Latest / Baba ji Vijay Vats / 6 Dec 25 - चेतना को उच्चतम स्तर तक कैसे ले जाएँ? आध्यात्मिक उन्नति का सरल मार्ग! सुनहरा सूत्र! Baba ji Vijay Vats Satsang
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- 0:18पदम प्रकाश आत्मिक तरक्की कैसे हो बाबा हौ टु इंक्रीज कॉन्शन्स
- 0:41लेवल? बड़ा सुंदर सवाल है।
- 1:00हमने आज मूर्तियों के कद को बढ़ाना शुरू कर दिया है, जबकि
- 1:10अध्यात्म के खिलाड़ियों ने। हमें चेतना को बढ़ाने के फॉर्मूला
- 1:17चाहिए था। विज्ञान भैरव तंत्र है।
- 1:28भगवान शिव ने पार्वती को 112 विधियों कॉन्शसनेस को बढ़ाने के
- 1:36लिए बताये। और हमने 112 फिट की स्टील की
- 1:42मूर्ति खड़ी कर दी। सदगुरु जी महाराज ने आदि योगी 112
- 1:53फुट स्टील की मूर्ति जाके देखिएगा।
- 2:00बाहर का नजारा बड़ा सुंदर नजर आएगा, लेकिन वो ऐसे मूर्ख ये नहीं
- 2:11जानते। के मूर्तियों के कद बढ़ाने से
- 2:16कॉन्शसनेस का कद नहीं बढ़ता। एक इंगित है कि कॉन्शसनेस लेवल सो
- 2:30पर आ जाए। 100% और हमने 112 फुट के स्टील की
- 2:45मूर्ति बना ली। ज़रा कभी अपनी आत्मा से पूछेगा,
- 2:51दूसरा पूछेगा तो झूठ बोल दोगे? सदगुरू जी कभी अपने कमरे में
- 3:00एकांत व्यर्थ के सोचियेगा कहीं ये मानस जन्म व्यर्थ तो नहीं चलाते?
- 3:11कहीं ऐसा तो नहीं कि हमने कैन्सेस्नेस?
- 3:18के लेवल को बढ़ाना था। हमने मूर्तियों के लेवल को बढ़ा
- 3:21दिया तो गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में आपका नाम आ गया लेकिन
- 3:31उस परमात्मा के रिकॉर्ड में आपका नाम आया कि नहीं आया?
- 3:38तुम लाखों लोगों को भ्रमित कर सकते हो, कोई अध्यात्म के व्यसे
- 3:44कर ले, कोई राजनीति के व्यसे कर ले, लेकिन आपका मूल सिद्धांत यही
- 3:53है। हाउ टु मेक ए मैन पुलिस आदमी को
- 4:03मोर को कैसे बनाना है? लेकिन तुम्हें परमात्मा का
- 4:09बुनियादी उसूल अभी पता नहीं चला। दूसरों को मूर्ख बनाने से पहले
- 4:16खुद मूर्ख बनना होता है तो तुम दूसरों को मूर्ख बना लोगे।
- 4:22इससे पहले तुम्हें खुद को मूर्ख बनना होगा।
- 4:29लाखों लोगों की भीड़ तुम इकट्ठा कर जाओगे।
- 4:33और एक दम टाइम टाइम फिश हो जाएगी। किसके लिए करते हो बाल बच्चों के
- 4:41लिए करते हो? जीस मोह के कारण तुम करते हो और
- 4:53बाल बच्चों का हो। वह शरीर का हो, वह दुनिया में मान
- 5:02प्रतिष्ठा कमाने का हो। दान संग्रह करने का हो, कोई हाल
- 5:07मस्त कोई चाल मस्त कोई माल मस्त बस तो मस्त होना चाहते हो?
- 5:14हम एक नंबर हैं। एक नंबर हुआ जाता है कॉन्शसनेस
- 5:22लेवल को 100%, ऊंचा उठा के जीस आदि योगी की तस्वीर तुमने बना दी
- 5:32है क्या उससे कभी? ईद भी मनी।
- 5:41कभी उसको गले से लगा के रोए भी कभी उसकी याद भी तड़पाई रोखी सूखी
- 5:51आँखों को रिक्ता आंसुओं से। शून्य हीन आँखें जिनमें अशूर में
- 6:01वो लिए लिए फिरते हो और लोगों को गुमराह करते हो एम् मोहब्बत तेरे
- 6:12अंजाम पे रोना आया। कॉन्शसनेस लेवल को कैसे बढ़ाया
- 6:25जाए? मैंने अपनी 23000 वीडियो में यही
- 6:34कुछ बोला है। 112 फुट की प्रतिमा बनाई गई के
- 6:41विज्ञान भैरव तंत्र में 112 में दिया।
- 6:46लेकिन बाबा ने मुझे 100 तेरहवीं विधि बताई, जो बड़ी सरल है।
- 6:54क्रिया जो करो न कुछ करने में बैठ जाओ और रोज़ उस वाणी को सुनो।
- 7:03तेरे ज़मान से जो आएँ को सला उस आवाज को सुनाऊं।
- 7:23जो उस तट से टकरा के आती है जहाँ वो खुद विराजमान है उस र सुधार से
- 7:32लिपट झपट कर आती है। चुनो में।
- 7:41उस जुबां को जीस प्यार तेरा नाम तेरे दामन से।
- 8:03उन हम को सलाम। जो हमाये वहाँ से आती हैं, टकरा
- 8:10के आनंद के रस सागर से टकरा के उन्हें रोज़ सुनो रोज़ पिओ सुनिए,
- 8:18दुख पाप का नाश। तुम्हारे सब कष्ट कलिश, दर्द,
- 8:23तकलीफें मिट जाएंगे। चुनो में उस जुबां को, इसपे आय।
- 8:37तेरा नाम सबसे अच्छी सुबह तेरी सबसे रंगे तेरी शाम तुझे पे दिल।
- 8:56कुरवा वो सुबह मिले। बुध को सुबह सुबह मिले वो दुपहरी
- 9:09को मिले। महावीर को दोपहर में मिले।
- 9:14जब वो खड़े खड़े बैठे बैठने जा रहे थे और वो दोहासन में थे तो
- 9:22अचानक वो प्रकट हो गया सबसे अच्छी तेरी शुभा।
- 9:31सबसे रंगीन तेरी शाम बाबा नानक को रात को शाम को मिला सूरज ढल गया
- 9:37था। तुझ पे दिल।
- 9:46कुरबान, उसपे दिल कुरबान करो। तुम धन पे दिल कुर्बान करते हो,
- 10:00गद्दियों पे दिल कुर्बान करते हो, मान सम्मान मिल जाए हमारे पांव को
- 10:07धोकर लोग पिए हमारे नाम का जयकार हुए उद्घोष करें लोग।
- 10:15तुम्हारी चाहतें वे अर्थ हैं, व्यर्थ हैं, उनका कोई अर्थ नहीं
- 10:25जो 112 हूट की स्टील की मूर्ति बनाई गई, कभी उससे मिलन हुआ?
- 10:35कभी दर्शन, कभी उस प्यारे प्यारे चेहरे को निहारा, कभी उसे गल
- 10:44बकड़ी डाली, कभी उसके साथ गल बकड़ी डालकर ईद मनी।
- 10:52कभी उसकी याद में झर झर छर छर आंसू बहे कल कल करती हुई गंगा की
- 10:59लहरों के समान तुम्हारा हृदय कभी खेल उठा अगर नहीं?
- 11:11तो दुनिया को बहकाना बंद करो क्यों अपना समय व्यर्थ कर रहे हो
- 11:20कौन? जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम
- 11:24हो जाए खुद भी भटकते हो तुम? दुनिया को भी भटका देते हो, इसी
- 11:37को मैं पाप कहता हूँ। क्रिया योग करो, सुबह उठकर खूब
- 11:48करो। तत्पश्चात स्नान ध्यान करके न कुछ
- 11:55करने में बैठ जाओ, जिसे मैं ध्यान कहता हूँ।
- 12:00तत्पश्चात मेरी वीडियो को सुनो जो उस तट के सागर के आनंद से लिपट
- 12:07झपट के आई। उस मदहोशी के आलम में खोजा बस
- 12:23तुम्हे कुछ और करने की जरूरत नहीं है और फिर जो कुछ करना है वो इस
- 12:29रथ के लिए करना है जिसके ऊपर तुम आरूर हो जिसे तुम मैं कहते हो।
- 12:36शरीर के पालन पोषण है तो इसको भी बनाए रखना यह जरूरी है वाहन है और
- 12:46उसे वाहन की तरह ही प्रयोग करना है।
- 12:50मैं की तरह प्रयोग करना बंद कर दो।
- 12:57यह उपकरण है ऑपरेटस है, यह साधन है साधन को साधन की तरह देखो, यह
- 13:07लक्ष्य नहीं यह सिद्ध नहीं। मुकाम कहीं और है, मंजिल कहीं और
- 13:15है हाउ टू इंक्रीज दी कॉन्शसनेस लैब ये मानो का जमा मिला ही इसलिए
- 13:35है। के बाकी सभी जामे उस कान्शस्नस
- 13:40लेवल तक पहुँच नहीं पाते एक ही जामा और वो है मान ऊ जामा तुम
- 13:48देवता भी हो जाओगे तो नहीं पहुंचोगे।
- 13:56ये प्रश्न पूछा है देवता तो मनुष्य से ऊपर होते हैं, वो क्यों
- 14:03नहीं पहुँच पाते? बाबा पहुंचने के लिए मानव शरीर ही
- 14:08क्यों जरूरी है? आओ मैं तुम्हें आज इस ब्रह्म से
- 14:11भी मुक्त करता हूँ। तुम अच्छा बनना चाहते हो और उस
- 14:28अच्छे बनने के पीछे भी कोई वासना छिपी है?
- 14:37तुम चाहते हो लोग मुझे मरने के बाद याद करें किसको पड़ी है?
- 14:45किसको फिकर है? कितनी आय?
- 14:47कितनी चले गए लोग? अपने गुजरे हुए जमाने में जो उनके
- 14:56दादा परदादा थे, उनको भी भूल गए। दूसरा कोई क्यों याद करेगा?
- 15:07यही गलती तुम कर रहे हो दुनिया मुझे याद रखे अच्छे कर्म करके
- 15:22अपना नाम कमाने वाला देवता वह देव पुरुष।
- 15:31और वह भी नहीं पहुँच सकता क्यों? क्योंकि उसके पीछे भी वासना छपी
- 15:38है और उस तत्व तक तुम तब पहुँचोगे जब सभी वासना क्षण।
- 15:49परमात्मा होने की वासना भी क्षीण हो जाएगी, देवता होने की वासना भी
- 15:55क्षीण हो जाएगी। सही पूछो तो देवता होने की वासना,
- 15:59अहंकार की वासना। मैं मरकर भी अच्छा कह लूँ।
- 16:05लोग मुझे कहीं कि डी रूजवेल्ट बहुत अच्छा व्यक्ति था।
- 16:11लोग मुझे कहीं के सदगुरु बड़ा शानदार गुरु था।
- 16:22कोई फातिहा, यहाँ कोई चार फूल। चढ़ा क्यों?
- 16:50कोई और किस्म जला क्यों? मैं वो बेकस ही की मजाक हूँ ना?
- 17:13हाँ, किसी की आँख का? न न किसी के दिल का करार जो किसी
- 17:33के काम न। आ सके।
- 17:43मैं वो। एक मोस्ट गोभा।
- 17:57तुम्हें पता है हिंदू मुसलमान में ऐसा द्वेष फैलाने वालों शायर हों
- 18:12तो ऐसे हों बहादुर शाह ज़फर गॉट एनलाइटन।
- 18:20इन हिज़ लास्ट टेस्ट लिकन तुम्हें बताएं कौन इन शब्दों के अर्थों को
- 18:35गहरे से खंगालोगे तो पता चलेगा कोई फतिह यहाँ आए क्यों?
- 18:46क्यों याद करे मुझे कोई मरने के बाद?
- 18:53मैं अक्सर ही एक कविता कहकर साली चुट इलेक्शन रिपोर्ट लेट मी लिव
- 18:59उनसीन अन्नोन एंड लेट मी डार्क स्टिल फ्रॉम दी वर्ड, नॉट ए स्टोन
- 19:06टेल व्हेर आई लिव। कोई फात हाँ यहाँ आएगा, तुम तो
- 19:16चाहते हो लोगों मुझे याद रखें युगों युगों तुक मेरा याद रखें
- 19:20हिरण्यकश्यप की तरह अपने पुत्र को कह देते हो मेरा नाम जब्बो मैं ही
- 19:24भगवान। तुम्हारी भगवान होने की सभी
- 19:29श्रेष्ठ हैं, मृत्यु तुमसे छीन लेगी।
- 19:36काश तुमने इस अल्टीमेट ट्रुथ को कभी सोचा होता है।
- 19:44कोई चार फूल चढ़ाये क्यों? पत्थरम पुष्पम फलम तोयम यह माँ
- 19:51भक्त्या परिश्चित कोई फातिहा यहाँ आए क्यों बहादुर शाह जफर अपना
- 20:04नाम? इतिहास में अमर नहीं करना चाहते
- 20:09थे, लेकिन देवता इतिहास में अपना नाम अमर करना चाहते हैं।
- 20:17मेरा नाम सुर्णक्षरों में लिखा जाए और लोग मुझे याद रखें क्या हो
- 20:22जाएगा? मरे हुए व्यक्तियों को इक्की
- 20:25तोपों की सलामी दे दो या 2100 तोपों की सलामी दे दो, वह सुनेगा
- 20:31क्या? जिन कानों से चेतना निकल गई तो
- 20:39सुने कौन सुनने वाला गया? और देते रहो और तुम इन्हीं मूड
- 20:51कारणों से सारी उम्र भटकते रहते हो, इधर से उधर पेंडुलम की तरह।
- 21:06कोई चार फूल चढ़ाएं। क्यों कोई आके क्षमा जलाये क्यों
- 21:13मेरी मजार को कोई रोश नहीं क्यों बक्से मैं वो बेकसी की मजार हूँ।
- 21:31नॉट ए स्टोन टेल व्हेर आई लाइ अलेक्जैंडर पॉप कहते हैं कि मेल
- 21:39कवर के ऊपर कोई पत्थर शिला लेख न लगा हो कि इसके भीतर जो दफन है वो
- 21:46अलेक्जैंडर पॉप है। जिसकी कोई वासना शेष नहीं रहे।
- 21:56देवता के भीतर भी वासना है। देवता के भीतर भी मुझे लोग अच्छा
- 22:05कहें और यह भी वासना और। बड़ी से बड़ी वासना यही है।
- 22:09तुम पहचान नहीं पाते तुम जीते जी परमात्मा बनना चाहते हो तुम जीते
- 22:19जी महान बनना चाहते हो, ये एक वासना है।
- 22:28निर्वासना होकर ही परमात्मा हुआ जा सकता है।
- 22:35इन शब्दों को फिर सुनो निर्वासना होकर ही।
- 22:42परमात्मा हुआ जा सकता है। तुम तो संसार की नजरों में भीड़
- 22:55इकट्ठे करते करते हो, तुम सारे दिन भर रात सोचते रहते हो कैसे?
- 23:10मेरे जलसे जुलूस में ज्यादा से ज्यादा लोग इकट्ठे राधे माँ कह
- 23:18रही थी। उससे पूछा तुम्हारी अंतिम इच्छा
- 23:25क्या है? मैं कहती मेरी?
- 23:30मजार पर लाखों लोग फूल चढ़ाएं। मेरे मरने पर लाखों लोग अंतिम
- 23:39संस्कार में शामिल है। यह भी एक वासन है।
- 23:44कोई मरने के बाद सच कांड दिखा रहा है।
- 23:48कोई मरने के बाद वो स्वर्ग नरक दिखा रहा है।
- 23:52कोई मरने के बाद लाखों लोगों की भीड़ इकट्ठे करने की इच्छा रखे
- 23:58रहता है। ये सभी इच्छाएं भाषण है कभी मरने
- 24:03के बाद कोई सच्च खंड गया मरना वो? मरना वो जब सब यात्राएं समाप्त हो
- 24:13जाती हैं और एक पर मरना होता है जीस मरने से जग डरे मेरे मन आनंद।
- 24:27मरने ही से पाइए परना पूर्ण परमानंद वह पर मरणा है कैसी कैसी
- 24:44मूडताएं परमात्मा की इस सृष्टि में लोगों ने बना ली।
- 24:52बड़े से बड़ा झूठ के मैं हूँ योगी योग के क्षण में यह पाता है कि
- 25:01मैं नहीं हूँ तो उसकी बोलती बंद हो जाती है अब तक।
- 25:10मैं मैं ही किए जा रहा था अंतिम वेला में पता चला कि मैं ही नहीं
- 25:20हूँ तुम सारी उम्र से जखाई में बता देते हो कि मैं हूँ, मेरा है।
- 25:29और अंत में जो परिणाम आता है, जो दर्शन होता है वो ये होता है कि
- 25:37मैं ही नहीं हूँ तो किसके मरने पे दुनिया इकट्ठी होगी, किसको याद
- 25:46करेगी दुनिया? याद करने वाला एक ही है जिसने इस
- 25:52सारे तंत्र की रचना की, वही वंदनीय, वही स्मरणीय और तुम उसी
- 26:01को भूल जाते हो। बहादुर शाह जफर कहते हैं कि कोई
- 26:14भी तमन्ना शेष ना रहे, कोई फातिहा यहाँ आई।
- 26:19क्यों? मेरे मरने के बाद मेरी कबर के ऊपर
- 26:24कोई फातिहा पढ़ने न आए। कोई चार फूल चढ़ाएं।
- 26:31क्यों? क्यों तुम चार फूल चढ़ाते हो उसकी
- 26:37जयंती पे या उसकी शहादत पे? कोई आपके शम्मा जलाये, क्यों?
- 26:52जो परम रोशनाई में खो गया उसको तुम्हारे दीप की रोशनाई की जरूरत
- 26:59कहाँ रह जाती है? मैं वो बेकसी की मज़ा हूँ, मैं
- 27:08ऐसी मज़ा हूँ जिसके ऊपर कोई भी ना आए अगर ऐसा तुम्हारा चित दशा हो
- 27:16जाता है। तो फिर तुम्हें पानी के और कुछ
- 27:21शेष नहीं रह जाता, यही अंतिम मंजिल है, यही अंतिम दरगाह है।
- 27:29यही है सच कंडा यही है स्वर्ग कुछ भी न पानी की तमन्ना।
- 27:40जब शेष न रह जाए तो कॉन्शसनेस लेवल का 100% आ गया।
- 27:48तुमने पूछा हाउ टू इंक्रीज़ दी कॉन्शसनेस लेवल सभी इच्छाएं जब
- 27:55गिर जाती हैं तुमने गिरनी नहीं। यही पहचान यही लक्षण कि तुम्हारी
- 28:07कॉन्शसनेस ने अपना चर्म प्राकाष्ठा का स्वर्ग पा लिया,
- 28:17फिर कोई तुम्हारी खबर पे। दिया जलाये तुम्हारी कब्र पे फूल
- 28:24चढ़ाएं, इबादत करें फतिहा पढ़े तुम्हारी कोई तमन्ना जीतेगी शेष न
- 28:37रखे। अभी तो तुम्हें इतना मूर्ख बनाया
- 28:43जा रहा है मूडों के द्वारा के मरने के बाद मैं आऊंगा तुम्हारी
- 28:51ऊँगली पकड़ूंगा सच खंड ले जाऊंगा मैं इन गुरुओं से कहूंगा कर वध
- 28:57प्रार्थना करके। जैसे मैंने कल इन लोगों से कहा जो
- 29:09गद्दी नशीं हैं जो राजनीतिज्ञ हैं मैंने कल कर वध प्रार्थना की आप
- 29:19कृपा करके गद्धियों को छोड़ दी। देश को खुशहाल करना तुम्हारा
- 29:29बेहतर का ज्वाला है, जल रही है हृदय का और तुम्हें नहीं पता कि
- 29:35यह ज्वाला तब शांत होगी जब तुम गद्दी को छोड़ दोगे।
- 29:41तुम ही गद्दी के लिए श्राप हो तुम मैं का होना ही जैसे इस तुम्हारे
- 29:54तत्व को देखने में बाधा बन जाता है।
- 29:57आँखों में पड़ा हुआ कुणक ही जैसे संसार को देखने से वंचित कर देता
- 30:02है। ऐसे ही तुम्हारा गद्दी पर आसीन
- 30:07होना किसी भी मुल्क के लिए गद्दी नसीन के, क्योंकि वो अहंकारी होता
- 30:15है। संत कभी गद्दी को स्वीकार नहीं
- 30:21करेगा। क्यों मुझे भी लोग पूछ लेते हैं
- 30:28बाबा इस उम्र में आकर गद्दी की चाहत जगी भी तो कब जगी छड़ी
- 30:39जवानी, बूढ़े? इनका पुत्र तुम समझ नहीं पाए तुम
- 30:50अपने ही ढंग से सोचोगे, जो तुम्हारे दिमागों में कूड़ा भरा
- 30:54पड़ा। मैं निचंद और सितारों।
- 31:08की तमन्ना की थी मैंने चार दोर सितारों की तमन्ना।
- 31:22की थी। मुझको रातों की सयाही के सिवा कुछ
- 31:31ना मिला मैंने चार लोग सितारों की तमन्ना।
- 31:41की थी। वो तो ज़माना बीत गया पुत्र मुझको
- 31:55तुम्हारे हालात पे रोना गया अभी यंत्र चढ़ रहा है, अभी हृदय तड़प
- 32:04रहा है अभी फेफड़ा स्वास्थ ले रखा है और मेरे देश को जरूरत है।
- 32:13अगर ये देश मेरी गुणवत्ता को पहचान जाए, तो मैं इसे मोल्ड कर
- 32:29सकता हूँ। गोल्डन स्कोर बना सकता हूँ लेकिन
- 32:35उससे पहले इन भनौतियों को कोई शुद्ध तुम्हारे घर में जाके बैठ
- 32:46जाता है। तुम गंगा जल से उसे पवित्र करते
- 32:50हो, दूध से स्नान करवातें हो। तुममें समझे नाम की कोई चीज़ बची
- 32:58भी है कि नहीं की टल खड़काने ही योग्य हो तो फिर टल ही खड़काते
- 33:08रहते योगी जी महाराज? काहे गदियों को धब्बे लगा रहे हो
- 33:18तुम्हें पता, बुलडोजर चलाना दिमाग न होने की निशानी है।
- 33:25इससे कभी कोई मसला हल हुआ। मैटर्स आर ऑल्वेज़ सो।
- 33:33होंडा चाकते वाले तुम्हें किस मूर्ख ने बना दिया?
- 33:42चीफ मिनिस्टर सच पूछो तो तुम्हें जूती भी मारने की इच्छा नहीं
- 33:54होती, जूती खराब हो जाएगी। सड़े हुए लोग हो तो।
- 34:03तुम्हारे दिमाग में इतनी गंदगी भरी है क्या तुम गंदगी के ऊपर से
- 34:08जूती पहनकर भी निकल जाना पसंद करोगे?
- 34:12नहीं करोगे क्यों? क्योंकि फिर जूती हमें धोनी पड़े।
- 34:18ये ऐसी गंदगी है जिसे तुम उचित गद्दी निशीन करना चाहते हो?
- 34:31इन व्यक्तियों से छुटकारा कैसे पा जाऊं?
- 34:36इस बात का इलम लड़ाया करो, इस बात को मत इलम लड़ाया, करो कि कैसे
- 34:44इनको गद्दी नसीं और ऊंची गद्दी मिल जाए।
- 34:54जब सभी तमन्नाएं खो जाती हैं। मरने के पहले भी मरने के बाद की
- 35:06और व्यक्ति को जीते जी तो शायद तमन्ना कम होती।
- 35:11जैसे जैसे बूढ़ा होता है, तमन्नाएँ बढ़ती ही चली जाती हैं।
- 35:16भीतर की आत्मा कहती है वक्त तो गया।
- 35:19अब तो 75 का हो गया बूढ़ा अब तो संयस्त के योग्य हो गया और लोग
- 35:26कहते हैं छोड़ो गद्दी वोट चोर गद्दी छोड़ हरामखोर गद्दी छोड़।
- 35:42लेकिन तुम ऐसे चिपटे हो अगर थोड़ा भी इतनी जलील होकर भी गद्दी नहीं
- 35:51छोड़ना चाहते। अगर थोड़ी सी भी जमीर बाकी होती
- 35:57जिंदा। कौन इतनी जलालत सहता है, लेकिन
- 36:07कुछ है समझना बातों कुछ है जो भीतर से धक्का मार रहा है नहीं
- 36:17पूरा करना है। और उसी को मैं कहता हूँ वासना इसी
- 36:31वासना का खोजना ना जीते जी कोई वासना रहे।
- 36:39न मन करे काम क्रोध लो मो अहंकार मत मत सर्ब है कुछ भोगने का, मन
- 36:47ना रहे खो जाए सब तुम वही हो जाओ। जो कभी थे।
- 36:58अब ये शब्द बड़ा गहरा है। इसको बल्ले से बांध लो, तुम वही
- 37:03हो जाओ जो कभी थे, तुम मरते तो कभी हो न।
- 37:10नैनम शिद्दत की शस्त्राणी नैनम राहती पांव का न चैनम क्ले दनता
- 37:15को न सोस्य पी मरुगा तुम मरते तो कभी होना है तो वही हो जाओ जो कभी
- 37:23थे कुछ और बनने की चेष्टा न करो, होने की चेष्टा करो।
- 37:29होने की चेष्टा करो, बनाने की चेष्टा न करो हाउ टु इंक्रीज दी
- 37:41कॉन्शसनेस लेवल अप 200% कोई बात न शेष न रहे ना जीते जी मरना।
- 37:50मरने के बाद लोग बच्चों को पैदा करते है।
- 37:58और तो मैं अपना नाम नहीं अमर कर सका।
- 38:01चलो बच्चे ही पैदा करते हैं, मरने के बाद लिखा जाएगा जगमीत सिंह
- 38:09बेटा हिरन के शप। तो नाम तो रेण किशप का रह जायेगा
- 38:17ना? इसी फिराक में लोग बच्चे जंगते
- 38:26हैं और कोई रास्ता ना मिला। थिस इस इज़ी वे टु बीए मार्शल तो
- 38:35बच्चे पैदा करते है क्योंकि जाएगा काम है, नाम तो मेरा ही लिखेगा
- 38:42ना? लेकिन लोग बड़े समझदार है जो
- 38:46समझदार बच्चा है। वो अपने पिता का नाम भी बदल देता
- 38:51है। फिर तुम उसे चाहे हलाल कहो या
- 38:57हराम का कहो, इससे तो अच्छा है नॉन बॉय लेज कर से तो अच्छा है,
- 39:03कोई तो पीता रहा है। पुत्र अब मेरी इस बात को गंभीरता
- 39:17से ले लो कोई वासना शेषना रहे ना जीते जी ना मरने के।
- 39:26बाद। तो 100% चेतना।
- 39:32जागक बस इसे आप गांठ बाधना तुम्हें कोई शास्त्र पढ़ने की
- 39:38जरूरत नहीं है। किसी गुरु के पास आने की आवश्यकता
- 39:41नहीं, मेरा प्रवचन और सुनने की आवश्यकता नहीं, यह आखिरी शब्द है।
- 39:51आखिरी शब्द है ना जीते जी ना मरने के बाद मुझे लोग याद रखें मेरी
- 40:06रूचि में नारे बनाई जाए। और कुछ नहीं मिलता तो तुम बच्चे
- 40:14पैदा कर देते हो। दिखेगा ना बाप का नाम लेकिन लोग
- 40:19समझदार लोग बाप का नाम भी बदल देते हैं और ज्यादा समझदार लोग तो
- 40:24कह देते हैं आई ऍम नॉन बायोडजिकल। वो सबसे ज्यादा समझदार होते हैं।
- 40:31अवतार पुरुष होते हैं। मुझे कहते हैं परमात्मा को किसी
- 40:34ने मैंने कहा वो तो नॉन बायोलॉजिकल है।
- 40:47ना तो मैं किसी का हबीब, ना तो मैं किसी का रखी।
- 41:08ना तुम्हें किसी? का?
- 41:12हबीब ना तुम्हें किसी का रकेबो जो भी।
- 41:24गढ़ गया हो नसीब वो जो उजड़ गया वो दया रूह।
- 41:43ना तो मैं किसी का हवी हूँ, ना तो मैं किसी का रखी जो।
- 42:03उजड़ गया वो नसीब जो बिगड़ गया वो दयार हो।
- 42:22ना? किसी की।
- 42:25आँख का नूर कोई। तुम्हारा दोस्त नहीं कोई तुम्हारा
- 42:38दुश्मन ना रहे। बस तुम ही तुम रहो या वो ही वो
- 42:50रहे एक ही रहे झगड़ा दो में होता है जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि
- 43:01है मैं ना। प्रेम गली अति संकरी ताने दो न
- 43:08समा न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो मैं किसी का रकीब हूँ जो बिगड़
- 43:19गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ।
- 43:27ऐसे हो जाओ कोई वासना शेष न बचे थीम रूप में से गांठ में बांध
- 43:35लेना न जीते जी कोई वासना शेष बचे।
- 43:44इसलिए हमारे शास्त्रों में ऋषियों ने लिखा कि देवताओं को भी अगर
- 43:50वहाँ तक पहुंचना होगा तो मनुष्य का चोला अपनाना होगा, क्योंकि
- 43:57देवता जो अच्छा कर्म करता है। तो बुरे कर्मों वालों का तो
- 44:01उन्होंने नाम ही नहीं लिया क्योंकि वो तो पहुँच ही नहीं
- 44:05पाएगा। तो कहा देवता भी अगर पहुंचना
- 44:09चाहते हैं तो उन्हें मानस के जाम में आना पड़ेगा।
- 44:16क्योंकि अगर तुम अच्छे काम करते हो तो ये भी अहंकार है कि मैं
- 44:22देखो किता अच्छा कर रहा हूँ। मैंने शौचालय बना दिया।
- 44:29खाने को पांच किलो अनाज दे रहा हूँ।
- 44:33लेकिन अगर ये वासना के कारण दिया जा रहा है तो फिर तुम मुक्ति की
- 44:40कामना न करना अगर इलेक्शन से ज़रा पहले ₹10,000 औरतों के खाते में
- 44:49डाला जा रहा है। तो फिर तुम मुक्ति की कामना ना
- 44:53करे ये ₹10,000 तुम्हारे लिए गले की फांस बन जाए तो पुत्र पूछा है
- 45:05बहुत बार बोला मैंने अब इसको हृदय में गांठ बांध लो।
- 45:12जब कोई तमन्ना शेष ना रहे, ना जीते जी वासना शेष रहे कुछ भोगने
- 45:19ना मरने की बात तुम कहते हो अब मर ही गया अब क्या वासना है?
- 45:23नहीं नहीं मरने के बाद की वासनाएं तुम्हारे जीने की वासनाओं से
- 45:28ज्यादा होती हैं। मेरी मजार पे आके लोग क्षमा जलाये
- 45:35मेरी मजार पे आके लोग इबादत करें और बड़ी छुपी हुई वासनाएं जिनको
- 45:44तुम पहचान नहीं पाते। मेरा रंग रूप बिगड़ गया मेरा यार
- 46:08मुझसे। बिछड़ गया मेरा रंग रूप बिगड़
- 46:22गया। मेरा यार मुझसे बिछड़ गया वो।
- 46:36चमन की जाँ से। उजड़ गया मैं।
- 46:45खुशी की। हसूले वाह।
- 46:56मेरा रंग रूप बिछड़ गया, तुम जीसको अपना रूप रंग कहते हो।
- 47:06वह तो 1 दिन झुर्रियां पड़ जाएंगी।
- 47:10बूढ़ा हो जाए चलने से बेजार हो जाओगे जो कुदड़पियाँ मारते थे, जो
- 47:22रेस लगाते थे मैराथन की सब थम जाए।
- 47:28मेरा रंग रूप बिगड़ गया मेरा यार मुझसे भी छोड़ गया जिसके संग थे
- 47:38मेले में, बिछड़ गए उसे उसको ढूंढो वो कहाँ है?
- 47:46सर्च हिम इसलिए संतों ने कहा नो दाय सर्च सर्च युअर सर्च अपने
- 47:58आपको खोज मेरा रंग रूप बिछड़ गया बिगड़ गया।
- 48:04मेरा यार मुझसे बिछड़ के जो चमन के जहाँ से उजड़ गया, मैं उसी की
- 48:14फसलें बहार हूँ कभी बाहर की भी फसलें होती हैं।
- 48:23बाहर की तो उजाड़ हुआ करते हैं, बाहर की फसल थोड़ी होती है लेकिन
- 48:31अल्फाज़ बदलने में बरतने में लाजवाब है बहादुर शाह जफर क्योंकि
- 48:40बहादुर शाह जफर। देखो मुसलमान और पहुँच गए हैं उस
- 48:52मुकाम पे तुम सिर्फ हिंदू है, मुसलमान है।
- 48:59बाहर के आवरणों से कपड़ों की पहचान कर लेते हो और उसके भीतर
- 49:03जाने का प्रयास नहीं करते हो। उसके भीतर छोड़ो पहले तो अपने
- 49:07भीतर उतरो, फिर जब तुम व्हेन यू विल रेकग्नाइज़ युअर सेल्फ?
- 49:17तो दूसरों की भी पहचाना जाएगा। दूसरों को कपड़े से पहचानने वालों
- 49:24पहले खुद को पहचानो नो दाय सर तुम हो कौन यही तो अर्जुन को भ्रम।
- 49:36मैं गुरु द्रोण को कैसे मारू? पिता महक को कैसे मारू और कृष्ण
- 49:44समते थे? कृष्ण उस स्थल पर चले गए थे।
- 49:48भगवान कृष्ण कहते ठीक? तू आंख बंद कर मैं तुझे तेरा आपवा
- 49:56दिखा दूँ, कह लेता हूँ पहले उसका आपवा दिखाया तो उसने जानक मैं
- 50:02शरीर हूँ तो उसका ब्रह्म बेटा। मेरा आपा जो मैं समझे बैठा था
- 50:12आयतक दट। वास् एन इल्ल्यूशन वह एक भ्रम था
- 50:20और फिर जब मैं ही नहीं मर सकता, मैं शरीर हूँ नहीं तो मेरे मरने
- 50:24के बाद भी मैं जिंदा रहूंगा। अर्जुन ने ऐसा देखा।
- 50:30और अर्जुन ने जब ऐसा देखा तत्व कृष्ण उसे ये एहसास हुआ कि जब मैं
- 50:36शरीर नहीं हूँ तो गुरु द्रोण विषम पदामा भी शरीर कैसे है?
- 50:43दे ऑल्सो अरे नॉट बॉडी। नहनते हन्न माने शरीर शरीर मरता
- 50:51है मैं नहीं मरता प्रतिक्षण हुए पांव में गर पड़े कृष्ण के कहते
- 51:00तो ठीक अभी ठहर जा। अभी तू अपना आपा जान चुका,
- 51:06मंजिलें और भी हैं उसको भी देख ले फिर विराट दिखाया पहले तो तुम कौन
- 51:21हो अर्जुन फिर ये दिखाया कि मैं कौन हूँ अर्जुन ये देख?
- 51:27इसको विरासतत्व कहते हैं। ये दो मुकाम होते हैं।
- 51:32एक जगह तक बुद्ध पहुंचे वह नौ दाई शल अप दीपो भव एक दूसरा मैं कौन
- 51:46हूँ के आगे वह कौन है? जिसने सर्जिना की, फिर वहाँ तक
- 51:54कृष्ण पहुंचते हैं। देख मेरा विराट विराट को देखकर वो
- 52:03थर थर कांपने लगा क्योंकि वहाँ मृत्यु?
- 52:11विराट होने के लिए मृत्यु के भीतर से गुजरना पड़ता है।
- 52:17ये कैसे हो सकता है कि तुम क्षुद्र भी रह जाओ और ब्रह्म भी
- 52:22हो जाओ? असल में समझाने वालों ने ये
- 52:26च्यस्था दी थी तुमने इसे जातियों में ढक दी।
- 52:34ब्राह्मण विराट हो गया और शुद्र संकीर्ण रह गया।
- 52:38तुमने जाति पाति में विभक्त कर दिया।
- 52:40तुम्हारी बुद्धि ही मूर्ख है। तुमने इसका थीम समझा नहीं?
- 52:46अक्सर ही शिष्य लोग गुरु की बातों को बिगाड़तेगाड़ लेते हैं।
- 52:58मैं उसी की फसलें बाहर हूँ न तो मैं किसी का रकीब हूँ, न तो मैं
- 53:07किसी का। हबीब हूँ जो उजड़ गया वो नसीब
- 53:13हूँ, जो बिगड़ गया वो तैयार हूँ शब्दों की तरफ मत जाना किसी के
- 53:27तुम दोस्त न रहो किसी के तुम दुश्मन न रहो।
- 53:35हौ टु इंक्रीज दी कान्शस्नस लेबल जब तुम्हारी वासना ना जिंदा ना
- 53:42मृदा होने के बाद कोई वासना शेष नहीं रहती तो समझ लेना।
- 53:52कि कॉन्शसनेस 100% ग्रो हो के किसी के शत्रु न रहो, किसी के
- 53:58मैत्र न रहो कोई तुम्हारा न रहा हम।
- 54:07किसी के। न रहे, कोई हमारा न रहा, कोई हम्द
- 54:27न रहा। कोई।
- 54:32सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा।
- 54:50नारा कोई हमदम नारा, कोई सहारा नारा।
- 55:05मेरा विलंब हो जाओ। सब अवलंबन खो जाए, सब सहारे खो
- 55:12जाए, कोई सहारा न रहा कोई हम दम न रहा, सभी तुम्हारे हैं और सभी तुम
- 55:22हो सभी कुछ तुम हो जाओ। कोई दूसरा न रहे, कोई बेगाना न
- 55:31रहे, वसुधैव कुटुम्बकम सब अपने हो जाएं सब एक परिवार हो जाए।
- 55:38यह ति ऋषियों की सनातन परंपरा जो आज मूर्ख लोग हिंदू राष्ट्र को
- 55:44मांगने के लिए निकले हैं, उन्हें पता नहीं।
- 55:47गद्दी नशीं तो हम ही हैं तो इसे तुम समझदार कहोगे किस्से मांगने
- 55:57चले अभी भी भिक्षा पत्र स्वप्न में हो क्या?
- 56:06सो रहे हो स्वपन आ रहा है अरे गद्दी पे तो तुम बैठे हो?
- 56:12राष्ट्र किस से मांग रहे हो और हिंदू राष्ट्र बन भी जाए तो क्या
- 56:19कर लोगे? जो अब तक 11 साल में धन धन कर दी
- 56:23वो टल टल लगाते रहोगे? होश में आजा सोए सोए मत रहो, सारी
- 56:40उम्र गवाली तुम। सारी उम्र गवा ली तुम जिंदड़ी है
- 56:4810। की जहान भी चौखट या ये कोट पैंट
- 56:52छह बार बदलने की बजाय और कुछ कटा तुमने कोई कॉन्शसनेस में लेवल
- 56:58बड़ा कमरा वही रहे ना? काक पढ़ाया पिंजरा पढ़ गया चारों
- 57:05वे समझाए समझा नहीं रया डेढ़ का डेढ़ 100% अगर कॉन्शसनेस को
- 57:14बढ़ाना है पुत्र। तो जीवन में कोई भी वासना शेष न
- 57:21रहे, जीते जी कोई भोगने की तमन्ना न रहे, तमन्ना कहता हूँ वासना न
- 57:28रहे और कुछ मर जाने के बाद मुझे 21 तोपों की सलामी मिले क्योंकि
- 57:35मरने के बाद। कान काम नहीं करते भाई कानों से
- 57:42जो सुनता था वो निकल गया। चेतन उसी के होने से थी, ये महफिल
- 57:50आबाद उसी के निकल जाने से उजाड़ आ गया।
- 57:57कौन सुनेगा? तोपों की गड़गड़ाहट को इतनी तुच्छ
- 58:05बातों के लिए जो हैं ही नहीं? उनके लिए तुम मशक्कत इतनी करते
- 58:09हो? 1818 घंटे काम करते हो, विश्राम
- 58:13कर लिया करो थोड़ा सा। कौन रोकता है अगर ऐसे बुद्धू न
- 58:26होते? हमारे भारत में तो चाइना 18
- 58:32ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनकर अमेरिका को लाल आँखें न दिखा
- 58:38रहा होता? तुम तो स्वप्न और कल्पना में लाल
- 58:41आँखें दिखाने की बातें करते हो, सत्य में तुम्हें पीलिया हो गया
- 58:48है। तुम्हारी आँखों में लाली आती ही
- 58:51नहीं, पीलिया रोग से ग्रस्त हो, तुम पांडु रोग से ग्रस्त हो?
- 59:03कॉन्शसनेस लेवल जहाँ तुम जाकर मुक्त हो जाओगे, फिर ना जीने का
- 59:09मोह रहेगा ना मरने का भय रहेगा ये आखिरी शब्द सुन लेना जिसके जीने
- 59:17की तमन्ना मुक गई, जीवेशणा खत्म हो गई।
- 59:21तो बराबर में दूसरे पहलू में सिक्के का दूसरा पहलू क्या आएगा?
- 59:25के मरने का खौफ खत्म हो जाएगा। जैसे ही जीने की तमन्ना खत्म हुई,
- 59:32मरने का खौफ खत्म हो गया। एक ही सिक्के के दो पहलू होते
- 59:37हैं। तुम इन्हें अलग अलग रूप से
- 59:39पहचानने की चेष्टा मत किया करो जी वेषण है।
- 59:43अगर तुम्हें मृत्यु से डर लगता है तो तुम जीना चाहते हो।
- 59:49और जितना मृत्यु से डर लगता, जितनी जितनी तुम साथ साथ लेहर सकी
- 59:56सुरक्षा घेरे में चलते हो तो समझो तुम उतने ही जीवेशणा है तुम्हारे
- 1:00:02लिए जीतने मात्रा में जीवेशणा इस पैरामीटर को आप नोट कर लो।
- 1:00:09जितनी मात्रा में जीव वैष्ण उतनी ही मात्रा में भय जनता सर्वोपरि
- 1:00:21होती है। यही लोकतंत्र का महत्त्व है।
- 1:00:26हमने कमाया है भाई बोलना। कमाया है बलिदान देके कमाया है,
- 1:00:33गोलियां खाईं हैं छती में हमारी तो चिढ़ी भी नहीं, मारी धन्यवाद।