Latest / Khushei Ki Duniya / गुड़ रोटी: Woh Bhukhe Hain 👁️🗨️🔥
Transcript
- 0:00कहते हैं की मौत सब कुछ खत्म कर देती है।
- 0:03पर क्या एक बच्चे के जाने के बाद किसी माँ की ममता भी खत्म हो जाती
- 0:08है या फिर वो इतनी जिद्दी होती है कि मिट्टी के नीचे सोए बच्चों को
- 0:14भी आवाज देकर वापस बुला ले? ये कहानी डर की नहीं है।
- 0:18एक कहानी है एक माँ की, उसकी ममता की जो मैं आज तुम्हें सुनाने आई
- 0:24हूँ सुहाई गाइस थिस इस युअर होस्ट कम दोस्त खुशी और अपने कानों में
- 0:29लगा लो दुनिया से थोड़े से दूर हो जाओ और सुनु ये किस्सा क्योंकि
- 0:35कहानियों झूठ हो सकती हैं पर किस्से?
- 0:38कभी नहीं जाते। ये कहानी है निर्मला की।
- 0:43निर्मला शादी कर कर जब अपने पति के घर आई तो वो बहुत खुश थी।
- 0:48उसका पति उसे बहुत प्यार करता था और एक खुशहाल परिवार में उसकी
- 0:52शादी हुई थी। शादी के 1 साल बाद ही निर्मला के
- 0:56घर में किलकारिया गूंजी क्नॉइस वो बहुत खुश थी अपनी संतान से और वो
- 1:01चाहती थी कि उसे दुनिया की सारी खुशियां दे दे।
- 1:04वो आखिर कौन माँ नहीं चाहती कि उसके बच्चे को दुनिया की सारी
- 1:08खुशियां मिले? निर्मला भी यही चाहती थी।
- 1:11उसका बेटा अशोक बड़ा होकर खूब नाम कमाए।
- 1:14खूब शोहरत कमाए, उसके गांव में खूब इज्जत हो।
- 1:18बहुत खुश थी। वो बड़े प्यार से अपने बेटे का
- 1:21पालन पोषण कर रही थी और उसके बाद उसकी एक और औलाद होती है।
- 1:26जब उसने जन्म दिया अतुल को तो वो दूसरी बार माँ बनी थी और वो एहसास
- 1:32भी उतना ही खूबसूरत था जब वो अशोक की माँ बनी थी।
- 1:35और वो अपने बेटे को बहुत प्यार से पाल रही थी।
- 1:38उसके दोनों बच्चे उससे बहुत प्यार किया करते थे।
- 1:41एक बेटा 5 साल को होने को आया था और दूसरा बेटा 3 साल का था।
- 1:46दोनों ही बहुत प्यारे थे और निर्मला को हँसी मजाक करने की
- 1:50बहुत आदत थी। 1 दिन जब वो गांव के कुएं से पानी
- 1:55भरकर आ रही थी तो वो देखती है कि एक तांत्रिक वहाँ से जा रहा था और
- 2:00उसके साथ एक बच्चा था जिसे देखने के बाद उसने तांत्रिक से कहा ये
- 2:06बच्चा कहाँ से चुराकर लाए हो? तुम किसका बच्चा है?
- 2:09ये तांत्रिकों के साथ तो बच्चे नहीं होते।
- 2:13तो तांत्रिक ने बड़े ही सहज भाव से कहा कि ये मेरा बच्चा है और ये
- 2:19मेरे साथ ही रहता है। निर्मला को इस बात पर हँसी आ गई
- 2:23और बोली अरे तुम शमशान में रहने वाले कब से माँ की ममता वाला
- 2:27प्यार बच्चों को दे पाओगे? इस बात पर तांत्रिक को थोड़ा
- 2:31गुस्सा आया। उसने निर्मला से कहा कि मजाक मत
- 2:35उड़ाओ हमारा ना हमारे बच्चे का बहुत प्यार से पालते हैं हम इसे
- 2:40पर निर्मला को फिर से इस बात पर हँसी आ गई और वो बोली, तांतरिक
- 2:45में ममता कहाँ से चुरा के लाये हो, बच्चे को वहीं लौटा कर आओ?
- 2:50तुम जैसे लोगों के साथ बच्चे शोभा नहीं देते।
- 2:53तंत्र को इस बात पर बहुत गुस्सा आ गया और उसने कहा अपनी माँ होने पर
- 2:58बहुत घमंड है ना तुझे बहुत ज्यादा घमंड कर रही है ना तू अपना माँ
- 3:02होने का, अपनी ममता का तो जा बचा ले।
- 3:05अब अपने बच्चों को तेरे घर में अब किलकारियां नहीं गूंजेगी।
- 3:09मौत, गूंजेगी मौत इस बात पर मैं निर्मला थोड़ी सी घबराई थोड़ी सी
- 3:14सक पकाई, पर बोली अरे तुम्हारे कहने से कुछ नहीं होता है, हमारी
- 3:18ममता है ना वही काफी है मेरे बच्चों के लिए और वो वहाँ से चली
- 3:23जाती है और जब अपने घर जाती है तो सबसे पहले अपने बच्चों को देखती
- 3:27है। उसके बच्चे एकदम सही सलामत थे और
- 3:31वो सोचती है कि ऐसे ही कोई तांत्रिक कुछ कह जाएगा तो मेरे
- 3:36बच्चे मुझसे थोड़ी छीन जाएंगे और चीजें सामान्य थी।
- 3:40हर दिन की तरह पूरा दिन अच्छा गुजरा।
- 3:43उसके बाद हफ्ते, महीने और निर्मला ये बात भूल गई।
- 3:48की किसी तांत्रिक ने उसे कुछ कहा भी था ऐसा?
- 3:51उसके बाद निर्मला जब फिर से पेट से थी तो उसका बड़ा बेटा अशोक अब
- 3:577 साल का हो गया था और छोटा बेटा अतुल 5 साल का।
- 4:01पर 1 दिन जब वो दोनों बाहर खेल रहे थे तो अशोक मानो बस।
- 4:07वहाँ खड़ा रहा। अतुल उसकी तरफ बॉल फेंक रहा था और
- 4:11अशोक स्तब्ध खड़ा था। कुछ देर बाद एकदम से अशोक जमीन पर
- 4:16गिर जाता है। अतुल चिल्लाता है, अपने माँ बाप
- 4:19को बुलाता है और उसके आँखों के सामने अशोक की आँखों से खून आने
- 4:25लगता है। और देखते ही देखते अशोक झटपटा कर
- 4:29वहीं मर जाता है। ये दृश्य देखने में बहुत खौफनाक
- 4:32था और एक माँ जो अपने बच्चे को इस हालत में देखे उसके दिल पर क्या
- 4:37गुजरती है ये सिर्फ उसे ही पता है।
- 4:41निर्मला मानो पागल से हो गई थी। उसके कोप में एक और बच्चा था और।
- 4:46अब उसे उसका भी डर लगने लगा था। अशोक की ये अजीबोगरीब मौत से पूरे
- 4:51गांव में डर का माहौल था कि आखिर ऐसे कैसे मौत हो गई।
- 4:55उसकी पर कहीं ना कहीं निर्मला का दिल जानता था कि कहीं उस तांत्रिक
- 5:02के श्राप की वजह से तो नहीं हुआ। पर निर्मला ने सोचा नहीं ऐसा नहीं
- 5:07हो सकता है। उसके बाद वो अतुल का और ध्यान
- 5:10रखने लगी। बहुत कोशिश करती कि अतुल हर वक्त
- 5:13उसकी आँखों के सामने रहे। जब अतुल 7 साल का हुआ तो अतुल के
- 5:18साथ भी वही हुआ जो अशोक के साथ हुआ था।
- 5:22निर्मला मानो पागल सी हो गई। उसे समझ ही नहीं आया कि 2 साल के
- 5:27अंदर उसके दो बेटे खत्म हो गए और कैसे?
- 5:31हाँ वो तांत्रिक श्राप देकर गया था पर 7 साल ही क्यों उसे नहीं
- 5:36समझ आ रहा था। उसने अपनी गोद में रखे अपने बच्चे
- 5:39को देखा और सोचा कि क्या मुझसे सचमुच उस दिन गलती हो गई थी?
- 5:44क्या मैंने उस तंत्रिक की ममता का मजाक उड़ाकर अपने ही बच्चों की
- 5:48जान खुद ले ली? पर अब बचता है क्या होता?
- 5:53उसके दो बच्चे जा चूके थे। अब हर वक्त उसे डर लगा रहता कि
- 5:57कहीं जो उसकी गोद में बच्चा था वो भी तो नहीं उससे छीन जाएगा और जो
- 6:03सोचा। वहीं हुआ।
- 6:05जैसे ही उसका तीसरा बेटा 7 साल का हुआ, उसकी भी छत से गिरकर मौत हो
- 6:11गई। अब मानो निर्मला पागल हो गई थी।
- 6:15पूरी तरह से उसे नहीं समझ आ रहा था कि अब वो आगे करे तो क्या करे?
- 6:20उसके तीन बच्चे खत्म हो चूके थे। क्नॉइस और कौन माँ सह सकती है
- 6:25अपने बच्चों को अपनी आँखों के सामने ऐसे जाते हुए देखना निर्मला
- 6:31टूट चुकी थी, रो रोकर पागल हो गई थी 1 दिन रात में जब उसके तीसरे
- 6:37बेटे को भी लोग दफना कर आ गए तो वो सोचने लगी की अब अब वो क्या
- 6:41करेगी उसकी? तीनों औलाद खत्म हो गई थी।
- 6:45घर में कोई उसे माँ बुलवाने वाला नहीं था।
- 6:48उसके बच्चे जिन्हें गुड रोटी बहुत पसंद थी, अब किसे खिलाएगी वो?
- 6:52गुड रोटी क्या होगा जब उसके बच्चों को भूख लगेंगी?
- 6:57किसके पास जाएंगे? वो निर्मला यही सोचती रहे और फिर
- 7:01जाकर। वो रात में कब उठी और खुद शमशान
- 7:06में कहते हैं कि छोटे बच्चों को कुछ प्रांतों में जलाया नहीं जाता
- 7:11है, उनका अंतिम संस्कार नहीं होता है बजाय उसके उन्हें गाड़ दिया
- 7:16जाता है। गड्ढा बनाकर शमशान में ही निर्मला
- 7:20को पता था उसके दो बेटे कहाँ थे? और ये तीसरा बेटा भी वो जानती थी।
- 7:25वो श्मशान में जाती है गुड़ रोटी लेकर और कहती है अशोक अतुल रूखे
- 7:32हो गए ना बेटा आजा खाना खा लो माँ गुड़ रोटी लाई है उसके बाद वो
- 7:38अपने तीसरे बेटे को भी आवाज लगाती है।
- 7:41रामू क्नॉइस बेटा भूखा होगा ना, आजा माँ खाना लाई है गुड रोटी
- 7:47मेरे बच्चों को बहुत पसंद है ना गुड रोटी और ये कहकर वहाँ खड़ी हो
- 7:52जाती है श्मशान के दरवाजे पर और देखते ही देखते उसके सामने उसके
- 7:58तीनों बच्चे थे। वो तीनों बच्चे मानो कब से अपनी
- 8:01माँ की राह देख रहे थे और वो खुशी के मारे रोने लग जाती है।
- 8:06फिर प्यार से अपने तीनों बच्चों को अपने हाथों से गुड रोटी खिलाते
- 8:11हैं। उसके बाद उन्हें कहती है चलो माँ
- 8:14तुम्हें घर लेने आई है बच्चों चलो घर जब वो घर जाती है क्नॉइस।
- 8:19उसके पैर मिट्टी में सने हुए थे। वो घर जाकर सो जाती है, पहले अपने
- 8:24बच्चों को सुलाती है और फिर खुद भी सो जाती है।
- 8:27अगले दिन सुबह सब देखते हैं कि निर्मला एकदम नॉर्मल थी जैसे मानो
- 8:32कुछ नहीं हुआ था। उसके तीनों बच्चे कहीं गए ही नहीं
- 8:35थे। उसके घरवालों को लगता है की शायद
- 8:38निर्मला ठीक हो गयी थी। शायद उसने मान लिया था की अब उसके
- 8:42बच्चे वापस नहीं आ सकते हैं पर ये कोई नहीं जानता था की निर्मला
- 8:48इसलिए शांत थी क्योंकि उसके तीनो बच्चे उसके सामने थे और अगले ही
- 8:53दिन से वो शुरू हो जाती है। अतुल।
- 8:56आजा तुझे नहला दूं बेटा अशोक ले गुड, रोटी खा ले राम आजा बेटा तू
- 9:03भी नहा ले और वो मानो जैसे उसे दिख रहे थे वो बच्चे पर किसी और
- 9:08को नहीं। किसी को नहीं पता था कि आखिर ये
- 9:11सब क्या चल रहा था और सबको लगा कि शायद।
- 9:15वो जीतने बड़े दुख से गुजरी थी, कुछ वक्त लगता उसे पर वो ठीक हो
- 9:21जाएगी गांव में सब लोगों को लगा कि हो जाएगा सब ठीक 1 दिन निर्मला
- 9:27को अब ये करते करते 10 दिन हो चूके थे।
- 9:30दसवें दिन वो अशोक को कहती है अशोक बेटा आ जा, गुड रोटी खायेगा।
- 9:35और वो उसे अपने हाथ से गुड़ रोटी खिलाती है तभी पास से गुजरी एक
- 9:39औरत कहती है पागल हो गई है क्या? निर्मला तेरे बच्चे मर चूके हैं,
- 9:45किसे रोटी खिलाती रहती है, किसकी बातें करती रहती है तो वो कहती है
- 9:50अरे बहन ये दिख नहीं रहा है तुझे अशोक ये रहा अतुल।
- 9:54और वो रहा राम कैसी बात कर रही है ये तो बैठे मेरे तीनो बच्चे और वो
- 10:00कहती है की निर्मला तू तो पागल हो गई है तेरा क्या होगा?
- 10:06अशोक गुस्से में आ जाता है पर निर्मला कहती है अरे बेटा ये पागल
- 10:10है, दिखता नहीं है उसे क्नॉइस। तुम लोग यहाँ बैठे तो हो?
- 10:13मेरी नजरों के सामने पर अशोक की आंखें लाल हो गई थीं।
- 10:17गुस्से से निर्मला कहती है कि बेटा जाने दे पर जैसे ही रात होती
- 10:22है उस औरत के घर में अजीबो गरीब चीजें होने लग जाती है।
- 10:27वो जब अपना दूध गर्म कर रही थी तो अचानक पूरा दूध काला पड़ जाता है।
- 10:32वो एकदम से डर जाती और कहती है अरे ये दूध कैसे काला हो गया?
- 10:36अरे ये तो बहुत बड़ा अपशगुन होता है।
- 10:39इतना कहना ही था कि पीछे उसका बच्चा आता है।
- 10:42रोते हुए वो देखती है कि उसके सिर से खून बह रहा था।
- 10:46जब वो पूछती है का हुआ लल्ला का हो गया?
- 10:50तू बताता है? माँ पता नहीं मैं बाहर खेल रहा था
- 10:53कोई कोई बच्चा आया और मेरे सर पे एकदम से उसने पत्थर दे पत्थर दे
- 10:57मारा कौन था बता मुझे पर मामू हमारे गांव का नहीं लग रहा था।
- 11:01मुझे पता नहीं कौन था मैं नहीं जानता और घर में अजीब सी चीजें
- 11:06शुरू हो गई। उसके घर में जो रोगियों रखी थी वो
- 11:09भी काली पड़ गई। औरत को लगा मानो क्या हो गया?
- 11:13फिर उसने देखा कि उसके घर की दीवार पर ऐसे पंजे बने हुए थे
- 11:18मानो छोटे छोटे हाथों की जैसे कोई उसके दीवारों पे चला था।
- 11:24अपने हाथ और पैर के बल पर ये किसी बच्चे के हाथ और पैर के निशान थे।
- 11:30जो देखने के बाद वो औरत पागल सी हो जाती है, घर से भाग जाती है और
- 11:35सोच ये सब क्या हो रहा है? वो रात अपने बच्चे और पति के साथ
- 11:39मंदिर में गुजारती है और उस दिन गांव वालों को पता लगता है कि कुछ
- 11:44तो गड़बड़ थी शायद निर्मला में या उसके घर में कुछ तो बात थी।
- 11:51जब वो औरत अगले दिन निर्मला के पास आती और उसे कहती हैं की बेहेन
- 11:55मेरे घर में क्या हो रहा हैं ये निर्मला निर्मला क्या हो रहा हैं
- 11:59ये सब तो निर्मला कहती हैं मैंने क्या किया?
- 12:03बहन मैंने तो तुम्हारे घर पे कुछ नहीं किया तेरा बच्चा आया था मेरे
- 12:08घर पे अशोक। तो वो औरत ऐसे मानो ऐसे कह रही थी
- 12:13जैसे उसने भी अशोक को देखा था तो निर्मला कहती है अरे मैं इसको मना
- 12:18कर दूंगी, ये ये बच्चा है ना, अब आप उस दिन ऐसे बोल कर गयी ना तो
- 12:23बुरा लग गया होगा। अशोक आज के बाद तो नहीं जायेगा ना
- 12:26किसी को तंग नहीं करेगा ना बेटा। और अशोक हाँ में सर हिला देता है।
- 12:30वो उस औरत से कहती है अब कुछ नहीं होगा बहन तुम अपने घर जाओ आराम से
- 12:35अब ये तुम्हे तंग नहीं करेगा। वो औरत अपने घर चली जाती है पर
- 12:39उसके बाद गांव में पंचायत बैठती है और वो सब कहते हैं कि मानो
- 12:43निर्मला के साथ कुछ अजीब था। कोई भी निर्मला से कुछ भी कहता
- 12:47तो। उसके साथ कुछ ना कुछ गलत होता,
- 12:50कुछ बुरा होता, कुछ डरावना होता और हर बार कहीं ना कहीं किसी
- 12:56बच्चे का जिक्र जरूर होता। ये क्या था, क्यों था किसी को
- 13:00नहीं समझ आया। निर्मला के घरवालों को शुरुआत में
- 13:04जो एक आम सी बात लग रही थी कि एक माँ का ट्रॉमा था, शायद वो।
- 13:09कि उसे वो बच्चे दिख रहे होंगे। पर क्या सच में वो बच्चे थे वहाँ
- 13:13पे और थे तो अब क्या किया जाए? फिर पूरे गांव ने मिलकर एक बहुत
- 13:19बड़े पंडित जी को अपने गांव बुलाया और उन्होंने सारी बातें
- 13:24पंडित जी को कह दी। उसके बाद वो निर्मला के घर जैसे
- 13:27ही जाने लगे तो उन्हें पता चला उस घर में कुछ अजीब था।
- 13:32निर्मला के बिस्तर के पास तीन बच्चों के पैरों के निशान थे जैसे
- 13:37मानो वो राख पर से चलकर आए थे। कुछ अजीब पूरे घर में छोटे बच्चों
- 13:42की किलकारिया भी थी। जैसे छोटे बच्चे एक दूसरे के साथ
- 13:45खेलते हुए हंसते हैं। कुछ वैसा किसी को कुछ समझ नहीं आ
- 13:50रहा था। पंडित जीके अलावा निर्मला के घर
- 13:53में कोई नहीं घुसा। निर्मला के खुद के घरवाले भी अब
- 13:56उससे डरने लगे थे। कोई भी निर्मला को कुछ भी कहता,
- 14:00उसके साथ कुछ बुरा हो जाता। जाने अनजाने कुछ तो हो जाता।
- 14:05पंडित जब निर्मला के पास जाते हैं तो निर्मला बहुत प्यार से पंडित
- 14:08जीके पैर छूती है। बहुत आदर सद्भाव से उनका स्वागत
- 14:11करती है और कहती है पंडित जी आप हमारे घर तो वो कहते हैं बेटा
- 14:18तुम्हारे बच्चे कहाँ है? तो निर्मला कहती है ये बैठे ना
- 14:22पंडित जी। जाओ पंडित जीके पैर छुओ, पर वो
- 14:25बच्चे उठते नहीं है। पंडित जी कहते है कोई बात नहीं है
- 14:29बेटा तू बच्चों को डांट मत नहीं छू रहे है, पैर तो कोई बात नहीं
- 14:33है। उसके बाद पंडित जी निर्मला से
- 14:36पूछते है निर्मला तुम्हारे बच्चे कब से तुम्हारे साथ वापस आए है?
- 14:41तो निर्मला ने बताया। पंडित जी, ये गांव वाले तो मेरे
- 14:45बच्चों को मारा समझ के शमशान ले गए थे और मैं उन्हें वापस लेकर
- 14:49आयी और जब वो पंडित जी को उस रात की सारी बात बताती है तो पंडित जी
- 14:54को तारीख से समझ आता है की वो अमावस की रात थी।
- 14:57शायद उस रात गलती से वो किसी। गलत मायाजाल में फंस गई थी या कोई
- 15:03गलत बच्चों की आत्मा उसके साथ आ गई थी, पर अब किया क्या जाए?
- 15:08उसके बाद पंडित जी गांव में ही एक हवन करते हैं।
- 15:11निर्मला को बुलाया जाता है। उसे समझाया जाता है कि वो उसके
- 15:16बच्चे नहीं थे जो उसके साथ रह रहे थे।
- 15:19निर्मला अब मानती तो नहीं है। पर जब सब बहुत कहते हैं तो वो
- 15:23पूजा में बैठ जाती है। बच्चे मना करते हैं निर्मला को,
- 15:27पर निर्मला कहती है बेटा डरने की क्या बात है?
- 15:30पंडित जी हैं, पूजा ही तो हो रही हैं।
- 15:33निर्मला सिर्फ उनको अपने बच्चों की तरह देख रही थी पर वो असल में
- 15:38आत्माएं थी। उसके बाद पंडित जी हवन करते हैं
- 15:42और देखते ही देखते निर्मला के बच्चे झटपटाने लगते हैं।
- 15:46निर्मला कहती है और रोक दो। इस हवन को मेरे बच्चे, मेरे बच्चे
- 15:50परेशान हो रहे हैं। पंडित जी कहते हैं निर्मला बस कुछ
- 15:54देर और रुको यहाँ पर उसके बाद धीरे धीरे उसे दिखता है कि वो
- 15:59उसके बच्चे नहीं थे। वो तो कुछ और था, कोई प्रेत आत्मा
- 16:03जो उसके साथ आ गयी थी, उस दिन शायद गलती से या शायद उसकी ममता
- 16:07के वजह से वो बच्चे निर्मला से प्यार करते थे पर कोई अगर निर्मला
- 16:12को कुछ भी गलत कहे तो फिर वो उसके साथ कुछ बहुत बुरा किया करते थे।
- 16:18उसके बाद पंडित जीके समझाने पर और गांव वालों के समझाने पर निर्मला
- 16:23उन सब बच्चों को अपने सामने खत्म होता देखती है।
- 16:27वो बहुत रोती है है और उसे समझ आता है कि शायद यही सही था उसके
- 16:32लिए उसके देखते ही देखते वो बच्चे वहाँ से गायब हो जाते।
- 16:37निर्मला बहुत रोती है, उसके घरवाले उसे संभाले हैं और कहते
- 16:41हैं जो हो गया वो हो गया। अब बच्चों को वापस नहीं लाया जा
- 16:46सकता। अतुल, अशोक और रामू अब इस दुनिया
- 16:50में नहीं है पर जिंदगी खत्म नहीं होगी।
- 16:54तुम्हारी ममता है। वो बच्चे जहाँ भी होंगे खुश
- 16:58होंगे। शायद उनके नसीब में इतना ही आना
- 17:01था। उसके बाद निर्मला सबको बताती है
- 17:03उस तांत्रिक की कही हुई बातें, तांत्रिक का श्राप जिसकी वजह से
- 17:08ये सब शुरू हुआ था। पंडित जी उसके लिए भी कुछ उपाय
- 17:12देते हैं और फिर नौ महीने बाद क्नॉइस।
- 17:15निर्मला फिर से माँ बनने वाली थी। उस बार वो खुश थी की शायद अब वो
- 17:20श्राप जा चुका था, शायद पंडित जी की पूजा की वजह से पर जैसे ही
- 17:25उसका बच्चा पैदा होता है वो बच्चा जिंदा नहीं था पर पंडित जी को
- 17:31कहीं ना कहीं आशंका थी इस बात की क्नॉइस।
- 17:34तो पंडित जी उस दिन गांव आए थे जब उन्होंने निर्मला के घर से रोती
- 17:38हुई निर्मला की चीखें सुनी तो वो समझ गए कि शायद वो श्राप अभी तक
- 17:43खत्म नहीं हुआ था। वो तांत्रिक जो भी था, कोई बड़ा
- 17:47तांत्रिक था पर पंडित जी ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी।
- 17:52जैसे ही उन्होंने निर्मला के बच्चे को अपनी गोद में उठाया
- 17:55उन्होंने समझ आगया की ये उस शराब की वजह से हो रहा था।
- 18:00उसके बाद उन्होंने कहा की शायद जिसने इसकी ज़िन्दगी ली है उसकी
- 18:06ज़िन्दगी भी वही वापस दे। उसके बाद उन्होंने उस बच्चे को
- 18:10पहले भगवान के आगे कुछ देर रखा और भगवान से प्रार्थना की।
- 18:15उसके बाद एक माँ की ममता थी। निर्मला अभी उठ खड़ी हुई और उसने
- 18:20भी भगवान से रोते बिलखते हुए अपने बच्चे के लिए भीख मांगी पर उसका
- 18:25बच्चा अभी भी सांस नहीं ले रहा था।
- 18:28पंडित जी भी क्नॉइस। आज हारने लगे थे, फिर उन्हें कुछ
- 18:32याद आया अपने गुरूजी की बात। उन्होंने कुछ मंत्र जाप किए और उस
- 18:37बच्चे को अनाज के एक बड़े से ढेर में दबा दिया।
- 18:42गांव वालों को ये बहुत अजीब लगा। उन्होंने कहा कि अरे ऐसे तो बच्चे
- 18:45को सांस आनी भी होगी तो नहीं आएगी।
- 18:48पर पंडित जी ने कहा भरोसा रखो ये अनाज ही है जो हम सबको जिंदा रखता
- 18:52है, इस बच्चे को भी जरूर जिंदा करेगा।
- 18:56उसके बाद पंडित जी ने कई देर तक काफी देर तक मंत्र जाप किया और
- 19:01फिर कुछ देर बाद उस गेहूं के ढेर में से गेहूं गिरने लगे।
- 19:07और वो बच्चा हाथ पैर मारकर रोने लगा।
- 19:11उस बच्चे के रोने से मानो पूरे गांव में जान आ गई थी और निर्मला
- 19:17उसकी आँखों से खुशी के आंसू गिरने लगे थे।
- 19:20शायद उसके बच्चे या कोई तो कुछ तो हुआ।
- 19:26जिसकी वजह से उसका मरा हुआ बच्चा भी अब उसके सामने वापस था और वो
- 19:30खुश थी। उसके बाद निर्मला के और भी बच्चे
- 19:34हुए और उसका परिवार खुशहाल हो गया।
- 19:37फिर से और ये कोई फेक स्टोरी नहीं थी।
- 19:41ये एक असली कहानी थी। उसके बाद निर्मला का वो बच्चा,
- 19:45उसका खुद का एक बहुत बड़ा परिवार बना और वो सब आज तक बहुत खुशहाल
- 19:50है। ये कहानी आज से करीबन 8085 यानी
- 19:54की 80 टु 85 इयर्स ओल्ड है तो ऐसी ही थी ये कहानी कभी कभी हम अनजाने
- 20:01में। कुछ ऐसी चीजों को बुलावा दे देते
- 20:03हैं जो शायद हमारी ही जिंदगी को खराब कर देती है।
- 20:06बाद में अगर उस दिन निर्मला और तंत्रिक को नहीं कुछ बोलती या
- 20:11उसका मजाक नहीं उड़ाती तो शायद उसकी जिंदगी में वो सब नहीं होना
- 20:16पर कहते हैं की होनी को कोई टाल नहीं सकता है।
- 20:19क्नॉइस। शायद उसके तीन बच्चों की जिंदगी
- 20:21उतनी ही थी। उन्हें जाने के लिए किसी श्राप की
- 20:24जरूरत थी जो निर्मला की करनी से उन्हें मिला और यही थी हमारी आज
- 20:30की कहानी। मिलती हूँ तुमसे किसी और स्पूकी
- 20:33सैटरडे के किसी और डरावने से एपिसोड के साथ तब तक के लिए टेक
- 20:37केयर एंड बाई बाई।