Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Jan 26 - वर्तमान में कैसे ठहरें? अहंकार और परमात्मा के बीच का संघर्ष | कबीर के दोहों का गहरा अर्थ
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- 0:15पुष्पंजलि अजमेर से बीती तही बरसा दे।
- 0:28आगे की सुध ले जो बन आवे, सहज में सोई होत न दे।
- 0:42कबीर का व्रत प्यारा शब्द है। लेकिन व्याख्या करो ने इसकी हत्या
- 0:52कर दी। पूजा है पुष्पांजलि अजमेर से इसके
- 1:05गहरे रहस्यत्मक अर्थ को प्रकट करने का कष्ट करें।
- 1:15तो चलिए हम गहरे में उतरते हैं, बीती ताही बसारते हैं आगे के
- 1:29सुधल्ले। साधारणतया तुम अर्थ करते हो कि जो
- 1:39बीत गया उसको भूल जाए आगे के सुदले यहाँ तुम चूक जाते हो।
- 1:57प्रायः तुम समझ लेते हो कि बीती ता ही बिसार दे, अतीत को भूल जाओ,
- 2:09स्मृतियों को दफन कर दो, और फ्यूचर पे निगाह कर लो।
- 2:16फ्यूचर को बनाने की युक्ति सीखो फ्यूचर को संवारने की कोशिश करो,
- 2:26यही गलती हो गई मेरे अर्थों को समझने से पहले।
- 2:39एक काम अवश्य करना होता है तुम्हें वो काम है के ठहर जाना,
- 2:49दौड़ते दौड़ते कुछ भी करते करते अगर तुम मेरी बुजों को सुनोगे तो
- 2:57चुप जाओ। अर्थ जो मैंने समझाने की चेष्टा
- 3:05की वो आपके अंत में नहीं उतरेगा, कुछ और ही उतर जाएगा।
- 3:14बीती ताहे विशार्थ है, ये ठीक है। अतीत को भूल जाओ, जो चला गया उसे
- 3:22भूल जाओ, आगे की सुध लें अब यहाँ ठहर जाओ अतीत के बाद क्या आता है?
- 3:44थोड़ी देर ठहर जाओ रुको सोचो अतीत के बाद क्या आता है कुछ मेरी बात
- 4:00पे हम सुनेंगे। कुछ मेरी बात का मखौल उड़ाएंगे,
- 4:10कुछ गौर से देखेंगे, कहीं थोड़ा फर्क तो नहीं पड़ गया?
- 4:16नहीं ऐसा कुछ नहीं। तुम कहोगे बिल्कुल सिंपल सा स्वाद
- 4:23है, अतीत के बाद भी उससे आता है तो चुप गए, तुम्हे यहीं चुप गया।
- 4:34कबीर क्या कहना चाहते हैं? यह व्याख्या करो पर निर्भर नहीं
- 4:40करता। संत इसकी व्याख्या करे तो बात
- 4:46बनती है अंतः गडबड हो जाएगा। अतीत के बाद भविष्य नहीं आता।
- 4:58ठहरिए, अतीत के बाद सदाता है वर्त्तमान फ्यूचर के बाद पास्ट के
- 5:12बाद फ्यूचर से पहले। एक क्षण आता है जिसे हम कहते हैं
- 5:23प्रेसेंट अतीत और भविष्य दोनों के बीच में एक क्षण आता है छोटा सा
- 5:33लंबा वह क्षण होता है प्रेसेंट। वर्तमान बस वह थोड़ा सा लहमा आपके
- 5:47जीवन को बदल भी सकता है, बिगाड़ भी सकता है सुधार भी सकता है।
- 6:02उस लम्हे को वर्तमान के लम्हे को अक्सर तुम चूक जाते हो, जैसी कारण
- 6:12है की आज तुम बैठे मेरे प्रवचन सुन रहे हो, क्योंकि तुमने।
- 6:21वर्तमान को चूक गया अतीत और भविष्य के बीच में एक क्षण आता
- 6:32है, जो बड़ा बहुमूल्य है वह क्षण है वर्तमान प्रेसेंट।
- 6:42जो प्रेसेंट को चूका वह सब चूक गया।
- 6:53तुम अतीत की समृतियों में भी खोये रहते हो, भविष्य की कल्पनाओं में
- 6:58भी खोये रहते हो, अतीत की यादें तुम्हें सता रही होती हैं।
- 7:04भविष्य की योजनाओं में तुम उलझे रहते हो, तुम सुलझे कहा हो, अतीत
- 7:12की स्मृतियों में तुम्हें उलझा लिया, भविष्य की योजनाओं ने
- 7:17तुम्हें उलझा लिया तो तुम ठहरे कहा हो।
- 7:26एक छोटा सा पल आएगा दोनों के बीच में वो पल है वर्तमान का जो
- 7:38वर्तमान में ठहरने की कला से किया।
- 7:44वह प्रबुद्ध हो गया। वो जो वर्तमान में श्रद्धा के लिए
- 7:53होकर रह गया, वह परमात्मा हो गया। इस परिभाषा को फिर से सुन लो।
- 8:02जो वर्तमान में ठहरना सीख गया वो प्रबुद्ध हो गया जो वर्तमान में
- 8:12स्थिति ही हो गया। सतिप्रज्ञ हो जा ही अर्जुन।
- 8:20प्रज्ञा क्या है? वर्तमान प्रज्ञा है प्रज्ञा इज़
- 8:25प्रेसेंट सती प्रज्ञ हो जा हे पार्थ वर्तमान में हो जा।
- 8:40अगर तुम ठहर गए पल के लिए तो तुम प्रबुद्ध हो जाओगे अगर तुम बने
- 8:46रहे सदा के लिए तो तुम भगवान हो जाओगे, ये परिभाषा थोड़ी सी कठिन
- 8:54पड़ेगी, लेकिन इसे बार बार समझेना तो समझ में आ जाएगा।
- 9:00एक पल के लिए ठहरे वर्तमान में तो तुम प्रबुद्ध हो गए, बुद्ध हो गए
- 9:10बुद्ध वो जो वर्तमान में ठहर जाते हैं।
- 9:14और देखो जो वर्तमान में ठहर गया वो कभी वर्तमान में चूक भी जाएगा
- 9:22तो बुद्ध से गलती होगी। आनंद और बुद्ध दोनों जा रहे हैं
- 9:37बुद्ध ने अपने नाक पे से। हाथ मरा आनंद ने कहा बनते ये आपने
- 9:48क्या किया कुछ है तो है नहीं कितना मक्खी को हटा।
- 9:54रहा हूँ। आनंद कहते हैं, लेकिन मक्खी तो है
- 10:00नहीं। बुध कहते थी लेकिन मैंने बेहोशी
- 10:08के क्षण में उगा दी होश नहीं था। और मैंने उड़ा दी क्रिया सारी
- 10:22वैसी ही हुई, मक्खी बैठी मैंने हाथ से ऐसे किया, मक्खी उड़ गई
- 10:27लेकिन आई वास् नॉट अवेर ऐट दैट टाइम क्रियाएं सारी वहीं हुई।
- 10:37मक्खी भी बैठी, हाथ भी उठा, लेकिन यंत्र वत उठा सजगता में नहीं उठा
- 10:49तो फिर अब क्या कर रहे हो? गंत अब मैं सजगता से हाथ उठा रहा
- 10:54हूँ, मैं जानता हूँ। कि मैंने हाथ उठाया।
- 11:00इसी सजगता को अवेयरनेस कहते हैं। बुद्ध जो एक पल के लिए ठहरा वो
- 11:08कभी चूके, कभी तो बुद्ध चुकेंगे कृष्ण नहीं चुकेंगे।
- 11:18कृष्ण कभी नहीं कहेंगे, गलती हो गई है, नहीं कहेंगे क्यों?
- 11:25क्योंकि वो सदा वर्तमान में हो गए हैं, ठहरे नहीं हैं, वो वर्तमान
- 11:32ही हो गए हैं। वो वर्तमान में ठहर नहीं गए हैं।
- 11:38वर्तमान में ठहर गए बुद्ध और वर्तमान हो गए कृष्ण, वर्तमान हो
- 11:46गए महावीर। इन दो मुखौटों को मैं सदा ही पैर
- 11:55लड़ लेता हूँ एक ही धरातल पर खड़े हैं समतल लेकिन विरोधी छोर हैं
- 12:09बुद्ध बा होश सारे काम करते हैं लेकिन प्रयास।
- 12:15शहीद करते कृष्ण प्रयासरहित अवेयरनेस में होते ही हैं सदा एक
- 12:30अव्वल के लिए भी कभी कृष्ण अपने वर्तमान से छूट गए।
- 12:37एक पल के लिए महावीर कभी वर्तमान से झुकते हैं बुध चुकते हैं, कभी
- 12:44कभी बुध में और कृष्ण में यही फर्क है थोड़ा सा।
- 12:55बीती का ही वि सार्थक आगे के सूत्र भविष्य को भविष्य को और
- 13:09अतीत को दोनों को भूल जाए पास्ट को और फ्यूचर को।
- 13:17दोनों को भूल जाओ। दोनों के बीच में एक सुद्र साक्षण
- 13:29आएगा वर्तमान कहते हैं उसे प्रेसेंट उसमें हो जा।
- 13:41जो उसमें हो गया, वह परमात्मा हो गया।
- 13:48बीती ता ही विसारते पाष्ठ के बाद क्या आता है?
- 13:54तुम कहोगे फ्यूचर नहीं। पास्ट के बाद आता है वर्तमान और
- 14:02वर्तमान के बाद आता है फ्यूचर, लेकिन एक बात तो मैं समझा दूँ
- 14:07थोड़े से ठहरे ही रहना ना वर्तमान आता है ना।
- 14:15वर्तमान खोता है ना भविष्य आता है ना पाष्ठ गुजरता है वर्तमान सदा
- 14:28ही है प्रेसेंट इस प्रेसेंट एवरी मोमेंट।
- 14:38ये सब थोड़ा फिर समझ लो। थोड़ा गहरा है प्रेसेंट इस
- 14:42प्रेसेंट इन एवेरी मोमेंट हर क्षण में वर्तमान मौजूद है।
- 14:52फिर सुन लो। हर क्षण में वर्तमान मौजूद है।
- 14:58प्रेसेंट इस प्रेसेंट इन आवर मोमेंट।
- 15:03तो फिर भविष्य और अतीत कहाँ है, ये तुम्हारी स्मृतियों में है।
- 15:15तुम्हारा अतीत तुम्हारी समृद्धि के रिकॉर्डर में है, तुम्हारा
- 15:22भविष्य तुम्हारी योजनाओं के रिकॉर्डर में है, लेकिन दोनों
- 15:31रिकॉर्डर में है। जो गुजर गया, वह भी तुम्हारी
- 15:39स्मृति में फीड हो गया। जो योजनाएं तुम बना रहे हो कल की,
- 15:46वह भी तुम्हारी कल्पनाओं में योजनाओं में फीड है।
- 15:51तुमने क्या सपने देखे? लेकिन जो गुजर गया उसके साथ कोई
- 15:58छेड़छाड़ नहीं हो सकती और जो फ्यूचर है उसके साथ भी कोई
- 16:04छेड़छाड़ नहीं होती। बड़े मज़े की बात है।
- 16:13तुम्हारे व्याख्या कार्य में व्याख्या करेंगे कि फ्यूचर के
- 16:18भीतर छेड़छाड़ हो सकती है, लेकिन संत ये नहीं कहता कभी भी संत क्या
- 16:26कहता है, संत कहता है। अतीत तो बदला ही नहीं जा सकता, जो
- 16:34तीर कमान से निकल गया उसको तो बदलो के कैसे गया वक्त कभी वापस
- 16:41से लेकिन तुम्हारे प्रबुद्ध पुरुष कहेंगे वर्तमान से।
- 16:51अच्छे कर्म करके भविष्य को बदला जा सकता है, लेकिन संत ये बात
- 16:55नहीं है। बड़ी दुविधा पड़ेगी तुम्हें अरे
- 17:02बाबा बदला जा सकता है कहेंगे तुम्हारे।
- 17:13दार्शनिक संत कभी यह बात नहीं कहेगा।
- 17:22संत कहेगा नथिंग कैन बी ट्रांसफर्ड।
- 17:28नथ्थिंग कैन बी चेंज्ड संत कहेगा होनी तो हो कर रहे अनहोनी ना होए
- 17:46अब ये बात वैज्ञानिक मन के भीतर उतरती है।
- 17:57इसलिए भारत कभी वैज्ञानिक मन नहीं हो पाया और पश्चिम?
- 18:09कभी स्वयं में स्थित नहीं हो सका, प्रज्ञा में स्थित नहीं हो सका।
- 18:19संत कहेगा भविष्य को भी बदला नहीं जा सकता।
- 18:26अतीत को तो बदला ही नहीं जा सकता, इस पर दोनों ही मत मानेंगे।
- 18:34ठीक है पास्ट कैनट बी चेस्ड ऐट ऑल जो तीर कमान से छूट गया।
- 18:47उसका कुछ नहीं हो सकता, लेकिन भविष्य बदला जा सकता है।
- 18:51अच्छे कर्म करके बस यही फर्क पड़ जाता है संत की वाणी में और
- 19:03दार्शनिक की वाणी में यही फर्क है।
- 19:07मेरी बातों के ऊपर आचार्य तो होंगे और उनका कुपित होना
- 19:14स्वाभाविक भी है, क्योंकि वो बुद्धि से काम लेते हैं।
- 19:21कहते हैं हौ इट इस पॉसिबल तो फिर उपनिश्चित बेकार हो जाते हैं।
- 19:31वो ही आचार्य इस बात से नाखुश होंगे कहेंगे नहीं इनकार करेंगे
- 19:43और वो ही उपनिश्चितों का विवेचना करेंगे।
- 19:52यह जो बात मैंने कही, जो संत ने बोली वह बुद्धि की पकड़ में नहीं
- 19:58आती, संत कहेगा ना तो अतीत बदला जा सकता और ना भविष्य बदला जा
- 20:12सकता। ये बात बड़ी मुश्किल पड़ती है।
- 20:19यही फर्क है दार्शनिक में और संत में।
- 20:24तो आइए हम कबीर से उतर लेते हैं इस बात का आगे का शब्द।
- 20:33तुम्हारे मनुष्य के पटल को खोल देगा तो कबीर इसी दोहे में सब कुछ
- 20:40बतला देते है, लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि हमें व्याख्याकार
- 20:47सही नहीं मिलता। व्याख्याकार सही कौन होगा?
- 20:52जो उसी तल पे पहुँच गया। जीस पे कृष्ण पहुँच गए, कबीर
- 20:59पहुँच गए, महावीर पहुँच गए आगे का शब्द सुनिए बीती तही बिसार दे आगे
- 21:09की सुधर्ले है। जो बन आवे सहज में जो बन आवे, सहज
- 21:20में सोई होत न दे अब इसका अर्थ सुनिए क्या होता है?
- 21:32कबीर कहते ना तो तुम भविष्य को बदल सकते हो, ना तुम अतीत को बदल
- 21:38सकते हो क्योंकि करने वाला सहजता से किया चला जाता है करने वाला
- 21:46वह। जो गन आवे सहज में, जो सहजता से
- 21:52होता है वॉटेवर हैपन जो गन आवे सहज में जो सहजता में होता है,
- 22:05अपने आप होता है। तब होता है जब तुम पूर्णता से
- 22:11अपने आप को उसके चरणों में छोड़ देते हो तब होता है क्या होता है
- 22:18कि सहज में होने लग जाता है। जो बन आ वे सहज में एक एकल लफ्ज़।
- 22:28हीरे से मड़ा हुआ है ये अंत से निकले हुए शब्द हैं स्पष्ट वह
- 22:35जाने जा सकते हैं कि संत के हृदय से आई हुई वाणी है, जो बन आवे सहज
- 22:43में। सोई हो तो न दे, वो ही तो होने
- 22:47नहीं देता। मेरे इस शब्द को बिलकुल ठहर के
- 22:57सुन अभी अगर आप किसी भाग दौड़ में हो।
- 23:02अभी अगर आप किसी चाहत में हो, किसी ड्यूटी पर हो, किसी काम में
- 23:09व्यस्त हो तो अभी मेरी ये बात मत सुन फुर्सत में बिल्कुल फुर्सत के
- 23:16लम्हों में, इसलिए मैं सदैव तुम्हें कहता हूँ।
- 23:20यह तो सुबह उठकर जब तुम फ्रेश होते हो, पूरे ब्रह्मकाल का
- 23:26ब्रह्म मुहूर्त का यही महत्त्व था।
- 23:29सारी रात तुमने एनर्जी गेन की कॉन्शसनेस पूरी अपने।
- 23:39ऊंचाइयों पर है, एनर्जी फुल है तुम्हारे शरीर के अंदर या तू तब
- 23:46बैठ जाना या बिल्कुल सारे काम काज निपटा के जब तुम अपने बिस्तरों
- 23:52में जाओ तो ठहर जाना, थोड़ी देर के लिए फिर इस शब्द को सुनना फिर
- 23:57मेरी वीडियो सुना करो। रात को सोने से पहले तुम्हें कुछ
- 24:05नहीं करना होता, तब आराम से बैठ जाओ, अब तुम बिल्कुल।
- 24:18नॉन बिज़नेस में हो अब सोना है और सोने का मतलब कुछ नहीं करना होता
- 24:25है। उस क्षण में तुम बैठ जाओ और मेरी
- 24:32वीडियो क्वेश्चन। तब ये शब्द आपके भीतर उतर जाएगा
- 24:38क्या जो बन आ गए सहज में जो अपने आप होता है, सोई हो तो ना दे, वह
- 24:49तू होने नहीं देता, क्यों तुम बीज़ी हो जाते हो?
- 24:59फिर इसका अर्थ क्या हुआ? तुम सारा कुछ छोड़ कर उसके ऊपर जो
- 25:07होता है उसको होने दे। हाँ ये बात बिल्कुल ठीक है अब सही
- 25:13अर्थ। जो बन आवे, सहज में सोई होत न दे,
- 25:22वो तो तू होने ही नहीं देता, बीच में अडंगा डाल लेता है मैंने
- 25:26फ्यूचर को बनाना है बना तुम में इतने कितने को?
- 25:33इस व्रत के आगे तुम्हारी अहमियत ही क्या है?
- 25:41ज़रा विराट को नगन आँखों से देखो दूरबीन से देखो जेम्स वेब
- 25:48टेलीस्कोप से देखो। तुम्हें इसका और छोर नजर आता है,
- 25:58इससे थोड़ी सी और सुपीरियर बना लो, फिर देखना तुम्हें इसका कोई
- 26:05और छोर नजर आता है। नहीं नजर आता।
- 26:10हम जब शरीर से बाहर जाते हैं तो संकल्प लेना होता है।
- 26:17थोड़ा शांति से सुनें, अपनी मान्यताओं को बीच में मत आने दिया
- 26:22करो, मैं कुछ बोलता हूँ। आपकी मान्यताएँ आड़े आ जाती है।
- 26:28ये तो होता ही नहीं कुछ। यही तुम्हारे भीतर उतरने नहीं
- 26:35देता बात को फिर मैं क्यों बोल रहा हूँ।
- 26:43अगर ये होता नहीं तो फिर मैं क्यों बोल रहा हूँ?
- 26:47फिर आप क्यों सुनने आए हो? मुझे नहीं आना चाहिए था।
- 26:57कोई चार पैसे कमा लेते हैं, कोई काम धाम निपटा लेते हैं।
- 27:10जो बन आवे, सहज में सोई होत न दे तुम्हारे दुख का मूल कारण ही है
- 27:22तुम फ्यूचर को बदल सकते हैं हम। यह अहंकार वाले हो, क्षमा करना
- 27:33मैंने शब्द प्रयोग कर लिया अहंकार और यह बिल्कुल ठीक है, तुम कहते
- 27:40हो करके दिखाएं। यहीं पर महात्मा विदा हो जाती है
- 27:47और कहते हैं ठीक तू कर ले। तू ही कर ले।
- 27:54जिसने सारी सर्जनों को सृजन किया, वो सृजन हार कण कण में बैठा हुआ
- 28:03वो कहते ठीक फिर तू ही करता है। और वो चेतन है ध्यान रखना कोई जड़
- 28:11पत्थर नहीं है। जब तुम कहते हो, हम करके दिखाएंगे
- 28:17तो ईश्वर कह देता ठीक तुम करके दिखाओ, वह तुम्हारे विरुद्ध नहीं
- 28:24होता। बस वह खुद का करना छोड़ देता है।
- 28:32वह तुम्हें तुम्हारे हाल पर छोड़ देता है कि ठीक तुम करो, कोई
- 28:39गुस्सा नहीं होता, गुस्सा किस्से होगा, उसी के ही तो सारे रुनाए
- 28:44हुए हैं। वो तुम्हें सत्य में ले जाना
- 28:48चाहता है और सत्य में तुम्हारा अहंकार तुम्हें जाने नहीं देता।
- 28:55वो कहता है हम करके दिखाएंगे तो फिर करके दिखाओ फिर ऐसा करो ना।
- 29:03तुम रेत का एक कण ही बना के दिखा दो बाकी तू छोड़ो, मंगल पे पहुँच
- 29:10के दिखाओगे सूरज पे पहुँच के दिखाओगे तुम?
- 29:15थोड़ा सक्कानी बना के दिखाओगे मिट्टी का?
- 29:19हवा का पानी का एक एटम बना के दिखा दो इलेक्ट्रान प्रोटोन
- 29:23न्यूटन बीती ताहि बिसार दे, आगे भी सुध ले पास्ट के बाद आता है
- 29:41प्रेसेंट फ्यूचर नहीं आता। और सत्य में अगर मैं कहूं तो ना
- 29:48तो पास्ट है, ना फ्यूचर है, आक भी जाने ना तू।
- 30:08पीछे भी जाने ना तू जो भी है बस यही।
- 30:23एक फल है, जो भी है बस यही एक फल है, आगे भी क्या होगा आगे पता
- 30:42नहीं। जाने ना तू, पीछे भी स्मृतियों
- 30:50में क्या बीत गया, पिछले जन्म में क्या हो गया पता नहीं तुझे क्या
- 30:56भोग भोग का इकट्ठा किया? था भी के नहीं, ये पता नहीं।
- 31:03पीछे भी जाने ना तो जो भी है बस यही एक फल है।
- 31:18बस यही क्षण है जो भी है। और तुम देखना ज़रा घोष से जब भी
- 31:25आएगा प्रेसेंट आएगा, यह बात अलग के प्रेसेंट पास्त्र में बदल
- 31:32जाएगा और यह बात अलग के प्रेसेंट फ्यूचर में बदल जाएगा, लेकिन आएगा
- 31:39जब भी। तो प्रेसेंट की तरह आएगा।
- 31:46कबीर के इस दोहे को हम थीम की तरह ले लेंगे।
- 31:50आइए हम इसका निचोड़ निकलते हैं। बीती ता ही बिसारते हैं जो बीत
- 31:58गया। वह तुम्हारे रिकॉर्डर में चला
- 32:00गया। वह तुम्हारे कर्म के सुपर
- 32:04सेंसिटिव रिकॉर्डर जो हमारे भीतर है, उसमें फीड हो गया।
- 32:10जो बीज तुमने वो दिया वह धरती के गर्भ में समा गया।
- 32:17बीती ताँही बिसार दे, उसको भूल जाए आके कि सुधर ले पास्ट के बाद
- 32:26आता क्या है? बस यहीं तुम गलती कर जाते हो तुम
- 32:30कहते हो, पास्ट के बाद फ्यूचर आता है नहीं पास्ट के बाद प्रेसेंट
- 32:34आता है। जो बीत गया जो मैंने बोल दिया
- 32:39उसके बाद अब आया ना प्रेसिडेंट, जब मैं बोल रहा हूँ, उसके बाद
- 32:45आएगा फ्यूचर तो तुम तीन काल में से एक काल को खो ही देते हो,
- 32:53लुप्त ही कर देते हो। और वो ही काल निर्णायक है
- 32:59प्रेसेंट इस डीसीसी उसी को तुम खो देते हो, तुम क्या कहते हो?
- 33:09जो बीत गया वो तो बीत गया। लेकिन अपना फ्यूचर तो तुम बना
- 33:14सकते हो नहीं, कबीर क्या कहते हैं?
- 33:17आगे देखो कबीर कहते तुम आगे फ्यूचर भी नहीं बना सकते, जो बन
- 33:27आवे सहज में जो सहज से होता है। सहज क्या होता है?
- 33:33ये सहज बड़ी जगह प्रयोग किया है। कबीर ने सहज समाती भले रे सन्तों,
- 33:43जो अपने आप उतर जाए और उतरती ही अपने आप है, बड़े मज़े की बात है।
- 33:51सत्य को इस रूप में बोला जाता है क्या करें शब्दों की अल्पज्ञता
- 34:00है, किया भी कुछ नहीं कर सकता जो वन आवे सहज में।
- 34:10जो सहजता से होता है, उसको होने दे।
- 34:18जो बीत गया वो भी तुम कुछ नहीं कर सकते और जो फ्यूचर में हो गया वो
- 34:25भी तुम कुछ नहीं कर सकते। तो फिर तुमने क्या करना है?
- 34:31यू आर टु बी इन प्रेज़ेंट तुमने वर्तमान होना है तुमने वर्तमान
- 34:41में होना है तुमने स्थिति प्रज्ञा होना है।
- 34:46प्रज्ञा प्रज्ञा का मतलब वर्तमान प्रेसेंट नाउ इन दिस मूवमेंट
- 34:56शब्दों से मैं हर हिसाब से इन ऑल डायमेंशन्स आपको समझाने की चेष्टा
- 35:03कर रहा हूँ जानता हूँ अभी? कि वो समझ में आता नहीं है, लेकिन
- 35:08आता है समझ में इशारों की तरह समझ में आता है, इसलिए सभी डायमेंशन्स
- 35:16से मैं बोलता हूँ कि किसी तरह तुम वर्तमान के भीतर उतर जाओ और
- 35:22उतरोगे कैसे। बहुत और भविष्य उन दोनों को
- 35:31नज़रअन्दाज़ करते हैं, तो छोटा सा पल रह जाएगा।
- 35:37शेष जो भी है। बस यही एक पल है इस पल में अगर
- 35:48तुम ठहर गए तो फिर तुम्हारे लिए खोया हुआ भविष्य जो अभी आया नहीं
- 36:02बीता हुआ कल। जो बदला नहीं जा सकता तो कभी आएगा
- 36:07नहीं। वो बेकार हो जाते हैं।
- 36:15कबीर कहते हैं जो बना आवे, सहज में सोई होत न दे, वो तो होने
- 36:26नहीं देता। उसमें अड़ंगा फंसा लेता है।
- 36:30अड़ंगा क्या फंसा लेता है हम करके दिखाए कबीर कहते तुम हो जान लिया
- 36:41है अपने आप को ये क्यों कहते हैं ऋषि गण के नो डायसेल्फ?
- 36:48ये आपका सपना तोड़ने के लिए कहते हैं क्या सपना होता है?
- 36:56बताइए मुझे देखते तो हो ना तुम और तुम कहते हो जो दिखता है वो सही
- 37:03होता है। कहते हो न मार्क सुई कहते हैं जो
- 37:09नहीं दिखता वो होता ही नहीं, परमात्मा दिखता नहीं, इसलिए
- 37:14परमात्मा होता ही नहीं तो मैं कहता हूँ फिर सपना नहीं होता क्या
- 37:17सपना तो तुम देखते हो अगर तुम जो देखते हो वो होता है।
- 37:24और जो नहीं देखते वो नहीं होता तो फिर सपनों तो तुम देखते हो क्या?
- 37:31सपना होता है कि नहीं होता सपना देखते हो लेकिन होता कहाँ?
- 37:38है नहीं होता है। यह तुम्हारी परिकल्पना है, यह
- 37:49तुम्हारी दिमाग की खुजली है। खुजलाहट तुम किसी भी शब्द को मान
- 37:55लेते हो और प्रकटीकरण कर देते हो अगर यह सिद्धांत है।
- 38:03इफ इट इस दी लॉ जो दिखता है वो सत्य जो नहीं दिखता वह असत्य तो
- 38:10मार्क्स की ये परिभाषा स्वप्न के बारे में कहाँ?
- 38:15स्वप्न तो दिखता है तुम देखने वाले होते हो उस वक्त और पूरे
- 38:20भावेश में अगर अच्छा सपना है? तो तुम उसका लुत्फ उठाते हो अगर
- 38:25बुरा सपना है तो तुम काँप काँप जाते हो तो फिर सपना क्यों खो
- 38:31जाता है? क्यों नहीं होता?
- 38:33वो किसी भी चीज़ को तुम डिफैन नहीं कर सकता।
- 38:43क्योंकि हर चीज़ परमात्मा है, एवरीथिंग इज़ गॉट।
- 38:52इसलिए परमात्मा को डिफाइन नहीं किया जा सकता, तो फिर तुम किसी भी
- 38:57चीज़ को डिफाइन नहीं कर सकते। क्योंकि एवरीथिंग इस गॉट और
- 39:04परमात्मा को व्याख्या ही नहीं किया जा सकता, लेकिन तुम तुम तो
- 39:10हर चीज़ की व्याख्या करते हो विकास बेबी करती से पूछो।
- 39:17इसकी डेफिनिशन क्या है, बता देंगे।
- 39:21खान सर से पूछ लो, बता देंगे तुम्हारे सर लोग सारे बता देंगे,
- 39:29आचार्यों से पूछ लो। तुम किसी चीज़ को डिफैन कर ही
- 39:41नहीं सकते, इसलिए मैं रोज़ बोलता हूँ और ये भी कहता हूँ, उधर के
- 39:52पीते थे मैं और जानते थे 1 दिन। रंग लाई गई हमारी फ का मस्ती एकदम
- 40:05उज्रकी पीते थे मैं और जानते थे कि हाँ रंग लाई गई हमारी फ का
- 40:12मस्ती एकदम हम बोलेंगे। तुम सुनोगे, तुम सुन के पाओगे कि
- 40:26हाँ बड़ा रसीला था आज का प्रवचन लेकिन हम बोल के पाएंगे नहीं बोला
- 40:33गया। हम माथे पे हाथ मारेंगे, हम
- 40:42कहेंगे कहाँ बोला गया छोड़ो मैं बोला नहीं जाता कल नहीं बोलेंगे
- 40:49लेकिन फिर तुम्हारे चेहरे के ऊपर 12:00 बज के 3.75 मिनट।
- 40:56हमें बोलने को फिर मजबूर कर देंगे, यह जानते हुए भी कि वह
- 41:03बोला नहीं जा सकता। तुम्हारे चेहरों के लटके हुए
- 41:08चेहरे देखकर हम बोलने की चेष्टा फिर से कर लेंगे।
- 41:14कितनी बार हम गिरे हैं, कितनी बार और कितनी बार सोचा नहीं बोलेंगे
- 41:22कल से बस इसके बाद नहीं बोलेंगे। ये आखिरी प्रवचन है।
- 41:27मैंने बहुत बार कहा। बहुत बार मैं अपने चैनल कंट्रोलर
- 41:32से कहता हूँ कि आप कल का कल के बाद नहीं बोलेंगे।
- 41:38अब उन्हें तो आदत पड़ गई है तो रोहित मुझे कहता है बाबा आप आप कर
- 41:44भी बोलोगे अब देखिए यह तेरे अंदर ही है।
- 41:49इनको पता है और मैं पूरे मन से कहता हूँ बिलकुल नहीं बोलने के कल
- 41:55से क्योंकि वह बोला ही नहीं जा सकता बोल के माथे पे हाथ मरा कहाँ
- 42:02बोला गया? नहीं बोला जाता भाई वह मौन में
- 42:07पिया जाता है। लेकिन फिर भी मौन में पिया जाता
- 42:13है ये तो बोलेंगे हाँ ये बोलेंगे लेकिन इस बोलने का प्रभाव तुम पर
- 42:21पड़ेगा कि नहीं यह तुम्हारे पर डिपेंड करता है।
- 42:25इट डिपेंड्स अपॉन यू। यह बात बोलेंगे कि बोलने से मौन
- 42:36की तरफ इशारा हो सकता है। तुम चुप हो जाओ, चुप कराने के लिए
- 42:42भी शब्दों का सहारा लेना पड़ता है।
- 42:44चुप कराने के लिए भी बोलना तो पड़ता ही है कि चुप हो जाओ भाई या
- 42:51इशारा करना पड़ता है कि चुप हो जाओ भाई, ऐसा करना पड़ता है।
- 43:00यह इशारे से बोलना है। लेकिन है तू ये भी बोलना बीती
- 43:12ताही, बिज़ार दे आगे की सुध ले जो बन आवे सहज में सोई होत न दे।
- 43:26जो सहज में होता है उसको होने दे, जो बन आवे, सहज में सोई होत न दे,
- 43:39उसको तो होने नहीं देता क्यों? क्योंकि तुम प्रयास से कर के
- 43:45दिखाएंगे यह बात बाधा बन जाती। है तो।
- 43:55इसके रास में चले। इसका गहनतम राशि ये है पुत्र जो
- 44:07बीत गया उसको छोड़ते है। भविष्य की योजनाओं को भी छोड़ते
- 44:12है। जो बीत गया उसको भी छोड़ते है।
- 44:22भविष्य की योजनाओं को भी छोड़ते हैं।
- 44:28तुम्हारी साइंटिफिक होती कहे कि फिर प्रोग्रेस कैसे होगी?
- 44:32प्रोग्रेस बाहर की नहीं करनी हमने 200 मंजिला इमारतें नहीं बनानी
- 44:39हैं। हमने अटलांटा नहीं बनाना।
- 44:44भविष्य की योजनाओं को भी छोड़ते हैं।
- 44:49तुम्हारी वैज्ञानिक मन कहेंगे फिर फिर विकास कैसे होगा?
- 44:56विकास बाहर का विकास कागजी होता है।
- 45:01बाहर का विकास क्षणी का मज़ा तो दे सकता है क्षणी का स्टिमुलेशन
- 45:07तो दे सकता है आनंद नहीं दे सकता कबीर झोंपड़ पट्टी के भीतर बैठकर
- 45:13भी उस सरस को पी लेते है। सुरत कला हरी।
- 45:38भय मत बा रे मदवा पी गई बिन तो ल मन रोला क्या मेरा?
- 45:58फकीरी में, फकीरी में मंडोला, जो मेरो रहा हूँ, जो सुख प।
- 46:16राम भजन में जो सुख पायो राम भजन में वो सुख ना हीं अमीर में।
- 46:36मन डोला जो मेरो रो फकीरी मैं फकीरी मैं मन डोला, जो मेरो रो
- 46:52साइंटिस्ट जिसे विकास करते हैं। वह सत्य में विनाश है।
- 47:00तुम विकास कहते हो, एसी की ठंडी हवाओं में बैठ जाए, सर्दी में
- 47:06हीटर के भीतर गर्म ऐश में बैठ जाए, यह आराम तो है विकास नहीं
- 47:14है। विकास सही में 1000 मंझला इमारतें
- 47:18भी तुम बना लोगे तो भी विकास नहीं होगा।
- 47:23बाहर का विकास की बात ही नहीं करते।
- 47:26कबीर विकास सत्य में अगर देखो तो बाकी विकास की धारणाएँ कल्पनाएँ
- 47:34हैं। विकास होता है तो चेतना का होता
- 47:38है। एवोल्यूशन ऑफ कान्शस्नस बाहर की
- 47:531000 मंजिला इमारतों को तुम बना लोगे, लिफ्ट लगा लोगे, बटन को ऑन
- 48:01करोगे? लिफ्ट चली जाएगी 1000 मंजल तक
- 48:04नीचे आ जाएगी जीस समझल पर भी तुम चाहोगे रुक जाएगी लेकिन इससे क्या
- 48:11होगा तुम्हारे भीतर चेतना का विकास होगा।
- 48:21शरीर का विकास तो हो गया पत्थर से विकसित होते होते काया माइनस शरीर
- 48:31धारण करके यह विकास तो हो गया बाहर का भीतर का विकास।
- 48:40आसमानस। के शरीर की ऐसी संघ रचना ईश्वर ने
- 48:45बना दी उस कारीगर ने कि 100। प्रतिशत चेतना इस।
- 48:54मानव शरीर में ही विकसित हो सकती है।
- 48:59जैसे कि विशेष। फल और फूल।
- 49:02किसी विशेष मौसम में ही खेला करते हैं।
- 49:08एक फूल 10 साल के बाद खेला करता। है 12 साल के बाद खेला करता है वह
- 49:13विशेष मौसम में खेला करता है। सही विकास कैन्शस्नस का करना है
- 49:24हमें डेवलपमेंट ऑफ कैन्शस्नस इसको तुम शब्द कोई भी दे दो।
- 49:36चेतना का परम विकास 100। प्रतिशत परम विकास।
- 49:45जो तुम कर। रहे हो वो वो?
- 49:50गैर जरूरी है। तुम।
- 49:54स्मार्ट सिटी बना लोगे तुम धरने से भरपूर?
- 50:01कर दोगे तुम सोने? की खानों में बैठ जाओगे।
- 50:11तुम सोने। के घर बना लोगे?
- 50:16तुम्हें पता है दुबई। में यूएई।
- 50:21में बहुत से शेखों के पास फ्लैशर्स जो है वो।
- 50:27सोने की है। उससे क्या होता है?
- 50:33तुम बिन। जीवन कैसे बीता तुम बिन जीवन कैसे
- 50:48बीता? पूछो मेरे दिल से तुम बिन जीवन
- 50:56कैसे बीता तुम कौन अरेहस अरेहस आनंद अमृत पूछो मेरे दिल से।
- 51:09आग लकी रहती है वहाँ। मेरा हृदय ही जानता है, जो दुखी
- 51:22रहता है हर वक्त। दुखी व्यक्ति यह कहता है परमात्मा
- 51:28के बिनामें ये जीवन कैसे बीता ये तुम मुझसे पूछो।
- 51:33पूछो मेरे दिल से तड़पता हीरा, वो दिल आइए।
- 51:42इस। दोहे के रास्ते में उतर जाएं।
- 51:48बीती का ही। जो तुमने कल किया था?
- 51:58वह स्मृति में चला। गया।
- 51:59फिर हो गया आगे के सूद। ले प्रेसेंट के सूद ले।
- 52:10अब मैं कहूंगा प्रेसेंट से। भविष्य नहीं बनाया।
- 52:15जा सकता। वरन प्रेसेंट में आकर प्रेसेंट
- 52:19में हुआ जा सकता है, प्रेसेंट हुआ जा सकता है प्रेसेंट में होना
- 52:26प्रेसेंट होना। कहने के अलग अलग अंदाज।
- 52:33होंगे मेरे काश। तुम किसी भी तरह।
- 52:37मेरी बात समझ सकते सती प्रज्ञा हो जा।
- 52:42प्रज्ञा का मतलब जो है। प्रेसेंट वर्तमान प्रज्ञा में सित
- 52:51ओजा ठहर जा डूब जा विलीन होजा मर्ज होजा डिसोलज बनाओ बुद्ध
- 53:00डिसोलज होते है कृष्ण। मर्ज होते है।
- 53:09और डिसॉल्व में और मर्ज में। लॉट ऑफ डिफरेंस में बैठना था।
- 53:16डिसॉल्व जो हो गया नमक डिसॉल्व होता।
- 53:19है। पानी में वह अलग किया जा सकता है
- 53:22जब भी चाहे। लेकिन जो बूंद समुद्र में मर्ज हो
- 53:26गई, वह तुम अलग नहीं कर सकोगे। कबीर की बूंद कृष्ण।
- 53:34की बूंद नानक की बूंद सागर में समा गई।
- 53:39तुम उसको कभी अलग नहीं कर सकोगे। लेकिन नम को जपचह अलग कर लूँ।
- 53:52भीते ता ही विसार्थ आगे के सूत्र। पास्त के बाद आगे क्या आएगा?
- 54:00वर्तमान आएगा तो तू वर्तमान हो जा।
- 54:06फिर क्या होगा? तू जो आज।
- 54:09कर रहा है वो गलत कर रहा है जो। बन आवे सहज में।
- 54:16तू मर्ज हो जा उसमें, तू छोड़ मत तू उसके।
- 54:24चरणों में विलीन। हो जा।
- 54:28कैसे क्षमा में परवाना खाक हो जाता है।
- 54:34जैसे समुद्र में बूंद। मर्ज हो जाती है।
- 54:38ऐसे हो जा, इन्सर्ट कर दे अपने आपको उसमें।
- 54:46और जब तू ख़ाक हो जायेगा। जब तू मर्ज हो जायेगा तो फिर ऐसा।
- 54:55आनंद में तू लीन। हो जायेगा जब तू स्थिति प्रज्ञ।
- 55:00हो जायेगा। आज में।
- 55:03आज ही हो। जायेगा।
- 55:10फिर भगवद्ता तुम्हें प्राप्त हो। जाएगी, फिर तो भाग्यवान हो
- 55:14जायेगा, फिर तो फिटफुल। हो जायेगा।
- 55:18फिर तू भाग्यशाली हो जायेगा फिर तुम्हारी किस्मत अपनी चरम शिखर पर
- 55:25होगी। भूल जा बाहर की।
- 55:32विकास को। कबीर कहते हैं, देखो।
- 55:38मैं झोपड़ पट्टी के अंदर बैठा हुआ 100।
- 55:43प्रतिशत एक चेतना में। विलीन हो गया वक्त जाया मत कर अभी
- 55:50वक्त है अभी चेतन गुरु। तेरे पास बैठा।
- 55:54है कल, कल यह। चेतन गुरु सदन नहीं।
- 56:02रहता चला जायेगा। फिर नया।
- 56:07चेतन गुरु जब आएगा। या तो तू उसे पहचान नहीं पाएगा,
- 56:12तू वैसा ही कहेगा कि ऐसा ही काला मुक्का होना चाहिए।
- 56:17ऐसी ही दाढ़ी होनी चाहिए। ऐसा ही बोलने का अंदाज होना
- 56:22चाहिए। बस तुम इन चीजों से चिपक जाएगा और
- 56:26तुम पहचानने से चूक जाएगा। तुम संत की।
- 56:32परिभाषाएं भी गणित कर लेते हो तुम?
- 56:37कहोगे इसलिए मैं तुलसीदास। को मूड क्यों कहता हूँ?
- 56:42तुलसीदास कहते हैं कि भगवान के हाथ में तो धनुष बाण होता है
- 56:48मुरली थोड़े हुआ करती ये मूडता। की निशानी है या।
- 56:53समझदारी भगतो मुझे जवाब दो भगवान। के हाथ में तो।
- 57:02धनुषबान होता है बनसरिया। थोड़ी हुआ करती है।
- 57:08तो फिर तुम इस व्यक्ति को मुड़ कहोगे या?
- 57:10समीधार कहोगे फिर तुम कहते हो बाबा।
- 57:14आप शब्द भी उसको। उठा लेते हो शब्द भाई कीमती है
- 57:18उठा लेता हूँ जोड़े हैं। मापतौल।
- 57:23दोनों तरफ से परडे। बराबर बैठते हैं तो मैं उठा लेता
- 57:27हूँ मेरे काम के लेकिन इससे। वह व्यक्ति प्रबुद्ध नहीं।
- 57:32हो जाता वह व्यक्ति भाग्यवान नहीं हो जाता।
- 57:39जो वन आवैसह जमे। जब तू उसमें मर्ज हो गया तो मर्ज
- 57:44कैसे होगा अपने अहंकार को पूर्णतया को छोड़कर, अपने अहंकार
- 57:51को पूर्णतया उसमें मर्ज करके, अपने आपे को पूर्णतया उसमें लीन
- 57:56करके, अपने आपे को खाक करके? राख करके, बसम करके इसलिए तुम।
- 58:05दोनों के आगे। बैठ कर राख शरीर पर मल तो सकते हो
- 58:11लेकिन ये दोनों तुम्हें कोई बात सीखाता है।
- 58:13वो सीखते नहीं। क्या सीखाता है दोनों?
- 58:19धोना सगाता है। जैसे इस अग्नि में लकड़ी जलकर राख
- 58:23हो जाती है, वैसे ही तू अपने अहंकार को लकड़ी को राख कर दे।
- 58:32आग में जलकर आग क्या यह ट्रांसफॉर्मेशन मर्जनेस?
- 58:41यह तलीनता यह। विलीनता यह खो जाना, यह मिट जाना,
- 58:47परवाना की तरह बसवीं भूत हो जाना। यह आग है।
- 58:58इस आग में छोड़ दे अपने। आप को।
- 59:04जो बन आ वे सहज में फिर। जो होता है उन्हें।
- 59:10जिंदगी का साथ। निभाता चला गया।
- 59:17मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 59:22जो कुछ होता है होने दे। ये होता है जिंदगी का साथ निभाना
- 59:29और जो होता है उसे नहीं होने देता, वो तो कबीर कहते हैं।
- 59:40सोई होत न दे। वो तू होने नहीं देता, जो साइड
- 59:44में होता है तो बीज़ी हो जाता है तो व्यापार करने लगता है तो
- 59:50विकास। करने लगता है तो।
- 59:521000 मंजिलें में खो जाता है। तू सपनों में खो जाता है और नहीं
- 59:57तो तू प्रभुद होने की चेष्टा में लीन हो जाता है।
- 1:00:00यहाँ अपने आप को बीज़ी कर लेता है और नहीं तो भगवान ही तेरा उजक हो
- 1:00:05जाता है तू यहाँ भगवान के भीतर पे उलझ जाता है यू अरे ऑलवेज बीज़ी।
- 1:00:13कभी धन। कमाने के लिए कभी।
- 1:00:15भगवान होने के लिए बड़े। मज़े की बात है।
- 1:00:21भगवान होने के लिए भी तुम बीज़ी हो सकते हो अरे भाई मुझे मत तंग
- 1:00:26करो। मैं भगवान होने।
- 1:00:27जा रहा हूँ भगवान हुआ नहीं जाता भाई।
- 1:00:31जो बन पावे। सहेज में।
- 1:00:34सहजता से जो हो सोई होत न दे, वो तू होने दे, वो तू होने नहीं
- 1:00:41देता, यह अहंकार की परिश्रम की फल है।
- 1:00:46अहंकार के परिश्रम का फल। क्या है कि जो।
- 1:00:52होता है उसे होने। नहीं देता और फिर उसका।
- 1:00:59नतीजा क्या मिलता है? ये लंबे चेहरे, ये दुख, ये दर्द,
- 1:01:06ये चिंताएं, सारी सारी रात का जागना।
- 1:01:12और तुम जागरण करते हो। पाड़ा वालिये, गदिया, वालिये सेरा
- 1:01:17वालिये, ये बकवास। करते फिरते हो सारी रात।
- 1:01:24तुमने? क्या क्या नहीं थोप?
- 1:01:26लिया। तुमने परमात्मा की भी परिभाषा
- 1:01:31गणित कर ली है कोई? कहेगा भगवान तो मूर्ति।
- 1:01:37वत बैठा होता है। वह बुध का उपासक है।
- 1:01:41कोई कहेगा भगवान तो हाथ में मुरली जीए बैठा है, वह कृष्ण का उपासक
- 1:01:47है। कोई कहेगा भगवान तो धनुषबान उठा
- 1:01:51ही पड़ता है, धनुर्धारी है, वह राम का उपासक है कोई?
- 1:01:58कहेगा भगवान तो। बैठा गीत गुनगुनाता होता है।
- 1:02:04वह नानक का पुजारी है। जो कहेगा वह तो शब्द।
- 1:02:08को श्रुति में। मिला रहा है।
- 1:02:10वो कबीर का पुजारी है। तुमने भगवानों की परिभाषाओं को
- 1:02:15गठित कर दिया है। सत्य में भगवान।
- 1:02:19की कोई परिभाषा? ये सब तुम्हारी।
- 1:02:23ऑल और। क्लिंगिंगनेस।
- 1:02:26ये तुम्हारी छिप काट कि भगवान ऐसा होता है और यह अहंकार।
- 1:02:35अपने आप को बचाने का अंत तक प्रयास करता है।
- 1:02:42अंत तक। क्योंकि इसको पता।
- 1:02:46है अगर मैं एक। बार खिसक गया तो फिर गया।
- 1:02:50सजा के लिए। परवाना अगर ये।
- 1:02:54जानता है कि। क्षमा के भीतर अगर वो चला गया तो
- 1:02:58उसका राख भी न बचेगा। पता ही नहीं वो कहाँ होगा?
- 1:03:03तो परवाना क्षमा में जाएगा ही तो तुमने?
- 1:03:08भगवान की भी। परिभाषाएं गठित कर ली इसलिए तुलसी
- 1:03:16बोलते। हैं।
- 1:03:16जा कर वो। झूठ बोलते हैं।
- 1:03:20कहाँ कहो छवि आपकी? भले भले हो न क्या कहूँ बड़े
- 1:03:26प्यारे नज़र आते हो कहाँ प्यारे नज़र आते हो अगर प्यारे नज़र आते
- 1:03:30तो तुम चरण क्यों लेते हो? प्यारे नज़र आए नहीं भाई क्योंकि।
- 1:03:37आगे पोल खोल के सारा शब्द। तुलसी मस्तक।
- 1:03:42तब निभाय जब। उसने सुगाण को अर्थ खोल गया ना
- 1:03:46सारी पोल शब्दों से। पहचाने जाते हैं।
- 1:03:51मूर्ख कालिदास। पहचाने गए जब ऊँट।
- 1:03:56देखा? तो पुत्र उटर उटर उस्टर की जगह
- 1:04:00उटर उटर कहना शुरू कर दिया और विद्योत्मा पे जान के ये तो मूर्ख
- 1:04:05है यह कैसा पंडित है? अल्फाजों से पता चल जाता है।
- 1:04:15आचार्यों की परिभाषाओं। से पता चल जाता है तुमने कहाँ तक
- 1:04:19गोता लगाया है? सर, लोगों की परिभाषाओं से पता।
- 1:04:24चल जाता है कि इन्होंने अपने न्यूरोस को सूचनाओं से भरा है या
- 1:04:31कुछ थोड़ा बहुत भीतर जाने का अनुभव भी है?
- 1:04:34उस रस को भी चखा है पता चल जाता है और।
- 1:04:39ध्यान रखो, जिसने वोहरा। से जीस दिन चख लिया।
- 1:04:46उस दिन सर पढ़ा तो न पायेगा। देवकीर्ति सर खान सर उस।
- 1:04:52दिन पढ़ा नहीं पायेगा। उस दिन तो कोई और ही पाठ पढ़ाएगा।
- 1:05:02उस दिन तो फिर। लगा चुने की मैदा।
- 1:05:11लगा सुनरी। मैदा छिपाऊँ कैसे है?
- 1:05:20लगा सुनरी मैदा। छुपाऊँ कैसे?
- 1:05:31लगा चुनरी मेरा छिपाओ कैसे घर जाऊं कैसे घर जाऊं कैसे?
- 1:05:49लगा चुनरी में दाग सिपाऊ कैसे लगा चुनरी में दाग?
- 1:06:09जो बन पावे सहज में। सोई होत न दे अपने।
- 1:06:15आपको उसके। भीतर मर्ज कर दे, फिर वह करेगा।
- 1:06:21जो भी कुछ करेगा। और फिर मज़ा आएगा।
- 1:06:25जीने का। फिर रस आएगा जीने।
- 1:06:29का? अब तक तो तू दिनों को धक्के दे
- 1:06:32रहा है अगर रस। सही रूप में।
- 1:06:36पीना चाहता है तो। मुश्किल तो बहुत है लेकिन छोड़ना
- 1:06:44पड़ेगा। क्योंकि तुम्हारी चेतना और।
- 1:06:49चीजों की तरफ दौड़ती है। तुम कहते हो यह भी जरूरी यह भी
- 1:06:54जरूरी यह भी जरूरी कुछ भी जरूरी नहीं।
- 1:07:01कबीर कहते। हैं, जो जरूरी है।
- 1:07:03वो करते करते भी। भजन में जाया जा सकता है छोड़ दे
- 1:07:10सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं।
- 1:07:24आदमी के गले प्यार से भी जरूरी कई काम है, प्यार सब कुछ नहीं।
- 1:07:43जिंदगी केली छोड़ दे सारी दुनिया किसी केली लेकिन।
- 1:07:56कबीर कहते हैं कि। अगर तू किसी के लिए सारी दुनिया
- 1:08:00को छोड़ दे। यही शुभ है तेरे लिए मुनासिब तो
- 1:08:05पड़ेगा लेकिन तू हिम्मत जुटा सहस कर उसके लिए खाक हो जा पर वाणी की
- 1:08:14तरह क्षमा में जलकर राख हो जा तो तू पाएगा।
- 1:08:20जो बन पावह सहज में जो सहज। में होता है उसको।
- 1:08:27होने दे फिर जो होगा वो शुभ होगा। कभी भी अशुभ नहीं होगा।
- 1:08:33धन्यवाद।