Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Aug 25 - Live-in vs शादी | आज़ादी का सही मतलब | ऑपरेशन से पहले जब मैंने आपके मन की बातें सुनीं!
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- 0:01प्रश्न बहुत से हैं सरलता से सभी को यकमुश्त कर के शॉर्ट करके
- 0:17समझाने की चेष्टा प्रमुख आपने? वाचस्पति मिश्रा की कहानी सुनाई।
- 0:32वाचस्पति मिश्रा भामती से शादी करते हैं, घर आकर अपने काम में
- 0:39होने जाते हैं ग्रंथ पूरा करना। ब्रह्मवासी का टीका करना पिता
- 0:54कहते हैं, शादी करने व्यक्ति सरल स्वभाव का हो जाता है जैसे जैसे
- 1:03अंदर चलता है। एक शब्द को लफ्ज़ बा लफ्ज़ अपने
- 1:12हृदय में उतारते रहना। जितना है तुम भीतर जाओगे, सरल हो
- 1:18जाओगे और ईसा भी यही कहते है की सरल हो जाओ, बच्चों के समान है।
- 1:24बूढ़ा व्यक्ति शर्म कैसे होगा? अपने भीतर उतर के अनुपम राय जी
- 1:35पूछते हैं, आपकी बातों में कुछ स्वतंत्र नजर आता है?
- 1:46वाचस्त्री मिश्र ने शादी की भामती के साथ गृहस्थ जीवन निभाया नहीं,
- 1:57भाषा टीका में व्यस्त हो गए। हार्ट कैन बी पासिंग फॉर दैट यहाँ
- 2:09सब होता है दूसरे दिन भाग जाती है सब होता है दो चार दिनों के बाद
- 2:17भाग जाती है बुद्ध। इसलिए मैं इन लोगों को भगोड़े
- 2:24कहता हूँ। तुम बुद्ध की कितनी प्रशंसा कर
- 2:30लो, लेकिन मैं प्रशंसा करूँगा सिर्फ उस बात पर जहाँ करनी होगी
- 2:36निंदा भी करूँगा प्रस्तुति भी करूँगा।
- 2:41पशु की प्रशंसा भी करूँगा। अंधा भी करूँगा और तुम्हें कमेंट
- 2:50करने का अधिकार भी कोई, क्योंकि कमेंट करने का मतलब तुम मुझसे
- 2:55ज्यादा जानते हो। पर मुझे सुनने की आवश्यकता नहीं
- 2:59रह जाती जब तुम उससे ज्यादा जानते हो और जानने का क्या है जीस जानने
- 3:10को आप जान न कहते हो वो तो अलफजों का ढेर है।
- 3:17अपने नरोज़ को भर लो, जल्दी ही वक्त आएगा।
- 3:26जब आपसे पूछा जाएगा बताओ आप क्या करना चाहते हो माँ बाप डिसैड
- 3:32करेंगे या बच्चा डिसैड करेगा? तुम जो भी कहोगे डॉक्टर,
- 3:41इंजीनियर, कंप्यूटर, गणित, रसायन शास्त्र।
- 3:55भौतिक शास्त्र पॉलिटिक्स दुकानों पर बिकाऊ मिलेंगे यह चॉइस
- 4:07तुम्हारी तुम कहोगे, हमने तो इंजीनियर बनाना है।
- 4:18तुम दाम दे दोगे और वो छोटा सा पुर जा के वो चिप की तरह लग
- 4:25जाएगा। ये होने वाली घटनाओं को वर्णन कर
- 4:27रहा हूँ मैं फिर तुम्हें आइचारों के पास जाने की जरूरत नहीं होती।
- 4:36क्या ही सारा काम करते हो? तुम्हें सारी सूचनाएं उपलब्ध करवा
- 4:45देगा लेकिन ध्यान रखना फिर भी तुम्हें कुछ करना पड़ेगा।
- 4:55थ्रोटिकल तुमने सब कुछ सीख लिया। प्रैक्टिकल तो सीखना ही पड़ेगा।
- 5:01आज तुम थ्रोटिकल पूछने के लिए अचारों के पास जाते हो।
- 5:05इसकी जरूरत नहीं रहेंगी। कहा, बाचस्वती मिश्र के साथ बामति
- 5:16काट जाती है, 30 साल तक याद नहीं कराती, सेवा करती है।
- 5:23हम मानने को तैयार नहीं है। प्रभु या तो सोना सपना लेकर रात
- 5:31को फरार हो जाएगा। अनुपम यह तुम्हारा अनुभव है।
- 5:43मेरा मेरा अनुभव तो वही होगा जो मैं बोलूं।
- 5:52ये कहानी सत्य है कुछ और कुछ पूछ लिया।
- 6:04क्या फिर बाढ़ झोंकने के लिए मेरी शादी की थी?
- 6:11इसको तुम कहते हो आनंद मैं उसको बाड़ जोकना कहता हूँ इसलिए न मैं
- 6:20छोड़ता हूँ कृष्णमूर्ति को न मैं छोड़ता हूँ ओशो।
- 6:27कृष्ण को बचा लेता, कबीर को बचा लेता, नानक को बचा लेता।
- 6:37मेरे एक बात का जवाब था राजा आज की कहानी अभी दो 4 दिन पहले मैंने
- 6:46बखान किया था। जीस राजा के पास 3600 प्रकार के
- 6:51बल में घोड़े के लिए दिखाएगा। फिर ओशु ने रस स्वादन कर दिया।
- 7:06अंग से अंग बढ़ाएगा। समझा रही है तुम्हें और थोड़ा सा
- 7:15उसको जब खोल लूँ ताकि अगले जन्म में साथ चला जाए।
- 7:263600 प्रकार के भोजन खाने वाला अंज घोड़े के लीद ने कह उपाय 1
- 7:33दिन के लिए वाचा श्रुति मिश्र की बातें कल्पना लगती हैं और फ्राउड
- 7:43लगता है अब झूठा हूँ, बिल्कुल झूठा हूँ।
- 7:51तुम्हारी दृष्टि में झूठा ही होना चाहिए अन्यथा तुम नकली नकली बन
- 7:55जाओगे। असली असली बनोगे जानकर अपने अनुभव
- 8:01की कसौटी की परीक्षा पर खरे उतर गए।
- 8:10मैं तुमसे पूछता हूँ राजा अजने को नहीं दिखाई?
- 8:173600 प्रकार के भोजन उसके पास उपलब्ध है और उसको एक चम्मच।
- 8:25घोड़े के लिए भी नहीं खाये जाते। इसी तरह मैं तुमसे कहता हूँ जिसने
- 8:38उस परम रस को भी लिया। ये भामती का क्या करे और भामती
- 8:50वाचस्पति मिश्र का क्या करे? लेकिन तुम भूल जाते सनातन ने सब
- 8:59कुछ बना के दिया था। तुम विश्लेषित नहीं कर पाए।
- 9:06भगवान शंकर का अध नारिशवरूप आदमी को इस तरह की जरूरत पड़ती है,
- 9:13किसी बेला में और स्त्री को आदमी की जरूरत पड़ती है, किसी वेला में
- 9:20शरीर सिर्फ। संतान उत्पत्ति के लिए और बहुत से
- 9:27कामों में स्त्री, पुरुष, पुरुष, स्त्री के काम आते हैं।
- 9:36जैसे एक उदाहरण मैंने समझाया अगर कोई शरीर से बाहर चला जाए, विपरीत
- 9:42लिंगी व्यक्ति। उनके दोनों अंगूठों को टच कर लिया
- 9:49गया हुआ व्यक्ति हुर्न वापस आ जाएगा।
- 9:58कुछ तंत्र नेक हो जाता और सच पूछो तो ज्यादा तंत्र नेक हो जाता।
- 10:06और तंत्र तुम्हारी समझ में आता नहीं और तुम समझे वगैरह गए चलते
- 10:10नहीं, यही दुविधा है तुम्हारी तुम कहते हो पहले समझेंगे फिर चलेंगे।
- 10:24चल। तुम्हारी इच्छा है तुम यही सोच ते
- 10:34हो सपने से ज्योति हो प्री वेडिंग पोस्ट वेडिंग आफ्टर पोस्ट वेडिंग
- 10:44रे वेडिंग का क्या अपने? रिलेशनशिप में रहना बहुत प्रश्न
- 10:56आया, अचारों से तो पूछ पूछ के थक गए अब आप ही पिताजी?
- 11:06एक ही वीडियो में सारे जवाब देना चाहता हूँ।
- 11:12समझने की कैपेबिलिटी आपने होनी चाहिए, लेवन में व्यक्ति रहना
- 11:22चाहता है, आदमी हो यास्त्र। क्योंकि व्यक्ति की आंतरिक भूख
- 11:31आजादी की है, फिर सुन लो व्यक्ति की आंतरिक भूख आजादी की है।
- 11:51वह आजाद रहना चाहता है। किसी भी कीमत पर अपनी आजादी का
- 11:59हनन नहीं, उन्हें देना चाहता। जो भी सम्मान के जोले में आता है
- 12:08ये है बुनियादी कर। बाकी सारे कारण अप्रत्यक्ष रूप से
- 12:21व्यक्ति ज्यादा जागरूक होना शुरू हो गया।
- 12:27तुम कहोगे तो कलुग है, कलुग है लेकिन व्यक्ति ज्यादा स्वतंत्र
- 12:34होना। चाह रहा है जो उसके ढंग खोलता है।
- 12:45शरीर की इच्छा भी पूरी हो जाए और बंधन भी कोई ना बने।
- 12:54एक पक्ष तो यह है कबीर तुम्हें सिखाते हैं।
- 13:04नानक तुम्हें सिखाते हैं, कृष्ण तुम्हें सिखाते हैं, तुम घर में
- 13:17ही बैठे हो, वहीं मिल जाएगा और मिल भी गया।
- 13:24मैं जब प्रथम बार 3 जनवरी 1973 को घर से गया तो हनुमान जी मुझे यही
- 13:34संदेश दिया था घर चले जाओ, घर बैठे तुम्हें सब मिल जाएगा।
- 13:42अज्ञानी था तब मैं समझ ना पाया। मैंने कहा नहीं मैं तो जाऊंगा और
- 13:50कहाँ जा पाया अज्ञान के वशुआ व्यक्ति जो सोचता है।
- 14:01वह सोचता है कि मैं सही और अज्ञानी यह समझ ले कि मैं ज्ञानी
- 14:07नहीं हूँ तो उसका अज्ञान तत्क क्षण समाप्त हो जाएगा।
- 14:21आंतरिक स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए।
- 14:24कोई पराधीन रहे ना चाहता तुलसी ने कहा पराधीन सप्ने हों, यथार्थ की
- 14:34बात मत करो, सप्ने में भी उसे सुख नहीं मिलता।
- 14:39जो पर आधीन होता है इसलिए तो जनता तानाशाह को झेल नहीं पाती।
- 14:51वो तानाशाह जो करोड़ों व्यक्तियों को मार देता है प्लस।
- 14:58जीस तरह रिवॉल्वर खरीदी होगी या ले के आया होगा उसको पता नहीं था।
- 15:04यही रिवॉल्वर उसकी मृत्यु का कारण खुद की बनेगा।
- 15:09तानाशाह भी यही सोचता है और अंत उसका यही हुआ करता है।
- 15:15वो मुसोलिनी हो, वो स्टालिन हो। वो माओ हो या कोई भी हो, क्योंकि
- 15:30जितनी जनता पे तुम राज़ करते हो, उनकी संख्या ज्यादा है।
- 15:39जनता पराधीन रहना चाहती नहीं। दूसरों को अपराधीन करना चाहता है,
- 15:52अपने इशारों से नचाना चाहता है। यहीं द्वंद कॉन्फ्लिक्ट पैदा होता
- 15:58है, वहीं गृह युद्ध में तब्दील हो जाती है।
- 16:10वाचस्पति मिश्रा तुम्हारी तरह शादी करने नहीं जाते, वो जानते
- 16:20हैं स्त्री आधा और कोई बंधन नहीं। भामवती भी कमाल की श्री रही होगी।
- 16:32बिलकुल शारदा की तरह जैसे राम किशन, परमहंस और शारदा ये बेमेल
- 16:38जोड़ियाँ हैं जो यदा कदा उपलब्ध हो जाती है।
- 16:43लोई कबीर इनका कारण कुछ और है। शादी करने का तुम्हारा कारण कुछ
- 16:57और है और बहु संख्या तुम्हारी है इसलिए तो सत्य एक बार हार जाता है
- 17:11क्योंकि सत्य ठीक है। और झूठे अनेक है इसलिए झूठा जीत
- 17:19जाता है। सत्य हार जाता है, लेकिन घबराना
- 17:23नहीं है, सत्य पराजित नहीं होता है।
- 17:34सत्य प्रताड़ित नहीं होता, तूफ़ान झेल सकता है, तानाशाह के कोड़े
- 17:47बरस सकते हैं, बंधनों में रहना पड़ सकता है, लेकिन प्रत्येक
- 17:54व्यक्ति के भीतर की स्वतंत्रता। उसको याद कराती रहती है कि तुम
- 18:03आजाद हो जाओ, आजादी तुम्हारा परम कर्तव्य है, इसलिए लिबरेशन कहा,
- 18:12हमने उस आनंद को पीने। लिबरेशन किसे कहते हैं मुक्ति?
- 18:21आजादी परम रस को पीकर व्यक्ति आजाद हो जाता है के नाम अलग अलग
- 18:33हैं। इनके भीतर रश ही की है।
- 18:40लिबरेशन की डिमॅंड तुम करते हो ताकि पराधीन न रहो इच्छा तो
- 18:44तुम्हारी ठीक है लेकिन पराधीन हो काम आता है, कामग्रस्त हो जाते
- 18:52है। क्रोध आता है, क्रोधग्रस्त हो
- 18:57जाते है लोग ओमोग अंकार वासना विकारो के साई में तुम जीते हो।
- 19:11तुम्हारी भीतरी आकांक्षा है लिबरेशन मुक्ति याने आजादी और
- 19:18कमाल की बात है। तुम इतने बंधनों से घिरे हुए हो,
- 19:25कोई तुम्हारे बंधनों को तोड़ने की चेष्टा करे तो तुम उनके वर खिलाफ़
- 19:29हो जाते हो, झंडे? उठा लेते हो जिंदाबाद मरता तुम
- 19:38किसी भी कीमत पर अपने अंतर से पराधीन नहीं होना जाता और गुरु
- 19:47तुम्हें पराधीन नहीं करता। गुरु तुम्हें लबरेट करता है गुरु
- 19:55तुम्हारे लिए बंधन का कारण न बने बंधन तोड़ने का सबब बने कह नानक
- 20:03गुरु बंधन काटे विश्वरत आन मराए। तो अनुपम तुम्हें मेरी बात यक्षी
- 20:13नहीं? वाचस्पति मिश्र और भामती घर शादी
- 20:19क्यों करते हैं? राम किशन?
- 20:21परमा और शारदा शादी क्यों करते हैं?
- 20:32यही मैं कहता हूँ पामती और वाचस्वति मिश्र भी इसीलिए शादी
- 20:39करते हैं कि स्त्री की जरूरत है। आधा अंग स्त्री के हैं, आधा अंग
- 20:44पुरुष के हैं। ये दोनों एक दूसरे के।
- 20:48के काम आएँगे। प्रकृति ने नियम बनाया अकेला
- 20:52पुरुष या अकेली स्त्री बच्चा पैदा नहीं कर सकती।
- 20:56ऐसे ही अकेले तुम रह भी नहीं सकते।
- 21:02इस स्त्री को पुरुष और पुरुष को स्त्री इसे ऐसा समझो।
- 21:07के संकल्प को समर्पण और समर्पण को संकल्प की व्यवस्था पड़ती ही
- 21:12पड़ती है। यह आवश्यकता प्रत्येक मृतकों और
- 21:20प्रत्येक स्त्री को होगी। ये नियम है प्रकृति का।
- 21:27लेबन में यही साबित करता है तुम भीतर से आजाद रहना चाहते हो, कोई
- 21:40बंधन ना हो, कोई रोकटोक ना हो जहाँ चाहूँ मज़े से जाऊं वापस आऊ
- 21:46आऊ न उतना। ये तुम्हारी भीतर की आंतरिक चाह
- 21:54का बाहरी पेशकश है लाइव इन वरना अगर तुम सही रूप में अपने आप को
- 22:05जानो कि मैं बंद सकता ही नहीं हूँ।
- 22:08तो कृष्ण हो जाओगे, फौरन कबीर हो जाओगे, नानक हो जाओगे, फौरन अभी
- 22:14तुम्हें पता नहीं, अभी तुम्हें बंधन लगता है तो तुम बाहर से वैसी
- 22:21व्यवस्था कर लेते हो, लेकिन तुम्हारी सारी व्यवस्थाएँ आज
- 22:25नहीं, कल फेल होने को है। अदालतों में केस कटेंगे नहीं,
- 22:39क्योंकि मूल समस्या बनी ही रही। मूल समस्या है स्वतंत्र कोई रोके
- 22:48नहीं, कोई टोके नहीं। ये तुम्हारी भीतर की इच्छा है।
- 23:02मनुष्य पुरुष हो या स्त्री हो लिव इन में रहने की तुम्हारी भीतरी
- 23:15इच्छा इसीलिए है कि तुम पराधीन होना निश्चिंत।
- 23:28लेकिन जिसके हाथ में सत्ता आ जाती है, कोई वक्त था, ब्राह्मणों के
- 23:33हाथ में सत्ता थे, अपने शास्त्र कर लिए।
- 23:40मैं ज्ञानी जलसिंह के पास चला गया।
- 23:44पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उसके बाद राष्ट्रपति बने।
- 23:51यहाँ पास ही गांव है संतवा उनके घर चला गया।
- 23:55सिंपल से व्यक्तित्व बातचीत करते रहे।
- 24:09मैंने कहा तुम्हारा नाम तो किया नहीं है लेकिन ज्ञान नाम की कोई
- 24:17चीज़ नजर आती है नहीं तो वो चक्कर है उनके घर जाके कोई व्यक्ति ऐसी
- 24:29बात कहें। जो व्यक्ति ये कहता है इंदिरा
- 24:36गाँधी कहें तो मैं झाड़ू भी लगा दूंगा।
- 24:41ये क्या है? रुतबे के लिए आजादी को बेच देना।
- 24:50और राजनीतिज्ञ यही करते हैं, तुम्हें रुतवा दे देंगे।
- 24:58खुद को क्राइम करने की इच्छा नहीं है।
- 25:02जिगर नहीं उनके भीतर तुम्हें लो वो दे देंगे।
- 25:06ये काम कर दो पदोन्नती हो जाएगी। ये राजनीतिक व्यवस्था है इनका ये
- 25:18आपने क्या कह दिया? इंदिरा गाँधी कहे तो मैं झाड़ू भी
- 25:23फेर दूंगा। बस राष्ट्रपति बना दो तो जयर सिंह
- 25:32बड़े प्यारे स्वभाव के व्यक्ति थे हसे दो शब्द बोले आज सांझा करना
- 25:43चाहूंगा। मुझे बोले आपने मेरी नब्ज़ पकड़
- 25:49लिया, आप आध्यात्मिक व्यक्ति जान पड़ते हो हम राजनीतिक?
- 26:02हम स्वतंत्रता का हनन कर देते हैं।
- 26:05पदार्थ के लिए बड़ी साफगोई से बात कही गई थी और मैं उनका मरीज हो
- 26:13गया। ज्ञानी जयाल सिंह उसके बाद
- 26:18राष्ट्रपति बने। उसके दौरान दंगे, फसाद वगैरह हुए।
- 26:24ये छोड़िए, कहानी लंबी चली जाएगी। सीधी सी बात समझ लो जिसने रस पी
- 26:35लिया भीतर कहा है। वह बाहर के रसों का गुलाम नहीं है
- 26:44और अगर मैं बोलता हूँ कृष्ण और के खिलाफ़ तो तर्क देता हूँ, साथ में
- 26:51सत्य के अनुभव के। जब लोग मुझे गालियां निकालने वाले
- 27:01मेरे पास आते हैं, मेरे जीवन को देखकर दंग रह जाते हैं।
- 27:04बाबा अब समझ में आ गया कृष्ण ने क्यों कहा कि लक्षण देख लेना
- 27:11चाहिए? यह व्यक्ति जो बोलता है क्या उसके
- 27:16जीवन में? उसका लक्षण उतरता है।
- 27:22मुझे लोग कह देते हैं बाबा आप भी तो पिछले जन्म में छोटी छोटी
- 27:29बच्चियों के कंधों पर हाथ रखकर चलते थे, क्योंकि अच्छी बात है।
- 27:35मैंने कहा इसमें बुरी भी क्या है? क्या तुम अपने बच्चियों का सहारा
- 27:41नहीं लेते? व्रत हो क्या है?
- 27:47ठत्तर साल का है, चला नहीं जाता। लेकिन ये तुम्हारी मूड क्या बोलते
- 28:01है क्योंकि तुम काम भासना से भरे पड़े हो और काम भासना से हर वक्त
- 28:11भरे रहते है। दो विधा तुम्हारी मेरे हैं, गाँधी
- 28:24के भी नहीं। आभा और मन्नू दो कंधे हैं गांधा।
- 28:35और गाँधी चलते हैं क्योंकि व्रध है, ये तर्क तो समझता है तुम्हें
- 28:41व्रध है तो चलेंगे। मृत के कंधे थोड़े ऊंचे होते हैं,
- 28:53उनपे हाथ नहीं डाला जा सकता। स्त्री थोड़े कम कद के होते हैं।
- 29:02लेकिन पोतियाँ हैं ध्यान रखो और दूसरे सबसे अहम बात काम बसरा नहीं
- 29:13तो बड़ा अजूबा मालूम पड़ेगा। ये कैसे हो सकता है?
- 29:17व्यक्ति में काम बसराना हो? यही तो तुम्हारी दुविधा है तुमने
- 29:25एक ही सबक सीख लिया जो तुम्हें नहीं पता वो होता ही नहीं।
- 29:32यही तो औचार्य कहते हैं, यही चारबाग कहते हैं यही मार्कर्स
- 29:35कहते हैं, नहीं दिखता ब्रह्मात्मत नहीं होता।
- 29:40तुम्हारे अपने तर्क तुम इनके साथ जियो जिंदाबाद दूसरी बात गाँधी
- 29:53छुपाती कहाँ है मुख्य बात समझना। पाप होता है छुपाने में, इसलिए जब
- 30:03कोई अपराध करता है, अपराधी कोशिश करता है, पता न चल जाए, कैसे को
- 30:11मीडिया लगाएगा? संस्थान खरीद लेगा।
- 30:18पाप कहीं उखड़ के बाहर ना जाए यहाँ तो गाँधी सरेआम उन बच्चियों
- 30:24के कांधों का सहारा लेके चल रहे हैं कहाँ छिपा रहे हैं पाप हमेशा
- 30:31वो जो छुपाए जाए गाँधी तो नहीं छुपाते?
- 30:37शक्ति के प्रयोग जब इतनी स्पष्ट बता देता है मैं फादर वास् डाइंग
- 30:46ऑन दी डेथ बेड एंड आई वास् विथ कस्तूरबा तुम कह सकते हो बात।
- 31:01लेकिन तुम्हारी बुद्धि जैसी है, वैसा ही तो तुम बोलोगे, तुम्हारा
- 31:08कसूर नहीं है, तुम्हारी बुद्धि का कसूर है।
- 31:19अगर महात्मा गाँधी से पाप समझते है तो सार्वजनिक रूप से ऐसे नहीं
- 31:24आता। तुम भी जहाँ पाप करते हो, वहाँ
- 31:29सार्वजनिक रूप में सामने नहीं आता, छुपा लेते हो और उसको छुपाने
- 31:34को मीडिया को खरीद लेते हो, तंत्रों को खरीद लेते हो, पाप
- 31:39बाहर न जाए, लेकिन सच्चाई छुप नहीं सकती।
- 31:42बनावट के असूदों से। कि खुशबू आ नहीं सकती।
- 31:46कभी कागज़ के फूलों से कितना ही पाप छपाव सामने आ जाता है और सत्य
- 31:55को उगाड़ने की इच्छा होती है। इसलिए गाँधी सत्य को उगाड के चलते
- 32:00हैं। सत्य के प्रयोग।
- 32:07एक छोटा सा क्रिप मेरे को भेजा, मैं ऑपरेशन करवा के ही हटा था तो
- 32:19मैंने दूसरी अंक से पढ़ा, गॉड से ऊपर बोल रही थी एक बतिया बड़े
- 32:26गुस्से में नजर आए। क्या बोलती है शब्द अच्छी तरह से
- 32:34समझना ये मानसिकता है तुम्हारी तुम बच्चों को ये दे रहे हो और
- 32:42वही पाओगे जो बीज आ जाता है। वो बिटिया बोल रही है कि तो मैं
- 32:51नहीं थी, अगर तुम होते तो क्या कर लेते?
- 32:56अंग्रेजों के चरण पकड़ लेते हो, नहीं तो मैं नहीं थी।
- 33:02नहीं ये शुभ कर्म। गॉड से नहीं करता मैं अपने शुभ
- 33:07हाथों से यह शुभकर्म मैं खुद करती बड़ा हँसा डॉक्टर मुझे कहने लगे
- 33:19ज्यादा हँसें होते है, टांके टूट सकते हैं।
- 33:29मैंने कहा फिर कौन सा सुमेरु पर्वत डाल लेती?
- 33:32गाँधी को तो मार देती और गाँधी मारती है बस गोडसे की तरह गोडसे
- 33:41की जगह तू लटके जाती? और क्या होना था बताओ अरे बेटी
- 33:49गाँधी को मार के गॉड से लटक गया तू अपने शुभ हाथों से शुभ कर्म कर
- 33:55देती तो तू लटक ही जाती। गाँधी को कोई फर्क नहीं पड़ता था
- 34:03गॉड से मारे कि बिटिया तेरा नाम तो नहीं मेरे को लेकिन बता रहा
- 34:08हूँ ये तू मारे कोई फर्क नहीं पड़ता गाँधी तो मर गया ना गोली
- 34:14किसने मारी कोई बात नहीं। तो घुट से लटका फिर तुम लटकी
- 34:21हस्ती बैठी और अगर मारने का इतना ही शौक है तो गाँधी ये बैठा है,
- 34:27आजा मेरी छत वे मार तीन नहीं, 300 मार।
- 34:41झूठ बोलने वाले अक्सर ऐसे ही झूठ फैला के राज़ करते हैं और तुम्हें
- 34:49एक बात बता दूँ जिसके लिए वो इतना पाप करते हैं उसमें सुख है नहीं।
- 34:59इतनी हत्याएं करके लाशों के ऊपर होड़ियाँ बना के जो तुम छतों पर
- 35:05चढ़ गए, लेकिन याद रखो वो पाप तुम्हारा पीछा करेंगे, छाया पीते?
- 35:22ऐसी ऐसी मानसिकताएँ हमने जन्म दी हैं बिटिया का नाम नहीं मुझे पता
- 35:28कोई विवाद चल रहा था और टेलीविज़न वालों को तो विवाद चाहिए।
- 35:33मुझे कोई कह रहा था टेलीविज़न वाला।
- 35:37बाबा जब से मोदी आया, अपना काम तो चार आठ गुना बढ़ गया।
- 35:41अपने तो अच्छे दिन आ गए, मैंने कहा भाई कैसे कहता रोज़ कोई न कोई
- 35:47खबर यह कोई नया नया कारनामा कर देता है।
- 35:58हमें मसाला मिल जाता है, पहले मसाला ही नहीं होता था।
- 36:01हम मनमोहन सिंह बेचारा बोलते ही नहीं थे।
- 36:04मसाला क्या मिलेगा? हमारा काम बहुत बढ़ गया।
- 36:10मीडिया का मीडिया का दाम बहुत बढ़ गया।
- 36:17जो अपनाए उनका भी दाम बढ़ गया और जिसने ठुकराया उनका भी दाम बढ़
- 36:20गया। ऐसी मानसिकता हम अपने बच्चों को
- 36:28सीखा रहे हैं। मैं होती तो गाँधी को खुद मारती,
- 36:41इसमें इतनी बुद्धि नहीं है, खुद मारती तो कहाँ भाग जाती?
- 36:49गोडसे को वीर दिखाया जाता कि भागा नहीं वो।
- 36:53अरे कोई भाग नहीं देगा तो ही ना 10,00,000 लोग उसके अंतिम संस्कार
- 37:07में तिल रखने को जगह नहीं थी। और तुम भौंकते मर जाते हो, भीड़
- 37:15इकट्ठी करते अपनी रेडियो में जिसने वो रस भी लिया, जो सुख पायो
- 37:26राम भजन में, सो सुख नहीं अमीरी में।
- 37:37वह क्यों औरतों के साथ आदमियों के साथ आलिंगन करेगा?
- 37:45कोई बात नहीं बाद में जवाब दे देना अब नहीं है तो।
- 37:52इसलिए वेंकृष्णामूर्ति और ओशो का कहता अधूरे अधूरे रहते हैं।
- 37:59कृष्णामूर्ति ने नकल की सिर्फ अष्टावक्र अष्टावक्र का चरित्र
- 38:06नहीं साधा। और कृष्ण कहते हैं चरित्र देख
- 38:14लेना कृष्ण ने कहाँ छुपाया? 16,100 रानियों चुराकी लेके आया
- 38:25राजकुमारियों कहाँ छुपाया? कहीं प्रदेश में जाके अमेरिका,
- 38:32चाइना, रशिया में जाके रखनी थी। अपने घर के पास रखी अपने महल के
- 38:36पास जो छपाता है वही पाप हो जाता है, जो उगाड़ देता है, नग्न हो
- 38:46जाता है, महावीर की तरह वो निष्पाप हो जाता है।
- 38:51मेरी इन बातों को ध्यान से समझ लेना बस एक ही पैमाना जिसने वो
- 39:01अंतर का रस प्याला पी लिया। बाहर के सारे रस उसके लिए बेकार
- 39:08होते। बातों से भजन कीर्तन से मंडलियों
- 39:14से नहीं जीवन से आचरण से कल ही मुझे कोई कह रहा था बाबा आचरण
- 39:27देखा तो मैं देखा। ओशो मिट्टीपलीद कर गया कृष्णा
- 39:38मूर्ति मिट्टीपलीद कर गया तीन बच्चों को घरा देना किसी को पता
- 39:45है गाँधी होते तो पता करते निर्दोष बच्चे की तरह।
- 39:54लेकिन कृष्णमूर्ति शिभा गए और छुपा गए।
- 40:00कितनी जनता नर्क में धकेल दी? इन लोगों ने गलत आचरण का पालन
- 40:05करके सीखा गए। इसलिए मैं कहता हूँ।
- 40:12जब जरूरत नहीं है तो आचरण शुद्ध हो ही जाता है।
- 40:23जब तुम औरतों से आलिंगन करोगे तो स्पष्ट है कि तुम्हें वो अमृत का
- 40:29रस मिलाना हाँ। कृष्ण बच्चे पैदा करते हैं, तब की
- 40:36जरूरत थी तब मर्द गम थे, स्त्रियां ज्यादा थी, वक्त की
- 40:43जरूरत थी और कृष्ण ने निभाया। भागने वालों में कृष्ण नहीं।
- 40:52न बुद्ध की तरह घर छोड़ के भक्त हैं।
- 40:55यशोदरा ने सही प्रश्न पूछा था क्षत्रानी थी सही वो?
- 41:01उसने एक ही प्रश्न पूछा कि मुझे इतना बता दो क्या जो तुमने वहाँ
- 41:06जाकर पाया वो यहाँ नहीं मिल सकता था?
- 41:11अब कैसे वो दिखने का नहीं मिल सकता था?
- 41:15बिकॉज़ ही इस प्रेसेंट एव्रीवन यही तो बाबा ने मुझे कहा तुम्हें
- 41:23घर बैठे मिलेगा, तुम घर चले जाओ, बच्चे हो, निर्दोष हो इतने बोले
- 41:29लगते हो? जाओ घर जाओ, मैं नहीं गया मेरी
- 41:37दृष्टि ही भंग कर दी, मैं आखिर आना ही पड़ा लिविन में रहना।
- 41:48तुम्हारी आत्मा आजादी मांगती है, बाहर आते आते प्रारूप ले लेती है।
- 42:00लिव इन में नौकर नहीं बनेंगे शहाना गद्दी राष्ट्रपति पद के लिए
- 42:07जड़ो भी फेर दूंगा, मैं किसी पार्टी से तालुकात नहीं रखता सीरत
- 42:19के हम गुलाम हैं। सूरत हुई तो क्या सर हो, सफेद
- 42:25मिट्टी की मूरत हुई तो क्या? हम सेरत के बड़ा है, सेरत के नहीं
- 42:33गुण चाहिए अनुभव चाहिए हमें त्याग नहीं चाहिए।
- 42:47नहीं कराए गए शादी फिर काहे तीन तीन गर्भ फिर रखे हो बस डरते हो
- 42:54ना बंधन से और तुम व्याख्यान करते हो कर्शन का जो कहता है वो तो
- 43:01मरता नहीं वो तो कटता नहीं, वो तो जलता नहीं, गलता नहीं सोखता नहीं
- 43:05डरते हो बंधन से। कैसे कह दूं कि तुम मुक्त हो गए
- 43:11हो तो ठीक ही कहते हो अगर तुम कहते हो लिबरेशन होता ही नहीं,
- 43:19ठीक है मार्कर्स कहते है कि परमात्मा होता ही नहीं, लेकिन
- 43:23जिन्होंने देखा उनका क्या होगा? तो ये एक निकल आता है अरबों में,
- 43:30खरबों में उसका क्या करोगे? लेकिन लोकतंत्र में यही चलता है।
- 43:3851 की जीत होती है, 49 हार जाते हैं।
- 43:52जितनी गंदगी हो सो खिलार के गए चरित्र के मामले में अगर यह गंदगी
- 44:00ना खिलार के जाते हैं। तो ओशो आज पूजे जाते हैं कृष्ण की
- 44:12तरह छुपाया ना इतना राज़ छुपाया। ना गोपियों के संग निधि वन में
- 44:23नाचे ना 16,100 रानियों को राजकुमारियों को छुड़वाया और अपने
- 44:33महलों के समीप रखा आठ औरतें वैरिट।
- 44:40और तुम मुसलमान को कह देते हो कि चार हमारे भगवान तो आठ रखते हैं
- 44:45वेरीड स्टेम्प्ड हजरत अगर दाश निकाह कर लेते हैं तो आपत्ति हो
- 44:53जाती है। तुम अपने आप को मर्यादित पुरुष
- 45:03कहते हो, यद्यपि तुम्हारे आचरण अमर्यादित और बात आचरणों से देखी
- 45:10जाती है, शब्दों से नहीं शब्द तो तुम गाली निकाल दो तो भी शब्द है।
- 45:18और किसकी स्तुति कर दो वो भी शब्द है दोनों ही शब्द है पहली बात
- 45:25अपना अंतः आजादी मांगता है, अपना अंतः व अमृत प्याला मांगता है।
- 45:37ये नाम जुदा जुदा है। सुगंध ही कुष्ठी बात एक ही है, एक
- 45:43ही द्रव्य का नाम है एक ही तत्व का नाम है मैं डरता नहीं है, किसी
- 45:52से मैं डराता नहीं है किसी को। उसका बैर नहीं कैसे से वह किसी का
- 46:02बैर ही नहीं ना कहूं से दोस्ती ना कहूं से बैर, कबीरा खड़ा बाजार
- 46:11में सबकी मांगें खैर। ये छूट भईया भानुमति का कुनबा इधर
- 46:26से उधर से शब्द ले लिए। और तुम शब्दों से ही सम्मोहित
- 46:32होते हो, तुम्हारी कोई सलागा कर दे, अंततः को देखना तुम जानती
- 46:39नहीं तुम शब्दों को ही देखते हो और तुम कहते हो बड़ा अच्छा आदमी
- 46:44है तुमको कोई गाली निकाल दे तुमको कि बहुत बुरा व्यक्ति है।
- 46:49अन्तश को तुम देखना नहीं चाहते जानते हैं उस स्थल पे पहुँच जाओ
- 46:56गट गट के अन्तश की जानत भले भरे की पीर पशन अभी मेरा ऑपरेशन हुआ
- 47:04एक रात बाबा कहते चलो। हम अपने ही कॉस्मिक के अंदर चले
- 47:16हैं कलेक्टिव अनकॉन्शियस में चले गए।
- 47:25सामूहिक अचेतन मन होता है हमारा सबका सांझा मैं बहुत बार बोल चुका
- 47:30हूँ। वहाँ मैंने जो चीज़ देखी देख कर
- 47:37हैरान रह गया उस स्थल पे कभी कभी जाता हूँ क्योंकि वहाँ पर निंदा
- 47:45से गिरती है उसका कोई पर्पस भी नहीं है।
- 47:49सीधा अचेतन से छलांग लगा लेता हूँ।
- 47:52सामूहिक अचेतन में सामूहिक अचेतन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
- 47:59कौन जाएगा निंदा सुनने कौन जाएगा? अस्तुति सुनने कौन क्या बोल रहा
- 48:04है यह तो वही संसारिक पति हो गई। तो मैं अपने अचेतन के गहरे से
- 48:10सीधा छलांग ले लेता हूँ कॉस्मिक अकॉन्शियसनेस सामूहिक चेतना में
- 48:20जहाँ आनंद ही आनंद है बाबा कहते थोड़ा बीच में रुक जाओ।
- 48:29कलेक्टिव अनकॉन्शस मैंने जो बातें देखी, वो जो लोग मुझे खैर फोकस
- 48:38हैं, सुनते भी हैं। बाबा को ऑपरेशन कराने की क्या
- 48:48जरूरत पड़ गई? भरा पड़ा कचरा और बाहर से भागते
- 48:56हैं। मैं जान गया, बाबा कहते हैं कभी
- 49:06कभी यहाँ भी देख लिया करो समाज में तुम नहीं जाते, लेकिन
- 49:13तुम्हारे पास तो उस समाज को देखने का एक बड़ा शानदार साधन है अपने
- 49:17ही कलेक्टिव अनकॉन्शस में उतर जाओ।
- 49:21समाज तुम्हारी बातों में ठीक से समझ लेगा।
- 49:24तुम समझ लोगे संसार को तुम्हारे किस कर्म का समाज क्या प्रतिकार
- 49:35करता है? तुम समझ जाओगे राम स्तर पर जाते
- 49:41नहीं। जैसा जिसने कह दिया वैसा सो दिया
- 49:46और सीता को कर दिया। कहीं चूक गए अपने ही कलेक्टिव
- 49:54अनकॉन्शस में उतर जाते। वहाँ पाती कौन क्या कहता है और
- 50:01कौन सच्चा और कौन झूठा? सीता बिल्कुल पति भरता था।
- 50:07बिलासक आरोप लगाए गए, लांछन थे इसलिए धरती को वहाँ तकलीफ के
- 50:16क्षणों में कहा। हे धरती।
- 50:19हे धरणी माँ तू फट जा। सब्र की इंतहा खत्म हो गई।
- 50:26तू फट मैं त्रेवे समझ आऊँ। ऐसे ही कोई नहीं बोला करता।
- 50:43आजादी चाहिए रस का पहला चाहिए, तुम्हें चाहिए तुम्हारी भीतरी
- 50:53पुकार है। तुम्हें सुनाई ही नहीं पड़ता।
- 50:59बाहर के प्रलोभनों ने तुम्हारे हीरे पर इतना छिकड़ लाद दिया है,
- 51:05छिकड़ घना है और हीरे का प्रकाश वार्थ आता है।
- 51:13फिर तुम कीचड़ को ही स्वयं का होना स्वीकार कर लेते हो।
- 51:18यही तुम्हारे दुख का कारण है। ये भीतर की बातें हैं।
- 51:32कुछ असली असली होता है, कुछ नकली नकली लोग नकल कर लेते हैं।
- 51:37मेरे चेन पर बहुत से लोग आते हैं, अदृश्य रूप से आते हैं, सुनते चले
- 51:42जाते हैं। मैं रोहित देखता हूँ, पांच सात
- 51:45लोग आते हैं, शाम को अनसबस्क्राइब कर जाते हैं, बस देखता है क्या
- 51:50कंटेंट बोला। पापा ने उस कंटेंट पे अपनी लेयर
- 51:54जुड़ा देंगे और बोल देंगे क्या फायदा?
- 51:58आत्म रूपांतरण कहाँ हुआ? रस का प्याला कहाँ पिया तुम कहाँ
- 52:04वास्तविक का आजादी का आनंद मान पाए, नुकसान किसका कर रहे हो?
- 52:12चार पैसे कमा लोगे, नाम कमालोगे जो संघ नहीं जाएगा?
- 52:20मैं तुम्हें वास्तविक होना सीखाता हूँ।
- 52:22ऑथेंटिक यू शुड बी ऑथेंटिक। इससे अच्छा मैं आचार्यों को कहता
- 52:34हूँ नहीं जाना पर होता नहीं है। समझा दी बात इन्होंने देखा
- 52:45मार्कर्स को ठीक समझता हूँ, चार बात को ठीक समझता हूँ, ईमानदार तो
- 52:49है लेकिन इनसे मैं क्या कहूँ? मोडों से जो जाना भी नहीं और कहते
- 52:57हैं कि हम। हम प्रेमानंद है, तो इसका मतलब
- 53:04तुम क्या हो, सच में नहीं जान पाए।
- 53:08अभी तक प्रेमानंद ही बने रहे। इसका मतलब भीतर के उस प्रेम को
- 53:18नहीं जाना और आनंद को भी नहीं जाना।
- 53:22बस इस शरीर को ही माने बैठे हो? अभी तक लोगों को का खाक सिखाओगे
- 53:30हम प्रेमानंद गंगाजल में चुटकी भरी और वो भाग गया ऐसे कोई भागता
- 53:41है? गोट से भागा था।
- 53:46समूह इकट्ठा करने का ढंग है, लेकिन ध्यान रखना कोई किसी को
- 53:57धोखा नहीं दे सकता। कबीर ने कहा था धोखा खा लेना,
- 54:02धोखा देना मत किसी को। तुम्हारी करनी तुम्हारे आगे आएगी
- 54:10और मैं अनकॉन्शियस में उतारा तो बहुत से लोग सोच रहे हैं, यह
- 54:16लांछन लगाता है, अपने गुर्दे ठीक नहीं करता।
- 54:20प्रेमानंद अब तुम अपनी आँख खुद ठीक करके दिखाओ मैं तो सर्कृत भाव
- 54:27में हूँ चली जाए और दोनों चली जाए तो कोई नहीं।
- 54:33दोनों बनी रहे तो कोई नहीं यही स्वीकार भाव मैं आपको सीखाता हूँ।
- 54:40किसी भी बाहरी परिस्थिति में अकंप बने रहना वह तुम्हारी अनुकूल हो,
- 54:47परिस्थिति या प्रतिकूल हो यही मैं सीखाता हूँ।
- 54:51यही मैं जानता हूँ यही मैं अपनाता हूँ।
- 54:54यही मेरे जीने का ढंग है। और ठीक करना चाहूँ तो कोई बहुत
- 55:05बड़ी बात बने। उस स्थान पर जाकर मांगना है तो
- 55:11होता है। जो व्यक्ति एक हफ्ता पहले बता
- 55:14सकता है तुम्हारी आंख की रौशनी चली जाएगी क्या वो ठीक नहीं कर
- 55:19सकता? क्यों 10 दिन पहले बता सकता है कि
- 55:24विपत्ति काल शुरू हुआ? वह क्या टाल नहीं सकता?
- 55:31बस यही बातें हैं तुम्हारी जो तुम समझना चाहते हो और समझ में वो आता
- 55:34नहीं समझ के बगैर तुम आगे चलते नहीं।
- 55:39इसलिए तुम यहीं ऐसे ही मुड़ के मुड़ बने रहोगे।
- 55:44शब्द है काग पढ़ाया पिंजरा पड़ गया, चारो वेद तुमने सबको जान
- 55:49लिया, चारो काग बढ़ाया पिंजरा पड़ गया।
- 55:54चारो वेद चारो वेद पढ़ लो। समझाया, समझा नहीं, बात को समझ
- 56:02नहीं सका, वो तत्व को नहीं समझ सका।
- 56:04अरे यार डेड का डेड तुम डेड के डेड ही रहो।
- 56:13मैं परिश्रम करा रहा था। डॉक्टर मुझसे कहने लगा आपकी बोली
- 56:16कहती आप हरयाणवी हो आप? मैंने कहा नहीं और डॉक्टर कहता
- 56:25ऑपरेशन भी कर रहा है। आंख में सुई मर रहा है तो फिर
- 56:34क्या पंजाबी हो? मैंने कहा नहीं।
- 56:38फिर क्या तुम आये तो पंजाब से हो, तुम हरयाणा भी भी नहीं हो, तुम
- 56:48पंजाबी भी नहीं हो तो फिर क्या हुआ?
- 56:50मैंने कहा मिक्स हो मिक्स हो ओह हंसा।
- 56:56अरे बाबा ऐसे मत हँसाओ हाथ की तुरंत हो जाएगा मिक्स कैसे?
- 57:05मैंने कहा खच्चा होता है ना खच्चा उन्हें गधा होता है न घोड़ा होता
- 57:10है मैंने कहा बस अब वो मिक्स हूँ मैं।
- 57:17मतलब माँ पंजाब से थी, जैतो से मंडी जैतो और पिता कारी से थी।
- 57:25हरियाणा से तो मिक्स हो गया, ना ना हरियाणा का ना पंजाब का मिक्स
- 57:32हो गया ज़रा संत की तरह। आधा आधा मिक्स हो खूब हँसाव रहा
- 57:41हँसते हँसते ओपरेक्ष कराते डेढ़ घंटा लगा और पल में बीत गया
- 57:51हँसीबो खेरीबो दरबो तो यहाँ यही कहते हैं।
- 57:56किसी भी अवस्था में तुम नाइट्रस ऑक्साइड सुनकर लाफ़िंग बुद्धा की
- 58:04बात मत किया करो। ये अच्छी नहीं लगती मुझे सही
- 58:08लाफ़िंग बुद्धा के स्टेज पे आ जाओ अब मैंने कोई नाइट्रस ऑक्साइड
- 58:13थोड़ी। सुगर की लेकिन मैं हँसता हूँ फिर
- 58:17भी वहाँ भी हस्ता जी कहते हैं, हँसीबो खरीबो दरिबो त्याग अपने
- 58:28स्वयं में बने रहो, साक्षी रूप से देखते रहो क्या हो रहा है।
- 58:33सर्कमस्टैंसेस फियर पे क्या होते हैं इसको बस ससाक्षी हो के देखते
- 58:39रहो यही है हँसी बोखले बहुत हरी बोतियाँ संसार के थपेड़ों से थके
- 58:51थके तुम अपने आप से घबरा गए। और उस स्तर पर उतरने की बजाय शराब
- 58:57का साधन, मैं अपने आप से घबरा गया हूँ।
- 59:17मैं अपने आप से घबरा गया हूँ, मुझे है ज़िन्दगी।
- 59:33दीवाना कर दे मुझे है ज़िन्दगी दीवाना कर दे मैं अपना आप से।
- 59:52घबरा गया अगर अपने आप से घबरा गए हो उस सतल पे उतर जाओ जहाँ दीवाने
- 1:00:07हो जाओगे, प्रभु का रस भी हो गया धन्यवाद।