Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Oct 25 - वात्सायन ने कामसूत्र कैसे लिखा? वात्सायन से लेकर Osho तक का सफर! ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?
Transcript
- 0:14बाबा जी प्रणब नरेश कुमार देशवाल शास्त्रों में लिखा सभी संत कहते
- 0:33हैं। परमात्मा जगत के कण कण में
- 0:41व्याप्त है। फिर विरोधी चीजों का दुष्प्रचार
- 0:54क्यों? इंकार क्यों?
- 0:56त्याग क्यों? स्त्री, पुरुष, परमात्मा ने जोड़े
- 1:10बनाए किसी कारण से बनाए उनके आपसी संबंधों को।
- 1:23विषय कहना या उनकी मज़ा मत करना, कुछ जजता नहीं मुझे भगवान राम की
- 1:41मर्यादा भी। कुछ उखड़ी उखड़ी सी लगती है ये
- 1:53परमात्मा जगत के कण कण में विद्यमान है तो फिर वह उसकी बनाई
- 2:02हुई किसी चीज़ को। गलत क्यों कहता है?
- 2:14किसी भी वस्तु का वो करना पाप कैसे हो सकता है?
- 2:36नरेश परमात्मा तो जहर में भी है, फिर उससे पीकर उंगेत परमात्मा अमर
- 3:01से बिलकुल विपरीत तो आप कहते हैं विपरीत लिंगी को भोगना?
- 3:09पाप क्यों है? क्योंकि उस समय भी परमात्मा है।
- 3:18पुरुष में परमात्मा, स्त्री और सभी चीजों के जोड़े बनाए और भगवान
- 3:30राम की मर्यादा को तुमने सिरे से नकार दिया।
- 3:34तुझ कहा? नरेश थोड़ा समझो परमात्मा सभी
- 3:55विपरीत चीजों में है, मलमूत्र में भी है, लेकिन उसका सेवन अब ये
- 4:03शब्द समझ लेना। उसका सेवन करना है या नहीं करना
- 4:11है इसके लिए हमें बुद्धिविधि है। परमात्मा ने परमात्मा तो गंदगी
- 4:22में भी है। और उससे गंदगी में सुवर बैठा रहता
- 4:27है क्या तुम भी वहाँ बैठ जाओ जा के?
- 4:35क्योंकि वराह तो अवतार घोषित किया है हमारे पंडिता ने।
- 4:47इन्हीं शब्दों के बलबूते पर देखा अनाचारी व्यक्ति गलत बातें सीखा
- 5:00दिया समाज को। अति सर्वत्र वर्गीय शरीर को
- 5:18पौष्टिकता प्रदान करने वाला घी अगर तुम बहुत मात्रा में पी जाओगे
- 5:29तो तुम्हें डायरिया। लॉस मोशन लगेगा, पेट खराब हो
- 5:34जाएगा, स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा। परमात्मा तो घी में भी है तो गंदे
- 5:47नाले में भी है, उसका पानी कौन पी लेते?
- 5:51डिस्टिल्ड कवि तो सब कुछ परमात्मा है शाबास, मिलम सर्वम, यतकेन्द्र
- 6:06जगत के आम जगत जगत भी परमात्मा और ब्रह्म भी परमात्मा।
- 6:18यह सभी शास्त्रों में लिखा लेकिन उसका सेवन कैसे करना है बस यही
- 6:27साझेदारी की बात है। आपको पता है?
- 6:36वात सायन, काम सूत्र जिसने वात सायन ने लिखा।
- 6:43आप पोस्टर तो बना लेते हो खजुराहो, खजुराहो के क्या?
- 6:52क्या तुम जानते हो के वात्र साए कामसूत्र लिखे वाला खुद वात्र
- 6:58साए? ब्रह्मचारी था, आजीवन कुंवारा
- 7:05नहीं था, वो ब्रह्मचारी था जी तुम जिसके नाम से नफरत करते हो,
- 7:16प्रचार तो उसी ने भी किया। लेकिन कहाँ पर वंशज है कई बार
- 7:27अपने कामों को सत्यापित करने के लिए व्यक्ति दुष्कर्मों को भी?
- 7:36तर्ककों से मान्यता दे दिया करता है।
- 7:41अपने चरित्र को सत्यापन करने हेतु मैं उसे बुद्ध होने से इंकार नहीं
- 7:53करता कभी नहीं किया, मैं जानता था मैं कौन हूँ मेरा शक।
- 8:05लेकिन आगे 1,00,000 किताबें पढ़ना है और उसे पता है ये किताबें
- 8:10विजाती यात्रा पे हैं। इट्स फॉरिन मटेरियल।
- 8:18और इसकी उल्टी करनी पड़ेगी क्योंकि यह डाइजेस्ट नहीं होगा।
- 8:22फौरन मटेरियल बजाती अद्रव्य हमारे शरीर में सोखा नहीं जाता।
- 8:31बाहर फेंक दिया जाता है मलमूत्र की तरह पसीने की तरह।
- 8:39तुम जैसे साहित्य कहते हो, मैं ऐसे ओशो की वोमिटिंग कहता हूँ
- 8:46इट्स ए वोमिटिंग जो फड़ा जो खाया जो सुना।
- 9:00उससे कोई क्रांति घटित नहीं हुई और तुम्हें और बात बता दूँ,
- 9:07उन्होंने खुद को तो जाना लेकिन जरूरी नहीं होता की पतंजलि के
- 9:14हिसाब से यम नियम अष्टांग योग के जरिये ही पहुंचा जाए।
- 9:19सीधा सीधा पहुंचा जा सकता है, लेकिन ये सीधा पहुंचना आम लोगों
- 9:28के लिए विष न बन जाए और वह विश्व बन गया।
- 9:38यह कोई गर्व की बात है कि 31 मुल्क उसको अपने देश में वीजा
- 9:47देने से मना करते किसी भी गुंडे को मना कर सकते हैं, ये गर्व की
- 9:56बात है। उनके तख्त हिला जाता था, लेकिन
- 10:05तख्त हिलाने वाली बातें न्याय संग थीम ठीक थीम या नहीं थी।
- 10:18इसी प्रकार आप हर चीज़ की इति करने लग जाओगे।
- 10:25एक्सेस ऑफ़ एवरीथिंग इस बैड तो मर्यादा का मतलब ही नहीं होता जो
- 10:35तुम्हें बांध लिया है। ध्यान से समझना बात को मर्यादा का
- 10:42मतलब जो तुम्हें मुक्त करता है एक इन्द्रिय परमात्मा ने तुम्हें दी,
- 10:54उसका कारण है मूत्र त्याग और अगर। संतान की उत्पत्ति भी चाहिए
- 11:04क्योंकि तुम बूढ़े हो जाओगे तो संतान उत्पत्ति के लिए समाज में
- 11:12जरूरत को देखो और समाज की जरूरतों को मद्देनज़र रखते हुए।
- 11:22पिक्चर पैदा होगा। कृष्ण वेला में आदमियों की कमी थी
- 11:37और एक सूत्र है कि बच्चा पैदा होगा, लड़का ही होगा।
- 11:41मैंने पहले बोला। बहुत से सूत्र हैं खोज लिए जाएंगे
- 11:46अभी खोज तो लिया गया है। सेपरेशन ऑफ एक्स एंड वाय बात साइन
- 11:54को आपने गलत कहा। आप बात साइन का कामसूत्र पढ़ने भी
- 12:01अच्छा नहीं समझ। क्यों?
- 12:06क्योंकि मर्यादा विहीन भोग कष्ट में लेके जाता है।
- 12:17इतना शानदार स्पन जीवित है। जी बचपन जिसके भीतर चेतना आप कभी
- 12:29वीरे को लबा रोटरी में अगर कोई व्यक्ति आए तो उसको माइक्रोस्कोप
- 12:36के नीचे देखना नहीं। में भी।
- 12:41वीरे में भी। आपको ऐसे ही जीव छोटे छोटे चलते
- 12:51हुए मिलेंगे। दही में भी लैपटॉप एसीलस।
- 13:03इसलिए दही को संसार का अमृत कहा गया।
- 13:08ऋषि मुनि के द्वारा ऋषि मुनि खोजित है।
- 13:15स्वयं की कोई खोज न कर सकने वाला ओशव ऋषि मुनियों की निंदा करने पर
- 13:21इतना अतुर है। जो ऋषि मने इनवेंटर थे, साइंटिस्ट
- 13:30थे, ये तो कोई बात न बनी कि एक व्यक्ति को उठा लिया जाए।
- 13:41और उन्हें सरकारी सांड कह के सभी को सरकारी सांड कह दिया।
- 13:50वह समाज था और समाज अपनी तरह के अलग अलग होते हैं, बदल जाते हैं।
- 13:58आज का समाज कल नहीं रहेगा। कल जो था वो आज नहीं वात शाइन ने
- 14:11लिखा है कि देखिए मैंने लिख तो किया अनुभवी व्यक्तियों से पूछ
- 14:25पूछ के लिखा मैं खुद नहीं जानता हम सेलिब्रेट पर्सन?
- 14:31मैं तो एक ब्रह्मचार्य हूँ, मुझे कुछ नहीं और आपको जानकर हैरानी
- 14:38होगी बादशाह ने लिखा, मैं तो योनिकी संरचना के बारे में नहीं।
- 14:47अब इस व्यक्ति से काम सूत्र की अपेक्षा रखना जायज है।
- 14:55नहीं। अगर ओशो कहते हैं तो मेरा प्रचार
- 15:04मेरे शिष्य करेंगे। यह आपको बात ठीक लगती है।
- 15:12यह कोई कांग्रेस है या भारतीय जनता पार्टी?
- 15:14काम मिनिस्ट्री पार्टी ये पार्टीज़ हैं यह तो एक अनुभव है
- 15:26तो क्या ये ठीक लगता है, उपयुक्त लगता है?
- 15:30कि मैं कह दूँ कि मेरे सभी शिष्य अथराइज्ड हैं, मेरा प्रचार करें,
- 15:39मेरे जाने के बाद बिल्कुल गलत है, मैं नहीं कहूंगा क्यों नहीं
- 15:45कहूंगा, मैं कहूंगा। तो ये कहूंगा जो पहुँच गया, वो
- 15:52बोले और जो पहुँच गया वह बोलेंगे नहीं, उसे बरवा लिया जाएगा, उसका
- 16:01रस उसे नाचने पे विवश करेगा। खुशी की तरंगें तुम्हें झूमने पर
- 16:10विवश कर देती हैं। जब तुम प्रसन्न चित होते हो तो
- 16:17महस्य होंठ मुस्कुराने लगते हैं, चेहरे पे गर्व आ जाता है।
- 16:25तुम जानबूझकर यह कोई सर्कस नहीं करता है।
- 16:34भीतर की आई हुई खुशी चेहरे पर गुलाल या मलाल ला देती।
- 16:52है। उनका ख्याल आ गया कि चेहरे पे
- 17:05होने के मला। लागया वैसा उनका ख्याल आ गया।
- 17:27भीतर की खुशी या भीतर का गम। चेहर को वही मूर्त दे देता है तो
- 17:37भीतर का आनंद तुम्हें नाचने पे, गाने पे या बतलाने पे।
- 17:45दूसरा भी इसी आनंद को चखे मजबूर नहीं करेगा।
- 17:49क्या? फिर क्या यह कहना जायज होगा कि
- 17:54मुझे जो सुनता है वह उथरा ही कह प्रचार करे?
- 18:01यह तो प्रचार का मंडलीय हो गई। शिष्य तो की तरह होता है,
- 18:12रिकॉर्डर की तरह होता है। उसका अपना अनुभव कुछ नहीं है।
- 18:20ये सभी बातें तो एआईबी बता देगा। जीतने संत हुए उन सब की बातों को
- 18:28बता देगा। ए आई ओशो की टेप खूब हू शब्द वा
- 18:40शब्द तुम्हें आज बता देंगे ओशो ने क्या बोला तो क्या?
- 18:49बूढ़ी प्रगाडर उपलब्ध हो गया है। परमात्मा को, आनंद को, चेतना को।
- 19:00क्या वो कैसेट उपलब्ध हो गई है? परमात्मा ओके बोलती तो बिल्कुल
- 19:05वैसे ही है मैं कल। और उसको एक शिष्य को सुन रहा था
- 19:09नया बना दिया उस रजन। मैंने कहा भाई इसमें शर्तपुर
- 19:19सुकून है, कहते है शर्त। उसमें सखा ठीक कोई भी बन जाओ मैं
- 19:35क्या और कोई भी उसके पीछे लग जाओ अब मैं इस में भी क्या?
- 19:46लेकिन ये रिकॉर्डर है और रिकॉर्ड इतना सुस्पष्ट बोला करता है जितना
- 19:56उसको बोल का है। शायद कई बार होशों से भी ज्यादा
- 20:01बढ़िया सुस्पष्ट संकेत देंगे। कुछ आज तो फ़ोन आगे हैं, जैसा तुम
- 20:10बोलोगे उससे ज्यादा बढ़िया ढंग से प्रस्तुतिकरण करेंगे।
- 20:19तुम अगर थोड़े से। सुर ताल से बाहर जा रही है तो यह
- 20:30है माइक खुद से उसे ठीक करके सुर ताल में ला देगा ऐसे आविष्कार हो।
- 20:44आज ए आई बोल रहा है हमसे ज्यादा सुन्दर बोल रहा है, लेकिन सब है
- 20:56एक चीज़ नहीं है जो होनी चाहिए रस नहीं।
- 21:03और इसी रस की जरूरत है इसी रस के पीछे मानव लगा हुआ है इतना प्रचार
- 21:15करना की आवश्यकता। मर्यादित होना सिखाया।
- 21:24अगर तो मात्र इसीलिए सिखाया अपने वंश के बढ़ोत्तरी के लिए आप इसका
- 21:38सेवन करो, आपको इसके स्वाद का पता चल जायेगा।
- 21:46जैसे हम सब्जी खाते हैं। जीवा के टेस्ट हमें बता सकते हैं
- 21:51कि सब्जी में नमक, मिर्च सभी मसाले ठीक हैं, इसी तरह इनका
- 22:02उपयोग करो, सुख है, सुनें। सुख होना भी चाहिए।
- 22:10इसमें परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि में वह खुद छिपा है।
- 22:20हर कोने कोने में हर जरे जरे में सर्बियत किन चीज़?
- 22:31और वह सखा बोल रहे थे तुम ऐसा भविष्य का सपना पूरा कर रहे ये
- 22:43लोग बिना पहुंचे उस स्थल पर। सावधान मुझे सुनने वाला व्यक्ति
- 22:55ये तमन्ना न करें, मैं चला जाऊं तो मेरी आवाज का सहारा ले लेना।
- 23:06लेकिन दुनिया को गुमराह मत करना दुनिया उसी दिन गुमराह हो जाएगी।
- 23:18जसंत तुम बिना जाने उस तल की बातें करना शुरू करते।
- 23:26बात तो मेरी कसेट पे करेगा यूट्यूब पर बोलेंगे, मेरे प्रवचन
- 23:31भी बिल्कुल वही बताएंगे जो मैं आज बता रहा हूँ।
- 23:42इतना बड़ा साहित्य कैसे रच गए? सारे साहित्य को कंगाल लो आप खुद
- 23:55के इन्वेंशन बता दो। क्या उसके खुद रह जाते हैं बार
- 24:02बार अपनी। साधनाओं को पलट दें।
- 24:11पहले निष्क्रिय साधने चलाई, देखा कि फेल हो रही है, फिर सक्रिय
- 24:17साधने चलाई। ऊंचे ऊंचे सांस लो, ज़ोर से सांस
- 24:24लो। सारी शक्ति को चुकता कर दो, दूसरा
- 24:28तल आ जाएगा। यानी प्रयोग कर रहे हैं।
- 24:33हमारे राजनीतिज्ञों की तरह जैसे राजनीतिज्ञ आज हिंदुस्तान में
- 24:37क्या सारे संसार में प्रयोग कर रहे हैं फिर से?
- 24:45राजनीतिज्ञों के लिए अपने अपने देश अपरों की शालाएं हो गई।
- 24:51अगर धूल में लट्ठ लग गया तो वो 12 पक्षी श्रद्धा के लिए घोषित कर
- 24:56दे। अगर धूल में लट्ठ न लगा तो फिर
- 24:59लट्ठ अपने बच जायेगा और क्या? दोनों में से एक काम तो हो ही
- 25:05जाएगा। तुमने पूछा पुत्र मर्यादा मैं
- 25:17जानता हूँ कि ओशो ने राम को सम्मान नहीं दिया और यह भी ध्यान
- 25:25देने योग्य बात है। कि राम कोषों जैसे व्यक्ति की
- 25:30सम्मान के जरूरत भी नहीं समझते थे।
- 25:38क्या कोषों के सम्मान देने से ही कोई ऊंचा होगा?
- 25:44हम बोलेंगे तो ही कोई व्यक्ति ऊँचा होगा।
- 25:48हम घराएंगे तो ही कोई व्यक्ति गिरेगा नहीं, हम बोलेंगे तो आप
- 25:58सिर्फ सोचना आप सिर्फ कंपॅरिज़न करना के हमारे बोलने में।
- 26:06कितना दम जरूरत से ज्यादा भोजन कर लिया जाए तो उसके उल्टी ही तो है
- 26:17और मैंने कल ही के प्रवेशों में बताया कि शब्द विजातीय द्रव है।
- 26:24फॉर मटेरियल पार्क। फिस्कल बैठी रह यह वोमिट होगा यह
- 26:34तुम्हारा काम करो, यह तुम्हारा शस्त्र शस्त्रज्ञ हमारे शहर में
- 26:42एक आदमी हुआ करता था। उसे कोई बात बताया जाता, राज़ की
- 26:49यही चुगली नहीं था। इसी को राज़ कह देते हैं तो उसके
- 26:54हजम नहीं आती। वो भागा भागा मेरे पास आता कहते
- 27:01भैया आपको। एक बात बताऊँ आगे मत बताना मैंने
- 27:05कहा देख बाती तू मेरे को मत बता मैं फकर बोलता हूँ न जानूं किसको
- 27:15क्या कह दूँ तो आगे बताऊँगा न बताऊँगा।
- 27:22इसका मुझे कुछ नहीं पता, तुम मुझे ही मत बताओ, मैंने तुमसे कहा कि
- 27:28तुम मुझे बताओ। उसकी कमजोरी, उसकी निंदा जोग रही,
- 27:31वो क्या गलत करता है? मैंने पूछा नहीं तो खुद ही बात
- 27:36किया है। हाँ मुझे पता है तेरे गैस ज्यादा
- 27:39बन गई है। और पेट हल्का करने आए।
- 27:43अरे पेट तो तेरा हल्का होगा बैंक तू मेरे पे लगा रहा है क्या दे मत
- 27:48बताना चुगल खोर तू है बंधन में मुझे डालने का प्रयास करता है।
- 28:01मैं तो बंधन में बंधने वाला हूँ ना फकर आदमी का क्या पता किसको
- 28:08क्या कहे बैठे बहुत से लोगों से नाराज हो जाते हैं बाबा आपने मेरा
- 28:12नाम बोल दिया, मैंने कहा तुमने प्रश्न कब पूछा?
- 28:19मैंने तुमसे कहा था कि यह प्रश्न पूछो कोई ठीक सा पूछ लिया हो तो
- 28:26जिसमें तुम्हारी पिटाई ना होते, अब जैसा प्रश्न पूछ लिया, नाम
- 28:32बोला गया बोला गया या नाम लिखते ही ना फिर भी नहीं बोलते।
- 28:42राम जैसे मर्यादित व्यक्ति को अगर ओशो भावना दे हंसने वाली बात है।
- 29:01एक व्यक्ति जो खुद मानसिक संतुलन जिसका बिगड़ा हुआ है अपने जीवन के
- 29:11अंतिम वक्त में आके ओशो मांस। मानसिक रूप से गड़बड़ा कहते हैं।
- 29:27डायस है फॉर्म के वेरियम 9090 गोलियां 90 छोड़ो, 40 खाते होंगे।
- 29:35अरे एक गोली होती है, ये त्रिचुलिजेर् है।
- 29:43थोड़ा विश्राम देने के लिए कि तुम सोचना बंद कर दो, नींद आ जाए और
- 29:49नीत एक ऐसा अमृत है जो तुमको पुनः फैश कर देता है।
- 29:57तो इसीलिए बनी थी। कोई 9090 गोलियां खाने के लिए
- 30:02थोड़ा बनी थी, अगर कोई खा रहा है तो उसका अर्थ क्या है?
- 30:10मन ने ही तो शांत होना है और मन ही अगर नाइट्रस ऑक्साइड से हंसेगा
- 30:17खुश होगा। लाफिंग बुद्धा भी रोचन करेगा
- 30:21नाइट्रस ऑक्साइड को सूंघ कर तो क्या खाक हुआ वो गांजा और भांग का
- 30:30इस्तेमाल करके तो कोई भी हंस सकता है या कोई नई बात की क्या?
- 30:38ओह, शो का जीवन आखिरी वक्त में बता गया, लेकिन मैं ये प्रवचन मैं
- 30:48तुम्हें क्या सीखाना चाहता हूँ मैं तुम्हें यही सीखाना चाहता हूँ
- 30:56कि तुम मुझे सुनकर मेरे टेपर का ऑर्डर मत बन जाना।
- 31:00मेरे टेप रिकॉर्डर ऑलरेडी यूट्यूब पर उपलब्ध होंगे या चार स्थानों
- 31:04पे और मेरे शिष्यगण में रिकॉर्डिंग करके अलग से रखे हैं
- 31:15जब तक तुम उस रस का स्वाद न चखो। तब तक न तो बोला जा सकता है, वह
- 31:27तो पीने के बाद भी नहीं बोला जा सकता।
- 31:29उसका स्वाद ही कुछ ऐसा है जो गूंगा गुड़ खाई के कहे कौन मक्ख
- 31:34स्वाद? और न ही पहुंचने से पहले बोलना
- 31:40चाहिए क्योंकि बोला जा नहीं सकता होगा, जो पिया नहीं फिर सिर्फ
- 31:48शब्दों में बोलोगे, दूसरों की बात जैसे वात साइन कह गया।
- 31:54सभी पोस्टर बढ़ा गया, काम सूत्र गए।
- 32:00और ये बात आपको किसी ने नहीं बताई कि वह खुद ब्रह्मचारी था, सारी
- 32:05उम्र, बात, साइन सारी उम्र, ब्रह्मचारी रहा और बात साइन।
- 32:14एक मज़े की बात बताऊँ, जिंदगी में एक बार भी संभव नहीं किया।
- 32:21तुम तर्क दे सकते हो। पश्चिम के लोग तर्क दे सकते हैं।
- 32:29हाइट कैन बी पॉसिबल? तो तुम्हारे लिए नहीं होगा पॉसिबल
- 32:38ये मज़ा वही जानें जिसने ब्रह्मचर्य को साध लिया।
- 32:46ये भी एक साधना है और जैसा मज़ा ही स्वयं है।
- 32:53तुम सिर्फ दूर से दूर से परमात्मा को देखने का मज़ा चखते हो, तो
- 33:00क्या होगा जब तुम उसको अंतर्निहित कर लोगे, उसको अंग अंग का भाग बना
- 33:07लोगे? वो तुम्हारे रक्त में संचार करेगा
- 33:13वो तुम्हारे हड्डियों और तुम्हारे टिश्यूज़ में न्यूरोन में वह
- 33:18संचार करेगा और श्रद्धा के लिए रिज़र्व हो जायेगा तो कैसी खुशी
- 33:23का माहौल होगा? जिसके कारण आप एक वर्गीय दूध से
- 33:27उस परमात्मा को देख लेते हो जिसे हम आनंद कहते हैं।
- 33:31उसको अगर तुम जज़ब कर लोगे या अबसॉर्ब कर लोगे तो वह तुम्हारे
- 33:38शरीर का अभिन्न अंग बन जाएगा। तो कैसा मज़ा होगा ज़रा सोच?
- 33:44और फिर मुझसे ये पूछो क्यों बैठू मैं यहाँ मुझे कोई मुझे कोई
- 33:54रजनीशपुरम बनाने की जल्दबाजी क्यों नहीं?
- 34:02क्यों मैं कोई संस्था खड़ी नहीं करता क्यों मैं कोई धर्म खड़ा
- 34:05नहीं करता? क्या इतना ही काफी नहीं कि मैंने
- 34:10प्रचुर मात्रा में फिर लिया है? क्या इतना ही काफी नहीं कि 24
- 34:17घंटों में मैं आनंद में रहता हूँ? क्या है?
- 34:25ये कम है और मेरी आवाज़ को सुन क्या तुम्हे आनंद नहीं आता?
- 34:35क्या तुम उसके भीतर सरबवर नहीं होते?
- 34:41ऐसी वाणी पूरी है मन का आपका कोय, औरण को शीतल करे आप हूँ शीतल होए
- 34:51मैं खुद भी आनंदित हूँ और मेरी आवाज की खनखनाहट।
- 34:59तुम्हें भी मंत्रा मौज कर जाती है जब तक न पहुँचो उस सतल पर जाकर
- 35:19अच्छी तरह से पी लो और तुम्हें एक और बात बता दू वहाँ जाकर पीने के
- 35:25बाद? तुम्हारा मन नहीं करेगा बोलने का?
- 35:3285 की उस घटना के बाद मैं 35 वर्ष तक उसको पीता रहा।
- 35:42उस अमृत का भान करता रहा। घरवालों ने समझा पागल हो गया है
- 35:56बात ठीक भी है जो तुम्हारे संसार जैसा नहीं रहा, जो सुपरले संसार
- 36:06जैसा हो गया। वह तुम्हारी नजरों में पाग रह ही
- 36:10तो लगेगा, लेकिन मैंने कुछ पे लिया था तो जहर में परमात्मा तो
- 36:23है, परमात्मा सब जगह है। फिर तुमने पूछा क्या काम के भीतर
- 36:31क्या? स्त्री के भीतर परमात्मा ने,
- 36:33पुरुष के भीतर परमात्मा ने तो उसको भोंगा क्यों नजर इंकार करता
- 36:38है? इंकार कौन करता है तुम्हें पता है
- 36:43चाणक्य? चंद्र गुप्त को थोड़ा थोड़ा थोड़ा
- 36:51थोड़ा जहर देते थे, रोज़ थोड़ा सा जहर महामंत्री थे।
- 37:00देख रेख की सारी जिम्मेदारी उनकी बॉडीगार्ड भी थे।
- 37:04चिकित्सक भी थे। सलाहकार भी थे, मंत्री भी थे।
- 37:12उनके खाने में थोड़ा थोड़ा हल्का हल्का जहर रोज़ मिला और क्या हुआ,
- 37:26जहर मिलाया क्यों? थोड़ा थोड़ा जहर मिलाने से उसके
- 37:32भीतर इम्युनिटी बढ़ती चली गई। जैसे लुई पाक्षक ने खोज के रैबीज
- 37:41या कोई भी बैक्टीरिया अगर बहुत सिथल करके।
- 37:46उसमें कोई बल न रहे। बल हीन करके तुम्हारे भीतर
- 37:49इंजेक्ट कर दिया जाए तो जब उसका वास्तविक कीटाणु आएगा, बैक्टीरिया
- 37:55आएगा तो हमारे शरीर के बैक्टीरिया जो उसको आसानी से मार देंगे।
- 38:01व्हाइट ब्लड कॉर्प्स आसानी से लड़ लेंगे और उसे मार देंगे।
- 38:10तो जब जहर आएगा कोई उस जमाने में, यही तो कुछ हुआ करता था।
- 38:16मिसाइल तो थी नहीं के ऊपर फेंक दे किसी को अगर कोई राजा इसको खाना
- 38:28जहर मिला के दे दे तो उसकी बॉडी इतनी ज्यादा।
- 38:36इम्युनिटी से भर जाए कि उस जहर का प्रतिकार कर सके।
- 38:42चाणक्य इसलिए थोड़ा थोड़ा जहर दे रहे है थोड़ा थोड़ा जहर 1 दिन
- 38:51क्या हुआ? चन्द्रगुप्त के साथ भोजन कर रही
- 39:03थी रानी घुसने का प्रिय आज मेरा मन है तो मैं तुम्हारे साथ भोजन।
- 39:11बहुत भक्त भी था तुम भी राज़ कामों में खोये रहते हो बा
- 39:19मुश्किल हम प्रेम करते हैं आज मेरा मन है की हम इकट्ठा बैठ के
- 39:25भोजन करें, चंद्रगुप्त से का बिलकुल करो।
- 39:33चन्द्रगुप्त बोले बिलकुल प्रिय, आज हम दोनों बैठ के दोपहर का भोजन
- 39:40करते हैं। दोनों ने भोजन किया।
- 39:47चन्द्रगुप्त खुद भी नहीं जानते थे।
- 39:50कि मेरे खाने में थोड़ा सा जहर मिला देते हैं कि इम्युनिटी बढ़
- 39:54जाएगी, फिर जब असली जहर को राजा खिलाएगा तो पैसा नहीं पड़ेगा।
- 40:00उन दिनों में मारने का यही तरीका हुआ करता है तो कुटिल रूप से
- 40:04मारने का या किसी को पता भी न चले।
- 40:12तू चन्द्रगुप्त रोज़ ही खाया कर आज उसकी धर्मपत्नी दूर धरा भाभी
- 40:22सामने बैठ गई दोनों ने खाया खाना। और जहर थोड़ा थोड़ा बढ़ाया करते
- 40:29थे। रोज़ ज्यादा मात्रा में जहर हो
- 40:32गया था तो चंद्रगुप्त रोज़ के आदि थे, लेकिन दुर्दना को वह विषय सहन
- 40:41नहीं हुआ और वह गर्भवती थे और गर्भ में था बिंदु सार।
- 40:47अशोक का बाप सम्राट अशोक का बाप पिता उस जहर के खाने से तबियत
- 40:58बिगड़ने लगे। चंद्र बोस को कुछ नहीं हुआ।
- 41:05लेकिन यह बात सुबन्धु को पता था। सुबन्धु भी चाणक्य के साथ जैसे
- 41:13मंत्री होते हैं। हमारे ऐसे उसकी कैबिनेट में थे
- 41:17सबसे बड़ा मंत्री चाणक्य था मंत्री व मालिकी ठाकरे।
- 41:24राजा के हर बॉडी कॉर्ड से लेके खाना पीना जाना आना, सब संदी
- 41:30वगैरह सब काम करना, चाणक्य के हाथ में था हस्ताक्षर करना, किसी राजा
- 41:36के साथ सन्धि करना। जब आक्रमण किया हमारे देश में,
- 41:55सिकंदर ने तो उसके महामंत्री से समझौता किया चाणक्य।
- 42:10क्योंकि उसने कहा कि ये राज्य बड़ा संबद्ध है और बड़ा शक्तिमान
- 42:14है। इससे संधि करना बहुत अच्छा रहेगा।
- 42:21तो उसके महामंत्री ने समझौता किया चाणक्य के साथ।
- 42:26और चाणक्य को कहने लगा कि मेरी एक बात राजा से कह देना कि मान ले एक
- 42:35यूनानी राजकुमारी थी तो सिकंदर के सेनापति थे सैलूकस।
- 42:46शैलूकस की बेटी थी, एक उसका नाम था, बताया गया युनानी सुंदरी थी।
- 42:58चन्द्रगुप्त से ये कहा गया कि आपको इस लड़की से शादी करना होगा।
- 43:03अगर संधि करना है। सुंदर लड़की थी, गुणों से युक्त
- 43:10थी। सैलुकस ने कहा कि इससे बढ़िया,
- 43:13राजकुमार और राजा और बलशाली और इतना विशाल साम्राज्य तो सिकंदर
- 43:23की आड़ में सैलुकस। अपनी बेटी की शादी चंद्रगुप्त के
- 43:27साथ करने में सफल हो गया, सन्धि भी हो गई और सैलुकस की पुत्री का
- 43:35विवाह भी हो गया। चंद्रगुप्त के साथ दूसरी
- 43:41धर्मपत्नी थी उनके सैलुकस की। बेटे उनका नाम आज तक नहीं बताएगा।
- 43:46अलग अलग नाम बताये जाते हैं, लेकिन ये तुक्के हैं सर लेकिन दूर
- 43:55धरा से बेमिसाल उसके गर्भ में से वो जहर उसने भी खा लिया।
- 44:07चंद्रगुप्त तो आती थी, वो तो जहर को बचाया जाते थे, इसी मतलब से
- 44:13उसको थोड़ा थोड़ा जहर देना शुरू किया था, लेकिन आज उल्टा पड़ गया
- 44:17काम, ये तो अचेत हो गए और बेमिसाल।
- 44:27बस जन्म लेने से करीब कुछ दिन ही बाकी थे।
- 44:35नाइन्थ मंथ शुरू हो गया था, डॉक्टर्स को बुलाया गया, यह तो
- 44:42नहीं बच सकेगी। और ये जहर हो सकता है इस बच्चे के
- 44:49भीतर फैल जाए। सर्जरी की गई, वो बच्चा निकाला
- 44:57गया और दूरधरा की मृत्यु हो गई। सुवन्धु इस बात को जानता था और
- 45:05संबन्धु को अच्छी तरह से पता था कि यह चणक ने किस कारण से किया
- 45:10है। राजा के जीवन के लिए किया है।
- 45:16कहीं कोई दुश्मनी पाले हुए राजा इसको जहर न दे दे तो पचा जाएगा।
- 45:25लेकिन दुर्धरा के मरने के बाद जब बिंबिसार बड़ा हुआ बिंबिसार ने
- 45:31सत्ता संभाली तो सुमंतू थोड़ा सा बूढ़ा हो गया था और चाणक्य भी था
- 45:37चाणक्य सब का चहिता था। क्योंकि राजा का चरित्र और सुबंधु
- 45:44जैसे लोग भीतर भीतर उसे घृणा करते थे, जलते थे कि इसकी इतनी बात
- 45:52सुनी जाती है। बात तो कुछ नहीं है।
- 45:56काला ब्राह्मण। इतनी लंबी चोटियाँ तीन फुट की
- 46:01चीटियाँ थी उसकी तीन फुट कोई सुंदर भी नहीं था नए नक्ष भी नहीं
- 46:12थे चाणक का पुत्र चाणक्य और कुटिल उनका गोध था इसलिए उनको कौटिल्य
- 46:18कहा गया। विष्णुगुप्त उनका नाम था सही
- 46:28चाणक्य का सही नाम विष्णुगुप्त यह एग्जाम देने वाले नोट कर लिया करो
- 46:34थोड़े से कुछ यह बात। वैसे तो आपके सर लोग बता देते हैं
- 46:43विष्णुगुप्त इनका नाम था कौटिल्य था, इनका गोद था कौटिल्य और
- 46:51चाणक्य। इनको कहते हैं इनके पिता का नाम
- 46:53था चाणक। जैसे द्रुपद की पुत्री द्रौपदी
- 47:00जनक की पुत्री जानकी वासुदेव के पुत्र कृष्ण वासुदेव देवकीनंदन
- 47:12ऐसे नाम। कहे जाते थे।
- 47:15ऑथेंटिसिटी के लिए तो सुबंधु ने 1 दिन गंभीरता से कहा राजा से थोड़ा
- 47:24सुबंधु ने करीबी बनानी शुरू कर दी।
- 47:27राजा के साथ कहा कि तुम्हारी माता की मृत्यु का जिम्मेवार।
- 47:33चाणक्य है चाणक्य ने जहर दे दिया दूर धरा को और बिमवे सार्थक
- 47:46क्रोधित हो गया। आपका ये राजा लोग ऐसे ही होते
- 47:48हैं। कच्चे कान होते हैं इन लोगों के।
- 47:56अगर कृष्ण ने कह दिया ना वो बगावत कर रहा है, वो तुम्हारी कुर्सी को
- 48:01हिला देगा तो तुरंत वो छंटनी कर देते की चल भाई तू तो उसका गुंडर
- 48:09बन जा राजपाल बन जा। तो इस कुर्सी को छोड़ दे।
- 48:15बहुत वफादार व्यक्ति अपने पास रखा करते हैं और ध्यान रखो।
- 48:19जब भी किसी ने गद्दी पलटा की है तो वफादार करीबी व्यक्ति ने नंबर
- 48:23दो व्यक्ति नहीं किए क्योंकि उसको उसके सारे राज़, उसकी भराई उसके
- 48:31गलत काम राजा गलत काम भी करते हैं।
- 48:35बस वह व्यक्ति छुपा लेता है यह की जोडियां हुआ करती जैसे कृष्ण
- 48:42अर्जुन बस बाकी तो आप समझदार। तो रल मिल के हम अच्छे दिन लेके
- 48:58आएँगे, थोड़ी थोड़ी बात सुन लिया करो, हृदय में उतर ही जाती है,
- 49:05इसलिए मैं थोड़ी थोड़ी चीज़ बोलता हूँ, सब्जी में नमक के बराबर जैसे
- 49:12चाणक्य थोड़ा थोड़ा। पाइजन दिया करता था।
- 49:16चंद्रगुप्त को यही तरीका है हृदय में उतारने का, तुम्हें भी समझा
- 49:30दूँ, थोड़ा थोड़ा बोलते जाओ, रोज़ बोलते जाओ, रोज़ बोलते जाओ।
- 49:37हृदय की भीतर गहराइयों में अच्छी तन में उतर जाएगा और 1 दिन
- 49:40क्रांति। घटित हो जाएगी।
- 49:45रस रही आवत जात के सिर पर पड़ते, निशान करत करत और व्यास के जड़
- 49:52मति होत सोजा। तो मैं तुमसे ये कहता हूँ कि जो
- 50:02ओशो कह के गए तो मैं नहीं करूँगा, मैं तुम्हें ऑथेंटिसिटी नहीं देता
- 50:08हूँ कि तुम मेरी बातों का प्रचार करो, मुझे पता है।
- 50:13कहाँ गुरुवाणी का प्रचार कर पाए ग्रंथि कहाँ कुरान का प्रचार कर
- 50:20पाए? मालवे कहाँ बाइबल का प्रचार कर
- 50:26पाए? होप नकली नकली धंधे हो जाते हैं
- 50:39इसलिए मेरी इस बात को ध्यान से सुन लेना जो आज कूड़ा जेन्नो ने
- 50:46हथिया लिया। ओशो का साम्राज्य वो तो कूड़ा है।
- 50:51नहीं तो पता है क्यों? उन्होंने तो धन के लिए जो साहित्य
- 50:57वो लिख गए, उनसे जो आमदनी होगी उन्होंने तो पैसे के कारण किया
- 51:04है। बिलकुल साफ पता है।
- 51:07वो सब मरे के मारे गए इसके विवाद में मैं नहीं पढ़ना चाहता।
- 51:13ये थोड़ा सा लंबा विवाद है लेकिन एक बात कहूंगा वो सब खुद जो गलती
- 51:21कर गया। आदम ज्ञान हो गया था, बुद्ध के
- 51:26धरा निकल पड़ते ज्यादा बढ़िया था और सबसे बढ़िया काम बत ने किया,
- 51:36समझदार भी निकले और थोड़ी सी गलती भी खाकर थोड़ा सा और धीरे से रख
- 51:42लेते हैं तो कृष्ण हो जाते हैं। लक्कन जल्दबाजी की कि दुनिया दुखी
- 51:48है बता दूँ कि दुख का कारण है और कारण को हटाने का उपाय है।
- 51:58इतनी जल्दबाजी कर गए। के ये जानते हुए भी के आगे
- 52:04परमात्मा है जीना सब पृथक दिख जाता है सास बिना शक दिख जाता है,
- 52:10साफ दिखता है वह खींच लेता है अपनी तरफ जो एक बार वो दत्त्व को
- 52:17उपलब्ध हो गया वह। ईश्वर बनेगा ही बनेगा, उसे अपनी
- 52:23सीमाएं तोड़नी ही पड़ेगी। वह अनंत और विराट में समायेगा ही
- 52:28समायेगा लेकिन ये अपवाद है बुद्धि जैसे लोग मैं अपवाद मानता हूँ जी
- 52:36ऐसे कह लोग के इनमें करुणा का इतना भाव।
- 52:40ज्यादा भरा हुआ है। किसे कहते कोई बात नहीं, मंजिल तो
- 52:49आ गई, अब तो परमात्मा की यात्रा है।
- 52:52मैंने खुद की खुदी को देख लिया, अब विराट भी हो जाऊंगा।
- 52:58मैंने जान लिया मैं कौन हूँ? तो मैं ये भी जान लूँगा वह कौन
- 53:02है? अब मेरा सफर खत्म, परमात्मा का
- 53:09सफर शुरू अब आगे जो भी हो, अंजाम देखा जाएगा।
- 53:22खुद ही तराश लिए और बंद की कश। खुद ही को देख लिया और जल्दबाजी
- 53:31में दौड़ें। बता दूँ और बता बोल दिया, लेकिन
- 53:36मैं तुम्हें बताऊँ बहुत धर्म का जुड़ा है।
- 53:42क्योंकि जो अपने चरम शिखर तक न पहुँच पाया वो कल ही अधूरा फूल
- 53:48होती, कल ही अगर अधूरी रह जाए, पूरी तरह शिखर न पाए।
- 53:59स्वगन्ध दो देती। लिकन फूल जीतने हैं, वो मुस्कराहट
- 54:06कहें जो फूल की एक एक पंकड़ी पूरी खैल जाती है।
- 54:10बस थोड़ा सा इंतजार करना था लेकिन ओशो ने यह भी न किया।
- 54:22वो तो छोटी उम्र में ही एनलाइटन होगा।
- 54:25यह 202122 में हो गया होंगे। मैं पूरी तरह से जानता नहीं,
- 54:30लेकिन बिलो 25 इतना मैं समझता हूँ कि बिलो 25 वह एनलाइटन होगा, उसके
- 54:37बाद किताबें पढ़ने की आवश्यकता क्या?
- 54:43ऐसे ही आप समझ जाओगे उसके बाद किताबें पढ़ने की आवश्यकता क्या
- 54:50थी? उसके बाद आवश्यकता थी आगे मार्ग
- 54:55पर चलने के। वो 1,00,000 किताबें पढ़ी गईं।
- 55:04वो एनलाइटनमेंट के बाद पढ़ी गईं और यह विजाति है द्रव्यता और
- 55:09उल्टी करनी पड़ी आज जो सहायता पढ़ो के उसों का, वो उल्टी है
- 55:12वॉमिटिंग। अगर एनलाइटनमेंट से पहले ये कूड़ा
- 55:20कबाड़ा इकट्ठा किया होता तो उन्हें कैथोसिस करना पड़ता
- 55:26कैथोसिस करने से सारे नुरोंज खाली करके ही पहुँच पाते।
- 55:33ओके, विजय तो कोई जानते नहीं थे, उसके बाद फिलॉसफी किया और फिलॉसफी
- 55:40आपको पता है? फिलॉसफर जैसे होते है फिलॉसफर चाय
- 55:46भी पिएगा तो वो देखेगा इसमें जो कॅन्टेंट है एलिसिस करेगा।
- 55:51इनको तोड़ेगा ये इससे बनी जो उससे बनी कैसे बनी फूल के सौंदर्य को
- 55:59नष्ट कर देते हैं और उसके भीतर छिपे हुए तत्वों को क्या है?
- 56:08वो अलग अलग रख देता है। इतना ये तत्व है इतना ये तत्व है
- 56:13इतना ये तत्व है तो फूल की सौंदर्यता खो गई।
- 56:19तुम फ्लस्वर कैसे होते हैं? तुम जानते ही हो और तुम अगर ओशो
- 56:24की बातों पर इतना ज्यादा। कहते हो कि छा गया, छा गया तो
- 56:35आनंद के कारण नहीं छाये बुद्ध छाये आनंद के कारण क्योंकि
- 56:41उन्होंने कचरा इकट्ठा नहीं किया। बुद्ध पहुंचे और तुरंत भाग लिए।
- 56:49लेकिन ओशो पहुंचे हिलाशक पहुंचे उनकी आवाज में वो जादू मेले भाग
- 56:58में जो किसी भी बौद्ध पुरुष में। उसके बाद ये कूड़ा का बाड़ा
- 57:05इकट्ठा करने की आवश्यकता तो नहीं थी लेकिन क्योंकि फिलस्पर थी और
- 57:14फिलस्पर व्यक्ति की आदत होती है। कांठ छांट कांठ छांट करने वह यही
- 57:19नहीं कहेगा कि पानी प्यास हो जाता है।
- 57:22वह ये कहेगा ये एच के दो एटम आ गए।
- 57:27ओह का एक एटम आ गया। कैसे ये मिले, कैसे प्रोसेसर हुई
- 57:32वो इन बकवासों पर ज्यादा ध्यान देगा और आप सहित पढ़ना तो आपको
- 57:40पता चलेगा। पुरुषों की बातों में कितना दम है
- 57:51बात कम करेंगे। लोगों की बात ज्यादा वो पश्चिम
- 57:55में हुआ। एशिया में वो यूरोप में हुआ वो
- 58:02अमेरिका में हुआ। लंदन में हुआ वो वहाँ हुआ वो वहाँ
- 58:06हुआ इधर उधर की बातें खुद से क्या हुआ?
- 58:13बहुत थोड़ी सी बातें जो खुद से हुई वो बताने जैसी थीं होशों के
- 58:19जीवन। तो उन्होंने बता दिया, अप्रशीटबल
- 58:28थी बतानी चाहिए कि उससे लोगों में श्रद्धा का उत्थान होता है।
- 58:38यहीं से यात्रा शुरू होती है। एक फाउंडेशन तो होना चाहिए, लेकिन
- 58:46आप सारे साहित्य को खंगाल लो, पढ़ लो, तुम तोते हो जाओ और शो के
- 58:53तोते। बस मैं तुम्हें कहूंगा बच्चो मेरे
- 59:02जाने के बाद यूट्यूब को बोलने थे ना तुम मत बोल, तुम इनका सहारा ले
- 59:13लेना, कहीं अटक जाओ तो कोई ना कोई बात कहीं ना कहीं मिलेंगे इसीलिए
- 59:16मैं इतना बोल रहा हूँ। लेकिन तुम खुद हो मेरे नवी ना मन
- 59:29जाना ध्यान रखो। मोहम्मद पहुंचे बिलकुल पहुँच,
- 59:39लेकिन आज मोरू में। और भी क्या प्रचार करें?
- 59:44क्या मोहम्मद जैसा जीवन बना पाएंगे आप?
- 59:54खैर मोहम्मद के ऊपर अलग से बोलेंगे।
- 1:00:01मोहम्मद के संतानें तो हैं। लेकिन छोटी छोटी उम्र में मर गयी।
- 1:00:06वो एक फातिमा हुई जिसका वंश आगे चला।
- 1:00:13संक्षेप में तुम्हें समझा दिया थोड़ा सा उसी पर शंख पेड़ है तो
- 1:00:20मर्यादा को ऊपर से थोपी हुई चीज़ मत समझना।
- 1:00:26मर्यादा भीतर से आया हुआ वोरास है जो चरित्र में ढल जाता है।
- 1:00:32हाँ इस सिर को फिर सुन मर्यादा भीतर जड़ों से धरती के गर्भ से
- 1:00:40आया हुआ वोरास है। जो चरित्र में ढल जाता है राम ने
- 1:00:46सीता ने कोई ब्रह्मचर्य साधन ब्रह्मचर्य अक्समाथ भीतर से
- 1:00:53उत्पन्न हो। उन्होंने सिर्फ ब्रह्मचर्य का
- 1:00:56स्वाद चखा। नानक ने कबीर ने ब्रह्मचर्य का
- 1:01:02स्वच्छ दो बच्चे, कबीर क दो बच्चे नानक, दो बच्चे राम कृष्ण
- 1:01:15एक्सेप्शन केस हैं, क्योंकि वो राजा हैं, उनका कर्तव्य बनता है।
- 1:01:25हमारे राज़ में पुरुषों की कमी है, युद्ध अक्सर हुआ करते थे और
- 1:01:31बुद्धों में सैनिक लड़ा करते थे। सैनिक हमरा करते थे और सेना में
- 1:01:38स्त्रियां आज भी नहीं लड़ सकती हैं।
- 1:01:40उसे ढंग से स्त्री प्राकृतिक रूप से कमजोर बनाएगी।
- 1:01:45लड़ने के लिए नहीं बनाई है, एक्सेप्ट करने के लिए बनाई है।
- 1:01:49उसका स्वभाव है पी जाना ग्रहण करना अटैक करना है, उसका स्वभाव
- 1:02:00तो वो लड़ नहीं सकता। लड़ेंगे भी तो आप इस तरह की लड़ाई
- 1:02:05देखना कभी बस जो ज्यादा ऊंचा बोलेंगे वह जीत जाएगा।
- 1:02:12यह स्त्री की लड़ाई है। आज मैं की लड़ाई मैंने देखा हमारे
- 1:02:20शहर में। दो खेत थे मालिक खेत बहुत दूर थे।
- 1:02:30बात करते करते कहीं बाजार में मिल गए।
- 1:02:34झगड़ा था, एक फिट जमीन का झगड़ा था, एक फिट तीन इंच।
- 1:02:4212 इंच 12 इंच जमीन का झगड़ा वो कहता है ये मेरी तरफ है, बट गलत
- 1:02:50है तुम्हारी, वो कहता है ये मेरी तरफ है, ये तुम्हारी बात गलत है।
- 1:02:58लड़ते लड़ते लड़ते लड़ते वो कहता तू ऐसा करना मेरे खेत में तू पांव
- 1:03:03रख कर दिखाना। वो।
- 1:03:06कहता कोई बात नहीं रख लूँगा, कहता तू छोड़ खेत में तू जब जाएगा जब
- 1:03:10जाएगा उसने लकीर बाँध दी ये ये मेरा खेतो में सड़क थी।
- 1:03:19ये मेरा खेत उससे पार तेरा खेत इधर मैं खड़ा हूँ, उधर तू खड़ा है
- 1:03:25वो तेरा खेत, ये मेरा खेत इस लाइन को क्रॉस कर दे फिर तेरा हाल देख
- 1:03:32वहीं लड़ पड़े, अब खेत तो कहीं पड़े।
- 1:03:36ये मर्दों की लड़ाई होती है आगे जिद्दी वो था उसने पांव का, वो तो
- 1:03:45पूरा बेहतर घुसाया और कहता ए अल तो उसके उसके हाथ में।
- 1:03:54कापवा था, उन्हें गर्दन पर फेर दिया।
- 1:03:57कहते हैं ए अल तो ऐसा लड़ाई होती है मर्द की तो मर्द कम थे तो
- 1:04:06कृष्ण ने बच्चे पैदा किए और बच्चे पैदा करने को मैंने तुम्हें बताया
- 1:04:11एक तरीका है। लड़के ही पैदा हो गए, लड़के ही
- 1:04:17पैदा हो गए। इसलिए पांडवों के कोरवों के कृष्ण
- 1:04:23के लड़के ही पैदा हुए। कोरवों के एक लड़की दुषा ला
- 1:04:29पांडवों के लड़की ही नहीं थे। और कृष्ण के एक बेटी चारुमती से
- 1:04:36हुई बस जयपुर मेला के दो दो शाला और चारुमती।
- 1:04:52बस लोग आ जाते हैं बाबा आप कहते हो ब्रह्मचर्य का स्वास्थ्य तो
- 1:04:57बहुत घना है, लेकिन ब्रह्मचर्य रहा नहीं जाता भैया तुम्हारा
- 1:05:04संस्कार हो गया है जैसे सिगरेट बिना हमारी जरूरत नहीं है।
- 1:05:11लेकिन हम जब सिगरेट पीने हैं, पीते हैं और उसका मज़ा आता है तो
- 1:05:17वह मज़ा में खींचता है और 1 दिन व्यक्ति चैन स्मकर हो जाता है।
- 1:05:22फिर चैन स्मकर को सिगरेट छोड़नी मुश्किल बहुत हो जाती है।
- 1:05:26ऐसे ही तो काम ही हो गया काम आपका।
- 1:05:31संस्कार बन गया। इसीलिए गोरुकुल में 25 वर्ष तक
- 1:05:40ब्रह्मचर्य का पालन करवाया जाता था ताकि परी जवानी तक यह व्यक्ति
- 1:05:46को पता ही न हो। लड़कियों से दूर लड़कियों को
- 1:05:54लड़कों से दूर एक बार उस ब्रह्मचर्य का स्वाद चख लिया।
- 1:06:03फिर काम की जरूरत होगी सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए और बना भी
- 1:06:06उसी लिए। रोने वाले तुझे रोने का सलेका ही
- 1:06:13नहीं रोने वाले तुझे रोने का सलेका ही नहीं अश्क पीने के लिए
- 1:06:23है न कि बहाने के लिए। तुम तो गन्दी नालियों में अपने ही
- 1:06:28बच्चों को रोज़ पटक देते हो। निरोध के भीतर कितने ही बच्चे
- 1:06:33तुम्हारे मर जाते हैं तुम गन्दी नालियों में फेंक देते हो अपने
- 1:06:36बच्चों को और तुम्हारी आँखें मूँद गई हैं तुम्हें ब्रह्मचर्य का
- 1:06:43स्वाद चखाने का आज जन्मति। कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ो ये मेकाल
- 1:06:49ऐसा गया यहाँ से अंग्रेज हिंदुस्तान का द्रव्य लेके कोई
- 1:06:55बात नहीं, कोई खास नहीं बिगड़ा, बिगड़ा तो बहुत, लेकिन कोई खास
- 1:07:00नहीं बिगड़ा। सबसे ज्यादा बिगड़ा तो वह हमारी
- 1:07:03प्रणाली को नष्ट कर के। जहाँ 25 वर्ष तक शालिवेसी का आनंद
- 1:07:10सिखाया जाता था और वह आगे जाकर आनंद में तब्दील हो जाता और फिर
- 1:07:14तुम चाहे गुलाम रहो, चाहे आजाद रहो, कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 1:07:19इसलिए हमारा देश इतने साल तक गुलाम रहा और किसी ने क्यों नहीं
- 1:07:24कही? क्यों वो किस सैली बसी का इतना
- 1:07:28मज़ा ब्रह्मचर्य का इतना मज़ा कि गुलामी की जंजीरें कुछ बिगाड़
- 1:07:33सकती हैं? जब भीतर से स्वतंत्र हैं हम और
- 1:07:36इतने आनंद में हैं हम जब हम सोए पड़े हैं मजेदार।
- 1:07:42गहन सुसुक्ति के भीतर सोये पड़े हैं, तो क्या हम देखते हैं कि
- 1:07:46हमारे हाथ में हमारे पांव में जंजीरें हैं या भेड़िया हैं?
- 1:07:52नहीं, हम देखते हैं क्योंकि निद्रा ही सुसुक्ति ही इतनी गहन
- 1:07:57है। कहीं जान ही नहीं पाते हम।
- 1:08:02के हाथ जंजीरों से पांव बेड़ियों से बने गुरुकुल प्रणाली में 25
- 1:08:13वर्ष तक जो मजाक ब्रह्मचर्य में है वो तुम्हें क्या पूछना है
- 1:08:21तुम्हें बचपन से ही? नाम रखा लिब्रल सक्स मेरा अक्षय
- 1:08:33शिवा में चला गया। उसमें जब बातें पता है बड़ी
- 1:08:38हैरानी हुई मुझे इसलिए जीतने लोग? सेक्स डिजीज से मरे और सब इस
- 1:08:56आश्रम के कारण मरे और इनको ये कहते हैं तंत्र की कलाश क्या भाई
- 1:09:05हम तंत्र जानते नहीं? और शून्य तंत्र कहाँ सीखा बताओ
- 1:09:12मुझे हमने तो विधिवत तंत्र सीखा। श्मशान घाट में से कोई एक लम्हा
- 1:09:21ऐसा बताओ क्या पहले पढ़े पढ़कर पढ़ाया।
- 1:09:26बढ़ाकर प्रचार किया। तंत्र कब सीखा?
- 1:09:30किताबों से सीखा ना वह साइन की तरह लेकिन हमने तो खुद तंत्र
- 1:09:35किया। 3 साल की वो शमशान साधना हमें
- 1:09:41तंत्र में महारत दे गई लेकिन कोई कालवेला ऐसी बता पाओ।
- 1:09:46जो ओशो ने तंत्र का स्वयं अध्ययन किया।
- 1:09:50किताबों से तो कुछ प्रमाण नहीं मिलते हैं।
- 1:09:52बात साइन खुद भर में जा रही थी और किताबें लिख रहा है कामशास्त्र
- 1:09:59पे। क्या ये ऑथेंटिक है?
- 1:10:02तुम चर चर बातों को मत किया करो। मुझे पता है ओशो के तोते हो और
- 1:10:09ओशो एनलाइटन थे। बिल्कुल थे लेकिन जो सीखा गए वो
- 1:10:14गलत था, वो तुम्हें गलत राह पे डाल पाएगा।
- 1:10:17तुम कभी उन ऊंचाइयों को छू न पाओगे जितनी सहजता से तुम।
- 1:10:25ब्रह्मचर्य रहते रहते उस आनंद के तल को छू लोगे?
- 1:10:32सहजे सहजे सहजे समाधि भली रे संतो।
- 1:10:42सहज समाधी बाली सहज समाधी बाली आज कुछ काला खराब है गा नहीं पाऊंगा
- 1:10:54सहज समाधी बाली रे संतों सहज समाधी बाली।
- 1:11:02सहजे सहजे उतरता है तुम खींच तोल के लेके आते हो इधर से खेचा उधर
- 1:11:08से खेचा और ध्यान रखना मेरी एक बात को तुम चलते जाओ अपने मार्ग
- 1:11:17पे। और मेरे बताए मार्ग पर रुक चलते
- 1:11:22रहेंगे। बस अब तुम फर्क देख लेना, आज ही
- 1:11:29फर्क देख लेना। आज ही ओशो के सन्यासों ने जो हाल
- 1:11:33किया है, अलग अलग से अपने आश्रम बनाए बैठे हैं और जो कुछ होता है
- 1:11:39वहाँ। वहाँ की बसने वाली लड़कियां लड़की
- 1:11:47मेरे पास पहुँच करते हैं बाबा ऐसा कुछ होता है साईंनवास हमने बना
- 1:11:55लिया है, कुछ पीसे थे कि हमने एक झोंपड़ी डाल दी, लेकिन होता ये
- 1:11:59है। लिब्रत सेक्स मिला शक ओशो यह
- 1:12:08सिखाने के मन में नहीं था, लेकिन कुछ करने से पहले।
- 1:12:18तुम इतने बड़े फिलॉसोफर हो क्या इस बात की तरफ फिलॉसोफी का ध्यान
- 1:12:23नहीं है कि अगर तुम ऐसा करोगे तो कहीं ये मर्यादा की बजाय तुम्हारा
- 1:12:32संस्कार ही न बन जाए, पर वही हो गया, आज संस्कार बन गया।
- 1:12:38ये ना जाने कितनी बार सेट करने वाले लोग आज उपदेश करेंगे
- 1:12:43तुम्हारे रजनीशपुरम में उस आनंद को छोड़ देंगे और उसकी जरूरत है
- 1:12:55अभी। जब व्यक्ति सहजे सहजे अपने
- 1:13:02अस्तित्व में उतरता है तो कहाँ जरूरत रह जाती है सेक्स की?
- 1:13:08अगर अभी भी सेक्स की जरूरत है? अगर अभी भी जीव आपको स्वादिष्ट
- 1:13:12पदार्थ चाहिए तो मामला गड़बड़ है। मैं रोटी तो नहीं खाता, नमक तक
- 1:13:30मैंने नहीं खाया, तेरे से कोई डेफिशियेंसी नहीं हुई।
- 1:13:35मेरे पिता कितनी बार चेक अप किया? और पैथोलोजी से हैरान होते है
- 1:13:45बाबा सिर्फ दूध लेते हो तीन 300 ग्राम, तीन बार और कोई चीज़ भी
- 1:13:51डेफिसिएंसी नहीं। थोड़ा आइरन कम है क्योंकि आइरन कम
- 1:13:55होता है। वो दूध में कहाँ होता है?
- 1:14:00लेकिन भीतर जो फॅक्टरी लगी ना हमारे।
- 1:14:05वो सब कर देती है चेंज, गला, गला ये लिवर बड़ी शांत और फैक्टरी है।
- 1:14:10हमारी तुम्हारे वैज्ञानिक इस फैक्टरी को बना नहीं सके और शायद
- 1:14:15बना भी न पाए। इस तरह प्रकार के जूसे 350 प्रकार
- 1:14:25के जूसे पैदा करता है देखो अपने आप तुम लेते हो साधारण भोजन लेते
- 1:14:33हो, तो मैं तुम्हें ये कहता हूँ अगर चाट पकोड़े तुम अभी भी खा रहे
- 1:14:39हो। ओशो अभी भी कह रहे हैं तो इसमें
- 1:14:41मामला गड़बड़ है। अगर अभी भी तुम स्त्रियों के साथ
- 1:14:51ही गफ्फी डाल रहे हो तो मामला तुम प्रचार करो तो मैं कौन रोकता?
- 1:15:02मैं अपने शीशों से मखात हूँ तुम ऐसा काम मत कर देना बा मुश्किल यह
- 1:15:10शरीर मिला, फिर एक बार भटके तो फिर भटके अब लाइन चली लाइन को
- 1:15:16खराब मत कर देना। मैं रहूं या मुझे लेकिन मैंने एक
- 1:15:22ही बात बोली मैं दो तरफ़ा मल्टीडायमेंशनल कभी नहीं हूँ, मैं
- 1:15:30इसी बात पर लगातार चल रहा हूँ क्योंकि मैंने जैसे पाया वैसे ही
- 1:15:34तो मैं बता रहा हूँ। और वैसा ही बताना चाहिए।
- 1:15:40मैं कहता हूँ आंखन देखी कबीर ने और ज्यादा ऑथेंटिसिटी उसी बात में
- 1:15:45होती है। प्रमाणिकता उसी बात में होती है।
- 1:15:53तुम जीवन को ज्यादा कम्पैटिबिलिटी के साथ जियो समज से सिक्के के साथ
- 1:16:00जियो। प्रेम के साथ जियो समझौते के साथ
- 1:16:04मत जियो जिंदगी के साथ सामंजस्य से जियो मिलवर्तन से जियो जिंदगी
- 1:16:11के भीतर डूब जाओ जिंदगी का मज़ा चखो किसी यंत्र से, किसी औजार से,
- 1:16:17किसी उपकरण से, किसी ऑपरेटर से। किसी इन्द्रिय से स्वाद पाने की
- 1:16:22चेष्टा करना, ये ये दर्शाता है कि तुम्हें अभी परम स्वाद मिलना है,
- 1:16:29फिर तुम गृहस्थ में रहोगे और भी बहुत से काम है।
- 1:16:36राहतें और भी हैं वसल की राहत के सिवा।
- 1:16:44और भी गम है जमाने में मोहब्बत के समय दो व्यक्ति जिनकी रेंजेस आपस
- 1:16:54में मिल गई। एक छत के नीचे वर्षों वर्षों
- 1:16:59गुजारते पूरी ज़िन्दगी गुजारते के हिंदुस्तान में यह संभव है,
- 1:17:05क्योंकि यहाँ की माटी में उन महापुरुषों के चरण तो क्या हुए
- 1:17:09हैं। जिन्होंने हजारों हजारों लाखों
- 1:17:16लाखों सालों तक इस समिति को पवित्र किया तो कॉन्वेंट की तरफ़
- 1:17:21मत भागना गोरखोल बना लो न सिखाओ संस्कृत और समझता भी कौन है
- 1:17:29अंग्रेजी में समझा दो अंग्रेजी में भी तो समझाया जा सकता है।
- 1:17:33इंटरनेशनल लैंग्वेज है हिंदी, अंग्रेजी में सीखा तो जरूरी
- 1:17:41संस्कृत है संस्कृत आज गम हो गए, कुछ गिनती चुनती के लोग संस्कृत
- 1:17:48जानते हैं और वो जानते क्या हैं? वो पागल हैं।
- 1:17:53संस्कृत के बलबूते सिर्फ मैं ही जानता हूँ।
- 1:17:58इससे अहंकार का पोषण होता है। उनका संस्कृत में कुछ विलक्षणता
- 1:18:06नहीं है और भाषाओं की तरह। भाषा प्रेडक्षणता है तो मुश्किल
- 1:18:14फारसी अरबी है, फारसी है, ये सीखो इनमें थोड़ा सा मुश्किल है।
- 1:18:22चाइना में थोड़ा मुश्किल है। संस्कृत तो बड़ी सहज भाषा है।
- 1:18:28हिंदी की तरह बिल्कुल सहज भाषा तो गुरुकुल बनाओ तो क्योंकि
- 1:18:37इंटरनेशनल हमने आज विश्व करीब करीब एक हुआ जाता है।
- 1:18:43इंटरनेट ने विश्व को करीब करीब एक प्लेटफार्म बना दिया।
- 1:18:48तो अंग्रेजी में पढ़ाओ कोई ऐसा तो नहीं कि अंग्रेजी पढ़ने वाला
- 1:18:54ब्रह्मचर्य नहीं होता, बादशाह ही तो बदलेगी लेकिन तुमने पुत्र ये
- 1:19:01प्रश्न तो ठीक पूछ लिया कि मर्यादा एक बंधन है नहीं, नहीं।
- 1:19:07आज तो कहने वाले आचार्य भी कहते हैं कि शादी के बंधने लाइव इन में
- 1:19:11रहो जिन्होंने ये प्रथा बनाई थी। मर्द और स्त्री समझौते के साथ है।
- 1:19:21माना घुल मिल नहीं सकते। प्रेम के बिना अगर शादी होती है।
- 1:19:28तो बात न बनेंगे, लेकिन फिर समझौते के साथ जीवन जीरो अन्यथा
- 1:19:44यौन रोगों से मरोगे। ओशो आश्रम के कितने लोग यौन रोगों
- 1:19:48से मरे मेरी निगाह में है। जब उन्मुक्त चलेगा सब तो एक दूसरे
- 1:19:59के इन्फेक्शन पेट्स व जैसे रोग होंगे।
- 1:20:05इम्युनिटी घटेगी तुम्हें। एक दूसरे की करने प्रवेश कर
- 1:20:11जाएंगे, जो पास से निकल जाने से करने छू जाती है।
- 1:20:17जब तुम इस शरीर के भीतर बढ़ जाओगे तो क्या होगा?
- 1:20:22तुमने कभी सोचा गो से जाने की कोशिश करते हो तुम?
- 1:20:29कोशिश तो ठीक है, इंटरमिंगड ही होना, लेकिन परमात्मा में होना,
- 1:20:37पदार्थ में नहीं होना, पदार्थ को पदार्थ में घुसेड़ने की चिंता
- 1:20:41चेष्टा करते हो तुम जो गलत है सम को सम में।
- 1:20:52बोध को समुद्र में प्रवेश कर देना है यह मिलन।
- 1:21:04सितारों का जमीन पर है मिलन। आज की रात दो सितारों का जमीन पर
- 1:21:23है मिलन आज की रात। सारी दुनिया नजर आती है दुल्हन आज
- 1:21:39की रात हाथ दो सितारों का जमीन पर है मेरन।
- 1:21:49आज की रात सारी दुनिया नजर आती है दुल्हन आज की रात दो सितारों का।
- 1:22:06जमीन पर है मिलन आज की रात आज की रात धन्यवाद।