Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Mar 25 - अनहद नाद कैसे सुनें? शब्द और सुरति का मेल।Consciousness Level कैसे बढ़े? ठहराव ही कुंजी है!
Transcript
- 0:06आवाज प्रणाम थ्री वीक्स पहले मेरे हस्बैंड के कहने पर मैंने।
- 0:22सद गुरु का शांभवी इनिशिएशन अटेंड किया था।
- 0:30क्या मुझे यह क्रिया करनी चाहिए? मैं नाद सुनते समय।
- 0:43अपना ध्यान कहाँ केंद्रित करूँ? ये प्रश्न बहुत लोगों का प्रश्न।
- 1:09बेचारे साधक यह समझते हैं कि संत किसी का भी मार्ग बता देता है।
- 1:29गलत है। ये बात यहाँ रास्ते अलग अलग हैं,
- 1:38यद्यपि मंजले गए। कृष्ण कहेंगे मेरे शरण में आ जाओ,
- 1:53सर्वधर्माणपत्रजमामी का शरण वृक्ष मैं ही कर दूंगा सब कुछ।
- 2:01अहम् तम सर्व पापे घ मोक्ष स्वामी महा सूत्र और बुद्ध कहेंगे मेरी
- 2:14क्षण में न हो अप दीपो भवा खुद अपना रास्ता तलाशो।
- 2:24अपने दीमक दीपक क्षमा करना स्वयं बन ये बिलकुल विरोधी रास्ते है।
- 2:38कृष्ण कहते हैं, मेरी शरण में आजा।
- 2:43बुध कहते मेरी शरण में ना अपने दीपक का स्वयं बनो, ये विरोधी
- 2:54रास्ते हैं अब किसकी बात मानोगे? पूछा है बेटी ने?
- 3:07तीन सप्ताह पहले मैंने शंभवी क्रिया अटेंड की थी।
- 3:13अपने पति के कहने पर क्या मुझे ये क्रिया करनी चाहिए?
- 3:25अब थोड़ा सा आज इस बात को भी मैं साफ कर दूँ, अब ध्यान से सुनना
- 3:34मेरी बात को मेरे पास बहुत सी भवन आ जाती है।
- 3:46बाबा जी शब्द और सुरती का मिलान कैसे होगा?
- 3:55मैंने कहा तुमने मुझसे दीक्षा ली नहीं बाबा मैं तो राधास्वामी से
- 4:04दीक्षा हूँ। तो मैंने कहा पुत्रे राधा साहब से
- 4:09पूछो जिसका काम उसी को सजाये और करे तो ठेंगा बजा, मैं ना बता
- 4:22सकूँ। बहुत से लोगों के मेरे पास पश्चिम
- 4:31आ जाते हैं जो किसी अन्य अन्य गुरुओं से दीक्षित होते हैं और
- 4:40मुझे जो करना चाहिए मैं वही करता हूँ।
- 4:45देखिए अपने गुरु के पास से। क्योंकि मेरा रास्ता उससे थोड़ा
- 4:53अलग भी हो सकता है। विरोधी भी हो सकता है 90 के कोण
- 4:58पे भी हो सकता है और 45 और 30 के कोण पे भी हो सकता है।
- 5:06और यहाँ तो रास्ता ऐसा है ये रास्ते हैं प्यार के चलना ज़रा
- 5:14सबल करें। थोड़ा सा भी एंगल गलत हो गया तो
- 5:22आप कहीं और पहुँच जाओगे। पूछा है बेटी ने और उसका पूछना
- 5:37बिल्कुल इसी तरह है जैसे दो नाव बराबर चल रही है और एक नाव में
- 5:48बैठा हुआ यात्री मुझे कहे के ये बराबर चल रही है।
- 5:53मैं इसके ऊपर एक पांव रख लूँ, तो मैं क्या कहूंगा भाई दो नौकाओं
- 6:04में पांव रखोगे तो डूबोगे पता नहीं ये कहाँ मुड़ मुड़ जाए।
- 6:14मेरी गस्ती का मुझे तो पता है ये कहाँ जाएगी लेकिन बराबर जो कस्ती
- 6:20चल रही है उसका मुझे पता है ये कहाँ मूड़ मूड़ जाएगी इसलिए मैं
- 6:27इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। या तो फिर तुम ये कर सकते हो कि
- 6:34अभी तो बराबर है। उसी कस्तियों में छलांग लगा दो,
- 6:38लेकिन रहो एक अगस्ती में दो कस्तियों पर सवार।
- 6:49यात्री डुबा ही करते हैं। अब इसका बात का जवाब तो आपको मिल
- 6:58गया होगा। मैं तीन सप्ताह पहले अपने पति के
- 7:03कहने पर सतगुरु की सांभवी। इनिशिएशन में गई थी मुझे वहाँ कुछ
- 7:14महसूस नहीं हुआ। पीपल वर क्राइंग बट आई हैड नो
- 7:26रिस्पांस। मुझे कुछ नहीं हुआ।
- 7:32आई अटेंडेड वन ऑफ दी एक्सटेंसिव प्रोग्राम कंडक्टेड बाय ईशा
- 7:39फाउंडेशन सदगुरु मेड एस। डू डिफ्रैंट टाइप्स ऑफ मेडिटेशन
- 7:50ड्युरिंग दैट देर वर सम पीपल हू वर स्क्रीमिंग एंड क्राइंग लौडली
- 8:05आई डिड नॉट फील। एनी ऑफ दिस टफ व्हाय कौलडंट आई
- 8:13फील एनिथिंग इज़ कथोडस ए लाइफ लॉन्ग प्रोसेसर।
- 8:25तुम्हें कुछ क्यों नहीं हुआ? पुत्री यह मैं कुछ नहीं कह सकता
- 8:33मैं क्या जानूं शंभवी क्रिया के बारे में मैं नहीं जानता।
- 8:43जो जानता है वो ही बता सकता है। हाँ मैं इतना जरूर जानता हूँ।
- 8:52अब ये बात सभी साधक ध्यान से सुन ले।
- 9:00अगर कोई भी क्रिया करते हुए तुम्हारा मन ठहर गया है।
- 9:05दौड़ता नहीं आनंद में है खुमारी, फिर तुम लिप्त हो गए, खुशी महसूस
- 9:20हो रही है, बस फिर तुम्हें अपनी मज्जत मिल कर।
- 9:27वो मंदिर हो, गुरुद्वारा हो, चर्च हो या मस्जिद हो कोई भी गुरु हो,
- 9:34कोई भी स्थान हो मतलब है तुम्हारी।
- 9:42इन्नर एक्सटेंसिस एंटायर एक्सटेंसिस अगर तुमने वो पा ली तो
- 9:50फिर गुरु का महत्त्व खत्म हो जाता है और मैं तुम्हें रोज़ कहता हूँ।
- 10:01अगर तुम्हें वो मिल जाए जिसे आनंद कहते हैं, ठहराव कहते हैं, तो तुम
- 10:11मेरे भी पांव मत पकड़े रहना। लोगों के और बहुत से लोग हुए हैं।
- 10:23जीस नाव से पार होते हैं उस नाव को पकड़ लेते हैं अब धन्यवाद कैसे
- 10:31करूँ तुमने तो पहुंचा दिया यहाँ तक छलांग नहीं लगाते किनारे पर।
- 10:39उसी कश्ती पर खड़े रहते हैं, बस ऐसा मत करना कहीं भी तुमको कहीं
- 10:48भी अनेक धर्म है या करीब 300 धर्म है।
- 10:59और संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है।
- 11:04बड़े तरीके हैं विज्ञान भैरव तंत्र में भी 112 तरीके हैं।
- 11:13मैं ये नहीं कहता कि आप सबको आजमाइए लेकिन अगर तुम्हें जच गया
- 11:20है। तुम्हारा मन ठहर गया और तुम्हें
- 11:23फ़ौरन पता लगेगा तुम ये जो मुझे पूछ रही हो कि मुझे करना चाहिए या
- 11:33नहीं करना चाहिए, यही बता रहा है कि तुम्हें आनंद नहीं है।
- 11:41अगर तुम्हें आनंद आता तो बिटिया तुम मुझे पूछती नहीं फिर तुम दूर
- 11:49दराज निकल जाती, मुझे पता ही नहीं तुम कौन हो?
- 11:57मैं तुम्हें आवाज़ भी न लगाता हूँ कि मेरे से दीक्षित हो, लौट आओ
- 12:03नहीं, वह गुरु सुधा होता है जो शिष्य को जाने न दे कहीं और गुरु
- 12:12आपको स्वतंत्रता देता है। जहाँ तुम्हें आनंद मिले वहाँ जाओ
- 12:20जहाँ तुम्हारा मन ठहर जाए वहाँ जाओ लेकिन वहाँ जाओ जहाँ मन ठहर
- 12:25जाए उघड़ बुघड़ ना करे, मन दौड़े ना?
- 12:36परम शांति में आ जाओ, वो चाहे कोई भी स्थान हो या कोई भी गुरु, इससे
- 12:44कोई फर्क नहीं पड़ता। सभी स्थान अल्लाह के हैं सभी
- 12:52दरगाहें। परमात्मा की ये मंदिर मस्जिद,
- 13:00गुरुद्वारा, चर्च, पागल मनुष्य की देन है।
- 13:08ये धर्म धर्म नहीं, संप्रदाय हैं जैसी प्राप्ति होती है।
- 13:13हिंदू, मुसलमान, सिख, साईं, पारसी येहुद्दीन ये पार्टीज़ हैं, सबने
- 13:21अपना अपना झंडा उठा रखा है, लेकिन बस मेरी एक बात याद रखा।
- 13:35जहाँ तुम्हें आनंद आया है, वहीं बैठ जाना और बेटी मैं क्या कहता
- 13:44हूँ तुम बैठ ही जाओगी, मुझे कहने का कोई अर्थ भी नहीं लगता।
- 13:53क्योंकि जहाँ तुम यहाँ आनंद आ गया, फिर मुझे थोड़ा कहना पड़ेगा
- 13:59कि यहाँ आनंद आ गया तो यहाँ बैठ जाओ, तुम बैठे ही जाओगे, किसी से
- 14:06पूछना नहीं पड़ेगा दुनिया ला तुम्हें कह।
- 14:12लेकिन तुम कहो कि तुम चुप रहो, मुझसे पूछा मुझे ये क्रिया करनी
- 14:22चाहिए, मुझसे मत पूछो बेटा अगर तुम्हें ये क्रिया करके मन ठहर
- 14:30जाता है, आनंद आता है। तो बाकी सभी छोड़ दो दो नावों में
- 14:37फ़ोन मत रखना एक रास्ता पहुंचा देता है।
- 14:41दो रास्तों पे मत चलें, एक रास्ता ही काफी होता है।
- 14:53और अगर तुम बहुत गहरे में जाओगी तो मैं आखिरी बात बोल दूँ कोई
- 15:06रास्ता ही नहीं होता। वहाँ जाने के लिए
- 15:21तुम खुद ही खुद यू यू अरे सेल्फ फॉर एंटायर एक्ससेस कोई रास्ता
- 15:33नहीं मात्र ठहरना होता है। इसलिए मैंने तुम्हें कहा जहाँ तहर
- 15:41जाओ जैसे तहर जाओ जीस तरीके से तहर जाओ जीस स्थान पे ठहर जाओ ये
- 15:48मत देखना कि चर्च है, गुरुद्वारा है, मश्चित है या मंदिर है या
- 15:55सुनसान इलाका है। ये जंगल है या पहाड़ है या हिमालय
- 16:01की कंधराएं हैं और मुझे पूछना भी नहीं पड़ेगा आज तक उठा कौन है
- 16:14जीसको जहाँ आनंद आ गया ये बता दो, तुम खुद से ही नहीं उठोगे।
- 16:25किसी को पूछने की यहाँ कोई आवश्यकता नहीं थी जहाँ जाकर
- 16:31तुम्हें पूछना पड़े कि मुझे ये क्रिया करनी चाहिए, समझो आनंद
- 16:37नहीं आया। बस वहाँ से चुपचाप कस के जाना, वो
- 16:42चाहे मेरा धाम हो, चाहे किसी का धाम हो, उससे कोई फर्क नहीं
- 16:47पड़ता। अभी मुझे पांच 4 दिन पहले एक
- 16:55मैसेज आया, बाबा आपने अंगूठा रखा। मुझे कोई महसूस नहीं हुआ।
- 17:08मैंने कबूतरिक दो ही बातें या तो जड़ व्यक्ति होता है क्योंकि
- 17:14मैंने मैंने अंगूठा लगा के तुम्हें विशुद्धि चक्कर पे पहुंचा
- 17:19देना है मेरा और कोई दूसरा काम है।
- 17:24तुम जहाँ भी हो जीस भी चक्कर पे हो मोलाधार पे हो स्वादिष्ट स्थान
- 17:28पे अना हक पे या जीस पे हो मैंने अंगूठा लगाके तुम्हें विशुद्धि पे
- 17:38पहुंचा देना है। वी शुद्धि से आगे मैं जानता हूँ
- 17:42यू विल हॅव टु डू नथ्थिंग वह करेगा जो करेगा जहाँ सब प्रयास
- 17:53समाप्त हो जाते हैं। वहाँ पहुंचा दूंगा मैं तुम्हें और
- 17:59फिर कहूंगा अब कुछ मत करो और यह मैं जिम्मा लेता हूँ आई ऍम ए
- 18:10रेस्पोंसिबल फॉर दट, आई स्टेम्प ऑन इट।
- 18:22लेकिन दो ही कारणों से तुम्हें महसूस नहीं होता।
- 18:33एक कारण है कि तुम जड़ हो, पत्थर को भी नहीं पता चलेगा तुम इतने
- 18:38बहुजेल हो, मान्यताओं से इतने भरे पड़े हो।
- 18:42तुम्हें पता ही नहीं लगता पत्थर के ऊपर जैसे मैं अंगूठा लगा दूँ,
- 18:53वह थोड़ा वह शुद्धी में पहुँच जाएगा क्योंकि बहुत उजड़ है और
- 19:01दूसरा। दूसरा यू आर ऑलरेडी ऑन द विशुद्ध
- 19:04चक्र तुम पहले से ही विशुद्ध चक्र पर हो तो फिर तुम्हें कुछ महसूस
- 19:12नहीं होगा। ये दो ही कारण हो सकते हैं तीसरा
- 19:17कोई कारण? अगर तुम पहले से ही भी शुद्धि पे
- 19:24हो, तुमने इतनी यात्रा कर ली है कि तुम शुद्धि तक पहुंचने में
- 19:35कामयाब हो गई हो तो फिर तुम्हें पता नहीं लगेगा क्योंकि जहाँ हो
- 19:43वहीं। ना ऊपर जाओगे ना नीचे आओगे बहुत
- 19:53से लोग यहाँ कपने लग जाते हैं बहुत से लोग यहाँ शीतल हो जाते
- 19:58हैं बहुत से लोग मूर्ति वध हो जाते हैं पत्थर पीता।
- 20:04अलग अलग संभावनाओं हैं। प्रत्येक व्यक्ति की सबको यकसा
- 20:09नहीं हुआ करता क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति उसी स्थान पर नहीं है।
- 20:18उसी कान्शस्नस लेवल पे नहीं है जहाँ एक है।
- 20:26सब के कॉन्शसनेस लेवल डिफरेंट हैं, इसलिए सभी को अलग अलग अनुभव
- 20:33होते हैं। इससे घबराना मत, फल को तो ये हो
- 20:37गया, मुझे होगा नहीं, तुम्हारा लेवल अलग है।
- 20:41तुम तुम्हारे लेवल से संतुष्ट रहना, बहुत से सवाल पूछे हैं अनाथ
- 21:03को कैसे सुनें वहाँ ध्यान को एकाग्र करके सुनें।
- 21:15यह कैसे सुनें? इतनी लंबी वीडियो मैंने पुणे 2
- 21:21घंटे की बोली और उसके बाद भी बहुत सी वीडियो बोली।
- 21:28लेकिन आज फिर वो ही प्रश्न खड़ा है।
- 21:32इसका अर्थ या तो मैं समझा नहीं पाया, मैंने उपयुक्त शब्दों का
- 21:39इस्तेमाल नहीं किया या या आपने? गहरे फलों पे वो बात उतारी नहीं
- 21:48है या आपके अनुभव में वो बात आती और ये बहुत लोगों का प्रश्न है।
- 22:02मैं आपको समझा दूँ अब गौर से। अनाहत नाक जब शुरू हो जाए, ये
- 22:14कहाँ से आता है? तुम्हें बताना उसका उदगम स्रोत है
- 22:19तुम्हारी कुंडली के आसपास मूलाधार के करीब।
- 22:26और यह सुनाई आपको लगेगा कानों से पड़ता है लेकिन यह सुनाई पड़ता है
- 22:33सहस्रार सहस्रार पर गूंजती हुई यह चेतना की आवाज।
- 22:40तुम्हें सुनाई पड़ती है क्योंकि श्रवण का यंत्र कान है, आँखों में
- 22:46सुनाई नहीं पड़ता, आँखों में दिखाई पड़ता है, नाक में सुनाई
- 22:52नहीं पड़ता, नाक में सुंघा जाता है।
- 23:00दिमाग से समझ नहीं आता क्योंकि समझने की चीज़ नहीं है ये हो रहा
- 23:08है जहाँ पर हो उदगम स्रोत तुम्हारी कुंडली के आसपास तुम्हें
- 23:16महसूस होता है कानो के आसपास। लेकिन कान सिर्फ इसको सुन रही
- 23:21हूँ, यह गूंज रहा है ससुराल में और तुमने इसे कैसे सुनना है?
- 23:32अब ये अच्छी तरह से समझो, मैं इसका मस्त हूँ।
- 23:44ये हो रहा है इसको होने दो। आप अच्छी तरह से समझले ना मैं आज
- 23:52इसकी सारी परतें खोल दूंगा। यह गूंज रहा है इसको गूंजने दो।
- 24:04देखो आप रात को खेतों खलिहानों में जाते हो, एकांत में जाते हो।
- 24:11आपको यह सन्नाटे की आवाज सुनाई पड़ती है।
- 24:13क्या तुम्हें सुननी पड़ती है? क्या तुम्हें ज़ोर लगाना पड़ता है
- 24:20इसे सुनने के लिए? कानो पर दबाव देना पड़ता है।
- 24:24मस्तिष्क पे दबाव देना पड़ता है नहीं, यह स्वतः ही सुनाई पड़ता
- 24:30है। इट्स साउंड ऑफ साइलेंस सन्नाटे की
- 24:34आवाज़ है। यहाँ कोई आवाज़ नहीं होती।
- 24:38वहाँ ये आवाज़ होती है तुम ब्लैक होल पर चले जाओ, जब भी जाओगे तो
- 24:43पाओगे, वहाँ भी यही आवाज़ गूंज रहे है।
- 24:47ये अस्तित्व की आवाज़ है साइलेंस अस्तित्व को कहते हैं एंड इट इस
- 24:54आउट ऑफ़ साइलेंस, जहाँ भी जाओगे। वहाँ इसको प्रवॉक है, हर जगह गूंज
- 25:02रही है और कोई भी स्थान नहीं जहाँ ये गूंजती न हो और बाबा ने इसी
- 25:12स्थान की तरफ अग्रसर किया है। आपको आगाह किया है इंगित किया है।
- 25:19जेता कित्ता तेता नाम? जितना पसारा है उसके भीतर ये गूंज
- 25:25रहा नाम कहते हैं इसको इसको जपना नहीं होता, इसको सुनना होता है।
- 25:35और तुम महसूस करोगे कितना आनंद है सो जैसे झरता हुआ रस आनंद का एक
- 25:49स्रोत बिखेर रहा है अपनी सुगंध को और तुम ठहर जाओगे।
- 25:59तो इसको सुनने की चेष्टा मत करना। मैंने पहला शब्द ही बोला है तुमने
- 26:06लिखा बिटिया कि मैंने फिर सुनी वीडियो, बस कहीं फर्क रह क्या?
- 26:14क्या मैंने कहा कि तुमने सुना बात बनी ना इसको कैसे सुन इसको होने
- 26:27दे होने दे और सुनने का प्रयास यू अरे टु डू नथ्थिंग?
- 26:41ओनली टू स्टॉप सिर्फ ठहर जाना है तुमने ठहर जाना है, इसको होने
- 26:49देना है उस अवस्था में जो होगा वो देख लो क्या होगा?
- 26:57फिर वो दो महत्वपूर्ण चीज़ इसको होने देना है जैसे रात के सन्नाटे
- 27:04को तुम होने देते हो। रोक भी नहीं सकते इस बात को ध्यान
- 27:11में रखना अगर तुम अनंतनाथ को रोकने की चिष्टा करोगे यह रुकेगा
- 27:15नहीं। बिकॉज़ इट्स गॉड्स वॉइस यह आवाजाए
- 27:25खलक है, यह आवाजाए खलक है, यह नकारा खुजा है।
- 27:37ये नगाड़ा है पर सारे अस्तित्व में गूंज रहा है और तुम तो कभी गए
- 27:49नहीं कहीं, लेकिन इस धरती पे तो घूमे हो?
- 27:55तो तुम कहीं भी चले जाना जहाँ थोड़ा सा सन्नाटा हुआ, वहाँ ये
- 28:02बजना शुरू हो जाएगा। फिर बता दूँ बहुत लोगों ने ये
- 28:15प्रश्न पूछा है। इतनी वीडियो बोलने के बाद भी आज
- 28:21ये प्रश्न वहीं अटका हुआ है। जीस नाट्य की आवाज, ये जंगल की
- 28:36आवाज या जो भी आवाज तुम्हें सुनाई पड़ रही है वो बंसरी की हो बंसरी
- 28:45से कृष्ण ने ये समझाने की चेष्टा की क्योंकि उन्हें बंसरी की आवाज
- 28:50सुनाई पड़ रही थी। प्रत्येक व्यक्ति को ये अलग अलग
- 28:54आवाज़ें सुनाई पड़ सकती हैं। डोर मृदंग, बंसरी बहनी सन्नाटा
- 29:06झिंकुर बहुत तरह की आवाज़ें। लेकिन मुझे ये क्यों है?
- 29:13वो क्यों नहीं इस बात को मत पढ़ना, इसको बदलने की चेष्ठा मत
- 29:21करना। मुझे वंशरी क्यों नहीं सुनाई
- 29:24पड़ी? भेणी क्यों नहीं सुनाई पड़ी
- 29:27शंखनाद क्यों नहीं हुआ? ना बदलने की कोशिश करना, ना हटाने
- 29:36की कोशिश करना, ना बढ़ाने की कोशिश करना, इसके रस को पीना यह
- 29:44सुनाई पड़े। तुम ठहर जाना, तुम ठहर जाना अनंथ
- 29:59नाद गूँजता रहेगा बस इन दोनों क्रियाएं को होने देना तुम्हारा
- 30:04ठहराव और अनंत नाद को गूँजना दोनों को स्वतः ही होने देना।
- 30:13फिर जो स्थिति होगी उसको तुम समझ लो क्या हो तुम ठहर जाओगे ये
- 30:20सुनाई पड़ेगा ये क्योंकि गूंज रहा है कभी बंद नहीं होता तुम सो जाते
- 30:25हो या नहीं सोते? तुम्हारे सोने के उपरांत भी यह
- 30:31गूंजता रहता है। तुम बेहोश हो जाती हो, जो व्यक्ति
- 30:37बेहोश हो गया उसको बाहर के चिल्लाते हुए लोग सुनते हैं, नहीं
- 30:44सुनते, वह बेहोश है। जब बाहर होश हो जाएगा तो उसे
- 30:52सुनाई ही पड़ेगा। बस यही होता है तुम रात को सो
- 30:57जाते हो ये चलता रहता है, ये नहीं बंद होता है और सुबह जब जगती हो
- 31:04तो पाते हो ये चल रहा है क्या हुआ?
- 31:15तुम ही सो गए हैं, ये बंद नहीं हुआ, कैसे सुने इसका मैंने तीन
- 31:25चार बार जवाब दे दिया। शून्य की चेष्ठा नहीं करना, इसको
- 31:31होने देना, रोकने की चेष्ठा नहीं करना रुकेगा भी नहीं, सुनोगे तो
- 31:37व्यवधान पड़ेगा। दोनों ही तरीकों में व्यवधान है।
- 31:45तुम शून्य की चेष्टा करोगे तो भी व्यवधान है।
- 31:50और तुम हटाने की चेष्टा करोगे तो भी व्यवधान है तुम इसको तो होने
- 31:55देना और तुम ठहर जाना। यू अरे नॉट टु डू एनीथिंग ओनली टु
- 32:03स्टॉप सिर्फ ठहर जाना है। अब देखो फिर क्या होगा, फिर ये
- 32:16सुनाई पड़ेगा, सिर्फ सुनाई पड़ेगा, तुम्हें सुनना नहीं
- 32:22पड़ेगा जैसे रात के सन्नाटे किए हो।
- 32:28ऐसे ही ये भी सुनाई पड़ेगा अगर कहीं धुन बदली तो बदल जाए।
- 32:36तुम्हारा क्या लेती है, वो भी तुम्हें सुनाई पड़ेगी बिन ना में
- 32:42ना ही कोठों। कोई स्थान ऐसा नहीं है जहाँ ये
- 32:47गुंजार नहीं हो रहा और मैं क्या कहूँ इन मूर्खों को ये ओम का
- 32:54गुंजार ये गुंजार नहीं करता। यह तुम सही स्थान पे पहुँच गई हो
- 33:07परमात्मा की अगाध कृपा है तुम्हारे जिसके भी शुरू हो गया
- 33:13नाथ वह धन्य भाग्य हुआ क्यों? नाद का सुनना इस बात का सूचक है?
- 33:21कि तुम विशुधि पे पहुँच गए और विशुधि पे पहुँच के तुम्हें ये
- 33:30नाक सुना ही पड़ता है विशुधि से आगे।
- 33:39उस 1000 पंखड़ियों तक पहुंचने में यू आर ढूंढने से तुम्हें कुछ नहीं
- 33:44करना होता, इसलिए मैं कहता हूँ ध्यान में कुछ न करो, कुछ करोगे
- 33:52तो चुकोगे फिर तुम ही भला? गले में डालोगे?
- 34:01तुम्हारा कुछ भी करना व्यवधान पैदा करेगा।
- 34:10ठहरे हो ठहरे रहो और जब तुम ठहर जाओगे।
- 34:18तुम धीरे धीरे अपने भीतर खिसकोगे धीरे धीरे तुम्हारा लेवल तुम्हारा
- 34:24तलब बदलता जाएगा। रोज़ रोज़ गिरोगे उस गहरे कोण।
- 34:36जहाँ से ये आवाज कलक आ रही है ये बागें इलाही आ रही हैं।
- 34:52इसको एक धागा। ये बन जाएगा तुम बनाना मत, यह है
- 35:00सिर्फ तुम्हें सूचना देने के लिए है कि यह आवाज़ तुम्हारे भीतर हो
- 35:08रही है तुम पैदा नहीं कर सकते। तुम असमर्थ हो, इसको पैदा करने
- 35:18में लाचार हो, इसको पैदा करने में श्रेष्टा मत करना क्यों पैदा नहीं
- 35:24हुआ? इसके लिए प्रयास मत करना, अफसोस
- 35:27मत करना नहीं हुआ तो नहीं हुआ। जब शुरू हो जाए तो फिर तुमने कुछ
- 35:35नहीं करना ये सुनाई पड़ेगा और तुम सुनते रहें।
- 35:41ये है प्रोसेसर यानी कि सारी प्रोसेसर में।
- 35:52यू अरे नॉट टू इन्वॉल्व योरसेल्फ, तुमने कुछ नहीं करना, तुमने मात्र
- 36:01ठहरे रहना है और ठहरते ठहरते, ठहरते तुम इतने सुरूर में हो
- 36:07जाओगे। वह भीतर से जो चुम्बक के पास से
- 36:12यह आवाज़ आ रही उसकी तरफ खिसकोगे। धीरे धीरे और खिसकते खिसकते 1 दिन
- 36:23आएगा। जब तुम उस स्थान पे जहाँ से यह
- 36:28आवाज़ उठ रही है, उसी में विलीन हो जाऊंगा।
- 36:36बड़े सन्तों ने इशारे किया, बोले शाह ने कहा मस्जिद को नो जोड़ा
- 36:44डरा ये जीभ डर गया मस्जिद के पास, मस्जिद दीवारों से, वैन से
- 36:53तुम्हारी बंदिशों से जीरा घबरा जाता है, मस्जिद कोरों जोड़ा डरया
- 37:02जा ठाकुर दे डेरे बढ़िया। ये ठाकुर का डेरा है।
- 37:09कहने के अल्फाज़ ही किसी धर्म से संबंधित मत कर लेना, इसको मस्जिद
- 37:19कोनो जोड़ा डरिया जा ठाकुर दे डेरे बढ़िया जीतते वैद्य।
- 37:249000 इश्क दी नमियो नमी बहा रोज़ नए नए होते जाओगे तुम रोज़ ये तल
- 37:34बदले कहाँ? आज जहाँ हो कुछ दिन बाद वहाँ नहीं
- 37:43होगे। रास्ता लम्बा है क्योंकि तुम इतनी
- 37:48दूर निकल आए हो स्वयं से तुम मैं खुद भी नहीं मान रहा।
- 37:54तुम इतने दूर निकल गए कि यह आवाज़ तुम्हारे अस्तित्व से आ रही हो,
- 38:00तुम्हें पता नहीं चल रहा देखो तुम कितनी दूर हो।
- 38:05तुम भीड़ बेखो कर और फिर खुद को ढूंढ रहे हो?
- 38:20ये जो बेचैनी का आलम है, तुम्हारे भीतर ये आलम क्या है?
- 38:27खुद को ढूंढने की व्यवस्था है। तुम खुद ही गुमशुदा हो, खुद की ही
- 38:37तलाश है, तुम्हें खुद को ही तलाशना है और खुद में ही आसीन हो
- 38:45जाना है। स्थितीप्रज्ञ हो जाओ अर्जुन।
- 38:50अपनी प्रज्ञा में अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जाओ।
- 38:55कृष्ण कहते हैं अपने पास लौट आओ अभी तुम दूसरों के पास हो, पदार्थ
- 39:03में हो, गद्दी में हो। धन में हो, मान सम्मान में हो,
- 39:08किताबों में हो, शास्त्रों में हो शब्दों में हो अल्फाजों में हो,
- 39:13क्रियाएं में हो अभी तुम दूसरे स्थानों पे हो तुम अपने आप में
- 39:18नहीं हो तो कृष्ण कहते हैं सबको छोड़ के सर्वधर्मणा प्रत्यक्ष।
- 39:29तू स्थिति प्रज्ञा हो जा अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जा वह जो एक
- 39:33है संतों ने कहने की बड़ी चेष्टा की अलग अलग हिसाब से कहने की
- 39:38चेष्टा की एक कोमकार वह ओंकार। एक है वहाँ जब जाओगे, इस धन को
- 39:49गूंजता हुआ पांव, दूर दराज दूर तलक तुम्हें सुनती है ये आवाज़
- 39:56लेकिन इसका ओरिजिनल प्वाइंट उदगम सतल तुम्हारे भीतर है तुम हो।
- 40:05तुम्हारे भीतर से आ रही है ये आवाज तुम इसके उद्गम सफल हो अगर
- 40:13कोई कहे की ये करना पड़ेगा वो करना पड़ेगा तो देखिये जब बात
- 40:18नहीं है, मैं तुम्हें स्पष्ट बता दूँ।
- 40:24अपने तक पहुंचने के लिए कुछ नहीं करना होता।
- 40:30तुम खुद ही हो जहाँ जाना भटक गए हो जैसे सो जाते हो।
- 40:43सुबह वापस लौटते हो, सपना आता है सपने में न जाने क्या कुछ दिख
- 40:48जाता है बस वो ही तुम सपने में हो और क्या कुछ देख रहे हो ये
- 40:57तुम्हें पता होगा। ये सपना टूटे, तुम जाग जाओ, सत्य
- 41:11का दर्शन हो, आँखें खोलें कहने की बातें कि चर्म चक्षरों की बात
- 41:21नहीं, मैं कर रहा हूँ। की आँखें खोली दिव्य चक्छु बलजाना
- 41:28वो दिव्य चक्छु जो कृष्ण ने को दिए थे श्याम बाबा को वो दिव्य
- 41:36चक्छु जो कृष्ण ने अर्जुन कर दिए थे।
- 41:42और उसके साक्षी हुए संजन उसके साक्षी हुए।
- 41:48वेद व्यास दूर से बैठे दिख रहे हैं।
- 41:51क्योंकि जन्म जक्षो के लिए क्या दुरी और क्या नहीं दिखी उसके लिए
- 42:01कभी दूर नहीं। उसके लिए कोई पास नहीं है।
- 42:04इसलिए उपनिषद में कहा वह दूर से दूर है और पास से पास है।
- 42:14अल फज़ू से तुम समझोगे क्या विरोधी शब्दों का सहारा लेना
- 42:19पड़ता है समझाने के लिए? तो कैसे सुनें इसको तुम्हें तरीका
- 42:35बताया है तुम ठहर जाओ, इसको होने दो यह आवाज गूंजेगी, गूंजे नहीं
- 42:45दो कोई व्यवधान ना खड़ा करो। कोई ओब्स्टेकल खड़ी ना करो और तुम
- 42:56भी ठहर जाओ जब ये दोनों अपने अपने स्थान पे ठहर गए, तुम भी ठहर गए
- 43:11और ये आवाज तो है ही। ये तो ठहर ही हुई है।
- 43:16यही शब्द और सुरती का मेल है। ये धागा मिल जाता है।
- 43:23यह शब्द गूंज रहा है अनंत और तुम्हारी सुरती ठहर गई।
- 43:31बस शब्द और सवती का मिलान हो गया। एक धागे ने दोनों इकट्ठे कर दिया।
- 43:39यह सूत्र सूत्र धागे को कहते हैं। इसको ऐसे सुनना है इसको सुनने का
- 43:59बहुत से संतो ने अपने अपने ढंग से व्याख्यान किया है।
- 44:30ऐसे ऐसे ध्रुव पहलादू जब हर जैसे ध्रुव पहलादू।
- 44:48जब यो हर जैस राम मंजपोजि। ध्रुव, प्रहलाद जप्योहार जैसे।
- 45:15ऐसे ही ध्रुव नहीं जपा ऐसे प्रहलाद नहीं जपा।
- 45:19ऐसे ही तुम्हे झपना पड़ेगा। अब शब्दों में ये चीज़ आती नहीं।
- 45:25अनुभवों को शब्दों में विख्यात किया नहीं जा सकता।
- 45:32अनुभव तो छोटे छोटे अनुभव तो तुम विख्यात नहीं कर सकते।
- 45:36ज़रा बताओ तो तुम्हें दर्द हो रहा है।
- 45:39पेट में तुम्हें डॉक्टर बाजित हो जाए।
- 45:43इंजेक्शन फिर दूंगा, इस दर्द को निकाल के बाहर दिखाओ ये रहा दर्द
- 45:49तो निकाल पाओगे, दिखा पाओगे नहीं तुम खुशी से बावरे हुए जा रहे हो
- 45:59और कोई कहे के वाकये ही तुम्हें खुशी हुई।
- 46:02उस खुशी को निकाल के दिखाओ मुझे कहाँ है वो खुशी, मैं तो फिर
- 46:07मानूंगा तुम छोटे छोटे अनुभवों को भी अल्फाज़ में डाल नहीं सकते।
- 46:14दिखा नहीं सकते अनुभवों को दिखाया नहीं जाता उसे लोग कह देते हैं
- 46:18परमात्मा को दिखाओ अगर तुमने देखा तो।
- 46:24पवन को क्या जो हफ्ते मस्ती को कभी दिखाया जाता है शराब दिख जाती
- 46:35है शराब के भीतर जब मस्ती होती है वो दिख जाती है बताओ?
- 46:45शराब के भीतर की मस्ती कोई देख सकता है क्या नहीं दिखेगा?
- 46:52जैसे दर्द नहीं दिखता जैसे खुशी नहीं देखती जैसे दुख नहीं दिखता।
- 47:00जैसे शोक नहीं दिखता जैसे धैर्य नहीं दिखता लेकिन इसका मतलब ये
- 47:10नहीं कि अगर तुम अपना दर्द दिखा नहीं सकते तो दर्द है नहीं।
- 47:21मार्क इसी बात का तर्क करता है अरे दिखता नहीं है, नहीं तो दर्द
- 47:27भी दिखता नहीं भाई दर्द भी महसूस होता है, वो है नहीं, खुशी भी
- 47:33नहीं दिखती। गमी भी नहीं दिखती, शोक भी नहीं
- 47:36दिखता। संतप भी नहीं दिखता।
- 47:41बहुत से अनुभव हैं जो देखते ही नहीं अनुभव कोई भी नहीं दिखता।
- 47:46अनुभव का एक्सप्रेशन तो देखा जा सकता है।
- 47:55संत की आवाज़ मुझे कशिश है उससे अगर तुम्हें नहीं पता लगा कि ये
- 48:01कहीं चल गया है। संत के जीने का लक्षण अगर तुम्हें
- 48:06नहीं बताते तो फिर तुम और कोई ढंग नहीं है देखने का उनकी चाल, उनकी
- 48:17ढाल, उनकी बोलनी, उनका जीने का ढंग।
- 48:22उनकी सारी व्यवस्था जीवन शैली अगर इससे तुम ना पहचान पाए तो फिर कोई
- 48:30तरीका नहीं। फिर मार्क्स की तरह कहना होगा
- 48:35परमात्मा नहीं या नीच से किधर कहना होगा।
- 48:42गॉड स्टे था, लेकिन मर गया। बड़े मज़े की बात है, तुम तर्क की
- 49:01व्याख्या बड़ी सुंदर देते हैं। परमात्मा के नशे को अफीम का नशा
- 49:06बता देते हैं। धर्म असीम का नशा है, है तो नशा
- 49:17तो है, बड़ा गहरा नशा है और नशा ऐसा ना दिन उतरे ना राहत उतरे।
- 49:27जिन्हें नशे जहान दे उतर जान प्रभात तुम्हारी, मयखानों की
- 49:33शराब, सुबह उतर जाती है नाम खुमारी, नान कचड़ी रहे दिन रात
- 49:41उसकी खुमारी, नाम की खुमारी, ऐसी खुमारी, वह ना दिन उतरे ना।
- 49:50वह चढ़ी ही रहती है, वह दिखाई भी नहीं जाती।
- 49:58तुम्हारे पास आँखें हों और इतनी सूक्षम आँखें हों और दिव्य दृष्टि
- 50:05हो। तो फिर तुम्हें दिखाई पड़ेगा,
- 50:13दिखाया नहीं जा सकता। परमात्मा मजबूरी है, अगर वो
- 50:18दिखाया नहीं जा सकता तो इसका मतलब यह नहीं कि वो होता नहीं।
- 50:23मैं तुम्हें पहले का दर्द कहाँ? फिर तुम दर्द को भी कहते हो नहीं
- 50:32हो अगर इसी मार्क्स के में था नहीं तब क्या करें?
- 50:41मैं उसके ऐसे चोट की भरता? वो चिल्लाता मैं कहता क्या हुआ,
- 50:49दर्द हुआ दिखाओ तो वो वही शब्द बोलता जो मैंने बोले नहीं दिखाया
- 50:56जाता, बस फिर तुम जब छोटे से अनुभव को दिखा नहीं सकते।
- 51:03छूटकी के दर्द को नहीं दिखा सकते तो इस विराट के होने को मैं कैसे
- 51:09दिखा सकता हूँ? सूत्र नहीं दिखा सकता तो विराट
- 51:16कैसे दिखा सकते हो नहीं दिखा सकता, बस विराट के एक्सप्रेशन बता
- 51:21देते हैं। के विराट है, दर्द का एक्सप्रेशन
- 51:27दिखा देता है। तुम्हारे माथे के सिलवटे पड़
- 51:30जाएंगे तुम दर्द से कराह उठोगे तुम्हारी आह की आवाज़ बता दे, अभी
- 51:39कुछ कुछ दुख रहा है। बच्चा रोयेगा बस रोने से ही माँ
- 51:45समझ जाएगी। यह तो भूखा है या फिर कुछ दुख रहा
- 51:52है? एक्सप्रेशन ढंग तो है, लेकिन तुम
- 52:00समझने वाले भी तो बोलो। तो मार्कस की बातों में मत आ
- 52:07जाना। मार्कस खुद बेचारे हैं, सभी
- 52:14नास्तिक बेचारे हैं, उसको इनकार करते हैं।
- 52:19जीसको बताया नहीं जा सकता। वह पर अनुभव है और यहाँ तो छोटे
- 52:24छोटे अनुभव भी नहीं पता जाता तो कैसे सुनें?
- 52:31मैंने विस्तार से बताया, आज फिर भी समझना है तो फिर पूछ लेना।
- 52:39क्योंकि ये तुम्हारी ज़िन्दगी का एक मुख्य सूत्र है।
- 52:43इस सम्मुख्य सूत्र को मैं चूकना नहीं चाहता और मैं चाहता हूँ
- 52:51तुम्हारे शुरू हो गया तो तुम बड़े भाग्यशाली हो, तुम भी ना चूक
- 52:56जाना। यह परमात्मा तुम्हें आवाज़ दे रहा
- 52:59है, यह इस बात का सूचक है कि तुम योग्य होए, उस तक पहुंचे तो अपनी
- 53:10योग्यता को और बढ़ाना, योग्यता को बढ़ाना तुम ठहर जाना मात्र।
- 53:16योग्यता अपने आप पड़ती रहती है, जैसे लोग पूछ लेते हैं, कॉन्शसनेस
- 53:25लेवल को कैसे बढ़ाया जाए कॉन्शस, आज बता दूँ, आज सुन लो कॉन्शसनेस
- 53:34लेवल को। ठहर के बढ़ाया जा सकता है।
- 53:39जितना ठहर जाओगे, डीप ठहर जाओगे, डीप वेस्ट ठहर जाओगे, उतना ही
- 53:46कॉन्शसनेस लेबर बढ़ता जाएगा। बस ये एक सूत्र है बड़ा अजीब सा
- 53:52सूत्र है, हाँ इसके लिए कुछ नहीं करना पड़ता।
- 53:59तुम्हारा ठहराव तुम्हारी कान्शस्नस लेवल को बढ़ाएगा और कोई
- 54:06ढंग नहीं और कोई तरीका नहीं। तुम मात्र ठहर जाओ।
- 54:12ठहरने से कान्शस्नस लेवल बढ़ेगा। और तुम इतने हो जाओगे तुम
- 54:17सुपरकॉन्शियसनेस में हो जाओगे, तुम परम चेतना में चले जाओगे,
- 54:28बूंद समुद्र में समा जाएगी। बूंद समुद्र का ही हिस्सा है।
- 54:39कहीं गलत हो गई, अलग हो गई। अब जो भीतर से आवाज़ आती है के आ
- 54:47जाओ तो तुम्हें पुकार रहा है वो आनंद तुम्हें पुकार रहा है।
- 54:55वहाँ जाओ, ऑसम के नी उदास लम्हों में कौन बुला रहा, कौन पुकार रहा?
- 55:12ये क्या है? मुझे कौन बुलाता है आप वास्ते के
- 55:17कौन बुलाता है? ये कौन है जो पास से गुजर जाता
- 55:23है, ये कौन है जो रोला जाता है? तुम्हें पता भी नहीं चलता ये मस्त
- 55:37मस्त सी हवाएं, ये गुलशन में भीनी भीनी सी सुगंध की फिजाएं तुम्हें
- 55:48कुछ एहसास कराती हूँ ये तुम्हें अपने पास बुलाती हूँ।
- 55:55तुम जाओ, इसके पास वह तुम्हें बुलाता है तुम्हें कुछ याद आएगा
- 56:08उसके करीब किसको ज़रा उसके करीब जाओ।
- 56:17अपने भीतरों से। शामज आंसू वहती।
- 56:33आ गई। शाम जब आंसू।
- 56:40वहती आ गई हर तरफ। गम की।
- 56:50उदासी छा गई। दीप यादों के जलाकर रो दिए।
- 57:07आपके पहलों में आकर रो रही दास्ताने?
- 57:24रो होती है। आपके पहलू में आकर रो दी ज़िन्दगी
- 57:37ने कर दिया जब भी। उदास ज़िन्दगी ने कर दिया जब भी
- 57:53उदास आ गए घबरा के हम। मंजिल के पास सर झुकाया, सर
- 58:09झुकाकर रो दिए आपके पहलू में। आकर रौदी गम जुदाई का सहा जाता
- 58:32नहीं गम जुदाई का स। जाता नहीं आपके बिन अब रहा जाता न
- 58:54प्यार में प्यार में। क्या क्या जमाकर रो दिए प्यार में
- 59:10क्या क्या जमाकर रो दिए आपके? पहलू में आकर रौ दी दास्ताने हम
- 59:31सुनाकर रोए आपके। पहलुओं में आकर रोडिया आप के पहलू
- 59:50में आकर रोडिया गमजदाई का सहा जाता नहीं।
- 1:00:03आपके बिन अब रहा जा रहा है यह दर्द की जुदाई गमें जुदाई में अब
- 1:00:11नहीं से प्यार में। क्या क्या गंवा कर रो दिया है?
- 1:00:21सब कुछ कमा दिया खाप हो गया और ध्यान रखना गंवा कर ही पाया जाता
- 1:00:28है। तुम चलते हो कुछ पाने के लिए पता
- 1:00:35तब चलता है जब। बिना बिना आनंद आना शुरू होता है
- 1:00:41फिर तुम अटक जाते हो फिर तुम देखते हो कुछ गवाया क्या आनंद को
- 1:00:53पाने की लालसा। लेकिन देखते हो कि कुछ गवा के यह
- 1:00:57आनंद पड़ा है तो तुम फँस जाते हो, लेकिन यह आनंद का जादू इतना गहरा
- 1:01:06है कि तुम्हें अपनी तरफ खींच लेता है, इसको छोड़ने का दिल नहीं
- 1:01:11करता। उस आलम में आकर स्थान पर आकर तुम
- 1:01:17अपने आपको गंवा देते हो सारे का सारा जैसे परवाना शमा में खाक हो
- 1:01:25जाता है राख हो जाता है बस में भूत हो जाता है चलो ओके शुरू में।
- 1:01:35चलोगे? इस नियत से चलोगे कुछ मिलेगा और
- 1:01:41जैसे जैसे तुम बेहतर जाओगे तुम थोड़ा थोड़ा गवाओगे और थोड़ा
- 1:01:49थोड़ा पाओगे थोड़ा थोड़ा गवाओगे वो।
- 1:01:53जो दुखड़े थे, जो गम था, जो आग थी, जो चेतना थी, जो चिंता थी,
- 1:01:59तनाव था, वो गवा दो और थोड़ा थोड़ा पाओगे और मीठा मीठा टपकता
- 1:02:08हुआ बीना बीना रस। आनंद का वो स्रोत बिखेरेगा
- 1:02:13तुम्हारे पास और तुम लाचार हो जाओगे, न तुम वापस मुड़ सकोगे आगे
- 1:02:22जाने का जीरा करेगा क्योंकि यह दर्द बड़ा मीठा है।
- 1:02:29यह दर्द बड़ा प्यारा है। इस दर्द को सहने का जी करता है इस
- 1:02:38प्यार में लूट जाने को जी करता है तेरी महफिल में किस्मत आजमाकर हम
- 1:02:46भी देखेंगे। घड़ी भर को तेरे नदी का कर हम भी
- 1:02:53देखेंगे, हम लूट कर देखेंगे, हम भी खुद ही को लुटा कर देखेंगे और
- 1:03:10अगर तुमने खुद ही को लुटा दिया। तो तुम जो पाओगे, उसको छोड़कर भी
- 1:03:18नहीं पाओगे। गमजुदाई का सहा जाता नहीं आपके
- 1:03:28बिन अब रहा जाता नहीं जो तुम पालोगे।
- 1:03:31उसके बिना नहीं रह पाओगे, लेकिन वो पुरानी यादें और माशूका वश्क
- 1:03:44जब बहे थे वो कभी कभी याद आएँगे तो लेकिन ये है जो प्यार मिला है।
- 1:03:53यह लाजवाब निराला इससे पहले कभी नहीं पाया।
- 1:04:02आपके बिन अब रहा जाता नहीं, जब ऐसी दशा जाए तो फिर गवाने को दिल
- 1:04:09करेगा प्यार में क्या क्या गंवा कर?
- 1:04:13ओके मिटा दें अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्दबा चाहे के दाना खाक में
- 1:04:21मिलकर गुरुकुलजार होता है श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:04:32हरे मुराय हे नाथू नारायण यन वासुदेव।
- 1:04:52श्री कृष्ण, गोविन्द हरि, मोरारी हेनाथ, नारायण वासुदेव।
- 1:05:17मात स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी सखा हमार।
- 1:05:32हे नाथ नारायण वासुदेव? जय कृष्ण।
- 1:05:43गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण?
- 1:05:51वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव
- 1:06:05पितुमात स्वामी सखा हमार। हे नाथ नारायण वासुदेव?
- 1:06:17श्रीकृष्ण? गोविंद पनन्या सिम तोमा।
- 1:06:30परपार्शित। ते?
- 1:06:34शम नित्याग योग से मम वहाँ। श्री कृष्ण।
- 1:06:52गोविन्द हरे मरारे हे नाथू नारायण वासुदेव।
- 1:07:04श्रीकृष्ण? गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:07:14यन वासु देओ। हे प्रभा तेरे व्रत तो को असंख्य
- 1:07:36कोण धन्यवाद?