Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Oct 25 - “शब्द और सुरति” शब्द से सुरति तक पहुंचना है? या सुरति से शब्द तक? सनातन का सही अर्थ? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:03कौशल कुमार दीपक बाबा जी कौन सा धर्म सर्वश्रेष्ठ हिंदू मुस्लिम,
- 0:23सिख, देसाई, यहूदी पास? क्योंकि भुवन कृष्ण के गीता में
- 0:37तीसरा अध्याय का 35 सुमं श्लोक आपने व्याख्या किया सुधर्मे
- 0:46निर्धर्म श्रेय पर धर्मः। ब्याह आज मानवता ने सभी धार्मिक
- 1:06शास्त्रों के अर्थ बदल दिए। और यह बड़ी भयंकर स्थिति है।
- 1:16वेकट विकराल से शब्दों के अर्थ अपनी बुद्धि के हिसाब से प्रकट
- 1:25नहीं करने चाहिए। शब्दों के अर्थ।
- 1:30अपने अनुभव के आधार पे भीतर जाके उस स्तर पे फिर प्रकट करनी चाहिए।
- 1:39आज हमारा दुर्भाग्य भी है कि हमने संतों के कह हुए वचन और किसी भी
- 1:47धर्म से संबंधित हो। उनकी व्याख्या करनी शुरू करते
- 1:55हैं, जबकि संतों के शब्द रहस्य होते हैं।
- 2:04हमने वैज्ञानिक के ढंग से उसकी व्याख्या करनी शुरू कर दी।
- 2:07यहीं पे मार्क है संतों के शब्दों की व्याख्या अनुभव से होनी चाहिए
- 2:28जीस सतल की वह बात कर रहे हैं। उस सतल पे उतरो और वहाँ जाकर
- 2:41अनुभव करो, फिर बोलो आपने क्या देखा?
- 2:48आपने क्या पढ़ा गलत आपने क्या माना गलत?
- 2:53आपने क्या सुना गलत? आपने क्या अनुभव किया?
- 2:57यह सही है। तुमने पूछा पुत्र और सात्विक
- 3:06प्रश्न और पूछा? एक सनातनी ने जूता फेंक दिया सी
- 3:17जाए को अलफास्ट सनातन का अपमान नहीं।
- 3:31सनातन किसी धर्म की बफौती नहीं है।
- 3:36इन शब्दों को ध्यान से सुन लें सनातन किसी एक धर्म की बफौती नहीं
- 3:45है, सनातन उतना ही हिंदू का है। उतना ही सिख का, पारसी का, यहौती
- 3:57का, मुसलमान का। किसी एक धर्म की क्योंकि यह तो
- 4:08धर्म है नहीं ये तो पाठ्य। हैं।
- 4:12और सनातन कोई पार्टी नहीं है। सनातन वो तल है जहाँ तुमने उतरना
- 4:20है लेकिन तुमने सनातन को भी नहीं बख्शा।
- 4:30तुमने सनातन के भी अर्थ बुद्धि के तल्प कर ली।
- 4:33है। सनातन का अर्थ शाश्वत ए मार्कटर
- 4:40सत्य जो कभी मर्तन है। लेकिन सनातन को कब्जे में ले
- 4:50लिया। हिंदू धर्म ने बबौती बना लिया,
- 4:54गलत है ऐसा ही तुमने सभी संत पुरुषों के वाक्यों के साथ किया।
- 5:05सभी धर्म जहाँ जाना सिखाते हैं आपको उनकी मंजिल है, सनातन सनातन
- 5:14राह नहीं। है, सनातन मंजिल है।
- 5:20वहाँ आपने पहुंचना है और वह किसी धर्म की बपौती नहीं।
- 5:30अच्छा होता अगर यह कहत्तर साल का वकील।
- 5:38बजाय जूता फेंकने के समझ लेता कि सनातन है।
- 5:41क्या तुमने कृष्ण को अपनी भभूति समझ
- 5:55लिया? तुमने राम को अपनी भभूति समझ
- 6:02लिया? कभी संत किसी की पति होती है, कभी
- 6:09संत, किसी की जायदाज़ होती है, सारे तीर्थंकर ज सारे।
- 6:24वो पहुंचे हुए लोग उस तरह पे सभी किसी एक धर्म की पोती है क्या
- 6:35मोहम्मद किसी धर्म विशेष के क्या ईसा, किसी धर्म विशेष के क्या?
- 6:4410। किसी धर्म विशेष के क्या मूसा
- 6:48किसी धर्म विशेष के नहीं जैसे वैज्ञानिक किसी धर्म विशेष का
- 7:00होता है, किसी देश विशेष का होता है।
- 7:07किसी देश विशेष में जन्मा हो सकता है तुम अमेरिका में जन्मे के
- 7:16हिंदुस्तान में जन्मे के यूनान में जन्मे, ये तो हो सकता है,
- 7:23लेकिन बबूति। किसी धर्म की हो, किसी क्षेत्र की
- 7:27हो या गलत विज्ञान की, जो खोजता है उसकी खोज सभी मानव जाति के हित
- 7:37के लिए होती है। हित या रहित।
- 7:44संत जो खोजता। है वह मानव जाति के कल्याणार्थ
- 7:50होता है और तुम संतो को अपनी गिरफ्त में कैद कर लेते हो।
- 8:02ये तो हमारा है जबकि संत तो आजाद है।
- 8:09वह संत क्या हुआ जो मुक्त न हुआ? जो अभी तक तुम्हारी धरोहर बना
- 8:15रहा, वह संत भी क्या हुआ, वह तो गुलाम।
- 8:20हुआ। वह वैज्ञानिक क्या हुआ जो किसी
- 8:25देश विशेष का हो गया? वह तो गुलाम ही हुआ नहीं, किसी
- 8:34देश विशेष में पैदा हो सकता है। कृष्ण इस धारा में पैदा हुआ है।
- 8:42तो हिंदुस्तान के नहीं हो गए। बुद्ध इस धरा पे पैदा हो गए तो
- 8:49हिंदुस्तान के नहीं हो गए। देखिए जितना बौद्ध धर्म आज
- 8:53हिंदुस्तान में है, जहाँ हम पैदा हुए उससे कहीं ज्यादा बाहर के
- 8:58मुल्कों में। बेहतर होता यह वकील महोदय, बजाए
- 9:14सनातन की परिभाषा दें। किसका अपमान हो रहा है यह देख
- 9:22लेते। ज्यादा बढ़िया था।
- 9:27आइए हम इन शब्द की गहराई में चलते हैं सनातन है क्या जिसका अपमान
- 9:38हुआ? कृष्ण कहते हैं सनातन वो जिसका
- 9:47अपमान हो ही नहीं सकता। एट एनी कॉस्ट किसी कीमत पर सनातन
- 9:57तो वो तत्व है। नैनम छगन तिशास्त्र नहीं नं।
- 10:04बहुत ही पांव का नय चैनम के लिए धन त्याप हो न सुश्यति मरता नहीं।
- 10:19जलता नहीं कटता नहीं, सूखता नहीं भेगता नहीं तो अपमानित कैसे हो
- 10:30जाएगा मुझे बताओ। फकीर माँ होता है तुमने 71 साल
- 10:44बिता दिए तुम अभी इन्हीं गुलामियों में उलझब हो गया बिना
- 10:56अर्थ समझे किसी बात का अर्थ का अनर्थ कर देना।
- 11:01शोभा देता है। ऐसे वृद्ध व्यक्ति सनातन का अर्थ
- 11:11है जो अपमानित हो ना सके। ये शब्द कहने से पहले सनातन का
- 11:23अपमान नहीं सहेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को जान लेना
- 11:27चाहिए कि सनातन सभी धर्मों का समान है।
- 11:33क्या दूसरे धर्मों में आत्म नहीं होती क्या?
- 11:38क्या ईसाई के भीतर वो तत्व नहीं होता, जो गलता नहीं जलता, नहीं,
- 11:42मरता नहीं कटता नहीं, पीटता नहीं। सूखता नहीं क्या वो तत्व नहीं
- 11:49होता है? सभी में होता है हिंदू, सिख,
- 11:56ईसाई, यहूदी, मुस्लिम, पारसी सभी में वो तत्व।
- 12:08पर कृष्ण अगर समझा गए तो हिंदू धर्म ने अगर उसे गिरफ्त में ले
- 12:14लिया, यह कोई भौगोलिक क्षेत्र थोड़ी है कि तुम जीस पर कब्जा कर
- 12:20लो, कोई तुम्हारा हो जाएगा नहीं यह तो संतत्व की।
- 12:25खोजी हुई चीजें जैसे साइंटिस्ट, वैज्ञानिक कोई खोज कर लेता है।
- 12:32आइंस्टीन ने खोज की ए इस इक्वल टु एम सी स्केयर तो क्या यह एक
- 12:38धर्मपत्र करे क्या वैज्ञानिक? और संत कभी किसी धर्म विशेष के
- 12:49नहीं होते, कभी किसी सम्प्रदाय विशेष के नहीं होते, कभी किसी देश
- 12:55विशेष के नहीं होते अन्यथा गुलाम हो जाएंगे।
- 13:06सनातन का अपमान नहीं सहेंगे, इन्होंने सनातन का अपमान कर दिया।
- 13:12यह कहक यानी सनातन का अपमान हो सकता है।
- 13:21इन्होंने एक दुर्भावना क्रिएट की। अपमान नहीं सहेंगे का?
- 13:29अर्थ ये है कि कृष्ण कट गए, कृष्ण जल गए, कृष्ण भीग गए, कृष्ण उड़
- 13:39गए, कृष्ण सूख गए, कृष्ण कट गए। मर गए वो सनातन न कटता, न मरता, न
- 13:51जलता, न गलता न सूखता। ऐसे उल्लुओं ने सनातन पर कब्जा कर
- 14:06दिया। मैं कहूंगा किसी भी चीज़ का
- 14:20वक्तव्य व्याख्या करने से पहले मैं रोज़ कहता हूँ उसके अनुभव में
- 14:27उतरो, तुम आचार्य मत बन जाना। अन्यथा करोड़ों, अरबों, अरबों की
- 14:38जिंदगी बेकार कर दोगे। तुम बिना जानी उस तथ्यों को
- 14:49प्रचारित मत करना। वास्तव में प्रचार कर भी कहा है।
- 14:56अपना ही तो प्रचार करे। आज महाराज जी की तबियत खराब है।
- 15:05ज़रा सोचो महाराज जीके गिवित विद खराब हो सकती है आज महाराज जी मर
- 15:12गए ज़रा सोचो महाराज जी कभी मर सकते है?
- 15:18आज महाराज जीके गुर्दे का डायलीसिस हो रहा है।
- 15:22ज़रा सोचो क्या महाराज जीके गुर्दों का डायलीसिस?
- 15:26होता है। प्रचार हेतु सारा बेरियाँ लगा हुआ
- 15:35है। यू कैन कन्वर्ट थे माइंड बट नॉट
- 15:49थे एंटायर एलिमेंट तुम उस आंतरिक तत्व को बदल सकते हैं।
- 16:01मस्तिष्क को भ्रमित जरूर कर सकते हो।
- 16:03वो तुम कर रहे हो, पर मैं रोज़ कहता हूँ कि आपको शर्म आनी चाहिए,
- 16:14ऐसा लक्षण कोई आके करेगा, हमने तो सोचा भी नहीं था।
- 16:25सारा तंत्र होगा ही भाई, जब किसी हाथ को रोजगार ना मिले तो झंडा
- 16:36डंडा उठाएगा और कुछ बाकी भी तो नहीं रह जाता।
- 16:47सुधर्म निधर्म से पर धर्मं भयावह सारी दुनिया का मानों का जमा उसका
- 17:10लक्ष्य है। वैसे तो सारी प्रकृति के सभी
- 17:16जीवों का एक ही लक्ष्य है। वो जड़ हूँ या चेत, लेकिन यह
- 17:22क्रमिक प्रोग्रेस है। और यह जड़ता से शुरू होगी और
- 17:36चेतना की पराकाष्ठा को छू ले के ऐसे ही झूठ फैलाये जाते हैं।
- 17:50ऐसे ही शुरुआत होती है। सनातन का अपमान नहीं सुनेंगे अब
- 18:00इतना बड़ा वकील है सुप्रीम कोर्ट उसने ये शब्द कहती सारी दुनिया
- 18:07सुनेंगे और जिनमें बुद्धि नहीं है।
- 18:14वो झंडा टिंडा उठा लेंगे। सनातन का मन नहीं से लेकिन ठहर
- 18:25मैं तुम्हें कहता हूँ उस विधाता ने तुम्हें सब कुछ दिया है,
- 18:31बुद्धि में दिया है। और कृष्ण को मानने वाले हैं।
- 18:44ये सोचो तो कहाँ लिखा है? 700 श्लोकों में कहीं भी कृष्ण ने
- 18:51लिखा के सनातन का अपमान हो सकता है।
- 18:59इसने ये शब्द कह के एक अलकीर आपके मन में डाल दी के सनातन का अपमान।
- 19:05हो सकता है तो बेरोजगार लोग झंडा टिंडा उठा लेगा।
- 19:15नारेबाजी शुरू की। और कोई काम तो है नहीं, यही मैं
- 19:21कहा करता हूँ। हमारे पंजाबी में कहावत है शिक्षा
- 19:28बेचारी तपवकारी अगर तुम शिक्षित नहीं हो।
- 19:35तो तुम परोपकार नहीं कर सकते? बड़ा सुंदर शब्द है, पर उपकार तुम
- 19:42तभी कर सकते हो जब तुम शिक्षित हो, अशिक्षित व्यक्ति।
- 19:50कभी पर्व उपकार नहीं कर सकता, वह स्वय उपकार भी नहीं कर सकता।
- 19:55पर उपकार तो क्या खाप करेगा? स्वयधर्मी निधनम श्रेया और
- 20:07तुम्हारा धर्म क्या है? तुम सभी पटक से बता दोगे हम हिंदू
- 20:19हैं, मुसलमान हैं, सिख हैं, साई हैं, ज़रा भी दे रहे हैं।
- 20:24रटे रटा। ये तोते हो नहीं लेकिन आप कृष्ण
- 20:30की गीता को पढ़ें। कृष्ण कहता तुम्हारा धर्म उसमें
- 20:39मर जाना श्रेष्कर है दूसरे के धर्म की बजाय पर धर्मं ब्याह बड़ा
- 20:46धयानक है दूसरे के धर्म में मर जाना अब आइए।
- 20:51इसका गहरा अर्थ भी साथ लेते चलते हैं और सनातन की परिभाषा भी संघ
- 20:59संग लेके चलते हैं। तुम्हारा स्वयधर्म क्या है?
- 21:10उसी में मरजाना श्रिष्क्र है। स्वधर्म है मौज मस्ती सुखी हो, ना
- 21:21आनंदित हो ना क्या तुम हो और अगर सुखी हो तो सुखी व्यक्ति की ये
- 21:30निशानी नहीं होती। सुखी व्यक्ति कभी जूता नहीं
- 21:35उछलता, सुखी व्यक्ति चपत नहीं मारता किसी को?
- 21:46सुखी व्यक्ति किसी पर शासन नहीं करना चाहता।
- 21:55सुखी व्यक्ति स्वयं में अकेला ही सुखी है, पर्याप्त है उसको दूसरे
- 22:06की आवश्यकता। कृष्ण कहते हैं, सुधर्म में निधनम
- 22:17श्रेय पर बच्चन है गीता, लेकिन क्या करें जब अशिक्षित लोगों ने।
- 22:32धर्म के विषय में अशिक्षित लोगों ने आचार्यों ने शंकराचार्यों ने
- 22:42इसकी व्याख्या कर दी। मूड तो तुम्हारे आदि शंकरा जा रही
- 22:50थी। मैं कितनी बार कह चुका हूँ?
- 22:54भला उस तल को छूने के बाद कभी कोई शास्त्र अर्थ करेगा जिसने जान
- 23:02लिया कि वह अनंत, वह अनाथ, वह विराट वह विशाल शास्त्र में आता
- 23:13नहीं? शब्दों में समाता नहीं।
- 23:20क्या वह शब्दों में शास्त्रार्थ करेगा?
- 23:24कितनी मूर्ता करेगा मुझको कोई हराए झंडा झंडा उठायेगा।
- 23:33यही शक होता है शंकराचार्य की वैधवत्ता पर और शंकराचार्य के
- 23:41अनुभव पर। सुधर्म निधनम श्री तुम्हारा अधर्म
- 23:57क्या है? अब ढंग से सुन लो।
- 24:00हिंदू हो, सिख हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, पारसी हो, जगिद हो या
- 24:05किसी भी धर्म का हो या नास्तिक हो।
- 24:08मेरी बात को नास्तिक भी सुनें, क्योंकि नास्तिकता भी एक धर्म है,
- 24:14धर्म है एक मान्यता। कल्पना लोक में खो जाना धर्म कोई
- 24:25हिंदू की कल्पना में खो गया कोई मुसलमान, कोई एशियाक, कोई यहूदी,
- 24:32कोई सिख सभी अपनी अपनी कल्पनाओं में खोये हुए हैं।
- 24:38जबकि धर्म तनातन खोना नहीं है। अपने अपने धर्म में खोना नहीं है,
- 24:50बल्कि सभी धर्मों को विराटतम रूप में जान लेना।
- 24:56है। सभी धर्म यहाँ पहुंचते हैं बहुत
- 24:59तत्व एक। है।
- 25:03मैं पहले भी बहुत दफे बोल चुका हूँ।
- 25:10सभी धर्मों के अधिष्ठाता उस एक की तरफ इशारा करते हैं।
- 25:22एको ब्रह्मा द्वितीय नास्त्र गॉट इट।
- 25:48ल इलाहा लालाह ईश्वर के सिवा कोई दूसरा पूज्य नहीं।
- 26:01सभी धर्मों ने उसे ईश्वर की तरफ़ इंगित किया।
- 26:06वह एक। और जो भी व्यक्ति जो भी ऋषि जो भी
- 26:12मुनि उस 70 पर पहुंचा, उसने उस एक की ओर इशारा किया।
- 26:19महावीर ने कहा, कैवल्य केवल एक है।
- 26:25बुद्ध ने कहा सब छूट जाता है निर्वाण निवृत्ति तुम्हारी सभी
- 26:31भोगने की इच्छाएं, वासनाएं सभी समाप्त हुईं।
- 26:36तुम अकेले रह गईं। नो दया सेल्फ सेल्फ ऑर मेम्बरिंग
- 26:42एक की तरफ़ इशारा है। तुम क्या सीखा रहे हो और जिन के
- 27:00पीछे तुम कदार बांधे हो, मुझे लोग कह देते हैं बाबा आप इंटरव्यू
- 27:11क्यों नहीं देते हैं? बड़े बड़े चैनल इंटरव्यू के लिए
- 27:15मेरे पास आए। मैंने कहा मैं कोई नमाज़ भी चीज़
- 27:21थोड़ी मेरे से इंटरव्यू किस चीज़ की जाती है और कौन करेगा
- 27:31इंटरव्यू? इंटरव्यू हमेशा वही व्यक्ति लेता।
- 27:36है। जो उससे ज्यादा समझदार हो।
- 27:43मेरा शिष्य मेरे से इंटरव्यू का खाक लेगा और मेरे विपरीत जो होगा
- 27:51वह भी का खाक बोलेंगे, जो मुझे समझे ही नहीं।
- 27:57इंटरव्यू लेने के योग्य दोनों ही नहीं है।
- 28:01संत की इंटरव्यू कभी की ही नहीं जा सकती और संत वह जो चुप्पी के
- 28:10उस मुकाम पर पहुँच। गए हैं।
- 28:13यह शोभन है, मन है। पर मौन की वो धारा जहाँ तुम बोलना
- 28:22भी चाहो तो असमर्थ पाती हो अपने आपको जहाँ बोलना भी एक मुसीबत
- 28:32नज़र आती है। और तुम्हारा मन तो सदा।
- 28:36बोलता ही रहता है। तुम बीमार हो, तुम्हें उपचार की
- 28:43आवश्यकता है, फिर तुम चाहे हिंदू धर्म से हो, इस्लाम से हो,
- 28:50यहूदियत से हो ईसाइया से हो। या शिक्षक से हो, किसी भी धर्म से
- 28:58हो, तुम तुम बीमार हो। अगर तुम्हारा मन बोलता है और धर्म
- 29:05का अर्थ ही यह। है मन का चुप हो जाना उस 70 पर
- 29:10चले जाना। जहाँ वो आ रहे हैं सांसो ज़रा
- 29:20अहिस्ता चलो दिल की धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ती है।
- 29:36शोर मचाने वाले लोगों का, मीडिया के लोगों, दिन भर रात अपने शोर से
- 29:49आसमान को गुंजा देने वाले लोगों। तुमने मौन की एक झलक देखी है कभी
- 30:00पर मौन की झलक कभी देखी है कभी जहाँ दिल की धड़कनें भी शोर बन
- 30:10जाती हैं तुम्हारा धर्म तो कुछ और ही।
- 30:18व्याख्यान करता है तुम्हारा धर्म तो शोर को ही बताता है भगवान
- 30:26तुम्हारा धर्म तो शोर को ही परमात्मा कहता है, स्वधर्म निधनम
- 30:33से हमारा धर्म क्या है? तुम्हारा धर्म है पिंट ऑफ साइलेंस
- 30:44दिल भी ना धड़ के फेफड़े, सांस भी ना लें इतनी साइलेंस?
- 30:57इतना। गहरा मौन पर।
- 30:59मौन जहाँ छा जाए वहाँ वो मिलता है और शुरुआत कहाँ से।
- 31:09होगी। पर मौन में जाना है तो मौन से
- 31:13शुरुआत होगी ना के नाम से तुमने नाम को उलट लिया।
- 31:22यह था मौन तुमने उल्टा पुल्टा करके बना लिया ना मौन को उल्टा
- 31:30दिया। मैं पहले ले आई और मैं बाद में ले
- 31:35आई, यह था मोन बना लिया तुमने नाम जहाँ पर मोन हो जाए वहीं उसके नाम
- 31:49का गुंजार होता है। यह शब्द और सुरती का मिलान क्या
- 31:54है, क्या है सुरती? इसे कबीर करते हैं।
- 32:05हृत कला रे भाई मतभारी। सूरत कलारी भयमत तुम्हारी मधुवफि
- 32:25गई शराब मदहोश। कुमारी आनंद चुप्पी, सहजता मान मत
- 32:41अभी गई बिन बोले। सब दो सुरती का जहाँ मिलान हो
- 32:54जाता है तुम्हारी सुरती बोलने से उखड़ेगी दिल की धड़कनों से भी
- 33:03इबादत में खलल पड़ते। और तुम तो शरत में बोलते रहते हो
- 33:13बात माल के हैं तुम्हारे मार्गदर्शक तुम्हारी सूरत जहाँ
- 33:20जाके मतवारी हो जाए सूरत कलारी भाई मतवारी मतवारी कहाँ?
- 33:29मेरे पास रोज़ मैसेज आ जाता है एक व्यक्ति का सुरेन्द्र ठक्कर मेरे
- 33:38बगल में गोदाम है, खल का गोदाम है, पशुओं का फील्ड होता है खल।
- 33:52सारे दिन भर रात ट्रक आते जाते रहते है।
- 34:00उसकी खलल से मेरा मन भंग होता है। आधे अधूरे मन की बात है।
- 34:10हे प्रभु मुझे निजात दिलाइए, मैं चुप हो जाता हूँ, मैं कोई जवाब
- 34:18नहीं देता और रो जाते हैं आज जवाब दे देता हूँ।
- 34:27जीस दिन तुम्हारी सुरती उस मधवा को पीलेगी उस दिन तुम भरे बाजार
- 34:38में भी खड़े रहो। पटाखे बजते रहे।
- 34:43तुम्हें पता नहीं चलेगा, बलेशा कहते हैं मस्जिद बोलो जीवडा डरिया
- 34:51जा ठकर दे डेरे पड़ जा जीतने वादे 1000 इश्क दी नमी।
- 35:04मस्जिद के सोनेपन से चारदीवारी से मेरा मन घबराया, तुम आजाद होना
- 35:10चाहते हो तुम पिंजरे के पंछी हो, तुम पिंजरे में गुलाम हो गए,
- 35:16क्योंकि पिंजरा सोने का है। सोने के पिंजरे से भी आदमी बांध
- 35:22जाता है, सोने की जेलों से भी बंध जाता।
- 35:25है। जस्टिन तुम्हारी सुरती ने भाई
- 35:40मतवारी वह मदवा पी लिया। जीसको मैं मौन करता हूँ अगर तुम
- 35:49मौन हो जाओगी पर बाहर कुछ भी होता है तुम्हे क्या फर्क पड़ेगा तुमने
- 36:05कभी? बच्चे की नींद देखी।
- 36:10आस पास शोर मचाते हो तो बच्चा सोयेगा ऐसा सोयेगा खुमारी में तुम
- 36:17बातें करते रहो तुम गाड़ी में कभी सोए हो?
- 36:24गाड़ी कितना शोर करती है चलते? हो?
- 36:28लेकिन सो जाते हो तो तू तुम्हारी नींद उखड़ जाती है।
- 36:37ऐसी ही तुम्हारी सरती ने जब वो कलारी पी ली मधवा पी लिया।
- 36:48यह एक सिम्बोलिक अब्रीविएशन था सिंबल था तुम जब अपने भीतर उतरोगे
- 37:00तो उतरना पड़ेगा मौन से। शब्दों से शब्द और सुरती का मिलान
- 37:10ऐसे होगा तुमने उलट ले लिया तुमने शब्द पहले बोलना शुरू कर दिया
- 37:15शब्द दाई का बाद। में सुरती लगेंगी।
- 37:22पहले। सुरती यानी मौन पहले होना पड़ेगा।
- 37:29तुमने पहले से ही खटकाहट करना शुरू कर दी, तुमने पहले से ही शोर
- 37:37मचाना शुरू कर दिया। जिंदाबाद मुर्दाबाद, इंकलाब
- 37:41जिंदाबाद। ये सभी शोर है ल इलाहा इलल्लाहा
- 37:48ये शोर। है।
- 37:51एक कोंकार। सतना।
- 37:53ये शोर है। तुमने इसे पकड़ लिया और ऐसे पकड़ा
- 37:58के इसको ही बोलते रहे तो यह मोन। तक जाने वाली सीढ़ी भी तुमने शोर
- 38:05से भरी कर दी। यह सीढ़ी थी जो तुम्हें उसे एक
- 38:11ओंकार तक पहुंचा सकती थी। यह चुप होना तुम्हें शब्द के पास
- 38:17ले जाएगा। शब्द क्या?
- 38:19है। पहले हम समझ लें कि सुरती क्या
- 38:23है, मौन है, सुरती बोलना है, चांदी खामोशी है, सोना बोलना है,
- 38:36चांदी खामोशी है, सोना चुप हो। जा।
- 38:41कर ईश्वर है कौन? अगर ईश्वर की पूजा करनी है तो
- 38:46बोलते रहो लेकिन कुछ ना मिलेगा सिवाय थकावट।
- 38:53एनर्जी लेस्सनेस मिलेंगे नाम जब से एनर्जी लेस्सनेस मिलेंगे,
- 38:59थकावट मिलेंगे करते रहो। चुप हो जा गर ईश्वर हे हो ना इफ़
- 39:11यू वॉन्ट टू बी ओंनिपोटेंट बी साईलैंड?
- 39:27बोला है चांदी दो अक्षर में समझा दी शब्द सुर्ति का मिलान।
- 39:36तुम शोर पहले मचाना शुरू कर देते हो, फिर वो शोर मचाने में जो
- 39:40शक्ति। खर्च होती है।
- 39:42वो तुम्हें एनर्जी लेस नेस कर देती है और तुम मूर्छित हो जाते
- 39:46हो। तुम कहते हो आह बड़ा आनंद है वह
- 39:50नींद का आनंद। था, मूर्छित हो गई तो व्यक्ति सो
- 39:54जाएगा। जैसे बच्चा सो जाता है, खेल कूद
- 39:58के थकहार जाता है सो जाता है माँ के यहाँ चल के।
- 40:09इस प्रसंग को ध्यान से समझना। है।
- 40:11ये बेसिक चीज़ है फंडामेंटल चीज़ है जहाँ आपको उलझाया गया।
- 40:15है। इन व्यापारियों ने इन कारोबारियों
- 40:19में। बोलना है चांदी बोलो, चांदी
- 40:35मिलेंगे, द्रव्य मिलेगा, शोहरत मिलेंगे गद्दियाँ मिलेंगे बिना
- 40:43बोले कभी गद्दी पे बैठे हो, बोलना तो पड़ेगा ना भाई।
- 40:472,00,00,000 रोजगार दूंगा, अच्छे दिन ला दूंगा, बोलना पड़ेगा ना
- 40:53बोलना है चांदी चांदी का तख्त ताज मिल जाएगा खामोशी है सोना अगर
- 41:03सबसे कीमती धातु चाहते हो तुम श्रृंगार के लिए।
- 41:10एक खामोशी है। मौन से शुरू करनी होगी यात्रा न
- 41:15किशोर से तुम्हारा प्रथम पड़ाव ही गलत है तो अंतिम पड़ाव तो निश्चित
- 41:23ही प्रथम पड़ाव तय किया करता है। ऐसे फिर सुन रहा हूँ, प्रथम पड़ाव
- 41:30ही अंतम मंजिल को तय किया करता। है।
- 41:35और तुम्हारा प्रथम पड़ाव ही गलत पड़ गया।
- 41:38प्रथम कदम ही तुमने फर्स्ट स्टेप इज़ रॉन्ग।
- 41:4520 मंजिल का। जो ऑर्गेनाइजर्स थे जो चलाने वाले
- 42:05थे, धर्मों को वह जानते थे, शोर तो हम सदा ही मचा रहे हैं, शोर तो
- 42:11हमारा मन दिन प्रतिदिन हर वक्त ठहरता ही नहीं, मेरे पास रो जाते
- 42:16हैं, लोग भी आ जाते हैं मैसेजस भी आ जाते।
- 42:21हैं। ये मन बड़ा तंग करता है।
- 42:24बाबा इसका कोई उपाय करो, तुम पहले से ही शोर से व्यथित हो और ऊपर
- 42:38से। ये गुरु तुम्हें शोर बड़ा शोर दे
- 42:44जाता है, कैसा करो, फिर बड़ा शोर ले जाओ, किसी की अंगुली में चोट
- 42:56हो ना? पर तुम कहो ऊँगली में चोट कर रहे
- 43:01हैं तो तुम उसकी जाड़ में दर्द कर दो जाड़ में जख्म कर दो वह ऊँगली
- 43:07का दर्द भूल जाएगा, बड़ा शोर दे दो।
- 43:13छोटे से शोर से मुक्ति हो जाएगी, लेकिन नहीं।
- 43:20तुम्हें छोटे शोर से मुक्ति चाहिए।
- 43:27गुरु तुम्हें बड़ा शोर देते थे राधे राधे करते रहो और तुम जब
- 43:34राधे राधे करोगे तुम हो जाओगे एनर्जी लेस्नेस?
- 43:39ऐसे बच्चा खेल कूद के थक जाता है, सो जाता है।
- 43:44क्या वह आनंद होता है? नहीं, थकावट होती है परिश्रम के
- 43:49बाद प्रकृतित्व में विश्राम में ले जाते।
- 43:57हैं। यह प्रकृति की इबादत है तुमपे
- 44:01इनायत है तुमपे प्रकृति तुम्हारे हर दुख का इलाज खुद कर देती है जो
- 44:16तुद पा व्यसन परिकार इस कार्य विजय था की प्रकृति के ऊपर।
- 44:20छोड़ दो अपने। अगर तुम आस्तिक हो तो परमात्मा के
- 44:24ऊपर छोड़ दो, अगर नास्तिक हो तो प्रकृति को ऊपर छोड़ दो लेकिन
- 44:31छोड़ दो सरेंडर यूरसेल्फ़ बिफोर गॉड अरे नीचे व्हाटएवर यू वांट?
- 44:41अगर तुम आस्थिक हो तो परमात्मा के ऊपर।
- 44:44छोड़ दो अगर। तुम मार्कस हो, नास्तिक हो तो
- 44:51प्रकृति के ऊपर छोड़ दो, क्या दिक्कत है?
- 44:54लेकिन छोड़ दो सर इंटरव्यू। हे कृष्ण ने कहा सर्वधर्माण
- 45:05प्रत्यक्ष तुम। किसी भी धर्म को मानते हो?
- 45:10हिंदू, सिख, मुस्लिम ऐसा ही जो होगी वर्ष सब कुछ हो तो।
- 45:15उस वक्त तो सारे धर्म थे भी बौद्ध बात में हुए।
- 45:22इस बात में हुए सिख बात में हुए बात में हुए कृष्ण सबसे बड़े हुए।
- 45:33उनका अर्थहीयता सभी धर्मों को छोड़ दो यानी सभी परिश्रमों को
- 45:38छोड़ दो। कोई परिश्रम ना करो क्योंकि तुम
- 45:44ही हो तुम मेरे पास आ जाओ और मैं कहूं मैं तुम्हारी ही घट घट में
- 45:53वाश करता हूँ। एम प्रेसेंट।
- 45:59ओमनी प्रेज़ेंट हो मैं शब्द और सुरती का मिला है।
- 46:08तुमने शब्द पहले दे। दिया।
- 46:10जबकि शब्द तो निष्पत्ति है तुम्हारे मौन।
- 46:14के। शब्द तक पहुंचना है मौन के
- 46:20द्वारा। तुमने उलट काम कर तुम शब्दों से
- 46:26पहुंचते हो मोन तक यह असंभव है। इस वीडियो को बड़े ध्यान से सुन
- 46:36तुम शोर मचा कर। मन तक पहुंचने की शिष्टता में
- 46:41संलग्न हो तो हमें मन तो नहीं मिलता, थकावट मिल जाती।
- 46:45है। करते रहो, मेरे पास लोग आ जाते
- 46:50हैं बाबा सारी उम्र कम होती है, कुछ नहीं मिला भोंकते भोंकते थक
- 46:58गया हूँ। इन नामों से तंग आ गया हूँ।
- 47:01मैंने कहा कि सुर लो के पट्ठे निकालता।
- 47:04हूँ। तू अपने गुरु का नाम बता देता है,
- 47:08अब मैं क्या नाम है, उसका लक्षण ही बता देते हैं।
- 47:14व्यक्ति कैसा है? तुम शब्द से शुरू करती हो इट्स
- 47:23रॉन्ग, वे शब्द से शुरू नहीं करना होता पर मून तक जाने के लिए।
- 47:33मन से शुरू करना होता है। समुद्र में मिलने के लिए एच टू ओह
- 47:38की मूड होना जरूरी है। इसको फिर समझ ले साइंटिफिक लोग
- 47:47समुद्र की बूंद। दोनों की रचना ही की है।
- 47:54हेच टू ओह और हेच टू ओह केन मर्ज डिज़र्ब भी नहीं केन मर्ज इनटू
- 48:03हेच टू। ओह।
- 48:11एच टू कैन मर्ज इंटू एच टू पानी की बूंद ही पानी के समुद्र में
- 48:19समा सकती। है।
- 48:21और तुमने समाना है लीन होना है डिसॉल्व्ड तो नमक भी हो जाया करता
- 48:26है, समुद्र का पानी खराब होता है, लेकिन तुम जब चाहे उसे अलग करो।
- 48:36थाली में भर लो धूप में रख दो, पानी वाष्प बन जाएगा, नमक शेष रह
- 48:41जाएगा। लेकिन वह मर्जिंग नहीं थी वह
- 48:46डिसोलविंग थी। तुम डिसोलवे होते हो।
- 48:54तुम थक जाते हो और थकना डिज़ॉल्व होना है एनर्जी लेस में सो जाना
- 49:02बोल बोल कर कितना भी बोलो 1 दिन थक जाओ।
- 49:07प्रत्येक चीज़ चलते चलते थक जाती है।
- 49:11तुम्हारी मशीनरी भी थक जाती है। तुम नई कार लेते हो, आज मॉडल बदल
- 49:16गया, 10 साल के बाद वह वो नहीं रहती थक जाती।
- 49:22है। आदमी का शरीर भी एक मशीनरी है,
- 49:26उपकरण है, थक जाता है, तुम अगर ऐसे काम लोगे से।
- 49:34तो थक जाओगे निश्चित है, बोलते रहो, मैं बोलने से कोई इनकार नहीं
- 49:40करता क्योंकि कर करके ही तुम पाओगे कि ये तो थकावट हाथ लगी, यह
- 49:51तो आनंद हाथ नहीं लगा। मैं चला था आनंद के लिए मिल गई
- 50:01मुझे थकावट अगर नाम से शुरू करोगे तो थकावट ही मिलने वाली है तुम
- 50:08आजमा के देख लो तुम जिंदा। रूह हो तुम जिंदा हो शरीर में
- 50:16बैठे तुम राम राम करके देख लो यह कोई जवानी कलामी बातें थोड़ी है
- 50:24यह तो प्रयोग है यह कोई थियोरेटिकल बात थोड़ी है यह तो
- 50:28एक्सपेरिमेंटल है। तुम एक्सपेरिमेंट करके देख लो।
- 50:33तुम सारे दिन भर काम करते हो चाहे राम राम करते हो साँझ सूर्य डरते
- 50:39ही तुम थक जाओगे इन गुरुगों ने उल्टा काम कर लिया धनदेवाजा गुरु
- 50:50कहलाने योगबे ने। इन्हें सभी को शर्म आनी चाहिए।
- 50:55आगे से नाम गद्दियाँ बदल जाती हैं नाम वो ही रहता है जो धर्म
- 51:05तुम्हें सिखाये के मरने के बाद तुम्हें मिलेगा स्वर्ग।
- 51:10मरने के बाद तुम्हे गलत करोगे तो मिलेगा मरने के बाद तुम्हे सच
- 51:15कंडम में मैं पहुँच जाऊंगा मरने के बाद सतलोग मैं दिखलाऊंगा उनको
- 51:20छोड़ देना क्योंकि जिंदा जी इंसान ही सब।
- 51:23कुछ पा सकता है। मैं तुम्हे जिंदा जी पहुंचाने की
- 51:26बात करता। हूँ।
- 51:37ज़िन्दगी जनता दिल का नाम। है।
- 51:42मुर्दा दिल का खाक जिया। करते है।
- 51:47तुम जीते जी स्वर्ग को पाना है तुमने ज़िन्दगी के जीते जी लम्हों
- 51:52में। सच्च खंड को सतलोक को पाना मरने
- 51:57के बाद कोई भरोसा नहीं, कोई वापस लोटा।
- 52:00मरने के बाद किसी ने बताया कि हाँ, मुझे गुरु आया और सच्च खंड
- 52:05में ले गया। मरने के बाद कभी कोई वापस आ के
- 52:08बताता? है।
- 52:12कभी कोई आया? जिनको तुम सर धकलाते हो कभी?
- 52:17उन्होंने बताया सपने में आते वो तो तुम्हारी स्मृतियों में कैद है
- 52:22और जो स्मृतियों में कैद है, वो सपनों में भी आएगा और तुम ही
- 52:28इन्हीं भ्रमित लोगों के साथ भ्रमित हो जाते।
- 52:31हो? शब्द और श्रुति का मिलान तुम्हारा
- 52:37धर्म क्या है? यह संघ संघ चल रहा हूँ।
- 52:40मैं सभी सब्जेक्ट्स को लिए तुम्हारा धर्म है।
- 52:45आनंद, लुत्फ, उठान, परमात्मा ने संरचना भोगने के लिए अपनाई।
- 52:50है। दुख के लिए और मज़े की बात है,
- 52:54हैरानी की बात है, विश्वम की बात है कि तुम दुखी हो।
- 52:59इतने भोगों के होते हुए इतने पदार्थों के होते हुए इतने सुख के
- 53:06साधनों के होते हुए भी तुम दुखी हो।
- 53:10और परमात्मा ने ये सृजना बनाई, तुम्हें सुखी करने के लिए हो गए,
- 53:14तुम दुखी तो कहीं गलती तो नहीं खा रहे?
- 53:16हो बिलकुल गलती खा रहे हो, गलती ये खा रहे हो।
- 53:28तुम पांव के जूतों से जो फीते होते हैं, उनको उठाकर उठना चाहते
- 53:33हो, पर जो कभी हो ना सकेगा, कभी देखा तुम कोशिश करके देखना।
- 53:41पांव के जूतों के जो तश्मे होते हैं, फीते उनको पकड़ लेना।
- 53:47और ऊपर उठने की कोशिश करना क्या उठ पाओगे?
- 53:51नहीं। गिर जाओगे।
- 53:59शब्द सुर्ते। शब्द से शुरू नहीं करना शब्द तो
- 54:07मंजिल है शब्द तो तुम्हारी। जो तुम तुमने जो किया उसके
- 54:13निश्चपत्ति है, उसका फल है, परिणाम है रिसाल्ट है शब्द तक
- 54:19पहुंचोगे वह परम मौन के पास शब्द गूंज रहा।
- 54:24है शब्दों से शुरू मत करो, शुरू करो मौन।
- 54:32तुम्हारा ये प्रश्न खत्म हो जाएगा क्या करूँ?
- 54:39मौन होने के लिए परम मौन होने के लिए मौन से शुरू करूँ मौन से शुरू
- 54:47करोगे? जैसे रात को दर्द घन हो जाता है,
- 54:55दर्द तो वही होता है लेकिन दिन में क्रियाकलापों के होते हुए वह
- 55:01दर्द तुम ठीक से देख नहीं पाते, तुम्हारा ध्यान और और तरफ होता
- 55:05है। रात को क्यों प्रेमिका को याद
- 55:10करके करवटियां बदल दिया? दिन तो किसी न किसी तरह बीत ही
- 55:17जाया करता है। इधर ध्यान चला गया, उधर ध्यान चला
- 55:21गया रात को ध्यान कहाँ जाएगा? छत के छत के ऊपर बालों को कड़ियों
- 55:28को गिनते रहोगे क्यों? क्योंकि ध्यान तो उतना ही है
- 55:38जितना दिन में था लेकिन दिन में ध्यान भट गया।
- 55:43इधर उधर उधर उधर कोई बॉस बैठा कोई काम निपटाना कोई कंप्यूटर पे बैठा
- 55:49कोई दुकान पर कोई कुछ लेने आ गया कोई ग्राहक दिन में ध्यान बढ़
- 55:56जाएगा। चाचा जान ये दिन तो किसी तरह बीत
- 56:02जाता है। ये रात क्यों आ जाती है?
- 56:11रात को तुम्हें तुम्हारा दर्द ज्यादा दिखता है, होता तो नहीं?
- 56:23ऐसे जब तुम मौन होगे तो तुम्हें तुम्हारा मन ज्यादा चलता हुआ
- 56:30प्रतीत होगा था। वो दिन में भी इतना मेरी बात को
- 56:36ध्यान से समझ लेना। यहीं से लोग बाहर आ जाते हैं।
- 56:40यह प्रथम पड़ा। जब तुम मौज में बैठोगे मन उछलेगा
- 56:45ज्यादा ऐसा नहीं कि दिन में नहीं उछल रहा था दिन में उछल रहा था,
- 56:51लेकिन चाचा जान के रात क्यों आ गए दिखता जाता है तुम एकाग्र हो गए।
- 57:01तुम कंसेंट्रेट हो गए, अब कुछ और है नहीं ना तो कोई ग्राहक आएगा जो
- 57:06तुम्हारा ध्यान डायवर्ट कर लेगा, ना ही कोई वर्स आएगा, ना ही कोई
- 57:12काम धाम होगा, ना ही कंप्यूटर होगा सामने तुम अकेले और अकेले हो
- 57:16गए। तो तुम्हें ऐसा लगेगा मन ज्यादा
- 57:21बोलना शुरू हो गया नहीं, उतना ही बोल रहा है और तुम इस मन के शोर
- 57:29से दिन भर रात गुजर रहे हो, फिर इस शोर से नफरत हो जाती।
- 57:38है। यह पहला मुकाम है जब तुम्हें शोर
- 57:44से नफरत हो जाए। फिर तुम नाम नहीं जपोगे इसलिए मैं
- 57:49कहता हूँ कि नाम को जब ही लेना, क्योंकि यह प्रथम पीढ़ी बन जाए,
- 57:55आपके लिए प्रथम स्टेर हो जाए। प्रथम पूड़ी हो जाये प्रथम सीढ़ी
- 58:02का प्रथम पायदान हो जाये गुजरे हैं आज।
- 58:17मुकाम से। गुजरे हैं।
- 58:28आज देश के में हम उस। मुकाम से नफरत सी हो गई है।
- 58:46मो। बा के नाम से।
- 58:55गुजरे हैं। आज इश्क में हम उस मुकाम से नफरत
- 59:10सी हो गई है मोहब्बत के नाम से। मोहब्बत के नाम से नफरत नहीं करना
- 59:15है। नाम से नफरत करना है, नफरत यानी
- 59:22हट जाना है। नाम को छोड़ देना तो पहले नाम को
- 59:30जब लेना भाई। अगर तुमने नाम को नाम को जपने का
- 59:38ये तज़र्बा ही करना है, तू कर लेना तज़र्बा ज्यादा बढ़िया होता
- 59:42है एक्सपीरियंस तुम्हें कोई ना कोई अनुभव देखे जाता है तज़र्बा
- 59:47प्रयोग करो करो। पाओगे कि मन ने बोलना बंद कर
- 59:55दिया, बिल्कुल बंद कर दिया, लेकिन क्या तुम उस मंजिल पर पहुँच जाओगे
- 1:00:00जहाँ शब्द का गुंजार होता है? नहीं।
- 1:00:06मस्जिद को न जोड़ा डर या इन पाबंदियों से जीवड़ा डर गया, बोले
- 1:00:12शाह कहते हैं इन पाबंदियों से इन चारदवारियों से राम मंत्र हो या
- 1:00:17मस्जिद हो, कोई फर्क नहीं बोलता। वो पहाड़ों वालियों का हो या गज़ब
- 1:00:25वालियों का हो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन हैं ये बंधन मस्जिद
- 1:00:33कोनो जोड़ा डरिया जा ठकर के ठेरे बोले सा ठकर का डेरा किसे करते
- 1:00:41हैं? वहाँ जहाँ शब्द का गुंजार हो रहा
- 1:00:45है और बाद में बताते भी हैं। जीथे वाजे नाद 1000 जहाँ हजारों
- 1:00:52प्रकार के नाद होते। हैं।
- 1:00:57ये लक्षण हैं उस स्थान पे ठाकुर के डेरे के लक्षण।
- 1:01:01जा ठकर दे ढेरे वढया मस्जिद खोलो जोड़ा डरिया जा ठकर दे ढेरे वढया
- 1:01:08जिथे वैदे ना बाजार जहाँ शब्द की गुंजार तुम तो शब्द की गुंजार से
- 1:01:16पहले शुरू कर देते हो। हाथ लगेंगी थकावट।
- 1:01:21शीर्शासन पे तुम कभी चल सकते हो ज्यादा देर।
- 1:01:24तक नहीं चल सकते। क्योंकि बना ही पांव है चलने के
- 1:01:31लिए फिर नहीं बना है, फिर सोचने के लिए बना है शृस्तु कमांड पांव
- 1:01:38चलने के लिए। तुम उलटे चलोगे तो थक जाओगे, तुम
- 1:01:43उलटे चल रहे हो थकोगे तुम शब्द पहले ले आए, जबकि शब्द तो
- 1:01:51निष्पत्ति शब्द तो परिणाम में आएगा।
- 1:01:56आखिर में तुम पाओगे पर मौन के पास शब्द भी बहता है गुंजार भी होए
- 1:02:01अंका एक अंका इट एस ए लास्ट पॉइंट लास्ट ईयर इट एस ए रूफ यह एक शब्द
- 1:02:14है। तुमने छत को ही प्रथम पड़ाव बना
- 1:02:20दिया, इसलिए ठहर गए, चिपक गए तुमने कहा।
- 1:02:25ये तो छत आ गई नहीं नहीं। शब्द को रूफ की तरह।
- 1:02:34पहुंचना है, वहाँ शब्द तक पहुंचना है और तुम्हारा गंतव्य बन जाए और
- 1:02:41तुम्हारा लक्ष्य बन जाए, मंजिल हो जाए।
- 1:02:45तुमने मंजिल को पहला पड़ाव बना लिया, सीढ़ी बना लिया फिर यहाँ
- 1:02:49चिपक जाते हो तुम शब्द के साथ चिपके लोग बहुत देखे।
- 1:02:55गंगा किनारे वाराणसी के घाट पे हरिद्वार, ऋषिकेश गंगा के घाट पे
- 1:03:07राम राम का गुंजार करते मैंने लोग देखने पहुंचे।
- 1:03:15गुजार करते बहुत लोग देखे। मैंने जगरातों में गुणगान करते
- 1:03:22बहुत लोग देखे। मैंने।
- 1:03:26आनंदित कोई भी नहीं हुआ तो तुम्हारा धर्म क्या है?
- 1:03:31आनंद अगर तुम्हें आनंद नहीं मिला, तो फिर तेरे बिना भी क्या जीना
- 1:03:44फूलों में, कलियों में, रस्तों की कलियों में तेरे बिना कुछ कही ना
- 1:03:52तेरे बिना भी क्या जीना। अगर आनंद न मिला तो फिर कहीं कुछ
- 1:03:59भी नहीं, तुम उल्टे हो गए, तुम सर के पर चलने की चेष्टा करते हो, थक
- 1:04:10जाओगे? आ जमा के देख लो हमारे यहाँ एक
- 1:04:16आते थे मैंने कहानी बहुत बार सुनी, बिच्छू लड़ जाए, साँप लड़
- 1:04:24जाए मेरे पास हरिद्वार है ये लगा लो।
- 1:04:31तुरंत जहर उतर जाएगा सिर्फ ₹2 का? सस्ते जमाने से ₹2 बहुत वक्त सांज
- 1:04:38के वेले पे जब कोई दुकान बंद करके जाता, तो उस गाँधी की चौक से
- 1:04:45गुजरना होता वहाँ से गुजरते हुए लोगों को।
- 1:04:50वह व्यक्ति मिल जाता बोलता हो, सांज की वेला थके हुए लोग बारिश
- 1:04:56हो रही है, सांप बिछु निकल रहे हैं, न जाने अपने ही लड़के या
- 1:05:04पड़ोसियों के लड़के हाँ चाहते तो तुम यही हो।
- 1:05:11तो ये दवा लगा देंगे, जहर उतर जाएगा, ₹2 के ही तो बात है।
- 1:05:18कहता है अगर विश्वास न हो तो मेरे पास सांप भी हैं, बिच्छू भी हैं,
- 1:05:24लडवा के दे करो। उसके पास शीशे में बड़े बड़े
- 1:05:28भिक्षुक। है और एक टोकरी में साँप भी थे।
- 1:05:34कोबरा से उसके दांत निकाल रहे थे। तो उसको तो कोई डर न था तो लड़वा
- 1:05:41के देख रहा हूँ। तो आने जाने वाले कहते हैं न जाने
- 1:05:47भाई बारिश का मौसम है या कीट पतंगें निकलते ही रहते हैं तो ली
- 1:05:54चल रही ₹2 की बात तो सारे दिन में इतनी बिक्री नहीं होती जो साझ को
- 1:06:00हो जाती है सूरज डालने के बाद। क्योंकि एक शानदार शब्द जो बाद
- 1:06:07में कह देता कि लड़वा के देख लो, मेरे पास सांप भी है और बच्चों
- 1:06:11भी। तो मैंने एक बार कह दिया कि भाई
- 1:06:16लड़वा फिर तेरी चार पांच सीसी इकट्ठे रहूंगा।
- 1:06:24लेकिन वो मेरे कान में कहने लगा अरे हमारा धंधा चौपट न करो भाई
- 1:06:32मदारी ऐसे ही करता है, कहता है कोई एक आदमी यहाँ भीड़ में से आ
- 1:06:38जाए पर वो उसका जानकार नहीं होता, उसके कान में पहले ही फूंक मार
- 1:06:43देते हैं। देखो पापी पेट का स्वाद है भाई
- 1:06:47ऐसा वैसा मत कर देना बस छोटी सी भूख मर देते हैं फिर वो जैसे ही
- 1:06:53कहता है वैसे कह देता है पापी पेट का स्वाद शब्द से शुरू नहीं करना,
- 1:07:05शब्द तक पहुंचना। है।
- 1:07:07चित्थे वज्दे नाद। जा ठाकरे दे दे रे वडिया मस्जिद
- 1:07:14को जो डांटता। है स्वधर्म अपने धर्म में निधनम
- 1:07:22मर जाना श्रीश्री श्रेष्ठ। स्व धर्मे निधन श्रेय पर धर्म
- 1:07:33व्याया व्याया दूसरे के धर्म में मरणम भयानक तुम्हारे धर्म।
- 1:07:39क्या है आनंद? खुशी से नाचो जैसे मेरा नाच जैसे
- 1:07:54पलटू नाच जैसे मलूक नाच जीसको वो आनंद में जाता।
- 1:08:06है वो किसी और चीज़ की तमन्ना नहीं करता।
- 1:08:10है। तुम्हारा धर्म क्या है?
- 1:08:11आनंद? क्या शब्द के जपने से तुम्हें
- 1:08:17आनंद मिलता है? तुम कहो क्या मिलता है?
- 1:08:21नहीं मिलता, थकावट मिलती है आनंद तो हो अगर आप सारे दिन जप करें और
- 1:08:29सोए ना थके ना? ऊर्जा से भर जाओ और तुम ध्यान में
- 1:08:38जाकर। तो ऊर्जा से भर जाओगे।
- 1:08:43तो मन बड़ा सताएगा, मन और ज्यादा गहरा होगा, ज्यादा शोर मचाता
- 1:08:47लगेगा लेकिन। लगेगा, होगा ना?
- 1:08:51बस दिन में तुम देख नहीं पा रहे थे रात को तुम ज्यादा नज़र रात को
- 1:08:55तुम ज्यादा देखोगे, उसको पीड़ा रात को ज्यादा होती है।
- 1:09:06आमतौर से यही प्रश्न आते हैं बाबा हम भीतर तो उतरने की कोशिश करते
- 1:09:10हैं लेकिन मिलता है कूड़ा कबाड़ा वासन भय।
- 1:09:16मैंने कहा, भाई यही तो तुमने दबाया है, जो दबाया है वही तो
- 1:09:23आएगा, वही तो रेचित होगा, वही तो बाहर निकलेगा, उसी से तो
- 1:09:31साक्षात्कार होगा रास्ते में जो तुमने दबाया।
- 1:09:35वो तुम्हारे अंत में उतर गया, अचेतन में उतर गया।
- 1:09:40अब चेतन में उतर गया। उसी से मुलाकात होगी।
- 1:09:43सबसे पहले शब्द तो बहुत बाद में आएगा, लेकिन ध्यान रखो।
- 1:09:52इट्स दी राइट पाथ। शब्द अंत में आएगा।
- 1:10:00जत्थे वज्दे नाद 1000 जब बड़ा मधुर संगीत बजेगा उसे ही शब्द कहा
- 1:10:08नानक नदी कहा। भले शाह नहीं बिका।
- 1:10:19बाजनाथ अनेक अशंका वहाँ पर अनेक प्रकार के अशांक।
- 1:10:27जिनकी गणित नहीं हो सकती इतने नाग बनते हैं कितने बावनहारे कितने
- 1:10:34राग परी सूके कितने गावनहारे वहाँ ना जाने कितने प्रकार के राग
- 1:10:42रागणियां हैं बड़ी मधुर। है।
- 1:10:46बड़ी माहक है, बड़ी सौगांध है, बड़ा प्यारा आलम है वहाँ उस स्थान
- 1:10:53का जिक्र करते हैं शब्द ब ये इन मूर्खों को पता नहीं वो शब्द पहले
- 1:11:02दे देते हैं। यद्यपि उसमें आनंद नहीं है, वह वो
- 1:11:09एक है जिसमें रस्म रस्महीन एक अगर चूसोगे तो क्या होगा?
- 1:11:18शब्द थोते शब्द, नाम, तोता शब्द है, उसमें रस नहीं।
- 1:11:26तो नाम लगेगा तुम्हें सुख देता हुआ लेकिन वस्त्र होता है, वो सुख
- 1:11:31नहीं देगा, बहुत थकावट देगा। तुम झपके देख लो, लड़वा के देख
- 1:11:35लो, साप है बिच्छू भी है, इन लोगों के पास लड़वा के देख लो।
- 1:11:44पहले तो तुम डेरों में ही जाओ। जब हार जाओ।
- 1:11:53तब तुम मेरे पास आना मेरा दर खुला है।
- 1:12:04खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए कोई झक तुम्हारा
- 1:12:19हृदय तोड़ दे। जब नाम जब जब के तुम खाली हो जाओ
- 1:12:24रहते हो तो आनंद की दूर दूर तक कोई झलक न मिले।
- 1:12:31थक जाओ तो हृदय टूट जाता। है।
- 1:12:40तड़पता हुआ जब तुम्हें छोड़ दो, तुम तड़प हो गया।
- 1:12:45हेरी मैं तो प्रेम देवानी मेरा दर्द न जाने को है, तड़पों के
- 1:12:51उसकी याद में वो आनंद की तड़प तुम्हारी प्यास बनेगी और जब
- 1:13:00तुम्हे प्यास लगे तो पानी मेरे पास है, आ जाना।
- 1:13:06प्यास विहीन मेरे पास कते ही मत आना फिर तो तुम कमेंट करो कमेंट
- 1:13:17करने में मूड रोग दक्ष होते हैं, जिन्होंने कभी आनंद का प्यारा
- 1:13:24किया घूंट क्या आनंद के प्यारे को मुख भी नहीं लगाया।
- 1:13:30रस को पीने की बात तो बड़ी अलग रही, वो भी कमेंट करें।
- 1:13:41शब्द पहले पहले मौन, स्वधर्म। अपना धर्म क्या आनंद जब तक तुम
- 1:13:51आनंद को ना पालो, सांस ना लेलो जब तक आनंद ना मिल जाए वह खजाना तुम
- 1:13:58हो, तुम्हारा है जब तक उसे ना प्राप्त कर लो, अब तक तुम चैन मत
- 1:14:07लेना। कृष्ण भइया ही कहते हैं आनंद के
- 1:14:12लिए मरो पदार्थों के लिए मत मरो पर धर्म यहाँ वह तुम धन के लिए
- 1:14:21मरते हो, गद्दियों के लिए मरते हो, मान सम्मान के लिए मरते हो
- 1:14:24देखो कैसे मरे जा रहे हो। दाढ़ी पीली कर लेती हैं, माथा
- 1:14:30पीला काला कर लेती हैं, ये क्या रामलीला हो रही है या कृष्ण लीला
- 1:14:36हो रही है? ये सरकस क्यों कर रहे है?
- 1:14:41विचारों को ख्याति चाहिए भूखे। प्यासे हैं जन्मो।
- 1:14:46जन्मो की ख्याति किसी ने दी नहीं, बचपन में प्यार नहीं मिला, नहीं
- 1:14:53तो बच्चा भाग कैसे जाएगा? भाग गए घर से जब भी कोई
- 1:14:59क्वालिफिकेशन है, कोई योग्यता है संतोनी की।
- 1:15:06नहीं, यह कोई योग्यता नहीं है। मैं अभी घर से भाग गया था।
- 1:15:11ऐसी घटना घट गई थी मेरे बायोग्राफी पर, लेकिन गुरु की
- 1:15:17तलाश में आनंद की तलाश में नहीं, गुरु।
- 1:15:20की तलाश में। कोई सच्चा गुरु मिल जाएगा, बता
- 1:15:25देगा और सुना है कि वहाँ गंगा के घाट पे वहाँ या वाराणसी में लोग
- 1:15:33हैं लेकिन मुझे हनुमान जी मिले। उस एनर्जी ने हनुमान जी का रूप
- 1:15:42धारण कर दिया। परमात्मा जब किसी को सुख देना
- 1:15:51चाहते हैं, किस को मुक्त करना चाहते हैं कर्मी आवय कपड़ा नगरीय
- 1:15:58मुख द्वार तो उसके ऊपर नजर कर देते हैं रहे।
- 1:16:03तो वह इतनी बड़ी सृजना को बनाने वाला विराट हनुमान जी का रूप धर
- 1:16:10के आगे मुझे कहता हूँ तुम्हें घर बैठे मिलेगा सब कुछ चले जाओ वापस
- 1:16:15उसने सारा उपराला कर लिया मैं पहुँच ही नहीं सका ऋषिकेश।
- 1:16:24वापस पहुँच गया। यही उसकी कृपा होती है।
- 1:16:28यही उसकी नजर होती है। घर बैठे मिलता है तुम्हें भी घर
- 1:16:33बैठा मिलेगा क्योंकि तुम अपने ही घर में सजा बैठे हो, स्वप्न संजो
- 1:16:40रहे हो, फूल गए हो अपने को। गुरु याद कराता है बडको मत, तुम
- 1:16:46ही तो हो कस्तूरी कुंडल बस है। मेरे गडूंडई बन माँ मत खोजो बनु
- 1:16:54मैं ऐसे गड में भी हैं मूर्ख जानिए ना?
- 1:17:04यह मूर्ख जो तुम्हें नाम देते हैं, जो शब्द देते हैं वह मूर्ख
- 1:17:11वह खुद नहीं जानते कि तुम्हारे ही भीतर है, अन्यथा तुम्हें शब्द न
- 1:17:17देते हैं सीधा सा रास्ता तुम्हें बतला रहा हूँ सभी संतों ने जो
- 1:17:21बतलाया। मौन हो जाओ।
- 1:17:24पर मौन में जाने के लिए एक ही रास्ता है उस जैसा होना पड़ता है
- 1:17:30समान होने के लिए शम होना पड़ता है, समुद्र होने के लिए बूंद होना
- 1:17:36पड़ता है एच टू ओह का विशाल स्मूत्र होने के लिए।
- 1:17:40एच टू की बूंद होना ही पड़ेगा पर मौन होने के लिए मौन की बूंद होना
- 1:17:47ही पड़ेगा। तुम हो जाते हो एनएसीएल नमक तो
- 1:17:52घुल जाते हो, तुम कहते हो आह नहीं।
- 1:17:57तुम कभी भी अलग किये जा सकते हो, तुम मर्ज नहीं हुए घुल गए, मिले
- 1:18:04नहीं तुमने मिलना है और जो घुल जाता है उसे आनंद नहीं आता, जो
- 1:18:14लोग पूछ लेते हैं बाबा तुम्हें क्या पता?
- 1:18:17जो मिलता है उसे ही आनंद आता है ध्यान से सुनना इस शब्द को जो
- 1:18:23घुलता है उसे आनंद नहीं आता। एनए सी पानी में घुस जाता है उसे
- 1:18:28आनंद नहीं आता समुद्र का हाँ, मैं जानता हूँ क्योंकि नमक भी मैं
- 1:18:33हूँ। जब व्यक्ति चरम पर नीती पर आता
- 1:18:37है, वह सब जान जाता है क्योंकि सब हो जाता।
- 1:18:41है। तब सुनिए मैंने कैसे जाना एनएसीएल
- 1:18:47को आनंद नहीं होता क्यों क्योंकि एनएसीएल अलग हो सकता।
- 1:18:52है। और एनएसीएल को तुम अलग कर सकते हो
- 1:18:55नमक को तुम अलग कर सकते हो पानी को सोका।
- 1:18:58का? और नमक कुछ चक होगे तो ही नमकीन
- 1:19:03निकलेगा। उसमें मिठास न।
- 1:19:06होगा। कहाँ चेंज हुआ नमक गोला?
- 1:19:15बट डिड नॉट ट्रांसफर। रूपांतरण नहीं हुआ, वही नमक का
- 1:19:22नमकीन रहा, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ नमक नमक ही रहेगा चाहे
- 1:19:28गोली जान। लेकिन पानी की बूँद अगर एक बार
- 1:19:33समा गई समुद्र में तुम ढूंढ के दिखा दो, उसी बूंद को तुम ढूंढ
- 1:19:38नहीं सकोगे। वह खो गई, उसे मर्ज कर दे।
- 1:19:44नमक, नमक ही रहेगा क्योंकि उसका टेस्ट नमकीन ही रहेगा।
- 1:19:50तुम चख के देख रहा हूँ ये प्रैक्टिकल बात करता हूँ मैं सुनी
- 1:19:55देखी बात नहीं करता, मैं शास्त्रों से पड़ी पड़ाई में बात
- 1:19:59नहीं करता मैं वो ही करता जो मैं नहीं जाना मैंने ऐसा ही जाना है
- 1:20:08तुम जब उस। बैराट में एकाकार हो जाओगे तो
- 1:20:13आनंद ही हो जाओगे नाम तो तुम लाखों जनमुक्त के जागते रहो जागते
- 1:20:19रहो कौन? रोकता।
- 1:20:20है मैं कोई डिक्टेटर। थोड़ी।
- 1:20:24मैं तो मार्गदर्शक हूँ, कोई मार्गदर्शन ले ले।
- 1:20:29तो अच्छा है, नहीं ले तो भी ठीक है, मुझे कोई आपत्ति नहीं है
- 1:20:35तुम्हे नहीं, प्यास लगी होगी तो तुमने पानी को दुतकार दिया, इसमें
- 1:20:41तुम्हारा कसूर भी क्या है तुम्हे अभी सुख हो रहा है धन को कमाने
- 1:20:47में। प्रतिष्ठानों को पाने में
- 1:20:53उपाधियों को पाने में सीएमपीएम होने में एम एलए एमपी होने में
- 1:20:58तुम्हें आनंद आ रहा है तुझको ये तुम थक जाओ, हार जाओ।
- 1:21:08तो मेरे से ना मिले तो चले आना मेरे।
- 1:21:11पास। मैं तुम्हें आनंद से भर दूंगा
- 1:21:18तुम्हारी। झोली है क्यों मैं आनंद स्वरुप
- 1:21:23हूँ। तब तुम मेरे पास।
- 1:21:29आना प्ले मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए।
- 1:21:46मैं वो तत्व हूँ जो तुम्हारे भीतर सदा ही बैठा हूँ और सदा ही बैठा
- 1:21:53रहूँगा। आध सच युगाद सच है भी सच नान कहो
- 1:21:57सी भी सच या बोलने वाला यंत्र रहे ना रहे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं
- 1:22:03रहूँगा, मैं सदा से हूँ। सदा था
- 1:22:21धन्यवाद।