Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Nov 25 - चमत्कार कैसे होते हैं? क्यों मैं अपनी शक्तियां अपने ऊपर उपयोग नहीं करता? जरुरी सत्संग! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:05कर्णिका प्रशाद बाबा जी संस्पर्ष बहुत दिनों से मन में उहा पहुंची।
- 0:28आपने अपनी बायोग्राफी में बताया कि एक व्यक्ति के मोटरसाइकिल दो
- 0:33बार गुम हो गए, वह आपके पास आया सारी कहानी
- 0:50बायोग्राफी में आपने दी है और वह मोटरसाइकिल आपने कहा।
- 0:58वहाँ मिल जाएगा वहाँ जाकर ले आओ वहाँ पर मिल भी गया आज भी ऐसा ही
- 1:12हुआ निपुण गुप्ता। का मोटरसाइकिल स्कूट से चोरी हो
- 1:23गया। घर के आगे से वह भी आज मिल गया।
- 1:40आपका अपना मोटरसाइकिल चोरी हुआ। घर के आगे से बैंक।
- 1:57दृश्यता माफ़ कीजियेगा, सिर्फ इस रहस्य को उगाड़ने की मंशा के साथ
- 2:13मैंने प्रश्न किया है और सुन्दर प्रश्न।
- 2:28संत दर्शन से यह उपलब्ध होता है और आपसे एक और बात बता दूँ संत
- 2:41दर्शन की। यही महिमा भी है और कसौटी भी है।
- 2:52कसौटी यानी संत परीक्षण श्यामलाल का मोटरसाइकिल चोरी हुआ प्रणाम
- 3:11करने आया था मेरे को। चाबी बीच में छोड़ गया, चोर ले
- 3:17गया कह तो बाबा आपके दरबार से चीज़ उठाई गई, लाओ मेरा मुट से,
- 3:26मैंने कहा ठीक है तू ऐसा कर। फक्रसर के पास फलां जगह पर तुझे
- 3:37मोटरसाइकिल मिल जाएगा। सभी भाई गए वहाँ पर मोटरसाइकिल
- 3:47मिल जाए ठहरी सभी। दूसरी बार फिर गायब हुआ वो उसके
- 4:02खुद के घर के सामने भूल जाता है। आदमी के सिर के ऊपर बहुत से बाहर
- 4:12फर्ज हैं। कर्ज हैं, मर्ज हैं।
- 4:25तो मैंने कहा आपके तो बाबा के दरबार से चोरी नहीं हुए कहते बाबा
- 4:31मैं गृह व्यक्ति हूँ। यही मोटरसाइकिल मेरी प्रॉपर्टी है
- 4:37और मेरे व्यवसाय का मुख्य कारण है।
- 4:44क्योंकि मैं बरोकर हूँ, जमीन जायदाद का काम करता हूँ, मैंने
- 4:54कहा ठीक तुम ऐसे करो जो भी के पास चले जाओ यहाँ गांव है पास में
- 5:02निशानी बताती वहाँ जाके तुम्हें मिल जाएगा।
- 5:12फिर गायब हुआ। मैंने कहा अब तुम कहीं ना जाओ अब
- 5:18मैं अपना काम करूँगा खुद ही व्यक्ति आपके घर पे सुबह 5:00 बजे
- 5:23आके दे जाए मैं आके दे गया। आज जीस स्कूटी की बात करते हो आप?
- 5:39वह गुम हुई तो मुझे टेलीफोन पे सूचना दी गई के घर के आगे से
- 5:48वीडियो भी भेजी गई। देखिए यह चोर है।
- 5:56यह उठा के ले गया। नहीं मिले मिले कब कल उस स्कूटी
- 6:10का मालिक यहाँ आया था। कल दरबार लगा था।
- 6:16यहाँ पर दीक्षा लेने के लिए लोग आए थे।
- 6:18वह सिर्फ दर्शन करने के लिए आए थे।
- 6:29जब उसकी टर्न आई वह आया तो मैंने उसे आशीर्वाद दिया।
- 6:35उसके नाम पे स्कूटी थी। और आज ही सुबह घर के पास थोड़ी
- 6:47दूर पे वह स्कूटी खड़ी हुई, मुर्गी उसमें चोर के कपड़े बेचे।
- 7:05तो बोले स्कूटी मिल गई, अब चोर के कपड़े क्या करें?
- 7:12मैंने कहा ऐसे दो ला लो और जो स्कूटी धोने वाले उनको दे दो,
- 7:21पोछे का काम ले लेना। और क्या करें पापा और गायों को
- 7:30चारों से मेरी स्कूटी क्यों नहीं मिली?
- 7:41मेरा मोटरसाइकिल हीरो सप्लेंडर क्यों नहीं मिला?
- 7:50क्योंकि वह मेरे नाम से? बात को गहरे से समझने की इष्टा
- 7:59करना है मेरा यहाँ कुछ है नहीं मेरा यहाँ चोरी कुछ नहीं होता, है
- 8:08ना मुझे कुछ मिलता है। मैं वह तत्त्व हूँ जिसका कुछ
- 8:15चुराया नहीं जा सकता जीसको कुछ बढ़ाया नहीं जा सकता, दिया नहीं
- 8:23जा सकता ना वो मरें, न ठाग्य जाऊं।
- 8:31जिनके राम बसै मनम ना तुम मुझे ठग सकते हो ना तुम मुझे मार सकते हो
- 8:38हमारा भ्रम मारोगे मेरे घर को मारोगे, लेकिन मैं होता तो हूँ जो
- 8:49कभी नहीं मारता। बचा ही रहूँगा शेष फिर उसको मारने
- 8:57के लिए आपके पास कोई अस्त्र शस्त्र परमाणु व हाइड्रोजन बंप
- 9:01ने। तो मैंने जब फरियाद ही नहीं की और
- 9:18सिर्फ इतना सा काम किया कि इसके ऊपर कोई गलत धंधा ना करे और हम तो
- 9:24चल फिर नहीं सकते। इसलिए पुलिस में रिपोर्ट करा था।
- 9:26बस हम स्कूल नहीं चाहिए, आउट साइकिल नहीं चाहिए।
- 9:38मेरा बेटा जो चला गया, उसके वह चलाया करता था, उसकी यादगार के
- 9:52रूप में रखा गया था तो जब बेटा ही चला गया उसकी यादें ही चलेंगी।
- 10:09यह होता कैसे है? बताया तो मैंने बहुत बार।
- 10:18है। जब आप संत के दरबार में आते हो,
- 10:21अगर वह सच्चा संत है तो ऐसा संत नहीं है।
- 10:30जो आपको भ्रम में डाले। पहले तो कहे की चादर बांधा करो,
- 10:36रोम कूप खुले रखो ताकि ये भी ऑक्सीजन ग्रहण करें और फिर जीन से
- 10:42बेचने पे आ जाए। ऐसे पाखंडियों से सावधान।
- 10:54ऐसे तथाकथित संतों से सावधान जो ब्रह्मचर्य का उपदेश न देकर
- 11:01एडटाइजमेंट करें कि यौन शक्ति कैसे बढ़ाये।
- 11:11इन पाखंडियों से इन नकली गुरुओं से सावधान यह ऐसे होता है पुत्र
- 11:27जब आप मेरे दरबार में आते हो, मेरे सामने खड़े होते हो तो मैं
- 11:33आपके रोये रोये की हर हरकत को जानता हूँ।
- 11:41भले ही बुरे की पीर परछा न था गट गट के अंतस की जान कुछ नहीं
- 11:53छिपाया जा सकता मुझसे जब मेरे सामने आ गए जब मेरे से दूर बैठे।
- 12:01मैं चाहूं तो उनके अंत में जाके देख सकता हूँ कि क्या चल रहा है,
- 12:10लेकिन भला ये कोई देखने जैसी चीज़ है अपना वह दूर छोड़कर?
- 12:25जो मैं शराब के घूँट पी रहा था वह आनंद का रस और मस्ती छोड़कर कभी
- 12:32मैं खाने से कोई व्यक्ति उठा। मैं खाने से उठने का मन ही नहीं
- 12:38करता। वहाँ तो जी करता है।
- 12:502400 घंटे बैठे रहे संत के दर्शन का प्रणाम एक शब्द सुनी तुलसी ने
- 13:11लिखा है सन्मुख होही। जीभमो ही जमीं जन्मकोट अग्ना से
- 13:25हीं तब इस शब्द के अर्थ बड़े गहरे हैं लेकिन आपको बुद्धि के तल से
- 13:32समझा देता हूँ क्योंकि आप इसी तल से ही समझ सकते हैं।
- 13:38सन् मुख हों ही जीभमो ही जब ही तुम अपने आप को ही जीभ समझो चलो
- 13:44ऐसा ही समझो, जब तुम मेरे सामने आओगे तो आपके सुख दुख मैं सब देख
- 13:52लूँगा और उनमें से। जो काटने योग्य हुए मैं काट
- 13:57दूंगा। जन्म कोट अगर न से ही तब ही और
- 14:04अगर सारे जन्मों के पाप काटने हैं, पाप फल काटने हैं।
- 14:13तो आप अपने ही भीतर चले जाओ, मेरे पास मत आना।
- 14:19जैसे ही आप उस परम तत्व का अवलोकन करेंगे, दर्शन करेंगे।
- 14:25आपके करोड़ों करोड़ों जन्मो के पाप तत्व के क्षण कट जाएंगे एक
- 14:31क्षण में। बस एक क्षण ही काफी है,
- 14:46उसके सामने जाना ही काफी है। सन्मुख होए जीव मोहि जब ही जब जीव
- 14:59मेरे सन्मुख होता है जन्म कोट। अग न सहिं तब अहिं अग पाप करोड़ों
- 15:08जन्म के पाप तथा कृष्ण नष्ट हो जाते हैं, जैसे परवाना शवों में
- 15:19जल जाता है। वश में बहुत हो जाता है।
- 15:23ततक्षण देर नहीं लगता इसलिए यहाँ से जाते हुए बड़े हल्के महसूस
- 15:31करते हैं इसलिए यहाँ बैठने का मन करता है।
- 15:41इसलिए रोज़ संदेश आते हैं बाबा आपके पास बैठने का मन करता है या
- 15:48कोई कुटिया बनवा लो। संत दर्शन का प्रणाम संत आते हैं,
- 16:07चले जाते हैं, कृष्ण आई चले गए, रहदास आई चले गए, नानक कबीर आई
- 16:15चले गए, मीरा आई चली गई। मैं भी चला जाऊंगा, लेकिन ईश्वर
- 16:33की सृष्टी में उजाला कभी खत्म नहीं होता।
- 16:40ये बात ध्यान में रखना बस फिर परमात्मा।
- 16:48अब जैसे संत समाप्त हुए तो सभी मेरे पास आ गए।
- 16:52आप बोले ऐसे ही उन छह लोगों को जोड़ बैठे हैं और जो अभी तैयार हो
- 16:59रहे हैं उनकी संख्या करीब 30 हो गई है।
- 17:08इस मामले में मैंने जो साधना पद्धति बताई वो बताई तो शिव ने
- 17:19मुझे वह सर्वश्रेष्ठ निकली। यद्यपि शिव ने पार्वती को 112
- 17:27विधियों विज्ञान भैरव तंत्र में बता दी कि लेकिन यह एक विधि बड़ी
- 17:32कारगर निकले। करीब 30 के करीब लोग इस अवधि के
- 17:38ऊपर चलकर आनंद का स्वाद उठा रहे है।
- 17:42वो तो नहीं आएँगे मैं भी। 35 वर्ष तक की तरह उस आनंद को और
- 17:53मन फिर भी भरा नहीं अभी। ना जाओ।
- 18:03छोड़कर के दिल अभी भरा न अभी ना जाओ।
- 18:21छोड़कर के दिल अभी वरा, न हूँ अभी ना जाओ छोड़कर तुम कभी भी उठोगे।
- 18:41तो मन करेगा नहीं उठो चलो वहीं यही कारण है मैं जल्दी जल्दी यहाँ
- 18:56पर किसी को आने नहीं देता। शहर के लोग मुझसे नाराज है।
- 19:03पुराने जानकार पुराने वफादार प्रणे मित्र मुझसे नाराज है कि
- 19:11हमको आप आने नहीं देते। वो भी तो वक्त था जब 30 वर्ष
- 19:16हमारे साथ गुजरे। बिल्कुल ठीक है, भाई भी जा रहे
- 19:20हैं लेकिन क्या करें? अब तो रात भर दिन उसको हमारी का
- 19:34नशा उतरने है, तुम आओगे तो मैं तुमसे क्या बोलेंगे?
- 19:42और तुम बोलने से ही समझते हो, मूक भाषा तुम्हें आती है।
- 19:54काश तुम्हें वो मूक भाषा आ जाती तो तुम मेरे पास घड़ी भर के लिए
- 20:02बैठ जाते और मेरी बात को समझ जाते।
- 20:10तुम्हारे प्रश्न तुम्हारी समस्याएं नकली हैं जाली काश तुम
- 20:18मेरे पास बैठी है समझ जाती लेकिन तुम तो तुम्हारी समस्याओं को असली
- 20:25समझे बैठे हो, फिर मैं क्या करूँ? हम्म स्क्रंटरलाइन का?
- 20:33जब तुम तुम्हारी समस्याओं को असली समझे बैठे हो तो फिर मैं क्या
- 20:39करू? मैं तो जानता हूँ कि समस्याएं
- 20:45इनकी सब नकली हैं। हेने स्वप्नवत हैं।
- 20:56तुम जानते हो कि ये स्वप्नवत नहीं है, ये रियल है।
- 21:04अब क्या किया जाए? बिल्कुल तुम्हारे बीच में ही
- 21:09जन्मा पला बढ़ा खाया, खेला, सुकर्म कुकर्म किए यहीं किए मतलब
- 21:23मेरा क्या सो गया? अगर वह अपार सृष्ट सृजन हरा मुझे
- 21:32उस बलन्तियों पे ले गया जहाँ मेरा साकार रूप अनंत वरायता के घेरे
- 21:44में आ गया, उसको छू गया मैं। और परम आनंद को प्राप्त हुआ तो
- 21:50इसमें मेरा क्या कसूर है? अब तो मैं जानता हूँ यह शरीर था
- 22:00जिसके संग तुम रहे खाये खेले गलियों की धूल हमने मस्तक पर लगा
- 22:07दी। लेकिन अगर उसने किसी को चुन लिया
- 22:23तो उस व्यक्ति का कसूर क्या है? अब तुम देखो कभी मैं बाहर निकला।
- 22:34कितने वर्षों से मैं यहाँ बैठा हूँ कारण मुझे कोई जेल थोड़ी हुई
- 22:39है और जेल भी कर दो तो अच्छा होगा, वहाँ भी ऐसे ही बैठूंगा यही
- 22:50कुछ। चाय पीऊंगा।
- 22:56क्योंकि जब मैंने कहीं जाना ही नहीं तो बाहर ताला लगा लो तो क्या
- 23:00है? बाहर खुला छोड़ जाओ तो क्या है?
- 23:04मैं भागूंगा, थोड़ा तुम कहो कि भाग जाओ, फिर भी नहीं भागूंगा।
- 23:14ये मुसीबत है। इसीलिए तो राजनीतिक लोग मुझे
- 23:20पकड़ने नहीं आते। ये तो जहाँ जम के बैठ के बैठ के
- 23:26अब मजिस्ट्रेट भी कहेगा ही शुड बी रियली हिज़ ओन बेल।
- 23:30तो मैं कहूंगा नहीं भाई कैसा बेल मैं मज़े में हूँ यारो मुझको माफ़
- 23:40करना यार मुझको माफ़ करना। मैं नशे में यार मुझको माफ़ करना
- 24:01मैं नशे में उस आनंद का नशा बड़ा प्यारा।
- 24:11आनंद तुम्हारी खुशी की तरह नहीं है, तुम्हारी खुशी तो स्टिमुलेशन
- 24:18है उत्तेजना, लेकिन मेरा आनंद नॉन स्टिमुलेशन।
- 24:28उत्तेजना हीनता है, उसमें कोई उत्तेजना नहीं है।
- 24:32जर्ब मेरा कोई तन्तु उत्तेजित नहीं होता।
- 24:37शांति में रहता है सारा शरीर का अरवा इसलिए तुम भी यहाँ बैठते हो,
- 24:43तुम भी शांत हो जाते हो। यह भी एक तरह का रोग है।
- 24:50आपने देखा? एक व्यक्ति समूह के भीतर बैठा
- 24:53उबासी लेता है तो क्षण तो मैं भी उबासी आ जाते है क्या हुआ?
- 25:00यह संक्रामक रोग है। एक ने उबासी ली, तुम भी उबासी
- 25:05लोगे? फिर सभी उबासी लेना शुरू से क्या
- 25:12हुआ? ये शंकराम को तुम मेरे पास बैठोगे
- 25:16मदहोसी के आलम में तुम भी खो जाओगे, तुम्हें भी लगेगा।
- 25:22बड़ा मीठा मीठा आलम तुम भी तनहा महसूस करोगे इगोलसनेस टाइमलेसनेस
- 25:36में चले जाओगे? तन्हा हो जा साली।
- 25:44झूठ तुम्हें हम ढूंढ़ते हैं हमें दिल ढूँढ़ता है।
- 26:01तुम्हें हम ढूँढते हैं, हमें दिल ढूँढता है।
- 26:15न अब मंजिल है, कोई न कोई रास्ता अकेले हैं।
- 26:34चले आ जहाँ कहाँ आवा जदे तुमको कहाँ वो?
- 26:53ओह, अकेले तुम जहाँ अकेले हो जाते हो, बस तुम अकेला होना सीख जाओ,
- 27:08इसलिए तुम भीड़ में रहना चाहते हो, चाचा ताऊ के संग्रहों।
- 27:13माँ बाप के संग्रह हूँ तुम अकेला होना सीखो जैसे ही तुम भीड़ में
- 27:20होते हो, वह तुम्हारे पास नहीं है जैसे प्रेमी का कहीं भीड़ में
- 27:30खड़ी हो तो प्रेमी जाके उसे। बहुभाष में ले लेता नहीं, प्रेम
- 27:37ही उसके अकेले होने का इंतजार करता है।
- 27:42प्रेमिका अकेली जब हो जाए तो प्रेमी उसको अपने बाहों में ले
- 27:48लेगा। ओह, प्रेमी का अगर भीड़ में गिड़ी
- 27:58फिर प्रेमी इंतजार करेगा, प्रेमी का इंतजार करेगी।
- 28:09कब अकेली हो कब अकेला हो मैं जा के बहुभाष मिले लूँ यहीं परमात्मा
- 28:19की हालत तुम अकेले होते हैं मैं तुमसे गल बकरी मिलता ना।
- 28:25तुम ईद तो मनाना चाहते हो लेकिन भीड़ में भीड़ में ईद कैसे माने?
- 28:32भाई, प्रेम कभी भीड़ में होता है, प्रेम अकेले में होता है,
- 28:42प्रेमिका सदा इंतजार करती है। प्रेमी भी सब इंतजार करता है।
- 28:50कब प्रेमिका अकेली हो, कब प्रेमी अकेला हो और हम एक दूसरे के बांह
- 28:56में खो जाए। अकेलापन का इंतजार परमात्मा करता
- 29:04है। तुम मुझसे शिकायत ना किया करो के
- 29:13मैं भगवान क्यों नहीं मिलता बस मेरी इस बात को आप मुख्य द्वार के
- 29:20चौथे प्रवचन को ध्यान से सुन लेना तुम अकेले हो जाओ।
- 29:32प्रेमिका अकेली हो जाएगी तो प्रेमी दूर नहीं है, इंतजार कर
- 29:36रहा है। उपनिषद में लिखा गया कि वह पास से
- 29:42पास है, लेकिन इंतजार करता है तुम्हारा तुम अकेले कब हो जाओ?
- 29:47यू अरे बीज़ी? मात्र शिकायत किया करो कि हमें
- 29:54परमात्मा ही नहीं मिलता, साली छूट में लिखता है पाट लेट मी लाइव
- 30:06उनसीन अननोन। एंड अनलिमिनल लेट मदर स्टिल फ्रॉम
- 30:12दी वर्ल्ड एंड नॉट ए स्टोन टेल व्हेर आर ला आईएस थे स्टेट व्हेर
- 30:24यू आर अराउंड स्पेशल। व्हेन यू फाइन्ड दी प्रेसेंट खुशी
- 30:35का वो बंका एकाकीपन में ही मिलता है।
- 30:45खुशी का वो मुकाम एकाकीपन में ही मिलता है, लेकिन तुम सॉलिच्यूड
- 30:52रहे थे, तुम कहते हो परमार्थ परमार्थ तुम्हारे द्वार पे बहुत
- 31:03बार। बट देर वॉज़ ए प्लेट आई एम बीज़ी
- 31:13नर्व यू कैन गो तुमने लिखा होता है एक बोर्ड बाहर कि मैं व्यस्त
- 31:25हूँ। इसलिए बड़ा सुंदर किया जिन्होंने
- 31:28व्यापार का नाम बुजीनेस रख दिया। तुम बुजीनेस हो हर वक्त क्या
- 31:34बुजीनेस करते हो मुझे लोग? मैंने कहा मैं बुजीनेस करता ही
- 31:41हूँ। में व्यस्त तो होता ही नहीं।
- 31:49एवेरी टाइम यू विल फाइंड मी नॉन वेजिंग इन दी स्टेट व्हेर आई ऍम
- 31:56अलोन एंड दट। इस वेरी प्लीज़ेंट फॉर मी ए
- 32:02प्लीज़ेंट चाहिए तुम्हें खुशी चाहिए तुम्हें आनंद चाहिए।
- 32:06प्रेम चाहिए तुम्हें चाहिए तो सब परन्तु तुम बीज़ी हो फिर तुम रोते
- 32:16हो, चिल्लाते हो, पीटते हो, कराहते हो परमात्मा कहना है
- 32:22परमात्मा है नहीं, तुम कहते हो ठीक।
- 32:26जब मिला नहीं तो है नहीं अंगूर खट्टे खियास खिसियानी बिल्ली खंबा
- 32:38नोचे है ना? इसलिए तुम्हारी आवाज में बिना के
- 32:46वो झंकार नजर न आए। आनंद का वो झरना झरता हुआ नजर न
- 32:52आएगा तुम रूखे, रूखे, खाली खाली शब्दों को दोहराते हुए सारी उम्र
- 33:00जियोगे और मर जाओगे। तुम कहोगे नाम कमाया तुम कहोगे
- 33:07संस्था कमाई तुम कहोगे परीक्षा कमाया तुम कहोगे तीन चार
- 33:12गर्लफ्रेंड कमाई बॉयफ्रेंड कमाए। लेकिन ध्यान रखना संत की दृष्टि
- 33:22में जिसे तुम कमाई कहते हो, कमाई है वो तो गंवायी है, तुम उन कीमती
- 33:34लम्हों को गंवा देते हो हीरा जन्म अमूर्था कौड़ी बदल जाए।
- 33:43तुम कौड़ी के भाव उसे बेच देते हो।
- 33:46जिन लम्हों में परम आनंद और खुशी का उल्लास मनाया जाता था, जा सकता
- 33:52था, उत्सव मनाया जा सकता था, वो तुम कौड़ी के दाम बेच देते हो?
- 34:08ताज का सूत्र नॉन बिज़नेस व्यापार करो लेकिन उतासा करो साईं इतना
- 34:19दीजिए जामे कुट मत समाये, मैं भी भूखा न रहूँ साधू न भूखा।
- 34:29अतिथि भी भूखा न जाए। वह कुछ आशा लेके तुम्हारे द्वार
- 34:38मुझे याद है बचपन की बात 1213 वर्ष का था।
- 34:45कोई दरवेश किसी घर के आके के न नहीं होगा।
- 34:51लोग बुरा मान जाते हैं भीतर मियाँ बीबी का झगड़ा हो के
- 35:06हटा था, झगड़ा ही होगा, फिर शादी के बाद तो।
- 35:14अरुंधति तारा और वशिष्ट को विश्वामित्र वशिष्ट को देखा होता।
- 35:19ये देखा नहीं तुमने जिन घरों में लड़ाई झगड़े होते हैं, जो अदालतों
- 35:26की दरगाह तक पहुँच चूके हैं, दहलीज पे कदम रख चूके हैं।
- 35:33एक बार रात्रि के वक्त सब दृश्यों में से अरुंधती का दर्शन करें,
- 35:41दुल्हन और वशिष्ठ का दर्शन करें, दोला बहुत संभव है।
- 35:50कि तुम कुछ दिनों में तलाक की अर्जुन वापस चले।
- 35:53आओ क्या है उसमें ऐसी तरंगें निकलती हैं।
- 35:58तुम कहते हो हम स्वतंत्र हैं काम करने के लिए यही तो मूड होता है
- 36:02तुम्हारी इस विराट आलम में तुम कहते हो वी अरे इंडिपेंडेन्ट टु
- 36:08डू यही तो? भर में है तुम्हारा हर वक्त, हर
- 36:16व्यक्ति के ऊपर गिरती है रात को 5 मिनट के लिए।
- 36:28जब दूल्हा दुल्हन के फेरे कराए जाते हैं तो पंडित इस साइंस का
- 36:32लाभ उठाते हैं। यह लाभ है साइंस का क्रेडिट लेते
- 36:45हैं, वो झंडी दिखाते हैं। ऐसे लोग बहुत से हैं हमारे भारत
- 36:50वश में। जो काम तो करते हैं संस्थान झंडी
- 36:54दिखा के क्रेडिट वो ले सकते हैं क्रेडिट लेने में माहिर और वो
- 36:59जानते नहीं बेचारे हैं कि क्रेडिट कभी साथ नहीं जाएगा।
- 37:05यहीं धरा का धरा रह जाएगा। तुम्हारे शरीर के साथ ही दफन हो
- 37:11जाएगा या जला दिया जाएगा किसके क्रेडिट यहाँ भरे रहे कुछ नहीं
- 37:18डरा रहता यहाँ तुम्हारे साथ ही खाक हो जाता है सब कुछ।
- 37:31जिन घरों में झगड़े चलते मियाँ बीबी के और रोज़ रात को 1 मिनट के
- 37:43लिए अरुंधती, तारा और वशिष्ठ तारा के दर्शन कर लिया करें, हर वक्त
- 37:50वह ऐसे ही करने निकलती हैं। जो आपको प्रेमपूर्वक बना देंगे
- 38:06अमावस्या की वो रात जो काली होती है तो अरमद्वती बड़ी चमकती है
- 38:13दुल्हन की तरह चमकती है वशिष्ट बड़े चमकते है दुल्हे की तरह।
- 38:22इसलिए रात्रि के वक्त फिर लिए जाते थे।
- 38:25आज तो दिन की चर्चा होने लगी। उसका कारण था दिन में नजर आता
- 38:35नहीं। और प्रथम मिलन से पहले दुल्हन
- 38:45अरुंधती के दर्शन करें। 2 मिनट के लिए देखते रहे उसे और
- 38:50दूल्हा वशिष्ट के दर्शन करें। इन तारों की गणना किसी साइंटिस्ट
- 38:58से पूछ लेना बता देगा या सर्च मार लेना तुम्हें पता चल जाएगा।
- 39:06झगड़े क्लेश खत्म हो जाएंगे। कुछ दिनों में तलाक तक की नौबत
- 39:11लिए हुए व्यक्ति वापस मिल जाएंगे। यह रात बड़ी प्यारी होती है।
- 39:29अरुंधति विशेषता है, रात को ऐसी किरणों का विकेरण करती है और
- 39:41वशिष्ट विशेषता रात को। ऐसी किरणों को विक्कीर्ण करता है
- 39:48जीसको पीकर तुम प्रेम से भर जाते हो, प्रेम से भर जाते हो, यह कोई
- 39:59चूरन वूरन नहीं डलता है नींबू के बीजों का।
- 40:07असलियत बाद में समझ आती है जो कहते हैं बौताबांधा को क्योंकि
- 40:14तुम्हारे रोम को श्वास लेने में मुश्किल महसूस करते हैं और वो ही
- 40:20बाद में नींद बेचने लग जाते हैं। नकली संतों को तुम पाओगे आज जिनके
- 40:29पास करोड़ों, लाखों की भीड़ है, कल को तुम पाओगे, उनके मंजर सूने
- 40:35पड़े होंगे। कारण ज्ञान नकली है।
- 40:40उदाहरण है। उधार ज्ञान वाला कितनी देर ठिकेगा
- 40:48आज नहीं कल मंजर सूखा हो जाएगा। जिन जोड़ों के कलह, कलह ही सोते
- 41:02हैं रात को एक 2 मिनट के लिए। अरुंधति और वशिष्ट इन दोनों के
- 41:10दर्शनों के आकार ऐसी किरणें बरसाती हैं तुम तुम तो आज फ्रैट्स
- 41:18में रह रहे हो, तुम्हें तो पता ही नहीं।
- 41:25वशिष्ठ और अरुंधती होते क्या? लेकिन फेरों के वक्त पंडित इस
- 41:31विज्ञान का लाभ उठाते ही। यद्यपि पंडितों को इस विज्ञान का
- 41:35पता नहीं है, मर्म नहीं पता है, रहस्य नहीं पता है।
- 41:40रहस्य ये है की जिसकी एक झलक से इतना प्रेम उड़ेगा जाता है भीतर
- 41:47कि जैसे ही सागर पी लिया हो, अगस्त ने अगस्त से मुनि सागर पी।
- 41:53बस इतनी सी देर काफी है जिनके घरों में मियाँ बीबी के झगड़े
- 41:58होते हैं और किसके घर में नहीं होते?
- 42:02ये बात है ना कह के फेस पाउडर लगा लेते बाहर चले जाते है लेकिन घर
- 42:07के भीतर तो थपड़े थपड़ी जूतों, जूते होते है, वो लाल हो जाते है
- 42:15तो फेस पाउडर लगा लेते है। चलो डकी भी जाएगी।
- 42:23और थोड़ा ग्लोब भी हो जाएगा। याद रह जाएगी ये रात करी बाजा।
- 43:08दूर रह कर न करो बात करी बाजा याद रह जाएगी दे रहात करी बाजा।
- 43:31सर्द जोकों से धधकते हैं बदन में शोले, सर्द जोकों से।
- 43:47धधकते हैं बदन में शो ले जान ले ले डीजे बरसात।
- 44:04करी बाजा जान ले लेगी ये बरसात करी बाजा करो हाथी, कल आ जाओ।
- 44:30साली चुप अकेले हो जाओ तुम्हारा अहंकार भीड़ को तलाशता है और
- 44:43ध्यान रखना। अहंकार के लिए यह दाबूत है दाबूत
- 44:48का कील है जैसे तुम्हारी अर्थी में कील कोई गांठ है, अकेलापन,
- 44:59लेकिन परमात्मा के लिए बड़ा सुंदर लम्ह है।
- 45:09टाइम लेसन खुशी कर लम ज्ञान बांटते फिरते आज आचार्य लोग उनसे
- 45:22पूछो। के खाली लम्हे कब आए, तुम्हारी
- 45:26ज़िन्दगी में तुमने कब उनका आनंद माना?
- 45:29और जब माना ही नहीं तो बांटो के क्या खाक?
- 45:45अकेले हो जाओ भीड़ अहंकार का भोजन अब ये कसौटी को ख्याल में रख लेना
- 45:55अगर तुम्हारा मन? अकेलापन की तरफ बढ़ रहा है।
- 46:02तुम्हे अकेलेपन में रस आ रहा है तो समझो तुम परमात्मा के करीब
- 46:06विचार है तो र रह कर न करो उसने तुम्हे पकारना शुरू कर दिया दो
- 46:16मदर हो पास आ जाओ, आओ गले से लग जाओ।
- 46:28उसने तुम्हें आवाज़ दे दी इसलिए आनंद नाग का स्वर इतना मीठा होता
- 46:33है वो तुम्हें पुकार का है आ जाओ हमारी बाहों में बाहें फलाए बैठे
- 46:43हैं हम। अहंकार की खुराक है भीड़।
- 47:02अगर नेता की रैली में भीड़ न आए तो जैसे उसके प्राण किसी ने चूस
- 47:11लिया। क्योंकि अहंकार से भरा पड़ा है
- 47:16राजनीतिक नेता जितनी भीड़ होगी उतना उसका अहंकार फूलता ही जाएगा।
- 47:25फैलता ही जाएगा राजनेता। के लिए भीड़ इसीलिए जरूरी होते
- 47:32हैं। अहंकार का वो प्रदूषण भीड़
- 47:42ढूंढ़ता है तो इसे एक कसौटी में लेना जब तुम्हारा मन भीड़ को
- 47:49ढूंढे। जब तुम्हारा मन कहे के भीड़ में
- 47:54चले चलो, मूवी देखने चले और तुम गलती में हो अगर तुम अकेलो को
- 48:03जाकर सिनेमा हॉल में बैठा दिया जाए और वहाँ कोई भी ना हो तुम भाग
- 48:08जाओगे। एक आध घंटे में तुम एग्ज़िट
- 48:14दरवाजे से बाहर जाओगी, भीड़ के कारण नहीं तो तुम जाते हो,
- 48:19तुम्हारे मन को ये पता नहीं होता कि हम जाते हैं, इसलिए शैलियों
- 48:24में जाते हो तुम। आई थोड़ा थोड़ा मानव समझने लगाए
- 48:28तो ₹500 और शराब की बोतल देकर बुलाना पड़ता है।
- 48:33रेलवे में इसे कसौटी समझ लेना कसवट्टी समझ लेना इट्स ए
- 48:43मेज़रमेंट। जब तुम्हारा मन अकेलापन में राजी
- 48:49होना शुरू हो जाए तो समझ रहे ना परमात्मा ने तुम्हें पुकार दिया
- 48:53है। आवाज़ देख हमें तुम बुलाओ।
- 49:12आ आवाज देख हमें तुम बुला महोबच में सुना हमको।
- 49:30सताओ आह, वह देख के हमे तुम बोला मोहब्बत में।
- 49:47ना हम को सता आवाज दे। इसे एक कसौटी की तरह ले लेना बस
- 50:03किसी संत के पास जाकर। यह पूछने की जरूरत नहीं है कि मैं
- 50:09किस चक्कर पे पहुँच गया हूँ अगर तुम अकेले होने का हो तुम्हें
- 50:18लुतिफा आ रहा है भीड़ में तुम्हारा मन घबराता है।
- 50:28बड़ा शुभकाल उत्पन्न होना शुरू हुआ।
- 50:32अच्छे दिन आ गए। भीतर से तुम्हारा मन ये करता है
- 50:43कि कहीं एकांत स्थान में आकर एकाकीपन में साली चूड़ में।
- 50:49हम जाके बैठ जाएं और बिल्कुल इसी इन्हीं लम्हों में अलेक्जैंडर पोप
- 50:55ने बोला होगा साली झूठ लेट मी लिव एंड सीन अननोन एंड अन्लीमेंटेड
- 51:01लेट मी डाइस इट फ्रॉम दी वर्ल्ड नॉट रेस्टोरेंट टेल व्हेर ए
- 51:05लार्ज। बिल्कुल, इन्हीं लम्हों में भीतर
- 51:09से उच्छरित हुआ होगा। एकाकीपन का मज़ा ऐसा क्योंकि
- 51:19तुमने चखा नहीं, तुम बचपन से जूं जन्मे थे, तुम भीड़ के अंदर ही
- 51:24रहे। भीड़ के अंदर ही परे एकांत
- 51:26तुम्हें खाने को आता है। देखिये पहले पहले तो खाने को ही
- 51:34लेकिन धीरे धीरे धीरे धीरे तुम्हें उसका चस्का लग जायेगा,
- 51:39मज़ा आएगा एकांत में बैठने को। फिर एक वक्त ऐसा आएगा।
- 51:49तुम अकेले पड़े होगे और तुम्हें कोई भी आ जाये कोई भी आ जाये
- 51:54तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा, बुरा लगेगा बस समझ लेना।
- 52:03यू अरे नियर अलमाइटी तुम परमात्मा के गरीब हो।
- 52:09तुम सर्व शक्तिमान के करीब तुम विराट के करीब हो और तुम विशाल के
- 52:14करीब हो, तुम फैलने लगे, ईश्वर कहे तुम उन लम्हों में जाओ, तुम
- 52:24विराट हो जाओ और तुम पाओगे कि दूसरा कोई नहीं वजह की बात है।
- 52:31सालीचूड़ वहाँ होता है एकाकीपन बस एक है अहम् ब्रह्मस मैं ही हूँ
- 52:37अनरहक मैं ही हूँ एको अहम् द्वितीय नास्तिक एको ब्रह्म
- 52:44द्वितीय नास्त एक है। ये कहने का मतलब ये था।
- 52:49एकाकीपण में मिलता है वो और एकाकीपण में ही वो स्वाद चखा जाता
- 52:56है वो लुत्फ उठाया जाता है वो लज्जत आ जाती है तुम लज्जते ढूंढ
- 53:04रहे हो कहीं और तुम गलती में हो। यह मार्ग जीस पर तुम चल रहे हो
- 53:13भीड़ के साथ वह एकाकीपन में जाता नहीं वह तुम्हें और ज्यादा भीड़
- 53:18भड़के में ले जाता है और अगर तुम लज्जत उठाना चाहते हो तो याद रखो।
- 53:25अकेले होने का साहस जुटाओ। यद्यपि ये पहले पहले साहस जैसा
- 53:29लगेगा, दुस्साहस जैसा लगेगा लेकिन जब इसके फल आएँगे, बड़े मीठे
- 53:35होंगे और फिर एक वैर की अगर वो फैला दे।
- 53:41तो तुम फिर से भीड़ के अंदर नहीं जाना चाहोगे।
- 53:44कभी भी बड़े मज़े की बात है। उसी भीड़ में जहाँ तुम जाना चाहते
- 53:50थे, डंडा डंडा उठा के उसी वही भीड़ तुम्हें खलेगी, वही भीड़
- 53:57तुम्हें दुखदाई। प्रतीत होगी तुम्हें लगेगा कहाँ
- 54:00से दुष्ट आ गए तुम किसी को बुलवाने पे भी नहीं जाओगे एकाकीपन
- 54:07का स्वाद, लज्जत ऐसी होती काश काश तुम्हें एकाकीपन की लज्जत आनी
- 54:16शुरू हो जाए। जब फैलता है व्यक्ति और इतनी दूर
- 54:24दरड़ तक चला जाता है कि दूसरा कोई होता ही नहीं, ना उपजेक्ट होता
- 54:33है, ना सब्जेक्ट होता है, सिर्फ दर्शन होता है।
- 54:40कुछ नहीं होता बस वह होता है समुद्र का एक एक समुद्र का एक
- 54:47एकाकीपन तुम अपने व्रतत्व में असीम भंडारण में खोये होते।
- 54:56वहाँ आता है मज़ा वहाँ आता है लुत्फ वहाँ आती है लज्जत भेड़ों
- 55:04में लज्जत को ढूंढने वालों अगर कोई व्यक्ति ये कहता है कि मैं
- 55:10भीड़ में ही रहूँ, समझो वो बीमार है।
- 55:13आध्यात्मिक तौर से बीमार है दिमाग में मेरी बात को थोड़ा समझ लेना
- 55:21मेडिकल और सफर चुली दोनों में फर्क मेडिकल तो तुम्हें कहेंगे ये
- 55:28काले एकांत में मत रहो। सदा ही बीज़ी रहो, सदा ही व्यस्त
- 55:36रहो, भीड़ पर रहो जब तुम मेंटली डिस्टर्ब होते हो, पागल होते हो।
- 55:47हमेशा ही तुम्हें मनोवैज्ञानिक मनोचिकित्सक कहेगा।
- 55:52सिकैट्रिस्ट कहेगा कि सदा ही अपने आप को बीती रखो तो तुम्हें मनो
- 55:59रोग है कोई मनोरोग को दूर करने के लिए।
- 56:06वह तुम्हें मशवरा देता है कि तुम सदा ही बीज़ी रहो, भीड़ करो,
- 56:12लेकिन मैं तुम्हें मन से पार की बात बताता हूँ।
- 56:16मन खुशी तो होते देता है लेकिन आनंद का स्वाद नहीं देता, वो रस
- 56:21नहीं है मन में। रस कहूँ मन में, मन तो ऊब जाता है
- 56:30मन लोभी मन लालची मन चंचल मन चोर मन तो पल पल में बदलता है, मन के
- 56:38मते न चालिए, पलक, पलक, मन और। तुम कैसे समित हो, मन के सहारे
- 56:48तुम उस आनंद को पा जाओगे, रस को नहीं पाओगे, मन के आगे भी कुछ है
- 56:56और भी दुनिया है सितारों से परे। तुम्हारे मन के सितारों की दुनिया
- 57:05से पार कोई एक मौन स्थिति भी है जहाँ शोर नहीं होता।
- 57:18जहाँ शोर नहीं होता वहाँ एकाकी पन में जो स्वाद जो लज्ज थे, जिसने
- 57:28एक बार चक्र, एक पल के लिए सदोरी में वो लज्जत आती, इसलिए मैं सदा
- 57:34ही कहता हूँ कि तुम एक पल? किसी न किसी तरह उस सुतोरी का
- 57:38आनंद ले लो, फिर तुम संसार में उतने घुस न पाओगे, जीतने उससे
- 57:47पहले और धीरे धीरे तुम अपनी तरफ मुड़ना शुरू हो जाओगे और 1 दिन
- 57:53तुम अपने में जाकर अवस्थित हो जाओगे।
- 57:56जिसे कृष्ण भगवान कहते हैं सीती प्रज्ञा अपनी प्रज्ञा में बैठ जा,
- 58:03शीतल हो जा अध्यात्म की तरफ जब तुम मुड़ने लगोगे, मन की तरफ जब
- 58:14तुम मुड़ने लगोगे, मन का स्वभाव है, वो तुम्हें भीड़ में ले के
- 58:17जाएगा, तुम समझ लो। तुम मनोरोगी हो, किसी डॉक्टर के
- 58:27पास जाने की जरूरत नहीं, खुद ही पैमाना तुम्हें बता रहा हूँ अगर
- 58:34भीड़ में जाने का मन करे। तो समझ लेना तुम मनोरोगी हो,
- 58:43तुम्हें मनोचिकित्सा की आवश्यकता है, लेकिन मनोचिकित्सक के पाशाओं
- 58:49के साइकिएट्रिक के पाशाओं के वह कहेगा बीज़ी रहो हर वक्त।
- 58:55वह खुद ही पागल है। तुम्हारे मनोरोगी का इलाज करने
- 59:01वाले साइकिएट्रिस्ट मनोवैज्ञानिक खुद ही पागल है।
- 59:04फ्राइड से बड़ा पागल और कौन हो सकता है।
- 59:09जो अचेतन की परम गहराइयों में नहीं जा सका और अचेतन को भी उसने
- 59:13विभक्त कर दिया बायफरकेट कर दिया। अब चेतन और अचेतन नहीं पहुँच पाए
- 59:19तो बेचारा क्या करें? दो भागों में बांट दिया
- 59:23सबकॉन्सेस्ड एंड अनकॉन्शियस अब चेतन और अचेतन।
- 59:28अचेतन वो जो मैं जान नहीं पाया अब चेतन वो जो मैं जान पाया बस कहने
- 59:34का मतलब ये है सीधा सीधा समझो उससे बेचारा ज्यादा कौन उससे
- 59:42ज्यादा बेचारा कोई भी नहीं नाम धरा का धरा रह गया।
- 59:48बहुत से पागल उसने पीछे लगा दिया और आज पागल बैठे अपनी कुर्सी पे
- 59:56लिख रहे हैं भी बीज़ी हॅव यूरसेल्फ़ बीज़ी एकांत में मत जाओ
- 1:00:06इसे अकेला मत छोड़ो। मनो रोगी मनोचिकित्सक तो तुम्हें
- 1:00:14यही कहेगा, लेकिन मैं उसकी बात कहूँ करता हूँ भाई मैं बात करता
- 1:00:23हूँ उस दुनिया की। और भी दुनिया है सितारों से पार
- 1:00:30जो तुम्हारे मन से पार है। जिसे मने कहते हैं गुरु नानकदेव
- 1:00:35मने की गतक कहीं न जाए, जो जो सो कहे पाछे पक्ष।
- 1:00:47वहाँ जाकर सब ठहर जाता है। गाड़ी चलती है तो तुम मनोरोगी हो,
- 1:00:54गाड़ी ठहर गई तो तुम्हे वक्त बिखता नजर आएगा।
- 1:00:58कोई पेड़ नहीं भाग रहा, कोई सितारे नहीं भागरे को जमीन नहीं
- 1:01:01भागरे को स्टेशन नहीं भागरे को लोक नहीं भागरे सब ठहरा हुआ है।
- 1:01:08यह सच्चाई है सच्चाई को तुम जान पाओगे उस स्तर पर जाकर तो मन की
- 1:01:15सवारी को लिए लिए तुम कहते हो जो बात वो सब गलत है, इसलिए मैं कहता
- 1:01:22हूँ अचारों की बातों को सुन लेना उस।
- 1:01:25पर चल लेना और तुम पाओगे तुम्हारा जीवन ज्यादा विकृत हो गया मेरी इस
- 1:01:32बात को फिर सुन लो अचारों की बात को सुन लेना, उनको गुण लेना, उनके
- 1:01:39ऊपर अमल करना चलना और तुम 1 दिन पाओगे।
- 1:01:44यू वर ऑन मिस्टेक तुम गलती में थे, क्योंकि पाओगे के दुख कर रहा
- 1:01:53हूँ जब मन करे भीड़ में जाने को तो खबरदार हो जाना, अलर्ट हो
- 1:02:05जाना। अपने आप को वार्न कर देना जागना
- 1:02:11तुम गलत राह पे चल रहे हो तुम्हारा मन जब कहीं भीड़ में
- 1:02:17चलो, चलो ताऊ, चाचू के पास चलो मित्र बंधुओं के पास चलो सिनेमा
- 1:02:25हर मूवी के पास। तो खबरदार ठहर जाना यू अरे ऑन दी
- 1:02:33रूम पाथ उससे बिलकुल विपरीत दिशा में चल जाना किसी से पूछना मत, वह
- 1:02:43दिशा बिलकुल विपरीत जब तुम चलोगे। पाओगे वो दिशा सही है, उसके
- 1:02:49विपरीत की दशा बिल्कुल सही है जो तुम्हें एकांत में लेके जाती है
- 1:02:56सारी चोट अकेले होने का साहस करो। अकेले होने का साहस इसका मतलब यह
- 1:03:12नहीं कि घर से भाग जाओ घर से भागोगे तो जहाँ जाओगे वहाँ भी
- 1:03:18भीड़ मिलेगा अकेले वहाँ भी कोई नहीं।
- 1:03:23तुम अपने आपको अकेलापन जहाँ पाओगे, दुनिया में रहते हुए कृष्ण
- 1:03:29की तरह, बुद्ध की तरह महावीर की तरह, नानक कबीर की तरह, दुनिया
- 1:03:38में रहते हुए तुम एकाकीपन को पा सकते हो।
- 1:03:46क्योंकि यू अरे नॉट चेंज सर्कमस्टैंसेस तुमने परिस्थितियों
- 1:03:54को नहीं बदलना है, तुमने मनोस्थितियां को बदलना है, भीतर
- 1:04:00गोता लगा जाओ, मनोस्थिति बदल गई, मन से बाहर निकल जाओ, इसी को मन
- 1:04:04ने कहा है। गुरना मन को छोड़ दो, यह गड्डर
- 1:04:13है? इससे बाहर निकल जाओ, इसको छोड़
- 1:04:17दो, यह तो नहीं हिलेगा, इसको हिलाने की चेष्टा मत करो इसको साफ
- 1:04:23सुथरा करने की। चेष्टा मत करो।
- 1:04:25इसलिए जो लोग जो संस्थाओं चरित्रवान बनाना सिखाती हैं, वो
- 1:04:31गलती में हैं, वो मोरालिटी तो पैदा कर देंगी, सब वर्चुअलिटी
- 1:04:36पैदा नहीं कर सकेंगे इसे फिर सुनो जो संस्थाओं तुम्हें संस्कारित
- 1:04:42करती हैं। वो मरेलिटी तो पैदा कर देंगे,
- 1:04:48स्पर्चुअलिटी पैदा नहीं कर सकेगी। बोर्ड चाहे इस पर च्युरिटी के ही
- 1:04:52क्यों न लगा ले, उसमें चरित्रवान बनाएंगी।
- 1:04:59स्वेत साड़ियां पहनाएंगी स्वेत वस्त्र, पहनाएंगी।
- 1:05:06एक प्रोटो को निश्चित कर देंगे कि श्वेत वस्त्र पहनना है, लेकिन
- 1:05:11ध्यान रखना मोरेलिटी सिखाने वाले स्पिरिचुअलिटी तक नहीं जा सकेंगे
- 1:05:18क्योंकि मोरेलिटी एक बंधन है। मोरालिटी तुम्हें बांध लेती है और
- 1:05:27तुमने होना है आजाद तुम जीस तल पर जाकर आजाद होगे वहाँ चले जाना
- 1:05:34वहाँ मिलेंगे आजादी वह तल यद्यपि अभी तुमसे अननोन है।
- 1:05:41यद्यपि अभी अनजाना है, अनजान है वो राही फिर भी जाना वहीं है जहाँ
- 1:05:51जाकर मन को सुकून मिलता है, सुरूर मिलता है।
- 1:05:56आनंद मिलता है, लुस्तफ मिलता है, लज्जत मिलती है।
- 1:06:04एकाकीपन में जो लज्जत है वो समूह में नहीं, इसलिए बाबा ने मुझे
- 1:06:10पर्थ में उपदेश दिया कि तुम बोलो बोलो लेकिन।
- 1:06:15कम्यून मत बना लेना, बस उसका मतलब मैं समझ पाया।
- 1:06:20बात में कम्यून के बनाने का अर्थ कि तुम बैठे होगे, मैं बोलता हूँ
- 1:06:27कि तुम घुसर वसुर करोगे तुम लड़की के लिए रिश्ता ढूंढ रहे हो?
- 1:06:34फिर बेटा क्या काम करता है? फिर कितना बड़ा है?
- 1:06:40तुम आपस में गुना भाग करते रहोगे, गुरु बोलता रहेगा तुम गुना भाग
- 1:06:46करते रहोगे। इसलिए बाबा ने कहा कमीन मत बना
- 1:06:52लेना। क्योंकि तुम्हारे मन की आदतों को
- 1:06:58वो अच्छी तरह जानते हैं। अगर वो नहीं जानते तो फिर कौन
- 1:07:01जानता है इसलिए जब तुम मेरे पास आते हो।
- 1:07:11मैं सदा ही उस तल पर बैठा हुआ व्यक्ति हूँ, मैं अपने घर के
- 1:07:16अंतरिम कोने में बैठता हूँ, सदा से परले घर में बैठा तो 58 फुट
- 1:07:23दूर बैठा ताकि मेरी तरंगें बाहर जाते व्यक्ति को सुरक्षित न कर
- 1:07:29पाएं। 60 फुट तक मेरी तरंगी जाती है इन
- 1:07:35नॉर्मल, वे तो मैं बिल्कुल आंतरिक बोलने में बैठ जाता हूँ, अंतिम
- 1:07:41कमरा मेरा होता है यहाँ भी तुम पाओगे।
- 1:07:50बिल्कुल अंतिम कोना मेरे पास आग से 58 फुट के दूर पर बैठे ताकि
- 1:07:58बाहर की भीड़ परक्का सूरज जब निकला कब छिपा मुझे तो उसका भी
- 1:08:03नहीं पता। क्योंकि तुम्हें मालूम हो न मालूम
- 1:08:07हो मुझे सूरज की घर्षण नजर आती है।
- 1:08:10मुझे सूरज की घर्षण सुनाई पड़ती है।
- 1:08:16मुझे वो आवाज सुनाई पड़ती है जब सूरज चलता है जब पृथ्वी अपनी धुरी
- 1:08:21के ऊपर चलती और सूरज के आसपास। एकाकीपन का स्वाद इसे ही साली छूट
- 1:08:39कहते हैं। जब तुम मेरे पास आते हो, बात चली
- 1:08:50जिसके नाम ये स्कूटर था। और जिसके नाम वो स्कूटर थे वो जब
- 1:08:56मेरे पास आया बाबा स्कूटर चोरी हो गया, आपके डर से हो गया और फिर
- 1:09:01उसके डर से हो गया तो फिर मैं क्या करता हूँ?
- 1:09:05मेरे पास एक तकनीक है, कोई बात नहीं बता के जाऊंगा, तुम फिक्र ना
- 1:09:09करो जाने से पहले। सब बता दिया गया है।
- 1:09:15कुछ रह गया है वो भी बता जाऊंगा सब बाँट जाऊंगा क्योंकि लेके तो
- 1:09:19कोई वैसे भी नहीं जा सकता तुम गलती में हो और जब यहाँ सर कोई
- 1:09:28लेके जा ही नहीं सकता तो फिर क्यूँ ना बाँट के जाए?
- 1:09:33यही संत स्वभाव है अभी कल परसों किसी ने प्रश्न पूछा कि ये
- 1:09:38बहुमूल्य हीरे बांटने के लिए है और कोई साथ लेके गया है कभी साथ
- 1:09:46कोई जब लेके ही नहीं जा सकता तो भला ये नहीं होगा कि मैं बांट
- 1:09:51जाऊं। बिल्कुल यही होगा लेकिन क्या करे
- 1:09:55तुम्हारा मन रोकता है नहीं, नहीं इसको नहीं बांटना है।
- 1:10:01बस इसी दुर्वृत्ति ने मानवता को कंगाल कर दिया।
- 1:10:07हमारे पास ऐसे ऐसे हीरे से जो आज खोज रहे हैं।
- 1:10:11मैं जब खोजता हूँ तो हैरान हो जाता हूँ ऐसा ऐसा पड़ा और बहुत से
- 1:10:17लोगों के पास थे जो सांस लेके कहते हैं कि सांस लेके मर गए,
- 1:10:21मैंने कहा नहीं यहाँ छोड़ के मर गए, अब आइंस्टाइन मरा तो क्या वह
- 1:10:26जहाँ जन्म लेगा? जन्मते ही उसे एबीसी फिर से सीखना
- 1:10:32होगा। वह सीधा ई इज़ इक्वल टु एम सी
- 1:10:37स्केयर नहीं जान पाएगा, क्योंकि वह खोपड़ा तो यहीं छोड़ गया,
- 1:10:40जिसके भीतर तो साथ कुछ नहीं लेकर जाओगे।
- 1:10:47धन दौलत। जमीन जायदाद, मित्र परिवार यही
- 1:10:53साथ नहीं जाता। ऐसा मत सोचना तुम्हारा कमाया हुआ
- 1:10:58ये सब जो सर लोगों के दिमाग में घुसा पड़ा है, जो आचार्य लोगों के
- 1:11:03दिमाग में घुसा पड़ा है, यह संघ नहीं जाएगा।
- 1:11:06शंख क्या लेके जाएगा, शंख लेके जाएगा।
- 1:11:08कबीर कबीर के पास ऐसी बहुमूल्य सम्पदा है जो उसके साथ जाएगी और
- 1:11:14वो सम्पदा कैसी है, वो सम्पदा है, भीतर की सम्पदा आध्यात्मिक सम्पदा
- 1:11:20है, तुम मोरल बना लोगे, फिर भी दुनिया कहाँ मोरल रहेंगी?
- 1:11:27मोरालिटी के नाम के ऊपर भी लोग धन कमा रहे हैं।
- 1:11:38यह जो स्कूटी आज मिली है, इतने दिन तक क्यों नहीं मिली?
- 1:11:46एक विद्या है जिसे मैं प्रयोग करता हूँ।
- 1:11:50लेकिन उसे मुझे पता रखना चाहिए। मैंने अपना मोटर साइकिल इसी लिए
- 1:11:57नहीं मांगा। मुझे पता है वो जहाँ है जिसने
- 1:12:00उठवाया उसका नाम भी मुझे पता है, जो उठा के ले गया उसका भी पता है
- 1:12:06लेकिन मुझे तरस आया आँखों में आंसू आए।
- 1:12:09कि आज यह इस कगार पे आ गया कि चोरी करने लगा चोरी करना तुम कोई
- 1:12:19अच्छा काम समझते हो, व्यक्ति इतना दीन हीन हो जाए कि वह चोरी करने
- 1:12:25लगे। बांटने की बात तो छोड़ो।
- 1:12:28हमारे संतों ने तो कहा कि बांटो सो हाथों से इकट्ठा करो, 1000
- 1:12:34हाथों से बांट दो और तुम ऐसे सतल पर आ गए, ऐसे तल पर आ गए।
- 1:12:39तुम्हें चोरी करना पड़ता है। कितनी देनहीन पर वृद्धि है यह जो
- 1:12:45व्यक्ति स्कूटर उठाकर ले गया। तो फिर मेरा तो कुछ है नहीं,
- 1:12:51इसलिए मैं तो नहीं मंगाऊंगा वह मेरे नाम पे था मेरा था, लेकिन
- 1:13:00जैसे ही मैं नहीं जाना, मेरा कुछ नहीं है और मैं भी नहीं।
- 1:13:04और अगर मैं हूँ तो मैं भगवान हूँ, परमात्मा है इसलिए कल्की का अवतार
- 1:13:11अगर घोषित किया शिव ने तो कोई गलत नहीं किया, बिल्कुल ठीक किया।
- 1:13:16जैसे ही तुम मेरे पास आओगे मन्नत तुम मांगोगे।
- 1:13:20मन्नत तो स्वीकृत होगी। लेकिन एक बात समझली ना थोड़ा सा
- 1:13:31तुम पुत्र मांग के गए, मिल गई तुम्हें पुत्र परमात्मा ने
- 1:13:41तुम्हें जीवंत तत्व तो दे दिया। जीवन तो उतना ही पुत्र में उतना
- 1:13:48ही पुत्र में लेकिन तुम्हारे समाज की व्यवस्था तुम्हारे समाज में
- 1:13:53मान्यता पुत्र की जात तो हमारे समाज में अंग्रेजी समाज में ऐसा
- 1:13:58नहीं है। मेरा भाई कहा करता था कि ये भारत
- 1:14:01के लोग इतने दुष्ट हैं, वह वहाँ पर।
- 1:14:05एम्प्टी था हार्ट का जब हम टेस्ट करते हैं और उसे लिख के देते हैं
- 1:14:14बेबी बॉय तो वो रोने लग जाते हैं और हिंदुस्तानी को जब हम लिख के
- 1:14:20देते हैं बेबी बॉय तो खुशी से जो मुड़ते हैं।
- 1:14:25नाचें लगते हैं। हमें तो मिठाई दोनों तरफ से मिल
- 1:14:28जाती है। भारतीयों के बेटा हो जाए तो भी
- 1:14:32मिठाई मिल जाती है और अंग्रेजों के बेटी हो जाए तो भी मिठाई मिल
- 1:14:38जाए। दोनों के सामाजिक व्यवस्थाएँ अलग
- 1:14:41अलग हैं। मान्यताएँ अलग अलग हैं।
- 1:14:44वो बेटी चाहते हैं क्योंकि बेटी को पालना बड़ा आसान है।
- 1:14:47कोई ज्यादा उपद्रव नहीं करती। बेटी बस वो प्रश्न ही पूछेगी,
- 1:14:54ज्यादा से ज्यादा इतना पूछ लेगी कि बाबा शांति चाहिए, बेटी ज्यादा
- 1:15:00उपद्रव नहीं। बस बोल बाल के जो हो जाएंगे,
- 1:15:05लेकिन बेटा तो उपद्रव खिला देगा घुसू मुक्का मारेगा?
- 1:15:14लेकिन हिंदुस्तानी तुम मेरे आगे आके मन्नत मानोगे?
- 1:15:20मुझे पुत्र मिल जाए। बात समझना आपको जीवन तो मिलेगा
- 1:15:31लेकिन पुत्री वह बड़ा सयाना है। यहाँ हमारे लोग कह देते हैं।
- 1:15:42बैली पुत न जमे ती अन्नी जंगी बहुत से भक्त लोग अभी देखो क्या
- 1:15:52मेरी इस वीडियो को सुन के नॉन सब्सक्राइब कर लेंगे और कहीं तो
- 1:15:56बड़े गुस्से में लगेंगे अनसबस्क्राइब?
- 1:16:00भाई मेरा क्या छीन लोगे तुम? मैं वो तत्व हूँ जिसमें से कुछ
- 1:16:07घटाया नहीं जा सकता। मैं वो तत्व हूँ जिसमें और जुड़ा
- 1:16:12नहीं जा सकता। तुमने अनसबस्क्राइब कर दिया तो कर
- 1:16:15दिया। अंत में पाओगे के हम सबसे अगर
- 1:16:21भयंकर और मूर्खता वाला दिन था और पल था तो वो यही था जब मैंने बाबा
- 1:16:27को अनसबस्क्राइब किया क्योंकि अब तुम जाओगे गफूरबंदियों के पास रुक
- 1:16:34तो सकते नहीं। गफोड़पंथी तुम्हें सिखाएंगे वैसा
- 1:16:39गुस्सा पहले वो तुम्हें देंगे उपदेश पढ़ा लिखा हुआ इधर उधर से
- 1:16:46बाबा तुम्हें बताते हैं खुद की देखी मैं कहता आँखों देख तुम कहते
- 1:16:53कागज़ की लेखी। और फिर धीरे धीरे ये प्रचार करने
- 1:17:00लगेंगे कि अपने गुप्त तंत्रों को कैसे बढ़ाओ, इसके साइज को कैसे
- 1:17:06बढ़ाओ, तुम देखना ये हालात आज नहीं कल हो जाएंगे।
- 1:17:17सत्य उघड़ के बाहर आ ही जाता है, देर आयत दुरुस्त आयत जो दुरुस्त
- 1:17:25है वो देरी से ही आ जाए चाहे लेकिन आ जाता है।
- 1:17:31तुम अगर धन के लोभ के कारण किसी कारणवश कुछ काम कर रहे थे।
- 1:17:391 दिन तो हमारा सत्य चीर के बाहर आ जाएगा कि तुम इसीलिए से कर रहे
- 1:17:44थे आज देखो। ये बोथा बांधने वाले जीन्स बेच
- 1:17:56रहे हैं और वो भी यहाँ घुटनों से फटी हुई।
- 1:18:05यह मोरल बना रहे थे तुम्हें। यह सुसंस्कृत कर रहे थे।
- 1:18:12कहते गुरुकुल चलाओ गुरुकुल को चलाने के लिए वैसे गुरु भी तो
- 1:18:19चाहिए। वैसे गुरु भी तो चाहिए, तुम गुरु
- 1:18:25बनने के योग्य हो। पल पल पे तुम झूठ बोलते हो खेर
- 1:18:38मैं पोल खोलने लगा था, लेकिन अभी नहीं खोलूँगा वक्त आने दो जब तुम
- 1:18:47मेरे पास आते हो। मेरे पास आते हो, मेरी गिरफ्त में
- 1:18:56आ जाते हो, फिर तुम स्वतंत्र नहीं होते तो मेरी गृहस्थ में तुम मेरे
- 1:19:06इन्फ्लुएंस में होते हो। अब कल परसों एक बड़ी सी वकील आ
- 1:19:12गयी तो बाप ने कहा फेंको इसके ऊपर वो चार्टर फेंको, इसको बगाओ जल्दी
- 1:19:19करो, वक्त खराब कर दिया मैंने वो चार्टर फेंक दिया 2.25 मिनट में
- 1:19:24भाग गयी वो। और 2.25 साल से कह रही थी कि मुझे
- 1:19:28ले जाओ, बाबा के पास उसका कोई दोष नहीं है।
- 1:19:34मैंने ही भगाया है उसे क्योंकि मैं उसकी बकवास सुन सुन नहीं
- 1:19:39सकता, वो तो झंड लग जाती सारी उम्र के लिए।
- 1:19:45और दंड में रखने नहीं रहता। समझ लो दंड वह नहीं रखने देता ना
- 1:19:52मैं झंडों की पूजा करता हूँ तो जब तुम मन में सोचते हो मन में ही
- 1:20:01सोच रहा हूँ, मुझे कहने की जरूरत नहीं, बहुत से लोग मेरे पास, मैं
- 1:20:06भीतर सारी मेरी। प्रज्ञा कॉन्सेंट्रेशन अपने उस
- 1:20:12स्तर पर होती है। उस वक्त तुम बोलोगे, मुझे सुनाई
- 1:20:15नहीं पड़ेगा क्योंकि कानों तक एनर्जी जाती ही नहीं।
- 1:20:22सारी एनर्जी कॉन्सेंट्रेट है, कन्डेन्स है।
- 1:20:29एक जगह पर तुम कानों में बोलोगे, मुझे नहीं सुनाई पड़े, मशीन भी
- 1:20:36लगा लूँगा फिर भी नहीं सुनें क्योंकि मैं सदा ही अपने भीतर उसे
- 1:20:44जल पर बैठा रहता हूँ। और वहाँ ऐसी वाद्यनाग अनेक असंख
- 1:20:51केते वावन हारे केते राग परिष्यों के केते गावण हारे वहाँ आनंद में
- 1:20:59मस्ती में खोया होता हूँ, तुम बाहर बोल बोल के चले जाते हो,
- 1:21:03मुझे कुछ पता नहीं लगा। लेकिन जब तुम हृदय में बोलोगे तो
- 1:21:08वो तार मेरे साथ जुड़े। तुम अपने हृदय में सोच लेना, यहाँ
- 1:21:15सोच लेना, मेरे सन्नो हो के सोच लेना, मेरे दायरे में सोच लेना।
- 1:21:23मुझे सुन जाएगा और मैं उसका हल कर दूंगा।
- 1:21:31कल जिनके नाम से स्कूटी थी वो मेरे पास आई मुद्दतों के बाद उससे
- 1:21:38पहले उसके परिवार के सभी लोग मेरे पास बहुत बार आए।
- 1:21:43अनेकों बार आई, लेकिन वह असली मालिक वह कल पहली बार आया है अपनी
- 1:21:52पुत्रवधू के साथ जसने जब उसने पांव को छुआ तो मुझे वो फ़ौरन बात
- 1:21:59याद आई। मैं कुछ ऐसा करता हूँ की जो
- 1:22:08व्यक्ति उठा के लेके जाता है उसको दिखना बंद हो जाता है।
- 1:22:13हँसते ही फिर वो डिग्गी के अंदर अपने अपने कपड़े भी भूल गया दिखते
- 1:22:18नहीं है जब। अजी निपुल मुझसे पूछता है बाबा इन
- 1:22:28कपड़ों का क्या करे बेनेगा इसे तुम?
- 1:22:32वहीं जहाँ गाड़ी को दिलाओगे वहीं से सर्विस स्टेशन के ऊपर और पूछे
- 1:22:38वगैरह भी काम ले लेगा। वैसे तो 65% इन लोगों के पास जेब
- 1:22:45में होता नहीं, लेकिन अगर निकले तो किसी गरीब को रुपए को दे देना,
- 1:22:50या को गौओं को हरा चारा खिला देना, कोई कुत्तों को विचारों को
- 1:22:53रोटी वगैरह खिला देना, बिस्कुट खिला देना।
- 1:22:59आजकल कुत्तों के लिए आपको स्पेशल बिस्कुट बनाना चाहिए बिना मीठे
- 1:23:05के, क्योंकि कुत्तों को अगर मीठा खिलाओगे तो उन उन के पांव हो
- 1:23:10जाएंगे, खारिश हो जाएगी। कुत्तों को मीठा मत पियाओ।
- 1:23:19अरे तुम बात को और तरफ़ मत ले जायेगा, वो खारिज करेंगे बट अगर
- 1:23:29तुम कुत्तों को ऐसा बिस्कुट बनाना शुरू कर दो जिसमें नमक भी ना हो।
- 1:23:40क्योंकि एक बात ख्याल रख लो, कुत्ते तुमसे ज्यादा बढ़िया हैं,
- 1:23:43स्वाद नहीं लेते हो, सिर्फ पेट ही भरते हैं ना?
- 1:23:49नमक ही चाहिए उन्हें थोड़ा सा नमक डाल दो।
- 1:23:51अगर डालने कोई चटनी भी नहीं चाहिए उन्हें जो चटनी से लगा के खाये।
- 1:23:57तुम तो चट्ट कोरे हो, कटाई खाने हो।
- 1:24:11जैसे ही तुम आके सोचते हो, मेरे हृदय के तार छिड़कने लग जाते हैं।
- 1:24:17मेरे भीतर फीड हो जाते हैं कि तुमने क्या सोचा, क्या मांगा?
- 1:24:22दरगाह में आकर उस वक्त उस वक्त में आनंद होता है।
- 1:24:30उस वक्त मैं आनंद में झूमता हुआ अनंत सागर में समया होता हूँ
- 1:24:37इसलिए ज़रा भी हेलजोल नहीं होता। इसीलिए तुम्हें हैरानी होती है।
- 1:24:42ये भूत है या जीता जागता व्यक्त? घंटो भर मेरा पांव नहीं हिलता।
- 1:24:51अंगूठा नहीं हिलता, क्यों? मैंने सब एनर्जी को कंसेंटेड ऑन
- 1:24:56वॅन्स पार्ट? एक ही स्पॉट पर कॉन्सेंट्रेट कर
- 1:25:01दिया है कन्डेन्स कर दिया है एनर्जी बाहर जाएगी ही नहीं तो
- 1:25:09गुड्डा हिलेगा। कैसे मैं अपने इंद्रों का मार्ग
- 1:25:12कैसे हिलेगा भईया? तुम भी अपने इन्द्रियों के मालिक
- 1:25:19हो जाओ, इन्द्र हो जाओ और क्योंकि मैं मालिक हूँ, तुरंत उसका निदान
- 1:25:33उपचार हो जाएगा। बहुत से लोग सोच लेते हैं बाबा,
- 1:25:38मांगा था बेटा, मिल गई बेट। तो होता तो कुछ भी नहीं था।
- 1:25:47चलो बेटी हो गई बेटी कौन सा खराब होगी?
- 1:25:49तुम्हारे समाज की ये मान्यताएँ और मान्यताओं को ही तो मैंने तोड़ना
- 1:26:00नहीं। फिर तीसरी बार में दो बार कह दिया
- 1:26:02तेरे को। बस यही होता है यही मैंने
- 1:26:14श्यामयाल का स्कूटर दो बार गुम हुआ यही मैंने तब किया, मैंने
- 1:26:24तुम्हें यही कहा था क्या जाओ? सब्सक्राइब करो फिर मैं क्या
- 1:26:31करूँगा? जब कोई वोट आएगा, अंधा हो जाएगा,
- 1:26:36फिर मैं उसका अंगूठा पकड़ूंगा और दबा दूंगा।
- 1:26:43आई हॅव थिस पावर। यूनिवर्स का मालिक क्या हुआ?
- 1:26:49वो जो इत्ता सा काम नहीं कर सकता लोग ऊँगली पकड़कर तुम्हें सच कंठ
- 1:26:56ले जाते हैं। मैं तुम्हें जीते जीत तुम्हारा
- 1:26:58अंगूठा पकड़ूंगा और जो चुनाव चिन्ह होगा उसके ऊपर ले जाऊंगा।
- 1:27:02ये लगाव फिर तुम करो। कैसे हेरा फेरी करोगे?
- 1:27:10ईसीआई खरीद लो या सीजेआई खरीद लो, कुछ नहीं बंटा जाएगा।
- 1:27:17तुम्हारे दिमागों को खराब कर दूंगा तुम सड़कों पर पागलपन की
- 1:27:21हालत में फिरोगे तुम्हे जेलों में बंद करने की आवश्यकता क्या है?
- 1:27:27तुम्हें टाँगने की आवश्यकता क्या है?
- 1:27:30जब सड़कों के ऊपर तुम बुड़बुडाते हुए फिरे तो तुम समझोगे कि
- 1:27:35तुम्हें वोट दे देगा फिर तुम गलती हो, मेरे पास और भी तरीके हैं और
- 1:27:42भी जहाँ हैं सितारों से पार। और मैं उन सब की कलाओं को जानता
- 1:27:47हूँ क्योंकि मैं मालिक हूँ। और को हो तो जय सुर खजोरे की।
- 1:28:04तब होता मुबारक हो तुझे तेरी आँखों कन्हैया, खाब मुबारक हो
- 1:28:23तुझे। मैं।
- 1:28:30ये ख्यालात किसे पेश करूँ ये मुरादों की।
- 1:28:44हँसी रात किसे पे शिकारों किसे पे शुक्रों?
- 1:28:59रंग और नौ की भारत किसे ऐश करो ये मुरादों की हसीरात किस्से के
- 1:29:21शिकार ये मेरा शेर मेरा आखिरी। नजराने हैं ये मेरे हैर मेरे आखिर
- 1:29:49नजराने मैं, वो अपनों में हूँ। जो हाँ जिसे बेगाने तालुक की
- 1:30:08मुलाक़ात किसे शिखर? बेताल की मुलाकात किसे पेश करो जे
- 1:30:31मुरादों की। हँसी मी रात किसे पे शुक्रों किसे
- 1:30:45पे शुक्रों किसे पे शुक्रों? किसे पे शिक अभी तो तुमने ये भी
- 1:31:01नहीं पता जी ख्वाहिश ये ख्यालात किसे पेश करो वह एक अनजाना सा
- 1:31:12तत्व। अज्ञात राहों से उबड़ खाबड़ राहों
- 1:31:17से चलते हुए मिलता है ये तुम्हारे भीतर के अरमान ये तुम्हारे भीतर
- 1:31:25के ख्यालात ये तुम्हारे भीतर की ख्वाहिशें तुम्हें पता नहीं।
- 1:31:32तुम किसे पेश करो, लेकिन 1 दिन यह अनजाना सा चेहरा जानकार हो जाएगा
- 1:31:39और मैं कहूँ यह अनजान सा चेहरा तुम ही हो जाओगे।
- 1:31:54धन्यवाद।