Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Feb 2025 - क्यों सबको दीक्षा नहीं मिल पाती? दीक्षा का पीछे कुछ गहरे रहस्य! भगवान शिव की दीक्षा!
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- 0:21आपने कहा बाबा जी और सभी संतों ने कहा गीता का मुख्य मर्म भी है, ये
- 0:32जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान।
- 0:39इसकी व्याख्या आपने बखूबी कॉल कर दी, जैसा पेपर देके आओगे, वैसे
- 0:48मार्क्स मिल जाएंगे। इसका अर्थ हम समझ गए।
- 0:58लेकिन वह जो दूसरे अर्थ निकलते हैं, संतो की वाणी से वह समझ में
- 1:07नहीं आते, वह जो दूसरे संत कहते हैं।
- 1:16के परमात्मा की इच्छा के बिना पत्ता नहीं हलता और वह जो करता है
- 1:25ठीक करता है तुम्हारे भले के लिए करता है।
- 1:34बाबा ये दोनों बातें विरोधी लगती हैं।
- 1:41इनमें तालमेल कैसे उठाओ? क्या एक तो तू जैसा करेगा वैसे
- 1:50करम भोंकेगा और दूसरा तू कुछ नहीं करता, मैं ही करता हूँ।
- 1:57मेरी इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता।
- 2:01यहीं हम उलझे खड़े हैं, कृपया करके इस गांठ को खोल लिया है
- 2:14भव्या। उससे पहले एक छोटा सा प्रश्न
- 2:24प्रथा गोशाल कृपया करके बताएं, दीक्षा लेने का क्या प्रोसेसर है?
- 2:38मुझे क्या करना होगा? जो प्रोसेसर आपको बतलाया गया था
- 2:59वह यह था कि बाबा। मुझे 20 अप्रैल को जहाँ तक मेरी
- 3:12स्मृति काम करती है, ये वरदान दे गए थे शिव कि तुम जिसके मस्तक पर
- 3:20अंगूठा लगा दोगे। उसको मुक्त करने की जिम्मेदारी
- 3:25मेरी हो गयी है। फिर तुम रहो न रहो यह दीक्षा कैसे
- 3:41मिलेंगे? शुरू में हमने दीक्षा के लिए
- 3:47आवेदन किया। लेकिन क्योंकि मैं तो अपने ही
- 3:56अंतरस में मस्त रहता हूँ, व्यवस्थाएँ मेरे व्यवस्थापक ही
- 4:04संभाले हैं कोई आने जाने वालों को।
- 4:12रिसीव करता है, विदा करता है कोई मेरे द्वारा बोली की।
- 4:18वीडियो उसको एडिट। करता है।
- 4:21आप तक पहुंचाता है मैं तो सिर्फ। अपने कमरे में मस्त पड़ा रहता
- 4:31हूँ। नहीं नहीं ना कहीं जाना, ना कहीं
- 4:33आना सब दौड़ खत्म है, सब मांग खत्म है, तो मैंने देखा जीस
- 4:44व्यक्ति ने प्रथम दिन अप्लाई किया था।
- 4:48प्रथम जन उसको दीक्षा आज तक नहीं मिली तो नंबर वाइज तो यहाँ होता
- 4:55नहीं है मेरी दृष्टि में क्योंकि मैं अंगूठा सिर्फ उसी का लगाव
- 5:03पाता हूँ। जीसको वो परम मालिक मुझे आज्ञा
- 5:11देते हैं बहुत से लोग हैं जहाँ आके बैठ जाते हैं मैं तो आ गया,
- 5:22मैं तो आ गयी। दीक्षा मैंने पूछता हूँ।
- 5:33अपने व्यवस्थापकों से इन्होंने अप्लाई किया, कोई रिकॉर्ड नहीं
- 5:40होता, नहीं किया तो फिर दीक्षा नहीं मिलेंगे।
- 5:49लेकिन बाबा से पूछता हूँ वो कहते हैं दीक्षा देता हूँ, अब दीक्षा
- 5:53तो बाबा ने देने मैं निर्वत हूँ, मैंने सिर्फ अंगूठा लगा देना।
- 6:06मैं दीक्षा दे देता हूँ, कोई अप्लाई नहीं किया।
- 6:11उन्होंने आकर बैठ गए बाहर धर्मशाला में ठहर गए बठिंडा मलोद
- 6:22ठहर गए हम आ गए हैं बाबा। दीक्षा दे दो यहाँ कोई नहीं आता
- 6:35तो तो पूछ के, लेकिन यहाँ तक बिना पूछ के आ जाते हैं तो जिसने
- 6:47दीक्षा देनी। वेहग्र कह दे ठीक मैं जिम्मेवारी
- 6:54लेता हूँ, मुझे अंगूठा लगाना पड़ता है, माइक को प्रसारित करना
- 7:05पड़ता है। जो बोलने वाला बोल रहा है, वह रोक
- 7:10नहीं सकता इसलिए इसमें मेरा होना न होना एक हिसाब से बराबर है।
- 7:23मात्र निमित हूँ मैं। और दूसरा क्वेश्चन पूछा है जब
- 7:28बाबा आप चले जाएंगे गौरव ने पूछा है यमुनानगर से जब आप चले जाएंगे
- 7:38बाबा फिर क्या ओशू की तरह आपके सब विधियों बेकार हो जाएँगी?
- 7:42नहीं विधियों बेकार नहीं होगी। विधियों कभी बेकार नहीं होती
- 7:52विधियों तो ओशो की भी बेकार नहीं है ये थोड़ा समझ लेना विधियों, जो
- 8:04हमने दी। मैंने तो बाबा से पूछ के दी ये
- 8:10क्रिया जो ध्यान में जाने की व्यवस्था और जो मैं बोला वो मैं
- 8:18नहीं बोला इस यंत्र के द्वारा वो बोला तो इसमें मेरा कोई योगदान
- 8:24नहीं है। किसी भी चीज़ में।
- 8:28मैं उस तल पर जाने में मेरा कोई योगदान है, मैंने कुछ नहीं किया,
- 8:35मैं सदा ही कहा करता हूँ, मैंने कोई ग्रंथ, कोई धार्मिक पुस्तक।
- 8:42कोई पन्ना नहीं पड़ा। सिर्फ बचपन में घरों में तुलसीदास
- 8:47के रामायण का अखंड पाठ होता था। वह मेरी आवाज अच्छी होने के कारण
- 8:52वह मुझे बुला लेते थे। मैं 2 घंटे पढ़ लेता था, वो भी
- 8:57क्या पढ़ता था, पन्ने पड़। अशांत प्रभाव चले ज्योत दुर्गति
- 9:10मैंने तुलसी दास की शायद ही किसी ने की होगी।
- 9:19रात्रि की ड्यूटी मेरी लगा देते। और सुबह तक मैं मौत से सोता गद्दी
- 9:26के जब मुझे पता होता तो वो आएँगे। मेरी आँख खुल जाती और मैं पन्ने
- 9:34में पलट देता चल अयोध्या कांड भी खत्म किया था।
- 9:38लंका कांडा जाता। यह तपस्या की है मैंने हाँ सबके
- 9:56नाम पर मैंने कुछ नहीं किया। संबोधि के मुक्ति के नाम पर मैंने
- 10:04कुछ नहीं किया। सच पूछो तो मैंने कुछ नहीं किया,
- 10:11ये सब ताम झाम उसका पहुंचाया। उसने बुलाया उसने बताया उसने ये
- 10:20सब गोरखधंधा उसका मेरा इसमें कुछ नहीं।
- 10:26तो बाबा कैसे दीक्षा मिलेंगे? दीक्षा जिन्होंने अप्लाई कर दिया,
- 10:36जब लाया जाएगा वह जाए अगर कोई आ जाता है।
- 10:47बाबा कहेंगे मैं तो सेवक हूँ, मैं अंगूठा लगा दूंगा आगे काम मालिक
- 11:03का। उन्होंने भगवान कृष्ण की तरह
- 11:10वायदा किया है। यदा यदा ही धर्म सकला निर्भक्ति
- 11:14भारत। जैसे ही पाप की वृद्धि होगी, मैं
- 11:21दुष्टों का हनन करने के लिए साधुओं की रक्षा के लिए वक्त वक्त
- 11:25में। अवतार लेता रहूँगा फिर वो जानें
- 11:32उनका कंचनें मेरे जाने के बाद ना तो विधियों बेकार होंगी क्योंकि
- 11:39विधियों मेरी नहीं है। मैंने बहुत ही स्पष्ट ढंग से
- 11:48बताया कि मैं शंकर मंदिर में बैठा जब मुझे क्रिया योग बताया गया और
- 11:54मैंने कुछ नहीं किया। जब ट्रेन का ये इंसिडेंट हुआ आ
- 12:02रहा था सर रोज़मर्रा की तरह। ये हुआ कि किसी ने उठा के पटक
- 12:10दिया तो दीक्षा की बात ये है कि जहाँ भी तुम हो, वहाँ टिके रहो,
- 12:25पहली बात तुम्हें अब सीधे हो। मेरे पास रोज़ ऐसे फ़ोन आते हैं
- 12:34तो मैं कहता हूँ जहाँ भी आप हो अगर आप कहते हो, हमने तो अंगूठा
- 12:46लगवाना ही है तो ये वीर वश में नहीं है।
- 12:51जिसे वो कहता है मैं लगा देता हूँ और वो जिम्मेवारी उसकी मेरे जाने
- 12:56के बाद भी जिम्मेवारी हाँ इतना मैं सर्टेन हूँ कि यू विल बी
- 13:03लिबरेटेड एट ऑल तुम्हें वो सब मिल जाएगा।
- 13:13जिसके लिए तुम यहाँ आए हो इस असिस्टेंट क्योंकि मुझे वो सब
- 13:24मिला है जो मैंने मांगा नहीं था, मैंने कभी मांग नहीं की वो मुझे
- 13:32मिल गया। इसीलिए बैठा हूँ, मोत से बैठा
- 13:38हूँ, आनंद में बैठा हूँ, कुंवारी में बैठा हूँ, दिन भर रात मस्ती
- 13:44के आलम में छाया हुआ मीठी ठंडी हवाएं चल रही हैं।
- 13:52आनंद के झरोखे गीत गुनगुनाता हूँ नाचता हूँ गाता हूँ किया मैंने
- 14:02कुछ नहीं और अगर तुम पूछते हो प्रथा।
- 14:11थोड़ा सा नाम लिख दिया करो, एड्रेस लिख दिया करो तो अच्छा
- 14:17रहेगा। कुछ लोग तो इतने कंजूस होते हैं
- 14:23या डरपोक होते हैं। ऊपर लिख देंगे पी बस के।
- 14:32प्रश्न पूछ ले क्या कौन हैं, कहाँ से हैं?
- 14:38कोई पता नहीं इतने कायर मत बनो, मेरे पास हक थोड़ा सा साहस बटोरण
- 14:45सीखो अगर ऐसे ही तुम बने रहे। तो उस भ्रांति को कैसे छोड़
- 14:51पाओगे? जीस भ्रांति को छोड़ने में तुम
- 14:56त्राहिमाम त्राहिमाम करने लगोगे। अभान्ति जन्मो जन्मो से तुम्हारे
- 15:02साथ चिपकी है। प्रगति ने कमज़ोर बने रहे नाम भी
- 15:07न ठीक से लिखा। एड्रेस भी ठीक से न लिखा के लिख
- 15:11दिया, पी लिख दिया क्या मतलब हुआ उसका आप लिखो कहाँ से हुआ और यहाँ
- 15:25साहसी व्यक्तियों का काम है कायरों का।
- 15:27काम नहीं है। उन व्यक्तियों का काम है जो सी
- 15:34सतलिक पे रख सकता है। और अंतिम आपको यही करना होगा नकली
- 15:41शीश आपको रखना होगा असली तो कभी मिटता ही नहीं असली पे दांव कभी
- 15:52लगाया नहीं जाता। नकली ही मिटता है और नकली ही रखना
- 15:57होता है। हथेली भी नकली शेर भी नकली, वो भी
- 16:01तुम नहीं रख सकते तो प्रेम गली में ना आओ।
- 16:16पूछा है प्रथा गोशाल ने? व्यवस्था तो यही है कि अप्लाई
- 16:22करो, उसके बाद आपका नंबर आएगा, आपको बुलाया जाएगा और बुलाया जाता
- 16:28है लेकिन आपको ये एक्सेप्शन से भी मैंने बताई।
- 16:37कुछ साधक आके बैठ जाते हैं यहाँ भटिंडा आ गया हूँ कुछ को मैं
- 16:47पूछता हूँ वो कहते हैं लौटा दो मैं लूटा देता हूँ वापस।
- 16:53उसको बाबा कहते हैं, बुला लो लगा दो अंगूठा, अब जब मालिक कह रहा है
- 17:00लगा दो अंगूठा तो मैं इंकार कैसे कर सकता हूँ क्योंकि उसने ही आपको
- 17:10अंतर्म छोर पे पहुंचाना है। मैं सिर्फ उसके हाथों की कठपुतली
- 17:17हूँ जैसा वो निचाये वैसा नाचता हूँ, मस्त हूँ आनंदित हूँ।
- 17:33ये आपके प्रश्नों के जवाब मेरे जाने के बाद न तो मेरी विधियों
- 17:42हैं, ये विधियों सब शिव की हैं जो आपको बदलाई की हैं क्रिया जो करो।
- 17:51जितना होता है करो ध्यान में जाओ, कुछ नहीं करने में उतरो और वीडियो
- 18:02सुनो ऐसे आपको प्रे ना मिलेगा। जैसा सुनोगे जैसा देखोगे जैसा
- 18:14विचार करोगे वैसे ही हो जाओगे तो संत बच्चन सुनोगे तो सत्संग की
- 18:25जिज्ञासा जागेगी, बुरी बाते सुनोगे?
- 18:30बोरे की जिज्ञासा जागेगी? इसलिए तो सब संगत का इतना महत्त्व
- 18:36था। अब हम गीता के मूल श्लोक पे आ
- 18:48जाए। कृष्ण कहते हैं यह सब मेरे मारे
- 18:54हुए लोग हैं। तोठ।
- 19:00इनका वध कर दे और भीष्म है, द्रोण है, वो जयदृत है, वो उपकरण है और
- 19:06दुर्योधन है, मैं इन्हें मार चुका हूँ तो नियमित मात्र हो जा इनको
- 19:16मार के। राजपाठ भोग और के कृष्ण अच्छी तरह
- 19:21से जानते हैं कि राजपाठ में कितना सुख होता है और अगर कृष्ण नहीं
- 19:26जानते तो और कौन जानता है। यह दुनिया एक खेला है, कंगाल मत
- 19:39सोचे कि मैं दुखी हूँ। और बड़े से बड़ा अमीर और बड़ी से
- 19:51बड़ी पदवी के ऊपर बैठा हुआ व्यक्ति ये न सोचे कि मैं खुश
- 19:55हूँ, खुशी मिलती है तरक्की में। और सर्वोच्च पदवी के ऊपर बैठे हुए
- 20:08लोग भी मुझे अतिरिक्त लगते है और सर्वोच्च धनी लोग भी मुझे
- 20:20अतिरिक्त लगते है। न मुझे तृप्ति रीगन में दिखी, न
- 20:32मुझे तृप्ति बिल गेट्स में दिखी अतृप्ति ही।
- 20:40चले गए। उनकी जगह किसी और ने ले ली।
- 20:53धनाढ्य व्यक्ति में तृप्ति नहीं है।
- 20:56सर्वोच्च पदासीन व्यक्ति में तृप्ति नहीं है।
- 21:03सवस्थ व्यक्ति में तृप्ति नहीं है।
- 21:13बड़ी सी जमीन का मालिक जमींदार वो जमीन उसकी तृप्ति का कारण है,
- 21:24छाती चौड़ी कर सकता है। मेरे पास इतनी जमीन है लेकिन ये
- 21:28छाती चौड़ी करना अहंकार को बढ़ायेगा।
- 21:33और अहंकार का बढ़ना ज्यादा दुखी करेगा तो फिर तृप्ति कैसे
- 21:43मिलेंगे? कबीर कहते हैं तृप्ति मिलेंगे,
- 21:54सबूरी मिलेंगे। उसकी रज़ा में चलने से जब तक तुम
- 22:06अपनी रज़ा में चल रहे हो तब तक तृप्ति नहीं मिलेंगे।
- 22:13यही नानक कहते हैं, यही पलटू कहते हैं।
- 22:22खबर जब तक नहीं होता तब तक दौड़ नहीं खत्म होती।
- 22:27तुम भागते जाओगे, बैठ नहीं सकोगे जगह पे आनंद को पी नहीं सकोगे और
- 22:35देखिये आपको चाय भी पीनी होती है ना तो आप दौड़े दौड़े चले चले,
- 22:39चाय नहीं पी सकते। बैठना होता है।
- 22:43आराम से खाना खाना हो, चाहे चाय पीनी हो, बैठ के ही पीनी होती है।
- 22:50इसी तरह तृप्ति भी बैठ के ही पीनी होती है।
- 22:54तृप्ति का रस भागे भागे नहीं मिलता।
- 23:03तो कबीर कहते हैं फकीरी में मेरा मन लग गया।
- 23:13लगो मेरा। फकीरी में फकीरी में मन्नड़?
- 23:34लाग्यो मेरो राम। जो सुखराम के पास बैठने में आता
- 23:58है। जो सुखपाल राम भजन में।
- 24:12अमानित तुम दंभित, तुम हिंसा शांतिराजम आचार्यों।
- 24:21उपासनम् शोषणम सरम आतुम निग्रह। जो सुख पा रामभजन, मैं हो सुख।
- 24:44नाहीं। अँधेरी में मन्नड़ो लाग्यो मेरा
- 24:57फकीरी में। फकीरी में।
- 25:05मन्नड़ लाग्या मेरा जो। सुख पायो राम भजन मैं बहुत से लोग
- 25:16मुझे कह देते हैं। देखिए कबीर कहते हैं राम को भजो
- 25:23अब बताइए। तुम कहते हो राम राम मत करो जो
- 25:35सुख पायो राम वचन में जो राम के पास बैठने में आनंद आया, फूल के
- 25:42पास बैठने से सुगंध मिलती है, राम के पास बैठने से आनंद आता है, सुख
- 25:49आता है। राम राम जपना रेपेटिशन है।
- 25:56राम बजना रेपेटिशन नहीं है। पास बैठना है और पास बैठने में और
- 26:06बजने में बड़ा फर्क है रेपेटिशन। और करीबी में बहुत फर्क है।
- 26:18यही मूर्ख तुम्हे सखाते हैं। कैसे मिलेगा सोक प्राग के करीब हो
- 26:33जाओ। राम कहाँ है?
- 26:36मूर्ति के पास बैठ जाए ये मूर्तियां तो पत्थर की नकली है
- 26:42क्षेत्र है राम तुम्हारे भीतर है जीस राम को तुम बाहर खोज रहे हो
- 26:53मंदिरों में मस्ज़िदों में। नहीं है।
- 26:57राम तुम्हारे भीतर है, उसके पास जाके बैठ जाओ, बड़ा सोखा आएगा,
- 27:06बड़ा आनंद मिलेगा बस तुम गए नहीं इसलिए चुके चुके कर रहे हो?
- 27:15भोला भोला फिर जगत में कैसा नातारे फूला फूला, फिर जगत में
- 27:26कैसा नातारे? भूला भूला फिर जगत में फूला फूला
- 27:38फिर जगत में कैसा नाता रे। भूला।
- 27:47भूला फिरे जगत में कैसा नाथारे जब तक।
- 27:54उससे नाता नहीं बनाते भूले भूले फिर रहे हो धन और जमीनों के मालिक
- 28:03फूले फूले फिर रहे हो। उससे नाता जोड़ लो, जब तक नाता न
- 28:11जोड़ोगे तब तक सुखी नहीं होगा तो राम भजन ने राम के करीब वर्षों।
- 28:21तुम अमीरी के करीब बैठे हो, धन के करीब बैठो इसलिए सुखी नहीं
- 28:37तुझे कॉन्फ्लिक्ट लगता है। बाबा कृष्ण कहते हैं जैसा।
- 28:45कर्म करेगा। वैसा में फल दूंगा।
- 28:50और फिर कहते हैं कि मेरी इच्छा के विनायक पत्ता भी नहीं जुलता।
- 28:56अब तालमेल बैठेंगे इसमें अमुल झकड़े पहली बात कुछ करनी जरूरी है
- 29:08प्रसंगिक हूँ या प्रसंगिक हूँ। क्योंकि जो बात जब बोल जाऊं तभी
- 29:17शोप इस ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं होता।
- 29:29किसी को भी सिर्फ मुझे ही नहीं किसी को कोई भरोसा नहीं है।
- 29:43इसलिए कहते हैं कर ले सो काम बजले सो रहा उसके करीब बैठ जाओ आनंद जो
- 29:56काम करना हो तो मुक्ति हुई काम करता है।
- 30:03तो कुछ बातें मैं बोलना चाहूंगा। इसको हरदम में बचा लेना ये आवश्यक
- 30:10है। ये थीम है मेरी वायब्राफी का,
- 30:15मेरे अनुभवों का। पहली बात पूछा है दीक्षा कैसे
- 30:24मिलेंगे? दीक्षा शायद यहाँ तो नहीं मिलेंगे
- 30:28जहाँ तक मैं समझता हूँ क्योंकि इतना धीमी गति पकड़ गया है दीक्षा
- 30:37का मसला। के किसी किसी को कहते हैं।
- 30:42बाबा बुलवाने के लिए ये चाल मुझे लगती है कि शायद ज्यादा लोग न
- 30:52बुलाये जाए इसलिए मैं तुमसे। यह आग्रह करता हूँ कि किसी अन्य
- 31:07गुरु को खोज लाओ या जहाँ पर चल रहे हो।
- 31:17बहुत से लोग मुझे प्रश्न कर लेते हैं, बाबा।
- 31:20तुम दीक्षा दे दोगे, आ जाए। मैंने कहा, पहली पहले तो हमने
- 31:28गुरु बना रखा है तो फिर टिके रहो, न टिके रहो वहाँ भीड़।
- 31:42को खपाने की जगह है। यहाँ भीड़ के लिए जगा नहीं है तो
- 31:49टिके रहो क्यों भागने की जल्दी करते हो और भागने से वो मिला भी
- 31:54नहीं करता? वह ठहरने से मिलता है तो जहाँ हो
- 31:58वहाँ ठहरों। और अगर नए हो खोज में हो तो मेरी
- 32:07इस बात को ध्यान में रख लो। मैं तुम्हें तीन बातें कहूंगा,
- 32:14पहली बात। मार्कर्स जैसे लोगों के पास मत
- 32:21जाना, जो कहते हैं परमात्मा नहीं है, वह है जो कहते हैं नियम ही
- 32:34काफी हैं। वो गलत हैं मेरी दृष्टि में,
- 32:39क्योंकि मैंने नियमों से पार नियमों को बनाने वाला देखा है और
- 32:44ये मैं अपने अनुभव के आधार पर कहता हूँ, अपनी दृष्टि और दर्शन
- 32:49के आधार पर कहता हूँ, किसी किताब के शस्त्र के आधार पर नहीं कहता
- 32:53हूँ, वह है। इसलिए किसी मार्क्स के पीछे मतलब
- 32:58नहीं। मार्क्स ने खोजा था नहीं और नहीं
- 33:06पाया था इसलिए उसने जो बोला सत्य बोला क्योंकि ना खोजा न पाया।
- 33:15तो उसके हिसाब से नहीं था तो वो ठीक है।
- 33:21उसने सत्य बोला लेकिन उसका सत्य सत्य नहीं है।
- 33:29उसका सत्य सिर्फ। एक अंदाजा था मेरा सत्य सिर्फ
- 33:39अंदाजा नहीं मेरा सत्य अनुभव है अनुभव की बड़ाकाष्ठ पे मैंने
- 33:45अच्छी तरह से कस लिया है देख लिया है।
- 33:47एक बार ने लाखों बार देख लिया है। रोज़ जाता हूँ सैकड़ों बार उसके
- 33:59आगोश में समा के आ जाता हूँ, वह है पहली बात किसी मार्कस के पास
- 34:06मत चले जाना दूसरा। किसी नाम देने वाले व्यक्ति के
- 34:25पास मत पहुंचे। जो पहुंचे वो पहुंचे वो टिके रह
- 34:35और कुछ नहीं तो अनुभव हो जाएगा तेरा पेटिशन से मिलता ना?
- 34:41इतना अनुभव भी काफी है। अगले जन्म में काम आएगा, संस्कार
- 34:47बन के साथ जाएगा नाम दान देने वाले के पास मत पहुंचाना, ये मैं
- 34:58बोल रहा हूँ गोशाल। अगर तुम नए हो तो मार्कस के पास
- 35:13मत पहुँच जाना, मार्कस गलत है, मार्कस को गलत करने के लिए मैं
- 35:21बैठा हूँ। मैंने अपनी नगन आँखों से उस सत्ता
- 35:26को देखा है जीसको बुद्ध कहते हैं नियम ही काफी है क्यों कहा यह
- 35:31बुद्ध जानते हैं और किसी चार बार के पास मत पहुंचाना।
- 35:42चारबा कहते हैं कोई लेना देना नहीं होता बसवभूतास्य दे हर्ष
- 35:47पुनर आगमनम कोतह यज्ञ जीवेत, सुखी जीवेत ऋणम कृतवा गृदम्पीवेत
- 35:57बसवभूतास्य दे हर्ष्य। पुनर आगमन कोतह यहाँ कोई लेना
- 36:06देना नहीं पड़ता, ऋण उठाओ और घी पी लो घी पी लो या दारु पी लो।
- 36:15मैं ये कहता हूँ ये भी झूठा है मारकश उठाओ।
- 36:21चार वाक झूठा यह भी बुद्धि के किसी दल से बोल रहा है।
- 36:27इसने भी बाहर की व्यवस्थाएँ देखी हैं।
- 36:29सिर्फ कोई खा के मुकर गया, मुकर गया, किसी ने किसी से उधारी दी
- 36:37नहीं दी। बाहर की व्यवस्थाएँ देखते हैं।
- 36:43किसी ने बच्चों को जन्म दे दिया, ठीक से बंटवारा नहीं किया, एक को
- 36:50तड़पाया एक को गले लगाया, वो भी गलत है।
- 36:56बहुत सी बातें हैं कहने वाली। लेकिन वक्त बड़ा कम होता है।
- 37:00हमेशा हमेशा ही वक्त कम होता है। क्या करें?
- 37:08बोलने को बहुत कुछ है शब्द सदा ही वही दिन में 24 घंटे होते हैं।
- 37:19किसी मार्कस के पास मत जाना, किसी चार बाग के पास मत जाना, क्योंकि
- 37:24चार बाग कहते हैं रिणम कृतु बाग बसंपूता से देहा से पुनर, आगमनम,
- 37:30कोता, शराब, पिलो, जुआ खेलो। जीपी लो, कोई बात नहीं, यहाँ वापस
- 37:41नहीं मोड़ना पड़ता, बिलकुल वापस मोड़ना पड़ता है।
- 37:45यही तो कृष्ण कहते है जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान तो इन
- 37:52दो व्यक्तियों के पास मत चले जाना, न मारकस न चारबाग।
- 37:58ये दोनों गलत हैं, अनुभवी नहीं हैं।
- 38:03इन्होंने क्यों कहा वो ये इनसे पूछो इन्होंने क्यों कहा इसके
- 38:07शिष्य बैठे हैं, बता देंगे तुम्हें?
- 38:13तीसरा मैंने कहा जो नाम बांटता है।
- 38:16शब्दों का नाम बांटता है राधे राधे करो राम राम करो शाम शाम करो
- 38:23कृष्ण कृष्ण करो, देखिये कृष्ण गोविंद तो मेरा भी करती है, लेकिन
- 38:33रेपुटेशन नहीं करती भीतर से गुबार हाथ।
- 38:38भीतर से आनंद का उफान आता है। प्लस फूटन आता है वो तो मेरे भीतर
- 38:45से आता है मैं रोज़ गाता हूँ कृष्ण गोविंद हरे।
- 38:52मुरारी नहीं गाता भीतर से आता है। ये रेपुटेशन में हला के रोज़ गाता
- 39:04हूँ लेकिन जरूरी नहीं है क्या गांव भीतर से आएगा?
- 39:09गांव नहीं आता नहीं गाता रोज़ ढंग अलग रंग अलग।
- 39:17मस्ती अलग छलकन अलग शराब वही प्याला बदल जाता है ब्रांडी बदल
- 39:24जाता है तो ये नाम बांटने वालों के पास में चले जाए ना धोखेबाज
- 39:35में लोभी हैं, इनका कोई स्वार्थ होगा?
- 39:39वो क्या स्वार्थ है इन्हें पता है।
- 39:50जो निर्लोभी हो, जो अनुभवी हो, उसकी बातों में सत्य की खुशबू
- 39:59आएगी, रिफ्लेक्शन आएगी, छलकन आएगी।
- 40:10और छलकन तुम्हें मदहोश कर चाय शब्द तो राजनीतिक व्यक्ति के पास
- 40:23भी बहुत होता है और तुम रोज़ सुनते हो।
- 40:31क्या तुम उनको सुनकर अपने उस तल पर चले जाते हो?
- 40:35नहीं जिसके वचन से तुम अपने अंतस के तल को छू लो?
- 40:44वह अनुभवी है तो मैं एक पहचान बता देता हूँ।
- 40:52जिसके वचनों से तुम भी अपने अंतर के तल को छू लो।
- 40:56जो तल उसने छुआ वह जब बोलेंगे तो उस तल से बोलेंगे।
- 41:02इसलिए मैं सतह कहता हूँ कि इन आचारों से गीता मत सुना करो।
- 41:09क्योंकि गीता कृष्ण ने जीस तल से कही या तो कृष्ण बोले या जो
- 41:15व्यक्ति उस कृष्ण के तल पर चला गया वो बोले ही इस ऑथेंटिक तो से
- 41:20वह प्रमाणिक व्यक्ति है कहने के लिए।
- 41:26इन खोपड़ीधारी आचार्यों से मत सुना करो, वक्त की बर्बादी है और
- 41:32बातों को पूछ लिया करो, शादी करें न करें, प्रेम करें न करें, लीव
- 41:38इन में रहें न रहें ये बातें संसार की इनसे पूछ लिया करो।
- 41:43यह बताएंगे कुंभ पे जाना है कि नहीं जाना, ये सभी बातों का जवाब
- 41:49देंगे और सुंदर ढंग से देंगे बखूबी देंगे।
- 41:52ये प्रश्न ये हैं इस मसले में लेकिन संसार के मसले में।
- 41:59परमात्मा के मसले में अगर तुम इनकी बात मानोगे तो मुँह बल
- 42:03गिरोगे दांत तुड़वा बैठोगे, भर्ती मत कर लेना, तो पृथ्वी गोशाल मेरी
- 42:16यह बातें तीन बातें। इन तीनों के पास में चले गए।
- 42:24बैरंग वापस आओगे कोई मिठास न आएगी, कोई खुशबू देखने को नहीं
- 42:32मिलेंगे, कोई आनंद की छलकन नहीं आएगी।
- 42:37कोई जीरा नहीं झूमेगा, कोई सुधबुध नहीं गुम होंगे।
- 42:47मुर्षित हो सकते हो शुधबुध तो उसमें भी गुम हो जाती है।
- 42:53लेकिन जब राम राम करते राधे राधे करते शक्ति हीन हो जाओगे तो
- 42:58मूर्छित हो जाओगे मूर्छित भर मुर्दा भी होता है।
- 43:03शक्ति हीनता होना अलग बात है आनंद की फूलकन से सुध बुध खो देना अलग
- 43:10बात है ये दोनों। अवस्था अलग है, बिलकुल विपरीत भी
- 43:15है। सुध भी सुरागयो।
- 43:50सुध विसरा गयो।
- 44:07नन्द के साथ जो कर गयो मन की छोरी रे।
- 44:28शुद्ध विसरा गयो मोरे ओह काला ओह काला।
- 44:47इक भा सूरी वाला। जिसके पास जाके शुधबुध बिसर जा
- 44:54रहे है। कृष्ण के पास जाके शुधबुध बिसर
- 44:58जाती है। बाबा मुझे एक प्रश्न का सुनाया
- 45:04करते हैं, शफ तुम्हें भी सुनाता हूँ, मज़ा आएगा पार्वती ने मुझे
- 45:15पाने के लिए बड़ा तप किया। मैंने पूछा था प्रश्न कि बाबा
- 45:29अंगूठा लगाने से क्या होता है? तो उसका जवाब दे रहे थे तो
- 45:37पार्वती ने बढ़त तब किया और मैंने जब उसकी मांग में सिंदूर भरने के
- 45:47कवायद शुरू के। तो मैंने दोनों बाहों के बीच में
- 45:54जहाँ बिंदियां लगाते हैं वहाँ से शुरू किया यहाँ पे रखा हाथ और फिर
- 45:58ऊपर तक ले गया ये सिंदूर की परंपरा वहाँ से शुरू है और बाबा
- 46:07कहते हैं जैसे तीसरे नेत्र पे हाथ गया, अंगूठा गया।
- 46:12तो पर्वती नाचने लगे, बड़ा मज़ा आया इस प्रसंग प्रसंग के एक बात
- 46:25दो गांठें खुल गए एक तो ये। कि अंगूठा रखने से क्या होता है?
- 46:33तुम्हारी शक्ति प्रवाहित हो जाती है।
- 46:37तीसरे नेत्र को में रिसेप्टिंग पावर बहुत होती है।
- 46:43यही एक पॉइंट है, जो कि मोस्ट सेंसिटिव सेंटर।
- 46:51और दूसरा सिंदूर लगाने की परंपरा कैसे शुरू है?
- 46:58तुम भी सिंदूर लगाते हो पंडित जीके कहने से लेकिन तुम्हें
- 47:03अंगूठा पता ही नहीं कहाँ लगाना है तुम तो सोने की अंगूठी में।
- 47:09सिंदूर रख लेते हो और मांग भर देते हो, बस परंपराएं निभाई जाती
- 47:15हैं आजकल मतलब किसी को पता नहीं लव से कहता है जो करता है
- 47:26परमात्मा करता है। कृष्ण भी कहते हैं, मेरी इच्छा के
- 47:30बिना पता नहीं हिलता तो इन दोनों बातों को कैसे मिलाओगे?
- 47:34बाबा संत कहता है जो करता है परमात्मा करता है कृष्ण कहते हैं
- 47:44जो करता हूँ मैं करता हूँ, मेरी इच्छा के बिना पता नहीं हिलता बात
- 47:48एक ही है। तुम कहते हो जो करते हो तुम उसका
- 47:55फल तुम भोगते हो, दोनों को कैसे मिलाओ के दोनों बात दो है ही
- 47:59नहीं, एक ही बात है संत कहता है। की वह जो करता है ठीक करता है, वह
- 48:15जो करवाता है वो भी ठीक करवाता है।
- 48:19थोड़ा समझे ना बात को? लेकिन संत कहते हैं, तुम इस बात
- 48:26को मान मत लेना, मैंने जाना तो मैंने माना तुम जब जानो के ताजमहल
- 48:41है तभी मानना कि ताजमहल है जब ताजमहल के सामने जाकर खड़े हो गए।
- 48:50तब मानना ही पड़ेगा कि ताजमहल है। संत सिर्फ बताते हैं अपना अनुभव
- 48:58तुम्हें मानने को बात नहीं करते कभी संतों ने तुम पे ज़ोर दिया कि
- 49:04तुम मानो। संत कहते हैं मैं कहता आँखों देखी
- 49:12तुम कहते कागज़ की देखी मैंने जो देखा वो मैंने बता दिया तुम मानो
- 49:21ना मानो नहीं मानो तो ठीक। क्योंकि चिप के जाओगे मानने से और
- 49:28चिप के जाओगे तो बदला हट से बच जाओगे।
- 49:40संत कहता है तुम कुछ नहीं करते, उसकी इच्छा के बिना पत्ता नहीं
- 49:48हिलता। वह पत्ता बनाया भी उसी ने है जीस
- 49:56सहवा से हिलता है, वो भी उसने बनाई जो ग्रैविटेशन फोर्स खींचता
- 50:02है वो भी उसने बनाया तुम्हारा इसमें क्या है?
- 50:10तुम्हारी इसमें सिर्फ दावा है, तुम दावा ठोक देते हो कि मेरा बस
- 50:17यही है तुम्हारा और कुछ नहीं। जब मैं अपने भीतर जाने लगा, मुझे
- 50:31परमात्मा के आदेश नहीं शुरू हो रहे माना मैंने कभी नहीं ना मैंने
- 50:40इंकार किया बिना जाने ना मैंने माना ना मैंने थोपा ना मैंने
- 50:47इंकार किया। जब मैं अपने भीतर जाना शुरू हुआ
- 50:51तो मुझे परमात्मा के आदेश आने शुरू हुए।
- 50:55ऐसा कर लो ऐसा कर लो और मैंने पाया मैं उस व्याख्यान के
- 51:04अतिरिक्त हूँ। अगर कुछ करने की चेष्टा की तो वो
- 51:08हो नहीं सका। फिर मैं समझ पाया इन बातों के
- 51:14अर्थ के वह ही करता है। कठपुतली अगर चाहे कि मैंने ऐसे
- 51:26नहीं नाचना जैसे नाचते हैं ये धागे तो नाचना ही पड़ेगा सोचते
- 51:33रहो जीस ऊँगली से बंधी है कठपुतली धागे से वह ऊँगली ऊपर उठेगी तो।
- 51:44कठपुतली को ऊपर उठना पड़ेगा। वह ऊँगली नीचे जाएगी तो कठपुतली
- 51:51को नीचे जाना पड़ेगा। झड़ियाँ पींगा चढ़ना असामानु ओना
- 51:57एठा जो पींगें होती है ना पींगें। झुला झुला झूलते हैं।
- 52:08एक श्रावण में झूलती हैं स्त्रियाँ तो पंजाबी कहावत है
- 52:15चिड़िया पीना जड़ना असमान नु जो आसमान में चढ़ती है हो ना हेठा हो
- 52:20ना वो नीचे आती है। यह विधान है परमात्मा का यह बात
- 52:33कहने की नहीं है। तो संत कहते हैं लिखा लिखी के हैं
- 52:40नहीं देखा लिखी बात संत जो देखता है वो बोलता है तुम लिखी हुई पढ़
- 52:53लेते हो और उसको बोल के कह देते हो, ये सत्य है।
- 52:57ये उल्टा मसला है। सोफी फकीर बाइजिद का पुत्र मर गया
- 53:07था, बहुत रोया उसके गले लग के माथा चूमा गले से लगाया।
- 53:21बार बार विदा करने को नहीं आता था।
- 53:27ऐसा वर्लाप तो आम गृहस्थी व्यक्ति भी नहीं करता।
- 53:30वो संत था, सुखी फकीर बड़ा वर्लाप किया।
- 53:36आसपास खड़े लोग भी रोने लगे। बहुत से फलोवर्स थे उसके जब दफन
- 53:49कराये अंतिम संस्कार हो गया तो उसकी धर्मपत्नी पूछने लगी भाई जी
- 54:07जितना तुम रोए। मैं स्वप्न में भी नहीं सोच सकती
- 54:12थी कि तुम इतना रोक है, तुम तो बहुत रोये, गले लग लग कर रोये,
- 54:22उसको विदा करने में नहीं आते थे घंटों लगा दिए तुमने।
- 54:30मुझे शक हुआ बाइजीत तुम्हारी फकीर पर बाइजीत कहते हैं अगर वो
- 54:44रुलाएगा तो मैं रोउंगा मेरी क्या जरूरत है मैं न रोउं?
- 54:54अगर वो ना रुलाता तो मैं नहीं रोता लेकिन उसने मुझे इतना रुलाया
- 55:01तो मैं रोया जरूरत तो मेरी कोई नहीं, ना रोने की, ना ना रोने की।
- 55:13जितना रुलाया उतना मैं रोया। उसकी धर्मपत्नी अस्वस्थ है ये
- 55:24बाइजिद अपने लिए नहीं कहते बाइजिद समस्त संसार के लिए कहते हैं।
- 55:30अगर समस्त संसार आज इतना दुखी है तो इसी कारण से दुखी है।
- 55:38उसके वाणी में रह नहीं पाता। संत ये नहीं कहता, अगर तुम्हारा
- 55:48कोई प्यारा चला गया है तो तुम रोओगे नहीं, ये पहचान है नहीं, ये
- 55:51कोई पहचान है। पहचान ये है कि वो अगर रुलाएगा तो
- 55:56तुम रहोगे और जरूरी नहीं कि तुम वो नहीं उडाएगा तो तुम नहीं रहोगे
- 56:05बस तुम करोगे भौजी, जो वो करवाता है मेरी ये तो ये।
- 56:11मेरी तो यही अर्जी कर वो ही जो तेरी मर्ज़ी पलटू कहता।
- 56:17सभी संतो ने एक ही बात उलट पुलट ढंग से कही, लेकिन एक बात में
- 56:27समानता जरूर थी। कि करता तुम नहीं हो कर्तव्य
- 56:37अज्ञात विराट है तुम में तो इतनी भी शक्ति नहीं।
- 56:47तुम में तो इतनी भी लयाकत नहीं कि तुम एक जर्रे को पैदा कर सको वो
- 56:56ज़रा हवा कहो पानी कहो या माटी कहो तुम में इतनी भी काबिलियत
- 57:06नहीं। तुम इतने भी शक्ति संपन्न नहीं हो
- 57:11एक ज़रा भी किसी चीज़ का बना दो लेकिन दावा ठोक सकते हो ये महल
- 57:17मेरा, ये अटारी मेरी ये कुर्सी मेरी ये मेरा।
- 57:29नहीं यहाँ दावे किसी के नहीं रहता, 1 दिन टूट जाता है शीशा।
- 57:44हो या दिल हो। आखिर टूट जाता है।
- 57:57टूट। जाता है, टूट जाता।
- 58:03है टूट जाता है। शीशा हो जाते हो आखिर टूट जाता
- 58:13है। तुम चले ही जाते हो।
- 58:181 दिन दावेदारी धड़ी रह जाती है। मैंने बड़े रोग देखे हैं
- 58:26जिन्होंने दावा किया था। अदालतों में दावे चलते रह गए और
- 58:37वो कब्रों में दफन हो गए। ओह घटना की ज्वालाओं में खो गए और
- 58:44राख बन गए चिताओं में भस्म हो गए। मैंने ऐसे बहुत से लोग देखे हैं।
- 58:58दावा करते थे, किताबें खोलकर लुकमान, जैसे ओके कि मैं टाल
- 59:11दूंगा, सब कुछ मैं हूँ। नथ्थिंग इस इम्पॉसिबल बोनापार्ट
- 59:22नेपोलियन नक्सलवाद कह कर नथ्थिंग इस इम्पॉसिबल इम्पॉसिबल वर्ल्ड इस
- 59:28नॉट फाउंड इन ब्य डिक्शनरी मेरे शब्दकोश में असंभव शब्द नाम की
- 59:34कोई इश्यू नहीं। करते थे।
- 59:42दावे के दावे खोलकर ये दवा हर्बीज़ न खाली जाएगी, लेकिन 1
- 59:51दिन उनकी दवा तो खाली चली ही जाती है, दावा करने वाले खुद भी चले
- 59:56जाते हैं। दावा करने वाले खुद भी दफन हो
- 1:00:02जाते हैं, दहन हो जाते हैं। बस ये बात अगर व्यक्ति के जीते जी
- 1:00:09समझ में आ जाए। अब अंतिम शब्दों को ठीक से समझ
- 1:00:13लेना। उसको ही मर जीवडा कहते हैं जीते
- 1:00:25जी ये बात समझ में आ जाए। ये घड़ी हर गिजन अट्टा दी जाए।
- 1:00:40ये मौत आएगी। लुकमान कहता है, ये दवा हरगिज न
- 1:00:47खाली जाएगी और मृत्यु कहती है ये घड़ी हरगिज न डाली जाएगी।
- 1:00:57इन दोनों का झगड़ा है। जीत जाती है, मौत जीत जाता है
- 1:01:02परमात्मा तुम खाली हाथ तुम्हें जाना पड़ता है।
- 1:01:08छाती पीटो या न पीटो, कोई फर्क नहीं पड़ता होता है वही जो मंजूरे
- 1:01:16खुदा होता है। मुद्दई ला होरा चाहे भी तो क्या
- 1:01:19होता है तो इन दो बातों को कैसे मिलाएं कैसे मिलाएं भीतर उतर के
- 1:01:30देखो कौन करता है? उसके फरमान आते हैं और वही होता
- 1:01:34है। उसके फरमान आते हैं और वही होता
- 1:01:41है। बड़े मज़े की बात है, तुम उसको
- 1:01:46टाल नहीं सकते। और यह आचार्य कहेंगे यह तो
- 1:02:06भाग्यवादी व्यक्ति है तो फिर कर्मवादी बनकर देख लो भाई
- 1:02:15कर्मवादी बनकर देख लो। मैंने आज तक एक व्यक्ति भी नहीं
- 1:02:23देखा। मेरे पास कंगाल भी आए, राजा भी
- 1:02:29आए। मैं खुद भी राजा रहा।
- 1:02:32उस बात को छोड़ दो, वो तो मत मानो।
- 1:02:36क्योंकि वो मैं नहीं जाना अपने पिछले जन्मों में जाना मैं राजा
- 1:02:41था मैंने सब भोंगा लेकिन कुछ नहीं मिला लेकिन वो बात तो मत मानो तुम
- 1:02:48इसी जन्म की बातों को मानो मैंने सब भोंगा।
- 1:02:56भोग और पाया भोग में सुख में भोग में दुख यह सृष्टि बनाई तो मैंने
- 1:03:09लेकिन यह सृष्टि सुख नहीं देती। बस यह परीक्षा की एक पाठशाला है।
- 1:03:14तुम देखो तो। भौंक के देखो सुख मिलता है, एक
- 1:03:23बार की लकी का सुख मिलता है लेकिन अंततः लकी का नहीं मिलता।
- 1:03:30बिलकुल ये उस दवा की तरह है जो पहले मीठी लगेंगी।
- 1:03:34कई दवाएं तुम्हें ऐसी मिलेंगी जो पहले मीठी लगेंगी।
- 1:03:38लेकिन बाद में जीवा के टेस्ट पर सब कड़वे हो जाते हैं।
- 1:03:47जीसको जीते जी पता चल गया। मरना ही सत्य है और तुम ये शब्द
- 1:04:01बोलते हो मर जाने के बाद और बुद्ध समझदार हैं।
- 1:04:07बुद्ध को पता चल जाता है। जीते जी ये घड़ी हरगिज ना टली
- 1:04:13जायके। भीतर जाओगे तो उसके फरमान पाओगे
- 1:04:19और वैसा ही होते पाओगे तो पता चलेगा कि उसकी इच्छा के बिना
- 1:04:25पत्ता भी नहीं खेलता। ये अनुभव की बात है।
- 1:04:31शब्द तर्क। विश्लेषण एनालिसिस से यह सिद्ध
- 1:04:39नहीं किया जा सकता। कुछ ऐसा नहीं कुछ उदाहरण नहीं
- 1:04:50अनुभव की बातें उदाहरणों से सिद्ध नहीं की जा सकती अनुभव की बातें।
- 1:04:56देखने से ही सिद्ध होती है लाखों धारण दूँ मैं कि सूरज है अंधे को
- 1:05:08अंधे को समझ नहीं आएगा क्यों आँखें नहीं हैं।
- 1:05:14और आँखें हूँ तो मुझे कहने की जरूरत नहीं है कि सूर्य है, फिर
- 1:05:20वो कहेगा मैं अंधा हूँगा मुझे दिखता तो है अंधे व्यक्ति को हुई
- 1:05:27उदाहरणों की आवश्यकता पड़ती है जिसके आंखें हैं।
- 1:05:33उसको उदाहरणों की जरूरत नहीं होती कि हरा ऐसा पीला, ऐसा गेरवा, ऐसा
- 1:05:41लाल, ऐसा पीला, ऐसा उदाहरण की जरूरत नहीं पड़ती उससे और अंधों
- 1:05:50को तुम कुछ भी उदाहरण दे दो। वो नहीं समझ पाएंगे क्योंकि
- 1:05:54बुनियादी चीज़ नहीं है। क्या आँखें नहीं हैं तो तुम्हें
- 1:05:59कोई उदाहरण तो नहीं काम आएँगे? संतों ने कोशिशों की लेकिन
- 1:06:07कोशिशों सब बेकार निकलीं क्योंकि। तुम्हारे प्रश्न यथावत बनी हूँ।
- 1:06:11मैं और संतों ने नगन आँखों से देखा जो करता है वो ही करता है।
- 1:06:21तुम कहोगे नहीं फिर हमको तुम उसके कारण हो।
- 1:06:27उसने तुम्हें बनाया, तुम कहोगे हमें नहीं पता हमने बनाया ये मकान
- 1:06:33बनाया ये कार बनाई ये गाड़ी बनाई ये सब हमने बनाया, ये धन बनाया ये
- 1:06:42सब हमने बनाया। सबसे यही फर्क पड़ जाता है।
- 1:06:49यह अनुभव की बात है जो करता है वो ही करता है अत्यंत कर सकते है
- 1:07:01लिखा लिखी की है नहीं देखा देखी बात।
- 1:07:06देख कर ही जान पाओगे उदाहरण काम नहीं आएँगे सत्य में तो तुम भीतर
- 1:07:17से तब समझ पाते हो जब अपनी आँखों से देखलेते हो।
- 1:07:23जब तक आग में हाथ न डालोगे तब तक किसी एक तल पर।
- 1:07:29यह भाव बना ही रहेगा शंका कि न जाने इसका ही जल गया हो, ये
- 1:07:34तुम्हें पता नहीं है। 99% अब तो मान लोगे 1% कहीं न
- 1:07:41कहीं ये अंदेशा बना रहेगा भीतरी मन के किसी कोने पे कि शायद।
- 1:07:48मेरा हाथ न जले, इसका जल क्या अनुभव की बातें उदाहरणों से नहीं
- 1:07:57बताई जांकी ये सत्य है, सिर्फ संत जानता है और संत कहता है मेरी
- 1:08:05बातों को मानना मत। वो ही सुनते है जो कहते हैं मेरी
- 1:08:12बातों को मानना और मानते ही चले जाना, बस करते ही चले जाना रात
- 1:08:22रात है बड़ा पार हो जाएगा। डूब जाओगे तुम देख लेना धन्यवाद
- 1:08:34श्री। कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:08:44हे नाथ नारायण वासुदेव? श्री कृष्ण।
- 1:08:52गोविंद हर मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:09:04पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारा यन
- 1:09:22वासु। देवा श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:09:31मुरारी हे। नाथ?
- 1:09:34नारायण वासुदेव, पितुमात स्वामी। सखा हमारे पितुमात स्वामी सखा
- 1:09:50हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव। अत्रम पुष्पम फ़िल्म तोयम यह मा
- 1:10:09भक्तों पर क्षति। हे नाथ नारायण, वासुदेव हे नाथ
- 1:10:24नारायण, वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद हरे मुरारी।
- 1:10:34हे नाथ नारायण वासुदेव पत्रम पुष्पम फ़िल्म तोयम ये महा भक्त।
- 1:10:55प्राक्षते तद अहं तू प्रथम। श्रावणी प्रथा मना।
- 1:11:19श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी।
- 1:11:25के नाथ। नारायण वासुदेव श्रीकृष्ण गोविन्द
- 1:11:34हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव पितु मात स्वामी।
- 1:11:48सखा हमार पितुमात स्वामी सखा मारे हैं नाथ नारायण?
- 1:12:05वासुदेव अनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
- 1:12:20अनाथ नारायण। वासुदेव व ओम धन्यवाद।