Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Dec 25 - साथ कुछ नहीं जाता, यह बात तुम्हारे भीतर कब उतरेगी? धरती पर रोज़ संत नहीं आता : चूक मत जाना! Baba Ji Vijay Vats
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- 0:03जिंदगी के मेले ये जिंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे, अफसोस
- 0:16होना होंगे। ये ज़िन्दगी के मेले ये ज़िन्दगी
- 0:23के मेले दुनिया में कम न होंगे अफ़सोस हम आएँगे ऐसे ही कमाते
- 0:33जाओगे जाते जाओगे। आने जाने के सिवा तुमने अब तक
- 0:39किया क्या है? यह प्रमाण है जो तुम आज तक यहाँ
- 0:44विद्यमान हो और तुमने यह जाना नहीं कि संघ कुछ जाता नहीं देखते
- 0:53रोज़ हो। फिर तुम मुझे कहते हो बाबा समझ
- 0:59नहीं आया ज़रा बताना रोज़ लोग मरते हैं तुम्हें तुम्हें कब
- 1:06समझाया कि हम भी 1 दिन चले जाएंगे।
- 1:11दुनिया में कम न होंगे अफसोस हम न होंगे कहाँ ये बात तुम्हारे भीतर
- 1:21उतरी बुद्ध के तो उतर गई, बुद्ध ने एक मुर्दा देखा, एक बीमार
- 1:28देखा, एक कमर झुकी हुई वृद्ध देखा।
- 1:31एक खास्ता वह व्यक्ति देखा लेकिन उसके भीतर मृत्यु उतर गई।
- 1:38गहरे तल पे और तुम्हारे पास से रोज़ अर्थियां गुजर जाती हैं और
- 1:45तुम अर्थियों के पीछे राम राम सत्य है।
- 1:48राधे राधे सत्य है करते। क्या तुम्हारे पास आँखें वास्तव
- 1:58में हैं? आँखें तो हैं, लेकिन तुम इन आँखों
- 2:06का सद उपयोग नहीं करते तुम दुरूपयोग करते हो पूर्ण देख लिया।
- 2:14मूवी देख आए किसी को हिंदू कह दिया, किसी को मुसलमान कह दिया
- 2:29तुमने आँखों का दुरुपयोग किया? बाबा कहते हैं कि मैं जीसको सबसे
- 2:38ज्यादा दंड देना होता है, उसकी आँखें छीन लेता हूँ और तुम ऐसे
- 2:45लोगों को अलंकृत कर देते हो कि ये तो हमारे शंकरे घर हैं।
- 2:52परमात्मा की कचहरी से दंड हुए लोग तुम उनके पाम पूछते हो फिर तुमने
- 3:00परमात्मा के विधान को समझा है नेहा तुमने परमात्मा को एक पागल
- 3:06व्यक्ति करार दे दिया। इसलिए जो जिसके जी में आता है वह
- 3:12कह देता है मैंने कल भी कहा था अनंत तुम्हारी परवाह नहीं करता,
- 3:20ये सारा संसार तुम्हारी परवाह कब करता है?
- 3:24तुम पीपल के पेड़ को कहोगे ये महफूल है।
- 3:28तुम आम के पेड़ को कहो कि यह बबूल है, वह तुम्हारी परवाह करेगा
- 3:37तुमको गालियाँ देगा, क्योंकि वह जानता है कि मैं आम का फिर हूँ।
- 3:45यह जो तुम प्रतिक्रियाएं करते हो न जानने के कारण करते हो तुम
- 3:51अज्ञानी हो इसीलिए प्रतिक्रियाएं करते हो तुम से ज्यादा समझदार तो
- 3:56आम का पीड़ा है, तुम ज़रा गाली देके देखो, उसे कहो तुम आम के
- 4:02नहीं तुम की करके पढ़ो। बबूल हो तुम, वह कोई प्रतिक्रिया
- 4:09नहीं करेगा। इतना समझदार तुमसे ज्यादा समझदार
- 4:13हो तुम फौरन उसके गल में उसके कॉलर में हाथ दे दोगे।
- 4:24लेकिन तुमसे ज्यादा सामीदार ये पेड़ पौधे हैं, ज़रा भी
- 4:29प्रतिक्रिया नहीं करते। मैंने कल ही कहा था गुलाब का फूल
- 4:34तुम्हें खुशबू देना छोड़ता नहीं। तुम लाख कहो कि तुम गुलाब नहीं
- 4:41हो, तुम गेंदा हो, तुम चमेदी हो, तुम मोतिया हो, तुम रात की रानी
- 4:45हो लेकिन तुम्हें फूल देना, सुगध देना, वो छोड़ता वह अपने स्वभाव
- 4:52से परे नहीं आता, संत का स्वभाव है बांटते चले जाना।
- 5:01इसलिए वह तुम्हारी बातों को कान हैं उसके, लेकिन अनसुना कर देता
- 5:10है, आँखें हैं उसके, लेकिन अनदेखा कर देता है क्यों?
- 5:17वह जानता है कि यह गलत बोल रहा है क्या इतना काफी नहीं है कि अगर
- 5:24तुम्हें कोई गाली निकाल रहा है, तुम पहले अपने भीतर किसी ने
- 5:30तुम्हें पागल कह दिया, तुम अपने भीतर देखो।
- 5:36क्या वास्तव में तुम पागल हो? तुम मानोगे तुम जानोगे कि तुम
- 5:44पागल नहीं हो? इस व्यक्ति ने सिर्फ तुम्हें दुखी
- 5:51करने के लिए शब्दों का लिफाजों का प्रयोग किया तो तुम्हें ज़रा भी
- 5:55गुस्सा नहीं आया? गुस्सा तब आता है जब तुम अपने
- 6:00भीतर नहीं उतरता तो फिर तुम सच में भागो फिर कहने वाले का कोई
- 6:09कसूर नहीं। वो ठीक बोल रहा है तुम्हारी अपनी
- 6:14सोचने की शक्ति। तुम्हारी वासना से आती है तुम
- 6:22कहते हो, इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा ले, तुम लाभ की दृष्टि से
- 6:29सोचते हो। बाबा हैं, संकल्प कर सकते हैं तो
- 6:34आओ हम ही प्राइम मिनिस्टर बन जाए। तुम इस दृष्टि से सोचते हो और यह
- 6:42दृष्टि तब आती है जब तुमने उस परवर दीगार का निहार नहीं किया
- 6:49जिसने नहीं देखा भगवान को। वह ऐसी मूर्लताएं करेगा करेगा
- 6:59जिसमें पिता को देखा है वह बला फिक्र करेगा सांझ की जो आगे मांगा
- 7:08सांझ को अगर रहेंगे। तो मांग लेंगे और उसने संसार
- 7:15बनाया सारा उसका तो पैमाना तुम्हारे पास है ही नहीं।
- 7:21तुम्हारे पास कोई मेज़रमेंट नहीं है।
- 7:26उस विराट की सीमा क्या है? तो ऐसा कहने लगे मांग लूँगा 150
- 7:35साल लेकिन ठहरों जाते कहाँ हो क्या साँझ तलक मैं जिंदा रहूंगा?
- 7:48ये गारंटी है तुम्हारी वह तो छत का एक सत्य जो तुम सदा ही भूले
- 7:58रहते हो और यही सत्य अगर तुम्हें याद आ जाए तो तुम फ़ौरन वो तो हो
- 8:04जाओ। तुम क्या सुनते हो?
- 8:09तुम मूड रह जाओगे। अगर बुद्ध की तरह मौत तुम्हें
- 8:15बहुत गहरे से छिड़ गई तो क्या तुम वही व्यक्ति रह जाओगे जो एक पल
- 8:24पहले थे नहीं? लेकिन ईशा जानते है इकठ्ठा करो,
- 8:38क्या तकलीफ है, मैं भी कहता हूँ इकठ्ठा करो, क्या तकलीफ है?
- 8:46क्योंकि मैं बखूबी जानता हूँ के साथ किसी के कभी ज्ञान छः से
- 8:575,50,000 और एक न चल लेना एक। कण माटी का भी हमारे संग नहीं
- 9:06जाएगा और मुझे कोई शक शुवा नहीं है।
- 9:13यही लक्षण भी है और लो भी हो जाता है।
- 9:19व्यक्ति फिर शिविर के लिए फीस नहीं मांगता।
- 9:25फिर इतनी दीक्षा और इतनी एंट्रेंस फीस देनी होगी, इसकी डिमैंड नहीं
- 9:31करता। वह कोई मांगता है जो विराट सृष्टि
- 9:36का माधक बन के अपने आपको देख लिया, जिसने।
- 9:41जिसने अपने आप को विराट देख लिया, वह तुमसे मांगेगा नहीं, तुमसे
- 9:51मांगेगा नहीं। भूख लगी है अपनी जरूरतों के लिए
- 9:56कहेगा भाई भूखा यह मांग नहीं है। यह जरूरत है मांग अब वो होती है
- 10:04जो तुम भूख के इलावा पेट के साथ बांध के ले जाते हो।
- 10:08तुम से ज्यादा पशु सामीदार है पशु को तुम खाना दे दो, वह उतना ही
- 10:16खाएगा जब तक पेट भरेगा तुम से ज्यादा समीदार है पशु।
- 10:21किसी बैंक की तिजोरी में जमा करने के लिए नहीं ले के गए राजा की तरह
- 10:29नए नए कर लगा के गोजी नहीं भरेगा अपने और अपने मित्रों के यह सब
- 10:38मूडता के लक्षण हैं। और न समझी के लक्षण न समझी से ये
- 10:47बातें पैदा होती हैं तो वह तो झटका क्या साँझ तलक मैं जिंदा
- 10:57रहूंगा? मांग लेता हूँ?
- 11:00वह मेरा प्यारा पिता है और जिसने देखा है उसके लिए तो पिता है
- 11:13तुम्हारी लिए तो कागजी शास्त्रों में लिखा हुआ पिता।
- 11:19उसके लिए सत्य में आँखों से देखा हुआ विचार और देर इस ए लॉट ऑफ़
- 11:26डिफरेंस बिटवीन दत्त विशाल अंतर है तुमने शास्त्रों से पढ़ा,
- 11:34मूर्ख सदगुरवों से सीखा। वह खंडियों से सीखा जिनके
- 11:39व्यापार, लेकिन कबीर ने किसी से नहीं सीखा।
- 11:44कबीर अपनी आँखों से देखते हैं ईसा अपनी आँखों से देखते हैं ईसा कहते
- 11:53हैं मांग लेता हूँ क्या पक्का भरोसा है?
- 11:57साँझ तक मैं रहूँगा तो उसने चरस पर किये प्रभु गलती हो गयी छोड़
- 12:07कर तो आज कोई सेट है कल कोई और था और कल।
- 12:15तुम्हारी जगह कोई और ले लेगा विकास यू आर नॉट ए मर्डर 1 दिन
- 12:21तुम मरोगे होंगी, यही बाहर हैं। उल्फत की यादगारें होंगी, यही
- 12:39बहारे उल्फत की यादगारें हों, बिगड़ेगी और।
- 12:50बनेगी दुनिया यहीं रहेंगी कोई एक कतरा यहाँ से ले जा सका है।
- 13:01अगर कोई एक कतरा मरने वाला यहाँ से ले जाता तो अब तक सारी धरती
- 13:07समाप्त हो गई होती। एक कतरा कतरा भी कोई लेके जाता
- 13:12लेकिन अफसोस ना सिकंदर लेके गया, ना नेपोलियन लेके गया, ना संगीत
- 13:19लेके गया सब लहू छूट गए यही तुम्हारी समझ में आता है।
- 13:27उनकी यही बहारें उलफत की यादगारें बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया यहीं
- 13:42रहेंगी। बिगड़ जाएगी बन जाएगी लेकिन यही
- 13:49रहेंगी होंगे यही झमेले, यही झमेले चलेंगे रात रात भर जागोगे
- 14:03तुम जिनके लिए। वो 1 दिन खाक हो जाएंगे।
- 14:09तुम भूल गए हम पित्रों को धन्यवाद क्यों करते हैं पित्रों को
- 14:15धन्यवाद करते हैं इसीलिए कि रात रात भर आप हमारे फिकर में जागे थे
- 14:23कौन बात है? जो अपने बच्चों की फिक्र में रात
- 14:26रात भर जागता नहीं, चिंता नहीं करता इसलिए पितरों को हम धन्यवाद
- 14:32देते हैं कि आपकी रातों का जागना, रत्न जगह के कारण हम आज मौजूद
- 14:41हैं। होंगे।
- 14:43यही झमेले होंगे यही झमेले ये जिंदगी के मेले दुनिया में कम न
- 14:59होंगे। ये झमेले यही लेना देना, यही
- 15:12वासनय यही दूसरों की जेबों को काटना।
- 15:17यही दूसरों को भूखे मार के तड़पाना कहाँ गया?
- 15:21विंस्टन चर चल, जिन्हें लाखों लोगों को भूखे मार दिया बंगाल
- 15:30कहाँ है? आज वो उसकी हड्डियों भी तो नहीं
- 15:33है आज? लेकिन बाद में याद करने का कोई
- 15:44फायदा नहीं। समझदार वह जो वक्त पे याद कर।
- 15:54इतिहास को याद करने का कोई फायदा नहीं।
- 15:57इसलिए मैं कहता हूँ इतिहास को जो याद करता है वो मूर्ख और इतिहास
- 16:03को जो खंगालता है वह अपना भी और अरबों अरबों दुनिया का भी वक्त
- 16:09नष्ट कर रहा है। जो इतिहास की बातें करता और जो
- 16:14भविष्य की बातें करता, उससे बड़ा मूड कोई है ही नहीं।
- 16:21जिंदगी आज है अब अब ही और यही रावण ने कहा लक्षण को।
- 16:30तू आज की बात अब की बात अब की बात आज पर मत डाल देना आज की बात तू
- 16:38कल पर मत डाल देना बस ये मेरा सूत्र है जीवन का और बड़ा जबरदस्त
- 16:45शानदार सूत्र है जीना अभी है जिंदगी अभी है।
- 16:50कल को कौन जाने क्या हो कौन जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो
- 16:59जाए उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो।
- 17:08मृत्यु की याद हमारे साथ रहे सदा 1 दिन जाना है हमें तो तुम पाप
- 17:14नहीं कर पाओगे उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस
- 17:24घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए। संत तुम्हें यही सखाता है और अगर
- 17:33कोई झूठ हो तो बता दो किसने जाना के तुम्हारे पुत्र पुत्र मज़ा
- 17:40लेंगे कौन जाने क्या तुम तरकाल रखशी हो?
- 17:50संत के पास आंख होती है, असली तुमने पाथर की आँखें लगवा रखी
- 17:55हैं, जिनसे दिखाई नहीं पड़ता। संत के पास सच्ची आंख होती है।
- 18:05वह चीजों को बखूबी निहार लेता है। वह जानता है कि दुनिया कहीं नहीं
- 18:14जाएगी होंगी यही बहारें उल्फत की यादगार बिगड़ेगी और बनेगी सब कुछ
- 18:24होता रहेगा। एक बिल्डिंग डहती है, एक नहीं
- 18:27बनती, आज मरेंगे, नए पैदा होंगे, फिर वो वो बड़े होंगे, ये
- 18:34गद्दियाँ कल किसी की और की होंगी। कौन काबिज रहा है सदा के लिए ए
- 18:41दोस्त? हमें तो तेरी इसी चाहत पर रोना
- 19:00आया कौन रहा है, कभी कोई रहा है बता दो कोई रहा हो?
- 19:18इतिहास से अगर सीखना है तो यही सीखो मैं कहता हूँ इतिहास से सबक
- 19:23लो इतिहास को याद मत करो ये 1507 में ये हुआ था 407 में, ये हुआ था
- 19:31705 में, ये हुआ था क्या फायदा इतिहास को याद मत करो।
- 19:37डू नॉट रेमेम्बेर इतिहास से सबक लो लर्न सीखो, याद मत करो और
- 19:50तुमने उल्टी बात पकड़ ली तुम याद करते हो इतिहास को।
- 19:58और तुम्हें पता नहीं इतिहास को याद करना, सूचनाओं को एकत्रित
- 20:03करना, अपने को करना तुम खाली नहीं होते और खाली नहीं होते तो खालीपन
- 20:11के लम्हों का तुम आनंद भी नहीं उठा सकते।
- 20:14तुम सदा भरे रहते हो। इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ परमात्मा
- 20:191000 बार तुम्हारे दरवाजे पे आके दस्तक देता है, बट यू अरे बीज़ी
- 20:25ऑलवेज बीज़ी वापस चला जाता है जब तुम नॉन बिज़नेस हुए आओगे?
- 20:34तब वो आ जाएगा तुम्हारे भीतर और तुम देखना तुम अगर आज तक नहीं
- 20:40पहुंचे उस तल पर तुम अगर आज तक उस तल को नहीं छुआ, जिसे सटोरी कहते
- 20:47हैं तो निश्चित ही तुम कभी अपने। वर्तमान के पल में आये ही नहीं,
- 20:56हाँ, इस बात को आप सर्कल में ले लो, अगर तुम आज तक दुखी हो, भटके
- 21:08हुए हो। तो पक्का है कि तुमने कभी भी आज
- 21:12तक कितने भी जीवन ले लिया जन्म ले लिया तुम वर्तमान के एक पल में
- 21:19कभी नहीं आए, यह सबूत है इस बात का लक्षण है, अन्यथा अगर तुम कभी
- 21:26भी एक पल के लिए। आज में मौजूद हो जाओ तो प्रतिक्षण
- 21:31तुम अपने भीतर उतर जाओगे और एक अव्वल का भीतर भीतर उतरना तुम्हें
- 21:37इतना आनंद के रस से सारा वार कर देगा की तुम उसको भूल नहीं पाओगे,
- 21:43जिनको प्यार के लम्हों का अहसास हुआ है।
- 21:47तो जानते हैं अनुभव से कि एक पल में कुछ ऐसा घट गया उस एक पल में
- 21:56तुम वर्तमान में ठहर गए यही करामत होती है प्रेम में और कुछ नहीं
- 22:01होता प्रेम के लम्हे में आँखें चार होती हैं।
- 22:07और क्यों वह पल सदा के लिए याद रहता है क्योंकि तुम उस वक्त
- 22:13वर्तमान के उस प्रेसेंट में आ जाते हो उस पन में आ जाते हो जिसे
- 22:20वर्तमान कहते है प्रेम में जगत? जीसको प्रेम की घटना कभी सच में
- 22:27घटी होगी। मैं अट्रैक्शन की बात नहीं करता
- 22:31हूँ वो जगडू राम कह रहे थे अपनी पत्नी से पत्नी कहती है कल तो तुम
- 22:40मुझे बहुत प्रेम करते हो। चाँद तारे तोड़ के लाने की बात
- 22:45करते थे, आज क्यों नहीं करते जगडू राम बोले देखो बातें ईमानदारी की
- 22:55बात है जब तुम हंसते थे ना, तो फूल खिलते थे हालांकि किसके फूल
- 23:02के लिए? कभी हंसने में फूल खेलते हैं,
- 23:07हंसने में तो दांत देखते हैं। ये पागलों की महंगी कमियों की बात
- 23:13है तो कहते फिर आपको क्या हुआ? क्या अब मैं हंसती हूँ तो फूल
- 23:22लेंगे? इसपे कहते है अब दांत ही गए, अब
- 23:29तो दांत ही टूट गए। इसी से प्यार था मुझे तो तुम
- 23:36ऑब्जेक्ट्स को प्यार करते हो, किसी का हँसना अच्छा लगा।
- 23:40किसी की चाल ढाल मस्तानी लगी किसी के सुडौल कायाछी लगी किसका
- 23:51मुस्कुराना गजब हो गया तुम ऐसी ना चीज़ चीजों पे मर मिटते हो।
- 24:00और उसे नाम दे देते हो प्रेम तुमने प्रेम की हत्या कर दी।
- 24:08यह भी अभी प्रश्न आ रहा है। राम मंदिर का ध्वजा आरोहण हो रहा
- 24:13है। इसका अध्यात्म ग्रस्त क्या है
- 24:16बाबा? इसका अध्यात्म का अर्थ ये है हमने
- 24:20असल में कर्मकांडों ने हमारे सत्य को मार दिया है।
- 24:25इसका मतलब था आनंद का झंडा सदा ही वरंद रहे तुम्हारा गौरीशंकर की
- 24:31रोगियों को छूता रहे आनंद सदा ही पींग पे रहे।
- 24:38और तुम तो झंडे में डंडा फंसा देते हो, रोज़ बदल देते हो भला जी
- 24:45ये प्रतीक कब तक काम करेगा? एचए टू ओह कब तक तुम्हारी प्यास
- 24:51को बजाएगा नहीं बजाएगा। 1 दिन तुम्हें समझा आ जाए तो आ
- 24:57जाए भोग क्षण पलटू शुभ दिन शुभ घड़ी याद पड़े जब नाम, लगन,
- 25:09मुहूर्त, झूठ सब और बिगाड़े का। तुम्हारे ये ध्वज आर ओह हण
- 25:17तुम्हारे कर्मकांड है? कुछ नहीं होता इनसे इसका रहस्य
- 25:21क्या है बाबा? इसका रहस्य ये है कि जहाँ मैं
- 25:26तुम्हें जब। तुम्हारे किसी भी चक्कर से उठाकर
- 25:32फिर शुद्धि चक्र में ले आता हूँ तो तुम ध्वज आरोहण को वहीं रखना
- 25:38कम से कम नीचे बताने के की ये कैसे होगा रो जिगरिया योग करो
- 25:47ऑक्सीजनरेटेड होगे तुम। तुम्हारा टिशू प्राण शक्ति से खिल
- 25:52उठेगा। प्रेरणा लोग सत्त पुरुषों के साथ
- 26:01और ध्यान में जाओ नो दायसल्फ तुम हो।
- 26:10फिर प्यार के एक पल के लिए जिंदगियां गवाने की जरूरत कहाँ
- 26:15बचती है? जब तुमने अपने आप के प्रेम के
- 26:18समुद्र को जान लिया के मैं ही हूँ प्रेम का समुद्र फिर तुम बूंदों
- 26:24के लिए को तरसोगे। फिर अगर तुम बूंदों के लिए तरसोगे
- 26:28तो समझो तुमने प्रेम को पाया है। जो व्यक्ति काम वासना में वो
- 26:34लिखता है, ये पक्का है कि उसने प्रेम के उस क्षीण मिश्रण को पाया
- 26:40नहीं, वह अनंत नहीं हुआ। वह उस अखंड में असीम में समाया
- 26:49नहीं जहाँ जाकर प्रेम इतना अतिरेक में हो जाता है 100% कॉन्शसनेस
- 26:58दैट से लाभ। फिर उसको और प्रेम की आवश्यकता
- 27:05नहीं होती। फिर वो और चीजों में क्यों
- 27:07ढूंढेगा तुम काम वासना में ढूंढ़ते हो तुम धन में ढूंढ़ते हो
- 27:11तुम गद्दियों में ढूंढ़ते हो और तुम मंगते बने भर जाओ कैसे हो
- 27:17अपने आपको शहंशाह, ये अकड़ है सोथी शहंशाह नहीं हो तुम शहंशाह
- 27:28के हाथों में भिक्षापत्र थोड़ी होते हैं उनके भीतर तो आनंद की
- 27:36चरम पराकाष्ठा के ध्वजाएँ लहराई होती हैं गौरी शंकर के ऊपर।
- 27:43तुम्हारी तरह डंडे में झंडा फंसा के ऊपर नहीं ध्वजारोहण होता।
- 27:47ध्वजारोहण का अर्थ था प्रतीक। वह तुमने खो दिया।
- 27:52अब तो कर्मकांड बचे हैं, बस आग में सामग्री भेंट करते रहो, स्वयं
- 27:58के अहंकार को बचा लो। वो बकरीद का हो, वो हवन का हो,
- 28:04इससे क्या फर्क पड़ता है तुमने सदा ही अपने अहंकार को बचाया रोज़
- 28:10बचाते चले जाते हो, यह कहीं खो न जाए, यह तुम्हारे लिए अमूल्य हीरा
- 28:16है जबकि तुम अमूल्य हीरों को लुटा देते हो।
- 28:21काम के क्षणों में लेकिन कबीर कहते हैं जिसने वो पल पा लिया
- 28:34बोतल पा लिया, बोतल पा लिया जहाँ तुम हो गए।
- 28:46फिर तुम इधर उधर जाने इकट्ठा नहीं करोगे, बस जरूरत काफी है, नहीं
- 28:54कमा पाओगे तो मांग लोगे। बुद्ध की तरह शहंशाह था वो।
- 29:01लेकिन वो कहा कोई बात नहीं, इतनी ही तमन्ना होनी चाहिए।
- 29:06इतनी ही बिरहा की आग जलनी चाहिए फिर मिलती है मंजल और तुम तो कहते
- 29:16हो कि हम परमात्मा हैं। और जब तुम्हारी ज़िन्दगी के जीने
- 29:22के तरीकों को देखा जाता है, तो तुम चाट पकोड़े खा रहे हो।
- 29:31इसके इतनी स्त्रियों से संबंध, इसके इतने पुरुषों से संबंध और
- 29:38तुम अपने आप को एनालाइज। फिर लक्षण कहाँ जाएंगे?
- 29:43अगर तुम बदल रहे हो तो हम सपाओं मानसरोवर।
- 30:04हम सकायो मानसरोवर ताल तलैया क्यों ढोल फिर ताल तलियो में गड़ो
- 30:19लगाओ। यह इंगित है या इशारा है कि इसने
- 30:28मानसरोवर को पाया है। खंसा पायो मानसरोवर।
- 30:40ताल कलैयाँ क्यों दो लह मन मस्त हुआ फिर क्यों बो लह मन मस्त हुआ
- 30:56फिर क्यों? बो।
- 31:01मन तुम्हारा बोलता रहता है, क्यों बोलता है आज इसकी परत खोरूं इसे
- 31:10कुछ चाहिए? इसे मानसरोवर चाहिए इसलिए यह ताल
- 31:17तलैया में डोलता है। दान इक्कठा कर दूँ, एक नंबर का
- 31:20अमीर हो जाऊं फिर अमेरिका का राष्ट्रपति हो जाऊं मूड लोग
- 31:28अमेरिका के राष्ट्रपति हो जाते हैं।
- 31:32यह वासनाओं की चरम पीक पॉइंट को छूना है और कुछ भी दें।
- 31:39और काश तुम राष्ट्रपति बनकर भी कुछ सबक दे पाते।
- 31:44सबक तो ये था कि तुम एक बार राष्ट्रपति बन गए और राष्ट्रपति
- 31:49बनने के बाद तुम एकांत में बैठ के मनन करो, कुछ पाया मैंने।
- 31:57जब वक्त ही खराब किया तुम पाओगे अगर सच में तुमने एडेर लाइसिस
- 32:03किया तो पाओगे कि मैंने वक्त ही खराब किया अगर तुमने सच में वो
- 32:12हीरा पा लिया। तो तुम गांठ बांध के रखोगे दिखाते
- 32:16नहीं मैं इतना समझदार हूँ मैं हर बात का जवाब दे सकता हूँ, यह अगर
- 32:26तुम दिखावे के रूप में ले आओगे तो समझो तुमने पाया नहीं यह अगर तुम।
- 32:33व्यक्ति की जिंदगी को खुशहाल करने के लिए प्रयोग करोगे तो समझो
- 32:38तुमने बात किया वह करुणा के रूप में आएगा।
- 32:41बोलते तो बुद्ध भी हैं, बोलते महावीर भी हैं और कृष्ण भी हैं,
- 32:47लेकिन करुणा क्या करें? बिखर बिखर जाता है।
- 32:54संभाल पाता नहीं इस गगरिया में इतना ही समा सकता था वो समा गया
- 33:01लेकिन ऊपर से आता हुआ गगन मंडल से वो आनंद की धारा का रस वह समा तो
- 33:09सकता नहीं तुम्हारी गगरिया बड़ी छोटी।
- 33:12और वर्षता बहुत तेज वह जैसे समुद्रबुंद के ऊपर उतर गया तो वो
- 33:19खिंडेगा और खिंडेगा तो उसके आस पास बैठे हुए लोग उससे पीटेंगे।
- 33:25यही था सत्संगति का ला। तुलसी ने लिखा तात स्वर्ग अप वर्ग
- 33:37सुख तात, स्वर्ग अप वर्ग सुख दरिये तुला एक अंग तुलना ताही।
- 33:47शक्ल मिली। जो जो सत पुरुष के पास एक क्षण
- 33:54बैठने में आनंद आता है, इसलिए तुम भूल नहीं पाते इसलिए रोज़ मुझे
- 33:59कहते हो बाबा एक बार और आना है कब हम बताओ?
- 34:04तुम्हें ये नहीं पता कि तुम यहाँ पर आने की तमन्ना क्यों करते हो
- 34:11इसलिए तमन्ना करते हो कि यहाँ आकर कुछ ऐसा मिला पल दो पल क्रिया से
- 34:17वो भूले से भलाया नहीं जाता। वह क्या था इसे तो तुम जानते हो,
- 34:26लेकिन कुछ था तो जो आज तक भूले से भुलता नहीं, वह अज्ञात प्रेम का
- 34:40सूत्र तुम साथ लिए चले गए। असली प्रेम तुम करते नहीं हो जाता
- 34:48है इसलिए बाबा ने कहा यह गुरु कृपा से होता है।
- 34:55तुम्हारे किए से कुछ नहीं होगा ज़ोर न जुगती छूटे संसार तुम्हारे
- 35:01सारे बंधन तुम्हारी किसी जुगती से।
- 35:05नहीं छूटेंगे और हम ऐसे मूर्ख हैं की हम जूगते ही डटाते रहते हैं
- 35:13ज्योत निरंजन ओमम का रणं का, सोहम सतन?
- 35:25क्या खाक है इसमें? अक्षरों के सिवा और क्या खाक है
- 35:31और अक्षर होते हैं कन्वर्सेशन के लिए भगवान को पाने के लिए अक्षर
- 35:38नहीं होते? और बड़े दुर्भाग्य की बात है कि
- 35:44किन दुर्भाग्य के क्षणों में हमने अक्षरों से परमात्मा मिलता है, यह
- 35:51किस मूर्ख ने तजबीज़ निकाली तुम यही झपते रहते हो, रटते रहते हो,
- 35:59मिलता मिलता। बस थोड़ी दुकानदारी बढ़िया चली
- 36:05जाये, थोड़ी लड़की की शादी हो जाये घर में पुत्र पोता हो जाये,
- 36:12यही तुम्हारी वासनाएं पूरी हो जाये, बस यही है तुम्हारी तमन्ना।
- 36:26तड़पे हैं सदा तड़पे हैं सदा अपनी कसम आपकी खातिर।
- 36:44ये जान भी जाएगी सनम आपकी खातिर ये जान भी जाएगी सनम आपकी खातिर।
- 37:02तड़पे है सदा तुम इसी के लिए तड़पते रहते हो भगवान का तो सिर्फ
- 37:10को नींद के ऊपर शुगर कोटेड कर लेते हो तड़पे है सदा अपनी कसम
- 37:19आपकी खाकर। ये जान भी जायेगी सनम आपकी खातर,
- 37:25धन की खातर, गद्दियो की खातर, मान सन्मान की खातर हमारे कोई पांव
- 37:33पूजे चरन धोए, धो धो के पिए इसके लिए तुम तड़पते हो।
- 37:41परमात्मा की आकांक्षा तुम्हें कहाँ है?
- 37:45अगर परमात्मा की सच्चे आकांक्षा जग जाए तो उसी क्षण तुम्हारे लिए
- 37:52गदियाँ बेकार हो जाएंगी। तुम जिसके लिए लालायित हो।
- 38:03भिक्षा पत्र उठा के भीख मांगते हो तानाशाह बने की कवाई तुम रचते हो
- 38:09सारे दिन भर रात वो बुद्ध के पास है फिर क्या रह गया जो बुद्ध जिसे
- 38:17पाने के लिए छोड़ देते हैं सारा कुछ?
- 38:21वहाँ तक अभी तुम आए नहीं, बच्चा जब आओगे तो तुम इन्हें लात मार
- 38:29दोगे, ईश्वर करे, गोपाल भाई खुदा करे कि कयामत हो।
- 38:40और तू आए खुदा करेगी, हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे कयामत
- 38:59तक। खुदा करे की कयामत हो और तू आए
- 39:10खुदा घर की। इस धरती पर रोज़ संत नहीं आता,
- 39:25कभी कभार आता है चूक मत जाना उसकी बताई हुई शिक्षा मार्गों पर।
- 39:39चलने से पहले एक बार निहार लेना कि उसके बोलना, चलना, खाना पीना,
- 39:46उठना, बैठना चाल डाल क्या जो उसके जीने का सलीका, उसके जीने का
- 39:53तरीका क्या है? तुम पाओगे?
- 39:58जमीन आसमान का फर्क है। तुम्हारे तथाकथित संतो और सच्चे
- 40:05संत में लक्षणों का ही तो बेहद होता है।
- 40:13इन लक्षणों से पहचान लेना कृष्ण ने कहा।
- 40:21और जब तुम्हें पहचान में आ जाए, फूल की पहचान करने के लिए नासा
- 40:27पुटों की आवश्यकता होती फूल पहचान में आ जाया करते।
- 40:38क्योंकि सच्चा फूल सुगंध को बिखेरता है और जाति से तुम्हें
- 40:44समझा जाएगा। हाँ यहाँ फूल है, तुम कहीं रास्ते
- 40:49से गुजर रहे हो। अचानक तुम्हें कहीं सुगंधा आती है
- 40:54तुम रुक जाते हो बड़ी सुन्दर खुशबू है कहाँ से आ रही है पास
- 40:59में कोई बाग बगीचा होगा चलो उस गुलशन की बहार को देख ले।
- 41:09तुम्हारे भीतर भी वो ही गुलशन की बहार जाओ अपने भीतर उतर के उसे
- 41:19देख लो वो आनंद की रस का खजाना। जिससे तुमने एक बूंद के लिए तरस
- 41:31गए अलग अलग द्वार दरवाजे तुमने खटकाए जहाँ वह मिलता नहीं, मैंने
- 41:39कल भी कहा था चीजें वही मिला करती हैं जहाँ हुआ करती हैं भीतर।
- 41:50ढूंढ रहे हो तुम बाहर यही कम उड़ता है तुम कर्म कांडों में
- 41:59ढूंढ रहे हो नहीं मिलेगा, ध्वजा आरोहण करने से नहीं मिलेगा।
- 42:03किसको मिला है कोई बताएं? अगर किसी को मिला तो कोई बताएं
- 42:12नहीं मिलता भाई, ध्वजारोहण यही है कि तुम अपने आनंद को पीक पे रखना
- 42:21और पल दो पल के लिए तो तुम अंतरमक्षणों में भी पा जाओगे।
- 42:26और दूर से देखोगे, लेकिन मैं तुम्हें वो तज दिखाना चाहता हूँ,
- 42:32जहाँ जाकर तुम उस ध्वज आरोहण के आनंद में या कसा हो जाओ घुरो नहीं
- 42:44मिल जाओ। डिसॉल्व न हो, मर्ज हो जाओ और फिर
- 42:50तुम ऐसे खो जाओगे उसमें तुम ऐसी गूंद के समुद्र हो जाओगे के ढूंढे
- 42:57से भी नहीं मिलेगा। मन मस्त हुआ।
- 43:03हुआ फिर क्यों? बोल मन मस्त हुआ फिर क्यों बोल?
- 43:23धन्यवाद।