Latest / Baba ji Vijay Vats / 6 Apr 26 - अहंकार और लोक-लज्जा: "दुनिया क्या कहेगी" के डर से मुक्ति।
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- 0:20मारुति प्रसाद भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यह कहने के बाद भी कि
- 0:41यह सब मेरे द्वारा मारे जा चूके हैं।
- 0:48मैंने इनका हनन कर दिया है ही अर्जुन तुम उठ और इनको मार दे,
- 1:03इनको मारने का श्रेय ले ले। लेकिन उसके बाद भी अर्जुन उठते
- 1:15हैं तथा क्षण अर्जुन अपना गाढ़ी धनुष जो फेंक दिया था।
- 1:24मैं युद्ध नहीं करूँगा, तत क्षण क्यों नहीं उठा लेता है, क्यों
- 1:32वक्त लगता है क्या है कारण जब भगवान यह बात कहते हैं कि यह मेरे
- 1:43द्वारा। मारे जा चूके हैं तो शस्त्र उठा
- 1:52और इनका आनंद कर दे, श्रेय ले ले और सब कुछ ही जीत कर हस्तनपुर का
- 2:02राजा बन। राजवोग इसके पीछे का क्या कारण
- 2:09है? बाबा?
- 2:12यह बात अटक रही है मारुति इटली से।
- 2:29सुन्दर सवाल है और आप सब के काम का है।
- 2:43कृष्ण कहते हैं, मैंने मार दिए हैं और अर्जुन धनुष नहीं उठाता,
- 2:56वह कप रहा है अभी भी। और कृष्ण शुरुआत करते हैं साकार
- 3:04से और यहाँ तक पहुँच जाते हैं राक्षसों को पूजा करता है वो
- 3:13राक्षस। देवताओं की पूजा करता है।
- 3:17वो देवता जो जिसकी पूजा करता है, मैं उसके भीतर उसकी नित्यत्मक
- 3:30वृद्धि को बुद्धि को दृढ़ कर देता हूँ।
- 3:36यहाँ से शुरू करके कृष्ण बोलते चले जाते हैं और अर्जुन विश्वास
- 3:45क्यों नहीं करते? क्यों नहीं उठाते?
- 3:49धनुषान? बड़े काम का प्रश्न पूछा है।
- 3:57लोग मुझे कहते हैं बाबा बोलो बंद कर दो दो 2500 वीडियो बहुत होती
- 4:05हैं समझाने के लिए, लेकिन मैं देखता हूँ।
- 4:12के प्रश्न अभी भी काम की आ रहे हैं।
- 4:21ये प्रश्न बड़ा काम का है, तुम गुरुओं के पास चलते हो?
- 4:33गुरु तुम्हें कहते हैं यह करो, तुम कहते हो ठीक पहले के गुरु वचन
- 4:44ले लेते थे कि मेरा शिष्य बनना चाहते हो तो मैं जैसा कहूंगा
- 4:56करोगे। हाँ कर्म तो फिर जो भी उसकी विधि
- 5:02होती थी बता देते थे राम राम करो या पांच नाम करो या कुछ भी मत करो
- 5:10जैसा है लेकिन आजकल वो वचन लेने की परंपरा।
- 5:17गायब सी लगती है क्योंकि जैसा कहूंगा करोगे वो रिवाज खत्म हो
- 5:31गया है। एक कृपालु जी महाराज, ये गफाहो
- 5:36वाले बाबा जैसा कहूं करोगे? क्या कुछ हुआ?
- 5:50गुरु शिष्य की परंपरा में एक अनिवार्य रूपेण धागा होता है।
- 5:59वो अगर टूटता दिखे। तो शिष्य को तो साहित्य समझना ही
- 6:05गुरु को समझाई जाती है। गुरु शिष्य से कह सकता है क्या आप
- 6:16जाइए क्यों वक्त खराब होता है? अक्सर मेरे से लोग नाराज हो जाते
- 6:27हैं। बाबा।
- 6:28आप कहते हो मुझे मत सुन भाई इसलिए कहता हूँ कि तुम नहीं सुन रहे हो,
- 6:41तुम वही सुन रहे हो जो सुनना चाहते हो।
- 6:48तुम सीखने के लिए नहीं आए तुम शिष्य नहीं, तुम सीखे, सिखाए पहले
- 6:54से ही आए यहाँ आकर तो तुम्हारे न्यूरॉन और भरेंगे।
- 7:06और तुम शास्त्रार्थ करोगे, तुम्हारी मनोवृत्ति सूचनाओं को
- 7:16इकट्ठा करने में सूचनाओं को कैसे इकट्ठा करें?
- 7:23यहाँ से भी मिल जाये, वहाँ से भी मिल जाये, यहाँ से इकट्ठा कर लूँ,
- 7:27वहाँ से इकट्ठा कर लूँ और फिर मैं शास्त्रार्थ करूँ और फिर।
- 7:38शास्त्रार्थ करके मैं लोगों में सर्वश्रेष्ठ कह लूँ।
- 7:46ये कारण है तुम्हारा इसलिए महावीर ने कहा श्रावक बन जाओ सच्चे
- 7:54श्रावक सम्यक श्रवण। और सिख धर्म शिष्य बन रहा तुम
- 8:02सीखे सिखाई पहले से हो तो शिष्य बनने की कोई तैयारी हो, कोरा कागज
- 8:09बन के आना होगा। अगर उसके हस्ताक्षर लेने हैं तो।
- 8:20सब सीखा सिखाया डिलीट करना परमिट करना होगा तुम्हारा मोबाइल फिर
- 8:32फिर पुनः लिखना होगा उसके ऊपर इमारत।
- 8:46अगर महावीर कहते हैं श्रावक वनम तो वो जानते हैं कि तुम महावीर को
- 8:53सुनने नहीं आए और सदा से लोग ऐसे रहे हैं, ये मत समझो कि महावीर के
- 8:59जमाने में अच्छे लोग थे, बिल्कुल वैसे ही लोग हैं।
- 9:07बुद्ध के जमाने में अच्छे लोग थे, बिल्कुल वैसे ही लोग बल्कि ज्यादा
- 9:13घटिया थे। आज गुरू को स्लिप तो नहीं दी
- 9:18जाती, प्रेम की बातें करने वाले को टांगा तो नहीं जाता?
- 9:23दुनिया आज समझदार भी हो गई है। पहले ज्यादा बुरे लोग थे, इस
- 9:34दृष्टि से पत्थर फेंकते हैं बुद्ध के ऊपर वो ज़माना कैसा रहा होगा?
- 9:47गालियां निकालते हैं, बुरी बुरी गालियां निकालते हैं और बुध मौन
- 9:58शांत हाथी की भांति मस्त हाथी की भांति।
- 10:06ये जीने का एक ढंक है समझ लेना इसे कोई कुछ भी कहे तुम अपनी मस्त
- 10:16चाल को चलते ही जाना अपनी राह पे। तेज भी नहीं होना, धीमा भी नहीं
- 10:26होना, अपनी गति से चलते रहना, ये जीने का एक तरीका है जो कह रहे
- 10:36हैं वो सर्वज्ञ हैं, जो तुम्हें कह रहे हैं वो सब नहीं जानते।
- 10:47संस्कारों के कारण कह रहे हैं। उनको समाज ने जैसा सिखाया वैसा कह
- 10:56रहे हैं। तुम्हें जरूरत नहीं है कि तुम
- 11:01उनकी बातों को मानो। अभी बहुत दिन पहले मेरे पास एक
- 11:15नौजवान का फ़ोन आया, आई ऍम गोइंग टु कमिट सो शायद मैंने करवाया।
- 11:29मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ। क्यों करने जा रहे हो?
- 11:35आत्महत्या तो हो नहीं सकती और आत्महत्या करना तो शुभ है।
- 11:40जो वास्तव में आत्महत्या है उसको तो संत कहते हैं करो।
- 11:49मरो हे जोगी मरो मरो मरण है मीठा, लेकिन सातवें एक शर्त लगा देते
- 11:55हैं ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मरगोर कतल था शरीर को मत मारो अहंकार को
- 12:03मार दो आँख में पड़ी हुई कंकड़ी को निकाल दो।
- 12:10इसने तुम्हारी आँख का देखना बंद कर दिया है।
- 12:16इनका क्यों मर से हो? थोड़े दिन पहले मैंने किसी लड़की
- 12:23के साथ संबंध बना लिए थे। वह किसी बिमारी से युक्त थी, वो
- 12:37बिमारी मुझे भी हो गयी। इन दिनों पे खारिश होती है, बुरी
- 12:47तरह। ना रात को छे ना ना दिन को छे
- 12:58क्या करूँ बाबा दवा लेता हूँ कुछ दिन ठीक रहता हूँ फिर फिर वही हाल
- 13:09हो जाता है। तो इससे मरना अच्छा।
- 13:19मैंने कहा मरने से हाल हो जाएगा, ये खारिज मत जाएगा।
- 13:28तुम रोग को खत्म नहीं कर रहे हो, तुम रोगी को खत्म कर रहे हो और ये
- 13:34कोई डंक भी नहीं है। सच्चे काट रहे हैं, बता रहा हूँ
- 13:52कहता वो तो ठीक बाबा मन में 1000 ख्याल होते हैं, बताओ कौन कौन से
- 13:58ख्याल लेते हैं मुझे बताओ ना इसलिए मैं कहता हूँ मरने से पहले
- 14:05थोड़ा मुझे कॅाटाक्ट कर लो। कई बार अब तो घबरा के ये कहते हो
- 14:13कि मर जाएंगे, अगर मर के भी शहन न पाया तो किधर जाएंगे?
- 14:27क्योंकि कई बार तुम्हारी बुद्धि के पास उन प्रश्नों के जवाब नहीं
- 14:30होते और वह प्रश्न प्रश्न होते ही नहीं जिन के कारण तुम अपनी जान
- 14:40कमा देते हो। बाबा कल को शादी भी हो गई, घरवाले
- 14:51मजबूर कर रहे हैं। मैंने कहा ये तो परंपरा है, शादी
- 14:56मत करो तो उसका दिमाग खुल गया हैं लेकिन घरवाले कहते है शादी करनी
- 15:04पड़ेगी। मैंने कहा वह तो मज़े ही कहते थे,
- 15:07करना ही पड़ेगा, लेकिन मैंने कहा जब तक मेरा लक्ष्य पूरा नहीं
- 15:14होता, मैं नहीं करूँगा और तुम्हें एक मजाक की बात बताऊँ, मुझे दुख
- 15:20भी देती है। कभी कभी मेरे पिताजी गाँधी चौक
- 15:24में मुझे मिल गए हैं। कोई ब्राह्मण बड़ा तंग कर रहा था,
- 15:27गुरुग्राम का था 3 दिन से लगातार दुकान पे आ जाता था, बड़ी दुकान
- 15:34थी, किराने की दुकान थी लेदर बूट्स, सैंडल्स, कॉस्मेटिक्स।
- 15:44बहुत दुकान चलती थी, अच्छा मना हुआ था, पशु वगैरह भी तो ब्राह्मण
- 15:57आके बैठ गया पंडित जी से कहने लगा पंडित जी देखिये, मेरी अकेली
- 16:03लड़की है उस वक्त। बीए पास है।
- 16:09तब बीए भी बड़े कम होते थे। मेरे चाचा जी दिल्ली में पंजाब
- 16:15नेशनल बैंक के मैनेजर रहे। उस वक्त एमए बहुत कम लोग होते थे।
- 16:29एमए। आज ऐवें तो ऐवें हैं, जगह जगह
- 16:37घूमते फिरते हैं, डंडे पड़ते हैं, सर्दी में बौछारें ठंडे पानी की
- 16:43और पुलिसवाले भी बड़े शरारती होते हैं, बर्फ़ डाल देते हैं।
- 16:49पानी कुछ वैसे ठंडा, कुछ बर्फ़ वक्त वक्त की बात है।
- 17:04पिताजी कहने लगे अरे कर्मठोक ऐसी बिलकुल सेम शब्द बता रहा हूँ।
- 17:10अब पिता को तो कहने का अधिकार है और बच्चे को भी कहने का अधिकार है
- 17:20मैं कोई ऐसा वैसा बच्चा तो था नहीं।
- 17:25अरे कर्मठोक शादी कर ले ऐसे रिश्ते बार बार नहीं मिलते।
- 17:34अच्छा कारोबार है। अकेली लड़की है सबका मालिक तो बन
- 17:38जाएगा। गुरुग्राम में सात दुकानें हैं,
- 17:43सातों दुकान किराये पे चढ़ी हुई है।
- 17:48आराम से बैठ के खाना। तुम्हें कुछ करने की जरूरत है।
- 18:02मैंने कहा पिता जी देखिए, मैं बहुत बार कह चुका हूँ।
- 18:10मेरे भीतर जो आग लगी, वह बुझे तो कुछ और सूझे वह जो ट्रेन इंसिडेंट
- 18:20के बाद खलबरी मची ये कौन किसको शादी की सूझती है?
- 18:30ना खाना अच्छा लगे पीना अच्छा लगे और वो आज आदत आज तक बनी हुई है ना
- 18:38घूमना अच्छा लगे बस कहीं जाके बैठ जाऊं किसी गुरु की तलाश में जो
- 18:45मुझे राह बता दे वो कौन था? और वहाँ तक कैसे पहुंचाया जा सकता
- 18:50है और मैंने सारी बायॉग्रफी में अपनी बात लिखी है।
- 19:00बोले, कर्मठोक तू यह शादी कर ले, रोज़ रोज़ जैसे रिश्ते नहीं आते,
- 19:10ये तो मेरा नाम है शहर में। ऐसा कोई ब्राह्मण नहीं जिसके पास
- 19:16इतनी संपत्ति हो जितनी मेरे पास मेरी अपनी बड़ी दुकान है।
- 19:23मेरा अपना बड़ा मकान है, तीन मंजिला मकान है, बच्चे वेल
- 19:32एजुकेटेड हैं, कोई डॉक्टर है। कोई ग्रैजुएशन में है, कोई
- 19:41फार्मासिस्ट है, सब तू शादी कर ले।
- 19:52मैंने बड़े धीरे से कहा, पिताजी। मुझे आप मजबूर मत कीजिए, मैं कुछ
- 20:03बोल पड़ूँगा क्या तू बोल ही है? पर क्या बोलना है बोल मैंने कहा
- 20:15पिताजी बात ये है। छः बेटे, दो बेटियां, आठ अगर
- 20:24तुम्हारा अभी भी जी ने भरा है तो आप एक शादी और करो, मैं कोई एतराज
- 20:29नहीं। ये शब्द मैंने अपने पिताजी
- 20:35सिखाया। और वो धन मर गए।
- 20:43वो कहते हैं, आज से बात बेटा मैं तुझे शादी कर लूँगा जो चाहे जहाँ
- 20:50चाहे जाओ और उसके बाद में। मैंने कभी ये शिकायत नहीं करनी
- 20:59पड़ी। माँ जरूर कह देती, कभी कभी पिता
- 21:03जी ने कभी नहीं कहा तो मैंने कहा मैंने भी तो इंकार किया था।
- 21:13दुख हुआ मुझे तो आज भी दुख होता है सितासी में वो चले गए।
- 21:1913 और 2538 वर्ष हो गए लेकिन कभी कभी वो दुख मन में आ जाता है।
- 21:27पिताजी को ऐसी अल्फाज़ नहीं कहने चाहिए।
- 21:35खैर, बीत गया सो बीत गया तो मैंने कहा तू स्वतंत्र है, तू शादी मत
- 21:46कर तो क्या मैं नहीं करूँगा? क्यों नहीं करेगा?
- 21:51बस नहीं करूँगा। एकदम से वो मुक्त हो क्या जैसे
- 21:59किसी जंजीरों में बंधा उसकी जंजीरें किसी ने खोलती है।
- 22:04अच्छा हाँ शादी में बंध होगा वो लड़की क्या कहेगी?
- 22:14मुझे तो गुप्तेन्द्रिया करोगे, मैंने कहा वो आयेगी तभी कहेगी ना
- 22:23तो मज़े से रहे ठीक हो और मैं कहता हूँ तुम करवाना भी मत शादी
- 22:30अगर मेरी बात माने तो। जिसके दिमाग में अभी इतनी उथल
- 22:41पुथल है। बाद में क्या होगा तो मत करवाना
- 22:47बहुत से लोग मेरे पास आ जाते हैं। बाबा क्या करें?
- 22:59कैसे बच्चों का पोषण करेंगे? नौजवान होते हैं, काम धंधा है
- 23:06नहीं, सहकारवार चलता नहीं, कुछ भी तो नहीं।
- 23:11अंधकार ही अंधकार है। मैंने कहा बच्चे पैदा न करो।
- 23:18और क्या हो सकता है? अगर नहीं पालन कर सकते तो मत करो,
- 23:26पैसा तो मुक्त हो जाते जैसे किसी ने बोझ हटा दिया हो, बस गुरु का
- 23:37काम। यही होता है तुम्हें बंधनों से
- 23:41मुक्त करना, क्योंकि बंधन बोझ रहे हैं तुम्हारे दिमाग पर क्योंकि न
- 23:47मान्यताओं का बोझ लगातार उठाना। और हजारों हजारों मान्यताएँ हैं।
- 23:58कुछ तुम्हें पता है कुछ तुम्हें नहीं पता है, लेकिन गुरु सब जानता
- 24:05है। गुरु का मतलब जो तुम्हारी
- 24:11समस्याओं को जानता है, वह समस्याओं का निदान भी जानता है।
- 24:19गुरु कभी नहीं कहेगा इट इस सेम पॉसिबल टु क्यू ध्यान रखना मेरी
- 24:24बात को तुम कुछ भी हो, कैसे भी हो, किसी भी रोग से ग्रस्त हो
- 24:33गुरु कभी नहीं कहेगा। यू आर नॉट क्यूरेबल नहीं कहेगा वो
- 24:40कहेगा बिल्कुल मैं तुम्हारा इलाज कर दूंगा।
- 24:42तुम चाहे कुछ भी किसी भी रोग से क्रश हो, क्योंकि गुरु तुम्हारी
- 24:47बुनियादी समस्या को जानता है। गुरु जानता है तुम दुखी क्यों हो?
- 24:54गुरु जानता है कि तुम्हारे दर्द क्यों हो रहा है।
- 24:58गुरु जानता है कि तुम पापी क्यों हो?
- 25:00गुरु जानता है कि तुम पूर्ण आत्मा को और जो जानता है वह गुरु बनने
- 25:07के योग्य है। मान्यताओं के आधार पे जो व्यक्ति
- 25:14गुरु बनता है गुरु बनने की चाहत तो मूर्ख में भी होती है ध्यान
- 25:20रखना मेरी बात गुरु बनने की चाहत तो मूर्ख व्यक्ति में भी होती है।
- 25:28कौन नहीं चाहता मैं गुरु? कौन नहीं चाहता पीएम बनु सब भी
- 25:34चाहती हैं पीएम बनु लेकिन बनता तो कोई एक ही है किसी किसी मूर्ख की
- 25:43किस्मत जाग जाती है वो बन जाता होगा अब तुम मूर्ख भी बन जाओ पीएम
- 25:49यह कैसे हो सकता है? कोई एक आध जल जाता है ऐसा मत करो।
- 26:04महंगाई है क्या करें? बच्चे मत पैदा करो, बस और उनका
- 26:10दिमाग इतना हल्का हो जाता है। लेकिन फिर ततक्षण थोड़े दिन बाद
- 26:15फिर आ जाते है बाबा वो तो ठीक लेकिन जब वृद्ध हो जाएंगे तब उनका
- 26:22तब की तब देखेंगे तब की अब क्यों निपट रहे हो?
- 26:31जब होगा तब होगा आज गुजर रहे हो जब आग आएगी तो चलेंगे देखेंगे आज
- 26:42मत चलो कल के लिए आज मत चलो, क्योंकि आदमी जानता नहीं शायद।
- 26:51कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज़, न जाने किस घड़ी इस
- 27:03जिंदगी की शाम हो जाए। अगले पल का भरोसा है, लेकिन मज़े
- 27:11की बात है, अगले पल का भरोसा किसी को नहीं, लेकिन अगले पल की
- 27:16समस्याओं का बोझ आज है। तुम्हारे ऊपर कमाल है।
- 27:25ईसा सड़क के किनारे पर खड़े परमात्मा से हाथ फैला के कह रहे
- 27:29थे। हो गॉड्स आई ऍम हंगरस प्रोवाइड मी
- 27:33फोर्स भूखा हूँ मैं मुझे भोजन दे दो, मांगना तो उसके दर से मांगो।
- 27:46दा ता दे लें दा थक पा और इतना देगा, इतना देगा कि तुम थक जाओगे,
- 27:54पानी वाला थक जाएगा। देने के बाद देने वाले के पास
- 27:59बहुत है। वह न थकेगा न मुकेगा उसके पास न
- 28:07कम होगा उसके पास उससे मांग लोग कहते हैं वो है नहीं, मैंने कहा
- 28:14ये मार्कर्स बोलता है, ये चार वक़्त बोलता है, ये नीच से बोलता
- 28:20है तो मैंने खुद नहीं खोजा। हम से पूछो कबीर से पूछो नानक से
- 28:27पूछो सिर्फ उसकी ही बात को क्यों मान लेते हो?
- 28:39हमारी भी तो बातें बैरल खड़ी है। हम भी तो कुछ देख के बोल रहे हैं
- 28:44कि वो है वो बिना देखे बोल रहा है हम देख कर बोल रहे हैं सच्चा कौन
- 28:57अंधा कहे कि इसका रंग गुलाबी है जिसने दिखन जीसको दिखता है और
- 29:02आँखों वाला कहे कि इसका रंग गुलाबी है।
- 29:07कौन ठीक आँखों वाला ठीक वक्तव्य चाहे मैं ते ही हूँ लेकिन ऑथेंटिक
- 29:21वही होता है जिसके पास आँखें हो। प्रसंग पे वापस लोग चले भगवान
- 29:37कृष्ण बहुत बातें कहते हैं और देखिए भगवान तुम आज कहते हैं,
- 29:42तुम्हें नहीं पता उस व्यक्ति को कितना जलील किया गया?
- 29:49उसे चोर कहा गया। उसे बदमाश कहा गया, उसे
- 30:00परिस्थितियों का अपहरण करने वाला कहा गया।
- 30:06उसको अय्याश कहा गया। क्या कुछ नहीं बस तुम सिर्फ उसके
- 30:25ऐश्वर्य से मोहित हो जाते हो, खुद को जो गालियाँ पड़ती हैं, उनकी
- 30:31तरफ तुम ख्याल नहीं करते। लोग थूक जाते हैं, कितनी कितनी
- 30:36बुरी बुरी गलियाँ निकालते हैं वो तुमने वो पहलू कभी देखा नहीं
- 30:46सिर्फ कृष्ण का ऐश्वर्य देखते हो कृष्ण को लोग कहते क्या हैं, किसी
- 30:53को भक्ष है। इस समाज ने कभी किसी को बख्शा है?
- 31:00आप प्रसंग पे वापस जाना चाहते थे लेकिन फिर और प्रसंग थोड़ा सा 5
- 31:06मिनट इसके ऊपर भी लगा ले। ईसा कहते मैं भूखा हूँ, मुझे भोजन
- 31:17देते हो, भगवान और पास से गुज़रने वाला व्यक्ति कहता है तुम कहते हो
- 31:24वह मेरा पिता परमदयालु है और तुम मांगने भी लगे उस तरफ शक्तिमान से
- 31:33तो मांगा क्या? भोजन नेक वक्त का जिशू इकट्ठा
- 31:42मांग लो कितने का मांगो बताओ 100 साल 50 साल 200 500 साल।
- 31:542050 साल का तो मांग ही लो, भरोसा है साँझ तक मैं जीऊंगा, मैं मांग
- 32:05तो लूँ, साँझ का भी कमी तो उसके पास नहीं है तुम दाता दाता।
- 32:13और तुम्हारे बाप में पैदा किए जाते हैं मार्कर्स कहते हैं ऐसे
- 32:22प्रमोशन को जो हमें खाने पान नहीं देते, मैंने कहा तुम्हारे बाप के
- 32:27बाप ने दिया। ये धरती बनाई, ये बीज बनाया, ये
- 32:31पानी बनाया, हवा बनाई, सूरज बनाया, तुम्हारे बाप ने बनाया
- 32:39लेकिन तर्क हैं तुम्हें जा चीज़ जाते हैं, सब ठीक सब देता है पर
- 32:46बातों में व्यवस्था की है। पर तुमने तो बीज ही तो बोना होता
- 32:51है, फिर फसल को तुम बढ़ा भी तो नहीं सकते।
- 32:55गेहूं की बलियां तो खुद ही लगती हैं, धान के ऊपर भी खुद लगती हैं।
- 33:01तुमने किया क्या है? सिर्फ ये कहने के मैं हूँ तो
- 33:07मुमकिन है इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन माइ डिक्शनरी और क्या
- 33:14किया तुमने तुमने कुछ नहीं किया तुम बातें करने में मैं माहिर हो,
- 33:23दक्ष हो और ध्यान रखना। बातें करने में लक्ष्य हो रहोगे,
- 33:29लूट लोगे, राज़ कर लोगे? लेकिन संतों से पूछो राज़ क्या
- 33:36होता है? राज़ दो तरह के होते हैं दिमागों
- 33:41पर राज़ किया जाता है दंड से। डंडा दिखा के?
- 33:48और राज़ तो कृष्ण भी करते हैं लेकिन वो हरदियों का राज़ करते
- 33:51हैं और 5000 साल पहले का व्यक्ति वो दिल में ऐसा छा गया कि आज भी
- 34:04उसका नाम? खुमारी मटवा देता है।
- 34:13सुद बिसरा? मौरी रे कर गयो मना की छोरी।
- 34:45सूरीवाला ये होता है राज़ तुम तो चले जाओगे, धुंध भी नहीं रह जाएगी
- 34:57ध्यान रखना राज़ वो है। जो दिलों पे छा जाए व्यक्ति
- 35:04मिटाये से न मिटे राज़ कृष्ण जैसा राज़ सरजते हैं प्रेम की लीला
- 35:14प्रेम से ही दिलों में जगह बनाई जाती है और जो प्रेम करता है वो
- 35:20ही राज़ करता है। ध्यान रखना कृष्ण ने प्रेम किया
- 35:28तुम तर्क उठा सकते हो तुम स्वतंत्र हो बुद्धि तुम्हारी तर्क
- 35:34तुम्हारा शब्द तुम्हारे लेकिन आज भी वो।
- 35:42हृदयों पे राज़ करता है आज भी भगवान राम हृदयों पे राज़ करते
- 35:50हैं उसका जीवन कितना ही कष्ट भरत है, ये होता है राज़ हृदयों पे
- 35:59राज़ करना राज़ होता है। मस्तिष्कों पे राज़ तो राजनीतिक
- 36:03करते हैं, वो तो तानाशाह किया करते हैं और तानाशाहों को जो हल
- 36:07होता है वो तुमने देखा कभी किसी तानाशाह को उसका आश्रय देखा आपने?
- 36:20अगर इस जन्म में ठीक मौत मर गया, अटैक आ गया और मर गया, लेकिन अगले
- 36:26जन्म किसने देखे हमने देखा है, हमसे पूछो।
- 36:33बहुत से बातों का जवाब आपके तथा कथित बुद्धिमान व्यक्ति नहीं दे
- 36:39सकते। हम देंगे उसका जवाब तुम कहते कागज
- 36:44की लेखी और मैं कहता आँखों देखी कबीर है, भरोसा है शाम का मांग तो
- 36:57लूँ मेरा बाप है, मैं उसका ब्यारा पुत्र हूँ।
- 37:04तुम बताओ और वो लाजवाब हो गया, चला गया अपना माता प्रसंग पे जाने
- 37:16से पहले थोड़ी सी चर्चा कर लें 5 मिनट मैं चाहता हूँ।
- 37:25कि दुनिया समाज मुक्त हो जाये। अब इन बातों को 5 मिनट की इन
- 37:33बातों को ध्यान से सुन लेना दुनिया समाज मुक्त हो जाये, कोई
- 37:42समाज ना हो, व्यक्ति हो। व्यक्ति हो, व्यक्ति कोई जाति न
- 37:51हो, कोई धर्म न हो, व्यक्ति हो, वही लाल खून सब के रबों में
- 37:59दौड़ता है। और जब तुम मरने के कगार में होते
- 38:06हो, तुम नहीं पूछते ये शूद्र का कूण या ब्राह्मण का कूण तब तुम
- 38:15भूल जाते हो और तुम्हारी ये सड़ी हुई खोपड़ी जब ठीक हो जाती है तो
- 38:23फिर से याद कर ले। पुनः मैं कहता हूँ समाज को बदलना
- 38:31नहीं है। ध्यान को लोगों ने बहुत नए नए
- 38:38मोडोस दिए हैं। बदल डालो समाज को नहीं, मैं कहता
- 38:41हूँ समाज को खत्म कर दो। समाज नाम की चीज़ व्यक्ति के
- 38:46दिमाग पर पहुँच मेरी जिन बातों को जान से सुन और चाहे अज्ञात वादी
- 38:55हों, चाहे संसार वादी हों, दोनों के काम पड़ेंगे।
- 39:03समाज नाम की चीज़ खत्म कर दो समाज एक बोझ है क्या कहेंगे लोग?
- 39:12कुछ भी कहें तो पर दुनिया चलेगी कैसे दुनिया?
- 39:22कानून में चलेगी कानून है तू समाज की कोई आवश्यकता भी कहाँ है बताओ
- 39:32और समाज कानून एक सबके लिए कानून एक कोई चोरी करेगा।
- 39:43कोई कतल करेगा, सबके ऊपर धारावाह ही लगेंगी और मैं यह कहता हूँ, जो
- 39:53यह राष्ट्रपति का पद यह समाप्त हो जाना चाहिए कोई भी व्यक्ति।
- 40:01व्यक्तियों के ऊपर परमात्मा की तरह नहीं बैठना चाहिए क्योंकि ये
- 40:06एक सच्चा परमात्मा बैठा है, राष्ट्रपति मनुष्य है और मनुष्य
- 40:15की अपनी सीमाएं होती हैं। हो सकता है कि वो किसी से मोह भी
- 40:19कर ले, किसी को माफ़ भी कर ले। समाज को खत्म करना है राष्ट्रपति
- 40:28की पदवी, समाप्त करनी है राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की जगह
- 40:33राष्ट्रपति करतूत जैसे अमेरिका में होता है।
- 40:37ये क्यों बिठा रखा है हमारे सर के ऊपर तुमने दया मुझे दया आ गयी अरे
- 40:48भाई कमाल हो गयी ये क्या नौटंकी है ये नाटकबाजी?
- 40:58हमारे पंजाब के यानी जयराज सिंह जी राष्ट्रपति बन गए और
- 41:05राष्ट्रपति बन गए। उनका पहला वक्तव्य क्या था?
- 41:08अगर इंदिरा गाँधी कहेंगी झाड़ू फेरो तो मैं झाड़ू कर दूंगा जी
- 41:13राष्ट्रपति बड़ी जगत नहीं हुई अरे तू सर्वोच्च पद के ऊपर बैठने जा
- 41:21रहा है, ये क्या शब्द हुए तू गोला है या राष्ट्रपति?
- 41:30लेकिन लोग? जीव लप लपाती हैं, बस किसी तरह पद
- 41:36भी मिल जाए, समाज समाज समाप्त कर दो।
- 41:45वैसे भी समाज कानून एक समाज, एक नहीं ऐसे भी समाज हैं जहाँ भाई
- 41:54बहनों की। चचेरे भाई बहनों की शादी होती है।
- 42:03अगर किसी ने बनाई थी कि भाई बहनों की शादी नहीं होनी चाहिए।
- 42:06इट वास् साइंटिफिकल बैठ क्रोनोसोंस का एक।
- 42:10बहुत बड़ा पैमाना है, लेकिन अभी नहीं समझाऊंगा बड़ा प्रसंग तो
- 42:14पहले ही लंबे होते जाते हैं। प्रसंग में से प्रसंग क्रोमोसोम
- 42:21के हाइटेरी कैरेक्टर में आ जाते हैं।
- 42:24इसलिए रोका गया था और कोई पुण्य पाप की बात नहीं थी।
- 42:35और कोई कहता तो ये पाप है अपने ही भाई के साथ भाग गई लड़की भाई
- 42:43प्रेम तो प्रेम है, प्रेम किसी को देखता है, नींद ना बेखे बिस्तरा
- 42:55नींद बिस्त्री को नहीं देती। भूख न वेखे बात और जो भूख है वो
- 43:01बात नहीं देखती कि क्या है बस भूख मिटानी मौत न वेखे उम्र मृत्यु
- 43:13कभी उम्र नहीं देखती। जी 1 दिन का है या सुसाल का है
- 43:21मौत न विखे उम्र मुकेश इश्क न विखे जात इश्क जात को नहीं देता
- 43:33नींद न विखे मिश्रा आज नींद खो गई।
- 43:36गोलियां ले के भी तुम्हें नहीं नहीं आती ऊख न बिखे पात आज
- 43:41परमात्मा की दी हुई चीजें तुमने सब लूटा, दी ये खाक इंसानी तो बने
- 43:47तुम्हें। परमात्मा की दी हुई सारी चीजें
- 43:54उन्हीं में तो रंगत थी जीने की इसलिए तो आज दुनिया इतनी बेरंगत
- 44:00में परमात्मा की बनाई चीजें तुमने खत्म कर दी नींद तुमने खो दी भूख
- 44:08तुमने खो दी भूख न विखे पात। मौत न वेखे उम्र इश्क न वेखे इश्क
- 44:21तुमने खो दिया प्रेम तो प्रेम होता है।
- 44:30लेकिन यहाँ तड़क तड़क तड़क करके तुम्हारी मान्यताएँ टूटती हैं
- 44:36इसलिए बड़े गुस्से में होते बाबा तुम्हें मार देंगे।
- 44:39मैंने कहा आओ भी कायर हो अब इसके बाद क्या?
- 44:46500 साल जीना मैंने। मुकादू काम 1 दिन तो मुकेगा ही
- 44:52देखो मुझे ये भ्रम नहीं है कि मैं सारी उम्र जीऊंगा, जीसको होगा,
- 44:58उसको होगा। मैं तो ये जानता हूँ कि ये शरीर
- 45:04बस हार्ट पंप करने से रोका होगा। हार्ट रेस्ट होगा चल मैं जानता
- 45:17हूँ और आदमी की आँखें सूरे, मैं बखूबी जानता हूँ मुझे कोई भ्रम
- 45:26नहीं। समाज को खत्म कर दो, राष्ट्रपति
- 45:36के पद को समाप्त कर दो, ये असमानता है, मनुष्यता के जीवन के
- 45:39ऊपर कलंक है, एक व्यक्ति की अंतरित नहीं।
- 45:46नहीं खबर होनी चाहिए कि जब सारे न्याय प्रणाली ने कह दिया कि ही
- 45:51शुड बी हैं तो एक व्यक्ति कह दे कि मैं क्षमा करता हूँ तो एक केस
- 46:02आ गया ज्ञानी जीके पास। हमारे पंजाब के थे, पास के गांव
- 46:12संधवा के थे तो उन्होंने पेटिशन डाल दी।
- 46:22आप मेरी सजा को माफ़ कर दीजिए कर सकते हैं।
- 46:28उन्हें सजा माफ़ ने की वापस कर दिया।
- 46:32फिर दूसरी बार फिर पैटिशन लगाई कि आप माफ़ कर दीजिए, कर सकते हैं
- 46:37तुम्हारा क्या जानता है मैं और जी लूँगा पांच सर सर नहीं माफ़ की।
- 46:45लेकिन वो भी आगे पक्का था। वो कहता है कि आपने राष्ट्रपति
- 46:53महोद है, आपने मेरी सजा माफ़ क्यों नहीं की तो ज्ञानी जैल सिंह
- 46:59बोले, वैसे तो मैं। जवाबदेह नहीं, लेकिन लेकिन मानवता
- 47:08बस क्योंकि तुम जा रहे हो ये प्रश्न साथ ले के न जाओ कि मैंने
- 47:15तुम्हें इसलिए माफ़ नहीं किया कि मेरे भीतर तुम्हें क्षमा करने का
- 47:24भाग नहीं आया, दया नहीं आई, दयालुता आई नहीं वो दयालु ने कृपा
- 47:33की नहीं, आगे वो बुजुर्ग था। हम कहते, राष्ट्रपति महोदय, वैसे
- 47:42तो मैं पूछना भी नहीं चाहता, लेकिन क्या मैं पूछ सकता हूँ कि
- 47:49आपको मेरे ऊपर दया क्यों नहीं आई, तो राष्ट्रपति महोदय कहते हैं।
- 47:59दया क्यों नहीं आई इसका मेरे पास जवाब कुछ नहीं, बस दया नहीं आई तो
- 48:04नहीं आई। वैसे मैं बताने का जवाबदेही का
- 48:11बहुताज नहीं हूँ, एक व्यक्ति को इतनी समर्थ मत दो।
- 48:21किसी दिन कानून का दुरूपयोग हो सकता है।
- 48:28मनुष्य मनुष्य मनुष्य के भीतर पशुता भी है, मनुष्य के भीतर
- 48:33राक्षस भी है, कभी जग सकता है? राष्ट्रपति सीधा राष्ट्रपति पद
- 48:42हो, प्रधानमंत्री की जगह जैसे अमेरिका में होता है प्रधानमंत्री
- 48:50का पद समाप्त कर दिया जाए, राष्ट्रपति हो बस।
- 48:56कोई मानवता से ऊपर क्षमा करने वाला न हो, क्योंकि मानव के ऊपर
- 49:01क्षमा करने वाला मानवता में कोई नहीं होता।
- 49:05अमानवता से मानव से ऊपर जो जो जो दृष्टा है जो साक्षी है सबका।
- 49:16और सबके भीतर मौजूद है सर्वव्यापी सदा अलिपा तोहे संग समाई।
- 49:24जेता कित्ता तेतता नाउ बैन ना मैं ना ही कोठां हर जगह जो मौजूद है,
- 49:30वह न्यायकारी है, वही रहम कर सकता है।
- 49:35वह रहम करे तो करे लेकिन व्यक्ति रहम करे, ये जश्न दी नहीं।
- 49:45बात करना तो हो ही है, जो मेजोरिटी है।
- 49:515149 का ही भेद होता है। लेकिन 49 सदा ही मारे जाते हैं और
- 49:59ये तुम लोकतंत्र को, लोकतंत्र को तुम न्याय पढ़ना नहीं जानते हो,
- 50:08तुमने शायद कभी सोचा ना होगा। 51 वाला राज़ करता है, 49 वाला
- 50:13झांकता रहता है। 2% का फर्क है तो 49 लोगों ने जो
- 50:22अपनी इच्छा ज़ाहिर की, उनका हनन तो हो गया, कैसा लोकतंत्र हो पाई?
- 50:28यह तो प्रतंत्र तो हुई, हम जैसे नहीं चाहते थे उसे वोट नहीं डाला।
- 50:34और वह चुन लिया गया। क्यों बहुत संख्या उधर थी।
- 50:37इसीलिए लोकतंत्र को मैं सदा ही गलत कह रहा हूँ।
- 50:42लोकतंत्र कभी भी ठीक नहीं होता। इसके एवज में इसके समान अंतर क्या
- 50:52होना चाहिए? देखिए वक्त पहले ही बहुत ज्यादा
- 50:55हो गया है। ये 51 मिनट की बढ़िया हो गई।
- 51:02समाज को खत्म कर दो पूंजी को खत्म।
- 51:04कर दो जमाने में मारे। जमा कैसे के जमीं खा।
- 51:23गई आसमान कैसे कैसे? जमाने ने मारे जमा, कैसे कैसे?
- 51:45मैं तुम्हें ये आश्वस्त करता हूँ। आश्वस्त करता हूँ मेरी बातों को
- 51:55लागू तो नहीं किया जाएगा। मैं जानता हूँ क्योंकि कुछ लोग भी
- 52:00लोगों के हाथों में पकड़ है। ग्रिप है तुम्हारी गर्द ने पकड़
- 52:04रखी है। अब मुझे मरवा सकते हैं निश्चित।
- 52:09और मैं तो मरा मरा, मैं मरा मरा। लेकिन पूँजीवाद को समाप्त कर दो
- 52:23पूंजी समाप्त कर दो वाद को नहीं समाप्त करना है।
- 52:26पूंजी को खत्म कर दो ये नई बात का है।
- 52:35अन्न धरती पैदा करती है, जरूरत की चीजें फैक्टरीज़ पैदा करती है, आज
- 52:42बनाते हैं मनुष्य कल बनाएंगे रोपोट क्या करेगा?
- 52:46मनुष्य बेकार हो जाये, अराजकता फैली के फैली।
- 52:56पूंजी को समाप्त कर दो तुम देख लेना सोच लेना बैठ के आराम से
- 53:04प्रबुद्ध लोग हैं हमारी धरती पे अभी अभी उम्र ही नहीं है धरती
- 53:09प्रबुद्ध लोगों से ग्रस्त। और जीस दिन बाहर प्रबुद्धजनों का
- 53:17काम हो गया। उस दिन धरती अभी प्रबुद्ध, अभी
- 53:25समझने सोचने वाले, न्याय करने वाले लोग हैं।
- 53:33इसलिए ये ऊपर के पद समाप्त होने चाहिए।
- 53:35मैंने कहा, ये राज्यपाल भी नहीं होने चाहिए।
- 53:41जब चीफ मिनिस्टर चुन लिया हमने। जब तुम एक तरफ जा के कहते हो कि
- 53:46जनता को हमने जनता ने हमें चुना है तो राज्यपाल किसने चुना है?
- 53:54राज्यपाल को तो किसी ने नहीं चुना जनता का चुना हुआ प्रतिनिधि सीएम
- 54:00होता है, चीफ मिनिस्टर प्राइम मिनिस्टर बिल्कुल ठीक।
- 54:04जहाँ तक ही सतह महत्त्व होनी चाहिए और यहाँ तक ही शक्ति
- 54:08महत्त्व होनी चाहिए, उससे ऊपर कोई सिर के ऊपर न बैठो वैसे ही भी जकट
- 54:13पुतली होती है। हसा मत करो।
- 54:21पूंजी को समाप्त कर तो देर शुड बी $9 ₹9 नौ रूबर कुछ नहीं होना
- 54:29चाहिए। मैं संसार की बात कर रहा हूँ।
- 54:33मैं जानता हूँ कि अमीर लोग कभी नहीं चाहेंगे।
- 54:38ट्रम्प के डॉलर खत्म हो। गरीब लोग चाहेंगे कि उनकी करेंसी
- 54:46अगर खत्म हो जाए कोई बात नहीं लेकिन अमीर ही तो खत्म नहीं होना
- 54:52देना चाहते, ये पूँजीवाद को कौन नहीं खत्म होने देना चाहता?
- 54:56तुम्हें पता है जिनके पास पैसा है?
- 55:00प्रचुर मात्रा में धन है और पूंजी बात को समाप्त नहीं होने देना
- 55:04चाहिए। लेकिन एक बात तुम्हें आखिर की बता
- 55:08दूँ, फिर मैं अपना प्रसंग शुरू करूँगा।
- 55:12वैसे तो 1 घंटे के करीब हो गया है लेकिन क्या करूँ मेरी अपनी
- 55:17मजबूरी? बाप संपत्ति को बनाकर संपत्ति के
- 55:29बीच में ठहर गया साक्षी बन के जीस, हथ जोड़ कर वेख सोई नानक
- 55:38उत्तम नीचे न कोई। तुम प्राइम मिनिस्टर बन जाओ, तुम
- 55:48राष्ट्रपति बन जाओ, तुम दुनिया के माल को बन जाओ, सिकंदर बन जाओ एक
- 55:53बात उसके हाथ में क्या आनंद सुखा मस्ती सोर।
- 56:05वो मदमस्ती, वो खुमारी वो उसके हाथ में और जिसके जीवन में खुमारी
- 56:11नहीं, वो जीवन लोहार की धोकनी की तरह है, सांस लेता है।
- 56:22श्वास छोड़ता है एक तो मैं शब्द बताऊँ किसी समझदार ने ये जाद किया
- 56:30लोग लेकिन जिसने ये जाद किया वो भी इसका अर्थ नहीं जानता दुनिया
- 56:35मंदी है, जोरन है कमजोरन। ज़ोर शब्द का अर्थ होता है आनंद।
- 56:42मैं पहले भी व्याख्या कर चुका हूँ अगर तुम आनंद में हो तो दुनिया
- 56:50तुम्हें मानेगी। बुद्ध आज तक लोगों के हर्दा पे
- 56:56राज़ करते है। कृष्ण आज तक लोगों के हृदय में
- 57:01राज़ करते हैं। क्यों आनंद था?
- 57:08राम ने कितने कष्ट सहे? शारीरिक, मानसिक लेकिन हृदय में
- 57:12आनंद था, इसलिए मर्यादा पुरषोतम कहलाया।
- 57:19मर्यादाओं से भरे हुए, लेकिन आनंद से भी भरे हुए हैं तो मैं कहता
- 57:27हूँ तुम ज़ोर को पैदा करना, उसको आनंद को पैदा करना और कितने भी
- 57:32तुम जोरदार हो जाओ बाहर से। अगर भीतर का वो आनंद तुम्हें नहीं
- 57:39आया तो जिंदगी निराश हो गई। तुम एक होता ना गन्ना वो चाहे 50
- 57:46फुट ऊँचा चला जाए लेकिन बीच में उसके रसन आएगा तो फिर क्या करोगे?
- 57:55जिससे गन्ने के भीतर जैसे ईख के भीतर मिठास नहीं और फूंक का गन्ना
- 58:01क्या करोगे उसको तुम चूक पाओगे ना तो जिंदगी ऐसे ही तुम्हारी है
- 58:12बढ़ते ही चले जाते हो। बढ़ते ही चले जाते हो, भूख की तरह
- 58:17रस नहीं और रस के बिना तुम राष्ट्रपति हो जाओ, तुम प्राइम
- 58:23मिनिस्टर हो जाओ, तुम चीफ मिनिस्टर हो जाओ, तुम दुनिया पर
- 58:26राज़ करो, तुम डायलर चलाओ, तुम मेरे पास चलाओ लेकिन इसीलिए तो
- 58:32भारत भूमि। विशव गुरु कहलाई, तुम्हें पता
- 58:37नहीं तुम विशव गुरु किसी और ढंग से करना चाहते हो, लेकिन हम विशव
- 58:44गुरु जीस रूप में थे उस रूप में आज भी हैं आज भी हमारे।
- 58:52कर जदा गदा कोई व्यक्ति उनतनों को छू लेता है, जहाँ परमरस बरस रहा
- 58:58है और उस परमरस को पीकर सबर में आ जाता है।
- 59:05व्यक्ति। कह तू कभी?
- 59:14सुनो भाई साधु कहत कवि सुनो भाई साधु।
- 59:31सा हब मिलहैं सबूरी मैं सबूरी मैं मन्नड़ राग मेरो।
- 59:50फकीरी में फकीरी में मन्नड़ोला, जो मेरा रो रो।
- 1:00:03तुम कितने भी ऊंचे कद के हो जाओ, फौके गन्ने की तरह एक की तरह।
- 1:00:09अगर तुम में रस नहीं है तो बस उचाई ही उचाई देखेगी मिठास नहीं
- 1:00:16होगी। कबीर गरीब है तुम्हारे हिसाब से
- 1:00:21हम विष्णु गुरु कर भी थे आज भी लेकिन उस दृष्टि से जैसे।
- 1:00:27दृष्टि से भीषण गुरु उकलते उसी दृष्टि से आज कभी कभी हमारे भीतर
- 1:00:38एक हीरा जन्म पड़ता है जो सरस से सराहपुर होता है।
- 1:00:47विदेश की धरती पर नहीं होता। मेरे भाई बहन कहा करते हैं
- 1:00:51अमेरिका चले गए। वो कहते हैं भाई तुम मिलते नहीं
- 1:00:55हैं क्या? बात आपस में इकट्ठे गए थे।
- 1:00:59यहाँ तो बड़े प्यार से रहते थे तो भाई बहन कहते हैं भाई क्या बताएं
- 1:01:04आपसे? अमेरिका में जाके खून से फायदा हो
- 1:01:07जाता है। उनकी बात मैं समझता हूँ जो डालरों
- 1:01:13की कमाई में उलझ गया। जो डालरों की खनक में उलझ गया,
- 1:01:20उसके भीतर रश उत्र का कैसे? तुम एक नंबर के अमीर तो हो सकते
- 1:01:25हो लेकिन फकीर नहीं हो सकते, कबीरी नहीं आ सकती, तुम में फकीरी
- 1:01:31नहीं आ सकती, तुम्हे अमीरी आ सकती।
- 1:01:33है जो सुख पालम हराम भजन में। जो सुख पायो राम भजनों में वो सुख
- 1:01:56नहीं अमेरी में। अमीरी में मनड़ लाग्यो मेरो।
- 1:02:08राम? फकीरी में फकीरी में मनड़?
- 1:02:18लाग्यो मेरो राम। वक़्त भी दिख ही जाता है।
- 1:02:31क्या करें इतनी कैपेसिटी तुम में नहीं कि तुम सुन सको, मैं तो बोल
- 1:02:41दूंगा। लेकिन तुम सुन न पाओगे तो खत्म
- 1:02:57होनी चाहिए। मुद्रा करेंसी छोड़ डवालिश करेंसी
- 1:03:08को खत्म कर दो और तुम देखोगे, जीतने पाप अनाचार।
- 1:03:13करेन्सी के कारण होते हैं। सब कॉम्पिटिशन के कारण होते हैं।
- 1:03:20आज एक व्यक्ति नारे लगा रहा है समाजवाद के बराबरी होनी चाहिए,
- 1:03:25बराबरी होनी चाहिए। ये कैसा तमाशा है?
- 1:03:30यह तो अन्याय है। उसको तुम पांच 7,00,00,000
- 1:03:33₹10,00,00,000 दे दो, एक अच्छा सा महल दे दो, सुंदर सी स्थिति दे दो
- 1:03:37वो चुप हो जाएगा उसकी डिमॅंड वास्तव में ये थी बात कर रहा था
- 1:03:48समाजवाद की। डिमॅंड ये थी ऐसी ऐसी डिमॅंड रखते
- 1:03:57हैं लोग मेरा कशिश्य था मुझे कहता उस्ताद जी मैं मरना नहीं चाहता
- 1:04:03हूँ, लेकिन मरते वक्त मैं करोड़पति रहना चाहता हूँ।
- 1:04:07करोड़पति हो के मर्म। मैंने का पुत्र कल्याण मस्त तुम
- 1:04:12करोड़पति होकर ही मरोगे। मुझे सदा से वरदान रहा है क्योंकि
- 1:04:19मैं एक स्थान पर बैठा हूँ और जो व्यक्ति 7 साल तक एक स्थान पर बैठ
- 1:04:24जाता है, उसे बात सिद्धि मिल जाती है।
- 1:04:29बशर्ते वो भीतर से भी शांत हो। बाहर से तो अपाहिज भी 7 साल बैठ
- 1:04:36सकता है। जिसके पोलियो हो गया है, वो भी
- 1:04:41बैठ सकता है। जिसके अदरंग हो गया है, वो मजबूरी
- 1:04:44है, वो मजबूरी में बैठ रहा है, खुशी से बैठे सारे अंग सलामत हो।
- 1:04:49मेरे सारे अंग सलामत हैं और खुशी से बैठो, मैंने कहा पुत्र तुम
- 1:04:58अरबपति करोड़पति हो के मरोगे, ठीक है हस्ता जी और वह मरा और
- 1:05:06करोड़पति हो के मरा। लेकिन क्या उम्र यही 45 साल की
- 1:05:14उम्र में 50 साल की उम्र में मरनों की उम्र में होता?
- 1:05:19माइकल जैक्सन ने 150 साल जीने का इंतजाम किया।
- 1:05:24सब कुछ था उसके पास मरा 50 साल में।
- 1:05:27आम आदमी भी 50 साल मैं नहीं मरता मेरे पास रोज़ केस आ जाते हैं
- 1:05:34बाबा वो मरता ही नहीं है। मेरी माँ नहीं मरती, फिर याद कर
- 1:05:39दीजिए। मैंने कहा मरने की फिर याद करो
- 1:05:42भगवान क्या करो, बुरा सा लगता है, देख लो।
- 1:05:47कर दो बाबा दुख क्या कहें तो क्या कहूँ भगवान इसे मर दो उल्टा न हो
- 1:05:56जाएगा थोड़ा सा बुरा लगता है नहीं नहीं कर दो बाबा तो कर देता हूँ,
- 1:06:04मजबूरी है क्या करूँ? व्यक्ति नहीं चाहता।
- 1:06:09मैं दुख हो व्यक्ति के तो मर जाऊं।
- 1:06:13इससे तो अच्छा है समाज को खत्म कर दो।
- 1:06:20समाज की मान्यताएँ वैसे भी पहले से ही डिफरेंट हैं।
- 1:06:26सभी समाजों की समाजों की छोड़ो घरों की व्यवस्थाएँ अलग है।
- 1:06:32एक घर ऐसा देखा मैंने जो अभी भी भगवान राम के पथ चिन्हों पर चल
- 1:06:36रहा है क्या बड़े का मान होता है। हम बड़ा हैरान हो बड़ों का मान
- 1:06:46होता है तो फिर भगवान राम के पद चिन्हों पर चलते हो, लेकिन चलते
- 1:06:51तो है नहीं। कहते कैसे?
- 1:06:53मैं कहा, भगवान राम तो छोटों के लिए राज़ छोड़ के घर छोड़ के
- 1:06:58वनवास चले गए थे। तुम तो निकलते नहीं, तुम तो पेंशन
- 1:07:01खाते हो। भगवान राम ने छोटों का मान रखा
- 1:07:10इसलिए दिलों में छाये रहे। आज भी हमारे दिलों पे राज़ करते
- 1:07:15हैं। हिटलर कभी राज़ ना कर सकेंगे।
- 1:07:19मसोलनी कभी राज़ न कर सकेंगे स्टालिन कभी राग न राज न कर
- 1:07:24सकेंगे नफरत फैलाने वाले कभी राज़ न कर सकेंगे।
- 1:07:28प्यार बांटने वाले सदा राज़ करते हैं और परम विराट प्रेम जिन्होंने
- 1:07:33बांटा राम ने बांटा, कृष्ण ने बांटा वो आज भी हमारे हृदय में
- 1:07:37राज़ करते हैं। ईसा ने बांटा वो आज भी आंधी
- 1:07:41दुनिया ईसाईयत को मानती है हजरत को मानती है।
- 1:07:46मुहम्मद को क्यों उसने प्यार बांटा?
- 1:07:52उन मूर्खों की बात अलग है। वो उनमें से ही आती हैं।
- 1:08:00आप समझ जावे जो सिर्फ जिंदगी का भारत होते हैं, गधे होते हैं।
- 1:08:12प्रश्न फिर झुक? बिल्कुल अगले प्रवचन मैं यहाँ से
- 1:08:18शुरू करूँगा बड़ा प्यारा प्रश्न है तुम्हारा प्रश्न है, लेकिन बीच
- 1:08:23में बहुत कुछ आ जाता है तो, लेकिन आज चलो हम यहाँ पर तो आ गए।
- 1:08:29करन सिंह को खत्म कर दो कॉम्पिटिशन खत्म हो जाएगा?
- 1:08:34प्रबुद्ध व्यक्ति जनम होंगे, प्रबुद्ध व्यक्ति राज़ करेंगे
- 1:08:39यानी व्यवस्था संभालेंगे। राज़ का मतलब मैनेजमेंट प्रबुद्ध
- 1:08:47व्यक्ति, काबिल व्यक्ति मैनेजमेंट करें।
- 1:08:52स्वर्ग बन जाएगा और सारा विश्व कल्पना तो ठीक की थी हमारे रिक्शो
- 1:08:58ने बसुधैव कुटुंब अगर वसुदा एक कुटुंब की भांति हो जाए तो क्या
- 1:09:04मज़ा आएगा? होता नहीं क्या करे जाने के साथ
- 1:09:08बैठे हैं? केम जॉन जॉन जैसे?
- 1:09:12वो होने नहीं देते उनके निजी स्वार्थ हिटलर जैसे मैं सोलो नहीं
- 1:09:21जैसे वो कभी राज़ नहीं कर सकेंगे हमारे वर्जन पे दिमागों पे राज़
- 1:09:25कर के कर जाएंगे ये भी कर जाएंगे और भी आएँगे।
- 1:09:31लेकिन तुम व्यवस्था को मत बदलो। तुम समाज समाज को मत दो, समाज को
- 1:09:38मत बदलो। समाज खत्म कर दो करेंसी खत्म कर
- 1:09:42दो करेंसी ने आज तक। दुखों के सिवा पापों के सिवा
- 1:09:48कॉम्पिटिशन के सिवा नफरत के सिवा आगे जने के सिवा कुछ नहीं दिया।
- 1:09:54किसी को ये लुटेरे पैदा होते हैं। करेन्सी के कारण डाकू पैदा होते
- 1:09:59हैं। करेन्सी के कारण करेन्सी खत्म हो
- 1:10:02गई तो डाकू किस चीज़ का? करेंसी को खत्म करो फिर तुम मेहनत
- 1:10:18करोगे इंटेलिजेंसी को बढ़ाने के लिए फिर सेवा भाव आएगा।
- 1:10:26फिर तुम आया एस करोगे। वो कॉम्पिटिशन के कारण नहीं
- 1:10:30करोगे, वो सिर्फ मनेजमेंट के कारण उसको कहते हैं देशभक्ति फिर तुम
- 1:10:37देश की भक्ति करोगे, कुछ कमाना नहीं पता है।
- 1:10:41आज भी पता है के खाने तो वही चार फूल के हैं।
- 1:10:47लेकिन आज ये बीच में चीज़ आड़े आ गई।
- 1:10:50मूर्खों ने कागजों की किस्तियां बना दी इसके ऊपर सवार हो जाओ
- 1:10:54भाविसागर पार कर जाओ, करो राधे राधे करो, राम राम भाविसागर से
- 1:10:59पार हो जाओ, कैसे हो जाओगे भाई? लेकिन आज तक किसी व्यक्ति ने मुझे
- 1:11:03बताया। मैंने बहुत बार जवाब मांगा लेकिन
- 1:11:09बताया किसी ने नहीं राम राम करने से राधे राधे करने से कैसे कागजों
- 1:11:16की नामी कभी भाव सागर को पार करते हैं, इतने तूफ़ानी इतने थपेड़े
- 1:11:21पड़ते हैं, इतनी आंधियां चलती हैं।
- 1:11:25और तुम सुबह 2:00 बजे जाके लोगों की नींद खराब करते हो।
- 1:11:30इट शुड बी बैंड ऑल ओवर दी वर्ल्ड। किसी को अधिकार नहीं होनी चाहिए।
- 1:11:35किसी को नींद खराब नींद, परमात्मा की देन भूख परमात्मा की देन।
- 1:11:44तुम्हें अगर परमात्मा ने दंडित कर दिया तो तुम्हें नींद नहीं आती,
- 1:11:49मौत का 1 दिन वयन है। नींद क्यों?
- 1:11:52रात भर नहीं आती ये पापों का परिणाम है, पापों का परिणाम है,
- 1:11:59देखो भोगना पड़ेगा मैंने किया मैं तुमने किया तुम भोगो।
- 1:12:05और देखो इन लोगों को पहले परमात्मा दंडित कर रहा है।
- 1:12:09इससे ज्यादा क्या करें? कैटिनिस तो फाइल कर दो राधा रानी
- 1:12:13की कृपा से जीवंत है गलत कहा कृपा है डायलीसिस की डायलीसिस कराना
- 1:12:21बंद कर दो एक महीना। फिर राधा रानी का चमत्कार
- 1:12:24देखेंगे। ऐसे सब्जवाग मत दिखाओ हमें ये
- 1:12:34मूर्ख पंथियों के मूर्ख धारणाओं में मत उलझाओ इनको तोड़ने वाले
- 1:12:40अभी जिन्ना। अरे अब तो सुधर जा एक व्यक्ति
- 1:12:50अंधा है और धर्माचारी और बाबा कहा करते हैं जिसने इतना घोर अनर्थ
- 1:12:59किया हो। अपने पिछले जन्म में परमात्मा के
- 1:13:02पास इससे बड़ा कोई जंड नहीं है कि उसकी आँखें छीन रहे।
- 1:13:06आँख है तो जहान है, दांत है तो स्वाद है और वो धर्माचार्य बन रहा
- 1:13:15है। धर्म का उपदेश दे रहा हूँ दंड तो
- 1:13:21दे दिया इससे डरो तुम लोगों को कहते हो।
- 1:13:25अगर हमारे भीतर उबाल आ गया तो उससे तुम ना बच पाओगे, फिर संत
- 1:13:30कैसे हुआ है, संत कैसे हुआ है, संत का विश्राप देता है, संत का
- 1:13:40हृदय इतना शांत होता है, वह तो दूसरों के दुख से।
- 1:13:45निकल जाता है। संत हृदय नवनीत समान।
- 1:13:57मक्खन की तरह को मिला होता है जो श्राप दे।
- 1:14:02वो शांत थोड़ा ही होता है तुम्हारा मन क्यों प्रचंड आवेश
- 1:14:07में आएगा संतत्व वे कुछ शाक्य लगता है, ऐसे बातें मत मत किया
- 1:14:18करो। अगर परमात्मा ने दंड दिया है तो
- 1:14:22भुगतो आराम से आगे के लिए फिर व्यवस्था बना रहे हो फिर गुमराह
- 1:14:28कर रहे हो देश को दुनिया को या घोर बाप है बिना जाने या फिर जवाब
- 1:14:34दो कैसे मिलेगा? राधा करने से राम करने से, जाहिद
- 1:14:43शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर या वो जगह बता जहाँ खुदा का घर न हो
- 1:14:49लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं है। इसका कहते हैं तो वो सर व्यापी है
- 1:14:52लेकिन शराब नहीं पिए। फिर रह गया अगले प्रवचन में।
- 1:14:59धन्यवाद।