Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Sep 25 - Baba Ji’s Real Story! स्वधर्म क्या है? डर कब तक लगता है और डर खत्म हो जाने से क्या होता है?
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- 0:22श्री यश गोराहा प्रश्न बड़ा गहरा है और जितना प्रश्न गहरा है, उतना
- 0:39बुद्धि से नहीं समझ में आएगा। अंतत से सुनने की चेष्टा करोगे और
- 0:50बार बार चेष्टा करोगे, दर्शन भी में आ जायेगा।
- 0:55भाव एक गुत्थी को हल करें। गांधीजी ने कहा था, 6 अप्रैल 1947
- 1:15को अगर मुसलमान हम हिंदुओं को मारना चाहते हैं तो हमें बहादुरी
- 1:25से मौत का सामना करना। हिंदुओं को अपने दिलों में
- 1:32मुसलमानों के प्रति क्रोध नहीं पालना चाहिए, भले ही मुसलमान
- 1:43उन्हें नष्ट करना चाहिए अगर वे हिंदुओं को मारकर।
- 1:50अपना शासन स्थापित करते हैं तो हम अपने हिंदुओं को जीवन का बलिदान
- 1:59देकर एक नई दुनिया की शुरुआत करेंगे।
- 2:04आई ऍम नॉट शुर इफ इट इस यू। बट इट इस पब्लिश्ड इन टाइम्स ऑफ
- 2:12इंडिया क्या ये व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का विचार है या सत्य
- 2:22में गाँधी ने कहा है? कृपया करके आप जवाब दीजिये बड़ी
- 2:33उलझन में एक गीता का श्लोक सुनिए स्वधर्मम निधनम श्रेया।
- 2:47भर धर्मों ब्यावह तीसरे धयका 35 साँस लोग आइए अब थोड़ी सी खाने
- 2:59शुरू करें। मैं अक्सर जाया करता था।
- 3:14बाबा धर्मदास की सीमाती पर रात को सारी सारी रात बैठा रहता।
- 3:31ऐसा मुकाम आता, शरीर जड़ दिखने लगा और चैतन्य आत्मा का दर्शन
- 3:44होने लगा, जिसका मैंने पहले भी जिक्र किया एक से दो हो गया।
- 3:56पहले मैं अकेला विजय कुमार था। एक साक्षी का जन्म हुआ जो इस शरीर
- 4:09की इस मन की विचारों की। भावनाओं की गतिविधियों को देखता
- 4:15रहता हर वक्त बड़ा मज़ा आता उस स्थिति में और अक्सर ये होता रात
- 4:32के समय शायद ही कोई दिन खाली किया हो।
- 4:41वहाँ के जमींदारों ने मुझे बहुत बार रोका की आप मत जाया करो, वहाँ
- 4:46कोबरा रहते है, वहाँ सांप तुम्हें डस लेंगे, लेकिन धुन ऐसी धुन काहे
- 4:58की? जो आनंद मिलता है उस स्थिति में
- 5:07उस आनंद की कोई कीमत नहीं और उस आनंद की ये जीवन भी कोई कीमत नहीं
- 5:14है। धन दौलत, मान पदवी को छोड़ो।
- 5:23इस जीवन तक की भी कोई कीमत नहीं उस आनंद के मेरे जीवन की घटनाएं
- 5:34किसी दूसरे के जीवन की घटना मैं नहीं सुना रहा।
- 5:41सांप आते मेरे ऊपर से गुजर जाते महसूस होता, पता चलता मैं आप खोल
- 5:48के देखते हो सांप जा रहा है लेकिन मेरे भीतर भाव उन्हें मारने का
- 5:58नहीं था। अगर ये डस लेगा तो डस लेगा।
- 6:16संसार में दो ही विचारधाराएं हैं एक मनुष्य की एक संतों के मनुष्य
- 6:24कहता है जहाँ नुकसान हो वहाँ मत जाना।
- 6:31संत कहता है जहाँ वो ले जाए वहाँ जाना शब्द गहरे हैं, शांति से
- 6:39सुनेंगे। सांप पीठ पर चढ़ जाते हैं, पैरों
- 6:48के ऊपर रेंगते हैं। आँखें खोल के मैं देखता, मुँह खोल
- 6:54कर जीभों को बाहर निकालते ना तो मैंने गीता पूरी ना मैंने कोई
- 7:06शास्त्र पढ़ा था, बस उस दिन मैं मर गया था।
- 7:14चिंतन ट्रेन की वो घटना मर ही गया था जिसकी कृपा से बचा मगर अब
- 7:29मारना चाहेगा। तो ठीक है तब बचा लिया अब वो
- 7:37मारना चाहेगा तो उसकी मर्ज मेरे भीतर का भाव था।
- 7:46मर जाना श्रेष्कर है इसे मार देने के है।
- 7:58बुद्धि के तल पर यह बात समझने आएगी की बुद्धि का तल हानि और लाभ
- 8:02को देखता है। अस्तित्व का तल न हानि देखता, न
- 8:10लाभ देखता, न यश देखता, न अपियश्य देखता न जीवन देखता न।
- 8:24वह सिर्फ आनंद को देखता। जीस स्थिति में उसे आनंद मिलता है
- 8:36वही वो करता है और बेधड़क करता है।
- 8:41निर्द्रता से करता है, साहस से करता है कायरता से नहीं करता कायर
- 8:46व्यक्ति तो सांप को देखते है, मार्त का या कायरता की परिभाषा
- 8:50है, इसीलिए कभी भी साबरकर के और गाँधी के विचार मिले।
- 9:04गोडसे के और गाँधी के विचार मिले नहीं, कोई इसमें गलत नहीं हुआ कि
- 9:13गोडसे ने गाँधी को मार दिया। गोडसे की विचारधारा गाँधी की
- 9:19विचारधारा को मार जाती है। गोडसे की विचारधारा जहाँ नुकसान
- 9:26हो उसे मार दो और गाँधी की विचारधारा नुकसान हो या लाभ हो,
- 9:36जो उसको मंजूर है, वो ठीक यही सभी संतों का मत।
- 9:44एक बात ध्यान से सुन गाँधी जी अपने बिल्कुल अंतकाल में उस
- 9:49स्थिति पर पहुँच गए थे जो मैंने श्लोक वर्णित किया वह धर्म ने
- 9:59जन्म श्रेया पर धर्म। ब्याह दूसरे के धर्म में मर जाना
- 10:07बड़ा भयावह है। अपने धर्म में मर जाना श्रेष्पय
- 10:16माना के दोनों चीजों में मरना तो होता है सहधर्म में मरो।
- 10:22जब भारत धरम में मरो मरना तो होता है और असल में इन सब बातों की
- 10:35फाउंडेशन में जो चीज़ है वो ये है की तुम मरना नहीं चाहते।
- 10:45नए मरने की कायरता के कारण तुम विचारधाराएं पैदा करते हो हिंदू,
- 10:53मुसलमान, सिख, इसाईक। उसका कारण तुम खंगाल नहीं पाते,
- 11:02लेकिन संत खंगाल लेता है स्वधर्मम ने जन्म श्रेया पर धर्मम गया वह।
- 11:21लिखा है, मुझे नहीं पता ये ठीक है या गलत है, ये ठीक है, मैं इसकी
- 11:27पुष्टि करता हूँ। ये ठीक है कैसे?
- 11:30ठीक है, उसी के बारे में तो बोल रहा हूँ जिसका भेद मट गया।
- 11:41जिसका कोई मित्र और शत्रु ना रहा उसके लिए हिंदू और मुसलमान भी ना
- 11:48रहा। उसके लिए भेद खत्म हो गया।
- 11:54ना हिंदू, ना मुसलमान, ना शेख, ना ईसाई, ना ये होगी ना पार्थ।
- 12:00और यह अवस्था आना परम अवस्था है। संत मत में इसे शर्म अवस्था रहता
- 12:08है। तुम कहते हो, गाँधी ने इसे शब्द
- 12:12किया है क्यों कहे हमें कायर बना रहा है?
- 12:21अपनी मृत्यु को स्वीकार करना कायरता का काम है क्या?
- 12:30गौर से 2 मिनट आँखें मूँद लो शांति से बैठो सोचो।
- 12:41तुम क्या करोगे साप तो कोई हिंदू मुसलमान है साप तो साप और साँप के
- 12:53गुजर जाने से मुझे उसे मारने में बड़ी दिक्कत आती है।
- 13:02और ध्यान रखना, जिसके भीतर से अहिंसा की तरंगें निकलती हैं, उसे
- 13:14गॉड से तो मार सकता है। सांप नहीं मारेगा।
- 13:19जहर कितना भी हो इस शब्द को फिर सुनो जिससे व्यक्ति के भीतर से
- 13:30अहिंसा की तिरंगे निकलती हैं और महात्मा गाँधी का पूरा जीवन और
- 13:38क्या बताता है तुम्हें? अहिंसा, परमा, धर्मा, महावीर का
- 13:44जीवन, बुद्ध का जीवन तो मैं क्या कर सकता हूँ?
- 13:47अंगली माल मर्त मर्त महावीर के कानों में किरण ठोक दी जाती है।
- 14:00लेकिन समस्या कहाँ आती है? समस्या आती है राजनीति में।
- 14:07समस्या वहाँ आती है जहाँ राजनीति में तुम धर्म को घुसेड़ लेते हो।
- 14:19अब समझी असली बात? गाँधी अपने अंतकाल में धार्मिक हो
- 14:24गए थे, अध्यात्मिक हो गए थे, गॉड से के भीतर कोहरा से ज्यादा सांप
- 14:39से ज्यादा जहर भरा है। सांप ने मुझे नहीं डसा, मेरी
- 14:47अहिंसा। क्योंकि साँप के भीतर ऐसी प्रणाली
- 14:53है, जिसकी त्वचा जान लेती है कि यह व्यक्ति जो बैठा है यह मुझे
- 15:00मारेगा नहीं। इसके भीतर से तिरंगे जो उठती हैं।
- 15:07वो अहिंसा की हैं, हिंसा की हैं, इसलिए सभी संत जो वनों में बैठ
- 15:20जाते हैं कुठिया बनाकर कभी सुना के उसको शेर खाके सांप बिच्छू
- 15:29वहाँ पर होते हैं। कभी सुना कि किसी साँप ने ढँक
- 15:36लिया? और अगर सोना तो उस व्यक्ति के
- 15:40भीतर से हिंसा की तरंगें निकल रही होंगी और गोर शेप आदि होगा।
- 15:45महात्मा गाँधी की तरंगें उसमें आईं।
- 15:53और फिर वो डरेगा, वह एकांत में झोंपड़ी डालेगा।
- 15:57बेटा गुरु और शि से जा रहे रोज़ जाते थे।
- 16:08एक श्याम की बात है, सूर्य जल रहा है।
- 16:16गुरु को कहीं से कोई ईंट मिल गया। सोने पहले भी जाते थे, आज भी जा
- 16:27रहे हैं, लेकिन आज बार बार गुरु कुछ लेता है।
- 16:32शीर्ष से गांव कितनी दूर है? यहाँ से आबादी कितनी दूर है यहाँ
- 16:38से? शिष्य दो चार बार तो ख्याल नहीं
- 16:46किया, लेकिन बारो बार पूछने उसने सोचा की आज ऐसी क्या बात होगी?
- 17:00जो गुरु मुझे बार बार पूछता है कि ग्राम आया की नहीं आया सूरज तो ढल
- 17:04रहा है आगे तो कभी पूछा नहीं शिष्य बड़ा सामीदार था।
- 17:15कई बार शिष्य गुरुओं से ज्यादा समझदार होता है।
- 17:22उसने सोचा, भय तो उसको होता है जिसके पास कुछ खोने हो।
- 17:32भय तो तुम्हें तब तक होगा जब तक तुम शरीर हो।
- 17:38तो खोने को तुम्हारे पास पैसा ना हो, सोना ना हो, सोने के इते ना
- 17:44हो, शरीर तो है जीसको ये पता चल गया कि शरीर में नहीं हूँ उसे
- 17:56बहके। कृष्ण ने सारी गीतों में कहा कहीं
- 18:08कहीं तू डर? कृष्ण ने यही कहा कि तू आज
- 18:17क्षत्रिय होकर शोक और कायरता की बातें क्यों कर रहा है?
- 18:24तू क्षत्रिय पुत्र है, आज मृत्यु की याद तुझे रणक्षेत्र में ही
- 18:29क्यों आई? ऐसा क्या है तेरे पास कोने को
- 18:33रिकन कृष्ण जानते हैं इसके पास कोने को शरीर।
- 18:38क्षत्रिय धर्म से हो गया है। ये जाति से हो गया है, लेकिन
- 18:44क्षत्रिय धर्म में उत्पन्न होने से कोई क्षत्र नहीं है।
- 18:49ब्राह्मण धर्म में पैदा होने से कोई ब्राह्मणत्व को पाता नहीं है
- 18:55और शुद्र धर्म में पैदा होने से। कोई हनुमान की तरह सेवक नहीं बन
- 18:59सकता पर वैश्य धर्म में पैदा होने से कोई चार साहबजादों के लिए सोने
- 19:13के सिक्के खड़े होकर। बिछा दिए गए।
- 19:17इतनी जमीन दे देंगे अगर साहेबजादे गुरु गोबिंद सिंह के इसका संस्कार
- 19:24करना है तो जब गुरु ने बहुत बार पूछा ग्राम कितनी दूर है?
- 19:41सूरज तो शिप्द्या है। रास्ते में प्यास लगी।
- 19:49शीर्ष से बोला इस झोले को संभल लेना, मैं थोड़ा पानी पी के आ
- 19:57जाऊ। शिष्य ने कहा देखें तो आज ये बदला
- 20:06बदरा सा मौसम क्या है? गुरु पानी पीने चला गया और शिष्य
- 20:13ने देखा तो उसमें सोने के एक थे। फिर से सारी बात समझ गया।
- 20:25उसने वो सोने की ईंट थोड़ी दूर फेंक दी और वहीं से एक ईंट उठाई
- 20:34और जोरे में डाल दी। उसने वचन के करीब करीब।
- 20:41गुरु जल्दी से पानी पी के आ गया, कहता लाओ जोला जोला दे दे, चल
- 20:52पड़े गंतव्य अँधेरा हो चला। अंधेरा का रात ही हो गई थी ग्रुप
- 21:04ट्रेनिंग का अरे देख पुत्र यहाँ कोई आसपास झोपड़ी दिख जाए, कहीं
- 21:16से आग की धरती दिख जाए, धुंआ उठता दिख जाए।
- 21:21वहीं आश्रय ले लेंगे। ग्राम तो काफी दूर लगता है।
- 21:26शीशने का गुरूजी, डरो मत वह सोने की ईंट तो मैं वहीं गिराया था।
- 21:39जब तुम्हें कुछ खोने का डर होता है तब तुम डरते हो।
- 21:48बात गाँधी सबकर और गॉड से गिरे नहीं तो राजनीति के लिए आप शब्दों
- 21:56का अर्थ का अनर्थ कर सकते हो। कर रहे हो।
- 22:06डर लगता है ऐसा वर्कर को मरने से दोष देते हो?
- 22:12गाँधी को ये कहाँ का असूल है? गाँधी को तो डर लगा नहीं।
- 22:26और गाँधी बेहिचकने देते हैं। कोई किसी की तलाशी नहीं लेनी।
- 22:33पटेल ने कहा तुम्हें मार देंगे बाबू हमारी इन्टेलिजेन्स सपोर्ट
- 22:39करती है तुम्हें मार देंगे। गाँधी करने के ठीक है, कोई बात
- 22:46नहीं स्वयधर्मम निर्धनम चिरेगा गाँधी का धर्म जैसे जैसे तुम बेधर
- 23:00जाओगे, तुम अहिंसक होते जाओगे। तुम आनंदित होते जाओगे, इतना आनंद
- 23:15जी से मिल गया हो। मैं दूसरे को मारेगा, क्यों?
- 23:22दूसरे को मारने की कल्पना भी क्यों करेगा?
- 23:32निजदानी जिसे मिल गया। जिसे रामधन कहते हैं, उसे कुछ खो
- 23:41जाने का डर नहीं होता, क्योंकि रामधन कभी खोया नहीं जा सकता।
- 23:48वह एक बार मिल गया तो मिल गया। अंतिम वेला में गाँधी को उसकी झलक
- 23:56मिल गई थी। पक्की पक्की तुमने जब पूछा पुत्र
- 24:05क्या मैं उलझन में हूँ? जो बुद्धि से सोचेगा, भुल्जन में
- 24:11आएगा और उलझन में आया हुआ व्यक्ति अर्थ का अनर्थ करेगा।
- 24:18जैसे तुम्हारे आज गीता का व्याख्यान करने वाले आचार्य कर
- 24:26रहे हैं। उसका पता तो उस सतल पर जाकर ही
- 24:33रखता है। पर क्या कैसा और उसके पास जाने के
- 24:40बाद व्यक्ति को डर नहीं रहता, साहस आ जाता है?
- 24:46क्यों? जिसे वो मैं की तरह समित था कल तक
- 24:52वो झूठा निकला मैं इल्यूश़न है वो, मैं मैं नहीं है भ्रम टूट गया
- 25:02एक मिथ थी, एक कल्पना थी टूट गई। वह यह जान जाएगा कि जो मरता है वह
- 25:11शरीर है, नहाने से अनिमानित शरीर है और शरीर का धर्म गुण धर्म मरना
- 25:20ही है। मरेगा देर अवेर यह जाएगा।
- 25:29मरने से तुम डरते हो, कायरता सीखा रहे हैं महात्मा गाँधी क्या वो
- 25:38खुद मरने से डरे भगवान कृष्ण ही रहते हैं?
- 25:44लक्षण देखो। गाँधी में एक भी लक्षण कोई उसे
- 25:52मार जाएगा। अगर मरने का डर हो तो सात
- 25:59श्रेणियों की सुरक्षा पंक्ति के भीतर चलेगा आदमी।
- 26:06एकांत में जब ये पता चल जाए कि इन्टेलिजेन्स कहती है कि ये मार
- 26:10देंगे और एक पहले अभ्यास हो भी चुका था, बच गए तो और पटेल कहते
- 26:18हैं तुम्हें मार देंगे। गाँधी कहते कोई बात नहीं, ये साहस
- 26:26है या करता है सोच के बताइए गाँधी जीवन में क्या कहते हैं ये छोड़ो
- 26:38सिखाते कहेंगे देखो। कायरता सिखाते हैं या साहस सिखाते
- 26:45हैं दो तिहाई पृथ्वी का मालिक जार जो पंचम उसके सामने जाकर गाँधी
- 26:56खड़े हो जाते हैं। जो आपके किसी सुर में इतनी हिम्मत
- 27:01नहीं होती और एक लंगोटी पहनें और पंचम पुश्ते हैं।
- 27:11जार पंचम मिस्टर गाँधी व्हेर आर युअर क्रॉस।
- 27:19पहली बात तो ऐसे व्यक्ति के सामने जाया ही नहीं जा सकता जो दो तिहाई
- 27:23प्रति का मालिक अगर चला जाए तो जवाब देने की हिम्मत नहीं होती।
- 27:28लेकिन उनमें जवाब देने की गजब की हिम्मत थी।
- 27:31यह तुम्हें साहस सिखाता है या कायर?
- 27:39गाँधी कहते हैं, आपने मेरे ही नहीं सारे भारतवासियों के वस्त्र
- 27:47छीन लिए हैं। धन छीन लिया है, आजादी छीन ली।
- 27:54ये कहने का साहस कायर जुटा पाएगा या साहस ही जुटा पाएगा।
- 28:04हरकतों से देखो, लक्षणों से देखो, कृष्ण की इस बात को याद रखो,
- 28:10जिसने माफी मांगी है। माफी मृत्यु के बहस से मांगी कायर
- 28:15रह है या गाँधी और इसी बहस के चलते 1906 में सावरकर और गाँधी
- 28:31में बहस हो जाती है। गति सशस्त्र क्रांति से भारत आजाद
- 28:36होगा, गाँधी का दिन नहीं क्योंकि शस्त्र अंग्रेजों के पास बहुत ही
- 28:43ज्यादा है। तुम तो सोच भी नहीं सकते, इतना
- 28:47सेना है, इतना शस्त्र है। ऐसी मूर्दता भरी बातें मत कर
- 28:54संवरकर उसे जीता जा सकता है तो सिर्फ धैर्य और अहिंसा जो कहा वो
- 29:07अडिग रहा, अंतिम बकत्ता के मर गया।
- 29:11मृ तो संवरकर भी गया। मृ तो गोट से भी गया लेकिन किए
- 29:20हुए कर्म तो शेष दुनिया को याद रहते हैं।
- 29:27कृष्ण कहते हैं, स्वयधर्म निधनम श्री।
- 29:34पर धर्म भयाबह अपने धर्म में मर जाना उचित दूसरे के धर्म में मरने
- 29:41से दूसरे के धर्म में मरना बड़ा भयावह होता है ये शब्द।
- 29:50राजनीतिक है, ये शब्द अध्यात्मिक है, बस तुम चूक जाते हो, गाँधी को
- 29:59राजनीतिक संध लेते हो, राजनीतिक वो है, राजनीतिक होता तो गद्दी
- 30:05लोग गद्दी छोड़ते नहीं। और गाँधी गद्दी पर बैठते है लक्षण
- 30:14देखो, फिर कहते गाँधी का सिखाके निर्धरता सिखाके लक्षण देखो
- 30:26लक्षण। गॉड से ने मार तो दिया, लेकिन
- 30:30अंतिम वेला में क्या हुआ? लास्ट उन्होंने ली की देखिए गाँधी
- 30:37जी अहिंसा के पुजारी थे। अगर तुम मुझे फांसी की सजा दे
- 30:43दोगे तो ये गाँधी जीके। अहिंसा का अपमान होगा।
- 30:53यह व्यक्ति कहाँ से कहाँ आ गया? गाँधी को मारने वाला गाँधी के?
- 31:07जिन ढंगों पे चल रहे हैं, गाँधी उनका उल्लेख करता है, जीवन
- 31:14प्रणाली के ऊपर बोलता है गाँधी जी अहिंसक है इसलिए अगर मुझे मार
- 31:18दोगे तो हिंसा हो जाएगी, लेकिन कहाँ चलती है न्याय के आगे?
- 31:27और गाँधी ने कहा कि मुझे बचा लो, कोई आओ मुझे बचा लो, मुझे
- 31:32हॉस्पिटल ले जाओ बस राम हेरा यह कायरता सीखाता है, गाँधी का मरना
- 31:43भी तो तुम्हें। अहिंसा सिखाते रहा मरो तो अहिंसा
- 31:49से मरो स्वधरन निधनम से पर धर्मं ब्याह वह।
- 32:04मरे तो वोट से मरे तो सबक लेकिन गाँधी गाँधी अपने धर्म में मरे
- 32:16सारी उम्र अहिंसा की बात की और अहिंसा में ही मरे ना हथियार
- 32:23उठाये। ना सुरक्षा ली।
- 32:27ये कायरता सीखाता है या साहस? विचार करना है इस बात को मेरी जगह
- 32:40पर तुम बैठोगे वहाँ जाकर कोई भी बाबा धर्मदास की समाधि पर।
- 32:51जिसके मन में हिंसा होगी वह सांप को मार देगा।
- 32:54मारते थे वहाँ के जिम्मेदार लोग, लेकिन मैं बैठा रहता देखता।
- 33:02मैंने शाक्षितों का अभ्यास यहीं से सीखा।
- 33:05मृत्यु के आगे ही शाक्षितों का अभ्यास होता है।
- 33:12सांप आया मृत्यु के रूप में डेकनोसेंट संस राजनीतिक व्यक्ति
- 33:23नहीं थे गाँधी गाँधी अध्यात्मिक व्यक्ति थे और राजनीतिक व्यक्ति
- 33:30की तुलना। आध्यात्मिक व्यक्ति से करना
- 33:34मूर्खता से ज्यादा और कुछ भी नहीं।
- 33:39उसने ये कहा था उसने ये कहा था आभा और मन्नू के साथ चलते हुए
- 33:45दिखाई दिए तो काम भाषण तुम्हारे भीतर के गाँधी के।
- 33:52तुम ये सोच ही नहीं सकते कि कोई बूढ़ा ठत्तर साल का एक जवान लड़की
- 33:58के साथ नगण हो के सो सकता है। यह बात समझने में क्या सुनने में
- 34:07ही तुम्हें सोचने में तुम्हें अश्लील लगेंगी?
- 34:13लेकिन एक जाति ऐसी है, आदिवासी नग्न ही रहते हैं।
- 34:19हम पहले नग्न ऋतू रहते थे जैसे जैसे डाँबते गए शरीर में कैसे
- 34:25तैसी काम बसना? जानवर नंगे ही रहते हैं और जितना
- 34:37मनुष्य कामुख है, उतना तो जानवर भी कामुख नहीं है तुम।
- 34:46पाश से युक्त पाश कहते उसे मनुष्य हर वक्त का मुख है।
- 34:56पशु तो थोड़ी देर के लिए वर्ष भर में एकाध बार का मुख होता है।
- 35:03मनुष्य हर क्षण हर फल का मुख है। और काम भाषण के लिए वह हत्य तक कर
- 35:08देता है मार देता है शब्दों का अनर्थ करके सत्यो को बदला नहीं जा
- 35:20सकता तुमने कहा, बेटे। इस समस्या को सुलझाए समस्या नहीं
- 35:30सुलझेगी क्योंकि जब राजनीति को धर्म से तोला जाएगा, जब राजनीति
- 35:38को आध्यात्मिकता से तोला जाएगा, वह तुल ही नहीं सकेंगे।
- 35:45राजनीति है कायरता? और आध्यात्मिकता है साहस, साहस
- 35:54को, आध्यात्मिकता को, बुद्धि से व्यख्यायित करने वाले लोग कर तो
- 36:00देंगे शब्द हैं उनके पास वोकबुलरी है, शब्द हैं, अर्थ हैं, कर
- 36:06देंगे। लेकिन वो अर्थ नहीं होगा, वो
- 36:09सार्थक नहीं होगा, वो नर्तक होगा, व्यर्थ होगा, वो सही अर्थ नहीं
- 36:15होगा। अभी कहते हैं अगर मुसलमानत में
- 36:24मार देते हैं। तो अपने धर्म में मरना श्रेष्कर
- 36:29खाये और कृष्ण भी यही बात कहते हैं स्वय धर्मम मणि जन्म पर धर्मं
- 36:39भयावाह फर्क लगा आपको कोई बात। जो गाँधी ही कहते हैं गाँधी के
- 36:50पास हर वक्त गीता होती थी और गीता पढ़ने के लिए होते थे।
- 36:56गीता उनके जीवन में उतर गई थी। स्वय धर्म में ही मरे सारी उम्र।
- 37:04अहिंसा, शादी और अहिंसा में एक हिसाब से देखा जाए तो मैं अगर कोई
- 37:14बोलता हूँ तो आपको नहीं कहता हूँ कि तुम मरने से न डरो, मेरे कहने
- 37:22से तुम निर्भीक नहीं हो जाओगे। मेरे कहने से तुम मृत्यु से डरना
- 37:27बांध नहीं हो जाओगे मृत्यु से डरना बंध तो तुम तभी होगे जब तुम
- 37:32उस स्तर पर चले गए जहाँ मृत्यु ही खत्म हो गयी तो गाँधी के लिए
- 37:37मृत्यु खत्म हो गयी। गौड़ से के लिए अभी मृत्यु है।
- 37:45साबरकर के लिए अभी मृत्यु है, वो अपने तल पर सोचेंगे और शुभ
- 37:50सोचेंगे। सही सोचा उन्होंने गाँधी अपने तल
- 37:54पर सोचेंगे और उसी तल से व्यक्ति सोच पाता है।
- 37:58जीस तल पर होता है। दोनों चीजों का मिलान करना, तुलना
- 38:04करना मूर्खता से ज्यादा और कुछ भी व्हाट्सएप पे क्या लिखा फेसबुक पे
- 38:11क्या लिखा तुम्हें क्या पढ़ाया गया?
- 38:15आचार्य क्या करते हैं इसका अर्थ इनसे हमने कुछ लेना नहीं।
- 38:20गाँधी ने ये शब्द बोले और क्यों बोले, मैंने समझा दिया आपको गाँधी
- 38:24के पास खोने को कुछ भी नहीं गाँधी को झलक मिल गई है उस अमर तत्व की
- 38:33जो कभी मर्तान गाँधी जी अपने बारे में बात करते हैं।
- 38:38स्वय धर्मन। निधनुम श्रेयस पर धर्मं ब्याह
- 38:53दूसरे के धर्म में मरोगे। उससे बुरा कुछ है।
- 38:57इसलिए अपने धर्म में मरना सीखो। तुमने अर्थ गलत कर लिया कि हिंदू
- 39:03धर्म में मरना सीखो मुसलमान धर्म में मरना सीखो, ये अर्थ नहीं है
- 39:07अध्यात्मिक तल पे ये अर्थ खत्म हो जाता है।
- 39:11राजनीति के तल पर इनकी अहमियत है, लेकिन अध्यात्म में इनकी कोई
- 39:15अहमियत नहीं है। माया बाज ना मिल दा सजन वे उस
- 39:26मालिक दा प्यार मोय बाज ना मिल दा।
- 39:35सजन वे धन्यवाद।