Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Oct 25 - मेरा, उस विराट के साथ Connection | आपको बताने भर से ही असंभव चीज़ कैसे हो जाती है संभव?
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- 0:06श्री यश गोरा। पर धर्मों में भयावह श्रीमद्भागवत
- 0:28गीता तीसरे अध्याय के 35 श्लोक बाबाजी मुझे यह कैसे पता लगे कि
- 0:42मेरे लिए? स्वधर्म क्या है और पर धर्म क्या
- 0:51है? स्वधर्म एक होता है या अनेक होता
- 1:00है। शयधर्म दो होते हैं
- 1:33एक शयधर्म होता है अपने शरीर के लिए जीव का उर्धन करना।
- 1:50यह स्वयं धर्म का पहला अंग है। पढ़ाई लिखाई करो, अपने पांव पे
- 2:04स्टैंड हो जाओ, किसी के आगे हाथ फेराने की आवश्यकता न पड़े इतने
- 2:14विद्वान हो जाओ। के दूसरों को कुछ दे सको मांगो।
- 2:22यह शरीर का स्वयधर्म है और अभी तुम शरीर ही हो पुत्र तुम जो हो
- 2:30उसको बचाने का धर्म स्वयधर्म है। इस डेफिनिशन को सर्कल में दिलो जब
- 2:46जब भी तुम जो होते हो उसको बचाना, स्वय धर्म न हो।
- 2:56अभी पुत्र तुम शरीफ अभी तुम मन हो, शरीफ हो अभी तुम्हारा कर्तव्य
- 3:12तुम्हारा धर्म बराबर समजते रहना। धर्म यानी कर्तव्य शरीर को बचाने
- 3:22हेतु कालन पोषण करने हेतु पर अपनी जेनरेशन को आगे बढ़ाने क्योंकि ये
- 3:33भी तो घर में है। अगर प्रत्येक व्यक्ति आरएसएस का
- 3:40मेंबर बन गया और शादी ना किया और धरती बेरान हो जाए जहाँ यूनिवर्स
- 3:54बहुत सी चीजों को मिलाकर पैरलल हो।
- 4:01जैसे कहते कितने अंग हैं इसमें जुड़े हुए और सभी अंगों का जुड़ाव
- 4:16शरीर कहलाता है। अगर तुम एक मार्ग में चल पड़े तो
- 4:26दूसरे का क्या होगा? यह सोचना अगर तुमने संसार का
- 4:36सार्वजनिक इकट्ठा कर लिया। अपने ड्रंक भर लिए दूसरों का क्या
- 4:46होगा? क्या दूसरे भिक्षा पत्र लिए भीख
- 4:53मांगते रहे शायद? शायद हमारे सर्वोच्च पदवी पर बैठे
- 5:24हुए व्यक्ति। इस कुंठा का शिकार और जो व्यक्ति
- 5:37बचपन में जीस कुंठा का शिकार होता है बड़ा होकर दूसरों से बदला
- 5:43लेता। है।
- 5:5035 वर्ष भिक्षा मांगकर खाया ये दंश हम पुत्रु तुम्हारे हाथों में
- 5:57छूटा है, क्योंकि यह भी कैसा समाज?
- 6:09यह भी कैसे बतवारे का ढंग एक व्यक्ति का ड्रंक भर जाए?
- 6:15और एक व्यक्ति भूखों मरे और वह गडगडाने को अभिव्यक्ष हो जाए, ऐसा
- 6:21हुआ नहीं। वैसे तो मैं बताऊँ अगर ऐसा हुआ
- 6:26होता तो छाती 56 ना होते, ऐसा मत करो।
- 6:34वोट बटोरने की बातें हैं, मैं गरीब हूँ तो क्या अब्राहम लिंकन
- 6:42अमीर परिवार से थे? फ्रम केव्ड व्हाइट हाउस झोपड़ी तो
- 6:49तुम्हारे पास पक्का मकान तो। होगा।
- 6:58बचपन में जो दुख सहे, जीस कार्य से सहे बड़े होकर तुम उसका बदला
- 7:05ले रहे है इसलिए आज बच्चे माँ बाप से बदला ले रहे है।
- 7:15कल तुम बलशाली थे, बच्चा निर्बल था, आज बच्चा हो गया, तुम निर्बल
- 7:21हो गए, कल तुम स्कूल में छोड़ के आते बच्चों को और बच्चों को
- 7:28मास्टर को कहते कि इसके हार्डकम्प तोड़ते न करना पड़े।
- 7:34आज बच्चे बड़े हो गए, तुम हो गए? यह बच्चा अपने उस दंश का बदला
- 7:45लेगा। यह तुम्हारे हार्ड फॉर्म से
- 7:47उड़ेगा। जब भी कभी बच्चों को स्कूल में
- 7:53भेजता। खुद छोड़ दिया था और ऐसे स्कूल
- 8:00में लगाया मैंने जो मेरा शिष्य था रतन लाल, एडवोकेट शिवालिक पब्लिक
- 8:07सको। मैंने उससे पहले वचन लिया देखा।
- 8:13बच्चों को प्रताड़ित नहीं करना, मुर्गा बनाने की मारपीट करने की
- 8:20तो बात भूल ही जाओ, इतना प्रताड़ित भी नहीं करना के बच्चों
- 8:27को कहो कि तुम आखिरी बेंच पे बैठ जाओ या बेंच पर खड़े हो जाओ।
- 8:36तो रतन लाल तो बड़ा हैरान हुआ गुलाम उसका जी फिर वो ही ना करे,
- 8:44हम कैसे पढ़ेंगे? बच्चों का मन का प्रेम एक ऐसा
- 8:51उजार है। जो हाथी को भी भस्म कर लेते हैं,
- 8:57जो शेर को भी पहरेदारी करने पर विवश कर देता, वह प्रेम?
- 9:13प्रेम से पढ़ाना बच्चे अन्यथा अगर मुझे शिकायत मिल गई और बच्चों को
- 9:20फेंक दिया था, अगर तुम्हे कोई मार पुटाई करे, कुटाई करे तो मुझे बता
- 9:26दे ना स्कूल और भी हैं और अगर स्कूल?
- 9:31सब खत्म हो गए तो मैं तो हूँ मैं घर पे पढ़ाता हूँ, अगर मैं इनको
- 9:43पढ़ा सकता हूँ तो तुमको? बचपन का दंश भीख मांगने का याद
- 10:01रखना, ऐसे व्यक्ति को उच्चस्त गद्दी पे मत उठा देना।
- 10:07वह बदला लेगा। फिर वह सारे देश के हाथों में
- 10:12ठूठा पकड़ा। देगा।
- 10:14फिर वह एक व्यक्ति के ट्रंक और तिजोरियां भर देगा एक वृद्धि के
- 10:20गोदाम भर देगा। तुम लाख उसके सगे हो, लेकिन
- 10:26तुम्हें नहीं पता, मैं उसके भीतर की अंतर्दशा को जानता।
- 10:30हूँ। और अंतर्दशा को भी जानता हूँ मैं।
- 10:35कोलेक्टिव अनकॉन्शियस को भेज देता हूँ उसके भीतर जाकर अच्छी तरह
- 10:39पहले तो मैं यही कुछ निहारता हूँ के जो सबसे बड़ी गलती पे बैठा है।
- 10:47प्रधान सेवक के ज़रा देखे तो उसके विचार के।
- 10:54जो लोग कह देते है आपने देश को आजाद क्यूँ कराया?
- 11:00मैंने कैसे लिया? तुम राज़ कर सको इसीलिए की तुम
- 11:08अपना जहाज़। लोगों के पैसों से खरीद के सारी
- 11:12दुनिया की शेयर कर सको। इसीलिए कि तुम छठी ले के लोगों को
- 11:19तानाशाही दिखा सको। इसीलिए कि तुम सभी संस्थाओं को
- 11:24खरीद फरोख्त कर सको। और क्यों अजाग कराया?
- 11:28यही तो कारण था। अगर राज़ करना होता तो मैं बैठ रह
- 11:34जाता खुद कौन माई बलाल मुझे रोक सकता?
- 11:38था। एक लंदन से वरीष्ठ बड़ा वो
- 11:43व्यक्ति है अनपढ़ नहीं, अशिक्षित नहीं गमार नहीं।
- 11:50वह चौथी छठी पास फेल रही हैं बैरिस्टर पर वो भी लंदन
- 11:56यूनिवर्सिटी 22 वर्ष की उम्र में जीस वक्त तुम रोजगार की तलाश।
- 12:08करने में जुट थे। उस वक्त गाँधी जी ने यूनाइटेड
- 12:17किंगडम में इनर टेम्पल यूनिवर्सिटी चार यूनिवर्सिटी हैं।
- 12:25लास्ट। उसने वकालत की पढ़ाई 1891 में पास
- 12:32कर ली थी। उस वक्त वो 22 वर्ष का था।
- 12:48सब कुछ था। अमीर घराने से थे गाँधी के पिता
- 12:55श्री करमचंद अंग्रेजी हकूमत में दीवान की हैसियत चीफ मिनिस्ट्री
- 13:09विथ मी। आज तुम सरपंच बना दो पंच बना दो
- 13:19ये छोड़ो प्रेसिडेंट बना दो मिस्परिटी का ये भी छोड़ो,
- 13:24प्रेसिडेंट न बनाओ, सिर्फ मैम्बर बना दो।
- 13:31घर करोड़ों से भर जाएं, लेकिन घर भरना ठीक नहीं समझाना
- 13:46दो धर्म हैं सुधर्मि निर्धनम से यहाँ परधर्म भयावह।
- 13:58पहला धर्म शरीर का जब तक तुम शरीर हो तब तक जो तुम हो उसकी रक्षा के
- 14:13लिए गुजर बसर करने के लिए यह तुम्हारा पहला क्या?
- 14:26जब इस शरीर की पालनपोषण की कर्तव्य तुम्हारे सिर के ऊपर न
- 14:34रहे तो तुम्हारा दूसरा धर्म शुरू होता है।
- 14:46जीसको वास्तव में कृष्ण कहते हैं स्वधर्म में धर्म से या सब की
- 14:53परिस्थितियां अलग अलग होती हैं। अर्जुन का स्वधर्म उस वक्त।
- 15:02कृष्ण बताते हैं कि क्या है बाहर का भीतर का नहीं, बाहर का मैंने
- 15:08तुम्हे बताया पढ़ लिख के विद्वान बन जाओ अपने पापा पर इस समय जाओ,
- 15:12इतना सा कर लो कि गुजर प्रेशर हो जाए, किसी का छीना मत।
- 15:22किसी को देने के योग्य हो जाओ, किसी भूखे का भोजन, किसी निर्बल
- 15:30को बल, किसी गबराए हुए को तसल्ली। अर्जुन को पहले धर्म की प्रेरणा
- 15:49की जरूरत है। अर्जुन युद्ध के मैदान में है और
- 15:53अर्जुन को कुछ भी पता नहीं है। अपने दूसरे धर्म के बारे में
- 16:02छोड़ो, अपने पहले धर्म से ही वो घबरा गया है।
- 16:13भागना चाहता है, बहाना बनाता है सारथी उसे भागने नहीं देता मैं
- 16:22अपने आप से। घबरा गया हूँ।
- 16:34मैं अपने आप से घबरा गया हूँ। मुझे है ज़िन्दगी दीवाना कर दे
- 16:56मुझे है ज़िन्दगी दीवाना कर दे। मैं अपने आप से घबरा गया।
- 17:15थर्रा रहा है अर्जुन कांप रहा है अर्जुन ब्याग्रस्त अर्जन।
- 17:25भगवान कृष्ण भाँप लेते हैं घट घट के अंतश की जानने वाले सर्वज्ञ सब
- 17:31जान लेते हैं और ये भी जान लेते हैं कि ये अपनी कायरता को छिपाने
- 17:38की। योजनाएं ना रहा है।
- 17:40कैसे बाबू फंस गया धुरंधर वीर खड़े हैं, शंका है शंका है ना
- 17:48जाने जीत पाऊंगा, नहीं जीत पाऊंगा ना जाने गुरु ने कोई तरकीब अपने
- 17:54पास रख लियो मुझे ना बताइयो एकन गुरु बड़े अमानदार।
- 18:00न जाने किसी बात से कोई ऐसा फार्मूला भीष्म किताब मैंने रख
- 18:05लिया हो। ऐसे ही तो इसका नाम देवव्रत नहीं
- 18:09है। इससे कैसे करूँगा?
- 18:17असली में तो बात ये है मरने से डर लगता है।
- 18:22तो तुम पहले इसी योग्य हो जाओ जब कृष्ण कहते हैं कि तुम मैं तेरे
- 18:29संग हूँ, अब बात ये है कि ये कहते हैं कि मैं तेरे संग हूँ लेकिन यह
- 18:35है तो मेरा शक है। यहीं कडप हो जाता है।
- 18:43यह मेरा सखः है, कृष्ण भी जानते हैं।
- 18:46जब तक इसको नहीं दिखाऊंगा मेरा मेरा प्रभुत्व मेरी वो लीला मेरा
- 18:55अनंत विस्तार न दिखाऊंगा। और इसका हुनर न दिखाऊंगा तब तक
- 19:01इसमें कर्ज़ आएगा। क्या जड़ को जानते हैं?
- 19:07कृष्ण कृष्ण कहते हैं, तुम भागो मत, मैं तेरा इलाज करती हूँ।
- 19:21इसलिए कृष्ण सारथी बने उसे पता था ये डर जाएगा और युद्ध की मुख्य
- 19:27कमान इसी के हाथ में है। ये कतलोक सिर्फ एक व्यक्ति कर
- 19:35सकता है। भीम कर तो सकता है, लेकिन भीम
- 19:42मोटी बुद्धि है नहीं तो गधा उठाएगा, सिर में मार देगा ये तो
- 19:47है सो के सो मार दिया और उसमें कोई लक्ष्य तो है नहीं, निपुणता
- 19:54तो है ही। बारीकी नहीं है।
- 19:58दिमाग में मोटा दिमाग है तो बारीक दिमाग अर्जुन है, किसी को पकड़ना
- 20:04होगा, वह जानता है किसका भय कैसे खत्म होगा, मैं भी जानता हूँ।
- 20:11तुम्हारा भय कैसे खत्म होगा? जब तक तुम अपने उस अंत का दर्शन न
- 20:19कर लो, जब तक तुम मन और भावनाओं से पार न निकल जाओ, दूर चले जाओ।
- 20:37जहाँ मन और भावनाओं की ज़रा भी गंध न बचे, वहाँ तुम्हें पहुंचाना
- 20:45होगा, तब तुम्हें साहस आएगा, साहसी के पास जाओगे तो साहस आएगा।
- 20:57तुम याद सिखाती हैं तुम्हारे परुक्षण संकल्प करो।
- 21:02संकल्प करना नहीं होता। संकल्पवान पर संकल्पवान के पास
- 21:08जाना होता है। सुगंध पैदा नहीं की जा सकती।
- 21:13जिसके पास सुगंध है उसके पास जाकर बैठना होता है, फूलों से नाशिका
- 21:18लगा लो, लेकिन उसके लिए बाघ बगीचों में जाना होता है।
- 21:25फूलों के साथ नाशिका बढ़ानी होगी तो खुशबू आएगी।
- 21:32वो कृष्ण बाली भांति जानते हैं मैं कितना ही जोबानी कलामी बात कर
- 21:38रहा हूँ, बात बने हैं इसको दिखाना होगा अपना अपना होना तुम हो कौन
- 21:47और इसको दिखाना होगा कि दूसरे कौन हैं?
- 21:51और उसको तीसरी बात यह भी दिखाना होगा कि मैं कौन हूँ यह दिखाना
- 21:58होगा। अब तक तो सखा समय है, मित्र कहता
- 22:01है, तुम हैरानी की बात मानोगे? लेकिन यह सत्य है कि अर्जुन विराट
- 22:12देखने से पहले कृष्ण को एक मामूली ग्वाला समझता था।
- 22:19शिशुपाल जैसे लोग तो समझते ही थे। जरासंध जैसे लोग तो समझते ही थे।
- 22:26खुद अर्जुन इसको ग्वाला समझता था। प्रश्न तुम भी संतों को मामूली
- 22:36फकीर समझते हो इसलिए चोंक जाते हो?
- 22:41यह फ़ोन आ रहा है। मैं इसका जवाब पहले दे दूँ, इसका
- 22:45जवाब भी बड़ा जरूरी है, थोड़ी देर के लिए रुकिए, फिर मैं शुरू
- 22:50करूँगा। अगली बार बीच में से एक स्वाद ले
- 22:56लें। क्रिस्टेना एरिया।
- 23:03युग कैसे पूछती हैं? ऐसे में इस प्रश्न का जवाब देना
- 23:12नहीं चाहता था क्योंकि प्रवचन के दौरान साइलैंड पे होता है फ़ोन।
- 23:25कई बार गलती हो जाती है तो आवाज़ मुझे सुनाई पड़ जाती है।
- 23:34प्रश्न पूछा है उसने क्रिस्टीना एर्य ने, ये कैसा होता है?
- 23:41बाबा आप सब समझाते जाओगे, ये बात हमें भी समझा दी।
- 23:52हम आपसे फ़ोन पे कोई बात करते हैं, वह असंभव होते हुए भी सॉल्व
- 24:03हो जाती है। ऐसा क्या होता है थोड़ा विस्तार?
- 24:15करना चाहेंगे? हम आपके पास आकर मन्नत मान जाते
- 24:22हैं, वह पूरी हो जाती है। थोड़ा सा इसका विज्ञान बता
- 24:29पाएंगे। आपने कहा था सब बताके जाऊंगा तो
- 24:40कृपया इस अंधकार में पड़े हुए प्रश्नों को भी प्रकाशित कीजिए।
- 24:49हाल जट पॉसिबल कैसे होता है? संभव है।
- 24:58हमने फ़ोन पे आपसे कोई बात कही, हमारी शत प्रतिशत बातें पूरी होती
- 25:07है, ये क्या होता है इसका उत्तर सुनो बेटे।
- 25:18यद्यपि मैं यह बताना नहीं चाहता था, बहुत सी बातें मैं बता कर
- 25:23नहीं भी जाऊंगा और वो बातें आपके लिए उपयोगी ही नहीं होंगी, लेकिन
- 25:32यह बताना थोड़ा सा मार्गदर्शक भी हो सकता है और मेरे लिए जी का
- 25:36जिंजाल भी हो सकता है। और फिर जब 1000 2000 हिस्सों से
- 25:44आगे मैं करोड़ों में संख्या बढ़ा लूँगा, तो क्या तुम मुझे देख भी
- 25:48पाओगे? फिर तो मुझे थर के ऊपर नहीं,
- 25:55हेलिकॉप्टर के ऊपर से गुजरना होगा दर्शन देने के लिए और तुम
- 26:00हेलिकॉप्टर को ही दर्शन कर पाओगे, मुझे तो नहीं देख पाओ, इसलिए
- 26:06संख्या को मैं बढ़ाता नहीं। ज्यादा प्रश्नों को तो मैं संसार
- 26:12के सभी प्रश्नों को हल करने की क्षमता रखता है।
- 26:20मैं वो शय हूँ जो कायनात की खबर रखता है।
- 26:28मैं वो शय हूँ जो कयामत की नजर रखता हूँ।
- 26:39लेकिन तुमने पूछ ही लिया बैठे एक तुम से गुजारिश करूँगा झुंड पहले
- 26:51ही बहुत है तुम यह रच मत कर लेना, इसलिए मैं नास्तिकों को आशीष देता
- 27:02हूँ। शुक्र कुछ होई तो घटी जो मुझे
- 27:09नहीं मानते, औरों को मानते हैं उनको मैं आशीष दिया करता हूँ,
- 27:13शुक्र है मेरे पल्ले तो नहीं पड़े मुश्किल है।
- 27:22ये मनीष दांत पार्ट नहीं रहता क्या होता है सिर्फ तुमने?
- 27:38प्रथम बार? यह प्रश्न ने पूछा यह प्रश्न बहुत
- 27:40बार पूछ चूके हैं। रोहित पुष्कें हैं, मेरे चैनल
- 27:44कंट्रोलर अर्पित पुष्क हैं दो ही हैं चैनल कंट्रोलर में बा भाई ऐसा
- 27:51क्या होता है आपके सामने कोई समस्या रखती जाए, वह हैलो हो जाती
- 27:55है, तुरंत हल हो जाती है। अभी थोड़े से दिन पहले की बात है।
- 28:04कुणाल की नानी बीमार हो गई, मुझे फ़ोन आया अब कुणाल की नानी है,
- 28:17मेरी भी तुम आता हो। कि मम्मी बोल नहीं रही ना,
- 28:27रिस्पांस कर रही है। हाँ वो भी नहीं कर रही, सुनाई भी
- 28:31नहीं पड़ रहा, आँखें भी नहीं खोल रही।
- 28:34पहचान भी नहीं रही। बोल भी नहीं रही।
- 28:53तो मुझे गुटलाडा शहर में मेरे ससुराल है, वहाँ से फ़ोन आए मेरे
- 29:01सालेहार का बोले जीजा आप ऐसा करो। कोई दान पुण्य बता दो मैंने दान
- 29:22पुण्य बदल दिया लेकिन जाते जाते जो बात उसने कही।
- 29:35वह उस मालिक ने सुन ली। मैं हर वक्त उस बड़ी शक्ति के साथ
- 29:43कनेक्टेड रहता हूँ। हॉट लाइन जिसे आपकी भाषा में कह
- 29:46रहा हूँ, हर वक्त, हर पल, हर घड़ी इसीलिए कहते हैं अंत।
- 29:54सदा दिवाली सादगी आठों पहर आनंद क्यों?
- 30:00इसका वैज्ञानिक कारण मैं तुम्हें बताता हूँ क्योंकि वो आठों पहर उस
- 30:06विराट के साथ कोनेक रहते हैं, हॉट लाइन पे रहते हैं और वह कौन?
- 30:12वह आनंद का सागर ठीक समझा के आनंद के सागर के साथ चौबीसों घंटे को
- 30:25नेक्स्ट चढ़ रहे हैं ना चौबीसों घंटे दिवाली हम दिवाली मैं नहीं
- 30:29मनाई क्यों मनाऊ? जब हर रोज़ दिवाली है, दिन भी
- 30:36दिवाली है रात भी दिवाली है तो दिवाली को अलग से आप तो मनाते हो,
- 30:43आप तो इंतजार करते हो, कब पटाके फोड़ेंगे।
- 30:50बस आपका शोक महज है। इन छोटी छोटी शुद्र कामों में
- 30:54आनंद लेने का है। अंतरंग घड़ियों में चले जाओ,
- 30:58संभोग कर लो अच्छी अच्छी सुंदर सी स्त्री पुरुष देख लो, इसमें ही
- 31:04आनंद लेने में आपका जीवन गुजर जाता है।
- 31:09लेकिन संत सच्चा संत गुफाएं नहीं बनाता।
- 31:17सच्चा संत अपने भीतर उतर कर उसका मज़ा उठाता है और उससे बड़ा मज़ा
- 31:24संसार के किसी भी जगाने। ढिठ्य सभ्य था, नहीं तो दिजे है
- 31:32आप उस विराट आनंद के समुद्र के साथ हर वक्त हॉट लाइन पे रहता हूँ
- 31:39मैं उसका सूच्य मैंने आपसे कहा मैं तल बदलता हूँ, हर संत तल
- 31:47बदलता है। रामकृष्णा कभी कहते हैं हे माँ
- 31:54केशव को ठीक कर दें तो मैं ढ़ाई आने का प्रशाद बढ़ूंगा और वहीं
- 32:02रामकृष्णा जब उस स्थल पर पहुंचते हैं।
- 32:05तो कहते हैं जो राम और जो कशन वो अकेला राम कृष्ण चल बदलने की बात
- 32:12है, कोई अहंकार नहीं आ गया है। चल बदल लिया है।
- 32:17जैसे साधारण बंदा प्राइम मिनिस्टर की कुर्सी राष्ट्रपति की कुर्सी
- 32:21में बैठ जाए, बस ऐसा है। तो जाते जाते उसने एक बात कही,
- 32:35शायद वो भी जानती हो, बस मेरी इच्छा थी कि अपनी चौथी पीढ़ी के
- 32:44दर्शन कर ले। बहू गर्भवती थी, चौथी पीढ़ी के
- 32:55दर्शन कर रहे हो? सांसारी का मान्यता है अगर कोई
- 33:04चौथी पीढ़ी के दर्शन कर रहे हो तो उसको सोने की पुढ़ी लग गई।
- 33:12इस संसार की मान्यता है, लेकिन मेरा बात तो ध्यान है।
- 33:21ओह ये तो स्विच ऑन रह गया, बात बाबा नहीं समझी बाबा मुस्कराये।
- 33:34बाबा मुझे कहते हैं हर वक्त इतनी मद होसी में ना रहा करो मैं के
- 33:42बाबा मैं क्या करूँ? भूल जाता हूँ बीच में से फ़ोन आ
- 33:46जाता है। बाबा कहते थे अब मैंने सुन लिया,
- 33:55तुम मुझे मत नहीं न सुनाया करो, सबसे पहले इतना होश तो रखो।
- 34:04मैं तो उसी के आलम मैं इतना को ना जाया करूँ ये बटन को ऑन ऑफ करना
- 34:11भी भूल जाओ। अब आपकी भाषा में समझा दो।
- 34:16इस लिमिटेड का ये ढांचा है इस लिमिटेड का लिमिट लेस के साथ।
- 34:28हर वक्त होट लाइन में कनेक्शन रहता है।
- 34:33हर वक्त ये कहावत आपने बहुत बार सुनी होगी, लेकिन इसका अर्थ जाना
- 34:40नहीं होगा और किसी ने बताया नहीं होगा।
- 34:43लेकिन आज तुमने पूछ लिया तो मैंने बता दिया श्रद्धा, दिवाली, सादगी
- 34:50और आठों पहर आनंद सोए जगते, उठते, बैठते, बोलते चलते इसलिए इतना
- 34:59आनंद है कि उठने का भाई मन नहीं करता।
- 35:04बिलकुल सीधा सोचता हूँ बिलकुल स्ट्रिक्ट और कमर की बात है कि आप
- 35:12ज़रा भी जीस दिशा में अपराध को फोटो खींच लेना सुबह जब उठाना हूँ
- 35:19थोड़ा सा लेके उठता हूँ। कई बार तो 10 भी बचा था।
- 35:24ब्रह्म मुहूर्त वगैरह की मैं फिकर नहीं करता।
- 35:26ब्रह्म मुहूर्त मेरा फिकर करें, मैं क्यों करूँ उसका फिकर सूरज कब
- 35:34निकला? मैं निकले।
- 35:38सूरज मेरी फिक्र करें, मैं सूरज की फिक्र क्यों करूँ?
- 35:47लिमिटेड लिमिट लेस के कनेक्शन में चौबीसों घंटे होटल लाइन में रखना।
- 36:01मेरे पास जब शिक्षा लेने तुम आते हो, अब देखिए मैं आपसे एक वचन
- 36:14लेता हूँ वचन नहीं बस वचन तो फिर आप बंक कर दोगे वचन बंक करना
- 36:21तुम्हे आता है अज़म इकट्ठा कर लोगे लेकिन अज़म इकट्ठा मत करना।
- 36:33अभी बातों को ही सुन सुन के बड़े लोग अपने धर्मों को छोड़ने को
- 36:39उचित हो गए। बाबा हमें अपना हो गया, कहता हूँ
- 36:46भाई मुझ पे रहम करो। 13 वर्षों से अन्न तक नहीं खाया।
- 36:52और तुम आके 1 दिन 2 दिन 5 दिन 10 दिन खुराक तो देखोगे तुम स्थगित
- 36:59हो जाओगे, मैं जिंदा कैसे हूँ? ये ढांचा चल कैसी रहा है?
- 37:12लेकिन सृष्टि को जिसने बनाया, उस सृष्टि को चला भी रहा है।
- 37:22यद्यपि तुम कितना ही गुमान पालो कि तुम चला रहे हो अपनी सृष्टि
- 37:29को, लेकिन तुम चला नहीं सकते। तुम इतना बल कहाँ हो तुम निर्बल
- 37:40ही नहीं तुम बल ही न हो तुम में ज़रा भी पलना तो मैं हर वक्त होटल
- 37:52लाइन पे रहता हूँ जब दीक्षा देता हूँ।
- 37:55तब अपने बटन को ऑन ऑफ करता रहता हूँ।
- 38:00दीक्षा देते वक्त आपने ज्ञान किया होगा कि मैं एक विशेष अंगूठी के
- 38:14संपर्क में रहता हूँ। वह विशेष अंगूठी से संबंध है।
- 38:26जब मैं आपके माथे पर हाथ लगाऊंगा तो सीधा खबर जाएगी।
- 38:31सीधी सीधी बाबा के पास तुम दीक्षित हुए और तुम्हारी
- 38:38जिम्मेवारी उसने ओठ ली। अन्नन्यास चिन्हितित तो माँम जी
- 38:42जनह परिपात से तैशाम नृत्य भुगतानम योग्य सेवाम उसका योग्य
- 38:48सेवाम उसका वहन मैं करूँगा भार में उठा लिया तुम निश्चिंत हो जाओ
- 38:54उस वक्त। लेकिन अगर उसके बाद भी कोई
- 39:00व्यक्ति ये कहे के तुम्हारे अंगूठा लगाने से हम मुक्त हो गए,
- 39:05ये मान ही कैसे भीतर उतरती? नहीं बात तो फिर उसे मैं यही
- 39:11कहूँगा कि मेरे पास ना ना किसी और गुरु की खोज कर लेना।
- 39:17आप पाओगे यूट्यूब चैनल पर एक ईंट उड़ोगे और 10 गुरु मेरे किसी को
- 39:30भी चुन लो, यह मैंने बुलाया नहीं। फिर भी तुम चले आये और फिर शंका
- 39:40लेके चले आये यह तो कृतघन जैसा पाप हो गया तो फिर आते ही ना
- 39:47मैंने कब बुलाया? ऐसे दृश्य भी मिलते हैं।
- 40:00दीक्षा देते वक्त मैं ऑन ऑफ बटन को कर लेता हूँ और मैं ही जानता
- 40:05हूँ कैसे करना होता। है।
- 40:15जहाँ पर हमारे पास पास के ही गांव में एक संत थे, वो संत उस अवस्था
- 40:26को पहुँच गए थे, मैं उन्हें देखने गया था बहुत बचपन की बात है।
- 40:32गदड़ भाग के बिल्कुल थोड़े से पास ही ज़्यादा दुख नहीं है।
- 40:35सेबिया नाम का ही काम और उस गांव में वह व्यक्ति एनलाइटन हो गया।
- 40:51एनलाइटन हो गया तो क्या करता? बस वैसा ही पड़ा रहता अमोआधे की
- 40:59तरह। जब दुनिया को पता चल जाता है तो
- 41:08संतो को बहुत कुशक तैयार करना पड़ता है तो लोग आते केस ने 48
- 41:18घंटे से कुछ खाया ही नहीं। आते ही चार गर्म गर्म फूल के रख
- 41:24जाते हो। ऊपर सभी भाग जाते।
- 41:28और वह उन्हें गालियाँ निकालता, बुरी बुरी गालियाँ निकालता।
- 41:37आप इस कहानी की सिंचाई को पता कर सकते हो?
- 41:42शायद अब वो नहीं रहे होंगे। मेरे ख्याल में मैंने पता लिया
- 41:46नहीं। मैं भी चला गया मेरा चेचयजान छोटे
- 41:58वाले चेचयजान से बड़े पांच भाई थे, मेरे पिताजी से छोटे से छोटे
- 42:08तीसरे नंबर वार्ड है। वो सट्टा वगैरह लगाने का काम करते
- 42:16थे। होता है ना?
- 42:16एक से लेकर 100 तक लगा देंगे, 100 गुना मिलेंगे।
- 42:25वो काम करता था। तो मेरे चाचा कहने लगे विजय हम
- 42:37संत के दर्शन करने जाना है से भी हम संत है या नहीं?
- 42:45कोई ज्यादा बड़ी उम्र का नहीं था, ठीक से उम्र का था।
- 42:51यही कोई 1517 वर्ष का 15 वर्ष का ऐसे ही था।
- 42:58मैंने कहा जैसे ही चलो कहाँ है वो उपासी है बस गए और आए चलो हम चलते
- 43:07रहे। वहाँ पहुँच गए, कोई रास्ते में
- 43:13व्हीकल मिल गया, चांगा वगैरह। परसों बार मैंने एनलाइटन परसों का
- 43:24दर्शन किया। परसों बार जिंदगी में बाल बिखरे
- 43:31हुए अल्बर्ट आइंस्टाइन की तरह। चेहरे पर झुर्रियां उम्र भी काफी
- 43:37हो गई होगी। उसके पास पत्थर रखे थे।
- 43:44दूर दूर से मारता, गाली निकालता लोग उससे सट्टा पूजने आते नंबर।
- 43:55वह गाड़ी निकालता क्या करे? बेचारा लोगों को लो तो हम भी चले
- 44:08गए। चर्चा ने दूर से हाथ जोड़े मैं
- 44:21बच्चा था इतना पता नहीं था शिष्टाचार का मैंने भाई आज जोड़
- 44:24लिया चाचा जाके उसके पांव को हाथ लगाए, पांव को हाथ न लगाने दो, हट
- 44:38जाओ, दूर हट जाओ। वो डरते से सभी पत्थरे और मारेगा
- 44:43बोबरा फोड़ देगा उसको देखादेख के मुझे चेचार कहने लगे।
- 44:54यह सिद्ध संत है, इसके चरण स्पष्ट है।
- 45:02मैं बच्चा ही था, अभी किशोर हुआ नहीं था, मैंने उसके चरणों के हाथ
- 45:07लगाए, उसने लगाने दे दिया। दूर खड़े लोग देख रहे थे।
- 45:16उसने इशारा करके मुझे ऐसे बुलाया पास।
- 45:22मैं उसके पास चला गया उससे। पहले मैं सट्टा वगैरह का नाम नहीं
- 45:30जान सकता। मेरे कान में वो कहने लगा।
- 45:36सात मुंडा लगा ले मुझे मुंडा कुड़ी का कोई पसंद अरे तुम मत लगा
- 45:49लेना, मैं उसकी बात नहीं रहा। मुझे कहते साथ मुंडा लगा ले अब
- 45:59मुझे समझ में कोई आया नहीं, लेकिन अक्सर तो मैंने सुन लिए।
- 46:04चलो मैं चला गया, अब सफ़ेद ने बुलाया और मैंने कान पास किया,
- 46:09धीरे से कुछ बताया तब ठीक से सुनाई पड़ता था।
- 46:14अब तो बहुत ऊंचा बोलना पड़ता। घिस गए हैं सारे तन्तु तू मेरे को
- 46:29हँस गया तो चेचा मेरे पास चला गया बाहर चले गया तंगा पे बैठ गए तो
- 46:36चेचा बोले क्या कहा तुम्हें? मैंने कहा चाचा मेरे को पता तो है
- 46:43नहीं कुछ मुंडा कुड़ीसा का सर हमारे पंजाबी में लड़की को कुड़ी
- 46:48कहते हैं लड़के को मुंडा कहते हैं कहते फिर भी कुछ तो बोल रहा होगा?
- 47:00ये पढ़ाई तो मैंने की थी नमरायली जो तो मैं जानता था अक्षर मैंने
- 47:04कहा वो कहते सात मुंडा लगा ली अब ये शब्द बोला समझो मेरे तो आये है
- 47:14तो चाचा के चेहरे पे मुस्करा हटा के खैर चला कहता बस ठीक।
- 47:20इतना ही काफी है। अगले दिन मुझे मिठाई खिला के गया,
- 47:31लोगों को मिठाई बांटे। मंदिर में जाके प्रथा से खिला के
- 47:36आया आते जाते वो मिठाई का डब्बा दिया कि बाबा को दे आना शिरडी
- 47:42वहाँ पर जाके। मैंने कहा जी क्या होता है ये ये
- 47:52क्या हुआ तुम्हे? ये तो बात ये है मुझे ये नंबर
- 47:58होते हैं 100 100 तक और यहाँ तो मिलते हैं शत्रुगण बाहर मिलते हैं
- 48:06श्रीगंगानगर वगैरह 100 गुण। यार तुम्हें नम्बर बताया था उसने
- 48:11100 में से एक सैंटना होता है, मतलब उसने चांट लिया, किसान चांट
- 48:14से क्या कुमार का बनता है, क्या हम भी ऐसा बन सकते हैं?
- 48:25जैसा कहते हैं, बिल्कुल बन सकते हैं।
- 48:27तपस्या करो, खूब जप किया करो, भगवान का नाम लिया करो।
- 48:32मैं एक अच्छा यहाँ से शुरुआत हुई से ब्याह कर संत आज भी उनकी
- 48:40हिस्टरी लोगों को मालूम होगा और मुझे ये भी नहीं पता।
- 48:44कि वह मर गया ही है, शरीर उसका विलीन हो गया है।
- 48:48जमीन तो कहता है सात मुंडा लगा लो मैं तो मजाक, मैं तो मुंडा शब्द
- 48:58सुनती, खूब ऐसा बच्चों की तरह खिलखिला ये क्या होता है मुंडा?
- 49:04तू सीधा कह साथ नंबर लगा ले। वैसे ये भाषा होती है हमारी हर
- 49:12वक्त 24 घंटे कनेक्शन में रहता हूँ यह शुद्र उस विराट लिमिटेड।
- 49:22लिमिटलेस के साथ एकागार रहना है इसलिए हर वक्त दिवाली रहती है।
- 49:28आनंद की तुम्हें कुछ पल के लिए जब कुछ विशेष क्षणों में उतरते हो तो
- 49:35तुम्हारे लिए दिवाली हो जाती है, जबकि तुम उस दिवाली में बहुत कुछ
- 49:39खो देते हो। लेकिन यहाँ दिवाली ऐसी के खोना
- 49:44कुछ भी नहीं पाना सब है। नथ्थिंग टु लूज़, बट टु गेट, ओवर
- 49:54विथ थिंग गंवाना कुछ भी नहीं पाना सब है।
- 50:09और जब तुम यहाँ आते हो उस वक्त मैं एक विशेष नेत्र से निहार रहा
- 50:20हूँ तुम्हारे अंतर को देख रहा हूँ।
- 50:27ऐसा कहना भी उचित नहीं होगा। अगर ठीक से समझाऊं तो समझाया नहीं
- 50:31जाएगा। शब्द प्रयोग नहीं होते, देख रहा
- 50:36होता हूँ ऐसा नहीं हूँ दिख रहा होता है ऐसा है कुछ अभी भी बुरा
- 50:42नहीं बोल पाया दिख रहा होता है कि तुम क्या?
- 50:46भीतर मन्नत मांग है और क्योंकि मैं स्विच को ऑन कर देता हूँ, तुम
- 51:00उधर ये मत सोचना मैं जितना तुम्हें जड़ मालूम पड़ूँगा बुद्ध
- 51:07की तरह उतना ही चेतन होगा। मैं सब देख रहा हूँ।
- 51:15जब तुम मन्नत मांगते हो तब मैं बटन को ऑन कर देता हूँ तो क्या
- 51:24हुआ मैं हट गया। बीच में से तुम्हारा सीधा संपर्क
- 51:27शिव के साथ होगा। तुम कहते हो कि शिव के साथ संपर्क
- 51:31कब होगा? ये ऐसे हो जाता है तुम्हारा जब
- 51:34तुम मन्नत मांगते हो तो मैं स्विच को ऑन कर देता हूँ।
- 51:37सीधा संपर्क सेव से तुम्हारा हो जाता है।
- 51:40बहुत सी घड़ियों में तुम्हारा संपर्क सेव से हुआ होगा तो
- 51:44तुम्हें पता नहीं होगा और मैंने स्विच ऑन कर दिया।
- 51:48और तुम्हारा शिव से संपर्क हो गया, उस घड़ी तुमने जो भी सोचा वह
- 51:54पूर्ण हो ही जाएगा बिल्कुल हो जाएगा कोई गुंजाइश शक नहीं है।
- 52:07बहुत बार तो ऐसा होता है घर के बाहर खड़े हुए लोग जो ज्यादा
- 52:14समझदार हैं, भीतर प्रवेश नहीं मिलता, बाहर खड़े हुए लोग हाथ
- 52:20जोड़ के। क्योंकि दायरा बड़ा लम्बा होता
- 52:22है, उस वक्त तो दायरा बहुत होता है।
- 52:28वहाँ पर ही हाथ जोड़कर श्रद्धा भाव से नमन।
- 52:32ये ख्याल में रखना श्रद्धयान चित्र अगर शंकाम चित्र रखोगे तो
- 52:39फिर? तो इसलिए मैं ऐसे व्यक्तियों को
- 52:44जो कहते हैं हमें हमारे गले के नीचे नहीं उतरता कि आप अंगूठा रख
- 52:50लेते हो तो खुद का ही गंवाया यहाँ आए भी कुछ पाती भी ना गए बस मैं।
- 53:01बाज ही नहीं करूँगा सरपता रथ है जग माँ सगला पता रथ है जग।
- 53:26न न र पा वथ सगल पदार्थ हैं जगम। भाग्यहीन नर पावत नहीं देखे, कुंए
- 53:41के पाशा के व्यक्ति के आशा चला जाए ये हमारी बदनसीबी, जो नहीं और
- 53:50क्या हाथ भी लगाया अंगूठा भी लगाया।
- 53:58और भीतर का राज़ बाहर आ ही गया, आ ही जाता है।
- 54:04शब्द से कब तक छुपा पाओगे? नहीं छुपाया जाएगा कितना भी
- 54:10छुपाने की चेस्ट करो, क्योंकि वह शर्म भी आपकी है।
- 54:14कण कण में व्रत है उसका ईशा वस्त्र में गम सर्वम यथ किन चीज़
- 54:20जगती आम जगत कण कण में है राज़ तुम्हारा तो कैसे पूरी हो जाती है
- 54:35अरिया? क्योंकि तुम कितनी दूर बैठी हो
- 54:40मैं जानता हूँ, लेकिन तुम ये नहीं जानती कि मेरा फैलाव कितना दूर
- 54:46है। तुम तो इस गृह पे हो, मैं तो अनंत
- 54:52भ्रमण में समया हुआ होता तो हूँ? जीसको तुम सोच भी नहीं सकते, उसका
- 55:07मेजरमेंट नापना तो बहुत दूर गणना ही करना भी पड़ा।
- 55:12असंभव है। तुम वहाँ भी बैठे अगर सोच लोगे।
- 55:22तो पूर्ण हो जाएगा वह बात मेरे ससुराल से उसने कहा कि चौथी पीढ़ी
- 55:35देख लेती ज्यादा अच्छी। बटन ऑन रहेगा।
- 55:45मैंने जान बूझ के नहीं किया, मैं समझ गया मैंने फ़ोन रख दिया, काट
- 55:54दिया। आज सुबह खबर आई आज ही सुबह खबर आई
- 56:04कि चौथी पीढ़ी का जन्म हो गया। यानी के कुणाल का मामा क्या बन
- 56:26गया? दादा पुत्र हुआ उनके।
- 56:37मैंने आपको बहुत बार कहा ये सारा यूनिवर्स एक महीना बंधन में बंधा
- 56:42हुआ है, गोथा हुआ है। प्रभु जी ने ऐसी कायनात बंधी।
- 56:56प्रभु जी ने ऐसी कायनात बांधी, 1 दिन के पीछे एक रात बांधी साथ साथ
- 57:09बांधी प्रभु जी ने। ऐसी काय?
- 57:14नात गाँधी 1 दिन के पीछे एक रात गाँधी साथ साथ गाँधी जैसे माला
- 57:28में धागा परोरा होता है, तुम्हे धागा दिखता है।
- 57:33ऐसे ही ये सरह का इनाद सजना मेरे ही धागे से ओतप्रोत गुत्थी हुई
- 57:43है। ज़रा भी दरोद्र नहीं हो सकती और
- 57:48हर कन में। हर घरे में मैं ही इसलिए संत कहता
- 58:02हूँ जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तू है, ये दर्शन है या खोपड़ी की बात
- 58:08में जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तू है।
- 58:14हर झरने में तो भीत और पर्व है। ये है सारी साइंटिफिक प्रोसेसर
- 58:26अल्केमी रसायनिक विज्ञान इसका भीतर का है इस सारे प्रमंड में।
- 58:38एक ही तत्व में समाया हुआ ये सारा भ्रमण का तारा गह नक्षत्र दादी की
- 58:50तरह बंधे हुए हैं मेरे माला में। ज़रा भी कुछ ही धरोधर नहीं होता
- 59:01क्योंकि संभालने वाला मैं हर जगह मौजूद हूँ।
- 59:05नहीं तो अगर एक पल के लिए मैं अपना साक्षी तो खो दूंगा, वही
- 59:12साक्षी होना आपको सखाता हूँ। एक फल के लिए मैं अपना साक्ष्य तो
- 59:18खो दूं कि दुनिया बिखर जाएगा। ये चाँद तारे मोतियों की तरह बिखर
- 59:23गई है। माल टूट गई है।
- 59:30माला मन के बिखर गए। 2 दिन रहकर साथ न जाने किधर गए तू
- 59:46गई है माला मन के भी कर गए। 2 दिन रहकर सा न जाने किधर गए पता
- 1:00:01नहीं चलेगा कहाँ गया सूर्य धरती में समा जाएगा, धरती मंगल में समा
- 1:00:08जाएगा। सब एक अव्वल लगते ही आँख झपकते ही
- 1:00:13सब इसे ही विनाश करते हैं। इसे ही कहते हैं।
- 1:00:22बस दादी की थोड़ी सी चीज़ तोड़नी होती है और दादी का एक।
- 1:00:28सीरा मैंने तोड़ दिया कहीं से भी तोड़ दिया क्षण भर में उसी क्षण
- 1:00:36टूट जाएंगे सब मेरा बिखर जाएंगे सब मोती ध्वस्त हो जाएगा सब कुछ।
- 1:00:48बेटी आरिया तुमने कहा कैसा पूरा हो जाता?
- 1:00:54मैंने तुम्हें सारा बेहतर का प्रोसेसर बता दिया।
- 1:00:59साइंटिफिक प्रोसेसर पूरा समझा नहीं पर यक्षी।
- 1:01:04समझा पाऊंगा भी नहीं, ये भी ठीक है और कोई समझा पाएगा भी नहीं, ये
- 1:01:11तो नहीं समझा पाएगा ये पक्का इस तरह से जब मेरे करीब।
- 1:01:26उस घड़ी में जब मेरा स्विच ऑन होता है, मैं हॉट लाइन पर उस अखिल
- 1:01:38विश्व का जो सर्व आत्मा है, उस परमात्मा के संग एक आकार।
- 1:01:46कनेक्शन मैं होता हूँ कैसे तुम्हारे घर का फूसे थर्मल प्लांट
- 1:01:51से कहीं ना कहीं जाके कनेक्ट हो जाता है और बिजली तो थर्मल से ही
- 1:01:57आती है बस रास्तों में से गुजरती गुजरती हुई।
- 1:02:04पावर स्टेशन से होती हुई फिर तुम्हारे घर तक पहुँच जाता है।
- 1:02:10ऐसे ही मैं उस विद्युत के पावर सेंटर तक पहुँच जाता हूँ जो आनंद
- 1:02:17का स्वरूप है जो आनंद का सागर है। इसलिए 2400 घंटे हैं।
- 1:02:26तुम भी इसी आनंद में आ जाओ, भटकते न फिरो थोड़ा सा मेरी बातों की
- 1:02:34गहराई को सुनो। मेरे भीतर से उठती हुई वो आनंद का
- 1:02:39कम्पन तुम्हें आनंद विभोर नहीं कर देता।
- 1:02:47तुम भी ऐसे हो सकते हो मेरी इस सर्वस्वता को पूजा मत करो मेरे
- 1:03:00जैसे होने की चेष्टा करो। इसने बहुत कोशिश की।
- 1:03:13बड़ी तरफ़ से मैंने हर डायमेंशन से मारी इन मान्यताओं को तोड़ने
- 1:03:18की चेष्टा की। कैसे ये पोस्टर द्विवार्षिक हटा
- 1:03:23दूँ? तुम्हारी चिपकाहटों को हटा दो,
- 1:03:26कैसे इस पोस्ट को उखाड़ लूँ, दीवार से तो ये मुक्त हो जाए
- 1:03:33लेकिन तुम हो ये गालियां निकाल नहीं, तुम हो मुझे गालियों से कोई
- 1:03:40फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरी माता है ही नहीं।
- 1:03:45शरीर की माता मर गई लेकिन मैंने कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी।
- 1:03:53बाबा ने मुझे आज्ञा दी थी मैंने अपना धर्म समझकर वो पालना की।
- 1:04:01और उससे कहीं ज्यादा पालना की अभी पीछे 1520 दिन पहले वो 22 के 22
- 1:04:07लोग आए जो पहले दिन मुझे जगा कर गए थे।
- 1:04:11ये कर्तव्य निहित करके गए थे ये काम तुमने करना है।
- 1:04:16मैंने कहा किसी और को सौंप दो, मुझे भी लेने दो।
- 1:04:23ऐसी पी है के उतरती ही नहीं है। ऐसी पी है के और पीने का दिल करता
- 1:04:29है और संतों ने आँखों में आंसू भर लिए कहते तो औरों को मिलाना नहीं
- 1:04:39चाहते क्या? बस मैं द्रवित हो गया।
- 1:04:44संत हर्दा है न बनी तो समाना मैंने कहा ठीक आपकी आज्ञा सिर्फ
- 1:04:53धार्य पर मैंने बोलना शुरू कर दिया।
- 1:04:58और अभी जब मेरा दृढ़ सम्पूर्ण हुआ उसके बाद ही मैं बोल रहा हूँ वो
- 1:05:08सभी लोग मुझे धन्यवाद देने आए थे जीसको तुम कहते हो वो भी संगत है।
- 1:05:19जीसको ये कहता है व्यक्ति के मैंने जन्म ले लिया।
- 1:05:22ओशो का ये झू धन्यवाद देने के लिए खुद ओशो का और ओशो की सभी कमियां
- 1:05:32उसको ने बताईं। इसीलिए मैं तुम्हें बोलता हूँ।
- 1:05:38अगर जहाँ ठीक वहाँ ठीक जहाँ गलत वहाँ कहता हूँ कि यह गलती कर गया,
- 1:05:42इसने खुद बताया, मैं गलती कर गया, मैंने एक कम्यून बनाया, तुम
- 1:05:48कम्यून मत बना लेना नेवश को ही शब्द थे सभी धन्यवाद देने के लिए
- 1:05:57उसी दिन। सभी उपस्थित हुए थे।
- 1:05:59बहुत हुआ हम आभारी हैं आपके ये मानवता जन्मो जन्मो तक जन्मो तक
- 1:06:08अनंतकाल तक प्रलयकाल तक आपकी आभारी बेटी जीस सरलता से सहज भाव
- 1:06:17से। जीस जगह जो चीज़ प्रयोग की जा
- 1:06:20सकती थी आपने वही की जहाँ निंदा करनी, निंदा करनी जहाँ गुस्सा
- 1:06:25करना, गुस्सा करना, यहाँ शांति करना, शांति करना ये जैसे तन आपने
- 1:06:30बदले सर्वश्रेष्ठता से उसके हम काहे।
- 1:06:36तो मैं बड़ी कोशिश करता हूँ कि कैसे आपका ये लगा हुआ पोस्टर
- 1:06:42दीवार से मुक्त हो जाए। ये तुमने ही लगाया है फेब्री कॉल
- 1:06:48ये मान्यताएँ तुम्हारी ही हैं। किसी और ने ठोकी नहीं।
- 1:06:55या तुमने ठपवाई नहीं जानबूझकर बहुत कोशिशों की मगर दिल ना बहला।
- 1:07:15बहुत कोशिशों की मगर दिल ना फैला कई राग छेड़े।
- 1:07:32खाई देख गाय जब याद आए बहुत याद आया।
- 1:07:53गमे ज़िन्दगी के अंधेरे में अने चिराग मोहब्बत?
- 1:08:07जलाये बजाएं और जब याद आए अब तो याद हर डाइमेंशन से।
- 1:08:26हर दिशा से मैंने तुम्हें समझाने की चुष्टा गरमाई से, सस्ताई से,
- 1:08:33क्रोध से, व्यंग्य से मैंने अपनी सभी कलाएं प्रयोग कर किसी तरह
- 1:08:43तुम्हारी। यह थोपी हुई मान्यता टूट जाए,
- 1:08:49क्योंकि यही तो हो रहे हैं यही तो बंधने और कोई बंधन दिखाओ।
- 1:08:53अगर है तो कोई फौलाज कोई लोहे की जंजीरों का बंधन तुम पे है नहीं।
- 1:09:02तुम्हारी ही मान्यताएँ तुम्हारे ऊपर बंधन बन गई।
- 1:09:06तोड़ फेंको ही नहीं या फिर अगर तोड़ फेंकने का दम नहीं तुम्हें
- 1:09:12तो गुरु की शरण में आ जाओ। गुरु इसको झपट्टा मार के छने लगा।
- 1:09:21और तुम्हारा पोस्ट में उखड़ जाएगा।
- 1:09:24तुम छीन लेने दो उसे बस इसे ही समर्पण करते, ये तो थे समर्पण के
- 1:09:34कर्मकांड कोई कामना है? गुरु तुम्हारी मान्यताओं को
- 1:09:39तोड़ेगा और हम जगह जगह पे थे। हर तरफ से मैं कोशिश करता हूँ
- 1:09:45किसी राजनेता के साथ तो हुई है नहीं इन चिपक गया है किसी गुरु के
- 1:09:49साथ तो नहीं चिपक गया किसी रिश्ते के साथ रिश्तेदार के साथ किसी
- 1:09:54मित्र के साथ परिवार के साथ किसी देश के साथ।
- 1:09:59बहुत समानताएं तुम्हारी हो सकती हैं।
- 1:10:01बहुत इच्छा काटी तुम्हारी हो सकती हैं जापान के एक व्यक्ति का मेरे
- 1:10:12पास फ़ोन आ गया। मैंने कहा जापान में जापान तुम
- 1:10:22प्रचम व्यक्ति हो, मैंने कहा। जापान में तो बौद्ध धर्म भी शायद
- 1:10:33ही जलता है। इसलिए सारी ऊर्जा उत्पत्ति में लग
- 1:10:41जाती है। तुम भौतिक रूप से समृद्ध हो सकते
- 1:10:45हो। 100 मंजिला छोड़ो 1000 मंजिला भी
- 1:10:49बना सकते हो। 45 में आइटम बम कराया गया।
- 1:10:54आज फिर से खुशहाल मुल्क है जापान कारण कारणों का।
- 1:11:05अब परमात्मा, परमात्मा, धर्म, जाति वगैरह के चक्कर में पड़ता ही
- 1:11:09है। क्या करना है इन चीजों का?
- 1:11:14थोपनाओं का क्या करना समझदार? तो उसका मेरे पास फ़ोन आया बाबा
- 1:11:28जापानी से बोल रहा हूँ प्रथम बार में चौंका।
- 1:11:32मैंने कहा आज तक मेरे पास किसी ज़पानी का फ़ोन नहीं आया।
- 1:11:40तुम्हारी बातों से बड़ा प्रभावित हूँ हिंदी जानते हो?
- 1:11:47ऑप्शनल लैंग्वेज के रूप में मैंने हिंदी को पढ़ा, अच्छी लगी, सरल
- 1:11:51भाषा एक्यूरेट तुम्हारी भाषा को तुम्हारी भावनाओं को, तुम्हारे
- 1:12:01अंदा को मैं समझता हूँ। मुझे क्या करना होगा?
- 1:12:08अब उस स्थल पे पहुंचना हो। मैंने कहा पुत्र तुम्हें तो एक ही
- 1:12:15काम करना होगा, कहता क्या करना होगा?
- 1:12:20अब तुम लोग देश के साथ बहुत चिपटे हुए हो।
- 1:12:26हाँ। देश को उस तत्व से भी पहले रखते
- 1:12:34हो। बिल्कुल ठीक कहा आपने, मैंने कहा
- 1:12:40इसको उखाड़ने को। उसका बाद में फ़ोन आया, कहता मैं
- 1:12:45थर्राया, 2 घंटे तक थर्राया, बाबा ने कहते दिया देश से 999 नॉट ऐट
- 1:12:52ऑल। मैंने कहा जो चपकाहट जैसी होती है
- 1:12:59वो चपकाहट को वैसे ही तोड़ना होता है।
- 1:13:03अब तुम मुक्त होना चाहते हो तो फिर मुक्त अच्छाई से भी तो होना
- 1:13:07पड़ेगा मानो देश का हित बहुत अच्छा है, लेकिन मैं तुम्हें एक
- 1:13:18सुझाव दूँ, बोलो? मैंने कहा कितना अच्छा हो अगर
- 1:13:24वसुध है कुटुंबकम, सारी वसुधा ही एक कुटुंब हो जाए।
- 1:13:30तुमने क्यों बांटा? राज़ करने के लिए तुमने बाट दिया?
- 1:13:35तुम लोगों को भी बाँट रहे हो जाती पाती धर्म स्पर्धा।
- 1:13:40और तुमने देशों के भू भागों को भी बांट दिया यह बांटने की सारी
- 1:13:46सियासत तुम्हारे राज़ करने की और राज़ जिसे तुम कहते हो वो राज़ है
- 1:13:51राज़ तो संत करता है सर उसका अपने इंद्रों पर भी राज़ होता है।
- 1:13:57मजाक कोई इंद्री उसकी इच्छा के बिना ठनक जाए, उसकी इच्छा के बिना
- 1:14:05कुछ नहीं। उसकी इन्द्रियां नहीं चल पाती।
- 1:14:09वो अपनी इन्द्रियों को चलाता है, वह इन्द्र होता है।
- 1:14:15भेदों में जीस इंद्र का जिक्र किया गया।
- 1:14:17वो यही इंद्र है जिसने अपनी इंद्रियों को जीत लिया।
- 1:14:20जिसकी इंद्रियां उसके कहें के बीच में हैं, जहाँ कहता है रुक जा
- 1:14:26स्टक तो स्टक रुक जाती हैं जहाँ वो कहते हैं कि चलो वो चलती हैं।
- 1:14:35इसे कहते है इंद्र तुम जीस इंद्र भगवान को मोर मुकुट लगा के मुकुट
- 1:14:40लगा के स्वर्ण का और काल्पनिक को स्वर्ग बना के।
- 1:14:49वहाँ पर तुम गद्दी नशीं कर देते हो वह इंद्र जैसा कुछ है नहीं।
- 1:14:54तुम्हारी कल्पना के सिवा इंद्र ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी इंद्रियों
- 1:15:02को अपने कंट्रोल में उसके कहें से इंद्रियां चलती है।
- 1:15:06मैंने देखा बहुत से व्यक्ति मेरे पास बैठे हैं, पांव मिलाते रहते
- 1:15:09हैं। मैंने कहा दौड़ रहे हो क्या कहते
- 1:15:13नहीं, तेरे पांव क्यों हिल रहे हैं वो इतने बेसुरते हैं कि बैठे
- 1:15:22हैं कुर्सी पे पांव हिला रहे हो? मैंने कहा ये कोई मेरा तो नहीं,
- 1:15:31फिर पांव क्यों हिल रहा है तुम्हारी अंतरिया तुम्हारे वश में
- 1:15:36है कोई चबर चबर जुबान छुपा रहा है बिना बात के बोले जा रहे है
- 1:15:45सड़कों पर चलाओ। घूंसे मुँह के चला रहा है कहीं
- 1:15:53पान कोई जला देता है, कहीं धड़क से गिर में पड़ता है, झुकना चुरा
- 1:15:57लेते हैं, अपने में बातें कर रहे हो वहाँ जाके ऐसे करूँगा ऐसे
- 1:16:03करूँगा। झगड़ा करूँगा अगर उसने ऐसा कह
- 1:16:06दिया तो मैं ऐसा करूँगा। प्लानिंग चलती है सब सारी दुनिया
- 1:16:12पागलपन के कगार पे खड़ी है। मैंने छपाने से कहा देश प्रेम यह
- 1:16:20तुम्हारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत है।
- 1:16:23और सब चले जाएंगे। जापानी नहीं पहुँच पाएगा इतना
- 1:16:29खतरनाक रूप से देशप्रेम अगर कोई उखाड़ो तो उसका गला दबोचने पे आ
- 1:16:41जाते हैं। तुम उसे कहोगे देशवर्ती मैं इसे
- 1:16:47कहूंगा आत्मप्रवंचना जिसने वो है एक नहीं देखा जिसके भीतर कोई
- 1:16:59दराज़ नहीं, कोई लकीर नहीं। कोई भू भाग नहीं, कोई विखंडन
- 1:17:04नहीं, कोई विघटन नहीं जिसने वो एक देख लिया।
- 1:17:09उसके लिए कैसा देश और कैसा प्रदेश, कैसा विदेश?
- 1:17:16उसके लिए तो भारत भूमि का यही। अखंड वक्त पे काम करेगा वसुधैव
- 1:17:23कुटुम्बकम, ये सारी वसुधा सारी पृथ्वी एक कुटुम्ब है, कैसा थी
- 1:17:30इस? हाँ इस पृथ्वी से प्यार करना तो
- 1:17:37पृथ्वी से करो। जंगलों को मत मिटाओ हजारों एकड़
- 1:17:46जमीनों को कोई विशेष प्रोजेक्ट लगाने के लिए मत प्रयोग करो,
- 1:17:53बड़ों को मत काटो, पंचों के घोंसले उजड़ जाएंगे तो हमारे घर।
- 1:17:59जैसे कोई उजाड़ दे, तुम्हें कैसा लगेगा?
- 1:18:03पृथ्वी को मत उजाड़ो पृथ्वी उजनीय है माता तृतीय महत्त्व धरती माँ
- 1:18:15है। लेकिन जापान रस्ट इसके साथ चिपक
- 1:18:20जाओगे तो पुत्र तुम भीतर नहीं पहुंचोगे।
- 1:18:26या तो इसको स्वीकार करो या उसको स्वीकार करो तुम्हारी मर्जी, मैं
- 1:18:32कोई तानाशा थोड़ी हूँ। तुमने पूछा तो मैंने बता दिया
- 1:18:37जहाँ तुम्हारी चिपकाहट है, मोरल रोप में सुन लो, जहाँ तुम्हारी
- 1:18:44चिपकाहट है, उससे मुक्त हो जाना ही मुक्ति है और कहीं कोई वतन
- 1:18:49थोड़ी है। जिट्ठे सभ्य थान नहीं दूध ये है
- 1:18:55आप अपने उस स्थान पर पहुँच जाओ जिसके साथ मेरी हॉट लाइन हर वक्त
- 1:19:01जुड़ी रहती है और मैं जब चाहूँ ऑन ऑफ कर लो तो मेरे सामने आके जा
- 1:19:07मेरे दायरे में आके तुम कुछ भी मांगोगे पूरा हो जायेगा।
- 1:19:14वह विराट सबको जन्म देने वाला, सबको विनाश करने वाला, सबको पालन
- 1:19:21करने वाला, वह तुम्हारी इच्छा को पूर्ण करेगा।
- 1:19:27इसलिए इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। फिर आज ही।
- 1:19:31कौन आया के नानी जीके पड़पोता हुआ है?
- 1:19:40चौथी पीढ़ी देख ली तो इसमें दो बातें हुईं, एक तो वो ठीक हो गए।
- 1:19:48मेरी धर्मपत्नी ने कहा मैंने कहा कुछ होश है, मैंने 20 मिनट तक
- 1:19:55बोली लेकिन उसने ज़रा भी नहीं सुना।
- 1:19:58कोई रिस्पांस नहीं है, जैसे मुर्दा होता है, बस कुछ देर की
- 1:20:03मेहमान है। इनका नहीं कुछ देर की मेहमान अभी
- 1:20:11चौथी पीढ़ी आनी बाकी है और चौथी पीढ़ी आज आ गई।
- 1:20:21बहुत बार मुझसे रोहित कह देते हैं।
- 1:20:24ये गांव में हुआ। कल एक नक्शा बनाना था बाबा मैं
- 1:20:29फ़ोन करता हूँ बह उठाता ही नहीं कितने दिन बीत गए, महीने तक किया
- 1:20:33नहीं, मैंने फ़ोन रखा तुरंत उसका फ़ोन आया।
- 1:20:40हॉट लाइन पे गलती हो जाती है। मैं तो गलती कर देता हूँ, वह गलती
- 1:20:48नहीं है। ये ढांचा कभी कभी गलती खा जाता है
- 1:20:57और मैं बैठा क्यों हूँ कि इतना सा दूध पीता हूँ, क्यों कोई स्वाद
- 1:21:01नहीं लेता जीसको परम स्वाद मिल गया।
- 1:21:04वह शुद्ध स्वादों में उलझेगा बस कर्तव्य पूर्ण करेगा।
- 1:21:11ऐसे बिल भी बनाता हूँ, भेजता भी हूँ फ़ोन भी करता हूँ बच्चे के
- 1:21:16काम में सहायता भी करता हूँ खुद मेहनत करके खाते हैं भाई।
- 1:21:27इतना कामचोर भी मत संजले जाके देख लो पूछ लो हमारा डब्बा कई जगह पे
- 1:21:38जाता है मिठाई हम धंधा भी काम कामधंधा भी करते हैं।
- 1:21:45ये धंधा भी मैं करता हूँ ये कुटाई पुटाई का धंधा तुम आहत हो जाते हो
- 1:21:57कबीर चादरिया बनते हैं, ननक फसल बोते हैं, छोड़ते नहीं।
- 1:22:05तुम दान देते हो? जीस चीज़ के लिए दान उस पर लग
- 1:22:08जाता है वो चीज़ बनवा देते हैं, लेकिन हम जो खाते हैं और कोई
- 1:22:19विशेष नहीं खाते हैं। तो हम अपनी।
- 1:22:25मेहनत से कमा के खाते हैं आई तिलक।
- 1:22:29कितने परसों बेच गए कभी 1 दिन के लिए मैंने काम करने नहीं किया सर
- 1:22:37चलता। है।
- 1:22:40कल को जब तुम। देखोगे तो ये व्यक्ति ऐसा था,
- 1:22:46तुम्हारे होश का शोर हो जाएंगे। अरे इसको हम दुत्कारते रहे इसकी
- 1:22:52हम निंदा करते रहे। इसके कटु बच्चों से हम आढ़त हुए
- 1:22:56जब की ये हमें बदलना चाहता था। हम दुखी हैं, आनंदित।
- 1:23:02करना चाहता था ये इससे बड़ा बदलाव।
- 1:23:04और क्या होगा? बिलकुल उलट तपस्या हो गया।
- 1:23:08तुम दुखी हो तो मैं आनंदित करना चाहता हूँ।
- 1:23:11ये बदलाव ही तो है और इसी के लिए मैं सारा बुगाई जुगाई मारता हूँ।
- 1:23:19लेकिन तुम अपनी समझ। रखते हो?
- 1:23:21समझ रखे जाओ मुझे कोई। फर्क नहीं पड़ता।
- 1:23:25दूसरा धर्म है जो कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान कृष्ण ने बातों
- 1:23:35ही बातों में दूसरे धर्म की बात। भी करते हैं।
- 1:23:41पहला धर्म ये कि तू लड़। क्योंकि फौजें सामने खड़ी है।
- 1:23:46पहला धर्म तुम्हारा ये तुम्हारा शरीर मांगता है दिल।
- 1:23:49धड़कता है। इसके लिए कुछ पैदा करो और इसके
- 1:23:54लिए सरकार से मांगो नौकरी पैदा करो।
- 1:23:59नौकरियां दो हमारे हाथों को काम दो, थोड़ा ज़्यादा हम स्वाभिमान।
- 1:24:05से कमा सके पांच किलो अन्न क्या करना है हमें मुफ्त का हम गुलाम
- 1:24:10हो जाएंगे तुम्हें ये इनकी इच्छा है कि तुम गुलाम हो जाओ नहीं।
- 1:24:15तुम स्वाभिमान ही बनो। तुम्हारे हाथ बाऊ भी सवस्थ रहेंगे
- 1:24:25और तुम्हारा दिमाग। स्वाभिमानी बनेगा चोर नहीं बनेगा
- 1:24:2970। 1000 करोड़ उधर से ले लिया।
- 1:24:32बीच में गंगा स्नान की अपरले पार चले गए।
- 1:24:35ऐसा कुछ करने वाले लोग कुछ नहीं लेके जाते।
- 1:24:38यहाँ से सब गंवा के चले जाते हैं करते चले जाओ हम रोकते किसी को
- 1:24:46नहीं तुम 70,000 करोड़ लेके चले गए।
- 1:24:59तो तुम्हारे से प्रेरित हो के मैंने रोटी खाना थोड़ी शुरू कर
- 1:25:02दिया। तुम कहते हो मैंने फल फ्रूट खाना
- 1:25:07थोड़ी शुरू कर दिया मैं वो ही वो ही चाय पीता हूँ जो पीता हूँ तुम
- 1:25:11कितने ही 1000 करोड़ ले जाओ। मेरे पे कोई फैक्ट।
- 1:25:15नहीं पड़ता इसका। सहधर्म में निधन श्रेया पर धर्मो
- 1:25:27भया गवाह। अपने धर्म में जाना, अपने धर्म
- 1:25:31में मर जाना, वहाँ भी जाकर मरना होता है अपने धर्म में जाने के
- 1:25:38लिए। मरना होता।
- 1:25:40है। मरो हे जौगी मरो मरो मरण है मीठा
- 1:25:48ऐसी मरणी मरो जीस मरणी। मर वो रखो, ठीक?
- 1:25:52था ऐसी मरणी मरो जीस मरने से शरीर भी बचा रहेगा सब बचा रहेगा ये
- 1:25:59इन्स्ट्रुमेंटेशन। लेकिन तुम्हें तुम्हारे भीतर का
- 1:26:05श्रेयस। दृश्य जायेगा।
- 1:26:09श्रेयस को देख लो डिसमरणीय मर गोरखडीठा ऐसी मरणीय मरो।
- 1:26:24तो क्या मरे जो तुम्हें तुम्हारे भीतर बैठा हुआ श्रेय से दिख जाए?
- 1:26:32अहंकार मरे क्योंकि तुमने और कुछ नहीं कमाया, तुमने कुछ नहीं
- 1:26:37बनाया? तुमने बनाया सिर्फ अंगकार और
- 1:26:41तुम्हारा बनाया हुआ व्यर्थ बनाया तुमने परमात्मा से तुम इतर नहीं
- 1:26:46हो और ऊपर भी नहीं तुमने जो बनाया गलत बनाया दुर्गंध बनाया।
- 1:26:57इसको मिटा दो। संधर्म में मरण यह होता है संधर्म
- 1:27:10में निधन श्रेय पर धर्मों में ब्याव है।
- 1:27:19पहला धर्म। मैंने कहा अपने पांव पे मजबूती से
- 1:27:22खड़े हो। मुद्द की बात अलग थी, ज़माना अलग
- 1:27:29था, बात अलग थी। कपिल वस्तु के सिंहासन को छोड़ के
- 1:27:35आया था। वह व्यक्ति मांगता, अच्छा भी लगता
- 1:27:37था। शंकर भी बांधते अच्छे लगते
- 1:27:42क्योंकि शंकर झोंपड़ी में बैठे उस धन।
- 1:27:49की देवी को आदेश दे सकते हैं क्या जब।
- 1:27:53बरसाऊ धन उस विधवा ब्राह्मणी के घर जाकर आ गई स्थिति और उनकी।
- 1:28:12इस छंद के अंदर। इस अस्तोत्र के अंदर।
- 1:28:18तुम्हें भिड़ती लगेंगी। लेकिन भिड़ती नहीं है।
- 1:28:23यह आदेश है। ये बात अलग है के संत पुरुष दूसरे
- 1:28:29को। अधीमान दे पर बोल दे मैं मेरे
- 1:28:40चैनल कंट्रोलर को आप कह के उपलब्ध मेरे चैनल कंट्रोल कहते हैं।
- 1:28:47मुझे आप क्यों कहते हो तुम कहा करो न?
- 1:28:53कुछ संबोधन करने के तरीके भी होते हैं।
- 1:28:57यहाँ छोटे बड़े का ख्याल नहीं होता वहाँ।
- 1:28:59थोड़ा सा शिशिर विचार। भी निभाना होता है तो यद्यपि
- 1:29:05महालक्ष्मी शंकर के पांव की धूल। लेकिन फिर भी वो बिनती करते हैं,
- 1:29:23बुलाती हैं हम हम अरे हैं पुलक वो।
- 1:29:34शमश्र। ंगनवम। कोला वरुणम तमालम।
- 1:29:51अंगी कथा खिल विभोति। पांगल गिला।
- 1:29:58मंगल दास तुम मंगल देवता। यह भलाने का एक।
- 1:30:16ढांग का है, लेकिन यह प्रार्थना यह आदेश शंकर अपनी झोपड़ी में भी।
- 1:30:26आदेश दे सकते हैं महालक्ष्मी? लेकिन आदेश देते नहीं।
- 1:30:34बस एक प्रण ले लिया है जैसे प्रण लिया भर्त ने राज़ का मालिक था,
- 1:30:44प्रण लिया कहे भैया अगर 14 वर्ष के बाद एक क्षण की भी देरी करी।
- 1:30:52तो भरत जल जाएगा, तुम देर मत करना 14 वर्ष कैसे गुजरूंगा कि तुम्हें
- 1:31:01मालूम है तुम भगवान हो, लेकिन 14 वर्ष।
- 1:31:08पिता की आज्ञा तुमने रख दी। तो मैं स्वीकृति देता हूँ, लेकिन
- 1:31:15मैं बाहर बैठूं, मैं राज़ दरबारों में नहीं मुझे पता मेरा भाई सोएगा
- 1:31:21जमीन पर तुम्हारा छोटा भईया। नन्ती ग्राम में सोएगा जमीन पर।
- 1:31:30नगरी से। दो तम्बुओं की छांव में मेरा
- 1:31:41भैया। साँपों के बीच में चलेगा तो मैं
- 1:31:44भी साँपों के बीच में। सोऊंगा यह एक प्रण है।
- 1:31:53और यही रघुकुल का प्रण रघुकुलरी तो सदा चली आई प्राणी जाए।
- 1:32:08पर वचन न जाई, प्राणी चले जाएं, वचन न जाए।
- 1:32:21तो शंकर हुकम कर सकते हैं। लेकिन हुकम नहीं करते।
- 1:32:28फिर भी एक मर्यादा मांगते हैं। मांगूंगा 1 दिन में एक घर में
- 1:32:33मांगूंगा और वहाँ से नहीं मिलेगा। जो भी मिलेगा ग्रहण कर लूँगा,
- 1:32:40नहीं मिलेगा, वापस आ जाऊंगा, बुखार रह लूँगा।
- 1:32:43अगले दिन का इंतजार कर। यह एक प्रकार का महासमर्पण है जो
- 1:32:53महावीर ने किया महासमर्पण है। शंकर से पहले महावीर।
- 1:33:00ये कर चूके थे। और एक दृष्टि से देखा जाए तो
- 1:33:05शंकराचार्य। ने महावीर का।
- 1:33:07अनुकरण किया। महावीर भी ऐसा ही कहते थे।
- 1:33:12ये प्रकृति हे माँ, हे परमात्मा अगर तू मुझे ये अद्या शक्ति तू
- 1:33:18अगर मुझे जलाना चाहती है तो मुझे भोजन दे दे।
- 1:33:23नहीं जलाना चाहती है तो वो ही न दे राजी हैं हम उसी में जिसमें।
- 1:33:29तेरी रचा है अपनी तो यूँ। भी वह वह है और यूँ भी वह वह है।
- 1:33:39पर धर्मों व्यावाह, लेकिन तुम जरूरत से ज़्यादा।
- 1:33:46अगर इन सेठों की तरह अडाणी अंबानियों की तरह तुम संदूकों में
- 1:33:51जमा करना शुरू कर दो तो वह पर धर्मों में अपवाह हो जाएगा, यह
- 1:33:59तुम्हें काल का? अग्रस बना देगी कि संघ जाएगा
- 1:34:02नहीं। सोने की, पशा के पहना के पहन के
- 1:34:05तुम चिढ़ाओगे गरीबों को इससे ज़्यादा तुम कुछ न कर सकोगे।
- 1:34:10सोना खा तो न सकोगे खाओगे तो वहीं भोजन लेकिन हसर इनका जैसा।
- 1:34:19होगा मैं जानता हूँ। इसलिए मैं इनका।
- 1:34:26अनुकरण नहीं करता। मैं आज सब का भी।
- 1:34:29अनुकरण नहीं करता। आप भांति भांति के।
- 1:34:323600 प्रकार के भोजन करते हो, चावमन चुग्गा फुग्गा खाते हो।
- 1:34:40ज़रा मेरे में तबदीली आई नहीं आई, तबदीली तो आए अगर मैं कच्चा करा
- 1:34:50जो पक गया जिसने उस वहाँ आनंद का रस चक लिया वह बदल नहीं सकता वह
- 1:34:57बदल गया। जितना बदल सकता था इससे ज्यादा।
- 1:35:04बदला जा नहीं सकता। बस बदल गया जितना।
- 1:35:08इससे ज्यादा आनंद और भरा क्या होगा?
- 1:35:13जब चाहूँ अठखेलियां खाता हूँ समुद्र के।
- 1:35:19तो मेरे आनंद की डोर, मेरे आनंद का बटन मेरे हाथ में है, तुम्हारी
- 1:35:28आवाज़ उस परमात्मा तक पहुंचानी है, नहीं, वह बटन मेरे हाथ में
- 1:35:33है। मैं जान बूझ के नहीं करता सडन।
- 1:35:37कई बार रह जाता है। और बात अधूरी रह गई।
- 1:35:47उसका फ़ोन तो क्षण आ गया। आर्किटेक्ट का?
- 1:35:56फ़ोन बाद रोहित ने मुझे फ़ोन किया बाबा तुम क्या करते हो?
- 1:36:05क्या किया तुमने? मैंने कहा मैंने कुछ नहीं ओह ये
- 1:36:08बटन होना है क्या? मैंने कुछ नहीं किया मैंने फ़ोन
- 1:36:12से बटन ऐसी गलती तो हो जाती है मैंने टू एरर्स अब थोड़ा सा एक और
- 1:36:26प्रश्न। जो लोग कह देते हैं चाइना को खाप
- 1:36:34कर दो, पाकिस्तान को खाप कर दो। क्यों करते हो मेरे बच्चे किढ़ी?
- 1:36:42मकौड़ी मछली मेंढक। सुवर तक मेरे बच्चे ये पेड़ पौधे
- 1:36:50हैं। ये नाव, नदियां, लाज, ये चाँद,
- 1:36:55तारे या ग्रह आसमान, ये सब मेरे बच्चे हैं मेरी उत्पत्ति है मेरी
- 1:37:02समझ ना किसको मारूँ लेकिन तुम तो कहोगे क्यों तुम्हारे दिमाग में?
- 1:37:11इन्हें कूड़ा भर्क का है। लोगों ने कुछ जमातें ऐसी पैदा
- 1:37:15हुईं जिन्होंने। उसके दर्शन नहीं किए।
- 1:37:18विराट के जैसे आर्य शस्त्र की शाखा में बहुत बार करता हूँ, अपने
- 1:37:23बच्चों को मत भेजा करो, ये दिमाग बघेल बनते हैं।
- 1:37:27और इससे निकला हुआ व्यक्ति कभी आपका भला करेगा?
- 1:37:30सोचना मत अटल बिहारी वाजपेयी आया। पेंशन बंद कर दिया।
- 1:37:38बूढ़ों को मार गया ना बेचारा और बूढ़े ही।
- 1:37:44सहारा देने के योग्य थे। इतने वर्ष तक उन्होंने सेवा की
- 1:37:49सरकार की और पेंशन छीन के ले गए। ओल्ड पेंशन के ये नया।
- 1:38:01कानून बनाने में दक्ष हैं। लेकिन मंत्र?
- 1:38:04भी इनका ये है कि किस तरह? हमारी तानाशाही चले हमारा नाम चले
- 1:38:09हमारे ओल्डिंग्स लगे हमारा नाम रहे भाई, नाम यहाँ पे सही का भी
- 1:38:13नहीं रहता। नाम जिसका रहता है उससे कोई फर्क
- 1:38:20भी नहीं पड़ता। कृष्ण को कोई फर्क नहीं।
- 1:38:22पड़ता कितना ही नाम जब भेजा और राम को कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:38:26कितना ही नाम के पे जाओ क्योंकि वो तो गए वो इतने आनंद में कि
- 1:38:33तुम्हारी पूजा से उसे अनंत नहीं मिलता, वो अहंकार में नहीं आते कि
- 1:38:38तुम उसकी पूजा करते हो। उनके लिए श्रुति और नंदा बराबर
- 1:38:41है। वो छलांग ले गए।
- 1:38:44उस पर हम सुमंत्र आनंद में। दूसरा धर्म तुम इतना इतना।
- 1:38:53जोड़ना शुरू कर दो कि ज़िन्दगी रह गई दर्द।
- 1:38:56बन कर ज़िन्दगी रह गई। दर्द बन के दर्द दिल।
- 1:39:12में। छुपाए छुपाए आ सो जा।
- 1:39:25तो आंसू भरा मुद्दतें हो गई। मुस्कुराए आजू चा।
- 1:39:46तो हाँ। सो बैरा ज़रा।
- 1:39:53सोचो अतीत में जाओ मुद्दतें बीत गईं कब तुम पिछली बार मुस्कराये
- 1:39:59थे, कब बच्चों की तरह तुमने ठहाके लगाई?
- 1:40:04मेरा सोचो वो ततह बीत गई, तुम हँसे, ये भी कोई जिंदगी है?
- 1:40:18और अगर ऐसी संस्थाओं के पीछे चलोगे?
- 1:40:22अपने बच्चों को मैं फिर कहता हूँ आरएसएस के भीतर भर्ती मत करना, जो
- 1:40:27कर चूके वो गलती कर चूके है, ये मुझे पता है, पक्के भक्त बदले
- 1:40:32नहीं जा सकते क्योंकि तुम्हारे भीतर के उस स्थान पर चला गया ये
- 1:40:39जो तुमने भेजा। जो पीनियल ग्लैंड के पास है, वहाँ
- 1:40:44जो चला। जाता है, वह मिटता नहीं है।
- 1:40:48और जो चीज़ बार बार दोहराओगे। बार बार दोहराओगे वो तुम्हारे उस
- 1:40:52स्थान। पर बैठ जाएगा।
- 1:40:54पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल पास एक छोटी सी गलती होती है, जो शायद
- 1:40:59मुझे पता नहीं। मेडिकल खोज पाया कि नहीं खोज
- 1:41:02पाया। उसमें जो चीज़ चली गई वो नहीं
- 1:41:05मरते छूटती। नहीं है काफी मुँह को लगी हुई यह
- 1:41:13ऐसी चीज़। है जब तुम मर जाओगे या फिर भी संग
- 1:41:18जाए। छूटती नहीं है का?
- 1:41:22फिर मुँह को लगी हुई इसे ही ऐडिक्शन कहते हैं।
- 1:41:29जो बच्चे बहुत ही ज्यादा नशा करते हैं और पीनेल ग्लैंड के पास एक
- 1:41:36छोटा सा जर्रा रेत का। उतनी सी ग्रंथी है जो दिखती भी
- 1:41:41नहीं। शायद मेरे ख्याल में खोजी नहीं
- 1:41:44होगी, क्योंकि अब तक चक्कर नहीं खोजेगा।
- 1:41:46ये कुंडल नहीं नहीं खोजी गयी, ये सारा भीतर का तंत्र यंत्र नहीं।
- 1:41:52खोजागा आत्मा नहीं खोजेगी। तो वह भी बिल्कुल आत्मा ही है
- 1:41:57करीब। कारण शरीर नहीं खोजा।
- 1:41:59गैंस क्योंकि तुम्हारी कोई भी हर्बल या जेम्स वेव टेलीस्कोप या
- 1:42:07कोई और बड़ी बना लो, वो कितनी भी मैग्निफिकेशन कर ले वह नहीं
- 1:42:12दिखेगा। परमात्मा कभी दिखने की चीज़ थोड़ी
- 1:42:15है परमात्मा पीने की चीज़। पिया जाता है झों बराबर झों शराबी
- 1:42:24झों बराबर झों झों बराबर झों शराबी।
- 1:42:30झों बराबर? झों काली घटा है।
- 1:42:37मस्त फजा है, काली घटा है मस्त फजा है जाम के घूम घूम घूम झों
- 1:42:49बराबर झों शराबी झों बराबर झों। ये वो शराब है।
- 1:42:57ये वो मस्ती है मद मस्ती। इसीलिए मद कहते हैं काली गट्टा
- 1:43:05है। मस्त सजा है।
- 1:43:08जाम उठाकर घूम घूम घूम यूँ बराबर यूँ शराब।
- 1:43:17यही आनंद है यही जीने का तुम पूछते हो और मुकाम क्या है?
- 1:43:24हमारी मंजिल क्या है? ये मंजिल है तुम्हारी कोई मुक्ति
- 1:43:29शक्ति वंतन ये नहीं कोई मंजिल नहीं है ये।
- 1:43:34मंजिल यही है जियो जियो आनंद से जियो झूम झूम के जियो पीपी के
- 1:43:40जियो बस ठेके की शराब को नहीं, छोटे से शराब के ठेके हैं वह
- 1:43:52विराट। नशे का सागर, मदमस्ती का सागर
- 1:43:59उसको पियो अगर पीना है ये भी कोई पीने की चीज़ है उसको पियो और पी
- 1:44:09के झूमो और झूम के झूमो। जीने का मज़ा है, कोई जाप नहीं
- 1:44:23कोई। तप नहीं कोई पूजा नहीं, कोई
- 1:44:26पार्टी छोड़ दो इन बकवास में उन्मुख तो हो के जियो, स्वतंत्र
- 1:44:31हो के जियो, बस स्वच्छंद मत हो जाओ।
- 1:44:37स्वच्छंदता का मतलब दूसरों। की आजादी में खल मत डालो।
- 1:44:43स्वतंत्र हो जाओ बस तुम आजाद हो, तुम आजादी के लिए अपनी आजादी के
- 1:44:50लिए सब कुछ करो, जो कर सकते हो आदम अहंकार को भी गला दो।
- 1:44:58आत्म गलानी में मत मरो, आत्म अहंकार को गला दो, पर धर्मो
- 1:45:08ब्यावः। दूसरे के धर्मों में भी तुम मरते।
- 1:45:13हो पैसा इकट्ठा करके या मर जाएंगे।
- 1:45:16अडाणी अंबानी वगैरह जीतने भी कहते हैं कि पहले 100 अमीर मुल्क इस
- 1:45:24देश में। उनके पास तो देश की 50% से अधिक
- 1:45:31संपत्ति है। क्या सिर्फ बिमारी है?
- 1:45:37डॉलर खाई जाती हैं। क्या सोना खाया जाता है?
- 1:45:41चांदी? खाई जाती है खाओगे तो वही बेटा
- 1:45:45गेहूं खा। या चावल खाओ गया जो।
- 1:45:47भी खाना है वही खाओ, सोना नहीं खाया।
- 1:45:52जाता चांदी नहीं खाये जाते डॉलर? नहीं खाये जाते, खाया तो अन्न ही
- 1:45:58जाता अगर इस पर धर्म ये परम धर्म। पर धर्मो भया वह।
- 1:46:09अगर धन। कमाने में ही तुमने जन्म।
- 1:46:11बता दिया जीवन। बता दिया।
- 1:46:15यह परम धर्म है, दूसरा धर्म दूसरे का धर्म है।
- 1:46:23तुम्हारा धर्म तो वही है, झूम बराबर।
- 1:46:26झूम वहाँ जाके। जियो जियो मस्ती से जियो कोई बंधन
- 1:46:30नहीं है तुम्हारे ऊपर जब बंधन तुम्हारे बनाए हुए कल्पना तोड़ दो
- 1:46:35इनको सबको मैं आह्वान करता हूँ आज तुम्हें तुम स्वतंत्र हो के जियो,
- 1:46:40मज़े से जियो। खाओ पियो आनंद करो परमानंद में
- 1:46:47झूमो कोई बंदा नहीं तुम्हारे ऊपर कोई देवी देवता पित्तर भूत,
- 1:46:53प्रेत, यम, राक्षस, बैताल कुछ नहीं अगर है तो मेरे पास वही तुम
- 1:46:59मैं निपट दूंगा अपने। मैंने कितनी बार कहा एक मूड सा
- 1:47:05बैठा होता है, वो निकालता है जिन्ह को मैंने कहा अरे भाई मेरे
- 1:47:10पास एक जिम भेज दे देख मैं उस जिन्न की जिम।
- 1:47:16कराता हूँ एक वास। गाढ़ दूंगा डेरों की तरह।
- 1:47:21और उसको पांच। नाम दे दूंगा जब तरे उतर तरे।
- 1:47:24जब तरे उतर तरे। बिहाना हो जाए तो मज़े कैसे?
- 1:47:34अरे तुम मज़े से जियो पियो और जियो लेकिन पियो।
- 1:47:41ठेके पे जा रहे। हैं रियो उस मैं खाने में जा के
- 1:47:46जो तुम स्वयं हो तुम्हारा अता पता ही तुम्हें मालूम नहीं कमाल की
- 1:47:51बात है इससे ज़्यादा दीन ध्रिध्र व्यक्ति और क्या?
- 1:47:56हो सकता है जिसे अपना ही पता नहीं।
- 1:48:00चलो। भीतर उतरो, शांत हो जाओ, सब चीजों
- 1:48:04को छोड़ो। सब चिपकाहटों को छोड़ो, मान्यताओं
- 1:48:07को छोड़ो, सभी मान्यताओं को छोड़ो, तुम्हें पता नहीं है ये भी
- 1:48:12तो पता नहीं जिसका जाप कर रहे हो वो है भी कि नहीं?
- 1:48:16ये तो स्टाम्प कोई कबीर ही लगा सकता है।
- 1:48:19कोई विजय वक्त ही। लगा सकता है स्टाम्प वह है और वह
- 1:48:24मैंने देखा है। बस इतना सा कर लो, दुनिया की
- 1:48:34बातों को छोड़ो। कहीं भी बैठे रहो।
- 1:48:40बस मेरी बात को मान लो, वह है मार्कस की बातों को मत मानो, वह
- 1:48:45मूर्ख था। नीच से मूर्ख।
- 1:48:47था, उसने देखा नहीं था, उसने खोजा नहीं, मैंने खोजा और मैंने पाया
- 1:48:52जीने खोजा तन पानी गहरा पानी फेंक मैं बहुत गहरा चला गया, बिल्कुल
- 1:48:58तड़प में चला गया। मैं बुरा हुडन, डरा गयो किनारे,
- 1:49:03बैठ ये मार्कर्स जैसे लोग ये किनारे पे बैठे रहे, डरते रहे
- 1:49:09मरने। से, लेकिन मैं मरने।
- 1:49:11से डर रहा हूँ मैं मौत के बीच में मरे सापों के पहरे में।
- 1:49:17रातों रातों वह जागता बरसों वर्षों तक बैठता।
- 1:49:25लेकिन किसी प्राणी ने मुझे? डसा?
- 1:49:34मैं आनंद से। झूमता रहा।
- 1:49:38और आखिर आखिर। आखिर वह मुकाम पर लिया।
- 1:49:43जो मैं वास्तव में हूँ और फिर। वह जो वह।
- 1:49:47वास्तव में है। पहले खुद को खोजा, नो दाए सल्फ।
- 1:49:55हूँ आर यू। फिर उसने बता दिया कि।
- 1:50:01मैं कौन हूँ? एम आर।
- 1:50:04ने दो ही खोजें हैं सहधर्म। पहले तुम अभी अपने अपने।
- 1:50:12आप को शरीर मानते हो? शरीर का उपाय करो पालन पोषण का,
- 1:50:20और उसके बाद उसके बाद जो वास्तव में तुम हो उसमें उतर जाओ गहरे।
- 1:50:33ये संघ संघ में चलते रहे तो कोई परेशानी नहीं है।
- 1:50:39ये दो चीजें नहीं हैं एक ही चीज़ है।
- 1:50:42एक अपने भीतर जाना। है अंतर यात्रा एक अपने बाहर जाना
- 1:50:45है बहरह यात्रा तुम्हारी ही यात्रा है दोनों तरफ।
- 1:50:52पर धर्मों। ब्याव लेकिन इस पैसे को इकट्ठा।
- 1:50:56करते हुए मत मर जाना, गद्दी को इकट्ठा करते, लोगों का सम्मान
- 1:51:03सहते, सम्मान इकट्ठा करते, किसी भी चीज़ को इकट्ठा करते मर मत
- 1:51:11जाना। इसीलिए पतंजलि ने महावीर ने बुद्ध
- 1:51:14ने कहा, अपने ग्रह कुछ जोड़ना मत, कुछ भी मत जोड़ना मान।
- 1:51:21सम्मान से लेकर हीरे। जोहारा तक मत जोड़ना क्योंकि तुम
- 1:51:26वो हो जो सबका समूह हो, सबका यूनिट।
- 1:51:31यूनिट हो तुम जुड़े हुए अनंत अखंड कोई दरार नहीं तुम में कोई अलगाव
- 1:51:39नहीं तुम में देश तुमने अलग किए। परमात्मा ने तो एक धरा बनाई
- 1:51:47परमात्मा ने देश ने बनाए। देश तो।
- 1:51:49तुम्हारे स्वार्थी। राजनीतिक तत्वों ने बनाए और आज
- 1:51:56करना चाहते हैं उन्हें। कर लेने दो लेकिन तुम अपनी मौज
- 1:52:00मस्ती। में बैठो, कैसे में बैठो, क्या
- 1:52:03दिक्कत है, कौन रोकेगा तुम्हे? वो मैं कहता हूँ तुम स्वतंत्र हो
- 1:52:08जाओ स्वच्छंद न हो जाओ बाहर जाके किसकी गर्दन न दबाओ किसी पर अपने
- 1:52:15नियम कायदे कानून न लागू करो इसलिए राजनीतिक इतनी बड़ी मौत
- 1:52:21मरते हैं। क्योंकि पाप इससे बड़ा पाप क्या
- 1:52:27है? तुम अपनी तानाशाही दूसरों पर
- 1:52:33ठोकते हो, कुछ क्षणों के आनंद के लिए अहम् के लिए कि देखो देखो
- 1:52:40मैंने लगा दी है ना लाइन में क्या हो गया लाइन में लगा दिया था।
- 1:52:46क्या हो गया? धरती बदल गई, चाँद तारे बदल गए,
- 1:52:50आसमान की फिजाएं, फिजाएं बदल गईं, वृक्षों की हरियाली बदल गई, फूलों
- 1:52:59की सुगंध बदल गई। नालियों की दुर्गंध बदल?
- 1:53:03गई क्या बदल गई? बस इतने में ही।
- 1:53:08प्रसन्न हो जाए। इतना ही माझना है इन लोगों को।
- 1:53:12देखो लाइन में लगा दिए न? बस तुम यही चाहते हो, ये है परम
- 1:53:21धर्म। पर धर्मो, ब्याह ऐसी बुरी मौत जो
- 1:53:26पर धर्म में मरता है वो ऐसी बुरी मौत मरता है।
- 1:53:30ऐसी बुरी मौत क्या होगी? आनंद का खजाना होते हुए?
- 1:53:36तुम। दुखों से घरे घरे मर जाओ।
- 1:53:40इससे बुरी मौत हो सकती है। फन।
- 1:53:43तुम आनंद के खजाने। मरो दुःख को त्राहिमाम, त्राहिमाम
- 1:53:48करते करते, रोते रोते चिल्लाते चिल्लाते तुम यहाँ से विदा हो
- 1:53:53जाओ। इससे दुखद मौत कोई हो सकती है और
- 1:53:56तुम किसी राजनीतिक को मरते हुए देखो।
- 1:54:01जो कमाया सब छूट रहा है पर धर्म छूट ही जाता है।
- 1:54:08स्वधर्म साथ जाता। है स्वधर्म क्या।
- 1:54:11है तुमने? जितनी अपनी आत्मा की कान्शस्नस
- 1:54:14बढ़ा दी वह स्वधर्म। क्वांटिटी ऑफ कान्शस्नस जीस लेबल
- 1:54:26पे तुम लिया मैं तुम्हारा स्वय धर्म तुमने बढ़ाया।
- 1:54:32मैं तुम्हारे शंक जाए। और जितनी क्वांटिटी मैं तुमने
- 1:54:36कॉन्शस को बढ़ा दिया, उतनी क्वांटिटी में आनंद तुम्हारे शंक
- 1:54:41जाएगा, बैठ जा नहीं छूट जाएगा पदार्थ यहाँ छूट जाएगा आनंद
- 1:54:47तुम्हारे शंक जाएगा समझा बात। पदार्थ यहाँ छूट।
- 1:54:54जाता है कौन ले के गया सोई भी ले के गया?
- 1:54:59तुम 2000। किले की बात करते हो, एकड़ की बात
- 1:55:02करते हो इस। 2000 एकड़ में से एक ज़रा
- 1:55:06तुम्हारे संग जाता है ये शरीर तक तुम्हारे साथ नहीं जाता।
- 1:55:10ये पर्व धर्म है, ये स्वयधर्म नहीं है स्वयधर्म तो वो।
- 1:55:16जो तुम्हारे संग? जाएगा।
- 1:55:18बड़े मज़े की बात है, तुम्हें स्वयधर्म का अभी तक पता नहीं है,
- 1:55:22लेकिन मैं तुम्हें बता ही देता हूँ बड़े सर्वे मैं।
- 1:55:27जो तुम्हारे संघ जाए वो तुम्हारे सुधर्म क्वांटिटी ऑफ़ कान्शस्नस
- 1:55:40जितनी मात्रा में तुमने। अपनी चेतना।
- 1:55:44का ग्राफ बढ़ा दिया। वह तुम्हारे संघ।
- 1:55:48जाएगा। और फिर कृष्ण किसी भी परिस्थिति
- 1:55:53में घबराते हैं। कृष्ण किसी भी परिस्थिति में ये
- 1:55:57लक्षण है घबराते नहीं, डरते नहीं क्यों?
- 1:56:04क्योंकि वह आनंद का जो बुरा साथ ले के गए।
- 1:56:09और परिपूर्ण ग्राफ हो गया है उनका पिछले जन्म में शरीर छूट गया कोई
- 1:56:15बात। नहीं, लेकिन परिपूर्ण ग्राफ।
- 1:56:18100% कॉन्शन्स उनके साथ गई। अगले जन्म में वो अवतार के रूप
- 1:56:24में जन्म लेंगे तुम भी अवतार के रूप में जन्म ले सकते हो।
- 1:56:30अगर मेरा भी कोई जन्म। हो या सिर्फ मैं आपको उदाहरण के
- 1:56:34लिए। होगा नहीं।
- 1:56:36अगर मैं तुम्हें अगर मेरा भी जन्म हो तो 100% कान्शस्नस पे आएगा।
- 1:56:42व्यक्ति अवदार के रूप में जन्म लेगा इसे ही अवदार कहते हैं हम।
- 1:56:47बाइट समझाने के लिए हमने बहुत सी चीजे बनाई।
- 1:56:51लेकिन समझा नहीं पाया। 100% कौन सी से भरा हुआ?
- 1:56:56व्यक्ति अवतार कह जाता। है सही अगर देखा जाए तो अवतार
- 1:57:01कृष्ण, राम और तीसरा पशु। ये तीन ही हवतार से ही गिने
- 1:57:13जाएंगे बाकी। तो वरा है मछली।
- 1:57:18है। कछुआ है यह तो आपको बतराने के लिए
- 1:57:22थे लक्षण के ऐसा करोगे? इंद्रियों को समेट लो, मछली की
- 1:57:29तरह तड़प लो। उसके बरहा में यह आपको एक रस्ते
- 1:57:39के मार्ग का हिसाब दिया था, ये कुछ आएगा रास्ते में।
- 1:57:45तड़प हो गई। ब्राह की आग में मछली के समान, वह
- 1:57:52भी आग मीठी भी बढ़ी है जो मैं ऐसा जानती।
- 1:58:09हो नगर ढिंढोरा। प्रगति न करियो, ये शुरुआत मछली
- 1:58:32की तरह तड़प हो अपने सारे अंगों को अपनी सारी कॉन्सेंट्रेशन को एक
- 1:58:39जगह पे ले आओ। सारी शक्ति को कंटेन्स कर लो, एक
- 1:58:42ही जगह पे कछुए की तरह। और वह बता।
- 1:58:53अच्छा बुरा सबको। स्वीकार नाली में भी।
- 1:58:58बैठ जाता है बुरा। और नहला धुलाके दूसरे देशों में
- 1:59:04देखना सुअर दूसरे देशों के सुअर नहाये दहाई गोरे चिट्टे अंग्रेजों
- 1:59:14के तहे वैसे मिलेंगे सूरत में। अरे नहीं।
- 1:59:19नहीं अंग्रेज सूअर। थोड़े ही होते हैं।
- 1:59:21अंग्रेजों के सूअर मैं करता हूँ। ये बेउर के पुल के बात करते है।
- 1:59:27चिट्टे गोरे गोरे मैंने। देते हैं वह अवतार मत्स्य अवतार
- 1:59:35कच्छप अवतार। यह रास्ते के माइलस्टोन थे।
- 1:59:43ऐसे ऐसे गुजरोगे तुम और आगे चलते जाओगे।
- 1:59:47फिर क्रोध भी हो गए, फिर सहनशील भी हो गए, मर्यादा में बंधे हुए
- 1:59:53भी हो। गए।
- 1:59:54फिर तुम ए मर्यादित नहीं स्वतंत्र।
- 1:59:59उच्छृंकर नहीं स्वच्छंद नहीं, स्वतंत्र कृष्ण की भांति 16 कला
- 2:00:0664 कला सम्पूर्ण परमात्मा भी हो जाओगे तो पर धर्म इन सेठों की
- 2:00:15तरह। रंगों को भर जाना।
- 2:00:17तुम देख लेना, मैं शायद रहू न रहू इनके हाथ अच्छी तरह से देख लेना।
- 2:00:25सिकंदर ने तो ये ब्रम तोड़ दिया। लेकिन तुम इनकी मुठिया खोल के देख
- 2:00:29लेना कुछ ले तो नहीं गए, संग शरीर भी तो संग नहीं ले गए।
- 2:00:35शरीर भी तो तुम जला दोगे या दफन का तो देख के कुछ नहीं जाएंगे।
- 2:00:41कोई गद्दियाँ साथ लेके जाते हैं तुम कैसे मिलते हो ये प्राइम
- 2:00:47मिनिस्टर फेविकोल समेत गद्दी को साथ लेके जाएगा कौन ले जाने देगा
- 2:00:53नहीं कोई ले जाने देता भाई? वह तो शरीर भी नहीं गद्दी के ऊपर
- 2:00:57बैठा शरीर भी यहीं रह जाता है। हमारे एक राष्ट्रपति गद्दी के ऊपर
- 2:01:02बैठे ही रह गए थे। शायद फखरुद्दीन अली अहमद है।
- 2:01:06अगर मैं नाम नहीं बोलता तो वो गद्दी के ऊपर ही पड़ेगा।
- 2:01:10चलो इच्छा होगी बेचारे की। गद्दी का पुरू पूरी मरजम तो।
- 2:01:16ब्रह्मंडली ब्रह्मंड सबकी इच्छा पूरी करता है तो, पर धर्मो भया,
- 2:01:23वहाँ क्यों मैं शकस की? क्यों मैं शकस की इतनी क्यों
- 2:01:31कमाया, क्यों रुलाया? लोगों को गरीबों को तड़पाया भूखों
- 2:01:35मारा। तुमने गोदाम भरे तो वो भूखों मरे,
- 2:01:38तो उसका बाप किसके? ऊपर तुम्हारे ऊपर तुमने क्यों
- 2:01:42गोदाम भरे बाबा? नानक का फॉर्म मेरा बड़ा।
- 2:01:46सुन्दर है, वो कहते जीतने रुपए हैं।
- 2:01:50तुम तो तुम तो पेट। भरे हो या।
- 2:01:52घर जाके खा लोगे इनका पेट भर दो बिचारों का तो भूखों का पेट भर
- 2:01:58दिया। संतों का पेट भर दिया, गुरमुखों
- 2:02:07का पेट भर दिया। भूख हैं।
- 2:02:11इसलिए लंगर चलते मिलेंगे। आइटम गुरुद्वारा में लेकिन मंदिर
- 2:02:17में एक मगता। भूल से मंत्र में जला गया।
- 2:02:23मंदिर का पुजारी तो खुद ही। नियत भूखी रहती है।
- 2:02:28भीतर से आए कितनी? सोना भरा पड़ा।
- 2:02:33नियत भूखी रहे तो वह भूखा ही है। तुम सारे मुल्कों की सैर कराओ।
- 2:02:40लेकिन नियत नहीं भरी। तो कुछ नहीं भरी, फिर अपने लिए
- 2:02:45जहाज भी खरीद लो। लेकिन जहाज संघ थोड़ा जाएगा जहाज
- 2:02:49के ऊपर। बैठने वाला यह बंदा भी नहीं
- 2:02:51जाएगा। संघ यह भी यहीं छुट जाएगा।
- 2:02:55छः बार कपड़े बदलो, 12 बार कपड़े बदलो, साथ जाएंगे, कपड़े नहीं भाई
- 2:02:59शरीर भी नहीं जाएगा। संघ ये 8000 करोड़ का बाजीजान भी
- 2:03:05नहीं जाएगा संघ सत्य है पर कड़वा है।
- 2:03:13क्या करून मत बोल कहना पड़ता है, कहे बिना रहा नहीं जानता।
- 2:03:27पर धर्म है गद्दियों पर बैठ जाना जमीनों को खरीद।
- 2:03:34लेना वे बजा जो जरूरत नहीं है तुम्हारी।
- 2:03:38बैंकरों को भर देना है फड करा लेना।
- 2:03:45भव्य मरते ऊंची ऊंची बना लेना। संघ तो फिर नहीं जाएगा।
- 2:03:52ये है पर धर्मो। भया वह ये बड़ा भयानक है क्योंकि
- 2:03:59जितना। जोड़ोगे उतना छोड़ोगे और छोड़ तो
- 2:04:04तुम ज़िन्दगी में एक ज़रा भी नहीं सके करोना आया, सेतु ने क्या दिया
- 2:04:13जो? परिग्रह करना जानता है वो छोड़ना
- 2:04:16नहीं जानता। क्योंकि परिग्रह करने का संस्कार
- 2:04:25भारी हो गया है। तो कोरोना में गरीबों ने बहुत कुछ
- 2:04:29दिया। सेठों ने कुछ भी नहीं दिया छीन।
- 2:04:34पे शक दिया सेठों। ने तो जो बनाया प्रधानमंत्री।
- 2:04:40कोश उसमें से बेसिक खादें दिया कुछ ने यह सेठों के निशानी भी हैं
- 2:04:49और यह सेठों का सुभागी भी है। कि जो जुड़ा है ऐसा कहीं जाएगा।
- 2:05:03इससे बड़ा। स्वभाजन क्या होता है?
- 2:05:06पर। धर्मों ब्याह।
- 2:05:15जो कुछ जोड़ोगे तुम अपनी सिवा और तुम क्या हो ये?
- 2:05:19जब जानोगे, तुम हैरान हो जाओगे। जो जोड़ोगे वह छोड़ोगे छोड़ना
- 2:05:27पड़ेगा मृत्यु के करोड़ हाथ तुमसे छीन लेंगे वो।
- 2:05:38और तुम रोओगे चिल्लाओगे। तुम कहो, बचाओ बचाओ, अरे भाई ये
- 2:05:42सब छीने जाता है लेकिन कोई बचा ना पाएगा, मार कर मार कर गोली गराली
- 2:05:56जाएगी। बेमहोर देख उठा ली जाएगी जब तेरी
- 2:06:10सर धर्में निघ्नम श्रेया। अपने भीतर।
- 2:06:14जाओ वहाँ भी मरना पड़ता है देखो कॉपी आएगी पढ़ी।
- 2:06:18इसीलिए गुरु की जरूरत वहाँ पड़ती है जब तुम कपोगे सारी उम्र के
- 2:06:23संस्कार। के मैं शरीर हूँ मैं भागना।
- 2:06:25हूँ मैं विचार एक टूटेंगे तुम कपोगे तुम्हारी हर गर्वस्ती जब
- 2:06:33छूटेगी तुम। कपोगे।
- 2:06:36लेकिन घबराने? यह नेचुरल पार्ट है।
- 2:06:41एनलाइटनमेंट का घबराना नहीं, तुम कपों के तो अपना सौभाग्य समझना
- 2:06:46शुकर कंपन आया शुकर यह मैं कंपा मुझे डर लगा डर के बिना कभी कोई
- 2:06:54पहुँच चुकाया? सीधा सीधा कभी नहीं पहुँच पाया।
- 2:06:58पत्ते की तरह कप होंगे, सूखे पत्ते की तरह कप होंगे पत्ते
- 2:07:01झड़के सूखे की पत्ते की तरह कम हो गए ऊर्जा कल्पना आवश्यक भी है यह
- 2:07:10एक मार्ग का। रस्ते का हिस्सा भी है।
- 2:07:15अगर नहीं कपे तो नहीं पहुंचे समझे अपना अवशक सधर्मे ने धर्म श्रेया
- 2:07:25अपने धर्म में जाओगे तो कम्पाओगे पर धर्मों।
- 2:07:32ब्याह वाह। दूसरे धर्म में जब छोड़ना पड़ेगा
- 2:07:40तब कब सर धर्म में जाओ या पर धर्म में जाओ?
- 2:07:47एक बात निश्चित है कि तुम कब होगे?
- 2:07:51और फिर परधर्म में कंपनी के बजाय। क्यूँ कहा भगवान ने कि?
- 2:07:55स्वधर्म में गपना ज्यादा श्रेष्ठ है, स्वधर्म में निधनम श्रेया
- 2:08:02कपना ही है भाई, मरना ही है तो अपने धर्म में क्यूँ नहीं मर जाते
- 2:08:08बच जाओगे? जब मर ही जाओगे तो स्वःधर्म में
- 2:08:15मर जाओ। कितना शानदार शब्द है और मरने से
- 2:08:24कभी कोई बचपा। मारे बाप दादा बड़।
- 2:08:27दादा सड दादा कितनी पड़ी? कोई बच पाए चाहा सभी ने क्या बच
- 2:08:33जाए? बचा कोई तो कृष्ण भगवान बड़ी
- 2:08:37शानदार बात करते हैं काम। की बात करते हैं, कहती।
- 2:08:40है जब वो मरना ही है, पक्का है ना देख लो शायद तुम कभी बच जाओ तो।
- 2:08:48शायद कोई पटे पुटे। लिखा के आया हो।
- 2:08:52कोई पता नहीं होता है, राजनीतिज्ञों।
- 2:08:54की तरह पटे लिखा के आते हैं। मैं तो न।
- 2:08:56मरूँ मरा संसार अर्थ दूसरा कर लेते हैं, मैं न मरूँ मरा, संसार
- 2:09:04संसार मरे, मैं थोड़ी मरूँगा। प्रश्न कहते हैं जब मरना ही है।
- 2:09:17स्वधर्म। में क्यों नहीं मरते?
- 2:09:19अपने आप को दर्शन कर लोगे महा आनंद?
- 2:09:22में डूबोगे अटखेरियां खाओगे? आठों पहर आनंद हो जाएगा।
- 2:09:26वो मरना बड़ा भला तो इस तरह मरो तरीका है मरने का मरो मरण है मीठा
- 2:09:41बड़ा प्यारा है, मीठा है, अमृत जैसा है ऐसी मरने मरो ये ढाँगा है
- 2:09:47मरने का। वो भी ढंग है।
- 2:09:49मरने का दन जोड़ो संपत्ति जोड़ो, मान मर्यादा जोड़ो प्रतिष्ठा
- 2:09:56जोड़ो गद्दियाँ जोड़ो। समग्री जोड़ो।
- 2:10:03पदार्थ जोड़ो डिग्री जोड़ो। सूचनाएं जोड़ो जोड़ो, वो भी
- 2:10:15छोड़ना पड़ेगा, वो भी मरने का एक तरीका है लेकिन उस तरीके को मत
- 2:10:20अपना लेना वो भयावह है। यह श्रेय है श्रेयस।
- 2:10:26ये श्रेय। वह बड़ा भयानक है।
- 2:10:33स्वधर्मी निधनम। श्रेया अपने धर्म में।
- 2:10:39मरना श्रेष्कर है। दूसरे के धर्म में मरना बड़ा।
- 2:10:45भयानक है। और अब विचार करो आइए हम लास्ट
- 2:10:49पॉइंट पे आ गए मरना तो होगा ना पक्का बच तो नहीं जाओगे ना कभी
- 2:11:01कोई बचा तो नहीं ना सोच लो। अगर कभी कोई बचा तो मुझे बताओ।
- 2:11:13तो कृष्ण कहते हैं तो। क्या गलत कहते हैं?
- 2:11:20अरे जब मरना ही है तो अपने। धरम में क्यों नहीं मर जाते?
- 2:11:23डूबना ही? है तो डूब जाओ अपने कुंए में डूब
- 2:11:26जाओ दूसरे के कुंए में क्यों डूबना है?
- 2:11:30अपने कुएं में डूब के भी मरोगे। दूसरे के कुएं में डूब।
- 2:11:33के भी। मरोगे, लेकिन दोनों का परिणाम
- 2:11:36बड़ा कलेक्शन होगा। अलग अलग होगा सर धरम में मरोगे।
- 2:11:41निधर्म श्रेया। आनंद के उस।
- 2:11:44खजाने को वहाँ जाओगे जीसको जन्मो जन्मो से।
- 2:11:48बहुत ही जन्मदिन है मेरे माधव ये जन्म तुम्हारे लेखे तो लेखे
- 2:11:53लग्ज्ञा से ही इसका फल आ गया तुम महा आनंदित हो जाओगे सदा सदा के
- 2:11:59लिए जो मैं कहता हूँ 24 घंटे आनंद में रहता हूँ।
- 2:12:06कोई जरूरत? नहीं, कोई वासना नहीं।
- 2:12:11कोई इच्छा नहीं कुछ। खाना नहीं, कोई घूमना नहीं, कोई
- 2:12:15विषयों। की सैर नहीं करनी जो मैं भीतर से
- 2:12:19हूँ दृढ़ सभ्य था नहीं तेरे जैसा कोई।
- 2:12:27मरना ही। है तो करो फैसला परिणाम तो स्पष्ट
- 2:12:34है ना? परिणाम दोनों का एक है ना?
- 2:12:40अपने आप को। छूओगे तो भी मरोगे।
- 2:12:44लेकिन महा आनंद मिलेगा, दूसरे के धर्म को इकट्ठा करोगे तो भी
- 2:12:51मरोगे, लेकिन हाथों में कुछ नहीं आएगा।
- 2:12:54खाली हाथ जाओगे सिकंदर की तरह तो फिर सोचो तुम फैसला तुम्हारे ऊपर।
- 2:13:03तुम कैसा? मरनी मरना चाहोगे तुम कृष्ण की
- 2:13:10मरनी मरना चाहोगे या राजनीतिज्ञ की मरनी?
- 2:13:15मरना चाहोगे फैसला तुम्हारे? हाथ में मैं तुम्हें कोई
- 2:13:21कमेंटमेंट हाथ में नहीं पकड़ाता। कैसे ही मरनी मरो।
- 2:13:28तुम्हारी मर्जी जो। मरनी मरो मरो मरना पड़ेगा लेकिन।
- 2:13:36संत हमारे भले के लिए कहते हैं ऐसी।
- 2:13:40मरनी मरो। जीस मरणी मरगोरक डीप था तुम्हें
- 2:13:46तुम्हारा गौरक दिख गया श्रेयस। तुम्हें तुम्हारा शरीर
- 2:14:01और अगर ऐसी मरणी में गए तो बहूर न मर न।
- 2:14:05होए फिर नहीं मरोगे, बस एक बार अंतिम बार मरोगे।
- 2:14:12मरोगे। घबराओ मत।
- 2:14:15इधर भी। मरोगे।
- 2:14:17उधर भी मरोगे, लेकिन ये मरना ऐसा स्वधर्म में के बहूर न मरना होय
- 2:14:24ऐसी मरणी जो मरे बहूर न जन मर न होय।
- 2:14:29अगर ऐसी मर नहीं मरोगे, फिर नहीं मरोगे, अगर वैसी मर नहीं मरोगे,
- 2:14:34तो बार बार मरोगे। सर तुम्हारे हाथ में सोचो।
- 2:14:44तो मैं। धन्यवाद।