Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Apr 26 - प्राण, निद्रा और मूर्छा में क्या फ़र्क़ है? साक्षी होने का अभ्यास कैसे करें? मौन vs नामजप
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- 0:11गुरूजी प्राण क्या है इसके बारे में सोच सोचकर मैं पगला जा रहा
- 0:28था। सोचता था यह प्राण क्या होते हैं?
- 0:35जो निकल जाते हैं उसके बाद सारा शरीर निष्क्रिय हो जाता है।
- 0:44आज आपने पूरा धूल साफ कर दिया। एक लास्ट क्वेश्चन मेरा राधे राधे
- 0:56और हनुमान जी राम राम बोल के एनलाइट हुए तो ये राम राम।
- 1:06क्या और कैसे किया या करना चाहिए या ये भी गप है?
- 1:20आइए इसको हम साइंटिफिक तरीके से। समझाने की कोशिश करेंगे आप गाड़ी
- 1:32पर जा रहे हो बीच सड़क में जाके गाड़ी रुक गए।
- 1:38सर आपने देखा कि फ्यूल की टंकी? शून्य होगी तो आप किसी नजदीकी
- 1:54पेट्रोल पंप पर जाकर वह फ्यूल भरवा लेंगे।
- 2:02नींद क्या? आपकी गाड़ी का फ्यूल समाप्त हो
- 2:08जाए। फिर प्रकृति आपको अपने उस अंत के
- 2:16तल पर दकील देती है जहाँ पेट्रोल पंप है।
- 2:26और वहाँ का पेट्रोल पंप आपकी कार का टैंकी को पेट्रोल भर देता है,
- 2:40आपकी गाड़ी पुनः चलनी शुरू हो जाती है।
- 2:45यहाँ तक आप गौर से सम्मलित निद्रा एक प्रकार की मोर्चा है, आपने
- 3:06देखा? बच्चे अभी चाल बाजियां सीखे नहीं,
- 3:16उनको किसी जागरण में ले जाओ, उनको घूमाने ले जाओ, जब उनका शरीर
- 3:27एनर्जीलैसनेस में आ जाएगा। उनको प्रकृति सुलह देती है।
- 3:39प्रकृति जानती है कि इसके शरीर का फ्यूल ब्रेन का फ्यूल समाप्त हो
- 3:46गया है। और वह बिना बताए सो जाता है।
- 3:54लेकिन आप फिर भी कुछ फ्यूल हमारे भीतर तीन तल होते हैं।
- 4:08आप ज़ोर जबरदस्ती जागते हो और दूसरे तल से फ्यूल लेना शुरू कर
- 4:15देते हो लेकिन वो भी खत्म हो जाता है।
- 4:26मनुष्य ने यह जो ज़ोर जबरदस्ती करना सीखा।
- 4:33यह उसके आनंद के मार्ग का एक कंठ केला अरोड़ा बनता है।
- 4:49निद्रा का अर्थ है कि आपकी शरीर की शक्ति, आपकी गाड़ी का शोर
- 4:56समस्त हो गया तो प्रकृति तुम्हें अपने भीतर धकेल देती है उस स्थल
- 5:04पर जहाँ फ्यूल इज़ अवेलेबल। अब आपने कहा कि राम राम राते राते
- 5:20हैं। हनुमान, हनुमान, शिव, शिव, शिव,
- 5:24शिव नाम जप नाम जप करते करते। आपकी शक्ति वह हो तो देख मुर्दा
- 5:45नाम जप नहीं कर सकता। अगर कोई डेरे का भगत सच खंड में
- 5:57चला गया। उसके कान में बोलो के पांच नाम
- 6:03बताओ कौन से? उन्होंने बताया, क्योंकि वह मर
- 6:12क्या है? उसने अपनी तमाम शरीर की संरचना का
- 6:18श्योर समाप्त कर दिया है। राधास्वामी डेरे के हिसाब से वह
- 6:28सच है। बस इनकी परमुरक्षा ही सच कंठ है,
- 6:35जबकि मेरा सच गठ परम जागृत। हमारे दोनों के बीच में यही अंतर
- 6:43है और यही विशाल अंतर है वो तुम्हारी शक्ति को खर्च करवा करवा
- 6:52कर। तुम्हें मूर्छा में धकेल देंगे,
- 6:58तुम्हें शक्ति विहीन कर देंगे और शक्ति विहीन अवस्था में प्रकृति
- 7:05में अपने भीतर फेंक देंगे और एक बात ध्यान में रखना जब प्रकृति
- 7:12तुम्हें अपने भीतर फेंक देगी तो भीतर वो टैंक है।
- 7:17जहाँ जाकर आपको फ़ौरन प्रकृति फ्यूल भर देगी, यही वर्षों वर्षों
- 7:23तक चलता रहेगा। तुम फिर उठ के पांच नाम जपने लग
- 7:33फिर खाली हो जाओगे। यही तो रोज़ करते हो तुम अपने
- 7:39व्हीकल के साथ तुम क्या करते हो फिर फिर खत्म हो जाता है फिर फिर
- 7:45तुम जाते हो, रोज़ ही तो करा रहे हैं तो इन गुर बोले क्योंकि तुम
- 7:54अनजान थे। और कोई ज्ञानी पुरुष स्थान यह
- 8:00मुसीबत सृष्टि का वह एनलाइटन फर्स्ट एनलाइटन पर्सन को क्या
- 8:13जरूरत पड़ी? कि वह जानता है उस स्तर पर और कोई
- 8:24गैर नहीं अब दो बातें सुख मोर्चा में भी हैं।
- 8:36सुख निद्रा में भी है और सुख ध्यान में भी है।
- 8:44समाधि में भी है, सुख जागने में भी है।
- 8:53पर आप उसका वेद नहीं कर पाते, वेद बदलाने वाला कोई है नहीं।
- 9:02इसलिए मैं किसी को नाम जप करने से रोकता नहीं।
- 9:11नाम जप तुम समझते रहो के परमात्मा तक पहुंचा देगा और बहुत से लोग जप
- 9:23करते करते मर जाते हैं सारी आंश। रोज़ मूर्छों में धकेले जाते हैं।
- 9:31उसी को वो आनंद मान लेते हैं तो तुम भाई किसी भी चीज़ को आनंद मान
- 9:39लो तुम्हारे मानने से। वह मूर्षा आनंद तो नहीं बन जाएगी?
- 9:57बीच में से एक क्वेश्चन तुम क्यों कहते हो अचार्य जैसे लोग कभी सुख
- 10:02ही नहीं हो पाएंगे। कारण साइंटिफिक।
- 10:11कारण है कि ये चीज़ वह बता रहे हैं।
- 10:15इस अविषाध सृष्टि में आग का गोला सूरज दहक रहा सारे नक्षत्र ग्रह
- 10:27हैं तारे। आकाश गंगा ब्लैक होल्स, ब्रह्मंडक
- 10:36एक्यूरेट स्थिति में घूम रहे और यह लोग गीता का अनुवाद करते हैं।
- 10:51यह अपने मन में ही माने बैठे हैं कि हम सब कुछ जानते हैं कि
- 10:57एनलाइटनमेंट होता नहीं बिना खंगाले बिना खोजे।
- 11:11निहित स्वार्थों के कारण मैं साइंटिफिकली ढंग से इसीलिए बोल
- 11:21सकता हूँ विथ फुल कन्फर्मेशन जैसे कोई जहर गया।
- 11:32जैसे ऐसे समझौते मोनो नाम का एक जहर होता है जो जमींदार लोग अपनी
- 11:45फसलों पर कीड़ों को मारने के लिए। क्लोरो भी होता है, एक ज़हर होता
- 11:55है ऐन्डो ऐन्डो सेल्फ फर्स्ट। यह इतना तीक्षण जहर है कि अगर कोई
- 12:08व्यक्ति इसको पी लेगा, पूरा गैलन पी लेगा।
- 12:13और मेरे सामने पीलेगा आई कैन प्रॉडक्ट आई कैन प्रॉडक्ट दट ही
- 12:22विल दिए क्यों? क्योंकि मैं जानता हूँ एन्डो
- 12:29सल्फान। बड़ा तेज़ जो जहर है मैं किसी
- 12:37सेंटिफिक कार्य से बोल रहा हूँ, मोनो भी जहर है, लेकिन इतना तेज़
- 12:45नहीं ग्लोरो भी जहर है, लेकिन इतना तेज़ नहीं जितना इंडोर है और
- 12:50अगर कोई पोटैशियम सायनाइड को हो। तो क्या मैं भविष्यवाणी नहीं कर
- 12:58सकता? तुम भी भविष्यवाणी कर सकते हो
- 13:00क्या क्या यह मर गया मैं भविष्यवाणियां बिल्कुल साइंटिफिक
- 13:10वैसे कसकर। कसौटी पर कसकर बोला करता हूँ फिर
- 13:18तुम्हारा संसार इसे माने या नम? मुझे इससे कोई लेना देना क्योंकि
- 13:30ये कहते हैं। की जैसे मार्क कसने का परमात्मा
- 13:41नहीं होता और बड़े बचकाना तर्क भी।
- 13:49जो परमात्मा हमें खाने को रोटी नहीं थी, हम उसे कैसे मानें?
- 14:02मार्कस अब समझा गई ना आपको, मार्कस बहुत बड़ी बोल में।
- 14:11परमात्मा ने तो रोटी का साधन सब दे दिया।
- 14:15सबकी अलगअलग इच्छाएं हैं, कोई कणक की रोटी खाना चाहता है, कोई बाजरा
- 14:23की, कोई ज्वार की, गुड़, मक्खी, कोई चावल खाना चाहता है तो उसने
- 14:29आपको राम मटेरियल। जमीन दे दी, पानी दे दिया,
- 14:36ऑक्सीजन दे दी, खाद दे दी, आसमान में 15,00,00,000 मील दो।
- 14:52एक चमकता हुआ सूरज रख दिया। इन सब चीजों को मिलाकर अन्न
- 15:02उपजालों जो तुम्हें अच्छा लगता है फिर मूंगी।
- 15:09मूठ उड़द मसहर अरहर कुछ भी परमात्मा तुम्हें रोटी तो दी
- 15:22लेकिन परमात्मा जानता है कि मैंने भांति भांति के जीव जंतु पैदा
- 15:27किए। अब जैसे मोर है, मक्की खाता है,
- 15:32खुश हूँ, पेट भरने को कुछ भी खाले तो मार्क्स को मैं बुद्धू को कहता
- 15:47हूँ। इतना बचकाना सवाल जिसकी बुद्धि हल
- 15:50नहीं कर सकती, वह बच्चों जैसी बातें ही तो होंगी?
- 15:58तो फिर मार्क्स तुम रोटी खाकर बोलते हो?
- 16:03वह रोटी दी किसने? मार्क्स चूक गए।
- 16:08मार्क्स को यह नहीं पता लगा कि जिन गरीबों को रोटी नहीं मिलती उन
- 16:15गरीबों की रोटी, अडानी, अंबानी जैसे लोगों ने कैद कर ली है।
- 16:22डिस्ट्रिब्यूटिंग प्रोसेसर गलत है।
- 16:30परमात्मा ने तुम्हे सब कुछ दिया है अगर परमात्मा को तुमसे द्रोह
- 16:35होता तो वह ऑक्सीजन को खींच ले। तुम बच के दिखा दो नहीं, परमात्मा
- 16:46तुम्हे खिलाना चाहता है और जीवन के सारे साधन तुम्हे उपलब्ध कराए
- 16:51हैं। इसलिए तो तुम्हें खड्ड मस्तियां
- 16:53सूझती है। जब तुम अमीर हो जाते हो तो तुम
- 16:59वेन्जवला से कहते हो ईरान से कहते हो ये तेल मुझे दे दे खोम नहीं तो
- 17:08तेरे बाप क्या कहते? तू सारा खा के मरेगा क्या?
- 17:18संसार का सबसे अमीर मोलकर है रिचेस्ट कंट्री ऑफ दी वार तेल के
- 17:28लालच में। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति को उठा
- 17:31के ले जाते है। ऐसे मूर्ख लोक धरती पर रहने के
- 17:48योग्य नहीं है। इनको काट देना चाहिए।
- 17:57और यह पुण्य है, मैं तुम्हें गारंटी देता हूँ क्योंकि जिसके
- 18:05जाने से शांति हो जाए वही तो पुण्य होता है।
- 18:12जीस स्थल पर जाकर शांति मिल जाए। समाधि में वही तो तन मिलता है अगर
- 18:21एक ट्रिप का गला काट कर तुम देख लेना धरती सूखे हो जाते क्यों भाई
- 18:34क्यों बहन ज्वाला का तेल तुम? गृहस्थ में लेने चला है।
- 18:40क्यों ईरान से तेल मांग रहा है? ईरान से क्यों कह रहा है कि तू
- 18:48अनुभव नहीं बनाएगा, क्योंकि ईरान कहीं दुनिया को समाप्त न कर दे?
- 18:57तुम्हारा क्या भरोसा है? तुम पल पल में बयान बदलते हो,
- 19:02ईरान तो एक ही बयान पर डाटा बादलपन तो तुम्हारे बातों में
- 19:10झलकता है। 2 घंटे पहले तुमने कहा कि हार्मोस
- 19:16की हमें कोई जरूरत ही नहीं है। हमें तेल वहाँ से चाहिए ही नहीं
- 19:20और 2 घंटे के बाद तुम कहते हो कि हार्मोस खाली कर दो, वरना यह
- 19:26पागलपन की निशानी है। क्या ये समझदारी की है?
- 19:36इसलिए मैं कह सकता हूँ कि यह लोग कभी सुखी नहीं हो सके।
- 19:45सुविधाएं इनके पास तो होंगी। आज यह मेरा के पास सोना ही है।
- 19:53लेकिन अमेरिका में हर व्यक्ति दुख क्यों?
- 20:05अगर ऋत से होने में सुख होता है तो सबसे ज्यादा सुख अमेरिकन।
- 20:17लेकिन इनकी नीयत अपने आप के साम्राज्य को विस्तार करने की
- 20:22बताती है कि दे आर नॉट सेटिस्फाइ और यही बताती है सैटिस्फाइड न
- 20:31होना। इनके दुख से आता है।
- 20:38अगर ये आराम से कबीर की तरह सैटिस्फाइड होते हैं तो समझ में
- 20:44आता था कि इनकी अमीरी इनके सैटिस्फैक्शन का कारण।
- 20:52लेकिन आज इनकी अमीरी इनको तृप्ति नहीं दे पाई।
- 20:57इट मीन्स दे अरे नॉट सेटिस्फाइ और इससे ये एक और विवाद सिद्ध होती
- 21:03है कि अमीरी सटिस्फैक्शन नहीं दिया करते।
- 21:13बड़े से बड़े ओहदे के ऊपर होना सटिस्फैक्शन नहीं दिया करता।
- 21:18सारे दिन कांपते रहते हैं, वो कहीं वो फाइल ना खुल जाए हेरेन
- 21:25बांटे आकर। तुलसी प्रजापति की ना खुल जाए,
- 21:29जस्टिस लोया ना खुल जाए, सोहराह भी दिन की ना खुल जाए और पता नहीं
- 21:35किस किस को मारा होगा या ना दो बंधुओं ने मिलकर।
- 21:49दो सेठों का सहारा लेके जो लूटपाट मचाई, इतने वर्ष तक वह काबिल है
- 22:04तो जब तुम राम राम करते हो या पांच महीने करते हो।
- 22:13तो तुम अपनी कार के अपनी गाड़ी के शूल को जलाते हो, पलक के भी झपकते
- 22:24हो तो फ्यूल से बचा है राम राम करने से फ्यूल।
- 22:32कैसे नहीं जलेगा? राधेराधे करने से फ्यूल कैसे नहीं
- 22:35जलेगा और जब फ्यूल इतना जल जाएगा कि तुम्हारा टैंक खाली हो जाएगा
- 22:43तो फिर मोर्चा तुम्हें लपेट लेगी और तुम मूर्छित हो जाओगे।
- 22:49वह प्रकृति तुम्हें मोर्चा देती थी।
- 22:51ये बड़ी समझदार है प्रकृति अपने ढंग से तुम्हें जिंदा रखने की
- 22:57पूरी चिष्ट तुम बीमार होते हो तो तुम्हें पता नहीं, लेकिन प्रकृति
- 23:04तुम्हें सवस्थ करने में बड़ा सहयोग देती है।
- 23:09तुम्हें पता नहीं लगता बस? अब देखो इस दिल को तुम डरवा रहे
- 23:13हो यह स्वास्थ तुम डर रहे हो यह प्रकृति ही स्वास्थ्य तुम्हे
- 23:23दिलवा रही है। तुम कहते हो कि हनुमान?
- 23:33सीता सीता रात ही रात ये भी गप है क्या?
- 23:53एक बात करो तुम कोई भी नाम ले लो अपना ही नाम जब जो भी नाम है खैर
- 24:07आपने नाम तो नहीं लिखा? वैसे ही पता नहीं क्यों डर रखता
- 24:14है, वैसे ही हेमो वगेरा नाम रख के आगे डर डर रखता है।
- 24:26जब कोई बात नहीं, अपना ही नाम दोहराते रहो।
- 24:33बात दोहराव की है नाम की नहीं तुम राम राम जपो या टर र टर जपो या
- 24:45राधे राधे जपो या गधे गधे जपो। गाडी को तुम किसी दिशा में मोड़ो
- 24:57गाडी को तुम पाकिस्तान ले जाओ, गाड़ी को तुम कोलकाता ले जाओ,
- 25:06फ्यूल जलेगा। और फ्यूल के जलने से तुम धीरे
- 25:18धीरे हल्के हल्के मोर्चा में जाना शुरू हो जाओगे।
- 25:25उसको अगर तुमने आनंद मान लिया तो मानते जाओ किसी को क्या अर्थ?
- 25:35खैर, जब तुम शक्ति नहीं हो जाओ, तुमसे एक बार भी अपना नाम
- 25:44उच्चारित नहीं हो पाएगा। तो प्रकृति तुम्हें अपने भीतर पटक
- 25:50देगी। उस के पास जाओ, वहाँ से अपनी
- 25:55गाड़ी बना लो। यह निद्रा गाड़ी में फ्यूल बढ़ाने
- 26:01के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होता। तुम्हारा जप पांच नाम हो यार नाम
- 26:14हो तुम्हारा अपना नाम हो किसी का नाम यह तो जो लोग के
- 26:21शिड्यंत्रकारी थे और तुम बाहर से देख सकते हो।
- 26:27इनके डेरे शास्त्री के जाएंगे। और मज़े की बात तो ये है कि ये जब
- 26:39तक बैठी हैं बैठी हैं अपना उत्तराधिकारी न चुना के जाएं।
- 26:45क्योंकि उत्तराधिकारी भी नहीं पहुंचा है।
- 26:47ये भी नहीं पहुंचे इनके गुरु भी नहीं पहुंचे थे।
- 26:51यह एक गिरोह की शैतानियत है। ये चला था जयमल सिंह से।
- 27:03वहाँ से एक गुरु चला और एक नहीं चला।
- 27:07राधा नाम की स्त्री थी और उसके पति का नाम क्या था रणप्रीत उसको
- 27:18स्वामी जी स्वामी जी कहते थे। सात आठ उसके शिष्य थे।
- 27:29नामों में फर्क पड़ सकता है। थोड़ा सा समझा।
- 27:37उन्होंने गिरोह बना के गिरोह ही हमेशा।
- 27:43लूटने का तरीका बनाया करते हैं। उन्होंने बैठ के लूटने का तरीका
- 27:49बनाया। आग्रा के अंदर और फिर उन्हें जो
- 27:56बन में आ गया, जो नरंजन है कौन का?
- 28:02रणनकार सो हम सत्यन अच्छा कुछ भी लगा देते हैं।
- 28:09गधा वधा लगा देते तो कोई बात नहीं।
- 28:15उन्होंने कहा, लो भी तुम इस चीज़ का प्रचार करो, कह दो इससे भगवान
- 28:19मिल जाएगा। एक व्यक्ति का नाक कट गया, अब नाक
- 28:31का जख्म तो उसने ठीक कर लिया। महीने दो महीने में अब बाहर निकले
- 28:36ना वो? क्योंकि नाक कटा डंकटी हो आई
- 28:42चेहरा लबूल वाहन हुआ बता तो बहन स्वरूपण का ये कैसा घमसान हुआ?
- 28:50उसने कहा, मैं क्या बताऊँ ऐसे लोगों को आपत्तिकाल में।
- 28:59कुछ सुझाव मन देता है उनका शरारती है।
- 29:07वो बाहर आया तो लोग हँसेंगे। कितना हस्ते हैं क्या हस्ते हैं,
- 29:14तेरे को पता नहीं है कैसे पता है? क्या पता है तुम नाक को देख के
- 29:24हस्ते हो? हाँ अरे नाक काटने से भगवान देखते
- 29:31हैं हम ईशा वास में हम सर्वम। अच्छा पहले तो लोगों को विश्वास
- 29:41नहीं हुआ, लेकिन वो तो घूमता रहा। बहुत से लोग बेशर्मी की हद पार कर
- 29:48दिया करते हैं। मोदी जीते थे।
- 29:54कितनी गालियाँ पड़ती हैं, खुद बताते हैं, मैंने कहा भाई ऐसे काम
- 29:59क्यों करते हैं कि लोग तुम्हें गालियाँ निकालते हैं, ऐसे काम
- 30:07क्यों करते हो? मुझे निकालिए निकालते लोग।
- 30:12ज्यादा से ज्यादा कमेंट करते है सारा हिंदुस्तान का कितना तबका
- 30:21तुम्हें गाड़ियां निकालने में? और शर्म शर्म तो जैसे भगवान में
- 30:37तुम्हारे भीतर पैदा ही नहीं है। कब तक चिपटे रहोगे, दंड बने
- 30:45रहोगे? देश का इतना बुरा हाल करते?
- 30:52जैसे जैसे देश गर्त में जा रहा है ध्यान रखना।
- 30:56मोदी जी जब बोलेंगे ना देश तरक्की का रहस्य जो ये कहते हैं उससे
- 31:04उल्टा होता है करते हैं। इन्होंने कहा 2,00,00,000 रोजगार
- 31:08देंगे। रोजगार छीन लिए।
- 31:11इन्होंने कहा 6 दिन आएँगे बुरे दिनों में, इन्होंने कहा
- 31:1615,00,000 देंगे 15,00,000 छीन लिए तुमसे, इन्होंने कहा सुख
- 31:25शक्ति का महत्त्व होगा, न्याय मिलेगा सभी को।
- 31:28आज खुद ही ऐसे ऐसे कानून बना रहे हैं जिससे आप का न्याय जितना
- 31:35कमीता था वो भी खत्म हो जाए। सारी संस्थाएँ दे दी चुनाव आयोग
- 31:41से और मैंने तो सुबह भी चैलेंज किया था।
- 31:48अगर कोई न्यायपालिका का जज हाथ उठा के कह दे कि मैं ईमानदार हूँ,
- 31:56देखिए दो चार महीने का लगा हुआ है शुरू शुरू में तो वो ईमानदार के
- 32:00होता है, धीरे धीरे समझाती है, उसे काग होता जाता है।
- 32:06और सुप्रीम कोर्ट का जज आते आते तो परम का हो जाता है।
- 32:10चंद्रचूड़ बनते बनते, वह तो कहेगा कि मैं फैसला देते वक्त मैंने
- 32:19भगवान से पूछा कि हे भगवान मैं तो हार गया तो ही बताते।
- 32:27व्हाट शुड आई? मैंने कहा भाई मसला दो धर्का था
- 32:39तो भगवान से पूछ लिया और तुमने क्रियान्वयन कर दिया तो अल्लाह से
- 32:44क्यों? अल्लाह से भी तो पूछना था और क्या
- 32:52खाक बनाया है तुमने? राम मंत्र इसको खोद के देखा क्या
- 32:59कुछ मिला था? इसके पीछे सारा कुछ बहुत अधर्म का
- 33:06है। अगर तुम सच में राम मंदिर बनाना
- 33:14चाहते हो तो चलो मैं तुम्हें ले चलूँ जहाँ भगवान राम का जन्म हुआ
- 33:19था वो अक्चवल निशानदेही करके बता दूंगा यहाँ हुआ।
- 33:24जीस कमरे में हुआ था। माँ कुशाल्या ने भगवान श्रीराम को
- 33:28जन्म दिया था। वो स्थान था क्योंकि मैं आंधी काल
- 33:39की प्रार्थना आत्मा बहुत प्रार्थना आत्मा संयोग से
- 33:45परमात्मा ने मुझे इतना देरी से अनलाइट किया।
- 33:50तो उसका भी कोई कारण होगा? क्योंकि ये सब उसकी लीला है।
- 33:54ठीक है तुमने जहाँ राम मंदिर बनाया है चंद्रचूड़ जी तुम्हारा
- 34:02भगवान भोगस है जिसने तुम्हें कहा कि वैसाग बना दो यार।
- 34:10अगर सही राम मंदिर तुम बनाना चाहते हो भगीजनों भगवान राम के
- 34:16प्रति श्रद्धा है वह व्यक्ति कष्ट सहती सहती मृत्यु।
- 34:26मर्यादा को साधते साधते उसने कष्ट से अपने ही पांव पर कोहारी मार
- 34:33दिया, अपनी ही धर्मपत्नी को गर्भावस्था में महलों से निकाल
- 34:40दिया। गर्भ में दो बच्चे।
- 34:46जिन्हें महलों में करना चाहिए राम ने।
- 34:52मर्यादा साधते साधते कोई मन में छलकपट नहीं था, उस व्यक्ति पे
- 34:56पढ़ा, साफ सुथरा मलीनता ही कोई महल नहीं था।
- 35:04इतना साफ सुथरा और बड़ी ईमानदारी से मर्यादा को साधते साधते मर
- 35:11गया, लेकिन सदी ने परिणाम गलत आए। पत्नी सीता गलत बोल के गई तुम पति
- 35:22हो? तुम्हारा जैसा पति दुश्मन को भी न
- 35:25मिले फिर पुत्र आए पुत्र कहने लगे, अगर ऐसा ही कुछ करना एक
- 35:34व्यक्ति की कंप्लेंट के ऊपर जिसकी तुम अग्नि परीक्षा दे चूके हो।
- 35:45उसको बिना कटघरे में खड़े किए बिना अदालत लगाए, बिना सबूत मांगे
- 35:51बिना ज़रा करिए तुमने यक तरफ़ा रात्रि अर्ध रात्रि को।
- 35:59हमारे चाचा को आदेश दिया, लक्षणों के जाओ, छोड़ो पिता श्री बताइए
- 36:07आपने ये क्या किया? यह मर्यादा है क्या?
- 36:21लेखक से समझ न आते हैं। वेदना आते लेखक से समझ न आते हैं।
- 36:53राम सिया सियाराम से बिछड़े जाते हैं हों।
- 37:10वेदनाते लेखकशी के समझ न आते हैं और जो पेट में दी बच्चा उसको।
- 37:29पिता पुत्र से पुत्र पिता से पिछड़े जाते हैं।
- 37:43हो बिग नाते। लेखक किसी भी के मर्यादा सातती
- 38:05सातती मर गया जीवनरा सुनाया। गुप्त घाट पर सरयू में सुसाइड कुछ
- 38:20बंद नहीं है, पूजी नहीं है। ऐसा कुछ खुद का हित नहीं है।
- 38:30इसकी मर्यादा जुको जुको तक गाई जाती रह गाई जानी चाहिए।
- 38:39कुछ लोगों से अन्याय हो, उन लोगों से अन्याय नहीं होना चाहिए।
- 38:48दूसरा मेथड भी था। सीता की अग्नि परीक्षा ले चूके थे
- 38:57फिर भी अपने सारे दरबान को बुलाते सीता को बुलाते एस ए अक्यूस्ट
- 39:03तुम्हारे परदोष राम खुदभी खड़े हो?
- 39:10की मैंने अग्निपरीक्षण मैं उस वक्त गर्भवती थी और धोबी और धोबी
- 39:20को बताओ तुमने किस हिसाब से कहा? क्या सिर्फ तुमने बुद्धि के
- 39:30सुपोजिशन से मान्यता ही कर दी कि एक रात तू बाहर लगाई इसलिए मैं
- 39:39कोई राम तो जो तुझे घर में रख? इसलिए मैं कहता हूँ स्त्री को
- 39:52इंडी प्रेसिडेंट होना। सबसे ज्यादा दुख अगर इस सृष्टि
- 40:02में उठता है तो। या तो स्त्री उठाती है या बच्चे
- 40:09उठता है, बच्चों का जन्म उनकी रजा के बिना ही तुम करा देते हो और
- 40:20फिर बच्चों को तुम उनका बना हुआ हक।
- 40:25और फिर तुम उनको अपने भाइयों से लड़वाते हो, उनके दिमाग को पंगु
- 40:31बना देते हो, घिसा देते हो और फिर तुम कहते हो कि हम तो भगत है, हम
- 40:37तो रोज़ गुरुद्वारा जानते हैं, हम तो मंदिर मच्छी जाते हैं।
- 40:43तुम दुष्ट हो। जिसने अपने बच्चे तक की
- 40:49जिम्मेदारी नहीं समझी, उससे ज्यादा बड़ा दुष्ट और को मौका,
- 40:55क्योंकि बच्चा सिर्फ तुम्हारे पर नहीं हुआ, पड़ोसी के कारण नहीं
- 41:00हुआ। मोहन भागवत मैंने सुना है कहते
- 41:05हैं तीन बच्चे पैदा करो, अगर पड़ोसी की आवश्यकता पड़े पड़े तो
- 41:11तभी तुम ही शादी कर लो, तुम ही शादी कर लो, उल्लू के बैठो।
- 41:24तुम दुनिया को नरक बना के जाओगे, एक काम करना, छोटा सा प्रयोग और
- 41:39तुम्हारी सब भ्रांतियां टूर से साक्षी होने का अभ्यास करो पहले।
- 41:50बुद्ध द्वारा ईजाद किया गया विपश्यना ज्ञान करो, उसमें तुम
- 42:01साक्षी होना सीख जाओ। फिक्र मत करो जाप की पाठ की पांच
- 42:06नाम की ऐसा समझो क्या हम पांच 4 साल बाद में पैदा हो गए?
- 42:10कोई फर्क नहीं है, फिर तुम जब साक्षी होना सीख जाओ फिर तुम किसी
- 42:21भी जाप को उठा लेना। राम को उठा लेना, राधे को उठा
- 42:26लेना, पांच नम को उठा लेना जो आज कल प्रचलित जिनकी दुकानदारी ठीक
- 42:33से चल निकली है, फिर तुम उसको गुनगुनाना जैसे।
- 42:44मैं बोल भी रहा हूँ और मैंने बहुत बार आपको कहा कि मैं इस बोलती हुए
- 42:50यंत्र को सुन भी रहा हूँ क्योंकि मैं इसका साक्ष्य हूँ, ये तो मुझे
- 42:57समझ आ चुका है इसलिए मैं कहता हूँ।
- 43:02लेकिन जो अभी अभ्यास कर रहे हैं वो साक्षी होना सीखें।
- 43:07पहले फिर दोहराएँ। उसी नाम को जो ये गुरजन आपको देते
- 43:14हैं वो चाहे पांच नाम है जो नरंजन एक ओंकार।
- 43:22इश्कबाब बार बार तो हश रण का, सोहम सदन ज्योतनरंजन एकों का
- 43:35ज्योतनरंजन एकों का? ज्योत निरंजन एकोंका क्याक अब तुम
- 43:41प्रोसेसर देखना सेंटिफिक यह जाप जबते जबते मानसिक जप या वाचिक कोई
- 43:49बात मुझसे कोई फर्क नहीं मानसिक के सेवा तो तुम जप भी नहीं सकते।
- 44:01कोई अजबा वगैरह कुछ नहीं होता। अजबा वगैरह तो वो होता है जैसे
- 44:04पहाड़ियों में तुम चिल्लाते हो एक बार और आपकी बात सात बार गूंज के
- 44:09आती है, वह तो भ्रम है आपको। अजब जाप जो भीतर से उठा हुआ वो
- 44:19जाप है जो आपके उस आंतरिक तन से गुजरा जहाँ से अनाथ नाद गुजता है।
- 44:28बाज्य नाद अनेक असंखा कहते वावनहारे।
- 44:33कित्ते राग परुषों का? कित्ते का बनहार बले शाह कहते हैं
- 44:41मस्जिद गोरों जोड़ा, डरिया जा ठकर दे डेरे, बढ़िया जिते बजते नाद
- 44:461000, इश्क दी नमी नमी बहार जहाँ हजारों प्रकार के नाद गुजते।
- 44:54टल भी हैं, गड़याल भी हैं, शंख भी हैं।
- 44:59वहाँ कोयल की कोहू को भी होती है। वहाँ शंखनाद भी होते हैं।
- 45:07ओंकार का नाद भी होता है। वो अजपा जब तुम वो तुम्हारे
- 45:15गुरुओं ने तुम्हें व्याख्यात गलत किया है परिभाषित गलत किया है
- 45:23डिफाइन गलत किया है तो तुम जबना शुरू करो।
- 45:32जब वे जाओ जब पूछो जब पूछो खूब जब वो आज भ्रम तोड़ो और ये भ्रम टूट
- 45:39जाना चाहिए लगातार पांच सात महीने तुम करो इस काम लेकिन जागे जागे
- 45:46करो ये ध्यान रखो। इसलिए मैंने तुम्हें कहा कि पहले
- 45:52साक्षी की साधना को साथ दो, उस भीतर की चेतना को जगाओ, अभी तुम
- 45:59मूर्छित मूर्छित से जाप करते हो और मूर्छित हो जाते हो और मूर्छित
- 46:04हो के मूर्च्छ में ही गिर जाते हो तो तुम्हें पता ही नहीं चलता कुछ।
- 46:12तुम पहले जागृत हो, न सीखो बुद्ध का विपश्यना देखो विचार आया,
- 46:20विचार गया, सांस आया, सांस गया, इनहेल किया, एक्सहेल किया सब आते
- 46:28जाते देखो। जैसे अब मैं बोल रहा हूँ, कंठ से
- 46:33आवाज आती है जहाँ से आती है उदगम सतह से, वहाँ से भी मैं इसे महसूस
- 46:40कर रहा हूँ। ऊपर उठती उठती आवाज कंठ को क्रॉस
- 46:48कर। जीबा से शब्द बनते हैं और
- 46:56तुम्हारे कानों में पड़ती है और मेरे भी कानों में पड़ती है।
- 47:02मैं बोध भी रहा हूँ, मैं सुन भी रहा हूँ।
- 47:07और मेरे भीतर अन्नद नाद गूंज रहा है, वो भी मैं सुन रहा हूँ।
- 47:13मैं सभी चीजों का यक सा साक्षी हूँ तो तुमने कहा कि यह यह क्या?
- 47:27क्या यह भी गप है तो पता चल जाएगा, मैं कहता हूँ अभ्यास करो,
- 47:34बोलो ज्योत रंजनिकों का ज्योत रंजनिकों का और इसको देखते भी
- 47:42रहो। तुम देखोगे तुम्हारी खोपड़ी जापकर
- 47:49ही और तुम प्रतिबल शक्तिहीन हो रहे हो।
- 48:03मैंने कहा पलक जब कहें पर भाई शक्ति बह हो, बोलो राधे राधे राधे
- 48:11राधे मत सो जाओ कोई बात और उसको देखते भी रहो।
- 48:19एक वक्त क्या आएगा? राधे राधे राधे राधे जापते जापते
- 48:25जापते जापते यू विल फील एनर्जीलेसनेस और एनर्जीलेसनेस फील
- 48:34करते वक्त उसके बाद तुम्हें धम से मोर्चा में।
- 48:39बच्चे की तरह बताओ परिणाम ध्यान निकला के मोर्चा की नींद निकली।
- 48:56सच खंड का शब्द बाग दिखाने वाले लोग यह प्रैक्टिकल अभ्यास करके तो
- 49:03देखें इट्स ए साइंटिफिक एक्सेशन बोल मैं भी रहा हूँ देखो मैंने
- 49:11नहीं बोला ज्योत नरंजन एकों। भ्रमण हुंकार सोहम शत्रु मैंने भी
- 49:18बोला मैंने भी रात रात में बोला, लेकिन मैं बराबर इसका साक्षी भी
- 49:24हूँ और मैं तब भी साक्षी होऊंगा जब मैं आई विल फील फुल ऐट दी
- 49:31लेस्सनेस। के अब नहीं और बोला जाता मैं उस
- 49:37दशा का भी साक्षी होऊंगा पूरा पूरा और फिर एनर्जी रेसनेस की उस
- 49:45अवस्था में यानी मोर्चा की उस अवस्था में लुढ़क जाऊंगा, वो भी
- 49:49मैं देखता होगा अगर तुमने। भीतर के बुध के शाक्षित को सावधान
- 49:59ही तो तुम जब मूर्छित होते हो तब तुम उसके साक्षी नहीं हो पाओगे।
- 50:09बस तुम सो जाओगे। ना खुदा ही मिला ना बसा दे सब ना
- 50:19इधर के रहे ना उधर के रहे देखो मेरी बातों पर मैं निचोड़ बोलूं
- 50:24तुम्हें, समझी ना? मैंने तुम्हें साइंटिफिक व्याख्या
- 50:32दी और स्टेप ब्य स्टेप कण कण कण कण करके मैं आगे बढ़ा और तुम्हें
- 50:42सारा खोल दिया। तुम पहले साक्षी था तो।
- 50:47फिर तुम जो चाहो नाम को चाहिए, अपने ही और नाम जपने में शक्ति
- 50:53लगती है जैसे गाड़ी को तुम कहीं भी ले जाओ शहर के अंदर मोड़ लो,
- 51:02किसी गली कुंछे में ले जाओ। किसी मंत्र गुरुद्वारा में रिझाओ
- 51:06गाड़ी तो नहीं कहती कि मैं मंदिर नहीं जाती, गाड़ी तुम्हारी तरफ
- 51:09आगे थोड़ी गाड़ी थोड़ी ही कहेगी कि मैं तो मस्जिद के संग जा के
- 51:16नाचूँगी गाड़ी कहेगी ले चल जीस तरफ ले चल।
- 51:24गाड़ी तो बाबा नानक की भक्त है, इधर चाहे ले चल बस घूमा दे, उधर
- 51:35ही मुड़ जाएगी। लेकिन एक बात है जब उसका फ्यूल
- 51:41खत्म हो गया ना तो वो वहीं ठहर जाएगा।
- 51:48फिर दत्ता एक हरयाणवी पहली बार जहाज में बैठने लगा।
- 51:53पहली बार वो रोज़ हरियाणा बस से। रैना रोडवेज ट्रांसपोर्ट
- 52:03कॉर्पोरेशन इसकी बस से जाया करता था।
- 52:07प्रथम बार उसने जहाज पकड़ जहाज में बैठ गया।
- 52:10अपनी सीट से उठ के आया बैठक के पास कहने लगा, भाई।
- 52:17तेरे जहाज के पहिए वगैरह ठीक है, हवा पूरी है उसने गौर से देखा सब
- 52:25प्रश्न तो कभी पूछा ही नहीं, कोई पंक्चर तो नहीं है कितने?
- 52:37जहाज में तेल वगैरह पूरा है। आज नहीं आया ही बंदा आ गया था।
- 52:45उसने कहा हाँ बिलकुल फुल ट्रेन की करवाई उसके बिना तो उड़ सकते ही
- 52:50नहीं, हमने दूर जाना। और स्टेरिंग वगैरह ब्रेक वगैरह
- 52:56रेस वगैरह क्लच वगैरह जितना सिस्टम सारा ठीक ठाक है ना वो
- 53:04बेचारा कुछ सही बात नहीं है। उसने कहा हाँ, ताऊ जी बिलकुल ठीक
- 53:09है। जैसे मैं निर्मला सीतारमण को कहती
- 53:17हूँ अच्छा बुआ ये जो तुमने आज पास कर दिया ना एआई क्वांटम इसके लिए
- 53:26बड़ी बधाई हो तुमसे बुआ ऐसे ही काम ले के आया।
- 53:32ऐसे ही बेचारा श्रेम होगा। वो कहता है जी बिल्कुल पूरा है
- 53:41सारा कुछ ऐसे तो हम उधारी नहीं मार सकते।
- 53:44कोई बच्चों को खेल है कदर ठीक है। पायलट ने पूछा।
- 53:57तो वो तो ठीक है ताऊ, लेकिन तुमने ये सारी बातें मुझसे क्यों पूछी?
- 54:05कहता भाई क्या करो? हरियाणा ट्रांसपोर्ट रोड
- 54:09कॉर्पोरेशन की बस। रोज़ रास्ते में रुक जाती है।
- 54:13कहते हैं धक्का लगाओ अब भाई से जाज को तो धक्का लगाना भी मुश्किल
- 54:23इसलिए पूछ रहा था अगर ऐसा कुछ करना पड़ेगा तो एक बार ही उतर लो।
- 54:37ढंग से प्रैक्टिकल करके देखो तो तुम पाओगे अगर तुम साक्षी रहे,
- 54:52राम राम करो राधी राधी कर पांच नम कर कुछ।
- 54:581 दिन तुम अपने अनुभव से जान जाओगे सब व्यर्थ है, क्योंकि आखिर
- 55:08में तुम अपने आपको मूर्छा की उस घड़ी में पीता रडलू रखते हुए
- 55:14पाओगे? और तुम्हारा सारा भ्रम उस टाइम
- 55:21टूटेगा। तुम खुद प्रयास प्रैक्टिकल करो,
- 55:30इसलिए मैं प्रैक्टिकल के ऊपर ही था ना ज़ोर से।
- 55:35मैं कहता हूँ मेरी बात मत यज्ञ भी मैं सत्यव्रत लेकिन तुम भी आजमान
- 55:45और वैसी भी अगर मैंने खाया तो मेरा पेट भर तुम्हारा नहीं भर तुम
- 55:52खाओगे तभी पेट भरेगा। तुम जब देखोगे के वैसे सत्य है,
- 55:58ये बात के राम राम करते राधे राधे करते हम एनर्जिलसनेस शक्तिहीनता
- 56:08का में महसूस करने लग जाते हैं। और फिर हम ओर से तो जाते एंकर
- 56:14जाते प्रकृति आपको रोज़ बचपन से नींद में लेके जाती है और प्रकृति
- 56:26के सारे काम जीवन के हित में? ताकि थका मादा सुबह से शाम तक
- 56:38वक्त के थपेड़ों से, महंगाई की चपेटों से, बेरोजगारी के झगड़ों
- 56:47से। गरीबी से, तंगहाली से बदहाली से,
- 56:54ऊपर से इन बनाए हुए सख्त कानूनों से, ऊपर से इन झूठे दुकानदारों से
- 57:05जो तुम पर राज़ करो। माना ये तुमने ही की चिढ़ लगाई
- 57:11है, लेकिन अब किया क्या? क्या यह तो कुर्सी ही छोड़ेगा?
- 57:22मैं तो कितनी बार तुम कहा मोदी छोड़ो गद्दी।
- 57:28ये कहता कोई नहीं छोड़ कर लो क्या करना है?
- 57:34मेरे हाथ में सारी फौज है और फौज फौज को ये खुश रखता है।
- 57:39दीवाली मनाता है ये सब ये कारण है पीछे से कि मैंने इतने इतने गलत
- 57:44काम कर दिए। कल को फौज की जरूरत पड़ सकती है।
- 57:47जनता बिदकेगा जनता तो भाई बिदकेगी और तू याद रख जनता इसी फौज वालों
- 57:56की किसी का चाचा है, किसी का मामा है, किसी का फूफा है, किसी का
- 58:00भतीजा है, किसी का बेटा है, किसी का बाप है।
- 58:06जीस दिन जनता सड़कों पे आ गई उस दिन कितना ही जश्न मना ले लेना
- 58:13तू? जवानों के साथ जवानों के तोपों के
- 58:18मुख बॉर्डर के दुश्मनों की तरफ तो उठ सकते हैं।
- 58:23लेकिन अपने चाचा, भतीजा, मामा, फूफा, बेटे पुत्र की तरफ नहीं हो
- 58:27सकता। इतने गद्दार बने इतने निर्मोही भी
- 58:34नहीं वो जानते हैं कि कसूर तुम्हारा तुमने ही।
- 58:41ये सारी गंदगी फैलाई है वरन किसने कहा था तुम तो प्रचार कराने लगे
- 58:50हो, अपने मोदी का प्रचार करके आओ, ये फौज का ये काम है क्या?
- 58:56मोदी का प्रचार करें, फौज कौन कौन से संविधान में लिखा है?
- 59:03सरकारी संयंत्रों का प्रयोग करना। इलेक्शन के दौरान इसके कारण
- 59:12इंदिरा गाँधी की कुर्सी चली गई थी।
- 59:15जगमोहन ने सेना ने फैसला सुनाया। और आप मज़े से फौजियों को ही कर
- 59:25सकते, आप प्रचार करो, ये खोदी खोदी भी कर देंगे, ये बड़े ही
- 59:39होते है। ख्याल रखना ये देशभक्त हैं और
- 59:47ईमानदार हुए हैं, ये सब जानते हैं तुम क्या शरारतें कर रहे हो और
- 59:55तुम्हारी मंशा क्या है? तुमने पूछा है।
- 1:00:00हनुमान राम कि ये भी सब गप है हाँ मैं तो कहता हूँ लेकिन इसे
- 1:00:08प्रैक्टिकल तो पर्पस देखो, इसलिए मैंने साइंटिफिक इसकी विधि बताई
- 1:00:14है। ये।
- 1:00:19तुम भीतर से साक्षी बनकर जागते जागते सारी जागती प्रक्रिया को
- 1:00:23निहारते हो और उसका परिणाम देखो कि अंत में होता क्या है?
- 1:00:30अंत में होता है तुम लुढ़क जाओगे नहीं तुम्हारे गुरु कहेंगे।
- 1:00:40सच खंड आ गया सच खंड मिलता है जीते जी मूर्छित हो के नहीं मिलता
- 1:00:53और मृत्यु के क्षण में तो परमूर्चा के क्षण में होते हो तब
- 1:00:57ये कहते हैं कि हम हजूर हैं, के बाबा हैं, कोई भी आए कोई तो उल्लू
- 1:01:02का पट्ठा आएगा। और तुम्हारी अंगुली पकड़ेगा और
- 1:01:08तुम्हें मूर्छित मुर्छित व्यक्ति को कोई पता होगा।
- 1:01:11जबकि व्यक्ति मूर्छित हो जाता है तो उसे पता होता है मुझे फ़ोन उठा
- 1:01:14के ले। गुरु आया कि तुम्हारा दुश्मन आया
- 1:01:19कोई पता लगता है? तब ये आएँगे तुम्हें सचखंड में
- 1:01:23जाने के लिए जो ही ब्राह्मणों वाली इन्होंने तरकीब पकड़ ली
- 1:01:34ब्राह्मण कहते दान करो, पुण्य करो, ये करो श्राद्ध करो।
- 1:01:41हजारों पाखंड उन्हें खिला दिए और उनका परिणाम क्या मिला कि उनके
- 1:01:49बच्चे आज टल खड़कार रहे हैं टल खड़कार?
- 1:02:01कब तक जुड़ोगे सब तो कोई लेके जाता है किसी विधान के ऊपर के साथ
- 1:02:11कोई लेके नहीं जाता इसलिए जो मैंने गोल्डन सपेरों का।
- 1:02:19राजनीतिक चैनल बनाया है। इसी शक्ति पर आधारित है को लेकर
- 1:02:24तो तुम जाओगे नहीं और व्यक्ति को जीवन की जरूरतों के लिए
- 1:02:3025,00,00,000 बहुत होता है। जरूरतों के लिए ध्यान रखना।
- 1:02:36और वासना को तो सारा संसार क्या सारा ब्राह्मण भी कमतर होगा?
- 1:02:45वासनाय तो अपूर्त हैं, वासनाय कभी पूरी नहीं होती, जरूरतें पूरी हो
- 1:02:50जाती हैं, हाथ तुम्हारा पेट भर जाता है।
- 1:02:52चार फूल का खा लिया पांचवा तुमने खास।
- 1:02:57जरूरतें पूरी हुआ ही करती हैं और जरूरतें ही पूरी करनी।
- 1:03:03वासनाएं कभी पूरी नहीं होती और वासनाओं को पूरा करने की चेष्टा
- 1:03:07भी नहीं करनी है। मेरे दो आज के अल्फाज़ नोट कर।
- 1:03:14तो तुमने पूछा, पुत्र को मैंने विस्तार से आपको जवाब दी थी,
- 1:03:19साइंटिफिकली इसको आजमा के न कुछ करने में बैठ जाओ।
- 1:03:25विचार उठेंगे? विचारों को साक्षी भाव से देखते
- 1:03:29रहो, साक्षी परिपत्र हो जाएगा। फिर तुम बोलो राम राम पांच नाम
- 1:03:35बोलो राधे बोलो और तुम फिर पाओगे कि एक घड़ी ऐसी आई कि हम थक गए,
- 1:03:49शक्तिहीन हो गए। और शक्तिहीन मृत्यु की तरह ही
- 1:03:55होता है मोक्ष तुम नाम जबसे मोर्चा में पहुँच जाते हो।
- 1:04:11और ये गुरु लोग कहते हैं सर आज हम मनाएंगे उनके आने से आती है चेहरे
- 1:04:25पे रौनक। उनके आने से आती है चेहरे पर रौनक
- 1:04:35वो समझते हैं मरीजे हाल अच्छा है। उनके चेहरे से आती है चेहरे पर
- 1:04:47रंगत। वो समझते हैं कि मरीज हाल अच्छा
- 1:04:53है, कोई नहीं आता वाता ये भी मरेंगे कोई नहीं आएगा और ये जानते
- 1:05:03हैं बस इतना ही फर्क है। 1 दिन का वक्त दे दो मुझे मैं नर
- 1:05:12को करवा के बता दूँ, कोई नहीं आता कोई नहीं आता बस तुम मूर्छित हो
- 1:05:25जाते हो, राम राम करो। कोई पाठ करो, कोई पूजा करो, सोर
- 1:05:33से चार पूजन करो, वह पाठ चाहे तुम गीता का करो, चाहे ग्रंथ साफ करो,
- 1:05:40यू विल लूज़ युअर एनर्जी और मिलेगा कुछ।
- 1:05:47फिर बाबा मिलेगा कम मौन हो जाओ मौन होकर अपने अंत में उतरना शुरू
- 1:05:57हो जाओगे मौन, मौन, मौन, मौन, जाप, जाप, जाप से तुम मूर्ख समझ
- 1:06:04रहे। मौन, मौन, मौन पर्व में इतने मौन
- 1:06:10हो जाओ कि तुम्हें पता ही न चले सो दो और फिर तुम अपने भीतर उत्तर
- 1:06:23में रखोगे। और एक घड़ी ऐसी आएगी कि वहाँ
- 1:06:36पहुँच जाओगे, जहाँ शांति है, जहाँ आनंद का प्याला पीने को मिलेगा
- 1:06:49जहाँ रस छलकेगा। और तुम उसको पीओगे निहार हो जा और
- 1:06:57उसका स्वाद ऐसा फिर तुम्हें लत लग जाएगी एक बार लत लगा लो, उसके फिर
- 1:07:06तुम उसे और मांगोगे आएगा मौन होने से।
- 1:07:12मौन होने से शक्ति जमा होती है। जाप करने से शक्ति व्यय होती है।
- 1:07:20ये अब मुख्य किसी सर्कल में तुमने शक्ति को जोड़ना है।
- 1:07:30व्यय नहीं करना है और मौन होने से शक्ति जुड़ती है।
- 1:07:40जितना मौन होगे जितनी देर तक के लिए अगर तुम्हारे पास इंतेजामात
- 1:07:46है। तो मैं कहता हूँ तुम महीने भर का
- 1:07:49मौन रखो, किसी जरूरी काम के लिए तुम लिख के बता दिया करो और देखना
- 1:08:00मौन होते होते कलड़ी बच जाएगी और तुम पर मौन के खुमार में खो
- 1:08:06जाओगे। उस जगह पहुँच जाओगे जहाँ शांत
- 1:08:13वातावरण है, शांति शांति करने से शांति में मृत्यु ये लोग तो वही
- 1:08:21हैं तुम्हें बहकाने वाले। शांति शांति कह लो, यह भी शक्ति
- 1:08:26का व्यय है। मैंने कहा कुछ भी कह लो यू विल
- 1:08:32लूज़ युअर एनर्जी शांति शांति दोहराना नहीं है दोहराव मातृ
- 1:08:39शक्ति का व्यय। मौन हो जाओ अपने भीतर उतरो, गहरे
- 1:08:47मौन, गहरे मौन, गहरे मौन, तुम जंक्चर पॉइंट को क्रॉस कर जाओगे,
- 1:08:52और गहरे मौन और गहरे मौन। रास्ते में बहुत कुछ आएगा लेकिन
- 1:09:00तुमने उपेक्षित ढंग से उनको नकारते हुए चले जाना है और 1 दिन
- 1:09:09तुम उस स्थल पर पहुँच जाओगे जहाँ वो नाद गूंजता है, जीतने बाजे
- 1:09:14नाद। इश्कती नमियों नमी बहाल हर पल नया
- 1:09:19है वो लोगों की दुकानदारियां खराब होती हैं महंगाई का ज़माना है
- 1:09:32मोदी कार्य में। दुष्ट काल चल रहा है दुष्ट काल
- 1:09:44दुष्टों का गोल बालक धमकियों आती हैं, हम तुम्हे मारते हैं, हम
- 1:09:54मैंने कहा अब तक क्यों नहीं मारते?
- 1:10:01और तुम अगर नहीं भी आए तो पुत्र मेरे मृत्यु तुमसे मान से जीते,
- 1:10:11वहाँ जगती है सच्ची तलप ज़रा सोचो तुम सिगरेट का कष्ट लगाया नहीं।
- 1:10:21तो तुम्हे लत बढ़ेगी। कैसे?
- 1:10:23ये जो चिट्टे वाले चिट्टे का कष्ट लगाते है फिर वह बढ़ता ही जाता
- 1:10:31है। ऐसे ही एक बार लत लगा लो, बाहर के
- 1:10:37चिट्टे को छोड़ दो। बाहर के नशों को छोड़ दो उस नशे
- 1:10:44को अपना दो जो दिन भर रात चौबीसों घंटे श्रद्धा के लिए चढ़ा रहेगा।
- 1:10:51अखंड चिन्ह नशे जहान हैं उत्तर चाँद पर।
- 1:10:58नाम हमारी नान काजरे फिर तुम जब एक बार एक प्याला घूँट भर लोगे
- 1:11:07उसकी फिर तुम उसका स्वाद चखोगे पहली दफा फिर तुम मांगोगे।
- 1:11:17और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और और ज़रा सी दे साखी और ज़रा सी
- 1:11:33और कैसे रहूं। के मैंने पी ही क्या है?
- 1:11:40अब ये गोली तो लिया है, एक जाम ही तो कैसे रहूं?
- 1:11:48चुप के मैंने पी ही क्या है? होश भी तक है बाकी अभी तो और ज़रा
- 1:12:03सी दे दे साखी और ज़रा सी कैसे रहूं के मैंने।
- 1:12:13पी ही क्या है? ओशवी तक है बाकी और ज़रा सी दे
- 1:12:22देसा के और।