Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Oct 25 - संभोग में आनंद आने का असली कारण क्या है? वीर्य और रज के रहस्य, औझ क्या है? Must watch
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- 0:22गुरूजी, आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम मेरे दो प्रश्न हैं पहला
- 0:33काफी दिनों से अटका हुआ है, सोचा आपसे पूछ के इसको सुझा लू?
- 0:45क्यों बोझा उठाए रखने आप भी मेडिकल के छात्र रहे और मैं भी
- 0:56गुरूजी, ये तो बुद्धि को समझता है।
- 0:59आदमी के स्पर्म और औरत के ओवन में चेतना का अंश होता है।
- 1:08संभोग के दौरान सीमन में स्पर्म निकलता है, जो ओज में तब्दील हो
- 1:18सकता था। लेकिन महिलाओं के मामले में जो
- 1:21राज्य ओम वह तो हर महीने चौदहवे दिन एक ही दिन ओवरी से रिलीज होता
- 1:31है तो क्या इस हिसाब से संभोग के वक्त औरत इस तरह शक्ति विहीन नहीं
- 1:43होती? जीस प्रकार आदमी होता है, कृपया
- 1:49ऐसे साइंटिफिक वे से समझाने का कष्ट करें।
- 1:56आप तो साइंटिस्ट के भी साइंटिस्ट हैं।
- 2:03दूसरा प्रश्न मन की आवाज़ और आत्मा की आवाज़ को कैसे पहचानें?
- 2:07ये मैंने बोल चुका हूँ ये पिछली वीडियो में आप सुनो जी हम आज के
- 2:15प्रश्न पे आते हैं। स्त्री को हर महीने मासिक चक्र
- 2:32आता है, उसे मासिक धर्म भी कह लेते हैं।
- 2:34पीरियड भी कह लेते हैं और आवश्यक नहीं है कि 28 दिनों का हो।
- 2:4630 दिनों का भी हो सकता है। 32 दिनों का भी हो सकता है, 34
- 2:50दिनों का भी हो सकता है लेकिन ध्यान रखना अगर 28 दिन का है
- 3:06मासिक चक्र मासिक धर्म में। अगर 28 का है तो चौधवें दिन आधा
- 3:16कर लो उसको 30 का है तो पंद्रहवें दिन 32 का है तो सौदवें दिन एक
- 3:26अंडा निकलेगा, ओबरेस है। और वह अंडा ही स्वर्म के साथ
- 3:35मिलेगा। उसी से बच्चा पैदा होता है तो
- 3:41प्रश्न ठीक है बेटियां का, लेकिन दो अंडे भी निकल सकते हैं।
- 3:5185% स्थितियों में एक अण्डा निकलता है, इसलिए सामान्यतया एक
- 3:59बचा होता है लेकिन 15% दौड़ता में।
- 4:09ट्रेन भी निकल सकता है। दो बच्चे निकल सकते हैं दो अण्डान
- 4:14और गंधारी जैसे केस में 100 भी निकल सकते हैं।
- 4:17ये एक्सेप्शनल केस वो आपको समझ गई आई होगी।
- 4:25राज्य में से हर महीने एक अंडा निकलता है, दो भी हो सकते हैं,
- 4:36ज्यादा भी हो सकते हैं, वो ही अंडा पीरियड्स शुरू होने के बाद
- 4:49मध्य में निकलता है। अगर 28 दिन का मासिक चक्कर है तो
- 4:55शोध में देन 32 का है तो साल में देना इसको ठीक से समझ लेना।
- 5:01वैसे ये विज्ञान का प्रश्न इतना सा तो आपको गयनेकोलॉजिस्ट से पूछ
- 5:07लेना चाहिए। वह अंडा स्वर्म से मिलकर ही बच्चा
- 5:18बनाएगा। दो अंडे भी निकल सकते हैं।
- 5:24सोभ भी निकल सकते हैं। बट देर इस एन एक्सेप्शनल केस।
- 5:31आमतौर से एक निकलता है इसलिए सामान्यतः एक ही बच्चा पैदा होता
- 5:39है लेकिन तो स्वाद उच्छा वती ने उससे मेरे ब्रह्मचर्य का कोई लेना
- 5:52देना है ही नहीं। यह तो मैं जानता हूँ कि प्रश्न तो
- 5:59ब्रह्मचर्य से ही निकला होगा, जब इतना सा खून राज्य हर महीने बाहर
- 6:06निकल जाता है तो औरत ब्रह्मचर्य कैसे रखे?
- 6:11तो ये प्रश्न ठीक है। पूछना चाहिए।
- 6:14अब इसको समझने की चीज़ ठप करें, लेकिन ये आपको डॉक्टर से नहीं बता
- 6:22पाएंगे, न ही गयनेकोलॉजिस्ट बता पाएंगे, जैसे वैज्ञानिक चीर पढ़
- 6:30कर लेगा। लेकिन नहीं बता पाएगा।
- 6:35चक्कर होते हैं कि नहीं? रीड की हड्डी को छान देगा
- 6:40माइक्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं सारी कर देगा, लेकिन चक्कर नहीं देते
- 6:44सर सहसरार परम्रंत्रण नहीं ढूंढ सकेगा।
- 6:51यह विज्ञान की असमर्थता है। न काबिलियत है।
- 7:00अब समझिए ध्यान से समझिए, धीरे धीरे समझिए, टीन एज के बच्चे जरूर
- 7:08सुनें। ऐसे गुमराह हो जाते हैं।
- 7:1416 साल की उम्र के बाद के बच्चे ऐसे जरूर सुने किशोर अवस्थ से
- 7:27प्रति दिन रोज़। आदमी में मेल में थोड़ा थोड़ा
- 7:32वीर्य बनता है और स्त्री में थोड़ा थोड़ा राजा बनता है।
- 7:43वह वीर्य एक शैली में इकट्ठा होता रहता है।
- 7:47वह राजबी इकट्ठा होता रहता है। अब सोचिए थोड़ा सा ये साइंटिस्ट
- 7:56नहीं बता पाएंगे आपको आज का वीर कल का वीर परसों का वीर ये दस्त
- 8:05ने। 10 दिन का वीर्य इकट्ठा हो गया,
- 8:0810 दिन की राज्य इकट्ठे हो गया। इस तरह में थोड़ी सी प्रक्रिया
- 8:17आदमी से अलग है। तो अगर पुरुष 10 दिन तक अपने वीरे
- 8:22को बचा लेता है। कोई काम का दृश्य नहीं देखता।
- 8:30कोई पोर्न फिल्म्स नहीं देखता, अपने आपको उत्तेजित अवस्था में
- 8:34नहीं लेके आता कोई चाउमन चुग चाउमन चुगगा ये नहीं खाता
- 8:41मसालेदार पदार्थ। सिंपल भोजन करता है दाल रोटी
- 8:46तेंसी घी ज्यादा मसाली नहीं, मैच बिल्कुल नहीं।
- 8:51नमक थोड़ा सा दूध पियोग दही खाओ, फल फ्रूट खाओ।
- 9:02मास मिट्टी नहीं खाना है। अगर आप साधारण शाकाहारी भोजन करते
- 9:12हैं तो रोज़ अविर पैदा होगा अब यहाँ समझने जैसा हाँ आप इसको
- 9:21सर्कल में। 10 दिन का जब वीर इकट्ठा हो
- 9:26जाएगा, यह ऑटोमैटिकली ओज में परिवर्तित हो जाएगा, लेकिन फिर भी
- 9:38आप संयम बरतें हैं। क्योंकि ये 10 दिन के बाद भी वीर
- 9:44तो बनता रहेगा। वीर तो रोज़ बनता है आयुर्वेद के
- 9:50हिसाब से और मेरे हिसाब से मैं किसी भी चीज़ को बताने से पहले
- 9:57खुद आजमाता हूँ। के आयुर्वेद का ये कथन सत्य, रस,
- 10:04रक्त, मास, मज्जा, मेद, सत्यधातु। ये सातवीं धातु है बेर और सातवीं
- 10:14धातु है रस स्त्री मरीज बनता है सातवीं धातु।
- 10:22और पुरुष में व्यय बनता है। सत्य अब आठवीं धातु ओज, फिर इसे
- 10:33बनाई जा सकती है आठवीं धातु ओज। और राज्य से भी बनायी जा सकती है।
- 10:43स्त्री असमर्थ है। मासिक चक्र से पहले राज्य नहीं
- 10:49निकाल सकते हो, क्योंकि यह नेचुरल प्रक्रिया है।
- 10:58थोड़ा सा वृष का कथन थोड़ा आसान है।
- 11:00समझा दो स्त्री थोड़ी यज्ञ 10 दिन के बाद वह वास्प बनकर ओज बन ही
- 11:11जाएगा, लेकिन उसके बाद आप संयम रखें।
- 11:18बहुत से टीन एजर्स को स्वप्न दोष हो जाएगा, लेकिन घबराना मत हो।
- 11:26जाने दिन वह अध्यात्म के हिसाब से विजातीय दुर्वे है।
- 11:40अवांछित तत्व रह गए हैं जो वांछित थे यानी ओज था।
- 11:47वह सहसरार में चला गया यानी न्यूरोस में चला गया यानी नर्वस
- 11:51सिस्टम में चला गया। पुरुष के अंदर ये बड़ा सामान्य सा
- 12:00है। अब स्त्री की बात करें।
- 12:07स्त्री का राज़ बनता है 28 दिन में पूरा संपूर्ण और एकबारगी चार
- 12:135 दिन में निकल जाता है। चौदहवे दिन एवोल्यूशन की
- 12:21प्रक्रिया होती यानी। औबरी से अंडा निकलने की प्रक्रिया
- 12:26को एवोल्यूशन कहते हैं। वह अंडा एक निकले, दो निकले या
- 12:34ज्यादा निकले? इतने दिन तक वह रच अपने आप ही।
- 12:46ओझ बनता रहेगा। अब आप समझना थोड़ा समझ लो, गंभीर
- 12:53आ जाएगा। रज तो निकलेगा ही, राज्य ओझ में
- 12:59परिवर्तित होगा ही, लेकिन स्त्री खोयेगी क्या?
- 13:05ये प्रश्न ठीक पूछा बेटी ने संभोग के दौरान तुम बहुत कुछ खो देते हो
- 13:19इसलिए ऋषियों ने। वीर को बचाने के लिए क्षरण रोकने
- 13:32के लिए आपसे बात करें। वीर में खनीज भी होते हैं, पानी
- 13:38तो होता ही है, प्रोटीन भी होता है।
- 13:46इन सब चीजों के अलावा पांच हार्मोन होते हैं पांच हार्मोन
- 13:55डोपामिन, सैरेटोनिन, ऑक्सीडोसिन। डोपा में निकलता है हमारे ब्रेन
- 14:09के हाइपोथैलमिस से और दूसरा हार्मोन है ऑक्सीटोसिन।
- 14:23यह निकलता हमारी पिचुएट्री ग्रांट्स से।
- 14:29हरे से रंग के होते है प्रोलेक्टिन यह भी प्यूट्री
- 14:33ग्रैंड से आता है एंडोर फेंस यह एनल जैसिक दर्द को राहत देने
- 14:42वाला। आपके नर्वस सिस्टम से प्रीमियर
- 14:51ग्रैंड से पिट्यूटी ग्रैंड से हाइपोथेल्म से आपके ब्रेन से आपके
- 15:01नर्वस सिस्टम से ये सारे हार्मोन। कहाँ जाते हैं?
- 15:12संभोग के दौरान यह सिस्टम इनको रिलीज करता है।
- 15:20अगर तो आप। इनका लाभ उठाते हैं, लेकिन आप लाभ
- 15:30नहीं उठाते। यह नर्वस सिस्टम से निकल के जाता
- 15:34है। ब्लड में और ब्लड चार 5 घंटे बाद
- 15:39इन्हें एस्क्रिट कर देता है तोड़ के, तो आपने गंवाए ये पांच
- 15:45हार्मोन? ऑक्सीटोसिन को आया केरोटोनिन को
- 15:55आया डोपामाइन को आया पुष्करन को आया प्रोलेक्टिन ये सारे हार्मोन
- 16:05आपको खुशी देने वाले या दर्द से राहत चलाने वाले होते हैं।
- 16:12हाँ, ज़रा सोचो उन्मुक्त यौन की बात करने वालो, अगर तुम यौन में न
- 16:23उतरते रहे तो ये तुम्हारे भीतर संरक्षित रहता ना?
- 16:33उपवास रखने से क्या फायदा होता है?
- 16:39उपवास रखने के भीतर के यंत्र 1 दिन काम नहीं करना पड़ता।
- 16:46जैसे आप 5 दिन काम करते करते थक जाते हैं।
- 16:492 दिन आराम लेकिन भीतर के सभी यंत्रों को आप आराम देते हैं, वह
- 16:58भी थकते हैं। हार्ट भी रात को आराम ले लेता है।
- 17:05धीमे धीमे चलता है, आराम से चलता है, सांस भी आराम ले लेती है,
- 17:11फेफड़ी भी आराम लेते हैं। हमारे भीतर के तत्वों को और गन्स
- 17:20को भी आराम की जरूरत होती है। अगर आप इन हार्मोन्स को अपनी
- 17:30दूसरी खुशी के लिए प्रयोग करते दूसरी खुशी का है जैसे मैं आनंद
- 17:35कहता हूँ अगर आप इनको। एग्जेक्यूलेट ना करते इवैक्यूलेट
- 17:43ना करते एकसेकृत ना करते बाहर ना निकालते वो तो सृजित ना करते
- 17:50फेंकते नहीं बाहर तो ये कहाँ रहता?
- 17:54ऊपर से तो आया नहीं। शरीर ने अपनी ही किसी चीजों से
- 17:59बनाया। ये सारे हार्मोन आपकी फैक्टरी ने
- 18:08चाहे हाइपोथेल्मस ने बनाया, चाहे ने बनाया या किसी भी ग्रंथी ने
- 18:19बनाया। अगर वो भीतर स्टोव रहता तो किस
- 18:29में तब्दील हो जाता? अगर आप वीर को बाहर न निकालोगे तो
- 18:34किस में तब्दील हो जाएगा फौज में? वह ओझ जिसे डॉक्टर कहेंगे, दिखा
- 18:43इनको नहीं और डॉक्टर ने कह दिया कि कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर फर्क
- 18:52नहीं पड़ता तो फिर संभोग के फौरन बाद तुम निढाल क्यों जाते हो?
- 19:02वो कौन सी एनर्जी है जो आप से छीन ली जाती है और आपको शरीर कहता है
- 19:08आप आराम कर लो, कुछ तो खोया आपने। और अक्सर ज्यादा बहुत करने वाले
- 19:19लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं जबकि ब्रह्मचारी व्यक्ति बहुत सहनशक्ति
- 19:33का मार्ग होता है। वह बर्दाश्त करने की क्षमता
- 19:39प्रचुर मात्रा में रखता है, लेकिन गृहस्थ व्यक्ति संभव करने वाला
- 19:47व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाएगा। आजकल बड़ी ऐसी वीडियो चल रही हैं।
- 19:5417 की उम्र में अगर तुम फिर बाहर न निकालोगे तो क्या होगा?
- 19:57क्या होगा? बताओ क्या होगा?
- 20:03नली फट जाएगी। इन लोगों को पूछना चाहिए कि आप
- 20:10प्रमाण दो। अन्यथा आप पर कार्रवाई होगी।
- 20:22बताओ 29 वर्ष की उम्र में बुद्ध ने घर छोड़ा, संभोग का आनंद ले
- 20:32लिया, बच्चा हो गया, राहुल पैदा हो गया उसके बाद?
- 20:38वह दूसरी खोज में लग गया, मिल भी गया।
- 20:4180 साल का हो के मरा एक बार भी उसने वीर को एक्स्क्रिट नहीं किया
- 20:53तो क्या नाली फट गई? महावीर भी ऐसे हैं।
- 21:05ऐसे ही राम कृष्ण फरमान शारदा के साथ शादी करने के बाद भी जीस कारण
- 21:15के लिए वीर और अण्डानु बनता है बच्चा पैदा करना।
- 21:21अब खून से तो बच्चा नहीं भरता, रस रक्त माँ समझ जा मेद और बेरे
- 21:31बनेगा और उधर से ही अंडानु बनेगा, दोनों मिलेंगे तो बच्चा भरता
- 21:37होगा। यह प्रोसेसर है?
- 21:39नेचर के तो ये बच्चा पैदा करने के लिए बनाई अगर स्त्री भी इसीलिए
- 21:52दिगम्बर जैनियों ने। इसी कारण से कहा कि स्त्री नहीं
- 21:57पहुँच सकती जबकि सिर्फ ओज ही कारण नहीं है पहुंचने का हाँ 50% काम
- 22:07ओज का है और यह कोई कम नहीं है। क्योंकि दिगंबर जानते तो हैं नहीं
- 22:16थे श्वेता अंबर ज्यादा समयदार थे। दिगंबरों ने कहा स्त्री नहीं
- 22:23पहुँच सकती, क्यों नहीं पहुँच सकती?
- 22:25सिर्फ इसी कारण से कहा मैंने मासी के चक्कर में उसका बहुत सा खून और
- 22:30राज्य निकल जाता। वह शक्तिहीन हो जाती है और ओज
- 22:38नहीं बन पाता और पहुंचे कि कैसे उन्होंने ओज को 100% समझ लिया,
- 22:44जबकि सो नहीं है। ओज 50% है।
- 22:55लेकिन श्वेताम्बर ज्यादा समय दर्द है।
- 23:01श्वेताम्बर ने कहा बिल्कुल कौन हो सकती है क्योंकि वह जो राज्य है
- 23:10वो भी 10 दिनों के बाद। खोज में परिवर्तित हो जायेगा।
- 23:14अपने आप और वीर भी अपने आप परिवर्तित हो जायेगा, लेकिन तुम
- 23:23तो जल्दबाजी करते हो उस परमपिता परमात्मा की।
- 23:32दूर से जलक देखने के लालच की वृत्ति या वृत्ति गलत तो नहीं है।
- 23:38परमात्मा के दर्शन करना चाहते हो तुम उस गौरीशंकर का दूर से इसलिए
- 23:45आनंद आता है उस परिस्थिति में। यह शरीर पांच चतरा के हार्मोन से
- 23:52छोड़ता है और ये सारे आनंददायक हैं।
- 23:55तो आपको आनंद आता है, वैरी के निकलने से नहीं, स्त्री के भीतर
- 24:05भी कुछ द्रव निकलते हैं। लेकिन आनंद उस द्रव के निकलने से
- 24:15नहीं जाता। अब ये थोड़ी सी गलतफहमी मैं
- 24:19निकालता हूँ इस द्रव के निकलने से के निकलने से।
- 24:26या स्त्री भी जैकुलेट होती है तो द्रव निकलता है लेकिन उस कारण से
- 24:35जो जीसको आप मज़ा कहते हो वो नहीं आता तो मज़ा कैसे आता है?
- 24:41मज़ा आता है जो आपका ब्रेन सिस्टम नर्वस सिस्टम।
- 24:46यह हार्मोन को एक्सक्रीट करता है। डोपामीन निकालता सैराटोनिन
- 24:52निकालता पग्सिटो से निकालता प्रोलेक्टर निकालता आदमी में
- 25:01टेस्टोस्टोरण और। इससे में एस्ट्रोजन ये सारे खून
- 25:12में एकदम से मिल जाते हैं। बड़ी तेजी से सारी प्रक्रिया होती
- 25:18है तो जल्दी से नर्वस सिस्टम। खून में सभी आनंद देने वाले ये
- 25:26आनंद देने वाले हार्मोन है चाहे प्रोलेक्टिन हो चाहे ऑक्सीटोसिन
- 25:33हो, सैरेटन हो, डोपमीन हो, इनके कारण आनंद आता है आपको।
- 25:44शायद आज तक आपके भीतर भ्रांति ही बने हुए थे और बहुत से लोगों ने
- 25:49यह भ्रांति कि वीर की एक्सेक्रेशन से आनंद आता है नहीं, वीर तो जस्ट
- 25:58एक फ्लूट है, उसमें एनर्जी है। उसमें प्रोटीन है, उसमें कुछ खनीज
- 26:05है और उसमें स्पर्म है लेकिन जैसे ही वो सारी चीजें निकलती हैं
- 26:17जैकुरेशन के दौरान। यह ब्रेन सिस्टम एकदम से त्वरित
- 26:26एक्शन में आ जाता है और आनंद आपको वीरे के निकलने से नहीं आता
- 26:35क्योंकि आपको पता नहीं समझाया नहीं क्या?
- 26:41और बिटिया ने कहा कि तुम भी साइंस पढ़े हो तो पढ़ा तो हूँ मैं,
- 26:44लेकिन मैं ये साइंस की बात है, ये साइंस से परे की बात है।
- 26:53साइंस से परे की बात है। इसलिए डॉक्टर कह देंगे, कोई बात
- 27:01नहीं वेरे निकलता है, निकल जाने दो, राजू भी तो निकलता है निकलता
- 27:07है, लेकिन इस प्रोसेसर को कौन जानता है कि 10 दिन के बाद रज भी
- 27:13ओज में तब्दील हो जाता है। 30 दिन में तीन बार रज।
- 27:18कॉनवर्ट हो जाता है अपने आप जब वो निकलता है तो फोकट मटेरियल होता
- 27:24है, फिस्कल मैटर होता है, फोकल मटेरियल होता है, वीजा तीर द्रव
- 27:33पे होता है, फॉरेन मैटेरियल होता है।
- 27:41जैसे आप रस निकालो संतरे का, लेकिन थोड़ा सा फलूदा बन जाए होता
- 27:51तो उसमें भी कुछ है। तो जो वीर्य निकलता है, जोरा जी
- 27:57निकलता है होता तो उसमें भी है, एनर्जी होती है, बाकी के खनीज
- 28:04होते हैं, प्रोटीन्स होता है, पानी होता है और बहुत सी चीजें जो
- 28:12आप खो देते हों, अगर ये भित रहती तो?
- 28:17और उस क्षण में क्या होता है कि इस प्रोसेसर के द्वारा अगर ये
- 28:24प्रोसेसर न होती तो हमारा ब्रेन का जो सिस्टम है वो बनाता?
- 28:33प्रोलेक्टिन बनाता, डोपामिन बनाता, केरटोनिन बनाता,
- 28:37ऑक्सिडोसिन बनाता और ये दिमाग के भीतर जज़ब होते रहते है, स्टोर
- 28:43होते रहते है। अगर साइंस में ही समझना चाहते हो
- 28:49तो यही है आनंद। यह जो हमारा ब्रेन सिस्टम
- 28:58हाइपोथैलेमिस्ट पीचट्री ग्लैंड पीनियल ग्लैंड रिलीज करते हैं।
- 29:04ये हार्मोन इसी को आनंद कहते हैं। अगर साइंटिफिक भाषा में समझना
- 29:12चाहते हो लेकिन। थोड़ी सी परे की बात है, भाषा में
- 29:18समझाने का यत्न करता हूँ लेकिन पूरा नहीं समझा पाऊंगा क्योंकि
- 29:23थोड़ी सी परे की बात रह जाएगी। तो आपको जो आनंद आता है वो बीरे
- 29:30के कारण नहीं आता? पहली बात तो ये समझ रहा हूँ राज्य
- 29:33के निकलने के कारण नहीं आता। यह संभोग के कारण स्त्री के भीतर
- 29:41से जो द्रव्य निकलता है, उसके कारण नहीं आता।
- 29:47स्त्री भी खोती है यूनिक लुब्रिकेशन द्रव्य?
- 29:56गर्भाशय का मुक्त सर्वेक्षण और सेकंड ग्रंथियों का द्रव्य है
- 30:04फीमेल एग्ज़ैक्लेशन कहते हैं ये कुछ स्त्रियों में निकलता है।
- 30:13लेकिन असली जो तुम खोते हो वह ये तो है रज जब निकलता है तो उसमें
- 30:27से। ये अपने आप ही इसलिए औरत को
- 30:32सौंदर्य दिया गया, आपको पता नहीं इसका कारण क्या है?
- 30:38वह हर 10 दिन के बाद रज से अपने आप बना हुआ ओझ है, जिसे लवण्य
- 30:45कहते हैं। लेकिन आज ये सभ्यता खानपान खराब
- 30:55होने के कारण वो लावण्य समाप्त हो गया।
- 31:01अब जितनी भी सुंदर स्थितियां हुई हैं, सीता को ब्रह्मास्त हो गया।
- 31:05अब वनवास में खाने को क्या था? लेकिन उसने लवण्य नहीं खोया और
- 31:13बहुत से लोग मुझे प्रश्न कर देते हैं कि हर माह स्त्री को राज़
- 31:20निकलता है तो खाने को वहाँ कुछ है नहीं।
- 31:23विशेष। तो फिर सीता सुंदरी कैसे रह जाती
- 31:27है? बस वो राज्य जो है वो ओज में
- 31:30परिवर्तित हो जाता है। ऑटोमेटिक यह स्त्री के लिए एक
- 31:33वरदान पुरुष में ऐसा नहीं होता। पुरुष को बचाना पड़ता है।
- 31:46इसलिए स्त्री को ब्रह्मचर्य की शिक्षा नहीं दी गई।
- 31:52जानते हैं ऋषि के स्त्री के राज्य से हर दसवें दिन ओझ निकल जाएगा,
- 32:00अपने आप रह जाएगा। फलूदा वेस्ट मटेरियल वह निकल ही
- 32:07जाएगा। निकल जाने दो जैसे आप सुबह माल
- 32:11मूत्र का त्याग करते हो, कभी रोते चलाते हो, बस ऐसे ही राज़ फोकट हो
- 32:18जाता है और। इसी कारण से क्योंकि प्रकृति ने
- 32:26स्त्री को एक वरदान रूप में ये चीज़ दे दी।
- 32:31स्त्री में सौंदर्य का छलकन आता है।
- 32:39शायद आपको कोई डॉक्टर नहीं बता पाएगा।
- 32:44लेकिन मैंने आपको साफ कर दी बात स्त्री क्यों सुंदर होती है?
- 32:56और विशेषता जब उसे पीरियड से शुरू होते हैं तो दिन पर दिन ज्यादा
- 33:01सुंदर होती जाती है। कारण कारण इस रज का तकदीर होना।
- 33:08ओझ अपने आप सोता है, यह प्रकृति का एक वरदान भी है।
- 33:14अक्सर स्त्रियाँ से शराब समझ लेती हैं।
- 33:18आज मैं ये भ्रम भी निकाल देता हूँ स्त्रियों के लिए राजकाज निकलना,
- 33:23शराब में ये तो फोकट है, निकला ही था।
- 33:27इसका कोई काम भी नहीं है वह जो पीरियड्स के बीच के दिन हैं।
- 33:3328 दिन का है पीरियड तो चौदहवे दिन 32 का है तो सौरवे दिन उसमें
- 33:40से एक अंडा निकलेगा और इस और गरबाशे में चला जाए अगर वहाँ पर
- 33:50स्पर्म मौजूद है। तो दोनों के मिलन से बच्चा पैदा
- 33:55हो जाएगा। अब आपको समझ आ रही है ना लेकिन
- 34:00पुरुष के लिए थोड़ा मुश्किल है इसलिए पुरुष के लिए गुरुकुल बनाने
- 34:04पड़े ऋषि जानते थे स्त्री को। राज्य बजाने की आवश्यकता नहीं।
- 34:15प्राकृतिक सिस्टम ही ऐसा है स्त्रियों को रिवार्ड के रूप में
- 34:19मिला है। पुरुष को रिवार्ड के रूप में
- 34:26मेहनत करना पड़ेगा। थोड़ा।
- 34:31इसलिए आपको स्त्री ज्यादा शांत नजर आई।
- 34:38ये माना ये जो संख्या है गुणसूत्रों की क्रोमासन इसके।
- 34:49वो बराबर होती है 2323 और पुरुष में थोड़ा गड़बड़ हो जाता है।
- 34:58एक गुणसूत्र एक पाठक और एक वाय। उसके कारण भी थोड़ी सी चंचलता आती
- 35:06है। लेकिन मात्र वही कारण नहीं है।
- 35:11इस के भीतर क्रोमोसोम का एक्स होना उसको शांत करता है, लेकिन
- 35:18दूसरा मुख्य कारण डॉक्टर खोज नहीं पाए।
- 35:23करियेगा रिसर्च। सिस्टम मैंने बता दिया है 1 दिन
- 35:33पाजी हो गए। स्त्री ज्यादा आप देख रहे हो।
- 35:38गर्भावस्था में स्त्री ज्यादा सहज हो जाती है, कभी देखा आपने?
- 35:48गर्भ अवस्था में स्त्री ज्यादा सहज हो जाती है, ज्यादा सरल हो
- 35:53जाती है, ज्यादा सित्र हो जाती है क्यों?
- 36:02क्योंकि कुछ भी एग्जीक्यूलेट नहीं होता।
- 36:08संभोग के दौरान जो द्रव। एक्स्क्रिट होता था जैसे पुरुष का
- 36:17वीर। ऐसे ही स्त्री के भीतर से भी एक
- 36:21अद्रव निकलता है, वह इजैकुलेशन नहीं होते तो आटोमेटिक ही नूर आ
- 36:29जाता है। वो बच जाता है।
- 36:34बच्चा जो पैदा होता है, खुराक से जो कोण बनता है, उसके सारे अंग
- 36:39प्रकृति के द्वारा शोषित हो जाते हैं, पुरुष का ढांचा अलग है,
- 36:47स्त्री में एस्ट्रोजन होता है। पर पुरुष में टेस्टस्टे रण होता
- 36:52है लेकिन ये पांच हार्मोन हमारी खुशी के लिए बड़े मायने रखते हैं।
- 37:04आपको जो मज़ा आता है। और बेरे के निकलने का नहीं आता,
- 37:12आप देख ना बेरे तो सपन तो उसमें भी निकल जाता है, उसमें मज़ा नहीं
- 37:17आता, लेकिन संभोग के दौरान मज़ा आता है।
- 37:22कारण? स्वप्न दोष में आपके ये हार्मोन
- 37:27नहीं पैदा करता, नर्वस सिस्टम स्वप्न दोष में लड़कों के हार्मोन
- 37:37नहीं क्रियेट करता, नर्वस सिस्टम न हाइपोथैलमस।
- 37:44न पीनियल न पिचटरी। ये वो द्रव्य नहीं पैदा करते,
- 37:51हार्मोन नहीं पैदा करते, जो आपकी खुशी के लिए जिम्मेदार हैं।
- 37:56आनंद के लिए जिम्मेदार है, शांति के लिए जिम्मेदार है।
- 38:00स्त्री के तीन प्रकार के द्रव निकलते हैं।
- 38:03बारथोलीज़ ग्लैंड्स और फीमेल एक्ज़ैक्लेशन ये तीन प्रकार के
- 38:10द्रव निकलते हैं। पुरुष में से जेरी निकलता है,
- 38:15खनीज निकलते हैं, प्रोटीन्स निकलते हैं।
- 38:22और भी कुछ मात्रा के द्रव्य निकलते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी
- 38:27हैं। वाटर तो होता ही है लेकिन इतना
- 38:32नहीं निकलता कि डिहाइड्रेशन हो जाए।
- 38:39इसको बचाना। इसलिए जरूरी था स्त्रियों को
- 38:43ब्रह्मचर्य का ज्यादा संदेश नहीं दिया गया।
- 38:48स्त्री को शक्ति संपन्न कहा गया, जबकि उससे लोग पूछ लेते हैं कि
- 38:54स्त्री की शक्ति तो हर महीने निकल जाती है यह प्राकृतिक रूप से।
- 39:04स्त्री का ढांचा है जो प्रकृति निभ रहा है।
- 39:09राज्य निकलने से तो उसके सौंदर्य में वृद्धि होती है।
- 39:13यह तो सहायक है और आनंद में वृद्धि होती है।
- 39:19क्योंकि उस दौरान अब थोड़ी सी बात और समझ रहे हैं।
- 39:28यह जो मार्सिन की तरह का हार्मोन होता है, पीरियड्स के दौरान,
- 39:39हमारे प्रेम में से नर्वस सिस्टम में से?
- 39:44यह हार्मोन भी निकलता है पीरियड्स के दौरान ताकि दर्द कम हो।
- 39:52अगर ये द्रव न निकलता एंडोरफिन यह मार्फिन का ही ₹100।
- 40:00तो पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द होता आपका अब भी बहुत सी स्त्री
- 40:05है। पीरियड्स के दौरान एनाल जैसी का
- 40:07उपयोग करते हैं, लेकिन प्रकृति अपना उपाय करती है।
- 40:13प्रकृति एन्डोफिन निकलती है उससे आपके दर्द में बड़ी राहत मिलती है
- 40:18आपको? लेकिन फिर भी आप इतना दर्द भी सहन
- 40:26नहीं कर सकते इसलिए बाहर से एनर्जेस लेना पड़ता है आपको।
- 40:38अब विस्तार से हम बताएं सारी चीज़ राष्ट्र रूप में पहली बात तो
- 40:44वेर्य और राज्य के निकलने से आनंद नहीं आता।
- 40:51आपको आज तक ये था? कि शायद हम मस्टरबेट करते हैं,
- 41:00हस्त महसूस करते हैं, उससे जब बीरी निकलता है तो पी के पॉइंट पे
- 41:04जाकर हमें आनंद आता है। वीरी के निकलने के कारण है।
- 41:09जैसे ही वीरी निकलने लगता है। या स्त्री अपने चरम पीक पे होती
- 41:16हैं तो उसको तो मैंने बताया कि तीन तरह के गेरा से निकलते हैं और
- 41:27आदमी के भी और स्त्री के भी ये पांच प्रकार के हार्मोन
- 41:34जिम्मेवारें हैं आपकी आनंद और खुशी।
- 41:39सेराटोनिन हो, डॉक्यूमेंट हो, ओक्सेडोफिन हो, एंडोफिन हो स्त्री
- 41:56के टेस्टोस्टेरोन की जगह। एस्ट्रोजन निकलता है, पैदा होता
- 42:02है। यह ब्रेन पैदा करता है और ब्लड
- 42:06में धड़ाधड़ फेंकना शुरू कर देता है।
- 42:12इसलिए चार 5 घंटे तक यह ब्लड के अंदर रोटेट होता है।
- 42:17आपको इसका मज़ा आता है क्योंकि यह हार्बों जो मज़े के हार्बों हैं,
- 42:26काश ये शरीर में ही बने रहते हैं। आप किस्तों में लुत्फ उठाते हो।
- 42:38एक बार संभोग कर लिया, थोड़ा सा हार्मोन्स रिलीज़ हुआ, आपको खुशी
- 42:46मिली, प्रसन्नता हुई, शांति हुई, आनंद आया लेकिन ब्रह्मचारी संत?
- 42:54इसको स्टोर करता है, कुआं बनता है, तालाब बनता है, समुद्र बन
- 43:06जाता है। बुद्ध जैसे लोग आनंद ने बुद्ध से
- 43:12कहा भैया मेरी शर्त है। मैं आपका शिष्य तो बन जाऊंगा
- 43:18लेकिन एक शर्ते हैं, मैं बड़ा भाई हूँ, तुम्हारे सोचने का क्या
- 43:24बनते? आपकी क्या इच्छा है?
- 43:27मैं सदा आपके साथ रहूँगा, चौबीसों घंटे बहुत जानते हैं, ये क्यों
- 43:34पूछ रहा है? आनंद देखना चाहता है कि क्या होगा
- 43:39वासना? लेकिन इसको पता नहीं कि वासना में
- 43:46जो सुख मिलता है, आत्मज्ञान में उसे हजारों गुण ज्यादा सुख मिलता
- 43:50है। परमात्मा ज्ञान में तो अनंत गुणा।
- 43:54अनंत तो यानी असंख्य गुणों आनंद मिलता तो वह क्यों शूद्र को पीना
- 44:03चाहेगा? वह रात को छोड़ते हैं और जिसने
- 44:06जान दिया शरीर मैं नहीं हूँ वह जरूर ही जीवक के द्वारा स्वादिष्ट
- 44:11पदार्थों को ग्रहण करेगा। इसलिए बुद्ध को याद नहीं आते।
- 44:18वो राजसी पकवान 3600 प्रकार के भोजन नहीं याद आते, जो जैसा
- 44:24भिक्षा पात्र में डाल देता है वो कर देता है क्योंकि वह जानता है
- 44:29यह जीवन के लिए है स्वाद के लिए नहीं है।
- 44:33स्वाद को जो टेस्ट बढ़ते लेते हैं हमारी जीवा के, वह तो इंद्रियों
- 44:37का टेस्ट है। आपकी स्किन जो स्पर्श का आनंद
- 44:43लेती है, आँखें जो दृश्य का आनंद लेती हैं कहाँ जो श्रवण का आनंद
- 44:48लेते हैं। संभोग में जो इजैक्यूलेशन का और
- 45:00इन हार्मोन की रिलीजिंग का जो आपको सुख मिलता है वह क्यों लेना
- 45:07चाहेगा बुद्ध? क्योंकि आत्मज्ञान से बड़ा आनंद
- 45:12है, आपका संभव कर आनंद नहीं, यही मैं कहता हूँ, जब हीरे द्वारा दिख
- 45:19जाए तो फिर आप रेत इकट्ठा नहीं करोगे।
- 45:26कौन रेत को इकट्ठा करेगा? जब सामने हीरे मोती ज्वारथ पड़े।
- 45:34जब आत्मज्ञान का आनंद सहस्त्र गुणा होता है तो आवश्यकता क्या
- 45:41है? क्यों भटके?
- 45:47इसलिए मैं बार बार बोला। सभी वीडियो में बोला बहुत खोल के
- 45:51बोला के लक्षणों को देख लेना भाई मुझे लोग पूछते हैं गुरु कैसे
- 45:57बनाएं? मैंने कहा लक्षणों को देखा क्या?
- 46:02इसने शुद्र भोगों का त्याग कर दिया।
- 46:05अगर कर दिया तो इसने। बड़ा भोग पा लिया जीवन के भीतर
- 46:14उतरना, उसकी जीवनचर्या को देखना, उसके आसपास रहने वाले लोगों से उस
- 46:19व्यक्ति की दिनचर्या पूछना क्या यह भटकता है?
- 46:25क्या यह स्वाद लेने के लिए किसी इंद्री का प्रयोग करता है?
- 46:32अगर नहीं करता तो वह गुरु बनने के जोक नहीं, सीधा सीधा फॉर्मूला मैं
- 46:40आपको बता बहुत बार पहले भी बताएं। तुम्हारी इंद्रियों के स्वाद,
- 46:48नेत्रों से ऑब्जेक्ट का दर्शन, वस्तु का दर्शन, कानों से रस का
- 46:58पान, जीवा से स्वाद का पान। सपर्शिका त्वचा से और इंद्रा से
- 47:11संभव गपन छूट जाएगा जब आप 1000 गुना ज्यादा आनंद पा लेंगे।
- 47:27आप छोटे आनंद की तरफ जाएंगे नहीं, आपका मन ये जो शांत दो दो बच्चे
- 47:33पैदा कर देते हैं। यह सिर्फ प्रकृति के विधान को
- 47:36पूरा करने के लिए कबीर के दो बच्चे हैं नान के दो बच्चे।
- 47:41राम के द्वज कृष्ण की बात कुछ मैंने पहले भी बताई।
- 47:46उस वक्त युद्ध में लोग मारे गए थे, पुरुषों की कमी थी इसलिए उसको
- 47:52बच्चे पैदा करने पड़े। ये एक्सट्रॉर्डिनरी थोड़ा
- 47:58एक्सेप्शनल केस है। स्वाद के लिए उसका तो जीवन ही
- 48:07आनंद में लहलहाता हुआ जीवन है। अगर आवश्यकता महसूस होती है अभी
- 48:18गुफाएं बनाई जाती हैं। अभी स्विमिंग पूल बनाए जाते हैं।
- 48:25उम्र हो गई है छ 80 तो मैं कहता हूँ इनको शर्म वगैरह मत दो, तुम
- 48:35देखो क्या है? ये व्यक्ति गुरु बनने के योग्य
- 48:37है, लेकिन आज भी शिष्य। तो ये खुद से तब्दील हो जाए तो हो
- 48:47जाए लेकिन इनको कहने का कोई फायदा नहीं होता।
- 48:54मैं सिर्फ आपको एक तथ्य बताऊँगा जिसने विराट समुद्र के आनंद को पा
- 49:00लिया। वह संभोग जैसे क्षुद्र आनंद को
- 49:04आएगा और वह भी बलात्कार को और फिर केस चलेगा पर झूठ बोलेंगे नहीं,
- 49:10हमने नहीं किया है कतरो गारित करेगा।
- 49:15आज भी इन महाशयों के ऊपर केस चल रहे हैं।
- 49:20जिनका फैसला आना बाकी मैं किसी और हिसाब से बोल रहा हूँ।
- 49:29मैं इस हिसाब से सीधी सीधी बात बोल रहा हूँ।
- 49:32जिसने समुद्र देख लिया वह ताल तडैया क्यों खुले?
- 49:42एक छोटी सी बात आपको बताऊँ हंस ब्रह्मचेहरे का पालन करता है।
- 49:49एक पत्नी व्रत है, शायद आपको पता नहीं हो पक्षियों में से हंस ही
- 49:57एक मात्र प्राणी है। जो अपनी स्त्री और स्त्री आदमी के
- 50:03प्रति वफादार होता है। अगर हंस का जोड़ा एक मर गया,
- 50:09दूसरा मर जाएगा। इसके बिछोड़े में यहीं से चली सती
- 50:17पर था। अगर इतना ही प्रेम हो तो सती
- 50:24धक्के से नहीं करना होता, जिसके लिए जीती थी स्त्री हो गया वह कुछ
- 50:34बात अलग थी। इसको प्रथा के रूप में डालना एक
- 50:38मूर्खत तो हंस और हंसनी का जोड़ा होता है और हंस हंसनी के प्रति
- 50:49वफादार हंसनी हंस के प्रति। और जब हंस मर जाता है या हंस नहीं
- 50:55मर जाती है तो दूसरा दम तोड़ देता है गृह।
- 51:03यही राम का चरित्र है ये कुछ फिलोसोफर टाइप लोग।
- 51:17मैं पढ़ रहा था हँसाने के लिए तो बोल सकते हैं लेकिन इनको मैं इस
- 51:22विषय के ऊपर बुद्धू कहता हूँ। ऐसे मजाक अच्छे नहीं होते।
- 51:32एक पूरे धर्म का मार्गदर्शक, एक पूरे धर्म का आइकॉन जीसको हमने एक
- 51:48पुरस्कार से नवाजा अलंकार से नवाजा।
- 51:53मर्यादा पुरुषोत मैं सुन रहा था कि खुद भी परीक्षा दी होती, सीता
- 52:05के साथ खुद भी प्रवेश करके होते। देखिये ये फैलोशिप भी कल बातें
- 52:10इनका जवाब। अगर देंगे तो बात बढ़ जाएगी।
- 52:20अध्यात्म मसले में विवाद नहीं होता।
- 52:23ये जो शंकराचार्य कहते हैं कि विवाद कर ले, शास्त्रार्थ कर ले।
- 52:28इनको मैं मूड पहले बहुत बार बोल चुका हूँ।
- 52:32क्योंकि अगर पता लग गया कि उसका कोई और छोर नहीं वह आनंद है, वह
- 52:36बराट है, विशाल है। पता नहीं कितने कितने कोसों
- 52:42मिलों, योजनों का उसका फैलाव विस्तार तो उसके बारे में और
- 52:47उसमें है क्या? क्या कुछ है जो छुपा हुआ है?
- 52:55मैंने जब तंत्र सीखना शुरू किया तो छोटी छोटी बातों का असर एक
- 53:00धागा बना लो छोटा सा वो धागा ही कड़ामात कर देगा लेकिन दुख की बात
- 53:08ये है। के आज इसको मुड़ताओ में टक लिया
- 53:11की कर्मकांडों में टक लिया। प्रत्येक व्यक्ति कुछ ना कुछ है,
- 53:14सफाई बता देता है और लाखों करोड़ों की संख्या उसके पीछे लग
- 53:19जाती है। बस सिर्फ ये सोच के कि उस विद्वान
- 53:25व्यक्ति ने भी तो टोटका बताया। लेकिन नहीं हमने टोटका तो बताया
- 53:30भाई ये परीक्षा करके बताया मानते तो हम भी नहीं साइंटिफिक बुद्धि
- 53:38नहीं माना लेकिन जब कहा हमारे मार्गदर्शकों ने, पर देखो आज
- 53:42मार्ग तो देखे, उसे कुछ लोग मारने भी पड़े।
- 53:50झूठ बोलने का फायदा क्या है? कुछ लोगों को तकलीफ भी देनी पड़ी।
- 53:56परीक्षण के लिए डॉक्टर क्या नहीं करते थे, कितने मेंढक मार दिए,
- 54:02कितने फ्रॉक काट गए, कितने रैबिट काट लिए, कितने कॉकरोच काट लिए
- 54:06हमने। परीक्षण के लिए सब करना पड़ता है
- 54:12जब तंत्र सीख रहा था, तो सारी चीजों का प्रयोग किया और देखा
- 54:17कैसे एक छोटी सी चीज़ विनाश कर सकती है जैसे एटम बम।
- 54:24और मालिक उन के भीतर एटम और एटम के भीतर इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन,
- 54:28न्यूट्रॉन और वो छोटा सा इलेक्ट्रॉन जो नजर भी नहीं आता,
- 54:34वो इतना विनाश कर देगा, आप सोच सकते हो ऐसे ही परमात्मा की
- 54:41सृष्टि विशाल है। इस पर प्रतिक्रिया या कमेंट करने
- 54:48की चेष्टा करना महा मूड का है। हाँ कुछ बातें होती है जैसे कोई
- 54:55दो और दो छः होते है, ये गलत है, यहाँ तो फिर बोलना ही पड़ेगा।
- 54:59समयदार व्यक्ति दो और दो छः नहीं होते।
- 55:03किसी भी हिसाब से नहीं होते, जमा करोगे, चार होते हैं, माइनस
- 55:07करोगे, जीरो होता है और गुणा करोगे तो भी चार होते हैं तो
- 55:13जानने वाला मैथ जानने वाला व्यक्ति कहेगा दो तो छः तो नहीं
- 55:17होता किस हिसाब से? तो यहाँ बोलना पड़ता है जब
- 55:24प्रेमानंद जैसे लोग कहते हैं कि ठाकुर गर्भवती करके नामदेव की
- 55:28माता इट्स आउट ऑफ सिलेबस। तो यहाँ तो हम बोलेंगे लेकिन जब
- 55:43हम कोई टोटका बताते हैं तो वो हमारा प्रमाणित होता है और
- 55:49तुम्हें बाध्य किसने किया? तुम 1000 बार कहते हो बाबा कोई
- 55:52टोटका जरूर बता दिया तो हम कभी कभार।
- 55:57वो योग आने पर यह सारा कुछ ठीक है।
- 56:00ऊपर अगर बाबा ने कहा ज्योतिषी नाम की कोई चीज़ नहीं थी तो उसका कारण
- 56:06उसका कारण बड़ा अजीब है। आप समझ नहीं पाओगे, बाबा कहते
- 56:10हैं, जब होना ही उसके करने से है तो तुमने लेना है क्या पूछ के।
- 56:16जो तुद पा वैसविक का जब होना ही उसकी इच्छा से है तो फिर तुमने
- 56:25पूछ के क्या लेना है की क्या होगा?
- 56:29इस कारण से बोलते हैं की एस्ट्रोलॉजी वगैरह छोड़ो।
- 56:35ये पानी सूर्य तक नहीं पहुंचता ठीक लेकिन पानी का जो हक है सुबह
- 56:40का, वह आँखों को ताकत देता है। ये एक साइंटिफिक बेहतर है।
- 56:47मुक्त समझा रहे थे तो वैसे ही पानी को गिरा देते हो।
- 56:51ये लोग सूरज के पास चला गए। ये गलत है।
- 56:55पानी को भराओ उसकी दारा आँखों के बीच में जाएं सुबह है के सूर्य की
- 56:59किरणों को क्रॉस करके तो उसमें कुछ ऐसी करने निकलेंगे जो आपकी
- 57:06आँखों को बलवती करें। ये कुछ बातें अलग थीं।
- 57:11अगर थोड़ा सा इसमें से फॉर्मूला निकाल लिया जाए तो सब गडबड हो
- 57:15जाता है। बड़ी महीन बातें हैं, बड़ी बातें
- 57:21वह विराट है, वह विशाल है, आपको तो इतना भी नहीं पता?
- 57:30हम भी ऐसे ही थे कि वो है भी कि नहीं।
- 57:34मस्त थे, फराक काटा करते, रैबिट काटा करते कुछ नहीं पता था, बस
- 57:42जनून था कि डॉक्टर बनना है लेकिन उसकी लीला?
- 57:53नगरी मोख द्वार। उसकी नजर वह क्यों नजर करता है यह
- 57:59तो वो ही जानेगा। उसकी बातों को मैं नहीं कह सकता
- 58:07ताकि यह गला कथिया न जाए। ये को कहें पीछे पक्षता क्या
- 58:15कहें, उसके बारे में एक बाल नहीं बना सकते।
- 58:19आप बना के दिखा दीजिए, ये बता सकते हो कि बाल में कौन कौन से
- 58:25तत्व हैं, ये बात अलग है। ये तुम्हारी बुद्धि बताएंगे,
- 58:30लेकिन वह विषय विषय नहीं है। वह अनुभव है और वो हो ऐसा है अगर
- 58:46किसी व्यक्ति ने इतना आनंद चख लिया।
- 58:52वह क्यों शूद्र क्यों इकट्ठा करेगा?
- 58:59वह क्यों इकट्ठा करेगा? क्यों झूठ बोलेंगे झूठ?
- 59:04तो वह बोलेंगे जीसको ये भ्रम है कि जो मैं जोड़ूंगा वो श्रद्धा के
- 59:09लिए जुड़ूंगा और साथ लेके जाऊंगा। ना तो श्रद्धा के लिए जोड़ा जाता
- 59:14है ना साथ लेकर जाया जाता है तो फिर ये भ्रम है।
- 59:18अब उसका तो पालने दो ना तो साथ जाएगा, जो इकट्ठा करेगा सब यहाँ
- 59:31छूट जाता है। तो बाबा कहते हैं कि जो हो ही
- 59:42जाएगा, मुझसे लोग पूछते बच्चे पूछते बाबा शाम को रिज़ल्ट आने
- 59:47मैं पास हो जाऊंगा, फैल हो जाऊंगा।
- 59:52अभी किसी स्त्री ने पूछ लिया मैं पहुंचूंगी नहीं पहुंचूंगी मैंने
- 59:58कहा भाई ये तो यहाँ पता लगेगा माथे पे हाथ लगा के कितनी ऊर्जा
- 1:00:03तुम्हारी उर्द गमन हो गई, दूर बैठे मैं कैसे जाऊं?
- 1:00:13जब बुलाया जाए बैच तो तुम भी आ जाना मैं देख के बता दूंगा कि
- 1:00:20पहुंचोगे भी कि नहीं लग जाता है पता है आभाएं बदल जाती हैं औरे
- 1:00:27बदल जाते हैं। बहुत सी चीजें हैं।
- 1:00:29किस किस को विस्तार करें। बस ज्यादा विस्तार मांगने की बजाय
- 1:00:36ये चीजें विस्तार के लिए होती नहीं जिसमें तुम अटकी पड़ी थी ना
- 1:00:40बेटी हरिंदर कौर ये बातें अटकने वाली हैं नहीं।
- 1:00:48मैं तुम्हें इन बातों से मुक्त करना चाहता हूँ।
- 1:00:51तुम फिर धस्ती जाते हो, उसमें ये बता दो बाबा फिर ऐसा कैसे होता
- 1:00:57है? तो विज्ञान का विषय उनसे पूछ लो,
- 1:01:03जो चीजें मैं बता सकता हूँ आप समय का सदुपयोग क्यों नहीं करता?
- 1:01:08क्या मैं सदा रह जाऊंगा? कोई अच्छा प्रश्न नहीं पूछा जा
- 1:01:12सकता। अब मैंने प्रश्न का जवाब दे दिया,
- 1:01:16अब प्रताड़ित करता हूँ। जरूर ही यह प्रश्न पूछना और इससे
- 1:01:23तुम्हें सुख मिलेगा। इससे तुम्हें अपने आप को जानने
- 1:01:31में क्या मदद मिलेंगे? क्या बताओ मुझे अगर तुम उपदेश को
- 1:01:36ग्रहण करो तो उपदेश को बस यही ग्रहण करो के संभोग की अवस्था में
- 1:01:41न जाओ। इतना सा उपदेश अगर तुम ग्रहण कर
- 1:01:44लो तो मेरा बोलना सार्थक हो गया लेकिन ऐसे विषय मुझे पूछने के
- 1:01:50नहीं होते। मुझसे अगर जानना है तो एक ही बात
- 1:01:54जानो पहली बात क्या परमात्मा है? बस ये बात मुझसे पूछने वाली है,
- 1:02:00ये और कोई न बता सकेगा। न मार्कस पतंजलि बताएंगे,
- 1:02:08जाग्याबल के बताएंगे कृष्ण बताएंगे लेकिन तुम्हारी चारवां
- 1:02:14नित से ये न बता पाए तो अगर पूछना है कबीर से तो पूछो पर महत्त्व
- 1:02:21है? ये है पूछने योग्य प्रश्न झूठ
- 1:02:27कबीर बोलता नहीं सबसे पहला नियम है सत्य, अहिंसा, अस्ते,
- 1:02:34ब्रह्मचर्य, प्रग्रह ना जोड़तें हैं, ना ब्रह्मचर्य का खंडन करते
- 1:02:40हैं। बच्चे पैदा तो करे तो करते हैं,
- 1:02:43राम ने भी किया एक जोड़ा कोई मिसहैपनिंग हो जाए, लेकिन ऐसे
- 1:02:57सवालों में कोई पूछने का दुख नहीं होता।
- 1:03:02ये साइंस के सवाल हैं और मैं हर चीज़ को जानता हूँ, गलती मत खाये
- 1:03:07जा कुछ प्रश्न हैं जो मुझसे बेहतर सरलोक जवाब दे देंगे, गायनकार दे
- 1:03:15देंगे हाँ, जहाँ तक रस की बात है उसका जवाब तो मैं।
- 1:03:25इसमें 19% चीज़ गायने बता सकते 10% मैं बता सकता हूँ और बताती
- 1:03:36आपको। कि कैसे स्त्री में राज्य अपने आप
- 1:03:43ओझ को परिवर्तित हो जाता है, यही गलती खाई थी दिगंबरों ने।
- 1:03:49आज भी वो गलती नहीं स्त्री पहुँच ही नहीं सकती क्योंकि राज्य खोद
- 1:03:55देती है नहीं। राज्य खोदती नहीं फोकट मटेरियल
- 1:03:58खोदती है। स्त्री बड़े आराम से पहुँच सकती
- 1:04:04है। आनंदमयी माँ नहीं पहुंची क्या
- 1:04:10तुमने देखा? उसे बहुत स्त्री से बहुत सी
- 1:04:16स्त्रियाँ पहुंची। जिसका नाम आपने मलीनाथ रख दिया वो
- 1:04:22मलीबाई थे मलीबाई से लेकिन इस राज्य को कारण मत बनाना, ना
- 1:04:37पहुंचने का और वो बड़े कारण? खैर, बढ़िया बहुत लम्बी हो जाए।
- 1:04:44और कारण तो पुरुषों में भी कौन पहुंचे?
- 1:04:47अब कितने उपदेश दे रहे हैं उसमें कितने पहुंचे हुए अगर पहुंचे हुए
- 1:04:51होते तो बाबा मुझसे क्यों कहते? झूठ बोलते कि कोई नहीं है,
- 1:04:57तुम्हें ही बोलना होगा। यू वेल, हैव टु स्पीक।
- 1:05:05मुझे एक शोक लगा 440 का नहीं 11,000 का तो ये सब बकवास कर रहा
- 1:05:16है। जो पंडाल सजा रहे हैं, नाविक
- 1:05:22टोपियां रख के जो अंट शर्त बोल रहे हैं क्या ये नहीं पूछा?
- 1:05:32मैं बेखबर था, बेखबर बिल्कुल नहीं था।
- 1:05:36मैं उस रस को पी रहा था। 35 वर्ष से भड़क खोया हुआ था
- 1:05:41दुनिया से कट चुका था उस आनंद की मस्ती में सराबोर मैं बाहर ही
- 1:05:50निकलना बंद कर दिया क्योंकि बाहर जाऊं तो मुझे ये रेंज।
- 1:05:57लड़ती है जैसे रिएक्शन करती है तुम बाहर फिरते हो, मैं भी कभी
- 1:06:04कभी सोचता हूँ कि मैं भी बाहर फिरता था तो कैसे भरता था?
- 1:06:09बस जैसे तैसे भर लेता था दिनों को धक्के।
- 1:06:16लेकिन जब से आनंद के इस स्रोत को भीतर बैठ के पीना शुरू किया,
- 1:06:26लगातार पीना शुरू किया। जब वो उतरा, समुद्र बन के उतरा।
- 1:06:33फिर लगातार धीरे धीरे बाहर घूमना फिरना चलना के कारोबार के कारण
- 1:06:40घूमता था। बच्चे छोटे थे, लेकिन आनंद को
- 1:06:49पीना शुरू किया और आनंद को पीते पीते ऐसा हो गया।
- 1:06:57कि मैं आनंद को पीते ही चला गया, बाहर निकलना ही बंद कर दिया।
- 1:07:02यह एक गाथा मेरी तो मैं जो जानता हूँ उसी के बारे में बोलता हूँ तो
- 1:07:10मुझसे पूछो परमात्मा है। पर है तो वहाँ तक पहुंचने का ढंग
- 1:07:18क्या है? परमात्मा परम खुशी को कहते हैं।
- 1:07:24अगर सरल शब्दों में बोलूं तो और परम खुशी कौन नहीं चाहता?
- 1:07:28दुख तो कोई नहीं चाहता। तुम अगर दुख भी मांग लेते हो,
- 1:07:36कुंती की तरह तो भीतर से कोई चीज़ तुम्हें सुख तक पहुंचाने के लिए
- 1:07:42तुम दुख मांगते हो। तुम्हें पता है कि दुखी हुए बिना
- 1:07:48सुखी नहीं हुआ जा सकता। इसलिए दुख मांगते हो दुख चाहता
- 1:07:56कोई तो जो बात है तुम्हारे काम की वो यही है सारी दुनिया दुखिया
- 1:08:04सारी दुनिया जल रही है हर कोना जल रहा है अहंकार के आवेश में।
- 1:08:13फोका अहंकार दिखावा सारा मीडिया दिखा रहा है, सारे जीतने भी
- 1:08:23राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ये सब दिखावे बाजी या बाजी और कुछ
- 1:08:27नहीं। जिसने सच्चा पा लिया आनंद वो
- 1:08:34दिखावा नहीं करे इसके लक्षण ये भी समजलो गांठ गठ।
- 1:08:53हीरो पायो गांठ गठिया बार बार बा को क्यों खोले?
- 1:09:11मन मस्त हुआ मस्त हुआ फिर क्यों वो ये सवाल आ जाता है क्यों?
- 1:09:23क्यों बड़ा? यह प्रश्न वाचिक चिन्ह बड़ा सुंदर
- 1:09:29है? क्यों गुफाएं बनती हैं अगर चर्म
- 1:09:33आनंद ले लिया गया, क्यों शास्त्र की कहीं जाती है?
- 1:09:38अगर जान लिया तो वो मेरा क्यों तरण ताल बनते हैं, स्विमिंग पूल
- 1:09:48बनते हैं। अगर जान लिया गया तो वह।
- 1:09:52आनंद है जो तुमने पे लिया यह शर्म की बात नहीं है।
- 1:10:00यह सिर्फ ये बात आपको समझना चाहिए कि इन लोगों ने बिना पाई बोलना
- 1:10:05शुरू कर दिया। ये मसलमैन है।
- 1:10:12एनलाइटन नहीं खुद को ही नहीं जानते खुद से आगे उसको कैसे जाने
- 1:10:22का तुम मज़े सेन के पीछे लग सकते हो।
- 1:10:29कौन रोकता है? कोई तुम्हारी चौकीदारी नहीं
- 1:10:32करेगा। कोई तुम्हें समझाएगा भी नहीं
- 1:10:41लेकिन एक सत्य बताना जरूरी होता है।
- 1:10:47संत के लिए सत्य क्या? और सत्य तर्क साहित्य में बता रहा
- 1:10:59हूँ अंसपयो मानसरोवरु। हंसा पायो मानसरोवर ताल तलैया
- 1:11:20क्यों ढोल ताल तलैया। क्यों डोले और क्यों गटरों के
- 1:11:33अंदर हाथ मरेगा जिसने मानसरोवर का शुद्ध जल देख लिया, वो गठरों के
- 1:11:41पानी को क्यों पिएगा? और तुम यही कर रहे हो ईशा तो ईशा?
- 1:11:47अग्नि, हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई ये भूसा भरा है।
- 1:11:55तुम्हारे दिमाग में किसने भर दिया और देखो यहाँ एक्शन का रिएक्शन
- 1:12:07होता है। जो तुम दोगे, बांटोगे, वही
- 1:12:11तुम्हें वापस मिलेगा। तुम इस गलतफहमी में मत रहना कि ये
- 1:12:19वापस नहीं आएगा, बिल्कुल वापस आएगा, इस सृष्टि का रखवाला है।
- 1:12:28बस यही मैं आपको बताने वाला हूँ और मैंने उसे देखा है।
- 1:12:37इसमें कबीर की तरह स्टेम्प पर लगाता हूँ, तुम शास्त्रों की
- 1:12:44बातों को पढ़कर बांटते हो? तुम कहते कागज़ की लेखे और मैं
- 1:12:54कहता हूँ आँखों देख जो आँखों से देखा जो पी लिया।
- 1:13:08फिर थोड़ी सी करुणा उठती है तुम्हारे लम के हुए चेहरे देख के
- 1:13:12तुम्हारे चेहरों पे 12:00 बज के 3.75 मिनट होंगे और तुम बता रहे
- 1:13:19हो भविष्य मलका में सब डैड हो जाएगा तुम्हारे ही कारण डर जाएगा
- 1:13:26तुमने अगर द्रखत बन। काटना बंद न किया पानी को खराब
- 1:13:31करना बंद न करे, भूमि को खत्म करना बंद न किया तो बिलकुल फिर
- 1:13:37आएगा और तुम होगे कारण लोग मूर्ख नहीं थे।
- 1:13:47विश्नोई थे कभी आज कहा। जो कहते थे पेड़ को मत काटो, उससे
- 1:13:54पहले मुझे काटो, अहिंसक मार्ग मुझे काटो, फिर पेड़ को काट देना।
- 1:14:03वह हमला नहीं करते थे। वह पेड़ के साथ बांध जाते थे।
- 1:14:07फिर काटो, पेड़ को पहले मुझे काटो।
- 1:14:13कहाँ गए वो लोग? ये प्रदूषण इसी कारण से ही हुआ कि
- 1:14:22वो लोग चले गए। आज है नहीं।
- 1:14:24कौन लड़ता है किसी के लिए? लेकिन तुम्हें नहीं पता तुम अगर
- 1:14:31किसी के लिए नहीं लड़ रहे हो तो तुम्हारे बच्चे दुख ही भोगेंगे।
- 1:14:38तुम्हारी औलादें तुम्हारी पुश्ते, तुम्हारे आने वाली पीढ़ियां, फिर
- 1:14:44ये गंदा गटर का पानी ही पिया, उनके लिए कुछ सोचो।
- 1:14:51या उनको जन्म देना बंद कर दो? बस प्रलय आ गई और अगर बच्चों को
- 1:15:04जन्म दे रहे हो तो तुम्हारा दायित्व बनता है कि उनके लिए जैसे
- 1:15:08धन कमाते हो, जमीन कमाते हो। वैसे ही इन चीजों को जीने के लायक
- 1:15:13जो चीजें हैं हवा इसको शुद्ध रखो, बंद कर दो।
- 1:15:18कारखाने या कारखानों से कहो कि अपना जो गंदा मटेरियल है वो कहीं
- 1:15:27और निकासी करें। लेकिन कोई क्या करेगा जब हर बंदा
- 1:15:38गंदा हो जाए? एक कहावत है रिश्वत लेते पकड़े गए
- 1:15:47हो रिश्वत दे के छूट जाओ। अगर ऐसा ही चलता रहेगा ठीक है तुम
- 1:15:54झूठ जाओगे, बाप करके बच जाओगे, लेकिन याद रखना बचोगे क्योंकि इन
- 1:16:00आँखों के सेवा कुछ अदृश्य आँखें हैं जो हर जगह हैं वह सर्व व्यापक
- 1:16:06है, उसके आँखें हैं और वह है। बस यही बात मैंने बतानी है।
- 1:16:12यही बात मुझसे पूछनी चाहिए अंट शंट सवाल मत पूछा करो।
- 1:16:18वक्त खराब होता है, जो पूछने की बात है वो पूछो एक प्रश्न और है।
- 1:16:30बाबा हम आपको सन्मुख का सुनना चाहते हैं।
- 1:16:34देखिए बेटा मेरे पास है, स्थान है, आप लोगों ने इतना सा बना दिया
- 1:16:40तो मैं दीक्षा देने का योग दीक्षा आपको दे देता हूँ।
- 1:16:47अगर ओशो की तरह मुझसे प्रवचन सामने सुनना चाहते हो तो मेरे पास
- 1:16:50कहाँ है? बुद्धा हाथ मेरे पास कहाँ है?
- 1:16:54लाज जेहाद पर मैं तो न बना सकूँ क्योंकि इकट्ठा करने की तमन्ना
- 1:17:03मेरी नहीं है। बोल सकता हूँ अनुभव है अगर
- 1:17:10तुम्हारे पास कोई उपयुक्त संस्थान है तो मुझे बता दो वहाँ आकर मैं
- 1:17:15लाइव परवेक्शन दे दूंगा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता यहाँ भी बोलना है
- 1:17:22यहाँ भी अदृश्य रू हैं, मुझे सुनती हैं।
- 1:17:26वहाँ तुम दृश्य और वहीं सुन लिया करोगे तो क्या फर्क पड़ता है?
- 1:17:30लेकिन मेरे पास स्थान नहीं है और ये बिलकुल हकीकत है, स्थान नहीं
- 1:17:34है। फिर ये स्थान भी तुम लोगों ने
- 1:17:37बनाया है। इसमें मेरा प्रयास तो सिर्फ बच्चे
- 1:17:41का प्रयास है। उसने बनाने के अंदर योगदान दिया
- 1:17:44है। बहुत आकृष्ट झेले हैं।
- 1:17:45उसने तो मुश्किल बना है तो ये एक व्यक्ति का काम नहीं है।
- 1:17:52अगर तुम स्थान भी दे दोगे, जगह भी दे दोगे तो बनाएगा ये तो सभी को
- 1:17:58शिरकत करनी होगी। अगर लाइव में सुनना चाहते हो,
- 1:18:03बिल्कुल रूबरू सुनना चाहते हो तो रूबरू तो मैं अभी हूँ तब भी हो
- 1:18:09जाऊंगा लेकिन बात तो है हवा के अंदर थोड़ी बैठोगे तुम बैठने के
- 1:18:18लिए स्थान तो खाली चाहिए। वो नहीं तुम ओशो की बात करते हो।
- 1:18:26ओशो के पास था बुधा हाल था। मेरे पास बुधा हाल नहीं है, मेरे
- 1:18:32पास यही है, बस दीक्षा देने के लिए है दीक्षा मैं दे देता हूँ
- 1:18:38वहाँ दीक्षा के लिए भी मुसीबत आती।
- 1:18:40बड़ा छोटा मकान था तो इसलिए मैं माफी का वास्तगार हूँ, ये मुझसे न
- 1:18:54हो सकेगा। सना भाव के कारण क्या मैं जब।
- 1:19:04आंसू बहती आ गई, शामझ आंसू बहती आ।
- 1:19:19गई। हर तरफ गम की उदासी छा गई।
- 1:19:34दीप यादों के जलाकर रो र्य दीप यादों के जलाकर रो लिए आप के।
- 1:19:56पहलू में आकर रोली सर झुका सर झुकाकर रो लिए।
- 1:20:15आप आपके पहलू में आकर रो ली धन्यवाद।