Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Feb 25 - क्या सुख-दुःख हमारे हाथ में है? शादी, बच्चे, संसार, सुख-दुःख! How to live A Happy Life?
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- 0:07सर्वशक्ति मत परमान। रामायणमा सर्वशक्ति माथे, परमा
- 0:37मने शिरमाए। नमो?
- 0:56कल हमने एक प्रश्न छोड़ा था मेरी शादी को हुए थोड़ा वक्त बीता है।
- 1:10और मेरी धर्मपत्नी किसी और लड़के से बात करती है।
- 1:20मुझे शंका है कि उस पर कोई तंत्र क्रिया।
- 1:28हुई होगी। सगाई के बाद वो कमजोर होती जा रही
- 1:39है। मदद कीजिये।
- 1:46ये सवाल सांसारिक है बड़े कृपा के।
- 2:06आइए इस महत्त्व, प्रश्न को आज प्रथम बार पूछा गया है और तुम्हें
- 2:22अच्छी तरह से पता है मैंने पहले दिन ही तुम्हें कहा था आई ऍम जस्ट
- 2:27ए साइलेंट लेक। मैं एक मौन झील की तरह हूँ।
- 2:34अगर इसमें कंकड़ फेंक दोगे तो लहरें उठ जाएंगे अन्यथा ये शांत
- 2:39पड़ी रहती है। निस तरंग मुझे बहुत लोग कह देते
- 2:47हैं बाबा। आपने पहले जवाब क्यों दिया?
- 2:50उलट पुलट जवाब दे देते हो आप क्योंकि यहाँ क्रम नहीं है कोई
- 2:59यहाँ उत्तर आते हैं। आपके प्रश्नों से, मेरे भीतर से
- 3:04कोई प्रश्न का उत्तर नहीं आता। क्योंकि प्रश्न नहीं है कितनी देर
- 3:12पहले मैं निष्प्रश्न हो गया और उस तत्व को देख कर कोई भी निष्प्रश्न
- 3:19हो सकता है। प्रश्न बड़ा प्रासंगिक है, आपके
- 3:35लिए बड़ा कारगर है। भगवान महावीर का एक शब्द है जियो
- 3:47और जीने दो। खुद भी जियो और दूसरों को भी जीने
- 3:55दो, जिंदगी जीने के लिए है, रोने के लिए नहीं।
- 4:15ज़िन्दगी वैसे ही दुख है और तुम मान्यताओं में समाज की प्रथाओं
- 4:25में, भ्रांतियों में जीवन को और दुःखी कर देते हो।
- 4:36शांत होते हैं तुम्हें तुम्हारी समस्याओं से निजात दिलाने के लिए
- 4:41वो तुम्हें और उलझा देते हैं, जिन गांठों को तुम खोलना चाहते हो?
- 4:50उन गांठों को वो और ज़्यादा बल देकर गोल गांठ बना देते हैं कि वह
- 4:55कभी खुले ही नहीं, ऐसी बहुत सी गांठ ही हैं जो आज खुलती ही नहीं
- 5:01है। मानव चेतना से उन प्रश्नों में से
- 5:07एक प्रश्न यह भी है। बड़ा महत्वपूर्ण है इसलिए इसको
- 5:17ध्यान से सुनिएगा, हम शुरू करें। जब स्त्री पुरुष किसी बच्चे को
- 5:30जन्म देता है, क्या वह बच्चे से पूछते हैं क्या हम तुम्हें जन्म
- 5:41देंगे? न दे एक एक बात को गौर से समझ
- 5:45लेना बच्चे को जन्म देते वक्त। क्या स्त्री पुरुष पूछ लेते हैं
- 5:58बच्चों से? क्या हम तुम्हें जन्म दें कि ना
- 6:02दें और वही स्त्री पुरुष कहते हैं कि जीवन दुख है?
- 6:12फिर जीवन दुख है तो तुम बच्चों को जीवन देके दुख देने की प्रक्रिया
- 6:25में शामिल हो रहे हो या तो महावीर से उड़ट हो गयी बात।
- 6:32न तुम खुद जिए, न तुमने जीने दिया।
- 6:38व्यक्ति को जीवन देने का अधिकार तभी होना चाहिए जब उसे वास्तविक
- 6:47रूप से पता चल जाए। के जीवन दुख नहीं, जीवन महासुख है
- 6:54और इस महासुख को पाया जा सकता है। पुरुष महा सुख से युक्त व्यक्ति
- 7:13आनंद से युक्त व्यक्ति को हम ऋषि कहते थे।
- 7:22प्राचीन परंपराओं ने यह विधान बनाया था।
- 7:31कि अगर किसी का संतान न हो तो तुम ब्रह्म ऋषियों से डीएनए ले लेना।
- 7:43अब थोड़ी सी और बात बता दूँ। गहरी है।
- 7:55तुम अन्न खाते हो, जो भी कुछ खाते हो, उससे स्पर्म्स बनता है रज
- 8:01बनता है। दोनों के आपसी संबंध से बच्चा
- 8:07पैदा होता है, चेतना उतरती है, जीवन पैदा होता है।
- 8:20लेकिन जब कोई व्यक्ति समादृष्ट होता है, संबोधि को प्राप्त होता
- 8:27है, बाकी तो सब वैसा ही है। डीएनए वगैरह।
- 8:40लेकिन उसके रोम रोम में वह जो घटना घटी वह जो आनंद की बरसात हुई
- 8:49उसके स्पर्म में भी मिल जाती है। विदुषी, गार्गी और विद्योत्मा।
- 8:59इनके राज्य में भी मिल जाती है। ऐसे व्यक्ति कम ही उपलब्ध होते
- 9:07हैं। ऐसे व्यक्तियों को बच्चे पैदा
- 9:13करने का अधिकार होना चाहिए। सिर्फ ऐसे व्यक्तियों को और वह जो
- 9:23बच्चा पैदा होगा वह शिरशस्त्र प्रज्ञा से युक्त होगा।
- 9:30वह चालाक नहीं होगा। तेजस्वी होगा।
- 9:42यह दूसरों की गर्दने ने काटेगा, दूसरों को दुख नहीं देगा।
- 9:51वह सेन क्षीर पर वृत्ति का होगा। चेष्टा करेगा के उसके कारण किसी
- 10:01को दुःख न हो। ऐसे व्यक्तियों को हम रेशी कहते
- 10:13थे और ऐसे व्यक्तियों का स्वम लेने के लिए।
- 10:21या राज्य लेने के लिए एक परंपरा थी, प्रथा थी हमारे सनातन की बात
- 10:28कर रहा हूँ मन्नू जी महाराज की अगली पीढ़ियों में।
- 10:40एक पीढ़ी हुई। रथी सर रथी सर के कोई औलाद नहीं
- 10:44हुई है उसकी धर्म पत्नी के कोई बच्चा नहीं हुआ है तो रथी सर कहने
- 10:52लगे कि हम महर्षि अंगिरा ऋषि से। सब हम ले लेते हैं, ठीक है।
- 11:07दोनों ने आपसी सहमति से फैसला किया।
- 11:13अंग्रा ऋषि ने स्पर्म दे दिया। आज मान्यताएँ बदल गईं, समाज बदल
- 11:22गया। समाज आज कुरुप है, समाज का चेहरा
- 11:32मोहरा बिगड़ गया है। प्रश्न आए हैं कि मेरी धर्मपत्नी
- 11:44किसी और लड़के से बात करती है? हम कलाकार हैं कलाकार हम जो कुछ
- 12:00बन नहीं सके वो थोपते हैं अपने बच्चों पर।
- 12:06हम इंजीनियर नहीं बन सके, डॉक्टर नहीं बन सके, साइंटिस्ट, रिसर्चर
- 12:10नहीं बन सके तो हम सोचते है कि अपने बच्चों को ये बनाएंगे जैसे
- 12:19कि बच्चे तुम्हारे गुलाम हो। पहली बात तो ये धारणा छोड़ना होगा
- 12:27मैं प्रसंग पे आऊंगा जल्दी मत करो एक जीवन को लेके आना है धरती पे
- 12:45और मूर्खताव के कारण जीवन दे दिए गए धरती पे इसलिए आज सारी धरती
- 12:51मूर्खताव से भरी पड़ी है। झूठे व्यक्ति पैदा करते हैं, बस
- 13:00इशारा ही समझ लेना कहते हैं अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रंप जैसे
- 13:08ऑथेंटिसिटी ऑफ लाइंग। झूठ बोलने की प्रामाणिकता मिल गई।
- 13:17अमेरिका के राष्ट्रपति को जितना चाहे झूठ बोलते हैं, हमने आज समाज
- 13:29को झूठ से निर्मित कर दिया है। समाज एक तत्व पे पहले ही झूठा है,
- 13:42वो तत्व है भीतरी जैसे ऋषि समझाते हैं तुम जो हो वो मानते हो, तुम
- 13:50जानते नहीं तुम हो कौन ये बड़े से बड़े झूठ है।
- 13:55यू अरे इन इल्यूश़न ऋषि कहते हैं जो तुम मानते हो कि मैं हूँ, वह
- 14:02झूठ है, जो तुम वास्तव में हो वो जानने के बाद तुम सत्य हो गए,
- 14:09उससे पहले तुम झूठे रहोगे। तो पुरुष स्त्री किसी बच्चे को
- 14:19जन्म देती है, उसे पूछती है क्या हम तुम्हें जन्म दें?
- 14:28पूछ सकते भी नहीं, कोई कारण भी नहीं, कोई ढांग भी नहीं, कोई उपाय
- 14:34भी नहीं। लेकिन बच्चे को हमने जन्म दे दिया
- 14:44तुमने कुछ तो देखा होगा। संसार में सुख है, संसार में दुख
- 14:52है, संसार दुखों का घर है, संसार सुखों का घर है।
- 15:00बस ये दो ही बातें हैं जो समझाने योग्य हैं ऋषि को बच्चे पैदा करने
- 15:07का अधिकार क्यों है? क्योंकि ऋषि जानता है कि संसार
- 15:12महा सुख है, उसे बच्चे पैदा करने का अधिकार है।
- 15:20क्योंकि वह बच्चे को बता भी देगा कि महा सुख कैसे है?
- 15:28वह सारी प्रणाली को जानता है क्योंकि खुद उतर चुका है।
- 15:36उस गहरे तत्व में जिसे शाम वेद कहता है, तत्व और मशीष्वेद कहते
- 15:40हो, वह बच्चे पैदा करने का अधिकार रखता है, उसके लिए जीवन महासुख
- 15:52है। मूर्ख व्यक्ति को बच्चे पैदा करने
- 16:00का अधिकार नहीं होना चाहिए क्योंकि वह जानता है कि जीवन दुख
- 16:09है, सुख नहीं। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ बुध सुख
- 16:20बुध जीस स्तर तक रहे वहाँ तक सुख है सिर्फ और जहाँ से भागे वहाँ
- 16:28दुख था कहाँ से भागे सुख, ऐश्वर्य, साधन पदार्थ।
- 16:35हीरे मोती जोहरात गद्दियाँ तानाशाही जनता जनार्दन भूमि तख्त
- 16:47तो दास दासियाँ बुध को छोड़ के आ जाते हैं।
- 16:52बुध कहते नहीं दुख है। भाग जाते हैं तो देखें सुख भी है
- 17:05इसी खोज में निकल जाते हैं। एक बहुत बड़ा संकट अपने जीवन के
- 17:14ऊपर लिखे। पता नहीं है।
- 17:19सुख है कि नहीं इतना पाया कि इन पदार्थों में सुख नहीं है तो फिर
- 17:28कहीं सुख होता भी है बस इसी खोज में निकले हैं।
- 17:37बयान के रिस्क लेकर बहुत बड़ा रिस्क लिया बहुत ने और देखिए जो
- 17:44रिस्क लेता है वह ही साहसी है। वो पा भी लेता है रिस्क लेने की
- 18:00क्षमता जिसमें नहीं साहस नहीं वह अधिकारी नहीं उस तत्व तक पहुंचने
- 18:06का क्योंकि जो मनुष्य ने आज तक। उन्माद खड़ा कर लिया है।
- 18:15इलूशन खड़ा कर लिया है उसको तोड़ने के लिए बहुत बड़ा बेराट
- 18:22साहस चाहिए। इसलिए जैनी बड़े समझदार थे।
- 18:31जैनियों ने अपने चौबीसवें तीर्थंकर को उपाधि दी।
- 18:35नाम तो उसका वर्धमान था। उपाधि थी महावीर वह वीर ही नहीं
- 18:43है, वह महावीर है महावीर। जो इस इलूशन को तोड़ने का साहस
- 18:50दिखाते वह मान और इलूशन बड़ा भारी है जन्मो जन्मो से, मैं रोज़ कहता
- 19:01हूँ तहें जम गई हैं। सुमेरु पर्वत जैसे।
- 19:05और तुमने मान ही लिया है कि मैं शरीर हूँ, मैं मान हूँ पक्का और
- 19:11उसी हिसाब से तुमने सारा कानून निर्मित कर दिया है।
- 19:20समाज के जीने के लिए व्यवस्था अच्छी है।
- 19:27संत के जीने के लिए व्यवस्था ठीक नहीं और संत युगों युग वेजन से
- 19:36जानते रहे हैं ये बात कि यह समाज? हमारे लिए व्यवधान का काम करता
- 19:43है। छोड़ दिया, संसार बाहर निकल गई।
- 19:46यह था कारण इमालयों पे जाने का, एकांत में जाने का, वट वृक्षों के
- 19:55नीचे बैठने का अन्यथा दूरी कितनी थी?
- 19:58कपलवस्तु। और उस पेड़ के नीचे वटवृक्ष के
- 20:07नीचे जहाँ बुद्ध को ज्ञान हुआ कुछ ज्यादा दूरी नहीं थी, लेकिन इन
- 20:20उत्पादों से शोर गुल से परे होना है।
- 20:27एक रिस्क लेना है तुम ढूंढ़ते हो रिस्कलेस लाइफ और आखिर में
- 20:39तुम्हारे हाथ में आता है ठन ठन गोपाल गुरु घंटा।
- 20:49ना इधर के रहे, ना उधर के रहे ना खुदा ही मिला ना बसा ले सनम बोगो
- 20:58में कुछ निकला नहीं महाभोग के पास तुम गए नहीं।
- 21:06सूखी सूखी आँखें लिए इस संसार से विदा हो जाते हो।
- 21:13मरने वाले की आँखों में जाकर नजर आ बड़ा दर्द दिखाई पड़ेगा।
- 21:19और मरने वाले कबीर की आँखों में झांककर ज़रा बड़ी लाश मिलेंगे
- 21:24तुम्हें और विदा होते हैं जैसे परम परम स्वर्ग में जा रहे हैं
- 21:35ऐसे विदा होते हैं। एक सिंहासन चढ़ चढ़े एक बंधे जात
- 21:40ज़ंजीर तुम ऐसे जाते हो जैसे अपराधी की तरह जंजीरे बंधे बंधे
- 21:48जाते हो लाखों लाखों मान्यताओं। से तुम बंधे हुए हो, जिनका
- 21:57तुम्हें पता भी नहीं। बच्चों से हम कभी नहीं पूछते कि
- 22:05तुम्हें जन्म दें कि नहीं दें। सबसे पहला अपराध है चौंकना मत।
- 22:19उत्तेजित भी मत हो। सबसे बड़ा अपराध है बिना स्वयं के
- 22:29जाने बच्चा पैदा करना है और हम तो यही कर रहे हैं।
- 22:36तभी तो ये मूड ट्रंप जैसे लोग पैदा होते हैं।
- 22:39हिटलर जैसे लोग पैदा होते हैं, खुद का ज्ञान नहीं, टैरिफ का
- 22:49ज्ञान है न? मैं महान बनाऊंगा यही हिटलर ने
- 22:53कहा था, मैं महान बनाऊंगा जर्मनी को।
- 22:59और अकेले ट्रंप का तो मैं नाम लेता हूँ, बहुत से लोग हैं ऐसे
- 23:11तुम उनकी बेड़ियों में जकड़े जकड़े जी रहे हो?
- 23:15अगर तुम अपने आप को उन्मुक्त और स्वतंत्र समझते हो तो तुम गलती
- 23:19में हो तुम पर लाखों लाखों बढ़िया है धर्म की, गुरुओं की संस्कृति
- 23:29की, समाज की, कानून की। परिवार की, परिवार की, परिवार के
- 23:42मान्यताओं की, समाज की, गांव की, देश की, राष्ट्र की, विश्व की,
- 23:50तुम्हें पता ही नहीं है कितनी? बंधनों से तुम बंधे हुए हो, ये
- 23:57अज्ञात वधन तुम्हारे अचेतन मन में पड़े होते हैं।
- 24:05सारे लोग मुझे कहते हैं। कि हमें आश्चर्य होता है कि इतने
- 24:18ऋषि यहाँ पर आए बोलकर गाय कितने साफ साफ शब्दों से बोला लेकिन
- 24:25पहुंचे बहुत कम लोग ये हमें अविश्वसनीय लगता है।
- 24:31हैरानी होती है और मैं कहता हूँ मुझे ये अविश्वसनीय लगता है कि
- 24:42ऐसी दुनिया में कोई एक कबीर पूछ कैसे जाता है तुम्हें वो
- 24:49अविश्वसनीय लगता है। अनब्रेवेबल और मुझे ये लगता है
- 24:55इतनी बीड़ियों के होते हुए कबीर और नानक कैसे पहुँच जाते हैं,
- 25:00कैसे मीरा नाच लेती है इतनी रूढ़ियों के बावजूद उस राजस्थानी
- 25:09की भूमि पर? जहाँ डेढ़ गज का गूँघट चलता है और
- 25:17खास तौर से बेटियों के लिए नहीं, बहुओं के लिए बेटियों के लिए भी
- 25:21चलता है। बहुओं के लिए कामुकता की निशानी
- 25:29है यह। हीन भावना है तुम्हारे मन में जो
- 25:42समाज नगनता को स्वीकार न करे वह परमात्मा की बनाई हुई सृष्टि को
- 25:51उसके सामान्य रूप में। स्वीकार नहीं कर रहा।
- 25:55तुम बच्चे को स्वीकार कर लेते हो, कर लेते हो ना?
- 26:01बड़े को स्वीकार क्यों न करता वो ही अंकुश के पड़े हुए हैं और तो
- 26:06कुछ नहीं हुआ। प्रसंग बड़े लम्बे हो जाएंगे।
- 26:16मैं फिर फिर वापस वहीं आ जाता हूँ।
- 26:20बीच बीच की बातों को कह के बच्चों को जन्म देते हैं, बच्चों से
- 26:30अपेक्षा रखते हैं। उनसे पूछ के जन्म नहीं देते हैं,
- 26:35उनसे अपेक्षाएं बहुत रखते हैं। श्रवण कुमार जैसा होना चाहिए
- 26:45आज्ञाकारी। मैं आपको सत्य उदाहरण देता हूँ
- 26:51जहाँ से मेरा जीवन बदला हो शायद उसके वंशेज होते होंगे।
- 26:59अब मुझे नहीं पता क्योंकि मैं मैं तो 12 साल से इन कॉन्ट्रैक्ट नहीं
- 27:05हूँ। मेरे शहर में क्या हुआ, क्या
- 27:08बदला? पुराने मकानों का क्या हुआ नहीं
- 27:13पता मुझे ज्ञानी कभी बस एक कमरे में एक जगह स्थिरता आ गई।
- 27:29आचार्यों, उपासनम स्थैरम यह स्थैरम, आत्म मनुग्रह अपने आप का
- 27:42विश्लेषण। यह है ज्ञानी का लक्षण एक ज्ञानी
- 27:47के लक्षण होते हैं। भाग दौड़ ना करें अगर अभी तुमने
- 27:52कुछ पाना है ये भी भागदौड़ है अगर अभी तुमने दुनिया को बदलना है, ये
- 28:01भी भागदौड़ है। मुझसे लोग पूछ लेते हैं फिर तुम
- 28:06क्यों बोलते हो? मैं सिर्फ बोलता हूँ क्योंकि
- 28:11बोलना अपने अनुभव को बताना मुझे आनंदित करता है मैं शिष्यों को
- 28:20बनाने के लिए। नहीं बोलता।
- 28:26मैं सिर्फ़ अपना अनुभव बताने के लिए बोलता हूँ।
- 28:31फिर ये दीवारें सुनें या कोई मानव सुनें यह सुनकर मुझे समझे और मेरे
- 28:38पास आ जाए या न आए। ये उनकी मर्जी है।
- 28:49मैं ईश्वर की सृष्टि को बदलना नहीं चाहता।
- 28:52पहली बात थी सृष्टि जैसी है, इसका एक मालिक है।
- 28:59और मैंने बहुत बार कह दिया मैंने वो देखा है मुझे लोग शंका की
- 29:07दृष्टि से देखते हैं। आपने परमात्मा को देखा है बिलकुल
- 29:18देखा है। हमें शक है, होना भी चाहिए,
- 29:26तुम्हें शक है, होना भी चाहिए बिना देखे तुम विश्वास करो, ये तो
- 29:33मुड़ता है। बिना देखे तुम शक करो या
- 29:40बुद्धिमानी, तुम बुद्धिमान हो, तुम्हें मानना चाहिए उन्हें
- 29:46विश्वास करना भी नहीं चाहिए। श्रद्धा दर्शन के बाद हो जाए वह
- 29:55स्वभाविक है। दर्शन हुए न हो और तुम श्रद्धा को
- 30:01लीप बोतलों, वह नकली लोग मुझे कहते हैं आपने परमात्मा को देखा,
- 30:08मैंने कहा मैंने परमात्मा को देखा।
- 30:18इसका कोई आप इसका कोई प्रमाण दे सकते हो आप प्रश्न जायज़ बिलकुल
- 30:34मेरा जीवन प्रमाण इससे बड़ा प्रमाण की आवश्यकता है।
- 30:4212 वर्ष से एक आदमी एक स्थान पर बैठा है।
- 30:44टिक्कर स्थिरता का लक्षण उस में आ गया क्यों?
- 30:48क्योंकि उसने अपनी भीतर की स्थिरता को देख लिया, जान लिया
- 30:53मैं कौन हूँ? अपनी वास्तविकता को पहचान गया और
- 30:56वैसा ही है वैसा ही हो गया। सैरियम आदम भिनकृवा अपने आप को
- 31:06जानकर क्षेत्र हो जाता है आदम इसका ये प्रमाण इससे बड़ा भी कोई
- 31:17प्रमाण चाहिए होता है। किसी टेस्ट के प्रति कोई रुचि ना
- 31:29रखना। हज़ारों हज़ारों हज़ारों लोग आये
- 31:35पापा एक बुर्के खा लो, ये फल खा लो तुम्हारे लिए लेके आये मैंने
- 31:42कहा देखो। इस शरीर को चलने के लिए क्लोरिज
- 31:47की आवश्यकता होती है। हृदय, धड़के, फेफड़े, सांस में
- 31:56भीतर के सारे अंग सही ढंग से काम करते रहें, सुचारु ढंग से।
- 32:05उसके लिए कैलोरीज की आवश्यकता होती है।
- 32:10मैं उतना सा भोजन ले लेता हूँ, किसी रूप में लूँ, दूध के रूप में
- 32:15ले लेता हूँ, जैसा मुझे रुचिकर लगता है।
- 32:23कोई किसी ने मेरे पे बंदिश नहीं लगाई, पाबंदी नहीं है, कोई दंडित
- 32:29नहीं हूँ मैं बाहर जाने के लिए किसी ने रोका नहीं घूम सकता हूँ,
- 32:35लेकिन घूमने का मन नहीं हुआ जी रहा हूँ लेकिन जीने की अभिलाषा
- 32:43नहीं। इस वक्त बोलते बोलते भी अगर कोई
- 32:48व्यक्ति मुझे मार दे तो मेरी जीने की कोई इच्छा नहीं होगी।
- 32:58मेरे पुत्र ने मुझे पूछा बाबा आप जब डूब रहे थे, मैं साक्षी था।
- 33:07रोहित ने पूछा मैं साक्षी था और हमने तुम्हारे सब हव भाव देखे,
- 33:15ज़रा नहीं चिल्लाए, हाथ पांव नहीं हिलाए, मुझे बचा लो।
- 33:20मरने वाला व्यक्ति क्या नहीं करता?
- 33:27लेकिन तुम तो ऐसे ही पड़े रहे जैसे डेवलप के पिल्लों पे पड़ा
- 33:30रहता है आदमी मौत से जो तो दुब्बा है।
- 33:40ऐसे करने की जरूरत जो कर सके वह संबोधि युक्त है, वह है समाध्यक्ष
- 33:57भगवान राम तुम्हारे हिसाब से। सुसाइड करते हैं, लेकिन ज़रा
- 34:04छलांग लगा के देखो तुम लगाओ लगा पाओगे जीवन को जीने की अबलाशा
- 34:16तुम्हें ऐसे करम करने ही नहीं देते।
- 34:23तुम तो ये व्यापारिक आदमी कहते हैं छमे छमे जाईं ते छमे छमे आईं
- 34:27दो गुना लगे छैया छैया में आना और छैया छैया में जाना, रिस्क मत
- 34:34लेना। बड़े से बड़ा सहस और मर्यादा
- 34:43पुरुशोत्तम ने अपनी मृत्यु से भी साबित कर दिया के मरने की भी
- 34:53मर्यादा बड़ी शानदार अपनी इच्छा से ही मरे।
- 34:58किसी की इच्छा से नहीं मरे। तुम किसी की इच्छा से मरते हो,
- 35:04तुम मृत्यु की इच्छा से मरते हो, मृत्यु चाहती है तो मैं मारना और
- 35:09तुम मरना नहीं चाहती लेकिन वो मार देती है।
- 35:16राम खुद जल समाधि लेके तुम बताना चाहते हो कि देखो मृत्यु भी मेरी
- 35:25मालिक नहीं है, मैं मालिक हूँ मृत्यु का मैं खुद मरूँगा।
- 35:37मृत्यु के आगे गड़गड़ाऊ का नहीं, तुम इस से सुसाइड यू कैन से इट
- 35:46सुसाइड तुम्हारी अपनी भाषा है, तुम्हारी अपनी सोच है, समझे?
- 35:58और वह धर्मपरायणी सीता खुद को पृथ्वी में समाहित कर देती है ये
- 36:05क्या बताता है? परम साहस का रूप राजकुमारी थीं।
- 36:16राजघराने में ब्याही गई बनवास का तुम्हारे हिसाब से कष्ट झेला।
- 36:26अकेलापन का साहस, अपनों से दूर। फिर रमण की कैद में अकेलापन अपना
- 36:37कोई भी नहीं। फिर बाहर आई तो परीक्षा, अग्नि
- 36:43परीक्षा और फिर धोबी ने कह दिया फिर फिर चलो अपना बस।
- 36:55ऐसे साहसिक काम कौन कर पाएगा? ऐसा नहीं है कि त्रेता में द्वापर
- 37:08में सतयुग में ही ऐसे लोग थे। ये लोक वोग कुछ नहीं होता।
- 37:16ये तुम्हारे बनाए हुए हैं, ठग्गी का ढंक है।
- 37:24वातावरण साफ सुथरा हो, पानी पीने के योग्य हो, धरती में बीज
- 37:31अंकुर्त हो जाए, सही फलीभूत हो। वैसा योग है, मनुष्य का, मानव का
- 37:37मन मलरहित हो, सुख के साधन इकट्ठा ना करे, अब समझ लेना ये शब्द गहरा
- 37:50है। सुख के साधन इकट्ठा ना करें, सुख
- 37:57के कारण में चला जाए ये शब्द तो बड़ा गहराया अगर समझा जाएगा सुख
- 38:05के साधन पदार्थ। तो मच्छर खाते हो, स्वादिष्ट खाते
- 38:11हो, चाउ में चुग्गा सैर सपाटा करें और नहीं तो चलो कुम्भ स्नान
- 38:22करें। भटकते हुए लोगों की तड़पते हुए
- 38:31लोगों की। यह एक ढंग है कि चलो शायद वहाँ से
- 38:44मुक्ति मिल जाए, तुम मुक्ति चाहते कैसे हो दुख से और दुख तुम्हारा
- 38:53पीछा नहीं छोड़ता। तुम बड़े उपाय करते हो, पदार्थ
- 39:01भोंकते हो, गद्दियाँ भोंकते हो, पैसा इकट्ठा करते हो, सुन्दर
- 39:07पिल्लोस बैड्स सुन्दर स्त्री पुरुष भोंकते हो, सब भोंकते हो
- 39:14लेकिन। बेकार हो जाता है।
- 39:24तुम सुख के साधन इकट्ठा करते हो, सुख के कारण में नहीं जाते।
- 39:35दूसरी बार बोला मैंने शब्द तीसरी बार फिर बोलेंगे।
- 39:41तुम पदार्थों को इकट्ठा नहीं करते, मैं नहीं कहता, पदार्थों को
- 39:49मत भोगो, क्यों रोकूंगा? जो जानता है पदार्थों में सुख
- 40:02नहीं वो तुम्हें भी भोगने देगा भोगो, क्योंकि उसने निष्कर्ष
- 40:08निकाल दिया। इन तेलों में तेल है।
- 40:14रेगिस्तान में इस रेत में तेल नहीं निकलेगा।
- 40:22अब तुम्हें भी कहता है तुम भी अच्छी तरह से जान लो, निकाल लो
- 40:30इसका रस निचोड़ भ्रह्म। मुक्त हो जाओगे अनीता, भ्रम में
- 40:36रहोगे हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा, उनकी महफिल से हम उठ तो आये
- 40:51जीसको छोड़ के जाओगे, भ्रम रह जायेगा।
- 40:57कहीं वहाँ तो नहीं है जो मैं छोड़ आया बार बार न सताइए विचार इसलिए
- 41:08भोग ही लो ज्यादा बेहतर है। राजकुमारी राजघराने में ब्याही
- 41:22वनवास होगा। अंत तक राम के बच्चे पाले और राम
- 41:34को सौंप दिया। और देखिए इसकी सहनशक्ति कुछ मांगा
- 41:41नहीं। राम से इससे तुम कुछ सबक नहीं सीख
- 41:49पाए। सीता की जिंदगी से तुमने कुछ नहीं
- 41:51सीखा? सीता की ज़िन्दगी तुम्हें ये
- 42:01सिखाती है कि कहीं कुछ नहीं फना हो जाओ फना न राजकाज में सुख न
- 42:17माता, पिता में सुख बहन भाई में नहीं सुख।
- 42:23पति परिवार में नहीं सुख, न राज़ में सुख, न वन में सुख, न अपने घर
- 42:31सुख, न प्राय घर सुख बंदी बना ली गई, तब भी सुख नहीं।
- 42:40जब स्वतंत्र थी तब भी सुखना इसके जीवन से यह निचोड़ निकाला नहीं
- 42:47तुमने और कभी धैर्य नहीं खोया और आखिर में क्या किया?
- 42:57वो ही जोराम ने किया ये दोनों जोड़ी।
- 43:00अद्भुत थी संसार के ऊपर फिर शायद ऐसी जोड़ी कभी ना आए।
- 43:06दोनों सुसाइड करके मरे। सीता भी तुम्हे कहती है मैं
- 43:17मृत्यु के दिन नहीं। मैं अपनी इच्छा से मरूंगी।
- 43:20मृत्यु मेरे अधीन है मैं गुलाम नहीं हूँ मैं आज आता हूँ मृत्यु
- 43:31के मारे से नहीं मरूंगी, खुद मरूंगी अपनी इच्छा से मरूंगी।
- 43:37मृत्यु भी मेरा चैन है राम भी कहते हैं मृत्यु मेरा चैन है
- 43:44राजभोग मेरा चैन था मनवास मेरा चैन था, मैंने सब जगह आनंद लिया
- 43:51और तुम्हें नहीं पता तुम तो स्त्री तुम तो सीता को।
- 43:56परम दुख से युक्त समते हो यही तुम गलती खा जाते हो।
- 44:02सीता जहाँ भी गई कैद में रही, वनवास में रही महल में रही
- 44:07राजपुत्री बन के रही जनक की लेकिन भीतर से मुक्त रही।
- 44:15और जो भीतर से मुक्त है बाहर के बंधन के कोई परवाह नहीं होते हैं।
- 44:23डॉक मुझे कह देते हैं बाबा तुम तो खुद ही जेल में बैठे हो तुम्हारा
- 44:30जेल क्या 12 साल से तुमने खुद ही जेल चुन ली?
- 44:41कहीं नहीं जाते और क्या होता है जहर में?
- 44:45यही तो कुछ होता है अपनी इच्छा से नहीं जाते अपनी इच्छा से खाते
- 44:53पीते हो जो भी खाते पीते हो किसी ने कोई बंदिश थोड़ा दी, किसी ने
- 44:58कोई दंडार्थ। दंडात्मक कार्रवाई थोड़ा की है।
- 45:04मैं स्वयं का मालिक हो गया, गुलाम नहीं रहा, प्रसंग में चले तुम
- 45:12बच्चे को जन्म दे देते हो, स्वतंत्र चेतना को जन्म नहीं
- 45:17देते, तुम गुलामा को जन्म देते हो।
- 45:22इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ बच्चे पैदा करने बंद कर दो और जो
- 45:30तुम्हें कहते हैं कि तीन बच्चे पैदा करो, उनसे बोलो तुम पहले
- 45:33करो, तुम तीन करो तो हम चार करेंगे।
- 45:40ये तीन बच्चे तुमसे पैदा करवा के अपनी आर्मी में मिलाना चाहते हैं
- 45:46और आहूत करवाना चाहते हैं। तुम्हें ये इनकी मंशा है, ऐसा मत
- 45:50करना बच्चों तुम स्वतंत्र रहना। कई बार बाहर के मिठास भीतर की
- 46:06कुनीन का पता नहीं चलने देती। मेरे इशारे से समझ लेना।
- 46:12अगर समझ आए तो? जिसके भीतर कुनीन होती है उसको
- 46:19अक्सर शुगरकोटेड कर दिया जाता है। अच्छे अच्छे शब्द दिए जाते हैं।
- 46:29मिलेगा इन्हें भी दुःख। परमात्मा बड़ा समझदार है।
- 46:38अगर कोई ठगी मारेगा, चालाकी करेगा, उस्तादी करेगा, हेराफेरी
- 46:42करेगा, बेईमानी करेगा, अपनी समझदारी का प्रयोग करेगा, वह दुख
- 46:49होकेगा यही बाबा कहते हैं शेष क्षणप लखोवे तय करने चले तुम्हारे
- 46:58मैं 1000 क्षणप हूँ, लाखों क्षणप हूँ, समझदारियां हूँ चतुरता हूँ
- 47:07लेकिन एक भी तुम्हारे काम नहीं आएगा।
- 47:13तुम हुकुम करना चाहते हो? बाबा कहते हैं हुकुम करना तुम्हें
- 47:17दुख दे देगा और बाबा जो बोलते हैं 100% सत्य बोलते हैं।
- 47:30मैं बहुत बार बोला हूँ बाबा कहते है हुक्म करने में सुख नहीं है,
- 47:36जोर न राज़ माल मनसोर राज़ करने में सुख नहीं है जोर न जुगती
- 47:47ज्ञान विचार। ज़ोर न जुगती छुट है संसार
- 47:55तुम्हारी किसी भी जुगती में पांच नाम ले लो दो, नाम ले लो एक नाम
- 47:59ले लो सब बकवास राम राम कर लो राधे राधे कर लो लिपियाँ
- 48:04प्रवर्तित कर ली तुमने। कोई चाइना भाषा में बोल दो, कोई
- 48:08फ्रांसीसी में बोल दो, लैटिन में बोल दो, किसी और भाषा में बोल दो
- 48:13पंजाबी, हिंदी, उर्दू किसी में बोल दो 3000 भाषाएं हैं, कम से कम
- 48:21कहता हूँ। और अगर कोई मूर्ख यह बात कहे कि
- 48:27रोज़ गुलाब नहीं होता तो वह पागल ही होगा।
- 48:37बस यही काम तुम सारे दिन करते हो। और जो कहता है ईश्वर अदला तेरे
- 48:47नाम तुम उसका मजाक उड़ाते हो, जो कहता है रोज़ गुलाब है तुम उसका
- 48:56मजाक उड़ाते हो जब के रोज़ गुलाब है।
- 49:02भाषाओं का फर्क चाइनीज, फ्रांसीसी, जर्मनी, जापानीज़,
- 49:13इंग्लिश, पंजाबी में कुछ और बोलेंगे, लेकिन उसका मतलब गुलाब
- 49:21ही होगा। तुम नामों के ऊपर झगड़े करते हो,
- 49:31नामों के ऊपर गर्दनी कटवा लेते हो और काट देते हो एक मस्जिद के नीचे
- 49:40मंदर छुपा है ठीक छुपा है। ये वो लोग कहेंगे जिन्होंने अपने
- 49:50मन के अंदर जाके उस मंदिर को नहीं पाया।
- 49:55मस्जिदों के नीचे उस मंत्र को ढूँढोगे तुम।
- 50:00है तुम्हारे भीतर सब तेरे अंदर वसना।
- 50:10साहब तेरे अंदर बस दा तेनु नजर ना आवे।
- 50:1710 की ता जावे। साहब तो तेरे भीतर है तेरा सा हब
- 50:41है तूज माहें। तेरा सा हब।
- 50:49है तुझे माहि बाहर। नैना क्यों खोले बाहर नैना क्यों
- 51:05खोले? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले मन
- 51:14मस्त हुआ फिर क्यों बोले ढूंढ़ते रहो के नीचे मंदिर और मंदिरों के
- 51:24नीचे मशहूर। यही काम रहता है तुम्हें मूर्खों
- 51:36ने आदमियों को मूर्ख बना दिया मूर्खों ने।
- 51:45आदमियों को मूर्ख बनाती है, हिसाब तुम लगाते रहना बच्चा पैदा करते
- 51:54हो, उसकी कोई रजामंदी नहीं होती। बच्चा पैदा करने का अधिकार उसे
- 52:01होना चाहिए जिससे यह डगे। कि जीवन दुख नहीं, जीवन सुख है और
- 52:07महा सुख है और वह जानता भी हो। किसी शास्त्र में लिखा लिखाए पढ़
- 52:17के मैं बोलता हूँ और ऐसा व्यक्ति कौन होगा जिसने उस महा शख्स तक
- 52:23पहुँच बना ली? महा सुख तक सीढ़ी लगा ली उसने हर
- 52:32फल जाता है जब चाहे आँख में चले जब ज़रा गर्दन झोंकाई फेक ली दिल
- 52:37के आईने में थी तस्वीरें यार। जिसने ऐसा कुछ जान लिया वह बच्चे
- 52:51पैदा करने का अधिकारी हो गया। जब बच्चे ने प्रश्न पूछा है कि
- 53:11थोड़ी देर पहले मेरी शादी हुई, किसी दूसरे लड़के से बात तो
- 53:17संसारी का पूछ ही नहीं चाहिए। नहीं नहीं, यही पूछनी चाहिए।
- 53:22बिल्कुल सही सवाल किया था। जीवन से संबंधित प्रश्न पूछा करो
- 53:28जीवन से संबंधित प्रश्न मत पूछा करो यह चट्टान किसने बनाई?
- 53:33यह सूरज किसने बनाया नहीं, मैंने तो नहीं बनाया मुझको तो क्षमा
- 53:40करो। मैं जानता हूँ तुम्हारे पांव में
- 53:4511 इंच का बूट है इसलिए मैं तो हाथ बांध देता हूँ, मैंने नहीं
- 53:51बनाया भाई क्योंकि फिर तुम कहोगे इतना इतना दुखद नहीं संसार तुमने
- 54:00बनाया तो फिर आओ। तुमसे तो निपटे हैं थोड़ा सा मैं
- 54:07गोशाला मंदिर जाया करता था। वह एक नहर के किनारे एक किसान
- 54:15मुझे रोज़ मिलता है। उसके चेहरे पर शेकन की लकीरें
- 54:24दुखी रहता है। हर वक्त बेचारा मैं उससे पूछता
- 54:28तेरे दुख का कारण क्या है? तुम कभी मुझे हँसते हुए नहीं दिखा
- 54:37क्या? कारण?
- 54:40कित्ता पंडित जी, क्या बताऊँ मैं अगर मुझे कभी कहीं परमात्मा मिल
- 54:45गया ना तो मैं उसको घसा घसा के इतना सा कर दूंगा।
- 54:50मैंने कहा फिर तो वो नहीं मिलेगा भाई तुझे?
- 54:56अगर तुम घसा घसा के उसको इतना कर दोगे, तो वह क्यों मिलेगा?
- 55:03मेरा भाई अक्सर मुझे कहा करता था परमात्मा अगर कहीं जहाँ फिरता भी
- 55:07होगा ना तो चीनी की बूरी को लपेटे फिरता होगा।
- 55:15या कोई लंगोट वंगोट सड़ा गलासा वह बाँधे भरता होगा तुम्हारी अपनी
- 55:22सोच है समझ है, तुम कुछ भी सोच सकते हो।
- 55:29उसने बड़े सूक्ष्म संयंत्र पैदा कर दिया।
- 55:33तुम्हें अच्छा नहीं लगता। तो एक पिछला दरवाजा है वहाँ से
- 55:38निकल जाओ कौन रोकता है किसी ने रोका?
- 55:47बाबा 309 लग जाएगी लग जाएगी। तो बस फिर आगे तो मैं तुम्हें कुछ
- 55:54नहीं बताऊँगा। मैंने सुनी है एक बात किसी को
- 56:04आत्महत्या के केस में ऐफ़ आई आर लॉज हो गए थे।
- 56:10उसको मरने नहीं दिया गया। इसलिए मैं मजाक किया करता हूँ कि
- 56:16हिंदुस्तान का संविधान ब्रह्मज्ञानियों ने बनाया है।
- 56:21मूर्खों ने बनाया है आत्महत्या का यह जो कानून बनाया मूढ़ों ने
- 56:33बनाया। मरते हुए पड़ गए धारा 309 चलो
- 56:41पकड़ा गया जो भी दंड हुआ हुआ भौंक के आ गया सुना है मैंने नो कतल कर
- 56:51दिया उसे। अच्छे रहे, रोके जब वह जीना ही
- 56:58नहीं चाहता, खुद भी मरना चाहता है, लोगों को भी मारना चाहता है
- 57:05तो उसे मरने दो, मरने की इजाजत होनी चाहिए भाई।
- 57:10बेहद दुख में है। या तो उसका दुख दूर करो या फिर
- 57:17उसे मरने दो जाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर या वो जगह बता
- 57:25जहाँ खुदा कर हो। जीने के संसाधन तुम दे नहीं सकते
- 57:35और मरता हुआ पकड़ा जाए धारा 309 फिर क्या करोगे तुम वो जो अगर नौ
- 57:40कतल कर देगा 12 कतल कर देगा 50 कर देगा तुम क्या करोगे कुछ कर
- 57:46पाओगे, वह तो मरा वह तो मर गया पहले।
- 57:55इस धारा को हटा लेना चाहिए। मेरे दृश्य में यह धारा कोई
- 58:06समझदारों ने नहीं बनाई। कोई मूर्ख बीच में आ गया होगा।
- 58:15सभी की स्वीकृति से सभी संविधान नहीं बना।
- 58:21पूर्ण स्वीकृति नहीं थी। सारे संविधान पे कुछ कुछ बातें
- 58:24हैं जहाँ कुछ समझदार लोग ऐतराज करने लगे।
- 58:31यह ठीक नहीं ज़िन्दगी के विपरीत बैठती है बात।
- 58:46हमने जीवन दिया उससे पूछने वह पराधीन तुमने सबसे पहले बच्चे को
- 58:56पराधीन अवस्था में जन्म दिया? और तुम कहते हो तुम्हारे महापुरुष
- 59:04कहते हैं जीवन दुख है, पर जब जीवन दुख है तो तुम जीवन देते क्यों
- 59:12हो? मेरी बात का जवाब दो या वो जगह
- 59:19बता जहाँ खुदा का घर न हो। शाहिद शराब पीने दे, मस्जिद में
- 59:27बैठकर तुमने एक स्वतंत्र चेतना को जन्म दिया, लेकिन बेड़िया डालनी
- 59:42जन्म ते ही। और बेड़िया कितनी थी?
- 59:46असंख मूर्ख अंदखोर असंख चोर हरामखोर ये बाबा कहते हैं, असंख
- 59:55लोग हैं जो धारणाओं को चिपका देते हैं, तुम्हारे सिर पर और धर्म की
- 1:00:02धारणा हो। और रूढ़ि शादियों के धर न हो,
- 1:00:05बहुत से लोग तो घर से बाहर निकलते हैं, दायां पांव पहले रखते हैं।
- 1:00:12स्त्रियाँ बाएं पैर पहले रखते हैं।
- 1:00:16जब मुड़ताएं हैं और क्या काहे पागलपन खिला रहे हो?
- 1:00:27अरे ज़िन्दगी जियो, मौज से जियो और कैसे जी सकोगे मौज में उस
- 1:00:35स्थान पे पहुँच जाओ जहाँ मौज ही मौज है तुमने अभी तक का बोझ तल
- 1:00:41देखा नहीं। तो तुम ऐसी ही बातें उठाओ, उस तल
- 1:00:49पे पहुँच जाओ जहाँ मोज ही मोज है तो जीने का ढंग तुम सीखाये वहाँ
- 1:00:54से मिलता है, जीने का ढंग न माँ बाप सीखा सकता है, न टीचर सीखा
- 1:01:00सकता है, न समाज सीखा सकता है। न नेतागण सीखा सकते हैं, कोई नहीं
- 1:01:05सीखा सकता, वो तत्व सीखा सकता है तुम्हें जीने का ढंग और यहाँ ये
- 1:01:11किताब में लिखी जाती हैं। सुखी जीवन कैसे जिएं, बस पापी पेट
- 1:01:18का मसला है। पैसा इकट्ठा करना है।
- 1:01:26कॉम्पिटिशन का ज़माना है, कॉम्पिटिशन करते क्यों हो यह पता
- 1:01:31नहीं क्यों आई ए एस बनना चाहते हो यह पता नहीं।
- 1:01:37असल में तुम्हें पता ही नहीं। क्योंकि तुम्हें तुम्हारी आज्ञा
- 1:01:42के बिना तुम्हारी इच्छा के बिना जीवन दे दिया कर बड़ी सुंदर गाथा
- 1:01:51है सत्य है नहीं सत्य है इस पर बहस मत कर।
- 1:01:59कृष्ण जन्मे, कारागृह में जन्मे, कौन है जो कारागृह में नहीं?
- 1:02:06जन्मता लाखों, लाखों बेड़िया तुम्हारे सिर पे होती हैं, जब
- 1:02:17तुम्हें जन्म मिलता है, सभी कारागृह में जन्म लेते हैं।
- 1:02:29मेरी घरवाली किसी और लड़के से बात करती है तुम्हारी संपत्ति ना तुम
- 1:02:39उसकी संपत्ति हो ना वो तुम्हारी संपत्ति है, अगर वो किसी और से
- 1:02:44बात करती है तो तुम किसी और से बात कर लो।
- 1:02:50तू नहीं और सही और नहीं और सही तू अगर है हरजाई तो अपना भी यही दौर
- 1:02:56सही लोग शादी करा कर भाग जाते हैं छोड़कर तो इस तरह कहती अब हम क्या
- 1:03:05करें? अगर तुम तुम और कर लो क्या फर्क
- 1:03:08पड़ता है कौन रोकता है जब वो भाग गया शादी करा के बिना बताये तो
- 1:03:18तुम भी दूसरी शादी कर लो क्या गुनाह है?
- 1:03:22जीवन तो गुजारना है। अगर वासना नहीं है तो फिर ठीक है,
- 1:03:30अगर वासना है तो तुम भी कोई और करो वो भाग गया भाग जाने दो, तुम
- 1:03:41भाग जाओ। तुम भी तो वही कृत्य कर सकते हो
- 1:03:46न? देखिये ये कोई गाय भैस तो है न वो
- 1:03:56सात फेरों वाले वचन गए न कोई निभाता है, न निभाते हैं।
- 1:04:01तुम्हारे तो वचन ही बड़े हास्यास्पद हैं।
- 1:04:04गाय बेचूंगा भैस बेचूंगा, तुमसे पूछ के बेचूंगा हमारी पोलू राम जी
- 1:04:10ने दुकान कर ली कयानी की दुकान कर ली शादी हो चुकी थी वचन दे दिया
- 1:04:17था घरवाली को जो कुछ करूँगा तुमसे पूछ के कर।
- 1:04:21कोई सौदा करूँगा खरीदूंगा। बेचूंगा तुमसे पूछ के बेचूंगा
- 1:04:24ग्राहक आ गया पांच किलो चीनी दे रहे भाई कहता ठहरोगे बैठ जाओ, घर
- 1:04:33तो आधा घंटा वापस नहीं आया, घर वाली से पूछा भाग्यवान?
- 1:04:40पांच किलो चीनी मांगता दे दूँ, बेच दूँ तो बेच दो, मुझसे क्यों
- 1:04:47पूछने आओ तो वचन नहीं दिया था तुम्हें ये साल तो वचन में और
- 1:04:52क्या आता है, यही तो पागल बना है। अगर भाई नहीं निबते तो यह बच्चन
- 1:04:59किस पागल ने बनाई है? यही कुछ पाओगे, तुम देख लेंगे और
- 1:05:06तुम मज़े से वचन दे देते हो। पहले पड़ाव पर विवाह एकजुट है।
- 1:05:13यह प्रथम पड़ाव है। खें तो सात लकीरें मिटा दो।
- 1:05:23मैं अड़ गया। मैंने कहा मैं नहीं वचन वचन
- 1:05:26मानता, मैं तो अपनी मर्जी से करूँगा।
- 1:05:30आगे एक मोटू ब्राह्मण कुदरती यहाँ गिद्दड़बाह में।
- 1:05:34दुर्गा मंदिर में पुजारी रह के क्या?
- 1:05:36मैं देख तू मेरे को जानते हैं ना हाँ जानता हूँ, मैं कोई वचन वचन
- 1:05:40देने वाला नहीं हूँ। मैं इंडिपेंडेंट व्यक्ति हूँ,
- 1:05:46अपनी इच्छा से बिल्कुल शुभ करूँगा एनलाइटन पर्सन।
- 1:05:53जो चाहूंगा वो करूँ वचन वचन मत लो मेरे से उसने कोई वचन नहीं लिया
- 1:06:01समझ क्या वो उसने कोई आटे की नकीरें नहीं खेंची उसे पता है या
- 1:06:08उठकर चला जाएगा यहाँ से और मेरी दाढ़ी मर जाएगी।
- 1:06:16कैसा वचन भाई जो निभ न सके वचन क्यों देना एक बनिया का पुत्तर से
- 1:06:27बेटा? नए नए व्यापार में आए हो, आज से
- 1:06:31व्यापार में मैं तुम्हें सौंपता हूँ, ये लो चाबी ले लो।
- 1:06:41बनियों की बहुत बड़ी बढ़िया प्रथा है।
- 1:06:45तुम उनसे कुछ सीख नहीं सके जो बच्चा बिगड़ जाए।
- 1:06:49उसे लॉकर के चाबे दे दो अल्लाह माई सांभ गुंजिया तियाँ कर चलियाँ
- 1:06:56सरदारी ले बे लॉकर के चाबे अब घटेगा तो तेरा बढ़ेगा तो तेरा।
- 1:07:07देखो बेटा कमाता है कि नहीं कमाता तुम पैसे को हाथ मत करो, ना तुम
- 1:07:14जैन मुनी बन जाना लोकर को खोलेगा ना जब उसके हाथ घपेंगे हाय ये सो
- 1:07:28मेरे घटे। तो वणिकों को व्यापार का ढंग पता
- 1:07:36था, कहता बेटे, तेरे को सीखा दूँ, सीखा दूँ तो ऐसा कर दूँ, जो बारे
- 1:07:46के ऊपर खड़ा था पहली मंजल पे तू यहाँ से नीचे छलांग लगा दे।
- 1:07:52आज्ञाकारी था। कोई बेचारा श्रवण कुमार होगा और
- 1:07:56माँ बाप तो ढूंढ़ते हैं आज कल कि श्रवण कुमार हो कोई और हम खुद भी
- 1:08:02थर जाए और हमें भी तार दे समझ लेना, सुनने वाले समझ लेना मैं
- 1:08:06क्या बोल रहा हूँ, खुद भी थर जाए, हमें भी तार दे।
- 1:08:13ऐसा कोई मिल जाए उसने छलांग लगा दी।
- 1:08:21हड पर टूट गए परस्तर परस्तर चिढ़ाना बोला, चलो औरतों के पास
- 1:08:35ले गए। थोड़ा सा दर्द कम हुआ तो बेटे ने
- 1:08:40पूछा बापू तुने ये क्या किया? ये पहला पार्ट था पुत्र क्या
- 1:08:50व्यापार में सगे बाप के ऊपर यकीन मत करना?
- 1:08:57अगर कोई कहे न कि मुझे सुबह जेल हो जाएगी तेरे परम मित्र को और
- 1:09:02मुझे तो लाख रुपए दे दे कहीं से दे दे खुद बेक जा तू यकीन मत कर न
- 1:09:07ये उलझा लेगा तुझे तुझे घसीट लेगा फिर याद रखना बेईमान।
- 1:09:16भाई पानी का ज़माना है हे भाई मानी तेरा ही आसरा, जय जयकार हो
- 1:09:26रही है चारों तरफ हमारे तो साहब बोलते हैं कि 17,000 करोड़ का
- 1:09:35घपला कर दिया और अगले दिन? वित्त मंत्री लॉकर उसे पकड़ा लेते
- 1:09:44हैं, ये क्या हुआ? समझो मेरे तो नहीं आई तुम्हें
- 1:09:51समझाई हो तो मुझे जरूर बता देना ये गंगा पार करके।
- 1:09:58मुक्त कैसे हो गया? और जब नहीं गंगा पार करते हो चलो
- 1:10:04जरूर शब्दों के इशारों को समझ लेना हम बच्चे की इच्छा से बच्चा
- 1:10:20पैदा नहीं करते। और बच्चा जनमत है।
- 1:10:26उसके बाद लाखों तरह की स्वतंत्रताएं उससे छीन लेती हैं।
- 1:10:32इस धर्म को मानना पड़ेगा इस ग्रंथ को मानना पड़ेगा यहाँ मस्तक नुआना
- 1:10:37पड़ेगा या जंड के आगे सिर करना पड़ेगा।
- 1:10:40ये पीर के आगे ये लाला वाले के आगे ये फला वाले के आगे ये मलेर
- 1:10:45कोटला के आगे नाम बोल रहा हूँ सरे आम और बहुत बार बोल रहा हूँ अब ये
- 1:10:56कहता है कि मैं मेरी घरवाली किसी और लड़के से प्यार करती।
- 1:11:02बात करते हैं। मुझे शक है तंत्र बेचारा फंस गया।
- 1:11:07अब ढंग से सीधा सीधा पूछ भी नहीं सकता।
- 1:11:11इसे पता है चंद्रिका कहीं चंटिका न बन जाए पता लगता है कोई?
- 1:11:20तो पूछने के भी ढंग तलाश लेता है, व्यक्ति लगता है, तंत्र बोलता है,
- 1:11:29लेकिन बात कुछ और लगती है, लगता है कोई तंत्र वगैरह न कर दिया हो
- 1:11:37क्योंकि डरता भी है। ये चंद्रिका कहीं चंडीगढ़ न बन
- 1:11:42जाए तो खामी कहाँ है? क्या हुआ?
- 1:11:57इस छोटी सी जिंदगानी को किसने ग्रहण लगा दिया?
- 1:12:06कौन खा गया हमारा सुख आनंद किसने हमारा चैन और करार छीन लिया?
- 1:12:19किसने तुम्हारा अन्न छीन लिया, किसने तुम्हारा जान छीन लिया,
- 1:12:25किसने तुम्हारी बुद्धि ल्याकृति छीन ली, किसने तुम्हारी संस्कृति
- 1:12:32छीन ली? तुम लूटे ही लूटे रहो।
- 1:12:38कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने हमको लूटा है सभी ने।
- 1:12:56हमको लूटा है बचपन से लेके जो मान्यताएँ तुम्हारे सर पे थूपी
- 1:13:04जाती हैं और देखिये 12 वर्ष तक बच्चा बिलकुल नर्द सोता।
- 1:13:12और 12 वर्ष तक तुम कितनी गंदगी थोप देते हो।
- 1:13:16उसके जहन में वह ज़िन्दगी भर कूड़ा साफ भी करता रहे।
- 1:13:26साफ नहीं हो सकेगा क्योंकि तुमने उसके निर्दोष कोरे कागज पर।
- 1:13:33ये मान्यताएँ लिख दी पक्की पक्की। मैं मटा नहीं सकता, चाहे भी तो
- 1:13:39नहीं मटा सकता। मुझे लोग कह देते हैं ये इतने लोग
- 1:13:46गलतियों में पड़े हैं बाबा सुधार करो, मैंने कहा यह नहीं सुधर
- 1:13:50सकते। देखिये भाग्य कभी नहीं सुधरता,
- 1:13:55इनकी तो बात ही मत करो बस तुम सुधर जाओ इतना बहुत इसलिए मेरा तो
- 1:14:02फॉर्मूला ही है, ये किसी को मत सुधारो खुद सुधरो।
- 1:14:08क्योंकि खुद सुधारने से मिलती है जन्नत दूसरे को सुधारने में तुम
- 1:14:16जाते हो जन्नत खुद सुधरो तुम सुधरोगे तो तुम आनंद में जाओगे?
- 1:14:34हम तो अपनी मस्ती में आग लगे बस्ती में जीस दिन तुमने यह असूल
- 1:14:40अपना लिया हम तो अपनी मस्ती में दूसरों को बदलने की शिष्ट न करो,
- 1:14:47खुद मस्त होने के मार्ग पे चलोगे? मन में ये कामना न करो कि दूसरों
- 1:14:58को भी साथ ले लेता चलूँ परोपकार हो जाएगा बेचारा नहीं बेचारे तो
- 1:15:03अब तुम हो तुम खुद ही बेचारे हो भाई।
- 1:15:12तुम खुद बेचारेपन से दूर हो जाओ, निकल आओ फिर दूसरे को उतारना खुद
- 1:15:20तो थिरो खुद नहीं थिरते तुम मेरा मूल मंत्र खुद को बदलो।
- 1:15:31मैं सदा ही कहा करता हूँ, दुनिया दुखी है और सबसे पहला व्यक्ति जो
- 1:15:38सुखी होगा वो तुम होगे और अगर सभी व्यक्ति संसार में सभी व्यक्ति एक
- 1:15:46घर में शुरू कर दें। कि हमने सुखी हो न यह संकल्प ले
- 1:15:52लो, राम राम करने का संकल्प मत लो।
- 1:15:57राधे राधे करने का संकल्प मत लो, इतने करने हैं उतने नहीं करने
- 1:16:01नहीं करने, कोई बात नहीं है जो कर्म तुम भोगते रहे हो।
- 1:16:08यह तुमने कर दिए कर दिए भौग नहीं पड़ेंगे।
- 1:16:11वह कोई पागल नहीं है जो भुगता रहा है, लेकिन आगे से सुखी होने का
- 1:16:16प्रबंधन कर लो। कैसे सुखी हो पाओगे तुम सुखी
- 1:16:22होना, दुखी होना तुम्हारे हाथ में है।
- 1:16:26इट इस इन योर हैंड्स, तुम चकित मत होना, तुम गुलाम नहीं हो माँ बाप
- 1:16:34ने तुम्हें गुलाम पैदा कर दिया, कोई बात नहीं और सही माँ बाप वो
- 1:16:40हैं भाई देखो इसका कोई रोल नहीं। जन्म लेने में तुमने जन्म दिया,
- 1:16:50तुम इसको जीने योग्य सामग्री तो दे दो, यह चैन की नींद सो सके,
- 1:16:57बाकी तो यह कमा खा लेगा, कोई बात नहीं, तुम जीने की सामग्री तो दे
- 1:17:03दो। लोगों के पास सब कुछ होता है
- 1:17:06लेकिन नहीं देते क्योंकि वो कहते पहले श्रवण कुमार बनो, अब भला
- 1:17:13श्रवण कुमार कोई कैसे बन जाए और श्रवण कुमार कौन सा सुखी था?
- 1:17:23बेचारा किसी जगह के ऊपर आके श्रवण कुमार ने भी।
- 1:17:27पटक देती तुमने मुझे जन्म ही क्यों दिया इससे अच्छा तो तुम ही
- 1:17:37आँखों वाले रह लेते मुझे क्या जरूरत थी तुम्हारा बाल ढोते, फिर
- 1:17:41रहा हूँ मैं, मैं चला हूँ पिता समझदार थे शांत में।
- 1:17:48कैथ पुत्र एक बार अब इतना ढो लिया थोड़ा सा काम और करते हैं
- 1:17:55समितार्थ थोड़ा सा जहाँ से तू आया उधर ही वापस ले जा हमें।
- 1:18:07और जानते थे किसी जगह की लहरें लासानी तरंगों से युक्त होती हैं।
- 1:18:13वहाँ अच्छे से अच्छा विद्वान किस के जाता है?
- 1:18:19अंधे थे और अंधा उसमें अंतर्ज्ञान थोड़ा ज्यादा होता है।
- 1:18:27अचानक बदल गया कोई कारण है? धरती बदल गई, तरंगें बदल गई,
- 1:18:31उन्होंने खुद भी महसूस किया तो पीछे ले चल बेटा हम तुम्हें बता
- 1:18:37देंगे वह छोड़ के चले जाना, बाग जन हमें कोई शेर बगैर खा जाएगा खा
- 1:18:44जाएगा। हमारी किस्मत किस तरह बेंगी?
- 1:18:50उसने उठाई, रोते चिल्लाते वापस गया।
- 1:18:5610 किलोमीटर पीछे आसानी तरंगों से युक्त धरा आ गई।
- 1:19:03जगह होती है ऐसी। मेरे पास रोज़ आ जाती हैं।
- 1:19:07वाह वाह माटी देखना कैसे कुछ रिजेक्ट करने पड़ते हैं, कुछ
- 1:19:12सेलेक्ट करने पड़ते हैं पहना लो यहाँ ठीक ये मत बनाओ मत खरीद दो
- 1:19:18इसे। शहर का नाम तुम्हें नहीं बताऊँगा।
- 1:19:28पहले भी नहीं बताया। अगर मैंने किया लेकिन ज्यादा जिद
- 1:19:33करोगे तो मैं प्रसन्न एक व्यक्ति को बता दूंगा।
- 1:19:36बता भी रखा है कि दो। कौन सी धरती है वो जो लाशानी
- 1:19:43तरंगों से युक्त है? वहाँ के व्यक्ति आपको श्रेष्ठतम
- 1:19:47नहीं मिलेंगे को ऑपरेशन करते नहीं मिलेंगे।
- 1:19:52वो वही धरती होगी जहाँ बाबा नानक कहते हैं कि बसे रहो बसे रहो, बसे
- 1:19:56रहो, कुछ धरती होती है आसानी तरंगों से युक्त।
- 1:20:02वहाँ बाबा नानक कहेंगे, उजड़ जाओ, उजड़ जाओ, एक घर अगर यह संकल्प कर
- 1:20:09ले कि हमने सुखी होना है और सुखी होना तुम्हारे हाथ में कैसे सुखी
- 1:20:15हो? के दूसरा जो करता है।
- 1:20:20देखो कोई मूर्ख तो होता नहीं है कि कुछ ऐसा करेगा, वह तो उत्तेजना
- 1:20:27में करता है, अगर तुम्हें चिढ़ाता है मुँह चिब्बा बींगा करता है अब
- 1:20:32लक्षण संवाद होता था। हमारे ये परशुराम जी आ जाते हैं।
- 1:20:38राम जी उसके पांव में पकड़ते हैं, लक्ष्मण उसको चिढ़ाते हैं, जीभ
- 1:20:42निकाल लेते हैं, आँखें भूँव 20 पुट्ठी कर लेते हैं, तो परशुराम
- 1:20:47गुस्सा खा लेता है। अरे तू भला ये देखो क्या करता है?
- 1:20:55लक्ष्मण कहते हैं तू आंखें मूँद ले तू मेरी तरफ देखता ही तू देख
- 1:21:01राम की तरफ भैया की तरफ, वो तुझे मिन्नत कर रहा है हर्ष जोड़ रहा
- 1:21:05है पांव क्या तू मेरी तरफ देख ही मत?
- 1:21:14अगर तुम दुनिया की तरफ मत देखो, एक परिवार ये फैसला कर दे कि हमने
- 1:21:20सुखी रहना है और सुखी तुम रह सकते हो बस थोड़ा सत्याग थोड़ा सा
- 1:21:30अंकुश दो बर्तन होंगे। खड़केंगे किसी वक़्त सब आदिक है
- 1:21:42लेकिन उसको खड़काहट को संगीत की तरह लेना समझाई बर्तन खड़केंगे
- 1:21:51भिड़ेंगे, आवाज़ आएगी टकराहट के। लेकिन संगीत भी तो आवाज होती है
- 1:21:57टकराहट की। ये भी तो सात सुरों की आवाज है
- 1:22:02इसको संगीत की तरह ले लेना और भी तो कल्पनाएं तुम करते हो, गंदे
- 1:22:08पानी में स्नान कराते हो, बैक्टीरियल इनफेक्टेड।
- 1:22:17और तुम कहते हो कुंभ स्नान कराया है मुक्त हो गए कहाँ मुक्त हो गए
- 1:22:22भाई तुम तो कोई न कोई रोक बांध के लेके आए हो।
- 1:22:29एक परिवार से शुरू होगी ये बात। और एक परिवार अगर सुखी होगा तो वह
- 1:22:36दूसरे लोग देखेंगे। ये परिवार सुखी है।
- 1:22:38क्यों? सुखी एक से दूसरा दूसरे से तीसरा
- 1:22:44पूरा गांव बदलेगा? गांव से राज्य बदलेगा, राज्य से
- 1:22:49देश बदलेगा। देश से विश्व बदलेगा, ऐसे बदलेगा
- 1:22:54एक व्यक्ति को शुरू कर रहा हूँ। वो तो एक हैं और अपनी नॉन
- 1:23:03रिऐक्टिविटी से लाखों लाखों व्यक्तियों का जीवन बदल देते हैं।
- 1:23:12मर्यादा में रहो, किसी को बदलने की चेष्टा मत करो, खुद बदलो।
- 1:23:25प्रश्न लड़की किसी और से बात करती है।
- 1:23:31जब से सगाई हुई दुबली हुई जाती है, बात कुछ शाख वाली रखती है,
- 1:23:41उसको बैठाकर पूछो बताओ क्या रोग है?
- 1:23:51मैं तुम्हारा प्रेमी हूँ, तुम्हें तकलीफ क्या है?
- 1:23:56बेहिचक हो के बता दो। और ऐसा कोई प्राणी नहीं है जो
- 1:24:04प्रेम के आगे सच ना बोले। तुम डंडे से सच कहलवाते हो, इसलिए
- 1:24:10आधा अधूरा सच प्रकट होता है। आधा अधूरा प्रकट नहीं होता, लेकिन
- 1:24:16प्रेम से सारा सच प्रकट हो जाएगा। मुझे रोज़ आते हैं मैंने ये किया
- 1:24:24जिंदगी में मी टू। मैंने ज़िन्दगी में ये किया, ये
- 1:24:27किया ये किया ठीक है कोई क्या कोई बात नहीं, कोई पाप नहीं है, कुछ
- 1:24:34पाप नहीं है। ये स्वाभाविक प्रक्रियाएं हैं
- 1:24:38नेचुरल प्रोसेसेस। तुमने इसको मैं की तरह ले लिया
- 1:24:43इसलिए दिमाग पे बोझ है हल्के हो जाओ, फिकर मत करो नाचो गाओ खेलो
- 1:24:49कूदो जो जश्न मनाओ जिंदगी बड़ी प्यारी है तारों को देखकर नाचो
- 1:24:56चंद्रमा को देखकर नाचो सूरज उगे। पक्षी गायें चाहे चाहें, कोयल को
- 1:25:06गाती हुई देखकर तुम भी नाचो, तुम भी कहो, जिंदगी बड़ी सुंदर है,
- 1:25:13सुनने वाला होना चाहिए। जिंदगी संगीत से भरी पड़ी है।
- 1:25:21उस संगीत को ग्रहण करने वाला होना चाहिए।
- 1:25:25लगातार तुम्हारे भीतर संगीत बज रहा है, बस तुम सुन नहीं पा रहे
- 1:25:29हो ये काफी है तुम्हारी ज़िन्दगी को स्वर्गीय ज़िन्दगी बनाने के
- 1:25:35लिए, लेकिन तुम नारकीय हो। वाज्जेनाद अनेक असंख केते
- 1:25:43वावनहारे केते राग परिसो कैयाण केते गावनहारे।
- 1:25:50कितने राग बज रहे हैं और तुम फिर भी दुखी हो हैरानी है।
- 1:25:59हँसी आती है मुझको हरकतें इंसान पर गलतियाँ तो खुद करें और
- 1:26:05दोस्तें भगवान पर दुखी हो तुम अपनी कर्तूतों के कारण ये अनंतनाद
- 1:26:12बज रहा है इसको सुनो कितना प्यारा है।
- 1:26:16साउंड ऑफ़ साइलेंस खेतों में निकल जाओ बाहर सन्नाटे की आवाज़ ये कम
- 1:26:21सुन्दर है क्या प्रकृति का कण कण सुन्दर है क्योंकि उसमें वो बैठा
- 1:26:26है, वो प्यारा, वो प्यारा विराजमान है उसमें।
- 1:26:36तुम उसको देख नहीं पाते इसलिए दुखी हो, उससे पूछो क्या तकलीफ
- 1:26:41है, यही मुश्किल आती है। 1000 मान्यताएँ तुम्हें कहेंगे
- 1:26:49नहीं, नहीं नहीं लोग क्या कहेंगे? जीस दिन तुमने मेरा मंत्र याद कर
- 1:26:57लिया आग लगे बस्ती को हम तो अपनी मस्ती में आग लगे बस्ती में।
- 1:27:11लोगों का काम है कहना छोड़ो, बेकार की बातें कहीं बीत न जाए
- 1:27:19रहना थोड़ी सी छोटी सी ज़िन्दगी मिली है इसको जियो भरपूर मत रम
- 1:27:25जियो नाच गा के जियो। और जीते जीते नाचते गाते विदा हो
- 1:27:32जाओ कोई ज़िन्दगी जीवन सार्थक होगा, तुम्हारा पूछो उससे क्या
- 1:27:40तकलीफ है बताएंगे बिल्कुल बताएंगे, कोई तो दुख होगा।
- 1:27:49ऐसे तो खिला हुआ चेहरा रहना चाहिए, ये मायूस चेहरा क्यों?
- 1:27:55ये वेइट लॉस क्यों? कोई तकलीफ है, कुछ इसकी इच्छा के
- 1:28:01विरुद्ध हुआ है? तुम समझते नहीं ये बात उससे पूछो।
- 1:28:11एक ऋषि की छोटी सी कहानी ऐसा ही कुछ हुआ।
- 1:28:17ऋषि साझेदार थे। आज व्यक्ति मूर्ख हो गया है।
- 1:28:27अब वो मान्यताएँ थी तो लेकिन इतनी नहीं थी।
- 1:28:30आज मान्यताएँ बड़ी शगुन है। आज मान्यताएँ ही मान्यताएँ हैं।
- 1:28:34व्यक्तित्व खो गया। पूछा उसने धर्म पत्नी से क्या बात
- 1:28:40हुई उसने अपना? मन हल्का किया इस कारण से दुखी
- 1:28:49किसी अन्य व्यक्ति से प्यार करते थे।
- 1:28:53उसने हाथ पकड़ा चल देवी मैं खुद छोड़ के आता हूँ, तुम्हें उसका
- 1:29:01हाथ पकड़ा, उसके घर छोड़ा। संभालो, अपने प्रेम को संभालो,
- 1:29:13मैं उसको लेके आऊंगा जो मुझे प्रेम करती हो क्या तुम जिसे
- 1:29:20प्रेम करते हो, तुम अपना प्रेम संभालो?
- 1:29:26हम ऐसी मोहब्बत नहीं चाहते, बाजा इस महब्बत से उठा लो पानदान अपना
- 1:29:39एक कहावत है तुम भी नोट कर लो उसी स्त्री या पुरुष से शादी करो।
- 1:29:50जो तो मैं चाहता है अच्छी तरह से समझ लो निष्कर्ष बोल रहा हूँ मैं
- 1:29:57वीडियो खत्म होने को है। उस स्त्री पुरुष से शादी करो जो
- 1:30:03तुमसे प्रेम करता है। उससे मत करो, जिससे तुम प्रेम
- 1:30:11करते हो। समझाई बात जिससे तुम प्रेम करते
- 1:30:18हो, उसकी चाहत करोगे तो गड़बड़ी हो जाएगी।
- 1:30:22जो तुम्हें प्रेम करती है या करता है उसके साथ बंधन भी बड़ा प्यारा
- 1:30:29लगता है। 4050 वर्ष एक छत के नीचे गुजारने
- 1:30:36हैं इकट्ठे सुख दुख सुख भी आयेंगे, दुख भी आयेंगे संसार।
- 1:30:42वक्त बदलेगा, धूप होगी, छाम होगी, सब होगा लेकिन अगर आपस में प्रेम
- 1:30:53हो तो बड़ी फटेगी कबीर और लोई की तरह।
- 1:30:59अगर आपस में दुश्मनी हो, प्रेम ना हो तो नहीं पटेगी इसको फिर नोट कर
- 1:31:06लो उस स्त्री पुरुष से शादी करना दोनों की बात कर रहा हूँ जो
- 1:31:13तुम्हें प्रेम करता है, करती है। उससे मत करना जिससे तुम प्रेम
- 1:31:21करते हो। यह तो तानाशाही हो गई, जहाँ रोज़
- 1:31:29गड़बड़ होती है, गड़बड़ होती है तुम्हें बेसिक कारण बता दिया तुम
- 1:31:34अपनी मान्यताओं का सिरे चढ़ाना चाहते हो?
- 1:31:37इसलिए जीवन को नरक बना लेते हो। वो छोटी सी बात है, घर में सुख हो
- 1:31:45तो इससे बड़ा आनंद कहाँ होता है? हम उस आनंद के पास जाते हैं, खुद
- 1:31:51ही को खो के जाते हैं। कितना बड़ा बलिदान?
- 1:31:55तुम इतना सा बलिदान नहीं कर सकते। इतना बड़ा बलिदान करके हम उस आनंद
- 1:32:01के पास जाते हैं, खुद को बलिदान करते हैं आप तुम खुद को बलिदान
- 1:32:09नहीं कर सकते अपनी खुशी को, अपनी चाहत को, अपनी मान्यताओं को।
- 1:32:16परे रख दो तुम्हें जो प्रेम करता है उसके साथ बंधन में बंधो फिर
- 1:32:27कोई बंधन बंधन जैसा नहीं होगा, वो बंधन भी मुक्ति जैसा लगेगा।
- 1:32:32बड़े प्यार से जिंदगानी कट जाएगी। हंसते खेलते नाचते, खाते कूदते
- 1:32:40मेरी इन बातों के पीछे रासायनिक कारण क्या है इसे समझ लो जिसे तुम
- 1:32:52प्रेम कहते हो, मुझे उससे प्रेम है।
- 1:32:55तुम्हें पता नहीं होता वह नेगेटिव पॉज़िटिव का अट्रैक्शन है।
- 1:33:03हम उसकी चाल से ढाल से बोलने से नएन नक्श से प्रभावित हो गए।
- 1:33:14थिस इस अट्रैक्शन और जो मैं कहता हूँ जो तुम्हें प्रेम करता है या
- 1:33:24करती है तुम्हें उसके पास बैठना अच्छा लगेगा।
- 1:33:32क्यों? क्योंकि उसके भीतर से आसानी
- 1:33:36तिरंगें करती है और जीस व्यक्ति के भीतर से आसानी तिरंगें निकलती
- 1:33:42है वह सदा निकलती ही रहती है। एक बार शुरू हुई तो फिर ये बंद
- 1:33:48नहीं होती। आसानी तरंगे जैसे कबीर और लोई,
- 1:33:59लोई बहुत जगह गई है। कबीर के आश्रम में आकर ठहर गई
- 1:34:05वहाँ तुम ठहर जाते हो आसानी तिरंगों के पास आकर तुम ठहर जाते
- 1:34:10हो, बैठ जाते हो। दौड़ खत्म हो जाती है।
- 1:34:15दौड़ गई संशय मेटा वस्तु ठोर की ठोर जहाँ मेरे पास लोग आते हैं,
- 1:34:23बाबा जाने को दिल नहीं करता, मैं उनकी समस्या को समझता हूँ, लेकिन
- 1:34:29क्या करूँ? मेरे पास जगह नहीं है।
- 1:34:34कहाँ बैठा हूँ ये प्रॉब्लम तो मैं उनसे कहता हूँ देखो 1015 मिनट 20
- 1:34:47मिनट बैठ लिए, सैनिक तो प्राप्त हो गया, अध्यक्ष ले ली।
- 1:34:54अब तुम घर जाके इसका अभ्यास करो, इन तरंगों को याद रखना तुम जिसे
- 1:35:04प्रेम कहते हो वह पेंडुलम की भाँति है।
- 1:35:08यह कभी इधर जाता है, कभी इधर जाता है, कभी इधर जाता है, तुम लटकते
- 1:35:13ही रहते हो। इसीलिए यह लड़ाई झगड़े होते रहते
- 1:35:17हैं और जिसे मैं आसानी तरंगें कहता हूँ वह लटकना नहीं है।
- 1:35:25वह तो उस पेंडुलम का गिर जाना है नीचे अपने अस्तित्व में वहाँ से
- 1:35:31आती हैं। आसानी रंगने समझने में थोड़ी
- 1:35:33मुश्किल होगी लेकिन समझ जाओगे कई बार सुनना इसको जो तुम से प्रेम
- 1:35:41करता है या करती है। उसके भीतर से आसानी तरंगें आती
- 1:35:46हैं। थोड़ा सा बैठना, उसके करीब बैठना,
- 1:35:54उसकी तरंगों को पीना समझाया जाएगी तुम्हें ज़िन्दगी जीने के ढंक।
- 1:36:04मैं तुम्हें थोड़ी सी बात बता दूँ, अपने ही पुत्र के ये मेरा
- 1:36:08पुत्र कहने लगा बाबा आपसे बात करना है, बताओ मैं किसी लड़की से
- 1:36:15प्रेम करता हूँ, शादी करना चाहता हूँ, मैंने कहा तू मुझे दो बात
- 1:36:23बता दे? फिर कर लेना प्रेम है भी हाँ है
- 1:36:32दूसरी बात बेटा हम हैं गरीब व्यक्ति कहीं ऐसा तो नहीं वो
- 1:36:38लड़की शाम को कहे पर्स उठाके चलो शॉपिंग।
- 1:36:43ये हमारे समर्थित नहीं हैं। कहते हैं मैंने देख लिया उसके पास
- 1:36:51तीन सूट हैं, दो जोड़ी बोट हैं और 2 साल से मैं लगातार वही सूट और
- 1:37:02वही बोट देख रहा हूँ। मैंने कहा अगर दोनों बातें हैं
- 1:37:08तुम्हें प्रेम है, खिचाब है, एक ही बेंच में बैठते थे क्रिप्टो
- 1:37:13मात्रंगों का पता चल जाता है और ज्यादा भटकन नहीं है।
- 1:37:22ज्यादा भटकने वाले लोग शाम को शॉपिंग पे निकल जाते हैं।
- 1:37:26दिखावा। दिखावे बाज तो नहीं है।
- 1:37:30नहीं बस तू ले आ मेरी तरफ से हरी झंडी उधर से पूछ ले क्या होता है
- 1:37:40प्रेम आसानी तरंगों को पी जाना सारी उम्र ने भेजी।
- 1:37:46और प्रेम से तो फिर अदालतों के दरवाजे खटखटाने पड़ेंगे, क्योंकि
- 1:37:51प्रेम धोखा है। प्रेम जिसे तुम कहते हो वह
- 1:37:56नेगेटिव पॉज़िटिव का खिंचाव है। अट्रैक्शन बिटवीन दी टू ऑपोजिट और
- 1:38:02कुछ नहीं। तुम उसको कैसे ही निभा लो, लिव इन
- 1:38:06में रह लो, ये 100 बकवास चली। आजकल इन बकवासों में न पड़ो।
- 1:38:13लोई की तरह समर्पित होने का स्थान ढूंढो।
- 1:38:17वक्त लग सकता है। 245 साल लग सकते हैं।
- 1:38:22और फिर जहाँ समर्पण हो जाए समर्पित हो जाओ, यह है तरीका आज
- 1:38:30प्रथम बार बोला हूँ खोल के बोला हूँ लंबी वीडियो है तुम अपने पसंद
- 1:38:37की। पत्नी या पति मत लेके आना किसी
- 1:38:47दूसरे की पसंद को अगर तुम हो तो बिल्कुल ले आना बिना पूछे ले आना
- 1:38:55और उसके पास बैठ के तुम्हें आनंद आता है।
- 1:38:59शांति मिलती है, उत्तेजना नहीं, शांति मिलती है।
- 1:39:03ये दो चीजें हैं स्टिमुलेशन एंड पीस ठहराव आता है उसको ले आना।
- 1:39:13बहुत से बच्चों के सवाल थे, बड़े अलग अलग थे।
- 1:39:18सब इसमें समाहित कर लिया। मैंने सब जवाब दे दिए इसलिए थोड़ी
- 1:39:21सी वीडियो लंबे हो गए। सारी सुनना सभी के जवाब आ जाएंगे
- 1:39:28ये जो आजकल तुम्हारे प्रेमानंद महाराज जी कह रहे हैं ना माँ बाप
- 1:39:32की इच्छा के बगैर माँ बाप जहाँ बांधे वहाँ बांध जाना।
- 1:39:37तुम कोई गाय, भैस, बकरी नहीं हो, जीवंत चेतना हो, तुम चारगी और
- 1:39:44विद्योत्मा को याद रखना तुमने उसे चेतन्य पे जाना है ये तो फसली
- 1:39:53बातें हैं। कुछ दिन के खिंचाव हैं।
- 1:39:56खत्म हो जाएंगे। लेकिन बाद में इसीलिए तो झगड़े
- 1:40:01होते हैं, खिंचाव खत्म हो जाता है, खिंचाव न खत्म हो क्योंकि वो
- 1:40:07आसानी तिरंगे खत्म होती नहीं इसलिए मैं बुनियादी बातें तो मैं
- 1:40:13कहता हूँ। मैं तुम्हें कुछ नहीं कहता कि ऐसे
- 1:40:16माँ बाप जो कहें ना ना ना बिल्कुल नहीं ऐसी गलती तो करना ही मत
- 1:40:21देखिए माँ बाप से बाद में परमिशन लेना जरूरी है क्योंकि उनका मान
- 1:40:25सम्मान भी होना चाहिए। पहली पसंद तुम्हारी।
- 1:40:31जिसके साथ हमने 4050 60 साल एक छत के नीचे गुजारने हैं।
- 1:40:38दूसरी परमिशन सिर्फ परमिशन लेनी है उनके चरण स्पर्श करके क्या
- 1:40:44हमें परमिट करो? हम दोनों शादी के बंधन में बंधना
- 1:40:49चाहते हैं वो फिर बंधन नहीं होगा बड़ा मज़ा आएगा जिंदगी जीने का,
- 1:40:55ऐसे ही गुजारी हैं जिंदगी हमने और बहुत से ही जन्मों में गुजारी हैं
- 1:41:00जिंदगी यह फॉर्मूला। तुम्हें जो चाहे उससे शादी करना
- 1:41:11है। तुम जीसको चाहे उससे शादी मत
- 1:41:14करना, अगर दोनों एक दूसरे को चाहते हो फिर शादी करना, फिर
- 1:41:19पूछना माँ बाप से भेड़, बकरी की तरह बांध मचाना स्वतंत्र चेत न हो
- 1:41:25तुम। कौन कहता है कि चाहत पे सभी का हक
- 1:41:36है? कौन कहता है कि चाहत पे?
- 1:41:44सभी का हक है तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक है, तू ही कह दे।
- 1:42:03की तेरा हाथ किसे पेश करो ये मुरादों की हसीरात किसे पेश?
- 1:42:21करो किसे पेश करो रंग और नूर की बारात किसे पेश करो?
- 1:42:46मुरादों की हँसी रात किसपे शुक्र। किसे पे शुक्र कौन कहता है कि
- 1:43:03चाहत पे सभी का हक है तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक है तू
- 1:43:12ही कह दे कि तेरा हाथ किसे पेश करूँ?
- 1:43:17ये मुरादों की हँसी रात कैसे फिस्का रंग और नूर की बारात किसे
- 1:43:24फिस्का मैंने जज़बात निभाए हैं। असुलों।
- 1:43:37की जगह आपने अरमान पिरोलाया हूँ, फूलों की जगह मेरे चेहरे के।
- 1:43:53ये सौगात किसे देश कर रहा हूँ? ये हँसी ये उम्मीदों की हसीरात
- 1:44:10किसे पे? शुक्रों किसे पेश करो रंग और नूर
- 1:44:24की बारात किसे पेश करो? ये मुरादों की हसीरात किसे पे शक?
- 1:44:49किस्से पेश करू, किस्से पेश करू। किसे पेश करो, किसे पेश करो रंग
- 1:45:17और नूर की बारात। किसे पेश करो ये मुरादों की हँसी
- 1:45:32रात किसे पेश करो। तू है मेरा प्रेमदेवता।
- 1:46:03इन चरन के दा से मन की प्यास बुझाने।
- 1:46:21आए मन की प्यास बुझाने आए अंतर्घट तक प्यासी हो।
- 1:46:41तू है मेरा प्रेम देवता, तू है मेरा प्रेम देवता इन चरणन किदा
- 1:46:57सिंह में। मन की प्यास भुजाने आए मन की
- 1:47:07प्यास भुजाने आई अंतर्घट तक प्यासी हूँ।
- 1:47:19तू है मेरा प्रेम देवता डम डम डम डम डम रू भागे।
- 1:47:37आ डम डम डम डम मैं नाचूँ शंकर के आगे हो के रहेंगी।
- 1:47:57जी तुसी की हो के रहेंगी जी तुसी की जा के कला से शंकर जागे मन की
- 1:48:14प्यास। भुजाने आई मन की प्यास भुजाने आई
- 1:48:26अंतर्घट तक प्यासी हूँ तो है मेरा।
- 1:48:35प्रेमदेवता तू है मेरा प्रेमदेवता मैं गौरी तू कम तू हमरा मैं।
- 1:48:52तू मेरा किनारा मेंगुरी तू कन तू हमार में न दिया तू मेरा किनारा।
- 1:49:11अंग लगाओ प्यास बुजाओ अंग लगाओ प्यास बुजाओ गंगा हो कर प्यासी
- 1:49:30हूँ। मन की प्यास बुझाने आई मन की
- 1:49:39प्यास बुझाने आई। अंतर्घट तक प्यार सिंह मैं तू है
- 1:49:52मेरा प्रेम देवता तू है मेरा प्रेम देवता।
- 1:50:07धन्यवाद।