Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Apr 25 - अध्यात्म की कड़वी बातें! मैं एक शूद्र हूँ, हमें मंदिर जाने नहीं दिया जाता! मैं क्या करूँ?
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- 0:01प्रेम प्रकाश दलित बाबा जी चरणस्प्रश मैं एक दलित हूँ, शुद्ध
- 0:13हूँ, मैं आपके वचन बड़े मीठे लगते हैं, प्यारे लगते हैं।
- 0:21निर्भय होते हैं, उनमें से एक सहज सुगंध पैदा होती है।
- 0:32हमें जिंदगी कैसा जीना चाहिए? एक और प्रश्न है मेरा ये मन बड़ो
- 0:45भरा में मेरा भाई के शब्द हैं, आइए शांत हो जाइए।
- 0:58चंचलता को त्याग दीजिए। मन को सहजता में लिया गया।
- 1:07थोड़ी देर अपने ही भीतर बैठे उसे झरने का स्वाद चखने की तरफ आओ हम
- 1:15चले। मैं एक दलित हूँ, मुझे कैसे जीवन
- 1:23जापन करना चाहिए? ये लोग हमें मंदिरों से पानी नहीं
- 1:29पीने देते हैं। ये लोग हमारे ऊपर पशाब कर देते
- 1:35हैं। ये लोग हमें घोड़े नहीं चढ़ने
- 1:41देते, यह हमें मंदिर में प्रवेश नहीं करने देते, हमें दुत्कारा
- 1:54जाता है बहुत पुरातन भक्त से। हमें कोई अधिकार नहीं दिया गया
- 2:03यहाँ तक पढ़ने लिखने का। ऐसे में जिंदगी कैसे छीये?
- 2:29पुत्र तुम दलित नहीं हो, तुम परमात्मा हो,
- 2:45महारानी मीराबाई है महाभक्ति ही लेकिन उन्होंने गुरु धारण किया।
- 2:57रैदास जो चमार थे लोगों ने बहुत कहा, भ्रष्ट ओके, कहाँ तुम्हारी
- 3:11जाति और कहाँ रैतास? जबकि ज्ञान किसी की जाति नहीं
- 3:19दिखता है। जात न पूछो सादकी पूछ लीजिये
- 3:24ज्ञान मोल करो तलवार का पड़ी रहने दो बयान।
- 3:35ये बड़ा क्रांतिकारी कदम था। संत कुछ बोले न बोले अपने कर्मों
- 3:42से ही मूर्खों को धौल छिटा देता है और उसकी नीयत में न्योति कि
- 3:50मैं धूल छिटा हूँ, मैं बड़ा नीरम। संत रेहतास ध्रुव की तरह आज भी
- 4:03चमक रहे हैं, बाकी नक्षत्रों की लो फीकी हो गई है, लेकिन वह आज।
- 4:16ध्रुव की तरह पोलार की तरह तुम्हारे लिए दिशा निर्देश का काम
- 4:22करता है और कोई कार्य करता है ये पोलार ही तो है।
- 4:31ये तुम्हें बताता है उत्तर किस तरह ऐसे ही संत रहताश तुम्हें आज
- 4:43द्रव की भाँति राह दिखला रही है। तुम पुत्र घबराओ।
- 4:52तो क्या करें तुम पढ़ाई करो बेटा इनको मंदिर के घंटे करने किसी के
- 5:10पाप धोते तोते। अब मुझे ना उठ सकेंगे।
- 5:25हो मुबारक तुझको खुशियाँ और मुझे रुसवाईंया।
- 5:41ओह, मुबारिक तुझको खुशियाँ और मुझे रुसवाईयां तुझको तेरा घर
- 5:55मुबारिक। और मुझे तनहाइना ओम बारीक तुझको
- 6:10खुशियाँ तुम टाल ही बजाते रहो और मुझे।
- 6:16रूस तुम पढ़ाई करो रात रात भर जाबो हमारे फनैन्स मिनिस्टर जो इस
- 6:28देश को आर्थिक गर्त की हालत से आज इस मुकाम पे पहुंचा गए थे।
- 6:39उनकी जिंदगी सब बिजली नहीं होती थी, घरों में स्ट्रीट लाइट की
- 6:51ट्यूब के नीचे बैठ के पड़ा करते थे।
- 6:56और 1 दिन फाइनांस मिनिस्टर बने रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के
- 7:02गवर्नमेंट बने और फिर प्राइम मिनिस्टर ऑफ।
- 7:10तुम्हें मंदिर में प्रवेश नहीं कर देते पुत्र तुम मंदिर में प्रवेश
- 7:15करना खुद बंद करो, तुम चाहती हो मंदिर क्या भेदभाव का घर वह
- 7:25परमात्मा का घर है जहाँ भेदभाव होता है।
- 7:31ओं, मुबारिक तुझको खुशियां और मुझे तनहाया तुझको तेरा घर।
- 7:47मुबारिक। और मुझे रुसवाईयां मरते मरते ही
- 7:58तेरा ही नाम लब पर। आई रहा ज़िन्दगी भर गमजोदाई का
- 8:15मुझे तड़पा हर नया। मौसम पुरानी याद लेकर आएगा
- 8:32ज़िन्दगी भर गमज। ड़ी पर देखे पुत्र मेरी बात को
- 8:49ध्यान से सुन लो इनसे लड़ो मत ये तुम घोड़ी पे नहीं चढ़ने देते
- 8:59मच्छर ये कोई जद। तुम बढ़िया गाड़ी की स्टोरी करो।
- 9:09आज घोड़ी का वैसे भी ज़माना नहीं रहा।
- 9:13वो जवानी चले गया है। आज रस रस का ज़माना है।
- 9:27और बहुत सी बढ़िया कार्य है तो घोड़ियों की क्या आवश्यकता है?
- 9:32जो बिदक जाती है। भक्त भक्त कार बिल्कुल नहीं
- 9:38बिदकती ऐसी ही आज्ञा पालक भक्त होती है।
- 9:47जिधर इशारों के बिल्कुल उतर मिलेंगे पर घोड़ी का तो कोई भरोसा
- 9:54भी नहीं होता। कौन जाने कब टाँगड़ी मार दे, कब
- 10:02तुम्हें गिरा दे? वह तुम्हें घोड़ी पर निचलने देते
- 10:09हैं। तुम घोड़ी को खोदी जात दो ना आज
- 10:21बड़ी से बड़ी बढ़िया से बढ़िया कारें ड्राइवर लेस कार।
- 10:33इनको घंटे ही बजाने दो ओह मुबारक तुझको खुशियाँ अगर तुम्हे टायल
- 10:45बजाने में खुशी मिलती तो बजाओ और मुझे रुसवाइयां।
- 11:00देखिये मेरा बड़ी सही है। मीरा ने रैदास को गुर चुन मीरा
- 11:10किसी ब्राह्मण को भी सुन सकती थी। मीरा किसी अन्य को भी गुरु चुन
- 11:17सकती थी। लेकिन मेरा कोई मूर्ख ना थी।
- 11:23मीरा के भीतर सोवरस ही जन्म उसने उस वक्त की नजाकत समझी।
- 11:36रैदास रविदास। जूतियां बनाते थे, उसे गुरुधारण
- 11:43किया। कहा महारानी फौजराज की पत्नी
- 11:56राजस्थान की शान। उसका कण कण प्यार उगलता था।
- 12:11मीरा का प्रेम सिर्फ कृष्ण के लिए कृष्ण का मतलब अस्तित्व होता है।
- 12:18तुम समझे नहीं? मीरा का मतलब उसने अस्तित्व से
- 12:24प्रेम किया क्योंकि कृष्ण से बढ़िया अस्तित्व का प्रमाण आज तक
- 12:29धरती पर नहीं मिला। सभी सीमित रह जाते हैं, वो तो
- 12:33बड़े सीमित हैं। महावीर पर एक कृष्ण ही हैं।
- 12:41जो सर्व व्यापक हो जाते हैं, जो बड़े धैर्यपूर्वक कहते हैं मेरी
- 12:50शरण में आजा। मैं सर्व व्यापक हूँ, मैं वो तत्व
- 12:57हूँ जिसमें कुछ और जोड़ा नहीं जा सकता।
- 13:01और मैं वो तत्त्व हूँ जिसमें से कुछ भी निकाला नहीं जा सकता।
- 13:19पूर्णस्य पूर्ण मादा है। पूर्ण मेवा शिष्य से मैं ऐसा
- 13:24पूर्ण हूँ जिसमें से पूर्ण को भी निकाल लिया जाये तो शेष पूर्ण ही
- 13:28बचूंगा। उपनिषद का ये महा उदघोष कृष्ण का
- 13:35ही उद्घोष है। देखिये लड़िये मत इनसे लड़िये मत
- 13:48बस इनके लिए मैंने आपको चार शब्द। ओम मुबारिक तुझको खुशियाँ और मुझे
- 14:06रुसैया तुझको तेरा घर। मुबारिक और मुझे तन तुझको तेरा घर
- 14:23में वारख मंदिर में ढलते रहो तुम कहते हो हम पानी नहीं पीने देंगे,
- 14:28तुम पानी पीने जाओ मत और कुमे। जगहजगह नल के लगे तुम खुद का पानी
- 14:39भरो और साथ लेके चलो अपना पानी। तुम इनके घर से पानी पियो मत, तुम
- 14:50इनको प्रतित्व करो। ये तुम्हें प्रत्यक्ष बहुत गर
- 14:56चूके हैं। ये वही है जिन्होंने तुम्हें
- 15:06ज़लील किया, स्तन टैक्स लगाया, इससे ज्यादा।
- 15:14ओछी बातें ब्रह्म किया करता है। ब्रह्म के नाम के ऊपर ब्राह्मण ने
- 15:21तथा कथित ब्राह्मण ने तुमसे सतन टैक्स वसूल किया और आज फिर वही
- 15:27कवायद करने की फिराक में है, इन्हें पता नहीं।
- 15:32इनकी गिनती है, तुम्हारी गिनती कहीं जाता है, लेकिन एक कमी है
- 15:40तुममें और कमी मैं गना देता हूँ पुत्र तुमने उस कमी की तरफ कभी
- 15:47ख्याल नहीं किया। एक वृत्त जमींदार अंतिम सातों पे
- 15:56था डेथ पे मर रहा था उसके पांच पुत्र थे लेकिन आपस में लड़ाई
- 16:03झगड़ा करते थे, बदहाली थी, घर में गरीबी थी।
- 16:10जहाँ झगड़ा होता है वहाँ गरीबी होती है।
- 16:14जहाँ झगड़ा होता है वहाँ अशांति होती है तो कृष्ण ने कहा कृष्ण ने
- 16:21कहा अगर तुम्हें चाहिए। तरक्की, समृद्धि, ज्ञान से समझ
- 16:33लेना भगवान कृष्ण के शब्द हैं। अगर तुम्हें समृद्धि चाहिए तो
- 16:39शांति पैदा करा। शांति में ही समृद्धि होगी,
- 16:46अशांति दूरदर्शन ले के आती है शांति ज़रा ज़रा सा लेके आती है
- 16:57भीषण गरीबी में जूझ होगे आज मूर्ख उसी कगार पे खड़े हैं।
- 17:08मुड़ताएं इन्हें मुबारक तुझको तेरा घर मुबारक तू घर में ही रह
- 17:24और मुझे तनख्वाह। हम अकेले चलेंगे।
- 17:31यही प्रश्न बहुत साल पहले हमसे एक बुटिया ने पूछा था क्या करे इस
- 17:35समाज को? मैंने कहा पुत्रे तुम पढ़ाई करो,
- 17:40एक ही रास्ता है जो बाबा साहब एम्बेडकर ने कहा।
- 17:48तुम किसी की पूजा ना करो, तुम अम्बेडकर को अपना आइकॉन मन लो,
- 17:56तुम उसके चरणों में सलाम करो, वो तुम्हारे लिए परमात्मा से ज्यादा
- 18:00है, परमात्मा दिखाई नहीं पड़ता। अंबेडकर दिखाई पड़ते हैं।
- 18:09अंबेडकर के विचार आज लहरें बनकर आसमान में गूंज रहे हैं।
- 18:16तुम उनको पढ़ने की चेष्टा करो, वो क्या कहना चाहते हैं तुम्हें?
- 18:27तो मंदिर जाना क्यों चाहते हो? कोई अड़ी है वहाँ परमात्मा है,
- 18:31मैं पक्का कहता हूँ वाहन मैं तो ब्राह्मण पुत्र हूँ संत तू को पा
- 18:39चुका वो व्यक्ति जो जाति से ब्राह्मण कहलाया जिसे आज बाबा।
- 18:47बहुत बचपन से मेरे 5:00 बजे थे जब मुझे थोड़ी सी होस्ट थी, सात 8
- 18:53साल का था तो बड़े बड़े बुजुर्ग के पांव हाथर खाते बाबा मैंने कहा
- 19:00बाबा कोई समझ नहीं आता। बाद में समझाया।
- 19:04पिता ने कहा कि ये ब्राह्मणों को बाबा कहते हैं, सभी वणिक सभी
- 19:10क्षत्रिय सभी शूद्र ब्राह्मण को बाबा कहते हैं, ऊँचा ये बच्चा ही
- 19:18क्यों नहीं कैसे हम छोटी? बच्ची के पांव धोते आज इन
- 19:27नवरात्रों में प्रथा है मात्रक लेकिन हम ज़रा भी देर नहीं करते।
- 19:32गर्व से लड़कियों को बाहर निकालने के लिए उनसे उनके जीने का अधिकार
- 19:38छीन लेते हैं। इस समाज को शर्म से डूब मरना
- 19:43चाहिए। शर्म से डूब मरते हैं तुम्हारे
- 19:47राम तुम्हारे कारण और तुम्हें ज़रा भी परेशानी और हिचक नहीं
- 19:53होती शर्म तुम को आनी चाहिए। पर श्रम से मर जाती है राम और
- 20:05तुम्हारे दिमाग पर कुछ रिंगटोन तो तुम्हें कुछ सूखा के जाती है,
- 20:12लेकिन तुम सीख तुम सीख नहीं। वह मर्यादा पुरुष राम उन्होंने
- 20:22खुद अपनी इच्छा से लोग कह देते हैं सीता को बनवास दिया, खुद अपनी
- 20:27इच्छा से बनवास में दिया और राजा थे।
- 20:30उस वक्त के हिसाब से मर्यादा अनुसार राजा पर कोई कलंक लगे।
- 20:36और वह उसके परिवार का सदस्य आए तो अपना लेते हैं, आए तो तरक्की कर
- 20:41देते हैं। उसने अपनी धर्मपत्नी को ही कर
- 20:46दिया है। यह एक एक मात्र उदाहरण था।
- 20:51विश्व में कभी ईसा धारण कभी आपको कहीं नहीं मिलेगा।
- 20:55बस एक मात्र उदाहरण जो सबसे प्रिय थी, प्राणों से प्यारी थी।
- 21:04मैं राम जी का रोल करता रहा और मुझे पता है जब सीता अपहरित हो
- 21:14जाती है। तो उसके वरलात में कैसे राम भटकते
- 21:18हैं? राम कहते हैं, ज़रा आवाज दो, तुम
- 21:28कह मैं ढूंढ ढूंढ कर थक गया हूँ, मेरे लायन रो रहे हैं।
- 21:40हृदय तड़प रहा है व्याकुल है कहाँ गई हो जनक न दिन इतना मुझे बतला
- 21:48तू मेरी सीए कहाँ? ढूँढत ढूँढत नैना हारे ए ढूँढत
- 22:04ढूँढत नैना हारे चलते चलते। आंत के ढूँढत ढूँढत नैना हारे
- 22:25चलते चलते आंत के। तुम कहाँ छिपी हो जनक नंदेनी तुम
- 22:42कहाँ छिपी हो? जनक नंदेनी इतना मुझे?
- 22:50बतला दो मेरी सीए कहाँ और तुम कितना बिन अब न रहा जाए मेरी सीए
- 23:08कहाँ? हो?
- 23:10तुम इतना तड़पता हुआ व्यक्ति देखिए, उसका मजाक उड़ाना पड़ा।
- 23:18उसका संग निभाना बड़ा मुश्किल है। मजाक तो कोई भी बुलाते है।
- 23:30ऐसी घोर व्यवस्था में डूबा हुआ व्यक्ति कोई एक्टिंग नहीं कर रहा
- 23:37है, कोई सर्कस नहीं कर रहा है। उसका मन इतना व्याकुल है, हृदय
- 23:43टूट गया है। राम को अपने बाहुबल पर पड़ा
- 23:51प्रताड़ित करते हैं, अपने बाहुबल को हे बाहुबल तू कहा हार गया तो
- 23:58वही है जो प्रिय जनकनंदिनी को भीषण शिव धनुष को तोड़कर व्यह के
- 24:05लेके आये थे। आज कहाँ गई तेरी सफलता छाती पीटता
- 24:13है, पंचवटी को कोसता है गोदावरी नदी से पूजता है फूलों पर मंडराते
- 24:22भंवरों से पूछता है। आती जाती हवाओं से पूछता है
- 24:29थपेड़ों से, पर्वतों से आकाश नक्षत्रों से सूर्य जचाँद तारों
- 24:35से, फिजाओं की इन बहारों से। इधर उधर से आती हुई खुशबू से राम
- 24:48पूछते हैं तुमने मेरी प्रियात्मा कहीं देखी?
- 25:04और बड़ा व्याकुल हो जाता था। वे सच में रोने लगता था।
- 25:12ये दो दृश्य मुझे सदा ही रुलाते हैं।
- 25:16लक्षण मृत्य राम विला। वो राम एक तथक क्षण में यही राम
- 25:25की मर्यादा है, तथक क्षण करते हैं।
- 25:30फैसला उनका सुपर कंप्यूटर माइंड है सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर, माइंड
- 25:40तथक क्षण फैसला लेते हैं। जो कृष्ण कहते हैं सिंच आत्मा
- 25:44विनिषदी सिंचा मत कर अर्जुन देर मत कर राम इसको क्रियान्वित करते
- 25:52हैं। राम देर नहीं करते।
- 26:05ततक्षण राज़ करने चले राज़ तिलक होने चला और के के ने मांग लिया
- 26:12उसके लिए बनवास कोई शिकन नहीं ठीक है मती ये लोग उत्तर वस्त्र।
- 26:24जल्दी से कुछ करो 1 दिन तो आज ही हो जाएगा उसके कुटिल तक हाँ माँ 1
- 26:38दिन आज ही हो जाएगा सुबह सुबह मंगल गान चल रहा है, वध संगीत बज
- 26:46रहे हैं। राजा राम बनेंगे राजतिलक होगा
- 26:51सारी अयोध्या झूम रही है नृत्य संगीत हो रहे हैं वध यंत्र दूर
- 26:58यहीं से पर बस मुझे खेच लेता है तुमने ठीक कहा माते।
- 27:06हम अभी प्रस्थान करते हैं। ठीक कहा 1 दिन तो आज ही हो जाएगा
- 27:14और वैसे माँ ये मंगलगान चल रहे तो भारत तो मेरे भ्राता नहीं है मेरे
- 27:22प्राण। तुमने कब से जाना कि प्रिय भरत
- 27:32मेरे से विलज्ञ है ये तुमने माता हज दो कैसे कर दिए?
- 27:40और तुम्हारा पुत्र नहीं। मेरा भाई भी है मेरा वो भाई जिसे
- 27:48मैं सब सोच सकता हूँ, तुमने ये कैसे कह दिया तुमने भरत को मुझसे
- 27:56अलग माना है, लेकिन नहीं इन शहनाईयों को बजने दो।
- 28:01इनको बंद मत कराओ। दशरथ कहते हैं बंद करो चित्रराम
- 28:09कहते हैं पिताश्र चलने दो इस गुंजार को होने दो ये मंगल गीत
- 28:16चलने दो ये भैया भरत के लिए हों। के राम के लिए कोई फर्क ही तो
- 28:23नहीं पड़ता ना? उधर कौशल्या राम के स्नेहल वचनों
- 28:36को सुनकर आँखें ढक लेती हैं। अश्कों का पता न चल जाए यह
- 28:55मर्यादित बेटे की मर्यादित माँ है जो आँखें झक लेती हैं।
- 29:08मुँह को बंद कर लेती है, कहीं खिसकी की आवाज़ बाहर न सुन जाए,
- 29:19तुमने दो कब समझी? वह तो मेरा प्रिय ही नहीं है, वह
- 29:27मेरा प्राण है। तुम म म प्रयाग भारत तक ही संभव
- 29:33भाई ने लक्ष्मण ने कहा जिसने सारी उम्र साथ निभाया, हर सुख दुःख में
- 29:42वन गमन वनवास में भी हर वक्त एक छाया की तरह उसके।
- 29:53लेकिन देखिए राम की मर्यादा राम लक्ष्मण को नहीं।
- 29:58प्रिया कहते है राम कहते हैं तुम हम अब प्रिय भरत नहीं समाहि तुम
- 30:05भरत के समान प्रिय हो। ऐसे मर्यादित पुरुष को तुम क्या
- 30:16अलंकार दोगे? तुम पूजा करके काम चला लोगे, आराम
- 30:27से एक। यह तुम्हारा सौभाग्य है, यह
- 30:36तुम्हारा परम सौभाग्य है कि ऐसा मर्यादित प्रभु भगवान श्रीराम
- 30:46तुम्हारी सभ्यता और संस्कृति में जनमदी है।
- 30:51ये गर्व की बात है लेकिन अगर तुम्हें तुमने उसे घोड़ी पहनने
- 30:59चढ़ने दिया, मंदिर में नहीं जाने दिया, अपने घड़े से पानी नहीं
- 31:06पीने दिया। उन्होंने कौन सा तुम्हें फूल लगा
- 31:11दी है? जैसा तुम बोओगे वैसा ही काटोगे।
- 31:21परमात्मा की दरबार में जो बोया जाता है वही उगता है, ऐसा नहीं
- 31:27होता बोय पेड़ बाबुल का तो आम कहो से उकार है।
- 31:36तो वह वृद्ध किसान मर रहा है। उसने पांचों पुत्रों को पढ़ाया,
- 31:41पुत्र आ जाओ, जिंदगी भर लड़ते रहे और किसान जानता था, अंत समय आएगा
- 31:49तो यह समझेंगे क्योंकि अंत समय में सभी।
- 31:55सभी के पाशव के हृदय भी निर्मल हो जाती है।
- 32:00अब आखिरी शब्द किसान बोला पुत्र ज़िन्दगी तो जैसे तैसे बिताती अब
- 32:08मैं जा रहा हूँ हाँ पिताश्री सभी। भावविष में बह गए हमारे लिए कोई
- 32:19सेवा बताओ पुत्र एक सेवा है वो तुम कर लेना हाँ उसने कहा एक तनखा
- 32:30लेके आओ। एक छठी का तिन कपड़ा था वो दे
- 32:37दिया ये लोग, उसने कहा इसको तोड़ो अब बेटी ने उसको तोड़ दिया।
- 32:46समझ नहीं आया क्या क्या रहा है आराम से टूट?
- 32:51उसने कहा अब ऐसे करो अब दो ले आओ, दो ले आये वो भी किसे बांदी टूट
- 32:58गए, थोड़ा सा ज़ोर से ज्यादा लगा। फिर कहते पांच फिट है इस सास के
- 33:03पांच ले आओ, पांच ले आये कहते आप थोड़ा।
- 33:09पांचों ने ज़ोर लगा लिया। महाबली से मेहनत करते थे, किसी से
- 33:16नहीं टूटा। पिताजी समझ ही नहीं आए।
- 33:21कहते पुत्र जैसे जे इकट्ठे हो गए, पांच और नहीं टूटे और एक टूट गया।
- 33:31बस इसी से समझाना, तुम इकट्ठे हो जाओ, पुत्र और कोई कमी नहीं है
- 33:41तुम सताए गए हो, भूख तो भोगी हो। और हृदय हमारे द्रवित होते हैं।
- 33:51तुम्हें जैसे सताया गया ये सोचकर कि अगर हमारे साथ ऐसा होता तो हम
- 33:57क्या करते? तुमने उसका प्रतिकार नहीं करना
- 34:02है। कुछ तुम इनके साथ वैसा मत करना।
- 34:07ये खुद ही शर्मिंदा हो जाएंगे। जे श्रीराम सीता को वनवास दे दो
- 34:21बैठ और सीता ने उसके दोनों पुत्रों को जवान करके सौंप दिया।
- 34:28ये लो अपने। और सीता ने माँ धरणी से कहा तू फट
- 34:36जा बात फटने की ही थी। ऐसी भीषण भयंकर अन्यायिक व्यवस्था
- 34:50राम जैसा राजा करेगा। सीता ने कभी नहीं सोचा था माँ
- 34:58धरणी से कहा तू फट जा माँ मैंने इसकी अमानती से सौंप दी और माँ
- 35:06धरती फट गई, सीता उसमें समा गई। कहानी है।
- 35:11लेकिन बड़ी प्यारी है, इससे कुछ सबक लो, ऐसे ही त्याग करो और ऐसे
- 35:19ही विलुप्त हो जाओ, त्याग करो भीषण से भीषण और चुपचाप।
- 35:31उसका प्रतिकार न मांगो, उसका क्रेडिट न मांगो, उसका माप जन माँ
- 35:37को चुप करके धरती में समा जाऊ और नेकी कर दरिया में डाल चुप चप सब
- 35:45सह गई सीता। चुपचाप उसकी अमानत को पाला।
- 35:52बड़ी श्रद्धा और प्रेम से महाबलि बनाकर जब लक्ष्मण और हनुमान जैसे
- 35:59महायोद्धा भी हार गए, उनसे तो राम खुद आये और मैं तुमसे एक बात
- 36:08कहूं। कोई बड़ी बात नहीं है।
- 36:11राम लव खुद से हार जाते हैं, कोई बड़ी बात नहीं है।
- 36:19मैं कहती हूँ, जीस तरीके से आकर आशुतोष है राम बूढ़े उचलित और वो
- 36:30जवानी में आ रहे थे। वाल्मीकि ने उसे ऐसा छाँटा ऐसा
- 36:38बलमान बनाया ऐसी शस्त्र और शस्त्र की विद्यावी कि उनमें शालीनता भी
- 36:44थी। उनमें सामर्थ्य भी था।
- 36:47और जहाँ ये दो चीजें हो जाती हैं, उसको कोई हरा नहीं सकता और राम हो
- 36:53या कोई फेंको तो राम एक दो फिर कवे उन छोटे छोटे बालकों के सामने
- 37:00कहते बच्चों तुम राम की बड़ाई तो करते हो, तुम्हें पता नहीं?
- 37:07हमारे समाज में एक बात बड़े अंकारी व्यक्ति और बड़े बलवान
- 37:11व्यक्ति को कहा जाता है। तुम्हें हराएगा कौन तुम्हारी औलाद
- 37:17इसको याद रख लेना बिल्कुल मैं इस बात को थोड़ा सा जीजस से कह रहा
- 37:26हूँ। क्योंकि राम लेकिन अगर राम लड़ने
- 37:33पे उतारु हो जाते तो वो दो थे मुझे लगता राम हार जाते ये मेरा
- 37:41खुद का मानना है तो मैं नहीं कहता।
- 37:47सीता ने ऐसा और सीता के साथ जैसा गुरुर वाल्मीकि ने जैसे दशरथ की
- 37:58तरह उनके परवर्ष के जैसे दादा करता है पोते की ऐसा।
- 38:07तुम ये मत कहना हम जानते हैं तो कल कडडाकू है नदिया कब की गंगा
- 38:15बहुत बह चुकी और सागर में विलीन हो गई।
- 38:18तुमने वो कालखंड देखा नहीं? जब तेज हवा का झोंका तूफान की तरह
- 38:24आया और रत्न ना कर को उड़ाकर ले गया उल्टे नाम झपेते जाना बालमीक
- 38:32भव प्रभुसामान क्या समझे पुत्र जात रखना मैं ना रहूं।
- 38:43ये अटल सत्य है। इससे घबराया मत करो, ये अक्सर मैं
- 38:49बोलता रहता हूँ और मैं बोलता रहता हूँ, इसलिए नहीं कि खुद को याद
- 38:53करता हूँ मैं तो याद ही मैं राम को नहीं याद करता, मैं मृत्यु को
- 39:00याद करता हूँ। और जिसने राम को जाद किया वो तो
- 39:06भटक गया है। जिसने मृत्यु को जाद किया उसके
- 39:12लिए विष्णु पार्षद ले के आए विमान से एक सिंहासन चढ़ चले एक बंद।
- 39:21तो मैं राम को नहीं भेजता, मैं मृत्यु को भेजता हूँ जीस मरने से
- 39:28जग डरे मेरे मन आनंद मरने ही से पाई है पूर्ण परम मरो मरो हे जोगी
- 39:37मरो। मरो मरण है मीठा ऐसी मरणी मरो
- 39:43जिससे मरणी मर गोर खटीठा लेकिन मरो ऐसे नहीं तो गाड़ी के नीचे ह
- 39:48जाओ मरो ऐसे नहीं कि फन था मरो ऐसे नहीं कि ज़हर फन करो मरो ऐसे
- 39:55नहीं ये तो दूसरे को मारना हो गया।
- 39:58शरीर तुम है नहीं, ये तुम्हें अज्ञान के कारण मैं लगता है तुमने
- 40:04शरीर को दंड दिया तो तुमने खुद को नहीं मारा, तुमने दूसरे को मारा।
- 40:10आत्महत्या कभी हो नहीं सकती। इस तरह से आत्महत्या हो सकती है।
- 40:15दूसरी तरह से स्वयं को मारो। स्वयं के अहंकार को भावन कुंड में
- 40:20अग्नि को समर्पित कर दो स्मृत सुपुर्द कर दो, उस तरह खाक हो जाओ
- 40:26जैसे क्षमा के भीतर परवाना है नामों निशान में विश्वास कहो भावन
- 40:35कुंड में कूद जाओ। तुम्हारी राख भी न बचाये।
- 40:48ये है असड़ी मरणा जिसे गोरख कहते है ऐसी मरणी मरो, शरीर को मत मरणा
- 40:56यह बेगाना है यह तुम्हें एक अमानत के रूप में मिला यह तुम्हारा गर्व
- 41:01है। इसको गलती मत कर देना, तुम्हें
- 41:04दंडित दंडित होना पड़ेगा। तुमने दूसरे की अमानत को छेड़ा,
- 41:14आत्महत्या करने को इससे चेतावनी करो।
- 41:24मरने वाले सोच समझ ले कल को फिर ये पलना मिलेगा, सोच ले अभी वक्त।
- 41:45आज तुझे पल है, सोचने के लिए कुछ नहीं पकड़ता, इसलिए मैं कहता हूँ
- 41:52मरने का ख्याल आ जाए तो 1 दिन के लिए कल मरेंगे, तुम उधारी लेने
- 41:59वाले को भी तो कह देते हो, कल आओ। चुकाते फिर भी नहीं तो मृत्यु
- 42:07जैसी महंत घटनाओं को तुम टाल नहीं सकते हो।
- 42:09वेतन के लिए और 24 घंटे में ऊपर व्यप हो जाती है।
- 42:17इसलिए रावण ने लक्ष्मण से कहा आज का काम आज ही करना।
- 42:23ये मृत्यु के लिए नहीं कहा ये उस मृत्यु के लिए कहा के अहंकार को
- 42:32आज ही मार लेना तुम शरीर को मार लेते हो, यहीं छूट के जाते हो
- 42:38शरीर तुम हो नहीं, संतो ने ऐसा जाना।
- 42:43तुम ऐसा जानते नहीं, इसलिए तुम अभी मानना भी मत तुम की तरह तुम
- 42:50नीचे की तरह तुम 4,00,000 की तरह तुम आचारों की तरह कितने ही बोलते
- 42:56रहो, कुछ भी बोलते रहो, लेकिन तुम जानते नहीं हो, ये पक्का है जब
- 43:01मैं जानता हूँ। कि तुम जानते नहीं ये मैंने अपने
- 43:07अनुभव से देखा बकवास सुन्नी हो तो अचानक के पास चले जाओ।
- 43:16भटकन के सेवा, तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें लगे का रास्ता
- 43:20दिखा रहा हूँ। लेकिन रास्ता से इन्होंने खुद भी
- 43:23नहीं पकड़ा। अभी वासना ही बाकी हैं।
- 43:27अभी तीन तीन गर्लफ्रेंड लेनी हैं। अभी इनके लिए शादी बंधन है और
- 43:36तुमने वहाँ पहुंचना है जहाँ कोई बंधन है।
- 43:41जहाँ बंधन जल के राख हो जाते हैं भस्मभूतस्य देहस्य पुनर आगमनम
- 43:47कुतह और फिर ऐसा मरता है ये जैसे देह मर जाती है फिर वापस लौट के
- 43:53नहीं आता वो अम्कार एक बार कमरा मारा, सदा क्रिया मर जाता है।
- 44:07मैं क्या कहूं? तुम पुत्र ये कम करो यू आर यू यू
- 44:12आर डिवाइडेड यू शुड बी यूनाइटेड? मेरी बात जब भी मान लोगे तभी सुखी
- 44:22हो जाओगे, आज मान लो। आशीष हो वर्ष बाद जब लेकिन जब मान
- 44:30लोगे तो क्षण सुखी हो जाओगे। अभी से कवायद शुरू कर दो यूनियन
- 44:36स्टैंक बड़े बड़े जोकेंगे राजा सिर का ताज तुम्हारे चरण में
- 44:41रखेंगे ये पंडित जो तुम्हें। छोटी आँखों नहीं देखते थे ये अपना
- 44:52शीष तुम्हारे सिर पर रहते थे की तुम विद्वान तो बना तुम पढ़ाई करो
- 44:59इन्हें घंटा भी नहीं ये टल घर का नहीं योग्य रह जाएंगे।
- 45:04और टेल्लो में कुछ नहीं होता। भाई टेल तो एक सूचना ही है कि
- 45:07तुम्हारे भीतर ऐसा ही टल बज रहा है।
- 45:10वहाँ पहुँच जाओ। वाज्य नाद अनेक अशखा केते भावण
- 45:16हारे केते राह गबरीशों के। उस स्थान पर पहुँच जाओ जहाँ बुले
- 45:26शाह ने कहा है मस्जिद कोनो जोड़ा डरा है जा ठाकुर दे ढेरे वढया
- 45:32जिथे वाजदे नाद 1000 इश्क दी नमियो नमी बहार ये तो एक सिर्फ।
- 45:43पृथकरात्मक था सिम्बोलिक करीब रेजेंटेशन ऑफ दी एंटायर तुम्हारे
- 45:53अंतस्की एक आवाज़। एक लिंग की तरह जैसे हम शिव रंग
- 46:02बनाते हैं, उसकी पूजा करना व्यर्थ है।
- 46:07तुम पाथर को ही पूजते रह जाओ। तुम कालेश्वर बनाकर उसके ऊपर घी
- 46:16बिखेरते होगे, काश ये किसी गरीब को।
- 46:19जिसकी हड्डियाँ निकली हुई है उसको पिलाते है।
- 46:22इसमें बड़ा विटामिन ए और डी होता है, हड्डियों को आँखों को मजबूत
- 46:27कर देता है और तुम उस पत्थर पे चढ़ा देते हो इसका कोई फायदा ऐसी
- 46:36मोड़ताओं से युक्त इन्हें रहने दो।
- 46:40तुम मत जाओ ये तुम्हें जाने नहीं देते तुम्हारा भला कर रहे हैं तुम
- 46:48समझो उस ईश्वर की नीती को, अगर ये तुम्हें मंदिरों में घुसने नहीं
- 46:53देते तो ठीक जब परमात्मा चाहता है कि तुम मंदिरों में न जाओ।
- 46:58क्योंकि वहाँ प्रखंड और द्वैत और घृणा और नफरत के सिवा तुम्हें कुछ
- 47:03न मिलेगा। यह राजनीति के गढ़ हैं।
- 47:10तुम इनका साथ मत दो बस और तुम जानोगे, तुम देखना तुम पुत्र मेरी
- 47:17बात को याद रखा। तुम्हें सब दूध काट देंगे, मैं
- 47:24तुम्हें गले लगाऊंगा, मैं तुम्हें पांव नहीं छूने दूंगा, मैं
- 47:30तुम्हें हृदय से लगा लूँगा, तुम को बलिदानी।
- 47:38डीएनए लिए भरते हो? जिसने हमारे मल ढोए, जिसने हमारी
- 47:45कुटिलताएं और कपटी स्वभाव को सहा, जिसने हमारी नफरतों को बर्दाश्त
- 47:55किया। हमारी गलत आभयानी को हमारे गलत
- 48:00नियमों को तुमने कबूल किया पिछले जन्म का होता है ये क्रम ये तुमने
- 48:06छीना होगा इसका तो आज तुम गरीब हो नहीं है, ऐसा कुछ नहीं होता।
- 48:10ये व्यवस्था है व्यवस्था। डिस्ट्रीब्यूशन की व्यवस्था ठीक
- 48:22से बांटा नहीं गया। अन्यथा अमेरिका इतना अनुरोध और
- 48:30बहुत से मुल्क हैं जो रोटी को मोहताज नहीं।
- 48:37छोटे से छोटे बच्चे दूध के बिना प्राण त्याग देते हैं, दवाई के
- 48:42बिना प्राण त्याग देते हैं। वे ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन इज़ रॉन्ग,
- 48:55यहाँ परमात्मा को बीच में उड़ाया लोभियों ने लालचियों ने
- 49:00स्वार्थियों ने ले के वापी कुछ। टाट रोड़ी कराने के अलावा
- 49:05उन्होंने भी कुछ नहीं किया। कुछ नहीं पाया, बस बोदियाँ रह गईं
- 49:10उनके परले और कुछ उनके परले, नहीं तो पुत्र तुम मेरी बात को समझो
- 49:19एंटायरली सोचो। सबसे पहली बात तुम भटके नहीं हो,
- 49:24तुम भटकाए गए हो। मेरे एक एक शब्द को सुर्ण सुरों
- 49:30में लिख लेना, हर्दा में उतार देना, इनको मोटो मत बना लेना।
- 49:38इनको भीतर अपनी जिंदगी का एक अंग बना लेना।
- 49:44तुम भी भक्त हो तुम डिवाइडेड हो इसलिए तुम इकट्ठे नहीं हो सके।
- 49:57तुम इकट्ठे हो जाओ पुत्रो तुम्हें पता नहीं तुम्हें कितने ताकत है।
- 50:07अगर सही डिवाइडेशन की जाए तो ये लोग कहते हैं 8020 का खेल है,
- 50:13बिल्कुल 8020 का खेल है, लेकिन 80 है तुम 80 हो पुत्रो।
- 50:22मैं जब गाता हूँ कई बार अल्लाह भी हो जाता है, मेरे को कमेंट्स होते
- 50:35हैं, मैं उनको ब्लॉक कर देता हूँ, बस।
- 50:38अब सिर्फ तुम्हें सुनने का हक करें।
- 50:40क्या वो मुश्किल नहीं है? अब तुम कमेंट न कर सकोगे पत्र
- 50:50क्यों? क्योंकि तुम कमेंट करने की तो
- 50:54हमारे दिमाग में न्यूरोन से कहें। टीशूज़ नहीं गोबर भरा है पर गोबर
- 51:00कभी सोचा फिरता है तुझको तेरा घर और मुझे तनहाई नहीं, तुम तनहाई
- 51:17में स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठके। तुम नवाब बनोगे और मेरी आत्मा उस
- 51:28दिन तृप्त होगी, मैं कहाँ भी बैठा हूँ, मैं जर्रे झर्रे में फैल
- 51:33जाऊंगा। मेरी आत्मा उस दिन तृप्त होगी।
- 51:38जीस दिन इस देश की बागडोर कोई अति दलित और पिछड़ा संभालेगा।
- 51:44अब हम तो अपनी आखरी साँसों में हैं, लेकिन तुम ये मत सोचना मैं
- 51:49खो जाऊंगा। खोता यहाँ कुछ भी नहीं यहाँ तो
- 51:54पदार्थ भी नहीं खोता। चेतना कैसे खो जाएगा?
- 52:02यहाँ तो फिजिक्स कहती है मैट्रिक एंड नीदर बी क्रिएटेड ना कैन बी
- 52:06डिस्ट्रॉइड और चेतना का तो स्वाद नहीं वो तो भगवान कृष्ण कहते हैं
- 52:10ना काट जाती, ना जलती ना गलती, ना सोबती, ना उड़ती।
- 52:16कहीं नहीं जाते हो। अटल है, अचल है तो दोनों ही चीजें
- 52:24नशूर नहीं हैं। मैं यहीं रहूंगा।
- 52:32रग रग में समाया होगा, कण कण में बिखराव होगा।
- 52:37बल्कि ये कह लो कण कण मेरा जुड़ाव होगा फेल जाऊंगा विश्व में मैं
- 52:46जाऊंगा कहीं नहीं तो मैं प्रतीति होगी ज़रा प्यार से पुकार लेना।
- 52:58आवाज देख के हमें तुम बोला आवाज देख के हमें तुम।
- 53:15बोला मोहब्बत में तू ना ना हमको सता आवाज़ देख।
- 53:34हमें तुम बुला मोहब्बत में न हम को सताओ आवाज़ देते।
- 53:54ना बता दे फिर सुना उनका कविता पुत्र स्त्रियों को इन्होंने पांव
- 54:15की ज्योति समझा ये गोबरधारी है पुत्र।
- 54:21और स्त्रियों को मैंने कहा तुम पढ़ो, तुम इनसे टकराओ मत, तुम
- 54:26वैसे भी निर्बल हो, निर्बल व्यक्ति के पास एक बड़ा शानदार
- 54:31हथियार क्या बुद्धि तुम इसको छुरी की धार की दृष्टि की?
- 54:43तुम बलवान मत बनो तुम तीक्षण बुद्धि विद्वान बनो, बलवान मत बनो
- 54:55स्त्रियों से, मैंने कहा तुम इनसे जीत भी न सकोगे।
- 55:02ईश्वर ने थोड़ा सा तुम्हें शारीरिक डिफिशंसी दिया, लेकिन
- 55:08घबराओ ना यही तुम्हारे लिए मून साबित होगा।
- 55:13तुम पढ़ो, पढ़ाई करो और आज क्या हुआ आज मेरे पास रोक आ जायेगा।
- 55:18मेरे पुत्र की शादी नहीं हो रही। मैंने कहा तुम्हारे पापों का
- 55:21परिणाम है तुमने बेटियों को कोख में काटा, अपने बच्चों को कोई
- 55:34गरमाइश आंच लग जाए। तो माँ और बाप दोनों तड़पते हैं,
- 55:42आग में जल गई थोड़ी और तुमने उन विचारों को अब परिपक्व को तुमने
- 55:53कैन्सियों से काट दिया। न तुम्हे दर्द हुआ, न तुम्हे शर्म
- 55:59हुई और आज तुम लड़कियों को ढूंढ़ते हो हमारा?
- 56:11हिंदू संस्कृति इतनी महान थी, उसने जान लिया था, पूर्वानुमान
- 56:15लगा दिया था। ये मूर्ख जो कर रहे हैं ज्ञान
- 56:22लिया था जो स्त्री के साथ भेदभाव हो रहा है।
- 56:251 दिन स्त्री ये ढूंढते फ्रेंड हैं।
- 56:32गर्भना मिलेगा आज बुद्ध भटक रहे है गर्भना में इस से शराब कैसे
- 56:41उतरोगे तुम बुद्ध हो या हिटलर हो सभी के लिए स्टॉप।
- 56:51भौंकते फ्रो हाँ, मशीनें पैदा कर एआई पैदा करलो लेकिन तुम भूल गए
- 57:02कितने ही एआई बना लेना तुम आज तक। सुनो मेरी बात कान खोल के सुन लो
- 57:11हे साइंटिस्ट प्रभु तुम आज तक एक छोटी सी परमात्मा की फैक्टरी जिसे
- 57:19लिवर कहते हैं, वो भी नहीं बना सके जो 350 किस्म के हार्मन्स
- 57:25पैदा करता है। जुसे फायदा तुम आज तक वो छोटी सी
- 57:31फैक्टरी नहीं बना सकते, तो मेरी ही सृजना में से चोरी करके अंश और
- 57:39मेरा ही मेरा। तुम्हारी मशीनें बच्चा पैदा करे
- 57:53तुम्हारी मशीनें माहौल पैदा करे ओनली सर्कमस्टैंसेस विल बी
- 57:57प्रोड्यूस्ड एनवायरनमेंट, लेकिन याद रखना क्या वो अंडा बना सकोगे?
- 58:09क्या स्पर्म बना सको तो तुम्हारी गर्दनी नीचे हो जाती है?
- 58:18बाबू जी धीरे चलना प्यार में ज़रा संभलना बड़े धोखे हैं बड़े धोखे
- 58:30हैं इस प्यार में। बाबूजी धीरे चलना जब मैं कहता हूँ
- 58:37अंडानु बना लोगे तो झुक जाते है, परम बना लोगे नहीं वो तो बाहर से
- 58:45लेना तो फिर तुमने क्या बनाया? तुम काहे पे छाती 56 इंच की के
- 58:51आओ। कागजी छाती है पुत्र जो हवा के
- 59:02झुमकों से टूट जाती है तुम इसे फलाद में समझ बैठना जब मैं कहता
- 59:14हूँ तुम स्पर्म बना लोगे हमसे रखते नहीं अपनाया क्या तुम स्पर्म
- 59:19का खा? जो ईश्वर की एक शानदार संरचना और
- 59:26तुम इसे बहा देते हो। जब मैं कहता हूँ इसे बचा लो, ये
- 59:30ओज में परिवर्तित हो जाएगा और तुम हस्ते हो ये हमारे साइंटिस्ट कहते
- 59:36हैं। ठीक है, उनको मान लो।
- 59:44उनको ध्यान लो भाई तो मैं कौन कहता हूँ मैं इतना हिंसक नहीं हूँ
- 59:49अपनी बात मानऊं मैं बड़ा अन्यायकारी हूँ, डिक्टेटर लेस
- 1:00:01स्वभाव है मेरा। तानाशाह होता तो तुम कहाँ होते?
- 1:00:09बस एक क्षण में तुम्हारी तानाशाह नेकड़े बना देता एक गरीब मत समझो
- 1:00:17के स्वभाव मेरा तानाशाह नहीं। अगर मेरा सिवा भी तुम्हारे जैसा
- 1:00:22हो जाता, तुम्हारा वजूद तो बचता कहाँ है?
- 1:00:24पुत्र पूछो इनसे हम सुद्र नहीं हो तो पाम की ज्योति नहीं हो
- 1:00:36पुत्रियो। तुम मेरे सिर का ताज छोड़ तुम
- 1:00:46मेरे हृदय की धड़कन तुम मेरे स्वांसों में सांस लेती हो, तुम
- 1:00:51मेरे स्वांसों का प्राण हो, तुम अपने आपको दीनहीन क्यों समझने
- 1:01:00लगे? तुम दीनहीन हो नहीं?
- 1:01:04तो मैं इकट्ठा हो जाऊ स्त्रियाँ जो फैसला करनी है हम हमारी हम
- 1:01:13हमारी शर्तों पे जिएंगी। आदमी अगर तीन सिर की ईंट बांदले
- 1:01:23ना पेट के साथ 2 दिन तक उसे रखनी है।
- 1:01:28जैसे स्त्री नौ महीने तक रोती है, इतनी प्रसव वेदना के सहते हुए वो
- 1:01:39भक्त दाता सुरभि इनको जन्म देती है।
- 1:01:44जननी जने तो भक्त जननी या दाता या सुर नहीं तो जननी बांध रहे काहे
- 1:01:51कहवा और तुमने इसे प्रताड़ित किया गोबरधारी प्रताड़ित ही करेंगे भाई
- 1:02:01मेरा भाई मुझे क्या करता था? भैया हम जब यहाँ लिंग निर्धारण
- 1:02:06करते हैं तो कोई लड़की हो तो नाचता है, कोई लड़का हो तो नाचता
- 1:02:15है, मैंने कहा भैया वो कौन है? ये दो कैटेगरी कैसे हैं?
- 1:02:19कहता है एक वो जो हिंदुस्तान से है।
- 1:02:22जब उन्हें कहते है वे लोग कहते है फिर ऐसा करो, मिठाई की दुकान से
- 1:02:31उड़िए जो बिटिया के वो अंग्रेज मैंने कहा फिर अंग्रेज समझदार को
- 1:02:38इसलिए दो तिहाई विषय पर आज। बेली गढ़ इतनी आसानी एरम से पनप
- 1:02:51जाती है, पाल ली जाती है। ज़रा भी तकलीफ नहीं होती अपनी
- 1:02:57तकलीफों को खुद अपने सर पर उठा ले।
- 1:03:01बल्कि दूसरों की तकलीफों का वर्णन करती है।
- 1:03:11दुख में होते हो सबसे पहले कौन आता था माँ?
- 1:03:21पिता नहीं रह जाती है। माँ ज्यादा जाती है जिसने नौ
- 1:03:29महीने तक अपनी कोख में तुझे पाला चुपके चुपके तुम्हें सबकुछ समझिया
- 1:03:36कराया खुद खुद दुख सहा। दर्द सा तुम्हें सुंदर सवस्थ
- 1:03:44सुडोल से लिखते हो और उसी मस्तिष्क को दिया तुम कहते हो
- 1:03:49स्त्री नरक का तो है इसलिए ही तो मैं कहता हूँ।
- 1:03:59कि तुम संवेदनहीन हो राम संवेदनशील जैसे ही हुए तत्क क्षण,
- 1:04:07जल समाधि लेकर मैंने कितना बड़ा काम किया है?
- 1:04:17तुम इसे कितना ही जल समाधि कह लो, मैं सत्य को उजागर करने में ज़रा
- 1:04:26भी नहीं सीखता हूँ। यह सुसाइड था आत्महत्या?
- 1:04:33उन्होंने कहा मुझे जीने का कोयद कर।
- 1:04:36जब मेरे सामने मेरी प्रिया बस उसका मुँह कुछ नहीं बोली कोई
- 1:04:44उलाना नहीं, कोई शिकायत नहीं, कुछ कवर नहीं और धरती को कहते माँ तू
- 1:04:49फट जा, बस अब से नहीं होता इसकी अमानत मुझे इसे लौटा दी।
- 1:04:56अब तू फट मैं तुझे मैं क्षमा चाहूंगा बहुत और क्या बात है
- 1:05:10जीसको अपना सर्व समना उसने अपना बनाकर धोखा दिया।
- 1:05:19इसलिए तो अब फट जा। माता तुम मुझे विश्राम करने दे,
- 1:05:26मैं पड़ी थक गई हूँ पुत्र इन्हें घंटा काटने गया, ये तुम्हें मंदिर
- 1:05:37में प्रवेश में करने लगती, तुम मंदिर में न जाओ, वहाँ भक्तों की
- 1:05:41भीड़ पहले ही बहुत है। तुम मत जाओ तुम एक काम करो, तुम
- 1:05:48पढ़ो और तुम यूनाइट रह जाओ, बस ये दो काम मेरे कर लेंगे तुम देखोगे
- 1:05:59इनके सिर तुम्हारे चरणों में झुके होंगे।
- 1:06:05यह मेरी सोच नहीं है ये मेरी आत्मा की आवाज तुम ज़रा देखो आज
- 1:06:11जैसे लड़के लड़कियां कहाँ मिलती है लड़का कहता मैं बड़ा खुश हूँ।
- 1:06:23परंतु तो सिर्फ बर्तन ही माझने हैं तो वो कहती बस ठीक नौकरानी
- 1:06:26रखवा तुम थोड़ा सा अपने भीतर आत्म जागृति लेकर आओ, तुम्हारी आत्मा
- 1:06:41इन्होंने झिंझोड़ी नहीं मार दी। इसको पुनर्जागरण करना होगा।
- 1:06:47वो दलित हूँ या स्त्री? और पुत्र इनसे झगड़ा नहीं करना
- 1:06:58पुत्र इनसे झगड़ा नहीं करना, तुम स्वतंत्र हो।
- 1:07:04मेरी हिस्टरी में तुम आ जाओ तुम जो चाहे वो बन सकती हो तुम चाहे
- 1:07:11वो कर सकती हो तुम देवी हो, तुम दुर्गा हो, तुम काली हो तुम
- 1:07:19लक्ष्मी। वो ही वाल्मीकि जीसको तुम दुकान?
- 1:07:33उसी आश्रम में माँ सीता ने आश्रय किया वो आश्रम उसके आश्रय स्थल से
- 1:07:40भी ज्यादा था। उसके लिए जीवन मरण का सवार हो
- 1:07:45गया। और अपने पुत्र उसने 1212 वर्ष के
- 1:07:48लिए यह कोई 14 वर्ष का वनवास न था।
- 1:07:54यह तो सदा के लिए डिस्कशन था। लक्षण बड़ा दयालू से बाहर से कठोर
- 1:08:04भीतर से तैयार। लक्षण बहुत रोया है।
- 1:08:11इस कार्तिक की राख को ठंडी हवाएं चल रही हैं।
- 1:08:18मेरा हृदय फट जाएगा प्रातः मुझसे ये को कर मत कराओ।
- 1:08:25और तुम देखना हमें देनी पड़ेगी क्या बात इन ठंडी हवाओं में उसे
- 1:08:30एक साड़ी में निकाल देना राजघराने की वो बेटी और राजघराने की वो
- 1:08:38इज्ज़त बकलो तुम इतनी ठंडी में। एक साड़ी में उसे निष्कर्षित कर
- 1:08:47रहे हो झरेल करके तुम कहानियों बना सकते हो, जीतने भी चाहो,
- 1:08:53लेकिन सही तो यह है जो तुमने किया शिवता के साथ सती सावित्री कोई
- 1:09:01बहुत बड़ी बात नहीं है। सीता का त्याग में सबसे बड़ा
- 1:09:05त्याग आज तक का कृत्याग किसी स्त्री ने किया।
- 1:09:11महानतम और सीता द्रोपदी तो फिर भी अपने पतियों के साथ थे।
- 1:09:23हर अच्छे बुरे वक्त में, लेकिन सीता अकेली थी।
- 1:09:28दो शिष्यों को गर्भ में लिया हुआ है और घोरवणों के भीतर जंगलों में
- 1:09:34छोड़ आये थे। लक्ष्मण न चढ़ाते हुए भी।
- 1:09:39बड़े भ्राता का आदेश यह बड़े भ्राता का आदेश मार दिया करता है।
- 1:09:44वर्तमान में ऐसे आदेशों को तुम्हें स्वतंत्र बुद्धि दी है
- 1:09:49परमात्माण ये बड़ा है सिर्फ इसलिए ये पागल भी हो सकता है समझना बात
- 1:09:57को। मैंने बहुत से 9090 साल के बड़े
- 1:10:01पागलखानों में हरकतें करते देखे। उम्र में बड़ा हूँ ना कोई
- 1:10:09क्वालिफिकेशन बुढ़ापे का कोई क्वालिफिकेशन नहीं होता।
- 1:10:15मूड था और मूर्खता कोई क्वालिफिकेशन नहीं होती।
- 1:10:18ज्यादा सूचनाओं को संग्रहित करना इट इज़ नॉट ए क्वालिफिकेशन
- 1:10:23समझदारी इज़ ए क्वालिफिकेशन पुत्र अपना पुत्र है क्या?
- 1:10:32अब क्या करें? कोई बात नहीं।
- 1:10:37अगले प्रवचन में अभी बहुत वक्त हो गया बेटा ये देखो करीब सवा घंटा
- 1:10:45हो गया है, कोई बात नहीं अगले प्रवचन में चलेगा ये मेरो मन बड़ो
- 1:10:53हरामी मीरा। राधे राधे श्यामला दे राधे राधे
- 1:11:15श्याम मिला दे। गोविंदा गोपाल हर राधे रात शाम
- 1:11:28मिला दे गोविंदा गोपाल हर मेरी नैय्या।
- 1:11:37तार लगा दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:11:52गोपाल हरे राधे राधे। जाम मिला दे, मेरी नैय्या पार लगा
- 1:12:02दे हाँ ऐसे गोविंदा गोपाल हरे रात रात शाम मिला दे ये एक पल।
- 1:12:16एक पल नृत्य का तुम्हारी जीवन को नृत्य से खिला देगा गोविंद गोपाल
- 1:12:28और धन्यवाद।