Latest / Baba ji Vijay Vats / 31 May 25 - एकांत क्या है? What’s the secret behind it? Commune न बनाने का असल कारण क्या है?
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- 0:05एकांत क्या है? बाबा और एकांत का इतना महत्त्व
- 0:12क्यों है? व्हाटस दी सीक्रेट बिहाइंड इट?
- 0:28आपको बाबा ने कहा कमी मत बनाना। इसकी रहस्यत्मक विवेचना भी करने
- 0:37का कष्ट करें। कई प्रश्न हैं आपको सुन लेने के
- 0:47बाद ऐसा लगता है किसी और को ना सुनें।
- 0:52लेकिन फिर भी दूसरों को सुन लेते हैं।
- 1:01एक बार आपके पास आए सिर्फ दर्शन किए, लेकिन मन भटकता है के वे ही
- 1:09जाना है बहुत से प्रश्न हैं, एक ही तल के हैं।
- 1:17इकट्ठों का जवाब दिया जा सकता है, पूछने का ढंग अलग अलग है।
- 1:26एकांत क्या है? तुम रात को सो जाता।
- 1:36पांच 6 घंटे के लिए 7 घंटे के लिए 8 घंटे के लिए 4 घंटे के लिए तुम
- 1:40कहाँ जाते हो? व्हिच कैनट बी डिफाइन्ड एंड कैनट
- 1:55बी डिस्क्राइब्ड जिसकी परिभाषा नहीं हो सकती।
- 2:06मात्र इशारा कर रहा हूँ। अगर तुम समझो तो जहाँ तुम चले
- 2:13जाते हो, वे एकांत है, जो बिटिया कहती है मैं एक बार आई रिक्शा में
- 2:24नहीं ली, सिर्फ दर्शन किये थे। लेकिन बार बार मन करता है वहाँ
- 2:28चला जाऊं वहाँ चली जाऊं कारण जब तुम एक तरफ़े उस एकांत के पास चले
- 2:36जाओगे अभी तो आप दूर से देखते हो उस एकांत को।
- 2:51और मन में ये अभिलाषा गहन हो जाती है क्योंकि उस एकांत में पड़े
- 2:55व्यक्ति को देख कर मन के किसी कोने से आवाज़ आती है कि काश मैं
- 3:02भी इसी तल पे हूँ बस यही आवाज तुम्हें खींचती है बार बार।
- 3:07वहीं चले जाओ। बाबा ने इसे भी कहा था कम्यून मत
- 3:16बनाना क्योंकि कम्यून में तुम साथ साथ बैठे होगे और मैंने पिछली
- 3:25वीडियो में जिक्र किया। कि तुम्हारा जितना कद है, उसे सब
- 3:36हीर खींच लिया जाए। उसको सेंटर बना के उतनी दूरी तक
- 3:40तुम्हारी रेंज ले जाती है। वो करीब ऐसा समझो कि पांच छः फुट
- 3:51के करीब वो रेंज होगी। और पूरी रेंज जाती है।
- 3:58उसके बाद थोड़ी थोड़ी रेंज घटनी शुरू हो जाती है।
- 4:01बिल्कुल खत्म नहीं होती। अगर कम्यून बनाएंगे तो प्रवचन
- 4:09नहीं हो सकेंगे। संदेश दिए जा सकते हैं।
- 4:13संदेश और प्रवचन में महत्त्व फर्क हैं।
- 4:26तुम जो मेरे पास आते हैं, मैं सामूहिक प्रदर्शन इसीलिए नहीं
- 4:30करता हूँ अन्यथा मुझे कोई नहीं है।
- 4:38अब तुम घर पे बैठे एक ही तरह के लोग तुम्हारी रेंज घुल मिल गई है
- 4:48उसके तुम व्यस्त हो गए हो और तुम इकट्ठे बैठ के सुनते हो, बहुत
- 4:53अच्छा हो अगर तुम अलग अलग कमरों में बैठ के सुनें।
- 5:05आपने कभी देखा भीड़ में व्यक्ति का व्यक्तित्व निदाद हो जाता है?
- 5:19यही कारण था प्रेम का संदेश लिए बुद्धि चलते हैं 50,000 वृक्षों
- 5:23के साथ। प्रेम की ज्योति से ज्योति चलती
- 5:28है, लेकिन अगर यही संभु घृणा का हो तो फिर क्या फसाद हो जाते हैं?
- 5:39दो तबकों के बीच में? दो विचारों के बीच में एक भीड़
- 5:49इकट्ठी हो जाती है। फिर तुम क्या करती हो?
- 5:52तुम्हें पता होता है नहीं व्यक्तित्व हो जाता है भीड़ के
- 5:58अंदर व्यक्तित्व हो जाता है। इसलिए भीड़ के अंदर मत बैठना,
- 6:02प्रवचन सुनने के लिए यही एकांत का मतलब है।
- 6:10एकांत में तुम अपनी बुद्धि को खो दोगे, जैसे रात को नींद में तुमने
- 6:17अपनी बुद्धि को खोया था। बुद्धि को खोए बिना तुम नींद में
- 6:21जा ही नहीं सकोगे। वह तल ही ऐसा है।
- 6:29वहाँ तक जाने के लिए बुद्धि की कुर्बानी चाहिए ही चाहिए, इसीलिए
- 6:35इस्लाम ने अर्थ गलत कर लिया। अल्लाह को प्यारी है कुर्बानी।
- 6:40कुर्बानी तुम्हारी बुद्धि की चाहिए तुम्हारे तार्की गमन की
- 6:43चाहिए तुम कुर्बानी दे देते हो निर्दोष्य जीवों की यह तुम मार खा
- 6:49गई तुमने कभी सोचा बहुत सी बातों का जवाब?
- 6:58बुद्धि से दिया नहीं जा सकता, लेकिन फिर भी तथाकथित समझदार
- 7:07बुद्धिमान लोग उनका उत्तर देते हैं।
- 7:11क्यों उत्तर देते हैं कि कहीं लोगों में ये प्रभाव न चला जाए?
- 7:17कि आचार्य जी इस बात का जवाब नहीं दे सकते, जबकि जो प्रश्न पूछा
- 7:30उसका जवाब बुद्धि से दिया ही नहीं जा सकता।
- 7:32अनुभव से जवाब आते हैं, आज सुबह ही मेरी किसी शीशा ने एक छोटी सी
- 7:38क्लिप भेज दी। यद्यपि मैंने देखा नहीं उसने जवाब
- 7:41क्या दिया। मैं देखा भी नहीं करता।
- 7:46मैं ऐसी क्लिप से भेजने वाले पे थोड़ा कुपित भी हो जाया करता हूँ।
- 7:54क्यों भेजी तुमने ये? लेकिन मैंने खोल के तो नहीं देखे,
- 8:04इसलिए मुझे सुनने वाले मुझे किसी प्रकार की वीडियो मत भेजा कर
- 8:10क्योंकि मैं देखता नहीं हूँ। आचार्य प्रशांत बोल रहे हैं क्या
- 8:22भूत प्रेत होते हैं? अब देखिए ये शुद्ध अनुभव का मसला
- 8:31है। हम्म ज़रा सोचिये बुद्धि का।
- 8:39क्या ये बुद्धि का मसला है? शुद्ध अनुभव का मसला क्या इसका
- 8:48बुद्धि जवाब दे पाएगी? भूत प्रबद्ध होते है कि नहीं होते
- 8:54है? यह शुद्ध अनुभव का मसला है।
- 9:01चरम चक्षुओं से यह सूक्ष्म भी दिखाई नहीं पड़ती इसलिए बहुत से
- 9:10लोग कह देते हैं मैंने वही पुराने शक में जो देखा नहीं वो उतना
- 9:15नहीं। मैंने नास्तिक नास्तिक जो देखा
- 9:25नहीं इन्होंने वो इन्होंने मान लिया के होता नहीं।
- 9:33यद्यपि यह सत्य है या नहीं है, यह इनको नहीं पता, बस जवाब देना है
- 9:40क्योंकि इंटेलीजेंट कहलाना है। आई ए एस का कॉम्पिटिशन लड़ा इनकी
- 9:47जिंदगियों पर आ जाओ। किस चीज़ की जरूरत पड़ी अनुभव की
- 9:52जरूरत पड़ी? क्या बुद्धि की जरूरत पड़ी?
- 9:58बुद्धि की जरूरत पड़ी सूचनाओं को संग्रहित करने के लिए बुद्धि ही
- 10:03तो काम आती है। अनुभव की बात तो आईएएस में पूछ ही
- 10:06नहीं जाती। ऐसे ही मूड लोग हैं प्रश्न पूछने
- 10:12वाले। ऐतिहासिक प्रश्न पूछेंगे सज्जूनाथ
- 10:21ने खब्बूनाथ को क्या कहा था, आप बताओ क्या कहा था और कब कहा था?
- 10:28ऐसे तो प्रश्न होते है। और जो याद रख पाता है वह समझदार
- 10:35कहलाता है। यद्यपि वह अव्वल दर्जे का मूर्ख
- 10:39होता है, इसलिए मैं कहता हूँ हमें शिक्षा पद्धति में बदलाव करना
- 10:43पड़ेगा। हम बुद्धि को शक्तिशाली बनाते
- 10:47हैं, बुद्धि के न्यूरॉन्स को बल देने पे केंद्रित हैं।
- 10:52जबकि पुराने गुरुकुर बुद्धि को बल नहीं देते थे।
- 10:59तुम्हारे अस्तित्व को बल देते थे, तुम्हें तुम्हारे अस्तित्व तक
- 11:05पहुंचने का रास्ता बताते थे। तुम पाओगे यह बुद्धिमान लोक गीता
- 11:17की भी श्लोकों की वर्णन करते हैं, उपनिषद की भी करते हैं और यहाँ तक
- 11:28कि वो। अष्टावक्र गीता की भी बरण करते
- 11:33हैं। भला परमात्मा का व्याख्यान बुद्धि
- 11:44से हो सकता है? खो देना नहीं जाना नहीं, पक्का
- 11:51है। क्योंकि कब जाना होगा?
- 11:53आई ए एस की होगी, उसके बाद नौकरी की होगी।
- 11:55फिर देखा होगा कि उधर ज्यादा गुंजाइश है और गुंजाइश होती भी है
- 12:03क्योंकि आई ए एस में तो शुद्ध समझदारी काम करती है।
- 12:06अगर पढ़ाओगे तो विकास, दिव्य कीर्ति जैसे लोग।
- 12:13ये भी कभी कभी घपड़ा कर जाते हैं, अजामिल की कथा कहनी शुरू कर देते
- 12:19हैं। यद्यपि इन्हें पता नहीं कि अजामिल
- 12:21की कथा के भीतर बात क्या है। यह शुद्ध मसला है आध्यात्मिकता।
- 12:28और बुद्धिमानी को सिखाने वाले लोग, सूचनाओं को सिखाने वाले लोग
- 12:32मैंने बहुत बार कहा जब जीस दिन इन्होंने कथाएँ कहनी शुरू कर दी,
- 12:37शामिल की उस दिन समझ लेना कि आध्यात्मिकता गरक गई और शुरू कर
- 12:42दिया। इन्होंने बोला।
- 12:49हौ टु लिवर जॉयफुल लाइफ ये समझाते हैं तुम्हें जब कि जॉय कहाँ है
- 12:57इनको पता है इनके शब्दों में मैंने बहुत बार सुना छोटे छोटे
- 13:03यूक्लिप भेज देते हैं। चार छः सेकंड के मसला तो वहीं
- 13:09रकिए हल होगा। मैंने कहा वहाँ पर तुम चले गए,
- 13:18नार्को करा लोगे, मैं क्रमाने को तैयार हूँ।
- 13:27यह मुसीबत खड़ी हो गई, पोल खुल जाएगी।
- 13:33एक क्षण के लिए जो व्यक्ति उन लम्हों में नहीं उतरा जिन्हें मैं
- 13:40फुर्सत के लम्हे कहता हूँ। वह कैसे जान पाएगा उस एकांत को?
- 13:48प्रश्न तो तुमने पूछ लिया पुत्र एकांत इतना मजेदार है जैसे रात की
- 13:55नींद, लेकिन इसको व्याख्या नहीं किया जा सकता।
- 14:07कितना ही शब्दों का गुढ़तम जाल हम फैला लें हज़ारों सा नर की सप्नी
- 14:16बेनूरी पिरोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा वर पैदा
- 14:24वहाँ जाना। कोई खलाजी का बड़ा नहीं है, वहाँ
- 14:30जाने के लिए शीश देना होता है, शीश जाने तुम्हारा अपना स्वय स्वय
- 14:39यानी जो तुमने निर्वाण किया वो तुम ईश्वर का अपनाया हुआ।
- 14:46शीश काटने को तैयार तो हो सकते हो, यह तो बड़ी आसान बात है,
- 14:55लेकिन वह जो तुमने बनाया वह मैं वह।
- 15:07आपकी चिपकाहट इल्यूज़न आपकी मान्यता जो आप जन्मो जनों से माने
- 15:18हुए हो, के आप है कौन मेरे से एक व्यक्ति आये।
- 15:27दो महीने भर के बाद हो गए अकेले आए थे कहते बाबा मैं आए तो बहुत
- 15:36बार हूँ, लेकिन जब समूह में आप शिक्षा देते हो तो आपको बात करने
- 15:44का। फुर्सत ही नहीं और आप इतने गहरे
- 15:49में मगन होते हो कि हमें पता चल जाता है।
- 15:53बाबा की आँखें ही नहीं खुलते। इतना मस्ती का आलम हमें चारों तरफ
- 16:00से घेर लेता है। तो कुछ पूछने भी आए हैं, वो भी
- 16:05भूल जाते हैं आपको देख के। ये अक्सर होता है बाबा मैं
- 16:11गायत्री मंत्रा तो भूल ही गई बाबा जी जो आप दीक्षा के वक्त लालचंदन
- 16:22की माला देते हो। यह तो मैं भूल गया तो मुझे कहने
- 16:31लगे मैं अक्सर यूट्यूब पे देखता हूँ।
- 16:36जैसे ही आपकी वीडियो आती मैं स्किप कर देता हूँ।
- 16:45124 सेकंड चलती होगी लेकिन स्किप कर देता।
- 16:49मैंने कभी सुनी नहीं थी। आपकी वेशभूषा आपकी बिखरी
- 16:54बिखरीदारी या झूमर लटकता हुआ कोई मेकअप नहीं कर रखा है।
- 17:08इससे पहले के तुम चार शब्द बोलो, मैं स्किप कर देता हूँ।
- 17:13मैंने कठी पुत्र समझाया, जब एवरेज भी डायरेक्शन इतना कम क्यों होता
- 17:18है? लोग तो पूरी पूरी सुनते हैं।
- 17:19लोग तो चार चार वर्ष सुनते हैं। कहते बाबा, वो ही तो मैं बता रहा
- 17:24हूँ। 1 दिन वह वीडियो उछल पड़ी और आपने
- 17:35चार अक्षर ही कहे थे और मैं जैसे दीवाना हो, क्या मेरे भीतर कुछ रस
- 17:43उतर गया, मेरी आँखें बंद होने लगीं।
- 17:48और वीडियो चलती रही और मैं जैसे सो गया सुना मुझे कुछ भी नहीं बस
- 17:56वह तरंगाइत किरणें मेरे भीतर उतर गईं और आनंद के गहरे खुमार में
- 18:07मैं लिपट गया। फिर मैंने वो वीडियो फिर से सुनी
- 18:14जाकर अवस्था में सुनी और उसके बाद बाबा मैंने किसी और की वीडियो
- 18:18नहीं सुनी वो दिन और आज मैंने किसी और की वीडियो नहीं सुनी।
- 18:30मुझे सब थोथे दखाई देखने थोथा चना बाजे गाना यह मीडिया के प्रभाव से
- 18:42बटोर लेते हैं। अपने सब्सक्राइब पर लेकिन आपको तो
- 18:50सब्सक्राइब करना पड़ता है। मैंने कहा पुत्र तुम उस घड़ी में
- 18:59एकांत में पहुँच गया था। शास्त्रों में अक्सर ही बात
- 19:06मिलेंगे तुम्हें कि जीस व्यक्ति ने अपना आपा छूट लिया है।
- 19:14कृष्ण जैसे व्यक्ति उनका एक दर्शन ही बहुत होता है।
- 19:22ये ऐसा छुआछूत का रोग है कि जब एक बार तुम इसकी ग्रस्त में आ जाते
- 19:32हो तो नहीं कर सकते। टेस्ट में ज़ोर नहीं ये वो आतिश
- 19:45है गाली जो लगाए न लगे और बुझाय न बने।
- 19:56अगर तुम एक बार इसकी गर्फ में आ गए, फिर तुम अपने आपको लाख बिछाने
- 20:02की चेष्टा करो, तुम बचा नहीं सकोगे यह एक ऐडिक्शन।
- 20:11ऐडिक्शन ऐसी जो तुम्हारे खुद के पास तुम्हें ले जाती है जिसे तुम
- 20:17एकांत करते हो, बाबा ने कहा, खमिन मत बनाना उसका भी यही कारण था।
- 20:27कितना ही व्यक्ति तुम्हारे पास वाला 10 फुट पे बैठा हो, लेकिन
- 20:32उसकी साँसों की आवाज़ उसके भीतर से निकलती हुई तिरंगे तुम्हें
- 20:37छिड़ेंगी इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ जब तुम ध्यान करो तुम्हारे
- 20:45पास कुल्फी ना हो। बिल्कुल अकेले और जीस दिन, तुम
- 20:59अकेला रहना सीख जाओगे अकेलेपन में इतना आनंद है इतना रस है।
- 21:12कि तुम उस रस की लत को छोड़ न होगे।
- 21:16ये वो आतिश है गालिब जो लगाए ना लगे और बुझाये लगे तुम एक बार जाओ
- 21:24तो। मैं तुमसे कोई लाइव सेशन में
- 21:39उड़ने के लिए नहीं कहता, मैं तुम्हारे प्रश्नों का जवाब सीधे
- 21:45सीधे नहीं देता क्योंकि मैं जानता हूँ।
- 21:52कि जीस विद्या पर मैंने बोला वो कहीं से भी पूछ लो जरूरी नहीं है
- 22:03कि आमने सामने पूछो और एक व्यक्ति का प्रश्न सारे संसार का प्रश्न
- 22:10है, तुम दुखी क्यों हो? सारा संसार उसी चीज़ के कारण दुखी
- 22:16है जिससे कारण तुम दुखी हो। अज्ञानता के कारण तुम दुखी हो और
- 22:22अज्ञानता तुम्हारी क्या है? तुम्हें आज तक पता नहीं चला कि
- 22:25वास्तव में मैं कौन हूँ? बात तो ये है।
- 22:33हमारी पंजाबी में कहावत है सोहो का जरसा सिरे ते गंड बस ऐसी ही
- 22:41बात है। ये भी जीस दिन तुमने स्वयं को चाट
- 22:48दिया। उस दिन गांठें तो खुल गई, उसके
- 22:52बाद रह गए। रहस्य अगर तुम रहस्य में ना भी जा
- 22:57पाओगे तो चलेगा जीने का मज़ा आ जायेगा हौ टु रेवजोयफुल लाइफ वहाँ
- 23:06पता चलेगा तुम्हें? खोपड़ी से नहीं पता चलेगा खोपड़ी
- 23:09में तो तुम खोपड़ी के निरुंज भर लोगे जी नहीं पाओगे।
- 23:18फर्क बड़ा साफ है क्या भूत प्रेत होते हैं कि नहीं?
- 23:22मैंने देखा नहीं आचार्य ने क्या बोला?
- 23:27मैं सुनता भी नहीं, लोगों को मैं जानता हूँ।
- 23:31जब एक पक्का हो के यह व्यक्ति अपने भीतर के उस स्तर पर नहीं
- 23:37पहुंचा, उसका बाहर का उरा बता देता है।
- 23:41कहाँ तक छिपाओगे तुम? वह बाहर के अस्त्र वस्त्र सुंदर
- 23:53डालेंगे, उसे खिंचाव करने की चेष्टा करेंगे और जो ज्यादा मेकअप
- 24:00करते हैं समझ लेना। जो स्त्री ज्यादा मेकअप करती है,
- 24:04वह उतनी ही कुरुप होती है। जी जो त्रिपुण्ड सजा लेते हैं,
- 24:11दाढ़ी दग को पीला कर लेते हैं। यह फसली फसली नस्लें हैं।
- 24:18बहुत जल्दी। जैसे ही उमड़ीं वैसे ही समाप्त भी
- 24:22हो जाती है। क्योंकि इनके सन्निधि से तुम्हें
- 24:26कुछ नहीं मिलेगा। एक सर्कस के अलावा तुम नमाज़ कर
- 24:32सकते हो, सर्कस की तरह भी कर सकते हो, तुम झुक सकते हो, पूरी जमीन
- 24:38से अपना माथा लगा सकते हो, लेकिन हो सकता है भीतर न झुकें।
- 24:44नमाज़ नानक की तरफ भी हो सकती है, खड़े रहे और वो नमन हो जाएं।
- 24:48उसके चरणों में नमाज़ खड़े खड़े भी हो सकती है।
- 24:52महावीर ने नमाज़ की खड़े खड़े की। सारा ध्यान कभी बैठे नहीं तो
- 25:01नमाज़ किसी सर्कस का नाम नहीं है। नमाज़ तुम्हारे अंत उसके जोके
- 25:06जाने का नाम है एकांत वह एक वह अंत में जो एक आता है उसके आगे एक
- 25:26ही है। जब तुमने उस तल को छू लिया, छू
- 25:32लिया कहता हूँ, देख लिए देखने भर से ही आपकी प्यास बढ़ जाती है।
- 25:39अब थोड़ा सा यहाँ विस्तार कर लो जब तुम पहली झलक में देखोगे किसी
- 25:44संत को अडोर अवस्था में। कोई भटकन नहीं, कोई तड़पन नहीं,
- 25:55कुछ पाना नहीं, कुछ खोने का भय नहीं, दूर से देखोगे तो तुम उसको
- 26:05दिल दे बैठोगे। तुम्हारे भीतर कहीं ना कहीं किसी
- 26:11कोने में यह बात उमड़ेगी। काश मैं भी ऐसा हो जाऊं और तुमने
- 26:17सदा सी चाहा है कि मैं ऐसा हो जाऊं।
- 26:23इसलिए संतों के आसपास जो भीड़ इकट्ठी हुई, वह सिधर थी।
- 26:29राजनीतिक लोगों के आसपास जो भीड़ इकट्ठी हुई वो स्थिर नहीं थी।
- 26:33अब आई जलसा, जुलूस किया और चले गए घर में लेकिन संतों के पास जो
- 26:39भीड़ आई वो भीड़ नहीं थी। वो मक्षु थे, वे तो उनके पास ही
- 26:44बैठ बैठने होगे रह गए। वो उन्हीं के होके रह गए, क्यों?
- 26:50क्योंकि उनमें कशिश थी भीतर की, वह उस एकांत के दल को छू चूके थे
- 26:58तो रात को तुम जहाँ जाते हो नींद में 2468 घंटे।
- 27:04तो तुम कहाँ जाते हो तुम्हें कोई पता नहीं।
- 27:06वैज्ञानिक तुम्हें बता नहीं सकेंगे, साइंटिस्ट तुम्हें बता
- 27:10नहीं सकेंगे। वो और और सा जवाब दे देंगे।
- 27:13घूमा फिरा कर सही नहीं जानते, लेकिन संत उसका जवाब जानता है।
- 27:20संत तो रोज़ जाता है। रोज़ भी कहना ठीक नहीं हर पल जाता
- 27:26है जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली दिल के आईने में थी तस्वीरें यार
- 27:39वह तल उसको एकांत कहते हैं। कम्यून मत बनाना।
- 27:44इसलिए वह बनेगा तरंगों से प्रभावित हो जाओगे उस पर मौन में
- 27:54न जा पाओगे जहाँ दिल के धड़कने से भी इबादत में खलल पड़ती है, उस पर
- 28:07मौन में जाने के लिए माहौल बड़ा शानदार चाहिए।
- 28:12पहले पहले और जब तुमने एक बार छू लिया बोतल।
- 28:17फिर तो भरी भीड़ में भी तुम एकांत में हो, बात तो तुम्हारी है,
- 28:27जिनको मैंने संबोधन करना है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ेगा
- 28:34तुम्हें। तुम्हारी रिसेप्टिंग कैपेसिटी विल
- 28:40बी रिड्यूस्ड तुम्हारी ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाएगी और उसी को
- 28:48मैंने बढ़ाना है। इसलिए मेरे पास सिर्फ एक ही फॉर्म
- 28:53होता है कारगर वो यही है। को एक कहानी सुनाई।
- 29:00सीता का अपहरण हो गया। जाते हुए जेवरात फेंक जाती है।
- 29:05वो हे वनवासियों, मेरे पति मुझे ढूंढ़ते हुए यहाँ से निकलेंगे,
- 29:13तुम बता देना ये जेवर। शीतक विधेय कुमारी के तुम बता
- 29:29दिया ना उन्हें उसे दिखा कोई भी नहीं।
- 29:35लेकिन पुकार कर रही है मेरी हवाएं पुकारो युक्त हवाएं वनों में खो
- 29:46जाएंगी और मेरे पति मुझे ढूंढ ही लेना, क्योंकि वह मेरी बारीक अंतः
- 29:52की आवाज़ को सुनते हैं। अंतर्यामी तो रास्ते में कुछ गहने
- 30:01मिले, लक्षण को दिखाया भैया देखना ये झुमका, ये हार, ये कर्ण फूल।
- 30:15ये तुम्हारी भाभी के है। लक्ष्मण कहने लगे, भैया मैंने
- 30:24माता के चरणों को सुबह स्पर्श रोज़ करता था।
- 30:28मैंने माता के इन जेवरों को कभी देखा नहीं।
- 30:34तुमने तो देखा होगा भैया तुम तो पति हो, उसके तो राम का जो जवाब
- 30:40था उसको सुनकर तुम हैरान हो जाओगे।
- 30:52राम ने कहा भैया जो स्त्री गहनों से ज्यादा सुन्दर हो उसके गहने
- 31:00कहाँ दिखाई पड़ते हैं? गहनों की सुन्दरता सीता की
- 31:08सौंदर्य में खो जाती है। इसलिए मुझे गहने कभी दिखाइए।
- 31:14बात बिल्कुल वाजिब है। भीतर का लाभण्य बाहर के लाभण्य को
- 31:21पछाड़ दिया करता है। संतो की आवाज भीतर का लाभण्य है।
- 31:29आचारों की आवाज बाहर का मेकअप है, बस इतेसी ही बात समझ लेना एकांत
- 31:38क्या है? एकांत उत्तर है जहाँ जाकर तुम्हें
- 31:42बड़ा आनंद और रस आता है। जिसे मैं रहस्य कहता हूँ वो अगर
- 31:52मानना हो तो इन बुद्धिवादियों का संघ छोड़ देना देखिये,
- 31:58साइकोलॉजिस्ट के पास जाओ या आचारों के पास जाओ, एक ही बात है
- 32:04वो भी शब्दों से ही आपको। सम्मोहित करेंगे दोनों ही लेकिन
- 32:15संत आपको शब्दों से समूहित नहीं करेगा।
- 32:19संत बोलेंगे शब्दों में और कई बार मौन भी रह जाएगा।
- 32:25लेकिन इसके बोलने में जो आभा होगी, लावण्य होगा वही उनके मौन
- 32:31में भी होगा। तुम उनके करीब बैठना चाहोगे, तुम
- 32:39चाहोगे कि कुछ भी न बोले, लेकिन मैं सिर्फ चुप हो के इसके पास बैठ
- 32:44जाऊं। यह कोई सोचना नहीं है जो जुबान से
- 32:58मैं दे सकूँ। यह वो आनंद का रस है जो जलता है
- 33:09और बिना बोले ही। आप तक पहुँच जाता है
- 33:25सूरत कलारी। सुरक कलारी भय मतवा रही मदवा की
- 33:47गई बिना बोले मन मस्त हुआ। फिर क्या बोले मन मस्त हुआ हाँ
- 34:04फिर क्यों बोले बोले की जरूरत क्या है?
- 34:12जो इतना रस में डूब गया, वह बोल पाएगा?
- 34:19कहीं बोलने की कोई गुंजाइश बाकी रहती है।
- 34:24जैसे ही बोलने के लिए संत उठता है वह चुम्बक उसे भीतर खींच लेता है।
- 34:31इसलिए संत के बोलने में तुम थोड़ा सा द्वंदा पाओगे, जो समझदार हैं
- 34:40वो देखेंगे। इनके बोलने में थोड़ा सा द्वंदा
- 34:43है। ऐसा लगता है जैसे कोई इन्हें खींच
- 34:47रहा है भीतर। बार बार तल बदलते हुए नजर आते
- 34:52हैं। बा मुश्किल अपने आप को संभालना
- 34:55है। संत तुम्हारे लिए है किसी न किसी
- 35:00तरह जैसे मरता हुआ आदमी अपना संदेश अपनी आखरी इच्छा तो मैं
- 35:05बताना चाहता हूँ। बिल्कुल वैसा ही संत को खींचती है
- 35:14वो ग्रैविटेशन फोर्स ऑफ आनंदा और वह अपनी करुणा के वासना के वशी
- 35:26करुणा एक वासना है। तुम्हें कुछ बता देना चाहता है।
- 35:32इन दोनों के भीतर द्वंद्व है और आखिर में संत हार जाता है,
- 35:39क्योंकि वह ग्रैविटेशन फोर्स इतनी सृजना में फैली हुई है, उतनी
- 35:45विराट विशाल है। वह आखिर से खींच ही लेती है पर वह
- 35:52चुप हो जाता है। वह बोल नहीं पाता, उसे ही एकांत
- 35:55कहते हैं। मानसरोवर केंद्र वो जबोत्तर जाता
- 36:09है तो ताल दलियों में मैं गोते नहीं लगाता।
- 36:16जीसको शुद्ध हीरा मिल जाता है। वो काँच के बंटे और पत्थर नहीं
- 36:22इकट्ठे करता। हीरोपयो गांठगठियायो हीरोपयो
- 36:41गांठगठियायो। बार बार को क्यों खोले?
- 36:55मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ।
- 37:05मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ फिर क्यों बोल
- 37:21इसे कहते हैं एकांत। बोलने का दिल नहीं करता और संत जब
- 37:28बोलता है बड़ी मुसीबत होती है, उसको मुश्किल से बोल पाता है उसके
- 37:40भीतर का अस्तित्व। उसे कहता है मत भूल बोलने की
- 37:47आवश्यकता क जिसे समझना है वो मौन से ही समझ जाएगा, लेकिन उसकी
- 37:53करुणा की वासना उसे बोलने पर बाध्य कर देती है।
- 37:58यही है एकांत, इसका सेवन करो। जीस दिन तुम्हें इसका रस लग गया
- 38:06लत लग गई यू विल बी एडिक्टेड फिर तुम इसे भाग न सकोगे फिर तुम्हारा
- 38:17मन बार बार करेगा नहीं जाने को। बार बार तुम उसके पास जाने की
- 38:27लालसा करोगे निगाहें मिलाने को जी।
- 38:39छः ता निगाहें मिलाने को जी छः ता।
- 38:56निगाहें मिलान को जी चाहता है, निगाहें मिलान को जी चाहता।
- 39:17आके न जान आके न जाने को जी चाहता है जी चाहता है।
- 39:36निगाहें मिला ने को जी चाहता। धन्यवाद।