Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Nov 25 - मान्यताएं छोड़ दो: जिंदगी आनंद पीने के लिए है, पैसा कमाने के लिए नहीं! कल्कि अवतार? Baba Ji Vijay Vats
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- 0:02नारायण सिंह बाबा जी प्रणब आपने कहा बाबा जी मोक्ष द्वार मेरा
- 0:20धर्म। ये तो हमारे समझ में आ गया खाओ,
- 0:35पियो आनंद करो, मान्यताओं को तोड़ दो।
- 0:47आपने कहा। शिव ने मुझे कल की अवतार घोषित
- 0:54किया। चलो हमने ये भी मान लिया लेकिन
- 1:06शिव को तो हमने देखा नहीं। मोक्ष द्वार का अगला सबक क्या है?
- 1:23कैसे हिंदुस्तान को आप आनंद में झूमता हुआ देश बनाओगे?
- 1:39आपने कहा अर्जुन तो मुझे मिल गया है
- 1:53और मान्यताओं की परिभाषा का है। व्हाटस दी डेफिनिशन ऑफ मान्यता?
- 2:05कृपया करके इस बात को विस्तार से समझाने का कष्ट करें बाबा जी
- 2:19कृपया आप अपना उद्देश्य बताइए। चले थे आप त्रिवेणी संगम में जल
- 2:34समाधि लेना किसी बच्चे के कहने से हमारी चीखो पुकार से।
- 2:49आपने अपनी जीवेशन को कहाँ स्थापित किया जो आप फिर फिर से
- 3:04क्रियान्वित हो गया हो। वसुधैव कुटम्बकम वसुधा एक परिवार
- 3:21है और जब मैंने देखा अपने ही अंतःस्व में।
- 3:32कभी तुम्हारी आवश्यकता है तो कोई जॉब मैं जानता हूँ तो कोई और नहीं
- 3:45जानता। मानवता को आनंद का रस पहनाने के
- 3:57लिए इससे पहले बहुत से मान पुरुषों में उन्होंने ईमानदारी से
- 4:03कोशिश भी की है। लेकिन भेड़ों की भीड़ के आगे सींग
- 4:11भी हार गया। मार्कस बड़ा ईमानदार व्यक्ति था।
- 4:24मार्कस ने कहा धर्म अफीम का नष्ट है, कोई भगवान नहीं है, कोई
- 4:35परमात्मा नहीं है एक मायने पे। मेरा काम बीच में छोड़ गया था।
- 4:48इससे आगे उसकी सोच कम नहीं थी, इसलिए मुझे खुद ही आना पड़ा।
- 5:00उसने कहा ईश्वर तुम्हारी मान्यता है, फिर मार्क्सस के कहने,
- 5:11वैज्ञानिक के कहने या मेरे कहने में क्या फर्क है?
- 5:18मैं भी कहता हूँ मान्यताओं को तोड़ लेकिन मैं ये जानता हूँ जब
- 5:26तक वृक्ष की जड़ भी बाकी रह गई, वह फिर उग जाएगा।
- 5:39तुमने शायद कहीं देखा हो, सारा वृक्ष तुमने काट दिया, उसकी जड़े
- 5:48भीतर रह गई वो जड़ों से फिर वृक्ष बन जाता है।
- 5:57मार्कस बहुत ईमानदार व्यक्ति था लेकिन चूक गया।
- 6:13जहाँ तक वो पहुंचा वो भी कमाल का था।
- 6:18लेकिन चुप क्या? मैं काम पूरा ही करके जाऊंगा,
- 6:30बिना काम पूरा किये मैं जाऊंगा। पिछले जन्म की छोटी सी बात बताऊँ
- 6:50किस बात ने मुझे प्रेरित किया कि मैं एक दीवान का पुत्र दीवान का
- 6:57पौत्र इतना बड़ा बैरिस्टर जिसकी बहुत बढ़िया।
- 7:04दुकानदारी चलती है, फिर कम नानी गरामी वकील साउथ अफ्रीका से गोपाल
- 7:18कृष्ण गोखले का पत्र क्या? मोहन पाजा आपकी बड़ी आवश्यकता है
- 7:34शायद उसकी अंतरात्माएं कहीं से आवाज़ दिख।
- 7:44इसको पुकारो, इसको बुलाओ और यहाँ मैं खूब घूमा।
- 7:53घूमने के बाद एक बात मेरे दिमाग में आ गई और वो बदल गई।
- 8:00हिंदुस्तान आजाद हो गया, क्या बात आई वही जो आज आई के हिंदुस्तान
- 8:19में मात्र 1,63,000? अंग्रेज हैं 1,63,000 अंग्रेज हैं
- 8:37और कैसे वो 30,00,00,000 लोगों पे राज़ कर रहे हैं?
- 8:45बस इसी विचार ने मेरे दिमाग की गोली बना दी।
- 8:56मैंने कहा हो गया देश आज़ाद। विचारों के जदपि परमात्मा के
- 9:05दरबार से आए थे। क्रियान्वयन भी उन्होंने किया।
- 9:17लेकिन मुझे सिर्फ माध्यम चुन लिया ये जो लोग कहते हैं ले दी हमें
- 9:30आजादी बिना खड़क बिना ढाल ये गलती है मेरा एक हाथ।
- 9:40अहिंसकता तो बाकी के 1000 हाथ लाखों हाथ हिंसक भी थे।
- 9:49तुम्हें वो हाथ देखे क्योंकि तुम मूढ़ हो, मूर्ख हो।
- 9:57अंधभक्तों को कभी वो अद्रि शाहत नजर आएँगे।
- 10:01मुझे आज तक भी लोग पूछ लेते हैं के भगत सिंह को तुमने आजाद क्यों
- 10:06नहीं कराया? गुलाम व्यक्ति गुलाम व्यक्ति को
- 10:14आजाद कैसे करवा सकता है? इतनी बात हमारे दिमाग में आती है
- 10:23गाँधी हिमसेल्फ वास सेल्फ और वह पूरे देश की आजादी के लिए संघर्ष
- 10:31कर रहा था। अकेले भगत सिंह के लिए नहीं, पूरे
- 10:38देश के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन क्या करें जब मूड व्यक्ति
- 10:45राज़ करने के लिए कुछ शब्दों को चुन लें तो कोई क्या करे?
- 10:57मुझे एक विचार कौन था और वह विचार बाबा नानक की वाणी जब वो फरमाए
- 11:06थे, इंसान ने नाहिया कुछ बनाया। मैं कुछ बना सकता है ही कैनट कैरट
- 11:18एनिथिंग इवन ए सिंगल आइटम मेन कैनट कैरट आदमी की ये औकात।
- 11:33और ख्याति ठोक के कहता है कि मैं हूँ तो हम कहें इम्पॉसिबल वर्ड इस
- 11:41नॉट फाउंड तो फिर मृत्यु इम्पॉसिबल कैसी?
- 11:52तुम्हारी डिक्शनरी में मृत्यु को जीतना इम्पॉसिबल कैसे हो गया?
- 12:01अगर सब कुछ पॉसिबल है मिस्टर नैपोलियन बोनापार्ट तो मृत्यु को
- 12:09जीतना इम्पॉसिबल कैसे हो गया? मोड़ों की बातें हैं।
- 12:20असल में इन्हें पता ही नहीं रस है।
- 12:26मैंने कल के प्रवचन में बड़े विस्तार से बताये।
- 12:33आज हम और आगे चलते हैं मोक्ष द्वार के अगले प्रोजेक्ट।
- 12:39सभी मान्यताओं को समाप्त करता हूँ।
- 12:47मान्यता में क्या है जिनको तुमने देखा नहीं और जिनको तुम देख सकते
- 12:58हैं। किसी भी ढंग से वह तुम्हारी
- 13:02मान्यता है, जो तुम्हारी बुद्धि की उत्पत्ति है वो तुम्हारी
- 13:10मान्यता है। फिर मैंने देवी देवता, पितर।
- 13:17श्राद्ध वगैरह सबका खंडन किया। खंडन शर्त में ये करना ही नहीं है
- 13:26कोई काली मेरे पास नहीं है तुम आके मुझे मार सकते हो, काली नहीं
- 13:31मुझे मार सकते क्योंकि काली है ही।
- 13:37ना दुर्गा, ना लक्ष्मी मुझे धन दे सकती बाहर के लोग क्यों अमीर हो
- 13:45गए? क्योंकि उन्होंने लक्ष्मी को नहीं
- 13:47माना? नहीं पूजा?
- 13:55उन्होंने पुरुषार्थ को पूछा और जहाँ पुरुषार्थ है, वहाँ अच्छे
- 14:09दिन हैं, जहाँ पुरुषार्थ नहीं, सिर्फ जहाजों पर घूमना है।
- 14:19अगला इलेक्शन जीतने की योजनाएं बनानी हैं।
- 14:25कैसे 146,00,00,000 लोगों को मूर्ख बनाना है?
- 14:29जिसका दिमाग सारे दिन यही घूमता है, उससे बड़ा मूर्ख और।
- 14:39कसूर किसी का भी नहीं कसूर है। अज्ञान तक ये विचारे जानते नहीं,
- 14:48इन्होंने रस का एक गोट भी नहीं किया।
- 14:56काश ये रस का एक खूंठ पी लेते हैं और सारी मानवता थोड़े से लोगों की
- 15:09मूर्खता के कारण परेशान। पूरा अमेरिका थोड़े से लोगों के
- 15:16कारण परेशान है। पूरा हिंदुस्तान थोड़े से लोगों
- 15:20के कारण परेशान है। यही बात मेरे दिमाग में है।
- 15:251,63,000 लोग भारत में थे, संयुक्त भारत था, पाकिस्तान बना
- 15:32नहीं। तो 30,00,00,000 आदमी के हिस्से
- 15:37में कितने आते हैं? बस कौन गया दिमाग हथियार की जरूरत
- 15:45क्या है भाई इन हरामियों को पकड़ लो।
- 15:531000 1002, 2000 इकट्ठा हो के एक बोटी बोटी भी नहीं आए।
- 15:57यही विचार इस अहिंसक गाँधी के मन में आए।
- 16:02फिर शस्त्र उठाने की आवश्यकता न बची, बस जरूरत थी।
- 16:12तो जीवंत तत्वों की जरूरत थी आपकी जरूरत थी आज भी मुझे आपकी जरूरत
- 16:18है अकेला कलकी कुछ नहीं कर सकता है अकेला कलकी तुम्हें राहत दिखा
- 16:26सकता है और तुम्हें। आनंद की राह बता सकता है।
- 16:36मान्यताओं को तोड़ना परमात्मा नहीं है।
- 16:48बुद्ध ने भी कह दिया, लेकिन इससे आगे कौन जाएगा?
- 16:54थोड़ा सा? इससे आगे कृष्ण निकल गया।
- 16:58थोड़ा सा इससे आगे घोर के निकल गया।
- 17:04अगर उनके शब्दों को ठीक से आत्मसात कर लिया जाए तो
- 17:09हिंदुस्तान नहीं। विश्व का कोई व्यक्ति दुःखी न हो।
- 17:13अभी इस मूल मंत्र को जान दीजिए। यह तुम्हें न कोई और बताएगा मैं
- 17:24तुम्हें तो बता रहा हूँ इस त्याग की तपस्चर्या की झलकन मेरे जीवन
- 17:33से तुम्हें मिलेगा। शिव ने कहा था तुम मानते नहीं, न
- 17:45मानो बिल्कुल मत मानो मैं तो खुद कहता हूँ, देखो और जानो मानो मत
- 17:52मान तो खुद ही लिया जाएगा। देखने के बाद जानने के बाद मानना
- 17:58अलग से नहीं होता। जानने के साथ मान न आ जाता है
- 18:03जैसे आनंद के साथ शांति आ जाती है।
- 18:15मान्यताओं को तोड़ दो कृष्ण ने कहा, सर्वधर्माण प्रतित्ज मामी का
- 18:22शर्मम वृक्ष छोड़ दो उस धर्म को। बड़ी कतल कारत की है और तुमने
- 18:35कृष्ण को पूजना शुरू कर दिया। तुम्हारा दिमाग दिवालिया हो चुका
- 18:44है तुम्हारा दिमाग। दिवालिया हो चूका है।
- 18:54इसका दिवाला कब का निकल चूका है जब एक व्यक्ति तुम्हें झांसा दे
- 19:04गया और 10 साल तक कुछ भी न करें। तो कैसे माने कोई कि तुम्हारे
- 19:12भीतर दिमाग है? मैं कल्कि का अवतार हूँ, कल्कि का
- 19:19अवतार पूजने के लिए नहीं होता। कृष्ण का अवतार भी पूजने के लिए
- 19:26नहीं था। कृष्ण का अवतार भी क्या था?
- 19:29पृथ्रा नाय। साधु नाम बिना शारी से दुष्कृता
- 19:37मान्यताओं को समाप्त कर दो और इस दिन नलटी पर आ जाओ प्रामाणिकता पर
- 19:43आ जाओ, मान्यताएँ झूठी होती हैं। असल में तुम्हारे दिमाग का दीवाला
- 19:54निकल गया है। मैं पहले बोला, जो व्यक्ति ऐसी
- 19:58बातें करते तो मुझसे पूछने लग जाते।
- 20:00लोगों ने मार्क्स को पूछना शुरू कर दिया मार्क्ससवाद कब कहा
- 20:08मार्क्सस ने मेरे को पूछो। कब कहा कृष्ण ने मुझे पूछो कब कहा
- 20:14राम ने ओह जीवन जिए, जीवन जी कर कुछ मापदंड स्थापित करती है।
- 20:22उन मापदंड को अच्छी तरह से देखो, तुम्हें जीवन का आनंद मिलेगा।
- 20:29अभी तुम आनंद से वंचित हो। तुम कितने भी कहते रहो की हम तो
- 20:33छह बार सूट बदलते हैं। हम तो 10 बार साड़ियाँ बदलते हैं,
- 20:40अगर साड़ियों से आनंद आ जाता अगर सूट बदलने से।
- 20:51लाखों करोड़ों के बूट पहनने से लाखों रुपये का पेन रखने से लाखों
- 20:57रुपये का चश्मा डालने से अगर आनंद आ जाता तो बड़े बड़े अमीर यहाँ से
- 21:03चले गए। जड़ सिकंदर का यहीं पर रह गया और
- 21:13वह लुकमान जैसा हकीम जो कभी होगा नहीं मरते दम लकमान भी ये कह गया
- 21:23ये घड़ी हर के चिर न टाली जाएगी। मार्कस जीस कदम तक आए, बस थोड़ा
- 21:35सा और आगे चलना है मान्यताओं को समाप्त कर दो, क्योंकि मान्यताएँ
- 21:45जड़। जीवन को अधिमान दो, जीवन को मूल्य
- 21:54दो मेरे ये शब्दों को आप अच्छी तरह से सर्कल में ले लो जड़ता को
- 22:00समाप्त कर दो जड़ता को मूल्य मत दो।
- 22:07जीवन को मूल्य दो, आज तुमने जड़ता को मूल्य दिया, तो दुर्गा काली
- 22:13फर्गा यह सब बनी जड़ता को तुमने पूजना शुरू कर दिया।
- 22:19और हद की बात यह कि आज तो ऐसे ही लोग है जो कहते है कावेरी का जल
- 22:24पी के हम जिंदा। शर्म हया नाम की कोई चीज़ इनमें
- 22:31नहीं और दिमाग का दीवाला निकल गया।
- 22:38कावेरी है कि क्या है? नर्मदा है, जल तो जल है।
- 22:45अकेला जल जीवन के लिए आवश्यक तो है, लेकिन सफ्फिशिएंट नहीं।
- 22:55अगर जल ही सफ्फिशिएंट होता तो परमात्मा पागल था।
- 23:00वो अनपना अरे मूडानन्दो? तुम ये बातें कहकर उसकी कदर घटा
- 23:11रहे हो। अगर नर्मदा का जल जीवन दाई है तो
- 23:22वह मूर्ख है जिसने अन्न पैदा किया।
- 23:28फिर जल ही दे देता नर्मदा कई नर्मदाएं बना देता।
- 23:35सभी देशों में सभी मुल्खों ने नर्मदाएं ही बना देता।
- 23:42ऐसे मूर्खों ने धरती का सत्या नाश किया।
- 23:48धरती की प्रतिभा का सत्यानुष है जल जीवन है बिल्कुल ठीक लेकिन
- 24:04काफी नहीं है। जीवन की आवश्यकता बहुत सी चीजों
- 24:09से पूरी होती। मान्यताओं को समाप्त करता हूँ
- 24:22परमात्मा नहीं है। जीस रूप में आप ने बनाया, क्योंकि
- 24:30मान्यताएँ हमेशा गलत होती हैं। बिना देखे अगर तुम कोई चित्र बना
- 24:35लोगे। तो बिलकुल उस अंधे की भांति है जो
- 24:40प्रवचन करेगा के हरे रंग के छह पांग होते हैं।
- 24:47गैरव रंग आठ पांव से चलता और लाल रंग 10 पांव से चलता।
- 24:58यह मूर्खता नहीं तोड़ते, लेकिन वह क्या करे?
- 25:02वह तो अंधा है, वह काना भी होता तो भी समझ में आती अंधा अंधों को
- 25:14समझा रहा है। और तुम सुनने वाले भी अंधे हो
- 25:19तुम्हारे कान को हैं आँखें में रंग देखने के लिए कान नहीं चाहिए
- 25:28आँख। आज तुम कहते हो विकास हो गया और
- 25:44जीवन कभी इतना डरपोक न था जितना आज हमारे विश्व ने हमारी धरा ने
- 25:56इतने इतने सूरमाओं को जन्म दिया। वो कायर में थे जीतने आज कायर
- 26:04तुमने शेयर मार्केट देखा क्या देख ना?
- 26:07कायरों की जमात थोड़ी सी खबर है। हिंडन वर्ग ने ये कह दिया तड़ाम
- 26:16नीचे। थोड़ा सा बूस्टी बात हो जाए चलो
- 26:23बूस्ट हो गए, ऐसी तुम्हारी औकात हो गई है।
- 26:29मन के पीछे चलने वाले लोग ऐसे ही हो गए।
- 26:40ईश्वर एक मान्यता है, तुम्हारी जो ईश्वर आपने पैदा कर लिया तभी तो
- 26:47अलग अलग है यहूदियों का ईश्वर कहता मैं बड़ा क्रू।
- 26:59मैं इतना सख्त हूँ, नरदई हूँ कि ज़रा भी दया नहीं करते और इस्लाम
- 27:07का परमात्मा खुदा कहते हैं कि मैं बड़ा हरम कर ही।
- 27:17मैं रहमत का पुंज मैं क्षमा करता हूँ, क्षमा करता ही जाऊंगा, मैं
- 27:26तेरे गुनाह माफ़ करता जाऊंगा, बस शर्त के तू तो बात कर ले।
- 27:38और गुनाह कितनी ही वर्कर लेकिन मैं गुनाहों को माफ़ करता ही चला
- 27:47जाऊंगा। तुम तौबा करते जाना मैं माफ़ करता
- 27:52जाऊंगा, इसलिए मुसलमान को हम इतने निर्दयी हो गए।
- 28:00मुसलमानों ने कहा गिड़गिड़ा लेंगे चापलूसी का आलम, आपने देखा है आज
- 28:07रिश्वतखोर बहुत है थोड़ा नवाज रोज़ पांच बार पडिए।
- 28:20ये उसके लिए रीसोद है, हिंदु कहता घंटा ज्यादा धड़का लेंगे गंगा में
- 28:26ज्यादा छलांग लगा लेंगे, करो पाप जब गंगा पवित्र कर देती है, पापों
- 28:33को हर लेती है पाप नशा नहीं गंगा तो करो पाप ये पाप ऐसे ही नहीं
- 28:39बढ़ गए। ये तुम्हारे इन शब्दों ने
- 28:43मान्यताओं ने पाप बढ़ाए के पाप करो, गंगा में गोता लगा दो, गंगा
- 28:55पाप नष्ट नहीं है गंगा तुम्हारे पापों को नष्ट कर दो।
- 29:02इसलिए मैं कहता हूँ तुम्हारे परमात्मा जैसे तुमने बनाए वैसे
- 29:06परमात्मा होने भी नहीं चाहिए है के नहीं होने भी नहीं चाहिए और
- 29:11परमात्मा वैसा है भी नहीं। परमात्मा तो है, परमात्मा तो है।
- 29:19मैं न कबीर की बात करता, न नानक की बात करता, न कृष्ण की बात
- 29:24करता, मैं अपनी बात करता मैंने देखा इन्हें नैनों से देख काश
- 29:34तुम्हारे नैन भी उसके दर्शन के प्यासे हो जाएं।
- 29:39आगा सबजन खायों के चुन चुन खायों माँ।
- 29:59दो नैना मत खाईओ मोहे पिया मिलन की आस।
- 30:23इन नैनों ने वो देखा है परमात्मा तो है लेकिन मेरी बात मानना मत।
- 30:36मैंने 1000 बार कहा मेरे भोजन करने से वो मेरी मदद मेरे पानी
- 30:42पीने से प्यास मेरी मदद तुम मत मानना।
- 30:49वह जो ढंग बताया उस ढंग पर अमल करना।
- 30:57तुम पा जाओगे वह जो मैंने अपनी आँखों से निहारा, जो कबीर ने
- 31:03निहारा, जो नानक नहीं निहारा मान्यताओं को समाप्त करता हूँ जब
- 31:15तक दौड़ बनी रहेंगी। तब तक कि तुम दुखी रहोगे।
- 31:21देखिए, सारे शब्दों को आप बांध लीजिये।
- 31:25एक पोटली में यह मोक्ष द्वार के भर्वचन बड़े क्रांतिकारी हैं और
- 31:32अद्भुत है अमूल्य। और कल तो एक बच्चे ने ये भी कह
- 31:42दिया कि ऐसा अमूल्य ज्ञान बांटना नहीं चाहिए।
- 31:50अब ऐसे लोगों से क्या कहूँ अगर संस्थान में कोई तरक्की करके।
- 31:56कोई इन्वेंशन करके आपको ना बताएं। अकेला ही लुत्फ उठाता चला जाए।
- 32:03यही तो धनपतियों की इच्छा है। मरता रहे कोई भूखा सड़कों पे?
- 32:11तुम्हारे गोदाम भरे रहेंगे तुम्हारे ट्रंक और तुम्हारे
- 32:14तिजोरियां तुम्हारे बैंक बैलेंस बढ़ते रहे।
- 32:18यही तो धनपतियों की सोच मान्यताओं को समाप्त करते हैं।
- 32:30थोड़े से और आगे चलो परमात्मा तुम्हारी मान्यता है बिलकुल
- 32:37मान्यता है क्योंकि जो देखा नहीं वो जाना तो है ना उसको मात्र तुम
- 32:45मान सकते हो फिर उसे किसी तरह मानो।
- 32:51फिर उसे कोई भी नाम दे दो, क्योंकि देखा ही नहीं।
- 32:55जब देखा ही नहीं तो स्वाय शास्त्र अर्थ के और क्या करोगे?
- 33:02शंकराचार्य की तरह बगल में पोत ही उठा लोगे, हाथ में झंडी ले लोगे,
- 33:07करो शास्त्र अर्थ? क्या खाक शास्त्र का जिसने देखा
- 33:12वह शास्त्र कभी करता है, वह तो झुक जाता है, वह पोत ही बगल में
- 33:21ही गिरेगा। यह तो अहंकार को बढ़ाने की सूचना
- 33:24देता है। माँ नेताओं को समाप्त कर दो, एक
- 33:33बार सत्ता मेरे हाथ में दे दो, मुझे तुम्हारी आवश्यकता है आज
- 33:38हिंदुस्तान नहीं। आज विश्व पूरा विश्व पागलपन की
- 33:45चपेट में आ गया। और तुम पागलपन के कगार पे हो, ये
- 33:49पागलपन नहीं और क्या है जो दिनभर रात आनंद से गुजर जाते थे।
- 33:57आज एक हफ्ते एक हफ्ते गुजर जाता हूँ कि कोई देश का तानाशाह पागल न
- 34:02हो जाए और कौन जाने? वह कुछ विशाल क्वांटिटी को एटम
- 34:18बम्ब हाइड्रोजन बम बना के फेंक दे, और दुनिया एक क्षण में समाप्त
- 34:24हो जाए, कौन जाने कोई पागल हो जाए और पागल तो बहुत है पागलपन।
- 34:29अगर देखना हो तो दिल्ली के पार्लियामेंट में चले जाओ, छोटे
- 34:34पागल असेंबली में बैठे हैं और बहुत छोटे पागल जो बेचारे नाम
- 34:41मात्र के पागल हैं जो तुमसे तो कहीं से आने हैं।
- 34:46और तुमने आग्रा, बरेली, अमृतसर इनके पागलखानों में बंद कर रखा है
- 34:54और तुम्हें ये भी नहीं पता कि उनमें से कोई प्रबुद्ध पुरुष भी
- 34:58है, क्योंकि प्रबुद्ध पुरुषों की बातें भी पागलों से मेल खाती हैं,
- 35:05मिलती जुलती होती हैं। यहाँ कुछ दिन पहले हाईकोर्ट की एक
- 35:11बड़ी बगीला भाई और डेढ़ साल से जद कर रही थी कि मैंने मिलना है बाबा
- 35:19से यहाँ पर आदि मैं कुछ तो मैं पागल हूँ।
- 35:27और कुछ मैंने दिखावे के लिए ये पागलपन डाल रखा है।
- 35:30सर जी जब देखेगा बंदा तो यह मुझे समझदार कहेगा, कुछ कुछ ये बाल
- 35:39वगैरह खिला लेता हूँ, जान कुछ है भरी।
- 35:45गर्मी के अंदर गर्म मफलर, जय नंबर का नीचे से टोपा, ये तो दिखाऊ
- 35:55क्या तुम्हें उगाड़ के नीचे टोपा है अगर हसो क्या चलो और हस।
- 36:05ये पागलपुन की निशानी नहीं है तो और क्या है?
- 36:09तो उसने जब ये सारा दृश्य देखा वो कहती है, मैं कहाँ फंस गई?
- 36:13सबसे पहले तो आचरण देखते थे। यही मैंने कहा कि ओशो माम और।
- 36:23जब तुमने बाह ही लिया था, उस तथ्यों को, तो अचल ने तुमने गलत
- 36:28क्यों किया? आज आंधी दुनिया बंट गई।
- 36:35लिबरल सेक्स और सिंह्य मित्र सेक्स।
- 36:43तुमने दुनिया को गाँट दिया, जैसे मार्क का आधा अधूरा ज्ञान बांट के
- 36:48चला गया आधा अधूरा था लो, मैं इसे पूरा करता हूँ तो वह आई।
- 36:59चुंग पुंग तुमने जानबूझ कर यार ये खोल लिए सारे, इसलिए मैं पहले ऐसा
- 37:13ही करता हूँ कि जिसने भागना हो ना, वो भाग जाओ जो ठहरेगा वो
- 37:21ठहरेगा, वो विशूषण। मैं भटिंडा जा रहा था, आपको पता
- 37:30ही थी बात एक जमींदारों का लड़का मुझे देख के कहने लगा भाई जी आती
- 37:36है तब थोड़ा समय ज्यादा पागल था। दसों में और पांवों में भी भरते
- 37:44थे और पांवों का तो पता नहीं चलता है।
- 37:48किसी का तो बैठने में कोई जगह नहीं थी।
- 37:55ऊपर हैंडल को पकड़ के तो ये हैंडल को पकड़े थे तो सब कुछ दिखे।
- 38:01तो देखे तो वोकैता भाई जी आती है। अब ऊपर उठने की इच्छा किसकी नहीं
- 38:05होती? नहीं लगता ठीक ठाक है और कोई एक
- 38:12आध व्यक्ति आकर मेरे पांव में भी छू गया तो उसने कहा बंदा तो
- 38:18मान्यता प्राप्त है, मान्यता प्राप्त है।
- 38:22जी मैं मानता हूँ को मैं कहता हूँ तोड़ दो ये बंदा मान्यता प्राप्त
- 38:28उसने मुझे पूछा, भाई जी, पंजाब ने पूछा आह की है?
- 38:32मैंने कहा अभी बड़ा काम करा। मैं किसी जरूरी काम से भटेंटा जा
- 38:36रहा था। मैंने कहा बात बढ़ती बढ़ती न जाने
- 38:41कहाँ चली जाएगी फिर ये मुझे हाथ दिखाएगा, फिर सारी बस सारे कामकाज
- 38:47भूल जाएगी, मुझे हाथ दिखाने में बैठ जाएगी।
- 38:56मुफ्त का तेल मिले तो जूती में डलवा लेना।
- 38:59अगर बर्तन न हो तो? यह हमें हमारे पुरखों ने सिखाया
- 39:10तो मैंने कहा अब यह कबाड़ा जड़ से ही काट दूँ, तो ज्यादा बढ़िया
- 39:13रहेगा। मैंने कहा देख मेरी बात सुन देखता
- 39:19है ना? मैं पागलखाना अमृतसर से भाग के
- 39:26आया हूँ। वो तो डर गया अच्छा अच्छा, उसकी
- 39:33तो सांस ऊपर के ऊपर है गई। मैंने कहा मर न जाए कहेंगे?
- 39:43शुभ हो जा अगर तू इससे आगे थोड़ा भी बोल पड़ा तो ये जो मेरे पास
- 39:49एयर बैग है इसके भीतर ईंटें हैं, बड़ी बड़ी यहाँ पर टांग।
- 39:58अब बोबरा फोड़ दूँ मैं निकाल के उसे और यहाँ कोई डॉक्टर भी नहीं
- 40:03है और मैं तो पागल हूँ बहुत डर क्या उसे हम गया वो तो इधर उधर
- 40:11देखे भीड़ इतनी न तो पीछे यहाँ का रास्ता।
- 40:15ना आगे जाने पूरा बा मुझ कर उसने किसी तरह बड़ी कोशिश करके एक सीट
- 40:23आगे कर दी के भाई तू भोंकती इस पागल को वो डर गया।
- 40:31और फिर आगे आगे आगे आगे आगे निकलता गया।
- 40:34जैसे ही बठिंडा आया, बस स्टेशन बस स्टैंड के अंदर बस घुसी तो थोड़ी
- 40:44देरें हुई। वहाँ चिल्ला के मैं देखूं कहाँ
- 40:50गया? वो छलांग लगा गया भाई।
- 40:59आगे भी जाने ना तो नीचे भी जाने ना तो।
- 41:17जो भी है बस यही एक सफल है। आगे भी जो भी है बस यही एकफल है।
- 41:33अगर इतनी छोटी सी बात पकड़ लें स्टे इन प्रजेंट वर्तमान में ठहर
- 41:45जा सारे इंताजामात करके। यह स्त्री आई मुझ से कौन छुपा
- 41:59सकता है? गट गट के अंतर की जान भले भरे की
- 42:04पीर को छानना था, यह तो सारी सांग तुम मूर्खों को भगाने के लिए।
- 42:13जिसमें बागना है बाग जो मैं अपना पूरा इंतजाम करके रखता हूँ मैं
- 42:20अपने शिष्यों की संख्या ज्यादा बढ़ जाती है।
- 42:23अगर गलती से बढ़ भी जाए तो मैं कोई ना कोई पंगा खाना झड़ लेता
- 42:27हूँ जिससे वह कमेंट करते हैं, मैं घुट्टा लगा देता हूँ।
- 42:32घट जाते हैं, उतने ही हो जाते हैं जीतने मैंने उतने हो जाते हैं
- 42:38अकेले भारत की बात नहीं करता विश्व व्यापी हूँ विश्व में समा
- 42:43रहा हूँ अनंत हूँ, अनंत की ही बात करूँगा।
- 42:57विश्व व्यापी हूँ तो विश्व की ही बात करूँगा।
- 43:01मैं विराट हूँ, मैं विशाल हूँ और जब मैं विशाल हूँ और मैं विराट
- 43:07हूँ तो मैं संकीर्णता की बात नहीं करूँगा, न धर्म विशेष की, न देश
- 43:13विशेष की। और ये शब्द हमें इंगित करते हैं
- 43:26हमारा देश विश्व गुरु, छात्र। ये शब्द सुनिए वसुधैव कुर्पम सारी
- 43:40वसुधा ही मेरा परिवार है, बस इसीलिए हम महंत हैं।
- 43:47ये शब्द बताते हैं कि शब्दों को बोलने वाला, शब्दों को जीने वाला।
- 43:54व्यक्ति विशु ग्रुथ जिसके लिए भेद मच जाए जो समाज जाए विराट में जो
- 44:05विराट ही हो जाए, वह विशु ग्रु होता है।
- 44:12वह विश्व का मालिक होता है, विश्व का नियंता होता है, सब उसके बच्चे
- 44:16होते हैं, कुछ बातें हैं जो बतानी वाजिब नहीं, नहीं तो फिर रीको से
- 44:30पहले सीखो आ जाए। नकलची बंदर बहुत बैठ मेरी वीडियो
- 44:37मैं बोलता हूँ, उससे पहले नकल हो जाती हूँ, रोज़ देखता हूँ कितने
- 44:43लोग मेरे सब्सक्राइबर बनते हैं सांज डले जब सुन लेते हैं
- 44:49अनसबस्क्राइब कर देते है। सर्फ कॅन्टेंट चोरी पे उनके भीतर
- 44:54से तो कॅन्टेंट आता है क्योंकि भीतर उतरें तो कॅन्टेंट मिले जहाँ
- 45:00कॅन्टेंट पड़ा जहाँ सर्वज्ञ बैठा, वहाँ उतरे तो ज्ञान मिले वहाँ
- 45:08जाने की हिम्मत नहीं। वहाँ जाने का तरीका नहीं मालूम
- 45:13राधे राधे करने से तो भीतर जाते हैं वह तो शोर है तो कंटेंट
- 45:18मिलेगा कैसे? कैसे चलेगा संसार का धंधा?
- 45:24वह मैं बताऊँगा कैसे चलेगा। धर्म के बिना चल नहीं सकता क्या?
- 45:31ज़रा सोच बताइए हमें 10 मिनट एक कॉनर में बैठ जाना, अपने कमरे के
- 45:40और सोचना कि अगर किसी का कोई धर्म न हो, बिल्कुल नवजात शिशु की तरह
- 45:46जैसे ईशा ने कहा ओनली दे विल। एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम, विल बी
- 45:53इनोसेंट या स्लाकेचर्ड बच्चे की तरह मासूम हो जाओ।
- 46:02बच्चे का कोई धर्म होता है क्या? बच्चा जब जन्म देता है?
- 46:09कोई क्रॉस लटका के देता है कोई तिलक लगा के देता है, त्रिपुंड
- 46:17सजा के देता है। वह जयंती माला डाल के देता है कोई
- 46:22खतना करके भेजता है। परमात्मा ने जैसे ही तुम्हें
- 46:28उत्पन्न किया और परमात्मा बड़ा सा समझदार है, पागल तो सिर्फ तुम ही
- 46:34हो जिन्होंने धर्म को उपजाया, धर्म मैंने भी उपजाया।
- 46:42लेकिन मैं उस धर्म की बात करता हूँ जो तुम हो।
- 46:45आनंद। इसलिए मैंने कहा मेरे धर्म को
- 46:51नास्तिक भी स्वीकारेंगे। आस्तिक भी स्वीकारेंगे?
- 46:54आनंद किसे नहीं चाहिए, चोर को भी चाहिए, शाह को को चाहिए, आनंद सभी
- 47:00को चाहिए जैसे नींद सभी को चाहिए। बहुजन सभी को चाहिए ऑक्सीजन सभी
- 47:05को चाहिए। ऐसे ही आनंद भी सभी को चाहिए वो
- 47:13नास्तिक हो वास्तिक हो ये कर्मों की बात है, कोई डाका मारे या कोई
- 47:18दान करे? तुम एक पल आनंद के लिए जीवन तक
- 47:32कुर्बान करने को रज मैंने कल भी बताया था निर्भयता केस के अंदर एक
- 47:38क्षण के स्वाद के लिए तुम लटक गए तो?
- 47:42कैसा होगा वह? और संभोग में सिर्फ दूर से देखते
- 47:49हो उसे उसकी गति क्या होगी? मन में की गत कही न जाए, जो को
- 48:02कहे पाछे पक्ष था, जो मन से पार हो गया।
- 48:09उसकी गति को तुम कह न सकोगे उसका बखान कैसे करोगे जब दूर से जिसे
- 48:16देखा और तुमने फिर उसे देखने की तमन्ना की, तुम बार बार उन अंतरंग
- 48:22क्षणों में जाना चाहते हो? फ्राइड कहता है व्यक्ति का जीवन
- 48:26तो। सेक्स के अर्ध करके ही घूमता है।
- 48:30दिन भर रात यही सोचता रहता है जो दूर से इतना प्यारा लगा जब तुम
- 48:50उसके आगोश में चले जाओगे। ईद मनेंगे फिर वो कितना प्यारा
- 48:57लगेगा? इतना प्यारा तनु रब ने बनाया जीकर
- 49:12देख दा रहा कितना प्यारा। रघु ने बनाया ये सब क्रिएशन कितनी
- 49:23मज़ेदार, कितनी प्यारी और जो समा गए उस विशाल परमानंद में उसकी
- 49:34बाहर की अकृतियाँ देखकर तुम भाग जाते हो?
- 49:42वो जानते हैं इस कूड़े को लेकर मैं करूँगा क्या इतना कुछ घसा
- 49:48लिया है गोबर किस किस को निकालूंगा कैसे व्हाई करूँगा मैं
- 49:55इसको? इसलिए ऐसे व्यक्ति को देखते हैं
- 50:00मुझे बाबा ने आदेश दिया ऐसा करो, उच्चाटन छोड़ दो, इसके ऊपर ये
- 50:05नहीं है काम बगा दो नहीं, नहीं उच्चाटन फेंक दिया 2.25 मिनट
- 50:12ठहरिये यहाँ। चले गए।
- 50:15यहाँ बैठने का दिल करता है आप भी आए हुए हैं, आपका मन करता है यहाँ
- 50:22बैठ जाए बाबा थोड़ी देर बड़ा मज़ा आता है संसार के थपेड़े लुएं गर्म
- 50:30लुएं के आगोश में आकर। हम यहाँ आते हैं तो बड़ी शीतलता
- 50:36बरसती है, आनंद यहाँ बैठते हैं 10 मिनट 2 मिनट
- 50:51तुम इच्छाओं से वासनाओं से भरे हुए ये हो जाए, मेरे बेटे की शादी
- 50:55हो जाए, मेरे बेटे की शादी हो जाए ये बात सुनाएं।
- 51:01और संतो के पास तुम इनकी वासनाओं की पूर्ति करने के लिए जाते हो
- 51:05बहाना कोई या तो बाद में जब खुलते हो तो पता चलता है कि तुम आए किस
- 51:12लिए थे। बहाना तो तुम यही करना कि दर्शन
- 51:17करने आए लेकिन बाद में पता चलता है।
- 51:20दर्शन का मतलब क्या था? किसी का कैंसर नहीं ठीक हो रहा,
- 51:26किसकी किडनी खराब हो रही है, किसका दिमाग भी खराब है?
- 51:32सभी अपने कामों के किए हुए फल न भोगने के प्रयास में रखे हैं।
- 51:38कर तो दिए इन्होंने। लेकिन अब कैसे बचें जैसे घोड़ से
- 51:43बचना चाहता, कर तो दिया, संवर करके कहें, लेकिन घोड़ से अंत में
- 51:49क्या पली लेता है? महात्मा गाँधी अहिंसा के पुजारित
- 51:53है अगर कानून ने मुझे दंडित कर दिया।
- 51:56तो महात्मा गाँधी का वो मुख आसुर टूट जाएगा, अहिंसा अहिंसा हो
- 52:03जाएगी मेरे लटकाने से देखिये दिमाग का दीवाला निकल गया कितने
- 52:12होश में किया होगा कतल। भुगतते वक्त तुम्हारे दिमाग का
- 52:19दीवाला निकल जाता है, फिर संतो की शरण में जाते हो कैसे थोड़ा सा
- 52:24देर हो जाए बाबा आगे कर दो कर सकता है बाबा सब कर सकता है।
- 52:32लेकिन जिसका नहीं करना उसे ये दिखा देता है।
- 52:42अरे इसमें सबसे ज्यादा हस्त है तो मेरे को ऐसा देते है जैसे धर्म के
- 52:52बिना काम चले। जब मैंने धर्म बताया वो किसी
- 52:58कमेंडमेंट के अधीन नहीं होता है। टेंट कमेंडमेंट नहीं है।
- 53:01इसमें सुबह उठो ब्रह्म मूर्त में उठो बह करू जपो, सतराम जपो राम
- 53:07राम करो फलाना करो, ये करो मंदिर जाओ मसीह जाओ ये कुछ मैंने कोई
- 53:11नियम नहीं है, ऐसा खोज के खेलो आनंद करो, मौज करो, जीवन को लो तब
- 53:15से जीओ। जीवन जीने के लिए है, न के
- 53:19मस्ज़िदों और मंदिरों में जाने के लिए क्यों अपना कीमती वक्त खराब
- 53:29करते हो? यह तुम्हारे मन की भ्रम है।
- 53:36महाकाल के उस समंदर में जाकर माथा टेक लूँगा तो जीत जाऊंगा।
- 53:41बिलकुल नहीं जीतोगे। मन के भरोसे मन के बहलाने को
- 53:49गाणें ये ख्याल जैसे बच्चा पैदा होता है निर्दोष।
- 54:00धर्म दोष हैं धर्म दोष हैं धर्म दोष त्याग दो इनको इन लबादों को
- 54:07उखाड़ फेंको ये तुम्हारी आत्मा पे बोझ है ना यही तो है कीचड़ जिसे
- 54:14मैं कहती हूँ खुरच दो तुम हीरे हो।
- 54:21तुम्हारा अस्तित्व तो हीरा है, लेकिन इस हीरे के ऊपर जो गोबर
- 54:27तुमने लिप लिया है, जो चीकड़ तुमने लिप लिया है उस उस गोबर को
- 54:35उस कीचड़ को। हटाना खुर्चना और यही है
- 54:40मान्यताओं को तोड़ देना। इसे ही मैं कहता हूँ मान्यताएँ यह
- 54:46जो कीचड़ तुमने ओढ़ लिया लवादा तुमने ओढ़ लिया इसको तुम खुर्च दो
- 54:53यह मान्यताएँ जो तुमने ओढ़ ली। जो परमात्मा ने तो नहीं बनाई तो
- 54:57हमने बनाई परमात्मा ने कोई शास्त्र नहीं बनाया, लेकिन
- 55:02प्रत्येक धर्म ये दावा करता है के बाइबल परमात्मा ने लिखे वेद
- 55:11परमात्मा ने लिखे। कुरान, परमात्मा नहीं लिखा कोई
- 55:16किताब परमात्मा लिखने क्यों आएगा आएगा इतना कमजोर है इतना
- 55:29बुद्धिहीन और बलहीन है यहाँ आकर किताब लिखना।
- 55:33वेध व्यास के जरिये अरे बिलकुल बुद्धि को पैदल कर दिया है, थोड़ा
- 55:42बहुत जूता डाल लो। सारी दो पैसे के कारण है।
- 56:06देखिये तुम बीमार हो गए, उठ नहीं सकते।
- 56:10यू कैनट वर्क इवन यू कैनट स्टैंड इवन यू कैनट सीट इवन।
- 56:17प्यासे हो, पानी की जरूरत है, अरबों खरबों डॉलर के मालिक हैं।
- 56:22कहो डॉलर से कहो गिव मी ए ग्लास ऑफ वाटर प्लीज़ आई ऍम थस्ट मैं
- 56:30प्यासा हूँ मुझे एक ग्लास पानी दे दो।
- 56:34क्या वो अरबों खरबों डॉलर तुम्हें ग्लास फनी का दे देंगे?
- 56:39यही मैं कहता हूँ जड़ता को मूल्य मत दो, जीवन को मूल्य दो।
- 56:48इसीलिए हम आज भी विश्व गुरु हैं। 146,00,00,000 की आवाज हम विश्व
- 56:56गुरु हैं। क्यों जीवन की महत्त्व सत्ता गणना
- 57:02हमारे पास है? तुम कहोगे ये तो अमेरिका है, उसके
- 57:09पास आइटम मम है। कुछ नहीं कर पाएगा उसका ये छोड़
- 57:15दो ये बातें मुझ पे छोड़ दो आई विल मैं कैसे निपटूंगा या जैसे
- 57:24देश को बचाने की लड़ने की बातें कुछ गुप्त रखी जाती हैं ये बातें
- 57:29तुमसे बताऊँगा। ये बातें तो मेरे हृदय में दफन
- 57:35है। मैंने कैसे अमेरिका से निपटना
- 57:42कैसे अन्य अमीर देशों से निपटना जो मान्यताओं के भरोसे सिर्फ डाल
- 57:49रखा है। मान्यता जी।
- 57:52डॉलर क्या है? मान्यता है सोना क्या है मान्यता
- 57:55है तुम लाखों टन सोने के भंडारों में बैठे हो, बीमार हो, पानी की
- 58:03जरूरत है या दवा की जरूरत है, क्या वह है सोने का भंडार तुम्हें
- 58:08बाजार से जा कर। एक टिक्की या दवा की लाती यह
- 58:13मान्यता है सब मान्यताओं को तोड़ दो।
- 58:19अब तक तो मैं नहीं धर्म की मान्यताएँ तोड़ दो और जिसे तुम
- 58:28कहते थे ये जेन्न ये फैन ये हजारों लोग वहाँ पर जाते हैं।
- 58:33गढ़म से घर पड़ते हैं क्या ये निकल गया?
- 58:35मैंने कहा भाई मेरे पास भी जो निकल गया मैं सुलट लूँगा तू क्यों
- 58:44व्यर्थ में मुश्किल में पड़ा है, इसे मज़े दे दे।
- 58:54कोई जन फन नहीं होता, इनकी वासना ही नहीं भरी।
- 58:57पेट भर गई गोगटा देखो बस इसका नाम नहीं मुझे पता शटल पता गोगटा देखा
- 59:08आपने इसके लिए? जन था निकल गया, भाग गया, मैंने
- 59:18कहा क्यों भगाया तू मेरे पास भेज देता है इस उल्लू के पट्ठे को?
- 59:28मान्यताओं को तोड़ दो, बस बस जो जो तुम्हारी मान्यता है उनको तोड़
- 59:36दो, जो तुम्हारी खोपड़ी में नहीं आए वो मैं बता दूंगा कौन कौन सी
- 59:40मान्यता? अगला सवाल है तुम पूछोगे तुम
- 59:46पूछते हो क्योंकि तुम अभ्यस्त हो चूके हो इन मान्यता का ये
- 59:51मान्यताएँ तुम्हारे भीतर घोर संस्कारों की देहली हिमालय जैसी
- 59:57हो गई हैं। तुम कहोगे ये गिरेंगी कैसे
- 1:00:00गिरेंगी भाई? मैं कहानी सुनाया करता हूँ एक
- 1:00:10बुढ़िया चरखा का ती पूनी का ती, सुबह से ही शाम तक वृद्धांत में
- 1:00:18को और काम क्या होता है? भागा तो जाता नहीं, भागदौड़ होती
- 1:00:23नहीं तो घर बैठे फ़ोन ही खाते रहो।
- 1:00:26पिछले जमाने के बात है। नई नई फैक्टरी से लगनी थी बहुत
- 1:00:30बड़ा कपास का ढेर तो उसका बेटा उसे उस फैक्टरी के आगे से ले गया।
- 1:00:42तो उसने देखा इतना विशाल रूही का ढेर उसके दिमाग पे बोझ पड़ गया
- 1:00:52बिमारी तो कोई और वो घर पे आयी तो एक ही बात बोले।
- 1:00:59कोन कत्तू कोन पिच्छू कोन कत्तू कोन पिंजू कोन पिंजेगा और कोन
- 1:01:06कापेगा तुम तुम्हारा पुराना फार्मूला फिर से दोहराते थे हम
- 1:01:17कैसे माने के शिव है मतभो? कौन कहता है मतमानों के आनंद होता
- 1:01:24है, मतमानों के सुख होता है, बड़े से लोग हैं, जो महसूस है, खुद को
- 1:01:32ही सताते हैं, वो कहते सुख नहीं है ना?
- 1:01:43बुद्ध भी उनमें से एक है जो कहते हैं जीवन दुख है नहीं भाई जीवन को
- 1:01:49जीने का तरीका तुम्हारा दुख होता है।
- 1:01:53जीवन तो बड़ा सुख है, जीवन तो वह तत्व है न कटता, न मरता, न जलता,
- 1:01:59न गलता, न सूखता, न बेगता। जीवन तो कैसे हो गया?
- 1:02:05जीवन को जो तुमने पहचान और किया वह गलत जीवन को जीने का ढंग करते
- 1:02:11हैं जीवन गलत में तो बुद्ध कहते हैं जीवन दुख इस अदुख का कारण?
- 1:02:19और उस दुख को निवारण करने का ढंग है।
- 1:02:23इतनी बात बोलने की जरूरत क्या थी? क्या कृष्ण का भी नहीं था क्या
- 1:02:31शर्म? धर्माण प्रत्ययमामिका शर्म व्रज
- 1:02:35झुक जाओ, जीरो हो जाओ। क्षमा जाओ, इन्सर्ट हो जाओ, विलीन
- 1:02:43हो जाओ पर वाणी की तरह गल जाओ जल जाओ क्षमा में काफी नहीं है जगह,
- 1:02:51लेकिन तुम मरने ही से तो डरते हो? न सोने की वैल्यू, न चांदी की
- 1:03:01वैल्यू, न लोहे की वैल्यू, किसी की कोई वैल्यू किसकी वैल्यू?
- 1:03:05जीवन की वैल्यू जिसके पास जितना जीवन है तुम्हारी मान्यता ही तो
- 1:03:12है। जिसके पास जितना डॉलर मैं कहता
- 1:03:17हूँ डॉलर पानी पीला देगा क्या जीवंत व्यक्ति तो पानी पीला देगा,
- 1:03:22लड़ भी लेगा फिर तुम कहते हो अगले के पास तो एटम मैं तो मैं बताऊँगा
- 1:03:29ना किसके पास एटम यही तो बात है जो मैं गुप्त रख रहा हूँ।
- 1:03:38उसके पास आइटम मॉम है तो किसी बात से ही मैं बोलता हूँगा ऐसा कोई
- 1:03:46भेजा थोड़ी खराब है वक्त खराब करूँ मैं, तुम एक बेरिड का 10,000
- 1:03:51ले लेते हो, मैं तुमसे कुछ मांगता हूँ सुनो सिर्फ सुनो।
- 1:03:57और मैं तुम्हें कहता हूँ हौ टु एन्जॉय दी लाइफ ज़िन्दगी जीने के
- 1:04:04लिए है जबकि तुम ज़िन्दगी को लड़की की शादी करनी, लड़के की
- 1:04:08शादी करनी, ये बड़ा सा मकान बनाना।
- 1:04:12बड़ी सी कार पड़ोसी ने ले ली। क्यों ले ली?
- 1:04:15इससे बढ़िया लेके हम तुम ज़िन्दगी को ऐसे जीते हो ज़िन्दगी को जीने
- 1:04:21का डंग गलत है, जीवन गलत नहीं है, जीवन दुख नहीं।
- 1:04:26जीवन को जीने का डंग गलत है। वह दुख पैदा करता है।
- 1:04:31अगर तुम अपने आपको कांटे चुभाने शुरू कर दो, फूलों की जगह तो दर्द
- 1:04:38तो होगा ना भाई, जीवन के बिना सब चीज़ बेकार वैल्यू किसकी होगी?
- 1:04:50जो परमात्मा ने चीजें बनाई तो न डॉलर, न रूरल, न रूपी न यूरो,
- 1:04:59किसी की कोई वैल्यू है वैल्यू किसकी?
- 1:05:02जीवन की मैं तुम्हें कहता हूँ जीवन ही की वैल्यू है।
- 1:05:09आज भी जैसे मैं कह रहा हूँ के मेरे धर्म को ना नास्तिक इनकार
- 1:05:13करेगा, नास्तिक इनकार करेगा तो जीस आनंद की मैं बात करता हूँ तुम
- 1:05:20अंतरंग क्षणों में जब पीक पॉइंट पे होते हो तो तुम्हें क्या दिखता
- 1:05:24है उसको कौन इनकार करेगा बताओ, नास्तिक इनकार करेगा।
- 1:05:29नास्तिक भी संभव के उन क्षणों में जाते हैं।
- 1:05:33आस्तिक भी तुम्हारे एक तथाकथित ऋषि मुनि भी इन्हीं कामों में
- 1:05:41रहे। षड्यंत्र करते हैं, तुम्हारे
- 1:05:43इंद्र अहिल्या से बलात्कार करते हैं।
- 1:05:48और चोरी छिपे षड्यंत्र करके जाते हैं।
- 1:05:51उन क्षणों में तुम्हें कुछ दिखाई पड़ता है।
- 1:05:53तुम उनके गुलाम हो जाते हो। ऐसे ही नहीं कोई पगला गया है।
- 1:05:59मैं तुम्हें उस जगह दे जाऊंगा जिसका तुमने उन अंतरण क्षणों में
- 1:06:04दर्शन किया था। शुक्र है ईश्वर ने।
- 1:06:08काम वासना बनाती है, बस एक काम वासना का छिद्र है।
- 1:06:13जीस छिद्र के जरिए तुम झांक सकते हो और दूर से उस प्रभावितों के
- 1:06:17दर्शन कर सकते हो। बट कैनट मर्ज इन दट यू कैन ओनली
- 1:06:23सी। सिर्फ देख सकते हो मिलना होता है
- 1:06:29जोबदी मैंने बताई कोई जात नहीं, कोई मंत्र नहीं, कोई पूजा नहीं और
- 1:06:37मैं कल की अवतार हूँ, मेरी पूजा मत करनी सुख, मेरी बातों को मानना
- 1:06:42यही पूजा है। ना भूतो ना भविष्य आने वाली भी
- 1:06:49जनता मेरे सेवक मेरे आने वाले शिष्य इस गलती को ना दोहराने के
- 1:06:57छूट, छूट, प्रचार, पूजन करना शुरू कर दे, कर्मकांड बना ले मेरी
- 1:07:01बातों को समझो। जीवन का मूल्य है, क्योंकि जीवन
- 1:07:05परमात्मा ने दिया तुम्हारे पदार्थों को ही मिले हैं।
- 1:07:12जो पैसा तुमने बना लिया डॉलर बना लिया ऊपर बना लिया, यूरोप बना
- 1:07:16लिया, रूप भी बना लिया। ये तुम्हारी मान्यता है।
- 1:07:22और ये भी मान्यताएँ हैं कि सोना लोहे से ज्यादा मूल्यवान होता है।
- 1:07:28नहीं नहीं तुम्हारी मान्यता है कल को मान्यता करनी क्या लोहा ज्यादा
- 1:07:32मूल्यवान है? सोना नहीं मूल्यवान है।
- 1:07:35फिर क्या करोगे? और सोना वैसे भी ज्यादा मूल्यवान
- 1:07:39नहीं है। क्योंकि सोने का गाटर बनाओगे सोने
- 1:07:44से लेंटर खलेगा सोने से थंबा उठेगा।
- 1:07:50सोना तो किसी काम का नहीं है सोना तो तुम्हारी अंकांक्षों की
- 1:07:56वासनाओं की पूर्ति करता, तुम्हारे अंकार को बढ़ाता और क्या करता?
- 1:08:03कनक कनक ते 100 गुना मादकता अधिक आय जो कनक तुम खाते हो उसमें
- 1:08:10जितना मादकता होता है उसको खाकर तुम सो जाते हो।
- 1:08:20नींद आने लगती है। कणक कणकते 100 गुणा माधकता
- 1:08:26अधिकाएँ ऋषि कहता है कि जो सोना तुम डालते हो उसके डालने से इतनी
- 1:08:34मादकता आ जाती है जितनी किसी व्यक्ति के।
- 1:08:40चीफ और जुडिशट बनने से अहंकार बढ़ जाता है।
- 1:08:47बस इसे मादक तक रहता है। यह एक तरह की मदहोश की है।
- 1:08:53यह मदहोश की एक तरह का पागलपन होता है।
- 1:09:01वो खाये बहुराय है, वो पाए बहुराय कणकते सौगुणा मार्दकता आदिक आए वो
- 1:09:10खाये बहुराय है वो पाए बहुराय कणक को खाकर तुम उन्नद्रा में हो जाते
- 1:09:17हो? और सोने को पहन कर तुम उन्हीं
- 1:09:24द्रण हो जाते हो। अहंकार व्यस्त हो जाते हो,
- 1:09:30सुस्ती, छाछ आती है, अहंकार हो जाता है हमारे विषयों ने।
- 1:09:39बड़े सूत्र बताए तुम्हें समझाए और खुद भी अमल किया, लेकिन काश हम
- 1:09:48उन्हीं की सल्तान उन्हें जागृत करना होगा।
- 1:09:55जीस से सनातन को तुमने बुला दिया है।
- 1:09:59इसलिए मैं कहता हूँ ये जूता उछालने वाला मूर्ख एक अंतर साल
- 1:10:03टाट में ले रही है तो मुझे नहीं पता कि होता क्या है जीसको तुम
- 1:10:10कहते हो बर्दाश्त नहीं करेंगे वो सनातन होता क्या है?
- 1:10:16पहले सनातन तो जान लो कौन होता है?
- 1:10:19फिर ही उसकी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं ना करोगे।
- 1:10:23उसकी बेइज्जती हो सकती है, ये बताओ पहले जो कट नहीं सकता नैनम
- 1:10:29चिरन त्रिशस्त्राण नैनम दहाती भव का जो जलाया नहीं जा सकता न चयनम
- 1:10:36क्रेदन त्याप हो न सोचती मार होता।
- 1:10:39जो पानी उसे बहा नहीं सकता, वायु उसे सुधा नहीं हो सकती, फिर उसकी
- 1:10:48बेइज्जती हो सकती है। उसकी बेइज्जती हो सकती है।
- 1:10:54तुमने तो धर्म को इतना चीप कर दिया, निर्बल कर दिया।
- 1:10:58यहाँ लोग कहते हैं धर्मों रक्षते रक्षते धर्म की रक्षा करो, क्यों
- 1:11:06अरे पोलियो हो गया है कोई धर्म को जो इसकी रक्षा करोगे और फिर वह
- 1:11:12तुम्हारी रक्षा करेगा पगला गए हो? क्या ये सनातन धर्म आज पगला गया
- 1:11:17है? इसको लाइन पर लाना होगा।
- 1:11:22हमारे ऊपर खोने के बाद कही थी। शांति का वह मुख्य सूत्र है इसलिए
- 1:11:29बाद में बता रहा हूँ अभी और प्रवचन आने बाकी हैं।
- 1:11:35इसे सुनिए। अरे, आत्मा जलती नहीं, तुम सनाथ
- 1:11:42नहीं हो यह बोलते फिरते हो तुम्हारे डॉलर तो चल जाएगा।
- 1:11:51सोना भी बिगड़ जाएगा। एक तापमान पे जाके लोहा भी बिगड़
- 1:11:56जाता है, बाष्पावन जाता है। एक तापमान पर जाकर सभी धातुएं
- 1:12:02बिगड़ जाती हैं, लेकिन एक तापमान का कोई भी तापमान बन जाए तुम्हारा
- 1:12:09आत्मतत्त्व नहीं बिगड़ता। नैनम चदं ति शस्त्राण नैनम दहती
- 1:12:15भाव। कहा कोई आग उसे पिघला नहीं सकती,
- 1:12:22दहे नहीं कर सकती। उसकी तो ये वक्त काफी हो गया है।
- 1:12:28अगले प्रवचन से पहले का शब्द बोल लूँ।
- 1:12:33मैंने कहा इस भागदौड़ ने तुम्हारा जीवन छीन लिया, तुम्हारे जीवन की
- 1:12:41सुख शांति से तुम दुखी हो, तुम दौड़ रहे हो इसीलिए?
- 1:12:49यह दौड़ बंद कैसे हो? दादू दूजा को नहीं दूजी मन की
- 1:12:56दौड़ जब मन दौड़ता है तो तुम दुखी हो जाओ दूसरा पैदा होता है दौड़
- 1:13:03मिट्टी संशा क्या वस्तु ठोर के ठोर बस तुम परमात्म हो यू विल नो।
- 1:13:09यू विल रीयलाइज यू विल रिकॉग्नाइज़ यूरसेल्फ़ आइए आखिर
- 1:13:19शब्द पे आ गए मैं कल की अवतार हूँ।
- 1:13:28विराट में जाकर घोषित हो चुका शिव तत्व के द्वारा लेकिन तुमने मुझे
- 1:13:40पूजना नहीं मेरी बातों को गुनना है सुनना है।
- 1:13:49और तुम्हें अंत तक छू लेंगे मुझे तुम्हारा शंख चाहिए तुम्हें आसपास
- 1:13:57लगी हुई आग दिख रही है। सब तरफ भ्रष्टाचार लोग हैं 17,000
- 1:14:03करोड़ का घोटाला करके। व्यक्ति गंगा स्नान करके परले पर
- 1:14:11डिप्टी चीफ मिनिस्ट्री बन जाता है।
- 1:14:13वित्त मंत्रालय भी फिर फिर उसे संभाल देते हैं।
- 1:14:19यह बदनसीब ही नहीं तो और क्या है? और हम उन्हीं के कब्जे में आ गए।
- 1:14:28ये हमारी बदनसीबी, जो नहीं तो और क्या है?
- 1:14:42ये हमारी बदनसीबी, जो नहीं तो और क्या है के उसी के हो गए हम।
- 1:15:02के उसी के हो गए हम जो न हो सका हमारा रहा घर विषयों में हरदम
- 1:15:20मेरे। इश्क का सितारा कभी डगमगाई कसती
- 1:15:31कभी हो गया किनारा रहा घर किशन। मैं हर दो चार शब्द मैंने बोल
- 1:15:44दिए, मेरी पूजा मत करना, कृष्ण ने भी नहीं कहा, कबीर ने भी नहीं
- 1:15:50कहा, नानक ने भी नहीं कहा, खुद ने भी नहीं कहा मेरी पूजा करना नहीं
- 1:15:53करना और जिसने जिसने कहा। उसकी उतनी ही तुमने मूर्तियां बना
- 1:15:59ली। बुध ने कहा मेरी मूर्ति मत बनाना।
- 1:16:02सबसे ज़्यादा मूर्तियाँ तुम्हे बुध के मिले तुम शिष्य हो जो गुरु
- 1:16:10के वचनों में नहीं चलते वह अपने आप को शिष्य कहलाने के योग्य है
- 1:16:16नहीं। पूजा मत करना, मेरे शब्दों को
- 1:16:22सुनना आज चारों तरफ आग लगी है और तुम सभी बजाने में व्यक्रियता से
- 1:16:35उत्सको। मैंने तुम्हारे अंतश को झाँका है
- 1:16:39देखा है इसीलिए मैं चलाता हूँ, मुहूर्त निकल गया था, छलांग लगा
- 1:16:50देता या आने वाले एक 2 दिन में लगा देता।
- 1:16:58लेकिन तुम्हारी व्याकुलता ने चीरतकार ने चीखों ने मेरी
- 1:17:07जीवेशणों को वापस तो नहीं किया, लेकिन जीवेशणों को किसी चीज़ से
- 1:17:11बांध दिया। अब इस चीज़ को तब खोलूंगा जब मैं
- 1:17:19अपना मंतव्य पूरा कर लूँगा। जब तुझे मुझे मार देंगे, फिर उसके
- 1:17:26बाद तुमने क्या करना है तुम्हें अच्छी तरह से पता है।
- 1:17:33मैंने आपका सहारा छोड़ दिया आपकी ऊँगली मुझे थमा दो, मेरे हाथ
- 1:17:42ज्यादा शक्तिशाली हैं तुम्हारी ऊँगली को पकड़ लेंगे अपनी ऊँगली
- 1:17:48मेरे हाथ में थमा दो। हाथ में थमा दूँ, समझती हो कोई
- 1:17:55बात और अब के तुम्हें जो प्राइम मिनिस्टर मिलेगा वह मिलेगा दलित।
- 1:18:07अब सुनिए वो शब्द जो मैं आपको सुनाना चाहता हूँ।
- 1:18:10प्रोबेशन लगातार जारी थे। मोक्ष द्वार ये शब्द हैं गुरु
- 1:18:31गौरव से सुनना। माया तो ठगणी भाई ठगक फिरत सब देश
- 1:18:42ये कागज ही तुम्हें दौड़ाते हैं, चैन से न सोने देते हैं, न जीने
- 1:18:46देते हैं और तुम जीने आये हो क्या जीना मत?
- 1:18:54तुम्हारी ज़िन्दगी भी आसान हो जाएगी अमेरो तुम्हारे वरुथ नहीं
- 1:18:58होंगे क्योंकि तुम्हें पता ही नहीं है ये दर्द चस चस तुम्हारे
- 1:19:05भीतर कैंसरराइटिस का बूढ़ा कर रहा है यह है बूढ़ा है अमीर बनने की
- 1:19:10चाहत एक नंबर बनने की चाहत क्योंकि तुम्हें पता नहीं है।
- 1:19:14जीस आनंद को हम चख चूके हैं, वो आनंद भी होता है और तुमने देखा
- 1:19:20नहीं तो मज़े से कह सकते हो। कोई नहीं होता और नहीं होता।
- 1:19:24इसका प्रमाण है कि तुम उसी को इकट्ठा कर रहे हो लेकिन मैं
- 1:19:29तुम्हें जी न सीखाता हूँ। उस जीने तक पहुंचना सीखाता हूँ
- 1:19:34माया तो ठगनी भाई मैं तुम्हें ठग लेती यह पैसा यह सोना जमीन जायदाद
- 1:19:46के काफिले यह गदियां। यह पूजा जाना लोगों का पांव
- 1:19:55पूजना, पांव धो धो के पीना इन सबसे तुम हिप्नोटाइज़ हो जाते हो
- 1:20:02मैं कहता हूँ उससे बाहर हूँ माया तो ठगनी भाई ये तुम्हारे जीवन के
- 1:20:07जीने को ठग लेती। जीवन जीने के लिए है इस ठगनी के
- 1:20:15द्वारा इस मायक के द्वारा ठगे जाने के लिए नहीं है पैसा कमाने
- 1:20:20के लिए जीवन है धन कमाने के लिए सोना कमाने के लिए।
- 1:20:29नाम कमाने के लिए अपने पांव पर जाने के लिए लोके माटी हैं, पांव
- 1:20:35माटी हैं, ये माटी का पुतला है, इस माया ने तुम्हें ठग लिया है
- 1:20:45तुम ठगे गए क्योंकि इसने चैन हर दिया।
- 1:20:49तुम्हें आनंद पीने नहीं देती है। यह दौड़ ऐसी कि तुम इस दौड़ के
- 1:20:57कारण रेस्ट नहीं कर सकते, जिसे तुम रेस्ट करना कहते हो।
- 1:21:05रात को अच्छे से गद्दों पर रेस्ट है।
- 1:21:10रेस्ट करने वाले तो सड़क बनाने वाले टूटे हुए पत्थरों के ऊपर भी
- 1:21:17आराम कर लिया करते हैं और तुमसे कहीं ज्यादा बढ़िया माया तो ठगणी
- 1:21:24वही ठग तो फिरत सब उदेश। सभी देशों को ठग रही है।
- 1:21:30सभी करंसियाँ तुम्हें ठग रही हैं माया तो ठगनी भाई ठग तो फिरत सब
- 1:21:41देश अमेरिका को ठग रही। अफ्रीका को ठग रही है, कनाडा को
- 1:21:50ठग रहा है, चाइना को ठग रहा है, ऑस्ट्रेलिया को न्यूजीलैंड को सभी
- 1:21:59विश्व के मुल्कों को ठग रहा है। 200 के गरीब मुल्क हैं तुम 195
- 1:22:06में केलो। क्योंकि तुम्हारी मान्यता है ये
- 1:22:11भी एक मान्यता है तुम्हारी 195 मैं तो कहता हूँ एक वसुधाई
- 1:22:17कुटुम्बकम, सारी वसुंध एक कुटुम्ब है।
- 1:22:24माया तो ठगनी भाई ठग तो फिर तो सब देश सभी देशों को इसने ठप दिया और
- 1:22:30सभी देशों में रहने वाले व्यक्ति तुमने अपना जीवन माया कमाने में
- 1:22:35लगा दिया और क्या कमाया? और फिर परमात्मा ने एक अद्भुत
- 1:22:42चीज़ बनाई जो तुम्हें बता देती है कि तुमने क्या कमाया तो अद्भुत
- 1:22:48चीज़ क्या बनाई परमात्मा ने और सभी को देता है वो क्या मौत?
- 1:22:59परमात्मा ने अद्भुत चीज़ बनाई। मौत और परमात्मा मौत सभी को देता।
- 1:23:06हैरानी की बात है, तुम्हारे बुजुर्गों की कितनी पीढ़ियाँ आती
- 1:23:12चली गई मर के तुम जानते हो उनके नाम क्या थे?
- 1:23:19और वो मर गए, वो भी तुम्हारी तरह चिंतित थे।
- 1:23:23रात भर उन्हें भी नींद नहीं आई कि मेरी भाभी पीढ़ियों के लिए क्या
- 1:23:29होगा? जिंदगी जीने के लिए है कमाने के
- 1:23:35दिन। धन कमाने के लिए नहीं आनंद पीने
- 1:23:40के लिए है जिंदगी आनंद पीने के लिए है और ये हमारा हमारी बदनसीबी
- 1:23:50है की हमें आनंद का पता ठिकाना ही नहीं है की आनंद है क्या।
- 1:23:56हम ज्यादा से ज्यादा आराम को जानते हैं।
- 1:23:59सूखों को जानते हैं, बस इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते।
- 1:24:05आनंद का तो दूर से नजारा हम उन क्षणों में करते हैं जिन क्षणों
- 1:24:12के मोहताज हो जाते हो तुम। बड़े से बड़ा कितना भी सूरमा हो
- 1:24:16सिकंदर हो या चंगेज हो औरंगजेब तुम उसके दीवाने हो जाते हो यह
- 1:24:28परमात्मा की कलाकृति? उसने ऐसी उसने ऐसी शानदार चीज़
- 1:24:37बनाई और तुम देखो आँखें होते हुए भी अंधे हो, जो अंधे हैं वो तो
- 1:24:42अंधे हैं तुम्हारे पास तो आँखें हैं, फिर भी तुम अंधे हो रोज़ जो
- 1:24:47तुम्हारा। तुम्हारे शहर का तुम्हारे पड़ोस
- 1:24:51का कोई व्यक्ति गुजर जाता है और तुम्हें पता नहीं चलता कि मैं भी
- 1:24:55मरूँगा तुम्हारे आँखें हैं नहीं हैं माया तो ठगनी भाई ठग तो फिर
- 1:25:10शक्ति। जीस ठगनी ठगनी ठगी त ठगवा दीस, तो
- 1:25:23गोरा कहते हैं वह सबसे बड़ा ठग जो उस अमृत को पी गया इस ठग को चगमा
- 1:25:29देगा। इस ठगनी को चकमा देते हैं यह ठगती
- 1:25:36फिर रही तुम्हारे आनंद को छीन भी लिया इसने क्री क्रीप सारी दुनिया
- 1:25:42को अपने आगोश में ले लिया, न लौजे काम आया, न कृष्ण काम आया।
- 1:25:52ना राम काम आया, ना नानक काम आया, ना कबीर काम आया ना जरथुस्त काम
- 1:25:59आया, कोई काम नहीं आया। इस समय में तुमने ठग लिया,
- 1:26:04तुम्हारे आनंद को ठग लिया और तुम जीवन का लक्ष्य क्या समझने लगे?
- 1:26:11बस जीवन का लक्ष्य इस श्रद्धालु को जो ज्यादा कमाएगा, वो लक्ष्य
- 1:26:15अगर तुम अबारिश कर दोगे, जड़ से ही खत्म कर दोगे, बिलकुल जड़ से
- 1:26:19ही निस्त नबूज कर दोगे तो जीने का मज़ा आएगा।
- 1:26:26फिर जीवन की पहली यात्रा का पहला स्टेप होगा वह।
- 1:26:34तो वह स्त्री आकर कहने लगी कौन क तू कौन पिंजू वो किसी वैद्य की
- 1:26:40बात समझ में नहीं आई, ये क्या करें?
- 1:26:44कोई समझदार बंदा था, वो कहता बेटा तुम इसको कहाँ कहाँ लेकर गए?
- 1:26:50तुम मेरे साथ चल पता नहीं मैं इसको ले के गया था जब बीमार थी
- 1:26:59डॉक्टर के पास और जब वापस आई तो कहती कौन पिंजू कौन कत्तू कौन
- 1:27:07काटेगा, कौन पीछेगा? क्या पिक्चर दिखा?
- 1:27:14सारे रास्ते में गया। उसे रास्ते में कॉटन एंड गेनिंग
- 1:27:19फैक्टरी मिल गई। विशाल भंडार रोई कपास उसने कथहर
- 1:27:27यहाँ से गया था। यहाँ से वापस आया था तो चल वापस
- 1:27:31चल क्या हुआ, बस तू चल समझ ले और माता ठीक हो गई, अच्छा चला गया।
- 1:27:45ये छोटे से नुक्ते ही होते हैं। तुम भी यही कह रहे हो कौन कर तू
- 1:27:50कौन पिंजू एक नंबर पे कौन होगा, तीन नंबर पे कौन होगा और रोज़
- 1:27:56देखते हो? एक नंबर वाला कब फिसल कर नीचे आ
- 1:28:00जाता है। बड़ी कोशिश करता है एक नंबर फिर
- 1:28:03हो जाऊं लेकिन क्या करोगे एक नंबर बनकर?
- 1:28:06रात की नींद नहीं, दिन का चैन नहीं, पेट में भूख की आग नहीं,
- 1:28:16आराम नहीं, चैन नहीं करार नहीं वे चैन हो भटकते फिर रहे हो, ये भी
- 1:28:22कोई जीवन है? हम कुछ नहीं कहते, कहीं नहीं जाते
- 1:28:31कोई शीश, कोई कहीं सुंदर सीनरी से देखते नहीं कोई भोग नहीं भोगते,
- 1:28:38लेकिन मज़े में एक ऐसा तत्व है हमारे ऊपर जो सदा मज़े में रहता
- 1:28:45हो। हम उसमें जाकर बैठ जाते हैं, आराम
- 1:28:49से। हंसा पायो मानसरोवर हंसा पायो।
- 1:29:13मानसरोवर ताल तलेया क्यों? डोल ताल तलेया क्यों डोल मन मस्त
- 1:29:31हुआ? हाँ तो क्यों बोलें?
- 1:29:35मन मस्त हुआ हुआ तो क्यों बोलें? जब मन मस्त हो गया, क्या पीता हूँ
- 1:29:44मैं देखो तो कोई शराब है यहाँ कुछ है जो मुझे।
- 1:29:51उन्हें मर्द में ले जाए, कुछ भी तो नहीं है और कितने वर्षों से एक
- 1:29:59जगह पे बैठा हूँ वो शितर हुआ तुम मेरी तरफ़ देखो सारी दुनिया
- 1:30:06बेकरार है सारी दुनिया दुखी है। लेकिन मैं एक आशा का दीप लिए आया
- 1:30:11हूँ तुम्हारे सामने इस दीप से दीप जला दो और सारी दुनिया को
- 1:30:16प्रकाशित करता हूँ उज्वल कर दो इसलिए पहले बाबा ने कठोर प्रशूम
- 1:30:24करके एक स्थान पर बिठाया, स्थिर कर दो।
- 1:30:29और सभी विकारों विचारों विषयों से मुक्त किया, निर्विषय हुआ,
- 1:30:37निर्विकार हुआ, निर्विचार हुआ और अब मैं योग्य हुआ अब मैं
- 1:30:46तुम्हारे। सन्नम खा गया सन्नम को मोहे सन्नम
- 1:30:52को होवे जीव मोहिं जबिं, जन्म कोटि अग न संहिं तबिं तुम्हारे
- 1:30:58सभी पाप खत्म हो जाएंगे, मेरी बातें मान लो, दौड़ को बंद कर दो।
- 1:31:08मुझे आपका सहारा चाहिए, तुम दुखी वैसे भी दुखी हो, मैं जानता हूँ
- 1:31:18बच्चों को रोज़ ठंड की रातों में पानी के बोछारें और पुलिस की
- 1:31:24लाठियां पड़ती हो, मैं देखता हूँ। तुम्हारी जरूरतें क्या हैं, मुझे
- 1:31:31पता है पेट में आग लगती है। माया तो ठगनी भाई ठग तो फिरत सब
- 1:31:37देख सारे देशों को ठग दिया ऐसे। जीस ठग ने ठग नहीं ठग दी जिसने
- 1:31:45माया को ठग दिया क्या ठग को आदेश उसको प्रणाम करता हूँ मैं?
- 1:31:49गोरख कहते हैं उसको नमन है मेरा, उसे आदेश संभालना हूँ मैं।
- 1:32:03आगे का प्रवचन प्रवचनों की श्रृंखला शुरू रहेंगी।
- 1:32:11मेरे संग आ जाओ इस चैनल को सब्सक्राइब करने का अर्थ तुमने
- 1:32:17अपनी अंगुली मुझे पकड़ा है। तुम्हारी मान्यता कि तुम मेरे संग
- 1:32:25हो, मैं तुमसे कुछ मांगता नहीं, कोई चिंता नहीं मैंने कोई मैंने
- 1:32:35कोई किसी को रिश्वत, कोई वोट खरीदना नहीं।
- 1:32:39कोई सस्ता नहीं खरीद लिया। मैंने कोई नियम, कायदा, कानून,
- 1:32:45कोई नियम बनाने वाले, कोई न्याय देने वाले, मैंने कुछ नहीं खरीदे,
- 1:32:49ना मुझे, ना पैसे की जरूरत, बस मुझे इस तरफ हो तुम्हारी जरूरत जो
- 1:32:55दुखी है वह व्यक्ति मुझे ऊँगली पकड़ा गया।
- 1:33:00सब्सक्राइब करते हैं। ये दुखी नहीं है।
- 1:33:05जो शहंशाह आलम है जो एक नंबर का अमीर है वह तो सब्सक्राइब न करे
- 1:33:11मुझे वैसे जरूरत तो तुम्हें भी सबसे ज्यादा है।
- 1:33:15क्योंकि तुमने देख लिया कि कुछ नहीं, संसार में तुमने तो सुख भी
- 1:33:20नहीं जाना। अनंत तो बड़ी दूर की बात है।
- 1:33:24साधू संत सब कुछ छोड़कर बुद्ध आनंद की एक बूँद तो चट लेते हैं,
- 1:33:31तभी तो निकलते हैं अन्यथा निकला कहाँ जाता है घर से?
- 1:33:34परिवार को छोड़ा जाता है। कहीं परिवार को छोड़ो दरबार को
- 1:33:38छोड़ा जाता है कभी वो तो दरबार को छोड़ के चल दिया तो बिना एक बूंद
- 1:33:44के पिए बुध भी ना निकल सकते थे तुम अपना हाथ मुझे दे दो चलो मेरे
- 1:33:53संग चलो। जिन जिन राहों से मैं तुम्हें
- 1:33:58आँखें बंद कर लूँ, अंधभक्त होना है, तुम यहाँ हो जाओ, याद रखो मैं
- 1:34:04तुम्हें भटकाऊ मैं तुम्हें डुबोंकन मैं तुम्हें सभी पापों से
- 1:34:12मुक्त कर दूंगी। अहम् पांव सर्व पापे भ्यव मोक्ष
- 1:34:16श्यामी माँ सुच्चा सर्वधर्माण पर तज्य माँ में कम शरण पर सर्प एक
- 1:34:23मेरी शरण में आ जाओ, सब्सक्राइबर हो जाओ प्रथम बार मैं तुम्हें
- 1:34:31आमंत्रित करती हूँ। तुम अगर सुखी होना चाहते हो, उस
- 1:34:41अमृत की बूंद तक पहुंचना चाहते हो तो इस कूड़े कबाड़े को छोड़ उन
- 1:34:52चरम सुख के क्षणों से। अरबों खरबों गुना ज्यादा आनंद
- 1:34:57वहाँ ले जाऊंगा तुम्हें जहाँ तुम्हारा दिल झूम जाएगा हो हजूर
- 1:35:09तुमको। सितारों पे ले चलूँ दिलजौंजा ऐसी
- 1:35:22बहारों में ले चलूँ और। है जो तुमको।
- 1:35:42धन्यवाद।