Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Oct 25 - मोक्ष द्वार: नए युग का आरम्भ, नए धर्म की शुरुआत! आनंद का मूल मंत्र! Baba ji Vijay vats Satsang
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- 0:21जगदीश राय बाबा जी चरसपंथ आपने सभी धर्मों को सिरे से नकार दिया।
- 0:51हिंदू हो या मुसलमान? सिख हो ईसाई पारसे
- 1:08हम आपसे आज पूछना चाहेंगे धर्म की सही परवश।
- 1:18आप क्यों बोलें? इतना धर्म है क्या और गांठों को
- 1:37आप खोल देते हैं और सबसे बड़ी गांठ रही है?
- 1:50जिसकी हम चर्चा करते हैं हर दिन वो धर्म है क्या?
- 2:03तो आइए आज एक नए धर्म की शुरुआत करते हैं।
- 2:14वह धर्म जो किसी की जान नहीं लेंगे, वह धर्म जो किसी का माल
- 2:26नहीं छीनेगा। वह धर्म जो किसी के ऊपर आधिपति
- 2:43नहीं करेगा। आइए आज इस धर्म की शुरुआत करते
- 2:56हैं। मैं तो इतना बोला आकर उसके पीछे
- 3:06का उद्देश्य क्या धर्म में कैसे मानता हूँ?
- 3:20पहली बात तो ये सब। कि मैं मानता मानता कुछ भी नहीं,
- 3:29मैं सिर्फ और सिर्फ जानता हूँ और जो जानता हूँ वे बाकी से बोल देता
- 3:38हूँ। दो 4 दिन की ज़िन्दगी में क्या
- 3:52खोओगे क्या पाओगे? देर न करते हुए इधर उधर न भटकते
- 4:07हुए। आइए हम सीधी स्ट्रेट लाइन पे चलते
- 4:12हैं धर्म है क्या? मेरी नजर में धर्म क्या है?
- 4:21तीन चीजें हैं। वह जो सभी को स्विकार्य हो, वह
- 4:35धर्म प्राणी मात्र को स्विकार्य हो।
- 4:45अकेले मनुष्य को चाँद तारों को ग्रह नक्षत्रों को।
- 4:58ब्रह्मंड को बहती हुई फ़िजाओं को हवाओं को बहते हुए गुलशनों को
- 5:09कैसे अच्छा लगता है बेहतर? मेरी आज एक बात ध्यान से समझ लेना
- 5:22धर्म है क्या धर्म है खुशी कोई परमात्मा नहीं छोड़ दो परमात्मा
- 5:34को। नहीं नाम बिगड़ गए हैं बिगड़ रहे
- 5:40हैं तिग्ड़ गए हैं। धर्म है कुश, धर्म है शान।
- 5:55और धर्म है आनंद चरई वैती चरई वैती चरई वैती चलते रहो, चलते
- 6:11रहो, चलते रहो, सब तक चलते रहो। जब तक ये तीन चीजें न पालो, सुख
- 6:26शांत और आनंद इससे बढ़कर कोई भी धर्म नहीं।
- 6:43और जो सर्वस्वीकार्य है प्रत्येक मनुष्य को, प्रत्येक प्राणी को,
- 6:55जीव जंतु को, पंक्षी को। जल में रहने वाले।
- 7:03नव 4 साल चार जल चार ब्रम्हंडों में रहने वाले और ग्रहों पे रहने
- 7:14वाले। किसी को भी इन तीन चीजों से
- 7:19आपत्ति नहीं है। तो मैं आज ये कह लो एक नए धर्म की
- 7:34शुरुआत कर रहा हूँ। 18 अक्तूबर 2025 सुबह है 7:15 बजे
- 7:55और जीस धर्म का मैं बखान करनी है ना?
- 8:01उसका नाम है मोक्ष द्वार मुक्ति का द्वार।
- 8:09मोख द्वार गेट ऑफ। निजात का दरवाजा।
- 8:28सभी हिंदू नहीं होना चाहेंगे। सभी इस्लाम को नहीं मंजूर करेंगे
- 8:39इस शायद को योदियत को सिखिस्म को। किसी भी धर्म को अन्य धर्म को सभी
- 8:59प्राणी एक स्वर से एक मत से स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन आज
- 9:09मैं एक धर्म की शुरुआत करने जा रहा हूँ, पर वह धर्म किसी के
- 9:15नहीं। उसका वही सिद्धांत एक दुसंतो का
- 9:23सिद्धांत है, जियो और जीने तो लिव।
- 9:35ऐन्ड्रैक्ट लिव हिंदू धर्म से किसी को आपत्ति हो सकती है, सिख
- 9:48धर्म से आपत्ति हो सकती है। इस सलाम से ये होती से इस साई से।
- 10:00किसी प्राणी मात्र को आपत्ति हो सकती है, कोई मनुष्य रह सकता है,
- 10:10मैं नहीं बनूँगा, मैं मानता ही नहीं, मैं तो नास्तिक हूँ।
- 10:25मैं तुम्हें बताऊँ मेरे धर्म को नास्तिक भी स्वीकार कर।
- 10:38क्योंकि प्रत्येक प्राणी उसी की खोज।
- 10:40में है हर वक्त। सगल संसार की संरचना खुशी का
- 10:59लक्ष्य लिए चली जा रही है। कौन नहीं चाहता उसका जीवन शांत?
- 11:15कौन नहीं चाहता कि वह शांत हो, सुखी हो, आनंदित हो कोई दुनिया
- 11:30में ऐसा प्राणी नहीं है? जो इन तीन तीन चीजों का तिरस्कार
- 11:37करते। हैं सुख शांत आनंद बस मेरा ही था।
- 11:49तीन सिद्धांत हैं इसके। सिद्धांतों के बजाय लक्ष्य कहना
- 11:56ज्यादा ठीक है, तीन लक्ष्य हैं। तुम्हारे जीवन के यह धर्म विभक्त
- 12:05नहीं है। यह मात्र डेफिनिशन ऑफ रेलिज़म।
- 12:17मोक्ष द्वार मोक्ष द्वार गटफ लिबरेशन निज़ाद का दरवाजा निज़ाद
- 12:32किस्से। तुम जैसे सुख कहते हो।
- 12:51गुलाब के फूल में भी काँटे कांटों को पार करके गुलाब को हाथ लगाया
- 13:00जाता है, नहीं तो काँटे जख्मी कर देते है।
- 13:08उन बहारों से क्या फायदा जिनमें दिल की कली जल गई जख्म फिर?
- 13:23से हरा हो गया है मेरे दिल कहीं और चल।
- 13:35कहीं और चल गम की दुनिया से दिल भर गया।
- 13:43ढूंढ ले अब कोई घर न आए इस महोब्बत से उठारो पान दान अपना न
- 13:55हिंदू, न मुसलमान, न ईसाई, न सिख। नहीं होती न प्रश्न पर यही तो दुख
- 14:17की बात है सभी का लक्षणिक। मतभेद हो सकते हैं सभी के धर्मों
- 14:31की मान्यताओं के ऊपर, लेकिन मेरे धर्म के ऊपर जीव मात्र कोई आपत्ति
- 14:40नहीं करेगा। तुम सुखी होना चाहते हो ज़रा अपने
- 14:52मन से सवाल पूछना क्या मैं ठीक बोल रहा हूँ?
- 14:59तुम शांति होना चाहते हो? तुम नहीं चाहते तुम्हारी ज़िन्दगी
- 15:02में कोई खलल डाले? तुम आनंदित होना चाहते हो यानी
- 15:13मस्त खुमार मदहोशी में रहना चाहते हो चौबीसों घंटे?
- 15:29धर्म की सही परभाषा ही है, लेकिन कितने उतर पाते हैं इस धर्म में
- 15:37खुशी शांत आनंद अरबों, खरबों में कोई एक।
- 15:54और वही एक व्यक्ति तुम्हें सीखा सकता है।
- 16:00व्हाटस युअर ऐम ऑफ लाइफ न हिंदू सीखा सकेगा, क्योंकि उसकी
- 16:09मान्यताएँ न मुसलमान सीखा सकेगा। कि उसकी अपनी माने ना ईसाई सीखा
- 16:22सकेगा, उसकी भी माने ना सिख सीखा सकेगा।
- 16:28उसकी भी माने ना पादरी नहीं हूँ दी।
- 16:38जो आज तुमने धर्म बनाए उनमें से कोई भी व्यक्तित्व में ये तीन
- 16:47चीजों को नहीं सका सके। लेकिन आज मैं तुम्हें एक बात
- 16:56सीखाना चाहता हूँ आज तुम्हें एक डगर ऐसी देना चाहता हूँ जिससे
- 17:04मनुष्य का प्राणी मात्र भी वश में आ जाता है।
- 17:10प्रेम मुक्ति का द्वार। बताइए कौन सुख को नहीं चाहता कि
- 17:29मैं सुखी हो जाऊं? तुम दुख को परेत कर के हो, कौन
- 17:39दुख को झेलना चाहता है? प्रत्येक प्राणी सुखी होना चाहता
- 17:43है। क्या तुम्हारा ये लक्षण?
- 17:47लेकिन तुम्हें तो लक्ष्य कुछ और बजाया गया।
- 17:52ब्रह्म मुहूर्त में उठना वह नींद जो परमात्मा की देन है।
- 18:04उसे छोड़ देना है, बस 3:40 के बाद त्याग दूँ।
- 18:14अपना बिछु ये धर्म है। फिर कोई कहेगा नमाज़ अगा करने कोई
- 18:35कहेगा मंदिर जा के मूर्ति को, माथा ठीक है कोई कहेगा चर्च?
- 18:49कोई गुरु घर में जाने की बात कहे, लेकिन सभी बातें अलग है।
- 18:56मैं जो बात कह रहा हूँ उसमें कोई अलग बात नहीं, तुम कहीं मत जाओ।
- 19:04मस्ती से बिछोने पे पड़े रहो तुम नहीं जानते कुदरत सबसे बड़ी
- 19:12डॉक्टर। उससे बड़ा हाकिम वैध कोई है नहीं
- 19:21पशुओं के पास कौन से डॉक्टर। लेकिन प्रकृति ने अगर शरीर बनाया
- 19:30इतनी सर्जनों को बनाने वाला शरीर को अगर कोई क्षति हो जाए तो वह
- 19:38कैसे पूर्ण करें? यह भी उसने बेहतर सिस्टम बनाया।
- 19:45तुम तो नहीं जानते लेकिन शिक्षित लोग ये जानते हैं।
- 19:54उसने ऐसे ऐसे प्रबंध किए। जिससे तुम रोग मुक्त हो जाओ बिना
- 20:06दवा लिए नैचुरल व्यर्थ बस प्रकृति को सुन दो।
- 20:22अपना दायित्व प्रकृति को सुन ऐम इन युअर हैंड्स दो वडावर और लाइक
- 20:31इसे ही नेचुरोपैथी कहते हैं। प्राकृतिक चिक्स और ध्यान।
- 20:37रखो वह चिकित्सा तुम्हारी खोजो में बने।
- 20:50यह चिकित्सा परमात्मा ने पहले से बनाई हुई है।
- 20:55वैज्ञानिक समझती है कि हम अपनी समझ से ज्यादा सूखे हो जाएंगे।
- 21:00गलती में जीवन को लंबा कर दोगे। सुखी नहीं सुविधाएं जुटा दोगे,
- 21:17सुख न दे पाओगे, धन के अम्बार लगा दोगे, शांति नहीं मिलेंगे।
- 21:33दवाइयां बना दो के कॉम्बिनेस के शांति न पैदा कर पाओगे बाहर की
- 21:50चीजों को। तुम सेवन कर।
- 21:56भांग, अफीम, गांजा या अन्य अन्य अमादक द्रव्य।
- 22:05लेकिन क्या ये शांति दे? पाएंगे।
- 22:11क्या जिन दवाइयों को लेकर तुम सोते हो सो जाते हो?
- 22:20क्या उनकी गुणवत्ता वही होती है? जीस गुणवत्ता से बच्चा सोता है
- 22:31क्या सैड ट्यूब्स ले के? तुम इतने शांत हो पाते हो जितना
- 22:36संत। तुम कम्पोस्ट और वेयरिंग का सेवन
- 22:49करके भी इतने। काम नहीं हो पाते।
- 22:54इतना संत स्वभाविक रूप से हो जाता है।
- 23:02स्वादिष्ट से स्वादिष्ट वस्तु का सेवन करने से तुम्हें इतना स्वाद
- 23:12नहीं आता जितना स्वाद तुम्हें अपने भीतर जाने से आता है।
- 23:23सब वो उपाय तुम्हारे भीतर प्रकृति ने लगा दिए घाव के भरने की
- 23:32व्यवस्था प्रकृति ने खुद बना दी। तुम्हें कोई चोट लग जाए।
- 23:42तो खून के भीतर ऐसे द्रव है विटामिन के है।
- 23:48वह अर्जुन की बाणों की तरह ऐसा जाल बिछाएगा।
- 23:54खून निकलना बंद हो जाएगा। यह व्यवस्था किसने बनाई?
- 24:00और जिसने बनाई वह ही भगवान अगर परमात्मा ना होता तो चीजें उबड़
- 24:09खाबड़ बिखरी हुई होती। यह जो इतनी शानदार व्यवस्था है,
- 24:17मनेजमेंट है। यही काफी नहीं है परमात्मा के तुम
- 24:24किसी घर में जाओ और सभी चीजों को अस्त व्यस्त उबड़ खाबड़ इधर उधर
- 24:34हर्षों पे धूल जमा हुआ। दीवारों पर रेत पिछड़ा हुआ, छतों
- 24:41पर जाल छड़े हुए उचड़ा हुआ। सब कुछ इधर उधर बिखरा हुआ देख कर
- 24:48तुम क्या कहोगे इस घर का कोई मालिक नहीं है।
- 24:59और जीस घर में तुम जाओ हर चीज़ तुम्हें सुसज्जित ढंग से मिले वेल
- 25:07मैनेज्ड, अपनी जगह पे हर चीज़ पे? तुम चाहे उस व्यक्ति को ना देख
- 25:19पाओ जिसने ये सजावट की लेकिन अंदाजा तो लगा सकते हो कि कोई तो
- 25:28है। जिसने इतने सुव्यवस्थित ढंग से इस
- 25:34घर को सजा दी। अशिक्षा, इस शब्द को समझना,
- 25:47अशिक्षा, ब्रह्मों की जननी? आज इतने भ्रम हैं।
- 25:56धरती पर उसका मूल कारण है अशिक्षा जिसे अविद्या भी कह देते हैं।
- 26:04हमारे ऋष्यों ने उसे अज्ञान कहा। अविद्या सभी ब्रह्मों की जननी है,
- 26:13जनम देवती है ब्रह्मों और तुम उसी के शिकार हो।
- 26:22मत पूछो। देखो, मेरे पास डॉक्टर्स लोग आ
- 26:33जाते हैं। साइंटिस्ट्स आ जाते हैं, बाबा
- 26:39आपकी बातों में दम तो लगता है? इस धर्म का उद्देश्य है शांत आनंद
- 27:00खुश। इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति।
- 27:07व्यापार की दुनिया में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे सुख
- 27:20नहीं चाहिए। सही पूछो तो अपने सुख के लिए ही
- 27:28व्यक्ति दूसरों को दुःखी करता है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जीसको
- 27:40शांति नहीं चाहिए और ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जीसको आनंद नहीं
- 27:48चाहिए। आज मैं इस नए धर्म की शुरुआत कर
- 27:58रहा हूँ जो सब लिमिट से पार है। लिमिटेड लैस तुम्हारे लिमिटेड
- 28:11धर्मों से पार लिमिटेड। टु लाइव मेटलस तुम्हारे धर्मों की
- 28:21कुछ कमेंटमेंट्स हैं मेरे धर्म की सिर्फ कसौटी है कोई कमेंट।
- 28:36तुम्हारे धर्म की कमेंडमेंट्स हैं नमाज़ पढ़ो, गीता पढ़ो, चर्च जाओ।
- 28:58सेवा करो बांट के खो गुरुवाणी का पाठ करो सच में अगर बोलो।
- 29:17ये कमेंट इवेंट्स ही तुम्हारे ऊपर प्रबंधन हो गयी है आज मुक्ति के
- 29:26लिए लिबरेशन के लिए। तुम्हें नामों से बांध दिया जाता
- 29:36है मुक्ति के लिए गए थे, बंद करा गए थे लिवरेट होने।
- 29:55उन्होंने तुम्हें नाम पकड़ा दिया, नाम एकर सा बन गया और तुम्हारी
- 30:07दिलो दिमाग को बांध रही यह एक बंधन है।
- 30:13और प्रत्येक गुरु के प्रत्येक धर्म के अपने अपने नाम मैं
- 30:20तुम्हें कोई बंधन नहीं देता, मैं तुम्हें कसौटी देता हूँ मैं
- 30:26तुम्हें रिसाल्ट देता हूँ, मैं तुम्हें परिणाम देता हूँ तुम्हें
- 30:30रस देता हूँ क्या? खुशी, शांति, खुमारी, अगर ये
- 30:50तीनों चीजों का संगम तुम पा जाओ। तो तुम वहीं पहुँच गए जिसकी बात
- 30:58कभी सन्तों ने की। आज तो संत हैं नहीं।
- 31:06होंगे भी तो किन्हीं शिविरों के भीतर एंट्रेंस फीस लेते होंगे।
- 31:14रिहायशी मकानों का खर्चा देते होंगे, सब के सिखाने के पैसे लेते
- 31:20होंगे, कोर्सस के पैसे लेते होंगे यह संत नहीं है व्यापारी खुशी
- 31:29पैसे से खरीदी नहीं जाती, सुविधाएं पैसे से आती है।
- 31:37तुम लाख डेवलप के पे लॉक सोने की सिंहासन बना लो, प्लग बना लो
- 31:47लेकिन एक भगवान ने तुम्हें नींद नहीं दी।
- 31:52तो सोने के प्लंग के ऊपर भी रात भर करवटें ही बदलो किसी को माशूका
- 32:03याद आती है किसी को माशूका याद आता है तुम्हें नींद याद आती है।
- 32:16क्या हो गया है मानवता को? क्या मानवता इतनी गर्क गई है?
- 32:28क्या हम ऐसे कगार पे पहुँच गए हैं?
- 32:30क्या वो मानवता गर्क हो जाएगी? और मात्र पशु ही बचेंगे या मानव
- 32:36के रूप में पशुताएं ही बचेंगे। कुछ ऐसा ही लग रहा है जीस चरण में
- 32:48आकर हवाएं जहरीली हो गई हैं। सभी जगह यह हवाओं का दूषित होना
- 33:01तो कोई बात नहीं। अगर तुम्हारे मन में खुशी की लहर
- 33:06हो तो यह हवाएं ज्यादा आपका खुशी बिगाड़ती नहीं।
- 33:12प्रदूषण होगा, थोड़ी ऑक्सीजन कम हो जाएगी, 21% ना रहेंगी, थोड़ा
- 33:19कम हो जाएगी। लेकिन अगर।
- 33:33मन खुश मन में हवाएं ठंडी बहती है, तुम्हारा हृदय में खुशी है तो
- 33:49फिर वो सावन का इंतजार कहाँ करती है?
- 33:54सावन में मोर नाचते सावन आए या न आए?
- 34:12सावन आए या न आए जिया जब जू में सावन है?
- 34:31सावन आए या न आए जिया जब जू में सावन है, सावन है या?
- 34:49न। अगर जिया झूमे तो फिर वो सावन है
- 34:55तुम्हारे लिए सावन का महीना न हो, जेठ आषाढ़ का महीना हो गर्म डूबे
- 35:07बैठते। लेकिन तुम्हारा जीरा झूम रहा है
- 35:17कोई सोहनी चली महिवाल से मिल ले, वो देखती है के गड़ा किच्चा का?
- 35:22पक्का? कोई हीर चली राँझा से वो देखती है
- 35:34के राँझा कहाँ होगा किस वेश में कोई मजनू देखता है, लैला कहाँ
- 35:41मिलेंगे? अगर तुम्हे खुशी मिल जाए खुशी है
- 35:52तो चाहिए बाहर पैगामे मोहब्बत के साथ बैठते हो बे नाओ का उदघोष हो
- 36:06रहा हो मृदंग बाजी सज रहे हो। बाज, नाद, अनेक आशंका, अनगणित
- 36:19प्रकार के नाद, वजन, लेकिन तुम्हारा।
- 36:24मन शोक संतोष। मन दुख से भरा तुम्हारी ये सब
- 36:35बेकार हो जाएगा मैं तुम्हें आज तीन मंत्र देता हूँ छोड़ दो सब
- 36:47नाम। कुछ नहीं रखा है।
- 36:57हजारों हजारों वर्षों से राधा का नाम जाप रहे हैं।
- 37:00लोग। राधा कब हुई थी, कब राम हुए थे?
- 37:0689000 साल पहले 5000 साल पहले कोई तरह।
- 37:20बस। पाखंडीयो ने राधा का नाम लेकर
- 37:22पाखंडीयो ने राम का नाम नाम लेकर। कुछ सिक्के इकट्ठे कर लिए, कुछ
- 37:30सुविधाएं इकट्ठी कर रही, लेकिन काश उन्हें सुख मिल।
- 37:37पाता? काश सिक्के तुम्हें सुखी कर सकता।
- 37:44जिसे तुम सुख सुनते हो वो ठहराव का सुख नहीं, उत्तेजना है समझना
- 37:59थोड़ी बात गहरी है। जीवा के ऊपर तुम ज्यादा तीखा
- 38:07पदार्थ रख लेते हो उत्तेजित करता है, तुम कह तो बड़ा स्वाद है,
- 38:21लेकिन तुम्हें पता नहीं प्राकृति या चीज़ बनाई है उससे ज्यादा
- 38:24स्वाद कुछ है ही नहीं। अब मैं दूध पीता हूँ, दूध में
- 38:33चीनी ने भी डालो तो प्रकृति ने ही उसमें फ्रक्टोस डाल दिया, लेक्टोस
- 38:38डाल दिया। उसकी स्वयं की मिठास।
- 38:45और धीरे धीरे तुम चीनी छोड़ दोगे, तुम देखना तुम्हें दूध और
- 38:49प्राकृतिक रूप से मीठा नज़र आएगा तुम्हारे टेस्ट वर्ष बताना शुरू
- 38:55कर देंगे मीठा वो कौन? है।
- 39:05वो कौन है जिसने ये सारी मात्राएं फेंकी?
- 39:15उसे लोग पूछ लेते हैं कि परमात्मा ने फिर जहर क्यों बनाया?
- 39:20मैंने कहा अगर उसकी सृष्टि अच्छी न लगे तो उपाय है तीखे सृति का
- 39:29जहर कैसी है? परमात्मा की सृष्टि किसी व्यक्ति
- 39:37को अच्छी भी नहीं लग सकती। हालांकि तुम तो एक ज़रा भी नहीं
- 39:42बना सकते, लेकिन फिर भी उसकी संघ रचना तुम्हें बात ही नहीं।
- 39:51तो फिर दूसरा उम्र के भी बनाया तुम्हारे लिए, उनके लिए कीने
- 39:56ज़िन्दगी राह सुनाई। असल में उन्हें ज़िन्दगी तो राशि
- 40:01ही आई, उनकी अपेक्षाएं ही पूरी नहीं हुई।
- 40:06असल में बात यह जो लोग सुसाइड कर लेते हैं, तुम्हें पता नहीं एक
- 40:17कारण मैं तुम्हें बेहतर का बता देता हूँ।
- 40:20बाहरी कारण तुम्हारी पुलिस कुछ भी छानबीन कर उसकी अपेक्षाएं पूरी
- 40:27नहीं है। ये मात्र एक कारण है।
- 40:31संत जब देखेगा तो पारदर्शी निगाहों से देखेगा ट्रांसपेरेंट।
- 40:40कोई मरता है जब जीवन से बेहतर उसे मौत नजर आती है, लेकिन ध्यान रखना
- 40:52मरता है बेहतरी के लिए। मरते भी हैं लोग, लेकिन मरते भी
- 41:02बेहतरी के लिए हैं और तुम्हें जानकर हैरानी हो गई।
- 41:08जीते भी खुशी के लिए हैं। और।
- 41:11मरते भी दुख से छुटकारा पाएं के लिए।
- 41:14यानी खुशी के लिए ये अजीब बात। है।
- 41:18तुम्हें समझना एक सरल करके बोल दिया तो तुम्हें समझ आ गया लोग
- 41:27जीते हैं तो। खुशी के लिए जीते हैं।
- 41:32लोग अमरते हैं तो खुशी के लिए अमरते हैं।
- 41:36तुम कहोगे कमाल बिलकुल कमाल नहीं, ये सच दुखी हैं, दुख से छूटना है।
- 41:49दुख से छूटेंगे तो सुख हो जाएगा। दूसरा पहलू सुख है इसलिए मर जाती।
- 41:55हूँ। मरना भी सुखी होने का एक उपाय
- 42:01जीना भी सुखी होने का एक उपाय। मैंने आज तुम्हें तीन मंत्र दिए,
- 42:10यह मंत्र गुनगुनाने के लिए नहीं, यह मंत्र जीने के लिए नाचो गओ
- 42:22खाओ, पियो आनन्द करो, बस्ती में झूमो।
- 42:29शांत रहो, ये तुम्हारा मन तुम्हें रोज़ तंग करता।
- 42:35है। अकारण तंग नहीं करता।
- 42:39तुम इस गलतफहमी में मत रहना कि मन तुम्हें अकारण गलत करता है, नहीं,
- 42:45नहीं, मन तो बेचारा बड़ा समझदार। है।
- 42:51बच्चा रोता है, कोई कारण होता है बच्चा बड़ा नासूर है।
- 42:58अकारण रोता ही नहीं क्या तो भूखा है?
- 43:07या पेट दर्द है, सिर दर्द है, शरीर में कहीं दर्द है, तकलीफ है
- 43:17तो रोता। है।
- 43:19अनीता बच्चा इतना मशहूर होता है अकारण बच्चा नहीं रोता तो हमारा
- 43:25मन भी बच्चों की तरह है। तुम रोज़ मेरे से शिकायतें करते
- 43:33हो बाबा मन शांत नहीं होता कैसे शांत बच्चा रोए ही चला जाता है।
- 43:41बच्चा इतना मशरूम है के अकारण कभी रोते है?
- 43:46खेलता रहेगा, हसेगा खिलखिलाएगा चिल्लाएगा चितकार करेगा, उसकी
- 43:54गुंजार सारे घर को गुजा देगी, क्योंकि वह खुश है।
- 44:02उसका कोई अंग दुख नहीं रहा, ना ही उसे भूख लगी।
- 44:07रोयेगा तब या तो उसे भूख लगी या उसका कोई अंग दर्द।
- 44:13कर रहा है। ये समझ लेना बच्चे को छल कपटा तन
- 44:20बच्चे को। झूठ फरेब पाता।
- 44:25इसलिए ईशा ने कहा, अगर मेरे प्रभु के राज्य में प्रवेश करना चाहते
- 44:30हो तो बच्चों की तरह मासूम हो जाओ।
- 44:37तुम शिकायत मुझे रोज़ करते हो और तुम्हें किसी ने ये जवाब नहीं
- 44:42दिया होगा आज तक। तो मैं आज जवाब दे देता।
- 44:46हूँ। मन अकारण कभी भी नहीं रोता।
- 44:54मन अकारण कभी भी नहीं चिल्लाता, शोर शराबा नहीं करता, मन बड़ा
- 45:01बच्चों की तरह डर दो। मन शोर तब मचाता है जब उसको ये
- 45:11तीन चीजें नहीं मिलती खुशी खुशी में मन उत्तेजित हो के हँसता।
- 45:18है। अब इन तीन बातों को बढ़े ध्यान से
- 45:26समझ लेना जब खुशी मिलती है इस बच्चा रूपी मन को तो उत्तेजित हो
- 45:36के खुश होता है, छलांगें लगाता है, चाहे चाहता है किलकारियों
- 45:41में। और उसकी आवाज सारे घर को छतों तक
- 45:49गुंजा देती। है।
- 45:52इसीलिए लोग कहते हैं कि घर में अगर बच्चा ना हो तो रौनक नहीं
- 45:57होती। बात ठीक है।
- 46:01बच्चे की मासूम किलकारियाँ तुम्हें कितना आनंदित कर देते हो
- 46:10तुम कहते हो हमने बच्चों को जन्म दिया जैसे उपकार किया नहीं, तुम
- 46:16भूल जाते हो बच्चों में पहले। बच्चों ने पहले दो तीन वर्षों में
- 46:24जो तुम्हें प्रसन्नता दी, वह तुम्हें परमात्मा ही दे सकता है।
- 46:28मात्र वो तुम्हें एक बोझ लगता है, लेकिन बच्चा इतनी मुस्कुराहट से
- 46:37किलकारियां मारता है, हंसता है, खेलता है।
- 46:40इंजन की तरह पांव हाथ चलाता बस बिल्कुल उतने ही प्रसन्न हो जाते
- 46:47हो जितना अपने पास जाके जीस तल्क की मैं बात करता हूँ वहाँ जाकर
- 46:53तुम प्रसन्न होते हो उतने ही खुश हो जाते हो बच्चों की।
- 46:59इस किलकारियों। से मन बड़ा तंग करता है बाबा मैं
- 47:14मन ध्वस्त होगा। मन का कुछ दुखता होगा, मन भूखा
- 47:22होगा, मन अशांत होगा, कोई बात होगी ऐसे तो मन कभी छींकता
- 47:30चिल्लाता है नहीं वह तो बेचारा बच्चों के सामान तुम उसको डांट
- 47:36दो। तुम्हारी तथा कथित कथावाचक गुरु
- 47:42कह देते हैं, हाँ मन जब बोले तो तुम रात ही रात करना शुरू कर दो
- 47:50तो फिर कानों में डांटे ही दे, 200 नहीं, एयर ब्लग।
- 47:59मैं कहता हूँ सुनो मन की बात मन शीशा है तुम्हारे स्वभाव अगर
- 48:10तुम्हारा मन शोर मचा तो सबसे पहले इसकी बात सुनो।
- 48:16उपेक्षित मत करो इसको अहिंसा। किसी दिन यह वृहद रोग बन जाएगा।
- 48:34मन ऐसे ही नहीं रोता। है।
- 48:43मन के रोने का कोई कारण होता है। मन के छठ बटाने का कोई कारण होता
- 48:50है, कुछ ऐसा है जो तुमने मन को दिया नहीं।
- 48:57मनोरंजन दिया होगा। कोई मूवी देख आए होंगे, लेकिन
- 49:05उससे मन थोड़ी मानता है। थोड़ी देर के लिए बहला जाता है
- 49:13लेकिन फिर उसे अपनी मूलभूत आवश्यकता याद आती।
- 49:23दिन तो किसी तरह गुजर जाता है। छचा झा ये रात क्यों आ जाती है?
- 49:35अब रात को कोई आस पास ध्यान बढ़ाने वाला भी नहीं होता।
- 49:40कितने ही राम राम राधे राधे करते रहो।
- 49:46और यह चिल्लाता तो उतना ही है जितना दिन में चिल्लाता था।
- 49:53तुम बड़ी कोशिश करते हो कोशिश आज से बंद कर।
- 49:57दो अभी से बंद कर। मैं तुम्हें एक फॉर्मूला देने जा
- 50:04रहा हूँ। मन रोता है।
- 50:10अभाव के कारण संत क्यों नहीं रोता?
- 50:22एक छोटी सी कहानी जो नैत का बेटे मर गए थे दो जोड़ में जुड़ में
- 50:28जन्मे थे जुड़ में ही मर गए कोई व्हीकल आया ऊपर से गुजर गया दोनों
- 50:33इकट्ठे। मर गए, अब जन्नत तो गया था।
- 50:42मस्जिद में नमाज़ अदा करना रोज़ का नियम था उसका आज।
- 50:59भी गया था बच्चों की मृत्यु देह। उसको संभाले कौन?
- 51:11तो जुनैद की विधवा ने बच्चे संभाले जो नैच अब आया बच्चे बड़े।
- 51:21थे। इतने बड़े थे कि समझाते थे उसको
- 51:26789 वर्ष के थे, वो साथ में जाते में बाद में जा के खुश भी बैठ
- 51:37जाते, नमाज़ अदा करते। लेकिन आज नहीं आए।
- 51:49बच्चे तो घर पर था, जो नेक पूछा बेटे को है उसकी घरवाली कहने लगी।
- 52:06भूख लगी होगी ज़रा खार खाना खा लो उसने हाथ पांव धोय प्रभु का शुक्र
- 52:21किया हे अल्लाह तेरा शुक्र गुजार आज का खाना पिटो ने दे दिया।
- 52:32इसलिए हमने अन्न को भ्रम कहा। आज तो अन्न को गन्दी नालियों में
- 52:40घराया जाता है, उसी अन्न के कारण लाखों भूखे।
- 52:46बिना रोटी खाये मर जाते हो तुम्हारी मनेजमेंट खराब है विवाह
- 52:56शादियों में कितना हन्न नाली में बाहर देते हो गटर में डस्टबिन में
- 53:03डाल देते हो वाहनों से खैर? कूड़ा कचरा चुनने वाले भूख के लोग
- 53:08निकाल के ले जाते हैं, लेकिन तुम तो गटरों में बहा देते हो तो
- 53:18जुनैद खाना खाने लग गया, खाना खा लिया सब तो पानी पी लिया।
- 53:27हाथ धो लिए। पूछा बेटे कहाँ है?
- 53:29आज आए नहीं, वो तो रोज़ आते थे, आज नहीं आए कहीं गए हैं कोई जरूरी
- 53:36काम हो गया उसके धर्म पत्नी कहने लगी मैंने एक स्वाद।
- 53:45पूछना है आपसे? सवाल बाद में पूछ लेना, मुझे मेरी
- 53:51बात का जवाब क्यों नहीं देते? उसकी धर्मपत्नी बोली हाँ, जवाब भी
- 53:57देती हूँ, ज़रा बताओ मुझे कुछ 10 वर्ष से पहले।
- 54:04मेरे पास कोई अमानत के रूप में कुछ गहने रहा क्या अच्छा आज वो
- 54:13मांगने आया क्या मैं उसे दे दूँ? लौटा दूँ उसके क्या उसकी अमानत?
- 54:24तनवा जी ठहरा देख क्या पागलपन की बातें कर रहे हो?
- 54:33क्या तुम हरामी बनना? चाहती हो?
- 54:38दूसरे की अमानत उसको सौंप दो, जो 10 साल पहले देख के गया, उसने
- 54:43एतबार किया कहीं गया होगा आज की यात्रा में, वहाँ पर मन लग गया
- 54:49होगा प्रभु के दरबार में ऐसा ही तो होता है आज आया है माँगने।
- 54:59तो मुझसे पूछने की क्या आवश्यकता समझी?
- 55:01तुमने लुटा ही देती ना कहती चलो ठीक है।
- 55:10आओ फिर मेरे संग संग चलो। कमरे में चारपाई के ऊपर श्वेत
- 55:29चादर उगाड़ दी। उसने।
- 55:35दोनों बेटे मृत अवस्था में पड़े थे।
- 55:45एक बार की तो चीख निकली लेकिन प्रतिक्षण होश में उसने कहा, हिपर
- 56:03वर्दीगार। तेरी।
- 56:07मर्ज तू जो करता है भला ही करता है।
- 56:22आँखों में आंसू भी था। जाने का दर्द भी था।
- 56:30हृदय को तकलीफ बारी थी तो बच्चे बड़े प्यारे थे।
- 56:35हँसते खेलते मुस्कराते बच्चे तुम्हें क्या कुछ दे आते?
- 56:43जो बच्चे बड़े होकर तुम दो बच्चे हैं बेदभाव करते हो?
- 56:54इंसानियत के खिलाफ़ नहीं ज़रा सोचना क्या यह इंसानियत है?
- 57:08दो बच्चे मेहनत करेंगे। तो बना लेंगे।
- 57:21हमारे संस्कृत में कहावत है हिंदी में कूट कपूत तो क्यों धन संचय
- 57:28कूट सपूत तो क्यों धन संचय अगर पुत्र सपूत होंगे?
- 57:35तो किस के लिए कमाते हो? खुद कमा लेंगे क्या?
- 57:42बड़े बड़े सेठ जो हुए गरीबी में जीए और बड़े सेठ हो के मरे
- 57:49उन्होंने खुद नहीं कमाया और क्या जो?
- 57:55पुश्तैनी अमीर थे। उन्होंने सब गंवा दिया तो फिर
- 58:04तुम्हारी कमाई कहाँ गई? अभी पिछले दिनों एक सेठ का बेटा
- 58:1140,000 करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ते।
- 58:14जर्मनी बन गया। उसके बाप ने माथा पिट लिया, कहता
- 58:26है तू इसका मत लो, मैं पागल था अगर ऐसा ही करना था।
- 58:34तो कम से कम मैं तो पाप झूठ, लोगों का दबाना, लोगों से कर्ज
- 58:43मांग के वापस न करना या कुछ पाप तो न करता अगर ऐसे ही तुमने जैन
- 58:51मुनि बना था। तो फिर मुझे पाप करने पे क्यों
- 58:58मजबूर किया? बाबा नानी कहते हैं पापा बाज न
- 59:02होवे कट्ठी मोया संग न। जा।
- 59:13देखिए धन को इकट्ठा करना है तो तुम्हें सूत्र बता।
- 59:16देता हूँ यह। जो लक्ष्मी को उल्लू की सवारी दी
- 59:22गई थी यह प्रतीक। था।
- 59:29रात के अंधेरे में चोर उचक के जेब कतरे काले धंधे करने वाले रात के
- 59:43अंधेरे में जागते। है।
- 59:47तुम दिन के उजाले में जो मेहनत करके शाम को तीन ₹400 कमाते हो,
- 59:55एक ही रात में करोड़ों रुपए बच्चों को मारने की दवा, नशे की
- 1:00:01दवा बेच के ये चिट्टा फिट्टा काला।
- 1:00:09दिनों में ही अरबपति हो जाते हैं, लेकिन अरबपति तो हो जाते हैं,
- 1:00:17राष्ट्रपति भी हो सकते हैं। प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं,
- 1:00:29लेकिन लोगों की लाशें बिछाकर उनको सीढ़ियों की तरह इस्तेमाल करके।
- 1:00:34छत पर भी पहुंचे तो क्या पहुंचे खाक पहुंचे।
- 1:00:42लोगों की दवाओं को सीढ़ियाँ बनाते।
- 1:00:44हैं। उन्न्य का मत तो तुम देखते हैं
- 1:00:50उनकी दुआएँ तुम्हें छत पे, वो भी पहुंचा देती और तुम्हारे हृदय में
- 1:00:58इस सब पाप का डर भी न। अब ये राजनीतिक लोग हैं।
- 1:01:04ये क्यों डरते हैं? कुर्सी जाने से अब भोग लिया 245
- 1:01:09साल 10 साल 1520 साल 25 फिर ये क्यों कहते हैं सदा के लिए घोषित?
- 1:01:15तानाशाह इन्हें पता है। कि जैसे हम मूर्ख हैं, जनता भी तो
- 1:01:23वैसी ही मूर्ख। अगर ये फाइल दूसरे के हाथ में आ
- 1:01:29गई तो कुछ भी लूटा देंगे। ये फाइल दूसरे के हाथ में नहीं
- 1:01:32जाने दे क्योंकि इन्हें पता है फाइल दूसरे के हाथ में गई।
- 1:01:41हम बच्चों बन गए। बस यही आपको गहरे कारण बताओ इसलिए
- 1:01:50ये कुछ भी करें, झूठ बोलें कफर तो लें पापा बाज न होवे।
- 1:01:55कट्ठी मोया संग न जावे। लेकिन यह कहते हैं मर जाएंगे तो
- 1:02:02फिर कौन है पूछने वाला सारे सबूत हमारे साथ ही मिट जाएंगे, लेकिन
- 1:02:07इन्हें पता नहीं सबूत तो सदा ही बाकी रहते।
- 1:02:15हैं। मैंने गोडसे से पूछा, मेरे प्रवचन
- 1:02:26रोशन नहीं आते, मैंने कहा चल अब बता क्या हुआ?
- 1:02:32मैं ऐसे नहीं बोल देता कि सावरकर सदन में गाँधी को मारने की योजना।
- 1:02:37बनी। अंध वक्त हड़बड़ाते हैं तो
- 1:02:42हड़बड़ाते रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, गोट से कहता है देखिए
- 1:02:49बाबा बात ये। है।
- 1:02:51अब मैं क्या झूठ बोलूं, मरने का डर तो है नहीं मर गया, टांग दिया
- 1:02:56उन्होंने, लेकिन अब तुमसे क्या झूठ बोल रहे हो?
- 1:03:00रोहित मैं सुनती हूँ, बाबा सावरकर ने सारी प्लान बनाई।
- 1:03:07सावरकर सदने में बनाई कौन छपायेगा सबूत कहीं छिपते।
- 1:03:17हैं। अब तो घबराहट से कहते हो कि मर
- 1:03:23जाएंगे। अगर मर मर के भी चैन न पाए तो
- 1:03:29किधर चढ़ेंगे? तुम पूछते रहो।
- 1:03:35मरने के बाद 21 तोपों की सलामी दो या 2100 तोपों की सलामी दो।
- 1:03:41तुम्हें सुनाई नहीं पड़ता ध्यान रखना।
- 1:03:44मरने के बाद तुम गीता के अठार में दाय का पाठ करते हो, लेकिन उसे
- 1:03:48तुम ही सुन पाते हो, वह नहीं सुन पाता।
- 1:03:53उसके तो भीतर प्रकृति सर्जरी कर रही होती है।
- 1:04:00सारे अंगों से कनेक्शन काट रही होती वह सुन नहीं रहा होता तुम
- 1:04:04गलती मत खा जाना यही गलती हमारे हिंदू धर्म ने खाई मरते व्यक्ति
- 1:04:11को गीता। का अठारहवां अध्याय सुनाओ तो क्या
- 1:04:14हो जाएगा? वक्त हो जाएगा, नहीं हो जाएगा।
- 1:04:20मुख्य तो जो बंधन इसने बनाए, भ्रांतियों के जो भावनाओं इसने
- 1:04:27बनाई, जो थोपना इसने थोपी, जो मान्यताएँ इसने मानी, झूठी कल्पना
- 1:04:37की। उसके बंधन संग ही जाएंगे।
- 1:04:41इसके तुम्हारी कमाई सफली हो या सफली न हो विफली हो इसलिए बाबा
- 1:04:52ने। कहा।
- 1:04:57कि कुछ वो हैं जो अपनी कमाई को सफली कर गए।
- 1:05:02कुछ वो हैं जो अपनी कमाई को विफली कर गए सफली कौन कर गए विफली कौन
- 1:05:09कर गए जिन्होंने धन कमाया पद कमाया प्रतिष्ठा कमाई।
- 1:05:15और जो भी कुछ कमाया और अगर यही रह गया तो वो कमाई भी फली हो गई।
- 1:05:22हो गई क्या नहीं सोचना तुम्हारे पास इस बात के जवाब तो हो सकते
- 1:05:29हैं। मैं मानता हूँ लेकिन वो जवाब ठीक
- 1:05:32नहीं होंगे। तुम्हारे क्या काम है?
- 1:05:34तुम्हें पता है तुम्हारा पुत्र कौन है?
- 1:05:37हो सकता है तुम्हारी दूसरी जन्मों का दुश्मन अक्सर दुश्मन ही घर में
- 1:05:42आते हैं जन्म लेने क्योंकि हिसाब बराबर नहीं करना है क्या?
- 1:05:50और प्रकृति हिसाबों को बराबर करती है।
- 1:05:55तो ये मत मान लेना कि मेरा बेटा मेरा बेटा मेरा हमदर्द है, इस
- 1:06:04जन्म में हमदर्द होगा, लेकिन जब तुम पिछले जन्म में खंगालोगे तो
- 1:06:09तुम हैरान हो जाओ। अरे, मुझे ही मारने वाला मेरे ही
- 1:06:14घर में पैदा हो ऐसा हो जाता है, लेकिन तुम बहुत बारीकियों को
- 1:06:22जानते हो, क्योंकि अभी तुमने पूरा खोजा कहाँ है?
- 1:06:31पूरा छोड़ो। इस भ्रमण के एक कण का अरब मा खरब
- 1:06:37मा असंख्य में हिस्सा भी तो अभी आपको नहीं पता तुम क्या खाक जानते
- 1:06:42हो तुम जो जानते हो? उसके लिए शब्द नहीं है।
- 1:06:53कोई नेग्लिजिबल कह सकते हो। इतना भी नहीं कि उसकी गणना की
- 1:06:59जाए। असंख्या संख्या में आता ही नहीं
- 1:07:02वो है ही नहीं। सीधा सीधा सरल भाषा में समझाऊं तो
- 1:07:15तुम्हारे साथ जो कमाया हुआ संघ जाए वो तुम्हें बिलकुल पता।
- 1:07:23लगता है इन मरे हुए को देखो कितने बड़े बड़े महल छोड़ गए।
- 1:07:33कितने सुंदर कार्यों का काफिला छूट गए।
- 1:07:37जिनकी तुम जिज्ञासा करते हो, तुम्हें भी मिल जाएंगे।
- 1:07:41चिंता मत करो। लेकिन याद रखना बेकार भी हो
- 1:07:47जाएंगे 1 दिन। तो मेरे पास आ जाते हैं।
- 1:07:52लोग कहते हैं बाबा इस मनेजमेंट को देखकर इस कायनात की मनेजमेंट को
- 1:08:03देखकर व्यवस्था को देखकर। में थोड़ा थोड़ा शक।
- 1:08:11यकीन में बदलता है कि कोई है जैसे सजे सबरे घर में हम चले हर चीज़
- 1:08:20बकायदा। रखी हो?
- 1:08:24हम क्या समझेंगे? अनुमान होगा प्रमाण तो नहीं होगा
- 1:08:30अनुमान होगा और वह अनुमान एक प्रकार का प्रमाण है के है कोई।
- 1:08:38यह घर उजाड़ नहीं है, इस घर में कोई रहता है।
- 1:08:44जिसने गोली, चम्मच, ग्लास सादी संभाल के रखे अपनी जगह पर जिसने
- 1:08:53ये मेज़, कुर्सी, डाइनिंग टेबल वगैरह सब सजाएं, जिसने सारी
- 1:08:59व्यवस्था एक दम सही देखिए तुम्हारा बीपी 300 हो जाए तो क्या
- 1:09:04होगा? होगा ही नहीं।
- 1:09:05तेरी बात ब्रेन है, कितनी सुंदर व्यवस्था है उसकी इतने तत्व हैं
- 1:09:15ज़रा भी थोड़ा सा घट जाए, बढ़ जाए तुम्हें बेचैनी होने लगती है,
- 1:09:21पसीना होने लगता है। बुद्ध मानते हैं और बुद्ध किसी
- 1:09:28कारण से मानते हैं बुद्धमूर्ख नहीं, बुद्ध जानते हैं वह है अब
- 1:09:35बुद्ध की बात। मैं क्यों जानू?
- 1:09:37मैं इसलिए जानू कि मैंने बुद्ध से अगला पड़ाव जानू।
- 1:09:43और मैं नहीं समझ सकता बुद्ध के तप पे आके व्यक्ति को पता न चले कि
- 1:09:47बिलकुल सामने जीने पर्दे के पीछे वो है तो लेकिन तुम्हारी करुणा।
- 1:09:54के लिए वो बोला उसे पता है। धर्म के नाम पर तुमने?
- 1:09:59इतनी मूड मान्यताएँ इकट्ठी कर ली जो मैंने तोड़ दी।
- 1:10:09वो जानते हैं मैंने करना क्या है। पुरुष करने के लिए इन सबको इंकार
- 1:10:16करना पड़ेगा। वेद, उपनिषद परमात्मा तक को इंकार
- 1:10:22करना पड़ेगा मजबूरी मैं भी तुम्हें आज ही कन्या धर्म देता।
- 1:10:32हूँ। हालांकि बुद्ध ने बौद्ध धर्म नहीं
- 1:10:36दिया। तुमने बनाया, ईसा ने ईसाई धर्म
- 1:10:43दिया नहीं। शिष्यों ने पैदा किया नानक ने सीक
- 1:10:50धरम आपको दिया नहीं, बाद में पैदा कृष्ण ने सनातन तुम्हें दिया
- 1:11:00नहीं। हाँ।
- 1:11:04कृष्ण ने यह बताया कि वह तत्व जो सनातन है, शाश्वत है जलता गलता
- 1:11:13मरता सूझता नहीं वहाँ पहुंचा है वहाँ तुम्हें ये तीन चीजें
- 1:11:19मिलेंगी सुख, शांति और आनंद। यही मोहम्मद ने बताया तुम वहाँ
- 1:11:31पहुँच जाओगे जहाँ इस स्लम में याने शांत और शांति के संग संग
- 1:11:38आनंद भी आता है। खुशी हो जाती।
- 1:11:46इसके अंग संग रहने वाली चीजें ये तीनों इकट्ठी होती हैं।
- 1:11:52अर्ज नहीं की जा सकती सुख। शांति और आनंद ये है तमारा धर्म।
- 1:12:01आज के बाद छोड़ दो सब कोई जाप नहीं कोई पाठ नहीं, कोई पूजा
- 1:12:10नहीं, कोई तीर्थ नहीं, कोई शरण नहीं, तीर्थ का कोई मान्यता नहीं,
- 1:12:17बस मात्र एक। और एक कसौटी।
- 1:12:21कसबट्टी जैसे तुम सुनार के पास जाते हो देखना भाई ये सोना है या
- 1:12:29नहीं वो कसबट्टी पे कस लेता है वो कहता है हाँ सोना है भाई ये कहते
- 1:12:35नहीं है सोना। ये कसबट्टी देता हूँ तुम्हें मैं
- 1:12:44छोड़ दो मान्यताओं को जो तुम्हें सुख नहीं देते छोड़ दो मान्यताओं
- 1:12:51को जो तुम्हें जंजीरों में लिपेट देती है, उन 10 को मेंडमेंट्स को
- 1:12:57ये जंजीरें हैं। तुम्हारी बुद्धि के ऊपर यह किसी
- 1:13:04दुष्ट ने कभी पहना दी होगी? तुम तोड़ दो आज आज मैं तोड़ता हूँ
- 1:13:10मुझे सौंप दो ये इनका भार मैं वहन करूँगा।
- 1:13:16तुम इनसे छुटकारा पाओ। इसे ही मुक्ति कर देते हैं।
- 1:13:20इसलिए मैंने इस धर्म का नाम मोक्ष द्वार रखा।
- 1:13:28इसका मतलब कुछ भी नहीं होता। बस तुम बंधन रहित हो जाओ।
- 1:13:33अब इसको नाम मत दे देना तुम। इसका मतलब समझ जाना, इसका जाप मत
- 1:13:40करने, लग जाना, मोक्ष द्वार, मोक्ष द्वार, मोक्ष द्वार फिर ये
- 1:13:45भी तुम्हारे लिए एक बंधन हो जाएगा जैसे राधा, राधा, राम, राम,
- 1:13:50कृष्ण, कृष्ण आज बंधन हो गए। अल्लाह अल्लाह पांच नाम से
- 1:13:55तुम्हारे लिए बंधन हो गए। ऐसे मोक्ष द्वारा भी तुम्हारे लिए
- 1:13:58बंधन हो जाएगा आगाज़ आगा पहले करना पड़ता है क्योंकि तुम बंधने
- 1:14:09के शौकीन भी हो और मरीज भी हो। पुरानी आदत है तुम्हारी बंदने की,
- 1:14:16इसलिए बंधन को हम पहले काट देते हैं कि देखिए उसको जाप मत बना
- 1:14:21लेना। तुम शाश्वत हो, लेकिन आज तुम गंगा
- 1:14:25के तीर पर देखो बारे में से। लोग हाथों में माला है और कह रहे
- 1:14:31हैं, शिवो हम शिवो हम मैं सनातन हूँ, मैं सनातन हूँ, मैं कभी मरता
- 1:14:39नहीं, यह जाप करने की बात थी या दर्शन करने की बात थी?
- 1:14:47मैं सनातन हूँ। मैं शाश्वत हूँ।
- 1:14:51यह खोपड़ी में न्योरांज सूचनाएं इकट्ठी करने योग्य थी।
- 1:14:56तुमने कोई प्रचारक बनना है? अगर प्रचारक बनना है तो इकट्ठा कर
- 1:15:02लो उपनिषद की बातों को आचार्यों की तरह।
- 1:15:08फिर तुम अच्छे से प्रचार का बनोगे, अच्छे से संस्थाओं का
- 1:15:12निर्माण करोगे और इकट्ठा करोगे और खूब अच्छी सी बिल्डिंग बना के
- 1:15:19विदा हो जाओगे, ये थोड़ा सा धीमे बोलो।
- 1:15:27कौन ले के गया है यहाँ मत कटा कर न कर इतना तगड़ा है जहाँ एक रोज़
- 1:15:40फानी है जो तुने कमाया वह 1 दिन फजूल हो जाए?
- 1:15:47तेरे से आला हो गुजरे ना कुछ बाकी निशानी है नेपोलियन चला गया कहाँ
- 1:15:52उसका नाम और उसका नाम तुम लो भी हो तो उसको फर्क क्या?
- 1:15:57पड़ेगा। आज महात्मा गाँधी की तस्वीर के
- 1:16:00ऊपर रंग भर के गोलियां मारी जाती हैं।
- 1:16:03सिर्फ। कैथोसिस है तुम्हारे ग्रोथ का और
- 1:16:06कुछ नहीं है ये तुम वातावरण में भी कर सकते हो, लेकिन अगर ऐसे ही
- 1:16:11करना चाहते हो तो ऐसे कर लो। क्या किसी को हज किसी की भावनाओं
- 1:16:17आहत नहीं होनी चाहिए? तुम अपनी भावनाओं को आहत न करो।
- 1:16:24वह अपने क्रोध को निष्कर्षित कर रहा है करने दो मूर्तियों के ऊपर
- 1:16:28कोई बात नहीं, पशु से हरजाना ले लो इसको वैसे ही बना के दो भाई
- 1:16:36अगर तुमने किसी गरीब का झोंपड़ा तोड़ दिया, सरकार ने तोड़ दिया।
- 1:16:46न्यायालय को यही चाहिए कि भाई घर बना के दे, उसको जब तक घर न बन
- 1:16:54जाए तब तक इसके रहने का कमेंट कहाँ रहेगा?
- 1:16:58ये इंतजाम अगर कोई किसी को मार दे।
- 1:17:03गोली मार दी उससे मांगो किरलाओ वह जो बंदा तुमने मरा, वह कानून की
- 1:17:18दृष्टि में मारने योग्य था या तुमने धक्के से मार दिया या कोई
- 1:17:23जंगल राजा? कानून के द्वारा भी मौत आती है
- 1:17:33लेकिन दट। इस ए रियरेस्ट ऑफ दी अरे यार।
- 1:17:41किसी व्यक्ति को मारा जाता है। किसी व्यक्ति को रेयरस्ट इन दी
- 1:17:47रेयर पहले तो रेयर फिर उनमें से भी रेयरस्ट उसको फांसी लगाया जाता
- 1:17:56है, उसको मौत के घाट उतारा जाता है।
- 1:17:58तुम जड़ से चार गुंडे फैला लेते हो, पर मरवा देते हो?
- 1:18:04कल को कोई भी किसी को मार सकता है और आज देखो क्या दमा चोकड़ी मच
- 1:18:08रही है? क्या ऐसे संसार की कल्पना कभी
- 1:18:15बुधने की थी? क्या ऐसे संसार की कल्पना हमारे
- 1:18:22ऋषियों मुन्नर ने की? थी।
- 1:18:27संसार इतना विमान हो जाएगा और फिर इनको कुछ मिलता।
- 1:18:34हो फिर भी समझे। मैं नहीं समझता कोई किसी को मार
- 1:18:38के रात को चैन भर सो पायेगा। बिलकुल पक्का है।
- 1:18:50दुजय नू दुख देवें आप चाहें सुख नू।
- 1:19:01दुचियानू दुख देवें आप चाहें सुख नू।
- 1:19:10लगदानि फल करें, जड़ों खड़े, रुख नू।
- 1:19:18रग दानी फल कदे जड़ सड़े रुखम दूसरों को दुख देते हो आप सुख
- 1:19:27जाते हो यह कभी कहता है कि जड़ से जो सड़ जाए वृक्ष जिसकी जड़ें सड़
- 1:19:39जाए। तुमने जड़ को चढ़ा दिया, दूसरों
- 1:19:43को दुख कैसे सींचेगा वो जीवनरूपी पानी धरती से क्योंकि जड़ ही नहीं
- 1:19:51है, जड़ ही नहीं तो जीवन ही नहीं है, जड़ ही जीवन है यद्यपि वो
- 1:19:56छुपी हुई जड़ है, दिखाई नहीं पड़ती।
- 1:20:03जो काम कानून ने करना वो आज गद्दी नशीं लोग कर रहे है अपना अपना काम
- 1:20:17कोई करता नहीं। अपना अपना काम करना चाहिए।
- 1:20:24सभी को बैठाएं किस लिए किस लिए बैठाना।
- 1:20:35इसका मतलब तुम्हारी कोई भी वर्खला भी करेगा तुम उसको मार दोगे, खुद
- 1:20:41नहीं मरोगे। सावरकर की तरह मैंने पूछा सावरकर
- 1:20:44ने कहता है उसका धंधा ही है? अब न तुम उस मुकाम पे जा सकते हो,
- 1:20:56न मैं तुम्हारी तसल्ली करा सकता हूँ लेकिन मेरी हिस्सेल्ली है
- 1:21:02इसलिए मैं बहुत बार बोला जड़ है साबरका कुछ लोग होते हैं जो छिपे
- 1:21:07रह जाते हैं, आज भी हैं। जब यह सत्ता दूसरों के हाथों में
- 1:21:12आ जाएगी तो वो उगड़ेंगे लोग इसलिए मैं जनता से कहता हूँ के पाप को
- 1:21:24उगाड़ना आवश्यक हो जाता है। दंड दो या न दो कोई बात नहीं वो
- 1:21:28बाद। की बात है।
- 1:21:30लेकिन पता चल जाए किसी ने पाप। किया है।
- 1:21:34फिर चाहे तो मैं क्षमा कर दो, वो फिर तुम्हारी मर्जी, लेकिन कम से
- 1:21:40कम अगर पता चल जाए किसी ने पाप किया, आगे से पाप तो नहीं करेगा
- 1:21:44आगे से तुम गद्दी पर तो नहीं? बैठा होगा इसको।
- 1:21:54इश्क और मोश्क हत्या, चोरी, डाका कभी छिपते हैं नहीं, बस तुम
- 1:22:03छिपाने की कोशिश करते हो। लाल कालीन बचा देते अंजाम में
- 1:22:12चले। सुख कोई प्राणी दुखी नहीं होना
- 1:22:21चाहता। सच में पूछो तो जो लोग दूसरों को
- 1:22:26दुखी करते हैं वो भी सुखी होने की फिराक में करते।
- 1:22:30हैं। अगर पड़ोसी ने चार मंजिला बना
- 1:22:35लिया और तुम्हारे पास एक मंजिला है तो तुम दुखी हो जाओगे।
- 1:22:39तरक्की है उसने की रात भर नहीं तो मैं नहीं आया मर उसने भी जाना, मर
- 1:22:50तुमने भी जाना। मौत का 1 दिन मय्यन है।
- 1:22:56नींद का रात भर नहीं आती वरना तुमने भी वरना 4 मिनट का 1 दिन
- 1:23:07मय्यन। है फिक्स है आई?
- 1:23:11देर अब ये नींद क्यों है? दसवीं साल 50 साल इंतज़ार लूँ
- 1:23:19चिंता काहे कीजिए जो अनहोनी होये बाकी चिंता क्यों करे जो होनी सो
- 1:23:27कोई? जो होता है वह होना ही होता है।
- 1:23:35तुम बाकी चिंता क्यों करते हो? उस विराट सृजनात्मक सत्ता के ऊपर
- 1:23:42छोड़ दो, जैसे रात को सोते हुए छोड़ते हो, दिन में भी छोड़।
- 1:23:48और तुम तो रात को भी नहीं छोड़ते इसलिए तो रात को भी नींद नहीं आती
- 1:23:54और कुछ है गुरु लोग बुल जाए 1:30 बजे दर्शन होगे अरे क्या दर्शन
- 1:23:59होगे? गंदगी से भरा हुआ ये शरीर
- 1:24:02पंचभौतिक ये दिखाओगे लोगो को कुछ शरवानी चाहिए।
- 1:24:08कहीं तो जा के ठहरों लेकिन बाबा के दर्शन क्या हो जाएगा, कितने
- 1:24:24बार दर्शन किया, कितने तरे, खुद ही तो तरे नहीं, तुम्हें क्या
- 1:24:31तरे? थोड़ा सोचो, मृत तत्व पर आ जाए,
- 1:24:39शांति, सुख और देखिये ओम शांति ओम शांति का जाप करने से शांति नहीं
- 1:24:48आएगी। क्योंकि अशांति भीतर दबी पड़ी उस
- 1:24:55अशांति का रीचन करना होगा। क्रिया योग करो सुबह उठ के ऊंचे
- 1:25:04ऊंचे श्वास तो देखिए श्वास कोरोना में नहीं आए तो लोग मर गए।
- 1:25:10इसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं है, तुम साँस लो, तुम तुम्हें फायदा
- 1:25:18होगा, तुम लम्बे लम्बे साँस लोगे, ऑक्सीजन तुम आओगे।
- 1:25:28प्राण वायु तुम्हारे भीतर स्टोर होंगे और वह प्राण वायु ही
- 1:25:36तुम्हें आनंदित करेगी। उसके बाद ध्यान में बैठो, हल्का
- 1:25:48फुल्का कुछ खाना है। खाल।
- 1:25:51दूध चाय पीनी है पी लो हल्का नाश्ता कर लो, बैठ जाओ कुछ न करने
- 1:25:58में बैठ जाओ कोई आराम नहीं कुछ कोई तरकीब नहीं रहना तरकीबों
- 1:26:06सेबों मिलता नहीं तरकीबों राह। की।
- 1:26:13कोई भी तरकीब, कोई भी तरकीब तुम्हारा मन बड़ा शरारती है ये
- 1:26:17सुझाएगा शरारती नहीं है ये बेचारा क्या करें बच्चा है बच्चा रोष है।
- 1:26:33और बच्चा शांत हो जाएगा। मुझे मैसेज करने वालों उत्तर सुन
- 1:26:40लो मन रोता है मन को कुछ मिला नहीं वो दे दो चुप हो जाएगा जैसे
- 1:26:48बच्चा। और कितनी सी इसकी मांग है?
- 1:26:51कुछ भी तो मांग नहीं है। इतनी सी मांग है जो तुम हो वहाँ
- 1:26:57चले जाओ। ये छुनकुना है जो हाथ में पकड़ा
- 1:27:02देते हैं हम बच्चों को इतनी सी बढ़ जाता है मन तो।
- 1:27:11मन रोता है तो कारण ऐसे मन नहीं रोता।
- 1:27:18सुख में मन उतेजित होता है सुख से शुरू करना।
- 1:27:26सुख से शुरू करके शांति में बैठे और ध्यान रखना ये नाम वाम, जात सब
- 1:27:35शांति में बातें खलल आ रहे हैं। सांसों ज़रा अहिस्ता चला।
- 1:27:45वो आ रही। हैं साँसों ज़रा आह हिस्सा चलो
- 1:27:52दिल की धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ती है।
- 1:27:57इतना भी शोर न हो के दिल धड़के पर वो तुम्हें पता चले।
- 1:28:03और दिल धड़कना बंद नहीं होगा तुम्हारी कहने से, ये तो प्रभु की
- 1:28:06है इसके बागडोर प्रभु के हाथ में उसने बड़ी सुंदर मनेजमेंट की है।
- 1:28:12नहीं तुम तो बंद कर लेते, फिर सुसाइड थोड़ी कमिट करते, तुम हाथ
- 1:28:19को बंद कर लेते, जफा डाल के ये बंद हो गया।
- 1:28:25मज़ा ही बड़ा था जब चाहे ये बंद कर लो जब चाहे इस बार नहीं नहीं
- 1:28:32ये प्रबोगी ना फुस फुस ना हार्ट हमारे कैसे नहीं।
- 1:28:42हम इसके निचोड़ में गए। सुख।
- 1:28:49कब आएगा जब तुम्हारे भीतर एनर्जी होगी?
- 1:28:55समझ लेना? ये तीनों चीजें एनर्जी की खेल है।
- 1:29:05मुर्दे में एनर्जी नहीं होती तो सुख भी नहीं होता।
- 1:29:10दुख भी नहीं होता सुखी तुम तभी होगे जब तुम एनर्जेटिक होगे।
- 1:29:20पहली। बात।
- 1:29:22खेल एनर्जी का और चेतना। का सुख के बाद शांत शांति भी तभी
- 1:29:35फलदायी होगी जब एनर्जी से तुम भरे हो गए।
- 1:29:42ऐसे तो मृदक बड़ा शांत होता। है।
- 1:29:47शमशान की शांति, एनर्जीलेस की शांति।
- 1:29:53है। और तुम्हारे जाप तुम्हें मुर्दाघर
- 1:30:00की शांतियां में पहुंचा देते हैं, तुम कहते हो?
- 1:30:03शांति? नो इट इस एनर्जी लाइसेंस जो शक्ति
- 1:30:11थी जो एनर्जी थी तुमने जाप में कमा।
- 1:30:14दी। एनर्जी का खेल चेतना का खेल तीसरा
- 1:30:22है आनंद। परम एनर्जी से ही परम आनंदो
- 1:30:31उत्पन्न होता है इसलिए ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक बता रखें।
- 1:30:37हम सूत्र जानते हैं। लिब्रल सेक्स की बात नहीं करते
- 1:30:43हैं, ये होशों से सीखो तभी तो नाइट्रस ऑक्साइड सूंघ नहीं पड़ती
- 1:30:54तभी तो वॉल्यूम डाइजेपम की पांच मिलीग्राम की 90 गोलियां खानी
- 1:30:59पड़ती है। ये शांति है, इससे तुम शांति कहाँ
- 1:31:10हो? नहीं ये शांति नहीं यह काम नस।
- 1:31:21बार्बचुरेट्स के द्वारा आई हुई है।
- 1:31:28यह मादक द्रव्यों से आई हुई शांति है।
- 1:31:35ध्यान रखना इन तीनों चीजों में एनर्जी का मुख्य रोल है।
- 1:31:43बच्चे में परम ऊर्जा होती है। उसका चेहरा देखना मुस्कुराता है,
- 1:31:50तिलकारियाँ देखता हूँ एनर्जीलेसनेस मुर्दा कभी
- 1:31:54कल्कारियाँ मारता है क्योंकि उसमें एनर्जी नहीं होती।
- 1:32:05मुर्दा कभी शांत होता है, सच्चा नहीं।
- 1:32:09थकावट में होता है एनर्जीलेसनेस लेकिन कोई क्या करे अगर तुमने
- 1:32:18एनर्जीलेसनेस को थकावट को शांति समझ लिया?
- 1:32:25तुम्हारी परिभाषा में कहीं अंतर आ गया है।
- 1:32:33तुम तो सेक्स के बाद की अवस्था को भी आनंद करती हो, हद की बात हो
- 1:32:41गयी परम शक्ति को खजाना तुमने लुटा दिया।
- 1:32:47तुम एनर्जी पर मैं एनर्जी लेसन्स हुई असली तो सो गए तुम्हारा शरीर
- 1:32:52अब जाग नहीं सकता यू कैनट बी अवेयर और तुम कहते हो मज़ा।
- 1:33:00आया आनंद आया। एनर्जी का खेल है सुखी हो,
- 1:33:11मुर्दों की तरह नहीं मुर्दा बड़ा सुखी।
- 1:33:13होता। है।
- 1:33:15मुर्दे में ज़रा भी अहंकार नहीं होता।
- 1:33:17ठुड्डे मारो कुछ नहीं कहते, आग में डाल दो।
- 1:33:21बड़ा सहनशील है तो क्या उसे सहनशीलता की चरम सीमा उसे
- 1:33:32पुरस्कार दो? वह एनर्जीलेस है, वह शांत है,
- 1:33:40क्या उसे शांति नोबेल दे दो क्या? इससे ज्यादा कोई शांत हो ही नहीं
- 1:33:44सकती। इसको जला दो, मार दो, काट दो,
- 1:33:47चलाते नहीं, शिकायत ही नहीं करता। क्या इसको नोबेल का शांति से नहीं
- 1:33:52मिलेगा? क्या मृदा है?
- 1:33:54इसमें शक्ति नहीं है, एनर्जी नहीं है।
- 1:33:58एनर्जी का खेल और आनंद परम एनर्जी का खेल।
- 1:34:03यही एनर्जी सुख से शुरू होगी। शांति में तब्दील होते होते आनंद
- 1:34:10में तब्दील हो जाएगी। खेल एनर्जी का है।
- 1:34:13वृहद एनर्जी जब हो जाती है तो सुख की एनर्जी आनंद में परिवर्तित हो
- 1:34:19जाती है। थोड़ी एनर्जी से पहले काम निसाई
- 1:34:27की शांति आएगी, फिर आएगा आनंद आनंद परम ऊर्जा का स्रोत हो
- 1:34:37जाओगे, तुम खो दें। तुम वहाँ पहुँच जाओगे, जहाँ से
- 1:34:42सारी शक्ति का स्रोत निकलता है, इसलिए हमने उस परमात्मा को नाम
- 1:34:50दिया। तीन सात चेत आनंद जहाँ एक संस्था
- 1:34:56है एक धर्म है। पुराना है, लेकिन अनपढ़ो लोगों को
- 1:35:03उन्होंने ठग लिया। वो कहते हैं आकाश तलवार मारो,
- 1:35:07कटता नहीं। भगवान कृष्ण का शब्द है नैनम
- 1:35:11सेदंतीशस्त्रणाणी तो इस आकाश में तलवार चलाओ, नहीं कटता।
- 1:35:18इसलिए यही भगवान नैनम दाहती पांव का इसमें आग लगा दो नहीं जलता यही
- 1:35:26परमात्मा है न चेनम क्ले दान त्यापको बारिश पड़ती है, बारिश
- 1:35:34पड़के हट जाती है, यह कहाँ? गीला होता है।
- 1:35:37तो यही परमात्मा है नहीं चैनम के लिए धनता को नहीं सुख जाती मारूता
- 1:35:44रोज़ हवाएं चलती है कहाँ ये सूखता है ठंडी चले गर्म चले निष्प्रभावी
- 1:35:55रहता है। यही परमात्मा है, लेकिन चेतना का
- 1:36:05सत्य के साथ चेत रखा। ज्ञानियों ने जनों ने अनुभव किया।
- 1:36:11देखा चित कहाँ है मैं निर्दंकारियों से पूछुंगा।
- 1:36:16मुझे बताये क्षेत्र का चेतन का क्या?
- 1:36:21आकाश प्रतिक्रिया करता है, चेतन तो प्रतिक्रिया करता है आकाश में
- 1:36:28चेतन है अगर आकाश में चेतना है। भाई तुम्हारे रॉकेट्स को ऊपर नहीं
- 1:36:36जाने देंगे, चेतना है, वो रोके तो रोकते रोक सकती है, भाई चेतना
- 1:36:44बाधा बन सकती है, लेकिन आकाश में चेतना नहीं, इसलिए आकाश में खुशी
- 1:36:51नहीं। इसलिए आकाश में आनंद नहीं है,
- 1:36:56इसलिए आकाश में शांति नहीं है। ये तीनों चीजें तुम्हें आकाश में
- 1:37:01नहीं मिलेंगे और परमात्मा की डेफिनिशन शास्त्रों में शास्त्र
- 1:37:06रग्गम है। सत्य?
- 1:37:09चित्र आनंद। सारा एनर्जी का खेल थोड़ा सूक्ष्म
- 1:37:19का प्रश्न ले लें। वक्त तो बहुत हो गया।
- 1:37:24ये कहते हैं अगर तुम एनर्जी को खत्म कर दोगे, खर्च कर दोगे।
- 1:37:32तो बढ़ेगी कैसे? देखिए पहलवान पहले एनर्जी को खत्म
- 1:37:43करता है, खत्म करता है। दंड मारता है, बैठ को मरता है,
- 1:37:49मुकद्दर को मरता है, वे उठता है वे क्या कर रहा है शक्ति को खर्च
- 1:37:56कर रहा है क्यों कर रहा है शक्ति को बढ़ाने के लिए वहीं मर्दु जैसा
- 1:38:06पहलवान। शक्ति को खर्च करके महाशक्तिवान्
- 1:38:13हो जाता है। एक छोटी सी उदाहरण।
- 1:38:19तुम्हें तुम एक व्यक्ति ने भैस। उठा ली थी, उससे पूछा गया।
- 1:38:28कि तुमने भैस कैसे उठा लिया। भैस तो बहुत भारी होता।
- 1:38:31है। उसने कहा सिंपल सी बात।
- 1:38:34है। जीस दिन भैस का कट्टा जनम लिया
- 1:38:40मैंने उस दिन इसको उठा लिया। हर रोज़ इसको उठाता चला गया।
- 1:38:47रोज़ इसकी शक्ति बढ़ती गई, रोज़ मेरी शक्ति बढ़ती गई, उतनी ही
- 1:38:54इसकी शक्ति बढ़ी उतनी ही उठाने वाली शक्ति उठी और आज मैंने भैस
- 1:38:59को उठा लिया क्योंकि ये मेरे लिए तो वही कट्टा है जो पहले दिन
- 1:39:02उठाया। था।
- 1:39:04तीन पड़ाव मैंने बताये मोक्ष द्वार।
- 1:39:07के पहले सुख सुख से शांत। सुख भी एनर्जेटिक हो के मिलेगा।
- 1:39:21भूखे भजन होयगोपाल। ये ले अपनी कंट्री में इसका मतलब
- 1:39:28यही था एनर्जीलेसनेस होके तो कोई वजह नहीं और तुम रोज़ कहते हो
- 1:39:35राधे राधे करते रहो, उठते बैठते, सोते जागते चलते फिरते।
- 1:39:40कुछ भी करते धरते तुम राधे राधे करते हो और राम राम करते हो तुम
- 1:39:46लोगों को कायर बनाना चाहते हो। ये आज जो कायर कोम जन्मी, जो
- 1:39:55प्रतिरोध नहीं कर पाती और तुम्हारी राधी राधी का राम राम का
- 1:39:59परिणाम। कृष्णा कृष्णा का प्रण कहाँ गए?
- 1:40:04वो लोग जो कभी कोई जाप नहीं करता था।
- 1:40:11जो एक और सच्चे मार्ग पर बस भरोसा।
- 1:40:14करता था। भरोसा मान्यता से शुरू होता।
- 1:40:19है। और दर्शन पे जाके समाप्त होता है।
- 1:40:23इन शब्दों का भरोसा मान्यता से शुरू होता है और दर्शन पे जाके
- 1:40:32समाप्त हो जाता है। जब तुम देख लोगे अपनी आँखों से तो
- 1:40:35फिर तुम्हें मानना ही पड़ेगा इंकार कैसे करोगे?
- 1:40:41सुन से भीन हो जाओगे, उतर गए हो मेरे मन का संसार।
- 1:40:58मन का संसार, ओह तेरी गयो मेरे मन का संसार।
- 1:41:16उतर गयो हो मेरे मन का संसा जब तेरा जब तेरा दरिसन पायो।
- 1:41:34जब तेरा दरसन पायो जब तेरा दरसन, उससे पहले शंख तभी समाप्त होगा जब
- 1:41:51दर्शन। होगा।
- 1:41:53मान्यताओं से संशय कभी समाप्त नहीं होता।
- 1:41:56मान्यताएँ तो तब तक बोझ बनी रहती हैं, जब तक संशय उतरता नहीं तो
- 1:42:03शुरू करना है। बोझ से मान्यता निर्भोजता तक जाना
- 1:42:08है, दर्शन तक जाना है। शक्ति यहाँ से शुरू करो, सुखी हो
- 1:42:19जाओ, कोई राम राम नहीं कोई राधे राधे नहीं कोई जात नहीं, कोई पाठ
- 1:42:26नहीं, कोई पूजा नहीं, कोई शोर शो, बाजार पूजन।
- 1:42:29कुछ नहीं करना। मैं उस आनंद की परिभाषा कर रहा
- 1:42:35हूँ। उस मुख्य द्वार की परिभाषा कर रहा
- 1:42:38हूँ। संसार में पाने के लिए तुम्हें सब
- 1:42:41करना पड़ेगा। संसार बिलकुल अलइदा, चीज़, संसार
- 1:42:47और परमात्मा। ये दोनों अलइदा चीज़ है यद्यपि।
- 1:42:51ये ठीक है। संसार के कण कण में वह शक्ति
- 1:42:55विद्यमान है। ईसावा स्मेधम सर्वम यज्ञ की जगत
- 1:43:00है, यद्यपि या बुद्धि से परे भी है, लेकिन समझने वालों को इशारा।
- 1:43:07दे रहा हूँ और। वह कण कण में विद्यमान परमात्मा
- 1:43:15कण कण में होता हुआ भी जुदा है, निर्लिप्त है।
- 1:43:21इसलिए सभी संतों ने कहा वह निर्लिप्त है, है, तुम में गुथा
- 1:43:29हुआ है। लेकिन धागे की तरह निर्लेप है अगर
- 1:43:34मनका टूट जाएगा, तो दादा नहीं टूट।
- 1:43:36जाएंगे। काहे बन खो जन जाए?
- 1:43:56काहेरे बन खोजन। जाए।
- 1:44:14सरबंजा। सदा अले, प कमाल की धशांत?
- 1:44:22मिल कर लो लेट सर्वव्यापी सदा अले प सर्वव्यापी सदा अले प भाषक भाषा
- 1:44:35की? मजबूरी है क्या?
- 1:44:37कर संत को बोलना पड़ता है समझाने के लिए इशारों में अब पता है
- 1:44:43इशारे वहाँ तक नहीं पहुंचते हैं लेकिन बोलना पड़ता है करुणावश
- 1:44:52सर्वभैया आपकी सदा। अली पा तोहे संग समाये तेरे में
- 1:45:06ही समाया। हुआ है।
- 1:45:08कहाँ है वो दर्रा जहाँ वो नहीं है?
- 1:45:13हर घर में तू ही तो रूबरू है जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तू है।
- 1:45:19सर वो आपकी सदा अलेफा तो है संग। काहे रे मन, खो जन जा अरे मन
- 1:45:42क्यों खोजी नहीं जाता है खोजने वाली?
- 1:45:44चीज़ अब ये ये तो मिली हुई है याद करने वाली है।
- 1:45:50तुम भूल गए हो स्मरण करो, तुम ही हो सुख से शुरू कर रहे हो क्या
- 1:46:04कापा खंड बना दिया गया देखिये कमाल की बात है, अब हम देखते हैं
- 1:46:10बड़े उदास हो जाता हूँ। और संत तुम्हें समझाने की कोशिश
- 1:46:19करता तुम्हारी मान्यता टूटती तुम संत को गालिया निकालते हो।
- 1:46:25एक कुत्ता जख्मी हो गया था। मैंने उसके ऐंटी सेप्टिक दवा
- 1:46:29लगाने की कोशिश की। मक्खियाँ नहीं बैठेंगी, वेब
- 1:46:36बनाएंगे नहीं, पर मैं ऐंटी सेप्टिक क्रीम लगाने की चेष्टा
- 1:46:43करता रहा। क्रीम तो मैंने लगा ली मक्खियाँ
- 1:46:49बैठेंगी। ये खुरकेगा जख्म बढ़ जाएगा।
- 1:46:55किसी तरह पट्टी भी लगा दी लेकिन सारे काम करते हुए कुत्ते ने मुझे
- 1:47:04काट। लिया तब से मैं थोड़ा सा पागल
- 1:47:09हूँ। अच्छा कई कुत्ते मुझे काट।
- 1:47:16लेते हैं। ऐसे हैं भाई क्या करूँ?
- 1:47:24कुत्तों का स्वभाव उनका भरा भी करो तो फिर वो काट लेते हैं।
- 1:47:30तुम कह सकते हो तुम्हें क्या मिल गया सुख से सुख सुख?
- 1:47:43दुख नहीं पहुंचाएगा मृत कभी जो मर गया।
- 1:47:47और तुम्हें जीवन कैसे देगा? सुख तुम्हें आनंद तक नहीं जाएगा,
- 1:47:53कुंजी है, सुख सुख बढ़ेगा। तुम शांत हो जाओगे, रात को तुम
- 1:48:03एनर्जेटिक होते हो, तो शांत हो जाते हो।
- 1:48:06सुबह उठते। हो?
- 1:48:08और काश ये शांति तुम इतनी बढ़ा लेते तुम तो दुष्ट 3:00 बजे उठा
- 1:48:12लेते। हैं।
- 1:48:13कि तुम कहीं एनर्जेटिक ना हो जाओ नहीं, मैं कहता हूँ मैं 10:00 बजे
- 1:48:19उठता हूँ। कई बार लोग फ़ोन करते हैं, बेटा
- 1:48:24कहता है सोए हुए हैं। अरे अब वापस सोए हुए हैं, हाँ भाई
- 1:48:32सोया हूँ, मैं तुम्हें क्या करती है, यही आपत्ति है कि तुम अपने
- 1:48:41हिसाब से डालना चाहती हो संसार को।
- 1:48:44इसे ही डिक्टेटरशिप करता है। एक व्यक्ति को हमने सत्ता दे दी,
- 1:48:50उपकार नहीं किया, उस पर उपकार दिया है।
- 1:48:53फिर वो सत्ता को सदा के लिए अपने हाथ में रखने की कोशिश करेगा।
- 1:48:57क्यों? क्योंकि सत्ता को बनाने के लिए?
- 1:49:02उसने जो कुछ कृत्य किये अगर सरकार बदल गई, ये जो सरकार बदलने दे गए,
- 1:49:08बड़े ईमानदार लोग थे। ये ब्राह्मण ये जिन्होंने सरकार
- 1:49:15बदलने दे दी यह एक प्रमाण है कि वो ईमानदार लोग थे।
- 1:49:20हैलो भाई। ये लो फाइल उठाओ अगर कोई गलती है,
- 1:49:25गलती निकालो, हमें दंड दो, ये बतलाता है जतलाता है कि ये
- 1:49:31ईमानदार थे और इसे एक इसे भी एक कसबटी की तरह ले लेना जो सत्ता को
- 1:49:40न छोड़े। बस समझ लेना घपला है भाई और जो
- 1:49:44बिलकुल ही ना छोड़े जप्पा ही डाले तुम कुर्सी के नीचे देख लेना फेब
- 1:49:48कूद लगी होगी ये नहीं उठेगा भाई क्यों?
- 1:49:57क्योंकि अगर फाइल चली गई तेरा क्या होगा कालिया?
- 1:50:06सुख से शुरू करना, शक्ति को बढ़ाना, पौष्टिक पदार्थ करना
- 1:50:15पौष्टिक चाओ मनचो गनी, ये तुम्हें कहीं नहीं दे के जाना।
- 1:50:19पौष्टिक पदार्थ कहा ना अल्प मात्रा में खाले युक्ता हार
- 1:50:23व्यारत्य मैं थोड़ा सा दूध लेता हूँ, इधर से उसमें ही पति दाते थे
- 1:50:37और मुझे लोग कहते हैं बाबा क्या पता लगता?
- 1:50:39है। घर के अंदर बैठो।
- 1:50:42ये अनशन वाले ऐसे ही करते हैं, टेंट के भीतर रक्षा बना रखे है,
- 1:50:46रात को खा लेते हैं और फिर अनशन का एक सोच बहुत हाँ भाई, लेकिन
- 1:50:57मैं ऐसा करता नहीं। बाबा झूठ नहीं बोल अगर ऐसा करो पर
- 1:51:11मुझे मेरी ही आत्मा मार डालने। की।
- 1:51:14क्योंकि झूठ व्यक्ति की आत्मा को मार देते हैं इसलिए तुम झूठ एक
- 1:51:19बार बोलोगे। 10 बार बोलोगे, आत्मा के ऊपर
- 1:51:23कीचड़ जम जाएगा झूठ बोल के फिर भीतर का हीरा जो मर्जी बोलता रहे
- 1:51:29वो कीचड़ उसको बाहर नहीं आने देगा।
- 1:51:32आत्मा मर गई उसकी हम कैसे है? मर नहीं गई उसके ऊपर कीचड़ जम
- 1:51:38गया, मैल जम गया। मैं मैल युक्त हो गई, लेकिन झूठ
- 1:51:44बोलना स्वय हित में होता है। तुम्हारे लिए झूठ नहीं बोलता है।
- 1:51:49सनी मैं स्वयं के आनंद के लिए झूठ नहीं बोलता, मुझे शांति रहती है।
- 1:51:55क्यों बोलूं झूठ अगर खत्म? तो तुम क्या मुझे कोई डांडर लगा?
- 1:52:03है। मैं ना सलमानिक होना चाहता हूँ
- 1:52:06कहाँ आने देता हूँ तुम्हें तुम तो हजारों की संख्या में आना चाहते
- 1:52:11हो मुश्किल से बिस्ती 100 लोगों में बड़ी मुश्किल।
- 1:52:14से। अरे मान सम्मान की आवश्यकता हुई
- 1:52:19ज़रा लक्षण देख लिया करो मैं बहुत बार कहता हूँ, नहीं खाता हूँ तो
- 1:52:26नहीं खाता हूँ दूध पीता हूँ तो दूध पीता हूँ अब थोड़ा सा दूध का
- 1:52:31इतिहास में समझाने में वीडियो तो बहुत लंबी हो गई दूध।
- 1:52:39पूछा है बड़ा सुन्दर प्रश्न है, इसलिए मैं जवाब देने पे खुश।
- 1:52:42हो गया सूक्ष्म। का प्रश्न है कि आप दूध ही क्यों
- 1:52:47लेते हैं, क्या दूध पूर्ति कर सकते हैं?
- 1:52:51सब चीजों की हाँ करीब की पूर्ति कर सकते हैं।
- 1:52:55बच्चा दूध ही तो पीता है और उस दूध पीने से ही बढ़ता है।
- 1:53:01प्रत्येक पशु गाय का बछड़ा भैस का कचरा दूध ही सब पीता है।
- 1:53:10बच्चा माँ का। दूध ही सब पीता है, दूध में सभी
- 1:53:14पदार्थ होते हैं। अब समझना थोड़ी सी बात है।
- 1:53:17ये नॉर्ज़ वाली बात है साइंटिफिक। बात है।
- 1:53:23दूध में एक हार्मोन? होता है।
- 1:53:29क्या होता है क्रिप्टो फेन? अब तुम्हें?
- 1:53:35थोड़ा सा कम वक्त ला के अगर तुम विस्तार से कहोगे तो मैं विस्तार
- 1:53:40से बता दूंगा। सच दूध में एक हार्मोन होता है
- 1:53:46क्रिप्टोफैन क्रिप्टोफैन। हार्मोन शोर भी होते हैं
- 1:53:55एस्ट्रोजन प्रोजेस्टोरिन मेलाटोनिन ये बहुत से हार्मोन
- 1:54:02होते हैं लेकिन एक हार्मोन होता है ट्रिप टॉप पेन जिसकी मैं बात
- 1:54:05कर रहा हूँ ट्रिप टॉप पेन वह ट्रिप टॉप पेन।
- 1:54:13गौर से सुनने में ये बादशाह आपको ना कोई पता है वह हमारे भीतर जा
- 1:54:21के कन्वर्ट होता है। फाइव एच टी पी में इसका विस्तार
- 1:54:29मैं आपको बाद में। बताऊँगा।
- 1:54:32टूट जाता है उससे एक और हार्मोन पैदा होता है।
- 1:54:36उसको कहते हैं सेरिटन सेरिटन व्हिच इस कॉल्ड दी जेनरेट ऑफ
- 1:54:50आनंद। यह आनंद का मूल स्रोत है।
- 1:54:55सर तो नैन आपको मैंने कंक्लूषन दे।
- 1:55:01दिया। जेनरेटर ऑफ आनंद।
- 1:55:10इस दी हार्मोन कार्ड सेराटोन न डोपामिन होता है डोपामिन तो सुख।
- 1:55:16का है। डोपामिन लोगे सुख ही हो जाओगे सुख
- 1:55:19एक उत्तेजना लेकिन सेराटोनिन है तो वो भी हार में।
- 1:55:29है तो डोपा मीन वी अरे मोन, लेकिन डोपा मीन उतेजना देता है वो तेजन
- 1:55:35से आप सुख मानते हो डोपा मीन आपको पसंद करते हैं, मुस्कुराने, लोगों
- 1:55:39के तालियाँ मारने लगो, नाचने कूदने लगो, ये सब हैप्पी हार्मोन
- 1:55:47से कहलाते हैं। लेकिन फिर भी फर्क है डोपमेन आपको
- 1:55:53खुश करता है, लेकिन वह खुशी होती है एक स्टिमुलेशन उत्तेजना।
- 1:56:11तो मैं जीस हार्मोन की बात कर रहा हूँ दट इस ए रेस्पोंसिबल फॉर
- 1:56:16आनंदा, वो है सैरटोन तुम मेरी श्रोताओं, मैं तुम्हें आज एक मूल
- 1:56:28मंत्र देता हूँ। एक ग्लास दूध, एक ग्लास दूध किसी
- 1:56:39वक्त पी लो, रोज़ पी लो अगर रात को सोते वक्त पी लो।
- 1:56:44तो बात ये क्या है? क्योंकि तुम्हें नींद बड़ी अच्छी
- 1:56:51है। हैप्पी हार्मोन पैदा होंगे
- 1:56:56क्योंकि और भी दूध में होते हैं और रात को क्या होगा इसमें जो
- 1:57:04सैराटोनिन है। अब इसको आप थोड़े से ध्यान से सुन
- 1:57:09लेना, जीतने अंधेरे में आप सो गए ज़रा भी रोशनाई एक करण भी ना
- 1:57:20इसलिए चांदनी रातों में नींद कम आती है तुम्हें पता।
- 1:57:25ये चाँद की रौशनी भी तुम्हें चुभती है।
- 1:57:30अमावस्या की रात की नींद ऐसी शानदार होती है उसका कारण चाँद का
- 1:57:38नोहन रौशनी तो तारों में भी होती है।
- 1:57:45लेकिन अगर तुम छत के नीचे सो जाओगे और बिल्कुल कहीं से रौशनी
- 1:57:49नहीं आएगी, देखिए हवा आने देना कभी हवा फिर तो काम खराब हो जाएगा
- 1:57:55फिर तो गल घुट जाएगी हवा आने देना, रौशनी मत आने देना रौशनी।
- 1:58:04सेलेटोनिन को मेलाटोनिन में बदल देती है और मेलाटोनिन वो हार्मोन
- 1:58:11है जो आपकी नींद के लिए जरूरी है पर बनता है रात को और ये दुष्ट
- 1:58:20रात को आपको दर्शन देते। हैं।
- 1:58:23नींद हराम करने के लिए पिछले जन्म का बेर होगा।
- 1:58:25भाई कोई निकाल रहे हैं? अनपढ़ता ऐसे ही होती है, इससे ही
- 1:58:36अनपढ़ता करती है रात के अंधेरे में।
- 1:58:43किसी को जगाने, इसलिए हम कहते हैं सोए को जगाओ मत।
- 1:58:47रात को व्यक्ति सोया, गहरी नींद आई उस गहरी नींद में ही सारा कुछ
- 1:58:54परिवर्तित होगा, तुम्हारे बीत के बीजा तीय अदरब में निकलेंगे।
- 1:58:59मेलाटोनिन बनेगा तुम गहरी शक्ति में जाने का जिम्मेवार कौन?
- 1:59:04मेलाटोनिन और रात को एक क्लास रोज़ कुछ लोग कहते हैं पछता नहीं।
- 1:59:15इससे तो सुपाच्य भोजन कोई है ही नहीं।
- 1:59:19जो बच्चे तक वो पांच जाता है तुम्हें ना बचा ये हो नहीं सकता
- 1:59:25कहीं एक बार तुमसे कहीं कोई गलती हो गई होगी लेकिन जो चीज़ बच्चे
- 1:59:31को पांच जाती है दट इस इसिली डाइजेस्टेबल।
- 1:59:38तुम्हें कैसे न पचेगी तुम बिल्कुल एक ग्लास दूध रोज़ रोटी कम खा लो
- 1:59:44कोई बात? नहीं।
- 1:59:46एक ग्लास दूध जरूर पी लो। हाँ, मूल चूल परिवर्तन बजाएगा,
- 1:59:55तुम आनंद की तरफ चलना शुरू हो जाओगे तुम्हारी गुणवत्तियाँ बदल
- 2:00:01जाएंगी पर कृपा करना देखिए रात को भागवत दर्शन मत करना, हाँ, जागरण
- 2:00:09में मत जाना। ये सब कुसंस्कार हैं जो तुम्हारे
- 2:00:17महामूर्खों ने अनपढ़ता नहीं बना दिया रात सोने के लिए उल्लुओं के
- 2:00:24जागने के लिए देखो उल्लू बनो तो फिर तुम्हारी मर्जी है।
- 2:00:29लेकिन तुम्हारी जागने के लिए नहीं है।
- 2:00:30तुम्हारी शरीर की व्यवस्था ही ऐसी है।
- 2:00:39ट्रिप्टोफेन दूध में होता है, उससे फाइव एच टी पी बनता है, उससे
- 2:00:47बनता है सेरेटोनिन और ये सेरेटोनिन बड़ा अभूतपूर्व है,
- 2:00:52सीधा नहीं लिया जा सकता। मेलाटोनियन की तो गोलियां आ जाती
- 2:00:55हैं तो डॉक्टर्स हम प्रिस्क्राइब भी करते हैं लोगों को कि चलो वो
- 2:01:01नींद आने में सहायक होती है। वो ऐसे बिना मेरे कहने से मत खा
- 2:01:06लेना डॉक्टर से प्रिस्क्राइब कराके फिर खाना उसको कितनी मात्रा
- 2:01:12खानी। मैं बात करता हूँ की तो कोई दवाई
- 2:01:17आती है उसका तो दूध पी लेना। आप कुछ आहार ऐसे होते हैं लेकिन
- 2:01:23सबसे ज्यादा ये होता है दूध में और अंडे में लेकिन अंडा?
- 2:01:27तो फिर आपको पता है आप खाते हैं। ना एक स्त्रिय वो कहती है, जीस
- 2:01:35तरह अंडा मेरे मुँह को लग गया ना उस दिन मैं प्राण त्याग दूंगी।
- 2:01:39मैंने कहा तू इसका तो नहीं बैठ कहाँ?
- 2:01:43अगर अंडा खाने से मुँह को लगने से प्राण त्यागती है, तू इसका तो काम
- 2:01:47नहीं बैठ दे? कुछ कहीं नहीं होता मुँह की बकवास
- 2:02:00है ना खंजर उठेगा ना तलवार इनसे जब बाजू मेरे आजमाए हुए हैं, कहाँ
- 2:02:07मरते हैं ये इनके बच्चे दो दो कुक्कड़ खा जाते हैं, मैंने देखे
- 2:02:12हैं। सब व्यर्थ की बात है, उनके पास
- 2:02:17बैठ के जो बातें करते हैं और किरणों का प्रभाव पड़ता है तो
- 2:02:23मूलभूत पे आ जाए। हम दूध के भीतर ट्रिप्टोफैन होता
- 2:02:27है, बाकी और भी होते हैं। लेकिन विश्लेषण अगर आप कहोगे तो
- 2:02:30मैं समझा दूंगा। आपको।
- 2:02:33ट्रिप्टोफैन। एक हार्मोन है वो कन्वर्ट होता है
- 2:02:39फाइव एच टी पी में और वो कन्वर्ट होता है सैराटोनियन में ये
- 2:02:44सैराटोनियन मूल है आनंद का मूल हम जैसे कहते है ना दया धर्म का मूल।
- 2:02:51है। पाप मूल पाप मूल अभिमान दया करोगे
- 2:02:58तो धर्म का मूल धर्म शुरू हो गया और अभिमान करोगे तो पाप शुरू हो
- 2:03:03गया दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान ये सेराटो निन।
- 2:03:12ये आपके मूड को स्विंग नहीं होने देता, ये आपको खुश रखेगा।
- 2:03:17इसलिए दूध पीने वाला बच्चा इतनी कलकारियाँ मरता है।
- 2:03:22इसलिए दूध पीने वाला बछड़ा इतनी ऊंची ऊंची लंबी लंबी छलांगें मरता
- 2:03:29है। टट डाक बच्चे, छड़, छड़ जो जो दूध
- 2:03:33पीते हैं, इन्हें सेंसी मिलेंगे। यह आपसे बेईमानी नहीं कर पाएगा।
- 2:03:38ऐसा व्यक्ति अगर किसी बेईमान व्यक्ति को जो दूसरों का पैसा
- 2:03:43पैसा लूट ले, बैंकरों में केस कुछ कर दे अदालतों में।
- 2:03:49उसकी रोटी छीन लेना, दूध पिलाना शुरू कर देना बसंत हो जाएगा।
- 2:03:52थोड़े दिनों में पांच 4 साल होगी। इतना तो वक्त लगेगा ही, उसकी रोटी
- 2:04:01छीन के दूध पिलाना शुरू कर देना। ये सजा है।
- 2:04:06मैंने ये सजा खुद से तय की है। तो ट्रिप तो फैंसी बनता है फाइबर
- 2:04:12छुट्टी पी ये हार्मोन का एक प्रकार है बदलाव से सेराटोनिन
- 2:04:17पैदा होता है और सेराटोनिन तुम्हारे आनंद का जनक है।
- 2:04:25और फिर जैसे जैसे रात घनी होगी अंधेरे में सोना जब भी सोना
- 2:04:30बिल्कुल अँधेरा हो, गुप अँधेरा हो, ये दक्ता बलब जला लेते हैं
- 2:04:39बलब की भरोसे तुम्हारी आँखों में थोड़ी सी पड़ती।
- 2:04:41है। नींद ठीक से नहीं आ पाती, बिल्कुल
- 2:04:46अँधेरा परमात्मय रात बनाई इसलिए तो मेलाटोनिन वह सेराटोनिन रात को
- 2:04:55मेलाटोनिन में बदल जाता है। प्राकृतिक रूप से हमारी वित्त
- 2:05:00मिशनरियां हैं। ऐसी लिवर है।
- 2:05:02जो एक दूसरी चीज़ में कॉनवर्ट करता रहता।
- 2:05:05है। कार्बोहाइड्रेट को इसमें तब्दील
- 2:05:09कर दिया। फैट को उसमें कर दिया, प्रोटीन को
- 2:05:11उसमें कर दिया यह उस फैक्टरी का काम।
- 2:05:14है। तो सेरा ट्यून इन मैला ट्यून में
- 2:05:18बदल देते हैं। नींद बहुत बढ़िया आएगी।
- 2:05:20आप को उस केंद्र में पहुँच जाओगे जो भगवत्ता के करीब है।
- 2:05:28मैंने बड़े विस्तार से समझाया, भगवत्ता के करीब है और वो भगवत्ता
- 2:05:34है। आनंद तो मैंने जो आज आपको नया
- 2:05:39धर्म दिया, यह नया धर्म यह खून खराबे का कारण ना बन जाए पहली बात
- 2:05:49क्योंकि इस्लाम का नाम भी मतलब भी शांति होता है लेकिन शांति कहाँ
- 2:05:53है? हम्म कन्फेशन है पापों को बता दो
- 2:06:04कैफेस कर लो मान लो लेकिन कन्फेशन आज गलत हो गया, कन्फेशन कर लिया
- 2:06:09तो बाहर उतर गया पर नहीं पाप करने के लिए तैयार हो।
- 2:06:15तो कन्फेशन के प्रभाव से होने शुरू हम गंगा में स्नान करते हैं
- 2:06:22पाप मूक्ष हो गए आके फिर पाप करना शुरू, ये कोई तरीके नहीं हैं।
- 2:06:30ऐसे मुक्त होना तो गलत है, ऐसा ठीक भी नहीं होता होता भी है,
- 2:06:33पापा उतरते नहीं है, गंगा क्या करेगी?
- 2:06:36तुम्हारे पाप का गंगा कहाँ लेके जाएगी?
- 2:06:39तुम्हारे पाप को कहीं नहीं लेके जाती।
- 2:06:42तुम्हारे सोचने की बातें हैं, दिल के बहलाने को गाली पे ख्याल अच्छा
- 2:06:47है। तुम दुखी ही बने रहोगे, इसलिए तो
- 2:06:51हॉस्पिटल डाइज़्ड हो जाती हो। गंगा स्नान के बाद तो ट्रिप्टोफैन
- 2:06:58फाइव एच टी पी में और वहाँ से बनेगा।
- 2:07:03सेरेटोनिन इट इस रेस्पोंसिबल फॉर युअर आनंद।
- 2:07:08ये को बढ़ाना ये हैप्पी हार्मोन तो है लेकिन डोपमेन जैसा नहीं है,
- 2:07:15उत्तेजना नहीं देता या निर उत्तेजना देता है।
- 2:07:19निर उत्तेजना ही आनंद की जननी है, उससे मेला ट्यून ज्यादा होता है।
- 2:07:28तो रात को तुम नींद भी अच्छी सोओगे सुबह फ्रेश हो गई रात को
- 2:07:32सोते हुए एक ग्लास किसी भी तरह दूध का पी।
- 2:07:38लेना तो मेरे ख्याल में वीडियो बहुत लंबी हो गई।
- 2:07:43अब दो पार्ट्स से भी ज्यादा हो गई ये वीडियो।
- 2:07:48तो प्रश्न जो पूछा आपने हम सुनते हैं अक्सर आज तो किताबों में
- 2:07:54बातें रह गई है। इतिहास की बातें कि भारत में दूध,
- 2:07:59दही की नदियां बहती थी, क्या था ऐसा?
- 2:08:03और क्यों शांति इतने पैदा होती थी?
- 2:08:06क्यों शहरों की जगमगाहट से दूर एकांत झोपड़ी में दूर बैठे शेरों,
- 2:08:12बिच्छू साँपों के बीच में बैठ जाते हैं।
- 2:08:15निर्भय हुए कारण क्या था? दूध, दही की नदियां?
- 2:08:25और दोज में या हरमन होता है इस हार्मोन को चूक न जाना।
- 2:08:32अगर इस रात में चले तो खुराक तुम्हें आखिरी खुराक पजादी,
- 2:08:37ट्रिप्टोफैन और दोज। में होता है।
- 2:08:41धन्यवाद, सर।