Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Jan 26 - आत्म-स्मरण क्या है? | खुद को जानने की पहली सीढ़ी | मैं कौन हूँ? आत्म-स्मरण की प्रक्रिया
Transcript
- 0:09बाबा रमन कहते हैं हूँ आर यू तुम कौन हो कैसे पता लगाएं?
- 0:27गुरजफ कहते हैं, सेल्फ रिमेम्बरिंग खुद को याद करो लाउजे
- 0:36कहते हैं नो दाय सेल्फ अपने आपको जान।
- 0:45कैसे जानें अपने आपको कैसे याद करें अपने आपको मैं कौन हूँ ये
- 0:53कैसे पता लगे? कैसे याद करें खुद को उससे पहले
- 1:12पिछली वीडियो में थोड़ी सी बात रह गई थी काल भार्वती और महाकार।
- 1:26तो जब काली के ऊपर कोई उसकी शक्ति खींचने वाला अनूढ़ हो गया, शिवजी
- 1:41उसके पति थे। ये प्रकृति और पुरुष की बात चल
- 1:46रही है ध्यान में रखना। तो शंकर की छाती पर पांव रखना
- 1:58शक्ति का और उसकी सारी शक्ति बिलुप्त हो जाती है।
- 2:10सिर्फ जोश अकेला विनाश की तरफ लेके जाएगा।
- 2:16सिर्फ शक्ति अकेली विनाश की तरफ ले के जाती।
- 2:21आपने देखा कोई छोटा बच्चा भाग रहा है।
- 2:26आगे देखता ही नहीं कि कौन उसमें होश कम है, बहुत कम आगे नहीं
- 2:33देखता। उसे पता ही नहीं।
- 2:37बस भागे चला जाता है गली मोहल्ले में सड़क पर कच्ची राहों पर दौड़
- 2:44लगाता है, आगे नहीं देखता है कुछ भी हो सकता है लेकिन होश नहीं।
- 2:54और कहीं कहीं दुर्घटनाएं हो जाती है।
- 2:57अकेला जोश आपको दुर्घटनाग्रस्त कर देगा, लेकिन जोश के साथ अगर होश
- 3:06हो शक्ति आपका विनाश करे। अगर आपको होश नहीं नंगी तारों को
- 3:1611,000 वोल्ट की नंगी तारों को भी अगर आप छू दोगे बिना समझे के यह
- 3:25है क्या? तो गिर फ्लो शॉट खो जाओ मृत्यु
- 3:31हो। अकेली शक्ति प्रज्ञा के बिना होश
- 3:37के बिना मार्ग है, लेकिन जब होश आता है शंकर चले उन देवताओं के
- 3:46कहने से लेट गए। और जैसे ही पांव रखा कालीन और
- 3:53उसकी सारी शक्ति खींच ली। होश सारी शक्तियां को खींच लेता
- 3:58है, होश के आगे सारी शक्तियां बेबस मालूम पड़ती है।
- 4:05होश सारी शक्तियां को समाहित कर लेता है।
- 4:10होश अद्वितीय है। होश को साधे रखना, अबया रहने को
- 4:14साधे रखना तो काली जैसी महाविकराल जिसका रूप जगाकर वर्णन कर आपको
- 4:25डराया गया। उसकी सारी शक्ति खेंचली शंकर के
- 4:32होश, शिव के होश, पुरुष की जीव बाहर जैसे किसी को करंट लग जाए।
- 4:45उसकी जीभ बहार आ जाती है। एक कुल मात्र यह व्याख्यान किया
- 4:52गया। इस बात के लिए दो हर्ष का
- 4:56व्याख्यान था जो मैंने एक छोटे से छंद में बोल दिया।
- 5:04होश रखना सिर्फ जोश से कुछ नहीं होगा।
- 5:11सिर्फ जोश से दुर्घटनाएं होती हैं, ऐक्सिडेंट्स होते हैं।
- 5:25लेकिन जोश के साथ होश भी हो तो बात बन जाती है।
- 5:33आप अपने गंतव्य तक पहुँच ही जाते हो सो होश रकम।
- 5:40इस सारे प्रकरण का निचोड़ था होश सादे रखना।
- 5:48शंकर की तरह औकोपित नहीं हुए। उन्होंने देखा कि मैंने शक्ति को
- 5:56यहाँ बिठाया था, शक्ति भाग गई। शक्ति भागती ही रहती है।
- 6:01शक्ति ठहरती नहीं ऊर्जा कवि ठहरती ये करंट गुजरता ही रहता है जब तक
- 6:09कि उस करंट को स्विच ऑफ ना कर दिया जाए तो शक्ति वहाँ से भाग
- 6:14गई। समाधि खुली शंकर की।
- 6:18उन्होंने रास्ते में लेट गए, पांव पड़ा, काली का सारी शक्ति खींच ली
- 6:26और उसकी जीवा भर ये डराने वाले पागलों से सावधान रहना बहुत से
- 6:36ग्रंथों के पोथे गिनाएंगे आपको। दिखाएंगे मेडल्स दिखाएंगे, लेकिन
- 6:43देखिए आप इनको लाख साल सुनते रहना आपको समझ कुछ नहीं आएगा, आप अंत
- 6:50में पाओगे के हाथ खाली के खाली मलते रह जाओगे।
- 6:57सो, ऐसे मूर्खों से सावधान रहना, जो ज्यादा किताबें दिखाकर आपको
- 7:02प्रभावित करते हैं, जो ज्यादा इंटेलिजेंस दिखाकर शब्दों की आपको
- 7:08प्रभावित करते हैं। ज्ञान नाम की इसमें कोई बात नहीं,
- 7:13अवेयरनेस को जगाने की इनमें कोई बात नहीं।
- 7:17ये तो कहानी सुनाने में दक्ष कृष्ण भगवान ने संदीपनी आश्रम के
- 7:27अंदर जाकर 64 दिनों में 64 कलाओं का अध्ययन कर लिया।
- 7:40चार वेद शेष शास्त्र 1018 पुराण 28 और।
- 8:0516 दिनों में 16 कलाएं और 20 दिनों में गीता क्या 18 शास्त्र?
- 8:2218 पुराण 18 दिनों में छः शास्त्र छः दिनों में 24 चार वृद्ध चार
- 8:36दिनों 2816 कलई 16 दिनों। 44 और 20 दिन लगाए।
- 8:46उन्होंने गीता ज्ञान 64 दिन उन्होंने लगाए।
- 8:51इन 64 कलाओं को सीखने। तो बात चल रही थी होश और जोश तो
- 9:09ये जो भयंकर भयंकर रूप वही बात है, याद कर लेना जो नरक के
- 9:19इन्होंने तांडव। प्रस्तुत किया।
- 9:26अलग ये कैंसर के फोड़े में से क्या अमृत निकला करता?
- 9:30यही तो कुआ है कुंभ भी पाक नर का और ये राजशाही ठाठ।
- 9:41असली फकीर दा मज़ा ओह चखें ये फकीरी ही तो स्वर्ग और क्या मंडो
- 9:51लाघ मेरो राम फकीरी मैं जो सुख पायो राम भजन मैं।
- 9:57वो सुख नाहीं अमीरी में, अमीरी में आपकी सुख सुविधाओं में वो सुख
- 10:03कहाँ कहत कबीर सुनो भाई साधु साहेब मिलिही सबूरी में।
- 10:12जब तक आपको तृप्ति नहीं होती, सब्र नहीं होती तब तक वो साहब
- 10:18नहीं मिलता। सबूरी में ही वो साहब आता है
- 10:22उत्तर के गगन मंडल से। सुख जिन्हें आप सुख कहते हो सुख
- 10:37नहीं कहाँ है वो सुख आप मान लेते हो सुविधाओं से आराम को आप सुख
- 10:45मान लेते हो जो जूता कल तक काट रहा था, खुद ने ही पहना था।
- 10:51और जूता उतार देते हो, जो काट रहा होता है, लहू लोहान कर दिया होता
- 10:55है। आपके पांव को जब आप उसे उतारते हो
- 10:59तो थोड़ी सी रिलैक्सेशन महसूस करते हो।
- 11:02उस रिलैक्सेशन को आप कहते हो सुख लेकिन सुख नहीं।
- 11:14सुख तो जहाँ है वहीं है सत्संग की आंधी घड़ी भजन के वर्ष 50 आप भजन
- 11:25करते हो, जागते रहो आप जाप करते रहो 50 वर्ष।
- 11:36सत्संग की आंधी घड़ी, भजन के वर्ष 50 आंधी घड़ी का बरसना और हॉल्ट न
- 11:4412 मास आंधी, घड़ी, सत्संग, आंधी, घड़ी ज्यादा कह दी।
- 11:54एक घड़ी 24 मिनट की होती है आंधी घड़ी 12 मिनट, लेकिन 12 मिनट तो
- 12:03छोड़ो। सत्संग अगर आप एक पल के लिए भी कर
- 12:07लोगे, एक क्षण के लिए भी उसमें डुबकी लगा लोगे, बस फिर आप वैसे
- 12:12ना रहोगे जो पहले थे जैसा आपने डुबकी लगाने से पहले आप थे।
- 12:22वैसा दुबकी निकाल के जब बाहर आओगे वैसे नहीं बचोगे, आमूल चूल
- 12:28परिवर्तन हो जाएगा। आपके बीच में सत्संग की आंधी घड़ी
- 12:35भजन के वर्ष 50 साल आप माता कवई करते हो।
- 12:41जब तेर हो कोई भी नाम राधे राधे कृष्ण कृष्ण कुछ भी करते हो
- 12:52अल्लाह हूँ अकबर करते हो? सतसंग की आदि कढ़ी, ये भजन आपका
- 13:04सतसंग नहीं है। 50 साल तक ही करो 50,000 साल तक
- 13:12करो कोई फर्क नहीं पड़ता भजन तो चाहे कितना ही कर लो।
- 13:22कुछ ना मिलेगा आपको शांति ना मिलेंगे, आनंद ना मिलेगा जब तक आप
- 13:34सत्संग में ना उतरोगे। उस सत्य का साचा साहब साचा न
- 13:40पाख्या पाओ अपार उस साचे के भीतर जब तक आप प्रवेश ना करोगे आज सच
- 13:50जुगाद सच हैप्पी सच। नानक हुस्से सच उस सत्संग की बात
- 13:56करते हैं, वो जहाँ बैठे हैं, उनके पास जाना पड़ेगा इसी को उपवास
- 14:04कहते हैं अपने ही पास जाकर वास करना उपवास।
- 14:17वहाँ जाकर शांति पड़ती है। 50 साल के वजन से नहीं मिलता, वो
- 14:2250,000 साल के वजन से भी नहीं मिलेगा, लेकिन सत संघ के 12 मिनट
- 14:29से मिल जाएगा 12 मिनट थोड़े ज्यादा कहते है एक डुबकी से ही
- 14:34मिल जाएगा। डुबकी भर लगा लो।
- 14:36एक बार बस आप उसके योग्य ही रह जाओगे, आमूल चूल बदल जाओगे।
- 14:44एक दर्शन ही तो होता है, कितनी देर लगती है?
- 14:48उस झलक को मिलने में सतोरी की एक झलक किसी ना किसी तरह पर।
- 14:57कुछ भी करते हैं तो आप इन मूर्खों के धंधे से परे हो जाओगे।
- 15:06देख लेना फिर आपको कोई अच्छा ना लगेगा।
- 15:09कुछ अच्छा ना लगेगा। आप अकेले में खुश रहोगे।
- 15:14अब तो आप भीड़ में सुख लेने की चेष्टा करते हो, आप अकेले रह ही
- 15:20नहीं सकते, दौड़ते हो उसे लोग पूछ लेते हैं बाबा 8 साल बाहर का
- 15:27दरवाजा नहीं, ये कैसे संभव है? संभव है?
- 15:35बैठा हूँ। आपके ये दौड़ाता जो मन है वह अगर
- 15:46आपकी आज्ञा मानने लगे वह अगर आपका मित्र हो जाए।
- 15:53तो आपको भगाएगा नहीं, आपका सेवक आपको हुकुम कैसे दे सकता है?
- 16:00आपका हुकुम मानेगा जरूर हुकुम देगा नहीं अभी तक तो आप गुलाम।
- 16:10अभी तक आपका मन आपको हुकुम देता है।
- 16:13हक मन है आप गुलाम जब आप हकम बन गए मन गुलाम हुआ तो मन के गुलाम
- 16:24इंद्रिया है इंद्रिया अपने आप वश में हो जाएंगे।
- 16:29रोज़ मुझे प्रश्न आते हैं बाबा मन बड़ा परेशान करता है बाबा क्या
- 16:37करें? ये इंद्रियां बड़ी परेशान करती
- 16:40हैं। जीवा ढूंढती है स्वादिष्ट चीजें
- 16:44सभी इंद्रियां अपने अपने लुत्फ लेना चाहती हैं।
- 16:49कान सुंदर सुंदर गायन ढूंढ़ते हैं।
- 16:55नाक अच्छी अच्छी खुशबू ढूंढ़ता है।
- 16:58सभी इन्द्रियां अपनी अपनी खुराक ढूंढ़ती हैं।
- 17:01क्या करें क्योंकि इनका इंद्रियों का राजा मन?
- 17:07उसके आप गुलाम हो, आप भी गुलाम हो, इन्द्रियां भी उसकी गुलाम है।
- 17:12जैसा मन कहता है भटका हुआ वैसे ही तुम उसके पीछे हो लेते हो।
- 17:18यही तो विद्या है। ध्यान की मन बोलेंगे बोलते रहे
- 17:23आपकी शक्ति लेकर ही बोलता है। आप उसके पीछे मत जाना और झगड़ा भी
- 17:27मत करना। गुलाम से कभी कोई झगड़ा कसता है
- 17:34गुलाम से झगड़ा भी मत करना और गुलाम के पीछे भी मत होना, उसे
- 17:40हाकम भी मत बनने देना। तुम उसका हुक्म मत मानो तुम अपने
- 17:46में मस्त रहना तुम उसके गतिविधि की तरफ ध्यान ही ना करना उपेक्षा
- 17:52शब्दाता है उपेक्षित रहना उसे कहना तुम जहाँ जाना चाहते हो जाओ।
- 18:04धीरे धीरे उसकी पावर खत्म हो जाएगी।
- 18:06जो पैडल मारे थे आपने साइकिल के उसके पीछे से लगी पावर खत्म हो
- 18:11जाएगी और साइकिल गिर जाएगी आप देख लेना आप खुद उस दिन मालिक हो
- 18:18जाओगे। अपने मन के जीस दिन मन ढह गया।
- 18:22मन की साइकिल गिरी और आप मालिक बन ये तभी तक है मन की साइकिल जब तक
- 18:33आप मन के पैडल न मारते रहते हो। साइकिल चलती जाएगी फिर रोते चलाते
- 18:38हो। हाय बाबा, क्या करूँ ये इंद्रिया
- 18:42परेशान कोई परेशान नहीं करता आपको आप खुद परेशानी में जान बूझ कर
- 18:47पड़े, इसी को मैं अज्ञान कहता हूँ।
- 18:54सभी ऋषि इसी को अज्ञान कहते हैं। इन्द्रियों को छोड़ो, इन्द्रियों
- 19:03के राजा को पकड़ो, मन मन को शक्ति देना, बंद कर दो मन को ठहर जाएगा
- 19:12अपने आप तुम्हारी शक्ति से चलता है, मैंने बहुत बार समझाया।
- 19:18बल्बों को मत तोड़ो, एसी और हीटरों को मत तोड़ो, स्विच को ऑफ
- 19:24कर दो, बस मेन स्विच को ऑफ कर दो पावर हॉउस को ऑफ कर दो।
- 19:33कोई तोड़ फोड़ की आवश्यकता नहीं। लोग इंद्रियां काट के रख देते है,
- 19:37जीवा काट के रख देते है ये बोलती ही रहती है जीवा तुम्हारी इच्छा
- 19:43होगी ना कैसे बोलेंगे ये तो तुम्हारी सेवक है।
- 19:54तो ऐसे खतरनाक दृश्यों को ये पेश करते रहेंगे आप उल्लू बनते रहोगे
- 20:05और उल्लू नहीं उल्लू के पट्ठे बनते रहोगे?
- 20:08एक व्यक्ति नीचे उल्लू बेच रहा, उल्लू लेलो उल्लू।
- 20:14और कोई उल्लू लेने चला गया। कुछ उल्लू होते हैं जो उल्लू की
- 20:18फिराक में रहते उल्लू ही अच्छे लगते है।
- 20:24उल्लू लेने चला गया दिखाओ भाई उसने कुल्लू दिखा दिया।
- 20:30अच्छा खूब तकड़ा। ये कितने का ये ₹20 का वो लोग है,
- 20:37पुराना ज़माना और दिखाओ और दिखाया उसने कोई पसंद नहीं आया।
- 20:47आखिर में छोटा सा बच्चा उल्लू का नवजात।
- 20:51कोई 245 दिन का सुन्दर लगते है। बच्चे किसी के भी छोटे बच्चे वो
- 20:58उल्लू का बच्चा बड़ा सुन्दर लगा वो कहता है ये दे दो मुझे ये
- 21:07प्यारा है ये सुन्दर है। कोई उपद्रव खड़ा नहीं करता, इसकी
- 21:14बताओ क्या कीमत है? कहता बाबा, इसकी कीमत और ₹250 है।
- 21:19अरे इतना फर्क बाबा बड़ा उल्लू 20 और छूटा उल्लू 250 का।
- 21:31क्या फर्क है बाबा? फर्क तो ये है कि ये बड़े वाला तो
- 21:36उल्लू है और ये छोटे वाला उल्लू का पट्ठा जानते बांधते कुछ नहीं।
- 21:50ज्ञान कुछ नहीं उन उल्लू के पट्ठों के पास किताबें धरी पड़ी
- 21:58हैं दिखलाने के लिए, आपकी दिमाग पर इमेज बनाने के लिए।
- 22:05मेरे तो यहाँ कोई कैसा है? बाबा वेस्टो जैम पड़ती है, आपके
- 22:08भीतर एक पानी की सीसी रखी हुई थी, ये क्या है?
- 22:16ये क्यों थी? कोई शास्त्र सजा के नहीं रखे, कोई
- 22:22मेडल मुझे मिला नहीं। कौन मूर्ख मुझे मेडल देगा?
- 22:26किसी का दिमाग भेजा खराब है क्या कोई मुझे मेडल मिलने वाला नहीं,
- 22:35फिकर ही मत करना। वैसे उल्लू के पत्थों से सावधान।
- 22:43इनके पास कुछ नहीं ये आपकी अवेयरनेस को कभी नहीं जगाएंगे।
- 22:47ये आपकी अवेयरनेस को बुद्धि को डराएंगे और दो ही चीजें इनके पास
- 22:53सजा से रहेंगे। ये वही दलाल मीडिया है, प्रचार
- 23:02तंत्र है। कुछ नहीं आता पढ़ा सब कुछ हुआ है
- 23:08रटन तोता सब रट रखा है अपने भीतर ज़रा भी नहीं उतरे एक इंच भी अपने
- 23:15भीतर नहीं खिसके तू इनकी बात मत सुन उलझ जाओगे।
- 23:24सेल्फ रिमेम्बरिंग क्या है बाबा गुरजियत कहते हैं मैं कौन हूँ,
- 23:30कैसे पता कर नो दाय सेल्फ अपने आपको जानू, कैसे जानू?
- 23:38ये तीनों एक ही बात है। सेल्फ रिमेम्बरिंग नो दी सेल्फ
- 23:43हूँ एमआइ याद करो, तुम हो को सेल्फ रिमेम्बरिंग कैसे याद करें
- 23:54खुद को। करोगे याद तो हर बात याद आएगी
- 24:04करोगे? याद तो हर बात याद आएगी।
- 24:10गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी। जैसे ही याद करो।
- 24:18कि तुम हो कौन? गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी,
- 24:24सब लहरें ठहर जाएंगे। गुजरे हुए जवानी की स्मृतियाँ याद
- 24:31न है करोगे याद तो हर बात याद आएगी।
- 24:38गुजरते वक्त की हर मोज़ ठहर जाएगी।
- 24:44जैसे ही जानोगे की तुम हो को याद करोगे स्मृतियां ठहर जाएंगी।
- 24:55भविष्य की कल्पनाएं ठहर जाएंगी। याद करोगे तो करोगे याद तो हर बात
- 25:05याद आएगी। गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी,
- 25:11मौज लहरों को कहते हैं। ये जो उथल पुथल होती है, समुद्र
- 25:15के भीतर की मोजों की फिर ठहर जाएँगी, कोई ज्वार बाटा, कोई
- 25:19तूफ़ान न उठेगा ये चाँद ये चाँद बीते जवानों का आईना होगा।
- 25:30ये चाँद बीते जवानों का आईना होगा भटकते अपर में चेहरा कोई बना होगा
- 25:40इस भटकते हुए अपर में आसमान में चेहरा कोई भटकता होगा।
- 25:50ये चाँद जमाने के चाँद बीते जमाने में आईना होगा भटकते उप्र में
- 26:00चेहरा कोई बना होगा उदास रहा कोई दास्तां सुनाएगी।
- 26:10ये चाँद बीते जमाने का आईना होगा भटकते अब्र में चेहरा कोई बना
- 26:18होगा उदास रहां कोई दास्तां सुनाएंगी।
- 26:29कहाँ भटक गया ये दर्द की दास्तां सुनाएगी।
- 26:34कहाँ रह गया, कहाँ गुम हो गया, क्या हो गया, क्या था, क्या हो
- 26:41गया? उदास राह कोई दास्तां सुनाएगी या
- 26:51कोई दास्तां सुनाएगी। आपको कैसे भटके क्या हुआ जिससे
- 26:58तुम्हें भटकना पड़ा इतना दुख दर्द सहना पड़ा बरसता भीगता मौसम धुआं
- 27:05धुआं होगा। भीगेगा यह मौसम परंतु धुआं कहीं
- 27:13नहीं जाएगा बरसता भीगता मौसम धुआं धुआं होगा पघलती शमों पे जल का
- 27:23मेरे घूमा होगा। श्यामे, पिघलेंगी और पिघलती हुई
- 27:29श्यामों को देख कर मेरे दिल में गुमान आएगा हाँ खुश हो रहा है
- 27:43पिघलती श्यामों पे। दिल का मेरे गुम्मा होगा,
- 27:48हथेलियों की हिना, हथेलियों की हिना, मेहंदी लगी हुई हिना,
- 27:55हथेलियों की हिना याद कुछ दिलाएगी कुछ याद दिलाएगी।
- 28:06कामिनी कभी तू सुहागन हुआ करती थी, आज ये हाथ सुने मेहंदी से
- 28:16रेख। बरसता भीगता मौसम धुआँ धुआँ, होगा
- 28:23ये गलती शमों पे दिल का मेरे गोमा होगा, हथेलियों के गिना याद कुछ
- 28:32कराएंगे। हथेलियों की हिना याद कुछ दिलाएगी
- 28:39करोगे याद तो हर बात याद आएगी, याद करोगे तो बात याद आएगी, सेल्फ
- 28:50रिमेम्बरिंग होगी याद करोगे तो हर बात याद आएगी।
- 28:55गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी, हर लहर पर अंकुश लगेगा।
- 29:02ये मन की मौज की लहरें ठहर जाएंगी, समय ठहर जाएगा ये उछलता
- 29:09कूदता, तांडव नृत्य करता तुम्हारा मन शांत हो जाएगा थोड़ा याद करके
- 29:14तो देखो। गली पे मोड़ गली के मोड़ पे सुना
- 29:21सा कोई दरवाजा गली के मोड़ पर सुना सा कोई दरवाजा जीस घर के
- 29:32भीतर तुम सदा रहते थे। ओह गली के मोड़ पर सुना सा कोई
- 29:38दरवाजा माँ मुद्दतों से तुम गए ही नहीं वो दरवाजा सदा से बंद है जंग
- 29:47लग गई उस दरवाजे को, गली के मोड़ पे सुना सा कोई दरवाजा।
- 29:53तरसती आँखों से रस्ता किसी का देखेगा वो भी ऐसा ही करता है ये
- 30:01दरवाजा गुजरती राह से रस्ता किसी का देखेगा।
- 30:10ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं?
- 30:19ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं जहाँ से
- 30:27भटके थे? ये दरवाज़ा भी तरस रहा है।
- 30:31गली के मोड़ पे सुना सकोई दरवाज़ा तरसती आँखों में रास्ता किसी का
- 30:38देखेगा क्या करेगा कौन आ रहा है कब आएगा वो पिछड़ा हुआ मेरा बालक?
- 30:50गली के मूड पे सुना सा कोई दरवाजा तरसती आँखों से रास्ता किसी का
- 30:58देखेगा निगाह दूर जा के लौट आएगी। कोई दिखेगा ही तुम जाते कहाँ हो
- 31:10वहाँ निगाहें दूर तलक जाके लौट आएंगी करोगे जहाज तो हर बात याद
- 31:22आएगी करोगे याद? तो हर बात याद आएगी।
- 31:30गुजरते वक्त की हर मोज़ ठहर जाएगी।
- 31:36जैसे ही तुम्हे याद आ जाएगा गुजरते वक्त की हर मोज़ ठहर
- 31:43जाएगी। मन का ये तूफान शांत हो जाएगा।
- 31:47कोई स्मृतियां न उठेंगे, कोई कल्पनाएं, कोई वासनाएं, कोई
- 31:53कामनाएं, कोई यादें न उठेंगे, याद करो तुम कौन?
- 32:07सेल्फ रिमेम्बरिंग इसे ही कहते हैं गुरूजीब किसे जात करें, कैसे
- 32:12जात करें? बाबा हूँ ए मैं नो द इत्सेल्फ
- 32:22रास्ता एक है। मैं बार बार कहता हूँ आराम से बैठ
- 32:31जाओ सब छोड़ छूट के झंझट तूफानों को सब फिकरों को उसके हवाले करके
- 32:40सर्वधर्म पर त्य। उसके शरण में उतर जाओ, सब छोड़ के
- 32:47उतर जाओ, उछलते हुए रथ में जब बैठ ही गए हो, तुम परमात्मा तो शक्ति
- 32:54उतारते रथ फिर तुम कुछ करते नहीं, तुम कुछ कर सकते नहीं।
- 33:03घूमा। पाल रखा है कि मैं करता हूँ घूमा
- 33:07पाल रखा है कि मैं कर सकता हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकते, ये
- 33:12तुम्हारा भ्रम है। इस भ्रम को विदा कर दो।
- 33:21वो तुम्हारी राह देख रहा है जिसे तुम रिमेम्बर करना चाहते हो गली
- 33:28के मोड़ पे, सूना सा कोई दरवाजा, वो दरवाजा वही है जहाँ से तुम कभी
- 33:35भी। गली के मोड़ पे सुना सा कोई
- 33:44दरवाजा तरसती आँखों से रास्ता किसी का देखेगा गली के मोड़ पे
- 33:55सुना सा कोई दरवाजा तरसती आंख से। रास्ता किसी का देखेगा, कहीं आ तो
- 34:04नहीं रहा है मेरा प्यारा बालक मेरा अमृत पुत्र आ तो नहीं रहा?
- 34:18तरसती आँख से रास्ता किसी का देखेगा निगाह दूर तलक जाके लौट
- 34:27जाएगी क्या करे वो भी बेचारा बड़ी देर से बैठ तुम्हे निहार रहा है।
- 34:37निगाह दूर तलक जाती है। बार बार ये दरवाजा कोई खट खटाता
- 34:45है, हवाएं खटखटाती है, दरवाजे को रूठ के बाहर आता है और खोल के
- 34:52देखता है। निकाह दूर तलक जाके लौट आएगी
- 35:00करोगे याद तो हर बात याद आएगी याद करो तुम कौन अपने भीतर?
- 35:20ये छोड़ो बाहर के सारे पाखंड ये जप, तप, त्याग, पूजा, प्रार्थना,
- 35:29प्रतिष्ठा, अरदास ये सब छोड़ दो पाखंड है ये बाहर भटकती है
- 35:35तुम्हें और वो। तुम्हारा अमृत तत्व भीतर तुम्हें
- 35:39रास्ता निहार रहा है वो तुम्हारा अमृत तत्व तुम्हें कब से इंतजार
- 35:46करता है ये कब आओगे ये सुना सा दरवाज़ा जिसे छोड़ के गए थे कब से
- 35:54बैठा तुम्हारा वो? प्यारा निहार रहा है तुम्हारी बात
- 36:05को गली के मोड़ पर सुना सा कोई दरवाजा।
- 36:18तरसती आंख से वृद्ध आँखों से जैसे कोई बूढ़ा निहार रहा हो अपने
- 36:25पुत्र को जो बरसों पहले न जाने कहाँ चला गया था भीड़ में खो गया
- 36:31था गली के मोड़ पे सुना सा कोई दरवाजा।
- 36:37तरसती आँख से रास्ता किसी का देखेगा तुम देख लेना वो तुम्हें
- 36:43बाहों में जकडण दिखा तुम ही ने उसका दर्द छोड़ा वो तो कब से
- 36:52पुकार रहा तुम ही उलझ गए ऐंठाट वाट।
- 36:57इन राजशाही में इन धन के अम्बारों में इन पद्व प्रतिष्ठा इनके ऊपर
- 37:03तुम बोले गए तरसती आंख से रास्ता किसी का देखेगा निगाह दूर तलक।
- 37:16जाके लौट आएगी कोई न दिखा, दरवाजा खटखटाने वाला कोई नहीं था।
- 37:25ये तो हवा का झोंका था जिसने दरवाजे को खटखटा दिया।
- 37:31निगाह दूर तक जाके लौट आएगी। करोगे याद तो हर बात याद आएगी
- 37:44गुज़रने वक्त की हर मोज़ ठहर जाएगी सब तुम्हारे मन के तूफान
- 37:52ठहर जाएंगे। तुम उसमें विलीन हो जाओ बहुत बार
- 37:57तुम्हे रास्ता बताया अपने भीतर उतरो छोड़ छाड़ के इन झंझटों को
- 38:07मत, तपो धुने मत गंगा स्नान करो। मत हज करो खुशी सीझ दे कर दा किस
- 38:19के मथे ना कुछ तीरथ ना कुछ मके कहीं चले जाओ।
- 38:33सिजदे कर सिजदे करदे कस गए मथे ना कुछ तीरथ ना कुछ मके कहाँ मिलेगा
- 38:51अपने? बाहर के सारे ये छोड़ दो
- 38:57क्रियाकलापों को अपने भीतर उतरो, शांत होके उतरो और देखो कुछ ही
- 39:06देर में। उस प्यारे की आगोश में लिपटे हुए
- 39:11पाओगे खुद को गुजरते वक्त की सब मोज़ ठहर जाएगी।
- 39:19धन्यवाद।