Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Apr 25 - रहस्य से भरपूर वीडियो! क्या क्रिया योग से रहस्य में उतरा जा सकता? Deep Secrets of Adhyatma.
Transcript
- 0:02मनोज कुमार बाबा जी प्रणम आप अक्सर बात करते हैं, रहस्य के के
- 0:15रहस्य क्या है? कुछ समझा सकेंगे जो समझ में नहीं
- 0:29आता बुरे हँस लेकिन घबराओ नहीं इशारे किए जा सकते हैं।
- 0:41लेकिन उन इशारों को पकड़ने के लिए तुम्हारे भीतर प्रतिभा होनी
- 0:46चाहिए। जो समझ में आए वो ढंग से समझ लेना
- 0:55इन व्याख्यायों को। जो समझ में आए वो संसार दीज़ अरे
- 1:02लॉस संसार में सभी कार्यकरण का संबंध है, पर वो समझ में आ भी
- 1:14जाता है। उसमें फॉर्मूलास हैं, उसमें नियम
- 1:20हैं नियमों से अवध यह संसार सृष्टि ने संसार में नियमों से
- 1:32अवध यह संसार। इसमें फॉर्मूला दें, समझ में आएगा
- 1:37सब समझायेगा आज नहीं कल आज तो वैज्ञानिक ने खोजा ही क्या है,
- 1:48बहुतबहुत वर्षों पहले लाखों करोड़ों वर्षों पहले?
- 1:54इस धरती पे बहुत सी सभ्यताएं विकसित हुई और विलीन हो गई आज जो
- 2:05तुम देख रहे हो जो तुम खोज रहे हो कभी ये गलती मत कर लेना कि ये
- 2:12प्रथम बार मानवता में। वैज्ञानिक ने खोजा है नहीं, ऐसा
- 2:16नहीं बहुत बार वैज्ञानिक बहुत सभ्यताओं में इतने चर्म शिखरों को
- 2:23छुए हैं जिनको तुम सोच भी नहीं सकते हो जितनी पुरानी।
- 2:35सृष्टि की व्याख्या करते हैं वैज्ञानिक उतनी प्राणी सृष्टि
- 2:39नहीं है, उससे कहीं ज्यादा अधिक प्राणी है, सो कभी सृष्टि की गणना
- 2:50वैज्ञानिक से करने की। चेष्टा मत करियेगा जा करता सिर्थी
- 2:57को सज्य आप पे जाने सोई वही जानता है जो समझ में आ जाये वह संसार।
- 3:10और संसार का ज़रा ज़रा तो मेरे समझ में आएगा सब पता चलेगा ये
- 3:18मलेक्यूल है, ये एटम है इलेक्ट्रॉन न्यूट्रॉन है सब पता
- 3:24चलेगा सबका व्यवहार पता चलेगा। वैज्ञानिक खोजें बहुत दूर तक
- 3:31विकसित होने अभी बाकी है। अभी वो वक्त नहीं आया जब
- 3:40आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स ने पहरे देने शुरू किया।
- 3:48और लड़ाई झगड़े किया। अभी वो वेला नहीं आया, बहुत दूर
- 3:54है और ये सभ्यताएं कभी भी पूर्णतया विलीन नहीं है।
- 4:00ये जन्मी, लेकिन अब भी जो 2100 अड़तीस में।
- 4:08प्रलय आएगी 20 अप्रैल को शाम 4:00 बजे।
- 4:13उसके बाद भी मानवता सारी खो जाएगी।
- 4:16ये मस्त बचेगी। मानवता काफी बचेगी, लेकिन आज
- 4:23जितनी नहीं आठ अरब नहीं तब तक तो और भी बढ़ जाएगी।
- 4:2710 अरब भी हो सकती है लेकिन पूर्णतया कभी भी है।
- 4:40सभ्यताओं का विनाश नहीं हुआ, कुछ ना कुछ बच गया है।
- 4:53और जो बच जाते हैं बस वो काफी है। हम अपनी संस्कृति में पढ़ते हैं
- 5:05कि मन्नू और शतरूपा, ये दो हुए बस दो ही चाहिए।
- 5:14हमारे यहाँ शहर में 1987 में गाड़ा मारी हुई थी, ओले गरे थे,
- 5:21बड़े मोटे मोटे हैं पांव पांव भर के, 250 ग्राम के और सारे।
- 5:29पक्षी मर गए। करीब करीब बड़े पक्षी तो मर ही
- 5:32गए। जैसे मोर मोर बड़ा पक्षी होता है,
- 5:36दूर तक उड़ नहीं सकता तो मोर तो एक भी नहीं बचा।
- 5:43मैं बहुत बार लोगों से कहता हूँ क्या आप ऐसा कीजिये मोर?
- 5:49बड़ा प्यारा होता है इसके बिना अधूरा है।
- 5:57अधूरा तो किसी भी प्राणी के बगैर है, लेकिन इसके बिना विशेष अधूरा
- 6:01है। क्योंकि इस मोर से तो भगवान कृष्ण
- 6:05का भी बड़ा प्रेम था। तो आप के जुड़ा लिए ये मोर मोर
- 6:15निगम बस बढ़ते जाएंगे और 1 दिन यहाँ मोर ही मोर होंगे।
- 6:24लेकिन आज तक किसने सहमत नहीं की कि एक जोड़ा यहाँ छोड़ जाए।
- 6:29हालांकि बहुत स्थानों पर मोर बहुत आयत में मिलते हैं, बस दो ही
- 6:37चाहिए। मन और शत्रु का इनसे ही विकास हो
- 6:42जाएगा। और इससे कहीं ज्यादा बच जाएंगे उस
- 6:53विनाश से लीला में, जो 2100 अड़तीस को होने वाली करोड़ों
- 7:00व्यक्ति बच जाएंगे? घबराओ मत।
- 7:07और विस्तार के लिए दो ही चश्मे उनसे ही आगे चला।
- 7:10सब और आज आठ अरब की आपत्ति हो गए। रहस्य क्या है रहस्य समझ में नहीं
- 7:25आता। अब समझ लेना ठीक से बात तुम्हारी
- 7:35खोजें। इन्वेंशन, स्केंटीफिक, रिसर्च
- 7:40तुम्हें उत्तेजित करती हैं, खुशी देते हैं।
- 7:44तुम झूम जाते हो वाह ये भी क्या खोज तुमने कभी नहीं कहा ईश्वर को
- 7:53जो कल के प्रवचन में मैंने बोला तुम कभी आश्चर्यचकित नहीं हुए।
- 8:03कि वाह ये भी तेरी सृष्टि में था चिट्ठी पहुंचाने के लिए छः छः
- 8:10महीने गुजर जाती, हजारों की कतार जाती।
- 8:14सैनी के जाते, फिर एक चिट्ठी दूसरे राजा तक पहुंचाई जा।
- 8:19जो कि 150 किलोमीटर दूर होता है और इतना ही वक्त आने को लग जाता
- 8:26है। करीब साल भर लग जाता है, लेकिन
- 8:30इसकी सृष्टि में व्हाट्सएप भी था। ज़रा सा तुम ऊँगली रखो।
- 8:38बस तुम्हारा मैसेज हो चुका थोड़ी सी ऊँगली लगाएगा वो और यहाँ पहुँच
- 8:46जायेगा सवाल जवाब बड़े सरल हो गए। पुराने जमाने न रहे।
- 8:55यह पहले से था तुम कब खोजोगे इस पर डिपेंड करता है है तो बहुत
- 9:03कुछ, लेकिन अभी तुमने खोजा नहीं। अगर मैं ठीक से तुम्हें बताऊँ तो
- 9:10वैज्ञानिक ने जो खोजा वह है 1% का।
- 9:16करोड़ों अरबों में 1% का कहत हूँ। देखिए कितना बाकी है खोजना न्यूटन
- 9:27ने सरायजा न्यूटन ने जब मरने लगा तो उनके शिष्यों ने पूछा आप महान
- 9:32हैं? फादर ऑफ़ साइंस कोई आदेश देना
- 9:40चाहेंगे हमें अपने इतने उगाड़ दिया सब नितिन शर्माया सब?
- 9:54आई हैव कलेक्टेड ओनली ए फ़्यू वेबर्स ऑन ए सीशोर ए व्हील दी
- 10:03ओशन्स ऑफ नॉलेज स्टिल रिमैन अनेक्सप्लोर्ड?
- 10:10मैंने अनेक समुद्रों के किनारे में से एक समुद्र के किनारे उस
- 10:16गहरे रेत में से कुछ कंकड़ पत्थर चुने हैं।
- 10:22एक के किनारे अनेकों में से जब के वाइल्ड ऑप्शन्स ऑफ़ नॉलेज।
- 10:29स्टिल रिमैन, उनक ऑडर्ड अभी तो कितने समुद्र हैं इनका भी पता
- 10:34नहीं। क्या तुम्हें पता है इस सरजना में
- 10:39कितने तारिक कितनी आकाशगंगाएँ हैं तुम्हें पता है।
- 10:49नहीं वैज्ञानिक कहीं का नहीं वैज्ञानिक करीकर आस्तिकता की तरफ
- 10:53मुड़ने लगे। वैज्ञानिक को बड़ा गमान था कि जो
- 11:04चीज़ हम खोज लेते हैं, वह बस वैसी ही होती है, लेकिन वैज्ञानिक के
- 11:11आविष्कार। बदल जाते हैं।
- 11:13वो ही हुआ जो न्यूटन ने कहा था आई हैव कलेक्टेड ओनली फ्यू पेपर्स तो
- 11:20न्यूटन ने कहा कि प्रकाश कण है पार्टिकल, लेकिन उसके बाद आए
- 11:30ह्यूजैन्स। जयंत ने कहा नो प्रकाश तरंग है,
- 11:39कारण नहीं है, मामला गड़बड़ हो गया।
- 11:45थाम सी यंग के डबल स्लिट। सिद्धांत के कारण उसने कहा नहीं
- 11:56प्रकाश तरंग है। यूजेंस ने कहा कि प्रकाश तरंगों
- 12:05की तरह हस्तक्षेप करता है। लेकिन उसके बाद अभी तक साफ नहीं
- 12:14था। मसला प्रकाश के ऊपर ही उलज हुए
- 12:17थे, उसके बाद आइस्टिन आया है। आइस्टिन कहते अल्बर्ट आइस्टिन ने
- 12:26फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव के जरिए बताया कि प्रकाश।
- 12:32जो ऊर्जा होती है वह क्विन्टा होते हैं और उसको फोटो भी कहा
- 12:39उसने गड़बड़ हुआ सब अभी कोई वैज्ञानिक सहमत न थी।
- 12:48लेकिन एल्बर्ट आइंस्टीन बड़ा शानदार मोड़ दे गया और यहीं से
- 12:53शुरू हुआ प्रकाश और तरंग के कण और बेफ इनका सिद्धांत गड़बड़ा गई।
- 13:04सारी वैज्ञानिकता। लेकिन उसके बाद लुई डी ब्रॉगली ने
- 13:13ये सुझाव दिया कि प्रकाश ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉन भी तरंगों की
- 13:21तरफ बाहर करते हैं। जबकि इलेक्ट्रॉन को कण माना गया
- 13:27था। लोई डी ब्रॉब्ली ने कहा कि प्रकाश
- 13:35तरंगों की तरह ही व्यवहार करता है।
- 13:38बस यहीं से गड़बड़ शुरू हो गया। पुलिस ने प्रयोग से स्थित कर
- 13:42दिया। वहीं से शुरू हुआ पार्टिकल
- 13:49वेवड्वेलिटी प्रिंसिपल सारी वैज्ञानिकता थर्रा गये।
- 13:56बेसिक काज़ जब कहा कि सिर्फ प्रकाश ही ने।
- 14:03यह तो इलेक्ट्रॉन भी डुअल स्वभाव का है।
- 14:09कभी तरंगा और कभी कण आप बताइए यह निश्चित क्या है और कौन जाने?
- 14:24आज जो वैज्ञानिक ने प्रमाणित किया, श्रद्धा से ही बदलता रहा।
- 14:30लेकिन आज यह सिद्धांत है वेब वर्टिकल ड्यूल।
- 14:40ये ड्यूलेटिव प्रिंसिपल है आज तक। कोई पता नहीं था।
- 14:451900 शताब्दी में 1900 बात की कि ऐसा कुछ होने वाला है, 1 दिन एक
- 14:50डायरिटी भी आएगी। पता नहीं कब प्रकाश और इलेक्ट्रॉन
- 14:57कण के रूप में व्यवहार करें। और पता नहीं कब तरंग के रूप में
- 15:01व्यवहार करना शुरू कर दें। अब करिए निश्चित सभी कुछ निश्चित
- 15:13हैं। कहने वालों तुमसे तो विज्ञान में
- 15:19भी अनिश्चितता शादी न गई। तुम वहाँ भी बुरी तरह बैठे हो,
- 15:29लेकिन जो समझ आ जाए आपके प्रश्न जो समझ आ जाए वो बुद्धि बुद्धि की
- 15:38पकड़ से परे समझी नहीं जाती। जिसे आप समझ रहे हो बहुत बार लोग
- 15:47मुझे कहते हैं मैं बोलता ही चला जाता हूँ, बोलता ही चला जाता हूँ
- 15:53वो मैं जानता हूँ क्या बोलता हूँ इतनी तह गहरी जम जाएगी।
- 16:00बाबा ने किसी वक्त जप जी में कहा था 500 से ज्यादा वृक्ष है, सुनिए
- 16:08दुःख पाप का नाश सुनते रहोगे, सुनते रहोगे, सुनते रहोगे तहें
- 16:15जमती चली जाएगी। और लिमिटेड जगह है तुम्हारे भीतर
- 16:23अचेतन में अवचेतन में तुमने देखा एक जात्री उठ जाता है गाड़ी में
- 16:32से जगह खाली हो जाती है वहाँ दूसरा बढ़ जाता है।
- 16:44तुम्हारा अचेतन मैं घर में उतार दूंगा अपने मौलिक दर्शन को, अपनी
- 16:58मौलिक अनुभूतियों को तो वह भी तो स्पेस मांगेगा।
- 17:04मुझे बेहतर पता है हौ टु चेंज यू हौ टु ट्रांसफॉर्म यू।
- 17:13पर मैं उसी ढंग से चिंता ये अचानक से एक व्यक्ति का भीतर भर जाना।
- 17:21अचानक से एक व्यक्ति का खाना इतना सिंपल कर देना।
- 17:28डॉक्टर मुझे कहते हैं मेरे शिष्य नहीं नहीं नहीं चल पाएगा।
- 17:31शरीर और कब से बोल रहे हैं? 10 वर्ष से बोल रहे हैं, नहीं जल
- 17:37पाएगा शरीर इतनी कैलोरीज, नट सुफ्फिसिएंट फॉर।
- 17:42हेल्त बस एक दो वर्ष जिओगे लेकिन 13 वर्ष हो गया और आज भी गर्ज कम
- 17:54नहीं हुई। मैं कुछ और नहीं करता जो लोग कह
- 18:00देते हैं बाबा। मैं तुम्हारे पास आना चाहता हूँ
- 18:04चार 5 दिन के लिए मैं ना करूँगा वाकई ही तुम खाना नहीं खाते, वाकई
- 18:12तुम नहीं खाते सब्जी वगैरह क्या तुम्हारा मन नहीं करता?
- 18:19मैंने कहा आके देखो तुम्हें कोई घुस नहीं देखा, कोई नहीं घुस नहीं
- 18:26देखाता है और मुझे कोई सजा हुई है जो तुम ऐसी ही बातें करते हो।
- 18:37तुम ये कहते हो बाबा तुम सम्मान मांगते हो तुम मत दो तुम्हारे हाथ
- 18:42में, है ना लेकिन बाबा जो खाते हैं वही खाते हैं, इसमें कोई फर्क
- 18:49नहीं। बहुत से लोग यहाँ रहते हैं आश्रम
- 18:54में। पखवाड़े बता देते हैं।
- 19:00वह गवाह हैं, रह जाते हैं, मेरे बगल के कमरों में रह जाते हैं।
- 19:06वह गवाह हैं और सबसे बड़े गवाह मेरे घरवाले परिवार जो मुझे बना
- 19:11के देता है मेरा दूध। ये तुम्हारे लिए असंभव होगा,
- 19:18लेकिन मेरे लिए असंभव कतई नहीं है।
- 19:26तो लुई ने कहा, यह कण की तरह भी है और यह तरंगती की तरह भी
- 19:32व्यवहार करता है। मूल बात पर आ जाएं।
- 19:35जो समझ आ जाएगा हम ध्यान से समझ लें ना जो समझ आ जाएगा वह संसार
- 19:47और जो समझ आ जाए वो आपको सुख तो दे सकता है आनंद नहीं आनंद बड़ा
- 19:53रसीला होता है। और जिसकी बात तुमने पूछी है पुत्र
- 20:00वो रहस्य क्या है जिसकी बात आप सदा ही करते हो?
- 20:03वो रहस्य है आनंद जिससे बुद्धि कभी नहीं पी पाएगी, कभी नहीं पी
- 20:09पाएगी, मैं कहता हूँ। इम्पॉसिबल क्यों?
- 20:17क्योंकि बुद्धि को मिट ना होगा और मीठ कर कोई अनुभव कैसे कर पाया
- 20:23है? मीठ कर तो विलीन हो जाता है,
- 20:27अनुभव नहीं किया जाता। पला क्षमा में बरवाना खो जाता है,
- 20:37बस खो जाता है, तुम्हें नहीं पता लगता परवाने पर क्या गुजरी है वह
- 20:48दीवाना होता है परवाना। मिटने को है, वे जानता है मिटूंगा
- 21:00तो मिलूंगा नहीं। मिटूंगा तो अलग थलग रहा हूँ और वो
- 21:07उस आनंद की तलाश में हैं और साहस जुटा लेता है।
- 21:13श्रावण की जलती हुई लोग चमकीली लोग, बडकीली लोग उसे कैसे लेते
- 21:19हैं और वो समाहित हो जाता है। तुम्हें उसके बाद नहीं पता कि
- 21:24परवानी का होता क्या है? बस ऐसा ही जब तक तुम ना हो जाओ।
- 21:32आनंद तो न पी सकोगे ये कन्फर्म है।
- 21:42बहुत लोगों ने मुझे प्रश्न पूछा समझ नहीं आया बाबा मैंने कहा
- 21:49दूसरे चैनलों पे चले जाऊं अगर समझ समझ ही चाहिए हो तो।
- 21:55बहुत हैं ईंट उखाड़ हो गए, चार भक्ता मिलेंगे और सभी ज्ञान आज
- 22:06ऐसा कुछ हो गया, तुम पागल हो जाओगे, तुम्हारी न्यूरोन जीतने
- 22:11बार जाएंगे, विस्फोट हो जाएगा। ये ऐसा ही पागलपन संसार में जो
- 22:19चला है, एक दम से नहीं हुआ। धीरे धीरे धीरे धीरे ये सब हुआ
- 22:25है। इसे ही हम अंधवक्ति कहते हैं।
- 22:35धीरे धीरे ये मान्यताएँ ये तुम्हारे भीतर उतरती चली जाएंगी
- 22:44और तुम मुर्छा के आलम में खोए खोए ये समझोगे हम मदहोश हो गए नहीं
- 22:49तुम मूर्छित हो गए। मुर्शीत और मदहोशि में लॉट ऑफ़
- 22:56डिफरेंस बिट्वीन दी टू मुर्शीत में बेहोशी होती है और मदहोशि में
- 23:08होश भी होता है। और आनंद भी होता है मद में डूबी
- 23:13हुई वो होश मद से सनी हुई वो होश जब तक तुम ऐसा नहीं होता जब
- 23:22तुम्हारी सुध न बिखर जाए तुम अपने आप को।
- 23:29होश को मद में नट बो दो लथ पथ न कर दो तब तक उस रहस्य का तुम्हें
- 23:41पता न चलेगा समझने जैसी बात नहीं है पुत्र।
- 23:49ये पीने जैसी बात है, समझने की लाख चेष्टा करने पर भी तुम शराब
- 23:57का एनालिसिस कर लोगे। फॉर्मूलेशन डीप में चले जाओगे
- 24:03लेकिन क्या वो सर्वर आ पाएगा जो पीके आता है?
- 24:10नहीं हो पायेगा तुम एनालिसिस कर सकते हो इतना पानी इतना अल्कोहल
- 24:21इतना ये केमिकल इतनी परसेंटेज? लेकिन मुझे ये बताओ एनालिसिस तुम
- 24:29कागज़ पर लिख दोगे, लेकिन क्या तमाम एलिसिस करने के बाद भी तुम
- 24:37उस शराब का आनंद ले सकोगे? मज़ा माना शराब बेहोश करती है।
- 24:46लेकिन बेहोशी का भी तो तुम्हें कोई अनुभव नहीं है?
- 24:52काश तुम बेहोशी का अनुभव ही ले सकते हो।
- 25:01मेरे पिछड़े जन्म के एक व्यक्ति जो रहस्यवादी थे, मैं उनके बड़े
- 25:09संपर्क में रहा। कौन थे गुरु जीव?
- 25:211871 में इनका जन्म हुआ। जॉर्ज इवानोविच।
- 25:30गुरचिप इनका नाम था अरबिन्याय थे। वहाँ इनका जन्म हुआ और यह एक
- 25:43रहस्यवादी थे। इनके जीवन से बड़ा प्रभावित था।
- 25:48मैं पिछले जन्म की बात बता रहा हूँ।
- 25:53इनका सिद्धांत बड़ा अजूबा था। लाजवाब सभी जगह गुम फिराए थे
- 26:08संसार में जहाँ जहाँ आध्यात्मिकता की संभावनाओं थीं, एशिया गए।
- 26:15तिब्बत गए जहाँ भारत में भी आए। सभी जगह गए जहाँ जहाँ
- 26:24आध्यात्मिकता की गूढ़ सभ्यताएं थीं, मान्यताएँ थीं, गुरु लोग
- 26:30बैठे गए, वहाँ से सबसे करेक्ट गया।
- 26:35तीन तरह की व्यवस्थाएँ उन्हें मिली, लेकिन उन्हें संतुष्टि नहीं
- 26:40हुई। खुद के ऊपर प्रयोग किया एनलाइटन
- 26:48हुए और उसके बाद उस रहसे में उतरे बस मैं अपनी जिंदगी में।
- 26:54दो ही व्यक्तियों को रहस्यवादी रूप में देखा या तो पीछे ले जन्म
- 26:59में जॉर्ज एवेनोविच गुरजीव यह इसी जन्म में जो आग्रा के पास रहते
- 27:11थे। रत्न गिरे बड़े ही सोते थे।
- 27:17यही से मेरी शुरुआत इस जिरम में हुई जब मैं भटकता रहा खोजता रहा।
- 27:24मेरे से वो घटना घट गई और मुझे समझ न आया बुद्धि जा मूक हो जाती
- 27:30है। बुद्धि चुप हो जाती है।
- 27:36कोई जवाब नहीं होता बुद्धि के पास उस घटना का तो बुद्धि बोलना छोड़
- 27:43देती है। तर्क तुम्हारा गायब हो जाता है।
- 27:47का फूल हो जाता है। वासु बनकर हवा में उठ जाता है।
- 27:50वातावरण में तुम्हारी बुद्धि तर्क देना बंद कर देती है क्योंकि एक
- 27:58बड़ा तर्क आ गया तुम्हारे सामने पहले उसे खोजो अन्यथा सब व्यर्थ।
- 28:09तो इस जन्म में मुझे प्रभावित के रत्नागिरि ने, जो आग्रा के पास से
- 28:14ताजमहल से आगे है, मैं जब भी जाता हूँ, उनकी शरण में जरूर जाता हूँ।
- 28:22वहीं से शुरुआत हुई। मैं खोजी था खोज में भटक रहा था
- 28:27मुझे कोई ना मिला कोई था भी नहीं घर से निकला नहीं मिला हनुमान जी
- 28:38ने मुझे रोका जाओ जाओ वापस चले जाओ बच्चे तुम्हारी उम्र क्या है?
- 28:45मासूम चेहरा और इतना गहरा उसे खोज लेने का मादा जज़्बा सब लूटा
- 29:02दूंगा, लेकिन वह खोजूंगा। तो हनुमान जी ने मुझे कहा आप वापस
- 29:12चले जाओ, आपको घर सब चीज़ मिल जाएगी यह जैसे एक मुझे आशीर्वाद
- 29:18था, लेकिन बुद्धि कहाँ मानती है? मैंने कहा नहीं, नहीं, मैं तो
- 29:25बड़ा भीतर से। इस प्रश्न के लिए उतावला था वो
- 29:30कौन था? बस यही उलझा गया और देखिए जब तुम
- 29:36मेरी किताब पढ़ोगे, यहाँ उलझ जाओ और कह दो कि सुलु के पट्ठे न लगी
- 29:42है तो कोई अति महत्वपूर्ण बात नहीं है।
- 29:48तुम कह सकते हो यद्यपि अगर आगे चल पड़ते तो फिर तुम कहते किस उल्लू
- 29:53ने लिखी है, क्योंकि सभी जगह तुम्हें ऐसी बातें, रहस्य से
- 30:00ओतपरोत चीजें जो तुम्हें झरनाटा देती चली जाएंगी, बच्चों को बड़ी
- 30:06पसंद है। क्योंकि बच्चों को ऐसी चीजें बड़ी
- 30:09अच्छी लगती हैं। आश्चर्य अच्छा लगता है, बच्चों को
- 30:13आश्चर्य में पले होते हैं इसलिए बहुत से बच्चे आते हैं।
- 30:16बाबा ऐसा कुछ एस्टल के बारे में बता दो और बता दो ना, क्योंकि वही
- 30:24उन्हें संभावित करता है। तुम्हारी संसार की बातें उन्हें
- 30:29सम्मोहित नहीं करतीं। 1 दिन मौत आ जाएगी क्या?
- 30:32लेकर आया बंदे क्या लेकर जाएगा ये उन्हें नहीं मोहित करता।
- 30:37ये मोहित करता है एस्टल ट्रैवलिंग ब्रैक कोहल गया वहाँ गया, एक
- 30:44सितारे पे गया ग्रह पे गया। लोग कहते जीवन है बिल्कुल है और
- 30:55मैं सदा आँखों से की बात कहता हूँ, झूठ बोलूं भी किसलिए है जब
- 31:00तमन्ना नहीं कोई तमा नहीं, कोई इच्छा नहीं कोई।
- 31:05जर्रे की भी इच्छा नहीं कोई वह झूठ कोई क्यों बोलेंगे तो बच्चे
- 31:11मुझे अक्सर कह देते हैं बाबा कुछ सुना दिया करो, मैंने कहा आप सुन
- 31:16लिया करो मेरे प्रत्येक प्रवचन में रहस्य तो होता ही है, रहस्य
- 31:24भी भरा होता है। और जहाँ तुम शुद्ध बुध खो देते हो
- 31:31और रसीले हो जाते हो बस उस मुकाम पर पहुंचना है।
- 31:44तो जार जी एवमानो विच गुरजिफ ये शराब पिलाता लोगों को और बहुत उस
- 31:55तरह की ऐसी ऐसी क्रियाएं कराता। उसने अपने मिशन का नाम रखा दफोर्थ
- 32:01हुए। तीन वे थे उस वक्त, लेकिन तीनों
- 32:09को उसने नकार दिया। उसने कहा नहीं ऐसा नहीं चलेगा या
- 32:15तो कीड़े की चल है और कीड़े की चाल से तुम इस बहरट के पास पहुँच
- 32:21जाओ। बहुत मुश्किल लगता है।
- 32:24जीवन बीत जाएगा इसलिए तुम्हें पूर्ण शक्ति से कुछ करना होगा
- 32:33झोंक दो, अपनी सारी शक्ति को इसे इसे फॉर्थ वे कहा।
- 32:44उस वक्त योग का मार्ग था, सन्यास का मार्ग था।
- 32:47इन्हीं मार्गों पर दुनिया जलती थी, वैराग्य था।
- 32:58उसने फोर्थ में कहा। फोर्थ वे में क्या कहा?
- 33:02दुनिया छोड़ छोड़ के जा रही थी। शंकराचारी के बाद दुनिया पागल हो
- 33:07गई जगत मिथ्या उन्होंने कहा, अगर मिथ्या है तो ये बाल बच्चे ये घर
- 33:12वाली ये पैसा दिला इकट्ठा करना एक मूढ़ता का विचार था।
- 33:20सब व्यर्थ है। चलो चले कंधराहों में लोग चले गए,
- 33:26पर्वत भर गए, वन भर गए, मोक्षों से पिपासुओं से ऐसा पागलपन आया।
- 33:40इसलिए मैं शंकराचार्य को कहता हूँ, मुझे शक वहाँ हुआ शंकराचार्य
- 33:44पे, जहाँ वो पोत ही उठा के मंडल मिश्र के साथ शस्त्रार्थ कर रहे
- 33:52थे। भला इस मूर्ख को ये नहीं पता था
- 33:55कि वह इतना भ्राट शस्त्रार्थ करने के योग्य है।
- 34:00मैंने कितनी बार कहा, मेरे पास लोग आ जाते हैं, पोत ही लेकर बाबा
- 34:04सार्थक करें। मैं उसके पंप पर लेता हूँ।
- 34:06देखिए आपकी तवन्ना पूरी हुई, आप जीत गए क्या?
- 34:11शंकर शरण नहीं कह सकते थे मंडल मिस्टर के चरणों में, सिर नवा के
- 34:17भारतीय के चरणों में सिर नवा के। मैं हारा, तुम जीते और संत तो ऐसा
- 34:22ही करते हैं जो संत अपनी बलन्दी का झंडा उठाए फिर वो तो पहलवान है
- 34:30और संत कहाँ, उसने तो झंडी उठा दी, पकड़ो इसको जो कि जाया बलवान
- 34:36है तुम। और कोई उसे झंडी को पकड़ लेता है।
- 34:40मंडन मिश्र ने पकड़ लिया और मंडन मिश्र हार गया।
- 34:48जज्ज थी उसकी धर्मपत्नी भारती भारती।
- 34:52बड़ी ईमान तक तब लोग ईमान पर होते थे, बेईमान नहीं होते थे।
- 34:59भारती ने कहा, मंडन तुम हर गए शंकर चापड़े खुश हुए झंडा और ऊपर
- 35:10कर दिया, झंडा ऊपर रहा ऊँचा रहा है हमारा, बस तुम्हारा झंडा ही
- 35:18ऊपर रहता है। तुम डंका डंका बजाते हो, शब्दों
- 35:25से लोग बजाते हैं कार्यों से तुमने डंकापति विकसित किए।
- 35:38लोगों ने विकास किया बुद्धि का, विज्ञान का तो मूड से मूड होते
- 35:44चले जाओगे और देख लेना 1 दिन फना हो जाओगे और समृद्ध से समृद्ध
- 35:53होते चले जाएंगे और देख लेना तो तुम्हे गुलाम बना लेंगे।
- 35:59आर्थिक गुलाम जो देश झूठे आंकड़े पैदा करने लगे बताने लगे अपनी
- 36:08जनता को, जिससे जनता ने उसे चुन के भेजा।
- 36:13तो किसी और से द्रोह नहीं कर रहा। वह देश से द्रोह कर रहा है।
- 36:20जनता जिसने सब सौंप दिया, कुछ भी ना रखा उसे आंकड़े छुपा लेना
- 36:28कितना भयंकर द्रोह है, कितना भयंकर पाप है लेकिन आज ये हो रहा
- 36:33है। बिल्कुल पड़ोसी मुल्क कहाँ पहुँच
- 36:36गया सुपर ए ए आई का निर्माण कर रहा है, न जाने क्या कुछ कर रहा
- 36:44है अपने आप कारें चलेंगी, अपने आप गाड़ियां चलेंगी जे पैन में से
- 36:49है। मेरे मित्र जो चरित जा के आए थे,
- 36:56जापान मेडिकल की दुकान थी मुझे जापान की कहानियों बजाते।
- 37:11वह गाड़ियां बसें अपने आप चलती हैं, रुक जाती हैं।
- 37:15कमाल है, कोई ड्राइवर नहीं, हाँ हाँ ड्राइवर प्लस थोड़ी हैरानी
- 37:23होती है 1 दिन वो मुझे बता रहे थे मैं कोई दवाई लेने गया था
- 37:29केमिस्ट्री शॉप से। दवाई देते वक्त जब उन्होंने हाथ
- 37:33मेरी तरफ बढ़ाया, मैंने उनकी लाइफ लाइन नहीं देखी।
- 37:36एक होता है इसमें। मैंने कहा मित्र हाँ शर्मा जी
- 37:48मुझे शर्मा जी। तुम्हारी उम्र ज्यादा नहीं है।
- 37:55अच्छा अच्छा किया तुम गम फेर लिया और कोई इच्छा हो तो पूरी कर लेना।
- 38:01तुम्हारी उम्र ज्यादा नहीं है पर जल्दी चले जाओगे इन दी अर्ली
- 38:08डेकेड्स। ऑफ़ लाइफ और वो जल्दी ही चले गए
- 38:14और मरे भी कैसे? वो ही बिमारी जो आम है।
- 38:18डेंगू हो गया, प्लेटलेट्स कम हो गए और क्या था?
- 38:24क्या है प्लेटलेट्स को ज्यादा बढ़ाना?
- 38:27बकरी का दूध पी लो। ये कीवी खालो बड़े उपाय हैं।
- 38:32सब किए लेकिन नहीं बढ़े, तुम कोई भी इलाज कर लो, वो ढंग खोज लेगा।
- 38:44जी मैं बताता हूँ मैं डूब रहा था, कुछ नहीं था।
- 38:48पगड़ी देने से मना कर दिया। पुलिस वाले ने अचानक एक व्यक्ति
- 38:52रस्सी लेके आ ये लो निकालो उसको इस दट।
- 38:59लेकिन परमात्मा को कुछ और मंजूर होता है।
- 39:06मुद्दई लाख होरा चाहे भी तो क्या होता है, होता है वही जो मंजूर
- 39:11है, खुदा होता है इसको रहस्य कहते हैं और मेरी जिंदगी में बहुत से
- 39:17ऐसे रहस्य हैं, बहुत तो साक्षी हैं।
- 39:21इन घटनाओं के बहुत से साक्षी तो नहीं है?
- 39:26वो मेरे अकेले में कटिंग और कुछ जो साक्षी थे आज विदा हो गए।
- 39:34ये रहस्य है जो कभी समझ नहीं आएगा।
- 39:38अब देखिए तुम फैसला करो आज मैं वाइफ करके कर देता हूँ इन्हें।
- 39:44विभाजित कर देता हूँ तुम पहले तो फैसला करो, देखिए आप अपने जीवन को
- 39:50बनाती हैं, पहले फैसला करते हैं कौन सी लाइन ठीक रहेंगी?
- 39:54इंजीनियर, डॉक्टर, खिलाड़ी, राजनीति जो कुछ नहीं कर सकता।
- 40:03वो चुप करके राजनीति में चले जाओ। बुद्धू लोग राजनीति में प्रवेश कर
- 40:11जाएं बिना पूछे क्योंकि वो कुछ नहीं कर सकते, राजनीति कर सकते
- 40:16हैं जो कुछ नहीं कर सकते, राजनीति करते हैं।
- 40:23हुक्म तो दे सकते हो, हुक्म नहीं मान सकते हुक्म अंदर सब को बाहर
- 40:31हुक्म मैं न कोय नान कहो मैं जे भजे तह मैं कहे न कोय, तुम ये तो
- 40:39न करो पाओगे ये तो बड़ा मुश्किल है।
- 40:42या कोई नानक कर पाएगा या कोई पलटू कर पाएगा या कोई मीरा कर पाएगा?
- 40:47कोई कबीर कर पाएगा तुम नहीं कर पाओगे।
- 40:50यह कोई आसान मसला नहीं है। तुम कहते हो बस इतनी सी बात है,
- 40:54लेकिन इतनी सी कहाँ है? यही तो भविकानंद कहते थे, इतनी सी
- 41:00बात है, ज़रा हाथ रख दो। और जब सिर पर हाथ रखा तो आगे मौत
- 41:06ही मौत खाई पड़ी और मौत तुम कभी नहीं चाहते और मौत ही सर्टेन है
- 41:14जो तुम कभी चाहते नहीं लेकिन तुम्हारी चाहनी से या ना चाहने से
- 41:18होता क्या है? होता है वही जो मंजूरे खुदा होता
- 41:22है ये खुदा ये रहस्य है इसके बारे में कभी फिलॉसोफिकल डिस्कॅशन न
- 41:30करना, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ क्यों पोथी लिए विरे शंकर बस यही
- 41:37मुझे आश्चर्य हुआ। फिर मेरी आत्मा का रो और माँ बोला
- 41:42ही वास् ए नॉट इन सीक्रेट ही में बी एनलाइटन पर्सन आत्मज्ञानी हो
- 41:51सकता है, लेकिन आत्मज्ञानी झंडा बुलंद रख सकता है।
- 41:56रहस्य में नहीं, रहस्य में तो जाके खो जायेगा व्यक्ति।
- 42:00क्षमा के भीतर परवाना जलकर राख हो जाए और उसकी अपनी कोई हैसियत फिर
- 42:05न बचेगी। अपने आप को जानने तक तुम्हारी
- 42:13समस्या नहीं खत्म होगी ध्यान से सुन।
- 42:18अपने आप को जानने तक तुम्हारी समस्याएं खत्म होगी।
- 42:22समस्याओं का समाधान हो जाएगा। रोगों का निदान हो जाएगा।
- 42:26तुम्हारे सब दुख दुखड़े मिट जाएंगे।
- 42:29अपने आप को जानने तक बुद्ध के मिट जाते हैं।
- 42:39लेकिन अपने आप को जानने के बाद उस विराट को उस सर्प को जानने के बाद
- 42:49तुम्हारे दुखड़े नहीं ध्यान रखना तुम ही खाक हो जाओगे।
- 42:54ये बड़ा खतरनाक पहलू है। अगर इतना ढेर हो तो रहस्यमय कूदने
- 43:01की इच्छा कर रहा है। सब इच्छाएं खो जाती हैं जहाँ वहाँ
- 43:12रहस्य का आगाज होता है। पहले छाईं खोती हैं फिर रहस्य का
- 43:19पदार्पण होता है। तो रहस्य तो पूछ लिया पुत्र मनोज
- 43:28लेकिन अब देखिए इतनी हिम्मत जुटा पाओगे?
- 43:37ब्लास्ट ब्रेस्ट विवेकानंद नहीं मैं जुटा पाया, जब गर्क होने लगा
- 43:47उस गहरी गुफा के अंदर कुएं के अंदर चिल्लाता।
- 43:54गुरुदेव मेरे माँ बाप हैं और उनकी सबकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है।
- 44:04संत इतना डिक्टेटर नहीं होता, हिंसक नहीं होता, हिंसक होता है,
- 44:09परम हिंसक होता है। फौरन हाथ उठा लिया।
- 44:12अच्छा फिर आ जाओ बाहर। लेकिन जो तुमने देखा अब तक वो
- 44:18बहुत कुछ देख चुका था जिसे सितौरी कहते हैं और सतौरी मिल जाए।
- 44:22एक बार मैं बहुत बार कह चुका हूँ। बाबा नानक को सत्रहअट्ठारह साल की
- 44:29उम्र में सितोरी मिली और 36 वर्ष में जाकर।
- 44:33उतने ही आग लग गए तो रहस्यमय कूद गए।
- 44:45तो रहस्य क्या है? इसकी कोई डेफिनिशन है जो समझ में
- 44:53न आए वो रहस्य इसको सीधा से समझ लेना।
- 44:57ये तो समझ में आ जाएगा ना जो जो समझ में आ जाये वह नियम जो समझ
- 45:04में ना आ जाये हम कहते सिर के ऊपर से गुजर जाए, वह रहस्य रहस्य आनंद
- 45:11से भर देता है। तुम्हारी इच्छा तो बहुत होती है।
- 45:16बड़ा प्यारा है, रसीला है, मिठास है, आनंद से लिपट बढ़ गया है
- 45:25तुम्हारी इच्छा बहुत होती है, सुख तो तुमने बड़े दिखे महा सुख भी
- 45:30तुम देख लोगे जब तुम स्वयं को जानोगे।
- 45:34लेकिन उससे आगे भी एक मुकाम है। देखिए बुद्ध के मुकाम पर रुकना
- 45:38चाहो रुक सकते हो ओषों के मुकाम पर रुकना चाहो रुक सकते हो लेकिन
- 45:45उसके बाद एक रहस्य है जिसने रहस्य को पी लिया।
- 45:51बस उसने सब पी लिया। कृष्ण रहस्य को भी जाती है।
- 45:55कृष्ण की भाषा बदल जाती है। राम स्वामी राम रहस्य को भी लेते
- 46:00हैं, उनकी भाषा बदली जाती है। वो कहेंगे राम को भूख लगी है, राम
- 46:15को रात को ठंडी लगी है तो राम को आप ज्यादा कंबल दे दिया करो भाई
- 46:22बाहर ठंडी बहुत होती है बाहर विदेश यात्रा पर चले गए थे राम
- 46:29इज़ धांगरी। राम को रात नींद नहीं ठीक से आई
- 46:34ठंडी में, ठिठुर सा ऐसे बोलता था ऐसे जानबूझकर नहीं बोलता था।
- 46:42उसके भीतर से ही वह बोलता था। फैसला तुमने करना है।
- 46:53समझ तक रहना है तो एक समझ संसारिक है।
- 46:58तुम संचित हो जाओ, खोज करो वो तो तुम्हें खोपड़ी की तसल्ली देगा,
- 47:07नोबेल मिल जाएगा। तुम सर्वविज्ञानी और सर्वविद्वान
- 47:16का पुरस्कार पालोगे पद्मश्री पालोगे भारतसर्जन पालोगे इससे
- 47:21ज्यादा भी कोई और भी बनाए वो भी पालोगे लेकिन वो इनाम पारितोषिक।
- 47:28दैट इज़ नॉट सुफ्फिसिएंट फॉर एक्चुअल इंटेलिजेंस ये भी
- 47:35तुम्हारी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस है तुम्हारे सर रोगों से ज्यादा
- 47:39आज आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जानता है जो आचार्य बोल रहे हैं।
- 47:47उससे कहीं ज्यादा हजारों, लाखों को ना ज्यादा आर्टिफीसियल एजेंट
- 47:52क्षमा करना आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स यह जानता है और यह
- 47:58बताता है आपको तो इसके ऊपर ज्यादा ज्यादा मान ना करना सब घुरुर तोड़
- 48:06दिए इसने। सब है, इसके भीतर बहुत देर से है,
- 48:10विकिपीडिया चल रही थी, सब चल रहा था इससे पहले लेकिन ये है कुछ नए
- 48:19तरीके का ज्ञान आया तो आपको सब बता देता है।
- 48:22इससे कुछ भी पूछिए सब बता देगा तुम्हें।
- 48:27वो ज्यादा मगज खपाई करने की जरूरत नहीं, इन अचारों के सामने प्रश्न
- 48:32रखने की आवश्यकता नहीं। इतनी दूर कहाँ जाओगे, घर बैठो,
- 48:42इनको सब्सक्राइब करो। इससे पूछो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस
- 48:48तो कोई भी है? चैट जी पैट है, ब्रोक है और भी
- 48:53बहुत सी हैं उनसे पूछो बहुत दूर जाने की आवश्यकता नहीं, ये तो कभी
- 49:00गलत भी हो जाएंगे, ये तो कभी गलत बता भी देंगे।
- 49:04वह नहीं गलत बताएगा। वह बहुत से पहलू आपको उजागर कर
- 49:09देगा। अरबीनिया में इनका जन्म हुआ जो कि
- 49:19रशिया के करीब बाउंड्री पे लगता है।
- 49:23उस वक्त के। लेकिन उसके बाद छोटी सी उम्र में
- 49:32ये रहस्यमय खो गया है। रहस्य की तरफ इनकी उन्मुखता हो
- 49:39गई। सब जगह गए खोजे खंगाले।
- 49:43तसल्ली नहीं हुई। आखिर में तसल्ली हुई और फिर
- 49:49तसल्ली होने के बाद सैटिस्फैक्शन होने के बाद इन्होंने फोर्थ वे
- 49:54इजाद किया। ये बिल्कुल अलग है, तुम हैरान हो
- 50:00जाओगे। और सही पूछो तो इसी कारण से गाँधी
- 50:07पिछले जन्म में इतना चले चलते चले जाओ, चलते चले जाओ।
- 50:13यह कुछ मात्रा में गुर जेब का प्रभाव था।
- 50:22अति कर दो, अति कर दो तो शराब पिलाते।
- 50:30तुम्हारे लिए तो छि छि छि तुम्हारे ते डेरों में निकासी हो
- 50:38जाती है अगर कोई शर्म प्रवेश ही नहीं होता।
- 50:42लेकिन वो तो कहता था आओ बैठो पियो, पियो पी से चले जाओ और खूब
- 50:50पियो और पियो आदमी करी तो मूर्छित हो जाता है वो कहता है अभी।
- 51:01अभी पूर्ण मुर्जा नहीं आई और पिलाता पास बैठ के पिलाता बीच बीच
- 51:09में से दूसरे शिष्यों के पास जाता है।
- 51:12कोई किसी तरह की कोई किसी तरह की साधना कर रहा है।
- 51:21इस बुद्धि को इतना मुर्शीत कर दो ये समझ को इतना मुर्शीत कर दो
- 51:26इतना मुर्शीत कर दो कि तुम्हें पता चल जाए कि एक जागृत तत्व भी
- 51:33है जो इस मुर्शी को देखा। ये फिलॉसफी प्रेडिक्शन दास थी।
- 51:44जो बाधा डालता है जो ओस्टिकल है, जो बैरियर है उसको इतना ज्यादा
- 51:54मूर्छित कर दो उस मूर्छित क्षण में।
- 51:59जो जागा है वह तो सदा जागा रहेगा, वो नहीं मुर्शीत होता।
- 52:03जो कट नहीं सकता, जो जल नहीं सकता, जो मर नहीं सकता, जो सुख
- 52:09नहीं सकता, जो गल नहीं सकता उसको तो मुर्शीत कैसे करोगे, वो तो होश
- 52:16है, वो तो चेतना है, शुद्ध चेतना है।
- 52:19वह मूर्छित होती ही नहीं तो जो मूर्छित होगा वह तुम्हारी समझ है
- 52:26और ये समझ बाधा है। अत्यंत शानदार फिलोसोफी का
- 52:33निर्माण किया। उन्होंने सब बांट के रख दिया।
- 52:40और अगर देखा जाए तो गाँधी के जीवन में अभी पता नहीं कोई कहता है रमन
- 52:49का कोई कहता है किसी का नहीं। गुर जेफ का उसी कालखंड में थे।
- 52:56गुरजोफ बस करीब करीब गाँधी की हत्या के बाद क्रीब क्रीब उसके
- 53:05आसपास ही वो गुजरे। वो बिदे छोड़ता है, लेकिन एक बंधे
- 53:13जाति जंजीर। एक सिंहासन चढ़ चढ़ वो सिंहासन पर
- 53:18चढ़ के चढ़ एक बंधे जाति ज़ंजीर गाँधी जंजीर में पड़ते थे अभी
- 53:24जंजीरें बाकी थीं, अभी टूटी नहीं थी सभी जंजीरें बहुत टूट चुकी थी
- 53:34लेकिन सभी ना टूटी थी। अभी सत्य का आचरण था, अभी सत्य तक
- 53:44पहुंचे नहीं थी, हुई अहिंसा का आचरण था, अभी उस अहिंसक तत्व तक
- 53:53पहुंचे नहीं थी, लेकिन इतना ही काफी है अगर कोई व्यक्ति सत्य।
- 54:00और अहिंसा को साध ले अचोरी को साध ले प्रीग्रह को साध ले सब छोड़
- 54:06दिया कोई प्रीग्रहणी शंख जो बैरिस्ट्री का कोट पैंट था सब
- 54:10उतार दिया घर में रख दिया सब था उसके पिता बड़े हुए थे गाँधी के
- 54:18पिता करमचंद। दीवान थे, दीवान थे और दीवान की
- 54:26पोस्ट। ऐसा समझो इस वक्त के चीफ मिनिस्टर
- 54:30की तरह होती है। करीब करीब मुकाबलो तो नहीं कर
- 54:33सकते। हम अब देखिए कितने समृद्ध होंगे
- 54:37वो। लेकिन छोड़ दिया सब बड़ा जिगरा
- 54:45चाहिए और वह व्यक्ति जो सब कर सकता था अहिंसक हो गया और उनकी इस
- 54:54अहिंसा में। आग में घी का काम किया गुर जेब की
- 54:59इस झोंक दो अपना सब कुछ तो जैसे ही उनके भीतर ही प्रवेश कर गया
- 55:09हो। रोम रोम।
- 55:15भर गया। उनका गुरजीव की शिक्षा से जाके
- 55:22उसके सामने खड़े हो गए जो दो तिहाई विश्व का मालिक था।
- 55:27पंचम जिसके सामने जुबां खुलती न थी।
- 55:35कांपती थी जो बात तालुसी चुपके जाती थी, उसके सामने उसने पूछा,
- 55:40मिस्टर गाँधी व्हेर अरे यू अरे प्लस गाँधी यहाँ से जनाब आप मेरे
- 55:52कपड़ों के बारे में पूछते हो? देखिए जिगरा देखिए इस वक्त तुम कह
- 55:57देते हो, निकालो गाली निकालो कोई बात नहीं, मैंने सुना मूढ़ों ने
- 56:09गाँधी के भूत में खून डाल के गोली चलाई।
- 56:13वो खून निकला, जश्न मनाया, लड्डू बांटे।
- 56:18क्या बात है? अरे गाँधी को मार दो, गाँधी फिर आ
- 56:22गया, लेकिन अब के और रूप में आया अब तुम कहोगे बाबा हम तंग हैं इस
- 56:32बात से। आ जाओ मुझे बहुत आते हैं लोग अब
- 56:38डूब रही है नैया तुम पार उतार दो मैंने कहा अब गाँधी कभी नहीं आएगा
- 56:43भाई तुम्हारे गोट से ने गाँधी ने नहीं मारा, गाँधी का पुनर्आगमन
- 56:49मार दिया गाँधी अब नहीं आएगा। गाँधी को सत्ताना तब चाहिए थी और
- 56:58आज तो कहाँ चल जाओगे? जब उसके सब बंधन कट गए तो फिर तो
- 57:03सत्ता का क्या सवाल है? ये कल्पनाओं में उलझे उलझे लोग।
- 57:14क्या कुछ नहीं बना लिए, देखो रहस्य क्या है तो वो कहते कि इतना
- 57:25मूर्छित कर दो शराब पी के। आज इस दर जा पिलादो के ना कुछ याद
- 57:42रहे आज इस दर। जपिला दो के न कुछ याद दूर रहे,
- 57:58बेखुदी इतनी बढ़ा दो। के न कुछ याद रहे आ आज इस दर
- 58:14जपिला दो के न कुछ याद रहे यही थे गुरुदेव के साथ।
- 58:26इस दर्जा पे लादो के न कुछ और उसमें जब मूर्छित हो जाती है
- 58:36बुद्धि जो बैरी है जो स्टेकल है तुम्हें उस रहस्य में प्रवेश करने
- 58:41से रोकती है सिर्फ बुद्धि ही है समझ लेना।
- 58:44जीस बुद्धि को तुम बल दे रहे हो सूचनाओं के द्वारा कभी इस चैनल पे
- 58:55हो लिए कभी उस चैनल पे हो लिए हजारों चैनल हैं तुम्हें नहीं पता
- 59:01ये भीतर जाकर लड़ाई करते हैं। तुम्हारा एक तंतू दूसरे तंतू से
- 59:06लड़ता है और तुम कहते हो बाबा चैन नहीं है, नहीं होगा तुमने इतने
- 59:14कलेक्ट कर लिए हैं सूचनाएं वो भीतर ही लड़ रही हैं।
- 59:17तुम्हें पता ही नहीं शरीर में तो जंग चल ही रही है।
- 59:23ऑलरेडी महाभारत है वह बाहर से आए हुए कीटाणु और तुम्हारी संरक्षक
- 59:29गार्ड, कीटाणु आप उसमें सदा ही लड़ते रहते हैं।
- 59:32वह महाभारत का युद्ध छिड़ा है। यह ईश्वरीय तौर से है।
- 59:41लेकिन एक महाभारत तुम्हारे भीतर और चढ़ जाता है तुम्हारी सूचनाएं
- 59:49यहाँ से कुछ और सूचनाएं उठा के चले जाते हो ढेरों से कुछ और
- 59:53सूचनाएं उठा के चले जाते हो कुवारियों से कुछ और सूचनाएं ले
- 59:58लेते हो। किशोरियों से कुछ और ले लेते हो,
- 1:00:04संप्रदायों से कुछ और ले लेते हो, धर्मों से कुछ और ले लेते हो ये
- 1:00:09सब आपस में लड़ते हो गुत्थम गुत्थ हो जाते हैं, पहलवानी चलती है,
- 1:00:13अंदर मुक्के घुसे चलते हैं, तुम्हें पता नहीं चलता और फिर तुम
- 1:00:17कहते हो बाबा दुखी हैं। एक दंध सा चल रहा है ये दंध भाई
- 1:00:21तुम्हारी सूचनाओं में चल रहा है तुम्हारा मन, चयन कैसे आएगा?
- 1:00:30इतनी सूचनाएं तुमने इकट्ठी कर ली, तुम खाली ही न हुए।
- 1:00:36इसलिए मैं कहता हूँ मेरे पास आने के लिए लोग कहते हैं वापस मोड़
- 1:00:40देते हैं। बाबा अच्छा लगता है नहीं, मेरी
- 1:00:43धर्मपत्नी भी कह रही थी, मुझे मुझे अच्छा नहीं लगता।
- 1:00:47मैंने कहा मुझे अच्छा लगता है तो मेरे पास आना, मैं हाज़िर हूँ।
- 1:00:57आना पहले करना आप क्रियाएं लंबे लंबे श्वास, इसमें आपका कुछ
- 1:01:03बिगड़ता नहीं इन श्वासों के कारण कोरोना ने कितने लोग मार दिए हैं,
- 1:01:09आज भी याद ताजा सबके मनों में हैं।
- 1:01:13करोना ले गया। उनके सुहाग करोना ले गए, उनके
- 1:01:18हृदय की रानियों खाक हो गया। सब क्यों?
- 1:01:25क्योंकि सास न आया? मैं कहता हूँ लम्बे लम्बे साँस
- 1:01:30लो, हरियाली की जगह में चले जाओ ऑक्सीजनेटेड स्थान पर जहाँ पर से
- 1:01:34और मात्रा में ऑक्सीजन हो प्राण ऊर्जा हो खूब लम्बे लम्बे साँस
- 1:01:38लो, लंबे लंबे सांस छोड़ो ऑक्सीजनेटेड कर दो रोम रोम को
- 1:01:44ऑक्सीजनेटेड कर दो। घंटा दो घंटा खूब वक़्त तो 24
- 1:01:52घंटे होते हैं हमारी लेज़िनेस तुम कहती है कि वक़्त नहीं है, वक़्त
- 1:01:58है, सबके पास है। इस वक़्त को निकालो फिर केथर से
- 1:02:04आएगा। क्योंकि ऑक्सीजनेशन से तुम्हारे
- 1:02:08भीतर के जो टिश्यू हैं बाहर फेकेंगे, अचेतन हल्का होगा।
- 1:02:15यहाँ क्यों आते हो? मुझे अच्छी तरह पता है, तुम ठोक
- 1:02:23करा ले के आते हो सूचनाओं को। यहाँ आकर मुझे देखते हो?
- 1:02:31निर्विकल्प समाधि में शांत मुद्रा में शीतल भाव से बिल्कुल बुद्ध
- 1:02:39बैठे हैं और आनंद से परिप और टोकरी यहीं फेंक देते हो।
- 1:02:46गिर जाती है तो हमारा कसूर भी नहीं होता, लेकिन और तुम्हारे
- 1:02:56भीतर की जो सूचनाएं हैं अचेतन खाली नहीं होता तुम्हारा तो मैं
- 1:03:01तुम्हें सबसे पहले कहता हूँ कि तुम?
- 1:03:04मेरे पास आने से पहले मेरे पास आने की काब्रियत तो जुटा हो, ऐसे
- 1:03:13ही मत आओ उसका कोई फायदा नहीं, ना तुम्हारा कुछ बदलेगा।
- 1:03:20बस सिर्फ यहाँ का माहौल बदल जाएगा।
- 1:03:24तुम्हारी लाशनिक तरंगें तुम यहाँ फेंक जाओगे और तुम हल्के हो
- 1:03:27जाओगे। एक बार ये ठीक है, एक बार के
- 1:03:32हल्के हो जाओगे लेकिन वो ना मिलेगा जिसके तुम्हें तमन्ना है,
- 1:03:37जो तुम्हारी सुधबुध हार लेता है। मखन
- 1:03:54जो। माखन चोर नन्द किशोर कर गया मन
- 1:04:15की। ओखला, ओखला, ओखला।
- 1:04:56सुध विसरा गयो मोरी रे कर गयो मन की चोट।
- 1:05:18ये मन चुरा लिया जाए कैसे हो, ये तुम्हारा मन कोई चुरा ले या तो
- 1:05:25प्रेम में पड़ जाओ और तुम पढ़ न सकोगे।
- 1:05:29ये ईश्वर्य दांत है। तुम अट्रैक्शन में पढ़ सकते हो और
- 1:05:34तुम अट्रैक्शन को प्रेम समझ लेते हो।
- 1:05:37किसी के नए नए नक्श पसंद आ गए। तुम कहते हो मुझे प्रेम हो गया।
- 1:05:41नहीं हुआ तुम्हें नए नक्श से प्रेम हुआ, किसी की आवाज़ तुम्हें
- 1:05:49मोर लेती है। तुम कहते हो मुझे तुमसे प्रेम हो
- 1:05:52गया नहीं तुम्हें उसकी आवाज़ से मोह हुआ किसी की गायन कला तुम्हें
- 1:06:01मोह लेती हैं बाबा नानक बड़े प्यारे गाते थे, मैंने सुना मोह
- 1:06:07लेते थे। तुम कहोगे मुझे बाबा तुमसे प्रेम
- 1:06:12हो गया, नहीं हुआ तुम्हें सिर्फ गायन कला से प्रेम हुआ।
- 1:06:18जब प्रेम होगा जिससे प्रेम होगा, तुम देखना तुम्हारा स्वयं हट
- 1:06:22जाएगा, दो नहीं रहते प्रेम में एक रह जाएगा और अक्सर प्रेमियों में
- 1:06:27झगड़े होते हैं। तो प्रेम होता नहीं, यहाँ से पता
- 1:06:30चल जाता है ना शादी के बाद पता चल जाता है शादी के बाद वही तुम्हारे
- 1:06:38बिना न रह सकूंगा। वही पत्नी कहती है, नहीं, नहीं
- 1:06:42मुझसे यह मत का करो। कैसा एक प्रेम था, अट्रैक्शन थी।
- 1:06:49किसी चीज़ ने अट्रैक्ट किया। स्वभाव ने अट्रैक्ट किया नहीं
- 1:06:55नहीं। नक्ष ने बोलचाल ने डंग ने फिसने।
- 1:07:07थोड़ा मुस्कुरा तू हमें तो लूट लिया, हमें तो लूट
- 1:07:24लिया मिलके हुस्न वालों ने गोरी गोरी गालों ने।
- 1:07:32काले काले बालो ने हमें तो लूट लिया मिल के हुसैन बालो ने काले
- 1:07:43काले बालो ने गोर गोर गालो ने हमें तो लूट लिया।
- 1:07:50बस ये तुम्हारी अट्रैक्शन है। या काले काले बालों ने लूट लिया
- 1:07:55तुम्हें या गोरे गोर गालों ने लूट लिया?
- 1:07:59तुम्हें पता नहीं शायद हमारा एक किसी से ऐसे ही मार खा गया था।
- 1:08:05लड़की दिखाई तो पूरा मेकअप गानों पे लादी।
- 1:08:13और बिदक गया। हाँ हाँ, बस इससे ज्यादा सुंदर
- 1:08:17कोई होगा ही नहीं। यही कारण है जब शादी के ऊपर बढ़ाई
- 1:08:22तो मेकअप नहीं था, समझदार हो गये भाई और वही दागिला चेहरा।
- 1:08:29रंग तो साफ हो ही गया, बिलकुल नहीं।
- 1:08:31मेकअप करा अब कहाँ भागेगा बेटा कहाँ भागेगा अब नहीं जावे।
- 1:08:39जब देखा उसने उसका रूप तो अपने कर्मों पे पिसता रहा।
- 1:08:47ऐसे भाई ठगी भी हो जाती है। ये रास्ते हैं प्यार के चलना ज़रा
- 1:08:52समझ के यहाँ टेढ़ी का ही हैं अरे हास्य क्या है जो समझ में न आए?
- 1:09:07तो मुद्दा ही खत्म कर देते हैं गुर्जफ गुर्जफ कहते हैं कि तुम
- 1:09:12रहस्य में पहुंचना चाहते हो बस एक शब्द काफी है।
- 1:09:16यहाँ तो रहस्य तक पहुंचने के लिए अड़चन है।
- 1:09:20तुम्हारी समझ इस समझ को मिटा दो। खाली हो जाऊं और खाली होने का
- 1:09:28रास्ता हमने बताया। किसी ने बताया हो ना बताया हो इस
- 1:09:34शिव की देन भगवान शिव की प्रश्न तो और भी हैं लेकिन भक्त बहुत हो
- 1:09:40गया। रहस्य में उतरना है उस आनंद को
- 1:09:48पीना है तो ध्यान रखना समझ के होते हुए तुम रहस्य का ज़रा पीना
- 1:09:54पी पाओगे जो कि पी भी नहीं पाए। अगर पी लेते एक जरिया पी लेते तो
- 1:09:59सथोरी मिल जाती। और जीसको सटोरी मिल गई।
- 1:10:03उसने एक कण कभी किसी क्षण में पी लिया बस फिर वो एक कण तुम्हें ले
- 1:10:10जाएगा जैसे ये नाद बजा, अन्नत नाद बजा।
- 1:10:16बहुत से लोगों को इसका अनुभव नहीं हुआ।
- 1:10:20लेकिन व्याख्यान कर रही हैं क्या करें बेचारे मैं कहता हूँ देखो
- 1:10:24बेरोजगारी है कुछ तो मेरा कॅन्टेंट चुरा लेते हैं।
- 1:10:29मैंने कहा भाई चुरा लो, कोई बात नहीं, तुम्हारा पेट भरना चाहिए,
- 1:10:34तुम्हारे बच्चे पलने चाहिए, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:10:42मैंने जो पाना था वो पा लिया और कुछ पाना बाकी ना रहा।
- 1:10:49तुमने कॅन्टेंट चोरी करना है, मज़े से करो लेकिन ध्यान रखना,
- 1:10:54स्टेप मेरा मत रखना, बिल्कुल ऐसा मत करना।
- 1:10:58जो शेट्टी साहब ने किया था। मेरी किताब ही पढ़कर मेरे
- 1:11:02प्रदर्शन बोलना शुरू कर दी। मेरे शीश से कहने लगे कि बाबा ये
- 1:11:08क्या हो गया, मैं कहा होने दो भाई क्या है?
- 1:11:13मुझे इस टेम्पो की आवश्यकता ही नहीं है।
- 1:11:19रहस्य को पीना चाहते हो पुत्र? इसलिए पूछा है मैं जानता हूँ
- 1:11:25तुम्हारी उमंग तुम्हारे भीतर की तरंग, तुम्हारे भीतर की प्यास इस
- 1:11:30रहस्य को ही मांगती है। और ये रहस्य बुद्धि से रहते न
- 1:11:35आएगा। जब तक तुम समझने की चेष्टा में
- 1:11:39संलग्न हो तब तक देखिए वैज्ञानिक के पास जो ये ठीक वो जीने का
- 1:11:49तरीका जानते नहीं लेकिन तुम्हें बताएंगे पुत्र।
- 1:11:53उन्हें खोद नहीं पता, बहुत बड़ा साहित्य वो बदल देंगे, राश्य
- 1:12:01देंगे या जी? किसी ने पूछा कि आप सद्गुरु के
- 1:12:07बारे में नहीं, कुछ बोल देते हैं, कभी नहीं बोलते हैं।
- 1:12:12इसको फिर किसी और प्रवचन में लेंगे क्योंकि बहुत लंबा प्रवचन
- 1:12:16हो गया और ये भी काफी वक्त आएगा। फिर कभी याद करा देना भाई मैं याद
- 1:12:25नहीं रहता मैं कहाँ बैठा हूँ। आइंस्टीन किसी के घर गए थे
- 1:12:34निमंत्रण पर उसके हिसाब से बड़े टाइम के पवन थे।
- 1:12:42शाम का डिन्नर उसके घर था, मित्र था और बड़ा नाम था अल्बर्ट
- 1:12:47आइंस्टीन का। खाना खा के बैठे रहे बातें चीते
- 1:12:54होती रहे और वो सही 10:00 बजे सो जाया करो अपने नौकर से कहा सुबह
- 1:13:00जगा दिया करो मुझे सुबह जगा दिया करो मुझे 7:00 बजे जगा दिया करो।
- 1:13:0810:00 बजे का सोया 9 घंटे कम से कम चाहिए तभी इतनी स्फूर्ति आएगी
- 1:13:14तभी तुम वैज्ञानिक हो पाओगे अगर रात को तुम बाबों के शरीरों को
- 1:13:19देखते रहे ना? कहीं नहीं पहुंचने वाले बेटा ठस
- 1:13:24के ठस रह जाओगे। गोबर गणेश तो 7:00 बजे उनका नूकर
- 1:13:30उठाता और सुबह नींद आती है। यहाँ पे नहीं उठूंगा, लड़ाई झगड़ा
- 1:13:35हो जाता है मुक्के बाजी चल जाती है, इन्स्टंट भी थोड़े से जोरावर
- 1:13:41से बराबर बढ़ते लेकिन मैं सोऊंगा। फिराई सेन ने कहा, नौकर ने कहा
- 1:13:48देखो मैं तो चला, बहुत से नौकर बदल गए।
- 1:13:52उसने कहा पी जे नहीं तो काम खराब है नहीं तो झगड़ाना शुरू कर देता
- 1:13:55है। सुबह थपड़ों थपड़े ही हो जाता है
- 1:13:59और रात को कह के सोता है देखो अगर तुमने नहीं जगाया तो मैं तुम्हें
- 1:14:03हटा दूंगा। तुमने मुझे जगाना ही पड़ेगा और
- 1:14:09सुबह जागते नहीं, यह लड़ाई झगड़ा शुरू कर देते हैं, चपत मारते हैं,
- 1:14:13जन्ना टेर अब क्या कहें उसे और बराबर दूसरा भी चपत दे देता लड़ाई
- 1:14:20झगड़ा हो जाता, लेकिन उठते नहीं। बहुत से लोग पतले तो आखिर में समझ
- 1:14:27गए कि कारण क्या है तो उन्होंने कहा कारण यही है कि तुम रात को
- 1:14:34कैसे सोते हो? किसी भी कीमत पर मुझे जुगा देना
- 1:14:39और फिर तुम जागते नहीं कहते क्या करो?
- 1:14:44नदियाँ बड़ी प्यारी लगती है और देखो जब तुम्हें नदियाँ प्यारी
- 1:14:49लगती है तो चूक मत जाना, इन मूर्खों की बातों में मत आ जाना
- 1:14:55ब्रह्ममूर्त कुछ नहीं होता ब्रह्ममूर्त में ये कभी नहीं
- 1:14:58पहुँचेंगे, कभी नहीं पहुंचे। सोना, सोना, पूरा पूरा सोना और जब
- 1:15:08तुम सो कर पूरे फ्रेश हो गए तुम्हारा रोमा, रोमा, टिश्यू सब
- 1:15:12जुड़ गए तो फिर तुम्हारी आँखें टप से खुल जाती है, वो है जागृति वो
- 1:15:19है ब्रह्ममुर। अब हुआ भ्रम का जागना तो फिर उसने
- 1:15:25कहा अभी देखो एक नया आया और कहने लगे भाई देखो सात तो हट गए, अब
- 1:15:31तुम आए हो, एक बात है मुझे सुबह जगाना तो पड़ेगा, मैं कहूंगा।
- 1:15:40के नहीं जगता तो मेरा एक उपाय मैं ही बता देता हूँ अब क्या करूँ?
- 1:15:45सर्दी हो, गर्मी हो, गर्मी हो तो फ्रिज का पानी डाल देना ठंडा और
- 1:15:53सर्दी हो तो आम पानी डाल देना, पूरी बाल्टी ठोक देना ऊपर।
- 1:15:59बस मैं उठ जाऊंगा। ज्यादा झगड़ा करने की आवश्यकता
- 1:16:02नहीं है। अपना फॉर्मूला उसने खुद ही बता
- 1:16:05दिया। दिन में झपकी लगती थी।
- 1:16:08इतना सोते वो दिमाग को बड़े आराम की जरूरत है जितनी गहरी रिसर्च
- 1:16:15तुमने करनी हो। उतने ही तुम्हारे आराम होने चाहिए
- 1:16:19टिश्यूस में लेकिन तुम्हारे टिश्यू तो भरे पड़े हैं लड्डू के
- 1:16:22फर्ज देवी देवताओं की मूर्तियों से प्राण प्रतिष्ठाओं में उलझे
- 1:16:27हुए हैं। तुम्हारी तो नजरें रहती हैं तुम
- 1:16:31फेरे कराते हो, तुम्हारी नजर रहती है।
- 1:16:34ये गऊ दक्षिणा में कितने पैसे देगा?
- 1:16:38उसी ढंग से एक और बोलने का श्लोक भाई तुम वैज्ञानिक बन पाओगे इसका
- 1:16:48सपना भी न ले लेना। श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:16:58हरे मुरारी नाथ नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए
- 1:17:27नाथ ना रहा इन वासुदेव। पितृमात स्वामी सखा अमर है ना?
- 1:17:55न रायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी।
- 1:18:12हे नाथ नारा धन वासुदेव श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी हे नाथ
- 1:18:25नारायण वासुधन। पिता मात स्वामी सखा हमारे पिता
- 1:18:35मात स्वामी सखा हमारे हेना हेना हे ना हे पितमात स्वामी सखामारे
- 1:19:04हे नाथ नारा। यान वासुदेव, श्री कृष्ण गोवन,
- 1:19:16हरे मुरारी हेनाथु नारायण। धन्यवाद।