढ़ाओगे कैसे मिलाओगे कैसे लीजिए मिला देते
- 56:58हैं। तो आइए नानक मिला देंगे।
- 57:07इसको क्या कहते हैं नानक? नानक कहते हैं, वो तो तो वही है
- 57:13जो वो करता है, उसकी लीला है। कृष्ण भी यही कहते हैं, जवाब तो
- 57:22तुम्हें सभी शांत दे देते हैं, लेकिन तुमने पूछ लिया तो मैं दौरा
- 57:26देता हूँ। कृष्ण जवाब देते हैं,
- 57:34कर्मण्यावाधिकारस्ते माफलेचू कदाचन मेरी शरण में आजा, मैं अपने
- 57:42आप करवा लूँगा, तुझसे जो करवाना है मैंने इन्हें मार दिया, तू
- 57:48धनुष उठा ले। बस एक लीला खेल है कि तुने इन्हें
- 57:53मार दिया है तो लीला मेरे द्वारा ये मारे गए हैं और नाने किस चीज़
- 58:02की विवेचना ऐसे करते हैं, है तो लीला तुम कुछ नहीं कर सकती।
- 58:10तो फिर क्या करो, अपने जीवन के पतवार उस विराट के हाथों में
- 58:17अज्ञात के हाथों में देख लो यद्यपि तुमने वो देखा नहीं है
- 58:23अपने जीवन की नैया की पतवार उस अज्ञात के हाथों में सौंप दो।
- 58:31जो उसने कराना है करवा तो वो फिर भी लेगा।
- 58:35होगा तो वही, लेकिन उसके हाथ में सौंप दो काहे सर धरती लेनी है?
- 58:47जब तुम कर ही कुछ नहीं सकते, बड़ा गुस्सा होंगे आचार्य ये सर लोग
- 58:55इनके खूब बड़ी बड़ी काम करती हैं। बड़े नाराज होंगे, तर्क पे तर्क
- 59:03बिठाए जाएंगे। ऐसा कैसे हो सकता है?
- 59:08फिर ये बनाया क्यों सा बनाया उसकी मर्ज़ी से बना सकता था बना लिया
- 59:12तुम बना लो भाई तुम्हें कौन रोकता है उससे लोग पूछ लेते हैं, भगवान
- 59:20ने सृष्टि बनाई क्यों? तो उसने बना ली वह बना सकता था,
- 59:24तुम बना लो अगर बना सकते हो तो। नहीं ये कोई जवाब ना हुआ फिर और
- 59:30जवाब तुम दे दो भाई वह बना सकता था उसने बना ली वह खिला सकता है,
- 59:39वो खिला रहा है तुम ना बना सकते हो ना खेल खिला सकते हो।
- 59:46तुम्हारे हाथ में कुछ भी नहीं है तो नान कहते हैं कि अपनी नैया की
- 59:53बागडोर जो तो दबवावे साई पलिका तो सदा सलामत निरंकार।
- 1:00:06तू जो करता है वो ठीक करता है, इसलिए है मानव कुछ भी होता है
- 1:00:17उसको स्वीकृत करने के लिए सजह तैयार है।
- 1:00:22जो भी कुछ होगा वो शुभ होगा। जो हुआ वो शुभ हुआ।
- 1:00:27जो हो रहा है वो शुभ हो रहा है। किसी भी संत के जीवन से अगर तुम
- 1:00:39तत्व भी निकालोगे रस निकालोगे तो यही मिलेगा।
- 1:00:45तुम अगर गहराई से उसके संत के जीवन को देखोगे तो उसकी बेक में
- 1:00:50यही पाओगे कि जो हुआ जो हो रहा है, उसने सह से स्वीकार किया।
- 1:01:00मेरा ही शिष्य मेरे चाली थप्पड़ मार जाता है चौमालिश।
- 1:01:05कुछ नहीं होता क्यों? क्योंकि गुरु होने का विमान ही
- 1:01:12नहीं है। पता है माटी माटी को रौंद रही है,
- 1:01:18माटी माटी को ताड़ रही है। ये चपत गुरु और शिष्य को नहीं लग
- 1:01:26रही है, ये चपत माटी पे माटी डाल रही है अगर व्यक्ति ये जान लेता
- 1:01:37है बुधनी के जाना। तो लोग थूक जाते थे, गालियां
- 1:01:42निकालते थे, तो बुध क्या कहें? मैं कपल वस्तु को छोड़ के आया।
- 1:01:49तुम तो ये ही कह देती, मैं तो आईएस की कुर्सी को छोड़ के आया,
- 1:01:53तुम कैसे गली निकल दो अक्सर जैन मुनि बहुत से इसलिए बन जाते हैं।
- 1:02:01के महावीर का मुकाबला कर सकें। उनके भीतर तो जीने की कामना हटी
- 1:02:09तो सब अपने आप ही छूट जाता है तो मान सम्मान के लिए छोड़ते हो।
- 1:02:17इन दोनों में बड़ा बुनियादी फर्क है।
- 1:02:22तुम प्रत्येक अवस्था को सहज स्वीकृति से हृदय से स्वीकार कर
- 1:02:28लो, यह है मूल मंत्र मूल मंत्र है वो करतार है एकुंकार सतनाम
- 1:02:36कर्तापुरख। ना डरता है ना डराता है अकाल मूरत
- 1:02:46निरपू निरवैर किसी के साथ उसका बैर नहीं अब तुम कहते
- 1:02:50पाकिस्तानियों को नहीं मार देते मेरे बच्चे।
- 1:02:58मेरे ही तो हैं और अगर बहुत गहराई से देखोगे तो मैं ही तो हूँ, अपने
- 1:03:06ही शरीर को पाटना शुरू कर दूँ। ये धर्म सिखाते होंगे तुम्हें
- 1:03:15शांत नहीं सीखाता ऐसी बातें। संत नहीं सीखाता आपस में वैर रखना
- 1:03:27संत सीखाता है जो है वो सभी एक है, अखंड है उसकी धारा कहीं खंडित
- 1:03:35नहीं होती। और वो तुम हो ये कह लो या वो मैं
- 1:03:45हूँ ये कह लो, कोई फर्क नहीं पड़ता एक ही बात को कहने के दो
- 1:03:52ढंग है। अगर तुम सब कुछ कर सकते हो तो
- 1:03:59वहाँ जा के तुम उड़ा क्यों नहीं देते हो चीन को जब पाकिस्तानियों
- 1:04:04को नहीं वहाँ भेद खो कर जाना होता है तुम्हारी ये।
- 1:04:14ईर्ष्या और द्वेष और नफरत की आग लेके वहाँ तुम जा ही नहीं सकते
- 1:04:21तुम्हारी आग, नफरत, बुद्धि, जूतियों जहाँ पर जूतियां निकाली
- 1:04:28जाती है वहाँ पर इसको रखना पड़ता है पहले।
- 1:04:33इस बुद्धि को जूतियों के साथ वहाँ रख दो फिर आओ फिर तमाशा देखो तुम
- 1:04:43इस आग को लिए लिए वहाँ जाना चाहते हो राम मंदिर में तुम इस आग को
- 1:04:48लेकर जा सकते हो। लेकिन वो मंदिर तुम्हारा बनाया
- 1:04:52हुआ है। ईश्वर के मंदिर में मन के अंदर
- 1:04:57में जो मंदिर है उसके द्वारा बनाया हुआ है।
- 1:05:00उसमें तुम ये नहीं सब कुछ कबाड़ खाना लेके जा सकते हो।
- 1:05:08उसमें तो शुद्ध शुद्ध जाता है, उसमें तो सत्य सत्य जाता है।
- 1:05:14उसमें तुम्हारा कबाड़ खाना ये तुम्हारे पॉलिटिशंस नहीं, किसी
- 1:05:20निहित स्वार्थ के लिए बनाया होगा, लेकिन निहित स्वार्थ भी उनके कहाँ
- 1:05:25हल होते हैं? यही तो गलती है उनकी।
- 1:05:29वो कहते हैं, हमने बड़ा मज़ा लिया, किसी ने मज़ा लिया मज़ा तो
- 1:05:32इंद्री होने लिया, तुमने कहाँ लिया?
- 1:05:35तुम तो सक्षी थे बस तुम्हें इसी बात का नहीं पता तुम अज्ञानी हुए
- 1:05:41हुए सभी चीजों को देखते रहते हो, शरीर भोगता है तुम देखते हो?
- 1:05:47और तुम कहते हो मैंने वो स्वादिष्ट स्वादिष्ट वस्तुओं का
- 1:05:53अस्वादन करती है जीवा टेस्ट वर्स और तुम कहते हो, मैंने बड़ी
- 1:06:00स्वादिष्ट चीज़ खाई कहाँ खाई भाई? स्वादिष्ट चीज़ तो जीवन खाई।
- 1:06:08और पेट में गया तुम ना पेट हो, ना जीब हो स्वादिष्ट सुंदर गीत संगीत
- 1:06:20कानूने सुना। तुमने देखा कहाँ सुन रहे हैं?
- 1:06:29सुंदर दृश्य तुम्हारी आँखों ने देखा और तुमने देखा कि आँखें देख
- 1:06:34रही हैं सुंदर दृश्यों को सुंदर दृश्य आँखों ने देखा।
- 1:06:43तो भोगता कौन है? भोगता है?
- 1:06:48इन्स्ट्रुमेंट तुम नहीं भोगते हो, तुम भोगते हो इन्स्ट्रुमेंट को
- 1:06:56देखते हो, ये अंतिम शब्दों को नोट कर देगा।
- 1:07:00अंतिम शब्दों को कसौटी पर कृष्णा। के यह बात ठीक है या गलत है अभी
- 1:07:06तो तुम्हें एक का पता है कि तुम शरीर हो, तुम मन हो सब तुम तुम ही
- 1:07:11भोगते हो तुम ही भुगतते हो तुम ही करते हो यह तुम्हें पता है
- 1:07:17तुम्हें अभी दो का नहीं पता लगा मैंने तुम्हें एक।
- 1:07:21प्रवचन में बताया था पहले एक से दो होना पड़ेगा शरीर अलग और तुम
- 1:07:26अलग शरीर जो भोगता है और तुम जो भोगने वाले को देखता है, पहले एक
- 1:07:35से दो और फिर दो से फिर एक होना पड़ेगा।
- 1:07:40उस तत्व में जाओगे जहाँ तुम वास्तव में हो, जो प्रेम का
- 1:07:46स्वरूप है, फिर तुम फैलोगे और फैलोगे तो अखंड अस्तित्व में समा
- 1:07:53जाओगे, फिर तुम फिर एक हो जाओगे, तुम भौंकते नहीं हो।
- 1:08:00घोंगती हैं इन्द्रियां तुम सिर्फ इन इन्द्रियों को भौंकते हुए देखो
- 1:08:09यही तुम्हारा इल्यूश़न खत्म होना चाहिए सारी स्पिरिचुअलिज्म सारा
- 1:08:16अध्यात्म। इसी कंक्लूषन के ऊपर खड़ा है।
- 1:08:20अगर तुमने ये देखा नहीं, सिर्फ जीवा की शब्दों से तुमने
- 1:08:29व्याख्यायित किया वो गीता हो, फिर वो उपनिश्चित हो या अष्टावक्र
- 1:08:36गीता हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:08:42फिर तुमने जीवों की लपा लप की यह सत्य नहीं है।
- 1:08:47तुमने कभी होगा नहीं, वो कहानी बड़ी देर हो जाएगी।
- 1:08:52मैंने सुनाई बहुत बार। कृष्ण कहता मैं बाल ब्रह्मचारी
- 1:08:57हूँ और माँ यमुना से कह दो कि कृष्ण हमारे प्रिय अगर बाल
- 1:09:04ब्रह्मचारी हैं तो रस्ता दे देना और यमुना रस्ता दे देते हैं।
- 1:09:11थाल सजा के ले जाती हैं सखियां। और खिलाती हैं।
- 1:09:17दुर्वासा को दरवाशा सारा चट कर जाता है।
- 1:09:22जब न उस दिन उफान पर थी, वह गोपियां कहने लगीं।
- 1:09:28गुरुदेव अब उन्हें वापस भी जाना है।
- 1:09:31जब हम आए थे तब तो हमें सूत्र बता दिया था।
- 1:09:35अब हम जाए कैसे? आप कोई सूत्र बताएं?
- 1:09:39उफान पे है पुल डूब गया है, पुल दिखाई नहीं देगा कहाँ है तुम
- 1:09:45दरबार से कहने लगे पुत्रे तुम ऐसे करो तुम माँ यमुना से बोल देना।
- 1:09:53अगर दुर्वासा ने कभी कुछ नहीं खाया, कभी कुछ नहीं खाया तो माँ
- 1:10:03रास्ता दे दे फिर वो हंसने लगी। यह क्या अजीब है ना, यही मैं कहता
- 1:10:11हूँ। ये अजीब दुनिया में तुम जी रहे हो
- 1:10:17जहाँ सत्य का पता किसी एक को लगता है और वही कबीर हो जाता है, वही
- 1:10:22नानक हो जाता है, वही कृष्ण हो जाता है और कई सखियां कई गोपियां।
- 1:10:30जाके प्रार्थना की हे माँ अगर हमारे प्रिय कृष्ण के गुरुदेव
- 1:10:38दरवास ने कभी कुछ नहीं खाया अभी खिला के आ रही हैं तो माँ रस्ता
- 1:10:45दे दे माँ रस्ता दे दे। सत्य कह प्रमाणिक हो गया है, तो
- 1:10:57कहानी लेकिन तुम्हें समझाने के लिए कि ऐसा है सत्य कहानियों से
- 1:11:06समझ में तुम्हारी आ जाता है। लेकिन तुम थीम तक फिर भी नहीं
- 1:11:10पहुँच सकते। जिसे तुम ऐश कहते हो वो ऐश तुम
- 1:11:15नहीं लेते हाँ, ऐश तुम देखते जरूर हो, इन्द्रियों को ऐश लेते हुए
- 1:11:21देखते हो, इन्द्रियों को दुखी होते हुए भी देखते हो?
- 1:11:25इंद्रियों को कष्ट होता है, तकलीफ होता है, दर्द होता है।
- 1:11:28तुम देखते हो यू अरे ओनली विटनेस विटनेसिंग ओब्सर्वर यू अरे
- 1:11:36ओब्सर्वर तुम सिर्फ ऑब्ज़रव करते हो, बड़ी पीड़ा है शरीर को कैंसर
- 1:11:42राइट्स है। तुम भोग नहीं रहे होते भोग तुम
- 1:11:47भोग तो रही होती है इत्रियां तुम भोगते हुए इत्रियों को देख रहे
- 1:11:53होते हो बस जीस दिन तुम स्थल पर पहुँच गए उस दिन तुमने सत्य को पा
- 1:11:57लिया और तुम श्रद्धा के लिए उस आनंद में उतर जाओगे।
- 1:12:03जीस रस को उपनिषद कहते हैं रसो वैसा श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:12:17मुरारी। हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:12:33गोविंद हरे मुरारी हे नाथ? नारायण वासुदेव पितुमात, स्वामी
- 1:12:52सखा हमार हेनाथ नारायण। यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद
- 1:13:12हरिमरारी, श्री कृष्ण गोविंद। अरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव
- 1:13:32पितु हाथ स्वामी सखा हमारे। बिद्युमात स्वामी सखा हमार
- 1:13:47हेनाथनाराम यन वासुदेववा श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:13:58हिनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण, गोविन्द हरे मुरारी हिनाथ
- 1:14:09नारायण वासुदेव। धन्यवाद।