Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Oct 25 - सभी साधकों के लिए बाबाजी का अंतिम संदेश! लगता है मेरा समय आ गया है! Babaji Last Message
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- 0:22प्रणाम बाबा जी आपका ग्रंथ पूरा हुआ, बड़ा प्यारा लगा आपसे
- 0:36दीक्षित हूँ क्रिया योग करता हूँ मज़ा आ जाता है।
- 0:46जिंदगी जीने का मज़ा हमने प्रथम बार आपसे ही सीखा है, तत्पश्चात न
- 1:01कुछ करने में बैठते हैं। जिसे आपने ध्यान कहा धीरे धीरे उस
- 1:11मकान पे पहुँच गया जहाँ दिन भर रात आनंद ही आनंद है र से जसता
- 1:21है। दुनिया के कामकाज पहले से बेहतर
- 1:26होने लगे। छोटा सा प्रश्न अब आपका सारा काम
- 1:43पूरा हुआ, आपकी भविष्य की क्या योजना है?
- 1:57हमारी माँ ने कृपा करें और देश की डूबती हुई नैया को विचार लीजिए।
- 2:08यह देश दो दिनों से घर चुका है यह देश।
- 2:15दुर्जनों से गिर चुका है। आपने सदा ही इस देश पर इनायत की
- 2:24नजर रखी है। आप जाते जाते ये अहसान और कर
- 2:32दीजिए। आपका प्रिय पुत्र अनिरोध।
- 2:59प्रिय पुत्र, मेरी कोई योजना नहीं है भला, मैं तो था भी नहीं कोई
- 3:15वक्त ऐसा भी गुजरा है जमाने में। जब मैं और मेरा कुछ भी नहीं होता
- 3:29योजना उस विराट मेरी कोई योजना नहीं है उसका हुक्म है।
- 3:45और आपने पूछ लिया तो मैं उसका आपको इस राह पे चलते चलते।
- 4:04एक वक्त ऐसा भी आ जाता है जब सभी थोपनाएं सभी मान्यताएं सभी ब्रह्म
- 4:23टूट जाते हैं। मर जाते हैं।
- 4:26तुम्हें शक्ति का आभास हो जाता है, प्रत्यक्षीकरण हो जाता है
- 4:33बिलकुल सही सही प्रत्यक्षीकरण होता है।
- 4:38एक बार ही नहीं लाखों, लाखों 12 प्रत्यक्षीकरण प्रति हो रोज़
- 4:43हजारों बार। उस स्थल पर मैं जाता हूँ जिसे तुम
- 4:48कहते हो परमात्मा आपने देखा है, मैं रोज़ उस स्थल पर हज़ारों भार
- 4:56जाता हूँ और रो उठाता हूँ कि मुझे कोई कार्यभार सौंपा गया है।
- 5:16या यूं कहिए वह जो सच्चा मालिक है अपने माल का, अपनी सर्जना का।
- 5:33वह अपनी सृजना को जैसा हुकुम करना चाहता है उसकी अद्यपिता जैसे मुझे
- 5:42प्राप्त हुई। बस इसे योजना समझी थी।
- 5:49मेरी योजना तो उसके हुकुम की मान्यता है।
- 5:54अलग से योजना मेरी कोई होती नहीं है ना मैं कोई सपने सजाता हूँ और
- 6:06ये भी ध्यान रखना सपने वो संजोयेगा।
- 6:10जिसके पास कुछ कमी हो जीसको सब मिल गया सपना क्या सुझोयेगा और
- 6:24क्यों सुझोयेगा? हम सफ़ाई, मानसरोवर, तालकला।
- 6:51धो। लेहे मन मस्त हुआ।
- 6:59फिर क्यों धो लेहे? उसकी जोजना बस खाओ।
- 7:18मेरी ही योजना है क्योंकि उससे अलग मेरा कोई अस्तित्व नहीं, ऐसा
- 7:28मैंने जाना। तुमने ठीक कहा पुत्र, मेरा ग्रंथ
- 7:44संपूर्ण हुआ है, मैंने जैसा देखा वैसा बोल दिया और इसमें मेरा
- 7:59निहित मात्र भी। जैसे जैसे देखता गया वैसा वैसा
- 8:11बोलता गया उसकी सजना में जो जो मैंने देखा वो बहू।
- 8:22जैसा प्रवृति करण किया गया, मैंने प्रकट कर दिया उसका हुकुम ही मेरी
- 8:32योजना है, जैसा हुकुम करेगा वही मेरी योजना होगी।
- 8:46मेरा अपना अलग से कोई वजूद नहीं। अभी पांच तारीख को दीक्षा का
- 9:07महोत्सव है, छः तारीख है रात्रि को।
- 9:13शरद पूर्णिमा तुम्हें भी याद करा दो।
- 9:22आज तीन तारीख है 3 अक्टूबर 6 अक्टूबर को वहीं शरदपूर्ण माँ आ
- 9:29रही हैं। इस शरद पूर्णिमा की चाँद ने मेरा
- 9:39आपा मिटा दिया था और मेरे आपके कल्पनाओं के स्थान पे उसके हुक्म
- 9:46को लाक रख दिया था बस उस दिन से। मेरी कल्पना ना बची उसका हुकुम
- 9:58बचा, अब तो उसका हुकुम ही सब कुछ है।
- 10:14अभी पांच तारीख को दीक्षा महोत्सव है छः तारीख की रात्रि को।
- 10:22आप ही खीर बनाइएगा रात्रि को चाँद की रोशनाई के तरह छाननी से ढक के
- 10:33रख दीजिएगा और सुबह उसको खा लीजिएगा।
- 10:36बहुत सी बीमारियों से आपको। प्रत्येक रोगी निरोगी प्रत्येक
- 10:46व्यक्ति से खा सकता है। उसके बाद अगला बैच हमने 12 तारीख
- 10:56को बुलाया है। उसके बाद 19 तारीख का हमने बैच
- 11:05नहीं रखा क्योंकि 21 तारीख की दीपावली और हम अपने परिवार का
- 11:14पोषण खुद मेहनत किसी से खाते। फिर एक बहुत ही छोटा सा व्यापार
- 11:26है, मिठाई के डिब्बे बनाना, मेरा बेटा वह करता है और मैं उसके इस
- 11:35काम में सहयोग करता हूँ। संत व्यक्ति को हराम का खाना भी
- 11:47नहीं चाहिए। कबीर की तरह काम करके खाना चाहिए,
- 11:53नानक की तरह काम करके खाना चाहिए, कृत करो वाणिक्षक को नाम।
- 12:16भक्त कबीर भी यही कहते हैं छीनी छीनी सी चदरिया मैंने पहुँचती है
- 12:31जब तक आपके हाथ को सलामत है चरी बहती चर बहती।
- 12:4919 तारीख को हमने नहीं बुलाया, 26 तारीख को हम फिर बैच हो रहा है।
- 13:0128 तारीख को अंग्रेजी हिसाब से मेरा एनलाइटनमेंट है।
- 13:13बस उसके बाद 26 तारीख का आखिरी वर्ष।
- 13:21उसके बाद दीक्षा महोत्सव समाप्त बहुत बार बंद हुई।
- 13:30बहुत बार शो हुई। लेकिन कुछ वायदे थे।
- 13:38कुछ लोगों को कहा गया था। वायदा खलाफी करना भी मंजूर ना
- 13:54हुआ। तो मुझे यही ठीक लगा कि इन लोगों
- 14:03को 26 तारीख तक दीक्षित कर दिया जाए।
- 14:09यही मेरी योजना का हिस्सा है। उसका हुक्म, उसका फरमान ही मेरी
- 14:24योजना है, उसके बाद मैं यहाँ से। इस मार्ग पे एक मुकाम ऐसा भी आता
- 14:55है। जब ये देह भी बंधन लगने लग जाता
- 15:02है, अभी तो देह बड़ी प्यारी लगती है अभी तो देह तुम्हें अपना आपा
- 15:16लगती है, नहाते हो, सजाते हो, संवारते हो।
- 15:24क्रेज बनाते हो? दिन में कई के सूट बदल लेते हो,
- 15:33कितना लगाते हो सर क्यों लगाते हो?
- 15:39फ्रेश पाउडर लगाते हो? लेकिन इस मकान पर चलते चलते एक
- 15:53ऐसा भी मरहला आता है जब देते है। खुद ही बंधन बन जाता है और ध्यान
- 16:04रखना ये अवस्था वैसी नहीं होती जैसी अवस्था सुसाइड करने वाले
- 16:12व्यक्ति की मानसिकता भी होती है। सुसाइड करने वाला व्यक्ति मानसिक
- 16:20रूप से बड़ा दुखी होता है। दुख से निजात उठाना चाहते हैं,
- 16:31लेकिन इस मकान पे जो इस स्थान पे आ गया उसका दुख तो कभी का खत्म हो
- 16:40गया। दुख नाम की कोई चीज़ है दर्दनाम
- 16:45की कोई चीज़ नहीं है, समस्या कुछ नहीं सब जगह है समाधान तो महावीर
- 16:55अन्य उपायों से खाना बंद कर देते हैं।
- 17:05जैन मुनि संथारा रख लेते हैं, भगवान राम देय एक बंधन मालूम
- 17:18पड़ती है। बाकी सभी भ्रम तोड़ दिए।
- 17:25मान्यताएँ तोड़ दी। इलीविजन तोड़ दिए, भ्रांतियां टूट
- 17:30गई, जान लिया जो जाना था मिल गया जो पाना था ना कुछ पानी का लोभ है
- 17:42ना कुछ खोने का वह है। इसमें मुकाम आता है, वहाँ शरीर की
- 17:54संरचना भी एक बंधन की धरा लगने लगती है।
- 18:02और बिलकुल उसी अवस्था में भगवान राम सरयू को अपना शरीर सौंप देते।
- 18:12वह शरीर जिसे करोड़ों लोग लाखों लोग प्रणाम करते हैं।
- 18:16चरण में यह सोचकर। के किसी मगरमच्छ का किसी बड़े जीब
- 18:25का पेट मचा किसी?
- 18:36के काम जो आए हुसेन सा। कहते हैं उसे इंसान कहते हैं और
- 18:57याद ह। इंसान कहते हैं उसे इंसान कहते
- 19:15हैं किसी के काम जो आये। तुगान राम जाते जाते भी अपने शरीर
- 19:28को किसी की भूख मिटा देगा, उसे पता नहीं होगा।
- 19:35यह व्यक्ति भगवान है। लेकिन करुणा इतनी क्यों?
- 19:47लकड़ियों को जलाना ईंधन लोगों के काम आएगा तो इसका सबसे बड़ा
- 19:58सदुपयोग है। किसी ऐसे बड़े जानवर का भक्ष्य
- 20:07व्यंजन इसके भूख मिट जाए और राम ये आखिरी उपकार करता है।
- 20:21संसार के जीवों पर आखिरी करूणा। हडकराज को दो एनलाइटनमेंट के बाद
- 20:40इतना पीआरएस से इतना पीआरएस और ये देह एक बंधन लगने लगे।
- 21:03मैंने भी अपना शरीर जल को सौंप दिया था।
- 21:15कोई बड़ा पशु उसका आहार बन जाऊंगा।
- 21:20अपनी भुख मटा ले। लेकिन मुझे उसकी योजना का पता
- 21:32नहीं। व्यक्ति को पता भी नहीं था
- 21:38व्यक्ति की क्षुद्र बुद्धि ये जान नहीं सकती कि उसकी योजना क्या है?
- 21:46उसकी योजना कुछ और थी पर मैं जानता था।
- 21:53यहाँ खड़े हुए लोग कोई तैरना मुझे कोई नहीं निकाल पाएगा लेकिन उसकी
- 22:03योजना का हिस्सा कुछ और दिल की धड़कन रुक चुकी थी, साँसे थम चुकी
- 22:13थी। लेकिन बाबा बोले कहाँ चले?
- 22:21ऐसे कैसे मैंने तुम्हें यहाँ तक पहुंचाने के लिए आतंक प्रयास किया
- 22:34है? और तुमने वो पाया है जो कभी किसी
- 22:39ने पाया है और किसी ने पाया तो वो इस तरह बोल न पाएगा।
- 22:49सरलीकृत ढंग से समझा न पाएगा तो ऐसा कैसे हो जाएगा?
- 23:00उसकी योजना कैसे? उसने मुझे मृत्य न होने दिया।
- 23:11बाद में बाबा ने बताया कि दूर खड़ा मैं।
- 23:20एक रस्सी दिए। मुझे पता था तुम क्या करने जा रहे
- 23:26हो और मैंने वो रस्सी इन बच्चों को।
- 23:48एक बच्चे में गुमान रह गया कि शायद मैंने बचाया, वो इतना भर
- 23:55जांच ले कि रस्सी कहाँ से आई। क्या तुम रस्सी के बिना बजा सकते
- 24:02हो? तुम खुद भी चले जाते।
- 24:07नहीं, ये उसकी योजना का हिस्सा था और बच्चा आज ही मन में यही भ्रम
- 24:17लिया है। ये मैंने बचा।
- 24:23जिसकी योजना का हिस्सा ये चाँद कार्य, आकाश ग्रहण क्षत्रपक्ष ये
- 24:31ब्राह्मण और ब्राह्मण अति भ्रमण सभी घूम रहे हैं निर्भय रूप से।
- 24:44ये भी उसकी योजना का हिस्सा मुझे निकाल लिया गया।
- 24:5485 में एनलाइटनमेंट के बाद बहुत पिया रस बहुत पिया और 2016 के
- 25:03बाद। 31 वर्ष हो चूके थे।
- 25:12करीब करीब रहते हुए सारे भोग मैंने भोग दिए थे।
- 25:16कुछ बाकी बचा है ये मुझे पता नहीं।
- 25:25टीकन उस विराट की योजना कुछ और थी।
- 25:30अभी आज ही एक प्रश्न आया है, अगर तुम्हारे हिसाब से देख लिया जाए
- 25:35हिसाब मेरा कुछ नहीं है मेरा दर्शन तो फिर वह ही अपनी जिंदगी
- 25:45अपनी सृष्टि के साथ खेल रहा है। वही पाप करता, वही दुख भोगता, वही
- 25:51पुण्य करता वही सुख भोगता तुमने ठीक पकड़ा पुत्र तुम कौन हो मैं
- 25:56जानता हूँ इसलिए इसको लीला कहा गया।
- 26:04यह सृजना यह सृष्टी। एक लीला है, इसमें तुम्हारा कोई
- 26:11योगदान नहीं। यद्यपि तुम कहते हो कि मेरा
- 26:14योगदान है और तुम्हारे कहने से कभी कुछ हुआ है तुम्हारे सोचने से
- 26:23कभी कुछ हुआ है। कभी खुशी होता है वही जो मंजूर है
- 26:31खुदा होता है मुझे इला बुरा चाहे भी तो क्या होता है तो बिलकुल ठीक
- 26:41पूछा पुत्र मैं बहुत बोला। लेकिन मैं नहीं बोला और बहुत बार
- 26:50मैंने ये शब्द दोहराए कि आपने मुझे बोलते हुए सुना और एक और भी
- 26:58ताकत थी जो मुझे बोलता हुआ सुन रही थी।
- 27:02वह असली ताकत भ्रमण की। उसी की योजना का हिस्सा है।
- 27:06मेरा बोल, बाकी सब भ्रम तुम्हारे ऊपर इतने इतने पहरे हैं
- 27:24सर्कमस्टैंसेस के इतनी दूर दूर की आकाश गंगाएं।
- 27:30इतने दूर दूर के यूनिवर्सेस तुम पे लगातार प्रभाव गिरा रहे हैं और
- 27:37तुम्हें पता नहीं और आश्चर्य की बात है कि तुम कहते हो कि मैं
- 27:47करता हूँ। भला इतने बंधनों में बंधा हुआ
- 27:52व्यक्ति खुद स्वतंत्र करने के लिए कैसे हो सकता है?
- 28:00इतनी सृजना विराट सृजना इतने गृह तारे, नक्षत्र गिने नहीं जा सकते।
- 28:07पाताल न पाताल? लख आगा स आगास वहाँ से आती हुई
- 28:15किरणें तुम्हारे ऊपर से गुजरती हैं और तुम्हें घेरती हैं और फिर
- 28:22भी तुम कहते हो कि मैं करता हूँ नहीं तुम कुछ नहीं करते हो।
- 28:33जो के नोट डूब करते नहीं, तुम कर ही नहीं सकते तुम इसकी विराट
- 28:45योजना का एक हिस्सा। बस यही बात व्यक्ति की खोपड़ी में
- 28:54आती जिसकी खोपड़ी में आ जाती है ओह निहाल हुआ।
- 29:04यह ऐसे कहो कि वह उसने खुद को निहाल कर दिया।
- 29:09शब्दों की बात है वह खुद को ऐसे निहाल कर देता है।
- 29:17गर्मी आ वह कपड़ा नगरी मोख दवार तो फिर तुमने क्या किया?
- 29:24उसकी कृपा से ही तुम्हें मानस क्यूँ नहीं मिली?
- 29:26उसकी कृपा से ही तुम मुक्ति होगी तो तुमने क्या किया?
- 29:32एक सफर है जिंदगी का सुहाना जिंदगी बड़ी प्यारी है।
- 29:39अगर ढंग से जी जाए तो? और ढंग क्या है?
- 29:43उसकी योजना का हिस्सा बन जाना। जिधर हवाएं बहती हैं उसके साथ ही
- 29:53पहचान जिधर गंगा का पानी बहता है, विपरीत दशा में न बहना न तैरना।
- 30:03उसी दशा में बह जाना ये उसकी योजना का हिस्सा है।
- 30:09इस शब्द को फिर मैंने कहा तुम सुखी हो जाओगे, तुम्हारा जीवन
- 30:18सुखी हो जायेगा। तुम अडो मत ठहरों देखो उसकी योजना
- 30:27क्या कहती फिर उसके संग बोलो और अगर तुम उसी उसकी योजना के विपरीत
- 30:37चलोगे। तो करवा तो वो फिर भी वही लेगा जो
- 30:41करवाना चाहता है, लेकिन तुम्हें गुमान रहेगा कि मैंने अपनी योजना
- 30:48से करवाया और यही गलती हर एक मनोज से करता है।
- 30:54कोई यहाँ अमीर हो सकता है शनि। कोई यहाँ गद्दीधारी हो सकता है
- 31:00क्षणिक कोई यहाँ बहुत मान्यताओं से युक्त हो सकता है क्षणिक लेकिन
- 31:10अंत में कहाँ टिक हो पाता है ये क्षणक भी खत्म हो जाता है।
- 31:17तुम्हारा यहाँ क्षणिक भी कुछ नहीं है।
- 31:20यद्यपि तुम माने बैठो। खैर, हम वहाँ से ही चले, बाबा
- 31:32बोले किधर चले? अभी पूरा ग्रंथ बोलना है तुमने,
- 31:42मैं तुम्हें कह दूंगा, तुम याद करो वो दिन जब शिवालय में बैठ कर
- 31:53तुम मुझे पुकारना। और बिन पराये, मैं तुम्हारे पास आ
- 31:59गया, मैं जानता था यह है यंत्र बिल्कुल ठीक इस वीणा पर मेरे
- 32:12हाथों की ऐसे स्वर्ग निकलेंगे। कि मेरी सृष्टि आनंद से सारा भोर
- 32:23हो जाएगा, तुम ऐसा नहीं जान सकते। वहाँ से शुरू हुआ सारा सफर
- 32:42अध्यक्ष के बाद बड़े बदला पाए और वह बदलाव बिल्कुल नए होते थे।
- 32:58मैं कविता में डरता सू के पत्ते। घबराहट होते हैं।
- 33:05बड़ी भारी घबराहट होती है। ऐसा कभी हुआ न था।
- 33:12कोई व्यक्ति पांच सात बार थोड़ा ही एनलाइटन होता है एनलाइटन पर
- 33:16सोमवार होता है। हर अनुभव हर दिन उसके लिए नया
- 33:21होता है। हर अनुभव उसके लिए नया होता है।
- 33:31बड़े इलाज कराए, बड़ी दवाइयां नी बड़ी खाक छानी।
- 33:43लेकिन यहाँ जाने से पहले हिसाब किताब बराबर भी करना होता है।
- 33:54वह अपरम पार, उसकी लीला परम पार उसे तुम ये भी नहीं कह सकते कि वो
- 34:03अन्यायकारी। क्योंकि वह अपने ही द्वारा किया
- 34:10गया प्रत्येक कर्म भुगते जाता है। अपनी ही सृष्टि में उसका के न
- 34:15राला लेकिन बड़ा ईमानदार। खुद ही करता खुद ही भोगता आपे
- 34:23खेले खेल खिलाड़ी आपे खेला नहारा तो तुम्हारा क्या घूम जाता है?
- 34:32तुम को रोते चिल्लाते हो तुमने क्या खो दिया?
- 34:39जो तुमने बनाया था क्या खो दिया तुमने तुमने बनाया ये कुछ इसलिए
- 34:47मैं कहता हूँ तुम्हारा कुछ नहीं है और ये छोड़ो तुम्हारा कुछ नहीं
- 34:53है, ये तो सत्य है तुम ही नहीं। सफर बढ़ता गया, सफर बढ़ता गया।
- 35:09गोशाला मंदिर में मैं बहुत पहले से ज्यादा मैंने फिर से जाना शुरू
- 35:14कर दिया। एक वक्त ऐसा आता है यह ढांचा।
- 35:31यह रक्त माँ समझ जा मीत हड्डी इसका ढंग से यह भी एक बंधन लगने
- 35:42लगता है। और बंधन लगा होगा इसलिए राम ने इस
- 35:50बंधन से मुक्त होना ठीक समझा और जाते जाते भी ऐसे लोगों को
- 35:55पुरस्कार कर दिया करता है। पराया दर्द अपनाए उसे इंसान कहता
- 36:06है। इसलिए दूसरों को दुख ना देना
- 36:12क्योंकि जब तुम भीतर जाके देखोगे तो दूसरा नहीं है कोई तुम किसी को
- 36:22भी दुख देते हो। अप्रत्यक्ष रूप से तुम अपने को ही
- 36:26दुख देते हो, क्योंकि यहाँ दुख देने के लिए दूसरा है ही नहीं,
- 36:34बैर करने के लिए दूसरा है ही नहीं।
- 36:37निर्वय निर्पों किसे डरोगे? किस्से बैर करोगे यहाँ दूसरा कोई
- 36:46है ही नहीं। बाबा कहते एक उनका एक ही है डरोगे
- 36:58किस्से बैर किस्से करोगे। बैर करने को यहाँ दूसरा है ही
- 37:05नहीं, दिन भित गए, भित गए सब देखा, इन आँखों ने दो भाइयों की
- 37:16मौत देखी, पित्रा की मृत्यु देखी। माता की मृत्यु देखी, राम की लीला
- 37:31खेली, बड़ी श्रद्धा से खेली और शायद धरती पर वह भगत है।
- 37:39एनलाइटनमेंट के बाद पहला व्यक्ति एनलाइटनमेंट के बाद जो रामलीला
- 37:46खेला। यू अरे दी फर्स्ट पर्सन जिसने
- 37:51एनलाइटनमेंट के बाद राम की लीला खेली।
- 37:59अग्नियों ने तो सदा ही खेली, ज्ञानी ने प्रथम बार लीला खेली और
- 38:09वह स्टेज धन्य हो गया। जीस पर लीला खेली।
- 38:17और वह लोग धन्य हो गए जिन्होंने वो लीला देखी।
- 38:22कोई न जानता था उसके सिवा कि यह व्यक्ति प्रबुद्ध हो गया है, बस
- 38:32मैं जानता था और वह जानता था। जिसकी योजना का हिस्सा है संसार
- 38:51अब उस बात को शुरू करें, पांच तारीख को यहाँ बैच बुलाया 12
- 38:59तारीख को बैच बुलाया। फिर 21 तारीख की दीपावली के कारण
- 39:07क्योंकि थोड़ा काम धाम भी करना, बिल वगैरह भी काटना है।
- 39:12अपने बेटे के काम में सहयोग भी करना तो 19 तारीख का हमने बैच
- 39:18नहीं रखा तो फिर उसके बाद 26 तारीख।
- 39:23ये सभी रविवार और 26 के बाद फिर अगली योजना उसने मुझे बताई नहीं।
- 39:43बस इतना सा बताएं वो जाने के उसकी ले ल तो वही जाने बस मुझे इतना सा
- 39:58बताएगा कि तुम्हें त्रिवेणी संगम पर जाना होगा।
- 40:15ये तो मुझे पता नहीं त्रिवेणी सिंघम पर दर्शन क्यों करवा रहे
- 40:19हैं और बस इतना बोले कि त्रिवेणी सिंघम पर जाना होगा।
- 40:32और वहाँ से वापस आना नहीं होगा। अब इसका अर्थ मुझे पता है यह उसकी
- 40:41योजना का हिस्सा है। वो खुद ही टिकट बुक करा दे।
- 40:52खुद ही ले जाएगा जैसे लेके जाऊ मैं तो चार कदम चल नहीं सकता 13
- 41:00वर्षों से एक स्थान पर बैठा तुम 4 घंटे बैठते हो बैरकड़ जाते।
- 41:07तेरा बरस से जो एक आसन पे बैठा है उसका तो सारा शरीर ही अकड़ गया बस
- 41:15जीवन है शरीर अकड़ गया लेकिन ऐसा जल तो लेता।
- 41:28उसकी योजना का कुछ ही हिस्सा है जो मुझे अभी नहीं बताएगा।
- 41:35फिर बताया जाएगा ऐन वक्त पर शायद बताया भी न जाए, ले जाया ही जाए।
- 41:43अब उसकी तो हो जाने लेकिन मैं उसकी योजना का हिस्सा जब से मैंने
- 42:03बहना सीख लिया। जब से मैंने अपना रूप देखा
- 42:12वास्तुवाला यह रूप तो बनता है बिगड़ता है, बच्चा है, किशोर है,
- 42:21जवान है, वृद्ध है, प्रौढ़ है और वृद्ध है।
- 42:30और फिर ये लोग इतने बुझु भी जाएंगे, लेकिन इतना पक्का पता है
- 42:41कि यह है वो समुद्र सब जगह है। तो कहते हैं बुद्ध सामान्य समुद्र
- 42:51में एक क्वेश्चन है ये भी आया के बाबा ये समुद्र कहा है कोई क्षीर
- 42:57सागर या कोई मानसरोवर ऐसा कोई नहीं है।
- 43:03उसका समुद्र सब जगह पे है। जहाँ जहाँ उसका भाषा वहाँ वहाँ वो
- 43:12समुद्र तो मेरी वो चेतना जो मुक्त हो गई, दे ही गल गया।
- 43:26वह उसमें उतर जाए। सभी निर्धारित हो चुका है।
- 43:37मैंने अपने करीबी लोगों को बता दिया।
- 43:45शरीर की ज्यादा फिक्र ना करें। यह चेतना का वो हिस्सा उस
- 43:56तुम्हारे बनाए हुए स्टैच्यू में उतर जाए।
- 44:04और श्रद्धा के लिए तो मैं सुने और श्रद्धा के लिए तुम्हारी पर्याप्त
- 44:12तुम्हारे दुख दर्द तुम्हारी चाहतें।
- 44:22मैं पूरी कहूंगा तेशन नित्याभुक्ता नाम योग शेम
- 44:38बहामयान मैं तुम्हारी रोज़मर्रा की कुरोटों को तुम्हारी बनाए हुए
- 44:50कल्पना के। इन जहाजों को उड़ाऊंगा तुम फिक्र
- 44:57मत करना लेकिन एक बात समझा दूँ वो जहाज भी मेरे ही होंगे।
- 45:09तुम भी मेरे ही हो। और पूरा भी मैं भी करूँगा मैं ही
- 45:16अपनी खेल के साथ खिलवाड़ करता हूँ, ये संसार मेरे लिए एक खिलौना
- 45:24है और अपने खिलौनों से मैं खेलता हूँ।
- 45:35इसमें जो आपत्ति करता है वो ही नास्तक जो सहमति जिता देता है वो
- 45:42ही नास्तक मेरी इस सृजना को मैं सृजन करके उससे खेलूँ।
- 45:51किसी को क्या आपत्ति? अगर कोई आपत्ति करे वह मूड ही तो
- 46:02गहराई। मैं अपनी ही सर्जना के साथ खेलता
- 46:09हूँ। क्योंकि दुझा कोई है ही, इसलिए
- 46:17अपनी ही सर्जना से खेल खेल लेता हूँ, मैं ही जीतता हूँ मैं ही
- 46:22हरता हूँ। दुख भी मैं ही पाता, सुख भी मैं
- 46:33ही पाता और इस सुख और दुख का दृष्टा भी मेरे सवा यहाँ कुछ कोई
- 46:42भी नहीं। और मेरे से वह यहाँ कुछ और होगी
- 46:49ना सके तुम अपनी मनोधारणाएं पूरी कर लो, यद्यपि ये कभी पूरी नहीं
- 47:01होगी। काश।
- 47:08हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे, कयामत तक खुदा करेगी।
- 47:29कयामत हो और तू आए खुदा करेगी कयामत हो और तू आए?
- 47:48हम इंतजार करेंगे तुम। खेल खेलो, तुम्हें पता नहीं तुम
- 48:01नहीं खेलता है ये खेल नहीं खेलता। मेरी ही योजना का हिस्सा है और
- 48:18तुम तो सिर्फ तुम्हारे पर ले सिर्फ अमान्यता तुम मानते हो कि
- 48:23मैं खेलता हूँ, मैं अफसर बना। मैं दास बना, मैं गुलाम बना, मैं
- 48:34राजा बना, मैं रानी बना मैंने ये किया, मैंने ये किया, मैंने ये
- 48:43किया दुनिया एक दौड़ की तरह है। पर इसमें मैं ही दौड़े जा रहा हूँ
- 48:54और इस समय मैं ही ठहर जाता हूँ। ज़रा सोच के बताओ किसी को क्या?
- 49:09किसी को आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए क्योंकि कोई है ही नहीं।
- 49:17यह किसी का होना भी तो तुम्हारा इल्यूज है तुम तुम्हारा करना।
- 49:29छोड़ना, अपनाना पाना, गंवाना, जीवन मृत्यु, सब कल्पनाएं सब मीरा
- 49:46मालिक में तुम मान ही जाओ। लेकिन मानने से कभी किसी का होता
- 49:54थोड़ी है। मृत्यु बता देती है कि तुमने जो
- 50:01तुम्हारा माना, क्या वह सत्य था जहाँ बड़ी बड़ी?
- 50:12गद्दी पर बैठे हुए गद्दी नशीं लोग पल भर में ढेर हो जाओ, बातें करते
- 50:20हैं 100 100 वर्षों की 1000 1000 वर्षों की और अगले पल का भरोसा
- 50:27कुछ। मुझे ऐसी योजना का विस्तार बताया
- 50:45गया। मुझे ऐसी योजना का क्लू दिया गया
- 50:54लगता है मुझे पर पक्का नहीं। की श्री राम जैसी हालत इस शरीर का
- 51:10क्योंकि सरयू नदी के किनारे राम ने क्या किया और मुझे क्यों
- 51:16त्रिवेणी संगम पर बुलाया जा रहा? उसकी योजना का हिस्सा है और तुमसे
- 51:25तुम्हें इतना क्या तुम्हारा फिर लाभ करना भी व्यर्थ है?
- 51:36जो मुझसे द्रोहक पाले बैठे हैं उनका खुशी मनाना भी जरूरत है।
- 51:461 दिन खुद खुदा कहलाने वाली भी यहाँ से रुखसत हो जाती है।
- 51:55कौन रुका है सब लीला है। मेरी लीला है इसमें तुम्हारा कुछ
- 52:03नहीं एक है विस्तार अखंड जिसका कोई और है, कोई बेबाना नहीं, ना
- 52:13जान सकते हो तुम ना जान सको कि तुम ना जान सका है कोई।
- 52:22जान सकोगे चौथा भ्रम है। कितने आए, कितने चले गए?
- 52:30तुम भी इसी योजना का हिस्सा बन जा।
- 52:42हमने ही अपने खून से बख्शा पूरा ये साझ भी उसके साथ है।
- 52:56ये स्वर भी उसके जब तुम जानोगे तो पाओगे।
- 53:09फिर तुम्हे शर्म पिया है मैं कितनी गलती में था।
- 53:26मैं इसे योग्य बना ऐसी बात उसी ने इसे योग्य बनाया हज़ारों सार
- 53:39नरगिस अपनी बेनोली पर होती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में
- 53:46जीता भर। उसकी ही सृजना में उसकी ही योजना
- 53:55कभी कभी हजारों वर्षों के बाद ऐसे व्यक्तियों को जन्म देती है जो ये
- 54:06बता पाएं। एक ही है, दो नहीं,
- 54:33जब इतना हाथ ताई घेर लेते हैं उसकी सृष्टि को मेंपन घना हो जाता
- 54:43है। बहुत झेल हो जाती है, धरती रोने
- 54:47लगती है, आसमान फटने लगता है, चितकार करता है तो वो कुछ ऐसी
- 54:58सजना करता है, चित्रकारी करता है, मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 55:06होते है। ये वो नगमा है जो हरसाज पे गाया
- 55:12नहीं जाता। यह चित्रकारी भी उसकी है,
- 55:20चित्रकार भी वो है और चित्रकारी के ऊपर की ही नक्काशी।
- 55:26भी उसकी ही की हुई है। योजना उसकी सामान उसका ज़रा गौर
- 55:38से किसी कोने पे बैठते सो तुमने क्या बनाया?
- 55:50सिर्फ उसकी सर्जना को तुमने दूषित किया तुमने सिर्फ अपने अहिंकार का
- 56:05फैलाव करके। उसकी योजना को नकार, लेकिन भला
- 56:18तुम्हारी कोई औकात है क्या जीस मालिक की इतनी वृहद संरचना के
- 56:31सामने तुम एक ज़रा भी। रेत का नहीं बना सकते ये तुम्हारी
- 56:42औकात तुम्हारी उस मैं की औकात यू नकली।
- 56:59लेकिन ध्यान रखना कोई कितना भी कुछ कहता है कहने से उसका नहीं हो
- 57:12जाता। माज सदा मालिक का ही रहा करता है।
- 57:29चाहते तो बहुत क्रिया करते हैं। मुझे याद है, भगवान ने कहा था कि
- 57:47जीस दिन तुम्हें ये देह और तो सभी बंधन तुमने तोड़ दिए।
- 57:56मेरी कृपा से तोड़ दिया, जीस दिन तुम्हें ये बंधन की तरह लगने लग।
- 58:04जाए शरीर उस दिन। इसको भी तोड़ देना और वह।
- 58:13वक्त। अलग ओरनोर की बारात किसे पेश
- 58:27करूँ? ये मुरादों की हँसी रहा किसे पे।
- 58:52रंग। और नौ के आरा किसे देश करो ये
- 59:06मुरा। हँसी रात किसे पे?
- 59:26मैंने जज़बात निभाए हैं उस लोगों की तग मैंने जज़बात।
- 59:43निभाए हैं। खुशबू लो की जगह अपने अरमान
- 59:57पिरोनाया हूँ। होलों की जगह।
- 1:00:08मैंने। जजबात निभाए होशलों की।
- 1:00:18जगह। अपने अरमान पिरोलाया फूलों की जगह
- 1:00:33मेरे सेहरे की। ये सौगाती से पेश करो ये मुरादों
- 1:00:49की हँसी। किसे पे किसे पे किसे पे?
- 1:01:14ये मेरे शेर मेरे। आखिरी।
- 1:01:29ये मेरे शेर। मेरे आखिर नजराने मैं वो अपनों
- 1:01:44में से हूँ आ जिसे बेगा। ानी है बेतालक से मुलाकात कि किसे
- 1:02:04के शिकारों ये मुरादों की। हँसी रात किसे पेश करें, किसे पेश
- 1:02:27करें? तबो ताब मुबारक हो तुझे सुरख
- 1:02:41जोड़े की तबो ताब मुबारक हो तुझे। तेरी।
- 1:02:53आँखों कन्हैया, ख्वाब मवार क हो तुझे?
- 1:03:04मैं जी ख्वाहिश, मैं जी। ख्वाहिश?
- 1:03:11ये ख्यालात किसे पेश करूँ? मैं ये ख्वाहिश ये।
- 1:03:23ख्यालात किसे पेश करूँ? ये मुरादों के हसीं रात मुबारक
- 1:03:41किसे पेश करें? किस्से?
- 1:04:03रंग। और नूर की।
- 1:04:09रंग। और नूर की बारात कैसे पेश करो ये
- 1:04:21मुरादन। किसे पेश करू, किसे पेश करू?
- 1:05:0112 में ये ख्वाहिश ये ख्यालात से पेशक कौन है यहाँ जिसे ख्वाहिश
- 1:05:16पेशक, जिसे ख्यालात पेशक? सुर्ख जोबड़े की तबोताब मबारिक हो
- 1:05:25तुझे तेरी आँखों का नया ख्वाब मबारिक हो मैं ये ख्वाहिश।
- 1:05:35ये ख्यालात किसे पेश कर? कोई है यहाँ जिसे पेश करो कोई है
- 1:05:49यहाँ जिसे पेश करो नहीं काश। तुम सरंगत में चले जाओ, तुम
- 1:06:07सितारों पे पहुँच जाओ, तुम स्नूर में खो जाओ जहाँ तुम्हे
- 1:06:16वास्तविकता का पता चल जाए। के तुम हो को और मेरे संग संग
- 1:06:29चलना मैं जो जे ग्रंथ छोड़ चला मन घबराए तो वीडियो सुन लेना।
- 1:06:41बड़े काम आए थे। पर मेरे संग संग चल मैं तुम्हें
- 1:06:56उस महफिल में ले जाऊंगा जहाँ का नूर निराला।
- 1:07:11सितारों पे ले चलो दिल जो मज़ा। ऐसी।
- 1:07:26बहारों में ले चलो और जो तुम को।