Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Mar 25 - क्या दुनिया सच में अपने अंत की ओर बढ़ रही है? 🌍 | MUST WATCH 🔥 Babaji’s Request to All 🙏
Transcript
- 0:16प्रश्न रोज़ ही बहुत होते हैं और सच पूछो तो प्रश्न ही प्रश्न होते
- 0:28हैं। मानवता प्रश्नों के जंजाल में
- 0:41इतना क्यों जगी है? दो तीन प्रश्नों पर आज हम विचार
- 0:51करेंगे, जो मूल हमारे जीवन से संबंधित है या कहिए कि हमारा
- 0:58जीवन। बाबा लोग भविष्यवाणी करते हैं कि
- 1:11आने वाला वक्त सही नहीं, बस थोड़े से करोड़ लोग बचेंगे।
- 1:18अब क्या क्या विचार है? और भी बहुत से प्रश्न हैं, रोज़
- 1:34ऐसा होता है कि एक प्रश्न होता है और मैं एक प्रश्न के बहाने
- 1:40बीसियों प्रश्नों का जवाब आपको दे देता हूँ।
- 1:50मूल प्रश्न जो श्रृंखला के रूप में चल रहा है वो है समुद्र मंथन
- 1:58क्या है समुद्र मंथन? पहले मेरी दो बातें ध्यान से सुन
- 2:07लो आप। जब मानवता पर संकट आता है तो सारी
- 2:19मानवता को मुट्ठी भर लोग चाहिए होते हैं।
- 2:25जो स्वार्थ से परे हटकर काम कर सके।
- 2:29एक एक शब्द को ध्यान से समझना जब मानवता पर कष्ट आता है तो मानवता
- 2:40को मुट्ठी भर लोगों की जरूरत होती है।
- 2:44जो अपने स्वय अर्थ से परे हटकर मानवता के लिए काम कर सके, आज वो
- 2:54वेला है। पूछा है कि आज दुनिया दुखी क्यों
- 3:13है? जवाब दे दो स्वार्थ के कारण।
- 3:27बड़े अफसोस की बात है। मान्यताओं ने हमारे दी भागों पर
- 3:38जहर लगा दी है जैसे लोहे को जंग खा जाती है।
- 3:46इस जंग लगाने में हाथ उन लोगों का है जो सार्थी थे।
- 3:57बहुत पहले हमारे भारतवर्ष में। एक मोटो किया क्या?
- 4:07वसुधैव कुटुम्ब कम अगर सारी वसुधा के लोग एक कुटुम्ब की तरह रहेंगे
- 4:19तो सुखी रहेंगे। इसका अर्थ निकाला नहीं गया।
- 4:27देखिये ये शरीर मेरा है। अभी ये ऊँगली कहे के सिर्फ मैं
- 4:35जिंदार हूँ, बाकी सभी चाहे मर जाए तो क्या होगा?
- 4:44इधर वाली ऊँगली कहे कि मैं जिंदार हूँ, बाकी चाहे सारा शरीर मचा।
- 4:51पांव की ऊँगली कहे के मैं जिंदा रहूँ शरीर का प्रतीक अंग यह बात
- 4:58कही की सिर्फ मैं जिंदा रहूँ बाढ़ में जाए सारा शरीर तो क्या होगा
- 5:06सारा शरीर ही मर जाएगा। और अफ़सोस की बात ये हैं धर्म
- 5:16स्थल जो शांति के लिए बने थे वहाँ स्वार्थ वार्ता के कारण कुंभ के
- 5:30अंदर। भगदड़ में लोग मर जाते हैं कारण
- 5:35कुछ भी बताया जाए, लेकिन कारण है स्वार्थ मैं पहले स्नान कर रहा
- 5:46हूँ, मैं स्वर्ग में पहुँच जाऊं। इन काल्पनिक चीजों ने हमें मार
- 5:53दिया। संगम के ऊपर मैं स्नान कर रहा
- 6:00हूँ। इसी स्वार्थ वार्ता के कारण कितने
- 6:07लोग मारे गए? मेरे पास कोई आंकड़ा नहीं है,
- 6:13लेकिन अगर एक भी व्यक्ति मारा गया तो वह निर्दोष मारा गया।
- 6:22हुआ क्यों? स्वार्थ वार्ता के कारण?
- 6:33आज हम अगर कोई व्यक्ति स्वार्थ से हटकर बात करता है, काम करता है,
- 6:44हम ऐसे मूड हैं कि सब इकट्ठे होकर।
- 6:52उसकी गर्दन बोझ लेते हैं। क्यों किसी एक व्यक्ति के
- 6:59स्वार्थ्य के कारण? लेकिन हमें ये नहीं पता।
- 7:11कि अगर शरीर के किसी अंग को गैंगरी न हो जाए और अगर हम उसे न
- 7:21बचाएंगे तो सारा शरीर 1 दिन मर जाएगा।
- 7:29पूरा अस्तित्व एक शरीर की तरह है। मैं बहुत बार बोल चुका हूँ।
- 7:36इसको बचाना वसुधा के ऊपर रहने वाले लोगों का कर्तव्य था, लेकिन
- 7:47हुआ क्या? हमारे ऋषियों की बात मानी नहीं
- 7:53गई, स्वार्थ हावी हो गया और अपने सुख के साधन खोजे गए।
- 8:06ऐसे भी लोग हैं जो जाति व्यक्ति को मार देते हैं।
- 8:13उसके जीवन की कीमत बाद में उसकी जेब देखी जाती है और जेब में से
- 8:19कुछ नहीं निकलता। ये स्वार्थपार्ता की इंतहा है।
- 8:36लेकिन हम भूल जाते हैं कि आज किसी एक व्यक्ति ने जाते निर्दोष
- 8:42व्यक्ति को मारा कल को हमें भी कोई मार देगा इसे रोकने का प्रयास
- 8:53नहीं करते। सारा विश्व देखता रहा।
- 9:03ध्यान से सुन लो, मेरी बात मैं कहीं चला नहीं जा रहा हूँ पहली
- 9:12बात आपको बता दूँ। बड़े कमेंट्स मेरे पास सैकड़ों
- 9:16हजारों कमेंट आए। बाबा छोड़ के मत जाना।
- 9:18अरे भाई मैं कहाँ जाता हूँ, यहीं बैठा हूँ तो मैं बैठा हूँ, जब
- 9:32आखिरी वक्त आएगा, वह मुझसे पूछ के नहीं आएगा, किसी से भी पूछ के
- 9:39नहीं आता। सारी उम्र मैं बचपन से देख रहा
- 9:48हूँ। अमेरिका अपने स्वार्थ के लिए
- 9:57देशों को लड़ाता रहा। उसके पास बल था, धन थी, शक्ति थी,
- 10:14एक व्यक्ति को एक मुल्क को पैसे दे देता, हथियार दे देता, उसका
- 10:19लोप था, मेरे हथियार बिकेंगे। और जो शक्ति विनाश के काम आती है
- 10:29वो शक्ति होनी नहीं चाहिए। मैं बहुत बचपन से इस बात को देखा
- 10:42करता था कि कैसे अमेरिका दो देशों को आपस में लड़ाके।
- 10:51अपने शस्त्र भंडार भेजता है और राज़ करता है।
- 10:58जब तक ये चला चला लेकिन आज क्या कर रहा है अमेरिका?
- 11:08आज उसने सम पे अंकुश लगा दिया। इसमें भी स्वास्थ्य है।
- 11:19उसने देखा अब ज्यादा दिन चलेंगे नहीं बात तो उसने पाशा पलट दिया।
- 11:32अब लड़ाई के अंदर कोई योगदान नहीं दूंगा।
- 11:36अब मैं अपने देश को देखूंगा। पहले कहाँ थे, पहले ही देश को देख
- 11:41लेते हैं। अगर एक अमीर भाई गरीब भाई को
- 11:56दबाने लग जाए तो यही हसुरु हुआ करते हैं।
- 12:02अगर बाप। जब माँ जिसके हाथ में बल है बल वो
- 12:12अमीर बच्चे का साथ दे, गरीब करना दे तो गरीब बच्चा तो मरा ही मरा
- 12:19है पहले। मानवता आज विनाश के कगार पर खड़ी
- 12:27है। ठीक पूछा बेटे ने सभी जोशी कह रहे
- 12:33हैं बस थोड़े से लोग बचेंगे। इतने भी बच जाएं शुभ है।
- 12:48नस्ल बच गई तो बढ़ने योग्य हो जाएंगे।
- 12:53नस्ल ही खत्म हो गई। तो बढ़ेगा कौन?
- 13:03ये हुआ क्या? वास्त स्केल के ऊपर इसको देखी हुआ
- 13:11स्वार्थ प्रथा के कारण। एक व्यक्ति ने राज़ करना है मुल्क
- 13:20जाये बाढ़ में, लेकिन उसने तो राज़ करना है।
- 13:31मैंने पहला शब्द बोला अगर वह व्यक्ति त्याग करता है।
- 13:37नहीं, मैंने देश बचाना है, राज़ नहीं करना है तो सारा मुल्क सुखी
- 13:44हो जाएगा। अगर अमीर भाई क्या करते हैं?
- 13:53कि मैंने अपने संसाधनों का, सबके लिए उपयोग करना है तो दुख नाम की
- 14:01कोई चीज़ ईश्वर की सृष्टि में नहीं है।
- 14:10दुख हमारी। वितरण प्रणाली के देन हैं।
- 14:18हमने भला चाह नहीं मानवता कहा अग्रणी हैं बातें करने में सर्वे
- 14:28भवन्तु सुख ही नाम। सर्वे सन्तु नरामयाः सर्वे
- 14:36भद्राणि पशंतु माँ कश्यप पाग पर बैठ लेकिन भीतर से ऐसी इच्छा है
- 14:47सब सुखी हों ऐसी इच्छा। मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा आप
- 14:58ज्यादा विस्तार क्यों नहीं कर रहे?
- 15:01ये मीडिया वीडिया क्यों नहीं लगा देते?
- 15:07वही जवाब स्वार्थ प्रता नहीं। न तो मैं खुशी भर लगाता हूँ, न
- 15:21मैं छीनता हूँ, न किसी प्रकार का मेरे में लोभ है इतना ब्लॉक नहीं
- 15:29है कि मैं भोजन ही ठीक से ले लूँ। तो आप समझ नहीं सकते, इस बात से
- 15:38आपको समझ नहीं आता जो मैं जानता हूँ वो मैं बोलता हूँ जो मैंने
- 15:53देखा अनुभव किया। वो मैंने बोला, जो होना चाहिए वो
- 16:00यही होना चाहिए और मैं हजारों बार बोल गया जीस चीज़ का तुम्हें पता
- 16:06नहीं ये आप से हाथ जोड़े कृपया करके मत बोलो।
- 16:13मानवता पहले से ही बहुत दुखी है, लेकिन कहाँ चलते हैं लोग?
- 16:30स्वार्थ परताः छोटी छोटी उदाहरण आपको समझा जाएगा।
- 16:41तीर्थ यात्रा पे जाते हैं लोग मर जाएं कोई बात नहीं हम स्वर्ग
- 16:49पहुँच जायेंगे जो है इन मूड मान्यताओं ने।
- 16:58हमारा दिन का क्षेण रात की नींद छीन ली इन देशों ने जो स्वार्थ
- 17:12हैं अपने भले के लिए हम राज़ करें, आज तक कितने लोग हैं?
- 17:26जिसने विश्व के ऊपर शासन किया हो और निस्वार्थ भाव से किया हो।
- 17:35दुनिया सुखी हो मेरे अधीन जो लोग हो वो सुखी हो किसने कामना की?
- 17:46दो तिहाई विश्व के ऊपर राज़ करने वाला ब्रेक है क्या?
- 17:54पुलिस थी उसकी बांटो, राज़ करो। और देखिये आपको एक बात और बताता
- 18:03हूँ मैंने आपसे पहले भी कहा, रोज़ भी कहता हूँ, मैं जो बोलता हूँ,
- 18:11अनुभव से बोलता हूँ, जो अनुभव मुझे नहीं है।
- 18:17स्पष्ट कहने में कोई गुरिज नहीं, मुझे न तो कोई मेडल चाहिए, न कोई
- 18:26पेंशन चाहिए, न कोई तनख्वाह चाहिए, माँ के किसी से नहीं।
- 18:36श्रद्धा से जो दे जाता है, जो कार्य लेता हूँ और मेरा काम चल
- 18:46जाता है साथ लेके कोई जाता नहीं। काम मेरा चल जाता है और क्या
- 18:58चाहिए? लेकिन इतनी समझ अगर दुनिया को
- 19:05आएगी उस दिन दुनिया सुखी हो जाएगी।
- 19:15गर्दनों को धड़ों से अलग करो। मार काट, लड़ाई झगड़े करवाओ और
- 19:25खुद राज़ करो, यह शुभ वृति नहीं है, वह घर हो।
- 19:39वो राज्य हो, वो देश हो, भविष्य हो, सारा कुछ इसमें आ गया।
- 19:48घर में भी अगर व्यक्ति एक व्यक्ति लोभी होगा वो सारा घर उजाड़ देगा।
- 20:01ग्राम में एक व्यक्ति लोभी होगा, सबको मार देगा।
- 20:10राज्य में एक व्यक्ति लोभी होगा। सारे राज्य का गर्क कर देगा।
- 20:16बीड़ा और देश में एक होगा। या विश्व में होगा तो सारे विश्व
- 20:25को फना कर देगा? आज विश्व इस का गार पाया गया है।
- 20:30जिसके हाथ में शक्ति है वह लोभी हो गया है।
- 20:40और लोभी ही नहीं वह क्रूर भी हो गया।
- 20:53दुनिया क्या करे, बोलने वाले बोलते जाएंगे और अगर कोई उन्हें
- 21:01बोलने ना दे तो क्या होगा? मैं एक बात कहने जा रहा था आपको
- 21:12बीच में रह गया ये जो राज़ करने की मंशा वाले लोग हैं, इन्हें
- 21:24ईश्वर के एक विधान का पता है। पहली बात तो इन्हें ईश्वर पे ही
- 21:29भरोसा में और ऐसे व्यक्ति होने चाहिए विश्व में जिन्होंने ईश्वर
- 21:41नाम के इस तत्व को देखा हो, एक ही हो जाए।
- 21:48एक व्यक्ति जो कहेगा मैंने देखा है झूठा न झूठा व्यक्ति तो घर में
- 22:03समाज में। ग्राम में देश में विश्व में एक
- 22:12हो खत्म करते रहो और सच्चा व्यक्ति एक हो।
- 22:26और वह लोगों को इंस्पायर कर सकते हैं, वह बदलते आज दुनिया दुखी है।
- 22:40मैं जानता हूँ। मैंने बोलना शुरू किया उसका
- 22:50प्रमाण कैसे व्यक्ति सुखी हो जाए व्यक्ति दुखी है कोई प्रवाह करे
- 23:02ना करे अपने घर की परवाह। जिसका घर है वो तो करता है,
- 23:10किरायेदार प्रवाह करे ना करे लेकिन घर का मालिक तो प्रवाह करता
- 23:16है और वह मालिक उससे कहेगा। जीस पर उसे गर्व होगा और जीसको वो
- 23:32योग्य समझेगा। उसकी कृपा हुई, उसने योग्य समझा,
- 23:41मुझे जगाया, बोलने के लिए हुक्म दिया।
- 23:45मैं बोला लेकिन कितने लोग बदले हैं?
- 23:51बदल लेते हैं, बदल लेते हैं, लेकिन एक आवाज हल्की आवाज।
- 24:07यूनिट्स की आवाज़ के डेसीबल के आगे दब जाती है।
- 24:14कौन सुनता है सिसकी आह जहाँ यूनिट्स की आवाजें हों, वहाँ आहा
- 24:24की आवाज़ सुनाई नहीं पड़ सकती। और एक व्यक्ति की आवाज जैसे सिसकी
- 24:33भर ली जैसे आह निकल गई वैसे है ऊंचे बाल्या वाले लोग बहुत हैं और
- 24:44उन्हें पता नहीं। कि सिर का भार पैरों पे आता है
- 24:48हमेशा फिर सुन लीजिए मेरी बात को सिर का भार हमेशा पैरों पे आता है
- 25:01आज नहीं कल। इन झूठ बोलने वाले तत्वों पर वो
- 25:10चाहे मीडिया हो, चाहे राजा हो, चाहे विशु का राजा हो, घर का
- 25:24मुखिया हो। या कोई भी हो जिन्हें हम हेड कहते
- 25:30हैं जिनके ऊपर धारमदार है करोड़ों, अरबों, अरबों लोगों का?
- 25:43वो अगर मूड़ मती का हो जाए अब बना एक औरत 10 बार साड़ी बदले कोई तुक
- 25:53बनती है सोच के जवाब देना मेरी बातों का एक बार सुन लेना।
- 26:04फिर मेरी बातों का जवाब देना एक स्त्री 10 बार साड़ी बदलती है,
- 26:16मेरे देखे या तो उसकी मानसिक दशा विक्षिप्त है।
- 26:25या वह लोगों को मूर्ख बनाना चाहती है और उसे पता नहीं जाने अनजाने
- 26:36वह आग लगा रही है गरीबों में। फिर गरीब उस जैसा होने का प्रयास
- 26:42करेगा। हो नहीं सकता तो सुगम मार्ग
- 26:48अपनाएगा। अब समझदार हो।
- 26:50सुगम मार्ग क्या होते हैं? और आज नहीं कल ये खुद ही काल का
- 26:57ग्रास हो जाएंगे। प्राणें पुराने लोगों ने बड़ा
- 27:07सुन्दर शब्द कहा था आज विकारकार भोजन, भजन, खजाना, नारी चारों
- 27:14पर्दे के अधिकारी, नारीकारथी स्त्री नारीकारथे तुम्हारे में जो
- 27:22सुंदरता है। वो पर्दे में रखो, तुम्हारे में
- 27:33जो पुष्टता है वो पर्दे में रखो, उजागर ना करो या बाँट दो।
- 27:48पूछा है आज बहुत से प्रश्नों के जवाब यकसन दे रहा हूँ किसका जवाब
- 27:55कहाँ से आया ये मत पूछना? कुल मिला के बात के मर्म को मैं
- 28:03समझता हूँ और बात के मर्म का जवाब संक्षिप्त दबाव से विराट अर्थों
- 28:16में दे रहा है। ताकि आप सबका जवाब आ जाए।
- 28:32एक छोटी सी कहानी से कश्मीरी ब्राह्मण गुरु तेग बहादुर के पास
- 28:41गए थे। समझना बात छोटी है, मर्म बड़ा
- 28:51विराट है गुरु तेग बहादुर पूछने लगे, क्या बात है तुम क्यों इतने
- 29:07दीन दुखी मेरे द्वार पे? तकलीफ क्या है तुम्हें तो कश्मीरी
- 29:16पंडित बोले प्रभु औरंगजेब नाम का एक व्यक्ति राजा।
- 29:28हमें धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर रहा है।
- 29:37मैं धर्म भ्रम के चक्कर में नहीं हूँ, याद रखना, मैं तो धर्म चाहता
- 29:42हूँ कि धर्म नाम की चीज़। धरती से उठ जाए तो अच्छा धर्म के
- 29:52नाम पर करुणा होनी चाहिए। धर्म लड़ाई की जड़ है।
- 30:01करुणा उपचार देती है सांत्वना। सहानुभूति, करुणा आपको हील करती
- 30:11है, धर्म जख्म देता है। गहरे और उसी गहरे जख्म देने वाले
- 30:20धर्म की बात आज मैं कर रहा हूँ। धार्मिक मत है जब एक व्यक्ति
- 30:31धार्मिक हो जाता है तो लाखों की सहमत आ जाती है बड़ा गहरा शब्द
- 30:40है। अभी नहीं समझ पाओगे, लेकिन शायद
- 30:45कोई तो समझ पाएगा। धार्मिक मत आना करुणामानु वो ही
- 30:59उदाहरण। मैंने कहा पांव का अंगूठा किया कि
- 31:01मैं बच जाऊं, हाथ का अंगूठा मर जाए तो वह मूर्ख है क्योंकि पांव
- 31:13के अंगूठे को पता नहीं कि यह सारा शरीर इसमें कहीं भी कांटा लड़
- 31:18जाए। कोई भी अंग टूट जाए, नींद सारे
- 31:23शरीर को नहीं आती, बेचैनी सारे शरीर में जाती है।
- 31:28यही विश्व है जिसने देखा इस विराट अस्तित्व को यक सा।
- 31:40उन्होंने उदघोष किया कि एक है एको अहम् द्वितीय नास्त एको ब्रह्म
- 31:52द्वितीय नास्त। और जिसने देखा यह सत्य भी है,
- 32:02इससे परे जाओगे तो झूठ हो जायेगा। बाबा नानक ने कहा एक कोंकार।
- 32:16जो दुई का प्रचार करता है, वह पापी है, वह जीवों में प्राणियों
- 32:29में दुख के संचार करने का। जिम्मेवार है।
- 32:42तुम कहते हो दुनिया दुखी है, हम दुखी हैं।
- 32:45तुम कहते हो बिलकुल ठीक जिम्मेवार कौन बहुत शुरू से लेंगे तो
- 32:54जिम्मेदार वो? जिसने दुई का निर्वाण किया जिसने
- 33:04द्वैत फलाने की चेष्टा की, उसने दुःख को जन्म दे दिया, तो गुरु
- 33:15तेग बहादुर कहने लगे, फिर तुम तुम मिलकर।
- 33:20उस व्यक्ति का हनन क्यों नहीं कर देते?
- 33:22तुम कितने हो? वो कहता वो राजा है, राजा है।
- 33:36राजा के पास सभी प्रकार के बल होते हैं।
- 33:40शस्त्र होते हैं, सैनिक होते हैं, जिन्हें बहुत तनख्वाह देता है,
- 33:51उसके पास बल है, हम निर्बल हैं, हम अगर इकट्ठे भी हो जाएं।
- 33:58तो भी उसको नहीं कर सकते, फिर क्या करना होगा?
- 34:13उन ब्राह्मणों ने कहा एक व्यक्ति की भली मांगता है, वो किसकी भली
- 34:22मांगता है। वो कहता है कि एक व्यक्ति ले आओ,
- 34:34मैं उसका धर्म बदल दूंगा तो तुम्हें सबने धर्म बदलना पड़ेगा।
- 34:40अगर उसने धर्म न बदला। तो फिर मैं तुम्हें मुक्त कर
- 34:45दूंगा, ऐसा व्यक्ति ढूंढने के लिए निकले आपकी शरण में आए।
- 35:03आपकी निगाह में कोई है? ये काम तो कोई महान पुरुष ही कर
- 35:08सकता है। दूसरे के लिए जीवन लौटाने वाला
- 35:17व्यक्ति कोरोनावान ही होना चाहिए। अन्यथा लोग दूसरों का जीवन ले
- 35:23लेते हैं। ऊपर चढ़ने के लिए पूड़ियों की तरह
- 35:27इस्तेमाल करते हैं। उनकी लाशों के ऊपर पांव रख कर अगर
- 35:36एक व्यक्ति अपने सुख के लिए जनता का हनन करते हैं।
- 35:45तो उस एक व्यक्ति का लिया हुआ क्षणिक सुख के साथ तो नहीं जाएगा।
- 35:51यह तो है हकीकत लेकिन वह जो मार धाड़ कर जाएगा, जो परिवारों में
- 36:00कमी वेशी। किसी का भाई गया, किसी का पुत्र
- 36:05गया, किसी का पिता गया, किसी का पति गया, वह कमी नहीं पूरी होगी।
- 36:16एक व्यक्ति की बली मांगता है वो औरंगजेब।
- 36:24साथ तो कोई कुछ ले के जाता नहीं, न ही औरंगजेब, न ही सिकंदर, लेकिन
- 36:30ये जो दुख दे जाते हैं, लोगों को यह दुख जिंदगियों तक चलता रहता
- 36:44है। फिर आने वाली पीढ़ियां औरंगजेब के
- 36:49नाम के ऊपर, जबकि उन्हें हमने बिठाया कंस्ट्रक्शन के लिए रचना
- 37:06के लिए। अगर करोड़ों हाथों ने किसी
- 37:15व्यक्ति को सत्ता दे दी रचना के लिए और वह व्यक्ति वक्त की कीमत न
- 37:22समझे तो क्या होगा लोगों को? गुरु तेग बहाद ने कहा किसी महान
- 37:34व्यक्ति की जरूरत है, जीवन की ने न बालक बोला गुरु गोबिंद सिंह
- 37:43उसके पुत्र थे पिता श्री आप से ज्यादा महान और कौन होगा?
- 37:51देश आपकी भली मांगता है उत्तर पिता से कहता है आपसे महान कौन
- 38:00है, देश आपकी भली मांगता है। ऐसे भी लोग हुए हैं जमाने में पर
- 38:14वो कर्बान हुए और हिंद की चादर कहलाये हम सलमान के अलावा।
- 38:27उन्हें देवी कह सकते हैं। उन्होंने अपना जीवन व्यय दिया,
- 38:33अपना पूरा परिवार सौंप दिया। देश को हम उन्हें देवी कह सकते
- 38:38हैं, सन्मान की श्रद्धा के अलावा हमारे पास तो कुछ है भी नहीं।
- 38:51आज विश्व को मुट्ठी भर ऐसे ही लोगों की जरूरत है।
- 39:02आज विश्व को मुट्ठी भर ऐसे ही लोगों की जरूरत है जो स्वार्थ
- 39:09त्याग कर अपने सामर्थ्य का। उपयोग कर सकें।
- 39:15मानवता के सुख के लिए मानवता दुखी बहुत है।
- 39:24अब जो कर गए वो तो कर गए, बड़े मुर्दे न उखाड़ो ये तो फिर
- 39:30तुम्हारी तरकीब होगी राज़ करने का।
- 39:34ये काम करो, बीती ताहि बिसार दे, आदि की सुध ले।
- 39:44अगर तुम भी ऐसा करने लग गए तो फिर देश को बनाएगा को।
- 39:55ज़रा सोचो क्या हम ऐसा चाहते हैं कि हमें एक अमीर मुल्क दोस्त है
- 40:10और हम गिराते रहे हैं? एक्सेप्ट करने की बजाय हम जवाब
- 40:17देते रहे, नहीं, नहीं, ऐसा नहीं है भाई ऐसा है हमने सभी राजाओं के
- 40:27राज़ देखे। मैं चला था जवाहर लाल से।
- 40:35सबके राज़ देखता गया। सबकी व्यवस्था मैंने देखी।
- 40:43आज विश्व कुछ ज्यादा ही क्रूर हो गया है और इस विश्व की क्रूरता
- 40:52में। प्रत्येक देश को सम्पन्न होना
- 41:00होगा सम्पन्न का अर्थ ये नहीं के अपने अपने ट्रंक भर लो, मेरे
- 41:10देखें। पांच ट्रिलियन 20 ट्रिलियन 100
- 41:18ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के बजाय अगर 140,00,00,000 लोगों को
- 41:30उनकी जरूरतें पूरी हो जाएं, काफी है।
- 41:40सिर्फ सिर के ऊपर सेहरा बनाने से एक हम व्यवस्था हो गए।
- 41:45एक नंबर मेरी दृष्टि में ये मुड़ता हो गया।
- 41:53मैं तो विश्व कल्याण की उम्मीद लेके आज बोलूं चलो।
- 42:01है कोई ऐसा बहुत हैं मैं जानता हूँ शूर वीरों की कोई कमी नहीं
- 42:10है। बुद्धिमानों की कोई कमी नहीं है।
- 42:16दिलवारों की कोई कमी नहीं है। परवानों की कोई कमी नहीं है,
- 42:26लेकिन अपना जौहर कोई दिखाए कैसा है?
- 42:39आज मुट्ठी भर लोगों की जरूरत है। सबसे पहले विषप बाद में सबसे पहले
- 42:47खुद देश देश को। 140,00,00,000 लोगों के जीवन को
- 43:02सुखी करना तुम्हारा टारगेट होना चाहिए।
- 43:07कुछ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना तुम्हारा टारगेट
- 43:13नहीं होना चाहिए। मेरी बात को फिर एक बार मैं कह
- 43:20दूँ कुछ लोग उनको सुनाई कम पड़ता है, थोड़े से ऊंचा बोलना पड़ता
- 43:33है। मेरे देखे व्यर्थ की शान शोकत
- 43:42कागजी लफाजी। इतने डॉलर की अर्थव्यवस्था
- 43:52बनाएंगे बनाने दो लोगों को तुम बन जाओ भाइयो, आज चीन अट्ठारहणी
- 44:00ट्रिलियन डॉलर की है। तुम भाई 218 की बजाओ, हमें कोई
- 44:09मतलब नहीं है। हमारा टारगेट क्या होना चाहिए?
- 44:18विद्वत जंग, करूणा, बान, बहादुर, शेर, दिल, बुद्धिमान।
- 44:30विशाल हृदय वाले शूरवीर पर वाणी मेरी बात को ध्यान से सुनें।
- 44:45आज जरूरत है कुछ मुट्ठी भर बलिदान बलिदान कोई सर धड़ से अलग नहीं
- 44:56करना है। आज तो इतना ही बलिदान काफी है कि
- 45:03प्रत्येक व्यक्ति अपनी अपनी क्षमता का।
- 45:06देश के उत्थान के लिए उपयोग करे एक व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता कब
- 45:11है और इन पागलपनों की बातों से बाहर आ जाओ।
- 45:27क्या हमने देश को इतने ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है?
- 45:33ये मोड़ विचार है 140,00,00,000 लोग।
- 45:45सुख में प्रसन्न होकर जब नाचेंगे तो उनका नृत्य।
- 46:02हिमालय में बैठे हुए शिव देखेंगे वो भी बहुत प्रसन्न होंगे।
- 46:11कैलाश में बैठे हुए शिव देखेंगे 140,00,00,000 लोगों को नाचते
- 46:19हुए। हमें कोई मतलब नहीं है, हमें
- 46:30स्वयं सुखी होना है। तुम दुखी हो मैं जानता हूँ और
- 46:37मुझे ये कैसे पता लगा। मेरे पास बाढ़ आ जाती है।
- 46:43बरसों बीत गए, बस यही बातें दुखी हैं वो और मैं जानता हूँ दुख काहे
- 46:56काहे मुख्य दुख को छोड़ो। उसका हल यज्ञ सा नहीं हो सकता।
- 47:10हम सिर्फ कमियों को पूरा कर सकते हैं।
- 47:13बाहरी लेवल पर। जान उतनी ही गरीब में भी है उतनी
- 47:23ही खरबपति में भी है जान वो ही एक काँटा चुभ जाए दर्द दोनों के समान
- 47:36होता है। विपन्नता भी दोनों को समान होगी।
- 47:44एक व्यक्ति की सम्पन्नता के ऊपर या कुछ लोगों की सम्पन्नता के
- 47:50ऊपर? आज व्यवस्था तो यहीं चल पड़ी है।
- 48:00भाड़ में जाये दुनिया एक व्यक्ति खरबपति होना चाहिए, क्या हो
- 48:11जाएगा? उससे अर्थव्यवस्था ज्यादा हो
- 48:14जाएगी? बस इतना ही है।
- 48:17क्या करोगे? एक व्यक्ति सर पर झंडा लगाकर
- 48:23घूमें और उसका परिवार निर्बलता में मर जाए एक व्यक्ति पहलवानी
- 48:32का। हाथ उठा के घूमे और उसका परिवार
- 48:40कमजोरी से मर जाए, ये कहाँ से उचित है ये उचित नहीं है।
- 48:52आज फिर वही वक्त आ गया। तुम आज लाख गाली निकालो, गाँधी को
- 49:07हँसते हैं लोग, मैंने कहा आज फिर जरूरत है।
- 49:13आज तुम गाँधी का काम करो, एक व्यक्ति ने सारा देश जगा दिया था
- 49:24तुम्हारे पास जुबान है, तुम्हारे पास साहस है।
- 49:33तुम्हारे पास शक्ति है, तुम लोगों को प्रेरणा दे सकते हो इकट्ठे हो
- 49:41जाओ, और बच्चे हैं, मुझे खुशी है आज।
- 49:53सभी उम्र के लोग हैं गिनती के, ये तो मैं जानता हूँ लेकिन हैं जो
- 50:03साहस कर रहे हैं। लेकिन क्या करें?
- 50:15जब हमारे ही लोग इनके विरुद्ध हो जाए तो कोई क्या करेगा?
- 50:26नहीं, ऐसा नहीं चलेगा। आज ऐसा करना भी नहीं चाहिए।
- 50:35मैं नहीं समझता कि सिर्फ एक सम्मान का झंडा क्या हम 20
- 50:45ट्रिलियन की डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गए और देशभूखा मर जाए?
- 50:51किसी कीमत पर मैं तो नहीं चाहता अगर कोई चाहता है, तो चाहता रहिए,
- 51:03लेकिन मैं नहीं समझता क्योंकि मैं आज जानता हूँ, मुझे आंकड़े नहीं
- 51:08पता। सुनता जरूर है जीस मुल्क में
- 51:1680,00,00,000 लोग पांच के लोग राशन के ऊपर गुज़ारा कर रहे हैं।
- 51:24उस देश की व्यवस्था क्या होगी? बस सिर्फ इसी कारण से आज एक अमीर
- 51:35मुल्क धुंस दे रहा है। दोनों में से एक काम हम कुछ कर
- 51:47नहीं सकते हैं ना हम अपनी जरूरतों को कम कर सकते हैं।
- 51:55ना हम ऐसे लोगों को कह सकते हैं कि तुम साड़ियाँ मत बदलो भाई।
- 52:0410 साड़ियों को एक स्त्री बदलेगी तो बाकी क्या करेगा?
- 52:11गाँधी ने लंगोटी पहन ली, पंचम पूछने लगा यह लंगोटी क्या पूरा तन
- 52:19ढापने के लिए वस्त्र नहीं हैं? गाँधी कहते नहीं, बस इतना ही मेरे
- 52:25हिस्से में आता और उससे ही पूछो तो इससे भी कम आता।
- 52:31इससे कम करूँगा तो फिर शर्म मुझे भी आएगी और तुम्हें भी आएगी
- 52:35क्योंकि तुमने मेरे देश के नागरिक का सब कुछ छीन लिया है।
- 52:49लेकर यहाँ से कोई भी नहीं जाता। मेरी बात को याद रखना, रिकॉर्ड
- 52:53रखना। जॉर्ज पंचम भी आखिर में सुसाइड
- 52:58करके मारा, उसको भी मार्फिन और कोकिन का इंजेक्शन लेना पड़ा।
- 53:04आखिर में कि मज़े मार दे, दूसरों को जो लूटेगा ईश्वर उसको लूट
- 53:13लेगा। मिला शक कोई चार वक बने तो बने
- 53:24कोई मार्कस बने तो बने। लेकिन यहाँ लेन देन कर्मों का
- 53:36होता है, तुम जानो हो न जानो मैं तो जानता हूँ मैं जानता हूँ यहाँ।
- 53:55एक नियम न्यूटन का एव्री एक्शन देर जे निकुर एंड अपोज़िट एक्शन
- 54:03साइंस का एक सिद्धांत अध्यात्मिक सिद्धांत भी है।
- 54:08परमात्मा भी इसी सिद्धांत के हिसाब से काम करता है।
- 54:13उसका विधान भी ऐसा ही चलता है। बहुत गौर से देखोगे, शांति से
- 54:22बैठकर तो आज कोई जीवन जीने लायक नहीं है, मेरे दृष्ट में।
- 54:33कोई गरीब है, कोई अमीर है, कोई मध्यम है, सभी मेरे दर पे आते
- 54:45हैं, मैं क्या बोलता हूँ हाँ? पर मैं किसी को सुख ही नहीं पाता
- 54:58क्यों? क्योंकि जितना है उससे ज्यादा
- 55:04चाहिए। दैट इज़ सुफ्फिसिएंट ऑर नॉट?
- 55:12वह पर्याप्त है या नहीं है? इससे हमने कुछ नहीं लेना, लेकिन
- 55:18और चाहिए बस इसी चीज़ ने मार दिया।
- 55:26आज जरूरत है अगर तुम्हारे पास ज्यादा है तुम बांटते हो।
- 55:31आज बाबा नानक के सिद्धांत की आवश्यकता है, वंड चको कृत करो,
- 55:39नाम जपो उस परमात्मा के विधान में रहो, कर्म करो, मेहनत करो और बाट
- 55:50के खाओ। सभी संतों ने ऐसा ही उपदेश दिया
- 55:57और सभी संत ऐसे ही अपने जीवन को जीए।
- 56:02आज वक्त नया आ गया तो क्या हुआ हम हिम्मत करेंगे।
- 56:12हम उठेंगे तो इस वक्त को पार कर लेंगे।
- 56:18कभी कुछ भी करना मुश्किल नहीं होता।
- 56:23उत्साह चाहिए, मोटिवेशन चाहिए और यही तो कृष्ण ने कहा और।
- 56:30क्या है अगर धुरंधर खड़े हैं सामने क्या है अगर तेरे पास चार
- 56:36अक्षोहणी सेना कम तुझे शस्त्र विद्या सीखाने वाला द्रोण तेरे
- 56:43विपरीत तुझे बच्चे से जवान बनाने वाला।
- 56:53भीष्म तेरे विपरीत और तुम पांच बस हो और तुम सात शून्य व 11 शून्य
- 57:07शस्त्र ज्यादा उनके पास। लेकिन तुम्हारे पास से सत्य है,
- 57:21उनके पास से झूठ है और हे अर्जुन सत्य इतना कमजोर नहीं होता।
- 57:31कि गणना के आगे हार जाए। मेरे इस शब्द को फिर सुनना है।
- 57:38सत्य इतना कमजोर नहीं होता कि क्वांटिटी के आगे हार जाए।
- 57:49क्वांटिटी में वो ज्यादा है। गणना में ज्यादा है संख्या उनकी
- 57:54ज्यादा है। लेकिन तेरे पास क्या है?
- 57:58तेरे पास सत्य है और सत्य है तो तू देखना तो विजयी होगा।
- 58:14आज भी वही अवस्था है 140,00,00,000 की आबादी वाला ये
- 58:23देश कहीं ऐसा तो नहीं कि कु अवस्था के कारण भूख के कगार पे आ
- 58:30गया हो? अतीत के परबंधक मैनेजमेंट करने
- 58:43वाले जिनको हमने गद्दियाँ सौंपी, कहीं ऐसा तो नहीं उन्होंने अपने
- 58:51ही घर भर लिया? तुम्हारा छीन लिया हो ऐसा ही है
- 59:03तुम्हारा छीन लिया हो अपना घर भर लिया।
- 59:08व्यवस्था के नाम पर आज सब चलता है, ठीक हो या गलत हो।
- 59:18जबकि मानवता चलनी चाहिए, करुणा के ऊपर वंड छको।
- 59:24लेकिन आज ये सिद्धांत नहीं है। आज न तो बाबा नानक है, लेकिन एक
- 59:31बात बाबा नानक जैसे लोग। धरती से मित्र नहीं हैं, एक नहीं
- 59:39हजारों हैं, मगर आज मेरी आवाज़ सुनकर उठ जाएं, जाग जाएं, सोए न
- 59:49रहें। तो एक अमीर की धुड़की के आगे एक
- 1:00:01गरीब जीत जाएगा, ये मेरे शब्दों को रिकॉर्ड में तुम्हारे पास है
- 1:00:09ही वीडियो के रूप में तुम देखना। विजयी हम होंगे और कैसे होंगे?
- 1:00:18ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बंद करने में हम इस गौरव से विजयी
- 1:00:27होंगे। हमारे देश में कोई भूखा नहीं मर
- 1:00:29रहा है। हमारे देश में एक भी व्यक्ति हर
- 1:00:37रात को भूखा सोतन है। एक भी व्यक्ति तन से नंगा, न एक
- 1:00:44ही व्यक्ति के सर के ऊपर सत्य न हो, ऐसा कोई व्यक्ति न है।
- 1:00:51और इससे बड़ा गौरव कोई हो भी नहीं सकता।
- 1:00:56तुम्हारी अतीत की पीढ़ियों ने तुम्हें जो सिखाया उसका फर्ज सफा
- 1:01:02हमारे सामने। हमारे सामने हैं सब और मैं देख
- 1:01:13रहा हूँ सुनाई थोड़ा कम पड़ता है, थोड़ी उम्र का तकाज़ा भी है।
- 1:01:28कान खराब है, दिमाग ठीक है और यह ठीक होना चाहिए तो कान की कोई बात
- 1:01:41नहीं है। वो तो मैं मशीन भी लगा लूँगा और
- 1:01:47वो भी खराब नहीं है तो मैं समझा दूँ।
- 1:01:53वो भी मेरे भीतर अन्नजनाद का आनंद चौबीसों घंटे चलता है।
- 1:02:00उस आवाज़ के संगीत में मैं बाहर की आवाज़ों को थोड़ा कम सुनाई
- 1:02:06देती हैं। मुझे बस यही है।
- 1:02:09और कुछ नहीं, शरीर का कोई अंग खराब नहीं।
- 1:02:13मैंने कुछ ऐसा नहीं खाया जिससे मेरा शरीर खराब हो।
- 1:02:22अभी 3 दिन पहले शरीर का मायना किया गया।
- 1:02:26डॉक्टर ने कहा, यह 16 साल के बच्चे का शरीर है।
- 1:02:35जो आपके सारे शरीर के अंग बस एक सिर्फ़ क्रेटेनन बॉर्डर लेवल पे
- 1:02:44है और कुछ नहीं। बाकी बच्चे का शरीर है ये।
- 1:02:53होना भी चाहिए। आहार बच्चों जैसा लेता हूँ तो
- 1:03:02शरीर के अंग बच्चों जैसे क्यों ना हो गए?
- 1:03:09खैर इसको छोड़ दो, ये हमारा, आज का विषय भी नहीं।
- 1:03:15आज का विषय क्या है? मानवता दुखी है, बिल्कुल दुखी है।
- 1:03:24सुखी कैसे हो जाए? देखिए अगर तो मेरी इस आवाज़ को
- 1:03:34आगे पहुंचने नहीं दिया जाएगा, फिर तो मैं कुछ नहीं कह सकता।
- 1:03:43अगर मेरी इस आवाज़ को देश के कोने में एक एक व्यक्ति के पास पहुँच
- 1:03:51जाए, यह बात और प्रत्येक व्यक्ति तत्पर हो जाए कि हाँ, मैं अपने
- 1:03:58परिवार को भूखा नहीं सोने दूंगा, बस सिर्फ परिवार को।
- 1:04:05प्रत्येक परिवार अपनी अपनी जिम्मेवारी ले ली।
- 1:04:08मूड़ताओं से हट के न मुझे मुक्ति चाहिए, न मुझे कुंभ चाहिए, अभी
- 1:04:16कुछ नहीं चाहिए। अभी तो भूख लगी है रोटी चाहिए?
- 1:04:26हम जब बनेंगे अमीर बन जाएंगे 2047 में, लेकिन भूख तो अभी लगी है,
- 1:04:33पेट 2047 का इंतजार करता नहीं, शिक्षा 2047 का इंतजार नहीं करते।
- 1:04:46जो बीमार है उसका दर्द 2047 तक इंतजार नहीं करेगा, उसे दवा फौरन
- 1:04:53चाहिए, फौरन शिक्षा चाहिए, फौरन इलाज चाहिए और फौरन रोटी चाहिए।
- 1:05:032047 का इंतजार नहीं करती। ये तीनों चीजें आज चाहिए आज अब
- 1:05:18नहीं तो ऐसी ही कुछ मूड। अमीर हमारे देश में भी हैं।
- 1:05:27सिर्फ एक देश का मुखिया जो सबसे ज्यादा धनाढ्य है, वह हमें आंख
- 1:05:37दिखाने लग गया। आंच?
- 1:05:46और हमारे शीर्षस्थ नेता लाचार। एक उस पिता की तरह है जो अपने
- 1:06:13बच्चों को भूखा दृद्र, दुखी, बीमार देखकर लाचार है।
- 1:06:19उसके पास कोई हल नहीं देखता मुझे क्योंकि अगर होता।
- 1:06:24तो वह इलाज कर देता। मुझे लगता नहीं कि उसके पास कोई
- 1:06:29हल है। वह लाचार पिता की तरह है।
- 1:06:32आज तो अगर पिता लाचार हो गया है तो कर्तव्य बच्चों का बनता है।
- 1:06:52के बच्चे, वह व्यक्ति जीसको हमने दिशा के लिए चुना, उसके संग भोले
- 1:07:00उसका साथ दें और देश में जितनी प्रतिभा है, कोई कमी तो है नहीं।
- 1:07:08दबी हुई है, कमी नहीं है। आज पिता का भी कर्तव्य है, बच्चों
- 1:07:21का साथ मांगी और बच्चों का भी कर्तव्य है।
- 1:07:26कि तोमते लगाने का वक्त नहीं है, बाद में लगा लेंगे तुम संकट काल
- 1:07:35से गुज़रने का वक्त है आज क्योंकि संकट काल सिर पे और अगर।
- 1:07:48इस संकट काल में हम मौन हो गए। एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप
- 1:07:53करते रहे, लांछन बाजी करते रहे तो लूटे तो पड़े हैं।
- 1:08:01बिलाशक कसरतों की बागी नहीं है। एक एक फिरंगी ने आज फिर आँखें लाल
- 1:08:18किया और उसकी लाल आँखों का जवाब हमें अपनी समृद्धि से देना होगा,
- 1:08:33उसकी आँखें निकाल के नहीं। उसे उसकी आँखें खोल के दूसरे की
- 1:08:42लकीर को छोटा नहीं करना। हम गुमान से गर्व से कह सकें
- 1:08:50हमारे देश का एक एक बच्चा। आज भरे पेट सोता है, एक एक शरीर
- 1:09:02डब्बा हुआ है एक एक सड़कों पर छत है।
- 1:09:12अगर हम ऐसा कुछ कह पाए तो यह गर्व की बात है।
- 1:09:19कुछ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना ज़रा भी गौरव
- 1:09:23नहीं है। वह तो फूंकी लफ्फाजी।
- 1:09:32कागजी झंडे हैं, वह मत उठाओ, उसका वक्त नहीं, बेला नहीं आज वक्त है
- 1:09:44देश का एक एक बच्चा। भूखा न सोय इलाज के कारण न मरे छत
- 1:10:04न बरसे। ठंडी से शरीर काफी ना और गर्मी की
- 1:10:14लॉ में डिहाइड्रेशन ना हो। ये सब कुछ एक साथ चाहिए।
- 1:10:21आज और एक साथ चाहिए तो एक साथ सभी को अनोखा।
- 1:10:28भेदभावों को मिटा के बहुत कर लिया भेदभाव तुमने मानव ने मानव के ऊपर
- 1:10:36जो अत्याचार किया वह बुलाया नहीं जा सकता लेकिन आज बुलवाने का वक्त
- 1:10:44है। आज किसी फरंगी ने तुम्हें ललकारा
- 1:10:51है। जागो अपनी अपनी बुद्धि बल
- 1:11:02सामर्थ्य को बटरों। और प्रयोग करो जो विद्वान हैं
- 1:11:14विध्वत्ता से जो बलवान हैं बल से जिनमें जो भी शक्ति है वो उसका
- 1:11:22प्रयोग करें, आज वेला है। आज देश मांगता है, देश की अनख
- 1:11:30मांगती है, देश का गौरव मांगता है, आज जरूरत है राष्ट्र की जीस
- 1:11:39राष्ट्र की हम दुहाई देते हैं आज फिर।
- 1:11:45गौरव का सवाल बनाया है, आज फिर दुश्मन ने हमारी शान के विरुद्ध
- 1:12:00लफाजी की है, हमें उसकी जबान बंद नहीं करना है।
- 1:12:13हमने खुद का सतर्क उठाना है। बस जब पूरा 140,00,00,000 का
- 1:12:23तबका। रात को भर पिट सोयेगा, तंग कपड़े
- 1:12:34से ढका होगा? सर पे छत होगी, सबके पास खाना
- 1:12:42होगा, वस्त्र होगा, मकान होगा। बैंक बैलेंस की जरूरत नहीं है।
- 1:12:49हमें कुछ गिने चुने अमीर लोगों से भी मैं हच विनम्र निवेदन करूँगा
- 1:13:01कि वह स्वार्थ वार्ता को भूल जाए। आज विशाल गर्भता दिखाने का वक्त
- 1:13:10है। आज कृर्पणता न दिखाएं इकट्ठे होने
- 1:13:22का वक्त है तुम्हारा आज। और मैं तो तुम्हें आवाहन ही कर
- 1:13:29सकता हूँ। अपना अपना जो सबके पास बल है किसी
- 1:13:42भी तरह का बस झोंक दो, झोंक दो कि कोई भूखा न सोए।
- 1:13:53तन ढपे हो सबके रात नींद ठीक है, इससे बड़ा गौरव कोई नहीं हुआ करता
- 1:14:08हम उन लोगों के साथ। उन लोगों के तेवर झेल रहे हैं जो
- 1:14:17लोग नींद की गोलियां खा के सोते हैं।
- 1:14:21बस इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बोल सकता।
- 1:14:24हमारे पास नींद है। बिस्तर तो हम बना लेंगे उनके पास
- 1:14:32भोग नहीं, हमारे पास भोग है भोजन तो हम बना लेंगे, हमारे पास प्यार
- 1:14:43है इकट्ठे तो हम हो लेंगे। ईद तो हम मना लेंगे गल बकड़ी तो
- 1:14:51हम डाल लेंगे बस ये चाहिए कमी तो कुछ भी न है इस देश में।
- 1:15:05अगर ऐसे सोने की चिड़िया नहीं तो हृदय तो प्रेम के सोने से भरे
- 1:15:11पड़े, आज उठो, जागो, अपनी जरूरत को पहचानो सारे मुल्क के प्रत्येक
- 1:15:21व्यक्ति से जो समझता है। बच्चे तो भी बच्चे हैं, उन्हें तो
- 1:15:25समझ नहीं आएगा जकमुश्त हो जाओ और अपने पूरे संसाधनों का उपयोग करो
- 1:15:34एक दूसरे के बर्खिला अपने एक दूसरे के साथ एक एक।
- 1:15:43दो नहीं होते, 11 होते हैं श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी हे
- 1:15:59नाथ नारायण। वह सुदेवान श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:16:13मुराय हे नाथ नारायण वासुदेव। पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात
- 1:16:33स्वामी सखा हमारे। हे नाथ नारा यन वासुदेव श्री
- 1:16:48कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण।
- 1:16:59वासुदेव यदा यदा ही धर्मस्य गला निर्भवती भारत अभ्युतानम अधर्मस्य
- 1:17:14तदामानम सृजम। पृत्रानाय साधुनाम
- 1:17:24विनाशयच्यदुष्कृत धर्म संस्थापनाय।
- 1:17:35संभव वाणी युगे जुगे धन्यवाद।