Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Apr 25 - गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें? बंधन रहित कैसे रहें? Say Goodbye To Society.
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- 0:16बाबा जी प्राण आपने बाजक वीडियो डायल ब्रह्मचर्य के ऊपर मन को छू
- 0:27गई। हमारे मन में भी उस कपल के जैसे
- 0:41हैं हम होना चाहते हैं, लेकिन अर्जुन है मेरा पुरुष।
- 0:56मेरा सहभागी पर ऐसा नहीं कि सिर्फ स्त्रियों पर पृषों की तरफ भी ऐसे
- 1:06ही। पुरुषों के भी ऐसे ही प्रश्न हैं।
- 1:12सैकड़ों प्रश्न बहुत पहले से ही प्रश्न आ रहे है।
- 1:24सहभागी को कैसे समझाएं? पुरुष कहता इस तिल के कारण?
- 1:38स्त्री कहती है, पुरुष के कारण अरे बड़े मज़े की बात है, फिर
- 1:41किसके कारण आग दोनों के भीतर है? प्रकृति दोनों के भीतर काम करती
- 1:55है यह नेचुरल प्रोसेसर। यह एक पानी का बहाव और देखिए अगर
- 2:07इस भाव को आप ऊपर ले जाना चाहते हैं।
- 2:10दसवीं मंजिल तक तो पंप का इस्तेमाल करना होगा, वो ही पंप है
- 2:15ब्रह्मचर्य। जो आपकी काम ऊर्जा को डीसी तक
- 2:26पहुंचा देता है। बोझ बन कर संक्षिप्त में बता दूँ
- 2:34कि जब भी ये बनता है। या राजवंती है।
- 2:42तीन दिनों में उसका सेंच खींच लिया जाता है तीन दिनों के बाद।
- 2:54अगर वो एक्स्क्रड हो जाए अपने आप तुम चाहोगे तीन दिनों के बाद चलो
- 3:01थोड़ा मज़ा ले लो, वो तो संस्कार बढ़ जाएगा ये तो पहले से बहुत है।
- 3:09तीन दिनों में उसका सेंस करीब 7080%।
- 3:13फौज बन जाता है सोते अगर तुम बचाने में सक्षम हो जाओ और अगर
- 3:22बिल्कुल ही बचाने में सक्षम हो जाओ तो एक वक्त कैसा आएगा जब वह
- 3:29वीर और रच सारे का सारा? होज बन जाएगा सतह तुम्हें कोई
- 3:38परेशानी ही नहीं है। मैंने आपसे कहा कि पानी सहज वापसी
- 3:46तो नीचे जाता है पानी की प्रवृत्ति ढलान में बहने की।
- 3:52लेकिन अगर आप उसे ऊपर ले जाना चाहते हो सौमी मंजल पड़े तो यू
- 4:01हॅव टु यूज़ पंप पंप का इस्तेमाल करना होगा।
- 4:06वो पंप है ब्रह्मचारी। किसी के ऊपर दोष मत देना दोनों ही
- 4:14जिम्मेदार है और कोई काम या ज्यादा नहीं बराबर की आग है।
- 4:23परमात्मा इतना मुर्ख है, परमात्मा ने बड़े ढंग से सृजन किया।
- 4:38अगर स्त्री पुकारना है और स्त्री का ढंग उकारने का अलग है और पुरुष
- 4:53का खीच जाने का ढंग अलग है। वो समर्पण से पकारती है और पुरुष
- 5:07आक्रामक रूप से जाता है। दोनों कीमतों व्यक्तियाँ मैंने
- 5:13अक्सर जोड़े देखे। मैं तो इसके कारण सटिसफाई करता
- 5:18हूँ उसे मैं। इससे कहती मैं तो इसके कारण इसे
- 5:23सटिसफाई करती हूँ। दोनों अपने अपने हमकारों को
- 5:27तसल्ली दे देते हैं और दोनों ही ब्रह्मचारी बन जाते हैं।
- 5:31नाम के कागजी नहीं ऐसा नहीं है। इसके भीतर की रासायनिक संरचना और
- 5:47ढंग देखना होगा। 29 वर्ष में घर से निकले और 80
- 6:01वर्ष में प्रणति आदि इतने साल 51 साल।
- 6:0851 साल ब्रह्मचारी रहे अखाड़ा कितने चेहरे पर नोट था, कितनी
- 6:21आवाज़ में शांति की छलकन थी? लबालब आनंद से बना हुआ उसका
- 6:29अस्तित्व गहरी शांति उसके चारों तरफ चहों दिशाओं में नाजुक थी।
- 6:39क्यों उसका एक कारण? ब्रह्मचर्य गीता एक कारण कहता,
- 6:47बाकी तो मुख्य कारण तो अलग थे और सै को जानना मुख्य कारण तुम हो
- 6:56कौन यह मुख्य कारण को जान दे। बाकी गौण कारण होते हैं।
- 7:08अब जैसे आप क्रिया योग करते हो लेकिन क्रिया योग के साथ अगर कुछ
- 7:14थोड़े से नियम अपना लो मिर्च मसालेदार भोजन का त्याग कर दो।
- 7:22सूक्ष्म आहार लेना शुरू कर दो, कुछ नहीं होता, मरोगे नहीं।
- 7:27तुम्हारे सामने 13 बरस से मैं बैठा सिर्फ दूध ले रहा हूँ तीन
- 7:31बार एक एक का गिलास। और बहुत से लोग शक्की लोग कह देते
- 7:44हैं बाबा मैं आपके पास हूँ, मैं ना करूँगा आपके पास पांच 7 दिन तक
- 7:51बैठूं देखूंगा वाकई ठीक है। मैंने कहा यहाँ लोग 2020 दिन भी
- 7:57बैठते हैं। वो माइना करके जाते हैं, उन्हें
- 8:00पता चल जाता है सब माइना करने नहीं आते और अगर आओगे तो जूते
- 8:08खाकर जाओगे, मुझे कोई सजा नहीं होगी।
- 8:12मैं अपनी इच्छा से कर रहा हूँ। इसलिए इस मामले में मत आना।
- 8:24तिल्ली वाले जूते भी पड़े हैं मेरे पास और तुम कहते हो हम आपको
- 8:38मान नहीं देंगे, बिल्कुल मत बोल। मांगा किस्म तुम जो चीज़ मुझे दे
- 8:52सकते हो उसकी आवश्यकता मुझे कब की खत्म हो गई।
- 9:02तुम मान सम्मान देना चाहते हो दे सकते हो लेकिन जब मैं विराट हो
- 9:08गया तो इससे बड़ा मान मुझे परमात्मा ज्ञान देगा।
- 9:11मैं अनंत हो गया। समुद्र की एक बूंद जब समुद्र ही
- 9:18हो जाती है तो इससे बड़ा मान होता क्या है?
- 9:20उसका अस्तित्व सच में ही मूंज से समुद्र हो गया।
- 9:25इससे इससे बड़ा सम्मान क्या लेगा? ब्रह्मांड
- 9:39आपने ब्रह्मचर्य कहा, तो आप क्या किया?
- 9:43मसला गहन है। देखिए थोड़े से मैं सुझाव देता
- 9:52हूँ। एकतरफा सुझाव नहीं चलेंगे एकतरफा
- 9:59सुझाव तो रिश्तों में ग्रह कर लेंगे।
- 10:04और ध्यान रखना अगर आप अपने साथी की काम वासना की पूर्ति नहीं करते
- 10:10तो अन्य किसी के पास जाएगा। स्त्री किसी अन्य पुरुष को तलाश
- 10:14करेगा और पुरुष किसी अन्य स्त्री की तलाश करेगा जो तुम कति
- 10:20बर्दाश्त नहीं कर सकते। मैं तुम्हारे स्वभाव को भी जानता
- 10:25हूँ और इसकी बात अगर तुम पुरुष या स्त्री की कामवासनों की जरूरत को
- 10:37पूरी नहीं करते तो वह तुम्हें कोर्ट में चैलेंज कर सकता है।
- 10:43तो फिर मैंने इसका क्या कहूं? मुझे तड़प करो, मैं दूसरी शादी कर
- 10:48सकूँ और ये बड़ा शानदार सत्य है। उनकी जो कुर्सी में बैठे हैं वो
- 11:00भी यही समझते हैं। की ये जरूरत है वो प्रबुद्ध नहीं
- 11:06होंगे तो वह पीड़ित पक्ष में फैसला देगा।
- 11:14तो इन दोनों बातों को ध्यान में रखना तो क्या करना भला दोनों का
- 11:20है। अगर तुम अपनी शक्ति को न गंवाओगे
- 11:25तो इसमें दोनों का भला, लेकिन अब क्या करें?
- 11:29अब हम 5050 के तो होंगे स्त्री को मैनपोस की अवस्था में पुरुष मैंने
- 11:37कहा वो तो कभी घोड़ा और पुरुष कभी बूढ़ा नहीं।
- 11:43कि अब ये कैसे मिटा जाए? ये दंड प्राकृतिक है, मैं सबसे
- 11:53पहले समझौता करना होगा। बैठकर आपसी सहमति से घर की शांति
- 12:06ना बिगड़े प्रेम और शुभद वातावरण बनवाना है।
- 12:17कोई झगड़ा लड़ाई का साथ लूँगा, उसके लिए बैठ के समझोता करो।
- 12:23जो ड्यूरेशन है आपका आपने 1520 दिन महीना रखा, तो हम दो महीने कर
- 12:29ले बढ़ाते, जो बढ़ाते जो ब्रह्मचर्य का स्वाद ऐसा कि अगर
- 12:39किसी व्यक्ति के गले उतरती है बाज।
- 12:42तो उसका स्वाद भी निराला है। जीसको चस्कर लग गया वह आपका
- 12:49धन्यवाद देख के ठीक किया था और अगर किसी को चस्का नहीं लगा तो वह
- 12:56बिगड़ भी सकता है। फिर पुरुष तो घर से बाहर जाएगा।
- 13:01किसी घर में किसी अन्य को बुलाई ये खतरे हैं वजी समस्या है आपकी?
- 13:11मैं समझता हूँ चलो अब ये तो हो गुज़ारा जैसे तैसे जैसे तैसे पार
- 13:19लगाओ। समझौता ही का अन्य कोई उपाय मुझे
- 13:30लगता है इसी और प्रकार का प्रयोग मत करो।
- 13:41बस आप समझ गए होंगे जैसे कुछ स्त्रियाँ कुछ ऐसे प्रयोग करती
- 13:47हैं कुछ काम वासना को घटाने के तत्व डाल देती हैं खाना तो उसने
- 13:52खाना होता है ऐसा कुछ मत करो। इससे स्वास्थ्य पे बहुत बुरा असर
- 14:00पड़ता है। हाँ नेचुरल सीते दे लो आप दनिया,
- 14:05जैसे दनिया है या काम वासना को घटाती हूँ दनिया का इस्तेमाल कर
- 14:12सारा दनिया, उसकी चटनी बना दो। थोड़ी काम बाकी बाहर के वातावरण
- 14:22के दृश्यों को उत्तेजक दृश्यों को हटाओ।
- 14:27ये नग्न तस्वीरें जो आपके घरों में चिपकी हैं इन एक्टर
- 14:35एक्ट्रेसेस हटाओ। अच्छे, गुणवान, बलवान भी महाराणा
- 14:45प्रताप, शिवाजी मरहट भगवान राम, श्री कृष्ण इनकी तस्वीरें लगाओ,
- 14:53जिससे हमें प्रेरणा मिले। ये नंग धड़ंग सुनहरी पर्दा सक्रीन
- 15:05की शोभा बनने वाले ये फिल्मी अदा का।
- 15:12इनकी फोटो को हटा ये आइकॉन मत बनाओ, ये सब है ऐसा आपको सहयोग
- 15:22करना होगा। एक दूसरे को इसलिए मैं कहती हूँ
- 15:26अगर कपल आ जाए तो सबसे बढ़िया होता है।
- 15:31अगर कपल न आए तो मुश्किल होती है, बिल्कुल मुश्किल होती है।
- 15:38अब क्या करें हमारा आदि जो समाज की व्यवस्था है वो ऐसी ही नहीं अब
- 15:52चलाओ कैसे भी चलाओ, समझौते से चलाओ।
- 15:55झगड़ा मत कर झगड़ा करना बेमानी है।
- 16:04दोनों में से एक को स्वीकार करना होगा।
- 16:11उस स्वीकृति में ही भलाई है। झगड़े में तो कोई भलाई युद्ध में
- 16:22अगर कोई कहे मैं जीत गया, मैं हार गया।
- 16:24गलत युद्ध में दोनों पक्ष हारते हैं और प्रेम में कोई कहे कि मैं
- 16:30हार गया, मैं जीत गया। गलत प्रेम में दोनों पक्ष जीत
- 16:34सकते हैं प्रेम। दोनों पक्षों को जिताता है और
- 16:41युद्ध दोनों पक्षों को हरत है। फिर से कम्प्रोमाइज़िंग नेचर के
- 16:48साथ अपनी घर कृति के रथ को चलाओ घर कृति का रथ एक पहिए को
- 16:53प्रचलतन। इसको बकई का दिमाग में रखो।
- 16:59दूसरा प्रश्न अनिल गोस्वामी बाबा सामाजिक ढांचा बड़ा पुरातन हो चला
- 17:14है, हमारा सनातन है तो पुरातन है। अब आज इसको बदले जाने की जरूरत
- 17:21रखती है। क्या आप सहमत हैं?
- 17:24और अगर बदला जाए तो हमें मार्गदर्शन कहें कि कैसे बदला
- 17:29जाए? सुन्दर प्रश्न लेकिन क्रांतिकारी?
- 17:37सारी व्यवस्थाएँ बदली, बहुत कुछ उलट पुलट होगा।
- 17:49अगर आप तैयार हों तो आप इस प्रयोग को कर सकते हो।
- 17:57क्या किया जाए अपनी शारीरिक शक्ति को सबसे पहले जरूरी?
- 18:06वो तो चाहे तुमने गृहस्थ धर्म निभाना नहीं निभाना, ये तो आवश्यक
- 18:12है कि पढ़ाई करो। जहाँ तक पढ़ सकते हो, पढ़ाई करो,
- 18:21कॉम्पिटिशन लड़ो, बड़े से बड़ा पौधा लो, आप ले सकते हो संसार में
- 18:31आप। अपने पांवों के ऊपर बखूबी स्टैंड
- 18:43होने की क्षमता पालो, सबसे पहले पुरुष है या हस्तिक आज वक्त आ गया
- 18:50है। क्योंकि पुरूष स्त्री का करी कृपा
- 18:57काफी कम हो गया है, आवाज़ दोनों बराबर है लेकिन शारीरिक बनावट के
- 19:07कारण जो परमात्मा की देन है स्त्री आज भी।
- 19:11अकेली नहीं जा सकती दरिंदे बलात्कारी, हत्यारे, चोर गिरोह
- 19:24भेड़िए ये सड़कों पर बिछड़ रहे हैं हम।
- 19:34और इन बेड़ियों के साथ कुछ स्त्रियां भी मिल गई हैं।
- 19:41अब माहौल सारा खराब है तो बाबा क्या किया जाए, क्या व्यवस्था
- 19:46कैसे बदली जाए? अब सुनिए मेरी बात।
- 19:55अपने पांव के स्टैंड एअर्निंग कैपेसिटी कीजिए, आप हुनर पैदा
- 20:04कीजिए। अगर आपको एअर्निंग कैपेसिटी नहीं
- 20:09मिल रही किसी तरफ से एअर्निंग सोर्स नहीं मिल रहा तो कम से कम
- 20:13आप में बुद्धिमानी तो है अपनी कला तो है निपुण तत्व है कोई आर्ट
- 20:24तकनीक तो है आप में। आज नहीं कल मिल जाएगा काम आप में
- 20:31गुणवत्ता होनी चाहिए तो गुणवत्ता को पैदा करना सर्वोत्तम लक्ष्य है
- 20:39आपका। और उसके लिए आप मेहनत कीजिए।
- 20:48सरकारों को बाध्य कीजिए के आपके लिए शैक्षणिक सेंटर बनाये उच्चतम
- 21:00इससे विकास के और विकास कागजों में नहीं होता विकास धरती पे होता
- 21:09है धरा पे जो दिखे विकास कागजों में होता है जी जो कागजों पे।
- 21:22कल्पनाओं में स्वप्नों में विकास का दावा दिखाते हैं।
- 21:28आपको ये ज्यादा देर चलेंगे नहीं। इनकी अवधि कम होती है।
- 21:35फसली कीड़े बहुत कम आयु रखते हैं। और नस्ली कीड़े बहुत ही लंबी आयु
- 21:45रखते हैं फसली और नस्ली में यही फर्क है।
- 21:50नस्ल नस्ली होती फसल तो कुछ दिनों की मेहमान होती है तो बात कीजिए
- 22:00इनको। अगर ये बाध्य किए से मानते नहीं
- 22:05तो इनको बदल दीजिये। प्रयोग करने में कोई हर्ज नहीं।
- 22:15कौन जाने इसके भीतर क्या कपैसिटी। हम जानते नहीं थे ये बौने कद का
- 22:24लाल बहादुर शास्त्री पाकिस्तान के छक्के छुड़ा देगा।
- 22:29अयूब खान कहता कि हम करेंगे, चाय पीएंगे।
- 22:42बॉर्डरलाइन लंच करेंगे अमृतसर जालंधर में और डिन्नर करेंगे हम
- 22:52डेल्ही में। जिंडा हमारे असलम का पाकिस्तान का
- 22:59आपके लाल किले पे पर आएगा साझ तलक, फिर शराब पीता था यह यहाँ का
- 23:08हो अयुब खान हो शराब पी के बोलते थे।
- 23:15और फिर कुछ का कुछ कह जाते थे। क्योंकि दिमाग तो कंट्रोल में
- 23:19रहता है, वो नशा आरजी होता है, जिसमें आपका दिमाग आपके कंट्रोल
- 23:31से बाहर हो जाए, आपको पता नहीं है आप क्या बोल रहे हो?
- 23:37उस मधुवन का नशा भी है जो आपको जगाये रखता है, मदहोश भी देता है,
- 23:45फिर दोनों काम करता है इसलिए उसका नाम रखा मदहोश मद भी है, नशा भी
- 23:51है और होश भी है, अवेयरनेस भी है और रस भी है।
- 23:57मर्द का हुआ उल्टा वह नाटिका दिखा प्राइम मिनिस्टर हमने भी सोचा था
- 24:09जब जवाहर लाल की भर्ती हुई मुझे याद है मैं जा रहा था सड़क के
- 24:16ऊपर। दोपहर की वेला में यह घोषणा हुई।
- 24:19रेडियो में बड़े दुख के साथ यह सूचना दी जाती है कि हमारे
- 24:26हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया
- 24:32है। जाती जाती सुन रहा था।
- 24:37थोड़ी ऊंची आवाज में उसने लगा रखा था रेडियो हमने सोचा अब इसके बाद
- 24:48कौन ठीक चला रहा था? कोई अराजकता नहीं थी।
- 24:58ऐसी छोटी मोटी अराजकता तो चलती रही।
- 25:01घर में 100 बर्तन पड़े हो, कहीं न कहीं कोई दो कड़क जाते हैं, ये
- 25:06कोई विशेष बात है। तो कितने बड़े मुल्क में छोटी
- 25:14मोटी घटनाएं होनी सहे हुए लाल बहादुर शास्त्री सर्वसमति से चुने
- 25:23गए तो जिन्होंने चुना आखिर वो अकलमंद तो होंगे।
- 25:31हमने जिनको चुना, उन्होंने जीसको चुना, वह अकलमंद तो होगा जीसको जो
- 25:39चुना गया नाटक का, लेकिन उसने धूल सटा दी वो कहते कि हम करेंगे
- 25:49डिन्नर दिल्ली में। और ये पहुँच गए लाहौर में सच में
- 25:58पहुँच गए, लाहौर में तो मुश्किल खड़ी हुई।
- 26:03रशिया में ताशकंद समझौता हुआ। मेरे देखने की बात है ये लेकिन
- 26:09षड़यंत्र का शिकार हो गए। और सुबह अगले दिन मुझे जहाँ तक
- 26:17याद है शायद 11 जनवरी थी या 10 जनवरी थी 1966 इतना सा याद है
- 26:26मुझे हल्का। यह सूचना आई।
- 26:32ये लालबहादुर शास्त्री रात को दिल के दौरे पड़ने से निधन हो गया।
- 26:44अब 64 और 66 सिर्फ 18 महीने में। दूसरा प्राइम मिनिस्टर गया मुल्क
- 26:56शॉप में था, अब क्या हुआ च तुम नहीं जाती रहती, किसी की जान से
- 27:08कुछ नहीं होता। इशू की सृष्टि में कभी किसी चीज़
- 27:12की कमी नहीं। इससे पहले के विदा हो जाए वो पहले
- 27:20इंतजाम करके रखता है की इसके बाद कौन वो जानता है की आप कहेंगे
- 27:25इसके पास कौन? वो पहले से इंतजाम कर देता है।
- 27:29अपनी सृष्टि की व्यवस्था उसने पहले से बना रखी है।
- 27:33ये संत जानते हैं और संत ही कहने का अधिकार रखते हैं।
- 27:41संत बेबाकी से बोलेंगे। की ऐसा मैंने देखा और ऐसा होता है
- 27:57हम दो रस्ते हैं, एक पुरातन, एक नूतन पुरातन, वही हमारे सनातन।
- 28:07दो शरीर नहीं मानते दो आत्माओं का बंधन होता है और आत्मा का भी बंधक
- 28:13ही नहीं, इसलिए हमारी शाती को हमने आत्मा का बंधन पा जो बंधती
- 28:21नहीं उसे एक। बारिक सूत्र से बांध लिया जाता
- 28:26है। यह होगा समर्पण से एक दूसरे के
- 28:30प्रति समर्पण। अगर समर्पण है तो फिर अरेंज मैरिज
- 28:35की कोई आवश्यकता नहीं, प्रत्येक प्राणी की अलौकिकता को।
- 28:45दिव्यता को और अद्वितीयता को हमें स्वीकारना होगा, सब बराबर एक
- 28:56ढांचे में न तो परमात्मा बनाये और न ही समाज उन्हें बनाये।
- 29:03अपने ढंग से जियो बस समाज नाम की प्रथा को समाप्त कर दो।
- 29:11कानून कानून काफी है, कानून की बालना तो सबको करनी ही होगी।
- 29:19और कुछ परमात्मा के कानून है, वो तो पालना करवा ही देगा।
- 29:24टेड़े मेढे चलोगे ग्रैविटेशन फोर्स ऑफ ग्रैविटेशन से अलग थलग
- 29:30चलोगे फटके जाओगे सिर मो। फड़ा बैठोगे।
- 29:39वह वार नहीं करता, वह तो सीधा पटक देता है तो परमात्मा का आवश्यक
- 29:45कानून तो वह मनवा लेगा लेकिन जो तुम्हारे संविधान के कानून हैं,
- 29:51वो तुम्हें मानने पड़ेंगे। वो तुम्हारे के लिए बंधन में।
- 29:57तो परमात्मा के कानूनों को समझो। अब यह बात समझ नहीं योग्य आप
- 30:05परमात्मा के कानूनों को समझो और उनका उल्लंघन मत करो।
- 30:12जैसे पुण्य का फल सुख मिलता है। पाप का फल दुख मिलता है या
- 30:18परमात्मा करके इसको समझो समझो और जैसा तुम चाहते हो दुख चाहते हो
- 30:25तो पाप कर लो, सुख चाहते हो तो पुण्य कर लो, फिर परमात्मा के
- 30:33कानूनों के नियमों को समझो। और संविधान के नियमों को मानवृत
- 30:40नियमों को मानो पढ़ो और मानव उसमें प्रतिबद्ध स्र्वो ये दो
- 30:50ढंके हैं। समाज के किसी प्रकार के नियम को
- 30:55मानने की कोई आवश्यकता नहीं। बिल्कुल जीरो को दो समाज को कोई
- 31:06जीरो के आगे टिप्पी लगा के वैन, वैन वैन नहीं करना है।
- 31:11बस जीरो कर दो समाज है नहीं, पड़ोसी क्या करता है?
- 31:16तुम उसका ख्याल मत करो, सामने वाला क्या करता है मत, ख्याल करो,
- 31:22अपना कर्तव्य गर्म करो और मस्त रोको।
- 31:26समाज बनाने की कोई आवश्यकता नहीं, समाज बना दिए।
- 31:30समाज उस वक्त आवश्यकता थी जबकि शेर बघेरे पशु हिंसक जानवर हमारे
- 31:39पे हमला करते थे। आज हम बड़े बड़े सुरक्षित हैं।
- 31:44समाजों की आवश्यकता खत्म हो गयी। आज शहरों में कहाँ समाज, शहरों
- 31:53में पड़ोसी का पता नहीं और बड़े मुल्कों में कुछ भी पता नहीं।
- 32:01अब अमेरिका में मेरे कुछ मित्र भी रहते हैं, खुशी भी रहते हैं।
- 32:06मेरे भाई बहन भी रहते हैं, बच्चे भी वहाँ रहते हैं।
- 32:11अब बताते हैं, हमें पता नहीं बोर हो जाते हैं हम न दाईं पता, न
- 32:17बाएं पता, न सामने पता, न नाम पता न उनकी भाषा पता न कैसे बोलते हैं
- 32:23ये भी नहीं पता बड़े बोर होते हैं।
- 32:37समाज को बिल्कुल मत मानो ये पहला आपको मैंने सिद्धांत बना दिया।
- 32:42आज से ही समाज को शून्य कर दो। और मैं इस बात को आज से मुद्दत तो
- 32:56पहले समझ गया था। मैं शादी के बाद शायद अपने ससुराल
- 33:06में दो या तीन बार गया होगा या दो चार बार और गया होगा बस कितना।
- 33:17मस्त रहो उनको जरूरत वो यहाँ आ जाए हमें जरूरत हम वहाँ चले जाएं
- 33:27और आज व्यवस्था ऐसी हो गई कि हम यहाँ से वीडियो कॉल कर सकते हैं।
- 33:33और बिलकुल आमने सामने बात हो गई जैसे प्रत्यक्ष दर्शन हो गए।
- 33:37अब आज आप जब चाहे सुन सकते हो, आज फासले मिट गए और वक्त ही न रहा
- 33:44क्या हमें तो मुद्दतें हो गई आपको देखे हुए आज विज्ञान की तकनीकों
- 33:51ने? और इंस्ट्रूमेंट्स ने सारे फासले
- 33:55बहुत मात्रा में कम कर दी तो समाज की सभी मान्यताओं को तोड़ो मत
- 34:06तोड़ने योग्य नहीं है ये मानो मत बस।
- 34:12नहीं मानोगे तो आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
- 34:14तोड़ोगे तो आपकी शक्ति रहेंगी। ये दो चीजों में इतना फर्क है अब
- 34:22व्यवस्था क्या बनी बाबा मुझे कोई मेरा शिष्य या मित्र समझो।
- 34:35बता रहा था। जया किशोरी के बाद कहती की मैं
- 34:43किसी से ऐसे नहीं कहती मुझसे सर्दी कराओ, लेकिन इस स्थल पर
- 34:52ज्यादा समयदार मानता हूँ मैं उसे। और चाहे कितनी बुद्धिहीनता की
- 34:58बातें करती हो, लेकिन इन बातों में मैं उससे थोड़ा सा समझदार माँ
- 35:06क्योंकि मैं नहीं पूछती। मुझे पता नहीं ये ऑथेंटिक वर्शन
- 35:10मैंने सुनी है कि जया कहती कि मैंने।
- 35:19मैं किसी पुरुष से ये नहीं पूछती की तुम मुझसे शादी करो नहीं, मैं
- 35:25सिर्फ ये पूछती हूँ कि क्या तुम मेरे बच्चे के बाप बनोगे?
- 35:31बड़ा सुन्दर प्रश्न था, ये बड़ा सुन्दर बात था ये।
- 35:36बस मैं वो ही बात बोलना चाहता हूँ।
- 35:42स्त्री पुरुष जीस घर में जन्मे। कानून अधिकार तो उसका है उसी घर
- 35:56में रहे। और जैसे अपना जीवन यापन करने के
- 36:05लिए अपनी मेहनत, अपनी पढ़ाई सभी अपनी अलग अलग करते है और अपनी
- 36:11नौकरी सब अलग करते है। ऐसे ही जो ब्रह्मचर्य न साध सके
- 36:19उनके लिए। व्यवस्था है वो क्या करें?
- 36:28जी बिलकुल ऐसा जो हमारी प्राचीनता संस्कृति में होता था।
- 36:36प्रथिशक इक्षांकु वंश के उसके कोई वचन?
- 36:44फिर क्या किया गया? उस वक्त बड़ा ओपेन था।
- 36:48ये समझदार समाज था। आज तो बड़ा नैरो माइंडेड समाज है
- 36:58आज का। धीरे धीरे ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट
- 37:03के फैसले आते रहे तो कुछ ब्रॉड पॉइंटर हो जाएगा।
- 37:09तो शीतल कहने लगा कि मैं आपको बताओ किस किस पर चाहती हूँ?
- 37:20आखिर में उनमें फैसला हुआ कि हम अंगरा ऋषि का स्वर्ग लेंगे।
- 37:29अंगरा ऋषि को ठीक अंगरा ऋषि से उससे संतानी उत्पन्न हुई।
- 37:39कहा जाता है कि सो संतान उत्पन्न हुई लेकिन मैं इसका साक्षी नहीं
- 37:45हूँ। ये सिर्फ लिखा है और मैंने आपको
- 37:49पढ़ के बताया है। प्रतींसर की वारया?
- 38:00प्रतीक्षा की धर्मपति उनका नाम प्रतीक्षा था, प्रतीक्षा वह अंगना
- 38:08ऋषि के द्वारा गृहवती हुई एक बात को ध्यान में रख लेना।
- 38:13समाज की कोई भी व्यवस्था 100% सही नहीं होती।
- 38:19उसमें कोई ना कोई खामी तो होगी ही, लेकिन ऐसे चलाना पड़ता है
- 38:24क्या किया जाए? व्यवस्था में कमियां होती हैं
- 38:30सदा, लेकिन कमियां और ज्यादा कमियां ये हो सकती हैं।
- 38:39तो क्या किया जाए? एक परिवार में एक लड़की, एक लड़के
- 38:44हैं। जन्म लीजा तो प्रथम योग्यता में
- 38:49ने क्या बताई। क्या आप अपनी भीतर की कला को
- 38:56मूर्त रूप दो? आप किस तरफ जाओगे और धनोपार्जन का
- 39:03साधन जुटाओ। सबसे पहली व्यवस्था आँखों के सारी
- 39:06उम्र का सवाल है अभी उम्र आपकी हुई भी क्या है?
- 39:13पूरा जीवन बाकी। यह जीवन का जैसे जैसे विज्ञान
- 39:21विकसित होगा, जीवन प्रणाली के वर्ष बढ़ते जाएंगे।
- 39:32जैसे कोई वक्त था जब 3540 वर्ष की एवरेज एज होती थी।
- 39:37लेकिन आज हिंदुस्तान में मेरे ख्याल में 6465 के करीब है।
- 39:46उम्र एवरेज उड़िया बढ़ती जाएगी तो बाकी का जन्म जीवन आपने गुजारना
- 39:58है। और सुखद जीव में गुजारना है तो
- 40:04क्या किया जाए? व्यवस्था को ठीक करना होगा।
- 40:07व्यवस्था को अपने दिमाग पर बंधन की तरह नहीं रखना, जो आज तक आपने
- 40:14सहा को गलत सहा। कोई वक्त था जब व्यवस्थाएँ बंद
- 40:19नहीं होती। वही मैंने बताया एक स्वंकु वंश तब
- 40:25व्यवस्थाएँ ऐसी सुंदर थी कि घर की समस्याओं को संबंधित व्यक्ति बैठ
- 40:33के सर्व करते थे, बिना किसी हिचक और शर्म के।
- 40:38पर उसका इलाज भी था। समाज के कोई प्रतिबंध नहीं थे।
- 40:44आज तो हो हल्ला मचता है लेकिन ये हो हल्ला मचाने वाला समाज कितना
- 40:51ही बोलता रहे। समाज की कोई समाज को खत्म कर दो,
- 40:55शून्य कर दो। जब तक आपका समाज जीर्ण नहीं होता,
- 40:59आज समाज की कोई आवश्यकता नहीं। समाज एक बोझ है, व्यर्थ का बोझ
- 41:04है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। इसको हटा 200% व्यक्ति रखो सिर्फ
- 41:14व्यर्थ। स्त्री, पुरुष, थर्ड जेंडर सब
- 41:28अपनी अपनी व्यवस्थाएँ बना ले। उन व्यवस्था में जीवन जी।
- 41:34अब मुख्य सवाल है कि जीवन तो बन गया, पांव पे सिंट भी हो गया,
- 41:43धनपार्जन भी करने लगे? हमारा ठीक से ही गुजर बसर होता है
- 41:49सब कुछ हो गया रहने को गर्व है। खाने को भोजन भी है, सब है, आराम
- 41:59भी है, सब चीजें भी हैं जो हमें चाहें अब जीवन कैसे गुजरें?
- 42:07अब आगे जरूरत है जीवन शास्त्री की।
- 42:10अब जीवन साथी के मैं आपको दो ढंग बता देता हूँ एक सनातन पुरातन, एक
- 42:17नूतन नवीनतम पुरातन तो ओके अक्सर प्रेम से चलेगा पुरातन।
- 42:27जिसमें प्रेम है और उतना प्रेम गहरा है, भरा हुआ है।
- 42:31हो तो गृहस्थ जीवन को बा मज़ा, लोई और कबीर की तरह नानक की तरह
- 42:38गुजारने के लेकिन प्रेम नहीं तो अरेंज मैरिज।
- 42:46देखिये, अरेंज मैरिज को आप ढोते हो अरेंज मैरिज को ढोते हो आप?
- 42:57इसलिए मैं पक्ष लेता हूँ प्रेम विवाह विवाह सिर्फ नाम का है।
- 43:06बात तो प्रेम की है। दोनों ने आपस में एक छत तले रहने
- 43:11का फैसला कर लिया। जीवन मज़े से गुजारेंगे 7 दिन है
- 43:19आपके पास कला है, आपके पास निपुणता है, आपके पास अब जीवन को
- 43:24जीना है। जीवन को जीने की मुख्य व्यवस्था
- 43:27है विवाह विवाह बंधन ना रहे विवाह एक समाज की योजना बन जाए सामंजस्य
- 43:37सामंजस्य आपने कैसे करना? अपने साथी के साथ क्रूरतापूर्ण
- 43:42नहीं चलेगा वो नहीं चलेगा। आपने हाथ सुधर लिया, उसने चिमटा
- 43:48फेंक दिया। यह कुछ नहीं चलेगा, बड़ी शांति से
- 43:53आनंद से घर चलाना होगा। अब बता रही बच्चों की।
- 44:02यह आपकी स्वतंत्रता पे निर्भर करता है।
- 44:08जैसे कोई स्त्री जया जैसी स्त्री कह सकती है कि मुझे बच्चा चाहिए,
- 44:14मुझे पति नहीं चाहिए, बिल्कुल हो सकता है इस शर्त पे स्वर भी ले
- 44:19सकती है जैसे यंगर ऋषि से। अरे तीसर की पत्नी प्रति छाया ने
- 44:26स्वम ले लिया, बस उसका कोई लगा देगा नहीं।
- 44:34और आज तो स्वम के बैंक भी खुले ले सकते हो आप?
- 44:40बिल्कुल अपनी मनपसंद का बच्चा सुन सकते हो?
- 44:42आप आँखें नीली हों, काली हों, जुलफें अंग्रेजों की हों या काली
- 44:50घटाएं, उसकी जैसी हों या आप चुन सकते हो, रंग कैसा हो, गोरा हो,
- 44:56श्यामल हो चुन सकते हो। आज बैंक बन गए, वह नाम गुप्त रखे
- 45:05जा यू कैन डोनेट किया और वहाँ से आप ले सकते हो?
- 45:17नहीं, यह कोई कार्तिक बात नहीं है अमेरिका में चलता है ऐसा और
- 45:23अमेरिका में जो आज चला सोशल बाद यहाँ बात में है, वह बड़ा अडवांस
- 45:29है यहाँ तो हम। बस इस गुमान से बाहर नहीं आती।
- 45:38क्या विश्व गुरु इस गुमान से बाहर आई तो कुछ और बात सोचें।
- 45:46कुछ विकास की बात सोचें। विकास एक कागज की नाव नहीं है, वो
- 45:53तो डूब जाएगी। एकागी जी फूल भी नहीं है उसमें
- 45:58कुछ और नहीं आएगा। धरती पर जो विकास हो वो विकास
- 46:04होता है जैसे मार्कस कहता है मैं नहीं मानता परमात्मा जो मुझे रोटी
- 46:13नहीं देता बस वैसा ही। विकास धरा पे आएगा धरती पर
- 46:21तुम्हें दिखना चाहिए, विकास है तुम किसी को मूर्ख न बना सको ऐसा
- 46:27तुम इतना प्रबुद्ध हो जाओ की किसी भी नाम से तुम्हें कोई ठग न सके।
- 46:35उसके लिए क्या जरूरत है? शिक्षा, शिक्षा, अनुवाद तो मैं
- 46:40प्रथम अगर किसी की कदर करता हूँ तो उनकी जो तंग आकर जिन्होंने ये
- 46:49बात कही के आप सिर्फ पढ़ाई करो। ये लोग आपके पांव में से रखेंगे
- 46:57जो आज आपको तुछे समझते हैं। बाबा साहब अंबेडकर उनका नाम अमर
- 47:06हो गया, वैसा काम करके दलितों को। जीवन दे गए और दलितों को उनका
- 47:16सम्मान ही नहीं करना चाहिए। नारा नहीं लगाना चाहिए, जयकारा
- 47:22नहीं लगाना चाहिए वरना उनकी बातों को अपनाना चाहिए।
- 47:28तुम पढ़ो पढ़ो और सिर्फ पढ़ो। आज संविधान है इस संविधान को अगर
- 47:40तोड़ने की चेष्टा करता है तो याद रखना अध्ययन हमने भी किया है।
- 47:54हमने भी रेशों बाँटी है जिनको ये तथाकथित हिंदू कहते हैं, पर कहते
- 48:05हैं हम 80% या 80% मात्र 18% हिंदू है हमारे।
- 48:12और देखिये बड़े मज़े की बात है। 19% मुसलमान 19 से ज्यादा 20 है
- 48:1819.72 के करीब हैं 18% के करीब हिंदू हैं शुद्ध हिंदू?
- 48:31लेकिन इन्होंने क्या किया? बुद्धों को हिंदु मार दिया, जैनों
- 48:34को हिंदु मार दिया, सिक्कों को हिंदु मार दिया, दलितों को हिंदु
- 48:40मार दिया, एससी एसटी को हिंदु मार दिया, अति पिछड़ों को मार दिया।
- 48:49और कितनी ही जातियों को जिनको इन्होंने सताया स्कन टैक्स लिए और
- 48:58उन पर इन्होंने लगामे कसिम और उनको तड़पाया आज भी इनको पानी
- 49:05नहीं पीने देते मंदिरों में? ये परंपरा चली आ रही है कुछ
- 49:11अंधभक्त, आज जीव कुछ बीज रह गए बिखरे हुए ये तले खड़काने के योग
- 49:19हैं इन्हें तले खड़काने में अभी कुछ दिन पहले मेरे पास प्रश्न आया
- 49:24था मैंने? तो क्या है तुम घबराओ मत।
- 49:31इनकी संख्या 18% है। हमने भी अपने सोर्सेज से पता किया
- 49:44जो ज्यादा एक्यूरेट है। जिनकी ऐक्युरेसी को नकारा नहीं जा
- 49:51सकता और इतने एक्यूरेट हैं जितना कंप्यूटर आपका जितना एक्यूरेट
- 50:00आपको ग्रुप जवाब देता है, जितना एक्यूरेट आपको।
- 50:07इचैट जीपी टी डेटाश 18% है हिंदू आज भी मुसलमानों की संख्या ज्यादा
- 50:14है, 19.72 के करीब है आज, लेकिन मर्दम समारी होगी तो फिर इन्हें
- 50:22पता चलेगा तभी तो ये। जिनको सताया उनको भी हिंदू मानते
- 50:28हैं जिनके ऊपर पछाव किया उनको भी हिंदू मानते हैं।
- 50:31जिनके गले काटे उनको भी हिंदू मानते हैं जिनको जंजीरों से बाता
- 50:35उनको भी हिंदू मानते हैं, जिनको पांव की जूती बनाया उनको भी हिंदू
- 50:39मानते हैं। जिन स्त्रियों को इन्होंने तड़
- 50:43पाया, उनको भी हिंदू मानते हैं। आज हिंदू इनके हिसाब से बहुत हैं
- 50:50तो 80% बनते हैं। लेकिन देखो मैं आपको आँखें खोल
- 50:54देता हूँ, इनसे तो ज्यादा मुसलमान हैं।
- 50:5918% हैं हिंदू। और करीब 20% हैं।
- 51:06मुसलमान आज भी मुसलमान जा रहे हैं।
- 51:12अगर इतिहास में तुम जाओगे या सत्य को कंगालने लगोगे, मैं सत्य को
- 51:18खंगाल के बहुत गहरे प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर कहता हूँ।
- 51:24ये जो आज मुसलमान यहाँ है, यह वास्तव में कभी मुसलमान नहीं थे।
- 51:30यह कभी हिंदू थे औरंगजेब ने या तात्कालिक हुकुमरानों ने इनको?
- 51:42जो धर्म तब्दील हुआ आखिर किसी ने तो किया होगा तुम इतने रो पीट रहे
- 51:47हो भाई धर्म तब्दील करवा दिया रोज़ इतने जीने इकठ्ठा करता था
- 51:52रोज़ इतने लोगों के धर्म तब्दील कराता वो आखिर हैं कहाँ?
- 51:55वो यही है यही है वो? और उनका लगाव इतना था इस माटी से
- 52:05के धर्म के आधार पर नहीं, ये द्वी राष्ट्र का सिद्धांत धर्म के आधार
- 52:09पर नहीं हुआ। ये इस आधार पर हुआ कि जिसने
- 52:15पाकिस्तान में जाना शुद्ध कटर है। जो कटर हैं वो पाकिस्तान में जाएं
- 52:22और जो कोई कटर नहीं रखते, सोच जो सेक्युलरवाद में विश्वास करते
- 52:29हैं, वो इधर रहे ये था असली क्योंकि ये आज़ादी?
- 52:37हिंदू राष्ट्रवादियों ने ही दिलाई ये सेक्युलरवादियों ने दिलाई
- 52:43इसलिए सेक्युलरिज़्म ही इसकी नींव है और सेक्युलरिज़्म ही हमारे
- 52:49संविधान का प्रमुख आधार है। और देखिए सेक्युलरिज़्म को एक बार
- 53:00छोड़ो, अगर तुम कहते हो कि हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे तो थोड़ा
- 53:07सा मर्दम तुम्हारी घर पे देख पता चलता है, शायद हम वर्ग में हैं।
- 53:18आप क्यों कहते हो बच्चे बढ़ाओ, बच्चे बढ़ाओ, बच्चे बढ़ाओ ये भीतर
- 53:22से जानते हैं हम कितने हैं तो ये किसी तरह आपको गुमराह करके आपकी
- 53:30संख्या को बढ़ाना चाहती हैं। हिंदुओं की।
- 53:34लेकिन वास्तव में क्या है? वास्तव में ये डरते हैं कि हमारी
- 53:38संख्या अब भी गम है सही यहाँ की वाशनिक मूल वाशनिक।
- 53:51हिंदू नहीं हिंदू बादशाह हिंदू यहाँ पर हैं स्नेक प्राणी ये धरा
- 54:02उनकी है लेकिन उनकी ही नहीं है, ज्यादा है दलितों की ज्यादा है सी
- 54:10एसटी की। ज्यादा है, बाकी जो आपकी जाति,
- 54:19राजपूत, वगेरा और अन्य अन्य अन्य इनको हिन्दुओं से मत छोड़िए, जब
- 54:28आप गणना करोगे तो आप हैरान रह जाओगे।
- 54:31कोई बड़ी बात नहीं, 18 से कम भी हो जाना, लेकिन हमारा अपना
- 54:38विश्लेषण, हमारे अपना सीक्रेट जो हमने अज्ञात तत्वों से पूछा वो
- 54:47हमें 18% बताते हैं। 19.72% मुस्लिममान बताते हैं,
- 54:54शुद्ध और बाकी जैन हैं, बुद्ध हैं, ईसाई हैं, परसी हैं, यहूदी
- 55:05हैं, सिख हैं। जैन हैं, बुद्ध हैं ये तो तुम
- 55:13बिल्कुल ही हिंदू में गिणते हो जो की हिंदू हैं नहीं, सारी सरेआम
- 55:19घोषणा करते हैं सेख कहते हैं सिख है कर लोकोण हम नहीं इंदौर और तुम
- 55:25फिर भी उनको। बात बड़े मज़े की है और हैरानी की
- 55:32तुम फिरते कहाँ हो? ये जो बाबा लोग ये अमूलता का
- 55:40प्रचार कर रही हैं, सिर्फ हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे।
- 55:43कैसे बनाओगे भाई, संविधान को छोड़ो?
- 55:47मृदुम सुमारी के हिसाब से भी तुम हिंदू राष्ट्र नहीं बना सकते।
- 55:53जब पता चला हिंदुस्तान को कि ये हिंदू राष्ट्र बनाने की फिराक में
- 55:57चले, आपकी कितनी रह गई सीटें? देखिए कितने थे आपने बढ़ना था अब
- 56:04घटे। यह क्या किस बात का प्रतीक है?
- 56:10और अभी तो आपको और आपके सहायक तत्वों को दूसरे वोट मिल गए तो आप
- 56:18240 पे ठहरे। ये जो राहुल गाँधी कहते हैं ये
- 56:30बहुत गहरे से ले के आए हैं। यथार्थ चीजों को यह पागल नहीं है।
- 56:39हाँ, इसको तुम पप्पू कह सकते हो। हाँ, ये तो हम कुछ भी कह सकते
- 56:45हैं। कहने को तो कोई कुछ भी कहे और तुम
- 56:50अपने आप को बहुत समझदार कह सकते हो।
- 56:53देखिये अपनी घरवाली की तो सभी बेगम कहते नहीं कहते बेगम बेगम
- 57:00अपनी घरवारी को सभी बेगम कहते हैं।
- 57:03सही बेगम कौन होती है? जीसको लोक बेगम है तो तुम हिंदू
- 57:09हैं, हिंदू हैं, 8020 का झगड़ा है, ये है वो है न तो मूर्ख बनो,
- 57:15न बनाओ सत्य पे उतरो तुम कराओ मर्दम सुमारी मुझे पता है तुम
- 57:22क्यों डरते हो तुम डरते हो जब आंकड़ा सामने आएगा और तुम्हें
- 57:30भागने को स्थान नहीं मिलेगा ये जो डर से वह से घृणा से, नफरत से।
- 57:39ये जो तुम कुछ कर रहे हो ये सही ईमानदारी का मेथैड नहीं है।
- 57:48ऐसा भी कभी कोई राज़ होता है? तुम अपनी भी नींदें खराब कर रहे
- 57:52हो और हिंदुस्तान के सारों की नींदें खराब कर रहे हो।
- 57:57एक जंजाल गुण रहे हो। गलत मानें तो ये व्यवस्था बदली
- 58:07होगी। क्या होगी?
- 58:10पहले पढ़ाई करो, उसके बाद आती है विवाह विवाह के ऊपर मैं ठहर गया
- 58:14था। अब विवाह के ऊपर मैं थोड़ा सा
- 58:17प्रसिद्ध था। ये दो हैं पुरातन और नूतन।
- 58:20जिसने प्रेम से शादी करनी है वो बंधन में बंध जाए उसको बंधन कुछ
- 58:25नहीं कहता कभी रोलोई की तरह शादियां तो हमने भी की और ज़रा भी
- 58:33एक 1 दिन भी कोई जगह। तो क्या है?
- 58:38हमारी में क्या है, समझ है आप ही समझो कबीर में क्या है?
- 58:46नानक में क्या है? नानक पाँचों उदासियाँ कर देते हैं
- 58:51महीनों, महीनों की बरसों वर्षों। घर से बाहर रहते हैं, कोई उलाना
- 58:59नहीं, कोई किसी को ऐतराज नहीं, कुछ मिल गया है, उसे बांटना है।
- 59:11बुध घर ही छोड़ देते हैं। कोई ऐतराज नहीं।
- 59:16यशोधरा संगीत चल देती है, उनका बेटा राहुल भी संगीत चल देता है
- 59:23तो विवाह की जो प्रथा है उसको आप इधर उधर पूछते हो।
- 59:29ये करें वो करें, ये करें वो करें।
- 59:32देखिए मुझे जया किशोरी का मसला, वह कितनी भी मूर्ख है या समझदार
- 59:37है। मुझे यह मसला ठीक लगा।
- 59:42मैं इससे पहले ही प्रभावित था। मैं अंगरा ऋषि और प्रतिसर की
- 59:51पत्नी प्रति छाया। इनके भीतर सम्राट से जो बच्चे
- 59:56पैदा हुए बस ऐसा समाज चल सकता है। तुम्हें तुम्हें पालने की कपैसिटी
- 1:00:05है तो आप उतने बच्चे पैदा। स्त्री बड़े मज़े से गुजर कर ले।
- 1:00:13तुम्हे नहीं पता है और पुरुष अपने आप को स्वतंत्र समझे पुरुष का मन
- 1:00:23भटकता है, भटकता ही स्त्री काफी है।
- 1:00:26तुम स्वतंत्र हो, तुम जहाँ जाओ लेकिन जो सनातन के हिसाब से बंध
- 1:00:33गया, वह नहीं टूटेगा, वह नहीं टूटेगा।
- 1:00:37कितनी ही शिक्षा कर वह बंध गए, पक्के दागे।
- 1:00:43जो सनातन में नहीं आ सकते, प्रेम में नहीं आ सकते।
- 1:00:46सनातन प्रेम होता है सर बाकी होती है आपकी प्रथाएँ जो प्रथाओं में
- 1:00:52बंध बंधना चाहती हैं, वो प्रथाओं में ना बंधे और प्रथाओं का त्याग
- 1:00:57कर दें। वो उन्नमुक्त जीवन जिएं उन्नमुक्त
- 1:01:04बच्चे पैदा करना कोई आवश्यक नहीं साथी का साथ होना कोई आवश्यक
- 1:01:09नहीं, बस आप अपना काम करो, ऑफिस जाओ, कोई दुकान चलाती हो।
- 1:01:21कोई आपका कारोबार की फैक्टरी है। अपना धनोपार्जन करने का तरीका
- 1:01:27आपके पास है। शादी के मसले में यू कैन बी अलोन।
- 1:01:35तुम अकेले रह सकते हो, पुरुष हो या स्त्री हो कोई किसी पे निर्भर
- 1:01:39हो। कोई किसी को मालिकाना हक ना
- 1:01:43सौंपे। पत्नी कहती मैं मालिक पति कहता
- 1:01:48मैं मालिक इसी झगड़े में सारा स्वाहा जीवन तुम जियोगे कब मैं
- 1:01:55तुम्हें जीना सीखा रहा हूँ। यहाँ तक बात ठीक थी, पढ़े लिखे
- 1:02:02तुम अपने पांव पे स्टैंड हो गए, आज लड़कियां नहीं मिल रही पता है
- 1:02:06तुम्हें मुझसे आज ही मेरा पुत्र पूछ रहा था पापा ये क्या हो गया
- 1:02:11है? ये क्या हो गया, मैंने कहा पुत्र।
- 1:02:17ये स्त्रियों में जागृति आती है। लड़कियों में उन्हें बच्चा चाहिए
- 1:02:24होगा तो वो किसी भी पुरुष से ले लेंगे।
- 1:02:27आज समाज की सभी प्रथाएं स्त्री ने तोड़ दी।
- 1:02:33वो जो तुम्हारे सुहागरात वगैरह का मसला था वो स्त्री ने तोड़ दिया।
- 1:02:38दफा हो तुम्हारी स्वार्थ हमने नहीं माना हम तो जहाँ चाहेंगे
- 1:02:43मनाए, जहाँ चाहेंगे बच्चा लेंगे उससे जहाँ चाहेंगे बच्चा करेंगे,
- 1:02:50नहीं करेंगे आखिर तो बच्चा पैदा करने की।
- 1:02:58जो कैपेसिटी है वो स्त्री में है, पुरुष सिर्फ मौज करता है उसे करने
- 1:03:08दो स्त्री अपने पांव पे स्टैंड आपात को थीम से समझिए।
- 1:03:14वक्त काफी हो गया है। वीडियो भी काफी लंबी करीब हो चुकी
- 1:03:17है। धानोपार्जन का ढांगा बनाओ और किसी
- 1:03:25के साथ ऐसा रिश्ता मत रखो जो कि आपको बंधन में बांध ले।
- 1:03:33लिव इन में रहना वगैरह वगैरह वगैरह ये सब फालतू की बातें जिसके
- 1:03:41साथ आपका मन मिलता है, जैसे रसीसर और प्रतीक्षा ने चुना, बोलो किसका
- 1:03:49स्पर्म चाहिए? तो उन्होंने आप की राय बना ली
- 1:03:52केंद्र? तो अँग्रेस्स से परम ले आयी जाके
- 1:03:57बरेया सात मेरे तीसर गए, कोई अविश्वास न था, अकेले भी जा सकते
- 1:04:04थे ऐसा समाज चाहिए जो किसी के ऊपर बंधन न हो आज तुम एक दूसरे के ऊपर
- 1:04:10ऐसे बंधन हो गए हो जैसे मनो मनो। पहाड़ों का बोझ हो, यह प्रथा
- 1:04:16समाप्त करनी हो, बिल्कुल ऐसा रहो जैसे यह तुम्हारे कौन सा धर्म है
- 1:04:26तुम्हारे जी? शिव बाबा जी ब्रह्माकुमार जी कोई
- 1:04:37बोझ नहीं है ऐसा जीवन जियो एकांत बस ये कमीन में जीती हैं, तुम घर
- 1:04:47में जियो। बच्चा पैदा करना है, बच्चा पैदा
- 1:04:51कर लो जिसका स्पर्म चाहिए चुन लो उससे स्पर्म ले लो रह गया आदमी
- 1:04:59आदमी मौज मस्ती करे, मौज मस्ती करे नहीं मौज मस्ती करनी तो फिर
- 1:05:07इस वीर को। पर उठने का साधन करे, इस तरह भी
- 1:05:11कर सकती है नहीं बच्चा पैदा करना तो इसको उर्द गांव नहीं मनाए।
- 1:05:18इस राज्य को या वीर को हमारी काम पावर को कैसे हमने सहस्रार में
- 1:05:23पहुंचाना इसका प्रयास करें। वैसे अंतिम लक्ष्य तो यही भी है।
- 1:05:29लेकिन जीवन जीने का डंग? संसारिक रूप से मैं आपको समझा रहा
- 1:05:33हूँ। कट ऑल दी बैंड्स सामाजिक बंधन
- 1:05:41सबको शुरू करता हूँ। किसी के लिए मत जियो, ये समझो बात
- 1:05:50को अपने लिए जियो। पहले फूल कलिवन के स्वार्थी होता
- 1:05:59है, सुगंध इकट्ठी करता है और फिर। जब सुगंध से भर जाता है तो
- 1:06:06पंखुड़ियां खोल लेता है फिर बांटता है।
- 1:06:10बिल्कुल इस तरह जियो फिर तुम बांट सकोगे आज तो तुम बांट नहीं सकते
- 1:06:15समाज में कितने लोग बांट सकते हैं?
- 1:06:17नहीं बांट सकते दुखों का भरा हुआ समाज तुमने परंपराएं ही ऐसी बना
- 1:06:22लीं? बड़ी विकृत पर प्राय करती थी तो
- 1:06:26जो स्त्री कहती है कि मैं सिर्फ बच्चा लेने के लिए अपना पुरुष
- 1:06:33स्वयं चुनुंगी तो वह बच्चा पैदा करने की क्षमता भी रखती है और वह
- 1:06:40बच्चा पालने की क्षमता भी रखती है।
- 1:06:43उसे पुरूष की कोई आवश्यकता नहीं और फिर अगर उसे मौज करनी होगी यह
- 1:06:49ध्यान रखना बच्चा पैदा करने के बाद तुमने अपनी ऊर्जा तो सारी
- 1:06:53उम्र बनती रहेंगी तो उस ऊर्जा को तुमने उर्द काम ही करना है।
- 1:06:59या कि तुमने और मज़े लेने हैं वो भी तुम्हारी अपनी इच्छा फिर तुम
- 1:07:05किसी भी पुरुष से सम्बंध बना सकते हो ऐसा समाज हो जाएगा।
- 1:07:11हाँ, हाँ तुम्हारी पार्टी ये पशु तानू नहीं ये पशु।
- 1:07:21पशु में समझनी होती, लेकिन मैं समझ के साथ समाज को विदा कर रहा
- 1:07:27हूँ। समाज के साथ समाज को विदा कर रहा
- 1:07:32हूँ क्योंकि पशु अपना जीवन नहीं मनाता, पांव पे सेंठ नहीं होता।
- 1:07:39पशु पराधीन है इसलिए उसे पास्ट कहते हैं, वो बंधन में बंधा हुआ
- 1:07:43है। क्यों?
- 1:07:44शारीरिक जरूरतों के लिए भी बंधन में है।
- 1:07:47तुम शारीरिक जरूरतों के लिए बंधन में नहीं बंधे हो।
- 1:07:50तुम अपने स्वतंत्र हो, अपना खुद अर्न करते हो और कमाते खाते हो,
- 1:07:54यही पशुता में नहीं है? मैं रिश्तों की बात कर रहा हूँ,
- 1:08:05रिश्ते बंधन हीन होनी चाहिए विवाह फिर शायद तुम्हें पता नहीं हमारे
- 1:08:16हिंदुस्तान में एक जगह है जहाँ पर।
- 1:08:19बाहर के लोग हमारे हिंदुस्तानी लोगों का वीर लेने के लिए गोरियां
- 1:08:26किशोरियां आती है। अगर कोई पूछना चाहे तो मैं अलग से
- 1:08:32उसे अलग से बता दूंगी और स्थान हमारे हिंदुस्तान में है।
- 1:08:40वहाँ का वीरे का चपेस्टी माना हुआ है और बहुत दूर दूर की किशोरियां
- 1:08:48और गोरियां और बाहर के लोग उनसे वीरे लेकर जाते हैं।
- 1:08:54एक महीना भर यहाँ रुकते हैं। जब तक को गर्भवती नहीं होती,
- 1:08:58लड़की तब तक यहाँ रहती है। आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए ये
- 1:09:03है समाज बाहर के मूर्खों ने बना लिया हम उलझे ही रह गए कहाँ उलझे
- 1:09:11रह गए, कहाँ उलझे रह गए? हम चक्करों में उलझे रहे।
- 1:09:19हम मुड़ों के नेतृत्व में उलझे रह गए।
- 1:09:22ये तोड़ना होगा। इन मुड़ों के नेतृत्व से पार जाना
- 1:09:28होगा, थोड़ा साहस बटोरना होगा। गाँधी ने साहस बटोरा के नहीं
- 1:09:32बटोरा? सावरकर ने साहस खोया नहीं मान्यता
- 1:09:40किसको मिली मरे दोनों एक को मार दिया गया।
- 1:09:45दूसरे खुद अपनी इच्छा से अपने प्रयास के स्वरूप मरे सावरकर।
- 1:09:51आखिर में खाना पीना छोड़ दिया वो तुम्हें नहीं पता।
- 1:09:55अप्रत्याशित कानून कुछ भी कहता है छोड़ो ये योजना सबर कर के सबर कर
- 1:10:06सद्र में बनी थी। आज इन बातों में कोई भरोसा नहीं
- 1:10:14क्योंकि जो प्रमाण नहीं मिले तो वहाँ जैसे कहते हैं कि वेल
- 1:10:26अशिंचित है। और जेल अपवाद है वैसे ही सबूतों
- 1:10:35के अभाव में बरी करना एसेंशियल अगर सबूत मिल गए होते तो सबर फिर
- 1:10:42भी जेल में होते जाते हैं। लोगों को सजा मिली दो तो टांग दिए
- 1:10:46गए। तो मैंने तुम्हें सारा सिस्टम
- 1:10:52बताया। आज उस क्षेत्र में मुख्य चीज़
- 1:10:54क्या थी लिबरेशन ऑफ माइंड लिबरेशन ऑफ माइंड लिबरेशन ऑफ माइंड से
- 1:11:05शुरू करोगे? तो लिबरेशन ऑफ साउंड तक पहुँचोगे
- 1:11:11मुख्य यहाँ से शुरू करना होगा तो उसे चाहे आप कवारा रहके गुजर बसर
- 1:11:20करो। एक तो पूरा धर्म चल गया, वो इसी
- 1:11:24कारण से चलो। ये ब्रह्माकुमारी?
- 1:11:29लेकिन इनको अपने वीरे को बचाना होगा जो वहाँ चल रहा है।
- 1:11:35ऐसा मुझे रिपोर्ट्स कुछ ठीक नहीं मिलता।
- 1:11:40इन पुत्रियां को चाहिए कि ये व्यवस्था को ठीक करें।
- 1:11:45मुझे किसी धर्म से कोई आपत्ति नहीं है।
- 1:11:49मैं उनकी सहायता करना चाहता हूँ कि एक रास्ता है इसको ऊपर उठाने
- 1:11:56का, पंप देख के सहस्रक में पहुंचाने का अगर तुमने व्यवस्था
- 1:12:00खोज ली, व्यवस्था सुन्दर है भला शक सुन्दर है।
- 1:12:06तो इसको थोड़ा सा और निखार दो। बस मैं इतना चाहता हूँ इन
- 1:12:13पुत्रियां से मैं इतना कहना चाहूंगा कि तुम इसे निखार दो और
- 1:12:18अपने उस काम ऊर्जा को सहस्त्र में ले जाने का प्रयास करो।
- 1:12:26बड़ा शुभ होगा। तुम लोक कल्याण कर सकोगी।
- 1:12:34सभी का मार्ग अपना अपना किसी ना किसी तल पे ठीक भी है और कहीं ना
- 1:12:40कहीं गलती भी खा गए हो। इसलिए पूर्ण रूप से शुद्धतम रूप
- 1:12:44उनका भरण है। आखिर में निष्कर्ष रूप में मैं
- 1:12:50तुम्हें कहूंगा समाज के बंधनों को बिल्कुल ही आज से अलविदा कह दो।
- 1:13:00जे। सपने में भी ना सोचना कि लोग क्या
- 1:13:05कहेंगे? जे मूडता बहुत हो गई, बस हुआ और
- 1:13:15इन लोगों ने जिन्हें हम राजनीतिक कहते हैं।
- 1:13:19इन्होंने बहुत गदर मचा दिया कभी किसी नाम पे कभी किसी नाम पे कभी
- 1:13:24किसी नाम पे लेकिन हाथ पले ना तुम्हारे कुछ आया ना इनकी कुछ आया
- 1:13:29आज भी इनके हाथ में ठूठे पकड़े भिक्षा पात्र भिक्षामदेही क्या
- 1:13:36करते हैं? बहुत ही तो मांग रहे हैं मांगते
- 1:13:38हैं। आप फिर भी आज दानी हो, लेकिन
- 1:13:42ध्यान रखना, ये ज़रा सोच समझ के चुनना इनके चुनने पर आपकी लिबरेशन
- 1:13:53मायने रखती है। ये आधार है अगर इन्होंने कुछ गडबड
- 1:13:59कर दिया तो फिर ये कुछ गलत मूर्खों का टोला कुछ पता नहीं।
- 1:14:05कुछ गलत ऐसा कानून बनाती तो वह मुश्किल हो जाएगा।
- 1:14:13जहाँ तक हिंदू राष्ट्र की बात है। हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हो तो
- 1:14:19मैं तुम्हें तरकीब बता दूंगा, मेरे पास आ जाओ, भींग लगे ना
- 1:14:24पकड़ी रंगवी चौखा दे कुछ नहीं होगा, उत्पाद भी नहीं होगा, कोई
- 1:14:29मार काट भी नहीं होगी कोई कतलोग अर्थ भी नहीं होगी, हिंदू राष्ट्र
- 1:14:32भी बन जाए ना संविधान चेंज होगा। ना कुछ करना पड़ेगा।
- 1:14:38इतनी आपाधापी करने की आवश्यकता ही नहीं है, किंतु राष्ट्र मज़े से
- 1:14:43बन सकता है, लेकिन वो तुम्हारे हिसाब से नहीं बनेगा।
- 1:14:48तुम्हारे हिसाब से तो तुम 18% हो क्योंकि तुमने जो कह ढाए
- 1:14:53तुम्हारे। बुजुर्गों ने जो कह डाले वो भी
- 1:14:57ज्यादा अच्छे नहीं थे। वो आज तुम्हें वोट देंगे और दे
- 1:15:01रहे हैं बस ठीक है, किसी तरह से दे रहे हैं लेकिन वो जल्दी ही
- 1:15:07तुम्हें वोट देना बंद कर देंगे। जैसे ही संविधान की बात आएगी तो
- 1:15:14इनके जीरे भी रड़खड़ाएंगे थोड़ी सी संविधान की तुमने सीधी सीधी
- 1:15:20बात नहीं की तो तभी उन्होंने पटका के मारा और जैसे जीते हो वो हम भी
- 1:15:27जानते हैं। सारे जानते हैं, बस शक है सिर्फ।
- 1:15:31सामने नहीं आया, लेकिन शक है तो मैं आज आपसे यह विदा चाहता हूँ।
- 1:15:43मेरे ख्याल से आप सबको समझा गया होगा।
- 1:15:46गृहस्थ जीवन जो पहले से बंध चुकी हैं।
- 1:15:51देखिए अब तो अब गंदगी मत फहराए। अब इसको ऐसा ही जैसे है दिनों को
- 1:16:00धक्के दीजिए, सुखपूर्वक दुःखपूर्वक लेकिन जो नए हैं जो
- 1:16:06अभी बंधे नहीं हैं, जो कमिट नहीं हुए हैं वो इस बात को ध्यान में
- 1:16:10रखें। दे कैन लीव अलोन दे कैन लीव अलोन
- 1:16:16वो चाहे बच्चा पैदा करें, चाहे न करें, ये आपसी सहयोग भी हो सकता
- 1:16:23है। लड़का लड़की ये कर सकते हैं कि
- 1:16:26देखो तो मेरे लिए बच्चा पैदा कर दो, बच्चा मुझे दे देना।
- 1:16:31जब अच्छा तुम रख ले ये एक जैसे हम संधि करते हैं, वो संधि की तरफ भी
- 1:16:37हो सकता है, चिपकाहट जरूरी नहीं, दिमागों के ऊपर बोझ ना बनो किसी
- 1:16:42बात का किसी व्यवस्था को दिमाग पर बोझ ना बनने दो ये मूल आज का
- 1:16:47मैंने जो प्रवचन किया। इसका मूल आज जो कारण है, ढंग है,
- 1:16:53मोरल है। वो ये है कि किसी भी बात को
- 1:16:56व्यवस्था को तुम जीने के लिए आए हो, बोझ ढोने के लिए नहीं आई और
- 1:17:07बोझ ढोना कोई जीवन नहीं होता। निरबोज होके उन्हें मुख्य रूप से
- 1:17:13जीना ये मानवता है पशु भी निर्बोज होके जीते हैं तुमसे अच्छे हैं
- 1:17:20कहीं किसी के दिमाग पे भोजनी पेड़, पौधे, जानवर, छोटे जानवर,
- 1:17:25बड़े चौपाई जानवर उड़ने वाले। समुद्र में ही रहने वाले सभी
- 1:17:31प्रकार के सब निरबोज हैं। आदमी को छोड़ के आदमी क्यों ले
- 1:17:35गया? बहुत जल क्यों हो गया इस समाज की
- 1:17:38व्यवस्था के कारण इनको बदलो इनको बदलो नहीं हटा दो इनको बस तुम
- 1:17:46जीओ, अपनी मर्जी से जीओ। बच्चे वगैरह सब होते रहेंगे,
- 1:17:52जीसको चाहिए, वह बच्चे पैदा करवा ठीक जीसको प्रेम चाहिए हो जे तो
- 1:18:13प्रेम मिलन की चाह। शीश तलीधर कर्म राजा प्रजा जी ही
- 1:18:22रूचे शीश दे ले छ जीसको जरूरत है भाई आपको बच्चों की जरूरत है,
- 1:18:29आपने सीना बनानी है, ये करना है वो करना है तो उसके लिए भाई
- 1:18:34व्यवस्था कर दो। पक्ष पक्ष के वर्णन तुमने बहुत
- 1:18:40सीख लिया, लड़ाई झगड़ों में सड़ गए, जल गए मेरा कुछ नहीं तो इन
- 1:18:52व्यवस्था को इन चीजों को बंद करो। खौरी रूप से बंद करो, जियो और
- 1:18:58जीना सोचो सीखो, तुम जीने के लिए ही परमात्मा के इस सृष्टि में
- 1:19:03अवतरित हुए हो। आज के लिए मैं आपसे अब विदा
- 1:19:12चाहूंगा। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुराय अनाथ
- 1:19:32नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारिन
- 1:19:51जीनाथ नारायण वासुदेव। पितुमात स्वामी सखा हमार पितुमात
- 1:20:08स्वामी सखा हमार हिनाथ नारा। यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद
- 1:20:24हरे, मुरारी हिनाथ, नारायण वासुदेव।
- 1:20:45धन्यवाद।