Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Aug 25 - तुमने सच्चा गुरु ढूंढा? प्यास लगी है? तो मेरे पास आ जाओ! वह अकेले में मिलता है का रहस्य!
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- 0:02बाबा जी प्रणब कुमारस्वामी अगर आप ऐसे ही ब्लॉक करते रहे हैं।
- 0:18तो आपके पास लोग आना हट जाएंगे, फिर क्या करोगे?
- 0:43मैं कोई दुकानदार नहीं हूँ और ना ही मेरे पास बेचने का कोई सामान
- 0:51है। मैं छोटा ही हुआ करता था हमारी
- 1:03दुकान के बगल में। लोगों का झुंड खड़ा रहता, सफेद
- 1:12दोतिया कुर्ता पहनें और बाजे लगाते 22 की बैची पांच दूसरा कह
- 1:24देता 20 की बैची पांच। दूसरा कह देता 19 की बची 10 एक
- 1:35बीच में और पड़ता खरीद ली खरीद ली, अब ये पागलों का खेल लगेगा
- 1:44तुम्हें? मैंने चाचा से पूछा चाचा ये क्या
- 1:53बेचर है और इसने क्या खरीदा? वो कहता 22 की बेची वो कहता 20 की
- 1:59बेची ये कहता 19 की बेची 10। और ये कहता खरीद ली खरीद ले, मुझे
- 2:07तो कुछ नजर नहीं आता। बेचने को कोई सामान इनके पास
- 2:13दिखता नहीं। खरीदने वाले के पास भी कुछ नहीं
- 2:18दिखता। मेरे को ये माजरा क्या है?
- 2:27चाचा बोले अभी तुम बच्चा वक्त आने पे तुम्हें समझा जाएगा, मैं कोई
- 2:38दुकानदार हूँ। मेरे पास बेचन का कोई सामान भी
- 2:43नहीं है। मेरे पास तो पानी है, शीतल जल है
- 2:51और मैंने प्याऊ खोल रखा है। पुराने जमाने में प्याऊ खोला करते
- 2:58थे हम लोग। कोई राहगीर गांव से आया घर में
- 3:06है, प्यास लगी होगी। धर्म के सबसे बड़े कामों में
- 3:16प्याऊ खोलना गिना जाता था। उन राहगीरों को ठंडा पानी पिया
- 3:23जाता है। उसकी एवज में कुछ नहीं लिया जाता।
- 3:31मैंने प्याऊ खोल रखा है, समान नहीं है, कुछ बेचने को मैं
- 3:43दुकानदार भी नहीं हूँ। प्यास लगी है तो आ जाओ, पानी पीला
- 3:56दूंगा, प्यास हो जाये ये पक्का है।
- 4:06इसकी मैं गैरॅन्टी देता हूँ बेशिन तो मेरे पास कुछ नहीं इसलिए जब
- 4:12तुम मुझे प्यास ही नहीं लगी होती तो तुम अंट शंट प्रश्न करता तो
- 4:21मैं तुम्हें ब्लॉक में भर देता हूँ।
- 4:23सीधा सा मदद तुम्हे प्यास नहीं लगी है, तो फिर सुनते काहे को
- 4:37तुम्हें दुकानदार चढ़ाई है तुम्हें मुक्त किया दुकानदार ढूंढ
- 4:44रहा हूँ जो भी अच्छा लगे। अपनी अपनी डफली, अपना अपना राग,
- 4:57मैंने तुम्हें रोका नहीं मैंने तुम्हें विदा किया जाओ दुकान।
- 5:08खर्चा क्या है? अभी तुम्हे सामान चाहिए।
- 5:15सामान मेरे पास है नहीं बेचने को मेरे पास तो क्या हुआ है?
- 5:23प्यास लगी है तो शीतल जल फला दूंगा।
- 5:28आ जाओ लेकिन अगर तुम प्याऊ वाले से ग्रोसरी का सामान मांगो तो गौर
- 5:42से तुम्हारी तरफ देखेगा। अंधा है ये पागल है अंधे तो हो
- 5:58अन्यथा जहाँ प्याऊ है तुम्हारा जल प्यास बजाने के लिए।
- 6:08वहाँ से तुम ग्रोसरी का सामान मांगते हो, चावल दे दो, चीनी दे
- 6:13दो, मसाला दे दो, मिर्च दे दो, नमक दे दो और हरजा भी क्या है?
- 6:25अगर की अंधा परात्री के वेला में किसी बंद दुकान के आगे खड़ा
- 6:36भिक्षा मांग रहा है। तो मैं उसे कह दूँ मुझे दिखता है
- 6:47के दुकान बंद है, यहाँ कोई सुनने वाला है ही नहीं, वो तो अपने घर
- 6:52जाके सो गया, तुम यहाँ से क्या उम्मीद करते हो, और रात का वेला
- 6:57है रात के वेला में सभी दुकान बंद कर देते हैं।
- 7:02देन मैं थकहार जाते हैं लेकिन तुम्हारी अपनी एक मजबूरी है।
- 7:20तुम्हारी एक मजबूरी है की ये यहाँ बैठा है तो इसके पास बेचने को भी
- 7:24कुछ होगा। यद्यपि सामानवान कुछ समझ नहीं आता
- 7:30तो मैं देखता हूँ वो ही माजरा है 22 की बैची 520 की बैची 519 की
- 7:38बेटी 10 वो कहता है खरीदी अब ये पागल लग गए हैं ना तो मैंने कहा च
- 7:46च। ये तो पागल लगते हैं, धोती कुर्दा
- 7:51शानदार मलमल का, ये क्या खरीद रहे हैं, क्या खरीद रहे हैं कुछ नजर
- 7:58तो आता नहीं तो मैं तुम्हें दुकानदारों के पास।
- 8:08जब प्यास ना लगी हो तो प्याऊ खोलने वाला व्यक्ति तुम्हे
- 8:17दुकानदारों के पास भेज दिया करता है।
- 8:22अगर तुम ऐसा ही ब्लॉक करते रहे, बाबा तो तुम्हारे पास आएगा कौन?
- 8:29हाँ तो मुझे ग्राहक नहीं चाहिए, ना मुझे प्यासी चाहिए ग्राहक की
- 8:41उम्मीद नहीं है मुझे। प्यासों का सामान गृहस्थियों का
- 8:51सामान गर्वश्री का नहीं, ये लिपस्टिक दे दो ये फेस पाउडर दे
- 9:01दो। ये कुछ मेरे पास है नहीं, इसलिए
- 9:11दुकानदारों के पास से देता हूँ, जाओ और व्रोग करने से तुम्हारे
- 9:22सुनने का अधिकार तो मैं छीन नहीं सकता।
- 9:24ये मजबूरी है अन्यथा पक्का छीन लेता।
- 9:30लेकिन ये मेरी है, तुम चाहो तो फिर भी सुनते रह सकते हो ऐसे बहुत
- 9:37से लोग है सभी गए नहीं पर उनको समझा गई मेरे प्रताड़ना से कि वो
- 9:47अभी पहुंचे नहीं। उनका ये धोखा था सर मन में कि हम
- 9:56पहुँच गए हैं यह मिट जाता है प्यास लगी है तो आ जाना।
- 10:10खुला आमंत्रण है सभी के लिए, लेकिन बेचने का सामान कुछ नहीं है
- 10:17मेरे पास जगत ने तो जगत का पार। सारी सृष्टि का सृजन किया है।
- 10:34बेचने को कुछ भी नहीं, यह एक और क्वेश्चन समझ लेना है।
- 10:47बाबा जब आप बोलते हो तो कम से कम दसियों तल लेते हो।
- 10:54कब कौन से तल से बोले, हमें समझ नहीं आता कब कभी तुम भिखारियों की
- 11:04तरह मांगने लग जाते हो? कभी तुम राजाओं की तरह दान करने
- 11:08लग जाते हो। ये आपका तल बदलना हमें समझ नहीं
- 11:16आता। ये हमें दो विधा त्रिवेधा में डाल
- 11:23देते हैं। बिलकुल ठीक पकड़ा तुमने संत तल
- 11:36बदलता है। पहले ही पल कह देगा मैंने सृजन
- 11:41किया सृष्टि का और अगले ही पल मांगने लग जाएगा हे प्रभु इन्हें
- 11:47सदभु और तुम्हें कुछ समझ नहीं आएगा।
- 11:57इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ संत को समझने की चेष्टा न करना संत समझा
- 12:03नहीं जाएगा और वह परमात्मा भी समझा नहीं जाता जिसके बारे में
- 12:09संत बात करता है। रामकृष्णा पर महेश की धर्मपत्नी
- 12:17शारदा शारदा बीमार हो गई। उन दिनों चेचक का प्रकोप था।
- 12:29चीच के शिकार हो गई, बीमार हो गई, बुखार रहने लगा, तबियत बिगड़ जाती
- 12:34है रामकृष्णा ने देखा बुखार बहुत है, तप रहा है सर।
- 12:47सारे शरीर पर फिंसकियां निकल आई तो राम कृष्ण माँ से कहने लगे माँ
- 12:59दो आने का प्रसाद भटूंगा गौर से सुनना मेरी बातो को।
- 13:10शारदा को ठीक कर दे माँ दो आने का प्रसाद बाटूंगा शाम हो जाती है।
- 13:28कई दिन तक शारदा का कोई फर्क नहीं पड़ता तो राम किशन कहते माँ शारदा
- 13:36ठीक नहीं हुई। क्या मन्नत कम लगी तुझे अच्छा?
- 13:46दक्षिणेश्वर मंदिर में आने वाले सभी गरीबों को खीर पुणे खलाऊंगा
- 13:54अब तुम आ जा। शार्द बहुत दिनों से परेशानी में
- 14:00है। शार्द को ठीक कर दे जीतने
- 14:08दक्षिणेश्वर में गरीब आते हैं, भूखे आते हैं सबको खीरपूरी गर्म।
- 14:19और शारदा ठीक होने लगी। 1015 दिन बीत गए, शारदा ठीक हो
- 14:31गई, राम किशन नाचने लगा है, देखो। माँ ने मेरी सुन ली आओ आज
- 14:45खीरपुड़ी खिलाते हैं, डंडोरा पुटवा दो आज लंगर चलेगा खीरपुड़ी
- 14:56चलेगा। मेरी बात सुन ली माँ ने शारदा ठीक
- 15:05हो गई और फिर दो चार दिनों के बाद माँ
- 15:21फिर उठ जाते है अब जब तक तुम मनाई भी नहीं।
- 15:30तब तक मैं मानूंगा ना तेरी ज्योत करूँगा, ना तुझे धूप दूंगा ना
- 15:39तेरी आरती करूँगा मैं तो ये बैठा हूँ हर माँ से मनाते।
- 15:49प्रेम के वश में भगवान आ जाते हैं प्रेम के वश में भगवान गुलाम हो
- 15:58जाते हैं, प्रेम के वश में भगवान गुलामी जाकरी करने लग जाते हैं।
- 16:07कबीर की बेटी की शादी थी, कबीर घर से बाहर निकल गया है सारी सेवा
- 16:15भगवान ने खुद की ये बातें तुम्हें बड़ी तकलीफ देने वाली होंगी ऐसा
- 16:19तारक की व्यक्ति आज कैसी बातें बोले खोपड़ी के तल पे जा पाऊंगा।
- 16:27तो मेरा कोई सानी है, मेरी बात की काट नहीं हो सके।
- 16:34हर्षा के तल पे जब आऊंगा तो कोई प्रेमी मेरी पुकार का मुकाबला
- 16:38नहीं कर सकेगा और जब मैं अस्तित्व के तल पे आऊंगा।
- 16:47सर वो बात आपकी समझ में आई कि नहीं?
- 16:52क्योंकि मैं पहुंचा रहस्य में और रहस्य की बातों को बुद्ध नहीं समझ
- 16:58सकते, गुस्सा मत होना। गुस्से में तुम्हे और प्यारी लगती
- 17:06हो जब उस रहस्य के तल पे जाऊंगा तो
- 17:19प्रेम, वर्षिका, यथादृष्टि तथा षष्ठ।
- 17:31चित्र बड़े सुंदर लगने लगेंगे। परमात्मा की सृष्टि अजीबो ग्रिप
- 17:36लगेंगी। यह हवाओं की सुगंध बदल जाएगी।
- 17:46उजड़े हुए गुलशन भर जाएंगे फूलों से लेकिन वहाँ से जो बात बोली
- 17:57जाएगी, हम बात को समझने वाला चाहिए।
- 18:06गोंके की बात को समेटती है गोंके की माँ खोपड़ी से भोली की बात तुम
- 18:15समझोगे इसलिए खोपड़ी राड़ियों के पास?
- 18:19बड़ी मात्रा में श्राव को मिलेंगे तुम्हें क्योंकि तुम अभी तक
- 18:25खोपड़ी से सुनने के योग्य ही हो। खोपड़ी पे अटके हो खोपड़ी से जो
- 18:31बोलेंगे वो तुम्हारी समझ में आएगा तुम तर्क करोगे।
- 18:39उन सभी बातों का जो खोपड़ी से पार निकल जाती हैं और ध्यान रखना वह
- 18:44खोपड़ी से पार हो के मिलता है। तड़का तीर्थ है, वो भावना तीर्थ
- 18:50है, वो खोपड़ी को क्रॉस किया, हृदय को क्रॉस किया तो स्वय के तल
- 18:56पे पहुंचे। न तर्क काम करेगा, न तुम्हारी झा
- 19:01से काम करेंगे। संत की बात 99% तुम्हारे सर के
- 19:11ऊपर से गुजर जाती। यद्यपि वह तुम्हारी भावनाओं को
- 19:18रुला देगा। तुम चीख होगे, चिल्लाओगे उसकी
- 19:23आवाज़ के भीतर बरस तुम्हें सम्मोहित कर देगा, लेकिन तुम्हारे
- 19:35समझ में नहीं आएगा। लगेगा कुछ है ये सुगंध कहाँ से आ
- 19:42रही है झरने का शीतल शीतल जल इसमें नहाया बड़ा मज़ा आया ये
- 19:51कहाँ से आ रही है गुलशन की खुशबू? दिखेगी नहीं तुम्हें, लेकिन
- 19:58तुम्हारी पकड़ में आ जायेगा तो संत के अनेक दल होते है रामकृष्णा
- 20:11मांगते माँ ठीक कर दे और जब खुद के कैंसर हुआ।
- 20:20और धरेन्द्र कहने लगे माँ तुम्हारी पास आती है, कह क्यों
- 20:24नहीं लेते? यह मन की आदत है मुझे मेरे शीश से
- 20:33कह देते हैं, जब बाबा आये थे तो मांग लेते हैं बड़ी मुश्किल से तो
- 20:38आते हैं, मैंने कहा नहीं। मेरे पास तो रोज़ जाते है और कई
- 20:43कई बार कोई मुश्किल मुश्किल नहीं है यहाँ और क्या मांग लेता?
- 20:54वीरेन्द्र कहते तुम माफी मांग लो देखो ये घुट भर पानी भी नहीं पी
- 21:00पाते है। एक रोटी का ग्रास भी तो नहीं खा
- 21:07पाते, निकल नहीं पाते, भयंकर दर्द होता है, गले का कैंसर होने है,
- 21:16माँ से मांग लो ना इतना सा तो ठीक कर दो।
- 21:21थोड़ा पानी पी लिया करो, थोड़े दो ग्रास रोटी के खा लिया करो, पर हम
- 21:29किशन ना पूछते हैं अज्ञानी अपनी भाषा में ही समझता है और अपनी
- 21:41भाषा में ही बोलता है सुबह फिर आते।
- 21:45विवेकानंद माँ आई थीं, आई थीं, आपने कहा इतना सा तो कर दो अरे
- 22:03मैं तो भूल गया ये कोई भूलने वाली बातें हैं।
- 22:09भूल गया कोई बात नहीं आज पूछुंगा आज तो जरूर ही पूछ लेना हाँ आज
- 22:17पूछूँगा दूसरे दिन फिर आए विवेकानंद, आज कहा माँ से?
- 22:28एकासा तो ठीक कर दो, दो घूंट पानी पी लिया दो, ग्रास रोटी के खा
- 22:37लिया करो, रामकृष्णा कहते हाँ पूछा था और जो ज़िन्दगी में नहीं
- 22:47हुआ ना कभी? नरेंद्र तुने मुझे झड़क डलवा दी
- 22:52माता से हैं मैंने हाँ मैंने पूछा माता से पिता सा तो कर दो।
- 23:07दो ग्रास खा लिया करो, इतना सा तो कर दो।
- 23:15दो घूंट पानी की पीलिया पर अम्मा ने बड़ी लताड़ लगाई।
- 23:21मुझे मैं बोली। इसी गले का ठेका ले रखा है तो
- 23:30हमने निरंत्र के गले से पी लिया करो, कालू के गले से खा लिया करो
- 23:38ये इतने शिष्य हैं तुम्हारे इनके गले से खा लिया करो, पी लिया करो
- 23:43ये भी तो तेरे हैं। मुझे बड़ी शायर हुआ है।
- 23:48मैंने तो अपना मुँह छुपा लिया, मैं बोल रहा हूँ तो क्या बोलू ऐसे
- 23:56यशोधरा ने वो तुझसे पूछा जो तुम्हे वहाँ मिला यहाँ नहीं मिल
- 24:01सकता था तो वो तो जो करे आता है। कुछ बातें बुद्धों को भी जो कहने
- 24:08से मजबूर कर देती है, विवश हो जाते हैं वो उनके पास कोई जवाब
- 24:13नहीं होता, बिल्कुल मिल सकता था लेकिन मैं अज्ञानी था।
- 24:25मुझे पता नहीं संस्कार ही ऐसे फैला रखी है कि घर में नहीं
- 24:36मिलेगा, कंदराव में मिलेगा। एकांत में मिलेगा, वर्ण में
- 24:43मिलेगा, जंगलों में मिलेगा, अकेले में मिलेगा, मिलता तो अकेले में
- 24:51है वो हाँ, इस बात को सर्कल मिलता अकेले में है वो।
- 25:01लेकिन बाहर से तुम कितनी ही भीड़ से लदे रहो भीतर तुम अकेले हो जाओ
- 25:08भीतर जब कोई जाएगा अकेला जाएगा भीतर दूसरा साथ नहीं जाता और।
- 25:19यहाँ तक कि गुरु भी साथ नहीं जाता।
- 25:24ये जो बोलते हैं कि अंत में मैं आऊंगा तेरी ऊँगली पकड़ के सच खंड
- 25:29ले जाऊंगा, सरासर झूठ बोल रहे हैं।
- 25:34अद्वैत में दूसरा प्रवेश कर ही नहीं सकता।
- 25:40फिर अद्वैत खो गया। गुरु भी दूसरा है।
- 25:49वहाँ न गुरु होता है, न तुम होते हो।
- 25:59तुम्हारा आपा खत्म हो जाता है तो मैं शून्य में विलीन हो जाते हो
- 26:05महा शांति महा चुपके माँ। दूसरा पुत्र है, अकेले में मिलता
- 26:22है ठीक कहा उन्होंने लेकिन वणो में अकेलापन होता है ये नहीं कहा।
- 26:30उन्होंने कंद्राओं में अकेलापन होता है, ये नहीं कहा।
- 26:34उन्होंने घर में ही पहुंचे। नानक घर में ही पहुंचे कबीर और
- 26:42मैं भटक गया था मुझे हनुमान जी बोले घर चले जाओ तुम्हें घर बैठे
- 26:50सभी कुछ मिल जाएगा वहीं मिल जाएगा।
- 26:52घर बैठे और मिल भी गया। तो मिलेगा एक अंत में यानी वहाँ
- 27:02जाना तुम्हें अकेले पड़ेगा। संघ तुम्हारे नहीं जाएगा, कोई
- 27:08गुरु भी नहीं जाएगा। परमात्मा भी संघ नहीं जाएगा।
- 27:14ध्यान रखना यहाँ थोड़ी सी बात समझ लेने जाती है।
- 27:19परमात्मा सामने खड़ा होगा गुरु इस बार परमात्मा उस बार बिच में तुम
- 27:27होगे यू आर टु जम्प। ये लास्ट मरहला है जहाँ तुम बचते
- 27:36हो तुम चाहो तो इधर कूद जाओ, तुम चाहो तो उधर कूद जाओ, यहीं आकर
- 27:47कबीर बोलते हैं गुरु गोविन्द दोनों खड़े काकेला भूपाओ।
- 27:52अभी अभी दवाई तो बाकी है अभी दोनों में वो जो यहाँ तक ले आया
- 28:04वो भी है वो जहाँ तक जाना था वो भी है, कबीर कहते हैं अब मैं।
- 28:16अलग सी मुसीबत में फंस गया हूँ करूँ तो क्या करूँ?
- 28:22संशय आत्मा मनुष्य की फैसला तो लेना ही पड़ेगा बड़ी हारी गुरु
- 28:30अपने ये न गोबंदियों में मिला है। तो आखिरी वक्त में गुरु का, शुकर
- 28:38विहार करते हैं, बस और अकेले हो जाते हैं।
- 28:47गुरु का शुकर विजार करके छलांग लगा जाता है।
- 28:50उस गुरु में विलीन हो जाते हैं जो सब का गुरु है।
- 28:55जो तुम्हारे गुरु का भी गुरु है इसलिए जो कहते हैं अंत में मैं
- 29:02आऊंगा वो तुम्हारी दुविधा को बरकरार रखते हैं और ध्यान रखना।
- 29:12दुविधा को बरकरार करने वाले रखने वाले लोग खुद पहुंचे नहीं होते
- 29:17हैं क्योंकि वहाँ सब दुविधाएं खत्म हो जाती हैं।
- 29:24वहाँ एक रहता है एक को ब्रह्मा, द्वितीय नाचते।
- 29:32एको अहं द्वितीय नमस्ते जहाँ दूसरा खत्म हो जाए वेद की रेखा
- 29:38छूट जाए सब अमट जाए, दूसरे का भाव ही पैदा न हो।
- 29:50वही फलता है? एकाकीपन का सत्य है, तुम्हें वहाँ
- 30:03जाना है, फिर चाहे तुम घर बैठ। कर वहाँ जाओ।
- 30:11चाहे बाजार बैठ के जाओ, चाहे बनो और कंदराओ में बैठ के वहाँ चले
- 30:19जाओ, जहाँ दूसरा कोई नहीं। वो तुम्हारा गंतव्य है, वहाँ गुरु
- 30:31भी नहीं होता तो मैं फिर से बोलेंगे जो गुरु तुम्हें कहते हैं
- 30:39मायंगे आखिर में और सिर्फ धर्म देते हैं क्योंकि आखिर में
- 30:43प्रकृति तुम्हें 3 घंटे पहले बेहोश कर देती है।
- 30:48तुम्हें पता कि नहीं चलेगा कब कौन आया और जिसने वायदा किया था कि
- 30:55मैं आऊंगा क्या पता वो पहले ही चला जाए।
- 31:03जो दया है तो पैदा करेगा वो गुरु। जो अद्वैत में तुम्हें छोड़ दे वह
- 31:10गुरु मानना तो तुम्हें पड़ेगा ही मुझे ना मानोगे तो किसी के पास भी
- 31:33जाओ वहाँ मानोगे? क्योंकि तुम्हें अभी उसकी झलक
- 31:41नहीं मिली अज्ञात राही है वो अज्ञात मंजिल है वो तुम्हें पता
- 31:52नहीं तुम कहाँ चले जा रहे हो। और वहाँ कोई साथी संघ चलता नहीं
- 32:02जो साथी संघ चलता है वहाँ जाके छूट जाता है अकेले का मार्ग है,
- 32:11हंसा जाए अकेला। दूसरा उपद्रव है, फिर चाहे गुरु
- 32:20ही क्यों न हो। इसलिए गुरु को छोड़ना बड़ा
- 32:24मुश्किल हो जाता है और गुरु को छोड़ना अनिवार्य भी है क्योंकि
- 32:31दूसरा गुरु है। जो सबसे ज्यादा प्यारा लगेगा
- 32:36तुम्हें निष्काम जे न गोबिंद देओ बता उसको भी शोबना है गुरु
- 32:52तुम्हें बताता है रात के अंधकार में।
- 32:56जीस दुकान के आगे खड़े हो कि तुम मांग रहे हो कुछ दुकान बंद है भाई
- 33:06शटर डाउन और क्योंकि तुम अंधे हो तुम्हें इतना भी तो नहीं दिखता कि
- 33:15शटर बंद। शटर शट हो गया।
- 33:21इतना ही नजर आ जाए तो तुम अंधे कहाँ रहे?
- 33:28इसलिए मैं तुमसे कहूंगा तुमने जो भी गुरु तिलासे अंधेपन में तलाशा।
- 33:37खोपड़ी अंति क्योंकि खोपड़ी विचार करती खोपड़ी वाइफरकेट करती है खुद
- 33:49ही। और जहाँ भी जिसने भी तुम्हें वह
- 33:53पर केट किया वह तुम्हें धकेला वह तुम्हारा दो सुमन खोपड़ी तुम्हें
- 34:02मल्टीडाइमेंशनल करते हैं और जिसने भी तुम्हें बहुगुणित किया
- 34:09बहुदिक्षित किया। बे तुम्हारा दुश्मन जो गुरु ने
- 34:14कहा कि मैं तुम्हारा हाथ पकडूंगा ले जाऊंगा तो समय आऊंगा फौके सब
- 34:20जवाब हैं तुम स्वतंत्र हो मानने के लिए।
- 34:28तुम्हारी स्वतंत्रता को कोई छीन नहीं सकता, लेकिन इतना बताने का
- 34:34हक तो है जिसके पास आँखें आ गईं। जहाँ खड़े पुकार रहे हों उस दुकान
- 34:46का शटर बना है। यहाँ सुनने वाला कोई यहाँ कोई
- 34:53नहीं दुकान खो देगा और तुम्हें सामान देगा रात है वो विश्राम कर
- 34:57रहा है रात को सभी गुरु सो जाते हैं हाँ सुन।
- 35:08कौन तुम्हारा ख्याल रखेगा, पगला जो वो ही ख्याल रखेगा जो रात को
- 35:14भी जागता है इसलिए कृष्ण ने कहा उसके पास पहुँच जाओ, जब सारा
- 35:23संसार सोता है। तो मेरा योगी जागता है, उसके पास
- 35:28जाओ। वह रात को भी जागता है, दिन को भी
- 35:31जागता है, चौबीसों घंटे अखंड धारा जागृति की अनवरत रूप से बह रही
- 35:39है। तुम्हारे भीतर उसके पास जाओ।
- 35:45इन्हें देहधारियों के पास खात जाओ और देहधारियों के पास जाओ तो उसके
- 35:52पास जाओ जो तुम्हे डॉली पाप न दिखाए।
- 35:56मैं अंत में आऊंगा। इन्हें खुद का भरोसा नहीं है।
- 36:01सामान 100 बरस का बल्कि खबर न। इन्हें खुद का ही पता है।
- 36:09अपने जीते जी गद्दियाँ सोंप के जाते हैं, ये लोग डरते हैं पता
- 36:15नहीं। जाने कौन सा फल मौत की।
- 36:24अमानत हो न जाने कौन सा फल मौत की अमानत हो हर एक फल की।
- 36:48हर एक पल की खुशी को गले लगा के जियो।
- 37:05नमो छुपा के जियो और न सरजुका के जियो गमों का दौर भी आए तो।
- 37:21मुस्कुरा के जियो गमों का दो ही आए तो मुस्कुरा।
- 37:34के जियो नामु छुपा के जियो। और न सर झुका के जीओ, मुस्कुरा के
- 37:51जीओ, सहजता से स्वीकार कर लो सभी परिस्थितियों को वह छियाएं वो भी
- 38:00कटायें यही एक रास्ता है। कोई दूसरा नहीं आएगा।
- 38:05मृत्युकाल में यह दुख यह पाखंड में जीसको आँखें मिल गई हैं।
- 38:14उसका कर्तव्य तो बनता ही है तुम मानो ना मानो तुम्हारी मजबूरी।
- 38:22तुम मानो ना मानो तुम्हारी स्वतंत्रता वह तुम्हारी
- 38:28स्वतंत्रता को नहीं छीन रहा वह कसते का वखान कर रहा है भाई, अंधे
- 38:35को रात भी कहाँ दिखती है जीसको दिन नहीं दिखता उसको रात भी तो
- 38:41नहीं दिखते। अंधे को कहाँ पता है?
- 38:45रात है घनघोर गटाएं काली छा गई हैं।
- 38:50मेघ इतने काले हैं और ऊपर से अमावस्या की काली रात कुछ भी तो
- 38:58दिखाई नहीं पड़ता और इस अंधेरी रात में।
- 39:02अंधा जीस दुकान के सामने खड़ा होकर मांग रहा है और दुकान का शटर
- 39:12डाउन है। मालिक घर विश्राम कर रहा है किसकी
- 39:19आँखें वो बताएगा। जीस रास्ते पे तुम चल रहे थोड़ी
- 39:25दूर आगे जाकर कुंआ आएगा गिर पड़ो के कुंए में और ये कुंए की मंडेर
- 39:34पर बैठे हैं गिनती करते रहते हैं। एक अफीम ची कुएं के मंडार पे बैठा
- 39:42था, दिन रहा था 252525251 गणितज्ञ वहाँ से निकला।
- 39:54उसने कहा इसको गिनती आती नहीं है या क्या माज रहा है पूछतो?
- 40:002525 उसने पास जाके कहा भाई मैं गणितज्ञ हूँ तुम 2525 ही करते हो
- 40:11अरे भाई गिनती आगे भी होती है, मुझसे सीख लो, मैं गणितज्ञ हूँ
- 40:16मैतेमेटिशियन। 2627282930 ये भी तो होता है,
- 40:23क्या तुम पढ़े नहीं? कुंए के मढ़े में बैठा व्यक्ति
- 40:28कहने लगा देखो आगे जाके देख लो 2525 उसने कहा चलो क्या हाल चाल
- 40:37है। देख तो लें यह कितना वाजिद है
- 40:41क्यों वाजिद है एफिमची दोहराया जा रहा था 2525 इन्होंने भी कुछ खा
- 40:52लिया है भांग धतूरा। जैसे ही उसने कुंए के भीतर झाँका
- 41:02अफीमची उठा और पीछे से लात मारते मैं डेर पे फिर बैठ गया कहता 26
- 41:12262626। ये मच रहा है हम कुछ कहते नहीं,
- 41:32वो ही कहते हैं जो देख लेते हैं। उनको ईशिकायत बैठे हम कुछ नहीं
- 41:48कहते, कुछ नहीं कहते। अपनी तो ये हाँ दते हैं कि हम कुछ
- 42:08नहीं कहते कुछ नहीं कहते। उनको ये सिखाएं।
- 42:30हम कुछ नहीं कहते। जो अपने भीतर उतर गया, वह मौन हो
- 42:35गया। तुम्हें क्या लगता है कौन बोल रहा
- 42:40है? हम तो निर्लिप्त हैं, लेकिन हमारी
- 42:51चेतना की शक्ति को। यह इन्स्ट्रुमेंट पीकर यह बोलता
- 42:57है इसलिए शरीर की जरूरत होती है बड़े बड़े देवी देवता जब मुक्ति
- 43:07का ख्याल आएगा तो उन्हें भी शरीर की जरूरत होगी।
- 43:12उन्हें भी मानव। तन चाहिए होगा बिना मानव तन के
- 43:17मुक्ति नहीं होती यह रथ उन्हें भी लेना पड़ेगा यह रथ ही तुम्हें
- 43:24यात्रा कराएगा और रथ ही तुम्हें पहुँच जाएगा।
- 43:27मानव तन की बड़ी महिमा है, इसे गवाह मत देना।
- 43:34और मैं देख रहा हूँ तुम गंवा रहे हो मेरा रात के घने साये में जब
- 43:42सब सो गए तुम बंद दुकानों के आगे फरियाद लगा लो शट चढा।
- 43:53मालिक घर विश्राम कर रहा है, गोराड़े मार रहा है मैं तुम्हें
- 43:58मूर्ख बना के चला गया उसने क्या लेना तुम आओगे जख मारोगे चले
- 44:07जाओगे। और मैं जो बोलता हूँ सत्य बोलता
- 44:12हूँ, इनका खून उबाला खाये तुम इनको छोड़ो, जिन्हें कुछ मिला
- 44:21नहीं है, इनके पास रहने वाले उनका खून उनका खून खोलेगा।
- 44:29लेकिन किसी न किसी तरह अपने मन को ठंडक दे देंगे।
- 44:32देखो दुकानदारी भंग हो जाएगी सारी फिर सीखो के पीछे जाना रामपाल की
- 44:42तरह। राम रहीम की तरह ये सारे राम ही
- 44:46क्यों होते हैं? किसी के पीछे राम, किसी के
- 44:51आसाराम, राम राम पार ये माजरा के? जिसने पा लिया है वो मन हो गया
- 45:13हाँ इसको लाइनिंग में दे दो जो समोन में पहुँच गया।
- 45:24वह मून का रस इतना प्यारा है उससे मौन से निकलने का दिल ही नहीं
- 45:30करता। वह इतना मीठा है, इतना रसीला है,
- 45:43वहाँ जाकर तुम्हारी सुध बिसर जाती।
- 45:49तुम ही नहीं बचते, वे ही बच जाता है।
- 45:57दो नहीं बचते, जो शेष रहता है वो ही रहता है।
- 46:05उसे अद्वैत कह लो, उसे एक कह लो आखिर में वही बचेगा?
- 46:17हम बोलते हैं लेकिन सत्य है, मैंने बहुत बार बोला वह बोला नहीं
- 46:24जाएगा। अंत में हम पाएंगे सभी पाते हैं
- 46:29के बोलना व्यर्थ गया हमारे बोलने से अगर कोई भाग्यशाली इशारों के
- 46:40सीध में देख कर। उसे पूर्णमासी का चंद्रमा दख जाया
- 46:48तो अहो भाग्य हैं मेरे और अहो भाग्य हैं उसके मेरे ये किसी ने
- 46:56इशारा समझा उसके ये के किसी ने इशारा समझाया।
- 47:04इशारों इशारों में बात होती है तो राज़ खुलता है।
- 47:15वैसे हमारी आदत है कि हम बहुत खुश हैं, निर्लिप्त हैं, चुप हैं।
- 47:20परम मौन है। हम बोलते कुछ नहीं, समुद्र का
- 47:26ऊपरी सतह तुम्हें कितना ही गड़बड़ लगे।
- 47:30भारी हालचाल होती है समुद्र की सतह पर, लेकिन ज़रा उसके भीतर
- 47:36जाकर देखना परम ठहरा और पांव। इतना ठहर गया हो वहाँ जाकर
- 47:45तुम्हारा खुद का भी बोलने का मन नहीं करेगा, इसलिए ऐसे संत को सुन
- 47:55जिसकी आवाज तुम्हें भी ठहरा दे। पर जहाँ उसकी आवाज़ सुनकर
- 48:10तुम्हारी आँखें झर झर करने लगे बुद्धि अंधी है।
- 48:19बुद्धि से तुम अंधे गुरु चुन लेते रहो अंधा सुझाकों को चुन्न कैसे
- 48:31सकता है अंडरलाइन। जो खुद अंधा है।
- 48:38उसको क्या पता ये सामने वाला सुजाखा है या अनबाही जब किसी की
- 48:47आँख खुलती है, जब किसी को आंख मिलती है तो उसका एक दायित्व हो
- 48:55जाता है। उसे कोई कहे न कहे।
- 48:59लेकिन भीतर से दायित्व बनता है। उसका के रात के अंधेरे में जो
- 49:06मांग रहे हैं अंधेर गुप है। सब की दुकानें बंद है और उन बंद
- 49:13दुकानों के आगे तुम जाकर मांग रहे हो।
- 49:17वहाँ से कुछ मिलेगा नहीं जिसने आँखें पालीं उसका कर्तव्य हो जाता
- 49:26है। तुम्हें एक आवाज़ देता है।
- 49:39आवा हज देख हमें तुम बुला मोहब्बत में।
- 49:55ना हमको सताया, आवाज़ दे के हमे तुम बोला मोहब्बत में।
- 50:12जना। ना हम को सताओ और जो देख के।
- 50:25उसका फर्ज बनता है ये तुम्हें आवाज़ तो दे।
- 50:32जिसने देख लिया वह कण कण में है वह अंधों को बता तो दे, थोड़ी सी
- 50:43दूर जहाँ तुम चल रहे हो, इन दी स्ट्रेट लाइन आदि कुआं है भाई रुक
- 50:49जाओगे। जहाँ खड़े होकर तुम अलख जगा रहे
- 50:58हो और द्वार बंद है, यहाँ कोई नहीं रहता।
- 51:09यहाँ अलग मत जगाओ तुमने पुष्ठा पुत्र अगर ऐसे ही ब्लॉक करते रहे
- 51:24तो तुम्हारे पास आएगा कौन मुझे प्यासों की जरूरत है?
- 51:39जो प्यासा है वो आजा है। इसको प्यास लगी नहीं और मैं
- 51:46बिलकुल सही से ही समझ गया कि इसे प्यास नहीं लगी।
- 51:51अचेतन में तो सभी के प्यास है, लेकिन वह प्यास अचेतन को क्रॉस
- 51:57करके चेतन में आई। क्षेत्र में अभी ऊहापोह चल रही
- 52:01है। तर्क चल रही हैं, मान्यताएँ चल
- 52:03रही हैं। तुमने बहुत कुछ स्वीकार कर लिया
- 52:07है, वो चल रही हैं। मेरे पास बेचने का कोई संबंध नहीं
- 52:17है। तुम्हारी प्यास बुझाने को पानी रो
- 52:19रहा है, बड़ा शीतल पानी है, बड़ा प्यारा है, आनंददायक और ध्यान
- 52:25रखना तुम परम रेगिस्तान में चले जा रहे हो पसीने से तरबतर
- 52:34तुम्हारे सारे कपड़े तरबतर। माथा गिला है और डिहाइड्रेशन हो
- 52:43गया है। तुम्हें पानी की आवश्यकता है,
- 52:51इसीलिए तो यह है घृणा फैलाने वाले लोग पैदा होते हैं।
- 52:56दे अरे डिहाइड्रेटेड। इन्हें प्रेम का पानी चाहिए।
- 53:05प्रेम का पानी निकल गया सूरज की गर्मी ने, रेगिस्तान की गर्मी ने
- 53:13इस बालू ने और तुम? डिहाइड्रेटेड हो गए तुम प्यासी हो
- 53:25तुम्हें प्यास लगिए शरीर मांग करता है रोआ रोआ मांग करता है तो
- 53:30उसी के पास जाना होगा जिसके पास पानी है और यह भी ध्यान रखना
- 53:37जिसके पास पानी है। पानी की कोई कीमत नहीं होती,
- 53:43सिर्फ कीमत वसूलता नहीं। तुमसे ईश्वर ने तुम्हें सारी
- 53:49सृष्टि सौंप दी, उसके बदले में क्या मांगा?
- 53:55ईश्वर जानता है? तुम्हारे पास दैनिक को कुछ नहीं
- 54:01दा ता देलंदा थकपा जुगा जुगांतर खाई खा तुम तो बस खाते ही चले जाओ
- 54:10तुम्हें सब कुछ सौंप दिया उसने बस अब तुम्हारी परीक्षा की घड़ी है।
- 54:20ये क्या तुम उसे खोज पाते हो जो तुम हो तुम्हें सब मिल गया कोई
- 54:25कमी नहीं है। सभी ऑर्गन तुम्हारी लगातार काम कर
- 54:31रहे हैं। और तुमने तुम्हें सब कुछ मुफ्त
- 54:40दिया गया है, लेकिन तुमने इन ऑपरेटर्स के अंकों के साथ खेलना
- 54:49शुरू कर दिया। तुम बच्चे बन गए, बच्चों का सा
- 54:56मासूम होना था। बच्चों के से खेलना नहीं था।
- 55:00तुम बच्चों की तरह इन अंगों के साथ खेलने लगे, झूठ बोलने लगे।
- 55:11अब इतनी ऊंची पदी पर बैठा हुआ अगर राजनीतिक झूठ बोले।
- 55:16तो क्या ये अच्छा लगेगा? और इतनी ऊंची प्रेम की पदवी पे
- 55:26पहुंचे जिसे तुम प्रेम समझते हो, प्रेमी समझते हो?
- 55:33वह अपनी सार्थकता ना दिखाई कि वह वास्तव में कौन है।
- 55:36झूठ बोले तो क्या ठीक लगेगा? कृष्ण झूठ बोलते ठीक लगते हैं।
- 55:44उम्मीद भी नहीं की जा सकती कि कृष्ण झूठ बोलेंगे, लेकिन क्या
- 55:51करें? ज़माना ही ऐसा क्या जिन्होंने उसे
- 55:59पिया नहीं? रस को वो आँखें बांट रहे हैं
- 56:07रौनकी राम कुश ढूंढ रहा था। नाली में गंदी नाली पास जाने वाला
- 56:21जानता था रोनकी राम क्या ढूंढ रहे हो क्या खो गया है सो रोनकी राम
- 56:26बोले कुछ नहीं खो गया तो आगुन तक बोला फिर कुछ नहीं खो गया तो ढूंढ
- 56:34क्या रहे हो? रोन की रामकनी ढूंढने में हर जगह
- 56:42तुम अपनी सारी जिंदगी ऐसी है गुरुओं के पास ढूंढने में गुजार
- 56:46देते हो। देखिए सीधी सी बात है तुम्हें
- 56:51महामोन में उतरना है। कैसे नाम के सहारे तुम जाओगे
- 56:55शब्दों के सहारे कैसे पहुंचोगे सीधा सा तर्क तुम्हारी समझ में
- 57:00नहीं आता जाना है मौन में जहाँ इतनी साइलेंस है कि वहाँ जाकर उस
- 57:09मुन्नी मौन में खो जाना होता है? उसी को मुन्नी कहते हैं।
- 57:18उन मुन्नी अवस्था भी कहते हैं और तुम उसके पास धरे गए।
- 57:28जो बोलता है बोलना इनकी आदत है। दे अरे एडिक्टेड और बड़े होशियार
- 57:42लोग हैं। वो खुद भी दूसरों को काटने में लग
- 57:47गए। हालांकि उसको जाना नहीं रस को।
- 57:53पहचान तो एक है। भगवान कृष्ण ने बताई स्थैर्यम
- 58:02स्थिरता अमान निकम दंभितुम हिंसा शांति रर्चुम आचारू उवासनम शौचम
- 58:12आत्मविनिक रहो सब जानते हैं, साथ नहीं जाएगा, सब जानते हैं, इकट्ठा
- 58:28कर रहे हैं। यह कुढ़ का माल है, कुढ़ का माल
- 58:34साथ नहीं जाएगा कतः यह माल आराम का है।
- 58:39इसलिए लताड़ लगाते हैं बाबनानक कि तुम चोर हो, तुम हरामखोर कित्ते
- 58:48चोर हरामखोर? अब ये मसला ऐसा है यह रूख वह है
- 59:10जो तुम्हें लगाए ना लगे और वजह ही ना बने।
- 59:21तुम उसको याद करते रहो। मैं कल ही अपने चैनल कंट्रोलर को
- 59:29कह रहा था सुमरन के बारे में। जिसे तुमने देखा नहीं पहले उसको
- 59:39याद कैसे कर पाओ कहता बाबा थोड़ा सा और खुलासा करो, मैंने कहा मैं
- 59:49एक शब्द बोलूँगा बताना तुम्हारे दिमाग में क्या नक्शा अब रहा?
- 59:56कहते बोलो, मैंने कहा तड़प व्याम सेंगे तड़प व्याम सेंगे तड़प
- 1:00:05व्याम सेंगे मैं सोच सोच के बोला बाबा कोई आकृति नहीं बनती।
- 1:00:16मैंने कहा क्योंकि तड़प ध्यान से ही तुमने पहले देखा ना, इसलिए
- 1:00:21आकृति नहीं बनी तो तुम याद कैसे करोगे?
- 1:00:27मैं तुमसे पूछता हूँ, तुम कहते हो स्मरण करो, मैं तुम्हें कहता हूँ,
- 1:00:33क्या तुम स्मरण कर सकते हो ऐसी चीज़ का?
- 1:00:36जो तुमने पहले से कभी देखी नहीं। स्मरण किसका आएगा, जो तुमने पहले
- 1:00:43देखा ही नहीं उसको याद कैसे कर पाओगे?
- 1:00:50याद हमेशा उसी को किया जाता है जो एक बारगी तो निहारली हो पहले।
- 1:00:59तुमने तो कभी देखा नहीं अनजान रहे हैं ज्ञात रस्ते है वो कैसा है,
- 1:01:09कैसा नहीं और उसको याद करने लगे हो याद कर भी पाओगे।
- 1:01:16ज़रा पहले ये विचार कर लो सुमरण कर पाओगे उसका अज्ञात का और वो
- 1:01:24अज्ञात ही नहीं है, वह अगेवी है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा ही इज़
- 1:01:34नॉट ओनली अननोन। वह अज्ञाति नहीं पटार सो अननोन
- 1:01:39एबल वह अज्ञे भी है तो याद कैसे कर पाओगे?
- 1:01:43ज़रा बताओ जीसको तुमने पहले देखा नहीं?
- 1:01:53सोच लो सोच के बता देना उसको याद कैसे कर पाओगे इसलिए मैं सोमरण को
- 1:02:05बकवास करता हूँ। कहीं ऐसा तो नहीं कि जिन्होंने
- 1:02:12जाना उनके शब्दों का तुमने अर्थ का अनर्थ कर लिया हो?
- 1:02:17ऐसा ही है जिन्होंने जाना उन्होंने सुमरण कहा था किसी और
- 1:02:23चीज़ को तुमने शब्दों का। अनर्थ कर दिया।
- 1:02:28अर्थ का अनर्थ कर दिया। तुम जानते नहीं कि सुमरण कहते
- 1:02:35किसे जिसके जो मन में आया पांच नाम कर दिया 1000 नाम कर दिया।
- 1:02:43किसी ने राम कह दिया किसने राधा कह दिया और बड़े पक्के इरादे से
- 1:02:47कहते हैं कि बस करती चली जा इतना पक्का इरादा और खूब ज़ोर से बोलते
- 1:02:54हैं क्या ज़ोर से बोलना, शोर मचाकर बोलना बोलने से?
- 1:03:02झूठ सत्य हो जाता है। ज़ोर से बोलने से क्या झूठ सत्य
- 1:03:09हो जाया करता है? तो क्यों चिल्ला रहे हो राधे राधे
- 1:03:13करते रहो यह तुमने जाना नहीं और जाना जा नहीं सकता बड़े प्यारे
- 1:03:22बात है। और कहीं भी उसने जो कोई धार्मिक
- 1:03:29व्यक्ति नहीं, साइंटिस्ट था बड़ा शानदार फॉर्मूलेक्शन देगा इस
- 1:03:34इक्वल टु मैक का। वो कहता है, सुमर्गन कैसे याद
- 1:03:42कैसे करोगे तुमने? मुझे कैसे देते हैं लोग, बाबा
- 1:03:46पहले क्यों नहीं आए? मैंने कहा मैं तो पहले था लेकिन
- 1:03:52तुमने मुझे जाना नहीं था। ऐसा ही परमात्मा है।
- 1:03:59सच सच बताना और सच सच बताये मुझे गुरुजन जो करोड़ों लोगों को उपदेश
- 1:04:06दे रहे हैं, सत्य की बात करता हूँ, तुमने देखा है बाहर से कह
- 1:04:14दें, बेलासक कह दें क्योंकि इनकी दुकानदारी?
- 1:04:20और मैंने कहा, मेरी दुकान धरी रही है इसलिए मैं छंटनी भी करता इसलिए
- 1:04:31मेरी संख्या बढ़ती गड़बिलासक जाए। क्योंकि मैं प्यास का हल करता
- 1:04:47हूँ। अगर आग जल गई बेरहकी तब तो हृदय
- 1:04:55हो गया। कोई अज्ञात प्रेम की बुलक उठी,
- 1:05:01भीतर से वही परमा है, अनजानी थी। आज तक जिन्होंने सच्चा प्रेम बुआ
- 1:05:11है, जिनको उन्हें अनुभव है इस बात का।
- 1:05:20के प्रेम के क्षण में जीस व्यक्ति से प्रेम हो जाता है उससे पहले वो
- 1:05:28उसने देखा नहीं था। और फिर जब आँखें 4:00 बजे उसके
- 1:05:35बाद वो भूले से भलाता है याद नहीं चाहिए बीते दिनों के।
- 1:05:46याद ही ना जाए। बीते दिनों की जाके न आए जोधन दिल
- 1:06:03क्यों भुला उन्हें दिल क्यों भुला।
- 1:06:13याद ना जा वह। प्रेम प्रथम बार तुम स्वाद चखते
- 1:06:21हो, प्रेम का और फिर स्वाद चखते हो, तो फिर उसकी माला तुम जागते
- 1:06:29नहीं? फिर तो तुम उसको धकेलने की कोशिश
- 1:06:32करते हो। बड़े शादमाते उन्हें हम भुलाकर
- 1:06:44अचानक ये क्या? हो गया बहुत शाहदमा थे हमको
- 1:07:02भुलाकर अचानक। ये क्या हो गया के चेहरे पे उनके
- 1:07:17मला आ गया। के चेहरे पे उनके।
- 1:07:27मलाला गया दिशाओं का खाया गया। वो ही ज़िन्दगी का सवाल आ गया वही
- 1:07:55शाम उनका। रो बड़ा से नहीं बोलता तुमने वो
- 1:08:03प्रेम कभी जाना नहीं था। बहुत शायद वहाँ थे उन्हें हम
- 1:08:08बुलाकर अचानक ये क्या हो गया तुम ढकेलना चाहते हो उसकी याद को
- 1:08:16लेकिन याद जाती ऐसा होता है प्रेम।
- 1:08:22तुम्हारी माला लेने से जपकर वो संख्या बताने से थोड़ा ही होता
- 1:08:25है। प्रेमियों से पूछो, कितनी बार जपा
- 1:08:28गया उसका नाम प्रेमियों से पूछो फिर से पूछो राँझा कितनी बार जपा
- 1:08:38गया। मजनू से पूछो लैला कितनी बार जब
- 1:08:46भी गए प्रेम के आगोश में जो छा जाता है उसको गिनती कभी याद रहती
- 1:08:57है। क्या तुम्हारी सभी गलतियाँ तुम
- 1:09:01गणित तक ज्ञा हो? तुम प्रेमी प्रेमी को कभी याद
- 1:09:06नहीं होता। कितनी बार बस वो याद आता ही चला
- 1:09:10जाता है याद न जाए बीते दिनों के। वह प्रेमी है के आता ही चला जाता
- 1:09:21है तुम्हें अभी प्रेम हुआ नहीं, उसी सुस्त तो तुम नकली नकली थोती
- 1:09:27थोती कागजी हवाई जहाज किश्तियां बनाते हो, बच्चों की तरह खेल लेते
- 1:09:32हो, खेलो। हम रोकते नहीं, तुम्हें पांच नाम
- 1:09:38ले लो ये खिलौने ये खिलौने राधे राधे कर लो खिलौने मन बहल जायेगा
- 1:09:50तुम भी तो बच्चे हो, अभी थोड़ा और रोड हो लो।
- 1:10:01वो याद आया करता है तुम्हारी कोई औकात नहीं है क्योंकि तुमने
- 1:10:08अज्ञात उसको कभी पहले जाना नहीं और संत जो कहते हैं कि वो अगेवी
- 1:10:16है, वह जाना जा भी नहीं सकती। यह बस पिया जा सकता है, तो मैं भी
- 1:10:28तुम्हें कहता हूँ तुम पी लो, तुमने कहा तुम ब्लॉक को करते हो,
- 1:10:34मैंने कहा तुम प्यार से कर लो। मेरे पास पानी है, प्यास बुझाने
- 1:10:40को मेरे पास ग्रोसरी का सामान नहीं है, ग्रोसरी का सामान है।
- 1:10:45ना तो किसी डेरे वगैरह में चले जाओ, वहाँ मिल जाएगा, खूब मिल
- 1:10:50जाएगा, लेकिन मेरे पास तो पानी है।
- 1:10:54प्यास लगी तो आजाओ। जैसे आँखें चार होने के बाद
- 1:10:59प्रेमी की याद आती है, उससे पहले तुम्हें प्रेम का पता ही नहीं
- 1:11:02होता, वैसे ही वो परमप्रेम है। एक बार गोता लग जाए भीतर तो बाबा
- 1:11:13कहते हैं। शबनजिया का एकता था, सो मैं
- 1:11:19विसरना चाही, वह मुझे भूलना चाहे मुझे भी याद कराया तुम्हारी
- 1:11:28बुद्धि। लाखों प्रश्न उठाए अभी कल राकेश
- 1:11:31बेदी ने 180 साल। क्षमा करना 80 कलो भजनू व्यक्ति
- 1:11:41को कैसे प्लेटफार्म में भटका जाता है?
- 1:11:45कोई सामने था तो है नहीं, पीछे भी कोई नहीं था।
- 1:11:50किसी ने पटक दिया। मैंने कहा जैसे।
- 1:11:57चंद्रयान तीन को गुमाया पलटाया दिशा मुड़ी गई।
- 1:12:03चंद्रयान तीन को पता नहीं था कौन मर्डर है?
- 1:12:10तुम याद नहीं करते तुम्हारे याद करना बिलकुल बेकार भूल जाओ और
- 1:12:17मेरी बात देर आये दुरुस्त आये सुबह का भूला शाम को घर आजाओ लौट
- 1:12:25के बुद्धू घर को आया। जान बची सो लाखों पाई जितनी जल्दी
- 1:12:29उसको छोड़ दो वक्त बच जाएगा ये वक्त पीने के लिए है।
- 1:12:37यह वक्त पीने के लिए है, पियो, पियो और जियो।
- 1:12:48याद किसे करोगे? पागल हो गया भाई जीसको देखा नहीं
- 1:12:57कभी उसकी याद नहीं आया करते वह याद करेगा तुम्हें?
- 1:13:05अब वो याद करा दे नहीं तो खरगोश काट के आया था रैप उठ कोई पुण्य
- 1:13:12करम भी ना दिया और तुम कैसे समझते हो वो आकर कोई रोब बुराएगा?
- 1:13:21फिर फिर मुझे उठा के पटकेगा अरे भाई वो कण कण में है, वो कहीं दूर
- 1:13:28बैठा सर चेखंड में नहीं, यही गलत मान्यता है, तुम्हे अंधा बनाये
- 1:13:36करते है और तुम अंधों के पीछे। और बस मुश्किल ही यही है तुम्हारी
- 1:13:41आँखें नहीं अगर कोई आँखें वाला तुम्हें कहे कि देखो जहाँ तुम
- 1:13:46पुकार लगा रहे हो, वह है तो दुकान बंद है भाई और रात का वेला, तुम
- 1:13:54कहाँ मांग रहे हो इनके पास है नहीं, यहाँ कोई भी तो नहीं है।
- 1:14:00तुम्हे करुण पुकार है, करुण बात है कहने को कि शायद तुम जग तो
- 1:14:06नहीं सकते, तुम्हें आँखें तो नहीं मिलेंगी, लेकिन तुम्हारे कान तो
- 1:14:11सुनते हैं, तुम बहरे तो नहीं तुम्हें सुनाई तो पड़ेगा।
- 1:14:20दिखाई नहीं पड़ता तो सुनाई तो पड़ता है।
- 1:14:27यह अन्नादनाथ में सुनाई तो पड़ता है, इस सूत्र का सहारा ले लो,
- 1:14:32इसके संग संग चलते जाओ और उदगम सतल पर पहुँच जाओगे।
- 1:14:37जहाँ तुम सैम हो, तुम। प्यार का सागर है तू प्यार का।
- 1:14:56सागर है तेरी एक बोध के प्यार से हम तू प्यार का सागर है।
- 1:15:15तेरी एक बूंद के प्यार से हम प्यार का सागर।
- 1:15:27है धन्यवाद।