Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Sep 25- मैं राधा स्वामी से हूँ, सब नियम निभाता हूँ! फिर भी सुरति और शब्द का मिलन क्यों नहीं हुआ?
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- 0:09गौरव बाबा मैं राधास्वामी मत को फॉलो करता हूँ।
- 0:32महीने भर में जो कमाई होती है, उसका दुश्मन गोलोक में डाल देता
- 0:43हूँ, लेकिन। अभी तक शब्दसूर्ति का मिलान नहीं
- 1:02हुआ है। गौरव 10% मत निकालो, कर जितना
- 1:23कमाओ, सारा गौरव में डालते हो। और तुम देखोगे भंडारे भरपूर हो
- 1:37जाएंगे, यही तो तुम्हारी गलती है। संसार हो या अध्यात्म, तुम
- 1:49कुनकुने कुनकुने से बने रहते। 10% दान कर दिया 50।
- 2:01दान कर दिया नहीं मैंने तुमसे कहा।
- 2:06इन्सर्ट कंप्लीट्ली योरसेल्फ पूरे का पूरा मत कोई फिर पूरे का पूरा
- 2:24दान देते अपूर्ण और फिर देखना। भँढारे पर एक छोटी सी कहानी एक
- 2:41याचक किसी समृद्ध परिवार के सामने।
- 2:47अलख, जगाएँ अलख न रंजन विक्षमदेही माता भितरशेख शालीन स्त्री थाली
- 3:12भर के लेके। सब कुछ था, उसमें रोटी नहीं थी,
- 3:19परांठे थे, सब्जी आलू की नहीं थी, पनीर था।
- 3:33हलवा बिठा ड्राई फ्रूट बिठा फ्रूट बिठा भरा भरा थार संत के चरणों
- 3:48में डेपी। बोलिए हे साधु महात्मा इस थल को
- 4:05भी साथ ही ले जाओ। चांदी का थल।
- 4:17वो तो हैरान हूँ मैं खैर, भिक्षा समिट के थाली को अपने झोले में पा
- 4:28के चलने ही लगा था। क्यों शालीन स्त्री ने पूछा बनते
- 4:43देखने में तुम किसी कोलीन घराने का लगता हो?
- 4:50राजघराने के जैसे बुद्ध किसी घर के आ गए।
- 4:53खड़े हुए ही होंगे जाके जैसे घर के आगे भी जाके खड़े हुए होंगे।
- 5:02बुद्ध की शालीनता बुद्ध की कालीनता कुलीनता लाभन्य भीतर का।
- 5:15राजसी चमक छुपी ना रहे होंगे तो गृहणी गोली बनते देखने में तुम
- 5:28किसी को लीन कराने के लिए। फिर तुम तप करने आई, यह तुम्हारी
- 5:36ये दशा कैसे होगी साधु की आँखों में थोड़ा सा आंसू
- 5:50हो गया है, हल्की से आँखें नम हो गई।
- 5:57साधु बोला। देवी जैसा तुम आज किए हो, थाली भर
- 6:09के लेके आई चांदी की और चांदी की थाली भी मजे थे और सब जो सुंदर
- 6:15सुंदर घर में पका था वो खिलाती है।
- 6:23इसी तरह तुम दान करते रहना 1 दिन मेरी जगह आ जाओगे, जो भी काम करो
- 6:44मैं शर्ट कंप्लीट्ली युअर। अपने आपको पूरे का पूरा झोंक दूँ,
- 6:51दान कर रहे हो तो 10 में हिस्सा का क्या देना होता है जितना बड़ा
- 6:59है सत्यव ब्राह्मणों के घर पे? शंकर मंगते हैं, फलक से जगाते हैं
- 7:12और शंकर दिन में एक बार ही मांगते थे।
- 7:161 अगस्त से मांगते थे, अगर वहाँ से कुछ नहीं मिला तो फिर आज फांका
- 7:23चलेगा। इसके घर के आगे जाके हालत जुगाई
- 7:37वो एक विधवा ब्राह्मणी थी, गरीब थी, उन दोनों में स्त्रियां कमाती
- 7:43नहीं थी। आजकल स्त्रियां ज्यादा कमाती।
- 7:50ये रोज़ मैसेज आते है, दब के रहना पड़ता है बाबा स्त्रियां ज्यादा।
- 8:06तो भी इतने वर्षों तक सैकड़ों हजारों वर्षों तक ये भी तो दब्बू
- 8:10रह रही है। कमाई के बल के ऊपर तुमने भी तो
- 8:16दबाया है। अब ये कमा रही हैं तो तुम डब्बू
- 8:21बन के रहो। देखो ये मनीष कह रहा हंस रहा है,
- 8:33दांत टूट गया, आँख फूट गई, फिर भी हंस रहा है और कह रहा हूँ भाई
- 8:44परमात्मा की रजा में रहना सीखो, यही तो मैं सीखा रहा हूँ।
- 8:50और मेरे बोलने का कोई तर्क पड़ेगा।
- 8:54आँख फूट गई, दांत टूट गए, फिर भी मुस्कुरा रहा हूँ, जिंदगी के जीने
- 9:05की राह दिखा रहा हूँ। ऐसे ही जियो तो ब्राह्मण गुजर गया
- 9:22था को थोड़ा बहुत गर्व पुराण का पाठ करके ले आता।
- 9:29अभी राम भद्राचार वर्ग जैसे कहते हैं।
- 9:36मैंने कहा तुम कौन सा ऑफिस का काम करते हो?
- 9:43बस हुंड बने पड़े हो खा खा के हरामखोर और हमारे प्यारे प्रेमनद
- 9:54को गाली निकालते हैं। वो तो मूर्ख है, शुरू से, पर
- 9:59मूर्खों को भी क्या खाली निकालनी होती है?
- 10:08तो कमाई धमाई का कोई रास्ता नहीं था और पता था शंकर एक घर में
- 10:13जाते। हड़बड़ाई घर में कुछ स्थान है को
- 10:25दर्तन आज कोई देख के भी नहीं गया था आस पास देखा खंगाला कहीं कुछ
- 10:36ना मिला घर के एक। जहाँ दीबा रखते थे, हम पहले आला
- 10:49कहते थे उसे उसमें एक आंवले का ताजा फल रखा था।
- 10:56उसने कहा संत को खाली हाथ तो नहीं जौंगे बस भिक्षा में वो।
- 11:05ताजा आम न दे दिया, अश्रु बहने लगे, रोने लगी प्रभु मेरे पास यही
- 11:16है 100% अब मेरी बात से सबक ले लेना।
- 11:28यही यही था, 100% का 100% दे दिया और कोई था खुद के पेट में आग
- 11:39लगेंगी तो वो फिर रह लेंगे। पड़ोस से पानी मंगलाई 100% दान
- 11:53तीन बार बोला मैं शंकराचार्य। उन्होंने हालात देखे नहीं।
- 12:12पहले देखने की जरूरत नहीं होती। छोटी छोटी बातों को पर 30 रणनीति
- 12:17मत लड़ाया करो, बड़े विशाल कामों के लिए होता है।
- 12:24गृह ब्राह्मणी है, विधवा है, बच्चे छोटे हैं, घर में कुछ स्थान
- 12:30नहीं है। जो था वो सारे का सारा दे दिया अब
- 12:37आता हूँ बात। तुम ध्यान में भी जाओ तो कंप्लेंट
- 12:51के लिए जाना, तुम जाते ही ऐसे लोगों के पास।
- 13:02तो तुम्हारा अहंकार नहीं मरने देते हैं यही तुम चाहते हो बाबा
- 13:08के पास क्यों नहीं आते? वह तो गला देगा तुम्हें जला देगा,
- 13:14तुम्हें खाक कर देगा, बस संबोध कर देगा।
- 13:29ये बेचारी के पास जो था दित्या चरनस वर्ष की है क्षमा करना बाबा
- 13:38मेरे पास यही है। देखिए, भिक्षा मांगने वाला
- 13:55महालक्ष्मी को आज्ञा देता है जैसे हीरे जवाहरातों का सिंहासन त्याग
- 14:04करने वाला। बहुत गरीब व्यक्ति के घर के आगे
- 14:08भिक्षा मांगता है बहुपुजी शंकर के महालक्ष्मी का आवाहन किया
- 14:24महालक्ष्मी आके महालक्ष्मी से कहा।
- 14:34हे शक्ति स्वरूप में इस सब्राह्मणी के घर में तीन मोहर तक
- 14:45सोना बरसात है। तीन मुहूर्त दो घड़ियों का
- 15:01मुहूर्त होता है, 30 मुहूर्त होते है 60 घड़ियों का दिन भर रात होता
- 15:05है 48 मिनट का एक मुहूर्त होता है।
- 15:10तीन मुहूर्त लगातार सोना बरसे। आसमान से सब भर गया, छत तक भर गए
- 15:23अम्बार लग गए से मेरे पर्वती जैसे शंकर आवहान करें।
- 15:36हर है कुलकभूषणमश्रण। अंगी कथा केल विभूति पांग लीला
- 16:06मंगल रजात तो म म मंगल दे बचाया। महालक्ष्मी प्रकट हुए सोना बरसाया
- 16:25रोसी तोत्र को जो मैंने गाया इसको बस।
- 16:34सिर्फ 11 बार सुन दिया करो, दरिद्रता समाप्त हो जाएगी।
- 16:40सुनना पूरे मंथ काम की तरह मत निपटाना प्रेम की तरह इसको गाना।
- 16:53सुन सुन ये दुख और पाप का निश तुम्हारे सब दरिद्रता खत्म
- 17:01तुम्हारे सब पापों के कारण जो दुख हैं तुम्हें वो समाप्त हो जाएंगे
- 17:09सो न बरसाया महालक्ष्मी। शंकराचार्य बोलिए प्रभु और पिया
- 17:18क्या कल्याण मस्तो देवी तुम अपने धाम जा सकती हो, चले गए इस संसार
- 17:31में बड़े अजूब हो। मत कहे कोई के हम नहीं जान लिया
- 17:37उसे वो है नहीं मत कहे कोई दिमाग के वकाबला लिख के बल पर ये लो
- 17:47सबूत परमात्मा है ये लो सबूत परमात्मा नहीं है।
- 17:52तुम कुछ भी तो नहीं कह सकते ना तो ये कह सकते हो वो नहीं है और ना
- 17:56ये कह सकते हो की वो है शंकर जैसा महा दसों विद्याओं से युक्त गोरख
- 18:11जैसा। भिक्षा मांगता है, ये तुम्हारी
- 18:17बुद्धि के तर्क में आएगा नहीं, अरे सब बात बड़ी फरहा नहीं और अभी
- 18:26अभी की बात बुद्ध सिंघासीन छोड़ के आये सोने हीरे ज्वालातों का।
- 18:35और भिक्षा मांग रहे हैं तो पूछना ज़रा प्रशांत से कैसे व्याख्यायत
- 18:43करें? ये तुम्हारे बुद्धि से कोई न कोई
- 18:46ढंग ढूंढेंगे। शार्द पुण्य से घनी है, तलवार की
- 18:52धार घनी है। लेकिन बुद्धि के स्तर पे रहस्य के
- 18:56स्तर पे रहस्यमय तो बेचारे कभी कहें इनकी आँखें कभी रोई नहीं,
- 19:03आँखों नहीं अश्क बहाई नहीं ऐसा भी होता है।
- 19:10मुझे लोग कहते हैं बाबा जब तुम सब कुछ करने में समर्थ थे, तुमने
- 19:14अपनी बच्ची को बचाया, बस यहीं तुम चौंक जाते हो।
- 19:22शंकर के पास इतनी देवी प्रतिभा? महालक्ष्मी को आदेश दे सकता है और
- 19:32बुद्ध के पास सब जो तुम ढूंढ़ते हो, गद्दी छोड़ने का मन नहीं
- 19:36करते, झोला उठाने का मन ही नहीं करते।
- 19:51इश्क पे ज़ोर नहीं ये वह आतिश है गालिब, इश्क पे ज़ोर नहीं ये वह
- 20:03आतिश है गालिब जो लगाए ना लगे है। और बजाय न बने जोला नहीं उठाया
- 20:12जायेगा। तुम्हारी बुद्धि के तर्क सब फीके
- 20:23पड़ जाते हैं, यही मैं समझाना चाहता हूँ।
- 20:28मैं विज्ञान को से श्रद्धा कहता हूँ।
- 20:32रेत का एक कण बना सकते हो, नहीं बना सकते रेत का एक कण मटा सकते
- 20:39हो नहीं, मटा सकते या मैटर कैन नीदर बी क्रिएट हो फिर तुम कर कह
- 20:47सकते हो जगाई मार सकते हो पर शांति की तरह।
- 20:53वो मार ही रहा। निहित स्वार्थ संगठन खड़ा करना
- 21:04है, संगठन को सहायता करो, मूल मुद्दा भूल गए।
- 21:18यद्यपि गीता पे व्याख्यान देते हैं, गीता पे व्याख्यान देते हैं,
- 21:27वह उस तल पे कौन सा ताल कभी गए हों?
- 21:35तुम्हारी बुद्धि तर्कशील है, वो तर्कों से तुम संतुष्ट हो जाते हो
- 21:43कैसे तर्क दोगे? बुद्ध के बारे में कैसे तर्क दोगे
- 21:46तुम? शंकर के बारे में?
- 21:52मांगने की क्या जरूरत है? वहीं आप वाहन कर लेते हैं वहाँ
- 22:00लक्ष्मी से कहते हैं खाना भेज थाली लगा और थाली भी सोने की होनी
- 22:08चाहिए। चम्मच भी सोने का होना चाहिए।
- 22:12बस मात्र रोटी ही सोने के ना तुम्हारी बुद्धि तर्पों के आधार
- 22:26पर जीती है और ये बातें हैं रहस्य और जिसके बारे में तुम बोल रहे हो
- 22:34और रहस्य। इसलिए आइंस्टीन भी जाते जाते कह
- 22:42देते हैं इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोनबल अज्ञात ही नहीं है
- 22:53वो अब ये भी है नहीं जान सकते। उसका ओर छोर नहीं जान सके।
- 23:00कहाँ तक वो शुरू हुआ और कहाँ तक वो अंत हुआ कहाँ उसका मध्य तुम
- 23:05जानते हो जी भोंकी लपलप। गौरव बेटा एक बात को सीख लेना
- 23:36किसी भी धर्म में जब मैं कोई मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा आप प्रणाम
- 23:43करते हो, कैसे करते हो मैं जिनकी पिटाई करनी होती है ना मेरी?
- 23:51क्योंकि वो ब्रह्मस्वरूप है, देखिये तो मैं जानता हूँ, जब सूर
- 23:55से गले लग सकता हूँ, आगे मत पूछो भाई आगे मत पूछो जब सूर से गले लग
- 24:06सके। तो मेरा प्रणाम करने का अर्थ ये
- 24:14होता की आज तुम्हारी धुनाई करूँगा, पिटाई करूँगा।
- 24:19आज बुरा मत मानना देख लो, हाँ इसलिए आज जोड़ता हूँ और बाद में
- 24:29तुम बुरा नहीं ना मन। तो मैं तुम्हें धन्यवाद भी देता
- 24:33हूँ। वो तुम्हारे लिए नहीं होता, पॉइंट
- 24:37के लिए होता है जिनकी पिटाई जानता हूँ ईशावासी मैडम सर्वम जति के
- 24:44नीचे, जगत या जगत, ये भी परमात्मा है?
- 24:50अच्छी तरह से जानता हूँ जानता या नहीं देखता हूँ सियाराम में सब
- 24:55जगह जाने करम प्रणाम जोर जुबानें सियाराम में।
- 25:11सब जग जारी करम प्रणाम जोरि जुबान पुत्र।
- 25:32नहीं तो दान ही न करो, दान करो तो कंप्लीट्ली दान करो और दान का भी
- 25:41क्या दान करना होता है? तुम अपने गुरु महाराज के क्षणों
- 25:47में स्वयं को ही दान कर दिया करो। समुच 100% दान कर दिया करो गुर
- 25:54गूंगा हो गुर गूंगे गुर बांवरे पावले चे बाठे मारता हो बाठे
- 26:01मारता हो यहाँ मारता हो सिंगापुर में मारता हो कोई बात नहीं।
- 26:07गुर गूंके गुर भंवरे गुर किरिया दास ओह तिल्ली वाली ज्योति मारे
- 26:15ना तो तुम कह ना वह बड़ा प्रसाद मिला है।
- 26:25100% इन्सर्ट हो जाना और पैसे का भी ज्ञात दान करना होता है।
- 26:34ये तो ऋषियों की एक ईजाद थी। शुरू करोगे पीछे से और आखिर में
- 26:39तुम्हें छोड़ना होगा बलिदान करना होगा गुरु के चरणों में अपना
- 26:43अहंकार। अहंकार और जीस गढ़ी तुमने अहंकार
- 26:49दान कर दिया ना बेटा गौरव, तुम्हारी आत्मा गौरव ही हो जाएगी।
- 27:05धन्यवाद।