Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Apr 25 - जीवेषणा के अब तक के सभी प्रवचनों का गूढ़ सार! अध्यात्म मार्ग वालों के लिए खास संदेश!
Transcript
- 0:07बाबा जी प्राण पाप का मोल क्या है, जड़ क्या है?
- 0:31कहाँ से उदगम होता है पाप? पाप का मूल अज्ञान, ज्ञान का न
- 0:50होना और पाप का मूल है सुखी जीवेशनम मैं जो।
- 1:06सुखी होकर जो यह बहुत उदगम है, पाप का मांसाहारी करना चाहिए नहीं
- 1:26करना चाहिए। प्रदीप नागौरी
- 1:41एक बहुत बड़ा उद्देश्य था बस एक देश और उसमें एक ही शहर विशाल शहर
- 1:55था, एक ही देश था। वहाँ पर सन्यासी ही सन्यासी रहते
- 2:06थे, उन्होंने अपना अलग गांव बसा लिया था।
- 2:20अपने आचरण, अपना धर्म, अपनी पुस्तकें, अपना ही ज्ञान।
- 2:30अपने ही शिक्षक और अपने ही विद्यार्थी बाहर से किसी व्यक्ति
- 2:35को बहाने न देते। वक्त बीतता गया शहर के एक कौने
- 2:52में। उन्होंने एक बहुत लंबा जुड़ा
- 2:59कब्रिस्तान बना लिया था जो कोई मर जाता उसे वहाँ पर लेटा देते हैं।
- 3:18और फिर बाहर आ जाते भीतर तक पोड़ियाँ जाती थी, सीढ़ियाँ और
- 3:26ऊपर से ढका होता था एक ढक्कन लगाया हुआ था।
- 3:32कि कुछ आदमी जाते इतना सा रास्ता और उस डेड बॉडी को वहाँ पटक के
- 3:41वापस आ जाते। कोई संस्कार नहीं, कोई क्रियाकर्म
- 3:49नहीं है। कोई कर्म कांड नहीं, कोई उसकी
- 3:54आत्मा की शांति के लिए कोई अनुष्ठान नहीं।
- 4:04बरसों बीत गए, सेलसला जारी रहा। 1 दिन एक व्यक्ति मृग सभी विक्षुक
- 4:23थे, क्योंकि एक ही धर्म के लोग। एक ही धर्म को मानते थे, कोई तनाव
- 4:35न था, कोई जबरन न था, कोई कटाक्ष न था एक जैसे शिक्षक और एक जैसे
- 4:45विद्यार्थी सभी चीज़े सुव्यवस्थित थी, शांति थी।
- 4:54कोई किसी से लड़ता झगड़ता नहीं होता एकमुश्त वह अपना काम करते और
- 5:03किसी तरह जीवन व्यतीत करते और सुखी से 1 दिन।
- 5:13ऐसा आया कि वह एक भिक्षुक मर गया। उन्होंने खोज पड़ताल की, वैद्य को
- 5:28बुलाया। प्राण जमाने की बात है।
- 5:35उसने शरीर का परीक्षण किया। पर मृत घोषित कर दिया कि यह
- 5:42व्यक्ति मर गया है। सभी ने उठाया कोई व्यवस्था नहीं,
- 5:57कोई स्नान ध्यान नहीं, कोई कर्म कांत्र नहीं।
- 6:01बस मर गया तो इसको श्मशान घाट में फेंक दो।
- 6:12बहुत विशाल श्मशान घाट पृथ्वी के धरती के नीचे बनाया हुआ है।
- 6:19ऊपर बड़ी सी तह थी। और ऊपर भारी सा पत्थर रखा था,
- 6:26इतना भारी पत्थर कि वह 1020 व्यक्तियों से हिले भी नहीं है।
- 6:37उस देश में सभी लोग शाकाहारी थे। कोई शराब न पीता था, कोई व्यसन न
- 6:47करता था, शुद्ध शाकाहारी लोग तो फिर सभी ने उसे उठाया चलो अंतिम
- 7:02विदाई दे दे। और जाकर उस शमशान के भीतर
- 7:08सीढ़ियों उतरे और वहाँ जाकर रख दिया।
- 7:17अंतिम प्रणाम किया। और चले गए।
- 7:26जाते हुए ऊपर का ढक्कन लगा गया, लेकिन दुर्भाग्य की बात कि वह
- 7:47व्यक्ति मरा नहीं था। अभी प्राण शेष थे।
- 7:53वैद्य से कोई गलती हो गई थी, नड़ी परीक्षण के धीरे धीरे उसको होश
- 8:03आया साँझ तक उसे होश आया तब तक रात ढलने को थी।
- 8:16अंधेरा तो सब जगह था लेकिन अब तो बाहर भी अंधेरा हो गया था।
- 8:25उसने देखा कुछ नजर न आया। अंधेरे में उसने टटोला प्रथम बार
- 8:34आया था। कुछ न दिखा कुछ कंकाल, कुछ
- 8:44हड्डियों, सभी वो लोग जो मर चूके थे, कोई कुछ बोलता न था।
- 8:56लेकिन वो जिंदा था। जैसे ही कोई मरता वैसे ही लोग उसे
- 9:08उठाकर वहाँ पटक देते। हैं।
- 9:17मरने वाला आदमी धीरे धीरे गलता है।
- 9:27अगले दिन उसे भूख लगी, भूख लगी तो उसने कहा क्या खाऊं?
- 9:41खाने को तो कुछ है नहीं बहुत सच चिल्लाता शोर किया।
- 9:48लेकिन शोर ऐसा की बंद गुफा का शोर बाहर ज़रा भी नहीं जाता।
- 10:00क्या कहें जब कोई व्यक्ति मरता थोड़ी देर के लिए उगाड़ देते हैं?
- 10:14वह कुछ बदबू बाहर निकल जाती और ऑक्सीजन भीतर प्रवेश कर जाती।
- 10:20वहाँ एक रिवाज था कि जो व्यक्ति मरता मान्यता थी उसके पास पानी का
- 10:29एक जार रख देते हैं। एक आध उसका कपड़ा रख देते वस्त्र
- 10:40जिसके साथ उसका मुँह था तो वह उठा, शोर मचाया किसी ने ना सुना,
- 10:53आवाज़ बाहर जाती नहीं थी। कई दिन हो गए, भूख के मारे प्राण
- 11:05निकलने लगे। वहाँ पर पड़ा हुआ थोड़ा सा पानी
- 11:09पी लेता, लेकिन पानी से एक सुधा शांत नहीं होती, प्यास बूझ जाती
- 11:16है, भूख नहीं बैठते। पेट में आग लगने लगी।
- 11:26है। खाने को कुछ न था।
- 11:36मजबूरी में जब दिन हो जाता तो थोड़ी सी रोशनई भी कहीं से आती
- 11:44है। तो मजबूरी में उसने किसी लाश को
- 11:53खाना शुरू कर दिया। मरा हुआ मास जैसे तैसे उसका पेट
- 12:03भरता गया। लाशें तो बहुत थी, सारा देश जीतने
- 12:10लोग मरे, एक स्थान पर कोई आज मरा, कोई कल मरा था, कोई बरसों कोई
- 12:18नर्सों। लेकिन कभी कभी लोग दो दो महीने न
- 12:24मरते मृत्यु का क्या पता है? मैं शमशान घाट में जाता था।
- 12:35मेरी बायोग्राफी में आपने पढ़ा होगा तो मैं वहाँ के मालिक से
- 12:42पूछता हूँ। यहाँ कितने लोग रो जाते हैं, दफ़न
- 12:47के लिए जलने के लिए शमशान मुझे बकायदा पंडित जी कभी कभी तो 1012
- 12:59लोग आ जाते हैं। और कभी कभी दो दो महीने कोई भी
- 13:03नहीं आता, ये परमात्मा का खेल है। दो महीने तक कोई व्यक्ति नहीं मरा
- 13:20और जब कोई मरेगा तो ढक्कन उठेगा, ढक्कन उठेगा तो कुछ लोग।
- 13:28भीतर आएँगे कोई नया व्यक्ति मर गया है।
- 13:40कुछ ना मिला तो उसने व्यक्ति मनुष्यों का मास कहना शुरू कर
- 13:45दिया। मरे हुए मनुष्यों का मास अब किसी
- 13:50तरह पेट की आग तो भिजानी है। फिर 1 दिन वक्त बीतता गया, 1 दिन
- 14:03कोई उस शहर में मरा ढक्कन खुला रौशनी हुई वह व्यक्ति घूम रहा था।
- 14:21तो उस मुर्दे को ले के अंदर आए देखा वह व्यक्ति घूम रहा है, वो
- 14:26तो डर गया अरे तुम मैं मरा नहीं था सारी गाथा उसने सुना दी कहीं
- 14:38चूक हो गई वैद्य जी से? तो फिर फिर मैंने मुर्दो का मांस
- 14:46खाया, जल यहाँ रख जाता है, जो मर जाता है, उसके सरहानी तुम छोटा सा
- 14:54जार पानी का रख देते हो जैसे तैसे जीवन गुज़ारा हो।
- 15:11इसे कहते हैं जीव विष्णु मनुष्य जीना चाहता है, सुखी होके जीना
- 15:28चाहता है सुख जितना भी मिल जाये कम।
- 15:36लेकिन अगर सुख न मिले तो जीना चाहता है, दुखी होकर जीना चाहता
- 15:43है, ज़रा सोचना तुम जी रहे हो, क्या तुम सुखी हो?
- 15:57आज तलक के मेरे इतिहास में एक व्यक्ति भी ऐसा नहीं आया मेरे पास
- 16:07खैर अब तो मैं कहीं जाता नहीं बाहर लेकिन पहले तो खूब घुमे।
- 16:15उस घूमते हुए भी मुझे कोई व्यक्ति नहीं मिला जो कहता मैं सूखी हूँ,
- 16:25ज़िन्दगी में एक व्यक्ति मिला जो कहता।
- 16:32मुझे कोई दुख नहीं है मैं सुखी मेरा रोवा रोवा सुखी है रोम रोम
- 16:41पुलकित है, बड़ा खुश नसीब हूँ, बड़ा आनंद में हूँ वो मस्ती की
- 16:49फुहार। हर घड़ी हर पल बहती रहती है और
- 16:53मैं उसका स्नान करता रहता हूँ। वह व्यक्ति था रत्नागिरि जो आग्रा
- 17:04के पास रहता था। ताजमहल से थोड़ा दूर लेकिन।
- 17:15तब तक मुझे ज्ञान ना। हो आज उससे?
- 17:21पहले की बहुत सी बातें उसके सर के ऊपर से निकल गईं।
- 17:27उसके पास बैठना अच्छा लगता। जैसे फूलों की सुगंध हो, वह
- 17:34मुस्कुराता रहता, उसके चेहरे पर एक लावन रहता, झूमता रहता, मस्ती
- 17:42में आँखें मंद और कभी कभी गाना शुरू कर देता, कोई भजन, कोई गीत।
- 17:52कभी नाचना शुरू कर देता हूँ मुझे कभी किसी व्यक्ति ने ये नहीं कहा
- 18:04कि मुझे कुछ नहीं चाहिए और मैं सुखी हूँ।
- 18:15व्यक्ति जीना चाहता है, सुखी हो के जीना चाहता है और किसी तरह
- 18:25सुखी हो के न जी सके तो वह दुखी हो के जीना चाहता है।
- 18:32जीवंत व्यक्तियों की बातें हैं क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना
- 18:36चाहिए मांस खाना चाहिए नहीं खाना चाहिए, यह जीवंत व्यक्तियों की
- 18:45बकवास है। मैं कहता हूँ अगर मजबूरी आन पड़े
- 19:05तो तुम मृत लोगों का मांस भी खा जाओगे।
- 19:08जीवन रहने के लिए बात जीवेषण की है तुम चाट बनाते हो सुबह उठ के
- 19:17ब्रेकफास्ट। गुनगुना जल पीना ब्रेकफास्ट के
- 19:23बाद फिर 3 घंटे कुछ नहीं, फिर लंच, फिर टी और फिर डिनर रात को
- 19:32सोते हुए दूध का गिलास तुम्हारा अपना अपना।
- 19:38चाट है डाइटिंग चाट लेकिन मुझे बताना।
- 19:50बुद्ध राजा थे राजघराने में जन्मे जो मांगते मिल जाता सब गायब होगा।
- 20:03चले गए। फिर कहाँ चाट रह गया?
- 20:08शंकर जाते हैं द्वार द्वार कहाँ चाट काम करता है जिसने जो दे दिया
- 20:18वह कर लिया। अपनी कोई इच्छा नहीं कि हमें क्या
- 20:33मिलना चाहिए नाश्ता में, लंच में एंड डिन्नर में।
- 20:42कैसा भोजन होना चाहिए, किन विटामिनों से युक्त होना चाहिए,
- 20:48थोड़ा लंबा चीज़ लोग है और कुछ भी न हो सकेगा और मेरी दूसरी बात को
- 20:56भी गौर फरमा लेना। कहीं गलती से तुम अमर हो गए, गलती
- 21:04शब्द प्रयोग करता हूँ, कहीं गलती से कोई वैज्ञानिक ने ऐसा स्त्री
- 21:14का खोज लिया कि तुम्हारा शरीर न मरा।
- 21:20योटी शूज़ की गजाबट है इसका प्रभाव है थम गया और तुम अमर हो
- 21:34गए तुम कभी न मरे तो मेरी बात। नोट भी रखना, लिख भी लेना मेरे ये
- 21:44शब्द रिकॉर्ड में रहेंगे इन्हें बचाने की चेष्टा करना अगर कहीं
- 21:51ऐसा हो गया यू विल कमिट सुसाइड। तुम मर जाओगे, पक्का मर जाओगे,
- 22:08अभी तो तुम्हारी तमन्ना है तुम्हारी तमन्ना तो बहुत होती है,
- 22:15तुम्हारी तमन्नाएँ तो आसमान को छूती हैं।
- 22:22तुम्हारी तमन्नाएं तो भ्रमण के बाहर निकल जाती हैं और अगर वो सच
- 22:27हो जाएं जो कि सच होती हैं किसी की सीख तुम्हारी तमन्ना की मैं
- 22:36विश्व सुंदरी से शादी कर रहा हूँ तो कर भी लेते है लेकिन अफसोस?
- 22:44तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ती है क्या हुआ तुम्हारी तमन्ना थी,
- 22:55ब्राह्मण ने पूरी कर दी, फिर तुम क्यों मर गए?
- 23:08तुम्हारी अगर सभी तमन्नाएँ या किस्म पूरी हो जाएं तो तुम्हें
- 23:13नहीं पता कि तुम मर जग गए। अभी तो तुम तमन्नाएँ करना जानते
- 23:20हो और अगर ईश्वर ऐसा विधान बना दे।
- 23:27कि तुम मर न सको, चाहते हो अभी तो बड़ी लाचारी हो जाएगी, फिर तुम
- 23:35परमात्मा से प्रार्थना करोगे? आज से बिल्कुल उलटी है कि प्रभु
- 23:43मृत्यु तय है। मैंने सुना है एक संत स्वर्ग की
- 23:52कामना करता था, स्वर्ग वही दिया गया, तुम जैसी कामना करते हो, वह
- 24:00तुम्हें मिल जाया करता है। इस भूल झोंक में मत रहना, परिश्रम
- 24:06करके मिलेगा, करके दिखाएंगे। ऐसा पागलपन करने की कोई आवश्यकता
- 24:12नहीं है। विराट तुम्हारी प्रत्येक इच्छा को
- 24:19पूरी करता है, उसके घर कोई कमी नहीं।
- 24:22बस इच्छाएं समझ के करना तो उस संत ने नए शरग एक इच्छा की कि मुझे
- 24:37शरग मिल जाए और कितने लोग शरग नहीं चाहते?
- 24:46और कहते हैं कि वे मर के स्वर्ग में चल जो मांगता मिल जाता
- 24:59कल्पवृक्ष है, वहाँ इन्द्र का सिंहासन है वहाँ।
- 25:07रम्भा, मेनका, उर्वशी और न जाने कितनी अफसर आए हैं।
- 25:12वहाँ पर्यटन शास्त्र पुरुष ने लिखे इसलिए तुम्हें स्वर्ग में
- 25:24इन्द्र के अतिरिक्त। और कोई पुरुष नहीं मिलेगा।
- 25:28बस तुम्हारी एक ऑप्शन है। सिर्फ इन्द्र स्त्रियों के लिए एक
- 25:32ऑप्शन है सिर्फ इन्द्र और अगर कहीं ये शास्त्र स्त्रियों ने
- 25:40निर्मित किए होते। तो फिर शास्त्र अलग होते हैं, वो
- 25:50शास्त्र अलग होते हैं। फिर स्त्रियाँ लिखती हमें कृष्ण
- 25:54जानते हैं। स्त्रियाँ लिखती हमें नकल चाहिए।
- 26:02स्त्रियाँ लिखती हैं, हमें महावीर चाहिए सुंदरतम पुरुष, लेकिन ये तो
- 26:10पुरुषों के हाथों में और पुरुष तो रम्भा में नका करौशय इन्हीं की
- 26:17कामना करें काम। वर्ष बीतते गए शिलाओं के ऊपर बैठा
- 26:27जो मांगता, मिल जाता, बहुत बड़ा सुख है, तुम्हें पता है ना तू?
- 26:39फानों से टकराने का जितना सुख है। जो मांगों के वही मिल जाएगा।
- 26:46ये मूर्ख बहुत मैं देखता हूँ। इन्हें पता नहीं है, खुद भी पता
- 26:53नहीं है। इनकी खुद की आकांक्षा है कि मैं
- 26:56जो मांगू वो मिल जाए, भ्रमण पूरी कर दे।
- 27:02अरे मैं इनको मूर्ख किस लिए करता हूँ के इन्हें पता नहीं जो तुम
- 27:08मांगते हो अगर तुम्हें वो ततक्षण मिल जाए जो कि मिलता है तुम्हें
- 27:16ज़िन्दगी नीरस नजर आएगी। तुम जल्दी ही हाथों को खाली हाथों
- 27:23को जड़ोगे और सोचोगे अब क्या मांगू?
- 27:31सुख सुख और सिर्फ सुख दुख नहीं होगा।
- 27:38तुम सुखी जीवन चाहते हो? परमात्मा ने तुम्हे सुखी जीवन दे
- 27:42दिया। जब बैठा रहता अधूरी इच्छाएं पूरी
- 27:48की, मैं गुलाब जामुन खाना चाहता हूँ मैं चम चम खाना चाहता हूँ।
- 27:59मैं वो फल खाना चाहता हूँ, मैं वो पीना चाहता हूँ, मैं शराब पीना
- 28:03चाहता हूँ इसलिए स्वर्ग की शराब सुराग लगती है सोम पान।
- 28:17जिससे सूर्य पीते हैं, देवता पीते हैं इस्लाम में स्वर्ग में शराब
- 28:29के जरने बहते हैं, बस सिर्फ तुम्हारी कल्पना।
- 28:36और इतनी सी कल्पना मैं कभी कभी हैरान हो जाता हूँ।
- 28:42मनुष्य की इतनी सी कल्पना है इतनी सी इच्छाएं मनुष्य की बहुत थोड़ी
- 28:49हैं, बहुत गम है यह तो एक कल्प वृक्ष ही पूरी कर देगा।
- 28:57और बैठो माला, फेरते रहो राधे राधे करते रहो लेकिन मेरी अगली
- 29:10बात को ध्यान से सुन लेना। 1 दिन ऐसा आएगा।
- 29:18तुम रात को 12:00 बजे, आंख बजा के भागोगे सर, और बिल्कुल साँझीकंद
- 29:26है नरक की वहाँ प्रवेश कर जाओगे पक्का हँसना।
- 29:38जीस से जीवन में सुख ही सुख है, दुख का तूफान नहीं, इसमें मज़ा भी
- 29:51नहीं होता। परमात्मा मूर्ख नहीं है।
- 29:59तुम एक दर्रा नहीं बना सकते। उसने पृथ्वी जैसे एस्क्राइड आवारा
- 30:06घूमने लगा दिया है तुम्हारे स्पेस में।
- 30:14और तुम संसार पे काबिज होना चाहते हो और उसने न जाने कितने संसार
- 30:20व्यर्थ में घूमते हुए बना दिए ये तमन्ना तुम्हारी क्या होगा?
- 30:30सब कुछ पूरा हो जाएगा और होता है। क्यों बैठ जाते हैं ये संत जो ऋषि
- 30:38हो जाता है क्यों वो किसी भ्रम में नहीं रहता है?
- 30:49जिसे तुम त्याग कहते हो वो त्याग नहीं होता है?
- 30:55इतनी भरपूर मात्रा में भोग लिया है उसे त्याग कहना उचित नहीं
- 31:01होगा। मुँह मुड़ गया है भोगने से इसे
- 31:10तृप्ति कह। बस नाक मुड़ गया और और नहीं बस और
- 31:23नहीं, तुम कहते हो गम के प्याले और संत कहते हैं, सुख के प्याले
- 31:30और। तुम गमों से घबराते हो, संत सुख
- 31:39से घबराता है। नहीं चाहिए कितने साल और अगर
- 31:48तुम्हें। कह दिया जाए अब बस तुम्हें यहीं
- 31:52रहना है तो तुम कान पकड़ लोगे, तुम कहोगे मेरे बाप मुझे निकाल
- 32:01लेना, वो कहेगा कल्पवृक्ष है जो मांगोगे मैं जा।
- 32:12जहाँ मेनका है, उर्वशी है कितनी देर भागोगे, वहाँ कृष्ण भी क्यों
- 32:21न हो, कितनी देर भागोगे? आखिर भोग थका देते हैं।
- 32:34अपने को मैं अपने अनुभव से कहता हूँ, और भी जनघानियों के अनुभव
- 32:46हैं मेरे साथ कि तुम रात को आंधी रात।
- 32:55स्वर्ग को छोड़कर बिल्कुल सांझिकंध है दीवार उसमें धीरे से
- 33:02प्रवेश कर जाओ वो जीवन ही क्या? जिसमें दुख की गहराई न हो, तुम
- 33:16देख लेना ईश्वर करे, तुम्हारे जीवन में ऐसी व्यवस्था आ जाए,
- 33:23सुखी ही सुख हो, मेरे जीवन में ऐसा क्षण आया।
- 33:29मैं तुम्हें ईमानदारी से कहती हूँ।
- 33:35तो मुझे ख्याल आया इस बात का जब मैंने परमात्मा की तरफ हाथ उठाया
- 33:46और परमात्मा से मैंने दुख में कहा।
- 33:51मुझे दुख दे दे पर मत है तुम कहते हो गम की दुनिया से दिल भर गया,
- 34:04मैंने कहा सुख की दुनिया से दिल भर गया ढूंढ ले अब कोई घर गया।
- 34:13जहाँ दुख मिल जाए, तुम्हारी परिभाषाएं और हैं, क्योंकि हर तरफ
- 34:22कमियां ही कमियां हैं। मेरी परिभाषाएं कुछ और थीं जो तुम
- 34:28कहते हो। कुंती ने दुख मांगा है।
- 34:33लेकिन ये नहीं देखते के कब माँगा पता है कब माँगा।
- 34:42कुंती ने दुख तब मांगा जब वो परम सुखी हो गई और सुख से हो गई सब
- 34:48इच्छाएं पूरी हो गई सब दुश्मन मारे गए उसके।
- 34:53दलित राष्ट्र के सौपुत्र गांधारी के सौपुत्र मर गए और उसके सभी
- 34:58पुत्र जीव अत्र रहे और ऐसा व्यक्ति दुख ही मांगेगा।
- 35:05भाई तुम ये? गुप्त सूत्र समझ नहीं आएगा क्यों
- 35:14तुम्हारी ज़िन्दगी के ऊपर से यह लंगर यह वक्त तुम्हारे ऊपर कभी
- 35:22आया नहीं के सुख ही सुख हो, दुख का एक गर्रा भी न हो और जीस जीवन
- 35:30में। सुख ही सुख होता है।
- 35:33मैं कोई मोटिवेशन पे कर ले ईमानदारी से कहता हूँ मैं अपना
- 35:40अनुभव मुझे तुमसे कुछ लेना देना नहीं, मैं अपने हाल में जैसा हूँ।
- 35:50मज़े में हूँ मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए मुझे मेरे हाल पे छोड़
- 36:12दो। मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो, मुझे
- 36:24तुमसे कुछ भी ना चाहिए अगर तुम्हे मेरा अनुभव ठीक नहीं लगता।
- 36:35तो चले जाओ यहाँ से ये लोग कहते हैं बाबा आप बड़े आराम से कह देते
- 36:42मत, सुना करो मुझे हमने आज तक ऐसा व्यक्ति नहीं देखा बुलाते तो
- 36:51देखे। भगाते नहीं देते मेरा दिल अगर कोई
- 36:59दिल नहीं उसे मेरे सामने। तोड़ दो उसे मेरे सामने तोड़ दो,
- 37:20मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए। और तुम तो कहोगे, हमें तो दुनिया
- 37:30से बहुत कुछ चाहिए। हमें एकठ चाहिए।
- 37:36हमें फॉलोवर करोड़ों की संख्या में चाहिए।
- 37:39हमें संख्या बल चाहिए, हमें धन बल चाहिए, हमें सुख बल चाहिए, हमें
- 37:46बल ही बल चाहिए। हुआ क्या है?
- 38:02क्योंकि तुम सुख की इम्तहान को पार नहीं किया हो।
- 38:10कभी वो दिन आए जब तुम सुख की सीमा को लांघ जाओ।
- 38:18फिर तुम्हारी ये दशा हो जाएगी जब कुंती की दशा हो गई, तुम उसे
- 38:24मुर्ख समझोगे, तुम इसके अर्थ के अनर्थ कर लेते हो, लेकिन तुम्हें
- 38:29पता नहीं जो व्यक्ति परम सुख में होता है, वह रातों रात अर्धरात्रि
- 38:35को। साथ सटे हुए नरक के द्वारों पर
- 38:39बेहतर प्रवेश कर जाता है। यह फार्मूला तुम्हारे लिए
- 38:49अस्वीकार्य होगा। तुम कहो ऐसा नहीं होता।
- 38:54मत मानो, लेकिन मित्र ऐसा होता है, परम सुख की सीमाओं को लंकर
- 39:13जैसे ही तुम निकलोगे तुम दुख मांगना शुरू कर दोगे।
- 39:18यह अजीब सा सूत्र है जो तुम्हें किसी ने कभी नहीं दिया।
- 39:26वह व्यक्ति जो बहस करता था, मांसाहारी करना चाहिए या नहीं
- 39:34करना चाहिए। जब नौबत आई वो की।
- 39:38तो मुर्दा के मांस खाने शुरू करती है ये तुम्हारी खोपड़ी चलती ही
- 39:45वहाँ है जहाँ सारा चार्ट तो होता है बुध के लिए कोई चार्ट।
- 39:52नहीं होता। बुद्ध नहीं कहते मैंने ब्रेकफास्ट
- 39:58में क्या लिया लंच में क्या डिन्नर में क्या उसकी तमन्ना कुछ
- 40:02और है? उसकी तमन्ना तुम्हारी तमन्नाओं से
- 40:08ऊपर हो गई। उसने वो भोग लिया जो तुम भोगना
- 40:12चाहते हो। उसने वो तक्षता से लात मार दी
- 40:17जिनको तुम पाने के लिए प्रयत्नशील हो।
- 40:20हाँ मैं भगाता हूँ, तुम कहोगे हमने संत ऐसे तो देखे जो बुलाती
- 40:35हैं। भगाते नहीं देखे क्योंकि मुझे बल
- 40:44नहीं चाहिए मैं खुद बाल हूँ सर्वश्रेष्ठ बाल हूँ मैं मुझे और
- 40:59बाल की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो मुझसे
- 41:07भली कौन ओमनी, इम्पोर्टेन्ट से भली, कोई होता है क्या लेकिन
- 41:18तुम्हारी तमन्नाएँ गलत हैं। मेरे पास रोज़ कमेंट आती है बाबा
- 41:24तुम्हारे घर क्या कमी है ऐसा कर दो ना मेरी भाई टाँगड़ी दुख रही
- 41:37है इसको ठीक करता। मैंने कहा किसी कारण से ही दुखती
- 41:45होगी तुमने कुछ ऐसा किया होगा बाई टांगड़ी दुख रही है तो ये कुछ
- 41:54करना छोड़ दो। किस किसकी टांग किस किस का हाथ?
- 42:02किस किस का सेट ठीक करूँगा मैं एक अकेला और तुम आठ ठहर बाद में और
- 42:11फिर जी भजन तो वो भी तो मैं हूँ, वो भी मेरे हैं।
- 42:22अच्छा ये ना होगा कि तुम पाप करना छोड़ दो, पाप का फल दुख होता है
- 42:30लेकिन तुम पाप करना नहीं छोड़ोगे हम तो ऐसा ही करेंगे बाबा तुम ठीक
- 42:37कर दो। रोज़ कमेंट करते।
- 42:41और यहाँ तक कमेंट आते हैं, मुझे गाली निकाल देते हैं।
- 42:47कल बड़ा मज़ेदार कमेंट है, कब से पका रही हूँ मुझे ठीक कर दो, मेरे
- 42:56पेट में दर्द है। मैंने कहा तो कुछ गलत खा लिया
- 43:00होगा, नहीं नहीं, कुछ नहीं, गलत कर तो फिर कोई कर मैसेज जो उगड़
- 43:07गए होंगे प्रारब तो वही तो ठीक करने को कह रही हूँ।
- 43:21तो फिर तुमने पाप किया है, क्या पाप किया तुमने?
- 43:27ठीक है, मैं करूँ कौन सी किताब में लिखूँ तो मुझे लास्ट कमेंट
- 43:35आया लोग मैं तुझे ब्लॉक करती हूँ अनसबस्क्राइब।
- 43:40पर तुम्हारी क्या चटनी लगा के खाना है?
- 43:51इन्होंने गुरु बनाया है, कुछ और काम देखो कैसे कैसे मांगते हैं
- 43:58फिर तुम्हारी क्या चटनी बना के खाना है लो मैंने सब्सक्राइब कर
- 44:04दिया। तुम दिखाओ कुछ और करते हो मांगते
- 44:15कुछ और हो आ के पांव पकड़ते हो। मेरा दरबार लगा था साईं ऐसा डिफ़र
- 44:32याद तेरे टाइम यार्दास करनी शुरू कर दे और अरदास में इतना कुछ
- 44:43कहती। मड़ई कमा तो बचाई मड़ई सोबत तो
- 44:48बचा देखी कित्ते दूर ना जाई मेनू छाड़ के ना जाई मेनू ए बी करायी
- 44:55मेनू ओह बी करण हाँ बोलता रहा भाई वो तो 10 मिनट बोलता रहा।
- 45:03मेरा भगत का दरबार रखा था। खूब बोला था साईं पे सादी फरियाद
- 45:14दर ताई और फरियाद के नाम पर इताकुश मांग लिया।
- 45:23मेरे तो सर में दर्द होने लगा, मैंने कहा रुक रुको रुक गया,
- 45:35मैंने कहा साईं हूँ के तेरे बाप का गोलम।
- 45:44तुम कहाँ से हो साईं हूँ के तेरे बाप का गोलम तुम इसे अरदास कहते
- 45:58हो। बहुत से प्रश्न आ जाते हैं मेरे
- 46:04पास बाबा फिर अरदास न करें तो और मांगेंगे किस से मुझे आ जाते हैं
- 46:12फिर हम किसकी आगे फरियाद करें, किसकी आगे रोना रोएं?
- 46:17मैंने कहा तुम पाप करना बंद करो, अपने आगे रोना रो।
- 46:23मेरे आगे क्यों रोते हो? तो फिर गुरु होता किस लिए है,
- 46:27मैंने कहा तुमने खरीद लिया है क्या?
- 46:31गुरु होता है तुम्हें तुम्हारा आपा दिखाने के लिए और जब एक बार
- 46:38आपा दिख जाए। तो सारे दर्द यज्ञ सा दूर हो
- 46:43जाएंगे, न सिर दर्द रहेगा, न पांव दर्द रहेगा, न पेट दर्द रहेगा, न
- 46:51कान दर्द रहेगा, न हृदय में दर्द होगा, न तकलीफ होगी, न आग लगेंगी,
- 46:57न चिंताओं की अग्नि जलाएगी। मैं वो शे हूँ जो तुम्हारे दुखों
- 47:03का यक साहरण कर लेता हूँ अलग अलग तुम्हारे दुखों को हरण नहीं करता
- 47:14तुम मुझे इसीलिए गुरु मत बना लेना कि तुम्हारे कैंसर है, ठीक हो
- 47:18जाएगा। न तुम्हारे कैंसर नहीं है, यह जान
- 47:26फार्मूला मेरा उल्टा है मानता हूँ, लेकिन एकदम से ठीक है उल्टा
- 47:32है। तुम्हारी इच्छाएं, तुम्हारी
- 47:37मान्यताओं, तुम्हारी त्रिष्ट नाओं तुम्हारी वासनाओं से उलट है,
- 47:44लेकिन सटीक है तुम आज कहते हो पांव में दर्द हो रहा है, कल
- 47:52कहोगे फिर ये मन का हिल गया थोड़ा।
- 47:55ये ठीक कर दो, ये सर्वाइकल है, ये चक्कर सा आ रहा है ये भी ठीक कर
- 48:05दो बाबा तो मैं सारा कुछ ही ठीक कर देता हूँ, थोड़ा आओ तो।
- 48:13सब ठीक कर दूंगा, मैं और अलग अलग से नहीं ठीक करूँगा ये बात ध्यान
- 48:20मेरे को लेना मैं उससे परिवार मेरे पास आ जाती।
- 48:26मेरे बेटे को गाय का बना दो, मैं बोला ठीक है, बना दूंगा।
- 48:33और पता चलता है। अगले दिन पकड़े गए छोटे बच्चों से
- 48:39रेप करते पकड़े गए। लगना चाहिए था पॉक्स को एक्ट,
- 48:45बाहर भरते हैं ये लोग और मुझे दोष देते हैं मेरे बेटे को गायक नहीं
- 48:57बनाया। मैंने कहा जब ये बदमाश बनना चाहता
- 49:00है तो मैं गायक क्यों मरुं दो दो चीजें थोड़ी होती हैं।
- 49:08शक्ति एक तरफ लगेंगी। या गायकी में लगेंगी या बदमाशी
- 49:13में लगेंगी? तुम रोज़ पुलिस में 70 80,000 दे
- 49:18आते हो या तो वो लगा दो या गाने की अड्वर्टाइज़्मन्ट में लगा दो
- 49:26पैसा तो एक तरफ़ ही लगेगा। और वो भी बड़ा होशियार आदमी था,
- 49:36घर वालों से पैसा नहीं लेता था, इधर उधर से मांग ले बेचारा हमारा
- 49:43एडिटर रोहित भी रगड़ा गया। नहीं बस इससे ज्यादा आपको क्या
- 49:50बताऊँ जब तुम इतने सुखी हो जाओगे जब तुम इतने सुखी हो जाओगे तुमने
- 50:06कभी देखा? दीपावली के दम तुम कितना मीठा खा
- 50:12लेते हो, कितना मीठा खा लेते हो? पेट भी भर लेते हो, मन भी भर जाता
- 50:23है, अलकत आती है। सांज कोई कहे के बस एक ही है जाम
- 50:29और खा लो, तुम कहोगे नहीं नहीं अब तो वोमिटिंग हो जाएगा नहीं खाना
- 50:35है हमने बड़े समझदार थे हमारे सनातन के तो अगले दिन खूब नमक,
- 50:43मिर्च सब अन्नकूट। मूली, उसमें गाजर, उसमें बैंगन,
- 50:48उसमें हरी मिर्च, उसमें काली मिर्च, उसमें लाल मिर्च सब कुछ
- 50:54उसमें होता है। पालक उसमें धनिया उसमें सारा कुछ
- 50:57से ही अन्नकूट करते हैं और कढ़ी के बीच में चावल और पकौड़ा।
- 51:07मीठा तो बहुत खाया। अगले दिन खूब नमक, मिर्च, तला हुआ
- 51:12सब खा लेते हो, बैलेंस हो जाता है, समझदारी के लक्षण हैं।
- 51:23तुम दुखी हो। हमारे ऋषियों ने बखूबी जान लिया,
- 51:29ठीक बनाई, गलत बनाई कहानियों बनाकर तुम्हें त्योहार दे दिया
- 51:37क्योंकि वो जानते हैं कि तुम दुखी हो।
- 51:43दुखी हो तो तुम नाच लोगे, रंग बिखेर लोगे, थोड़ा खुराफात कर
- 51:48दोगे और तुम नाच कूद कर जश्न मना दोगे इसको जश्न कहते।
- 52:03तो ऋषि ने त्योहार मना लिए। ऋषि ने प्रथम कोशिश की कि तुम जान
- 52:09लो तुम हो कौन तुम वो हो जैसे दुख नहीं होता।
- 52:15तुम वो हो जो कटता नहीं, जो गलता नहीं, जो जलता नहीं, जो सूखता
- 52:19नहीं, जो बेगता नहीं, लेकिन तुम नहीं समझे तो फिर उन्होंने दूसरा
- 52:25उपाय कर लिया। चलो थोड़े से दिनों के बाद।
- 52:33मुझे लोग कहने लगे, तुम्हारे हिंदुस्तान में छुट्टियाँ बहुत
- 52:36होती हैं, क्या होता है? मैंने कहा हिंदुस्तान के लोग दुखी
- 52:39बहुत हैं और इस दुख को पता न लगे भूल जाओ, थोड़े दुख खत्म नहीं
- 52:50होता है। नागिन डांस करने से कभी दुख दूर
- 52:57हुआ है और बढ़ जाता है बस तुम किसी ना किसी तरह हर चीज़ को जश्न
- 53:07बना लेना चाहते हो और देखो जीस घर में जश्न ज्यादा मनते हैं।
- 53:16गुस्सा मत करना मेरे और कर भी लोगे तो मेरा क्या बिगाड़ लोगे?
- 53:24वो घर उतना ही ज्यादा दुखी होता। है।
- 53:33आज यहाँ हवन हो रहा है आज ये यज्ञ हो रहा है आज ये है आज वो है आज
- 53:41सप्तमी है आज अष्टमी है, आज नवमी है रोज़ जो त्यौहार होते हैं
- 53:46तुम्हारे क्योंकि तुम रोज़ दुखी होते हो।
- 53:55और तुम दुख का बेसिक कारण रिमूव करने में कोई शक्ति नहीं झोंकता
- 54:04तुम शक्ति झोंकते हो, दुख के विपरीत।
- 54:10जश्न मनाने गए वह नकली नकली चलेगा।
- 54:14यह भ्रष्ट के फूल हैं। दुर्गंध आती है तो तुम्हें बाग
- 54:22खिलाने होंगे जो पक्के पक्के से तुम्हें सुगंध दे सके।
- 54:29बगीचे बनाने होंगे। तुम तो प्लास्टिक के फूल ले आते
- 54:35हो, उनमें न तो खुशबू होती है, खुशबू भी तुम्हारी होती है, फूल
- 54:41भी तुम्हारे होते हैं। बस तुम्हारा जीवन ऐसा ही जीवन है।
- 54:50नकली नकली साक्रियित्रम फूल भी कीमती कृत्रम और इत्र भी कृत्रम
- 55:00सुख वो है जो भीतर से पैदा होता है।
- 55:04अभी तो तुम सुखी ही नहीं हुए। दुख मांगोगे कैसे?
- 55:11कभी सोचो अभी पड़ाव बड़ा लम्बा है, अभी सुखी ही नहीं हुए।
- 55:22दुख मांगने का जिक्र जुटा कैसे पाओगे?
- 55:30दुःख मांगने का जिग्रह प्राणों से पूरी खुशहाल कुंती कर सकती है
- 55:39कुंती की सब इच्छाएं पूरी। वह कुंती जो दर दर भौंकती फिरती
- 55:45थी वह कुंती जिसने ना जाने कितने दुख देखे हैं, हर तरफ से दुखी थी
- 55:57और ईश्वर ने उसके शब्द दुख का हरण कर लिया है।
- 56:01दो माताएं थीं। कृष्ण की एक माता ने शराब दे दिया
- 56:09माँ गंधारी मैं चला हूँ द्वारिका आशीर्वाद लेता हूँ चर्णो सपर्श
- 56:19किए हाथ जोड़ के। वासुदेव मुझे एक बात का जवाब देता
- 56:28हूँ, पूछो मत, अगर तुम चाहते तो ये युद्ध रुक जाता या नहीं रुकता
- 56:38अब गश्न कैसे कर सकते हैं? कृष्ण को पता है अगर मैं चाहता तो
- 56:48युद्ध कैसे न रुकता। देखिए यहाँ एक बात और समझ लेना ये
- 56:54इन बातों को टिक मार कर दिया करो दे दिया करो।
- 56:59उस तल पर पहुंचा हुआ व्यक्ति परमात्मा हो जाता है, वह कुछ भी
- 57:09चाहेगा पूरा हो जाएगा तुम्हारे लिए बड़ी मुश्किल बात है तुम तो
- 57:15अगर कोई झूठ भी निकले मुझे लोग मजाक किया करते हैं आके।
- 57:21जो लोगों को मूर्ख बनाती हैं। बाबा मैंने आज एक पोस्ट डालते हैं
- 57:28वहाँ पर एक वृक्ष होता है वहाँ हाथ लगाकर आ जाओ, इस नक्षत्र में
- 57:33पता है आज ये नक्षत्र है और तुम घर आते ही अरबपति हो जाओगे।
- 57:42मैंने कहा पुत्र लोग तो अरब पति नहीं हैं, तुम्हे नर के जरूर मिल
- 57:48जाएगा लोगों को भटकाने का वो कैसे बाबा लोगों को गुमराह करके
- 57:57तालियां बजाना। खुश हो ना यह पाप है।
- 58:05बहुत से लोग मुझे कह देते हैं हम तो भगवान का नाम प्रचारित करते
- 58:09हैं, मैंने कहा यह भी पाप है, ये कैसे पाप हैं, भड़क जाते हैं।
- 58:16ये जो तुम जानते हैं उसका प्रचार करना पाप है।
- 58:19बस ये परिभाषा समझलो जो तुम जानते नहीं जो तुमने अपनी आँखों से देखा
- 58:28नहीं, उसका प्रचार करना पाप है। अब एक्सप्लनेशन तुम करते रहना,
- 58:38हमने तो बोल दिया जिसने जाना मन हो जाता है, वह बोलता नहीं।
- 58:53उसे बलवाना पड़ता है, तुम बोलते हो निहित कारण कुछ और होगा इसी से
- 59:05समझले न सारी बात तुम जीना चाहते हो।
- 59:14और अगर सुखी न जी पाओ तो दुखी हो के ही जी लें, कोई बात नहीं और
- 59:21दुनिया तुम्हारे पांव छुए। आके तो इतने बुद्धू हो तुम्हें
- 59:28पता नहीं ये पांव आज है। कल नहीं रहेंगे।
- 59:33बस ऐसे ही मूर्ख आज हमारी संस्कृति को तबाह करने पर तुले न
- 59:40जिनको यह पता कि राधा का नाम कैसे उतार जाएगा, तुम्हें खुद अभी तरे।
- 59:53तुमको कैसे दर्जन करें यही पाप कहता हूँ, मैं बहुत बोलता हूँ
- 1:00:04क्योंकि मैं चुप हूँ, मैं खामोश हो गया।
- 1:00:09जो व्यक्ति उस स्तर पे पहुंचता है।
- 1:00:12बैच चुप हो जाता है फिर उसको बुलवाना पड़ता है।
- 1:00:18मैं बोला नहीं मुझे बुलाया। बस तुम्हारी आत्मा से ज्यादा आत्म
- 1:00:38अनुसंधान करने वाला और कुछ भी तत्व बने तुम भलीभाँति जानते हो
- 1:00:45कि तुम झूठ बोल रहे हो जाना देखा। परखा तुम अच्छी तरह जानते हो और
- 1:00:56ध्यान रखना अगर तुमने गंदगी फैलाई, गिरेगी तो मेरे ऊपर आसमान
- 1:01:04में जो चीज़ फैलाई जाती है, धरती पे आया करती है इस बात का ध्यान।
- 1:01:11और धरती पे तुम खड़े हो जीने की तमन्ना जी वैष्णव
- 1:01:27तुम्हारी ये तमन्ना है कि मैं सुखी होके जाऊं और अगर सुखी होके
- 1:01:33न जुऊ तो मैं दुखी हो के भी जुऊ लेकिन जुऊ?
- 1:01:40यही तुम्हारी तमन्ना तुम्हें उस गंतव्य सतर्क पर पहुँच नहीं नीती,
- 1:01:51यह कलिंगिंग का कारण बन जाती है और देखो कलिंगिंगनेश।
- 1:01:56शुभ हैं या अशुभ हैं यह मायने नहीं रखते हैं।
- 1:02:01चिपकाहटें साधारण गोद से चिपकाई गईं या फेविकोल से या एरेला
- 1:02:09डाइट्स से या कोई बड़ी से बड़ी चिपकास इसका कोई मतलब नहीं।
- 1:02:15बात तो ये है कि तुम चिपके यह चिपकाहट तुमको हर ट्रेन नहीं देगी
- 1:02:24और यह तुम्हें वादे रखेगा और फिर तुम चलाओगे मैं मुक्त होना चाहता
- 1:02:32हूँ। चिप कहटों को तुम छोड़ नहीं पाते
- 1:02:34चिप कहटे तुमने स्वयं पैदा की है डिमांड करते हो मुक्ति की कैसे
- 1:02:42मिलेंगे तुमने बाज़ तो बड़े गहरे लगा दिए।
- 1:02:50इतने गहरे लगा दिये कि ये पांच खुलता ही नहीं और कह देते हैं
- 1:03:03बाबा तुम निंदा बहुत करते हो, नेका, तुम्हारे अल्फाज़ करते हैं।
- 1:03:17हम अपने घर की सफाई साल में एक बार तो करते हैं अगर वो लगे हुए
- 1:03:24जाले मकड़ी और वो सारी धूल दमाश जो दीवारों से चिपक गई, छत से
- 1:03:31चिपक गई, हमारे पर्दों पर लग गई, फर्श पर लग गई।
- 1:03:37सब कहीं उसका साम्राज्य है अगर वो झाड़ना निंदा है, तो मैं निंदा
- 1:03:44करता हूँ। मैं इन्हें स्वच्छ बनाना चाहता
- 1:03:49हूँ क्योंकि ये जमती जमती जमती जमती।
- 1:03:54आज इसलिए तो तुम्हारी दुर्दशा हो गया।
- 1:03:57तुमने खूब संस्कारों को जमने दिया हटैया और वो भी बेला थी जब जीवंत
- 1:04:07स्त्री को लोभ दिखा के पूजी जाओगे, जिंदगी तो वैसी भी नर्क
- 1:04:14है। दूसरी शादी होने नहीं देंगे तो जल
- 1:04:18जाओ, बढ़िया सती कहलाओगे और उसको भांग खिला देते, नशा खिला देते,
- 1:04:26गांजा पीला देते, मादक द्रव्य दे देते, उसको जला देते हैं।
- 1:04:32ये अच्छे दिन थे क्या? दंड है वो महापुरुष जिन्होंने इन
- 1:04:46मूड़ताओं को हटाया आज स्त्री इन परपंचों से बाहर आई।
- 1:05:00लेकिन पुत्रियो अभी तुम बहुत बंदन में हो मेरी बात को गौर से सुन
- 1:05:08लेना, नर और नारियों को जन्म देने वाली नारी तुम महान हो।
- 1:05:23तुम अपनी अपने मूल को पहचान मन तू जोत स्वरूप है, अपना मूल पहचान बस
- 1:05:36तुमने अपने मूल को नहीं पहचाना। तुम आदमी की गुलाम होकर रखे और
- 1:05:46मुक्ति देगा तुम्हें वो भी आदमी देगा ये तुम्हारा अधिकार है, ये
- 1:05:56तुम्हारा अधिकार है। तुमने आदमी को जन्म दिया, पुरुष
- 1:06:06को जन्म दिया तुमने नारी को भी जन्म दिया तुमने और तुम्हारे लिए
- 1:06:16नियम पुरुष बनाए, शास्त्र पुरुष बनाए।
- 1:06:24गलत है, यह बात तुम अवला नहीं हो, यह ठीक कि तुम्हारी संरचना
- 1:06:36शारीरिक संरचना थोड़ी कमजोर है। लेकिन इतने भी कमजोर नहीं तुम
- 1:06:42शक्ति स्वरूपा सहलाती हो, तुम्हें उठना ही पड़ेगा तुम्हें झंडा
- 1:06:50विलंद करना ही होगा अपनी स्वतंत्रता का।
- 1:07:02और ध्यान रखना पुरुष तुम्हारा गुलाम है।
- 1:07:11पुरुष तुम्हारा गुलाम है, उसको मालिक मत बनने देना।
- 1:07:21इन अर्थों में कब तुम्हारे लिए इतिहास बनाए, धर्म ग्रंथ बनाए या
- 1:07:33जीवन को जीने का डंका बनाए? खोज लेना।
- 1:07:40हम प्रसंग पे वापस आए, यद्यपि। वीडियो बहुत लंबी हो गई है।
- 1:07:50मनुष्य जीना चाहता है। सुखी जीना चाहता है।
- 1:07:59और अगर सुखी न जिए तो? दुखी भी जीना।
- 1:08:01चाहता है, लेकिन जीना चाहता है। तुमने कहा पाप का मूल क्या है?
- 1:08:07पाप का मूल है जी विष्णु। और जीवेशणा का टूट जना बड़ा।
- 1:08:17शुभ संकेत है। उस दिन जश्न मनाता है, सारा
- 1:08:22अस्तित्व नाचता है। क्योंकि बड़ी से।
- 1:08:26बड़ी धारणा है जीवेशणा बड़े से बड़ा पाप।
- 1:08:31का कारण है। जीवेशणा।
- 1:08:34तुम्हें पता नहीं, यह भी कोई जीना है दर दर।
- 1:08:42के भिखारी हो के भी। कोई जीना है लाख भेड़िया हैं
- 1:08:46तुम्हारे दिलो दिमाग पर यह भी कोई जीना है?
- 1:08:56मैं तुम्हें ये नहीं कहता कि तुम। मर जाओ मैं तुम्हें ये।
- 1:09:01कहता हूँ अपनी बेड़ियों को? तोड़ दो।
- 1:09:07ये जो भेड़िया तुम्हारे ऊपर। ताकतवर लोगों ने डालती हैं।
- 1:09:16इनको तोड़। गुलाम मत बना।
- 1:09:24पहले। ही से गुलाम हो अपनी।
- 1:09:26वासनाओं के। और ये जो तुम्हें स्वतंत्र होने
- 1:09:29की कवायद देते हैं, यह खुद गुलाम है।
- 1:09:33अपनी बसनाओं के अपनी बसनाओं से आजाद नहीं हुए।
- 1:09:43गुलामी को खत्म कर दो तभी मुक्त होगे तुम।
- 1:09:51महावीर को। महावीर का खिताब क्यों?
- 1:09:54मिला। उन्होंने ऐसा क्या कर?
- 1:09:57दिया, कोई जंग नहीं जीता। पानीपत की लड़ाई नहीं जीती।
- 1:10:03कोई तलवार नहीं उठाई। फिर भी जीते महावीर महावीर का
- 1:10:12खिताब? मिला इस।
- 1:10:14अलंकार से विभूषित हुए। क्यों हुए, क्या बात थी?
- 1:10:19ऐसा क्या था जो हमारे ऋषियों ने उन्हें महावीर कह दिया?
- 1:10:26ऐसी वीरता का? क्या काम था अपने विचारों?
- 1:10:32पर विजय प्राप्त करना बड़ी। से बड़ी वीरता होती है ये
- 1:10:37तुम्हारे वैरी जो दिन भर। रात तुम्हारा पीछा करते हैं।
- 1:10:43काम क्रोध, लोह। मोह अहंकार मद मत सर।
- 1:10:52इन पर उन्होंने। विजय पाली।
- 1:10:55और यहाँ तक? कि।
- 1:10:57जीवेशणा के ऊपर भी उन्होंने विजय प्राप्त किया।
- 1:11:05उनकी कोई इच्छा नहीं रही। मैं जीऊं।
- 1:11:10सुखी होके जीऊं यह। तो छोड़ो सुखी होके।
- 1:11:15जीऊं यह छोड़ो। उन्होंने जीने की उमंग ही त्याग
- 1:11:19दी। भला क्यों?
- 1:11:21त्यागते। तुम जीने।
- 1:11:24की उमंग मत त्याग देना। अदर्वाइज़ यू विल कमिट सुसाइड?
- 1:11:31इस स्थिति में तुम जीने की उमंग मत त्याग देना क्योंकि तुम अभी अध
- 1:11:36कच्चे हो। उन्होंने कुछ ऐसा किया।
- 1:11:43जो मैंने पहले बताया के इतने सुखी हो जाओ के स्वर्ग से।
- 1:11:50भी रातों रात भागना। पड़ा है।
- 1:11:56और नरक से तुम डरो ना नरक। के द्वार में चोरी छुपे प्रवेश कर
- 1:12:01जाओ। जिन सिंघाचनों को हीरे जौरात
- 1:12:06मोतियों। को।
- 1:12:11भरे हुए लोकर्स को तुम। चाहते हो पाना वह आंधी रात को
- 1:12:17चोरों की तरह उसको छोड़कर भागता है।
- 1:12:21जीस स्वर्ग को। तुम्हारे ऋषि मनी पाना चाहते।
- 1:12:23हैं। जब तुम उस स्वर्ग को रातों रात।
- 1:12:30बड़ी ऊब है स्वर्ग में तुम्हें पता नहीं, इसलिए मैं कहता हूँ
- 1:12:34गलती। से भी स्वर्ग मत माँग।
- 1:12:36लेना थोड़ी बहुत देर के लिए तो चलेगा।
- 1:12:42लेकिन अमर। होने का वरदान मत मांग।
- 1:12:44लेना फिर तुमसे। बड़ा दुखी कोई न होगा।
- 1:12:50फिर जितनी तुम्हारी दयनीय स्थिति होगी, तुम जानते नहीं हो मैं
- 1:12:55जानकर बोल रहा हूँ। किसी शास्त्र।
- 1:12:58में यह बात नहीं लिखी। दिखी तुम कहते कागज़ की लिखी और
- 1:13:05मैं कहता हूँ, जब सुख इतना प्रगाढ़ होता है, बरसता है तो
- 1:13:11कहाँ जीने की इच्छा रहती है? ना सुखी होने की काम न करो।
- 1:13:21ऊब जाओगे सर से तो दुख के क्षेत्र में प्रवेश कर जाओगे, वो भी में
- 1:13:28तृप्त न। कर पाएगा?
- 1:13:32एक। और क्षेत्र है सुख और।
- 1:13:34दुख से ऊपर उठकर उसे आनंद कहते हैं न?
- 1:13:40सुख तृप्ति देता न दुख। तृप्ति देता, आनंद, तृप्ति देता
- 1:13:47और आनंद। विषय है।
- 1:13:51जिसके बिना तृप्ति मिलते हैं लाख तुम चक्रवर्ती।
- 1:13:55सम्राट बन जाओ। लाख तुम।
- 1:13:59दुनिया के मालिक बन जाओ। शहंशाहे आलम हो जाओ, तृप्ति नहीं
- 1:14:04आये इसलिए कबीर? ने कहा जब आ वे संतो।
- 1:14:09का धन। सब धन दौड़ समान जो व्यक्ति आपको
- 1:14:21पाठ सगाता। है।
- 1:14:25उपनिषद का अष्टावक्र गीता का गीता।
- 1:14:35बात बताता है जनक की वह। व्यक्ति कामना ये करता है पीढ़
- 1:14:48करो सहायता। करो।
- 1:14:54किसकी? जो हमने ये ढमढमा बनाया।
- 1:15:05इसकी सहायता करो, इसको बलवान करो उनके।
- 1:15:12चैनलों के ऊपर। जगमग जगमग करता हुआ आर्थिक सहायता
- 1:15:18करें। आर्थिक सहायता करें।
- 1:15:22क्यों भाई? क्या आवश्यकता पड़ गई है?
- 1:15:29मेरे पास लोग आ जाते। हैं बाबा बैठने को जगह?
- 1:15:32नहीं है। मैंने कहा तो फिर बना लो तुमने
- 1:15:39बैठना है मैं तो यहाँ भी। बैठा वहाँ भी बैठा था।
- 1:15:45तुम यहाँ घसीट लाए, मैं यहाँ आ गया, अब तुमने बैठना है इंतजाम कर
- 1:15:50लो अगर बैठना है। नहीं, मैं तो साला कहता हूँ,
- 1:15:55दीक्षा लो, घर जाओ। घर से बढ़िया और कुछ नहीं होता
- 1:16:03क्यों इकट्ठा करते? हो क्यों जाए?
- 1:16:05ऋषिकेश क्यों जाए? हरिद्वार क्यों जाए गंगोत्री
- 1:16:09क्यों जाए यमुनोत्री? क्यों जाएं चार धाम पागल हुए हों?
- 1:16:16चार धाम के लोग संतों की तलाश में भटक रहे हैं।
- 1:16:21संत नहीं, वृद्ध चार। धाम तो यहाँ रहेंगे कहीं?
- 1:16:27नहीं जाएंगे। चार धाम यहीं हैं।
- 1:16:30यही थे यही रहेंगे, लेकिन संत नहीं मिलेगा सच्चा।
- 1:16:37संत अगर तुम्हें। कहीं मिल जाए, वहीं बैठ जाना उसके
- 1:16:44आसपास। बैठ?
- 1:16:45जाना बस। तुम्हारे जीवन का लक्ष्य।
- 1:16:50पूरा हुआ तुम जीना। चाहते हो सुखी हो?
- 1:16:56के। जीना चाहते हो?
- 1:16:58मैं नहीं कहता कि तुम मर जाओ, मैं कहता हूँ जीवन की इच्छा समाप्त हो
- 1:17:05जाये, इतना सुखी हो जाओ और होते हो?
- 1:17:09अगर न होते होते तो मैं बोलता भी नहीं इतने सुखी होते हो, वहाँ भी
- 1:17:17ऊब होती है उस ऊब से फिर ऊपर उठोगे वहाँ आएगा आनंद बस वहाँ
- 1:17:25जाके तृप्ति। होती है।
- 1:17:27एक। ही।
- 1:17:28तल है जहाँ जा के तृप्ति मिलती है ओह डिट्ठे सभ्यथा नहीं तो द जे
- 1:17:40हया उस जैसा कोई भी नहीं डिट्ठे सभ्यथा।
- 1:17:47नहीं तुध जिया तेरे जैसा कोई नहीं वहाँ पहुँच जाओ जिसके।
- 1:17:53जैसा कोई भी। नहीं और वो तुम्हारे भीतर भी है।
- 1:18:00यहाँ सिर्फ़ मेरे भीतर नहीं। बस मुझे पता चल गया है तुम्हारे
- 1:18:05भीतर भी है। पर मुझे दुख होता है जब एक तीर्थ
- 1:18:10चल। के मेरे पास आता है।
- 1:18:12शर्मसार भी होता है। आज एक तीर्थ चल के मेरे पास आया
- 1:18:20है। फर्क क्या?
- 1:18:23है। मैंने जान लिया कि मैं तीर्थ हूँ,
- 1:18:28इसने अभी जाना। नहीं कि मैं तीर्थ हूँ।
- 1:18:31इतना सा फैसला इसे घर। बैठ के हल कर लो।
- 1:18:38यहाँ से सीख जाओ। पाथ।
- 1:18:42और अपने। ही भीतर मिलेगा।
- 1:18:44जब भी। मिलेगा और जब मिलेगा तो फिर
- 1:18:50तुम्हें तीर्थ। यात्राओं पर।
- 1:18:53भोंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, चार धाम बेकार हो जाएंगे।
- 1:19:18हम सपायों मानसरोवरु ताल तलैया क्यों ढोल।
- 1:19:35मन मस्त हुआ। फिर क्यों बोला मन मस्त हुआ?
- 1:19:47फिर क्यों बोला? हीरोपयो गांठ गठियायो।
- 1:20:10बार, बार, वा। को क्यों खो ले?
- 1:20:19मन मस्त हुआ मस्त हुआ फिर क्यों बोल?
- 1:20:31क्यों बोले? क्यों बोले, क्यों बोले, क्यों?
- 1:20:48हाँ, बोला मन मस्त हुआ आया तो क्यों बोला?
- 1:21:02तेरा साहब। है।
- 1:21:08तुझ माहि। तेरो साहेब है तुझे माही चार धाम
- 1:21:22फिर क्यों डोले? चार धाम फिर क्यों?
- 1:21:33डोल फिर क्यों बोला मन मस्त हुआ फिर क्यों बोला?
- 1:21:52धन्यवाद।