Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Nov 25 - नवम द्वार कैसे जागृत होगा? मोह, अहंकार से मुक्ति और समर्पण का रहस्य! नवम द्वार का रहस्य! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:01बाबा जी जन्म स्पर्श जहाँ अहंकार झुकता नहीं, वहाँ सूर्य भी नहीं
- 0:12झुकता बल्कि तपता है। जहाँ प्रेम झुकता है, वहाँ सूर्य
- 0:23भी झुक जाता है, सूर्य भी शांति प्रदान करता है।
- 0:33इस शब्द का अर्थ क्या है? ये शब्द नामदेव जी महाराज के
- 0:53अद्भुत संत हुए। मराठी मराठी प्रतिभा अपने आप में
- 1:02अलौकिक हैं। इसमें बड़े संत प्रवृति के लोग
- 1:11हैं। संत ज्ञानेश्वर।
- 1:17संत एकनाथ, संत नामदेव और नामदेव की वाणी गुरूगंज साहब में संकल्प।
- 1:39आइए हम थोड़ी सी कहानी में चले गुरु नामदेव बैठे थे ध्यानमग्न
- 1:50से। आनंद में थे, लोगों ने कहा तू
- 2:06सूर्य की ओर पीठ करके बैठा है नामदेव।
- 2:14तू सूर्य की ओर पीठ करके बैठा है। नामदेव ने कहा मैं परमात्मा की
- 2:25तरफ मुख करके बैठा हूँ, सूर्य की तरफ पीठ करके नहीं।
- 2:36परमात्मा की तरफ मुख करके बैठा हूँ तो लोगों ने कहा फिर तेरे
- 2:48परमात्मा से कह दे के सूरज तेरे मुख के सामने आ जाए।
- 3:05नामदेव, जय विट्ठल, जय विट्ठल कहा नामदेव ने और सूर्य अपनी दिशा बदल
- 3:21के नामदेव के सामने आ गया। सूर्य ने नमन किया।
- 3:36नामदेव ने भी नमन किया। सूर्य और नमन करता गया।
- 3:45नामदेव ने भी नमन किया। गहरी बात है समझना।
- 3:49संग संग की चल रहा मेरे नाम देव नमन करता गया, लेकिन पहले सूर्य
- 3:59ने नमन किया भक्त भगवान का दास। बाद में होता है।
- 4:11पहले भगवान भक्त का दास हो जाता है, परमात्मा कृपा करता है।
- 4:20पहले मानुष पर परमात्मा पहले कृपा करता है।
- 4:29नदरीमुख द्वार जब तक वो आएगा नहीं जब तक वो दिखेगा नहीं, जब तक उसका
- 4:42दर्शन नहीं होगा तब तक तुम नमस्कार भी किसको करोगे?
- 4:52नाम जपने वालों को स्मरण करने वालों को सिमरण करने वालों को मैं
- 4:57सदा ही कहता हूँ। जब तुम्हें पता ही नहीं वो है भी
- 5:01कि नहीं और है तो क्या है और है तो उसका नाम क्या है?
- 5:10तो तुम सिमरण किसका करते हो? उनके पास कोई जवाब नहीं होता,
- 5:21लेकिन नामदेव के पास जवाब था। लोगों ने नामदेव से कहा अगर तू
- 5:28परमात्मा की तरफ मुक्त करके बैठा। तू बोल सूरज को कि तेरे सामने आ
- 5:35जाए क्योंकि भगवान ने सूरज को बनाया है।
- 5:44नामदे ने कहा जय विठ्ठल जय विठ्ठल।
- 5:49यहाँ ध्यान देने योग्य बात है। नाम कोई भी जप लो अगर तुम उसमें
- 6:00इन्सर्ट नहीं हुए, जिसे अपूर्ण श्रद्धा कह देते हैं।
- 6:10तो फिर सूरज नहीं झुकेगा अगर तुम नाम में इन्सर्ट हो गए जैविक ठंड।
- 6:28नामदेव इन्सर्ट हो गए हैं। विट्ठल में खपा दिया अपने आपको
- 6:34लेन कर दिया भस्म भस्म बहुत हो गया है तो सूरज ने अपनी चाल बदली,
- 6:43दिशा बदल ली। नामदेव के सामने आ गया है और
- 6:57ध्यान रखना सूर्य ने अपना गर्माहट खो दिया, सूर्य ने नमन किया।
- 7:11पहले सूर्य ने नमन किया। सुंदर बात है, गहरी है आनंद से
- 7:19सुनना, गहराई से सुनना, सूक्ष्मता से सुनना सूर्य ने अपना तेज खो
- 7:27दिया। यानी गर्माहट खोदी, लेकिन रोशनई
- 7:31बनी रही। तुम्हें पता है जो रात को
- 7:37पूर्णमासी के चंद्रमा में प्रकाश होता है वो सूर्य का होता है।
- 7:45आता है सूर्य से। रिफ्लेक्ट होकर धरती पर शीतल होकर
- 7:50बरस जाता है। आता है सूरज से तब पूरा गर्म होता
- 8:03है, बरसता है चंद्रमा पर और चंद्रमा की शीतलता के कारण वो
- 8:11शीतल होकर। धरती में तरंगे बनकर क्षमा जाता
- 8:16है। सूर्य ने नमन किया, नाम देम भी
- 8:28नमन किया। सूर्य ने फिर और नमन किया और नीचे
- 8:36आ गया। नामदेव ने भी नमन किया।
- 8:42दूसरे एक दूसरे को नमन करते जा रहे हैं और कहानी है कि सूर्य
- 8:50धरती के ऊपर आग है। कहानी है कि धरती जलने लगी और
- 9:06इतना प्रकाश हो गया, इतना प्रकाश हो गया लेकिन कितना ही नजदीक आ
- 9:16जाए ठंडा हो जाए सूरज फिर भी गर्माहस्त तो बनी रहती है।
- 9:20धरती जलने लगी। नामदेव के शरीर पे कीड़े पड़े हुए
- 9:30थे, कीड़े उसके मांस को खा रहे थे और वह कीड़ों को हटाता नहीं था।
- 9:50नामदेव कहते हैं, यह शरीर इन कीड़ों का भोजन है जिसने जान लिया
- 10:01कि मैं शरीर नहीं हूँ, वो ही ऐसा वक्तव्य दे सकता है।
- 10:07नामदेव ने कहा। यह शरीर इन कीड़ों का आहार है।
- 10:18जिसने ये जान लिया। मैं शरीर नहीं हूँ, ऐसा शब्द वही
- 10:23कह सकता है। अज्ञानी तो कहेगा कीड़े मुझे कह
- 10:30रहे हैं। ज्ञानी कहेगा नहीं पंचतत्व के
- 10:38पुतले को पंचतत्व का पुतला फर। यह शरीर कीड़ों का भोजन है।
- 10:49सूर्य के देश से सूर्य के प्रकाश से सूर्य की गर्मी से कीड़े मरने
- 10:54लगे हैं। कीड़ों का माझना कितना होता है?
- 11:04तो उसने सूर्य से कहा। ये मेरे विट्ठल मर रहे हैं तू जा
- 11:12ऊपर चला जा इसे कहते हैं आदेश नाथ परंपरा ने एक शब्द खोजा आदेश ये
- 11:30वहाँ से आता है। जिसकी मैं सदा ही बात करता हूँ
- 11:36जंग से और बैठ से थोड़ा नीचे जब आप भीतर उतरोगे तो संधि क्षेत्र
- 11:44से बिल्कुल नीचे जाओगे तो आप आदेश के क्षेत्र में प्रवेश हो जाओगे।
- 11:51आदेश कहने से हमें याद आता है वो जंक्चर पॉइंट जहाँ से आदेश दे
- 11:59सकता है कोई व्यक्ति नाम से भी याद आता है।
- 12:13लेकिन सिर्फ मात्र याद करना ही काफी नहीं टु रिमेम्बर, इस नॉट
- 12:19सुफ्फिसिएंट ऐट ऑल, स्मरण का नाम पर्याप्त नहीं है।
- 12:30स्मरण करके देख लिया। जान लिया कि मैं कौन हूँ तो वहाँ
- 12:37पहुंचना भी होता है। मंजिल अभी तय करनी बाकी अभी तुमने
- 12:43रास्ता देख लिया अभी तुमने देख लिया जार का मुख।
- 12:56मंजिल ने हार ली तुमने दूर गौरी शंकर का शिखर, लेकिन तुम तो गौरी
- 13:04शंकर के शिखर से बहुत दूर खड़ा तुम्हें अपने स्थान से।
- 13:14वहाँ तक जाना होगा, रास्ता तय करना होगा और मंजिल तक जाकर
- 13:20विश्राम करना होगा। अभी पड़ाव बाकी है।
- 13:25अभी मंजिल आई नहीं, मंजिल देखी जरूर है, सटोरी से ही कहते हैं।
- 13:39नामदेव ने आदेश दिया हे सूरज मेरा विट्ठल मर रहा है, वो कीड़ों को
- 13:47विट्ठल कहते है। जिसने यह जान लिया।
- 13:53हर व्यापक सरवत्रसमा हाँ ना प्रेम के प्रब्रत होई मैं जाना।
- 14:11हरि व्यापक सर्वत्र समां यह दर्शन की बात है, दोहराने की बात नहीं,
- 14:19याद करने की बात नहीं। हरि व्यापक सर्वत्र समां।
- 14:29समान रूप से सर्वत्र सब जगह वह व्याप्त है।
- 14:38ओमनी प्रेसेंट प्रेम मत मैं जानूं यह प्रेम क्या है?
- 14:48जिससे वह प्रकट हो जाएगा। प्रेम है तुम्हारा जोकना प्रेम है
- 14:56तुम्हारा उसके चरणों में समर्पण कर देना याद रखो।
- 15:09जैसे ही तुम समर्पण करते हो, तुम अपने भीतर मुड़ना शुरू हो जाते
- 15:14हो। ये सूत्र नया है, समझ लेना।
- 15:18जैसे ही तुम समर्पण करोगे मिठथ नीमी नान का गुण चंगिया।
- 15:27नीचे झुकोगे तो अपने भीतर भी उतरोगे इसलिए झुकना इतना जरूरी भी
- 15:34है और लाभप्रत भी है। झुकोगे तो आप अपने भीतर भी जाओगे,
- 15:41भीतर जाओगे, आनंद गहरा होगा, वो तुम्हें और झुकाएगा।
- 15:46और झुकोगे तो आनंद और गहरा होगा तुम और झुकोगे और फिर जंक्चर पैंट
- 15:51को क्रॉस कर जाओगे और तुम आदेश देने के योग्य जाओगे।
- 15:59उसी जो नाथ सम्प्रदाय में गौतम नाथ कहते हैं, आदेश?
- 16:05गुरवाणी में नानक कहते हैं, आदेश जिसे आदेश आद अनील अनाद अनाहत जुग
- 16:15जुग एक्कोवेज़। उस आदि अनादि सृजन हारे को मैं
- 16:31प्रणाम करता हूँ, जो कभी बदलता नहीं अनचेंजेबल सदा यज्ञस्रण रहता
- 16:38है, एक समान रहता है। नामदेव ने आदित्य कहानी क्या कहते
- 16:51हैं तुम्हारी कल्पनाओं से बहुत दूर तुम्हारे शरीर को?
- 17:01तो बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो जाता है।
- 17:04तुम कहते हो एंटीबायोटिक लेके आओ एक नामदेव कहते हैं कीड़े बाहर
- 17:15पड़े हैं, चल रहे हैं, रेंग रहे हैं घाव, जगह जगह हो गए हैं मवाद
- 17:20बहरे नामदेव कहते हैं यह विट्ठल का।
- 17:28भोजन है इन्हें अपना भोजन करने को क्या तुम ऐसी अवस्था में आ सकते
- 17:39हो? ऐसी अवस्था में जो आ गया।
- 17:48वहीं ये शब्द दोहरा सकता है मेरे विट्ठल का आहार है पंचभौतिक शरीर
- 17:59तुम उल्टा सोचता हो तुम कहते हो ये शरीर मेरा इन कीड़ों को मार
- 18:04दो, ले आओ एंटीबायोटिक। ले आओ ऐंटी फुंगल लेकिन नहीं नाम
- 18:13देव कहते हैं, यह शरीर आहार है मेरे विट्ठल का कीड़ों को वह
- 18:17विट्ठल कहते हैं और सूर्य आदेश से ऊपर उठने लगा।
- 18:29नामदेव मस्ती में थे। नामदेव ने कहा बस रुक जाओ सुर
- 18:38थोड़ा अभी नीचे थे अपनी जगह पे आज वहीं रुक गए आदेश।
- 18:46आज हुई मरदान में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है।
- 18:50कारण नामदेव ने सूरज को वहीं ठहरा दिया।
- 18:59मुल्तान में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है।
- 19:07संत की महिमा कहीं न जा तुम जीस परमात्मा को खुबड़िया से हल करने
- 19:17चले हो, तुम कोई समझदार नहीं। जो भी व्यक्ति खपड़ी से परमात्मा
- 19:31को हल करने चलेगा खोजने चलेगा। खपड़ी से खोजा जाता है भीतर
- 19:39प्रवेश कर लेकिन तुम खोजते हो बाहर के यंत्रों से यंत्रों से वो
- 19:45खोजा नहीं जाएगा। तुम्हें पता नहीं उसने क्या कुछ
- 19:51सृजन कर रखा है। नगरी में फैल गया दिव्य प्रकाश
- 20:05ऐसा प्रकाश बिलकुल ऐसा ही प्रकाश तुम्हें अपने वेतर में।
- 20:15और उस प्रकाश में आनंद बरस रहा था, छलक नहीं रहा था, बरस रहा था
- 20:22और वह दिव्य प्रकाश दिव्य औषध की तरह नामदेव के।
- 20:31शरीर को ठीक करने लगा। ओह सदी बन गया।
- 20:47सूर्य जी ने अपनी गर्मी खोदी। दिव्य प्रकाश में कन्वर्ट हो गया।
- 20:55वह दिव्य प्रकाश औषधि बनकर बरसा नाम देव का शरीर सवस्थ हो गया।
- 21:09इसलिए मराठा संत ज्ञानेश्वर। संत एक ना और संत नाम देव इनकी
- 21:24महम्मा का बड़ा बखान करता है। ये मोह तुम्हें ऐसा मानता है कि
- 21:36तुम इस मोह पाश से निकल नहीं सकते।
- 21:42अगर कोई व्यक्ति मोह से मुक्त हो गया तो बाकी के विकार कोई मायने
- 21:51रखते नहीं। मोह ऐसा विकार है।
- 21:58जिससे व्यक्ति बिल्कुल आखिर में छूटता है मोह क्लिंगन गणेशा है
- 22:06चिपका हट है मोह से छूटना ही बंधन से छूटना है सबसे बड़ा बंधन का
- 22:17कारक है मोह। बड़े हैरान हो गए जो कामी थे।
- 22:25उन्होंने कहा काम से छूट जाओ, जो लोभ ही थे, धन इकट्ठा करना चाहते
- 22:34थे, वो कहने लगे लोभ से छूट जाओ। क्रोध ही थे।
- 22:38उन्होंने कहा क्रोध मत करो, अहंकारी थे।
- 22:43उन्होंने कहा, हंकार मत करो। जो जीस विकार से ग्रसित थे,
- 22:50उन्होंने उसी विकार की बात की। लेकिन मोह की बात किसी ने नहीं
- 22:53किया जो मोहपाश में उलझा। वो सभी पाशों में बन गया और जो
- 23:02मोह से मुक्त हुआ वो सभी पाशों से मुक्त हो गया।
- 23:08मोह से मुक्त हो जाओ, मोह को उसके ओरिजिनल स्वरूप में बदल दो।
- 23:16ओरिजिनल स्वरूप क्या है? महु का ऊर्जा ऊर्जा में बदल दो और
- 23:23तुम पाओगे यही बंधन था एक ही चीज़ को गला कर तुम गौर से देखना।
- 23:38तुम अपने शरीर के मोह में बंधे हो, पुत्र, पुत्र के माता पिता के
- 23:49रिश्तेदारों के परिवारों के भाई, बहनों के मोहपाश में तुम जकड़े
- 23:55हो। ओर न जाने कितनी कितनी चीजों से
- 24:01उलझने की व्यवस्था तुमने कर ली है।
- 24:05सभी बंधनों से तुम छूट जाते हो, घड़ी दो घड़ी के लिए काम आता है।
- 24:12क्रोध आता है, कितनी देर के लिए ठहरता है?
- 24:17अहंकार आता है, कितनी देर के लिए ठहरता है?
- 24:19ज़रा सोचना है तुम्हारी ज़िन्दगी में काम, क्रोध, अहंकार और भय
- 24:25कितनी देर के लिए आए? थोड़ी थोड़ी देर के लिए आए।
- 24:33और कुछ मिनट के लिए कुछ घड़ी के लिए आए चले गए, लेकिन मोह ऐसा है
- 24:38कि चौबीसों घंटे बना रहता है। सोते, जगते, उठते, चलते फिरते,
- 24:48मोहो तुम्हारा संगनी छोड़ता। अगर तुम मोह को गला सको तो तुम
- 24:59पाओगे तो मुक्त हो गए मोह है, असली जड़ ये मूल रूट है।
- 25:10तो ध्यान रखना अगर मुक्त होना है, मोक्ष द्वार तुम्हें एक ही सबक
- 25:16देता है मोह से मुक्त होना है, और बड़े मज़े की बात है जब तुमने मोह
- 25:25से मुक्ति पाली, तुम देखोगे कोई बेकार भी न रहा।
- 25:29सभी विकास मोह के कारण थे। तुम्हें क्रोध आया, किसी चीज़ का
- 25:37मोह था तुम्हें, वो मिली नहीं इसलिए क्रोध आया तुम्हें काम आया।
- 25:46किसी स्त्री पुरुष के मोहपाश में तुम बंधे तो काम आया तुम्हें, लोह
- 25:55आया धन के मोह में बंधे तो लोह आया तुम्हें अहंकार आया, तुम्हारे
- 26:06अस्तित्व को किसी ने चुनौती दी। तुम्हारे मोह को अस्तित्व
- 26:11तुम्हारे अपने आप से मोह है, तुम्हारा उसको किसी ने चुनौती दी
- 26:16तो तुम्हें हंकार आया, तुम मुझे जानता नहीं मैं कौन हूँ?
- 26:22इसका बेसिक रूट है मोह कलिंगनेस चिपका।
- 26:30अगर तुमने मोह को जीत लिया जीता कैसे जायेगा मोह?
- 26:40एक ही नुक्ता है बिकारो को नष्ट करने का।
- 26:48वो नुखता है, दर्शन साक्षी कहलों जैसे ही तुम मुँह को देखोगे।
- 27:05कि इस वस्तु में इस व्यक्ति में इस ऑब्जेक्ट में इस सब्जेक्ट में
- 27:13मेरी संलिप्तता है। अगर तुमने पूरा जाग के देख लिया
- 27:19तो मोहतदक्षण समाप्त हो जाएगा। भाग्यहीन हो जो तुम देखते नहीं
- 27:30जाते हैं यह आता है सोई सोई और चला जाता है सोई सोई तुम्हें पता
- 27:38भी नहीं चलता। जब मोह आये और मोह हरकड़ी रहता
- 27:44है, काम तो कभी आता है करो तो तू कभी आता है तुम बाद में पक्ष कब
- 27:48कर लेते हो? अहंकार कभी कभी आता है तुम बाद
- 27:52में पक्ष कब कर लेते हो? लेकिन मोहो मोहो हर वक्त बना रहता
- 27:57है। एक चीज़ से छुटकारा हुआ, दूसरी
- 28:03चीज़ मोह के कारण आगे खड़ी है। एक पुत्र से छुटकारा हुआ तो अपने
- 28:12भाई से मोह हो क्या भाई से छुटकारा हो तो माँ बाप से मोह हो
- 28:19क्या? दोस्तों से मोह हो गया, चीजों से
- 28:23मोह हो गया, गरबार से मोह हो गया, जमीन जायदाद से मोह हो गया।
- 28:27यह मोह तुम्हारे जी का जंजाल तो मुक्त होना है।
- 28:39बाकी बेकारों से नहीं, बाकी विकारे तो इनके छाया के समान हैं,
- 28:49असल मूल हैं मोह तुम मोह से मुक्त हो जाओ मोह ही तुम्हें।
- 28:58कहता है मैं शरीर मोहित तुम्हें कहता मैं विचार मेरे विचारों पर
- 29:06तुमने आगाज किया, जबकि विचार तुम्हारे होते हैं, विचार
- 29:13तुम्हारे से बहुत दूर उठते हैं कुपड़िया।
- 29:19तुम कहते हो उससे मुझे प्रेम, उससे मुझे नफरत यह मोह के ही कारण
- 29:24है। प्रेम भी मोह है और घृणा भी मोह
- 29:28है। एक से विधायक प्रेम है।
- 29:35एक से नेगेटिव प्रेम है। उसे घृणा कहते थे और नफरत कहते
- 29:39थे। दोनों में मोह है मोह तुम्हारा
- 29:42पीछा नहीं छोड़ते मुक्त होना है तुम बंधे हुए हो निश्चित ही बंधे
- 29:54हुए रहो। विकार एक ही विकार से बंधे हुए
- 29:57हैं। बाकी के विकार तो इसकी प्रति छाया
- 30:02है मूल विकार है मोह बार बार बोल रहा हूँ इस मोह से मुक्त हो जाऊं।
- 30:17फिर तुम नामदेव की तरह ये शरीर को जो कीड़ा खायेगा वह विट्ठल ही
- 30:24होगा। यह शरीर विट्ठल का आहार है।
- 30:37हर जगह वो नजर आता है जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तो है, हर दर्रे
- 30:44में तू ही तो रो है कौन सा ऐसा स्थान जहाँ तू है नहीं सब जगह तू
- 30:56ही तू? लेकिन ध्यान रखना है तो वो सब जगह
- 31:08लेकिन नजर उसे आता है जिसके पास आ के।
- 31:16आँखों के बिना तुम देखोगे तुम अंधे हो तो देख नहीं सकते।
- 31:27तुम बुद्धि के द्वारा हर चीज़ को देखने की कोशिश करते हो।
- 31:31बुद्धि देखने में असमर्थ है बुद्धि तू एक कैंची की तरह सेंसर
- 31:37कर सकती है। बुद्धि देख नहीं सकती देखने के
- 31:44लिए ये आँखें संसार को देखने के लिए ये आँखें थोड़ा सा उससे भी
- 31:54आगे चलें। एक द्वार हमारा जो अभी तक खुला
- 32:01नहीं है वो है तीसरा द्वार नवम द्वार यह बंद है।
- 32:19बाकी सभी द्वार खुले अगर ये द्वार खुल जाए नमम द्वार खुल जाए तो
- 32:28बाकी सारे द्वारों में से कुंडलन नहीं शक्ति जागेगी और सभी द्वारों
- 32:34को जोड़तें हुए। तीसरे नेत्र में आके सहसरार में
- 32:39चली जाएगी तुम अगर इस द्वार को खोल लो यह दो ही द्वार खोलने
- 32:48योग्य हैं। नवम द्वार को तुम खोलोगे।
- 32:54दशम द्वार खुद से ही खुल जाएगा, वह तुम्हारे प्रयास से नहीं
- 32:59खुलेगा। नमम द्वार को कैसे खोलें?
- 33:06इसे दिव्य जक्षु भी कह देते हैं। जिसे बरब्रीक ने मांगा।
- 33:13वर ब्रिक कहते कि मैंने महाभारत के युद्ध को अपनी आँखों से देखना
- 33:18और सत्य सत्य देखना क्या हुआ तो भगवान कृष्ण ने कहा वर ब्रिक, अगर
- 33:26तुमने सत्य सत्य देखना तो तुम्हें दिव्य जक्षु की अवश्यता होगी।
- 33:33अगर तुमने सिर्फ देखना तो ये तुम्हारी दो आँखें काफी हैं लेकिन
- 33:39इन दो आँखों से तुम सत्यदर्शन नहीं कर पाओगे।
- 33:44अगर सच्चा सच्चा देखना कि महाभारत के युद्ध में कौन लड़ा, कौन जीता,
- 33:50कौन हारा? तो तुम्हें दिव्य चक्षु की
- 33:53आवश्यकता होगी। तो पर प्रिय कोरा प्रभु देव चक्षु
- 33:59कैसे आएगा? कृष्ण कहते हैं वो आएगा जब तुम
- 34:06शीश काट के तले पर हो। प्रेम ना बॉडी उसको प्रेम भी कहते
- 34:16है प्रेम ना हार्ट बकाए किसी दुकान पे बिकता नहीं वो किसी भाव
- 34:24में नहीं बिकता। राजा प्रजा जही रुचे समान है।
- 34:31सबके लिए कोई भेदभाव नहीं वितकरा नहीं है, कोई शीष दे ले जाए बस एक
- 34:41ही है मोरू। वो चाहे राजा है, चाहे प्रजा है,
- 34:45शीष दे दे और ले जाए। कहानी है के बरब्रीक ने अपना सिर
- 34:52काट दिया। कहानी है और दिव्य जक्ष्य मिल
- 34:57गया, लेकिन यह कहानी है इसके भीतर का रहस्य ये है शीश काट दो।
- 35:05अहंकार को समर्पित कर दो। जब तुम अहंकार को समर्पित कर दोगे
- 35:13तो तुम तो न रहे क्योंकि तुम तुम अभी अहंकार हो, तुम गौर से देखना
- 35:20तुम कौन हो, तुम कहोगे मैं शरीर हूँ।
- 35:25ये पांव में हूँ, ये हाथ में हूँ ये कान नाक आंख में हूँ ये विचार
- 35:32में हूँ ये भावनाएँ में हूँ, अभी तुम्हारा संबंध इनके साथ है, अभी
- 35:38तुम्हारा मोह इनके साथ है। और तुम्हारा जिससे मोह होता है वो
- 35:45ही तुम हो जाते हो। देखो तुम्हारे बच्चे को कोई चोट
- 35:48पहुंचा दे, जिससे तुम्हें मोह है, उसे कोई चोट पहुंचा दे तो दर्द
- 35:56तुम्हें होता है, पीड़ा तुम्हें होती है।
- 36:02यह मोह के कारण कृष्ण ने कहा इस अहंकार को यानी इस मोह को काट के
- 36:17इस सिर को अपने तली पर रख दो। फिर मेरे घर अब प्रवेश है तभी
- 36:28मिलेगा ओनली दे विल एंटर इन मैं गार्ड्स किंगडम हू विल बी इनोसेंट
- 36:34जस्ट लाइक ए मुझे कल कोई कहने लगा बा बाप जब बोल रहे थे बच्चे की
- 36:42कहानी। तो हमारी आँखों में आंसू छलक रहे
- 36:46थे। हमें लगा कि जैसे बच्चा ही बोल
- 36:50रहा है मैं 74 साल का व्यक्ति बचा नहीं हूँ लेकिन जस्ट लाइक ए चल।
- 37:04इनोसेंट जस्ट लाइक ए चार शरीर का इनोसेंसी से कोई समझ नहीं मन का
- 37:13इनोसेंसी से कोई समझ नहीं मन ही शैतान होता है मन ही मैं सुन।
- 37:25ओनली दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम मेरे परमात्मा के राज्य
- 37:30में बड़ा सुन्दर शब्द प्रयोग किया ईसन उसका राज्य शुरू होता है वह
- 37:39खुमारी छा जाती। जहाँ से उसका राज्य शुरू होता है
- 37:48वहाँ से कुमारी तुम्हें घेर लेती है जैसे कुमारी का तूफान तुम्हें
- 37:54घेर लेता है। और तुम शुद्ध वेद को विसरा देते
- 38:01हो, फिर तुम्हें पता नहीं होता किसने तुम्हें तुम्हें अपने आगोश
- 38:11में ले लिया। ओखला इक मांसूर वाला सुध बिसरा।
- 38:35मोरी रे सुध, बिसरा गयो मोरी, माखनचोर वो।
- 38:55नन्द के शोर वो कर गयो, कर गयो मन की चोरी रे सुध विसरा गयो।
- 39:14मोरी हो कला इक भाँ सूरी वाला। जैसे ही तुम उसके क्षेत्र में
- 39:31प्रवेश करते हो, प्रवेश कौन करेगा?
- 39:33हू विल बी इन नो सेंस? जस्ट लाइक ए चार्ज से सेन अप्पा
- 39:38लक हो वे टेकन चल ले, जब तक तुम होशियार हो, मासूम नहीं हो, बच्चे
- 39:45की तरह, वैसे ही उसके राज्य में प्रवेश तुम नहीं पा सकते।
- 39:50यू अरे बैड। तुम होशियारी करते हो और तुम
- 39:57समझते हो बुद्धि होशियारी करते है बुद्धि समितिए के चार बछाके सतरंज
- 40:02हुए मैं राज़ कर लूँगा कर लोगे राज़ भूकंप चला लोगे लेकिन हुकुम
- 40:08चलाने से कभी आनंद मिला है? आनंद मिलता है हुक्म मानने से इस
- 40:17शब्द को फिर से सुन लेना, होशियारी करके शतरंज की चाले,
- 40:22बिछा के तुम राजपाट हथिया दोगे। लेकिन राज़ पाठ हत्या के भी जनक
- 40:34को अष्टा बकरी की शरण में आना पड़ता है।
- 40:42राज़ पाठ आनंद नहीं देता। राजपाठ होशियारी से आता है और
- 40:48बाबा कहते हैं से सुसैन अपन लख होवे।
- 40:51तुम लाख श्रेणतें कर लो, होशियारी कर लो, सो सूझ लो तुम्हारे संग न
- 41:03चलेगा बड़ा प्यारा शब्द है संघ क्या जाता है पदार्थ संघ नहीं
- 41:09जाता कभी गया है जो मर जाता है। कभी कोई सुई साथ लेके गया कभी
- 41:17अपने मकान की छोटी सी रेत रेत का एक जर्रा अपने साथ लेके गया वह तो
- 41:24खुद का शरीर भी छोड़ के जेब खाली। कितनी भी भरी जेब छोड़ जाए, कितनी
- 41:33तंजोरी भरी छोड़ जाए, कितने भरे खेत कलिहान छोड़ जाए, लेकिन उसका
- 41:40एक ज़रा संघ नहीं जाता तो संघ कौन जाता है?
- 41:45खेर छण प लक होवे तो इक न चले नाल।
- 41:50साथ कौन जाता है? बाबा कहते हैं कि तुम्हारी स्याण
- 41:55से कमाई गई तो कुछ भी साथ नहीं जाती।
- 42:01इनोसेंस से जो कमाया जाता, वह तुम्हारे संग जाता और इनोसेंस से
- 42:07क्या कमाया जाता। इनोसेंस से कमाया जाता है आनंद
- 42:16आनंद में क्या है आनंद में तुम्हारी चेतना की वृद्धि हो तुम
- 42:22जीतने आनंदित होगे तुम्हारे चेहरे पे वो लाभान्व्य प्रकाश बन के
- 42:27बरसे। इसलिए संतों के भीतर वृद्ध हो
- 42:31जाते हैं लेकिन उनके चेहरे पे लाभन्य बना रहता है।
- 42:37वो लाभन्य है। आनंद का आनंद का लाभन्य उनके माथे
- 42:45से छलका करता है। तुम्हारी श्यानप तुम्हें साथ नहीं
- 42:54जाएगी श्यानप से तुम कमाओगे पदार्थ सुख सुविधाओं के साधन
- 43:00कमाओगे अच्छे गद्दे ले आओगे, सोने के तुम पलंग ले आओगे, सोने के
- 43:07टॉयलेट से बना लोगे। लेकिन नींद तो वह देगा ना?
- 43:16तुम कहते हो हम तो मेलाटुनिन खा लेंगे, नींद आ जाएगी नहीं आती
- 43:20भाई, नींद उसकी देन है। खाने के पदार्थ तुम इकट्ठे कर
- 43:27लोगे। 3600 प्रकार के।
- 43:29लेकिन भूख वो छीन लेगा। फिर क्या करोगे?
- 43:35भूख उसकी तेन है, नींद उसकी तेन है, तुम आराम करने के ढंग अपना
- 43:43लोगे, ले आओगे बाजार से कृत के लेकिन चैन वो छीन लेगा, फिर क्या
- 43:48करोगे? चैन उसकी देन सब कुछ तुम्हारे हाथ
- 43:57में नहीं और सच कहूं तो तुम्हारे हाथ में सिर्फ कूड़ा इकट्ठा करना।
- 44:06तुम्हारे हाथ में सिर्फ कूड़ा इकट्ठा करना है, वो तुम कर रहे हो
- 44:12सूचनाओं के रूप में कर रहे हो पदार्थों के रूप में कर रहे हो,
- 44:19लेकिन है सब कूड़ा डिग्रीज़ के रूप में कर रहे हो है सब कूड़ा।
- 44:25वो कूड़ा चाहे इस संसार का हो और ध्यान रखना एक बात मैं और कह दूँ,
- 44:30वो कूड़ा चाहे परमार्थ का हो, अध्यात्म का भी कूड़ा तुम्हे
- 44:34इकट्ठा कर लेता हूँ। आज आचार्य लोग अध्यात्म की गीता
- 44:41को। बिना उस तल पर जाए व्याखयित कर
- 44:47रहे हैं। यह कूड़ा है।
- 44:51यह सूचनाएं इकट्ठी कर ली। शब्दों के अर्थ इकट्ठे कर लिए
- 44:57वेकेबुलरी बहुत ज्यादा है इनमे लेकिन आनंद का क्या होगा?
- 45:06बात तो आनंद की कर रहे हैं। बाबा कहते हैं आनंद साथ जाएगा,
- 45:14तुम सहस क्षणप लक्ख हो गए, तुम लाख क्षणप कर लो, बिसात बिछा लो।
- 45:23तुम सब इकट्ठा कर लोगे लेकिन जो इकट्ठा करोगे तुम्हारे संग नहीं
- 45:29जाए, वो पदार्थ होंगे, महल अटारी बंगले होंगे, महंगी महंगी कारें
- 45:36होंगी, जहाज होंगे, हेलिकॉप्टर होंगे, पदार्थ होंगे।
- 45:41नाम होगा। नाम भी कमा सकते हो ये ये भी तुम
- 45:44कमा लेते हो लेकिन नाम भी तुम्हारे संग कहाँ जाता है नाम भी
- 45:53कहते हैं फलावक्ति मर गया बस मर गया तो नाम खत्म होगा, नाम कहाँ
- 45:58रहता है, किसका रहा है? रहता वहता यहाँ कुछ नहीं, सब
- 46:06परमात्मा का है तुम्हारा है भी नहीं।
- 46:10अंत में व्यक्ति को यही पता चलता है उस मुकाम पर जाके कि ना कुछ
- 46:15मेरा। और न कुछ मैं मैं ही नहीं हूँ उस
- 46:22समय को परवान करना होता है उसके चरणों में और यही कृष्ण ने कहा
- 46:28क्यों न हम परेशान होते हैं तू जो सबसे बाद में थक हार के करेगा।
- 46:36अभी समर्पित हो जा मेरे क्षण में ये डंडा झंडा फेंक दे सर्वथर्माण
- 46:44प्रतिजमा में कम शर्म पर ये डंडा झंडा फेंक दे।
- 46:53और मेरी शर्म में आजा बाद में भी तो मेरी शर्म में आएगा।
- 47:00बीओ गी राम राम झपले अभि, बीओ गी राम राम झपले अभि, फिर भी तो राम
- 47:08राम होती है। तो अभी ही क्यों नहीं कर लेता राम
- 47:15राम? लेकिन तुम अभी राम राम करने सेट
- 47:21होते हो, इसका अर्थ तुमने गलत ले लिया।
- 47:28वि। योगी राम राम जपले अभी।
- 47:31फिर भी तो राम राम होती है फिर जो राम राम होती है यानी तुम मर जाते
- 47:36हो भाई तुम जीते जी क्यों नहीं मरते जीते जी मर जाओ तुम जीते जी
- 47:44जपते हो, इससे तुम्हारा अहंकार बढ़ता है, मैंने एक अरब जा।
- 47:51जोड़ लिया। बैंक में दिल के बहलाने को मालिक
- 47:56ये ख्याल अच्छा है संड बंगा कुछ नहीं जाता, संग जाती है तुम्हारी
- 48:04चेतना की उचाई। तुमने कितनी प्रोग्रेस की,
- 48:09तुम्हारी चेतना ने कितनी उछाल दिया, कितनी उचाई कुट्टच किया
- 48:17तुमने काश तुम इस जीवन में कुछ कमा के जाओ।
- 48:25लेकिन तुम गवां के जाते हो सब कुछ क्योंकि जो तुमने कमाया वो तुम
- 48:32संग नहीं ले जाती तो फिर गवां के ही तो जाती हो देख लेना ज़रा ज़रा
- 48:38जो तुमने कमाया तुम कहते हो वो तुम्हें यही मिलेगा मरने के बाद।
- 48:46तो फिर क्या खाक कमाया तुमने? बाद में लोग करेंगे राम राम तुम
- 48:59अभी ही अपनी राम राम कर लो, तुम मर जीवड़े हो जाओ।
- 49:06जीते जी इस अहंकार को तुम वसुंध कर दो, इसकी राख भी न बचे, बाद
- 49:15में लोग तुम्हारी राख को गंगा में बहाएंगे तुम जीते जी अपनी ही राख
- 49:21को गंगा में क्यों नहीं बहा देते? तुम्हारे भीतर भी ये गंगा वहर ही
- 49:27है प्रेम उस प्रेम की गंगा में अपने आप को वहाँ दो तुम्हारी
- 49:42ज्योति जल जाएगी। ज्योत से ज्योत जलाते चलो ज्योत
- 49:54से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा वहते चलो।
- 50:05प्रेम की गंगा बहाते चलो राह में आए जो दीन दुखी सबको गले से लगाते
- 50:21चलो। प्रेम की गंगा बहाते चलो।
- 50:28लेकिन। तुम तुम तो कहते हो ये हिंदू है,
- 50:30ये मुसलमान सिख ऐसा ही ये बोध है, ये जैन है ये सब मरजा बने।
- 50:44बड़े बड़े शूरगीरों को मार दिया। इस मज़हब को ही त्यागना को कहते
- 50:52हैं कृष्ण सर्वधर्माणपत्र जया। इस मजहब ने बड़े बड़े बीर खा लिए।
- 51:02जमीन खा गई आसमान कैसे कैसे जमाने में मारे?
- 51:19जमा कैसे कै जमीन ख गई आसमान कैसे कैसे जमाने ने मारे?
- 51:38जमा कैसे कह कैसे कैसे जवान खा गए?
- 51:45धर्म परमात्मा जब तुम्हें पैदा करता है तो कोई खतना करके नहीं
- 51:53बैठता। खतना तुम करते हो?
- 51:57परमात्मा जब तुम्हें जन्म देता है तो कोई जूडा देकर नहीं भेजता।
- 52:03परमात्मा जब तुम्हें जन्म देता है तो के तिलक लगा के नहीं भेजता।
- 52:08त्रिपुंड सजा के नहीं। कोई दाढ़ी को काली पीली करके नहीं
- 52:14भेजता ये सब ड्रामा बाजित तुम करते हो सर्कस?
- 52:20परमात्मा में नरोल इंसान पैदा करके भेजता है।
- 52:26ये सब तुम्हारी शरारतें हैं, मुँह ढों की शरारतें हैं और देखिए,
- 52:33शरारतें करने वाला भी कुछ नहीं ले के जाएगा।
- 52:37बड़े मज़े की बात है, उससे भी भ्रम होता है के मैं 20 साल राज़
- 52:44कर लूँगा 15 साल और राज़ कर लूँगा तो शायद मुझे वो मिल जाएगा।
- 52:48नहीं मिलेगा भाई तुम चाहे लाख साल राज़ करो, राज़ करने से कभी किसी
- 52:56को मिला। उन्हीं से पीढ़िया जनक की ऐसे ही
- 53:01चली गई। नहीं मिला आखिर में स्टॉप करके
- 53:05चरण पकड़ने पड़े मिलता है, जोकने से मिलता है, नम्रता से मिलता है।
- 53:17मिठ्ठ सनी नान का गुण संगेया तथ तुम्हारी चालाकियों से तुम्हारी
- 53:26बेईमानियों से तुम्हारी शतरंजों के मोहरें बिछाने से वो नहीं मिल
- 53:31पाता। कितने ही खेल खेले चले जाओ।
- 53:39संघ तुम्हारे जाएगा, क्या जाएगा? बाबा कहते हैं, होश्यारी तो साथ
- 53:44में ही जाएगी। एक ही बात कही सब ने घूमा, फिरा
- 53:51के तुम समझ नहीं पाए। ईसा कहते हैं, सिर्फ वही प्रवेश
- 53:55करेंगे जो बच्चों की तरह मासूम होंगे और नानक कहते हैं तुम्हारी
- 54:01होशियारी तुम्हारे साथ नहीं जाएगी।
- 54:04होशियारी का मतलब नॉन इनोसेंस। बाबा भी कहते हैं तुम कुशियारी को
- 54:17छोड़ दो इससे जो तुम कमाओगे वो धरा का धरा रह जाएगा समर्पण से
- 54:27तुम धर्मों को छोड़ दो सबको। धर्म कीड़ा है जो तुम्हें खा
- 54:35जाएगा, खोखला कर देगा। धर्म को आज से ही त्याग दो।
- 54:40ना धर्म, ना जाग के शप, ना रंग ना रूप।
- 54:51हे आदमी की बनाई हुई चालबाजियां धोखे हैं शरारतें ये प्रखंड हैं
- 55:01खुद भी ये पागल हैं तो मैं भी पागल बना देते हैं ऐसे व्यक्तियों
- 55:09को। पागलपन में पागलखाने में इलाज के
- 55:16लिए भर्ती करा देना चाहिए और ये गद्दी पर बैठे हुए राज़ कर रहे
- 55:21हैं। एक व्यक्ति की शान शोकत के में छः
- 55:27बार सूट बदल। डेढ़ अरब लोगों को परेशान करे।
- 55:34ऐसा ही सारा जहाँ है ऐसा ही सिरफिरों से दुनिया परेशान है।
- 55:44उत्तर कोरिया उस सिरफिरे से परेशान है।
- 55:54अमेरिका ट्रंप से परेशान? क्योंकि व्यक्ति की सोच है कि मैं
- 56:01अगर सारे संसार का चक्रवर्ती सम्राट बन जाऊं तो शायद सुखी हो
- 56:05जाऊंगा। यही यही गलती खा जाता है आदमी से
- 56:10सेण 5,00,000 हो गए तुम अपनी सेण से कहते हो मैं जोड़ लूँगा, सुखी
- 56:16हो जाऊंगा कहाँ होते हो भाई अमर हो जाऊंगा कहाँ होते हो लाख
- 56:22कैप्सूल धवन? मरोगे दुखी होके मरोगे, जो
- 56:36तुम्हारी साथ नहीं जाता। समझदार शेख।
- 56:42समझदार कोण? समझदार की परिभाषा क्या मोक्ष
- 56:49द्वार का दूसरा पर्वच समझदार कोण जो वह कम आई जो उसके संग जाए?
- 57:02और उसकी झलक कमिंग इवेंट्स कास्ट सैडोस बिफोर उसकी झलक के जीते मिल
- 57:10जाती क्या लेके जाओगे संग तुम आनंद?
- 57:22सुख न सुख तो तुम्हारी इन्द्रियाँ होगी, आराम नहीं आनंद आनंद जिसकी
- 57:32एक बूंद भी तुमने चखी ले। कि नहीं सस्तोरी की झलकों में एक
- 57:38बूँद तुम्हें मिलती है, पर मैंने तुम्हें बहुत बार कहा कि तुम उस
- 57:45सस्तोरी की एक झलक, बस फिर तुम कुछ नहीं करोगे, फिर जो करेगा वह
- 57:55करेगा। वह कौन जिसने यह सजा दी है?
- 58:01तुम कहते हो वो तो है ही नहीं, हम कहते हैं वो ही है, बड़ा फर्क है
- 58:06इस बार तुम कहते हो वह नहीं है, हम कहते हैं ही वही।
- 58:15और तुम अंधे अंधे खपड़िया से कहते हो हम आँखों वाले देख के हमने
- 58:24देखा है उसे उसका जलवा निहारा है हमने उसको पिया है हमने, वह सुरूर
- 58:33है। वह आनंद है, वह मद बस्ती है, मद
- 58:38होसी है, क्या मद है? तुम कहते वो है नहीं, संत कहता है
- 58:49वह ही तो है, दूसरा कोई नहीं। एक को सुमर के नान का जो जल थल रे
- 59:00आज शम आए दूजा का हेर से मरि है जो च में ते मर जाए दादू दूजा को
- 59:10नहीं, दूजी मन की दो। क्या जो पागल थे वो दौड़ मिटी
- 59:18सनसे गया वस्तु ठोर की ठोर? ये कहते हैं ठहर जाओ, जो इकट्ठा
- 59:24करोगे वो कूड़ा है और तुम्हें दिख भी जाता है हैरानी की बात।
- 59:31तुम्हारा पड़ोसी अब तक ठीक ठाक था तुमसे बात करके क्या हार्ट अटैक आ
- 59:36गया खत्म हो गया मैंने देखा है दूर से आते हुए व्यक्ति घर जाते
- 59:42हैं और पास जाके देखे तो उसकी नब्ज़ नहीं होती।
- 59:46आठवीं तक अभी तो चला आ रहा था। माटी का पुत्र कैसा न जति है,
- 1:00:01कैसे न जति है डरियो फिरत है। कैसो नचतू।
- 1:00:13है डरियो फिर तू है माटी का पुतूरा कैसो नचतू है।
- 1:00:29मेरी बात को ध्यान से सुन लो अगर तुम ये समझते हो कि हम अपनी
- 1:00:42होशियारी से दांव पे चला के शतरंज की विश्वास बना के राज़ कर लेंगे,
- 1:00:47कर लो, बिलाश कर लो। राज़ करने वालों ने 50, 5000, 100
- 1:00:54साल तक राज़ किया और मुझे 50 साल राज़ किया अकबर ने 50 साल राज़
- 1:01:00किया लेकिन क्या ले गए यहाँ से जो कबीर ले गए जो मीरा ले गई, जो
- 1:01:11नानक ले गए, जो कृष्ण ले गए। जो नामदेव ले गए, क्या वो
- 1:01:25तुम्हारे सिकंदर ले गए? सिकंदर बड़े समझदार निकले ऐसे ही
- 1:01:35अगर तुम्हारे सेठ लोग। मरते हुए बता दें कि कुछ नहीं
- 1:01:40जाता। भाई साहब ये सोने की चमक दमक
- 1:01:44दिखाने के लिए थी। दखा व थी मात्रा देखो हम तो बहक
- 1:01:49गए, हमने समय खराब कर लिया सावधान तुम समय खराब मत करना तो दुनिया
- 1:01:54में अंधेरा समाप्त हो जाएगा। सतयुग तो वैसे आ ही गया, ऐसे लोग
- 1:02:00भी आ जाएंगे, धीरे धीरे ऐसे लोग आ जाएंगे कतार कतार शुरू हो गई है।
- 1:02:08लेकिन मुश्किल ये कि तुम भीतर से थपड़ो थपड़ी होके आते हो?
- 1:02:17मियां बीबी गाल लाल हो जाते हैं, जब चप्पल छेत्र पड़ते हैं,
- 1:02:29थप्पड़, थप्पड़ ही होते हैं, गाल लाल हो जाते हैं और तुम बाहर जाते
- 1:02:34हो। मुस्कराते हो।
- 1:02:37लोग पूछते हैं मेकअप किया नहीं थप्पड़ो थपड़ी हो के आए हो?
- 1:02:44कहते हैं नहीं, भीतर का लाभ नहीं छलकर ये थप्पड़ो थपड़ी होने से
- 1:02:53भीतर का लाभ नहीं तो उछलकेगा। गले लाल हो जाएंगे।
- 1:03:00एक दूसरे की गले लाल कर देते आदमी का तो दाढ़ी मूछ होती, पता नहीं
- 1:03:05लगता? स्त्रियों के पता लगता गाले लाल
- 1:03:08हो गया और तुम कहते हो ये तो भीतर का लगन है।
- 1:03:14अगर तुम छुपाना बंद कर दो उससे तो फिर मैं नहीं छिपता दुनिया से तुम
- 1:03:25छिपा लेते हो दुनिया तो होती है। अगर सेठ व्यक्ति ईमानदारी से कह
- 1:03:32के मरे के उसने जीवन में क्या कम है तो ये दुनिया को बदलते ज्यादा
- 1:03:38देर न लगेंगी। ये दुनिया पागल क्यों है?
- 1:03:41पागल है कि 1000 झूठ बोलकर तुम सत्ता लेते हो।
- 1:03:48खेसयानी बिल्ली खंभानुचार तुम्हारी मुस्कराहट के पीछे साफ
- 1:03:56असफलता नजर आ रही है। तुम्हारी मेहनत बेकार चली गई।
- 1:04:07और तुम जाना चाहते हो उस तरह सिकंदर भी गया तो बड़े ईमानदार से
- 1:04:12गया देखो मैं कुछ नहीं ले के चला भाई बड़ा ही ईमानदार व्यक्ति था
- 1:04:17अगर सिकंदर की तरह सभी अमीर लोग और सिकंदर ने तो आंधी से ज्यादा
- 1:04:23दुनिया जीत ली तुमने तो इतना जीता भी नहीं है।
- 1:04:29सिकंदर के बाद कोई बादशाह नहीं हुआ, जिसने पूरी जमीन जीत ली।
- 1:04:34और देखिए बड़े मज़े की बात। दो तिहाई राज्य के ऊपर ईसाईयत का
- 1:04:40कब्जा था। अंग्रेजों का कब्जा था दो तिहाई।
- 1:04:46दो तिहाई जमीन उनकी जमीन पर सूरज कभी अस्त नहीं होता था।
- 1:04:55सदा रोशनाई रहती थी उनके कब्जे की जमीन और तुम्हे एक मज़े की बात
- 1:05:01बताऊँ जो तुमने सोंची नहीं होगी। तुम हिंदू राष्ट्र का सपना दिखाते
- 1:05:10हो। क्या अंग्रेज चाहते तो ईसाई
- 1:05:14राष्ट्र नहीं बना सकते थे, बिल्कुल बना सकते थे, जिसके हाथ
- 1:05:19में दो तिहाई जमीन हो। सारी फौज और सारे संसाधन उसके हाथ
- 1:05:27में सारी फोर्स उसके हाथ में वह तो डिक्टेटिस 1000 जुगन वह क्यों
- 1:05:35चला गया? गाँधी का एक शब्द से लड़ गया
- 1:05:41अनीता शायद वो भी ईसाई राष्ट्र की घोषणा करके जाता हूँ लेकिन गाँधी
- 1:05:52ने कहा और उसका दिल काट गया। पंचम ने पूछा मिस्टर गाँधी वेरा
- 1:06:02क्रॉस? गाँधी ने कहा, जनाब मेरे वस्त्रों
- 1:06:09की बात करते हैं, आपने पहन लिया मेरे सारे देश के वस्त्र आप ही तो
- 1:06:16पहने बैठे हो। ऐसा बोलने की जरूरत किसी ने की
- 1:06:23नहीं। प्रथम बार जार के पंचम का असर
- 1:06:28निशा प्रथम बार उसके अहंकार को ठेस लगी।
- 1:06:36यह नंग मलंग व्यक्ति मुझे नीचा लग रहा।
- 1:06:42और ऐसा झटका लगा उसके अहंकार को और उसने चारपाई पकड़ ली।
- 1:06:48जार जो पंचम उसके बाद उतर हो सका, दर्द बढ़ता ही गया झुनझुन दवा की।
- 1:06:59और आखिर में जॉर्ज पंचम चाहता तो ईसाई राष्ट्र बना जाता।
- 1:07:07तुम्हें पता है कौन रोकता उसे लेकिन तुम पागल हो मूर्ख हो तुम
- 1:07:16इसी को ही तो अंधापन कहती। अगर अंग्रेज चाहते तो ईसाई
- 1:07:29राष्ट्र की घोषणा कर देते और ये सारी दुनिया कोई मुस्लिम राष्ट्र
- 1:07:34न होता, कोई मुस्लिम राष्ट्र न होता क्योंकि सब अंग्रेजों के हाथ
- 1:07:41में। घोषणा कर देते हैं कि सब ईसाई
- 1:07:46राष्ट्र बाइक वाला हमारी किताब है, धर्मग्रंथ है यह पढ़ना लाजिम
- 1:07:53है, तुम क्या कर लेते हैं तुम में इतना ज़ोर था नहीं तुम में इतना
- 1:08:02ज़ोर नहीं था। लेकिन तुम्हें जानकर हैरानी होगी
- 1:08:06ईसाई राष्ट्र के नाम पर आज कुछ भी नहीं आया।
- 1:08:09एक छोटी सी इमारत है उसको वेटिकन सिटी कहते हैं, ईसाई राष्ट्र नहीं
- 1:08:15वहाँ पर सिर्फ पोप बैठते हैं 35 आदमी वहाँ रहते हैं जो पोप की
- 1:08:22रक्षा करते हैं। उसकी सेवा शुरू शुरू करते हैं, वह
- 1:08:27है ईसाई राष्ट्र, वेटिकन सिटी, बस इतना समझ लो वेटिकन सिटी से बड़ा
- 1:08:35हमारा राष्ट्रपति भवन। ईसाई राष्ट्र की घोषणा मज़े से कर
- 1:08:43सकते थे। तुम मांगते हो 400 सीटें दे दो,
- 1:08:49हम संविधान बदल देंगे। खोखले लोगों को लुभावने के लिए
- 1:08:56नारे। जिनके हाथ में सब कुछ था सिकंदर
- 1:09:05जो कहता मैंने जो लूटपाट से इकट्ठा किया धन मेरी अर्थी जलना
- 1:09:10से के ऊपर से लूटा मेरे संग कुछ नहीं जा रहा, देखो सिकंदर खाली
- 1:09:16हाथ चला। हर सिकंदर का यहीं पर रह गया मरते
- 1:09:32दम लुकमान भी ये। कह गया ये घड़ी, ये घड़ी हरगिज न
- 1:09:45टाली। जाएगी जब तेरी।
- 1:09:53डोली निकाली जाएगी बे मुहूर्त? के।
- 1:10:01उठा ली जाएगी जब तेरी। तुम लोगों को दिवा स्वप्न दिखा
- 1:10:13रहे हो? कल्पना जिनके हाथ में तीन चौथाई
- 1:10:18दो तिहाई रास्ता था, जमीन थी वो भी ये कर सकते थे जानते थे।
- 1:10:29लेकिन वो जानते थे कि बाइबल धर्मग्रंथ पागलों का लिखा हुआ है
- 1:10:43जब गैलीली हो गैली ने कहा नहीं चक्कर लगाता है।
- 1:10:48सूरज पृथ्वी का बल्कि पृथ्वी, सूरज का चक्कर लगा दी टपकेथलिक
- 1:10:59चर्च के पादरियों ने कहा, झूठ बोलता इसको फांसी लगा उसे नजरबंद
- 1:11:06कर दिया गया। और वह तस्वीरें बनाता हुआ मरा।
- 1:11:10उसने तस्वीर खींची। दीवार पर सूरज के चक्कर लगा रही
- 1:11:17धरती और नीचे उसने लिखा एंड स्टिल इट मोज़ और अभी भी ये चक्कर लगा
- 1:11:23रही है। यह सत्य कभी बदला नहीं जा सकता।
- 1:11:28350 वर्षों के बाद कैथलिक चर्च का पृष्ठ कहता है हमसे गलती हो गई।
- 1:11:36हम क्षमा मांगते हैं उसे जो 300 साल पहले मर गया, अब क्षमा मांगने
- 1:11:41का क्या मतलब? अब क्या फायदा?
- 1:11:47ऐसे पाप करते हैं ये धार्मिक लोग मन्नू स्मृति लागू कर दें के क्या
- 1:11:54है मनीषमृत तुम्हारे वेद तुम्हारे प्राण आग लगाने जोके हैं तुम्हारी
- 1:12:01मनु स्मृति। लगा तू आग इसको मैं रोज़ कहता हूँ
- 1:12:07शास्त्रों को बहादुर गंगा में, क्योंकि ये आदमी को आदमी से
- 1:12:13लड़ाने के हथियार हैं, तुम्हें इनके भीतर हथियार नज़र आते नहीं।
- 1:12:21द्वेष भरा पड़ा, नफरत भरी पड़ी। अगर अंग्रेज चाहते तो ईसाई
- 1:12:29राष्ट्र की घोषणा नहीं कर सकते, कर सकते।
- 1:12:33क्यों नहीं किया व्यस्त था, उन्हें पता है ये जुमला।
- 1:12:40ईसाई राष्ट्र बनाने से क्या मतलब? हर एक व्यक्ति अद्वितीय परमात्मा
- 1:12:47ने हर एक व्यक्ति को बिल्कुल अलग अंदाज से पैदा किया।
- 1:12:51शक्ल अलग सूरत अलग मूरत, अलग सोच अलग कुछ भी तो नहीं मिलता।
- 1:13:03धर्म कैसे एक मिलेगा? सबका धर्म एक समान नहीं हो सकता।
- 1:13:08तुम लोगों को मूर्ख मत बनाओ। हिंदू राष्ट्र बनने से आसमान सोना
- 1:13:15नहीं बरसाने लगेगा अभी मुझे। आज ही कमेंट आया, कल आया एक बागी
- 1:13:24जी मुझे सुनते हैं, मैं तुम्हे 3 साल से सुनता हूँ बाबा जब आप गाते
- 1:13:29हो तो बढ़ा के ले जाते हो, लेकिन आप राजनीति की बातें जब करते हो
- 1:13:36तो अच्छा नहीं लगता, मुझे दुख होता है।
- 1:13:44मतलब मैं गुरु नहीं गुलाम हूँ, तुम्हारे हिसाब से बोलूं,
- 1:13:53तुम्हारे हिसाब से चलो, ये भी एक शिक्षा है।
- 1:14:03किसी को राजनीति झिकानी पड़ेगी क्योंकि राज़ भी तो कोई करेगा?
- 1:14:12मैं तो नहीं राज़ कर पाऊंगा मैं 74 साल का बूढ़ा कहाँ राज़ कर
- 1:14:21पाऊंगा? चलो तो जर्दन।
- 1:14:2313 साल से कुछ खाये शरीर कमजोर पड़ गया मैं सिर्फ बैठा रह सकता
- 1:14:32हूँ, जितनी देर सांस चलती, बस चलती मेरे बस में क्या है कुछ
- 1:14:36नहीं और तुम गुरु नहीं बनाया तुमने गुलाम बनाया।
- 1:14:45इसलिए मैं तुमसे एक बात कहूंगा, तुम्हारा नाम तो मैं भूल गया अभी
- 1:14:52मेरे चैनल को अनसबस्क्राइब कर दो, गुरु कहते हैं, आ जाओ उन्होंने
- 1:15:01संख्या को बढ़ाना है। मैंने प्रतिभा को बढ़ाना है,
- 1:15:09मैंने संख्या को नहीं बढ़ाना, संख्या से मेरा कोई लगा देगा नहीं
- 1:15:15और प्रतिभा को कमाने वाले लोग मैंने कल भी कहा।
- 1:15:23अभी मैं राजनीति में उतरने वाला हूँ।
- 1:15:25उतर ही क्या अगर तुम मर जीबड़े बनने के लिए तैयार हो मर जीबड़े
- 1:15:36वो तो 1 दिन आयेगी। मर नहीं जाओगे तुम उस स्थान को
- 1:15:43छुरोगे जहाँ आनंद ही आनंद है। लेकिन उसके लिए मरने के लिए तैयार
- 1:15:51रहना पड़ेगा जो मरने को तैयार नहीं होते।
- 1:15:56वो सतल को छु भी नहीं हो सकता। मोया बाज ही ना मिलता सजन बैठा।
- 1:16:03मोया बाज ना मिलदा सजन बे। उस मालिक दा प्यार मयांबाज ना
- 1:16:21मिलता सजन वे। जब दीक्षा लेने मेरे पास आओ, पहले
- 1:16:37से मन बना के आओ, उसके बाद मैं कोई किंतु नहीं करूँगा।
- 1:16:47मैंने अंगूठा लगाया तो अंगूठा मैं दूसरी तरफ भी लगा दूंगा, ये ध्यान
- 1:16:51रखो मैं ब्लॉक भी करना चाहता हूँ पर मैं तुमसे दीक्षा छीन भी
- 1:17:01लूँगा। कौन किसी का बोझ उठाने के लिए
- 1:17:07तैयार है? महान करुणावश कोई तुम्हारा बोझ
- 1:17:15उठाने को तैयार हुआ तुम मीन मेख निकालना शुरू कर दी।
- 1:17:23बाबा जब तुम बोलते हो। बहा के ले जाते हो या तो फिर बहने
- 1:17:27का आनंद उठा लो या फिर सिक्का टिप्पणी का आनंद उठा लो एक राह
- 1:17:36चुन लो, दोगले मत रहो डवल्टी तुम्हारी जान ले ले के।
- 1:17:51घर में उलझने दिल में है आलम बेकरारी का नजर में उलझने दिल
- 1:18:08में। है।
- 1:18:09आलम बेकरारी का है। आलम बेकरारी का समझ में कुछ नहीं
- 1:18:24आता। सुखों का आने कहाँ जाएं समझ में
- 1:18:36कुछ नहीं आता। सुखों पानी कहाँ जाएं?
- 1:18:45सुकुम पानी कहाँ जाए? समझो मैं आई का दू ये समय तो बाद
- 1:18:51आए, ये तो बहकाती है। गुरु तुम्हें सीधे राह पे डालता
- 1:18:59है और गुरु की बातों पे टिक्का टिप्पणी करो छोड़ दो।
- 1:19:08जगहजगह गुरू तेग बहादुर के जमाने के वक्त के सदा से ही ऐसा रहा है।
- 1:19:15मैं गुरू, मैं गुरू, मैं गुरू, उनकी शरण चली जाओ हमें भुलाना
- 1:19:22नहीं आता, हमें भगाना आता है। ऐसे सिर्फ रों की आवश्यकता नहीं
- 1:19:29है। इतना का कम है तुम घड़ी तो घड़ी
- 1:19:35घड़ी ये बह लेते हो। हमारा ये आनंद से गुनगुनाना
- 1:19:47तुम्हें बाहर ले जाता है, इतना काफी नहीं तुम क्या कुछ नहीं
- 1:19:52करते, घड़ी भर का सोख हो पाने के लिए संत तुम्हारे लिए रोज़ बोलता
- 1:19:58है करन तुमसे कुछ मानता हूँ। मांगता है तो मत दो।
- 1:20:10समझ में कुछ नहीं आता। बस यही है तुम्हारे साथ जाना
- 1:20:25सुकून पानी कहाँ जाए और अंतःस्थल में जाओ जिसे प्रज्ञा कहती है
- 1:20:38कृष्ण उस प्रज्ञा में चले जाओ, वहाँ सुकुम ही सुकुम है।
- 1:20:48आनंद ही आनंद है मदभूषी मही मदभूषी है, खुमारी ही खुमारी।
- 1:21:06तुम जिसके दर्शन को एक पल के लिए तरस जाते हो, तुम जिसके एक दर्शन
- 1:21:15के लिए एक पल के लिए तरस जाते हो तुमने देखा निर्भय कण इसके एक
- 1:21:24दर्शन के लिए। चारों लटक गए फांसी पे देखिए
- 1:21:32कितना प्यारा है वो तुम उसकी एक झलक पानी करते मौत तक की परवाह
- 1:21:43नहीं करते। लेकिन मैं तुम्हें कहता हूँ मर
- 1:21:47जीवड़ो मेरे पास आ जाओ, मैं तुम्हें वहाँ ले जाऊंगा जहाँ
- 1:21:57ज़िन्दगी मदहोशी के आलम में खुमारी में डूबी होगी।
- 1:22:03न तुम्हें वक्त का पता चलेगा, न तुम्हें अपने होने का पता चलेगा,
- 1:22:08तुम मधुबशी के आलम में डूबे डूबे से मधुमस्त सारे काम करोगे न
- 1:22:18दुनिया से भागोगे, न आनंद कोपी न छोड़ोगे।
- 1:22:23दोनों काम बराबर चलेंगे, दोनों काम बराबर चलेंगे।
- 1:22:26मैं फिर कभी समझाऊंगा मुझे याद करा देना कैसे संसार और परमात्मा
- 1:22:35का आनंद इकट्ठे इकट्ठे किया जाता है।
- 1:22:44तो मेरे पास आना, लेकिन अगर तुम्हारी दीक्षा मिल जाए तो ऐसे
- 1:22:52कमेंट मत करो। अगर ऐसे कमेंट करते हो करने की
- 1:22:59इच्छा है, आदत है, बहक जाते है भाई।
- 1:23:02तो आना मत किसने बुलाया था? कुआं कभी किसी को नहीं बुलाता
- 1:23:12क्योंकि कुआं जानता है जो प्यासा होगा आ जाएगा तुम ऐसा टिकट
- 1:23:23टिप्पणी जो कर रहे हो मैं कभी कभी छांट लेता हूँ ऐसा लोगों को।
- 1:23:30और फिर उन्हें मगजगबाई नहीं करनी चाहिए।
- 1:23:33उन्हें दूसरे गुरु प्रकाश से ले जाना चाहिए क्योंकि मुझे जो जज
- 1:23:39गया मैंने भीतर जा कर देख लिया की नहीं है।
- 1:23:42इसमें बिपाशा नहीं है तो मेरा बोलना इसके लिए बेकार।
- 1:23:50मैं आज नहीं का लगावट लगा ही दूंगा, अपने आप से चले जाओ, अच्छे
- 1:23:56रहूं मुझे जीतने सुन रहे हैं, काफी मोर थान सुफिसिएंट।
- 1:24:08शुध विसरा गयो मोरी रे शुध विसरा गयो मो र वो गाना।
- 1:24:29एक बा शुक्रवार कर गयो, मन की ही चोरी रे सुध भी सुरा गयो।
- 1:24:47मोरी वो काला काला इक बा सूरी वाला।
- 1:25:02धन्यवाद।