Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Oct 25 - सतोरी, समाधि और परमात्मा? मुक्त कैसे होंगे? मान्यताएं कैसे टूटेंगी? सिमरन का रहस्मय अर्थ? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:02जसवीर सिंह कनाडा से एक को सुमरिया नाम का जो जल था रिया
- 0:18समर। दुज्जा काहे से मरी जो जमे ते मर
- 0:29जाए बाबा जी, श्री और नानक के इन शब्दों को।
- 0:46रहस्यत्मक तल पर जाकर व्याख्यात करने का कष्ट करें।
- 1:03मनीष ने अगर बड़ी से बड़ी गलती की है जीस भाषा का उपयोग होना चाहिए
- 1:11था, उसी का दुरुपयोग कर ये बिल्कुल ऐसा है।
- 1:24जैसे तुमने अपनी ही छुरी के साथ सब्जी काटने के लिए लेकर आए थे
- 1:32अपनी गर्दन काट ली। ऐसा ही भाषा के साथ अन्याय हुआ
- 1:40है। एक को सुमर्य नाम का जो जल, थल,
- 1:50रया, समाज जो सब जगह मौजूद है। ओमनी प्रेसेंट है जल में, थल में,
- 1:58नभों में। उसका ही वजूद।
- 2:04है। कण कण में वो ही है ईशाबा से मैडम
- 2:09सर्वगम जगत आम जगत। वह सर्वव्यापक है।
- 2:21उसे एक को। आप कहते हो हम उसे एक को ही सिमर
- 2:37रहे है, हाँ आगे चलिए। आधा अधूरा वाक्य पूरा मतलब नहीं
- 2:49निकाल सकता। अगले पहरे में कहा गया दुज्जा
- 3:01काहे सा मर गया जो जमे ते मर जाए। असल में मैं कहूंगा पलटू हो या
- 3:20नामदेव हो या कोई भी संत हो नहीं नहीं।
- 3:34करीब करीब सभी संतो को पूरा पूरा पड़ा है।
- 3:40लेकिन जो बात नानक में पाई वो बात कही और कमाल की बात है कि नानक के
- 3:57ही शिष्य भटक गए और उन्हीं शब्दों को लेकर भटक गए।
- 4:06ये दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है हैलो अब मैं गहराई में जाके उस
- 4:20स्थल पे जाता हूँ और तुम्हें क्षण भर में समझा जाएगा।
- 4:29कि बाबा बोल के क्या कहे, हमने अर्थ क्या निकाला?
- 4:35इसलिए मैं कहा करता हूँ इन आचार्यों को इन चार लोगों को।
- 4:47इनसे सोचना सीख लेना बड़े दक्ष लेकिन जब ये अध्यात्म की बात करें
- 5:03तो इनसे कह देना चुप हो जाओ, चुप हो जाओ ये तुम्हारे बोलने का
- 5:10अधिकार भी नहीं है उस क्षेत्र में।
- 5:18दूजा काहे समरिये ये शब्द ब्याज निचोड़ है दूजा काहे समरिये जो
- 5:37जमे के मरजा। और जब तुम्हें समझाया जाता है तो
- 5:47तुम समझाने वाले की गलती निकाल देते हो, ज़रा कोर्स से देखना
- 6:00जिसे तुम सुम्रण कहते हो। क्या वह समरण है, एक का है या
- 6:15दूसरे को सुमर रहे है? बाबा कहते है, तुम दूसरे को सुन
- 6:22रहे हो, तुम दूसरे को याद करो। वह गुरु तुम्हारे लिए दूसरा है,
- 6:31क्यों तुम जानते हो अल्लाह तुम्हारे लिए दूसरा है।
- 6:42क्योंकि तुमने कभी देखा? नहीं जिसे तुम ठीक से देखा नहीं।
- 6:52वह दूसरा है। तुम राधा को सुना रहे हो, तुम
- 7:01राधा हो जैसे एक की बात कर रहे हैं।
- 7:09सदगुरु नानक क्या राधा वह है राधा तो एक अपंच भौतक सर कृष्ण भी एक
- 7:24अपंच भौतक सर बड़े मज़े की बात है।
- 7:28लोग मेरे नाम का जाप करने लगे। ओम नमा बाबा तेरे विजयव्त साय नम।
- 7:37मैंने कहा क्या पागल? और वो भी मेरे बैठे बैठे।
- 7:50अरे, डूबना है तो बाद में डूब लेना, मेरे बैठे बैठे तो तैरने का
- 7:56अभ्यास करो, लेकिन नहीं। मानव मन सत्य को विकृत करने में
- 8:09कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ता। इसे समझे मैं उसी तल पे आ गया, एक
- 8:28को सुमर लेना उनका, मैं एक हूँ और हर दिशा में मेरा फैलाव जर्रे
- 8:40जर्रे मैं रोम रोम मैं मैं हूँ मैं।
- 8:48यहाँ आकर तू ही तू नहीं चलता। इस दल पर आगाज मैं ही मैं होता
- 9:02है। तुम से नर्सिसिस्म कह देते हो या
- 9:12तुम बहुत है एक को सुमरीय नान का सुमरन का मतलब याद करना नहीं।
- 9:29अर्थ के अनर्थ हो गए अन्यथा तुम एक पल में जा सकते हो, दूसरा पल
- 9:35भी ना लगेगा। अष्टावकृत कहते हैं हे जनक तुम
- 9:46इसी जन्म की बात करते हो? घोड़े की एक टॉस से दूसरे टॉप पर
- 9:53जाने के लिए इतना वक्त लगता। मैं तुम्हें इतने वक्त में आत्मजन
- 9:59करा था और कृष्ण ने अर्जन को प्रभाव भी दिया।
- 10:07महाभारत के युद्ध में एक नियम था जो सबसे व्ययवृद्ध भीष्म पिता ने
- 10:14तय किए थे और दोनों दलों को मान्य थे।
- 10:23एक फौज की तरफ से शंख बजाया जाएगा।
- 10:27यह इशारा होगा कि हम लड़ने के लिए तैयार है।
- 10:37अगर दूसरी फौज भी लड़ना चाहती है अभी तो अपना शंखनाद करता।
- 10:43है। और भीष्म पिता मैंने बिगुल फूंक
- 10:48दिया था। लेकिन कृष्ण भगवान पांच छः जन
- 10:53नहीं बचा सके। कारण वह योद्धा क्षत्रिय वीर
- 11:04अर्जुन कप रहा है और युद्ध दूसरी ने करना है।
- 11:14उधर से हरी झंडी आ चुकी है। क्या हम तैयार प्रथम दिन है सुबह
- 11:25की वेला? दूसरा बिगुल बजा, उधर से थोड़ी
- 11:38देर इंतजार करते हैं भीषण पिता मैंने दूसरा बिगुल फूंक दिया
- 11:49लेकिन अर्जुन है कभी। अर्जुन तो भागने की तैयारी में है
- 12:03और कृष्ण जानते हैं अगर विषम पिताम ने तीसरा बिगुल फूंक दिया,
- 12:09उसके बाद विषम पिताम देखेंगे नहीं कि हमारी तरफ से बिगुल आए।
- 12:17चौथा बिगुल वो नहीं फूंकेंगे, शंखनाद नहीं करेंगे वो फिर तो
- 12:22आक्रमण हो ही जाएगा। इसका मतलब कि तुमने समर्पण कर
- 12:32दिया है, तुम लड़ने को तैयार नहीं हो।
- 12:34तुमने समर्पण कर दिया है तो ठीक हम तुम पे प्रहार करते हैं तुम
- 12:39लेट जाना, तुम बिछे जाना और किशन जानते हैं के व्यय वृद्ध विषम
- 12:51पिता ने शंखनाद कर दिया है। इधर से शंखनाद करना फिर।
- 12:58पांच ये जननी का कृष्ण भगवान है आज्ञा लेनी थी द्रौपदी के भाई से
- 13:10दृष्ट देवमन से क्योंकि सेनापति दुर्गाविथ आज्ञा लेकर वो शंख बुक
- 13:16देते, लेकिन अभी आज्ञा लेने का वक्त है ही नहीं था।
- 13:21अभी तो अर्जुन का प्रा है। दूसरा बिगल फूंक दिया गया और बस
- 13:35अब तीसरा बिगल फूंकते सार प्रहार हो जाता।
- 13:40इतना वक्त का। कृष्ण समझा रहे हैं।
- 13:48अर्जुन को और अर्जुन यह प्रश्न पूछकर भागने की फिराक में भगवान
- 13:56फिर धर्म क्या होता है भगवान इस बात का क्या मतलब है?
- 14:07और। भगवान अच्छी तरह जानते है यह
- 14:09भागने की तैयारी। कर रहा है।
- 14:10लंगोट का यह मरेगा और सारी फौजों को मरवाएगा सारे भाइयों को
- 14:18मरवाएगा। वो कृष्ण ये भी जानते हैं कि मैं
- 14:24अकेला भी संभाल लूँगा लेकिन फिर वो युद्ध नहीं हुआ।
- 14:31फिर वो अन्याय हो गया क्योंकि उद पीड़ित थे।
- 14:36पांडव कृष्ण तो उत्पीड़न नहीं थे, कृष्ण का उन्होंने कुछ नहीं।
- 14:43कृष्ण तो सिर्फ मार्गदर्शक थे, वक्त कमती पड़ता देख कृष्ण ने
- 14:54अपनी शक्ति फेंकी और अर्जन को अपना स्वरूप लगा दिया।
- 14:58यह देख। ये देख तू जिसके लिए कप रहा है वो
- 15:05तू है नहीं, तू नहीं मरेगा, तू नहीं मरेगा तो वो भी नहीं मरेंगे।
- 15:17शांत हुआ अर्जुन लेकिन एक जिज्ञासा भी और बाकी मैं तो हूँ
- 15:24लेकिन परमात्मा कोण? यह अद्भुत सन्देश गीता में ही
- 15:31मिलेगा तुम्हें। क्या गीता के अलावा मिलेगा
- 15:40तुम्हें? जब जी मैंने आज ऐसी बात बोल दी जो
- 15:47तुमने कभी सुनी नहीं, दूसरा तिल परमात्मा का बोला गया जब जी।
- 15:57जागीर था में और कृष्ण अपना स्वरूप भी दिखा देते हैं।
- 16:03यह देख मेरा प्राटू कहानी खत्म कुछ ही मिनटों में।
- 16:12रोक देते हैं, अपनी शक्ति से समय को ठहरा देते हैं, अपने स्वरुप को
- 16:19दिखला देते हैं, अर्जुन ठहर जाता है, कप रहा, अर्जुन ठहर जाता है।
- 16:35और ठहरा हुआ अर्जुन बोलता है, समृत्ति लफ्था नष्टो मोगा मैं
- 16:47पहुँच गया वहाँ मुझे याद आया। अब हुक्म को कीजिए, मैं क्या करू
- 16:58कृष्ण कहते तू युद्ध कर ज़रा देख तू युद्ध के मैदान में है।
- 17:07मेरे सम्मेलन के कारण तुझे पता नहीं लगा।
- 17:10मेरे सम्मेलन के कारण उन्हें भी नहीं पता लगा।
- 17:14मैंने समय को बांध दिया है। उस क्षेत्र में जाकर समय को बांधा
- 17:20जा सकता है। वहाँ क्या नहीं हो?
- 17:23सकता। तो जो नेपोलियन ने शब्द बोला।
- 17:29इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन मैं डिक्शनरी यह शब्द वास्तव में
- 17:36परमात्मा का है, जिन्हें इल्यूश़न हो जाता कि हम परमात्मा हैं, वह
- 17:44ऐसे शब्द बोला करते हैं नेपोलियन हो।
- 17:48या कोई भी राष्ट्राध्यक्ष उसे पता नहीं होता कि ये ताकत लोकतंत्र की
- 17:54ताकत है। आपकी ताकत।
- 17:56है। भूल जाता है वो दूसरे का खून चढ़ा
- 18:02है। इससे जीवन मिला है तुम्हें?
- 18:14उस स्तर पर जाकर क्या नहीं हो सकता?
- 18:19लेकिन ये सड़ी हुई तुम्हारी खोपड़ी क्योंकि तुमने आज तक हिंदू
- 18:26मुसलमान नफरत इरशा इसके सिवा कुछ कहा ही नहीं सुनाई।
- 18:33छोटे छोटे बच्चों को शिविरों में ले जाया जाता है।
- 18:37रवि कल ही मैंने सुना। एक बच्चे ने उससे पीड़ित होकर
- 18:41सुसाइड कर लिया। शायद केरला में पूरी कहानी मैंने
- 18:45नहीं की पढ़ी। एक बात सुन लो।
- 18:52आर एस की आरएसएस की शाखाओं में अपने बच्चे बच्चों को मत भेजना,
- 19:01इस कहानी की सत्यता की जांच करना मैं तो अपनी मधोशी के आलम में गुम
- 19:09हो जाऊंगा। लेकिन तुम्हें जीना है संसार में
- 19:21मुझे मरे तो इस 28 अक्तूबर को अगर ये आ गई।
- 19:26तो? 40 वर्ष हो जाएंगे।
- 19:35यह है मेरा चालीसवां एनआईटन डे है, वर्ष है मुझे मरे 40 वर्ष हो
- 19:44गए। उससे पहले मैं रोज़ मरता था उससे
- 19:53पहले 100 बार रोज़। मरता था।
- 19:5840 वर्षीय एक बार भी नहीं मरा उस दिन मरा बस ऐसी मरणी जो मरे।
- 20:04बहोर न जन्म मरना। होय ऐसे मरने ही मर गया क्या फिर
- 20:11से मरना नहीं होगा? अब मैं जानता हूँ कि जो मरेगा वह
- 20:22मैंने। जैसे हम अपना ही नाखून काट देते
- 20:29हैं। क्या नाखून हमारा अंग नहीं है?
- 20:39हम अपने बाल काट देते हैं? क्या बाल हमारा अंग नहीं है?
- 20:42हैं? दाढ़ी मूंछ काट देते है क्या जी
- 20:46हमारे शरीर के अंग नहीं है? लेकिन क्या हुआ?
- 20:50हम क्यों कटवा देते है? ध्यान से सुना इस वक्त क्योंकि
- 20:56हमने जान दिया जब बड़ा हुआ नाखून मैं नहीं हूँ।
- 21:03जब बड़े हुए केस मैं नहीं हूँ जब बड़ी हुई दाढ़ी और मूंछें मैं
- 21:07नहीं हूँ इसलिए कट जाएं तो कोई भरवा।
- 21:11नहीं। बस यही कृष्ण या कृष्ण के तल पर
- 21:16गए हुए लोग समझ लेते हैं। यह जो कटेगा वह बालों की तरह था।
- 21:24यह जो कटा था वो मूछों और दाड़ियों की तरह था।
- 21:27यह जो कटेगा नाखनों की तरह था सब कटा कटा, लेकिन मैं नहीं कटा।
- 21:41फिर कृष्ण से विराट दिखाते हैं। और कुछ ही मिनटों में मैं कहता
- 21:49हूँ 7 मिनट में गीता बोल दी गई और अर्जुन ने अपना गाढ़ी धनुष उठा
- 21:55दिया। और प्रथम प्रहार किया और पांच जन
- 22:00कृष्ण ने बजा दिया। ठीक है, हम तैयार हैं।
- 22:06कृष्ण चाहें तो क्या नहीं कर सकते?
- 22:10लेकिन अगर तुम कहो। फर चाइना को विध्वंस क्यों नहीं
- 22:15कर देते? ऐसे मूर्ख नहीं, कृष्ण का ही
- 22:18करेंगे। कृष्ण तो अपने दुश्मन को मरवाने
- 22:23के लिए भी जरा संत को मरवाने के लिए भी दूसरे का सहारा लेते हैं।
- 22:31जिसका उन्होंने बुरा किया। कृष्ण बड़े समझदार हैं।
- 22:41कृष्ण जानते हैं कि दूसरा कोई है नहीं।
- 22:49मेरे सिवा फिर क्या चाइना के लोग? और क्या अमेरिका के लोग क्या
- 22:59कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के और क्या हिंदुस्तान जब दूसरा?
- 23:05है ही नहीं कोई। लेकिन तुम्हारी मानसिक
- 23:09मनोवृत्तियां इतनी दूषित कर दी गई हैं।
- 23:14कि तुम्हें विखंडित होना सिखाया गया है, और यह बहुत लंबी परंपरा
- 23:20रही है। हिंदू परम बड़ी लंबी परंपरा से
- 23:28तुम्हें सदा के लिए मानसिक गुलाम बना दिया गया।
- 23:33अभी मेरे प्रोचनों के बड़े कमेंट आते है, मेरे लिए वो नहीं होते
- 23:43क्योंकि मैं जानता हूँ ऐसे कमेंट आएँगे अगर सत्य बदलाया जाएगा।
- 23:53तो ऐसे कमेंट आने स्वाभाविक है लेकिन फिर भी मैं बोलता हूँ उनके
- 24:02लिए नहीं बोलता हूँ। जिन्होंने यह कमेंट किए और ना भी
- 24:06करते तो अच्छा कर दिया। तो कोई बिगड़ता नहीं।
- 24:13मैं उनके लिए बोल रहा हूँ। जी नो, सिर्फ सुनो और कोई कमेंट
- 24:17ना किया सुना और गुना और मैं तुम्हें एक बात बताता हूँ।
- 24:27सुनिए दुख पाप का नाश। जिसने मुझे बोलते हुए सत्य में
- 24:36सुन लिया, उसके पाप जणित दुखों का तुरंत हरण हो जाए, दुख आते हैं
- 24:47तुम्हारे पाप कर्मुश। और पाप है अज्ञान से बड़ा कोई पाप
- 24:52है। अज्ञान क्या है तुमने?
- 24:56स्वयं को जाना है। जीस गढ़ी, तुम स्वयं को जान
- 25:00जाओगे, पाप समाप्त हो जाएंगे यही कृष्ण ने कहा मैं थोड़ा सा
- 25:05ज़्यादा फिर से फिकल वैसे आपको समझाने की चेष्टा कर रहा हूँ।
- 25:10आह तवांग सर व पापे भव मोक्ष श्याम माँ।
- 25:13सुचार तुम दुखी। हो मैं तुम्हें सभी पापों से
- 25:20निजात दिला दूंगा। पाप क्या है?
- 25:25नए जानना के मैं वास्तव में हूँ कौन या पाप?
- 25:29तुम जीसको बात कहते हो, वह कृष्ण की दृष्टि में कोई पाप नहीं, वह
- 25:37तो स्कैटरनेस ऑफ मैटर यह भौतिक तत्व जो जुड़े थे कभी?
- 25:46और जुड़े थे और बड़े थे और बढ़कर इतने बड़े हो गए वो टूट जाएंगे।
- 25:51विखंडित हो गए, स्कैटर हो गए? यह पाप नहीं है।
- 25:58कृष्ण के दृष्टि में पाप है अज्ञान।
- 26:04अपने आप को ना जानना इससे बड़ा कोई बात नहीं क्योंकि यह बड़ा दुख
- 26:10देता है, जीस दिन तुमने अपने आप को जान लिया उस दिन तुम दुखी।
- 26:23दुखी हो गए और दूसरों के अभाव के कारण दूसरों के रोग, पीड़ा या तो
- 26:34ये कि इन्होंने ऐसा कर्म किया था जिसका प्रतिकार रोग के रूप में
- 26:40आया। पाप दो तरीके से दुखा आते हैं।
- 26:49एक तो तुमने ऐसा कर्म कर दिया और कर्म का प्रतिकर्म आएगा।
- 26:56अब रिएक्शन देर इस इनिकल एंड अपहर्ज़ रिएक्शन।
- 27:02इसलिए गुम दुखी हो तुमने किसी का मन तो खाया, तुमने किसी की चोरी
- 27:14किसी का लूट लिया? किसी को भूखा मारकर जोड़ लिया
- 27:22अपने संदूकों में, बैंकरों में रख लिया किसी की जमीन हड़प ली वह
- 27:34पदार्थ जो तुम्हारे संग जाएगा नहीं आकर।
- 27:40एक तो पाप है जिसे बाबा कहते हैं पापा बाज न होवे, इकट्ठी तुम
- 27:46इकट्ठा हो तो कर लो, कोई बात नहीं, डाका मार लो, कानून बना के
- 27:54किसी की जेब काट के एक व्यक्ति को दे दो।
- 27:59कर लो, लेकिन बाबा कहते हैं कि अगर इकट्ठा करना है तो पाप करना
- 28:06होगा तो उसके दो अर्थ हैं एक तो दूसरे का छीनना होगा।
- 28:15डाकू बनना होगा, ज़ोर बनना होगा। वह पाप है, दूसरा पाप है, यह न
- 28:24जानना के मैं कौन हूँ? अज्ञान से बड़ा कोई पाप कृष्ण कभी
- 28:32पाप कर नहीं सकते। क्यों?
- 28:35वह जानते हैं वह कौन? अनंत विस्तार, अखंड मालिक,
- 28:48सर्वसर्जन हरम जिसका सब कुछ है, वह चोरी करेगा भी तो करेगा भी सब
- 28:58खीसें तो मारी हैं। एक खिसे में से निकाल लो तुम
- 29:02दूसरे खिसे में डालो क्या ये चोरी बस कृष्ण इतना जान ले, मैं
- 29:09तुम्हें चोर बनने से उत्साहित नहीं कर रहा बातों की थीम जहाँ से
- 29:15मैं बोल रहा हूँ, थोड़ा समझ बड़ी मुश्किल आएगा।
- 29:20उस तल पर तुम जा न सकोगे और उस तल तक मैं समझा न सकूंगा।
- 29:29तुम से आया ना गया। हम से आया न गया हम से भुलाया न
- 29:47गया हौसला प्यार में। दोनों से मिटाया ना गया हम से आया
- 30:07ना गया। मैं भीतर बैठा तुम्हारी खोपड़ी तक
- 30:14नहीं पहुंचा सकता बात और तुम खोपड़ी से नीचे आकर वो बात सुन
- 30:22नहीं सकते। बस ये फासला कभी मटेगा नहीं और
- 30:28तुम? काग पढ़ाया पुंजरा पढ़ गया चारो
- 30:34वेग समझाये, समझा नहीं रहे डेड के डेड तुम डेड के डेडी हो नफरत
- 30:46घृणा। आगजनी इनकी बातों को तुम फौरन समझ
- 30:50जाओगे क्योंकि ये बुद्धि में आते जहाँ से मैं बोलता हूँ ना तो वो
- 30:58तलबुद्धि में आता और ना वहाँ से बोला गया शब्द बुद्धि में आता
- 31:05बुद्धि से बहुत पार। शब्दाती लेकिन तुम एक असंभव
- 31:15चेष्टा में लगे हुए हो। तुम प्याली में गागर में सागर को
- 31:23भरने की चेष्टा कर रहे हो, कभी संभव हो पाएगा ज़रा सोचना इसे कभी
- 31:30गागर में सागर समा पाता है तो फिर वो सागर न रहा।
- 31:34हो? एक को सौम्य नाम का।
- 31:43जब व्यक्ति अखंडता में चला जाता है मेरी एनलाइटनमेंट की वीडियो
- 31:50सुनिए कैसे में अखंडता में प्रवेश हुआ कैसे सॉलिडिटी खत्म हो गई।
- 32:02और कैसे में ट्रांसपेरेंसी में स्थापित हो गया और कितनी देर तक
- 32:09मूर्तवत एक बूत की तरफ लड़ा अनंतता में ऐसा खोया कि खुद से जग
- 32:19भी न पाया। उस अनंतता का विस्तार उस अनंतता
- 32:31के एक अंग बुद्धि से कैसे प्रकट किया जा सकेगा?
- 32:37यह संभव है उस अनंतता का विस्तार। उस अनंतता की एक छोटी सी संरचना
- 32:49बुद्धि इससे कैसे समझा जा सकेगा? और तुम यही चेष्टा में लगे हो
- 33:01अनंत को? क्षुद्र बुद्धि से समझने की चिष्ट
- 33:14लोग इसलिए नहीं नास्तिक, नास्तिक इसलिए है तो उन्होंने खोजन इसलिए
- 33:26नहीं कि परमात्मा नहीं। इसीलिए नास्तिक है के खोजने की
- 33:33जरूरत नहीं है। शब्द को फिर समझ रहा हूँ, इतनी
- 33:43नास्तिकता आज विश्व भर में है। मुझे बाबा बता रहे थे आज विश्व
- 33:50में सात व्यक्ति। आस्तिक है, सात ओनली सेवेन क्या
- 34:00हुआ इस विषय को आठव की आबादी है। इसका मतलब एक अरब में एक व्यक्ति
- 34:07पहुंचा है। यह है।
- 34:12निश्चित ही लोकतंत्र में तुम जीत जाओ।
- 34:18अगर वोटिंग शुरू हो जाए तो सात नहीं जीतेंगे, सात अरब जीतेंगे,
- 34:23आठ अरब जीतेंगे। और मीडिया चलाएगा।
- 34:29दिन भर रात नहीं है, वो वो नहीं है, समय बर्बाद न करो और तुम
- 34:37झांसे में हो जाओ। लोग इसलिए नास्तिक नहीं है के
- 34:46परमात्मा नहीं। लोग इसीलिए नास्ती कहें कि
- 34:51परमात्मा तक जाने की जरूरत नहीं कर पाते।
- 35:00परमात्मा मांगता है तुमको तुम दे देते हो भेंट।
- 35:13तुम बकरीद पर मासूम मेमनी की भेंट दे देते हो, तुम हवन कराते हो,
- 35:21नारियल को भेंट कर देते हो, हवन सामग्री घी और आम की लकड़ी भेंट
- 35:27कर देते हो। तुम कहते हो हवन हो गया, आहुति
- 35:31डालते ओम पूर्ण मदह पूर्ण मदम कर दिया क्या हवन हो गया?
- 35:47लोग इसलिए नास्तिक है उस तत्व तक जाने की हिम्मत नहीं होती।
- 35:59वो हिम्मत है वस्तुओं को आहूत न करना जैसे तुमने कागज की गश्तियां
- 36:12बनाई। कागज़ की किस्तों से कभी भवसागर
- 36:16पार होता है। कागज़ के जहाज बनाए कागज़ के
- 36:23जहाजों से कभी विदेशों में जाया जा सकता है।
- 36:34ऐसे ही तुमने कागज़ के हवन बना लिए, ऐसे ही तुमने कागज़ की
- 36:40आहुतियाँ बना ली। ऐसे ही प्रत्येक धर्म में ऐसे कोई
- 36:50धर्म आज अछूता नहीं। सभी ने अपने अपने स्वयं को बचाने
- 37:01के लिए स्वयं की बलि न चढ़ जाए, दूसरे की आहुति दे दी।
- 37:10किसी ने बकरे चढ़ा दिया काली के दुर्गा के उसके उसके किसी ने खुद
- 37:22चिढ़ा दिया, भैंसा चढ़ा दिया। सच में ये खुद चाहते हैं खाना
- 37:29इच्छा इनकी होती है। भगवान के नाम पर मार देते हैं
- 37:34पशुओं। को।
- 37:36जबकि जीने का हक नहीं है। दुनिया में नास्तिकता इसीलिए बड़ी
- 37:47है, इसीलिए नहीं कि मार्ग का कह जाए।
- 37:50एक अकेले व्यक्ति के कहने से कभी दुनिया नास्तिक हुई।
- 37:55तुम भी डरते हो, तुम भी आहूत होने से डरते हो, इसलिए आहुतियों की
- 38:07सामग्री नकली बाजार से खरीद के ले आते है सब नकली नकली है सब दिखावा
- 38:16दिखावा है। इसने उस सच्चे आनंद की एक झलक भी
- 38:26पाली बूंद पीली तो बहुत दूर की बात है, झलक पाना है सतोरी अब ये
- 38:32प्रश्न का जवाब आ गया तो मेरा मनिश सतोरी है उसकी झलक पान।
- 38:46और समाधि है, उसकी बूंद को भी लेना है और परमात्मा है उसकी बूंद
- 38:54के सागर में खो जाना मिल जाना घोल जाना नहीं मिल जाना।
- 39:00अभी से फिर समझ लो। लोग यहाँ अटके पड़े हैं।
- 39:06सतौरी है दूर से देख लेना उसे निहार लेना जिसे दर्शन कह देते
- 39:11हैं सतौरी उसको दूर से देखना समाधि उसके पास चले जाना।
- 39:25उसके पास बैठ जाना, उसके समीप आसन लगा लेना, जो कृष्ण भगवान ने कहा
- 39:36आचार्य उपासनम आचार्य के पास उप आसन आसन लगा।
- 39:49और परमात्मा उसमें खो जाना तो बूंद अनंत में खोएगी सागर में तो
- 39:59अनंत हो जाएगी। ये है तुम्हारा आखिरी मुकाम।
- 40:08और असली मुकाम। दुज्जा काहे से मर गए विश्वास के
- 40:20ऊपर ठहर जाओ तुम सदा दूसरे का स्मरण कर रहे हो तुम राधा का करो।
- 40:30तुम राम का करो, तुम नानक का करो, तुम कबीर का करो, तुम अल्लाह का
- 40:36करो। लेकिन यह याद नहीं, यह सुमरन नहीं
- 40:48है, जो संत बताते हैं। संत सुमरण उसे कहते हैं जो स्वयं
- 40:57से आए और जो भूले से बोल ना पाए और ध्यान रखना।
- 41:10सटोरी में पाई गई झलक तुम फिर से बना नहीं सकोगे, याद न जाए।
- 41:26बीते दिनों के बीते दिनों के। जाके न आए जो दिल दिल क्यों
- 41:53भुलाए, उन्हें दिल क्यों भुला? याद ही न जा एक बार उसे तोड़ी की
- 42:09झलक देखी। तुम ज़िन्दगी भर न भूल सकोगे।
- 42:14बाबा नानक को मोदी खाना में 131313 झलक थी।
- 42:20सथोरी कहाँ बुला पाया? इसलिए मैं रोज़ तुम्हें कहता हूँ,
- 42:28एक बार स्टोरी की झलक देख लो, मैं जानता हूँ उसके बाद तुम भूल ना
- 42:35पाओगे। उसके बाद तुम बनाने की चेष्टा भी
- 42:41करो, कभी ना भूल पाओगे। यह वो मुकाम है जहाँ वो तुम्हें
- 42:47याद करता। है।
- 42:49सपना जियाँ का एक दाता सो में विसर ना जाए वह मुझे भूल न जाए।
- 42:58मैं तो 1000 बार भूलूंगा नहाऊंगा तो भूल जाऊंगा खाऊंगा तो भूल ही
- 43:03जाऊंगा, खाऊंगा तो भूल जाऊंगा, मुझसे निरंतर सिमरन नहीं हो सकेगा
- 43:11और तुम्हारा सिमरण सिमरन मुद्दा मिले।
- 43:15सिमरण सदा भोग करता है। तुम्हारा इसको ही कृपा कहते हैं
- 43:22नगरी मोख। द्वार।
- 43:24उसकी नजर तुम पे आजाये, वह तुम्हें से मर ले वह तुम्हें याद
- 43:29कर ले तुम्हारा नंबर लगा दिया जाओ, वह पुकार ले तुम्हें।
- 43:40नहीं, बोर नंबर थोड़ा मजाक कर एक बुढ़िया गिर गई थी केले के छिलके
- 43:49पर पंजाबुन थी कोई। किसी बलिष्ट व्यक्ति ने जाके तड़प
- 43:59रही थी, उठाया वर्धा थी, बेचारी 90 साल की तड़प रही थी।
- 44:05कहीं चुबकना वगैरह टूट जाया करता है बर्तन का।
- 44:14तो वृद्धा को सुकून आया। थोड़ा चलो उठा लिया, किसी ने
- 44:22थोड़ा अच्छी तरह से उसे देखा, चल के देख मत चल के देखा, धीरे धीरे
- 44:32चल सकती थी वो। कुछ टूट गया।
- 44:34था तो। वृद्धा ने आशीर्वाद देते हुए बोला
- 44:42जी मैं तुम में नो चक्या और मेरा बतरिन चकली जैसे तुमने मुझे उठाया
- 44:51वैसे परमात्मा तुझे उठा लिया। ऐसा भी समरण होता है?
- 45:00तुम ऐसा ही कर रहे? हो?
- 45:05लेकिन बाबा की बात को गौर से सुन। धुज्जा काहे से मरिये यहाँ
- 45:15कन्डेन्स हो जाओ, फोकस लगा दो यार कॉन्सेंट्रेट हो जाओ और और चीजों
- 45:21पे कॉन्सेंट्रेट होते हो तुम तुम इन शब्दों पे कॉन्सेंट्रेट हो जाओ
- 45:27धुज्जा काहे समरिये अब जब तुम याद करो ना?
- 45:33तो देखना क्या वो दूसरा तुम्हें दूसरा तुमने तो 1000 नाम परमात्मा
- 45:46के बना लिए अल्लाह हो सतनाम हो, बाबरू हो, राम हो, रहीम हो।
- 45:55राधे हो कृष्णा हो यह दूसरा है गाने के लिए तो अच्छा है, गाने के
- 46:03लिए तो हम मोन गाना सकेंगे। ये वो नगमा है जो हरसज पे गाया
- 46:11नहीं जाता। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 46:16होते है, लेकिन सिमरन के लिए शब्दों की कोई आवश्यकता नहीं
- 46:28होती। ध्वजा काहे सेमरिए अब यहीं
- 46:31कॉन्सेंट्रेट है ना जब तुम सिमरन करो।
- 46:36तो थोड़ा ठहर जाना क्षण भर के लिए क्या जीसको मैं सिमरन रहा हूँ, वह
- 46:42दूसरा तो नहीं है, मैं उसे जानता हूँ जब तुम किसी का नाम ले के
- 46:50बुलाते हो ना? तो क्या करते हो?
- 46:59अब कल ही एक स्वामी जी बोल रहे थे जब कोई तुम्हें ऊंचे से बुलाये
- 47:06नाम लेके तो तुम पलटोगे नहीं पलटोगे हैलो कह रहे बिल्कुल
- 47:11पलटोगे। तो आपको तो बात जीतेगी लेकिन
- 47:18हमारी खोपड़ी में कहाँ आती है बात में खराब खोपड़ी?
- 47:24मैंने कहा अभी पलटेंगे, लेकिन तुम्हें उसका नाम पता है जीसको
- 47:30बुला रहे हो? पहली बात तो तुम यहाँ जीसको बुला
- 47:34रहे हो, वह भी नाम तुम्हारा ही दिया हुआ है या किसी ज्योत शिख या
- 47:41किसी माँ बाप का माँ बाप बच्चा घर में होता है पहले से नाम लड़ाई
- 47:45झगड़ा कर देते हैं वो कहते नहीं, लड़की हुई तो उपास में रखेंगे।
- 47:52वो कहते हैं, लड़का हुआ तो श्रेयस रखेंगे, अब जबडो आप उसमें अभी
- 47:59बच्चा हुआ नहीं किया नहीं पता नहीं, ठीक ठाक होगा कि नहीं होगा,
- 48:04तुम्हें झगड़े का कारण चाहिए, बस कहते हैं बेटी हुई तो वो पास न
- 48:10खाएंगे। बेटा हुआ तो वो कहती श्रेयस
- 48:13रखेंगे तो भाई हो तो लेने दो, पहले तुम जीसको जानते नहीं हो भला
- 48:23उसका नाम है वह अनामी। उसको नाम से पुकारोगे क्या वह
- 48:34पलटेगा तुम्हारा बंदा तो पलटेगा क्यों?
- 48:37वह तो अभ्यस्त हो चुका है संस्कृत वर्ष उसको तो तुमने जतला दिया है
- 48:43कि जब चिंटू फिंटू मिंटू मोटू। ये मैं कहूँ तो तुम पलट जाना
- 48:50लेकिन उसका कोई नाम नहीं होता। वह कैसे पलटेगा और वह कहीं दूर
- 48:57थोड़ी उसको याद थोड़ा किया जाता है वो कहीं दूर है।
- 49:06आवाज उसे लगानी पड़ती है जो दूर होता है, जो बहरा होता है और दूर
- 49:14होता है उसे स्पीकर लगाकर रात को माँ माँ कहना पड़ता है ना तो वो
- 49:20बहरा है ना वो दूर है। करीब से करीब है वो।
- 49:28उसको मस्जिद के ऊपर बांध देकर चिल्लाकर बुलवाने की आवश्यकता
- 49:32नहीं है क्योंकि उसको बेहतर सुनाई पड़ता है, उसको ही सुनाई पड़ता
- 49:41है। उसको बेहतर दिखाई पड़ता है।
- 49:44उसकी आँखों में मोतियाबिंद कभी नहीं होता, उसकी आँखों का पर्दा
- 49:48कभी नहीं गिरता, वह सदा से साक्षी है और तुम्हारी हर हरकत को निहार
- 49:53रहा है बराबर एक पल को भी चूकता नहीं, उसका साक्षित तुम्हारा चूक
- 50:04जाता है तुम रात को सो। जाते।
- 50:09दुज्जा काहे सिमरी है तुम जब सिमरन करो ना, जो भी कुछ करो है
- 50:19तो सब बकवास। तो ज़रा पहले ये बात बता देना
- 50:26मुझे उसका नाम ये है तुम्हे कैसा पता चला या तुम्हारे गुरु को कैसा
- 50:31पता चला? गुरु से पूछ लेना बेहिचक हो के
- 50:37पूछ लेना। गुरु से पूछ लेना चाहिए के
- 50:42गुरूजी? बाबा जी आपको कैसे पता उसका जी
- 50:45नाम तो शक बका जाएगा, भीतर से तो सोचेगा आज फंस गए बेटे आज बच्चू
- 51:00बन गए। कोई घिसा पीटा जवाब दे भी देगा।
- 51:06तो तुम भी आगे मूड हो पूछने वाले पूछने वाला समझदार हो तो वह जानता
- 51:12है, नाम है वो अलग है वो वह करीब से करीब।
- 51:23है, उसका कोई नाम नहीं है। क्या नाम करोगे उसका?
- 51:29जीसको तुम जानते नहीं उसको कैसे पकारोगे फिर उसको तो ऐसे ही
- 51:35पकारोगे ओह ओह ओह ओह सफेद सूट वाले ओह लाल सूट वाले ये कोई नाम
- 51:44है क्या? ये पुकारना थोड़ी है चल रहा है ना
- 51:51ये तो क्योंकि तुम्हें नाम नहीं पता पिट से थोड़ी नाम पता लगता है
- 52:00अगर मुँह भी हो तो भी वो पहचानना नहीं।
- 52:04हमने परमात्मा की शक्ल कभी निहारी नहीं, तुम कैसे भलाओगे उसको कैसे
- 52:15पहचानोगे उसको मैंने वीडियो डाला। मैं ही परमात्मा पर मैं कोई पहला
- 52:26व्यक्ति नहीं। बहुत से संतों ने उदघोष किया हम
- 52:31ब्रह्मस्वः मैं ही परमात्मा और जीस धर्म में ये कहना गुनाह था उस
- 52:40मंसूर ने भी पुकारा अनलक खालक खलक खलक, मैं खालक।
- 52:52लेकिन इस्लाम में यह बात कहने की इजाज़त नहीं है और जहाँ इजाज़त
- 52:57नहीं है वो धर्म धर्म नहीं है। धर्म वह जो तुम्हारी सभी बेड़ियां
- 53:04तोड़ दे, धर्म वह नहीं, जो तुम्हे बेड़ियों में जकड़ दे।
- 53:13धर्म वह जो तुम्हें बेटियों से मुक्त कर दे, तुम्हारी आत्मा
- 53:19बेटियों से मुक्त होना चाहती है, बंधनों से मुक्त होना चाहती है,
- 53:24उसी को तुम मुक्ति कह देते हो, मोख कह देते हो, मोक्ष कह देते।
- 53:28हो? कोई बेढ़ी नहीं रहती और तुम्हारे
- 53:32तो लाखों मान्यता है। तुम तो जीस कुंभ के स्नान में
- 53:38जाते हो, ये भी एक तुम्हारे ऊपर बेढ़ी है कि कुंभ के स्नान से
- 53:43हमारी मुक्ति हो जाएगी। गंगा में डुबकी लगाएंगे।
- 53:48हमारी जंजीरें टूट जाएंगी ज़रा डालो ना किसी कैदी को जंजीरों से
- 53:58बांधकर किसी कैदी को डालो गंगा में और उसको फिर बाहर निकालो देखो
- 54:04उसकी जंजीरें टूट गईं। पाओगे।
- 54:11रत्ती भर भी नहीं हिली तो जो गंगा का पानी तुम्हारी शरीर की जंजीरों
- 54:19तक को नहीं तोड़ सका, वह मानसिक जंजीरें तो बहुत गहरी है और जो
- 54:25स्टील से भी ज्यादा ताकतवर है, उसको कैसे तोड़ेंगे?
- 54:30गंगा का बन तुम्हारी मान्यताओं को नहीं तोड़ सकता और जब तक
- 54:37मान्यताएँ नहीं टूटती, यही तो वंदन है तो मेरे ऊपर लिख लो।
- 54:47इसको गोल सर्जरी में दिलो। मान्यताएँ ही बंधन है।
- 54:51तुम तुम जो भी मानते हो वो बंधन है तो फिर मुक्ति क्या है निही
- 55:01शंशा हो जाना। बंधन हीन हो जाना क्या है?
- 55:08नहीं संशय हो जाना कैसे मिलेंगे वो अवस्था सुनिए बाबा ही कहते।
- 55:22हैं। मेरे मन का संसार के सन से सन से
- 55:36में रहना, ये मान्यताओं में रहना तुम्हें ठीक ठीक से पता नहीं।
- 55:45कि जिन पांच नामों का तुम जॉब कर रहे हो, तुम थोड़ा भीतर जाओगे तो
- 55:50पता चलेगा तुम नहीं जानते। विजय परमात्मा का नाम है, इससे
- 55:56परमात्मा मिल जायेगा। तुम नहीं जानते।
- 56:00बिलकुल नहीं जानते और सच में नहीं जानते हो, फिर गयो मेरे मन का सन
- 56:17आशा। जब तंदर सन पाय ठाकुर ठाकुर।
- 56:35ठाकुर ठाकुर तो मैं सर नहीं रहा। उतर गयो मेरे मन का।
- 56:52संस संसार विहीन तुम कब होगे? ये थोपी हुई मान्यताएँ कब
- 57:00टूटेंगी, दर्शनों से टूटेंगे गुरु लाख कहले तुम लाख मान लो।
- 57:13शास्त्र लाख का कह दें, सारे शास्त्र कह दें, लेकिन तुम याद
- 57:21रखना तुम्हारे हृदय के किसी कोने में यह संख्या बरकरार रहेगा, कहीं
- 57:29ऐसा तो नहीं है? समझाने वाले गलत हैं।
- 57:36इन्होंने पाया ना हो इन्होंने कोई चक्र बिहू रचा हो।
- 57:41यह ठगों बिलकुल उठेगा लेकिन तुम देख कम पाते हो।
- 57:49तुम भीतर उतर नहीं पाते, इसलिए भीतर जाके देख नहीं पाते।
- 57:55जैसे ही तुम भीतर जाओगे, तुम्हारे भीतर नास्तिकता भी छुपी हुई है।
- 58:01अपने गुरु के प्रति भी नास्तिकता भी छुपी हुई है।
- 58:07लेकिन तुम आँखें बंद कर लेते हो। कबूतर की तरह आँखें बंद करने से
- 58:13कभी बिल्ली भाग जाती है नहीं बिल्ली कहा जाती है।
- 58:21तुम्हारे भीतर भी नास्तिकता का संशय है?
- 58:27तुम नास्तिक हो तो सभी के प्रति हो।
- 58:29अगर परमात्मा नहीं है। या परमात्मा है तो हमें कैसे पता
- 58:35चला किसी गुरु ने बताया मार्गदर्शन ने बताया वह।
- 58:43ठीक बता रहा है तुम कैसे जानते हैं, मैं झूठ भी तो बोल सकता हूँ?
- 58:50तुम्हारे पास क्या मापदंड है कि मैं झूठ नहीं बोलता हूँ?
- 58:57इसीलिए मेरी एक बात सुन मैं सदा ही करता हूँ।
- 59:05नास्तिक तो मत बन जाना, क्योंकि नास्तिकता तो गलत है।
- 59:13जीसको संतो ने देख लिया और मैंने भी देख लिया और मैंने देखा तो मैं
- 59:19हो गया मैं ही हो गया पहले मैं हो गया।
- 59:24फिर मैं ही हो गया दोस्त तेज व्यापार करनी पड़ती है एक बुद्ध
- 59:31की मैं हो गया मैं कौन पता चला एक कृष्ण की मैं ही हो गया।
- 59:42तब मिटता है, सही, सन्न से। दर्शन के बिना सनशाइन जिसने कभी
- 59:58कद्दू ना देखा हो बच्चा है बच्चे को तुमने कहा कद्दू रट लो।
- 1:00:06उसने रट लिया। वर्ष दो वर्ष चार वर्ष उसने कभी
- 1:00:14कद्दू देखा ही नहीं और उसके सामने जाकर सेब रख दिया जाए।
- 1:00:21ये होता है कद्दू, तो कहेगा हाँ ये होता है कद्दू।
- 1:00:31लेकिन क्या वह कद्दू है? नहीं, वह कद्दू नहीं है सच में तो
- 1:00:43कद्दू भी तुम्हारा ही नाम रखा हुआ है।
- 1:00:46तुम्हें पता ही नहीं है और धरती पे आज तक कोई भी मानव नहीं हुआ।
- 1:00:52जो जानता हो कि उसका असली नाम क्या है, बस पहचान है, उसकी लक्षण
- 1:01:00है, उसका नाम क्या है या किसी को पहचान क्या?
- 1:01:09है। और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी
- 1:01:22और खमारी मदहोश। और एक बार तुमने उस मदहोशी को चख
- 1:01:36लिया, तो उसे बिछुड़ न पाओगे बिछुड़ तो अगर तुम अपनी प्रेमिका
- 1:01:46प्रेमी से जाते हो तो फिर आते करवटें बदलते हुए गुजरते हैं।
- 1:01:58उससे बिछड़ा हुआ व्यक्ति कैसे जी पड़ेगा
- 1:02:11तुमने उसको माना है और जीस गुरु ने आपको उसका नाम दिया।
- 1:02:18उसने भी जाना नहीं है। क्योंकि उसके लक्षण।
- 1:02:24हैं। लक्षण क्या हस्ते चोरी जो नाम
- 1:02:41मैंने तुम्हे दिया वो आगे ना बताना ये क्या चोरी नहीं है
- 1:02:45सूक्षम चोरी? सत्य अहिंसा, अस्ते पतंजलि का
- 1:02:54तीसरा सिद्धांत जो मैंने नाम दिया वो आगे मत बताना क्या यह सूक्ष्म
- 1:03:02चोरी नहीं? क्या इसमें निहित स्वार्थ नहीं
- 1:03:08है? अगर तुमने ही बता दिया, मैं
- 1:03:10स्पष्ट बोलता हूँ कि यह आगे फैला दे, कोई मेरे पास आए तो मैं शायद
- 1:03:17आने भी ना दूँ। ऐसा ही होता है।
- 1:03:20श्रद्धा से ही ऐसा होता। है।
- 1:03:23मैं आने वालों को कहता हूँ क्षमा करो भाई, घर बैठे रहो मिलेगा तो
- 1:03:27घर बैठ कर। यहाँ आने से थोड़ी मिलेगा।
- 1:03:33यहाँ आने से सिर्फ तुम्हें ये पता चलेगा कि वह होता है और उसके
- 1:03:40मिलने के बाद लक्षण क्या होते हैं?
- 1:03:42सधरता। ठहरा कोई आशा, ना बची कोई कृष्णा,
- 1:03:58ना बची कोई कामना, ना बची कोई वासना, ना बची कोई कल्पना।
- 1:04:05ना बची। इतनी भी वासना ना बची कि मैं एक
- 1:04:14पल और जीव तुम इतने निर्वासना हो जाओ जब वह अंत समय आए।
- 1:04:32तो तुम मज़े से कह लो, मौत के उस दूध को तुम गल बकड़ी डाल लो, अरे
- 1:04:40इतनी देर क्यों लगा दी? है।
- 1:04:45कब से इंतजार किया हूँ तुम्हारा? तुम नास्त किस लिए हो कि तुमने
- 1:04:56वहाँ जाने की जरूरत नहीं की साहस नहीं बटोरा क्योंकि वहाँ जाने के
- 1:05:02लिए साहस चाहिए किस चीज़ का? शीश देना पड़ता है।
- 1:05:15जो घर बार है अपना साले हमारे साथ यह कीमत है उसकी और तुम घबराह
- 1:05:23जाते हो धन ले लो तजबियाँ दे देता हूँ।
- 1:05:31सोना, ऊंट, घोड़े, गाय ये सब सामग्री ले लो मेमने की बोली दे
- 1:05:42दे तुम। नारियल की बलि दे देता हूँ, हवन
- 1:05:48कर देता हूँ लेकिन वह तुम्हारा हवन मानता है, आहूत आहूति
- 1:05:55तुम्हारी मांगता हूँ, तुम आहूत हो जाओ, पदार्थों का आहूत न करो।
- 1:06:02उन्होंने विचारों ने के बिगाड़े। मेमनों ने क्या बेचारे ने पकड़ा
- 1:06:08मेमने की आँखें देखना कतल करने से पहले इतनी मासूम आँखें बिल्कुल
- 1:06:14तुम्हारे बच्चे जैसे हैं, जब तो किसी का बच्चा है और तुम उस
- 1:06:21निर्दोष बच्चे की बलि देके कहते हो, धर्म कार्यकरण है।
- 1:06:25इससे बड़ा कोई पाप हो सकता है। मरते हुए जीव की आँखों में ज़रा
- 1:06:32गौर से देखना एक पल के लिए तो शायद तुम कभी हत्या ना कर पाओ।
- 1:06:41इतना भय और इतना वो हाथ जोड़ तो नहीं सकता?
- 1:06:44बोल तो नहीं सकता बेज़ुबान, लेकिन उसकी आँखों पर तुम्हें तरस आएगा।
- 1:06:52हम खरगोश काटा करते थे, एक बार मैंने उसकी आँखों में झांक लिया।
- 1:07:01इतना मासूम जैसे दया की भीख मांग रहा हो जैसे उसे पता हो कि मुझे
- 1:07:07मार देंगे, काट देंगे। जैसे डर तुम्हें लगता है ना वैसे
- 1:07:15उसमें भी प्राण हैं। दर्द उसे भी होता है।
- 1:07:23तुम्हारा संशय जब तक खत्म ना हो तब तक नाम जब्त मत करना और जब
- 1:07:30तुम्हारा संशय खत्म हो गया तब नाम जब्त करने की कोई जरूरत नहीं
- 1:07:34रहेंगी। इसलिए नाम जब प्रत्येक अवस्था में
- 1:07:40गैर जरूरी है उसका कोई नाम है भी नहीं।
- 1:07:50उस अनामी को तो बस ऐसे ही पुकार सकोगे अरे अरे सफेद शर्ट वाले ओह।
- 1:07:57ओह लाल सट वाले बने कुणाल ये तुम जागरण में ऐसे ही तो चर लाते हो,
- 1:08:07पुकारना नहीं चर लाते हो दुज्जा काहे समरिये जो जम में ते मर जाए।
- 1:08:16क्या कृष्ण जन्मे? नहीं, क्या कृष्ण मरे नहीं, क्या
- 1:08:23राम जन्मे नहीं, क्या राम मरे नहीं?
- 1:08:28क्या राधा जन्मे नहीं, क्या राधा मरे नहीं?
- 1:08:33दुज्जा काहे सिमरिये जो जन्मे ते मर जाए कृष्ण जन्मे भी कृष्ण मरे
- 1:08:44सारी उम्र बीत गई, मुझे समझाते हुए देखना मुझे भी सिजाल में मत
- 1:08:52फंसा देना। मेरे जीते जी तुमने शुरू कर दी
- 1:08:58हैं ये शरारतें ओम नमो भगवते विजय वत्सय नमः इन पागल्पनों को छोड़ो।
- 1:09:12नमन करना, समर्पण करना तो उस सतल को करो जहाँ जाकर तुम भगवत्ता को
- 1:09:19प्राप्त हो जाओगे, भाग्यवान हो जाओगे और भाग्यवान को ही भगवान
- 1:09:26कहा गया। और देखिए दर्शन के बाद ही समर्पण
- 1:09:33हुआ करता। है।
- 1:09:34उससे पहले तुम्हारे समर्पण चाहे वो जैन धर्म के हो, चाहे वो बी के
- 1:09:43के हों, ब्रह्मकुमारी। यह समर्पण, नकली नकली कागजों की
- 1:09:49नाव और कागजों के जहाज, यह समर्पण कहाँ जब तक तुम अपनी आँखों से
- 1:09:59नहीं देखते समर्पण नहीं हो पाता। क्यों?
- 1:10:04मन को गहरे से विश्वास नहीं हो पाता।
- 1:10:11बाबा कहते हैं मैंने जीसको बड़े से बड़ा दंड देना हूँ, मैंने पहले
- 1:10:17भी बताया था तुम्हें उसकी आँखें छीन लेता हूँ।
- 1:10:23मैंने कहा बाबा फिर। उससे क्या होता है?
- 1:10:28कहता, वो हमेशा भ्रम में रहता। है।
- 1:10:31क्योंकि वो देख नहीं पता, बहुत बड़ी सजा मिली तुम कहते हो जीस
- 1:10:39हिटलर ने 2,50,00,000 व्यक्तियों का वध किया।
- 1:10:42उसको कैसी सजा मिलेंगे? जन्मो जन्मो का?
- 1:10:45अंधापन और अंधे लोग आज तो शंकराचार्य बने बैठे, इन ये
- 1:10:56स्थापित हैं। प्रभु के शरापित व्यक्ति के पास
- 1:11:03जाना भी अपराध है। तुम उसके शराब का कुछ अंश लेके
- 1:11:09आओगे अगर उसके चरणों को स्पर्श करोगे से बोले बाबा।
- 1:11:26जा को मैं धारण दुख दें ही ताकि मत पहले हर ले, बस मेरा ढंग
- 1:11:35निराला है और बड़ा शानदार है। एक्यूरेट जस्टिस।
- 1:11:44आँखें हैं चुंडी फिर ये परमात्मा की व्याख्या करेंगे।
- 1:11:50हरे रंग के छह टांके होते हैं। सोलो अच्छी तरह से आगे भी अंधे और
- 1:11:59गेरुए के आठ होती हैं। और पीले रंग के नौ होती हैं और
- 1:12:04तुम कहोगे हाँ महाराज बिल्कुल ठीक, कहा आपने क्या खाक ठीक कहा?
- 1:12:10क्या तुमने देखा है हरे रंग के छः टाँगे होती हैं तुमने देखा गैरवे
- 1:12:18के आठ होती हैं तुमने देखा? क्या कहा?
- 1:12:23कहा करो बाबा कहते हैं उतर गयो मेरे मन का सन्स दर्शन से पहले
- 1:12:33तुम्हारी भ्रांतियां में। दर्शन से पहले व्यक्ति प्रत्येक
- 1:12:41व्यक्ति मोड़ होता है। मैंने एक माला जपते हुए की फोटो
- 1:12:47खिंचवाई और वायरल कर दी। मेरी ही फोटो मेरे पास ही थी।
- 1:12:54तो मुझे लोग कहने लगे आप जप का निषेध करते हो, खुद मारा फिर रहे
- 1:12:58हो। बड़ा बावेला मचा मैं पहले बावेले
- 1:13:05को मचने देता हूँ, अच्छी तरह से जब वह बांबड बन जाता है ना फिर
- 1:13:10मैं जवाब देता हूँ। मैंने कहा।
- 1:13:14यह फोटो मेरा है लेकिन बिफोर एनलाइटनमेंट मैं भी तुम्हारे जैसा
- 1:13:20बुद्धू ही था, मैं भी तुम्हारे जैसा मूर्ख ही था।
- 1:13:26सब जो हो गए। दर्शन से पहले प्रत्येक व्यक्ति
- 1:13:33मूड होता है। माला जपो या कुछ भी जपो इसलिए
- 1:13:38कबीर कहते हैं भलो भयो, हरी भी सरो सर से टली भला एक बोझ तो खत्म
- 1:13:44हुआ तो ये समझना तुम्हें शुक्रगुजार होना चाहिए।
- 1:13:48संतो का क्यों उन्होंने तुम्हारी एक भ्रांति तोड़ी?
- 1:13:54उलटे शुक्रगुजार होने के बजाय तुम गाली निकालते हो, तुम कमेंट करते
- 1:13:58हो जैसे कि तुमने जान लिया है, उसे जान लिया तो जम्मू के ऊपर
- 1:14:063:00 बज कर 12.5 मिनट के। ये तन्हाई का आलम और उस पर आप का
- 1:14:30गम। ये थनहाई का आलम और पर आप का गम न
- 1:14:46जीते हैं। ना मरते बताओ क्या करें हम अकेले
- 1:15:04चले आओ। जहाँ तुम कहाँ हो हमें पता नहीं।
- 1:15:14कहाँ आवाज दें तुमको कहाँ? अकेले हैं चले आओ जहाँ हो मेरा
- 1:15:37इसी वहरा में तड़पती है, मेरा सच्ची है, उसने देखा नहीं।
- 1:15:46पता नहीं तुम कहाँ हो पता नहीं तुम कौन हो पता नहीं तुम्हारा नाम
- 1:15:54क्या है, तुम जहाँ भी हो आजाओ ये तनहाई का आलम तड़पा रहा है।
- 1:16:15और उस पर आप का गम आप मिले नहीं हमें आओ मेरे गले से लग जाओ आओ
- 1:16:24मेरे हृदय को तप हर्दय को ठंडक चलाओ ना जीते हैं ना मरते हैं
- 1:16:31तड़प रहे हैं। उस मछली की तरह जो पानी से जुदा
- 1:16:35कर दी गई, तड़पते देखना कभी मछली तुम तो तड़पते नहीं देखते, उसे खा
- 1:16:42जाते। न जीते हैं, न मरते हैं।
- 1:16:56ऐसी हालत हो जाती है, पागलों जैसी बताओ क्या करें हम अब तुम ही बता
- 1:17:03दो, हम क्या करें? नाम झपने पांच नाम झपने राते राते
- 1:17:12कर। क्या हो तुम ये पता ही नहीं जब
- 1:17:24याद कैसे करोगे कौन है वो पता ही नहीं जब याद क्या करोगे।
- 1:17:35न तुम्हें तुम्हारा पता है, यह तनहाई का आलम खुद का भी पता है,
- 1:17:46बड़ा सन्नाटा है चारों और सर आपका कम आप कौन है पता?
- 1:17:56इंतजार सारे जीवन भर का तुम आई नहीं हमने पुकारा अलग अलग नामों
- 1:18:05से पुकारा, लेकिन तुम नहीं आए नामों से कभी आता हो जिसका कोई
- 1:18:10नाम नहीं। तुम कहते हो पलट के तो देखेगा,
- 1:18:14लेकिन उसका नाम वो होगा तो ही पलट के देखेगा ना?
- 1:18:18जब उसका नाम अल्लाह है ही नहीं, वो पलट के क्यों देखेगा?
- 1:18:23ये तो तुम्हारा रखा हुआ नाम है, जब उसका नाम है ही नहीं वो
- 1:18:31देखेगा। इन मुठताओं को छोड़ दो, यह
- 1:18:38तुम्हारे सर के ऊपर रखे भार से अलावा और कुछ भी नहीं फेंको इन
- 1:18:44नामों वामों को। रुपयों की तरह खजाने बना लिए।
- 1:18:50लोगों ने राम राम का धन मैंने एक अरब इकट्ठा कर लिया।
- 1:18:54मैंने कहा बहुत बढ़िया दिया, स्वर्ग मिलेगा, मैंने कहा है ही
- 1:18:59नहीं मिलेगा क्या? और बेचारा मुरुषित हो गया।
- 1:19:05मैंने सुना आज तक उठा नहीं। वो उठेगा भी नहीं।
- 1:19:11एक राजा स्वामी सम्प्रदाय का व्यक्ति मुझे कहने लगा बाबा आपकी
- 1:19:15बातें सुनकर मैं बेहोश हो जाता हूँ, मैंने कहा अच्छा वो बेहोश हो
- 1:19:24गया तो कुछ वित्र। उतरी और बहुत।
- 1:19:27से लोग तो मुझे सुन नहीं बहुत से। डेरों में तो ये अनाउंसमेंट कर दी
- 1:19:32गई कि बाबा की बातों को मत सुनना, ये क्रांतिकारी है, ये तुम्हें
- 1:19:39बहका देगा और ये नहीं कहेंगे कि तुम्हें सद मार्ग दिखा देगा।
- 1:19:45इन्होंने खुद नहीं देखा। तो इस मूर्ख मीडिया की तरह चलाएगा
- 1:19:54देखो देखो उसको मूत आया किसको आया?
- 1:20:01मैंने कहा ये भी कोई बात है? आज?
- 1:20:03पत्रकारिता इतनी न्यूनतम स्तर पे आ गई।
- 1:20:19दुच्चा काहे समर्य जो जमे ते मर जाए एक को सुमर यह आभास यह
- 1:20:32रिसाल्ट है। जब तुम्हें अपना पता चलता है।
- 1:20:39अहं ब्रह्मास्त्र एकों अहं द्वितीय नास्तिक दूसरा नोंक मैं
- 1:20:47ही वो ही घड़ी होती है। जब तुम्हारी सभी धारणाएँ वासनाएँ
- 1:21:00कल्पनाएँ समृतियाँ समाप्त हो जाती हैं और तुम परम आनंद में
- 1:21:09अठखेडियाँ करते हो नाचते हो झूमते हो?
- 1:21:14वो ही घड़ी होती है जब तुम्हें वो एक मिल जाता है जो एक है।
- 1:21:24इसको बाबा नानक ने कहा वह है और एक है।
- 1:21:33मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा परमात्मा है, मैंने कहा कह देता
- 1:21:40हूँ, मैंने देखा है तुम यकीन मत करना, मेरे लिए है, मेरे लिए है
- 1:21:49तो इसलिए इतना शुभम है। मेरे लिए है तो इतना आनंद है,
- 1:21:56मेरे लिए है तो सब बस में गई कोई है माइकल जो मुझे मेरी बात सुनाई
- 1:22:05गाना दे तेरा बरसों से एक स्थान पर बैठे कोई है जो मुझे बता दे?
- 1:22:11तो मैं ये वासन बसवास ले रहा हूँ दिल खलक रहा है, वो भी उसके बाने
- 1:22:19में तेरा पाना मीठा लग है जो तो द पावे सैंपल का।
- 1:22:29कोई वासना शेष नहीं, कोई प्रयास नहीं करता, बस काम धंधा करता हूँ
- 1:22:36जैसे रायदास करते हैं, चूतिया बनाते हैं, कबीर करते हैं, लोई
- 1:22:42बनाते हैं, च दरिया बनाते हैं, ऐसे काम करता हूँ।
- 1:22:50ये छोटा मोटा कम है, व्यक्ति का दायित्व भी होता है।
- 1:23:01वह जब तक उसके हार्ट पांव चलते कुछ ना कुछ करता रहे अपने रोजगार
- 1:23:07के लिए। अपने जीवन यापन के लिए एक को
- 1:23:16समरीय नान का जो जल तल रे असामायी प्रश्न था ओमनी पोटेंट
- 1:23:24ओमनीप्रेज़ेंट ओमनीशिएंट सर्वज्ञ है वो।
- 1:23:31सर्प व्यापक है, वो सर्प शक्तिमान है वो वह बस एक ही है, बाबा कहते
- 1:23:39हैं उसको ही सिमरों चिकन सिमरिंग नाम के बिना तुम्हें पहचान नहीं।
- 1:23:50ओह ही तुम चिल्लाओगे ओह ओह ओह सफ़ेद सट वाले लाल सट वाले
- 1:23:55तुम्हें पहचानना है, तुम व्यक्ति तक का नाम नहीं जानते, भगवान का
- 1:24:00नाम क्या खाद नाम है? उसका कोई नाम है भी नहीं और वह
- 1:24:09तुम्हें। परमात्मा ने द्रव्य तो तुम्हें
- 1:24:13दिया मुफ्त? ध्यान से समझना।
- 1:24:21परमात्मा ने द्रव्य तो दिया मुफ्त, कल मैंने कहानी सुनाई व्रत
- 1:24:25की उसके हार्ट का ऑपरेशन। हुआ।
- 1:24:2910,00,000 का बिल आया रोने लगा, डॉक्टर ने पूछा क्या कम कर दो,
- 1:24:37ज्यादा लगता है? उसने कहा नहीं डॉक्टर, वे तुम्हें
- 1:24:4220,00,000 भी सकता। हूँ।
- 1:24:44इन वस्त्रों से मत पहचान कर लेना। वस्त्रों से पहचान होती है।
- 1:24:53मैं खरबपती हूँ, लेकिन मैं तो रो पड़ा उसका एहसान देखकर उस अज्ञात
- 1:25:04का एहसान देखकर। जिसने इतने वर्ष तक 80 वर्ष 90
- 1:25:11वर्ष तक यह दिल संभालना मैं सो गया तो भी उसने संभालना मैं जग
- 1:25:19गया तो भी उसने संभालना। मैं पुण्य कर रहा था तो भी उसने
- 1:25:24संभालना पाप कर रहा था तो भी उसने संभालना उसने कभी इंकार नहीं किया
- 1:25:29मुझे और तुमने 4 घंटे मेरे दिल को संभालना और उसका 10,00,000 बिल
- 1:25:36बना। दिया।
- 1:25:39और सुबह चार महीने। करुणाबान महा करुणाबान ने परवर्ती
- 1:25:45कार ने रहमो करीम ने मुझे कोई बिल नहीं भेजा तो परमात्मा तुम्हे
- 1:25:54पदार्थ तो देता है मुफ्त। अब ये बात समझे।
- 1:26:02परमात्मा तुम्हें पदार्थ तो देता है मुक्त कोई उसका मुआवजा नहीं
- 1:26:07मानता, लेकिन स्वयं मिलता है परमात्मा।
- 1:26:14उसकी कीमत चुकानी होती है। और कीमत भी वही जो उसने दिया है
- 1:26:21बस उसका उसको सौंप 213 तुझको अर्पण क्या ला के मेरा लेकिन तुम
- 1:26:28जपफा डाले बैठो ही नहीं तो मेरा है क्या मानता है वो?
- 1:26:35क्या कीमत है उसकी? और यही साहस तुम जुटा नहीं पाते
- 1:26:40और इस साहस के जुटाए बिना तुम्हें चैन नहीं है, तुम प्रबुद्ध नहीं
- 1:26:53हो पाते। तुम ज्ञानी नहीं हो पाते,
- 1:26:56तुम्हारी अविद्या का नाश नहीं हो पाता, तुम्हारी अज्ञानता का नाश
- 1:27:01नहीं हो पाता तो क्या मानता है ज्ञान क्या मांग है परमात्मा की
- 1:27:11तुमसे? जैसे कोई पिता अपनी सारी संपत्ति
- 1:27:14को पुत्र को दे दे, हर उसमें से ₹10 मांग ले, के मेरे को दे दो और
- 1:27:22पुत्र समझे के यह तो मुझे दे दिया, मेरा ही हो गया और पुत्र
- 1:27:27₹10 भी ना ले पाए तो कैसा लगेगा? दिया हुआ परमात्मा का ही है सब
- 1:27:36कुछ वह अपना ही दिया हुआ तुमसे मांगता है, क्या मांगता है?
- 1:27:49परमात्मा कहता है अगर तुम्हें चाव चढ़ गया है।
- 1:27:55मेरे आंचल में छिप जाने का मेरे से गले लग जाने का ये तो।
- 1:28:13मिलन की जा मुझे तो मिलन की जा। अब यह मालजा देखो शी तलीधर शी
- 1:28:42तलीधर शी श तलीधर। मुझे तो प्रेम मिलनो के जा शीश
- 1:29:24तलीधर घर मेरे आ। मुझे तुम फ़िल्म मिलन के चा शी
- 1:29:41समझता है, शीष भी क्या जो तुमने नकली नकली मैं बना लिया।
- 1:29:52तुम्हारा अंकार मांगता है। वह बकरों की भली नहीं मांगता,
- 1:29:56मासूम मेमनों की भली नहीं मांगता नारियालों की भली नहीं मांगता
- 1:30:05नारियल उसके ही है। लगे हुए तुम्हें अच्छे नहीं लगते,
- 1:30:10क्या फूल उसके ही हैं और तुम उसको ही अर्पण कर देते हो?
- 1:30:19तोड़ के फूलों का खेलना अच्छा नहीं लगा क्या?
- 1:30:26दो घड़ी के लिए जीवन मिला था, उसे नाच रहा तुमने क्यों तोड़ दिया
- 1:30:33उसका गला क्यों काट दिया तुमने? तुम ऐसे ही कृत्यों को भक्ति
- 1:30:42करता? पत्रम पुष्पम फ़िल्म।
- 1:30:47तो हम सब उसका दिया हुआ है तो कहते हैं मुझे ये तो मेरा है, तुम
- 1:30:56वह दे दे मुझे जो तेरा है तुम्हारा क्या है?
- 1:31:03एक है तुम्हारा भी कुछ बनाया हुआ। वह नकली नकली है जो जिसे दिखाते
- 1:31:09फिरते हो तुम ये देखो मैंने छह सूट बदल दिए और यही भ्रम दुनिया
- 1:31:15को फैला देते हो सोने की पुशकें डालते चिढ़ाते हो तुम गरीबों को?
- 1:31:24देखो, तुम्हारी जेबें कुतर ली। हमने अपनी शार्प बुद्धि से कानून
- 1:31:30बना के कुतर लो। भाई संगत कोई भी नहीं ले जा पाया।
- 1:31:44जब संघ ही नहीं ले जा पाएगा तो इकट्ठा काहे कर रहे हो?
- 1:31:51पागल हुए हो अज्ञान का नाश कैसे हो?
- 1:32:01ज्ञान की उपलब्धि कैसे हो? बुद्ध ने सब कुछ ज्ञान होने से
- 1:32:08पहले ही छोड़ दिया, लेकिन एक चीज़ अभी बाकी थी।
- 1:32:14तुम कहोगे अगर पदार्थों के छोड़ने से परमात्मा मिल जाता तो बुद्ध को
- 1:32:19तुरंत ही मिल जाता, लेकिन फिर भी नहीं मिला।
- 1:32:24लेकिन 6 साल लग गए।