Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Mar 26 - "अज्ञात से अज्ञेय" की यात्रा जहाँ बुद्धि हार जाती है। Must Watch
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- 0:01मेरी बड़ी भाभी थी। मैं जब खाना खाता हूँ तो वह भी
- 0:11करीब करीब बाद में ही खाना खाता तो हालांकि मैं उससे छोटा था तो
- 0:20जब वो खाना खाती है तो पेट कर लेते।
- 0:30तो मैं कई बार मजाक करता हूँ तू भाभी पीठ कर लेती है क्या?
- 0:36रसमलाई खाती क्या हलवा पूड़ी बनाया तुने लेकिन मैं कुछ नहीं।
- 0:521 दिन मैंने कहा मन में आया कि देखूं क्या खाते हैं आराम से चुभ
- 0:58के दबे पांव जब देखा मैंने तो उसकी थाली में।
- 1:10सूखी हुई रोटियां थी और सब्जी है ही नहीं।
- 1:19वो रोटी को मुँह में डालती और पानी से गटक जाती।
- 1:30उस दिन मुझे समझ में आया कि पर्व उपकार क्या होता है?
- 1:40लांगरी का क्या महत्त्व होता है? लांक्री क्यों लंगर भरता के सबसे
- 1:47बाद में कहता है अगर बच जाए तो लेकिन उसके भाग्य का बच ही जाता
- 1:53है। कभी कभी मेरी भाभी के भाग्य का
- 1:59नहीं बचता था, वह शायद भूखी भी रह लेती होगी।
- 2:08राजा को ऐसा होना चाहिए और देखो तुम परमात्मा से टंकी नहीं मार
- 2:19सकता। सह से स्याणपमा लखभोवे का एक न
- 2:24चले ना ये सिर्फ शब्द नहीं रह सकते हैं।
- 2:31कहाँ जाओगे ठगी मारकर तुम्हारे मन के भ्रम है कि हम अपने बच्चों को
- 2:38दे जाएंगे। क्या तुम्हें पता है तुम्हारे
- 2:41बच्चे तुम्हारे पिछले जन्म के शत्रु नहीं?
- 2:47अक्सर ऐसा ही होता है जहाँ कुछ लेने देने का संबंध होता है उसी
- 2:53घर में जन्म लेते हैं बच्चे अन्यथा किसको पड़ी?
- 3:05राजा चाहे अनपढ़ हो, चाहे गवार हो चाहे पापला।
- 3:14सभी को गति पे नहीं बिठा देना चाहिए।
- 3:19अध्यात्म में तो चलेगा ही, क्योंकि अध्यात्म में अपने भीतर
- 3:26उतरना होता है। खोपड़ी का प्रशिक्षित होना जरूरी
- 3:30नहीं है। गुरू गुरू बावरे गुरू के रयो दास
- 3:38गुरू जे भेजे नरक में तो सर के रखियो दास अध्यात्म में चले गए
- 3:46लेकिन संसार में नहीं चलेगा। ध्यान रखना हम अज्ञात से अगले की
- 3:54यात्रा में हैं, अध्यात्म में चलेगा गुर गूंगा हो, गुर गांवरा
- 4:06हो कबीर चाहे अनपढ़ हो, कागज कलम छुओ नहीं।
- 4:16अपने भीतर जाने के लिए किसी प्रकार की बुद्धि की निष्नता होना
- 4:23जरूरी नहीं। वह निष्णा तो हो न हो, बिलकुल
- 4:31अनपढ़ भी चलेगा। लेकिन राजा के मामला में नहीं और
- 4:37फिर ऐसे राजा का क्या जो खुद को दिखा तो तो फकीर है करता।
- 4:44राज़ राज़ यानी हुक्म देता है। सही राज़ तो हुक्म मानने वाला
- 4:55होता है, राज़ करते हैं, फकीर कबीर करते हैं, नानक करते हैं,
- 5:03राज़ करती है मीरा। जिसके आंसू टपके टपके जाते हैं,
- 5:09आँखों से निरबहाती और जो विरह के इस आलम में रौंदते हुए कंठ से
- 5:20बोलते हैं जो मैं। ऐसा
- 5:55प्रीत नगरियों को। भीतर जाने के लिए बुद्धि का
- 6:08प्रशिक्षित होना बिल्कुल जरूरी नहीं है, लेकिन संसार में बुद्धि
- 6:16जितनी ज्यादा प्रशिक्षित हो जाए, उतना अच्छा अज्ञात से अज्ञेय की
- 6:24आधार है। तुम्हारे समझ में शायद न है
- 6:40वासनाएँ तुम्हारी कान्शस्नस की वृद्धि के लिए जरूरी है, यह
- 6:50असहिष्णु है। तुम्हारी कॉन्शस की वृत्ति करी
- 7:01वासनय विषय भावनाई विचार। यह जरूरी है तुम चौंकोगे तुम
- 7:16कहोगे हैं हम तो विषयावासनाओं को शत्रु समते हैं नहीं शत्रु नहीं,
- 7:27मैं इन्हें मित्र कहता हूँ। मित्र ही नहीं मैं इन्हें जरूरत
- 7:31कहता हूँ। मित्र तो कभी काम आये ना आये, कोई
- 7:39पता नहीं कॉन्शसनेस की वृद्धि करना प्रत्येक प्राणी का धर्म है।
- 7:52जब तुम सभी योनियों में से गुजर के मानस योनियों में आ जाते हो तो
- 7:56तुम्हारा एक ही ध्येय रह जाता है। तो इस बात पर शास्त्र कभी मत
- 8:02करना, सुनना तुम्हारा ध्येय क्या है?
- 8:06अपनी कॉन्शसनेस को 100% पर ले जाना, ये तुम्हारा दिया।
- 8:16मानव जाम में जो चेतना आती है, उसका एक ही ध्येय रह जाता है 100%
- 8:26कॉन्शसनेस। ना वकील बनना, ना इंजीनियर बनना,
- 8:36ना डॉक्टर बनना, ना सुप्रीमो बनना।
- 8:40उसका कोई लक्षण नहीं होता और उसमें सहायक होती हैं।
- 8:47वासनाएँ कैसे? अष्टा वक्रने शब्द का है वहाँ से
- 8:59उठायेंगे? हम अष्टा वक्र कहते हैं, जनक से
- 9:07हे राजन भोग से दुख मिलता है। और दुःख ही वो संपदा है जो
- 9:22तुम्हें कान्शस्नस की ऊंचाईयों तक ले जाती है।
- 9:29वह मिलता है भूख से ये बातें तुम्हें विपरीत लगेंगी।
- 9:36विरोधी लगेंगी। लेकिन विरोध ही नहीं है।
- 9:41एक स्टेप से दूसरा स्टेप तुम्हे विरोधी तो लगेगा, लेकिन विरोधी
- 9:46नहीं। अलगाव है तुम थोड़ा सा और ऊंचे हो
- 9:51गए। तुम्हारे दिमाग की आशंका है कि हम
- 9:56भी पहली पूड़ी को पकड़ा ही तो जब उसे छोड़ना ये जरूरी था, इट वास्
- 10:05ए एसेंशियलिटी पहले स्टेप को पकड़ना आवश्यक था और छोड़ना भी
- 10:15आवश्यक था। इसी तरह दूसरा तीसरा चौथा सभी
- 10:20पड़ावों को पकड़ना भी आवश्यक था और छोड़ना भी आवश्यक था।
- 10:28ध्यान रखना में अज्ञे की बात कर रहा हूँ।
- 10:37अष्टावक्र ने कहा, भोगन भोग से मिलेगा दुख, ऐसे ही तख्तो ताज से
- 10:51सजे हुए भूत। हर सुख सुविधा से संपन्न 10
- 10:59उदासियों से संपन्न ग्रीनरी में पले हुए सुख सुविधाओं में पले हुए
- 11:07बुद्ध आंधी रात को चोरों की तरह घर को नहीं छोड़ते थे।
- 11:13कुछ कारण तो रहा। बस कार्य में ही इतना भोग लिया,
- 11:26इतना भोग लिया। उसके पास अकेली यशोधरा नहीं थी।
- 11:35अब वो तो कभी इस बात का जिक्र नहीं करेंगे।
- 11:40लेकिन जो निस्सभक्ष अन्वेषण करता है खोज करता है, वह सब बातों को
- 11:51खोल कर रख देगा। वो तुम्हारे अच्छे होने, अच्छे
- 11:57लगने या बुरे लगने का फिक्र नहीं करेगा।
- 12:04उसने अकेले यशोधरा को नहीं भोग। उसने कपिल वस्तु की और आसपास की
- 12:12सर्वोत्तम सुंदरियों को भोग लिया। और उसका इंतजाम खुद उसके पिता पर
- 12:21थे कि संसार बिंगों में हो जाए और हैरानी की बात है।
- 12:40जो सोचा था शुद्धोदन ने उसका अनुभव गलत निकला।
- 12:55शुद्धोदन ने सोचा। रंगीनियों में खोया खोया वे है
- 13:05रंगीनियों में ही घुस जाएगा इतना लिप्त हो जाएगा रंगीनियों को
- 13:11छोड़ना दो भर मालूम पड़ेगा? अपनी जगह पर शुद्धोधन ठीक हुए
- 13:28लेकिन अष्टावक्र के तल पर शुद्धोधन आकर फेल हो जाते हैं।
- 13:36आज तुम्हें एक और मंत्र दे देता हूँ तुम तैयार करना मत तुम भोगों
- 13:51को छोड़ना मत। असलियत बात ये है कि भोकों को
- 13:58उसकी प्रचुरता में भोग लेना या उसकी इम्तहा में भोग लेना कभी कभी
- 14:06नहीं बल्कि सदा है भोकों को उसकी इम्तहा में भोग लेना।
- 14:15मुक्ति का कारण हो जाता है। सदा यह एक सूत्र तुम्हें दिया,
- 14:25इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ राजा इसलिए बनते हैं तुम्हें बेहतर की
- 14:30बात समझाती मैंने। राजा के जाने अनजाने किसी कोने
- 14:37में यह बात छुपी पड़ी है कि देखने तो उसमें है क्या जैसे वैज्ञानिक
- 14:44के मन में होती है कांट छांट के देखे खरगोश के भीतर क्या है?
- 14:51मेढक के भीतर कोकरोस के भीतर साँप के भीतर आदमी के भीतर क्या तो यह
- 15:02ईशणा साइंटिस्ट को बहुत बड़ा वैज्ञानिक बना देती है, डॉक्टर
- 15:09बना देती है। अष्टावकर ने कहा भोग तुम्हें
- 15:21पढ़ाने वाली रोक हल्के से बोल देते हैं, भोग से दुख मिलेगा बस
- 15:30नहीं मैं भोग के ऊपर। यहाँ पर भोग के ऊपर सारा ज़ोर
- 15:36दूंगा भोग भोगों की इंतहा फिर तुमसे जो एक बार छुड़वा देगी
- 15:46भोगों फिर तुम कभी भोग की तरफ। छोटी आँखों से भी नहीं देखोगे।
- 15:58यह एक एंटायर फिलॉसफी तुम्हें बताई।
- 16:05इसे कहते हैं कि तुम्हारा नाक सुकड़ जाएगा अरे रोज़ रोज़ आलू का
- 16:12भुन। रोज़ भिंडी नहीं चलेगा वही मूंग
- 16:18की राज़, तुम्हारा मन कुछ नया मांगता है रोज़ सुबह शाम दोनों
- 16:31वक्त नहीं चलेगा। मन मन प्रति बल बदलता है।
- 16:44पति प्रति क्षण बदलता है। पलक, पलक, मन और मन लोभी मन लालची
- 17:00मन, चंचल मन चो मन के मते न चलिये पलक पलक मन और सेकंड ठहर।
- 17:13मन के मते से चलो, मैं कबीर के विरुद्ध नहीं जा रहा और इतने
- 17:23इंतेहा से चलो। तो परिणाम क्या आएगा?
- 17:28तुम हैरान हो जाओगे मुझे गन्ने की मिठास बहुत अच्छी लगती थी तो मेरे
- 17:43इससे अच्छा जान मुझे कहने लगे तुम ऐसा कर धूप में बैठ जाएगा।
- 17:48सामने ही सब्जी मंडी से। सदालाल बाबूराम इनकी दुकान थे
- 17:55वहाँ से गन्ने खरीद लेते हैं दो लेते हैं छित में उनको फोरियो में
- 18:01काट लेते हैं धूप में बैठ के खूब चुभता इतना चुभता ये गन्ने तो अभी
- 18:09पड़े हैं। और 1 दिन ऐसा आया कि मैंने सारे
- 18:14गन्नों को चला के मारा ठीक उसके बाद मैंने जिंदगी में कभी गन्ना
- 18:23नहीं खाया। क्या हो?
- 18:31ये तो आज मैं सिर्फ दूध के ऊपर बैठा हूँ, मेरा मन रसगुल्लों के
- 18:36लिए तड़पाता नहीं गुलाब जामुन खाने के लिए ललचाता नहीं, यह है
- 18:44एक तकनीक बरती गई कुदरत के द्वारा।
- 18:49मेरे चाचा ने कहा, परसों दिवाली है और तुमने मुख्य काम करना है।
- 19:01लाओ कागज लेके आओ, मैं एक लिफाफा लिया था वो खुर्शीना भरके।
- 19:08गाजर पाक, रसगुल्ला गुलाब जामुन रास्ते तकरीब आज आज सिर पक्का और
- 19:14कभी कभी हमने कौनसा तोरा? ज्यादा भी हो सकता है आखिर में
- 19:20मुझे वो लिफाफा चोरी छुपे फेंकना पड़ता है नालियों में।
- 19:27ऐसा ही घी मैंने आपको बताया। हमारे घर में घी इतना आम था
- 19:36टोपियां भरा होता, मेरी माता रोटी उतारती और टोपी के भीतर डबो देती।
- 19:43वह जलेबी की तरह घी को चूस जाता। फिर कैसे खाओ चार किलो घी?
- 19:51सबने खाना ही खाना, जो खायेगा उसे शाबाश मिलेगा नहीं खायेगा उसको
- 19:59डांट पड़ेगी ऐसे हमपले। हम मूवीज़ देखकर नहीं पड़े, हम
- 20:10विदेशों की सैर करके अच्छी सिंट्रिस्ट देकर नहीं पड़े, हम
- 20:16पड़े हैं ऑथेंटिसिटी से प्रकृति और प्रकृति की ऑथेंटिसिटी क्या है
- 20:22भोगो, जितना हो सके भोग? और यही राजा करते है क्यों?
- 20:29राजा बनना चाहते हैं लोग देखे तो उसकी प्रकृति में है क्या?
- 20:36ज़रा छः बार सूट बदल के देख ले। अरे नहीं।
- 20:47ज़रा देख ले 10 बार साड़ी बदल के आगे के लिए रास्ता ठीक है, लेकिन
- 20:58कमतर व्यक्तियों के लिए प्रत्येक व्यक्ति राजा नहीं हो पायेगा।
- 21:04प्रत्येक व्यक्ति राजा बोलने के लिए इतना युद्ध नहीं बोल पाएगा या
- 21:09प्रकृति के लिए राजा बनने के लिए प्रत्येक व्यक्ति इतना योग्य भी
- 21:15नहीं हो पाएगा और योग्य व्यक्ति को तुम वोट देते भी कहाँ हो?
- 21:22अंबेडकर को तुम हरा देते हो। जिसके पास 36 डिग्री थी।
- 21:30योग्य व्यक्ति को तुम वोट देते कहाँ हो?
- 21:37धीरे धीरे समझे ना बात कॉल। राजा बनने की तमन्ना पैदा क्यों
- 21:44होती है? सब कुछ रोकने के कारण?
- 21:52और अगर राजा बनकर भी सारे देशों की सैर न की?
- 21:59अगर राजा बनकर भी सरकारी तेल पर उड़ानें न भरे, अगर राजा बनकर भी
- 22:07एपिस्टन कांड में छोटी छोटी बच्चियों से रेब न किया, उनके
- 22:15शरीर के टुकड़े करके उबालकर न खाया।
- 22:19बिरियानी मटन तो क्या खाक राजा बने नहीं, हम शराब नहीं पीते,
- 22:28जिससे खून पीने की एक आदत हो, वह शराब क्यों पिएगा?
- 22:39यह एक फार्मूला है, लेकिन यह कमतर लोगों के लिए है।
- 22:47146,00,00,000 लोगों में राजा कौन है?
- 22:53एक और वह दूसरे को उठने ही नहीं देता।
- 22:58क्यों सारा मैं भूलू? यह व्यक्ति आज नहीं कल मुक्त हो
- 23:03जाएगा। क्यों?
- 23:07इसने जाने अनजानी प्रकृति के उस नियम को अपना लिया जो नियम मुक्त
- 23:13करा देती है व्यक्ति को। यह जानता नहीं हो जाए, चाहे यह
- 23:19जानता, लेकिन यह व्यक्ति 1 दिन मुक्त हो जाएगा, लेकिन क्या होगा
- 23:31उन छोटे बच्चों का? जी अज्ञे इसीलिए है मैं बोलना तो
- 23:36नहीं चाहता था, लेकिन ग्रंथ को पूरा करना ही अच्छा होता है।
- 23:45तुम अगर ठीक समझो तो इस अध्याय को लुप्त रख लेना क्योंकि कौन देखता
- 23:53है? आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
- 23:59कौन जीता है तेरी युद्ध के सर होने तक मुझको तुम पढ़ोगे, सुनोगे
- 24:06नहीं सुनोगे? अभी ही लोग नहीं सुनते अभी ही लोग
- 24:10छोटी छोटी बातों पर कैदित। जब इता सा नहीं मिला, रोटी खाने
- 24:15को नहीं मिली तो हम बाबा तुम्हें क्यों मानिए भगवान मेरी आँखों में
- 24:23आंसू आने के सवा कुछ नहीं रहता, मैं इनको कोई जवाब नहीं दे सकता।
- 24:33क्योंकि ये है बेचारे पता ही है कि रोटी की व्यवस्था करना राजा का
- 24:39काम होता है। लांगरी का काम होता है।
- 24:43सबको खिला के फिर खुद खाये लेकिन जब खुद ही खाने पर पड़ गए।
- 24:51लांदरी तो फिर बिचारे पांडाल में बैठे हुए भूखे लोग क्या करें?
- 24:58वो थालियों को खड़काते रहे। कोरोना काल में लोग मरते रहे और
- 25:08राजेंद्र एक लोग। वोट मांगते रहे कोरोनाकाल में
- 25:13गंगा प्रदुषित हो जाएगी, शवों से और राजनीतिक लोग वोट मांग रहे
- 25:20होंगे, मैनेजमेंट कर रहे होंगे। जीस मैनेजमेंट के लिए उन्हें चुना
- 25:25गया था, वो नहीं करेंगे। यही तो राजा होता है।
- 25:34राजा का मतलब मनमुखी हो इसलिए राजा से बड़ा दुखी कोई हो नहीं
- 25:43सकता। और दुख एक की मियाँ है परमात्मा
- 25:49तक पहुंची है। यह एसिडिक खतरनाक है इसलिए मैं
- 25:56बोलने से गुरेज कर रहा था, लेकिन कोई बात नहीं।
- 26:04मेरे साहित्य विशेषज्ञ कंट्रोलर इस चॅप्टर को चाहे तो शुआ दें
- 26:11लेकिन यह चॅप्टर है अपना पहला, क्योंकि कोई कोई तो विरला होता
- 26:19है, कोई कोई तो टाटा होता है। कोई कोई तो सिंघानिया, अंबानी,
- 26:27अडानी होता ही कोई कोई तो बिल गेट्स में होता है।
- 26:42संसार को अति में भोग लेना कष्टकारी संसार को अति में भोग
- 26:53लेना दुखद है और दुख परमात्मा तक पहुंचने की सीढ़ी।
- 27:06तुम्हें शायद अभी समझना है, कोई बात नहीं मेरी इस वीडियो को।
- 27:20सहेज भी आते हैं। डाउनलोड करके अलग से रख लेना कोई
- 27:30पता नहीं हम खुद ही इसको ढा दे खतरनाक बात है।
- 27:44राजा होने की अभिलाषा व्यक्ति में अगर पैदा हो गए और अगर उसने भोग
- 27:51लिया तो वह दुखी हो जाएगा। तुम सैलवटों को देखना ट्रंप के
- 28:04चेहरे बंदरों से। भी बुरे होते हैं, सुरों से भी
- 28:09बुरे होते हैं। क्यों छोटी छोटी बच्चियों को काट
- 28:14के खा जा लहू पी लेना, जवान रहने के लिए लहू पी लेना के हमारे
- 28:21यंत्र ज्यादा देर तक टिके रहेंगे, टिकाऊ रहेंगे।
- 28:28ज्यादा देर तक हम जवानी का लुत्फ उठा पाएंगे।
- 28:33बस यही जीवन है क्या? नहीं इस जीवन में से निकलता है
- 28:48विष? भोग तुम्हें विश्व की तरफ ले जाता
- 28:53है और विश्व से आता है दुःख कुनिन इस बेटर इन टेस्ट वह दुख बेटर
- 29:06होता है। और तुम कुनीन को छोड़ दोगे?
- 29:15यह आर्टिफीसियल नहीं ऑटोमैटिक है, ऑटोमैटिक त्याग है जी यह तुम्हारा
- 29:25ऑटोमैटिक। यह तुम्हारा आर्टिफीसियल जैन
- 29:28मुनिया वाला त्याग नहीं है कि कोई भी एक हरी सब्जी छोड़ दो क्या हो
- 29:34जाएगा उससे लोग कहते हैं छोड़ दी मैंने जैन मुनिया से कहा मैं
- 29:44बताऊँ इन्होंने क्या छोड़ा? कहते बताओ मैंने कहा इनसे इनसे
- 29:49पूछ लो इन्होंने कद्दू छोड़ा कद्दू अरे कद्दू भी कोई खाने वाली
- 29:56चीज़ अब ये देखो किम जोंगन उसका मुँह कद्दू भर का है।
- 30:08यह 1 दिन पहुँच जाएगा। इसने 2000 स्त्रियाँ अपने आस पास
- 30:16भोंकने के लिए रखी हैं। मैं जीस थीम को समझाने की चेष्टा
- 30:25कर रहा हूँ उस थीम को समझने की चेष्टा।
- 30:322000 स्त्रियों ऐसा नहीं है कि पुरुष ही ऐसा करता है जो
- 30:38स्त्रियाँ रजिया सुल्तान ने कितने ही पुरुष अपने आसपास रखे विथ
- 30:50किलिओ पैट्रॉ। ने कितने ही पुरुष अपने आसपास रखे
- 30:55हैं, उसे यह प्राकृतिक संभावना है।
- 31:03इससे न प्लस न माइनस, न मेल, न फीमेल बचने से।
- 31:13भूख से मिलेगा दुख यह प्राकृतिक तुम्हारी भीतर की पर ना, लेकिन
- 31:20प्रकृति के ढंग से चलोगे प्रकृति के साथ।
- 31:26एंटर मींगड हो के चलोगे चिपकाहट से चलोगे तो दुख पाओगे।
- 31:34बड़ी उलट बात लग गई, इसलिए ये अध्याय मैंने अगे कहा?
- 31:46क्लिंग हो के चलोगे तो दुख भाग लेकिन तुम चाहते हो सुख और मैं
- 31:57तुम्हें कहता हूँ, ये भी एक रास्ता है।
- 31:59मैंने इसलिए आखिर में बताया। बिलकुल आखिर में बताया गया।
- 32:05रस्ता अगे का? पुरुष भोग लेना चाहता है जन्मो
- 32:13जन्मो का जो प्यासा होता है, इसलिए अगर कोई ज्यादा कमी है,
- 32:21ज्यादा लोभी है। ज्यादा क्रोधी है, ज्यादा अहूकारी
- 32:27है तो उसको नफरत की दृष्टि से मत देखना हैं, तो सब मेरे आदम को
- 32:38खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं। जो ये यंत्र बोल रहा है ये खुदा
- 32:48लेकिन खुदा के लेकिन खुदा के नूर से आदमजुदा लेकिन कोई तत्व है
- 32:57जिसके कारण यह यंत्र चलता है। वह खुदा है आदम को खुदा मत कहो
- 33:06आदम खुदा नहीं यह जो यंत्र तुम्हें बोलता हुआ नजर आता है यह
- 33:11खुदा नहीं इसको खुदा मत कहो लेकिन तुम तो इसी को मानोगे?
- 33:17तुम तो कहोगे बाबा जी पधार रहे। हजूर जी पधार रहे हैं, इनको चैन
- 33:22स्पर्श को इनके सामने लेट जाओ, यह बड़ी से बड़ी उठता है।
- 33:33ऐसा अज्ञानी व्यक्ति जिसने अपने भितरे की छलांग भी ना लगाई हो,
- 33:39क्या अध्यात्मिक गुरु बनने के योग्य है?
- 33:45ऐसा मूर्ख व्यक्ति लेकिन हाँ सस्ता रास्ता है, आसान रास्ता है,
- 33:58बाबा हो जाओ, कुछ भी एंटी शंट बोलते रहो, धन जुड़ जाएगा।
- 34:05मुझे कल ही एक कमेंट आया बाबा तुमने अच्छा काम किया, एक को कह
- 34:13दो के बढ़ जाएगा, एक को कह दो के घट जाएगा शेयर मार्केट और
- 34:17तुम्हारे लोग पांव पूछने लग जाएंगे।
- 34:19मैंने कहा वाह शाबाश खैर। मैंने उससे क्षमा मांगी और मैं कर
- 34:27भी क्या सकता हूँ पर वचन देने के लिए बा मुश्किल अपनी स्वभाव से
- 34:35बाहर आ पाता हूँ, मेरे पास शास्त्रार्थ करने को वक्त कहाँ है
- 34:42तो मैंने चुपके से अंगूठा लगा दिया।
- 34:47मैंने कहा मेरी वास्तविकता बताने के लिए तुम्हारा धन्यवाद और खुदा
- 34:55हाफिज और मैंने अंगूठा रखा था। अब तुम कयामत का इंतजार करो,
- 35:24कयामत। खुदा करे की कयामत
- 35:47इंतजार करेंगे मेरे से शास्त्रार्थ मत किया करो, ज़रा
- 35:59थोड़ा सोच लिया करो मैं बेचारा। किसी तरह इस संरक्षण को संभाले
- 36:06बैठा तुम अकेले नहीं हो और बहुत से गुरु हैं।
- 36:16देखो तो यूट्यूब को फ्लॉप है तुम्हें किसने कहा मेरे पास आने
- 36:23को? और मैं सैकड़ों बार यह बात बोल
- 36:26चुका हूँ, लेकिन तुम फिर फिर बार बार वहीं आ जाती हो, मैं
- 36:38शास्त्रार्थ करने के लिए समय कहाँ से लेके आऊं तुम मुझे एक बात का
- 36:45जवाब दो। हीरो पायो गांठ कठा मैं उस रस को
- 36:53क्यों या तुम्हारी शास्त्रार्थ करूँ?
- 36:56तुम सोच लो 1000 साल से सोच लो बाद में जवाब दे देना मैं उस अपने
- 37:04बेहतर के रस को क्यों? यह तुम्हारी इन बातों का जवाब
- 37:11तुम्हारी तो सकाईते बहुत हैं। कल किसी ने एक सवाल पूछ लिया।
- 37:19सवाल खतरनाक है, लेकिन इसको दिल पर मत ले।
- 37:28सवाल खतरनाक है और यही बोलने के योग्य है?
- 37:36मुझे कहते कबीर और नानक करीब करीब समकालीन थे।
- 37:40मैंने कहा। कबीर और नानक दोनों करीब करीब
- 37:47समकालीन थे, लेकिन दोनों में से श्रेष्ठ कौन?
- 37:52मैंने कहा देखो संतो के बीच में कंपैरिजन नहीं करना चाहिए।
- 38:03असल में संत की व्याख्या ही ये है कि जो परिधि से केंद्र तक पहुँच
- 38:08गया, जो दुखों से उस सुख के सागर में पहुँच गया जहाँ का आनंद कभी
- 38:16चुकता नहीं, कभी मुक्ता नहीं। बस यह है संत की व्याख्या लेकिन
- 38:22वो तो पीछे पड़ गए वो कहते नहीं बाबा, हम तो आपको आपसे इसका जवाब
- 38:29लेकर रहेंगे। आप हर बात का जवाब देने में सक्षम
- 38:33हो। मैंने कहा देखो।
- 38:37आप लड़ाओ मत भाई, ये तुम गलत कर रहे हो, मैं तुम्हें जवाब नहीं
- 38:44दूंगा तो बाबा क्या तुम नहीं जानते?
- 38:49मैंने कहा जानता तो हूँ, लेकिन जवाब नहीं दूंगा क्योंकि जवाब
- 38:54आपका यही है। कि संत वही होता है जो सफीर से
- 39:01केंद्र में पहुँच जाए, जो दुखों के सागर से यह संसार चक्र दुखों
- 39:08का सागर है केंद्र तक पहुँच। सुखों के सागर तक पहुंचा है सुख
- 39:17सागर। तुम तो पड़ते हो, पढ़ना थोड़ी
- 39:20होता है। सुख सागर में गोता लगाना होता है।
- 39:25इन मूर्खों ने तुम्हें सुख सागर पढ़ना सीखा दिया और तुम सुख सागर
- 39:31को गड्डा मारकर बैठ गए। अब तुम पूछते हो बाबा यह जो
- 39:37समुद्र मंथन हुआ था उसमें जो रस्सी बनाई गई थी वो कहाँ है?
- 39:42मैं ज़रा चूम लूँ। उस रस्सी को जा के यहीं से पागलपन
- 39:47पैदा होता है। एक ने पूछ लिया कि शेरा वाली कहाँ
- 39:53से गुजरती है? मैंने कहा क्या करना?
- 39:55तुने शेरा वाली कहता जहाँ से शेर गुजरता है, मैं वहाँ की माटी अपने
- 40:02माथे से लगा रहा हूँ, ऐसी ऐसी मूर्खताएं जन्म लेती हैं तुम्हारी
- 40:07कल्पनाओं के बाद, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ।
- 40:11ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो, इसमें अब कुछ भी नजर आता नहीं।
- 40:32कोई सागर दिल को बहला था नहीं अरे तुमने शेर वाली से क्या करा क्या
- 40:46तो मैं माटी उठाऊंगा। माथे से लगा होता मेरी माँ है
- 40:53मेरी इष्ट है इनका मूर्ख रामकृष्णा की तरह तलवार उठा और इस
- 41:03शेरों वाली का गाटा काट दी। तो वह तो थर्राया हैं बाबा तुम
- 41:13बोले मैंने कहा हाँ ये तुम्हारी मान्यता हैं बिलकुल वही मान्यताएँ
- 41:21जो मोदी जी कहते हैं। 47 में विकसित पार हो जाएगा
- 41:25बिलकुल वही मान्यताएँ जो मोदी जी कहते थे।
- 41:29कि मैं 15,00,000 दूंगा, मैं 2,00,00,000 रोज़ कर दूंगा, मैं
- 41:33महंगाई को कम कर दूंगा और रुपया मनमोहन सिंह तो बेचारा कुछ भी
- 41:39नहीं, मैं तो बराबर ले आऊंगा कभी पूरा हुआ।
- 41:51बस ऐसी ही बातें तुम्हारे सुख सागर में लिखी हुई इससे अतिरिक्त
- 41:58और कुछ भी नहीं। अब भगत तो भगत होते हैं।
- 42:05भागवत कहते हैं, बताइए बाबा आप सब कुछ बता सकते हो तो आपको जवाब
- 42:13देने वाले भी ऐसे ही मिल जाएंगे। क्या राधे राधे करने से पर
- 42:19महत्त्व मिल जाता है? क्या पांच नाम जपने से परमात्मा
- 42:23मिल जाता है? बोरो बाबा मैं फिर एक शब्द कहना
- 42:28ही पड़ता है मुझे, तुम भी सुन लो दिल के बहलाने को वाले।
- 42:42दिल बहल जाए, थोड़ी देर पहले तुम बहस करोगे, मेरा बाबा बड़ा तेरा
- 42:49बाबा बड़ा इसकी मुछे कुंडियों वाली तुम्हारी मुछे गिरी हुई, यह
- 42:55तो पहले ही आर बहाने बैठा हुआ है। देखो हमारा बाबा जीत गया, मैंने
- 43:03कहा हाँ भाई हम तो हारे हुए खिलाड़ी हैं, मैं तो 28 अक्तूबरों
- 43:10ने 185 को हार किया था, तुम मुझे क्या हरा हो गया जो है ही नहीं।
- 43:19वो मेरे सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
- 43:23वो मेरे सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
- 43:27उन्हें मालूम ही नहीं एक सब्र ही तो होता है।
- 43:31मुर्दे के पास मेरे पास सब्र के अलावा और है।
- 43:42मेरा अपना यहाँ कुछ भी नहीं मेरा मैं भी तो नहीं और मेरा भी तो
- 43:49यहाँ कुछ तुम आरती में तो कह देते हो तेरा तुझको अर्पण क्या लागे
- 43:58मेरा। लेकिन मानते नहीं हो कभी कभी घर
- 44:02में जाके लॉकर खोल के गहने गड्ढे बाहर फेंक दिए नहीं मन के बहलाने
- 44:08को गालिब ये ख्याल अच्छा है। नहीं नहीं, मैं नहीं बताऊँगा बस
- 44:24तुम्हें इतना कह देता हूँ के कबीर के ढंग से नानक का ढंग थोड़ा
- 44:34आसान, बस इतना। कबीर इतहसा तो मांग लेते हैं साईं
- 44:41इतना दीजिए जामे कुट में क्षमा है, मैं भी भूखा न साधु न भूखा जा
- 44:53यह है सद्वृत्ति। लेकिन नानक कहते हैं सद व्रतियों
- 44:58को भी पार करता हूँ अष्टावक्र कहते हैं व्रती तुम होई नहीं, सभी
- 45:07व्रतियों से पार हो जाओ। नानक कहते हैं तेरा प्राण मीठा
- 45:12रख। तू चाहे भूखा रख तू चाहे मनों,
- 45:23टनों के हिसाब से अम्बार दे दे, तेरा पाना बूढ़ा लाख है अबे समझ
- 45:30लेना तुम मैं कुछ नहीं बोलेंगे। बस मार्ग थोड़ा सुगम है।
- 45:37नानक का मार्ग थोड़ा दुर्गम है। कबीर का पहुंचते दोनों ही वहीं
- 45:42है। लेकिन कंपैरिजन मत करना, कंपैरिजन
- 45:51करने से तुम्हारी व्यवस्थाएँ टूटेगी।
- 45:56हाँ, इतना कंपैरिजन जरूर कर देता है कि रस्ता नानक का बड़ा शुभ है।
- 46:05रस्ता कबीर का थोड़ा मुश्किल है शब्द को सुरती में समा लेना।
- 46:12थोड़ा परिश्रम लगेगा छोड़ देने में कोई प्रयास नहीं तुम देखना
- 46:26बच्चा पैदा होता है, मुट्ठी बंद करके आता है पता ही नहीं मुट्ठी
- 46:29में क्या मरते वक्त उसकी मुट्ठियां खुल जाती है।
- 46:34देख लो कुछ नहीं लेके चलो। वह छोड़ता नहीं मुठ्ठियां कुर्से
- 46:43ही खुद से ही खुल जाती है प्रयास बड़ा आसान।
- 46:55कबीर ने भी दोनों चीजों का इस्तेमाल किया।
- 46:58असल में कबीर बहुआयामी कबीर भी कहते हैं सहज समाधी भलो भली रे
- 47:06सन्तो सहज समाधी भली। जो सहज से लग जाए उसकी रिस्क कोई
- 47:11नहीं। लेकिन फिर उसे पता है कि शायद तुम
- 47:17हो न पाओगे, इसलिए तुम्हें तरीका बताते हैं, लेकिन बाबा कहते नहीं
- 47:26ज़ोर न जुगती छूटे संसार किसी जुगती में कोई ज़ोर नहीं, यह तो
- 47:32तुम्हें छोड़ना ही पड़ेगा। तुम्हें मरना ही पड़ेगा और जो मर
- 47:41जाता है उसकी मुठियां खुल जाती हैं क्योंकि मुठियां बंद करने के
- 47:47लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। शक्ति तुम्हारे पास है नहीं, तुम
- 47:51मुर्दा हो गए। मुर्दे की तरह हो जाओ बहुत संतो
- 48:00नहीं दे सकता मरो मरो है जोगी मरो मरो मरण है मीठा।
- 48:10ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मरगोरकटीक था मरणों से तुम्हारी सारी शक्ति
- 48:22तुम कछुए की तरह की जगह पर ले आओगे इंद्रियों के साथ तादाद में
- 48:26करोगे नहीं। तुम्हारी मुठिया खुल जाएगी, तुम
- 48:35देखना मर्दे के मुठिया खली होती है।
- 48:42ओके पकड़ने को कुछ रहा न? मैं बहुत लू बहुत दूर चला।
- 49:03तेरी दुनिया मैं बहुत दू बहुत दू।
- 49:23बहुत दूर चला कितनी दूर बताये कभी कोई तुम्हें तुमसे तुम्हारा
- 49:34प्यारा बीछड़ा पता है वो कहाँ कहाँ चला गया यह अज्ञेय?
- 49:48दुख प्रचुर मात्रा में इतने दुखी हो जाओ और एक हिसाब से देखा जाए
- 49:54तो ये राजनीतिज्ञ ठीक हुए, लेकिन इन्हें पता नहीं।
- 50:02ये सोये हुए जिंदा है हैं तो जिंदा, लेकिन सोये ये भोग रहे
- 50:14हैं, लेकिन इन्हें पता नहीं के भोगने से दुख मिलता है और दुख
- 50:19उसमें ही ट्रांसफर करेगा। लेकिन एक बात सही है।
- 50:28अति सर्वत्र वर्जित। वैसे यह मूर्खों का शब्द है।
- 50:38संसार में बच के रहना, अति मत करना संसार में अति मत करना लेकिन
- 50:49जो अति करता है संसार में वह ठहर भी जाता है बुद्ध ने भोगने में
- 50:58अति की सारे राजा आपको। तीर्थंकर मिलेंगे।
- 51:06जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए। सभी राजा थे।
- 51:11क्यों भोग लिया अति में और जितना अति में भोगोगे उतना अति में दुख
- 51:20भी। और अति में दुख तुम पाना नहीं
- 51:27चाहते। तुम्हारी चाहतों से तुम्हारे
- 51:32परिणाम टकराएंगे और तुम टूट टूट जाओगे।
- 51:38बस यही चाहता है भ्रमण। इसलिए उसने संसार का सृजन किया कि
- 51:47व्यक्ति संसार को भोंककर अति में भोग ले और उसके बंधन जोड़ जाएं।
- 51:56संसार की लालिमा। संसार का खिंचाव उसे अपनी तरफ
- 52:04अट्रैक्ट न करता है। संसार से वह बचे क्योंकि संसार
- 52:10दुख देता है इसलिए जिसे संसार अच्छा लगता है वह भोग मैं रोकता
- 52:17नहीं। क्योंकि ज्यादा भोगना भी तुम्हें
- 52:20मुक्त कर देगा और बिल्कुल ना भोगना भी तुम्हें मुक्त कर देगा।
- 52:31अब दूसरा शब्द 2 मिनट में बोलेंगे क्योंकि मुख्य प्रवचन अग्नि कथ
- 52:43बिल्कुल न भोगना यानी दुष्टता बन जाना वह भोगता नहीं।
- 52:57साक्षी हो जाना वह भोगता नहीं, वह देखेगा या भोंगेगा?
- 53:07ये तुम्हें कभी ख्याल नहीं आया। साक्षी साक्षी इसीलिए रह पाता है
- 53:13कि वह भोगता कभी बनता ही नहीं। जब उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा।
- 53:27अब तमन्ना तुम्हारी तुम बर्बाद होना चाहते हो के आबाद तुम अति
- 53:35करना चाहते हो, भोगों की या भोगों को भोगते हुए देखना चाहते हो।
- 53:46ये दो ही रास्ते हैं या तो भोगों को भोगते हुए साक्षी हो जाओ तो
- 53:58तुम्हारा ये मिथ्या भ्रम टूट जाएगा कि भोगता कौन है?
- 54:04तुम पाओगे भौंकता है ये यंत्र, स्वात लेती जीवा संगीत का लुत्फ
- 54:12उठाते कान विचारों का लुत्फ कल्पना का लुत्फ उठाता है
- 54:20मस्तिष्क। कल्पनाओं का संसार बुनता है हृदय
- 54:28सपर्शिका आनंद लेती है तो जो लेकिन तुम इन्हें भोगते हुए देख
- 54:34लो, दूसरा फॉर्मूला बता रहा हूँ दो ही रस्ते।
- 54:43दोनों रस्तों में से तुम किसी तरफ चल पड़ लेकिन अति से चलना बस ये
- 54:52आखिरी शब्द मेरे याद रख लो। ऐथेर इन्सर्ट यूरसेल्फ
- 54:57कंप्लीट्ली। या तो अपने आप को उसमें समुद्र
- 55:05में बूंद की तरह लुप्त कर दो, मर्ज कर दो खाक हो जाओ या फिर उस
- 55:15भोगते हुए। खंडहर को देखते रहो, साक्षी बनकर
- 55:25बिना हिले डुले साक्षी तो तुम रहो की ही सता है।
- 55:32अगर अति में भोग लोगे तो दुख होगा।
- 55:38यही अष्टाव करने का भोगो भोगने से दुख मिलेगा।
- 55:47दुख मिलने से बैराग युत्पन्न होगा बैराग से उठेगी मूमक्षा।
- 55:55मुफ्त की तमन्ना जब कोई तुम्हें बांध लेता है तो तुम्हारी तमन्ना
- 56:01होती है कैसे मैं आजाद हो जाऊं? और फिर जब तुम्हारे भीतर तमन्ना
- 56:07उठी कि कैसे आजाद हो जाऊं तो थ्री के भी खोज लिए जाएंगे।
- 56:11नेस सिटी इस दी मदर ऑफ इन्वेंशन और फिर तुम तरीका खोज ही लोगे।
- 56:19दो ही तरीके या तो अपनी पूरी शक्ति को भोगने में लगा दो।
- 56:30इसमें एक चीज़ तुम्हें कामन मिलेंगे।
- 56:34इसको ठीक से समझ लो। अब मैं बिल्कुल लास्ट पर आ रहा
- 56:39हूँ। या तो अपनी पूरी शक्ति भोगने में
- 56:42लगा तो पूरी शक्ति जब भोगने में लग गई तो शेष जो बचा वह साक्षी
- 56:49बचा। और अगर पूरी शक्ति तुमने देखने
- 56:59में लगा दी ज़रा भी न चिपके ज़रा भी न इंटेंगर हुए ज़रा भी न लिप्त
- 57:06हुए निर्लिप्त बने रहे। तो फिर तुम्हें साफ नजर आएगा यह
- 57:13जो भोग रहा है, यह मैं नहीं यह कुछ जुदा है मुझसे आखिर में
- 57:20रास्ता फिर एक ही हो जाता है। वह एक रास्ता क्या है जो भी करो।
- 57:30कंप्लीट्ली शक्ति को एनवॉल्व करके करो, तुम पुण्य करो तो पूरी शक्ति
- 57:43से करो, खुद भी रुक जाओ और तुम पाप करो तो भी पूरी शक्ति से करो,
- 57:52क्योंकि पूरी शक्ति से पाप करोगे तो दुख पैदा।
- 57:57और दुःख तुम्हें मूर्त देगा मुँहमुक्षा की तरफ वैराग्य के
- 58:01जरिए फिर जब मुँहमुक्षा जन्म लेगी तो मुक्ति की तमन्ना उठेगा,
- 58:12मुक्ति की तमन्ना उठेगी। तो रस्ते खोज लिए जाएंगे।
- 58:17अभी तो तुम ना खुदा ही मिला ना वसाली सनम, ना इधर के रहे, ना उधर
- 58:24के रहे, ये क्यों है? क्योंकि तुम कुनकुने कुनकुने से
- 58:27भौंकते हो। कुनकने कुनकने से मरते हो और
- 58:33कुनकने कुनकने से जीते हो तुम कहीं नहीं पहुंचोगे या तो जो उनकी
- 58:46तमन्ना है बर्बाद पूछा। परमात्मा तुम्हें एक ही रास्ता
- 58:51कहता है कि जो भी कर कंप्लीट्ली इन्सर्ट हो जाए उसमें तो पुण्य कर
- 58:58या पाप कर इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मेरा कुछ घटेगा
- 59:03नहीं और मेरा कुछ बढ़ेगा नहीं। लेकिन तुम जब कंप्लीट्ली इन्वॉल्व
- 59:11कर दोगे, अपनी सारी शक्ति को तो शक्ति चुक जाएगी और शक्ति सदा ही
- 59:16बाहर से आती है। इस खंडहर में जब ये खंडहर
- 59:21शक्तिहीन हो जाता है तो कहाँ बोल पाता है?
- 59:27कहाँ भोग पाता है? तुम्हारा सारा कमाया हुआ धन
- 59:33तुम्हारे आसपास होगा और तुम्हारी लाश उसके भीतर पड़ी होगी।
- 59:42तुम्हारे सारे कष्ट, क्लेश तुम्हारे आसपास होंगे।
- 59:47जिन्होंने तुम्हारी ज़िन्दगी का जीना हराम कर दिया, लेकिन तुम फिर
- 59:51भी आनंद चैन से कवर में सोए हुए हो गए एक ही फॉर्मूला दो तरकीबों
- 1:00:08से बोल दिया मैंने। यह दूसरा शब्द था अज्ञेय।
- 1:00:16जो भी तुम कुछ करो, पूर्णता से करो, क्योंकि पूर्णता ही तुम्हें
- 1:00:25मुक्त करेगी उपनिषद का ये शब्द। पूर्णस्य पूर्ण महादायें पूर्ण
- 1:00:32मेवा विशेष्यते पूर्णता से ही पूर्णता में जाया जा सकता है कर्म
- 1:00:38करो पूर्णता से फिर पूर्णता से बर्बाद हो जाओ कोई बात नहीं।
- 1:00:49पूर्ण से पूर्ण मादाएँ पूर्ण में से पूर्ण को निकालो, सारी शक्ति
- 1:00:53को निकालो, पूर्ण में बाप शिश्तय या पूरे के पूरे बच जाओ साक्षी
- 1:01:02होकर आखिर में तुम उस पूर्ण को ही पा जाओगे।
- 1:01:07पूर्ण मेवा वशिष्ठ से पूर्ण ही बच जाता है।
- 1:01:13शब्द कह रहे हैं अक्षरों में बोले नहीं जाते, लेकिन उस खुदा का फजल
- 1:01:22है क्या? मैं बोल पाया हैलो।
- 1:01:26तुम समझ पाए या नहीं समझ पाए कोशिश करना पलट पलट के इसको
- 1:01:36डाउंलोड कर पलट पलट के सुन बस दोनों रस्ते तुम्हारे समझ में आ
- 1:01:43जाएंगे रास्ता तो एक ही। जो भी करो, पूर्णता से करो,
- 1:01:51सम्पूर्णता से करो, कंप्लीट्ली करो, टोटली करो, मरना हो तो
- 1:01:58पूर्णता से मरो, जीना हो तो पूर्णता से जीओ।
- 1:02:09कुंकने कुंकने मत जीयो और कुंकने कुंकने मत मरो तुम कुंकने कुंकने
- 1:02:18ही मरते हो और कुंकने कुंकने ही जीते हो।
- 1:02:27उमरेदराज मांगकर लाया था चन्द्रोच चार रोज़ उमरेदराज मांगकर लाए थे
- 1:02:36चार रोज़ दो आरजू में कट गए दो इंतजार में बाकी क्या बचा कुछ
- 1:02:42नहीं बचा। दो लम्हे कट गए, आरजू में यह मिल
- 1:02:50जाए वह मिल जाए वो मिल जाए और दो आरजू में और दो इंतजार में अब
- 1:02:59मिला किताब में मिला अब मिला किताब में मिला।
- 1:03:03चारों के चारों तुम गवा देते हो, तुम कंप्लीट होते ही नहीं कोई और
- 1:03:11वह जिसकी मैं बात कर रहा हूँ उसमें दरार नहीं है।
- 1:03:16वह कंप्लीट है, वह पूर्ण है पूर्ण से।
- 1:03:23पूर्णमदह पूर्णमिदम पूर्णमद अच्छे थे, वह पूर्ण है उसमें दरार नहीं
- 1:03:29है, उस पूर्ण तक पहुंचने के लिए पूर्णता से ही करना होगा कर्म फिर
- 1:03:40कर्म चाहे तुम। कुछ भी कर यह एक अजूबा सा
- 1:03:47सिद्धांत लगेगा, लेकिन बड़ा सुगम है तुम्हें आज तक बतलाया तो बहुत
- 1:03:56शास्त्रों ने लेकिन तुम समझ नहीं पाए क्योंकि यह है समझ में आता ही
- 1:04:01नहीं। वॉटेवर यू डू डू इट कंप्लीटली डू
- 1:04:16इट परफेक्टली वॉटेवर यू डू डू इट विथ फुल डेडिकेशन।
- 1:04:28कुछ भी करो, मैं नहीं कहता पाप करो, मैं नहीं कहता पुण्य करो,
- 1:04:36मैं कहता हूँ जो भी करना चाहते हो करो लेकिन करो पूर्णता से।
- 1:04:46उस पूर्ण तक पहुंचने का एक ही मार्ग है व्हाटएवर यू डू डू इट
- 1:04:56परफेक्ट विथ फुल डेडिकेशन उस पूर्ण तक पहुंचने का।
- 1:05:07यह फार्मूला है कि पूर्णता से करो, समझा दी नहीं आएगी, फिर फिर
- 1:05:16से समझना फिर फिर से सुनना समझ आ जाएगी।
- 1:05:19थोड़ा सा इशारा मिलेगा, तुम तो बोलते हो?
- 1:05:25तो तुम्हारा ध्यान 1000 तरफ होता है।
- 1:05:30कहाँ है पूर्णता कहाँ है फुल डेडिकेशन नहीं है तुम्हारा यू अरे
- 1:05:41नॉट कंप्लीट्ली डूइंग। एक शब्द के साथ विश्राम होगा माना
- 1:05:56तो कर्म में फिर जीब फिर मुखमा। माला तू कर मैं फिर जीव फिर मुखमा
- 1:06:10मनीराम चाहु दिस फिर।