Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Jan 25 - भीतर उतरने का सही मतलब क्या है? कुंडलिनी जागृत कैसे करें? IDA PINGALA SUSHUMNA नाड़ी!
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- 0:11स्वामी अच्यानंद है बाबा घोर असमंजस की स्थिति में हूँ जाना
- 0:29है। हमने ऊपर ससुराल में और आप विधि
- 0:37बताते हो नीचे जाने के भीतर जाने का बहुत बड़ी दुविधा।
- 0:50खड़ी होती है। आपकी बातों से आप कहते हो कि अपने
- 1:01भीतर उतरो और संत कहते हैं और आप भी कहते हो कि खेलेगा।
- 1:12सहसरार दल कमल 1000 पंखड़ियों वाला वह कमल खिलेगा और बड़ा आनंद
- 1:26आएगा ये दो शब्द। मेरे जी का जंजाल बन गए हैं कृपया
- 1:44इस चार्ज पूस को हटा के। मुझे कृतार्थ करने का कष्ट करें
- 2:01स्वामी जी, आपने मेरी बात को लगता है कि ठीक से नहीं सुना आधा सुन
- 2:11लिया होगा शेष रह गया होगा। बिल्कुल, मैं ये कहता हूँ कि अपने
- 2:20भीतर ही है घट घट का वासी, जिसे कहा गया है।
- 2:32और फिर जाना है ऊपर सहस्रार में सहस्रार दल कमल 2000 पंखुड़ियों
- 2:44वाला खिलेगा वो और बड़ा? आनंद आएगा उसी की तलाश है।
- 3:06हमें ध्यान से समझेगा क्योंकि पहले भी आपने कहीं चूक की है,
- 3:17अपने भीतर उतरना है। मैंने कहा एक पॉइंट आएगा जंक
- 3:27पॉइंट वहाँ से नीचे जाओगे तो आप पहुंचोगे।
- 3:38कुंडलनी के पास नाभि क्षेत्र के आसपास और नाभि क्षेत्र के आसपास
- 3:52कुंडलनी जब खुलेगी सारी शक्ति वहीं पे निहित है।
- 4:01प्रकृति ने इस चक्र का महत्त्व बढ़ा विराट बनाया है बच्चा होता
- 4:11है तो इसी चक्र से नाभि से जुड़ा होता है।
- 4:17नौ महीने का पोषण नाभि से ही पाता है तो आप नाभि के तल तक पहुँच
- 4:30जाओगे। भीतर जाते जाते हैं वहाँ से।
- 4:43एक रास्ता जाता है मेरु दंड के भीतर से होता हुआ ये जो तीन
- 4:49नाड़ियाँ मैंने बताईं पेड़ा, पिंगला शुशूमना उसके भीतर से यह
- 5:00शक्ति का प्रवाह। कुंडालनी एक आटोमिक पावर हॉउस की
- 5:11तरह भरा पड़ा है। वहाँ समस्त भ्रमण से हम जुड़े
- 5:19हैं। इस प्वाइंट से हम ब्रह्मरत्र से
- 5:28नहीं जुड़े हैं। ध्यान रखना कहीं भी, किसी भी
- 5:36स्थान पर, किसी भी शास्त्र में। आपको ब्रह्मरांद्र से जुड़ा हुआ
- 5:44कोई पॉइंट नहीं पाएगा जो आपको परमात्मा से चोटता हो तो आप अपने
- 5:57भीतर उतरोगे ध्यान अपने भीतर उतरने की एक विधि है।
- 6:07छोड़ देना है। अपने आपको रिलैक्स कुछ नहीं करना
- 6:14है, कुछ नहीं करना है, कुछ नहीं करोगे तो भीतर खिसकोगे धीरे धीरे
- 6:26धीरे धीरे। भीतर खिसकोगे संग संग लेता चलो
- 6:35सारी बातों को जैसे मैंने कहा कि एक टब के भीतर जब हम बाल्टी भरने
- 6:41के लिए कराते हैं। तो उस भरे हुए टब में जब हम
- 6:47बाल्टी डुबोते है तो उस बाल्टी का जितना वॉल्यूम डेंसिटी होती है,
- 6:54उस हिसाब से पानी बाहर आ जाता है। जब आप भीतर जाओगे वह बिलकुल इसी
- 7:08तरह समझो। कि आपने बाल्टी भरे हुए टप में
- 7:11डुबो दी पानी बाहर आएगा ये जो धूल आपकी बाहर आती है चेतन में।
- 7:28और जो आप डरते हो तरह तरह के अनुभव होते हैं, बह आता है।
- 7:36बहुत से लोग मुझे कहते हैं बाबा किसी के क्रोध ज्यादा, किसी के
- 7:42काम ज्यादा, किसी के लोभ मोभ ज्यादा।
- 7:47किसी का अहंकार ज्यादा होता है, ये बाबा बढ़ जाता है।
- 7:52क्यों? कुछ नहीं भरता, कुछ नहीं गढ़ता,
- 7:58बात समझी, टब में पानी है और टब में आपने बाल्टी डाल दी।
- 8:07तो दूध थोड़ा निकलेगा, पानी ही तो निकलेगा बाहर तो जब अचेतन के भीतर
- 8:19आप उतरोगे और बिल्कुल ऐसा ही है। जैसे टब के भीतर आपने बाल्टी
- 8:28डुबोई तो आपके भीतर जो भी कुछ होगा वो बाहर निकलेगा बाहर यानी
- 8:35चेतन में मैंने आपसे बहुत बार कहा है।
- 8:44जो भरा पड़ा है वो ही निकलेगा और निस्संदेह 70% आपने मृत्यु की
- 8:54भावना। दबाई है।
- 8:57कहीं कोई बड़ा अफसर आ गया, उसने आपको दलील कर दिया, गुस्सा तो
- 9:03पहुंचाया। लेकिन उस गुस्से को प्रवृत्ति
- 9:09नहीं कर सकते थे क्योंकि बड़ा ऑफिसर है अभी अक्सर ऑफिसेस में
- 9:20काम करने वाले लोग। डिप्रेशन का शिकार हुए जब मेरे
- 9:25पास आते हैं तो मैं ये कहता हूँ कि तुम्हारा वास तुम्हें दंग करता
- 9:32है और तुम बॉस के सामने बोल नहीं सकते क्योंकि वह कंप्लेंट कर दे,
- 9:39आपसे रिसाइन रखवा लेगा। फिर तुम्हारी बदली कहीं और दूर
- 9:44दराज करती जाएगी। इसलिए तुम डर के मारे बॉस से कुछ
- 9:51बहसबाजी नहीं करते। वह डर आपने दबा लिया।
- 9:59क्रोध तो उठा। जब बॉस ने हुक्म चलाया,
- 10:06डिक्टेटरशिप क्रोधित बहुत आया और भीतर ये भावना भी आई, कोई बात
- 10:15नहीं, हमारे भी तो दिन आएँगे। ये सब चलता है।
- 10:24तो आपने वो भय वह मृत्यु का भय अगर सामने बोला तो ये सुख साधन
- 10:35सुविधाएं छीन लेगा। वह आपने दबा दिया, वह मृत्यु का
- 10:41भय है अल्टिमेटली डर जाना दूसरे से मृत्यु से डर जाना ही होता है
- 10:51और कोई डर नहीं है इस संसार में अल्टिमेटली।
- 10:58कोई भी डर मृत्यु के भय से उत्पन्न होता है।
- 11:05घाटा पड़ गया। मृत्यु का व्यय सताएगा।
- 11:11क्या करें? कहीं कल को कंगाल हो गए, फिर भूखे
- 11:16मरना पड़ेगा और मर जाएंगे। बाल बच्चे कहाँ से पालेंगे,
- 11:23कर्तव्य निर्वहन कैसे करेंगे? बेटे की शादी करनी है, बेटे की
- 11:29शादी करनी है, पढ़ाई लिखाई करनी है, सब सब कुछ ही तो करना है।
- 11:41डर हर जगह पर देश के अंदर मृत्यु का डर।
- 11:44है और वो आप दबा लेते हो। बोल नहीं सकते।
- 11:52हमारी पंजाबी में एक कहावत है। कि गुस्सा बड़ा स्याना है, क्रोध
- 12:02बड़ा स्याना है, अपने से ताकतवर के आगे नहीं बोलता।
- 12:10क्रोध बड़ा स्याना है। अपने से ज्यादा ताकतवर व्यक्ति के
- 12:15सामने वह आता नहीं। क्योंकि अगर क्रोध अपने से ज्यादा
- 12:22ताकतवर के सामने आएगा तो वह दबा देगा।
- 12:26उसे उसमें शक्ति है, इसलिए लोग शक्ति की आकांक्षा करते हैं।
- 12:34लोग कहते हैं मेरे तीन स्टार लग जाए।
- 12:38फीती लग जाए, मैं मंत्री बन जाऊं, चीफ मिनिस्टर बन जाऊं।
- 12:45कितने लड़ाईयां झगड़े होती है दिल्ली जाके देखो गृह मंत्री बन
- 12:54जाऊं, प्राइम मिनिस्टर बन जाऊं। ये शक्ति अपने हाथ में क्यों लेना
- 13:02चाहते हैं? ये क्रोधि व्यक्ति होते हैं।
- 13:09ये किसी के क्रोध तले काम नहीं कर सकते।
- 13:12दूसरे शब्दों में कहूँ तो ये अहंकारी व्यक्ति होते हैं ये
- 13:17बर्दाश्त नहीं कर सकते। कि मेरे ऊपर कोई रौब जड़े इसलिए
- 13:23मर जाना पसंद करेंगे, कुर्सी को हाथ डाले रहेंगे, कुर्सी ना छूट
- 13:29जाये। कही कारण क्या है?
- 13:35मृत्यु का है। हम अगर शक्ति की कामना करते हैं,
- 13:43बल इकट्ठा करो, धन इकट्ठा करो, वक्त पे काम आएगा।
- 13:52तर्क अच्छे हैं, खोपड़ी में फिट बैठते हैं।
- 13:58इसलिए तो दौड़ते हैं लोग ये जो आचार्यगण कहते हैं शक्ति एकत्रित
- 14:09करो और गीता और उपनिषद जैसे उपनिषद जैसे।
- 14:17महाशांति से भरे हुए ग्रंथों को वे ही शक्ति लेने का डंक बना देते
- 14:24हैं। बात तो बा कमाल है ना कबीर जैसे
- 14:31लोगों को? ढाल देते हैं।
- 14:36शक्ति कमाने में हुनर है क्योंकि कॉम्पिटिशन लड़े हैं, जीते हैं,
- 14:49अधिकारी बने हैं। फिर लोभ ने घेर लिया।
- 14:55अगर आई ए एस बन सकते हैं तो सीएमपीएम क्यों नहीं बन सकते?
- 15:03उधर संभावना ज्यादा है इसलिए मैं आपसे बता दूँ ये आई ए एस के लोग
- 15:11ये सर लोगों का। ये रास्ता कोई भी टेढ़ा मेढ़ा चुन
- 15:16लें। आखिर में इनकी निगाहें राजनीतिक
- 15:22गद्दी में होंगी। देख लेना आज जो बच्चों को पढ़ा
- 15:28रहे हैं। उनका अंतिम उद्देश्य गद्दी है।
- 15:38मेरी इस बात को आप लिख लेना, मैं रहूं न रहूं, लेकिन मेरी इन बातों
- 15:45को आप सत्य होता पाओगे। क्योंकि मैंने बेसिक काज को
- 15:54पहचान। लिया है।
- 16:02टु कलेक्ट दी पावर इस इग्नोरेंस शक्ति को एकत्रित करना अज्ञान है
- 16:13और ये ज्ञान का दावा करने वाले लोग शक्ति को एकत्रित करने का।
- 16:22आपको ढंग भी बताते हैं आपको उपदेश भी करते हैं, बुद्धि को जच जाती
- 16:29है। आप पाओगे इन लोगों के अनयायी
- 16:35जीतने होते हैं। संतों के उतने अन्याय ही नहीं
- 16:39होते। कारण आपको बात जचती है, बात तो
- 16:49ठीक है, आप भी जानते हैं कि मैं शरीर हूँ।
- 17:00ज्ञान ज्ञान इनको भी नहीं हुआ कि मैं शरीर नहीं हूँ, ऐसा कुछ नहीं
- 17:05हुआ ना तो इन्होंने कभी साधना की आईएएस किया है।
- 17:10कब साधना करेंगे इनका टाइम टेबल देखना?
- 17:158 घंटे पढ़ाई, दो घंटा एक्सरसाइज, दो घंटा खाने पीने का इतना घंटा
- 17:24सोने का इतना नहाने धोने का आप अपने भीतर कब उतरे, इनका टाइमटेबल
- 17:32देखना। लेकिन अगर कोई व्यक्ति सहसा
- 17:39अध्यात्म का प्रव चिन्ह करना शुरू कर दे तो या तो वो अध्यात्म का
- 17:45रंग रूप बिगाड़ेगा। परिभाषा बदलेगा या वो?
- 17:50झूठ बोलेंगे। कुछ लोग सच्चे भी रह जाते हैं और
- 17:59अध्यात्म की परिभाषा को भी नष्ट कर देते हैं।
- 18:02ये ये आचार्य जैसे लोग होते हैं इनके हृदयगर्द भारी संख्या में आप
- 18:08लोग हैं उत्साह हूँ। या आचार्य हों, ये होते आईएसी हैं
- 18:17आपको सीधी सीधी बात बताता। हूँ।
- 18:22कि चाहे कुर्सी छोड़ के आए हों, चाहे अभी अध्यापन कार्य कर रहे
- 18:29हों। तुम देख लेना इनकी निगाहें
- 18:38सीएमपीएम की कुर्सी पर हैं, आज नहीं कल ये राजनीति में प्रवेश
- 18:45करेंगे। ये कोई ना कोई कबाड़ा खिलाएंगे।
- 18:50और राजनीति में कोई न कोई पदवी लेंगे।
- 18:58अब तुम्हें गुमराह करेंगे यू आर फॉलोअर्स?
- 19:04और फॉलोअर्स का अर्थ यह होता है कि तुम कम से कम इनकी वोट तो हो।
- 19:18शक्ति को एकत्रित करने का सुझाव देने वाले, उपदेश देने वाले।
- 19:29अज्ञानी होते हैं और यही लोग जो मूड प्रकृति के होते हैं, ये बात
- 19:41कृष्ण की करेंगे। उपनिषद की बात करेंगे, अष्टावक्र
- 19:49की बात करेंगे। जो कहते तुम हो ही मगर अष्टावक्र
- 19:58को ठीक से परिभाषित किया जाए तो अष्टावक्र कहते हैं, जोड़ना क्यों
- 20:03है? यू अरे ओमनी पोटेंट ऑलरेडी।
- 20:12तुम पहले से ही सर्वशक्तिमान हो? अन्य शक्ति की जरूरत क्या है ओर
- 20:19बल इकट्ठा करने की आवश्यकता क्या है?
- 20:24और ये लोग इसको तोड़ेंगे। हम रोदेंगे इनके असली शब्दों को
- 20:28नष्ट वृष्ट कर देंगे। बीज को अंकुरित नहीं होने देंगे,
- 20:33बीज को आग में जलाकर सौहरा कर देंगे तो फिर से अंकुरित।
- 20:37न हो पाएगा और इन्हीं लोगों ने। मुल्क की तकदीर बदल दे जो सोने की
- 20:48चिड़िया थी सोने की चिड़िया तो फिर भी हो जाएगी बिशर्ते की ये
- 20:55लोग न? रहें।
- 21:03मेरी बातें शायद तो मैं जचें ना मोस्ट प्रोबैबली नहीं जचेगी मैं
- 21:11जानता हूँ क्योंकि तुम्हारी भी वासनाओं के विपरीत पड़ती हैं, तुम
- 21:17भी चाहते हो जोड़ना कितना ही पतंजलि चल लाएं।
- 21:23कितना ही बुद्ध छोड़ के चले जाएं, वो जो जोड़ा हुआ है, उसके पिता ने
- 21:28कितना ही महावीर चले जाएं छोड़ के उनके जीवन से तुमको इस सबक नहीं
- 21:37सीखोगा। तुम तो बुद्ध की भी ये तो लोग अगर
- 21:41व्याख्या करेंगे तो बुद्ध की व्याख्या भी कहीं ना कहीं शब्दों
- 21:46को तोड़ मरोड़ कर बल को एकत्रित करने में ले जाएंगे।
- 21:52कर नहीं सके अब तक, लेकिन कोई पता नहीं इन सर लोगों का।
- 21:59कब कहाँ क्या मोड़ ले लें कोई पता नहीं होता।
- 22:05मैं नहीं कहता कि राजनीति में जाना बुरा होता है।
- 22:10कोई तो राजनीति को संभालेगा बेईमान लोगों से ज्यादा।
- 22:17अनपढ़ लोगों से ज्यादा बढ़िया ये लोग संभालेंगे ये निश्चित है
- 22:26लेकिन मैं ये भी नहीं चाहता कि ये उलटे हाथ से घी को निकाले।
- 22:33सीधा सीधा आईन। लेकिन वो संभव नहीं है।
- 22:37पर इनके शिष्य कैसे बनेंगे? ये जो करोड़ों की संख्या में
- 22:41शिष्य हैं, ये कैसे बनेंगे? यही तो इनका आधार बनेंगे राजनीति
- 22:47में लाने। का?
- 22:58तो ये यहाँ से हम शुरू किया थोड़ा सा आगे चले अच्यानंद जी ने पूछा
- 23:10जाना है ऊपर। और तुम बात करते हो नीचे उतरने के
- 23:19बेहतर रहने के ये बाबा दिमाग में बड़ा कोलाहल है।
- 23:27शोर शराबा है, अंतर्दंद दखाई पड़ता है, कहीं कोई तालमेल दखाई
- 23:34नहीं पड़ता। प्रश्न तो मेरे पास बहुत ऐसे आते
- 23:40हैं लेकिन लल्लू पंजू लेकिन मैं उन फिर लोगों को ऐड कर देता हूँ
- 23:48बाबा ये दोगली बातें हो गईं। भाई भाषा में तो दोगली बातें हो
- 23:52गईं। भाषा खुद शूद्र इसलिए भाषा में हम
- 24:01जो बोलेंगे, उसके उलट भी आपको लगेगा तो भाषा से समझने की चेष्टा
- 24:07मत करना। सबसे पहले मैं आपको हाथ जोड़कर
- 24:13कहता हूँ। ही कैनट बी एक्सप्लेन्ड मैं
- 24:24असमर्थ हूँ ऐसा नहीं है सभी असमर्थ हूँ यही अंशिन ने कहा था।
- 24:35वह ऐसा नहीं है ही इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोनबल।
- 24:43वह अज्ञात ही नहीं है। अज्ञे भी है।
- 24:49अज्ञे का अर्थ क्या होता है? बहुत गहरे में लोगे आप तो उसका
- 24:53मतलब कभी नहीं जाना जा सकेगा, तो छोड़ दो, इन बेवकूफियों को जाना
- 25:02नहीं जा सकेगा। तुम संसार की इन्वेंशन्स करो।
- 25:11तुम ये इन्वेंशन करो कि इस धातु में एटम है एटम को तोड़ेंगे।
- 25:19इलेक्ट्रान प्रोटोन न्यूट्रॉन निकलेगा, बस यहीं तक ही सीमित रहो
- 25:24और उसके भीतर से हमने एटम से काम कैसे लेना है?
- 25:28एटोमिक पावर प्लांट कैसे बनाना है?
- 25:31कैसे चलानी हैं बसें, रेलगाड़ियां, जहाज ये इन्वेंशन्स
- 25:38हैं इनसे काम लो प्रकृति का उत्पत्ति सथल क्या है ये देखने के
- 25:47बजाय अपनी शक्ति लगाओ। इसके प्रयोग में इसका सदुपयोग
- 25:53क्या है? और जिन्होंने सदुपयोग करने के
- 25:56तरीके ढूंढे वो उपकार कर गए मानवता के ऊपर और अगर तुमने ये भी
- 26:06देखना है कि ये कहाँ से ओरिजिनेट हुआ?
- 26:11तो फिर इन्वेंशन काम नहीं आएगा फिर तो इन्वेंशन लेस्नेस फिर तो
- 26:19आपको अपने भीतर जाना पड़ेगा सब कुछ छोड़ छाड़ के।
- 26:28तो पूछा आपने मैं दुविधा में हूँ दुविधा बिल्कुल ठीक है तुम्हारी
- 26:31प्रश्न समझ में आ गया शक्ति का कुंड जहाँ आप पहुंचोगे भीतर जाकर
- 26:46एक रास्ता है ईश्वर ने बनाया हुआ। कुण्डालनी से 72,000 नाड़ियां दो
- 26:57जोग ने आपको बताई और उनमें से तीन प्रमुख।
- 27:00नाड़ियां एडा पिंगला और बीच में शु सुभना तो यह जब जागृत होती है
- 27:08एनर्जी, जिसे आप कुंडलिनी भी कह सकते हो।
- 27:14यह एनर्जी जागृत हो के जाएगी। कहाँ से है तो ये नीचे नागरिक के
- 27:20पास जाएगी कहाँ? ससुराल में।
- 27:29है कहाँ नीचे नाभी में जाएगी कहाँ ऊपर ब्रह्मद्र में ससुराल में
- 27:38तेरी ये उलट हुआ कि नहीं हुआ? हो गया।
- 27:45आपने उस कुंडल ने को आप जब जाओगे आप और आप के साथ सारी शक्ति
- 27:57संग्रहित है। वह शक्ति जाकर उस कुंडली पर
- 28:03प्रतिवाद करेगी। कुंडली तथा क्षण जागृत हो जाएगी
- 28:09और यहाँ मैं आपको समझा दूँ। थोड़ा सा लोगों ने डराया बहुत है
- 28:13डर वो लोग पैदा करते हैं जो अध्ययनी होते हैं।
- 28:21आज भी आपको बहुत से लोग ऐसे मिल जाएंगे जो कहेंगे मैं मर गया था
- 28:29या मैं मर गयी थी यमराज ले गए। बड़ी दाढ़ी वाले उन्होंने पोता
- 28:41खोला और फिर उसने कहा नहीं नहीं ये नहीं भाई ये तो दूसरा ले आये,
- 28:50तुम पटक दो इसको। इतनी वृहद गलती ईश्वर के विधान
- 29:01में ना हो सकती है ना होती है। अभी भी हम ईशा से ज्यादा पुरानी
- 29:13बातों में मान्यताओं में उलझे हुए हैं।
- 29:19अभी कल एक स्वामी बात कर रहे थे कि हमारे आस पास चंद्रगुप्त बैठे
- 29:25हैं। दो कर्मों का लेखा जोखा समझा रहे
- 29:30थे। तो मैं समझ गया कि ईसा पूर्व की
- 29:36बात कर रहे। हैं क्योंकि ये पढ़े लिखे तो हैं
- 29:40नहीं, पढ़े लिखे भी नहीं हैं, ज्ञानी भी नहीं हैं, ज्ञानी होते
- 29:48तो भी कुछ इनके पल्ले होता। और फिर ये चित्रगुप्त हमारे पाप
- 29:55और पुण्य का हिसाब लिखते है भाई ये दो बोझे क्यों लाद रखे है
- 30:01भगवान ने सारी उम्र हम इनको ढोते है, पुण्य है, पाप है, सभी लिखते
- 30:12है। फिर लेके जाते हैं यमराज और
- 30:17उन्होंने साथ के साथ उदाहरण भी दिए गए।
- 30:19हैं कि जैसे वकील होता है या जो होता है और फिर धर्मराज के पास
- 30:28लेके जाते हैं। फिर वो आपको आपके कर्मों का दंड
- 30:35सुनाती हैं। जैसे जज सुनाता है और फिर क्या
- 30:39कहते हैं? आगे बड़ी कमाल की बात हो गई।
- 30:46फिर ये कहते हैं कि श्री हरि। जैसे राष्ट्रपति माफ़ कर सकता है
- 30:53वैसे श्री हरि आपके दंड को माफ़ कर सकता है।
- 31:00बात एक तट पर ठीक है लेकिन मैं बात इनकी अज्ञानता की करता हूँ।
- 31:09ये बात तो बिल्कुल ठीक है, बिलाशक लेकिन है बिल्कुल ऐसा जैसे 6 साल
- 31:17के बच्चे ने गीता को कंठस्थ कर लिया।
- 31:24इसकी साइंटिफिक और ओरिजिनल। व्याख्या देने के लिए दम चाहिए।
- 31:31किसका अनुभव का अनुभव के दम के बिना प्राचीन किताबों को पढ़कर
- 31:41ऐसे ऐसे सिद्धांत रख देना? मूर्ख बनाने वाली बातें अब ये उलझ
- 31:47जाएंगे सुनने वाले लाखों लाखों करोड़ों करोड़ो लोग होते हैं।
- 31:56मूर्खों के कोशिश ज्यादा ही होते हैं।
- 32:05वो दिमाग में बैठा लेंगे हाय ये चित्रगुप्त लिख लेगा हाय ये
- 32:11चित्रगुप्त लिख लेगा पाप करेंगे, पुण्य करेंगे और पाप और पुण्य के
- 32:18व्याख्या इन लोगों को आती नहीं। ये बड़े गहरे मसले हैं।
- 32:26बोलना बड़ा आसान है, लेकिन सस्ती लोकप्रियता कमाने के लिए ढंग
- 32:41अच्छा है। वो ही पराथन बातों को लकीर की तरह
- 32:48और गहरी करते रहना और गहरी करते रहना तो राष्ट्रपति भी बन गया और
- 32:57जहाँ माफ़ नहीं होता, राष्ट्रपति नहीं होता, वहाँ क्या करेगा?
- 33:01अकेले हिंदुस्तान की बात न न करो। सत्य जो है वो तो सारे भ्रमण में
- 33:08यक्साम होता है। जहाँ राष्ट्रपति का बिधान ही नहीं
- 33:14वहाँ क्या करेंगे जहाँ मृत्युदंड को प्राप्त ब्लड मनी देनी पड़ती
- 33:21है वहाँ क्या करोगे? तो मूर्खों की बातें हैं आप नीचे
- 33:33उतरोगे नीचे उतरोगे आप कहाँ जाओगे ये तो आप जानते ही हो।
- 33:40सभी शास्त्रों में उनका बहुत बहुत धन्यवादी हूँ मैं।
- 33:45कि हमारे काम में उन्होंने एक रचनात्मक दिशा दी।
- 33:53उन्होंने कम से कम आपको ये तो समझा दिया कि एक शक्ति का स्रोत
- 33:57कुंडल ने हमारी नाभि के आसपास है और वहाँ से।
- 34:03तीन नाड़ियाँ प्रमुख और कुल 72,000 नाड़ियाँ मेरु दंड पीछे
- 34:11इसे ये रीढ़ की हड्डी जिसे कहते हैं इसके भीतर से जागती हैं, बीच
- 34:19में होती हैं, सुशमना और आस पास होती हैं।
- 34:22ईडा पिंगला तो ये जो ईडा पिंगला है, ये हमारे दोनों नोस्टिल्स के
- 34:34आसपास यहाँ ठहर जाती है यहाँ इस स्थान पर और जो।
- 34:41शिशुना है वह हमारे ब्रह्म रंत्र में आ जाती है यहाँ बीच में।
- 34:47जहाँ चोटी रखते हैं ये आती हैं मेरु दंड में से पीछे से नीचे से
- 35:00आती हैं, ऊपर जाती हैं बस यही विधा मैंने आपको बताया।
- 35:08शक्ति जाएगी, नीचे से उठेगी, सहस्रग में जाएगी, ऊपर जाएगी और
- 35:20वह 1000 पंखुड़ियों वाला कमल खिलेगा।
- 35:231000 पंखुड़ियां तो कहीं हैं, कोई गन्नी नहीं किसी ने।
- 35:27अनंत पक्कड़ियाँ इसका एक और भी मतलब था वो भी सत्य है जिसकी मैं
- 35:38अक्सर बात करता हूँ। नाभि के आसपास आपका काम ऊर्जा का
- 35:45क्षेत्र भी है, जिसे मूलाधार चक्र कहते हैं।
- 35:53अगर आप किसी तरह उस काम ऊर्जा को बचाकर।
- 36:03इसी शुभना के भीतर से प्रवाहित करके सहस्राल में ले जा सकूँ तो
- 36:12बड़ा सहयोगी सिद्ध। होगा।
- 36:16आपकी कुण्डलनी जगी नहीं जगी इस बात से इसका कोई प्रयोजन नहीं है।
- 36:23जब कुण्डलनी जगेगी तब तो महत ऊर्जा साथ ले जाएगी।
- 36:29लेकिन एक बात को और भी ध्यान में रखना बहुत सी बातें होती हैं।
- 36:33सभी क्षेत्रों से हमें समझाना पड़ेगा।
- 36:35क्योंकि कल को आप फिर कोई प्रश्न दाग सकते हो, तो हम संभवतः कोशिश
- 36:40करते हैं कि जीतने डायमेंशन कवर हो सके।
- 36:44हम कर लें, तो आपकी काम ऊर्जा को ओझ में परिवर्तित करना जो मैं
- 36:53रोज़ कहता हूँ आपसे। और मैं रोज़ कहता हूँ कि पक्ष ने
- 36:59पूर्व की आत्मा को मार दिया, भोग की थ्योरी देखे, भोगो जीतने चाहे
- 37:13भोगो, कुछ नहीं होगा। आनंद लो लुत्फ्लो यह चारवा की।
- 37:22थुरी है। इस कर्म विधान को अगर देखा जाए तो
- 37:29चारवा के इंकार करते हैं। चारवा कहते हैं ऋण कृतवा कर्तम के
- 37:35वेथ भस्मबोतस्यदेहस्य। पुनर आगमन कुत्ता कुछ वापस नहीं
- 37:51लुटाना पड़ता। एक ढंग से ये बात ठीक भी है।
- 37:57तर्क देने वाले तर्क दे सकते हैं, जब है ही उसका तो किस से लोगे और
- 38:04किस को लुटाओगे? सब उसी का तो है लेकिन ये तर्क है
- 38:11वह बड़ा ईमानदार खिलाड़ी है। तुम कभी एकांत में कैरम या लूडो
- 38:22खेले हो गया अकेले। दोनों तरफ से अकेले हो गए और खेले
- 38:30होंगे और कोई पक्ष जीता होगा। खेलने वाले तुम अकेले हो और तुमने
- 38:37जो पक्ष जीता होगा उसको जे तो करार दिया।
- 38:40होगा। यह ईमानदारी से खेलना होता है तो
- 38:44वो एक। है।
- 38:47दूसरा तो कोई है नहीं, ये है भी उसका खेल बिलासक लेकिन कर्मविधान
- 38:57जो उसने अपने बना रखे हैं खुद के खेलने के ढंग।
- 39:05वह उस पर बंधन नहीं है, वो चाहे ठगी मार सकता है लेकिन ठगी मारेगा
- 39:12कैसे? वो चोरी किसकी करेगा, डाका किसके
- 39:17मरेगा? वह खुद ही तो है।
- 39:21इसलिए वो बड़ी ईमानदारी से खेल खेलता है।
- 39:26उसके एक रूप ने गुनाह कर दिया। दूसरे के प्रति कर दिया तो वह एक
- 39:34रूप को दंडित करेगा। जिसने अपना किया दूसरे को
- 39:38पुरस्कृत करेगा। यह उसकी न्याय संहिता।
- 39:42है, लेकिन इससे यह सिद्ध नहीं होता कि वह अनेक है नहीं है तो एक
- 39:56एक से अनेक हुआ संकल्प के कारण। हमारा सनासन कहता है और हमारा
- 40:04सनासन बहुत करीब बढ़ता है। सत्य को वह अकेला था।
- 40:11वैज्ञानिक भी कहते हैं कि एक एनर्जी पुंज्य।
- 40:14था, गोला उसमें विस्फोट हुआ। छः अरब साल पहले हुआ।
- 40:26चलो जब भी हुआ ये भी कहते हैं एक अरब सितान में करोड़ साल पहले
- 40:34सृष्टि का निर्माण हुआ। चलो जब भी हुआ।
- 40:40हम बात को समझे तो उस शक्तिपुंज ने संकल्प किया एक हो हम बहु, मैं
- 40:53एक हूँ बहुत हो जाऊं। और बहुत हो गया, लेकिन अब ये बात
- 41:01ध्यान में रखना कि वह एक है और एक से बहुत हुआ है, तो जो बहुत हुआ
- 41:09है उनमें एक ही है। जब चाहे वो बहुत को एक में समा
- 41:18सकता है। पानी का समुद्र एक एक बूंद में
- 41:24बिखर गया। और जब वो इकट्ठा करना चाहेगा तो
- 41:30एक एक बूंद इकट्ठी करके समुद्र हो जाएगा।
- 41:33ना यह एक खेल है। मिला शक खेल।
- 41:39है और उसका खेल है। जो लोग परन्तु परन्तु करते हैं
- 41:49हमारे पास उसका कोई जवाब नहीं है। हम ये कहते हैं कि तुम बता दो
- 41:55तुमने क्या बनाया है और हम इतना कह सकते हैं हम उन्हें जानते तो
- 42:05नहीं। लेकिन उसे पहचानते जरूर है।
- 42:11अब इस बात पर आप चौंकना मत। पहली बात तो वी कैन से विथ फुल
- 42:20ऑथेंटिसिटी पूरी प्रमाणिकता के साथ हम कह सकते हैं कि वह है पहली
- 42:27बात। हम अंधे हुए हुए ये नहीं कहते कि
- 42:34वह नहीं है और यहीं से सबसे अहम बात।
- 42:40शुरू हो जाती है। मैंने एक पिछले प्रवचन में कहा
- 42:46था। पूछा था किसी ने कि मैं परमात्मा
- 42:49से क्या मांगू तो मैंने उससे कहा था कि परमात्मा से एक चीज़ मांग
- 42:58लो, हम तो भजन तो बहुत बनाते हैं, प्रभु पूछ।
- 43:07तुमसे मैं क्या चाहता हूँ मैं तुमसे तुझे मांगना चाहता हूँ तो
- 43:14भजन किसी लिखारी ने किसी महंगे कबी ने।
- 43:27लिख दिया होगा तो आप प्रभु से क्या मांगो?
- 43:36मैंने कहा उनसे मांगो कि तेरे ऊपर तेरे अस्तित्व में।
- 43:45अखंड आस्था बना दे, टूटे ना और वो अखंड आस्था बनेगी।
- 43:50क्या दर्शन के बिना अखंड आस्था होती?
- 43:56नहीं तो नानक बड़े समझदार हैं। नानक कहते हैं कि जब देखोगे तब ही
- 44:13आपको यकीन आएगा, उससे पहले आप मान सकते हो क्योंकि सत्य को मानना
- 44:20गलत नहीं होता। ये अनार होता है, मान सकते हो,
- 44:29पानी होता है, मान सकते हो इसके मानने में कोई हर्ज नहीं।
- 44:39अगर आप ये कहोगे टी अनार होता है, गलत टी वाटर होता है गलत।
- 44:50सही चीज़ को मान लेना उसमें कोई भरा ही नहीं होती।
- 44:54पूछा था उसने कि मैं परमात्मा से क्या मांगू तो परमात्मा से?
- 45:04परमात्मा को मत मांगना, परमात्मा से मांगना कि तू है, इसका दृढ़
- 45:18आस्था मेरे भीतर प्रकट करते है। और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ।
- 45:24दृढ़ आस्था कैसे प्रकट होगी बिना दर्शन के नहीं पैदा होंगे।
- 45:34दर्शन के बाद ही आस्था, सही आस्था, दृढ़ आस्था, अखंड आस्था न
- 45:43टूटने वाली, न भंग होने वाली आस्था।
- 45:46मिला करते हैं। कहते थोड़ा सा दार्शनिक विषय है
- 45:55थोड़ा सा धीरे चलो ज़रा हौले हौले चलो मोरे साज ना।
- 46:07हम भी पीछे हैं तुम्हारे होले होले चलो मेरे साजे ना हम।
- 46:19भी पीछे हैं। तुम्हारे कोई बात नहीं धीरे चल
- 46:24पड़ते हैं। हम अपने भीतर उतरेंगे और दूसरी
- 46:33बात पूछ रहे हैं। सूक्ष्म से पूछ रहे हैं क्या
- 46:38कुंडलिनी से जो उठेगा प्रवाह? और यह जो स्पर्म से या काम शक्ति
- 46:49से जो उठेगा प्रवाह शक्ति का ओज में प्रवर्तित हो गए।
- 46:58ये दोनों एक रास्ते से कैसे जाएंगे?
- 47:02देखिये आपने वाटर वर्कर्स देखा है।
- 47:04वाटर वर्कर्स जो शहर को पानी सप्लाई करता है वहाँ से शहर को
- 47:11सप्लाई करने की जो पाइप होती। है या बड़ी विशाल होती है, बड़ी
- 47:16विशाल आगे जाती है, छोटी होती जाती है।
- 47:20आगे जाती है, छोटी होती जाती है, घरों में जाती है तो छोटी सी रह
- 47:24जाती है, दो तीन इंच की, एक दो इंच की डेढ़ इंच की तो वहाँ जाने
- 47:32का सिर्फ एक रास्ता नहीं है सहसरार में जाने के लिए।
- 47:43इस ओझ का कुंडलिनी के पास से चले जाना थोड़ी मात्रा में।
- 47:50रस्ता तो हो ही है। मार्ग है।
- 47:56उससे जब कुंडलिनी जागेगी वृहद शक्ति रूप में तो बड़ा प्रवाह भी
- 48:02जाएगा तो प्रवाह तो बड़ा है वहाँ। लेकिन आपकी जो ओज की शक्ति है, वो
- 48:11थोड़ी है कम है। लेकिन वहाँ से रास्ता है ऊपर
- 48:17जाने। का?
- 48:20इसी रास्ते से तुम्हारी काम शक्ति ओज बनकर ब्राह्मणन्द्र में
- 48:27सहस्रार में जाएगी, क्योंकि मूलाधार के पास ही।
- 48:37कुंडल नहीं है वहीं शक्ति है आपके काम, ऊर्जा और उसको ओज में
- 48:46परिवर्तित करके ऊपर जाना बड़ा आसान है।
- 48:49शुभमय पास ही तो पड़ी है वो। और जब आप भीतर।
- 48:58जाओगे आप तो आप जब टच चेक करोगे उसको कुंडल लिंक को टकराओगे उसके
- 49:08साथ इंटरमिंगल्ड होगे। कुंडली जागृत हो गए।
- 49:18ये सही मेथड है, कुंडली को जगाने का डर बड़े फैलाए जाते हैं जैसे
- 49:28अब ये ब्राह्मण कहते हैं। पाप करोगे नर्क भोगोगे नर्क में
- 49:32जाओगे गलाओगे पकौड़े चले जाएंगे, लेकिन इनका कोई साइंटिफिक जवाब
- 49:40नहीं दे पाते हो जब हम जला ही देते हैं शरीर को जहाँ।
- 49:47तो सूक्ष्म उसके भीतर ही होता है। वो जलता क्यों नहीं उसके पकौड़े
- 49:50क्यों नहीं बनाते? जब शरीर मर जाता है?
- 49:55ठहर जाता है सारा हार्ट ब्रेन सब ठहर जाता है तो सूक्ष्म उसके भीतर
- 50:03ही होता है। 3 घंटे तक शरीर छोड़ता नहीं वो।
- 50:07इस बात को ध्यान में रखना 3 घंटे तक सूक्ष्म सुभूल को छोड़ता नहीं
- 50:18क्यों? क्योंकि।
- 50:21वह सर्जरी की प्रक्रिया में। इतना सा ही वक्त लगता है कम से कम
- 50:28वह सारा जैसे जैसे जोड़ा था आज से 150 साल पहले वे सारी तारों को
- 50:36काटना, सारे कनेक्शन को काटना, अपना सारा थैला गटडी भर के लेके
- 50:40जाना। तो सब समेटना है ना यहाँ से और।
- 50:50समेटना है तो इस समेटने में 3 घंटे का वक्त लगता है।
- 50:54प्रकृति को सारा कुछ काटशाट करने में यह एक वृहद ऑपरेशन है।
- 51:02ज्यादा भी लग सकते हैं कम नहीं लगता।
- 51:05तो 3 घंटे से पहले जिसे फूंक दिया जाता है, वो मर तो गया, वे चाहे
- 51:13अब आप उसको 10 साल रखे रखो ना फूको उठेगा तो है नहीं।
- 51:20वो। कुछ लोग जो उठ जाते हैं।
- 51:26वो मरे नहीं होते, मैं आपको बताता हूँ गलती मत खा जाना।
- 51:33ठीक से डॉक्टर उसको डिक्लेर कर तो देता है लेकिन ठीक से डॉक्टर भी
- 51:38नहीं जानता डिक्लेर करने। वाला?
- 51:40तभी तो वो उठ बैठते। हैं।
- 51:43जब हार्ट ठहर जाता है तो ध्यान रखना ब्रेन कुछ देर के लिए जीवित
- 51:49रहता है। ब्रेन के शैल धीरे धीरे मरते हैं,
- 51:57धीरे धीरे मरते हैं। और कुछ चीजें तो शरीर को पता ही
- 52:02नहीं चलती। अभी भी काम करना शुरू कर देती है।
- 52:05आपको पता है मरने के बाद भी पाचन की प्रक्रिया बंद नहीं होती।
- 52:12भोजन आपने जो खाया है वो पचता रहता।
- 52:14है उसको पता ही नहीं कि आप मर गए। और आपको पता है मरने के बाद भी
- 52:23आपके कुश अंग जैसे बाल और नाखून बढ़ते।
- 52:25रहते हैं, बरसों तक बढ़ते रहते हैं।
- 52:29एकदम से शरीर मरता नहीं है। आज पांच तारीख है।
- 52:38तो 3 दिन बाद आठ तारीख आठ। जनवरी 2016 कुमे 30 फुट गहरी
- 52:47कितनी ठंडी होती है देख लो अब आए तो रजाई में।
- 52:50बैठे हैं, हीटर हैं। लेकिन नहर में गिर गया और पानी
- 52:56बड़ा ठंडा था। उस दिन कमाल की शीतलहर चल रही थी।
- 53:02कुदरथन ऐसा था कि उस दिन पारा भी बड़ा जाम।
- 53:07था। ठंडी बढ़ी थी।
- 53:12मैं घर गया कमजोर था क्योंकि रोटी नहीं खाता था।
- 53:16कुछ भी नहीं बस यही दूध चल रहा है यह 16 की बात।
- 53:22है आज 25 हो गया। तो नहीं खाने से कमजोरी?
- 53:30चला फिरा नहीं जाता ज्यादा थोड़ा सा चला फिरा जाता है गाड़ी में
- 53:35बैठ के चला गया और वहाँ जब नहर के किनारे पहुंचा बैलेंस।
- 53:45आउट हो गया और गिर गया। साढ़े 9 मिनट तक मैं उस पानी में
- 53:53रहा। ठन्डे पानी में हाइट वेट रुक गई,
- 53:58सब रुक गया सारा कुछ पानी भर। गया।
- 54:05बाल दिखने बंद हो गए। और वो कोई पहचान होती है जमींदार
- 54:11लोगों को के बुलबुले निकलने बंद। हो जाते हैं।
- 54:16तो इसका अर्थ ही है कि भीतर श्वास नहीं है, बस सब।
- 54:19पानी भर गया। अब ये व्यक्ति जरूरत नहीं है।
- 54:25तो वहाँ से गुजरते हुए किसी जमींदार ने कहा किसान ने केस को
- 54:29निकालो। रोहित था, एक मेरा और शिष्य था,
- 54:37एक मेरा बेटा था। कुणाल ये तीनों थे।
- 54:42लेकिन निकाल तो ये पहले ही लेते। इनके पास कोई रस्सी नहीं थी और
- 54:49तैरने में आता नहीं था। तो छलांग लगाने का अर्थ होता है
- 54:55स्वयं की आहूति तैरना आता नहीं। पास खड़े हुए एक पुलिसवाले को कहा
- 55:07कि पकड़ी दे दो भाई। बाबा जी को निकाल लेंगे हम लेकिन
- 55:14उसने कहा नहीं ये मेरी इज्जत है, पकड़ी नहीं, मैं दूंगा।
- 55:20कुछ लोगों को अपनी इज्जत किसी की जान से भी प्यारी होती है और कुछ
- 55:26लोगों को अपना जीवन किसी धर्म से भी ज्यादा प्यारा नहीं होता।
- 55:35गुरु तेग। बहादुर जैसे लोग पगड़ी चोट्स।
- 55:38सिर को ही कटा देते हैं। एक धर्म के लिए और शर्म की बात है
- 55:45कि जीस तेग बहादुर ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए सिर दे दिया और
- 55:53सिर के ऊपर लगी हुई पगड़ी आज ये पुलिस विभाग में कर्मचारी।
- 55:58इससे बच्चे मांगने की पगड़ी दे दी।
- 56:03ये कहता नहीं ये पगड़ी हमारी इज्जत?
- 56:05है। किसी की जान।
- 56:11जा रही है जा पगड़ी नहीं उतारूंगा।
- 56:16उसी के शीशे हैं जिसने शीश दिया ये पगड़ी देने को तैयार।
- 56:22हैं। और होती किस लिए पगड़ी अगर
- 56:27तुम्हारी पगड़ी से किसी का जीवन बच जाए?
- 56:33आपत्ति नहीं होनी चाहिए। तो ये बात अलग थी कि मैंने कोई
- 56:36पुकार नहीं की, बचाने का गुहार नहीं लगाया।
- 56:41कोई डर, भय भीतर नहीं। था।
- 56:43कब का खत्म हो गया? लेकिन उस व्यक्ति ने जो गुरु तेग
- 56:51बहादुर का अनुयायी है और उसी धर्म का शिष्य है, वो कहता पगड़ी नहीं
- 56:58मिलेंगे। जान जाए जाए तो फिर ऐसे लोगों को
- 57:06गुरु तेग बहादुर का अनुयायी समझे। ये सरकसिए ही हैं ना ऐसे लोगों
- 57:13का? अगर मैं सरकसिए कहता हूँ तो कुछ
- 57:17लोग बुरा मान जाते हैं। मान जाओ भाई जब आप भीतर जाओगे।
- 57:27आपके साथ आपकी शक्ति भी जाएगी। शरीर में बहुत कुछ होगा वह जो
- 57:35पानी बाहर निकलेगा भरे हुए टब में जब बाल्टी दबोगे वो होंगे आपके
- 57:41अचेतन मन के दबाए हुए। मृत्यु का भय भी हो सकता है।
- 57:47काम, क्रोध, लौह, मो। अहंकार भी हो सकता है।
- 57:50पिछले जन्म की समृद्धियां भी हो सकती हैं।
- 57:54जो दबा है वो ही बाहर आएगा उसके अतिरिक्त और कुछ?
- 57:57आ ही नहीं सकता। बहुत से लोग डर जाते हैं, कप जाते
- 58:05हैं बाबा आज ये दिख गया आज ये दिख गया दिख गया दिख गया भाई झट से
- 58:09मेरे को फ़ोन करेंगे, मैसेज करेंगे।
- 58:13जब मैंने आपको एक बात समझा दिया, तुम मरोगे नहीं।
- 58:20कम्प हो गए तो ये कंपन भीतर है, निकलने दो।
- 58:23इसको बाहर और जरिया कोई नहीं है। यह चेतन में से ही निकलेगा।
- 58:29यही एक रास्ता है, फिर भी रोज़ अब बैठा था।
- 58:34आज मैं आज मेरे को वो दिखाई दिए। आज नीली लाइट आज पीली लाइट क्या
- 58:39हो गया भाई ये सब कुछ देखेंगे इनको उपेक्षित करो, डर लगता है?
- 58:48मृत्यु का भय आएगा क्योंकि दबी हुई सबसे ज्यादा चीज़ यही है।
- 58:53जगहजगह पर आपने मृत्यु को दबाया है।
- 58:57बॉस ने बेइज्जती कर दी कोई और बातों में?
- 59:00कुछ घर में बड़े बुजुर्ग उनके सामने नहीं बोल सकते।
- 59:03अत्याचार हो रहा है, कोई सास बहू का झगड़ा है, कोई पिता पुत्र का
- 59:10है, हजारों झगड़े घरों में उपने हैं।
- 59:15तो मृत्यु आप दबा लेते हो, क्रोध आप दबा लेते हो ये सब दबाया हुआ
- 59:22क्रोध के बाहर निकलेगा इससे डरना, मित्र निकलने देना, इसको साक्षी
- 59:32भाव से देखते रहना। कि यह कूड़ा बाहर जा रहा है,
- 59:36बल्कि प्रसन्न हो। जश्न बनाने के मैं हल्का हो रहा
- 59:39हूँ, आपके सर पर ईंटों का बट्टल रखा है, अगर कोई एक ईंट उठा ले तो
- 59:45आप नाराज। होते हो अच्छा है।
- 59:48बाहर क्या? जो दबा है भीतर वो बाहर आएगा, आने
- 59:55को बाहर आएगा तो आपका भार हल्का होगा।
- 1:00:01वह जंजीरें हैं। आपके लिए आपने बड़ी मान्यताएँ कर
- 1:00:05रखी हैं और ये मान्यताएँ ही आपके राह में बाधा हैं।
- 1:00:12बहुत कुछ मान रखा है तुमने ये नर्क होता है ये स्वर्ग होता है
- 1:00:16सब मान्यता ही तो है तो ये जो कहते है की जब कुंडल नहीं जगेगी,
- 1:00:25फट जाएगा, सुरूर ऐसा होगा, वो होगा ये होगा कुछ नहीं होगा।
- 1:00:31ये शक्ति है उस शक्ति को जाने का रास्ता है।
- 1:00:35जैसे वाटरबक्स की पाइप के बीच में से पानी जाता है, सप्लाई होने के
- 1:00:40लिए तो पाइप फटती है नहीं कोई पाइप नहीं फटती।
- 1:00:46वह आराम से सभी घरों को पानी सप्लाई कर देती है।
- 1:00:49रोज़ सुबह शाम। ऐसे ही रास्ता है, बड़ा मजबूत
- 1:00:55रास्ता है, कहीं से नहीं फटेगा तो चिंता मत करना, ये डराने वाले लोग
- 1:01:00हैं। ये अज्ञानी हैं इन्हें कुंडली के
- 1:01:03बारे में कुछ बताना कुंडली शक्ति जब जागेगी, जब आप भीतर जाओगे?
- 1:01:12या इजी वे बताता हूँ और भी बड़े रास्ते हैं योग के लेकिन बड़ा
- 1:01:18इजी। वे बताता हूँ ध्यान का इसे वे
- 1:01:21कहते हैं ध्यान का रास्ता कुण्डनी जागरण के लिए अक्सर सहज समाधि
- 1:01:30वाले इसी का प्रयोग करते। हैं।
- 1:01:32जो कबीर ने कहा सहज समाधी भली रे सन्तो सहज समाधी भली तो जब आप
- 1:01:40भीतर जाओगे बिल्कुल आखिरी पड़ाव पे पहुंचोगे तो जंक्चर प्वाइंट पर
- 1:01:46रुक मत जाना वहाँ मैंने आपको बताया बड़ी दिशाएं।
- 1:01:50हैं। जंक्शन के ऊपर दशाएं होती हैं अब
- 1:01:54जंक्शन के ऊपर कोई रेलवे कहीं जाती है, कोई कहीं जाती, कोई कहीं
- 1:01:58जाती, बड़ी दूर दूर से निकलते हैं रास्ते ऐसे ही वहाँ से निकलते
- 1:02:04हैं, हजारों रास्ते निकलते हैं लेकिन आप किसी चीज़ का लोभ ना
- 1:02:09खाना। क्योंकि संसार में आपने लोग खाया
- 1:02:12था, संसार में जो इच्छा थी तुम्हारी संसार में वो मिला नहीं,
- 1:02:18वह यहाँ मिल जाएगा। सिर्फ मात्र सोचने से।
- 1:02:27इसे कल्पवृक्ष कहते हैं। बस कल्पना करो और वह प्रकट हो
- 1:02:34जाएगा आपको रास्ता मिल जाएगा आप उधर निकल जाओ, लेकिन आपने इधर उधर
- 1:02:42कहीं नहीं ख्याल करना है। सभी चीजों को उपेक्षित करके
- 1:02:48तिरस्कृत नहीं उपेक्षित न्यूट्रल आपने भीतर उतरते जाना है।
- 1:02:56जंकचर प्वाइंट को किसी तरह क्रॉस? कर लो।
- 1:03:01या मैं कोई फिलॉसोफिकल। आपको बात नहीं समझा रहा हूँ।
- 1:03:09ये एक्सपेरिमेंटल है। यह प्रयोग करने वाली है।
- 1:03:16यह प्रयोग है तो इस पर किसी प्रकार की एक्सप्लनेशन की जरूरत
- 1:03:23नहीं है, बस यही है। क्यों है?
- 1:03:26क्या है ये मत पूछना आप? तो?
- 1:03:31आप वहाँ से किसी तरह दामन बचा के निकल जाना नीचे नीचे नीचे पैंट
- 1:03:41आएगा वो ही जिसकी बात। बहुत शास्त्रों में की है और आपकी
- 1:03:46तो रट गई है ये बात मूलाधार चक्र वहाँ पर कुंडल में।
- 1:03:55उसके साथ आप जाकर टकराव करें। आपकी शक्ति जो आप भीतर उतरे।
- 1:04:03जैसे ही आप वहाँ पहुंचोगे तो जैसे एक कैटेलाइटिक एजेंट के आने से
- 1:04:09रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं, वैसे ही तुम कैटेलाइटिक
- 1:04:14एजेंट का काम करोगे। बस आप ही का इंतजार था जैसे।
- 1:04:21आप वहाँ उतरे, आपने वो तल छुआ तो कहते वृहद शक्ति पैदा हो गई।
- 1:04:29कुंडल ने जागेगी महान शक्ति आपके मिरुदंड में से होती हुई सुष्मना
- 1:04:39में से होती हुई ब्राह्मण धर्म? सहस्त्र दल कमल में प्रविष्ट हो
- 1:04:44जाएगी। उसे ही कहते हैं, शब्दसूर्ति का
- 1:04:47मिलान शक्ति संवार गई और द्वार खोल जाएगा।
- 1:04:58दशम द्वार जिसे कहते थे। यहाँ से व्यक्ति योगी जो निकल गया
- 1:05:08वह फिर वापस नहीं आ। सकता।
- 1:05:14क्योंकि उसके साथ उसको छोड़ के जानी पड़ेगी सिल्वर कॉट।
- 1:05:21एक विधान है, सिल्वर कॉर्ड टूट जाती है इसलिए जो निकला 1000 वो
- 1:05:29वापस नहीं आएगा जिसने बिल्कुल श्रद्धा के लिए जाना हो, जो मुक्त
- 1:05:33हो गया, समाधि हो गया, संबोधि में चला गया।
- 1:05:40उसने क्या करना है सिल्वर पॉट। का?
- 1:05:43वो यहाँ से निकलेगा। इसलिए योगी आम तौर।
- 1:05:49से साधारण तौर से। इसी चक्कर का इस्तेमाल करते हैं
- 1:05:54रिश्ते का इस्तेमाल करते हैं जाने के लिए।
- 1:05:59निकल वो किसी भी रास्ते से सकते हैं।
- 1:06:02सारा महल उनका है लेकिन जो ना भी चक्कर से निकलेगा वह जब भी चाहे
- 1:06:15वापस आ जाएगा। एक छोटा सा प्रश्न यहाँ और ले
- 1:06:18लूँ। कहते हैं बाबा मैं शरीर से बाहर
- 1:06:22हो जाता हूँ, बिल्कुल कोई भी हो सकता है, कोई खास बात नहीं है।
- 1:06:28शरीर से बाहर आप हो सकते हो, शॉपिंग में भी कई बार आप शरीर से
- 1:06:31बाहर हो जाते हो, सच में भी हो जाते हो, कल्पना में भी हो जाते
- 1:06:37हो। क्योंकि शरीर से बाहर आप हो सकते
- 1:06:41हो क्योंकि शरीर तुम हो नहीं, शरीर में हो तुम तो जो घर के भीतर
- 1:06:47बैठा है वो घर से बाहर कभी भी हो सकता है।
- 1:06:50कौन रुकेगा? उससे ये मालिक है।
- 1:06:55तो पूछा है कि मैं शरीर से बाहर हो जाता हूँ लेकिन संकल्प नहीं
- 1:06:58लेता, कहीं जाने का, कहीं जाता नहीं, मैं तो मुझे डर लगता है कि
- 1:07:04मैं कहीं चला ना जाऊं तो अगर चले जाओगे, तुम कहीं चले जाओगे, फर्ज
- 1:07:09करो तो मैंने वो जो विधान बताया। नेगेटिव पोस्ट को ऊर्जा को इसलिए
- 1:07:15बताया था दोनों अंगूठों को अगर आदमी गया है तो स्त्री छू लें।
- 1:07:20अगर स्त्री गई है तो पुरुष छू लें, वह वापस आ जाएगा और तुम ये
- 1:07:28कहते हो कि मैं कहीं दूसरे गह पे नहीं जाता।
- 1:07:31और आप कहते हो कि संकल्प की आवश्यकता पड़ती है, हाँ, दूसरे
- 1:07:35ग्रह पे जाने के लिए संकल्प की आवश्यकता पड़ती है।
- 1:07:40आप अगर शरीर से बाहर हो वहाँ आप संकल्प करो कि मैं किसी ग्रह के
- 1:07:46ऊपर जाना चाहता हूँ। एनी अदर प्लेनेट।
- 1:07:51तो आप किसी ग्रह पर पहुँच जाओगे, आप विशेष किसी ग्रह की बात करते
- 1:07:57हो जो दोन सपार ऐसे ऐसे कुछ नाम हैं क्षमा करना इनसे आप वाकिफ
- 1:08:06नहीं हो। नाम भी नए होंगे।
- 1:08:08एक विशाल ग्रह बड़ा जो धरती से 10 गुणा बड़ा मैं अक्सर सबसे मेरा
- 1:08:15प्रिय। ग्रह वो है।
- 1:08:19और कर बोल रहे थे कि स्वामी जी आचार्य जी त्रिलोक तो गृंडों
- 1:08:24ब्रह्मंडों से पार हो जाते हैं। भाई आपने खंगाल लिया है, भ्रमण
- 1:08:28होते नहीं? क्या ऐसे बात करते हैं ये?
- 1:08:33लोग। जिसका एक जर्रे की भी इनको सू
- 1:08:40नहीं है। बात भ्रमण की करते हैं एक्स्प्ल
- 1:08:44तो इनसे कुछ भी करवा लो। तो मैं बड़ा चकित हुआ और चकित भी
- 1:08:50हुआ और साथ में इनकी अज्ञानता पर भी थोड़ी समझ ज्यादा है।
- 1:08:58वाक्य ही अज्ञानी। है।
- 1:09:01नहीं गए और अगर ये कहते हैं कि नहीं होती एनलाइटनमेंट तो
- 1:09:05बिल्कुल। ठीक है, यहाँ जीकर क्या करोगे खाक
- 1:09:09जियोगे? आपके तो जीने का मकसद है बड़ा सा
- 1:09:18एक। बना हो महल उसमें बच्चों को भड़ाऊ
- 1:09:26ये क्षोभ तो है लेकिन क्षोभ नहीं है क्योंकि आप गलत रास्ते पर जा
- 1:09:33रहे हो। मैं नहीं कहता कि आप सीएमपीएम न
- 1:09:38बनो। अब इंडस्ट्रीज मत चलाओ, आप ये न
- 1:09:45करो आप वो न करो बिल्कुल करो, लेकिन जीस कॉम्पिटिशन से जीतकर आप
- 1:09:51आई ए एस बनें और जीस वासना की प्रगाढ़ता के साथ।
- 1:09:58आप घने चांस वाली जगह पे आ गए ये घना चांस।
- 1:10:01है। अध्यात्म में आना बड़ा चांस है तो
- 1:10:08या तो आप पैर बुझवाने लगोगे। एक वक्त ऐसा आएगा या आप बड़े ओहदे
- 1:10:15पे जाने के लिए राजनीति में आ जाओगे।
- 1:10:17ये दो ही तरीके हैं आपके आपकी भविष्यवाणी तो मैंने कर।
- 1:10:20दिया। लेकिन कबीर जैसे लोग न तो प्यार
- 1:10:25भिजवाएंगे, न झंडा डंडा लेकर अपनी पार्टी खोलेंगे।
- 1:10:30ये पक्का है न ना न कैसा करेंगे। तो बिना किसी बात को जाने देखे
- 1:10:40लोग तो आज भी कहते हैं कि नरक है ये बी के की मैं कहानी।
- 1:10:45सुन रहा था कल परसों। ओह मरकर चली गई, ऊपर सारी बातें
- 1:10:50बताई उसने यद भी बिल्कुल कोरी झूठ है, मैं कहता हूँ इनकी।
- 1:10:56इससे पहले के करोड़ों लोग मूर्ख बने, इनका नर्क हो करवाओ, पता चले
- 1:11:03इन्हें कि वाकई ही मर के गई नर्क होता है ये डराने के लिए।
- 1:11:14तो जो लोग कहते हैं कुंडली जगती है, फट जाता है, ऐसा हो जाता है,
- 1:11:17कुछ नहीं होता, साधारण प्रक्रिया है जैसे खून बहता है, नर्व्स के
- 1:11:22भीतर, वेन के भीतर और आर्टिस्ट के भीतर, वैसे ही ये शक्ति इसका एक
- 1:11:30रास्ता है। कोई बंध नहीं है रास्ता।
- 1:11:33बस उधर से गुजरी नहीं हो सकती, रास्ता बंद नहीं है रसागुलाई तो
- 1:11:40आप जब भीतर जाओगे वहाँ से उस रस्ते से एक कैटलाइट एजेंट का काम
- 1:11:47करोगे। आप और कुंडल नहीं जागृत होगी?
- 1:11:53और आगे की प्रक्रिया रास्ता है। मेरे दंड से होती हुई सुशमना के
- 1:11:58भीतर से वो अथाह शक्ति परमरंदर में जाएगी और वो खेल जाएगा जैसे
- 1:12:06बिजली जाती है, एसी चल जाता है, पंखा चल जाता है, लाइट जग जाती
- 1:12:12है। मशीनें चलती बड़ी बड़ी फैक्टरी
- 1:12:16चलती लेकिन कब? जब बिजली आती है बिजली काम करती
- 1:12:23है क्योंकि वो शक्ति है तो अगर मैंने कहा।
- 1:12:30कि आप इस शक्ति को व्यर्थ मत करो, इससे पहले के कुंडली जागृत हो, आप
- 1:12:37भीतर गहरे उतरो, वो तो पता नहीं कितनी देर लगेंगी, क्योंकि आप
- 1:12:41बाहर की चीजों में ही उलझे हुए हो।
- 1:12:44कुछ तो आपकी वासनाएँ आपको उलझा देती हैं कुछ ऐसे आचार्यगण।
- 1:12:49और ऐसे सद्गुरु आपको कह देते हैं एक सद्गुरु है, वो है तो
- 1:12:56आध्यात्मिक कहलाता है, लेकिन उसके प्रवचन है कि केला खालूँ ये नीम
- 1:13:04की गोली खालूँ अरे भाई, आध्यात्मिक व्यक्ति?
- 1:13:09कहाँ फिकर करता है खाने पीने के उन 4 दिन तक कुछ भी नहीं खाते
- 1:13:15बहुत क्या डाइट में लेंगे क्या सुबह ब्रेकफास्ट क्या डिन्नर क्या
- 1:13:23लंच उनके लिए कोई मैदान नहीं? रखता।
- 1:13:27वो तो भिक्षापत्र उठाते हैं और किसी भी घर के सामने जाके खड़े हो
- 1:13:31जाते हैं। लंच में जो आया ठीक सब एक बार ही
- 1:13:34जाते हैं, वो वही उनका ब्रेकफास्ट होता है, वही लंच और वही डिनर
- 1:13:42लेकिन वो अपना मार्ग पा जाते। हैं।
- 1:13:47तो ऐसे मत बांधो, गलत सपने दिखाकर सुबह ये खाओ फिर ये खाओ, फिर ये
- 1:13:55खाओ, रोग नहीं होगा मरोगे तो या मर हो जाओ ऐसी ऐसी भ्रांतियों
- 1:14:05में। फंसे हुए लोग तुमको फंसाएंगे और
- 1:14:10अगर इनकी चंगुल में फंस गए तो तुम छूट न।
- 1:14:12पाओगे? मेरे पास जब पहले दिन मुझे आदेश
- 1:14:17दिया गया तो आदेश के साथ ये कहा गया कि कम्युन मत बनाना।
- 1:14:26लेकिन आज पता चलता है, परसों ही मेरे पास बी के से और कुछ दिन
- 1:14:32पहले मेरे पास जैन धर्म से बहुत से लोग मुझे सुनते हैं, मेरे से
- 1:14:37बातचीत भी कर लेते हैं। कोई प्रश्न है उलझा हुआ?
- 1:14:44प्रश्न आ जाते हैं। चुगली निंदा होती है।
- 1:14:51कॉम्पटीशन हुआ कि जो सबसे बड़ा चुटकुला या अजूबा चुटकुला सुना
- 1:14:58देगा फर्स्ट आएगा। तो सब बच्चों ने अपने अपने
- 1:15:02चुटकुले सुनाए और जो एग्जामिन करने वाले थे उन्होंने सबके
- 1:15:11चुटकुले। सुने।
- 1:15:13एक के चुटकुला फर्स्ट। आ गया क्या फर्स्ट आ गया?
- 1:15:20वो कहता है चार औरतें बैठी थीं। एक चार पाइप है और चारों चुप हो
- 1:15:28बैठी थी। सबसे बड़ा अजूबा सरप्राइज़ ऑफ दी
- 1:15:39वर्ल्ड चार स्त्रियाँ चुप नहीं बैठ सकतीं।
- 1:15:46तो ये बी के वाले। कैसे चुप बैठते होंगे?
- 1:15:58तो यही समझ आया कि बाबा ने कहा कि कम्युन मत बनाना इसमें आसानी
- 1:16:05लासानी तरंगें पता नहीं कौन क्या लेके आया है ये बैठती रहती हैं आप
- 1:16:11उसमें एक दूसरे का गंध। एक दूसरे के ऊपर पता लगता नहीं है
- 1:16:16दिखती रंगे हैं न तुम जाते हो क्या सोच के ले के क्या आ जाते हो
- 1:16:26खोपड़े, भरे पड़े हैं और जो भरा पड़ा है वही तो निकलेगा बाहर।
- 1:16:35कम्यून मत बना लेना, तुम्हारे पास सबके पास कोई ना कोई स्थान है।
- 1:16:41बैठने के लिए उसको ही पूजा रूम बना।
- 1:16:45लो। मैं बार बार कहता हूँ मुझे कहते
- 1:16:48हैं, आपके दर्शन करने हैं, मैंने कहा दर्शन कर जाओ, कोई बात नहीं।
- 1:16:52उससे आपको प्रेरणा मिलेंगे कि ऐसे आनंद में हम भी हो सकते हैं।
- 1:16:58बस इसीलिए आना जरूर दो चार। 10 मिनट बैठने की।
- 1:17:06इच्छा हो वो बात अलग। है।
- 1:17:09लेकिन तुम कहो कि हम तो यहीं बैठेंगे तो कोई व्यवस्था नहीं है।
- 1:17:15सारी दुनिया भर के लोग कहते हैं हम यहाँ आकर जाने का जी नहीं
- 1:17:19करता। किसका जी करता है ये तिरंगे पीनो
- 1:17:24को सबका जी करता? है।
- 1:17:29निगाहें मिलाने को जी चाहता। निगाहें मिलाने को जी चाहता है,
- 1:17:53निगाहें मिलाने को जी चाहता। है दिलों जान लूटाने को जी चाहता
- 1:18:10है दिलों जान लूटाने लूटाने को जी चाहता है।
- 1:18:19जी चाहता वो तोहमत जी से वो तोहमत जी से।
- 1:18:34इश्क कहती है दुनिया वो तोहमत जिसे इश्क कहती है दुनिया वो
- 1:18:49तोहमत उठाने को जी। हम तो तोहमत को भी उठाने का दिल
- 1:19:01करता है। हमारा जो तो दक्वाद है, अगर तोहमत
- 1:19:07लगाना चाहता है तो तोहमत लगाता है वो भी हमें परवान।
- 1:19:14हम जीते हैं, उसकी मर्जी से जीते हैं और तुम जीते हो, तुम्हारी
- 1:19:19मर्जी से जीते हो बस यही फर्क है बुनियादी ये समझाने वाले लोग
- 1:19:28फिलॉसोफी का लोग। लाखों किताबें लिख देंगे, तृप्ति
- 1:19:36के एक बूँद भी तुम्हे नहीं देंगे, खोपड़ी को भर देंगे सोचना और 1
- 1:19:44दिन तुम पाओगे खोपड़ी बड़ी घनी भारी हो गया लेकिन वो मस्ती की एक
- 1:19:50बूँद न है। पर बात तो मस्ती की है, जहाँ
- 1:19:55सुधबुध खो जाता है, जरूरत तो इसकी है, आखिर में तुम बन जाओ, सब बन
- 1:20:02जाओ यूपीएससी कर। लो आई ए एस बन जाओ आई पीएस बन जाओ
- 1:20:07जो चाहते हो बन जाओ कौन रोकता है? लेकिन बात तो ये है कि जरूरत पूरी
- 1:20:16हुई क्या? जरूरत पूरी होती है तुम्हारी
- 1:20:23कितना ही हाँ कह दो, लेकिन दिल के बहलाने को गालिब के ख्याल अच्छा
- 1:20:28है। तुम्हारे भीतर का एक कोना पुकारना
- 1:20:33ही रहेगा कि नहीं? कुछ शेष रह गया, वो शेष क्या रह
- 1:20:41गया? वो शेष यही रह गया जो उसके बाण से
- 1:20:46मिलता है। तुम्हारे कर्म से नहीं मिलता,
- 1:20:49पैसा मिल जाएगा, पावर मिल जाएगी, सम्मान मिल जाएगा, बड़े बड़े
- 1:20:56संस्थान खोल लोगे, नाम हो। जाएगा दुनिया भर में, लेकिन नाम
- 1:21:02किसके रहे? नाम तो रेतों पर खींची हुई।
- 1:21:06लिखी हुई लकीरें। मात्र होती हैं।
- 1:21:09थोड़ी सी हवा आई तो ढह जाते हैं। नाम किसके रहें हैं?
- 1:21:16धीरे धीरे सभी के नाम खत्म हो जाते हैं।
- 1:21:20बस तुम्हें भ्रम दे दिया गया है। कि नाम रहना है कल ही मुझे किसी
- 1:21:25ने पूछा। कि बच्चा पैदा कर लूँ।
- 1:21:30मैंने कहा तुम देखो अगर तुम बोझ उठा सकते हो एक बात तुम्हें मैं
- 1:21:37बता सकता। हूँ वो ये कि बच्चा बोझ होता।
- 1:21:42है। 12 वर्ष के बाद तुम्हारी थोड़ी
- 1:21:45थोड़ी सहायता करना शुरू कर देगा। 12 वर्ष कहते हैं अंकल रूडी की भी
- 1:21:51सुनी जाती है। 12 वर्ष में बच्चा थोड़ा सा
- 1:21:53तुम्हारी सहायता करना शुरू करेगा और उसके बाद।
- 1:21:59अगर लायक निकल गया तो? वो भी नालायक निकल गया वो
- 1:22:05तुम्हारा सिर भी फोड़ सकता है ध्यान रखना सभी बातों को
- 1:22:10मद्देनज़र रखते हुए तीन बच्चों की तो बात छोड़ो।
- 1:22:13बतौन से कह दो आप पैदा करो, बच्चा पैदा करो।
- 1:22:20या न करो ये तुम्हारी आपसी सहमति है।
- 1:22:24मैं आपको कोई आदेश नहीं कर सकता और ध्यान रखना, मैं आपको कोई
- 1:22:29परामर्श भी नहीं दे सकता। मैं कहता हूँ जैसे तुम सुखी होते
- 1:22:35हो वैसे कर रहा हूँ। बच्चा होने तो सुखी होते हो।
- 1:22:39वैसा करो नहीं होने से दिमाग पे बोझ न पड़े ऐसा चाहते हो तो न
- 1:22:46करो, शादी करो, लाइव इन में रह लो।
- 1:22:51सब तरीके हैं बहुत से आयाम हैं जिनमें तुम मूर्त रूप दे सकते हो।
- 1:23:02लेकिन एक बात ध्यान में रखना जो किसी बुजुर्ग ने कहा था कुछ भी बन
- 1:23:14जाना, लेकिन अंत में हो जाना। अब इसके बड़े गहरे आते हैं।
- 1:23:21घर जाके सोचना मैंने क्या कहा, बन तो कुछ भी जाना, प्राइम मिनिस्टर
- 1:23:26बन जाना, सीएम बन जाना, आचार्य बन जाना, सद्गुरु बन जाना कुछ भी बन
- 1:23:34जाना, लेकिन आखिर में? जब ये संसार से जाओ तो हो जाना।
- 1:23:39क्या हो जाना जो तुम वास्तव में हो अगर तुम जाते हुए हुए नहीं जो
- 1:23:47तुम हो तो फिर फिर तुम्हें चक्कर लगाने पड़ेंगे अतिरिक्त अतिरिक्त
- 1:23:54तुम चले जाओगे, तुम तृप्त हो के ना जाओगे।
- 1:24:01सो भीतर जाना होता है। क्यों कहता हूँ क्योंकि वहाँ से
- 1:24:07उर्जा उठेगी और ऊपर जाने का मार्ग है मेरे दंड से सुशुमुना के भीतर?
- 1:24:13अंत में तो तुमने पहुंचना तो वहीं है।
- 1:24:15तो सीधे सीधे जो ध्यान लगाने की बात करते हैं वो लालच के लोग हैं।
- 1:24:20उन्हें इस मार्ग का पता नहीं है। इन पंखोंखानों में मत उजना सीधा
- 1:24:25रास्ता आपको बता। देता हूँ।
- 1:24:27वो यही है ज्ञान में पहले नीचे उतरो, फिर उस शक्ति के साथ आप
- 1:24:32सहस्रार में समझ आओ। जो आनंद का सरोवर है समुद्र।
- 1:24:37है। वो काला एक बा सूरीवाला।
- 1:24:56वो काला इक भां सूरी वाला शुध विषरा गयो।
- 1:25:13मोरी रे सुध विसरा गयो मोरी। माखन चोरवो नन्द किशोर जो कर गयो
- 1:25:41मन की चोरी रे। कर गयो मन्नू की चो रे वो काला
- 1:26:03इक। बां।
- 1:26:06सूरी वाला। सूप गयो, फिर एक तां सुना के कहाँ
- 1:26:30गयो। इक बाण चला के कहाँ गए हो इक बाण
- 1:26:46चला के। छुप गयो फिर एक तान सुना के कहाँ
- 1:27:05गयो इक बाण चला के। कहाँ गए एक भान चला के गोकुल
- 1:27:23ढूँढा मैंने मथुरा। ढूंढी, गोकुल ढूंढा, मैंने मथुरा
- 1:27:40ढूंढी। कोई नगरिया न छोड़ी रे, सुध विसरा
- 1:28:04गयो। मोरे ओंकार एक भानु शुरुआत।
- 1:28:30पनघट पे मोरी भैया मरोरी मैं बोली तो मेरी मर्द की।
- 1:28:47होरी मैं बोली तो मेरी मटकी फोरे पनघट पे मोरी।
- 1:29:05भैया मरोरी मैं बोली तो मेरे मठ की फोरी, मैं बोली तो मेरे मठ की
- 1:29:22फोरी। पैंया परू पैंया परू करू मैं
- 1:29:36विनती पर पैंया परू करू। मैं बिनती पर एक नमानी वो मोरी
- 1:29:52रे, सुध विसरा गयो में। रे ओह काला इक बा सूरी वाला।
- 1:30:25सुध विसरा गयो मोरी रे सुध विसरा गयो मोरी।
- 1:30:43वो काला इक बांसुरी वाला।