Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Apr 25 - ध्यान कैसे करें? ध्यान करते करते स्थितिप्रज्ञा कैसे होना है? अरदास किस तल पर सुनी जाती है?
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- 0:06प्रभु के दरबार में किसकी फरियाद सुनी जाती है?
- 0:23कमलकांत अरोरा जो प्रभु दरबार तक पहुँच जाता है।
- 0:41जो थोड़ा सा भी दूर रह गया। बुद्धि का तल परमात्मा से देखने
- 0:54में बहुत ज्यादा दूर नहीं है। लेकिन इस दृष्टि से बहुत ज्यादा
- 1:01दूर है। वहाँ पर परमात्मा के पास उसकी
- 1:13पुकार नहीं पहुंचते और यही सबसे बड़ा अभाग्य है दुर्भाग्य है।
- 1:24बुद्धि की पुकार परमात्मा तक नहीं पहुंचती, इस बात को आप नोट कर लो,
- 1:31लिख लो इसलिए बुद्धि लाक से लाये जैसे तुम संकल्प कहते हो।
- 1:43लोग एक दूसरे को गाली निकालते रहते हैं, वो कहाँ सुनता है, एक
- 1:49दूसरे को श्राप देते रहते हैं, कहाँ सुनता है तो फिर किसकी सुनी
- 1:59जाती है? उसके दरबार में दुर्भाषा जैसे
- 2:03शोक? जो ऋषि पद पर पहुँच गया उसकी सुनी
- 2:12जाती है। बहन ऋषि पद पर कौन पूछता है, जो
- 2:20उसके करीब आ गया? करीब कौन आएगा?
- 2:29जो चलेगा और चलता चलता उसकी अस्तित्व तक पहुंचेगा।
- 2:42अस्तित्व तक पहुंचना उसके करीबी है।
- 2:49वहाँ वो जो कहेगा वो परमात्मा से सीधा सीधा संवाद होगा, उस तल का
- 2:59तुम्हें पता नहीं। गाहे बगाहे।
- 3:05किन्हीं अज्ञात क्षणों में तुम वहाँ पहुँच जाते हो, कभी कभी और
- 3:11तुम्हारी कही हुई बातें ठीक हो जाती हैं, लेकिन तुम इसके भीतर का
- 3:17विज्ञान नहीं समझ पाते। विज्ञान में मैं आज समझा देता
- 3:23हूँ। बहुत बार कहा आज फिर बुद्धि के तल
- 3:31से उतरो, सारी एनर्जी जो तुमने झोंक रखी है, संसार में उसको
- 3:39इकट्ठा करो और अपने अंत में उतर जाओ, धीरे धीरे तुम उस।
- 3:47पॉइंट पर पहुँच जाओगे। बस वो ही प्वाइंट है जंक्चर पॉइंट
- 3:54से नीचे वहाँ पर किसी के भी प्रयास सुनी जाती है क्योंकि सभी
- 4:02उसके बच्चे कोई भी पहुँच सकता है। किसी भी जाति का हो, किसी भी
- 4:11धर्म, सम्प्रदाय का हो, शरीर से गोरा हो, काला हो, कोई भाषा बोलता
- 4:20हो, परमात्मा को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता।
- 4:29सभी उसकी संतती हैं इसलिए ये बाहरी बनावटें ये तुम्हारी हैं।
- 4:40वो ढांचा उसका है। जो उसके पास पहुँच गया उसकी ही
- 4:48बात वो सुनता है और पूरी करता है। पूछा है बाबा कोई उदाहरण देने का
- 4:59कष्ट कर उदाहरण तो रोज़ होती हैं। अभी कल ही मेरे पास एक फ़ोन आया
- 5:09हूँ जानता तो नहीं हूँ, लेकिन मेरा शिष्य है, सुनता है।
- 5:20मुझे बस इतना सा संवाद है। ऐसे अगर सही पूछोगे तो मैं पांच
- 5:29चार लोगों से अतिरिक्त जो मेरे समूह में हैं, उनको ठीक से जानता
- 5:35नहीं। वो कभी दूसरी तीसरी चौथी बार आ भी
- 5:42जाएं तो सच बात ये है कि मैं पहचान नहीं पाता क्योंकि मेरी
- 5:53दृष्टि बाहर नहीं है। 24 घंटे अंतर्दृष्टि में रहने
- 6:01वाला व्यक्ति बाहर की चीजों की पहचान।
- 6:05खो जाती है, पहचान धीमी पड़ने लगती है, फीकी होने लगती है।
- 6:21कल ही मेरे पास एक फ़ोन आया शाम को।
- 6:28नहीं जाने को मैंने उसे उठा लिया। अक्सर मैं उठाया नहीं करता और
- 6:35अक्सर तो ऐसा होता है कि मैं उसके गल पड़ जाता हूँ।
- 6:43तुने फ़ोन किया भैया वॉइस कॉल क्यों किया?
- 6:53मेरी फितरत है, मेरे मौन का कोई चीड़ है ना?
- 7:02क्योंकि उस मौन से मैं आपके लिए इकट्ठा करना है संसाधन जो सारे
- 7:08जगत में विस्तारित होगा। कई बार भूल जाता हूँ, साइलेंट पे
- 7:17नहीं होता एरोप्लेन मोड पे नहीं लगता तो रिंगा जाता है।
- 7:29और कई बार उठाने का दिल नहीं करता।
- 7:33कुछ कुछ ऐसे वक्त भी होते हैं जब मैं उठा लेता हूँ।
- 7:41कल फ़ोन आया, मैंने उठा लिया। उसका नाम लिखा था बलजीत सिंह।
- 7:51बाबा जी अपनी करुण गाथा कह रहा था, मेरी बिटिया है 1213 साल की
- 8:10उम्र है। मौत के करीब है।
- 8:18डॉक्टर घबरा रहे हैं, अब में है नागपाल हॉस्पिटल में है ब्लड
- 8:27प्रेशर, नीचे का 30 ऊपर का 50। हम में घबराहट है, छोटी प्यारी
- 8:36बच्ची है, बच्चियों में तो वैसे ही बहुत ज्यादा होता है।
- 8:55रो रहा था। मैंने कहा कोई नहीं पुत्र मैं
- 9:00क्या कर सकता हूँ, बाबा से फरियाद करता हूँ, मैंने कहा तुम रखो,
- 9:06फ़ोन मैं कर देता हूँ। मैंने बाबा से उस तन पर गया जहाँ
- 9:24फरियाद सुनी जाती है, मैंने कहा बाबा ऐसा है, नाम तो नहीं जानता
- 9:37लेकिन आप तो सब जानते हैं। अबोहर में है नागपाल हॉस्पिटल में
- 9:46है, छोटी बच्ची है, चाहो तो बचा लो।
- 9:57नेपाल के उस कांड के बाद मैंने ये कहना छोड़ दिया कि उसको बचा लो।
- 10:07क्योंकि परमात्मा की कार्यविधि में बाधा उत्पन्न करना भी एक
- 10:15अपराध है, लेकिन अक्सर वह पूरी कर देता है अक्सर।
- 10:27वह रेहद मालिक न करे तो कोई ज़ोर नहीं।
- 10:36और न। गया होता मैं वहाँ तो मैं कर भी
- 10:39ना पाता। मैं ज़रा सोचता हूँ तुम्हारे एक
- 10:47बार हाथ उठाने से किसी का जीवन बच जाए तो हर्जा भी तो नहीं होता।
- 10:59फरियाद तो कर दो। मालिक सुन लेगा वो ऊपर वर्दी का
- 11:07रहमो करीम शुभ है। नहीं सुनेगा तो अभी शुभ है, किया
- 11:19क्या जा सकता है? उसकी वृहदता के आगे नृत्य मस्तक
- 11:24होना पड़ता है। सभी को कितना ही बड़ा क्यों न हो,
- 11:27लेकिन है तो उसकी ही क्रिएशन। तुम बड़े हो सकते हो लेकिन इतने
- 11:36बड़े नहीं। कि हिरण्य के शव की तरह परमात्मा
- 11:40को चैलेंज कर दो कि मैं ही परमात्मा हूँ, एक तल आता है जब
- 11:47व्यक्ति कहता है मैं ही परमात्मा हूँ, लेकिन वह है और यह है इसमें
- 11:53जमीन आसमान का फर्क। यहाँ अहंकार बोलता है कि मैं ही
- 12:00परमात्मा हूँ, वहाँ अहंकार शून्यता से व्यक्ति बोलता है कि
- 12:05मैं ही परमात्मा हूँ। अनल हक अहम ब्रह्मास्त्र।
- 12:24मेरे पास रोज़ ऐसी फरियादियां आ जाती हैं लेकिन ध्यान रखना इतना
- 12:32समझदार तो मैं भी हूँ। व्यर्थ का प्रश्न क्या है और
- 12:40सार्थिक प्रश्न क्या है? मैं बखूबी जानता हूँ।
- 12:55बहुत से लोग तो ऐसे भी कह देते हैं बाबा मेरा पेट दुबता है, मैं
- 13:02कहता हूँ दवाई ले लो डी मैक ले लो ड्रॉट वेरिंग।
- 13:11डाइसाइक्लोमन हाइड्रोक्लाइटेन लो मैं फेनेमे की सिट ले लूँ, ठीक हो
- 13:22जाएगा बस को, पेन का इन्जेक्शन लगवा लो, ठीक हो जाएगा मेरे खुद
- 13:27के पेट में दर्द हो, मैं यहीं लगा लेता हूँ।
- 13:36काहे परेशान करना, अपने ही किये हुए कर्म सामने आ रहे हैं और अब
- 13:46तो भोगने के लिए ही हूँ तो भोग लिया जाए, ख़ुशी ख़ुशी भोग लिया
- 13:52जाए, भोग लेता हूँ। लेकिन तुम अभी इस बात को समझोगे
- 13:59नहीं, दुनिया में सबसे बड़ा अगर अज्ञान है तो अज्ञान ये है कि
- 14:08व्यक्ति प्राप्त तो करना चाहता है खूब मज़े से।
- 14:13उसको मार दिया, उसको काट दिया उस पर जुर्म कर दिया, उसको जेल में
- 14:17बंद कर दिया, उसको सजा दे दी। उसके विरुद्ध व्यर्थ में केस कर
- 14:23दिया। जेलों में ताड़ दिया सड़ाके मार
- 14:27दिया किसलिए सिर्फ? ऊंची पदवी के लिए या अपनी सत्ता
- 14:35को इन्क्रीज़ करने के लिए कैसे 510 साल 20 साल और मिल जाए, मिल
- 14:42जाएंगे भाई बस जनता को उल्लू बनाने का सलेखा आना चाहिए।
- 14:54और वो कोई भी अपराधी टाइप का व्यक्ति जान सकता है।
- 15:01दुनिया को कैसे उल्लू बनाना है तो तुम मज़े से राज़ कर सकते हो।
- 15:12मैंने फरियाद की बस दो क्षण की फरियाद होती है, कई बार घंटों
- 15:21थोड़ा फरियाद करनी होती है और मैं वापस आ गया शाम का ही वक्त।
- 15:38फिर मैंने हमारे साहित्य सेवक रमेश से फ़ोन किया।
- 15:45उसको मैंने बात बताई। ऐसे एक फ़ोन आया बल्कि जीत सिंह
- 15:51अब बहुत से 3050 बीपी गुंजाइश बहुत कम है।
- 16:03जब जान हथेली पर हो तो अपना भी मन होता है छोटी बच्ची अगर थोड़ा जीव
- 16:14न और मिल जाए, खा खेल लेगी अभी उम्र कुछ भी नहीं।
- 16:25तो मन से फरियाद वैसे फरियाद मैं जब भी करता हूँ मन से करता हूँ,
- 16:31ऐसी फरियादी मैं करता हूँ, लेकिन इन फरियादों के भ्रम में बहुत से
- 16:41लोग यह ना समझे कि उनकी टांग टूट गई।
- 16:48और बाबा फरियाद करेंगे, ठीक हो जाएगी।
- 16:50नहीं नहीं मैं तो अपनी टांग टूट गई उससे उसको फरियाद नहीं किया।
- 16:55चूकना टूट गया। नहीं फरियाद किया।
- 16:59मैंने अपने औरतों से ही पूछा, राजबहादुर से पूछा।
- 17:07मेरे औरतों से पूछा, गुरप्रीत से पूछो बताओ क्या करें?
- 17:14उन्होंने कहा कि आप डू नॉट ऑपरेट, क्योंकि आप खाते तो कुछ है नहीं।
- 17:20जख्म हरा हो जाएगा, फिर से भर नहीं पाएगा।
- 17:24बड़ी मुश्किल होगी बाबा। मबाद पड़ जाएगी, सड़ जाएगा और
- 17:31तुम्हारा जीवन खतरे में आ जाएगा। डू नॉट अपडेट पीस ठीक है, मैंने
- 17:40अपडेट किया डॉक्टर राजबहादुर। एक संत प्रकृति के अनुसार उनका
- 17:49स्पेशल मुझे फ़ोन आया। कोई स्पाइनल का ऑपरेशन कर रहे थे,
- 17:54कहते देखो बाबा ऑपरेशन मत करा लेना, तुम शायद ही ठीक हो जाओगे।
- 18:02डिसलोकेट नहीं हुई है। हल्की सी दरार है ठीक हो जाएगा,
- 18:08फिकर ना करो, मैंने कहा ठीक है, डाइट ले लो, कैल्शियम डाइट ले लो,
- 18:13दूध ले लो, लेकिन मैं ठीक हो गया। लोग मुझे कहते थे बाबा 1 साल
- 18:23लगेगा। और वा मुशकर मैं 21 दो में ठीक
- 18:31हूँ क्या सही दर्द जाता रहा, फ्रैक्चर जुड़ता रहा बिल्कुल ठीक।
- 18:43अभी तो साल बाबा कह के गए 20 अप्रैल को और 30 अप्रैल को यह
- 18:53घटना घट गया है। मुझे पता था उन्हीं को टाल सकता
- 19:00टालना भी नहीं चाहिए। तो मैंने प्रयाग की बाबा ऐसे
- 19:09बच्चे उसका जीवन बचा लो। अगर आप चाहते हो तो ये शब्द मैंने
- 19:17प्रयोग करना शुरू कर दिया हमें क्योंकि वह नेपाल के कान से।
- 19:24मैंने बड़ा सबक ले लिया था। अगर मैं अपनी इच्छा से चलूँगा तो
- 19:34कोई ना कोई गोल ही खेलेगा। उसकी ही इच्छा से चलो इसीलिए बाबा
- 19:41कहते हैं। तेरा पाना मीठा लग जो तू पावे सोई
- 19:48फली कार बस उनका सारा थीम यही है तू कर जो करता है और वैसे तू ही
- 19:59करता है। मनुष्य का अहंकार आड़े आ जाता है।
- 20:06जो कहते नहीं, मैं करता हूँ यही द्वन्द तुम्हें दुख दे जाता है
- 20:13सारी दुनिया आई दुखी है कारण बस यही है तुम कहते हो मैं करता हूँ
- 20:20असल मैं करता वो। बाबा ने उसे करतपुर कहा।
- 20:24सभी संतों ने उसे करतपुर कहा, लेकिन तुम ये कहते हो नहीं मैं
- 20:29करता आई कैन डू करके दिखाएंगे दिखा लो भाई करके कौन रोकता है
- 20:39तुम्हें? लेकिन एक बात है, यह पक्का है,
- 20:44तुम धड़ाम से 1 दिन घर जाओगे, मैं हूँ न हूँ करके दिखा दो क्या फर्क
- 20:51पड़ता है खैर, अभी मैं वीडियो बनाने लगा हूँ चला हूँ।
- 21:00उसके बाद मैं पूछुंगा उससे क्या हुआ का बताओ?
- 21:07मुझे उम्मीद है कि उसे बचा लिया जाएगा और वह बाबा का आशीष होगा।
- 21:20उसकी बहिजाने बेपरवाहियाँ तेरी आं तरफ़ डाटा बेपरवाह, बड़ा बेपरवाह
- 21:32क्या कमी है ज़रा अमावस्या की रात को?
- 21:38आसमान की तरफ आँखें उठा के देखना तुम नास्तिक हो या आस्तिक, इससे
- 21:44कोई फर्क नहीं पड़ता। उसकी वृहदता को जरूर देख लेना और
- 21:52ज्यादा सोचना मत बस देख लेना तो तुम पाओगे इतनी वृहद संरचना।
- 21:58एक कारण यह भी है व्यक्ति नहीं मानता, इतनी वृहद संरचना का कोई
- 22:03एक अथॉरिटी कैसे पैदा कर सकते हैं?
- 22:08इतनी वृहद अरपों अरपों अरपों आकाश गम का है।
- 22:17खरब और एक आकाश, गंगा में अरबों अरबों तारे और एक तारे में
- 22:33करोड़ों करोड़ों टन भार। कहाँ से लेके आया तुम्हारी बुद्धि
- 22:46मैंने कल कहा जहाँ जाकर तुम अश्वर्य से मर जाते हो और तुम तो
- 22:50बहुत छोटे अश्वर्य से मर जाते हो कोई बाबा हाथ की सफाई करके आपका
- 22:56नाम बता दे। आपके माता पिता का आप किस लिए आए
- 23:00यह बता दें आप चरने संभक हो जाते हैं?
- 23:04लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है। इतने निम्न स्तर पर चेतना हमारी आ
- 23:10गई है आज और उसका कारण। दोनों हैं तुम अकेले नहीं तुम भी
- 23:20करो तुम्हारे मार्गदर्शक जो तुम्हे उल्टा पुल्टा सिखाते हैं
- 23:28बस राम राम करते रहो। छोटा सा प्रश्न लेकिन जवाब बड़े
- 23:43विस्तार से दे देता हूँ ताकि आप आपके अन्य प्रश्न भी कवर हो जाएं।
- 23:49दूसरों के भी अन्य प्रश्न कवर हो जाएं।
- 23:55अब हम कल के प्रश्न पर हैं। जो पूछा था दिव्यांशु ने शिव
- 24:03सूत्र का पहला भाग मैंने बोल दिया था शिव सूत्र का दूसरा शब्द उठा
- 24:15नहीं, आज तो चल हम वहाँ चलते हैं। ये थोड़ा हम सूक्ष्म का प्रश्न दे
- 24:24रहे हैं इस के लिए प्राप्ति के लिए क्या दो बातें होती हैं जो
- 24:37आपने कहें प्रतीक्षा? और धैर्य प्रतीक्षा यानी इंतजार
- 24:51अपने ध्यान में उतरना सब करते रहना ध्यान में उतरना अपने भीतर।
- 25:01इसके बिना नहीं मिलेगा और ध्यान में उतरना और इंतजार करना
- 25:09प्रतीक्षा करना वह आएगा। नहीं आए तो सिर्फ बिरहा की अग्नि
- 25:20में जलना। मेरा की तरह।
- 25:25हज हो ना आए अलमा। बालमा, सावन भी पाजा।
- 26:15सावन वीर ताजा। यह प्रतीक्षा, इंतजार हम इंतजार
- 26:28करेंगे क्या मतलब का खुदा करे कि क्या मत हो तू आए?
- 26:38और धैर्य अगर न्याय तो दे रे अपना अगर ये दो गुण हैं आपके पिता तो
- 26:50निश्चिंत हैं। मैं स्टेप पर लगाता हूँ, तुम
- 26:54पहुँच जाओगे ध्यान में जाना, अपने काम को रोक मत देना और इंतजार
- 27:13करने वह आएगा जरूर आएगा। 1 दिन उससे मुलाकात होगी।
- 27:22और फिर अगर वो ना है तो धीरज रखना बस इतना सा।
- 27:30आज होना आए बालमा सावन बीत जाए।
- 28:01बिरहा की अगनी में जलते रहना, धीरे धीरे मत खो देना और इंतजार
- 28:07भी मत खो देना। ये दोनों का मिश्रण जीस हृदय में
- 28:12है। वह अवश्य में पहुँच जाएगा उस तल
- 28:18पे। जीस स्तर पे जा के तुम्हारी सारी
- 28:24इच्छाएं वासनाएँ खो जाती हैं तुम ना तो राष्ट्रपति बनना चाहोगे ना
- 28:30चक्रवर्ती सम्राट बनना चाहोगे ना कुबेर बनना चाहोगे?
- 28:39धन का अम्बार लगे। ये तुम्हारे भीतर बाबू नहीं
- 28:41उठेगा, क्यों नहीं उठेगा? थोड़ा विस्तार करता हूँ इसका हाँ
- 28:49इसलिए नहीं उठेगा कि तुम और लड़ी सर्वशक्तिमान हो गए तो
- 28:55सर्वशक्तिमान को। एक ज़रा और भी जिसमें जोड़ा नहीं
- 28:59जा सकता, वह क्यों करेगा ये इच्छा के और मिल जाए तो भगवान कृष्ण
- 29:06कहते हैं मैं वो शय हूँ जीसको बढ़ाया ना जा सके और जीसको घटाया
- 29:13ना जा सके। ओम पूर्णमद है पूर्णमद पूर्णा
- 29:18पूर्णमद अच्छे थे पूर्णन से पूर्ण मादाएँ पूर्ण में बाबा शिष्य थे।
- 29:23मेरे में से 100 में से 100 भी निकाल लो तो छः से 100 ही बचेगा।
- 29:29ज़रा भी निघटता मैं और ज़रा भी बढ़ाया नहीं जा सकता।
- 29:34मैं बहुत से हूँ प्रतीक्षा और धैर्य इंतजार करना ध्यान में
- 29:50उतरना, धीरज मत खो देना क्योंकि जितनी दूरी तुम निकल गए हो ये मत
- 29:58सोचना कि उसको तो मिल गया, मुझे नहीं मिला।
- 30:01भाई देखो वो थोड़ा सा कम दूर गया हुआ तुम ज्यादा दूर चले गए तो
- 30:07थोड़ा वक्त लग जाएगा तुम्हे पहुँच से तुम भी जाओगे दिल मत छोड़ो,
- 30:14साहस मत हारो, बिलकुल पहुँच जाओगे।
- 30:23तो आओ हम उस सूत्र में चलें। आप अक्सर 30 मिनट के आसपास मेरी
- 30:34वीडियो सुनते हो, ये आपका धन्यवाद है।
- 30:38देखिये 30 मिनट हो गए अगर आप यहाँ स्किप करना चाहते हो तो जा सकते
- 30:45हो। अगला नया प्रश्न शुरू हो जाएगा
- 30:50मुखर सुन लेना अगर चाहो तो बने रह सकते हो।
- 30:58लेकिन पूरी सुन लिया करो वीडियो मैं तुम्हारे लिए बोलता हूँ तो
- 31:05आइए दिव्यांशी हम चलते हैं शिव सूत्र के साथ।
- 31:18स्वम में स्थिति ही शक्ति है। स्वम में स्थिति ही शक्ति है, तो
- 31:32एस्टाब्लिश इन योरसेल्फ इज़ योर पावर।
- 31:39स्वयं में स्थिति ही शक्ति है टू एस्टाबलिश हिमसेल्फ जिसे स्थिति
- 31:49कहते हैं कृष्ण इस योर पावर इससे बड़ी कोशिश होती है।
- 31:56क्यों? क्योंकि वह सर्वशक्ति माना, सारी
- 32:06शक्ति उसमें निहित है, सारी शक्तियां का वो एक मात्र खजाना
- 32:12है। स्वयं में स्थित हो जाना यही
- 32:17तुम्हारी शक्ति है और इससे बड़ी कोई शक्ति भी है।
- 32:21मैंने पहले ही कहा उस शक्ति में कुछ बढ़ाया नहीं जा सकता, कुछ
- 32:25घटाया नहीं जा सकता अगर खुद में स्थित होने की तुम कला जान लो।
- 32:33जिसे सही आध्यात्मिक कहा जाता है तो तुम सर्व शक्तिमान हो जाओगे,
- 32:43इस भ्रमण की सारी शक्ति तुम्हारी होगी।
- 32:54तुम वो हो जाओगे जिसे सर्वशक्तिमान कहते हैं, जिसे ओमनी
- 33:01पोटेंट कहते हैं, लेकिन तुम शक्ति की कामना बाहर करते हो।
- 33:14आज तो ऐसा बुरा हाल हो गया। नौजवान पीएन तक की पोस्ट हालांकि
- 33:21कोई शक्ति ही नहीं होती, लेकिन चलो रोजगार छलता है पेट का भोजन
- 33:27जल जाता है परिवार का क्लर्क हो जाऊं?
- 33:33केशर हो जाऊं, छोटा मैनेजर बन जाऊं, बड़ा मैनेजर बन जाऊं, सब
- 33:39शक्ति को एकत्रित करने के साधन है पर उससे बड़ा।
- 33:50इनका भी मालिक हो जाऊं, उसका भी बॉस हो जाऊं उसका भी बॉस हो जाऊं
- 33:56फिर सारे बैंक का ही बॉस हो जाऊं। फिर बैंकरों के ऊपर बॉस भी बैंक
- 34:02को चलाने वाला जिसका हुक्म बैंक भी मांगते हैं।
- 34:11पर तुम चाहे कितने भी पढ़े लिखे हो और वो हो कुमाराण बिल्कुल
- 34:17अनपढ़ है, मैं कई बार कहा करता हूँ हसना मत मेरी बात।
- 34:29क्या कर परमात्मा इन अनबढ़ लोगों को अंगूठा न देता तो फिर क्या
- 34:36करता है? कोई साधन नहीं अपनाना पड़ता।
- 34:42आज भी बहुत से लोग है, जिनके अंगूठा नहीं है।
- 34:47उनका कुछ ना कुछ तो अलटरनेट होगा ही ना।
- 34:52उनके पास शक्ति आ गई। काबिलियत है नहीं है, कोई बात
- 35:04नहीं, लेकिन शक्ति आ गई क्यों? क्योंकि 51 लोगों ने।
- 35:14उनको चुनकर भेज दिया। नहीं भेजा तो सभी जो हमारे इदारे
- 35:25हैं, उन्होंने थोड़ी सहायता कर दी।
- 35:38तो वह चाहे बिल्कुल अशिक्षित हो तो तुम पढ़े लिखो पे राज़ करेगा।
- 35:47तुम कितने ही पदाधिकारी हो कितने ही पढ़े लिखो कितनी ही यूपीएससी
- 35:52के एग्जाम क्लियर कर दो, लेकिन तुम्हारी कुर्सी सदा।
- 35:57छोटी ही रहेंगी। उस हुक्म देने वाले का कद बो न हो
- 36:07या ऊंचा या वो स्त्री हो या पुरुष, कोई फर्क नहीं पड़ता बस
- 36:16पागल नहीं होना चाहिए। काबिलियत का कोई मतलब नहीं, बस
- 36:23काबिलियत है। इतनी के 51 लोगों ने हमें चुन
- 36:27लिया, देखिये बड़े मज़े की बात है।
- 36:3451 लोग चुन लेते हैं, किसे भी चुन ले।
- 36:38और जो लोग अपनी काबिलियत से बनकर सीजीआई हुए हैं, वो बिल्कुल अपनी
- 36:44काबिलियत से हुए हैं। पूरे इंटेलिजेंस वो भी इनका
- 36:58क्योंकि आखिर तनख्वाह तो यहीं से जाएगी ना?
- 37:02हमारा दिया हुआ जो कर है कर टीडीएस वगैरह आयटा वगैरह वो इनके
- 37:12पास पहुंचना है, अल्टीमेट और वहीं से जाएगा।
- 37:15इनको भी पगार के रूप में जो भी है।
- 37:20तो ये भी एक हिसाब से कान इधर से पकड़ा कान इधर से पकड़ा कोई फर्क
- 37:27नहीं है, लेकिन हैं उनके और हैं। लेकिन ध्यान रखना ये टैक्स आप
- 37:38भरते हो। ये टैक्स मैं और तुम भरते हैं ये
- 37:46खजाने में जाके जमा होता है जिनका माल्क हमने बना दिया, 51 लोगों ने
- 37:51बना लिया। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है तो
- 38:06पवन कृष्ण ये बाहर की बातें नहीं करते जो मैं आपको समझा रहा हूँ
- 38:13बातें अंतः के लिए ज़रा भी मायने नहीं रखती।
- 38:19लेकिन बाहरी व्यवस्था के लिए मायने रखती हैं, इसलिए मैं थोड़ी
- 38:23सा वक्त निकाल लिया करता हूँ बात बात में बात हो जाती है क्योंकि
- 38:34अगर बाहर ठीक होगा सब कुछ। तो तुम भीतर की तरफ मुड़ोगे बाहर
- 38:42का ठीक होना तुम्हें भीतर की तरफ मुड़ने में सहायता करता है, स्वयं
- 38:53में सिद्ध हो जाओ। आप अच्छी तरह से इस शब्द को सुन
- 38:57लेना शिव सूत्र का दूसरा है। पहला कर बोला था विस्मय का हैरान
- 39:04की अमेजमेंट वंडर दूसरा आज स्वयं में स्थित बहुत बार मैंने बोला
- 39:18भगवान के से कहते हैं अर्जुन। तू स्वयं में स्थित हो जा, बस यही
- 39:24कहते हैं, तू बहुत लंबा छोड़ा, दार्शनिक कारण नहीं है, इसका बड़ा
- 39:34सरल सा कर्म है स्वयं में उतर जाओ।
- 39:40और तुम अगर स्वयं में भी नहीं उतर सकते तो और कर क्या सकते हो?
- 39:46जैसे ही रात को नींद में उतर जाते हो, ऐसे ही स्वयं में उतर जाओ।
- 39:52जगह जगह उतर जाओ वही प्रोसेसर करके नथ्थिंग टु डू।
- 39:57जैसे कुछ न करते हुए तुम रात को निद्रा में चले गए और तुम्हें पता
- 40:01नहीं तुम कहाँ चले गए। यह संसार इतना बराट है, उसका
- 40:04बनाया हुआ और तुम जाग के आते हो, फ्रेश हुए हुए आते हो और तुम कहते
- 40:12हो वो है ही नहीं। इससे किसी का नुकसान नहीं होता।
- 40:20ध्यान रखना बस इससे सिर्फ तुम्हारा ही नुकसान होगा।
- 40:24क्या नुकसान होगा तुम उस राह की तरफ अगर सर नहीं आओगे जहाँ परम
- 40:33आनंद का निवास है, क्योंकि वो है ही नहीं।
- 40:39बस यही कमी रह जाएगी कम से कम इस जीवन में।
- 40:42इसलिए मैं कहता हूँ एक काम करो, आज से ये फैसला ले लो जो तुम
- 40:49जानते नहीं उसके बारे में कोई निर्णय नहीं देना, चलती गाड़ी में
- 40:52नहीं चढ़ना। पता नहीं ये कहाँ जा रही है इसको
- 41:04तुम जानते नहीं, उसके बारे में बोलना मत, तुम अपने आपको ज्ञानी
- 41:17मानते हो, मानते रहो। कोई कुछ नहीं कहेगा, लेकिन अपने
- 41:24ज्ञान का प्रदर्शन अगर तुमने अनुभव नहीं किया तो कृपा करके
- 41:28बांटना मत। ओके एक ना एक कोई जानने वाला
- 41:37तुम्हें मूड कहेगा, कोई बाबा नानक कहेगा।
- 41:43और तुम तिलमिलाओगे लेकिन मैं जानता हूँ कि सभी के निहित
- 41:53स्वार्थ होते हैं कोई बेचारा शरीर से परेशान।
- 42:03उसको दवाई चाहिए तो क्या करे? यही कुछ करना होगा अन्यथा लाचार
- 42:14होगा। दवा बूटी नहीं मिलेंगे, मर जाएगा।
- 42:18मरने का साहस इसमें है नहीं क्या है देते हैं लोग को।
- 42:25साहस कहाँ होता है? साहस नहीं होता।
- 42:39मृत्यु के डर से मारे बहुतों ने अंग्रेजों के कदम सुन लिए।
- 42:47दास बन गए। बोलिए हुक्म कीजिए, आपका साथ
- 42:50देंगे, हिंदुस्तान को आजाद होने दे।
- 42:55और साहस था तो ढ़ाई हड्डी का। गाँधी उन ढ़ाई हड्डियों को लिए
- 43:04करता रहा। अब उनको कोई मारेगी तो कौन मारेगा
- 43:10और जो मारेगा महा मूड होगा और एक महा मूड मिलेगा।
- 43:21अरे इसको क्या मारा मराया? मैंने कल भी कहा था मुसलमानों की
- 43:39तरफ वफादारी करता है जो गांव है गाँधी का लेकिन जब उसके गोली लगी
- 43:45अल्लाह तो एक बार भी नहीं आया। जुबानी गुलामी था अल्ला ईश्वर
- 43:52तेरे नाम अल्लाह पहले कहता था लेकिन जब लगी गोली तो आदमी ज़रा
- 43:58भी झूठ नहीं बोलता। वह जो आता है आखिरी वो प्राणों से
- 44:03आता है। तीन बार आया और तीनों बार राम
- 44:06आया। हे राम।
- 44:11अल्लाह तो एक बार भी न आया मृत्यु सब परदे खोल देती है और एक हिसाब
- 44:22से गाँधी का पर्दा भी खोल दिया। राम ही आया।
- 44:29तीनो बार राम आया, एक बार भी अल्लाह नहाया।
- 44:34एक बार भी वह गुरु न आया, एक बार भी औ गोट न आया, कोई न आया श्री
- 44:43राम ही आया। राम ही आना चाहिए था सच्चे हिंदू
- 44:51हम इसे कहते हैं जिनके हृदय में राम बस गए हैं।
- 44:56उनके हृदय में राम बस गए थे और हृदय में राम बस गए थे तो अंत दफे
- 45:02जब लगी गोली तो जो बेहतर था वो ही तो निकला।
- 45:06जब तुम गोली मारते हो तो भीतर मवाद हो तो मवाद निकलेगी, है ना?
- 45:12खून हो तो खून निकलेगा। हाँ हाँ तो जो हो भावना होगी तो
- 45:18वही भावना निकलेगी। भीतर तो राम थे मेरे राम।
- 45:33अल्लाह कहाँ से आ जाते हैं? अल्लाह तो एक समायोजित करने के
- 45:38लिए बोला गया अल्फाज़ था ताकि ये बने रहे।
- 45:44जिन्ना के भीतर राम नहीं होता और गाँधी के भीतर अल्लाह नहीं होता।
- 45:50ये देखिए बाहर से। लीपापोती की बातें होती है।
- 45:56स्वयं में स्थिति ही शक्ति है। कृष्ण कहते हैं, अर्जुन से कंप मत
- 46:10हे अर्जुन। तू जिनके लिए शोक कर रहा है,
- 46:14धैर्य को खो रहा है। हे पार्थ वो शोक करने योग्य नहीं
- 46:22है, वो धैर्य खोने योग्य नहीं है। तुझे ठीक नहीं कर रहा है।
- 46:34तू थोड़ा याद कर इन्होंने क्या कुछ नहीं किया।
- 46:37इनके कामों का लेखा जोखा मेरे पास लकसागिरी में तुम्हें जलाने की
- 46:44चेष्ठा की गई। जुए में गलत पांसा फेंककर चक्नों
- 46:52के द्वारा तुम्हारा इंद्रप्रस्थ से जीत लिया गया।
- 46:56पांचों भाइयों को बलम बना लिया गया, द्रौपदी को जीत लिया गया।
- 47:06और फिर जो द्रौपदी की दशा की वो तुम्हारे सामने ही है।
- 47:10अर्जुन तुम भूल गए क्या कृष्ण को? मैं तो नहीं भूला उस निर्बल?
- 47:24अवस्था में उसकी पुकार मैंने सुनी तुम क्यों भूल गए उसकी चिधकार तुम
- 47:31तो पति हो चिल्लायी तृपदी तुम कहाँ गए महाराज करो मतदेय?
- 47:44दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी सर मैं फ़ोरन आके जेल उड़ा गया,
- 47:57अब काहे तुम्हारी टाँगें कप रही हैं, किनके लिए कप रही हैं?
- 48:04जिनके लिए तू कंप रहा है, उनके लिए कंपना उचित नहीं है।
- 48:10जिनके लिए धैर्य हो रहा है, उनके लिए धैर्य होना उचित नहीं है।
- 48:16यह क्षत्रिय का स्वभाव नहीं है। अर्जुन हे पार्ट?
- 48:25थोड़ा समझ बुद्धि से काम लें। शंशाह में मात्र है शंस्यात्मा
- 48:31बनिषति शंस्यात्मा का विनाश हो जाता है शंस्य जानें।
- 48:41जो एक तरफ़ा नहीं होता, दो तरफ़ होते हैं इस नौ पे भी बैठे उस नौ
- 48:50पे भी बैठे मेरे पास लोगों के कमेंट आ जाते हैं एक कमेंट बड़ा
- 48:56प्यार आया बाबा आपसे बड़ा प्रेम है।
- 49:01आप से भी दीक्षित हूँ दूसरे से भी दीक्षित हूँ, मैं उलझ जाता हूँ
- 49:07क्या करूँ वो कहता है ना करो जाओ आप कहते हो वो कहता है जाप करो,
- 49:13जाप ही करो, मैंने कहा तू ऐसा कर। कोई बहुत बड़ी बात तो है नहीं तू
- 49:25छलांग लगा और उसकी कश्ती पर सवार हो जा, तू मुझे छोड़ दे, तू जब के
- 49:33देख ले, अगर मिल गया तो तू वापस नहीं आएगा अगर नहीं मिला।
- 49:40तो निश्चित ही तो मेरे पास आएगा। ये सौदा भी करके देख ले कोई महंगा
- 49:53नहीं है इस मूल्य में एक जन्म ही तो है हजारों जन्म पहले कमाती है।
- 50:00एक और चलते थे, शायद मिल ही जाए कोई पता लगता है लेकिन कृष्ण कहते
- 50:13हैं सिंच आत्मा वंश भी बेनाश हो जाता है दोगले व्यक्ति का।
- 50:19दो नाव पे सवार हुआ व्यक्ति डूब जाता है इसलिए है अर्जुन तू एक
- 50:26नाव पे स्मार हो जा, तू मेरी नाव पे स्मार हो जा, और पतवार मेरे
- 50:33हाथों में दे दे, बस मैं लूँगा, तू क्यों चिंता करता है?
- 50:40और आखिरी बात कहते हैं कृष्ण अर्जुन जिन्हें तो मारना चाहता
- 50:47है, उन्हें मैं कब का मार चुका हूँ?
- 50:50तुम्हें जिंदा दिखती हैं लेकिन ये हैं ये लाशें मेरे घर में ये
- 50:55मुर्दाएँ। मैंने इनके कर्मफल निश्चित कर दिए
- 50:59हैं एंड दे अरे ऑलरेडी डेड तू उठ और सेहरा अपने सर पे सजाले इनको
- 51:07मार के मैं इन्हें पहले से ही मार चुका हूँ क्योंकि इनके करम ऐसे
- 51:16हैं। ये मारने जो कैसे है?
- 51:20पार्थ और अगर अब। तू चेहरा भी नहीं ले सकेगा तो फिर
- 51:33बड़ी भाग्यहीनता की बात है। देखिए कहाँ जाते हैं कृष्ण
- 51:41परमात्मा सदा ऐसा ही बोलता है और निश्चित होके बोलता है लेकिन
- 51:49बिलकुल नहीं माने। अज्ञानी इस सिल में अन्य भक्तों
- 51:56को समझाते हैं। कभी नहीं समझाता मैं जानता हूँ।
- 52:13जितना भक्तिन के ऊपर जाया करेंगे, किसी नव सन्यासी के ऊपर करें।
- 52:22अंधभक्ति के ऊपर समय और शक्ति बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं
- 52:30है। एक ब्राह्मण।
- 52:35श्राद्ध खाने चला गया, ज्यादा खा लिया, पेट में दर्द हो गया क्या?
- 52:46तो पेट में दर्द हो गया? वो हमारे यहाँ दुर्गा मंदिर में
- 52:49रहता था, पास के कमरे में, बग़े जीके कमरे में।
- 52:54और देखा एक तो इसको खिलाया, तुम कहते हो बड़ा आशीर्वाद देंगे मोटी
- 53:00गोगोड़ फूली हुई हाथ फेरे गए, दुष्ट ने इतना खिला दिया पाचन ही
- 53:08रहने होते। मैंने कहा तू खाया क्यों था?
- 53:13अरे माल बेगाना था, पेड़ तो तेरा था क्या करें बाबा पूड़े देसी घी
- 53:22के स्वादिष्ट बड़े थे। सारे साल नहीं मिलते हैं, यही 15
- 53:28दिन होते हैं खाने के मोज उड़ा लो जी ऐसा करो।
- 53:33थोड़ा सा चूरन दे दो, उन्होंने चूरन दे दिया।
- 53:40कागज़ में रख के देसी दवाई थोड़ी सी ज्यादा होती है।
- 53:48आधा पानी का गिलास मैंने ले लिया। मैंने कहा, उठो।
- 53:53लम्हे उठा देता हूँ ये चूरन ले लो ठीक हो जाएगा उठो खड़े रहो अरे
- 54:08बाबा ना तो चूरन ना ही पानी। जाने की जगह ही नहीं है।
- 54:17फुल्लो फुल है काम गले के ऊपर तक भरा पड़ा है।
- 54:23जगह ही नहीं है। अगर जगह होती है ना बाबा तो मैं
- 54:27एक पूड़ा और खा लेता हूँ। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है।
- 54:38अब कँपते हुए अर्जुन को भगवान कृष्ण कहते हैं, तू शक्ति स्वरूपा
- 54:43हो जा, कैसे हो स्वयं में स्थित हो जा ये वहाँ से आया सूत्र स्वयं
- 54:51में स्थिति ही शक्ति है। तू कंप रहा है तुझे शक्ति की
- 54:56जरूरत है यू आर इन नीड ऑफ एनर्जी यू आर इन नीड ऑफ कॉन्शस नेक्स्ट
- 55:05तो थोड़ा जागृत हो, तो मुर्छित हो क्या है?
- 55:23हे अर्जुन तू स्थिति पर क्यों जा? अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जा
- 55:29अपने आप में स्थित हो जा जो तू है वास्तव में उसमें स्थित हो जा और
- 55:35उसमें स्थित होगा कैसे? बस तुम्हें बताया मैंने?
- 55:39अपने ही भीतर उतरते चले जाओ, किसी के भीतर नहीं उतरना है।
- 55:43अपने ही उतरते चले जाओ और उतरते उतरते उतरते।
- 55:471 दिन ऐसा आएगा कि तुम अपने अंतराल को छोड़ोगे, उस स्तर को
- 55:56छोड़ोगे जहाँ वास्तव में तुम हो। अनंत अनंत काल से पुरातन सनातन
- 56:06काल से तुम वहीं हो आध सच जुगा आध सच हेबी सच नानक होश में भी सच
- 56:13तुम वहीं हो वहीं उतर जा और वहीं बैठ जा।
- 56:18और सच में तो तो वही है, बस भटक गया है।
- 56:23थोड़ा किन्हीं कारणों से तू वापस आ जा इतनी सेना को देखकर भीष्म
- 56:36पितामह को देखकर अपने गुरु द्रोण को देखकर।
- 56:40और आज उसे अब उसे भाई लगते हैं, दुर्योधन जैसे को कैसे मरूँ और
- 56:48कंप रहा है, बलहीन हो गया है। इसको शक्ति की आवश्यकता है, साहस
- 56:57की आवश्यकता है। कृष्ण भली भांति जानते हैं।
- 57:02कृष्ण मास्टर ऑफ मास्टर्स वही दवाई बताते हैं जो उसको जरूरत है।
- 57:11इस वक्त ये कप रहा है। शक्ति की अवस्था में तू अपने भीतर
- 57:18उतर जा। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है।
- 57:24स्थिति प्रज्ञा हो जा अपनी प्रज्ञा में स्थित हुआ तो तू
- 57:27शक्तिमान हो जाएगा। कंपनी बंद हो जाएगा इलाज बताते
- 57:32हैं कृष्ण बहुत बड़े व्यक्ति हैं, डॉक्टर भी हैं।
- 57:39शक्ति की आवश्यकता है पर तू स्वयं में स्थित हो जा, ये अध्यात्मिक
- 57:46सूत्र है। कोई डॉक्टर होता है, वो कहता है
- 57:49गुरु को उसके पुत्र लगा देता है डी एन एस को लगा देता हूँ नॉर्मल
- 57:55सेलाइम चढ़ा देता हूँ। तो कंप रहा है पसीने से भरा हुआ
- 58:02सर्दी का मौसम है, जो बात कृष्ण कहते हैं, स्वयं में स्थित हो जा,
- 58:14उसका मतलब यही है कि तू साहसहीन हो गया है अपने में स्थित हो
- 58:21जाएगा। तो एक तो तू अपने आप को जान लेगा
- 58:26और जैसे ही तुने अपने आप को जान लिया हूँ, एमआइ वैसे ही तेरा भ्रम
- 58:31खत्म हो जाएगा कि मैं कौन हूँ तो दूसरा कौन है यही पता चल जाएगा।
- 58:36मैं शरीर नहीं हूँ तो विषम प्रताप में द्रोण और ये सब भाई जिन्हें
- 58:40कहता है। वो भी शरीर नहीं है फिर ये मरेंगे
- 58:44कैसे और कृष्ण कहते हैं मैंने इन्हें मार दिया।
- 58:48कर्मों के हिसाब से इनके कर्म ही ऐसे थे।
- 58:51फिर तो उठ खड़ा हो तो अपना धनुष उठा और इनको भेद दे।
- 58:59तो श्रेय अपने सिर पर ले ले सब बताते हैं, लेकिन नहीं ठीक बात
- 59:09सिर देने की है पर ब्रेक और खुशी खुशी अपना सिर दे देते हैं।
- 59:15मैंने देखना है युद्ध में क्या हो रहा है।
- 59:17कृष्ण कहते हैं, देखें। ये चरम चक्षुओं से नहीं पता
- 59:20लगेगा। देव चक्षु चाहिए।
- 59:23कहते हैं ठीक है भगवान बताओ देव चक्षु कैसे आएगा, बस अहंकार की
- 59:28बलि दे दे राजा प्रजा जहीरुजा शीश दे ले जाए।
- 59:38यही एक ही है, दूसरा को इत्रिका जेतु प्रेम मिलन की चाह शी सतलीधर
- 59:54घर में रह। पहली पहली और आखिरी ये शर्त है के
- 1:00:05शीश रख दे तलीपे और फिर मेरे घर में आजा फिर मेरे घर के दरवाजे
- 1:00:10खुले हैं ये शीश क्या है अहंकार अहंकार क्या है?
- 1:00:18तुम्हारी मान्यता के मैं शरीर हूँ क्या ये कोरी मान्यता है?
- 1:00:23बिल्कुल मान्यता है कैसे टूटेगी अपने अंतश में जा के सत्य के
- 1:00:28दर्शन करने से वही तो मैं समझाता हूँ अपने अंतश में जाओ किसी की
- 1:00:34बात न मानो। ना शास्त्रों की, ना मार्गदर्शकों
- 1:00:38की, ना गुरुओं की क्योंकि मेरा खाया मुझे ही शक्ति देगा, मुझे ही
- 1:00:44तृप्ति देगा, शास्त्रों ने खाया होगा किसी वक्त उनके लिखने वालों
- 1:00:53ने मैंने कभी खाया होगा। मैं कभी तृप्त हुआ आऊंगा, लेकिन
- 1:00:57तुम नहीं तुम तो खुद खाओगे तो फिर तृप्त होगे, इसलिए खुद के भीतर
- 1:01:04उतर जाओ यही है एक मात्र डंका दूसरा कोई डंका उस रस में उतर
- 1:01:13जाओ। तो तुम कंपनी में बंद हो जाओगे,
- 1:01:19विस्मय योग की भूमिका है। मैंने कल बोला स्वयं में स्थिति
- 1:01:26ही शक्ति है। मैंने आज बोला अब जो बाकी के रह
- 1:01:31के शिव सूर्य। तो मैं कल बोलेंगे, वक्त हो गया
- 1:01:35है जब व्यक्ति अपने भीतर स्थिर होता है, अपने सच्चे सत्य स्वरूप
- 1:01:47में स्थित हो जाता है, ठहर जाता है।
- 1:01:53तो यहीं उसे शक्ति मिलती है, अन्य कोई स्थान नहीं।
- 1:01:57शक्ति का बाकी शक्तियां तुम्हारे शरीर को शक्ति दे सकती हैं।
- 1:02:03तुम्हें आत्मबल न आएगा और जरूरत होती है आत्मबल की।
- 1:02:17राधे राधे श्याम मिला दे राधे राधे श्याम मिला दे।
- 1:02:39गोविंदा गोपाल हर राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा गोपाल हर।
- 1:02:56मेरी नैय्या पार लगा दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला
- 1:03:14दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे
- 1:03:23श्याम मिलादे गोविंदा गोपाल हरे। श्री?
- 1:03:35कृष्ण गोविंद हरे हे मोरारी। हे नाथ नारा ये न वा सुदेव श्री
- 1:04:03कृष्ण गोविंद। हरे रे मरा रे हे नाथ नारायण वा
- 1:04:19सु दे पितु मात। स्वामी।
- 1:04:29सखा हमार पितमात स्वामी सखा हमार। पितमात स्वामी सका हमार हे नाथ
- 1:04:57नारा धन वासुदेव, श्रीकृष्ण और मुरारी।