Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Apr 25 - कैवल्य कैसे प्राप्त करें? कैसे ईश्वर के हाथ का खिलौना हो जाएं? फाका और संथारा में क्या फर्क है?
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- 0:04कुमारस्वामी, भगवान महावीर का फाका और जैन मुनियों का संसार।
- 0:27इसमें क्या फर्क है? ये छोटे छोटे प्रश्न हैं।
- 0:41पूछने वाले भी कमाल के हैं न बताऊँ?
- 0:49तो फिर पूछते ही चले जाते हैं जैसे ज़िन्दगी मृत्यु का सवाल हो,
- 0:57तुम उनको बीच में से निकाल दूँ, फारिक कर दूँ तो ज्यादा अच्छा है।
- 1:07वैसे तुम्हे एक बात बता दूँ। ये प्रश्न उठते नहीं थे आप जो भी
- 1:14पूछते हो, जो भी पूछते हो वॉटेवर इट इज़ अगर आपने मेरी बात मानती?
- 1:29क्रियायोग करो, ज्ञान में उतरो, वीडियो सुनते रहो इससे आपको
- 1:35इंस्पिरेशन मिलेंगे। बहुत सी भ्रांतियां मान्यताएँ
- 1:45समाप्त हो जाएंगी और फिर तुम्हारे।
- 1:51भीतर यह प्रश्न उठे, लेकिन मैं समझता हूँ कि तुमने ऐसा या तो कुछ
- 2:00किया नहीं या किया है तो अनमने भाव से किया है आपने पूरी
- 2:09सामर्थ्य। इन क्रिया में झोंकी नहीं खैर,
- 2:24कभी भी आ जाना, इस रास्ते पे आ जाना।
- 2:31क्योंकि इस रस्ते के बिना कल्याण नहीं है।
- 2:39भगवान महावीर का फांका, जैन मुनियों का संसार संसार और भी
- 2:48बहुत से लोग करते हैं। तो दोनों में क्या फर्क है, आओ तो
- 2:59मैं समझा दूँ। संथारा पाप है, फांका पुण्य सौंको
- 3:14मंत्र। महावीर का सिद्धांत है कि उस घर
- 3:20से मैं बिक्षा लूँगा, चाहे मेरे स्थानों पर कितने ही लोग भोजन ले
- 3:27के आ जाए, लेकिन मैं खुद ही जाऊंगा।
- 3:38और एक घर पे जाऊंगा उस घर पे जीस घर पे प्रकृति मेरे संकल्प को
- 3:47पूरा करती है वो संकल्प बड़े ऊंट पटांग होते हैं।
- 3:55यहाँ मंतव्य को स्पष्ट समझ लेना महावीर की जीवेशणा मलिक वह जीना
- 4:01तो नहीं चाहते, लेकिन मरना भी नहीं चाहते वो प्रकृति की इच्छा
- 4:12से चलते हैं बाबा नानक का वही शब्द।
- 4:20जो तुद पाप है वो छोड़ देते हैं प्रकृति पे मेरी ये शर्त है अगर
- 4:27जिंदा रखना है मेरी जीवेशणा तो मर गई एक एक अल्फाज़ को बड़े गहरे
- 4:33में उतार लेना। मैं जीना खुद से तो नहीं चाहता।
- 4:41हे माता प्रकृति अगर तेरी इच्छा है कि मैं जिंदा रहूं, तुने मुझसे
- 4:47कोई काम लेना है तो फिर मेरी ये शर्त है।
- 4:55अगर ये पूरी हो जाए तो मैं ये समझूंगा कि तुम मुझे चिंता रखना
- 5:00चाहती हो, अन्यथा मेरी शर्त मत पूरी करना।
- 5:06यह तो है शर्तों के ऊपर। लेकिन इनमे बेसिक फर्क है।
- 5:16महावीर की जीवेशणा मर गई इसलिए मैं कहती हूँ ये पुण्य है, जिसकी
- 5:26जीवेशणा मर गई, उससे जो भी कुछ होता है वह पुण्य होता है।
- 5:38जैन मुनियों का संसार क्योंकि ना तो उनके पास लोग आएँगे, टिफिन ले
- 5:49के ना ही वो जाएंगे। अपनी शर्तों के मांगने भी नहीं
- 5:55जाएंगे। लेकिन उनकी जीवेषण नहीं मरी ये
- 6:05समझ लेना वो तंग आ गए हैं तंग आना और जीवेषण का मरना देर इस ए ह्यूज
- 6:17डिफरेंस बिटवीन दी टू बड़ा विशाल। अंतर है।
- 6:21दोनों इनकी जीवेशियां नहीं मर गई, लेकिन ये तंग आ गए।
- 6:33जीवन से कोई भी कारण ज़िन्दगी में इनको लगता नहीं।
- 6:45कि जीना चाहिए तो फिर ये मरना चाहते हैं।
- 6:50मनुष्य एक अति से दूसरी अति भर जाता है।
- 6:55यह बेसिक सूत्र है। जब अतियों का त्याग हो जाता है,
- 7:03वो तो अति नहीं करता है। महावीर भक्ति नहीं करते, महावीर
- 7:10थोड़े आगे निकले हुए हैं, मध्य में ठहर जाते हैं, लेकिन महावीर
- 7:19का अपना जीवन का ढंग है। वो।
- 7:27कहते हैं अगर तू जलाये तो मैं जी लूँगा मेरी खुद की कोई तमन्ना है
- 7:34जैसी कठपुतली कठपुतली की नाचने की कोई अपनी इच्छा नहीं होती।
- 7:42वह दृश्य हाथ उसे निचाते हैं, वो नाश्ता नहीं निचाते ठहरा रहता है।
- 7:54संथारा खुद से चुन्नी हुई, मौत है, कोई फर्क नहीं।
- 8:00अगर कोई फंदा लगा के मर जाये, सुसाइड का कोई अन्य साधन खोल देना
- 8:10या जानबूझ कर खाना बंद कर दे, लेकिन महावीर जानबूझ कर खाना मत।
- 8:20महावीर कहती मेरी शर्तों में भेज दे, ये है बड़ा कठिन मुद्दों तक
- 8:28बरसों बरसों तक प्रकृति चाहती थी वो जीएं और इनके प्रतीक संकल्प
- 8:35पूरी होती थी। क्योंकि प्रकृति उन्हें जलाना
- 8:41चाहती थी अभी तुमसे काम लेना है अभी नहीं शर्त रखो, हम पूरी
- 8:49करेंगे और प्रकृति उसकी शर्तें पूरी करती।
- 8:55है। यह कोई आत्मघाती यह तो उसकी मर्जी
- 9:01के ऊपर है और वह जब तक जलाना चाहती है बरसों तक यह साधना चलती
- 9:08रहेंगी। महावीर जी मरे नहीं।
- 9:19लेकिन तुम आयोजन कर लेते हो पता है भोजन ना लूँगा, बिलकुल मर
- 9:24जाऊंगा, पानी भी लेना बंद कर दो और ऑक्सीजन भी लेना बंद कर दो
- 9:33तुरंत मर जाओगे कुछ मिनटों में। यही तो है फंदा लगाने वाला
- 9:43ऑक्सीजन लेना बंद कर देता है। गर्दन का टेटुआ टूट जाता है खंड
- 9:49विखंड कर देता है शरीर को। यह आत्महत्या का एक रूप है।
- 9:56संथारा जिन्होंने संथारा दिया, वह पाप किया।
- 10:04जीवन से तंग आए लोग आत्महत्या करते हैं।
- 10:15यद्यपि आत्महत्या एक बड़ा साहसिक कदम है।
- 10:20लेकिन नेगेटिव पॉज़िटिव है, पॉज़िटिव स्टेप है महावीर का, वो
- 10:27कहते हैं देखो हम जींग माँ हम जींग।
- 10:36लेकिन जब तक तुम भोजन दोगे, हम हमारी ये शर्तें पूरी करो, हम
- 10:43जाएंगे मांगने के लिए भिक्षा और प्रकृति उनकी मुश्किल से मुश्किल।
- 10:52प्रतिज्ञाएं पूर्ण करती संकल्प पूरे करती ईश्वर के घर किसी चीज़
- 11:04का खून गाटा नहीं है, बड़ा विराट है लेकिन तुम?
- 11:11उसे आँखें खोलकर देखते हैं। यही मुश्किल है।
- 11:17जो संथारा करते हैं, उनकी जीवेशणा नहीं।
- 11:22हमारी जिंदा तो वो रहना चाहते हैं स्थान में उनको सब कुछ मिलेगा।
- 11:32खाना मिलेगा, पानी मिलेगा सब मिलेगा कई बार संथारा के लिए एक
- 11:44ये भी कारण होता है कि मरने के बाद सम्मान मिलेगा।
- 11:49क्या है? 10 दिन भूखे रहने लगे।
- 11:53जैसे सती प्रथा से चीता में कूद जाओ, ये तो मरगिया है, समाज इजाहत
- 12:02नहीं देता और शादी की बस बेहतर है कि तुम कूद जाओ।
- 12:09उसको नशा करा देते हैं, भंग का बड़े बड़े नशे कराते हैं।
- 12:15उस नशे में वो सम्मोहित हो जाती और उसे सती का मंदिर दिखाया जाता।
- 12:20ये देखो मंत्र टलियां बज रही है। तुम्हारी आरती उतर गई और बेहोशी
- 12:26के इस आलम में उचित समय जाती। तुम्हें अगले जन्म में भी सम्मान
- 12:36मिलना चाहिए। स्थापित तुम्हें लोग और यही
- 12:43शक्तियां के साथ किया गया, लेकिन यह गलत था शक्ति की खुद की इच्छा
- 12:50नहीं, कोई एक। कभी हुआ, कभी एक हुआ लाखों सतियाँ
- 12:58हुईं तो कभी एक हुआ। बहुत सी स्त्रियों ने डक के मारे
- 13:11जाला में कूद गईं। लेकिन ये संतितव नहीं था, ये समझ
- 13:20लेनी यह डर था। यह भय था संथारा जिवेशणा नहीं
- 13:35मरे। मान चाहिए सम्मान चाहिए।
- 13:40ये भी कारण हो सकता है ये इतने उपद्रव हैं, सुख कोई है नहीं।
- 13:48जैन धर्म के मुनियों को सुख क्या है बताओ गोर से देखा जाये।
- 13:56तो मैं कई बार सोचता हूँ हसिया मत कि ये लोग जीते क्यों है।
- 14:09भीतर तो कुछ हुआ नहीं है। महावीर की समझती है कि वह क्यों
- 14:15जीता है? लेकिन इनके भीतर तो कोई आनंद जैसी
- 14:19चीज़ उपजी नहीं, फिर ये जीना क्यों चाहते हैं?
- 14:30ज़रा भी फैसिलिटीज नहीं हवाई जहाज बना दिए गए।
- 14:38इन्हें यह परमिशन नहीं। यह समाज के गुलाम है के किसी वाहन
- 14:45का सवार करने में पैदल जाना पड़ेगा।
- 14:50गर्मी हो, सर्दी हो, अन्न सिला कपड़ा।
- 14:58सूरज छिपने से पहले खाना पानी को छान कर देना कुछ नियम है वो
- 15:04तुम्हें मानने पड़ेंगे और फिर ये भी बंधन है और जीस संत के ऊपर
- 15:11बंधन हो। वह संत होता ही नहीं।
- 15:15संत वो जो बंधनों को नहीं मानता, संत वो जो बंधनों से मुक्त होकर
- 15:23अपने बंधन आँख बनाता है, उसको क्या कहते हैं?
- 15:28उसको कहते हैं चरित्र। अनुकरणीय चरित्र जिसे कृष्ण कहते
- 15:35हैं के आध्यात्मिक व्यक्तियों का जीवन इतना पवित्र और ऐसा होना
- 15:41चाहिए कि उनके शिष्य उनके अनुगामी बन सकें।
- 15:47इतना शुद्ध, सरल, शांत। समाज का गुलाम आज का मुनि समाज का
- 15:57गुलाम हो गया है। अगर कोई भी कुताही की तो समाज
- 16:04खाने को नहीं देगा विद्र हो जायेगा।
- 16:08समाज से निकाल दिया जाओ जैन समाज से ये मजबूरी है भाई।
- 16:29जीने की लाल साम्राद्धि प्रकृति जलाये तो जलाये अपनी कोई इच्छा ना
- 16:39रही मैं अपनी इच्छा से मरूंगा आई विल हर्ट कमिट सुसाइड ऐट ऑल ये है
- 16:46महावीर। आई विल कमिट सुसाइड, मैं
- 16:53आत्महत्या कर लूँगा खाना नहीं खाऊंगा, पानी नहीं पीऊंगा।
- 16:59भले ही मेरे सामने 1000 टिफिन रोज़ पड़े हों, लेकिन नहीं
- 17:04खाऊंगा। क्योंकि मैं जीना नहीं चाहता, ये
- 17:09जीना नहीं चाहता। ये किन्हीं कारणों से है।
- 17:15महावीर का जीना नहीं चाहता, ये किन्हीं कारणों से नहीं, ये अकारण
- 17:20है। कोई कारण है?
- 17:23बस वो मिल गया जिसकी जरूरत है। फिर और किसी चीज़ की जरूरत नहीं।
- 17:34अब समाज चले चले ना चले कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 17:52अगर वह संघ ना चले तो सारा समाज संघ चले, दुनिया चले इससे कोई
- 18:01फर्क नहीं पड़ता। प्यारा संघ चले।
- 18:09713 नहीं। साथ तेराने संग दुनिया चले भी तो
- 18:33क्या है? एक तू ना?
- 18:41मिला। एक।
- 18:47तो ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है?
- 18:58एक तो ना? तो न तो न मेला।
- 19:15अकारण है क्योंकि जो मिल गया जो चाहिए था मिल गया जन्मो जन्मो की
- 19:19खोज पूरी हुई, अब कोई कारण नहीं जीने का।
- 19:25मैं नहीं जीना चाहता, लेकिन मैं मरना भी नहीं चाहता।
- 19:29आप इस फर्क को अच्छे से समझ लेना। सूक्ष्म जैन मनी जीना चाहता है।
- 19:43हालात कुछ ऐसे हैं। कि जीने देते नहीं और अगर फंदा
- 19:54लगा के मर जाएगा तो बड़ी बदनामी होगी।
- 19:58बाद में सुनमान नहीं मिलेंगे। या तो फिर सारी उम्र का किया घरा
- 20:07शून्य हो गया। फिर उसने एक और रास्ता पूजा उसको
- 20:17संथारा कहते हैं, समाज में मान प्रतिष्ठा भी बनी रहेंगी और
- 20:26अपूर्ण। बस बाहर भेज आएगा इलेक्ट्रिक के
- 20:32नहीं है मतलब पानी में नहीं कूदना आग में नहीं जलना छत से नहीं
- 20:42कूदना गाड़ी के नीचे नहीं आना। जहर नहीं पीना कुछ नहीं करना,
- 20:48जिससे ऐसा लगे समाज को इसने आत्महत्या की है।
- 20:54आत्महत्या करने वाले को समाज सम्मान नहीं देता मरने के बाद।
- 21:09इस तरह से अगर तुम से हत्या कर लोगे आत्महत्या भूखे रहकर तो वह
- 21:15तो बड़ा आपको सम्मान मिलेगा। सांतारा रख लिया बड़ा सुन्दर नाम
- 21:23लेकिन आपको पता नहीं गहरे अर्थों में।
- 21:28जी विष्णु है ऐसे व्यक्ति मुक्त नहीं होते।
- 21:34कैवलिक को प्राप्त जो कैवलिक को प्राप्त है, वह अपने आप में उतर
- 21:45गया, स्वय में उतर गया। और जो शह में उतर गया अब समझना
- 21:53फर्क को वह इतना आनंद है कि उस आनंद के आलम में खाना भूल जाए।
- 22:07और खाना न खा सके। भूलने के कारण ये तो है सही है,
- 22:17ये होता है यही हुआ जब वो केबले में उतर जाती हूँ उस केबले में
- 22:25इतना आनंद है। और उस कैवल्य की अवस्था को खाने
- 22:29की जरूरत नहीं है। पग बिन चले सुने बिन कान बिना
- 22:48इन्द्रियों के वह सब करता है वहाँ, पहुँच जाते हो तुम।
- 22:56जहाँ आनंद की घनी बरसात हो रही है।
- 22:59हर पल नामकुमारी, ननका चढ़ी रही दिन रात अगर उस अवस्था में
- 23:07पहुँचकर खाना याद ही नहीं है। यह बात कुछ और है तुम्हें भूख तो
- 23:22लगे और कोई खाना ले के आ जाए और तुम कहो नहीं, मैं नहीं कहूंगा
- 23:32मैं संथारे पे हूँ। यह एक जिद्द है।
- 23:36जिद्द समझना, बात को दूसरे पश्न में इसकी सहायता मिलेंगे।
- 23:45खाने का मन करे तुम कहो नहीं खाना है।
- 23:56नहीं खाना है। हमने सत्या आग्रह किया है वो
- 24:03गाँधी का सत्याग्रह है, जो व्यक्ति अज्ञानी है, गाँधी अभी तक
- 24:10का अज्ञानी है। निःसंकोच ज्ञानी सत्याग्रह नहीं
- 24:17करता, ज्ञानी केबली में उतरता है, अज्ञानी ही सत्याग्रह करता है और
- 24:28जो संथारा करते हैं वो अज्ञानी। भूख लगती है, तुम जबरदस्ती करते
- 24:43हो, तुम ही काम वास नहीं करती है, तुम दबा लेते हो, प्यास लगती है,
- 24:55दबा लेते हो। लेकिन कुछ ऐसी हैं क्रियाएं जिनको
- 25:02तुम दबा नहीं सकता। इम्पॉसिबल लघु शंखाई कहाँ तक
- 25:11रोकोगे? ब्लैडर बढ़ जाएगा धीर की शंखाई
- 25:16कहाँ तक रोकोगे? प्रकृति का अपना नियम है चलने का
- 25:27पूछे दीर्घ शंका और लघु शंका मल मूत्र का प्रयत्न ठीक।
- 25:41थोड़े से अल्फाज़ शिष्टाचार के हिसाब से व्रत लेता हूँ।
- 25:47नहीं समझाए पूछ लिया आपको कई बार थोड़ा सा मॉडर्न हो जाता हूँ।
- 26:05भूख लगी है, लेकिन नहीं खाना है। यह एक जिद है, महावीर की जिद
- 26:15नहीं, महावीर का संकल्प है। ये प्रश्न बीच में आ गया।
- 26:19दूसरा एक मित्र ने प्रश्न किया था जिद?
- 26:23और संकल्प में क्या फर्क है? जैन मुनि जिद करता है, यद की उसे
- 26:30भूख लगती है, यद की वो जीना चाहता है लेकिन यद करता है 1000 वासनाएँ
- 26:38इस जिद के पीछे 1000 वासनाएँ कतारबद्ध कड़ी।
- 26:43समाज मरने के बाद स्टैचू बनाएगा, सीधा लेख लिखेगा, उसकी याद में
- 26:48स्मृति मनाई जाएगी, उसको सम्मान मिलेगा, समाज में नाम होगा,
- 26:55प्रतिष्ठा होगी। हजारों कारण हैं।
- 27:04और इस मान को बटोर ये बड़ी मुश्किल से आया अवसर है।
- 27:14अब ट्रेन बन गई, झंडी दिखा दो तुम ऐसा मत करो, श्रेय लेने में कोई
- 27:21कसर ना छोड़ो। काम कोई करे, काम विज्ञान करें,
- 27:31साइंटिस्ट माता को पाई करें दिन रात पक्ष ते रहे और अपूर्ण
- 27:36बिल्कुल अशिक्षित आदमी, जब चंद्रयान पहुँच जाए।
- 27:42सफल होकर तो झंडी लेकर आ जाएंगे। क्रेडिट मुझे मिलना चाहिए, बस ऐसा
- 27:50ही तुम क्रेडिट लेना चाहते हो। तुम महावीर बनना चाहते हो जैनबनी
- 27:57महावीर बनना चाहता है, महावीर बन नहीं सकता।
- 28:00महावीर तो एक ही ढंग से माना जा सकता है कैबेल में उतर के जहाँ
- 28:05व्यक्ति अकेला रह जाता है, दूसरा होता अभेद अद्वैत सभी संतों ने जो
- 28:16बात कही अलफाज़ अलग अलग बदली। बात उसी तरह से की है।
- 28:23तुम लड़ मत करो, इस बार अच्छे बच्चे बना करो।
- 28:38जैन मुनि जिद करता है, महावीर संकल्प करते हैं, बस इसका मेरे
- 28:43ख्याल में अर्थ आप? विराट रूप से विशिष्ट रूप से समझ
- 28:49गए होंगे। महावीर का फाखा और जैन मुनि के
- 29:02संसार में क्या फर्क है? जैन मुनि जिद करके मर जाता है,
- 29:06आत्महत्याः पाप। और महावीर जिद नहीं करते, संकल्प
- 29:18करते क्योंकि जिद को पूरा नहीं कर सकती।
- 29:24प्रकृति प्रकृति क्या करेगी? भक्तों को भेज दें कि नहीं महाराज
- 29:29खाई है नहीं, नहीं यार, मैं बड़ी जरूरत है।
- 29:35काम दबाएंगे, मेहनत करेंगे, खुशामद करेंगे, रोएंगे चलाएंगे और
- 29:42सच भी है। जिससे प्यार है उसका बिछु
- 29:48बर्दाश्त नहीं होता। झूठा नहीं है समाज संत के प्रति
- 29:54समाज झूठा नहीं होता, संत झूठा हो जाये तो समाज क्या करे तो समाज
- 30:03कहता है नहीं मनी जी ऐसा मत करो, हमें तो बड़ी जरूरत है।
- 30:09बड़े शोक से सुन रहा था ज़माना, हम सो गए दास्तां, कहते कहते तो
- 30:18मत सो जाना मुनि हम आपकी हर इच्छा पूरी कर देते हैं, हुकम करो।
- 30:27लज़ीज़ जो व्यंजन जो आप खाना चाहते हो, हम लाते थे, आप हुकुम
- 30:32कीजिए हुकुम सिर माथी लेकिन कृपा करके मरियम।
- 30:47समाज बाबा को हो जाता है और इस भावना से मुनियों को और गहरा बल
- 31:00मिलता है। हाँ, ये अभी इतना मान दे रहे हैं,
- 31:04बाद में तो ये। स्थान कब बना देंगे?
- 31:07मेरे नाम का तो चलो चलो तोतापुरी देर क्यों करते हो, बस अड़े रह न
- 31:21और वह अड़ जाता है। जो अड़ गया वह मर गया मर जाता है
- 31:35माया मरी ना मन मरा, मर मर गए शरीर आशा तृष्णा न बनी, कह गए
- 31:43भक्त कबीर। आशा नहीं मृती त्रिशान मृती आशा
- 31:47कहाँ मरे बाद में पूजे जाएंगे, क्षति जल जाए, बाद में पूजी जाए
- 31:54कि मंदिर बनेंगे यहाँ जैन मुनियों के मंदिर बनेंगे, संस्थान का
- 32:00बनेंगे। तो मर जाओ क्या हर जाए वैसे भी तो
- 32:04मरना और कौन जाने अगले पल वैसे ही मर जाए तो बढ़िया मौत भी कहाँ
- 32:12आएगी? जीवन का त्याग व्यर्थ नहीं होगा,
- 32:18सार्थक हो जाएगा। लेकिन ध्यान रखना ये सारी बातें,
- 32:27ये सारे अलंकार महावीर नहीं चाहते।
- 32:30कम से कम महावीर उस अवस्था में पहुँच गए जहाँ देर इस नो नीड यहाँ
- 32:39जाकर। किसी वस्तु की या किसी चीज़ की
- 32:42कोई आवश्यकता नहीं रहती। कैवल्य वह अपने आप में अकारण
- 32:47प्रसन्न है। वह आनंद का समुद्र और खजाना हो
- 32:53गया है। अब उसे और कुछ नहीं चाहिए।
- 32:57तुम्हारा कुछ भी धन, संपत्ति, मान, सम्मान।
- 33:02कुछ भी उसे आकर्षित नहीं करता। वैरज्ञ नहीं हुआ उसे अब यहाँ समझ
- 33:11लेना महावीर को वैरज्ञ नहीं हुआ। महावीर को वैराग्य के बाद मोमक्षा
- 33:18और मोमक्षा के बाद कुछ मिल गया है।
- 33:21अपना आपा मिल गया है फिर वो आपका मरने के बाद आपका मान सत्कार नहीं
- 33:32ढूंढेगा। ये मान सत्कार वो ढूंढेगा जैन मनी
- 33:37ढूंढेगा महावीर नहीं ढूंढेगा जीसको मिल गया वो, जिसके मिलने से
- 33:46सब मिल जाता है हो ना तो अब कुछ डिमॅंड करता है, अब ये ध्यान से
- 33:53समझ लेना। ना ही मरने के बाद मुझे कुछ मिले।
- 33:58इसकी डिमांड करता है। सारे धर्म तुमसे कोई डिमांड करते
- 34:02हैं, मरने के बाद जन्नत मिलेगा, वहाँ हो रहे हैं यहाँ शराब मत
- 34:08पियो वहाँ शराब के झरने बहते हैं चश्मे।
- 34:14यह लोभ है, लेकिन महावीर को कोई लोभ नहीं मानता।
- 34:18क्यों? तो तुम कहते हो शराब के चश्मे
- 34:25वहिश्त में बहते हैं। ओह वहिश्त उसने जीते जी पा लिया।
- 34:50ही रुपयों गांठ घटिया बार बार बाबू।
- 35:07क्यों? खोले।
- 35:13मन मस्त हुआ तो क्यों बोले मन मस्त हुआ।
- 35:27फिर क्या बोले हंस पायो मानसरोवर हंस पायो?
- 35:48मानसरोवर तालितलिया तालितलिया। मन मस्त तो क्यों बोले मन मस्त
- 36:16हुआ फिर क्या बोल? जब मन मस्त हुआ, केवल की प्राप्ति
- 36:24हो गई, आनंद में डूब गया, रस खुद ही हो गया, रस में लिपटाने खुद ही
- 36:35रस हो गया रस वैसा रस रूप हो गया, रस ही हो गया।
- 36:43वह मरने के बाद तुम्हारा मान सम्मान ढूंढे।
- 36:49तुम उसकी अर्थी से जा के निकलो और यहाँ तो एक रिवाज है के जैन मनी,
- 36:55जो संथारा सा मर गया या वैसे ही मर गया।
- 36:59उसका दाह संस्कार जब किया जाता है, बोली लगती है, सेठों की लो
- 37:04अग्नि, मैं दूंगा 10,00,000 रूपया, दूसरा कहेगा 20,00,000
- 37:11जिसके नाम वो बोली छूट गई, वो अग्नि देगा और यहाँ सलमान उसे मिल
- 37:16गया। समाज के बनाये हुए थ्री कहें मान
- 37:22सम्मान लेने के और वर्षों तक याद रखेगा।
- 37:25फलां व्यक्ति ने फलां गुरु के महासमाधि पर महासमाधि कही जाएगी।
- 37:34समाधि ने। जब भी है तो समाधि भी है।
- 37:41इतने रुपये की बोली लगा के इनाम जीता था प्रथम आय अब ये सारी उम्र
- 37:46तुम्हारी क्षति पे बैठा रहेगा मुँह गदलेगा मैं वो ही हूँ।
- 37:54अरे गंगा बहुत दूर निकल गई भाई गंगा तो कब की समुद्र में मिल गई
- 38:04तुम वो ही बात पिट रहे हो, अभी तो समझ आ गई तुम्हें दो प्रश्नों के
- 38:12जवाब हो गए इसमें। एक पूछा कि जिद और संकल्प में
- 38:16क्या फर्क है, बीच में ही आ जाए। दूसरा पूछा कि महावीर के फाका में
- 38:27और जैन मुनि के संथारा में क्या फर्क है?
- 38:30जो संथारा करते हैं, जबरदस्ती वो आत्महत्या करते हैं।
- 38:35ज़रा सोचो अगर ना संतारा करते तो कोई भोजन की कमी ना थी भक्त लोग
- 38:41आस पास करें, रो रहे हैं खाओ उठ के खा लो अरे भाई तुम्हे प्रकृति
- 38:50थोड़ी मार रही है। अगर महावीर की तरह नववृत्ति चाहती
- 38:58हो, निर्वाण चाहती हो, कैवरली चाहती हो, निरजरा जाती हो तो फिर
- 39:10तो तुम। प्रकृति की बात माननी पड़ेगी,
- 39:16प्रकृति तुम्हें हिलाना चाहती हो। तुम जीव और प्रकृति तुम्हें
- 39:22खिलाना चाहती हो। तुम खाओ, महावीर की जीविसना मर
- 39:29गई। महावीर नहीं जीना चाहती, प्रकृति
- 39:31जानती है, नहीं जीना चाहती, लेकिन प्रकृति को जरूरत है उसकी यहाँ
- 39:38समाज को जरूरत है। उसकी दोनों बातों में बड़ा भेद
- 39:42है। ये बारीक हैं।
- 39:43सारी बातें ध्यान से समझ लेना इन। यहाँ जरूरत है समाज को वहाँ जरूरत
- 39:53है प्रकृति को प्रकृति ने कोई काम लेना है मुझे बचा लिया था आठ बार
- 39:58बचा लिया था। प्रकृति ने कोई काम लेना है और
- 40:02बाद में पता चला कि क्या काम लेना था।
- 40:13इन पाखंडियों का पाखंड तोड़ना और उस रस का पदार्पण करना, उस रस का
- 40:20व्याख्यान करना। ये दो काम थे मेरे और मैंने बखूबी
- 40:24निभाए। जितना निभा सका मौत नहीं मार सकती
- 40:31उसे। जिससे उसने काम लेना है।
- 40:35वह उसे बचा लेगा फानूस बनकर जिसकी हिफाज़त हवा करे
- 40:54फानूस बनकर जिसकी हिफाज़त हवा करे वो क्षमा क्या बुझे जिसे दीपक?
- 41:02खुदा कर यो दीप क्या मुझे जिसे रोशन खुदा कर वह जीसको रोशन करना
- 41:17चाहता है आठवा मृत्यु आये और देखने वाले तंग रह गए।
- 41:28बहुत से लोग मेरे अपने थे, आज भी उस बात को याद करके थर्रा जाते
- 41:32हैं। मुझसे मेरा बेटा पूछता है क्या
- 41:36हुआ पापा? रोहित पूछता है बाबा क्या हुआ?
- 41:44लेकिन बचा लिए गए हैं। न कोई तैर न जानता था, न कोई
- 41:48रस्सी थी और सरदार सिपाही ने अपनी पगड़ी देने से इंकार कर दिया।
- 41:57यह तो दस्तार है, यह तो इज्ज़त है।
- 42:00यह जीवन बचाने के लिए यह इज्ज़त बचाने के लिए होती।
- 42:07शर्म आनी चाहिए। तुम्हें ऐसी पगड़ियों के ऊपर
- 42:12तुम्हें शर्म आनी चाहिए। तुम्हारे ही गुरु गुरु तेग बहादर
- 42:19सीज कटा देते हैं और तुम? इस शीश के ऊपर झड़ी हुई पगड़ी
- 42:26किसी ज़िन्दगी को बचाने के लिए नहीं दे सकते।
- 42:28किसी को तुम जिंदा रह रहे हैं कि योगी सो रही हो लेकिन शर्मसार हुआ
- 42:39होगा वो। जब उस वृहद ने विराट ने जिसकी ले
- 42:44ला है जिसने काम लेना था उसने बचा लिया।
- 42:49उसके पास 1000 लाख अनेक अनंत अनकिणित साधन हैं जिसने जीसको
- 42:59बचाना है। बचाले का?
- 43:09जीवेष्णु भर्ती महावीर से जीवेष्ण नहीं मरी जैन मनी अब ये दो फर्क
- 43:18पर है। महावीर शर्त रखता है।
- 43:26इस शर्त पे भोजन दे दो मैं खुद को नहीं जीना चाहता स्पष्ट बात बड़ा
- 43:30ईमानदार है और प्रकृति जब तक बरसों तक प्रकृति जलाती रही, कठिन
- 43:37प्रतिज्ञाओं के बावजूद भी संकल्प इतने गहरे तुम सुनकर हैरान हो
- 43:43जाओगे। लेकिन प्रकृति चाहती है कि नहीं
- 43:48भाई तुमने अभी बहुत कुछ देना है मैंने तुमसे।
- 43:54काम लेना है मेरे। हाथ के खलोने हो गए हो, अब यहाँ
- 43:58समझ लेना यह बात फिर गहरी आ गयी। जैन मनी अभी उसके हाथ का खिलौना
- 44:05नहीं बना। उसने उसके हाथों में छोड़ा नहीं,
- 44:09कुछ उसने स्वयं के हाथों में रखा हुआ है सब महावीर उसके हाथ का
- 44:14खिलौना होता है, तुम पूछ लेते हो कौन करता है?
- 44:23क्या हम कुछ करने में स्वतंत्र हैं?
- 44:27जाके वही करता है। अब इसका उत्तर यहाँ समझा जाएगा।
- 44:31आपको थोड़ा सा गहरे समझोगे तो समझा जाएगा अगर तुम जैन बोनी की
- 44:39तरह हो। तो फिर तुम करता हो, तुम ही जिओगे
- 44:44तुम ही मरोगे, तो फिर तुम उसके हाथ का खिलौना नहीं होगे, क्योंकि
- 44:48तुमने समर्पण नहीं किया, तुम उसके हाथ का खिलौना नहीं होगे, तुम
- 44:53अपने हाथ का खिलौना हो, तुम जैसा चाहते हो अपना जीवन जीते हो,
- 44:58इसलिए बुद्ध ने कहा। अप दीपो भवा वो हाथ का फ़िल्म आनी
- 45:07बुध को नहीं नचा पाएगा। परमात्मा बुध खुद से ही करेगा जो
- 45:12करेगा और उसके परिणाम उसके सामने आएगा।
- 45:21महावीर जब तक उसके हाथ का खिलौना नहीं होता, तब करता है।
- 45:2712 वर्ष से ज्यादा लग गए महावीर को उसके बाद गबली की प्राप्ति।
- 45:36वह उसके हाथ का खिलौना हो गया। कितना ही कहलों संकल्प का मार्ग
- 45:42था लेकिन एक दूसरे अर्थो में वह बहुत गहरा समर्पित व्यक्ति था।
- 45:53उसने समर्पण कर दिया था कृष्ण की तरह।
- 45:59इसलिए मैं इनको महावीर को कृष्ण के बिल्कुल पैरलल उसी क्षेत्र में
- 46:05खड़ा करता हूँ। विरोधी धुरों में।
- 46:18जो उसके हाथ का खिलौना हो गया। यहाँ आपके प्रश्न का जवाब मिल रहा
- 46:22है। जो खिलौना नहीं हुआ वह करने में
- 46:28स्वतंत्र है। प्रकृति कोई किसी तरह का प्रावधान
- 46:32नहीं करती। और जो उसके हाथ का खिलौना हो गया,
- 46:39कौन होगा उसके हाथ का खिलौना? जो 100% उसके चरणों में समर्पित
- 46:44हो जाएगा, उसके हाथ का खिलौना हो जाएगा और उसके।
- 46:48100। प्रतिशत समर्पित होना।
- 46:51तुम्हारी अपनी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के कारण ही संभव है।
- 46:56अगर 1% पॉइंट 01% भी तुम्हारे समर्पण में कमी रह गई तो वह तो
- 47:03भली प्रकार जानता है। तुम भी न जान पाओ अगर।
- 47:11कहाँ काँटा अड़ गया? लेकिन वह तो जानता है घट घट के
- 47:17अंतश की जानत भले बड़े की पीर, कुछ जानत वह जानता है।
- 47:24कुंडी फंसी रह गई भाई अभी पॉइंट 01 समर्पण नहीं हुआ।
- 47:30इसका मतलब वह नहीं ना जायेगा। आपको चले गए, उनके ख्याल आए तो
- 47:47आते। चले गए।
- 47:55उनके ख्याल आए तो आते चले गए। दीवाना ज़िन्दगी को बनाते चले गए
- 48:22उनके ख्याल। आए तो आते चले गए।
- 48:35जब ऐसा हो जाता है, उनके ख्याल आए तो आशा आते चले गए।
- 48:42दीवाना ज़िन्दगी को बनाते चले गए तुम जब तक दीवाने ना हो जाओगे
- 48:48100% दीवाने यानी समर्पण बस उसकी ही याद आए तुम्हें याद न करना
- 48:57पड़े पुनरुक्ति न करनी पड़े। जाप न करना पड़े वो जाप आए, ख्याल
- 49:06आए आते है उनके ख्याल आए। तो आते चले गए।
- 49:20आते चले जाते हैं और तुम दीवाने होते जाते हो।
- 49:26तुम उतरते जाते हो, उसमें गहरे गहरे और गहरे और रस्त में और गहरा
- 49:33ले जाने में सहायक होता है और तुम दीवाने बन जाते हो 1 दिन।
- 49:38बस यही घटता है। समर्पण में समर्पण बुद्धि से होता
- 49:43नहीं, समर्पण में ऐसा होता है बुद्धि दीवाना हो जाती है, बुद्धि
- 49:56मस्त हो जाती है। और अंतः समय उतरना शुरू होती है
- 50:02और धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे वहाँ पहुँच जाती है जहाँ समुद्र है
- 50:10कुमारी का आनंद का। वहाँ जाकर तुम समर्पित वो ही जाते
- 50:21हो, समर्पण करना नहीं पड़ता। यहाँ तो बड़े धर्म हैं जो कहते
- 50:28हैं समर्पण कर दो और समर्पण हो गया।
- 50:30बुद्धि से समर्पण हो गया। नहीं होता ये तुम्हारे कागज़ी
- 50:34कार्रवाई हैं। ये कागजी कार्रवाई है नहीं।
- 50:45गोशाला मंदिर में सैर करने जाया करता था।
- 50:47वहाँ कच्ची पटड़ी थी। कच्ची नहर के किनारे ओह कच्ची
- 50:56पटड़ी थी। दो उड़ा करती थी, बड़ा बड़ा एक था
- 51:02दोनों तरफ तो क्या हुआ? बेईमानी का दौर सदा से रहा है।
- 51:11मनुष्य बेईमान है, स्वभाव से वह ज़्यादा से ज़्यादा इकट्ठा कर
- 51:18लेना चाहता है। अपने लिए नहीं, अपने बच्चों के
- 51:22लिए नहीं उनके बच्चों के लिए बहुत से व्यक्ति तो 100 100 पीढ़ियों
- 51:30का जोड़ जाते हैं। तसल्ली फिर भी नहीं आती।
- 51:32बात तसल्ली के हैं, कबीर एक पीढ़ी के लिए भी नहीं जोड़तें लेकिन
- 51:39तसल्ली हो जाती है, लज्जत आ जाती है लज्जत ये लज्जत बड़ी मुश्किल
- 51:49है और तृथ होते हो फिर आती है खमारी और ये आती कैसे है?
- 52:02बस उसके ही ख्याल आते हैं तुम जबते नहीं हो, मैं बार बार कहता
- 52:06हूँ उसके ख्याल आते हैं और आते हैं दीवाना, ज़िन्दगी को ये घटता
- 52:19है अपने आप। बना के चले गए उनके ख्याल आहई वाय
- 52:35गुरु वाय गुरु अपना सतनाम अल्लाह। राम रहीम राधे करना नहीं है भाई
- 52:46उनके ख्याल आएँगे जैसे अगर तुम्हें कभी प्रेम गधा हूँ
- 52:52भाग्यशाली हैं वो लोग जिनको प्रेम गधा उनको मेरी बात से है जी समझ
- 52:57में आ जायेगा। जिनको प्रेम की ये अपूर्व घटना घट
- 53:06गई और उनके बस में ना अचानक कोई आया, कोई आया।
- 53:17वह कौन था पता नहीं, लेकिन अन्नाय में चार हुए और प्यार हुआ और
- 53:26दोनों एक दूसरे के अंदर उतर गए। दोनों प्रेमिका अपने अंदर उतर गई।
- 53:36माशूका। और माशूक अपने अंदर उतर गए।
- 53:41अपने अंदर उतर के जो आनंद आता है वह उन्हें उस एक पल में इसे सतौरी
- 53:48कहते हैं। प्रेमी को सतौरी की जड़ को मिल
- 53:50जाती है, बशर्ते को शुद्ध प्रेमी हो, वासना से ग्रस्त प्रेमी न हो।
- 53:58शुद्ध प्रेमी हो उसको एक झलक मिल जाती है।
- 54:03उसे सटोरी कहते हैं, बस वहाँ से उत्पन्न होता है 1313 फिर सच्चा
- 54:10प्यार हो जाता है उसे वह गुरु के साथ सत नाम के साथ एक ओंकार के
- 54:16साथ। तो आँखें चार हुईं, दो दो आँखें
- 54:26पता नहीं कहाँ से अचानक बैठ जाते हो, तुम एक दूसरे को जानते हो
- 54:33तुमने तो नहीं किया पूर्व आयोजित नहीं था।
- 54:36सहसा घटा और बड़ी घटनाएं सहसा घटती हैं, तुम्हारे जचाने से नहीं
- 54:48घटती, तुम्हारी बिना जचाने से घटती हैं, बड़ी ब्लंट नहीं होती,
- 54:55वो पूर्व नियोजित नहीं होती, एकदम से घटती हैं।
- 55:02तुम्हें पता भी नहीं होता कब बढ़ जाएगी लाख कहा मजनू को सुंदर था,
- 55:11मजनू बहुत सुंदर था, लैला काले थे।
- 55:19नए नए नक्ष भी इतने अच्छे नहीं थे और किन्हीं भाग्यशाली लम्हों में
- 55:27दोनों के नए नचार हुए और प्यार हुआ है और मुँह का स्वर में एक
- 55:37दूसरे के हो गया है। इसे प्यार करते हैं।
- 55:43यह पूर्व न्यूज़ इतना है जहाँ एक हमारे गिद्दड़बाह में आशिक उनको
- 55:55अपनी पत्नी नहीं मिल रही थी, बड़ी जगह पर।
- 56:01लड़की देखते हैं, सुंदर से खूबसूरत है लड़की देखते हैं लड़की
- 56:06को तो पसंद आ जाती है लेकिन उसे लड़की पसंद न होती।
- 56:16वह हाइट देखता, कमर देखता, हिप देखता।
- 56:21और रिजेक्ट कर देता हूँ। मैंने कहा तुम चाहते क्या हो?
- 56:27अरे 47 लड़कियां देख ली तुम कहते देखो जी मुझे तो एक आंकड़ा बताया।
- 56:41अब मुझे याद भी नहीं है पता नहीं उसने बताया क्या?
- 56:45243624 शायद लेकिन मुझे पक्का नहीं पता, मैं कहा ये क्या होता
- 56:52है कहता बस ये कोई फिगर होता है? 3624 ये क्या है सब हाँ बस होता
- 57:02है फिगर जब तक ये नहीं मिलेगा। मैंने कहा फिर ले के जाते हो तुम
- 57:08गाज वगैरह नहीं बस मुझे पता चल रहा था।
- 57:13मैंने कहा मेरी बात सुन ले, तू कूड़ा ले के आएगा और वह कूड़ा ले
- 57:16आया। तुम अगर अपने बुद्धि से चलोगे तो
- 57:25कूड़ा ही लेके आओगे। आज कूड़े ही आने शुरू हो गए हैं
- 57:36अगर प्यार से यही प्राणी आता हो। तो कबीर और लोई की तरह जीवन यापन
- 57:43होता नान की तरह जीवन दांपत्य का कृष्ण की तरह जीवन यापन होता।
- 57:55क्या बात है? निधि वन में गूंज रहा है महारास।
- 58:02और ऐसा महाराष्ट्र कभी किसी के साथ नहीं हुआ और काली की लूटी
- 58:11लैला के साथ मजुम की आँखें चढ़ उस क्षण में जो घटता है ध्यान रखना
- 58:18इसको। साधारण घटना मत समझ लेना तुम बड़े
- 58:22भाग्यशाली हो जिसके जीवन में ये सहज घटना घटी है।
- 58:26तुम इसे घटाने की चेष्टा करते हो, लेकिन ऐसे नहीं घटा करती है या
- 58:32प्रीप्लेंडेड नहीं होती या फोटोग्राफिकल्ली नहीं होती कि मैं
- 58:37ऐसा करूँगा, तुम फोटो कैंसिल ले लो।
- 58:40दो कदम आगे चलूँगा। तुम फोटो के पीछे चलूँगा, फोटो
- 58:43खेंच लेना। ये फोटो बाजी से होता ही नहीं हवा
- 58:50बाजी से कुछ नहीं होता। ये कागजी ये कागजी हैं सब तो मैं
- 58:56जाया करता वहाँ। तो मेरे पास 1 दिन एक इंजीनियर आ
- 59:01गया। मुझे कहने लगा आप बद्रपुर से आप
- 59:06रोज़ आते हो, मैंने कहा कितने वर्ष से होते हो?
- 59:09मैंने कहा मैं तो बहुत गुस्सा से होता हूँ, क्यों?
- 59:12क्या बात है और ये जो पटड़ी है ये।
- 59:20ये पटड़ी है मैं कहा हाँ ये पटड़ी चार बार बना दी गई है और फिर तोड़
- 59:29दी गई है और फिर बना दी गई है रिपेर कर दी गई है।
- 59:34तुम तुम्हें कुछ समझाया, मुझसे बोले मैंने कहा मुझे तो कुछ नहीं
- 59:39समझाया, कहते बस ये समझ लेना जब तुम्हारे पास कोई आए तो ये बोल दे
- 59:46ना कि ये पटड़ी चार बार बनाएगी सड़क सड़कें होती तो उस एंटर लॉक
- 59:55नहीं होती। यह सड़क पहले बनी फिर थोड़ी सी
- 59:59गड्ढे पढ़ गए, फिर दूसरी बार बनी फिर गड्ढे पढ़ गए।
- 1:00:03तीसरी बार बनी फिर गड्ढे पढ़ गए। चौथी बार बनी चार बार बनी को
- 1:00:10समझाया। मैंने कहा समझ तो नहीं आया।
- 1:00:14बस तुमसे कोई पूछे तो हरजा क्या मैंने कहा मुझे क्या हाल था और
- 1:00:21तुम ऐसा ही बोल देना, मैं तुम्हें बोल दूंगा और कुछ दिनों के बाद एक
- 1:00:27बड़ा ऑफिस रहा। यह क्या है यहाँ?
- 1:00:34नौजवान तुम यहाँ रो जाते हो। मैंने कहा मैं तो रो जाता हूँ तो
- 1:00:39ये क्या है? मैंने कहा एक एक भद्र भूषण था।
- 1:00:45ये सड़क बनी थी। कभी ये तो बिलकुल रेत उड़ रहा है।
- 1:00:51मैंने कहा मेरे पास एक बदरपुर शहर था, कुछ दिन पहले वो कहता था ये
- 1:00:57चार बार बनी। पहली बार बनी गड्ढे पड़ गए, दूसरी
- 1:01:04बार बनी गड्ढे पड़ गए, ठेकेदार था।
- 1:01:10तीसरी बार बनी गड्ढे पड़ गए। चौथी बार बनी अब चौथी बार भी
- 1:01:14उखाड़ती गई वो उसने जोड़ लिया। मैं कह ये क्या कहता कि तुम कह
- 1:01:19देना भाई मेरे सामने तो ऐसा ही दूर उठता है फाका मैं तो बरसों से
- 1:01:25देख रहा हूँ, कोई बनी नहीं। कोई देखिए ऐसा है मुझे नहीं कुछ
- 1:01:39वो कह गया था बता देना मैंने बता दिया अब तुम देख रहे हो क्या है
- 1:01:44वो कहता है ऐसा ही है क्या करें? चलो आधा आधा कर लेंगे मैं कहा कर,
- 1:01:56लेकिन प्रेम में ऐसा नहीं होता। व्यापार में तो सब होता है
- 1:02:03व्यापार में तो तुम्हारे सामने एक बिलकुल बेचारी।
- 1:02:06गरीब की छत छोड़ रही है और पंचायत में काम करने वाले लोग उनके लिए
- 1:02:14सरकार दे देते हैं और अजीव गाँधी मूर्ख नहीं वो कहते हैं जहाँ से
- 1:02:19तो ये कर पा जाता है आगे आगे पहुंचते पहुंचते पहुंचते पहुंचते
- 1:02:2415 पीसे रह जाते हैं। ये सभी सरकारों में होते है।
- 1:02:33डायरेक्ट होनी चाहिए डेपॉज़िट उसके खाते में जितना भी हो, एक
- 1:02:39पैसा भी बिना डायरेक्ट नहीं होना चाहिए।
- 1:02:43किसी को थ्रू नहीं होना चाहिए, लेकिन बेईमान।
- 1:02:46कोई न कोई रास्ता खोय जायेंगे कुछ भी करो तुम तो प्रेम में जो घटना
- 1:02:52घटती है उस वक्त वो बड़ी महान होती है, इतनी प्यारी होती है,
- 1:02:56रसीदी होती है, भलाई से बोलती न। इश्क पे ज़ोर नहीं ये वो आतिश है
- 1:03:13गालिब जो लगाए न लगे और बजाई न बने ऐसा होता है इश्क।
- 1:03:26तुम प्रेम की याद को तुम्हारी बुद्धि भुना चाहती है, तंग करती
- 1:03:32है, वो याद आती है और देखिए मज़े की बात परमात्मा को तुम याद करते
- 1:03:38हो और संतुष्ट हो जाते हो। आज मैंने 10,000 जाप कर दिया।
- 1:03:45राधे का राम का वैगुरु का सतनाम का अल्लाह का और तुम तृप्त हो
- 1:03:51जाते हो नकली नकली है यह कागजी यह कागजी है जैसे वो पटड़ी बनी थी ना
- 1:03:56कागजी वैसे ही है। ये क्या है?
- 1:04:09इश्क में ज़ोर नहीं यहाँ तुम्हारा ज़ोर नहीं चलता, यहाँ तो याद आती
- 1:04:13है। इसलिए बाबा नानक कहते हैं कि देखो
- 1:04:21प्रभु मैं याद करूँ, मेरे में तो इतनी ताकत नहीं, मैं तो सो भी
- 1:04:25जाऊंगा। 1000 काम शरीर के भी करने होंगे
- 1:04:27मजबूरी मैं किसी वक्त भूलूंगा, भूलूंगा मैं भूल न आ रहा दो भक्ष
- 1:04:33न आ रहा यहाँ कहते हैं वो। कभी याद भी ना कर पाऊं, जद भी
- 1:04:37तेरी दातें इतनी के कभी भलाऊं ना लेकिन क्या करूँ मजबूरी है सब
- 1:04:44कामगार भी करने पड़ेंगे खेती बाड़ी भी करनी पड़ेगी खाना भी
- 1:04:48खाना पड़ेगा, स्नान भी करना पड़ेगा सब लेकिन मैं मजबूर हूँ
- 1:04:53देखा। आप मत भूल जाना हे वै गुरु हे
- 1:04:59सच्ची बस सब ना जियाँ का एक दाता शो में विसरना चाहिए उसको मैं ना
- 1:05:08विसर जाऊं कभी वो मुझे याद ही आता रहे ऐसा ही प्रेम होता है।
- 1:05:14अब तुम्हें बड़े सर तरीके से समझा दिया प्रेम होता है, ऐसा जो वो
- 1:05:20घटना घटी वो भीतर उतर गई। तुमने ना घटाई थी तुम में उसका
- 1:05:24कोई योगदान नहीं, अरेंज बैरिन में तुम्हारा योगदान है, प्रेम में
- 1:05:28तुम्हारा कोई योगदान है, प्रेम तो तुम्हें बच्चू बना के रखता है।
- 1:05:34वह दोनों की अकड़ खत्म अरएन्ज मैरिज में एक की अकड़ शायद खत्म
- 1:05:40ना हो। दोनों की अकड़ बरकरार रहती है और
- 1:05:44ध्यान रखना अगर अरएन्ज मैरिज हो अगर दोनों में अकड़ होती ही है,
- 1:05:48पक्का है और अगर सुखी जीवन तुम गृहस्थ में जीना चाहते हो अरएन्ज
- 1:05:52मैरिज में। तो एक व्यक्ति अक्कड़ को छोड़ दे।
- 1:05:58गृहस्थ जीवन ठीक होता चला जाएगा, थोड़े समथली जी पाओगे अन्यथा नहीं
- 1:06:03जी पाओगे, लेकिन प्रेम प्रेम तो कोई ज्योर नहीं।
- 1:06:15लोग उनसे कहते हैं बाबा आप जा भागी तो हीन करते हो, हमें समझ
- 1:06:21नहीं आता ये महाराज श्री श्री 1842 प्रेमानंद जी महाराज तो कहते
- 1:06:29है राधे राधे करते रहो। ये पागलपन है।
- 1:06:37अरे मूरख याद किया जाता है, कभी याद आती है उसकी?
- 1:06:46याद आती भी क्या है? तुम बाहर निकालना चाहते हो,
- 1:06:50फेंकना चाहते हो वो जाती नहीं है। याद न जाए।
- 1:07:04बीते जीना की याद न जाए बीते दिनों की।
- 1:07:22आ? के न जाए जो दिल क्यों भुला
- 1:07:32उन्हें दिल न भुला याद न। दिन जो पखेरू होते पिंजरे में मैं
- 1:07:59रख लेता। दिन में जो पखेरु होते पिंजरे में
- 1:08:11मैं रख लेता, पालता उनको जतन से पालता।
- 1:08:23उनको जतन से मोती के दाने देता सीने से रहता लगा।
- 1:08:38यहाँ दिन जा बीते दिनों के जाके ना आए जो दिन दिल क्यों भुला।
- 1:08:59उन्हें दिल क्यों भूला ये होता है प्यार ये होता है क्या फतह चलता
- 1:09:12है उसकी याद आती है तुम धकेलना चाहते हो बाहर।
- 1:09:16लोग मेरे पास आ जाते हैं। बाबा ये पल कैसे बुलाएं वो वास्तव
- 1:09:21में प्रेमी होते हैं, करता हूँ, इसको धक्के मारने की नकेल बाहर
- 1:09:28निकलो, ये जाती है फिर फिर से वापस आ जाती है, क्या किया जाए
- 1:09:34बाबा ये होती है? ये होती है याद इसे कहते हैं तुम
- 1:09:39कहते हो जा राधे राधे करते रहो नहीं होगा भाई तुम 1000 लाख साल
- 1:09:50जन्म जपते हो, लोगों को बुद्धि बना के चले जाओ।
- 1:09:56तुम्हें खुद ही नहीं पता प्रेमका तुम्हें याद उसके आगे नहीं।
- 1:10:05जब तुम एक बात को बार बार दोहराते हो तो एनर्जी लेस्नेस में तुम
- 1:10:10मदहोश नहीं, मूर्छित हो जाते हो। वो मूर्छितता का आनंद है जैसे तुम
- 1:10:19दिन भर की थकान और दिन भर की मुसीबतें।
- 1:10:24वो चाहे सांसारिक दुकानदारी क्यों या बॉस ने कुछ कह दिया परेशान शाम
- 1:10:31को? तुम शराब का पैग लगा लेते हो, हल
- 1:10:36होता है कोई नहीं, तुम मूर्छित हो जाते हो जब कोई हल नहीं शाम को
- 1:10:43कोई सुबह उतर जाते हो, बस राधे राधे करने से या कुछ होता है।
- 1:10:50जीस भी चीज़ की रेपुटेशन करेंगे। तुम मुर्शीत हो जाओगे, बेहोश हो
- 1:10:57जाओगे बहोशी भी नहीं होगी। मदहोशी भी नहीं होगी।
- 1:11:02ये दोनों स्थितियां बड़ी प्यारी हैं।
- 1:11:06बेहोशी मुर्शी कब होगे? जब तुम बार बार दोहराओगे क्यों
- 1:11:14होगे एनर्जी लेस्सनेस के कारण अब इससे ज्यादा मैं क्या व्यख्यात
- 1:11:18करूँ आपको तुम करके क्यों सारे दिन वह जिकाई मारते हो शाम को तुम
- 1:11:25धर्म से गिर पड़ते हो ना और क्या है मोर्चा नींद में चली जाती।
- 1:11:32यही राम राम करते हो राधे राधे करते हो मैं कहता हूँ महाराज,
- 1:11:37पीले वस्त्रधारी कृपा करो लोगों पे मत बेवकूफ बनो, तुम उलझा कर
- 1:11:43चले जाओगे। ये पाप बुद्धों के गले पड़ जाएगा।
- 1:11:50याद आती है, याद करनी नहीं होती और तुम इसको याद करने के हिसाब से
- 1:12:01डाल देते हो। सारे धर्मों ने याद करने के हिसाब
- 1:12:04से सिमरन स्मरण को सिमरन बना दिया।
- 1:12:10यही गलती खा गए। बस करते हो मूर्छित हो जाओगे कुछ
- 1:12:16नहीं गम गलत करने के लिए गम नहीं गलत होते, तुम मूर्छित हो जाते हो
- 1:12:24या कोई तरीका नहीं है या कोई सिलिकॉन है।
- 1:12:28बॉस ने झटक दिया अब तक दिमाग पर हावी सारे दिन की ऐसा लगता है मार
- 1:12:33दूं इसका गला घोंट दूं परामी का क्या है?
- 1:12:37थोड़ी सी बड़ी पध्वी मिल गई 1 दिन हम भी हो जाएंगे इस पर कोई बात,
- 1:12:42फड़ी सारे दिन की दुकानदारी। मगज खबाई पूरी इतने दे ले, इतने
- 1:12:52दे ता हूँ जकाई मारते हो सारे दिन थक जाते हो और शाम को तुम धर्म से
- 1:13:01चारपाई क्यों करा के पड़ते हो? यह मोर्चा है जनाब।
- 1:13:08तुम इसको कुछ भी समझते हो और इस मोर्चा ने।
- 1:13:14मारे जमा के सिख ये ढेरों में बैठे कर रहे हैं पांच नंबर।
- 1:13:24जमी खा गई आसमान कैसे कैसे जवान ने मार जवान?
- 1:13:43कैसे कह तुम्हारी और क्या बिज़नेस करू?
- 1:13:46मैं बताओ ये वो मजनू है, इसकी बात करता हूँ, रिस्क पे ज़ोर रही हूँ
- 1:13:57ये वो कहा ली जाए ये वो आतिश है। जो लगाई न लगे तुमने लगाई भी नहीं
- 1:14:07और बुझाई न बने 1 दिन ऐसा आएगा जहर स्मरण तुम्हारे भीतर उतरेगा,
- 1:14:13याद आएगा और तुम लाक धक्के मारो नहीं जाएगा भाई।
- 1:14:20जब जबरदस्ती तुम बनाने की चेष्ठा करो और वह बोले से बोले नहीं हूँ
- 1:14:26और तुम तो याद करते हो तुम तो कहते हो अरे ये तो तीन नाम हुए दो
- 1:14:31तो हुए नहीं तो महाराज ने कहा था 10 यार नाम जितना चाहे उतना करो।
- 1:14:39काम धाम तो है नहीं भाई बेरोजगारी तो यही करते रहो और क्या है कुछ
- 1:14:44नहीं मिलेगा। इससे अच्छा विश्राम कर लेना, सो
- 1:14:48लेना, घूम आना, कहीं पर्यटन पर राधे राधे तो मत करना क्या होता
- 1:14:57है? प्रेप में क्या होता है?
- 1:14:59यह प्रेम की बातें हैं जो शीश तली पे धर न सके वो प्रेम गली में आई
- 1:15:07थी बताना इस गली में जागते रहना बाहर राधे राधे बस एक बात पक्का।
- 1:15:17निश्चिंत हो जाना निश्चिंत हो जाना मिलेगा नहीं वो रस्ते में
- 1:15:23करते जाओ तुम्हें रोक के कौन रोक सकता है हमारी औकात पे क्या है हम
- 1:15:28तुम्हें रोक के क्या होता है उस पे हमें?
- 1:15:35प्रेमी प्रेमिका की याद आती है तुम बनाने की चेष्टा करते हो,
- 1:15:39धक्के बाहर मारते हो, लेकिन वो भीतर घुसने को करता है, घुस जाता
- 1:15:44है, मन के भीतर गया हुआ है भाई वो उस क्षण में वो भीतर उतर गया, अब
- 1:15:51तुम मजबूर हो यू अरे हेल्पलेस टु डू एनिथिंग?
- 1:15:56नाउ यू कैन डू नथिंग और इस बात का गुरूर होता है शराब पीकर वो भूल
- 1:16:03जाता है भूल जाती है तुम्हें गुरूर होता है कि हाँ मैंने
- 1:16:09बुलाती हूँ लेकिन। तुम गलती में आओ वो जो इश्क की आग
- 1:16:17लगती है ये आतिश है ग़ालिब ये तुम्हारे बजाने से नहीं, शराब
- 1:16:22पीने से नहीं बचती, कितना ही कुछ करो यह याद जाएगी, आते ही रहेंगी।
- 1:16:33हमें तो यही था गुरु हमें तो यही था गुरु।
- 1:16:51गमी यार हैं हम से दो वो ही गम जिसे हम किस किस यत्न से?
- 1:17:10शराब पी निशा किया ये किया वो किया बहुत कुछ किया ओह ही गम,
- 1:17:20जिसे हम किस किस यत्न से? निकाला था।
- 1:17:32इस दिल से दूर में उछलकर कयामत की चला गया।
- 1:17:49उछल कयाम की चला गया वैशाख। ख्याल लाग वो ही ज़िन्दगी का, फिर
- 1:18:14जीवन मरण का स्वाद होता है राधे राधे भूल जाओगे जीवन मरण का स्वाद
- 1:18:18नहीं होगा, जहाँ याद आएगी तो जीवन मरण का स्वाद होगा।
- 1:18:24वो ही ज़िन्दगी का सवाल आ गया। गया रह गया श्रीकृष्ण गोविंद हरे
- 1:18:58मुरारी। हे नाथ नारायण व सुदेव श्री कृष्ण
- 1:19:15भोगविंद हरे मुराद। हे नाथ नारायण वासुदेव पितुमात
- 1:19:32स्वामी सखा? ऋतुमात स्वामी सखा हमारे हेमंत
- 1:19:51नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हर मुरारी हे
- 1:20:11नाथ नारायण वासुदेव व। श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:20:20हरे माल हे नाथ नारायण वासुदेव इतमात स्वामी सखा हमारे इतमात
- 1:20:36स्वामी सखा हमारे। सखा हमार पितुमात स्वामी सखा
- 1:20:56हमार। हेनाथ नारा जल वसुदेव कृष्ण
- 1:21:04गोविन्द हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:21:25हृदय विशुद्ध है, समस्त विषय का भला घर।
- 1:21:42धन्यवाद।