Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 May 26 - कर्म का सिद्धांत: क्या परमात्मा की इच्छा के बिना सच में पत्ता नहीं हिलता?
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- 0:16सुनील त्रिपाठी और बहुत से प्रश्नकर्ताओं के प्रश्नों का
- 0:30जवाब भगवान कृष्ण ने कहा है कि मेरी इच्छा के बिना।
- 0:42एक पता भी नहीं हिलता, आपने बड़े कठिन सवालों के जवाब बड़े सरलतम
- 0:56ढंग से भेजे। सवाल फिर भी बने ही रहे।
- 1:11कृष्ण कहते हैं, मेरी इच्छा के दिन एक पता भी नहीं मिलता, कृपया
- 1:21इसका पूर्ण अंतःस्थल में जाकर जहाँ तक बोला जा सकता।
- 1:31वहाँ तक बोलने का कष्ट कहें क्यों कि हमें नहीं लगता कितना
- 1:41सटिस्फैक्टरी जवाब कोई और दे पाएगा?
- 1:52ऐसा समझिए एक कोर्ट है सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, उसमें बहुत से
- 2:06अपराधी खड़े हैं। किसने चोरी के डकैती के?
- 2:15किसने बलात्कार किया? कोई तलाक के लिया है किन्हीं
- 2:26भाइयों में जायदाद का बंटवारा? कोई अन्य डिस्प्यूट्स भी हैं,
- 2:39लेकिन एक वह व्यक्ति भी है जिसने 1000 कतल किया है और वह भी उनमें।
- 2:51शमय और भीतर जा जो बैठ है, शायद तुम कहोगे कि इन सब की तकदीर उस
- 3:13व्यक्ति के हाथ में है जो भीतर। सुप्रीम चेयर पे बैठा सी जे आई या
- 3:23फुलवेंच है अगर कृष्ण कहते हैं मेरी इच्छा के
- 3:37बिना पता भी नहीं हिल सकता तो शब्दों को।
- 3:46देखने के साथ साथ किस तल से वो बोल रहे हैं, यह पहले देखना
- 3:52चाहिए। अगर कोई सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
- 4:02का जज यह व्यक्ति। जो 1000 कतल किये हैं और सारे
- 4:15प्रमाण मौजूद हैं और वह कहे की यह तो फांसी पर चिडेगा तो क्या यह
- 4:25भविष्यवाणी? या की होनी है या की उसके कर्मों
- 4:36का फल सोचेगा? गहरे सवाल पूछा गया तो उत्तर भी
- 4:42गहरे होंगे। असली में तो।
- 4:50प्रश्न पूछते तो लेकिन वो प्रश्न बड़े खोखे और खोखे होते हैं,
- 4:58उनमें दम नहीं होता, कृष्ण उस से बोल रहे हैं।
- 5:10जीस स्तर से वह न्याय कार्य है। सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठा हुआ
- 5:19कृष्ण अपनी मर्जी से कुछ नहीं करता।
- 5:32अगर वह कहता है कि यह तो फांसी पर छिड़ेगा बिकॉज़ यह अपवादों में से
- 5:46भी अपवाद है। 1000 कतल।
- 5:53और सब के बागायदा सबूत तो फिर अगर बेहतर सीजिया की कुर्सी पर बैठा
- 6:03हुआ कोई व्यक्ति क्या कहते? मेरी इच्छा के बिना एक पत्ता भी
- 6:14नहीं हिलता तो यह बिल्कुल वही बात है कि वह न्याय की भाषा में बोलता
- 6:21है क्योंकि ऐसे व्यक्ति के लिए संविधान में यही तो कनिश्मेंट है।
- 6:34तुम इसे और ढंग से समझ सकते हो, लेकिन बोलने वाला इस ढंग से बोला
- 6:42नहीं। वह न्याय का सुप्रीमो है और साथ
- 6:51साथ। वह न्याय की किताब संविधान के
- 6:55भीतर बना हुआ है। जब वह फैसला देगा तो नीचे वह
- 7:02लिखेगा कि मैंने यह फैसला क्यों किया?
- 7:07आपने कभी ऑर्डर की काफी देखी है? बकायदा लिखता है किस कारण से
- 7:19मैंने यह फैसला लिया। मतलब कारण तो उसके कर्म ही हुए
- 7:28ना? ने की।
- 7:32सीजीआई का स्वतंत्र दृष्टि कोण और वह तो संविधान का रक्षक है, खबर
- 7:42है लेकिन फैसला संविधान के विपरीत कैसे दिखा?
- 7:55वह व्यक्ति जो कहेगा, उसका आधार, उसके कर्म अगर उसने 1000 कीतल न
- 8:06किए होते और कोई प्रमाण न होता तो वह ऐसे शब्द नहीं बोल सकता था।
- 8:12शब्दों की उल्टा पूर्ति है या बोलने के अलफज़ों के ढंग है?
- 8:19कृष्ण कहते हैं, मेरी इच्छा के बिना एक पत्ता नहीं मिलता, लेकिन
- 8:23उसकी इच्छा चलती कैसी है तुम्हारे कर्मों के आधार।
- 8:34वैल्यू उसकी स्वतंत्र इच्छा नहीं होती है।
- 8:39तुम्हें पनिश करने की ध्यान रखिये, तुम सब कृष्ण के बाल बच्चे
- 8:48हो। और क्या वह अपने बाल बच्चों से
- 8:56बिना अपराध किए कोई उन्हें सजा देगा?
- 9:04फिर अगर कृष्ण यह अल्फाज़ बोलते कि मेरी इच्छा के बिना पता नहीं
- 9:10हिलता। वह अकारण नहीं बोलते, वह सहकारण
- 9:15बोलते हैं, कास्ट एंड इफेक्ट है। इसमें किसी भी व्यक्ति के बोलने
- 9:24से पहले वह किस तल से बोला यह जरूर देख लिया।
- 9:37तुमने प्रश्न पूछा भविष्य मलिका का मैंने जवाब दे दिया तुमने फिर
- 9:46और आगे क्वेश्चन पूछा नहीं। उसमें तो पाकिस्तान भी लिखा है।
- 9:51उसमें अन्य अन्य ऐसी घटनाएं हैं। जो 600 वर्ष पहले नहीं हुई थी।
- 10:00बिल्कुल ठीक है इतनी माथा कपाई करने की बजाय।
- 10:16अगर तुम उस तन पर ही चले जाओ जहाँ जाकर सारे बेत की गांठें हो जाए।
- 10:24प्रश्न घर जाए, समझ आ जाए और फिर कोई भी प्रश्न पूछने का तुम्हारा
- 10:33औचित्य न रह जाए। और मैं तुम्हें यही सीखाता हूँ,
- 10:40बड़ा कीमती वेला है, काहे जिंदगी के लम्हों को तुच्छ चीजों में
- 10:51बेकार कर रहा हूँ। मैंने कुछ कह दिया और वह ठीक हो
- 10:59जाएगा। तुम मेरे पांव पकड़ लो, क्या
- 11:01करें? लेकिन इससे तुम्हें क्या मिला?
- 11:08मैं तुम्हें कहता हूँ ऐसा कुछ करो जिससे तुम्हें कुछ नहीं चाहिए।
- 11:17मैं तुम्हारे बंधन काटने के लिए आया हूँ और मेरे बंधन काटने के
- 11:24उपायों के बोलने के ढंग के ऊपर भी अगर तुम सवाल पैदा कर दो।
- 11:32तो इसका अर्थ साफ है कि अहंकार अपने आप को मिटाना नहीं चाहता,
- 11:39फिर महमुख शापिबासा जगिन फिर तुम सिर्फ मेरे शब्दों के तार्किक
- 11:46आनंद लेना चाहते हो, फिर तुम सिर्फ अल्पवास।
- 11:52सूचनाओं का संग्रह अपने में करना चाहते हो, इसके अतिरिक्त तुम्हारी
- 11:58कोई आंतरिक मिक्षा ने बाबा जी उसमें बहुत सी ऐसी बातें लिखी हैं
- 12:08जैसे पाकिस्तान, तुर्की। आदि देशों की बातें जो उस समय
- 12:13अस्तित्व में नहीं थे, मुझे भी लगता है कि इसमें तरमीन किया गया
- 12:19होगा, लेकिन इसकी ज्यादातर बातें सत्य क्यों हो रही हैं?
- 12:25मुझे एक स्रोत भी मिला जिनके घर में।
- 12:29ओरिजिनल ताड़ पत्र पर मूल काफी मौजूद थे।
- 12:34उनके पिताजी ने इस पर शोध कार्य किया है।
- 12:37उनसे मेरी बात हुई। उन्होंने मुझे अपने काम उड़ीसा
- 12:42आने का आमंत्रण दिया और बोला कि हम आपको दर्शन करवाएं।
- 12:48इसके अलावा बहुत से और प्रमाण हैं।
- 12:53एक संत हुए थे जो नॉर्वे चले गए। उन्होंने भी प्रथम, द्वितीय और
- 12:58तृतीय विश्व युद्ध की बात अपने लेख में की थी।
- 13:04प्रथम युद्धनीयत समय पर हो जाने के बाद।
- 13:07अमेरिकन डेलिगेट्स उनसे मिलने गए थे और इनका वार्तालाप अमेरिका के
- 13:14अखबार में आया था। मेरे पास हिंदी की पीडीएफ़ मौजूद
- 13:20है। आपकी आज्ञा हो तो मैं शेयर करूँ
- 13:24और भी तथ्य जो मैंने ढूंढे हैं। जिसका धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों
- 13:30प्रमाण भी हैं। मेरे पास एक छोटा लेख भी लिखा था।
- 13:342020 में यदि आज्ञा करें तो मैं शेयर कर सब कूड़े में चालाक।
- 13:46एक साधे सब सधे सब साधे सब चार मेरे ला बोलने के बाद भी।
- 14:00हमारी पंजाबी में कहावत है पंचों का कहा सिर माथे पर पर नाला ओथे
- 14:09दी ओथे मैं तुमसे पूछता हूँ कि तुम बदले क्यों न?
- 14:18सुनील त्रिपाठ मैं तुम्हें बदलने आया मैं तुम्हारा ये कांटा जो
- 14:28तुम्हारे दर्द का कारण है तुम्हारे प्रश्नों का कारण है जो
- 14:35तुम्हें चुभ रहा चस चस कर रहा रातों की नींदें हराम हो।
- 14:43मैं बाहर निकालने आया हूँ, मेरे पास फोर शेप है, मैं उस फोर शेप
- 14:49से काटे को पकड़ के बाहर कहीं से लूँगा।
- 14:56हमारी राहें अलग अलग हैं। कृष्ण कहते हैं, मेरी इच्छा के
- 15:03बिना एक पत्ता पे नहीं झूलते और आप उसी को प्रश्न बनाकर गुब्बार
- 15:12खड़ा कर सकते हो। तो फिर ये बरातकार क्या उसकी
- 15:18इच्छा से होती? फिर ये क्या कतलोग अर्थ उसकी
- 15:23इच्छा से होती नहीं, तुम भटक गए। कृष्ण के कहने का जो मूल अर्थ था
- 15:34वो तुमने खो दिया। मैं तुमसे कहने आया हूँ कि
- 15:42तुम्हारा दर्द में मटा दूंगा, तुम्हारे पांव में जो कांटे चूका
- 15:47वह निकाल दूंगा, तुम प्यासे हो, मेरे पास पानी है, बात खत्म हो गई
- 15:54ना? तुम प्यासे हो और तुम्हारा रोमा
- 16:01रोमा तड़प रहा है डिहाइड्रेशन के कारण और मेरे पास कौन है फिर
- 16:09गड़बड़ी क्या है कहाँ पे? फिर भी अगर तुम सवाल करो यह काँटा
- 16:20तिरचा है आडा है दो मुआ है, चार मुआ है, कितनी लंबाई चुड़ाई है?
- 16:29तो फिर इसका मतलब है कि तुम इस काँटे को निकलवाना नहीं चाहते।
- 16:39तुम सुखी होना नहीं चाहते, मेरी मंशा कुछ और है तुम्हारी चाहत कुछ
- 16:51और है और अगर बहुत संक्षिप्त। तुमने कहा रहस्यत्मक गहरे चल के
- 17:01उतर जाओ, लो उतर गया अब व्याख्यात करो बस मैं तो यही पर हूँ।
- 17:16कि तुम तुम्हारी चपकहतों को मरने से डर जाओ और कुछ भी तो नहीं है
- 17:26तुम चाहती हो, मैं कभी न मरूँ मैं यानी कि मेरा द्वंद पैदा करने
- 17:32वाला। मुझे कभी होश न आया और चाहे रूठ
- 17:45जाऊं सारा, फिर भी मुझे होश। दिन में अगर चिराग जलाये तो क्या
- 18:12हुआ? सब कुछ लुटा के?
- 18:20होश में आए तो क्या हुआ? जब दर्द इतना भारी हो जाता है
- 18:32मरीज को। उससे पहले वह लाख विचार करी
- 18:39सर्जरी करवाऊं न करवाऊं। कहीं ऐसा तो नहीं कि पीठ में लगने
- 18:47वाला इंजेक्शन मुझे मार ही न दे, लेकिन ध्यान करो।
- 18:55जब एक ऐसी अवस्था भी आती है, तुम भी जानते हो जब सर्जरी के अलावा
- 19:06कोई उपाय रह ही नहीं जाता तो तुम्हें टेबल पर बैठना ही पड़ता
- 19:13है। डॉक्टर।
- 19:15इस व्याधि के मूल कारणों को हटा दो, मैं इसे ही मुँह मुक्षा कहता
- 19:20हूँ जब तुम थक जाओगे, इस कांटे से मवाद बढ़ जाएगी, चस चस करोगे?
- 19:32और फिर तो दिन में भी चैन नहीं और रात को भी चैन नहीं।
- 19:38फिर आखिर को तो तुम सर्जरी के टेबल पर आना ही पड़ेगा, सबको आना
- 19:48पड़ता है। तुम इस बुद्धि से समझने की चेष्टा
- 19:57करते हो, जो बुद्धि गुनाहगार है और उसके शब्दों को समझने की
- 20:04चेष्टा करते हो। जो न्यायकारी है, फिर कितना फैसला
- 20:09है दोनों में? कातिल मुजरिम है और न्यायिक
- 20:19व्यवस्था की कुर्सी पर बैठा हुआ व्यक्ति मुजरिम नहीं है।
- 20:28वह अपने संविधान के हिसाब से न्यायिक।
- 20:35तुमने किया तो है गुना भाषा बोलते हो न्यायकारी भला?
- 20:44भेड़ भेड़ेगा कैसा लाख? ताड़ पत्र पर लिखा है।
- 20:55कर को सत्य हो या असत्य हो, लेकिन वह जो नॉर्वे चला गया वह जो उड़ी
- 21:03शर्तों में बुला रहा है। एक बात कभी उनसे पूछना।
- 21:14मेरे पास यहाँ एक पीएलआर करने वाले व्यक्ति आगया मशहूर
- 21:31तो एक प्रश्न पूछना था, मैंने कहा क्या करते हो?
- 21:36कैसे अच्छा अब तुम ऐसे स्थान पे खड़े हो?
- 21:44तुम झूठ नहीं बोल सकोगे बताओ क्या तुमने अपना पिछला जन्म जान लिया
- 21:52है? मेरे प्रभाव में आके व्यक्ति अपना
- 21:56तेज हो जाता है, वो कहता नहीं ठगी है सब तो मैंने कहा फिर ये पाप
- 22:06क्यों कमाते हो? तुम्हें पता है यह ठगी तुम्हारे
- 22:12साथ जाएगी। और ठगी से जो धन कमाया वो यहीं
- 22:16पड़ा रह जाएगा। फिर ये घाटे वाला सौदा तुम क्या
- 22:19करते हो? और आज कितने ही लोग हैं ये मास्टर
- 22:25जी ये सोहेल, ये बाबा भाग ईश्वर। काहे करते हैं ये इतना पाप?
- 22:38तीन 3,00,000 लोगों की किताब को धूप में जला देना इतनी दूर दूर से
- 22:42आए ये सब क्यों हो रहा है? मैं नहीं भराता क्योंकि मैं जानता
- 22:50हूँ। मैं तुम्हें आराम से तुम्हारे
- 22:57बिस्तर के ऊपर मेरी बातों को सुन इतनी सुविधाजनक रूप से मैं
- 23:06तुम्हें सत्य बताता हूँ बिना किसी तकलीफ दे ही मैं किसी व्यक्ति को।
- 23:15एक रुद्राक्ष देने के बहाने से करोड़ों लोगों की संख्या कोई
- 23:21इकट्ठा नहीं करता और उसकी भगदड़ में लोग मर जाते हैं और तुम समझ
- 23:28के हो के दंड किसी को नहीं मिला तुम गलती में हो।
- 23:35दंड मिलता है बहस घरे घरे में विद्यमान सर्जनहार बराबर साक्षी
- 23:45है हर चीज़ का कास एंड विट में दक्ष।
- 23:52वह परम सत्ता जानती है। किस के कारण यह हुआ यह बड़ी बड़ी
- 24:05दुखों के को संग लिए जो जन्म जाते हैं तुम कहते हो इस छोटे बच्चे ने
- 24:16क्या अपराध किया है? बस यही तुम चौंक जाते हो फिर कोई
- 24:23कहता है पिछला जन्म होता ही नहीं, एक जन्म होता है, कोई कहता है
- 24:28परमात्मा ही नहीं होता, कोई कहता है या कोई कर्म?
- 24:35और भुगतान की व्यवस्था ही नहीं होती।
- 24:38चारवाक कोई कहता है परमात्मा था तो लेकिन नंबर गया गॉड इस दट नीचे
- 24:46मार्क्स कोई आचार्य कहता है कि एनलाइटनमेंट होती ही नहीं,
- 24:58तुम्हारा कोई लक्षण नहीं है। यहाँ बस खाओ, पियो आनंद करो भोज
- 25:05मत रखो दिमाग पर न शादी कराओ तो फिर भोज दो, आवारा कुत्तों के
- 25:13दिमाग पर भी कोई नहीं होता और जब चाहे मैं तुम कर लेते।
- 25:19जब चाहे खा पी लेते, फिर क्या तुम कुत्तों की तरह हो?
- 25:26उनके बड़े बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड होते हैं।
- 25:29क्या तुम उन प्रजातियां में से आते हो?
- 25:34लेकिन नहीं पुत्र तुमने जो प्रश्न पूछा।
- 25:43व्यक्ति बोल कहाँ से रहा है? वह मुजरिम है, यह न्यायकारी है,
- 25:52यह देखो तुम सत्य को क्यों नहीं देखते?
- 25:55तुम शब्दों को क्यों देखते हो? कितनी पुरानी आदत है तुम्हारी
- 26:03शब्दों से चिपड़ जाए और मैं रोज़ बोलता हूँ कि शब्दों की चपकाहटों
- 26:10को छोड़ो। इस लगी हुई इस पर लगी हुई शक्ति
- 26:16को एकत्रित करके एक बिंदु। अपने अंत में उतरो, तो अब तक
- 26:22कितनी बार पहुँच गए हो? यह प्रश्न फिर तुम्हारी आड़े ना
- 26:30हो। छह वर्षों से मुझे तुम सुन रहे
- 26:32हो? और अभी भी उन लोगों के कमेंट्स
- 26:38आते हैं और मुझे पता है आएँगे के बाबा तब तो आपने कहा था 4,00,000
- 26:46साल का पड़ा कल यू अब तुम कहें आ ही गया कल यू तुमने ऐसा कहा।
- 26:56आज तुमने ऐसा कहा तो फिर मैं तुमसे ये कहूंगा कि मुझे सुन में
- 27:02छोड़ दो क्योंकि तुमने काम की बात कहा सुनी मैं तुम्हें कहता हूँ।
- 27:15तुम्हारी इच्छा है कि उसको मैं शब्दों में व्यवसायित करूँ और
- 27:22मेरी मजबूरी है कि मैं शब्दों में व्याख्यायत उसे नहीं कर सकता जो
- 27:27शब्दों से कहा जा सकता है शब्द बड़े तुच्छ है, और वह बड़ा विराट
- 27:34है तुम तो। अगर आँखें हैं, तो खोल के देख लो
- 27:38इस विशाल भ्रमण को तुम इसकी दूरी भी तो नाप नहीं पाओगे, फिर मैं
- 27:45इसे शब्दों में कैसे बांधू? और मेरा यह है बोलना एक तथ्य फरक
- 27:54है। कि वह शब्दों में नहीं बाचा जा
- 27:59सकता, लेकिन ध्यान रखना फिर भी बोलते हैं।
- 28:04क्यों ज़रा समझिएगा एक व्यक्ति जहाँ से 10 सड़कें पहुँचती हैं।
- 28:16वहाँ बीच में खड़ा है 10 तरफ डिवाइडेशन होता है 10 और दिशा में
- 28:26सड़के जाती हूँ और कोई व्यक्ति उसके पास आके रुकता है गाड़ी।
- 28:36वो कहते हैं, महाशय आप यहाँ खड़े हैं, आप तो जानते ही होंगे, मैंने
- 28:44बॉम्बे जाना है, कौन सी सड़क पे जाऊं तो मुझे जवाब दो, क्या उसे
- 28:52चुप रह जाना चाहिए? 10 तरफ से 1010 डायमेंशन्स में
- 29:04खिड़क के निकलती है और वह व्यक्ति बीच में खड़ा है।
- 29:09उसके पास गाड़ी रूकती है। वो पूछता है, महाशय मैंने बॉम्बे
- 29:15जाना है। कौन सी सड़के जाएगी तो उस वक्त उस
- 29:25महाशय का फर्ज क्या बनता है? बस वही फर्ज मेरा बनता है।
- 29:33तुम भुमत्र हुए लोग हो, तुम्हें नहीं पता कौन सी दिशा कहाँ जाएगी
- 29:41और इन दसों दिशाओं के बीच में खड़ा हुआ मैं जानता हूँ कौन सी
- 29:46दिशा कहाँ जाएगी। कौन सी सड़क दिल्ली जाएगी, कौन सी
- 29:51सड़क पाकिस्तान जाएगी? कौन सी सड़क अमेरिका जाए?
- 29:55कौन सी सड़क बॉम्बे है, सब जानता हूँ तो उस अवस्था में क्या मेरा
- 30:03मौन रहना ठीक है अगर मेरे मौन रहने से?
- 30:14ज्यादा संभावना है कि तुम अपनी मर्जी से चलोगे तो गलत राह पकड़
- 30:20लोगे, ज्यादा संभावना है, मैं करता हूँ और गलत राह पकड़ लिया तो
- 30:28तुम वापस आओगे, तुम कहो गया रे। यह तो लाहोरा क्या यह तो
- 30:37अफगानिस्तान फिर मेरा ना बोलना तुम्हें भटका गया कि नहीं भटका
- 30:48गया? फिर इसमें मेरा थोड़ा सा कसूर है
- 30:52कि नहीं है? बिल्कुल है।
- 30:56संत इसलिए बोलता है संत जानता है मैं जानता हूँ अभी अगर इनको राह
- 31:05ने दिखाया। तो ये भटक जाएंगे और उसके भटकने
- 31:09का कहीं ना कहीं इलज़ाम मैं अपने ऊपर भी लेके आऊंगा।
- 31:16मेरी आत्मा मुझे प्रताड़ित करेगी। जब तुम जानते थे तुमने इशारा
- 31:22क्यों नहीं कर दिया? बस इसीलिए मैं बोलता हूँ, मेरा एक
- 31:34इशारा ऐसे कर दो मैं यह सड़क जाएगी भाई, क्या बिगड़ जाएगा?
- 31:42इस डायरेक्शन को ऊँगली करने से मेरा क्या बिगड़ जाएगा?
- 31:47कुछ भी तो नहीं, तुम्हारा सब कुछ सुधर जाएगा।
- 31:53तुम उस सही दिशा में चल पड़े, सड़क पर चढ़ पड़े, तुमने गंतव्य
- 31:59पा ली। तुम वहाँ जाके धन्यवाद दोगे बताने
- 32:06वाले ने मुझे सही मार्ग बताए थे और अगर मैं बिल्कुल चुपचाप खड़ा
- 32:12रहा हूँ तो तुम पता नहीं कहाँ निकलोगे और कहाँ पहुंचोगे?
- 32:18बस इसलिए मैं बोलता हूँ। मत करो राधे राधे मत करो पांच नौ
- 32:24मत करो खंड पहट साहब का भोग ये कुछ नहीं बेकार है कहीं नहीं
- 32:30पहुंचाएंगे आपको किते प्रश्न तुम सब लोगों ने मुझसे पूछा।
- 32:40तुमने 1000 क्वेश्चन पूछे, मैंने 2000 क्वेश्चन का जवाब दे दिया,
- 32:49लेकिन क्या तुमने सुख पाया? बात मेरी नहीं, मैं रास्ता दिखाने
- 32:57के लिए ही मौजूद। कृष्ण कहते हैं तुम सच्ची शरण में
- 33:04आ जाओ, मैं तुम्हें तुम्हारे दुख दर्दों से मुक्त कर दूंगा।
- 33:11आहुं तों सर्ब पापे भमोक्ष स्वामी महासूच पाप दुख का मूल है।
- 33:20और कृष्ण तुमसे सिर्फ तुम्हारा आपा मांगते हैं जो तुमने नकली
- 33:24नकली बना दिया सर्वधर्माण प्रतिज्ञ छोड़ दो इन नकली धर्मों
- 33:32को इन नकली बांटीज को तो बस मेरी शरण में आ जाओ।
- 33:37यानी मेरी बात सुन तू श्रावक बन तू शिष्य बन तू मीन मेख मत कर, तू
- 33:46काट छांट मत कर, तू सेंसरशिप मत कर, तू इस कैंची को फेंक दे, सीधे
- 33:54सीधे मेरी बातों को सुन। और तू पाएगा तू सही स्थान पर
- 34:01पहुँच गया 10 सड़कों के बीच में खड़ा हुआ कोई व्यक्ति तुम राह
- 34:14पूछते हो, वह तुम्हें राह बता भी देता है।
- 34:18फिर भी तुम उस राह पे चलने की बजाय किसी अन्य राह पे चलते हो तो
- 34:24कसूर किसका? मैंने अपना कर्तव्य निर्वाहण कर
- 34:31दिया। क्या तुमने आज्ञा को शुरू किया?
- 34:45फिर पूछना ही नहीं है, लेकिन अगर पूछ लिया तो मेरी जिम्मेदारी बनती
- 34:54है। और बहुत से गुरु तो ठहरा के पूछ
- 34:59लेते हैं भाई ठहरों जाना कहाँ है? क्योंकि मैं जानता हूँ ये सभी
- 35:06सड़कें कौन कौन सी किधर जाती हैं, तुम मुझसे पूछ ले।
- 35:16और उसी सड़क पे निकल जा तू ज़रा ठहर के पुस्तु ले।
- 35:22लेकिन बहुत से लोग तो जन्मजात पैदाईशी ही सर्वज्ञ पैदा होते
- 35:32हैं। वह जानते हैं कौन सी सड़क हमें
- 35:35पहुंचा देगा। पहुंचते पहुंचते नहीं है, जो
- 35:40डेरों के अंदर बाबा लोग हजूरों को चुन लेते हैं।
- 35:45क्या इन्होंने अपना आपा खंगा लिया है?
- 35:50लेकिन ये दूसरों को दिखाएंगे मार्ग फिर क्या ये ठीक है?
- 36:07तो है बात याद आएगी गुजर जेवा। हरमौज ठहर जाएगी करोगे?
- 36:32याद तो है बात याद आए। गुजरते वक्त।
- 36:45की हरमौत ठहर जाए। अगर पूछोगे तो कोई बताने वाला
- 37:05होगा, लेकिन बताने वाले की जिम्मेदारी है कि वह बात करें या
- 37:13पुण्य करें। तुमने तो श्रद्धापूर्वक पूछ लिया,
- 37:25अब जिम्मेदारी आती है बताने वाले ऐसे ही जन्मजात अपंग, अंधबुद्धि,
- 37:36मंदबुद्धि, क्षीण बुद्धि नहीं पैदा हो जाया करते।
- 37:42कहीं ना कहीं कि नकली रस्तों पर इन्होंने गुमराह किया होगा उस
- 37:52विराट की इस सृजना को नुकसान पहुंचाया होगा।
- 38:02तुम्हें पता है सिर्फ मुर्गी का सर, कलम करना या मेमने का सर कलम
- 38:10करना ही अपराध नहीं होता। पेड़ का सर कलम करना भी अपराध
- 38:16होता है। लेकिन तुम फिर भी आँखें मूँदें
- 38:21अपराध किए जाते हो, जबकि तुम्हें पता है कि तुम अमर नहीं हो, यह
- 38:29पेड़ कटते ही ऑक्सीजन बिखेरना बंद कर देगा और वह ऑक्सीजन तुम्हें भी
- 38:37जीने के लिए जा। तो हमारे बच्चों को भी चाहिए और
- 38:42आने वाली सभी पुस्तों को चाहिए तुम एक पेड़ को बचा कर न जाने
- 38:48कितनी पुस्तों का उपकार कर पाओ। ऐसा सोचो क्या गंगा स्नान करने के
- 38:55लिए बनी है? आज तक तुम ही के पश्न किसी ने
- 38:59पूछा नहीं होगा तुम ज़रा सोचो कि तुम्हारे घर का होत क्या तुम
- 39:08नहाने के लिए उसके भीतर उत्तरा करते हो?
- 39:14तुम्हारे घर में भी तो कोई तैरती होगी?
- 39:17के जब तुमने नहाना होता है तुम किसी भी अवस्था में हो मल मूत्र
- 39:22से लेपटे होगा क्या तुम उस टंकी का ढक्कन खोल के उसके अंदर उतर
- 39:28जाते हो? गंगा के लिए तो तुम यही कर रहे हो
- 39:36घरों में तुम। बकेट में पानी लेते हो जो आता तो
- 39:43वहीं से है, लेकिन यह किस मूर्ख ने सिखाया कि तुम उस टंकी में ही
- 39:53उतर जाओ, उसमें ही सारा मल मूत्र छोड़ दो।
- 39:57फिर वही तो तुम पीओगे आज तुम यही कर रहे हो, मैं तुम्हें कहता हूँ
- 40:10गंगा में एक स्नान ऐसे डंग? तुम वहाँ से वक्त भर हो।
- 40:18मैं गंगा में बहुत स्नान किया हूँ।
- 40:25लेकिन मैं वहाँ से हमेशा ही बाल्टी भरता और दूर जाके नहाता।
- 40:32पानी तो वही है, मुझे लोग कहते हैं आप इसमें गोता लगाओ, न हारे,
- 40:42आर गंगे करो, मैंने कहा नहीं, यह पाप मैं नहीं कर सकता।
- 40:50जो नहायेगा उसके शरीर पे पसीना भी है, सिर पर धूल भी है।
- 41:01क्या मैं इसे और लोगों को दे दूँ अगर मेरा शरीर बीमार है?
- 41:07किसी प्रकार के फोड़े फुंसे से ग्रसित है।
- 41:11क्या वह बैक्टीरिया में दूसरों को सौंप दूँ?
- 41:18यही तो अंधभक्ति का प्रमाण है और उससे बहते पानी को तुम।
- 41:2410 घंटे आरती करने में उतार देते हैं।
- 41:27क्या यह वक्त की बर्बादी में फिर तुम कहते हो हमारा मुल्क चौथे से
- 41:36छठे नंबर पे आएगा भाई तुम्हारा ही तो मुल्क आएगा कोई चाइना थोड़ी ना
- 41:42आएगा। तुमने रास्ता सही चुना नहीं तुमने
- 41:53सही जानने वालों से पूछा नहीं तुमने रस्ते सदा उन्हीं से पूछे।
- 42:01और उनकी संख्या ज्यादा होती है। निश्चित एक व्यक्ति टोकरे में
- 42:11मेमना लिया जा रहा था। वह अकेला था और उसको ठगने वाले
- 42:16पांच पांचों अलग अलग मोड़ों पे खड़े हो गए क्योंकि मेमना बड़ा
- 42:24प्यारा था। उसको देखकर सब की मुँह की लाड़
- 42:30टपक पड़ी। हम इसे खाएं तो कितना बढ़िया
- 42:33लगेगा? तुम साधारण आलू खाओ या मशरूम खाओ,
- 42:40इतना महंगा मल बनकर सुबह तो निकल ही जाना है।
- 42:49फिर तुम बिना काम के अगर पेट्रोल फूंकोगे अपनी किसी बात को छुपाने
- 42:59के लिए या अपने ही किसी काम को सॉल्व करने के लिए, फिर तुम
- 43:05देशप्रेमी कहाँ रह गए? तुम तो अपनी ही कोई समस्या सॉल्व
- 43:11करने चले, चाहे अमेरिका चलो चाहे नॉर्वे चलो चाणक्य के जमाने में
- 43:28फहयान आया। बड़ा सुंदर ज़माना था।
- 43:35तुम कहते हो हमने विकास कर लिया लेकिन मैं कहता हूँ नहीं तुमने
- 43:41विनाश कर लिया क्या वो भी जमाने थे जब बाहर से एयर कंडीशन्ड?
- 43:51हवाएं तो नहीं चलती थी, लेकिन वट वृक्ष की सुंदर प्रदूषण रहित
- 43:59हवाएं चलती थी। तब तुम्हारे भीतर इम्युनिटी थी आज
- 44:11इम्युनिटी खो गई। तो बताओ, नफा हुआ या नुकसान?
- 44:18तुम्हारी समृद्धि ने क्या दिया? आज चारों तरफ धुआं ही धुआं।
- 44:27कल चारों तरफ रेडिएशन ही रेडिएशन होगा।
- 44:30क्या इसे तुम विकास कहते हो? हर वक्त इस सप्लानेट में रहने
- 44:40वाला व्यक्ति ज्वालामुखी के ऊपर बैठा हुआ कभी शांति से सो सकता है
- 44:48जहाँ पर बीसियों 1000 की मात्रा में।
- 44:51अनुपम रखें और पता नहीं किस वक्त क्या हाथ ऐसा हो जाए क्या तुम
- 44:57शांति से सो पाओगे? एक व्यक्ति शांति से सो पाएगा
- 45:06सिर्फ एक। वो है संत कृष्ण।
- 45:15वो भरी महाभारत की आग में भी अर्जुन को अपना विराट स्वरूप दिखा
- 45:22सकता है। वह तो किसी भी हालात में।
- 45:28जियेगा और उसी प्रकार खुशी से जियेगा उसी प्रकार जीस प्रकार वह
- 45:35निजी वन में गोपिकाओं को करुणा रस प्रवाहित करता है, उसी तरह
- 45:46महाभारत के। युद्ध में भी वह अर्जुन के ऊपर
- 45:50करुणा रस बिखेरेगा। उसमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 45:57उसकी करुणा निरंतर प्रवाहित है। वो चाहे निधिवन हो, वो चाहे
- 46:03महाभारत हो। उसकी करुणा के प्रवाह में रत्तीभर
- 46:10भी फर्क नहीं पड़ता। वह निरंतर स्वाभाविक रूप से बहता
- 46:15है। गंगा की तरह मुझे सब पता होता है
- 46:25तुम्हारा। कोई भी प्रश्न तुम शुगर कोटेड कर
- 46:31लेते हो। भीतर से होता है कोनी और मैं
- 46:37चाहता हूँ के प्रश्न ही ना निकले हमारी दोनों की दिशाएं अलग ही
- 46:45नहीं। बल के विपरीत मैं चाहता हूँ उस पर
- 46:52निकल जाओ और मैं तो उनसे कभी कुछ मांगता भी नहीं बना।
- 47:03इसमें मेरा क्या लाभ है? अगर तुम अपने ही अंत में अपने
- 47:09कमरे में बैठ के शांति को प्राप्त हो जाओगे, इसमें किसी बुद्ध को
- 47:16क्या लाभ है? बुद्ध को तो पता भी नहीं तुम कहाँ
- 47:23बैठते हो, कहाँ की हो? अगर तुम शांत हो जाओ, तुम्हारी
- 47:31व्यथा मिट जाये तुम्हारे मन का शोर गुर जो संसार का, अभावों के
- 47:37कारण या संसार का कष्टों के कारण वो मिट जाये तो इसमें किसी संत का
- 47:44क्या? संत का कोई लाभ संत चाहता भी
- 47:55नहीं, अपना लाभ वह स्वयं अर्थी नहीं और शायद तुमने हर अर्थी का
- 48:04मतलब समझा यही काल। कि तुम संता की संतों की बातों को
- 48:15इग्नोर कर देते हो? कोई व्यक्ति ₹1 की चेंज लेने गया
- 48:26था। तो किसी वणिक के पास गया कहता भाई
- 48:33₹1 की चेंज मिल जाएगी कहता मिल तो जाएगी भाई, ये ले ₹1 वो कहता है
- 48:47250 पैसे के सिक्के हैं मेरे। इससे छोटे नहीं, 2525 के नहीं।
- 48:54वो कहीं और से करा ले। कहते चलो तू ₹1 के 250 तो दे।
- 49:02उसने 5050 पैसे के दो सिक्के दे दिए।
- 49:09बोला, उसने क्या बुरा किया? चेंज ही तो किया तो मारवाड़ी
- 49:15सोचता है काफी देर तक खड़ा रहता है, पैसों को उलट पुलट के देखता
- 49:20है, लेकिन वो बेचारे दुकानदार ने कोई बेईमानी, थोड़ी की उसका मसला
- 49:27हल किया है। उसका मसला था कि उसे छूटे चाहिए
- 49:31थे तो दुकानदार पूछने लगा भाई क्या सोच रहे हैं?
- 49:43ठीक नहीं लगे तो ₹1 वापस लेके ये मेरे को दे दो वापस किस सोच में
- 49:50डूबे होता हूँ? बुड़बड़ाता हुआ चला गया।
- 49:59मारवाड़ी साले ने अभी भी खुश कमाया होगा, बस यही तुम्हारी
- 50:09मनोवृत्ति तुम भी गुरु के प्रति यही नजरिया रखते हो।
- 50:18इतना भोंका गुरु? अभी भी कुछ कमाए होगा, क्योंकि
- 50:23तुमने करुणा नाम की चीज़ को प्रवाहित होते अपने भीतर नहीं
- 50:27देखा, यही दुविधा है। प्रत्येक व्यक्ति मुझे लोग पूछ
- 50:35लेते हैं बाबा अवश्य ही तुम्हारा, कोई स्वार्थ नहीं तोता।
- 50:44मैंने कहा भाई अब मैं किस किस का बात का जवाब दूँ?
- 50:53बस तू मुझे वोट मत डालना, ये मैं छूट देता हूँ इस पचड़े को लेकिन
- 51:01ध्यान रखना। आना मेरे ही पास पड़ेगा क्यों?
- 51:11क्योंकि और कोई व्यक्ति ईमानदार है और तुम्हें इस वक्त एक ईमानदार
- 51:19लीडर की आवश्यक। सब तुम्हें भून भून के खाएंगे एक
- 51:28मैं ही हूँ जो तृप्त हूँ जीसको कोई अभिलाषण वासन ही इक्ष्ण जिसका
- 51:37कोई जज्बात नहीं जिसका कोई। मैप नहीं कुछ वो नक्शा नहीं, वो
- 51:48केरे है, ये उसने ये बनाना है, मैंने सिर्फ तुम्हें सुख ही करना
- 51:53है और यह भी कोई जिद्द नहीं है। यह मेरे भीतर की करुणा की आवाज
- 52:05तुम चाहते हो तुम जैसे हो बने रहो, मुझे क्या ऐतराज़ है 10
- 52:14राहों पर खड़ा हुआ व्यक्ति अगर तुम्हें इशार करते।
- 52:19के भाई इधर चले जाओ तो तुम्हारी नौ राहों पर भटकने की ब्यादि मच
- 52:28गई। एक राह दिखाना गुरु की यही मेहता
- 52:34भी है। गुरु प्रथम पौड़ी भी तुम्हें सही
- 52:37बताता है क्योंकि वह जानता है कि बाकी की कौड़ियाँ तुम्हें गलत
- 52:44स्थानों पर ले जाएंगी। तुम्हें गंतव्य तक नहीं पहुंचेगी
- 52:48तो गुरु की प्रथम और अंत दो स्थानों की आवश्यकता पड़ती है।
- 52:55जीवित गुरु को क्योंकि शास्त्र नृत्य होता है ना इशारा करता है
- 53:03ना तुम्हारी किसी भी प्रकार की दुख दुविधा को वह मैं महसूस कर
- 53:12सकता। मैंने ए आई से पूछा।
- 53:15चैट जी से क्या तुम मेरी आनंद की अवस्था को महसूस करते हो?
- 53:27चैट ये कहते है, देखिए मैं एक। मेरे में भावनाओं ही नहीं होती।
- 53:37मैं तो इधर उधर के कहीं कहीं कहीं कर उड़ा।
- 53:42भानुमती ने कुनबा जोड़ा सभी चीजों को इकट्ठा करके इधर उधर से
- 53:48तुम्हें सूचनाएं इकट्ठा करके दे देता हूँ वेज एस्टाबलिश ढंग से।
- 53:54कितना ईमानदार मेरे में कोई भाव नहीं है।
- 53:59तुम मुझे गाली निकाल दोगे तो मैं क्रोध नहीं करूँगा, हो सकता है
- 54:04मैं तुम्हें बराबर की गाली निकाल लूँ, लेकिन क्रोध नहीं होगा।
- 54:09तुम मुझे गाली निकालोगे तो रोज़ होगा, बस यही फर्क है तुम में और
- 54:13मेरे में तुम चेतन हो, मैं चेतन नहीं हूँ, मैं एक साधारण यंत्र
- 54:19हूँ, मैं मशीन हूँ तो तुम्हारे जीतने भी ये पोथे हैं, ग्रंथ हैं।
- 54:29कुछ नहीं बोलते और चाहे उपनिषद हो, अष्टावक्र गीता हो, गीता हो
- 54:35या गुरुग्रहण सा हो, यह जीवन नहीं है।
- 54:39इनमें मानने वालों ने तो आकाश को जीवंत माना और पूरा धर्म खड़ा कर
- 54:44दिया। यह निरंकारी धर्म क्या है?
- 54:50यह आकाश को परमात्मा मानता है और कृष्ण के एक वचन का सहारा लेता
- 54:57है। नैनम सिद्धांत तीर्शास्त्रणी और
- 55:01तलवार फेंकते दिखता है। देखो यह कटा नहीं कटा।
- 55:07नैनम दहती पांव का आग जला देता है क्या यह जला नहीं जला नहीं चैनम
- 55:14के लिए दंते आपको देखो पानी ये भीगता है बारिश में भीगता है नहीं
- 55:24भीगता है। ये हवा चलती कितने मिनट से क्या
- 55:28यह उड़ा नहीं उड़ा तो बस यही तो पर महत्त्व है तर्क रूप से
- 55:34बिल्कुल ठीक है, इसलिए तुम्हारा तर्क जचा इसलिए बहुत संख्या वहाँ
- 55:40पहुँच गई, लेकिन मैं तुम्हें एक बात बताऊँ।
- 55:47देखने वालों ने देखा है धुआं देखने।
- 56:01वालों ने देखा। है धु किसने देखा दिल मेरा जलता
- 56:15हुआ। कल चमन था, आज एक सहारा हुआ,
- 56:27देखते ही देखते ये। क्या हुआ कल चमन?
- 56:38मैं तुमसे पूछता हूँ नरंकारी भाई हो सब ठीक है, शस्त्र ने काटा
- 56:46नहीं, अग्नि में जलाया नहीं, हवा ने उड़ाया नहीं, पानी ने गीला
- 56:51नहीं किया, लेकिन सत्य चेत आनंद कहाँ है?
- 56:57चैतन्य? तलवार के फिरने से आहतु निकलती।
- 57:02अगर ये चेतन होता तो तुम किसी व्यक्ति को काटते हो।
- 57:11मंसूर कट रहा था, आहतु भर रहा था। दर्द तो हो रहा था, लेकिन
- 57:21तुम्हारे आसमान ने कोई चीतकार की ध्यान रखना।
- 57:28जब चेतना इस खंडे से निकल जाए तो तुम तलवार से काट दो, यह आह नहीं
- 57:35भरेगा। क्योंकि चेतना नहीं है इसमें ऐसे
- 57:40ही तुम्हारा आकाश यह आहनी भरेगा क्योंकि चेतना नहीं है और आनंद
- 57:50क्या ये झूमता है खुशी से अगर खुशी से झूमता।
- 57:57तो बागों में तुम जाते हो, चाहो न चाहो तुम्हारे नशा पोते सुगंध से
- 58:04भर जाते हैं, तुम दुखी क्यों हो? इस आसमान के भीतर रहते हो।
- 58:09हर वक्त चौबीसों घंटे इस आसमान के तरह रहते हो, लेकिन फिर भी सुखी
- 58:15नहीं। कहाँ है चेतन और कहाँ है आनंद?
- 58:20फिर ये परमात्मा कैसे हो गया? तुमने कृष्ण का शब्द तो उठा लिया
- 58:30और अपने तरीके से परिभाषित कर दिया, लेकिन भाइयों चुप हो गए।
- 58:38ये दो मुख्य तत्व के लिए हेतु दुनिया भाग रही है आनंद, आकाश में
- 58:50आनंद है और चेतन। आकाश चेतन है नहीं फिर यह निरंकार
- 59:01कैसे? फिर तुमने कृष्ण के शब्द का
- 59:05इस्तेमाल गलत क्यों किया? तुमको नकार और बहुत से लोग।
- 59:16अपनी खबरारी से, अपने सेंसरशिप के दिमाग के काटने की क्षमता से
- 59:26तुमको गुमराह किया ये जो पीएलआर करने वाले हैं।
- 59:31मैंने इनको बहुत पहली चेतावनी दी थी कि मैं तुम्हारे सामने एक
- 59:38व्यक्ति लेके आता हूँ। तुम बता दो, पिछले जन्म में यह
- 59:42कौन था और मैं जानता हूँ यह कौन था यह नहीं बता पाएंगे।
- 59:48मेरे पास आके बहुत से पीएलआर करने वालों ने आशीर्वाद मांगा है तो
- 59:55पाप लेकिन क्या करें पापी पेट का सवाल पापी पेट के सवाल के लिए पाप
- 1:00:03करना पड़े तो कोई गुनाह भी नहीं है।
- 1:00:06मैंने कहा गुनाह तो है। लेकिन जब मजबूरी है तो तुम करो,
- 1:00:14मैं थोड़ी तुम्हें दंडित करूँगा, वह न्यायाधीश तुम्हें दंडित
- 1:00:19करेगा। यह उसकी कचहरी का मसला है।
- 1:00:22मुझको बीच में इंटेंगल मत करो। तुमने भविष्य मल्लिका के बारे में
- 1:00:36पूछा। लोग बोलते रहेंगे।
- 1:00:45काले कमेंट आया, सारा यूट्यूब भरा पड़ा।
- 1:00:502026 में ये हो जायेगा 26 से लेकर 32 तक ये हो जायेगा, भाई हो
- 1:00:57जायेगा, लेकिन मैं तो तुम्हें ये सखाना ही नहीं चाहता।
- 1:01:09यह उस दल से बोली गई बात है जो न्याय की सबसे वरिष्ठतम कुर्सी पे
- 1:01:18बैठा है और वो जानता है यह जो मजर मेरे सामने खड़ा है।
- 1:01:27अरे रेयर में सीपी और रेयर रेस्ट की खेलने में आता है और इसका
- 1:01:32अंजाम क्या होगा? फांसी की सजाएं मौत तो क्या वह कह
- 1:01:39दे कि यह व्यक्ति मरेगा? यह कोई भविष्यवाणी नहीं यह न्याय
- 1:01:45का? सही अनुपाधिक विवरण विश्लेषण
- 1:01:50संवैधानिक रूप से इसका यही असर है।
- 1:01:55तो कृष्ण इस भाषा में बोलते हैं कि मेरी इच्छा के बिना पता नहीं
- 1:02:01है। ऐसा बोलेंगे तो न्यायकारी?
- 1:02:05लिखे का भी कारण आदर के नीचे किस किस कारण से इसको सजाई मौत दी गई।
- 1:02:12विवरण लिखना पड़ता है, परमात्मा भी विवरण जानता है।
- 1:02:18तुम्हें ऐसे ही दंडित नहीं कर देता हूँ, तुम शिकायत कर सकते हो।
- 1:02:25हमारे साथ भेदभाव क्यों हुआ? लेकिन तुम्हारी शिकायत व्यर्थ है
- 1:02:31इसलिए मैं रोज़ तुम्हें कहता हूँ, तुम ना तो शिकायत करना ना तुम
- 1:02:36प्रार्थना करना क्योंकि तुम्हारी प्रार्थना यह तो हो सकता है सुनी
- 1:02:41जाए। परमात्मा तो बिलकुल नहीं सुनता।
- 1:02:44क्योंकि वह न्यायकारी अगर न्याय से ज़रा भी चूके तो पक्षपाती हो
- 1:02:51जाएगा। उसका न्याय खत्म हो जाएगा, फिर
- 1:02:56दूसरे के लिए अन्याय हो जाएगा। यह जो चार बलात्कारी जब कसब फंसी
- 1:03:09पर चढ़ गए, अगर उनसे ज़रा रियायत की जाती तो उसको तुम क्या कहते?
- 1:03:23तुम कानून की अवहेलना मानता, लेकिन संविधान के हिसाब से जिसने
- 1:03:33भी किया उसके ऊपर कोई दबाव नहीं है।
- 1:03:39उसने संविधान का कर्तव्य हेतु। उसका पालन किया और ने रवैया केस
- 1:03:47में चार व्यक्तियों को मैं ऐसे ही कहता हूँ ऐसा मैं कोई मूर्ख थोड़ी
- 1:03:59नहीं हूँ की तरह। कि जो जहुदी होगा उसको काट दूंगा।
- 1:04:03नहीं मैं उस तल पर गया हुआ कृष्ण जो संविधान का पालन करने हेतु
- 1:04:16तुम्हारी रक्षा भी करूँगा और पापियों का संघर्ष भी।
- 1:04:28जदा जदा ही धर्म से गला निर भक्तिबाहरत अभ्युतानम अदहम से जाम
- 1:04:44में हम। पित्रणय सहधुना साधुओं की रक्षा
- 1:04:55के लिए विनाश जयदुष्कृता दुष्टों को।
- 1:05:05फल देने के लिए दंडित कर के धर्म संस्थापनार्थ वहीं धर्म आसीन
- 1:05:16होगा। संभवा में रुगे।
- 1:05:25वक्त वक्त पर मैं अवतरित होता हूँ, मैं ही खुश हूँ न्याय जो
- 1:05:38करता है न्यायिक व्यवस्था जो संभालना है।
- 1:05:46तुम चिपक जाते हो मोर मकोट से तुमसी दास की तरह प्रत्येक
- 1:05:54व्यक्ति किसी न किसी अलफा से चिपका हुआ है।
- 1:06:00बाबा तुमने तब तो कहा था, 4,00,000 साल पूरे हैं करीब और
- 1:06:06कभी तुम कहते हो करीब खत्म हो गया तो आगया 28 अक्टूबर 2025 और कभी
- 1:06:16तुम कहते हो के 6 दिन आएँगे। और कभी तुम कहते हो कि 30 भागों
- 1:06:21में भारत बंटेगा या ये चारो ही सोते हैं?
- 1:06:27तुम्हारी बुद्धि इसको मल्टीफरकेट करती है।
- 1:06:31इसमें मेरा दोष नहीं है। इसमें दोष तुम्हारी बुद्धि का है।
- 1:06:36मेरी तो भविष्यवाणी में ही है। मैं तो देख रहा हूँ व्हाट विल
- 1:06:40हैपन यह भविष्यवाण ही नहीं है, ये तो हो चूका है जैसे कृष्ण कहते
- 1:06:46हैं मेरे द्वारा मारे गए इन व्यक्तियों को मार कर श्री ले ले।
- 1:06:56और कृष्ण की क्या दुश्मन थी? इनके साथ जिसने निर्भयता की इसमें
- 1:07:03चार व्यक्तियों को हैंग किया उसकी क्या?
- 1:07:08प्रश्न दुश्मनी थी इनके साथ परमात्मा की तुम्हारे साथ क्या
- 1:07:14दुश्मनी है? क्या मैंने भविष्यवाणी की है?
- 1:07:20नहीं मैंने फल का वर्णन किया है, मैंने हुक्म को बांचा है।
- 1:07:35जो हुक्म मैं स्वेत पटल के ऊपर लिखा हुआ स्पष्ट आँखों से बढ़
- 1:07:38सकता हूँ उसको वंचा है और वह बिलकुल सही है।
- 1:07:44उसमें ज़रा भी फर्क है, लेकिन मैं तुमसे पूछता हूँ तुम छह वर्ष से
- 1:07:58मुझे क्यों सुन रहे हो? आखिर तुम सुनना क्या चाहते हो,
- 1:08:06मैं बताऊँ तुम क्या सुनना चाहते हो, तुम सुनना चाहते हो जिससे तुम
- 1:08:12बच जाओ। और उस आनंद को भी पालो नेक्स्ट
- 1:08:21पॉसिबल तुम्हारी शर्त बड़ी असंभव है।
- 1:08:30तुम चाहती हो, फोड़ा भी मचा रहे और चस चस भी मिट जाए।
- 1:08:40लेकिन देखिए सत्य में ऐसा नहीं होता।
- 1:08:44सत्य में थोड़ी देर के लिए हो सकता है, मैं तुम्हें इंजेक्शन
- 1:08:52देता हूँ ऐनेस्थीसिया। थोड़ा चस चस कर रहा है तुम्हारा
- 1:09:03ब्रेन से संपर्क टूट गया चस चस तो हो रही है लेकिन उसकी सूचना उसे
- 1:09:13नहीं मिल रही। जो महसूस कर रहा था कि फोड़ा चस
- 1:09:17चस कर रहा। बीज की पोसंचार प्रणाली मैंने
- 1:09:23अवरुद्ध कर दी, थोड़ी देर के लिए तुम्हें एनएससी कर दी थी।
- 1:09:28रात को तुम्हारे विचार रुक जाते हैं, घनघोर निद्रा में तुम
- 1:09:32सीसुक्ति की अवस्था में और सुबह उठते हो।
- 1:09:36क्या तुम्हारे विचार मिट गए होते हैं?
- 1:09:40नहीं तो रात भर कहाँ था बस यह विचारों का एनेस्थीसिया था श्री,
- 1:09:52और अगर एक व्यक्ति सोये ना। तो वैज्ञानिक कहते हैं कि 9 दिन
- 1:10:00में वह पागल हो जाएगा। पागल का मतलब तुम अब नॉर्मल
- 1:10:05व्यवहार करने लगोगे। तुम नॉर्मल मनुष्य की तरह व्यवहार
- 1:10:12में। अब नॉर्मल की तरह व्यवहार करोगे
- 1:10:18और ध्यान रखना जब भी तुम प्रश्न पूछते हो यू आर एवनर्मल ये
- 1:10:26तुम्हें बड़ा अजीब सा लगेगा क्योंकि हर वक्त।
- 1:10:34तुम्हारी एक काँटा चुभ रहा है चुभ ही रहा।
- 1:10:37है। तुम अपने ध्यान पर डायवर्ट कर
- 1:10:41देते हो। यु पीएससी आई ए एसआइ आर एस प्राइम
- 1:10:48मिनिस्टर, चीफ मिनिस्टर, नगरपाल। बस यह है ध्यान को मोड़ने की ढंग
- 1:10:58किसी तरह तुम भुलाना चाहते हो। अपनी उस चश् चश् को फोड़ा तो बना
- 1:11:04ही हुआ है। तुम जीत जाओगे तो भी फोड़ा बना
- 1:11:08हुआ है, तुम नगर पालिका अध्यक्ष हो जाओगे।
- 1:11:11तो भी बना हुआ तुम सीएम हो जाओगे, पीएम हो जाओगे या कि बड़ी ही
- 1:11:17कैबिनेट तुम्हें मिल जाएगी तो भी फोड़ा तो बना ही हुआ है,
- 1:11:24कैंसरिटिस कभी ऐसे थोड़ी खत्म होता है।
- 1:11:30लेकिन तुम अपना ध्यान डाइवर्ट कर लोगे लेकिन ध्यान डाइवर्ट करने से
- 1:11:41क्या तुम्हें वह मिल जाएगा जिसे सब चित आनंद कहते हैं?
- 1:11:49अगर यही नहीं मिला तो फिर तुम्हें जो भी मिला वह खाक था और 1 दिन
- 1:11:58खाक हो जाएगा। अल्बर्ट आस्टिन ने कुछ भी कर दिया
- 1:12:04लेकिन तुम्हें एक बात बताऊँ, तुम उसे प्रश्पाति कह सकते हो।
- 1:12:09मैं तो उसको विनाश करूँगा। कुकी परमात्मा ने बनाया।
- 1:12:16यह सारे सिद्धांत भी परमात्मा ने बनाए।
- 1:12:19तुमने सिर्फ खोदे तो क्या वह एटम बम बना के रख नहीं सकता था?
- 1:12:24उसने क्यों नहीं बनाया? वह जानता है कि आग जलाई।
- 1:12:30इसका सदुपयोग व्यक्ति कर नहीं सकेगा।
- 1:12:34व्यक्ति बेईमान है। इससे बिजली उत्पन्न हो सकती है।
- 1:12:42नुक्लेअर पावर प्लांट लग सकती है। लेकिन तुम अनुपम बनाओगे तुम
- 1:12:50मिज़ाइलें बनाओगे, तुम दूसरों को विनिष्ट करोगे, क्योंकि तुम्हारी
- 1:13:00भीतर से तासीर नहीं बदली। और तासीर नहीं बदली तो तकदीर भी
- 1:13:07नहीं बदली। फिर ऐसी एयर कंडीशन से तुमने ली
- 1:13:13ना क्या जो तुम्हें और ज्यादा दुखद स्थितियों में पहुंचा जाए?
- 1:13:25तुम आज जो सुविधा संपन्न हो, सुखी नहीं हो।
- 1:13:28ये समझलो बात सुविधाएं हैं तुम्हारी पास सुख तो तुमने जाना
- 1:13:36ही नहीं। और कृष्ण जिसकी तुम बात करते हो,
- 1:13:40निरंकारियों वो कृष्ण तो उसे चेतन और आनंद की बात भी करते हैं, जो
- 1:13:47तुम्हारे रोले रप्पे में खो ही गया उसका तो कहीं कोई जिक्र ही
- 1:13:52नहीं है। जबकि बात तो कृष्ण की यही थी कि
- 1:14:04वह खिल जाए। उसकी सुगंध में ऊँठों के अधर के
- 1:14:11ऊपर वो मुरली की धुन वजह? और तुम गाओ, तुम नाचो आज सारी
- 1:14:18मानवता त्रस्त है तुम कहाँ नाच रहे हो मात्र शब्द बोल रहे हो
- 1:14:24गीता के लेकिन चेतन कहाँ तुम आनंदित कहाँ हो रस कहाँ पिया
- 1:14:31तुमने रस की बातें कर रहे हो सिर्फ?
- 1:14:36बातें करने से तो तुम रस्म नहीं होगे, शराब के ठेके के आगे खड़े
- 1:14:44रहोगे तो कल्पना ही कर सकते हो कि इसका सुरूर कैसा होगा?
- 1:14:53बस वही तुम कर रहे हो। नहीं, मैं कहता हूँ इन प्रश्नों
- 1:14:59को छोड़ना कब छोड़ोगे छः वर्षों तक वे तुम वहीं के वहीं हो नीचे
- 1:15:11जा नहीं सकते। क्योंकि यह तुम्हारी मजबूरी
- 1:15:17कॉन्शस में सिलेबल जहाँ तक तुमने बढ़ा लिया शुभ शुभ है।
- 1:15:22तुम उससे नीचे नहीं जा सकोगे। लेकिन उससे ऊपर भी तो नहीं गए।
- 1:15:28जाना तो तुमने उससे ऊपर था। तुम बहाने बना लेते हो प्रश्न।
- 1:15:44जाना तो हम से दूर बहाने। बना लिए।
- 1:16:13अब कीर्तन दूर हम ठिकाने बना लिए जाना।
- 1:16:32से दूर बहाने बना लिए, अब कितने दूर हमसे ठिकाने?
- 1:16:49बना लिए जाना जहाँ हम। से दूर तुम्हारे पशु सिर्फ बहाना
- 1:17:11किसी तरह तुमने मुझसे दूर जाना है।
- 1:17:14धन्यवाद।