Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Apr 25 - परमात्मा किस रूप में आता है? परमात्मा को देखा जाता है या पिया जाता है? What is God?
Transcript
- 0:03अरविन्द स्याही आपकी आवाज से सत्य और अनुभव की सुगंध आती है।
- 0:20बाबा जी, कृपया बताइए कि आपने परमात्मा को देखा है।
- 0:38अरविंद, बुलंदशहर से जीस ढंग से, तुम पूछ रहे हो नहीं देखा जीस ढंग
- 1:03से तुम पूछ रहे हो? मैंने परमात्मा नहीं देखा, सत्य
- 1:15भी है और सरलता भी है। ज़रा सोंची है आपने कभी बिना किसी
- 1:39दूसरे की सहायता से। अपना चेहरा देखा जो आँखें समस्त
- 1:53ग्रमंड को देख लेती हैं। क्या आपने अपनी उन आँखों?
- 2:00को कभी देखा। सोचना सोच के जवाब देना तुम अपना
- 2:16चेहरा बिना किसी दूसरे की सहायता के नहीं देख सकता है।
- 2:24उसके लिए दर्पण चाहे जाए। उसके लिए झील का मौन पानी चाहिए।
- 2:39उसके लिए कुछ ऐसा चाहिए जो आपकी इमेज को रिफ्लेक्ट कर सके।
- 2:51लेकिन देखिये दूसरा तो यहाँ कोई नहीं है।
- 3:02एक परमात्मा ही है और ध्यान रखना तुम अपने रहते परमात्मा को कभी
- 3:15नहीं। बस इसी धारणा ने जगत को पागल बना
- 3:26दिया। समझाने वालों ने तुम्हें समझाया
- 3:33कि वह देखा जा सकता है। मैंने तुम्हे बहुत बार कहा है
- 3:49देखने के लिए दूसरे की आवश्यकता है और दूसरा कोई है नहीं एको
- 3:56अंकार एको अहम? द्वितीय नाश्ते हैं दर्पण के बिना
- 4:11तुम अपना चेहरा नहीं देख सकते या कोई दूसरा बता सकता है कि
- 4:15तुम्हारा चेहरा कैसा या तुम दूसरे को बता सकते हो कि तुम्हारे नाइन
- 4:22नक्शा बड़े सुंदर है? लेकिन बिना दूसरे की सहायता के
- 4:33तुम अपना चेहरा मोहरा निहार नहीं सकता, दादू दूजा को नहीं।
- 4:43तो जीवन की दौरा दूसरा तो यहाँ कोई है ही नहीं।
- 4:51सभी संत सभी शास्त्र अनंतकाल से पुकार रहे हैं, दूसरा कोई नहीं।
- 5:07और तुमने पूछा पुत्र क्या आपने परमात्मा को देखा है?
- 5:19इस हिसाब से नहीं जीस हिसाब से तुम पूछ रहे हो?
- 5:26देखिए आप कहीं जाते हो हॉलिडे मकान के लिए हॉलिडे मनाने के
- 5:34वास्ते कोई हिल स्टेशन या कहीं वहाँ आप कहते हो बड़ा मज़ा आया।
- 5:52अगर मैं आपसे कहूँ यह जो मज़ा आया यह दिखाओ मज़ा कहाँ है कोई फ़िल्म
- 6:02देखते हो तुम कहते हो बहुत मज़ा आया बाबा मुझे सुनते हैं कई लोग
- 6:07मुझे कहते हैं बड़ा मज़ा आता है। मैं उस अनुभव को समझता हूँ, मज़ा
- 6:24अनुभव करने जैसी चीज़ है बताने जैसी चीज़ है, दिखाने जैसी चीज़
- 6:32है। हाँ भाव हंगामाओं से प्रकृति करण
- 6:36अवश्य हो जाया करता है। परमात्मा को मैंने नहीं देखा
- 6:55परमात्मा को मैंने पिया है धीरे धीरे धीरे ध्यान में उतरते चला
- 7:06गया। कुछ नहीं किया।
- 7:09बरसों तक कुछ नहीं किया, करता भी क्या?
- 7:23बेहतरीन का इंसिडेंट मेरे जीवन की धारा को बदल गया।
- 7:34उसकी तलाश में ही निकल पड़ा, लेकिन बाहर बाबा ने कहा बाहर नहीं
- 7:44मिलेगा, अपने अंतर में जाओ वहाँ मिलेगा।
- 7:58उन्होंने फॉर्मूला बताया क्रिया योग करो, कुछ नए करने में बैठ
- 8:05जाओ, पौष्टिक आहार और विचारों को शुद्ध रखो।
- 8:16तुम उस बहाने पे पहुँच जाओगे जहाँ से छलांग लग जाएगी।
- 8:33मैंने उसे पिया है और यह है जो सत्य और।
- 8:43मस्ती की झलक आती है। तुम्हें अनुभव की झलक आती है
- 8:49तुम्हें यह उस पीने का प्रणाम है पीने के बाद।
- 8:58मद खुशी आती ही है, उसे कोई रोक नहीं सकता।
- 9:04स्वाभाविक लक्षण है वो, लेकिन तुम्हारी बुद्धि हर बात का जवाब
- 9:16मांगती है। विज्ञान छाती फला लेता है।
- 9:29मैं सदस्य कहता हूँ वैज्ञानिक से अभी तो तुम आँखों तक ही बात कहते
- 9:37हो यकीन नहीं करता और वह जो मज़ा है।
- 9:47जब तुम थक जाओगे, ऊब जाओगे, सब चीजों से उर्फ मिस्ट्री में उतर
- 9:56जाओगे, रहस्य मिस्टेक हो जाओगे तुम।
- 10:06रहस्य यानी बुद्धि को छोड़ना। बुद्धि रहस्य में कभी प्रवेश नहीं
- 10:13कर सकेगी रहस्य में प्रवेश करना। तो अनिवार्य रुपेण बुद्धि को
- 10:25छोड़ना होगा। लेकिन तुम बुद्धि को पकड़े पकड़े,
- 10:30रहस्य में प्रवेश करना चाहते हो, ज्यादा से ज्यादा तुम वैज्ञानिक
- 10:35हो जाओगे, रिसर्च हो जाओगे, खोजी हो जाओगे, अन्वेषक हो जाओगे।
- 10:44उस रहस्य। में ना उतर पाओगे।
- 10:52मैंने नहीं देखा मैं उसके करीब गया मज़ा आया और उस मज़े ने मुझे
- 11:04आगे बढ़ने को मजबूर किया। मैं बढ़ता ही गया, बढ़ता ही गया
- 11:11और मुझे पता भी नहीं चला कब वो घटना घट गया और मैं विराट हो गया।
- 11:25किसने देखा, किसको देखा, ऐसा कुछ नहीं हुआ।
- 11:34मुझे प्रश्न आते हैं बाबा आप शुरू से लेकर आखिर तक अपनी जन्मगानी के
- 11:44जो पहलू गुजरे, साधना काल में वो बताइए?
- 11:49मैं कहता हूँ मैं सब बता चुका हूँ।
- 11:55मेरी बायोग्राफी सब कुछ कह दे कि आपको संसार चाहिए तो बुद्धि
- 12:09आवश्यक है। मुझसे लोग कह देते हैं परमात्मा
- 12:18कल ही पूछा न्यायकारी है? दयालु है, पहले प्रश्न पर लोट
- 12:30चले, वह मज़ा है? और मज़े को देखा नहीं जाता।
- 12:39पिया जाता है तुम इस चक्कर में कब तक पड़े रहोगे कितने जनम बीत गए
- 12:51हैं बहुत ही जनम। बीते मेरे माथो एम् जन्म तुम्हारे
- 12:58लेके कोई जन्म तो उसके लेके कर दो तुम अपना ही आवारे हो अज्ञान तो
- 13:14बस तुम उलझे हो वासना। कल्पनाओं में समृद्धियों में
- 13:29लेकिन तुम्हें पता है ये सब है क्या रहस्य ही रहस्य हर तरफ तुम
- 13:42थोड़ी सी खोजबीन करके। थोड़ी सी शब्दावली दिमाग के
- 13:49न्यूरॉन्स में जोड़ के सर बन जाते हो मात्र लोह का फैलाव है।
- 14:03लोग वश दूसरे भी आते हैं। लडव कम्प्यूटेशन यूपीएस है।
- 14:14पंजाब आई एस पंजाब अधिकारी। बुद्धि तुम्हें यहाँ तक पहुंचाती
- 14:27है धर्मपति बनादे की गद्दी निश्चित करदे, बेईमानी से खादे की
- 14:34शतरंज के मोहरे बिछाना सुखादेगी लेकिन बुद्धि कभी रहस्यमय नहीं
- 14:42उतर पाती। एक बात को ध्यान से समझ लेना
- 14:50रहस्य में प्रवेश करना है तो बुद्धि को छोड़ना पड़ेगा, बस इसको
- 14:57पक्का समझ लेना और तुम तब तक प्रश्न करोगे।
- 15:03जब तुम तुम बुद्धि से चुपकर रहोगे प्रश्न आते ही बुद्धि से और वह
- 15:13बुद्धि से पार वह रहस्य रह। और रहस्य में उतरना परमात्मा में
- 15:28प्रवेश है। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ
- 15:33वैज्ञानिक कभी परमात्मा का साक्षात्कार नहीं कर पाएगा।
- 15:41क्योंकि वैज्ञानिक की मूल समझ ये है कि वह देखा जाएगा और तुम्हारे
- 15:51धर्मों ने तो कह दिया वो आएगा, दर्शन देगा, इतने हाथ होंगे।
- 15:55उसके इतने पाण हो गए। हाथ में ये जो कुछ होगा आप ने तो
- 16:02सारे लक्षण बता दिए भगवान का जैसे की बस वो आएगा और ऐसा ऐसा होगा।
- 16:17इस सवारी पे होगा इतने हाथ हो गए और कौन से हाथ में कौन सा शस्त्र
- 16:25होगा? पूरी परभाषा करते।
- 16:30और तुम्हारे अचेतन मन में ये बात तय करती चली गई कि वह देखा जा
- 16:34सकता है आएगा किसी दिन जरूर आएगा लेकिन वो नहीं आएगा।
- 16:44जीस रूप में तुमने माना, उस रूप में वो नहीं आएगा।
- 16:49वह आएगा मज़े के रूप में आएगा, खुमारी के रूप में आएगा तुम्हें
- 16:57खुमार से भर देगा तुम्हारी सुदी बुदी हर लेगा तुम बहूश हो तुम
- 17:07मदहोश हो जाओगे। तो पहली बात वह देखा नहीं जा
- 17:20सकता। मैंने उसे नहीं देखा और देखने की
- 17:28आवश्यकता भी क्या है। पीने की आवश्यकता है और मैंने उसे
- 17:37पिया पिया और उस मदोशी के आलम में खो गया।
- 17:44बस यही तो चाहिए था अगर मैं देख लेता।
- 17:57तो वह गलत होता। मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं।
- 18:03बाबा कृष्ण भगवान मेरे पास आते हैं।
- 18:07विष्णु, भगवान, शंकर, ब्रह्मा ये सब मेरे पास आते हैं।
- 18:15मैंने कहा फिर? आनंद आता है, आता है तो ठीक मेरे
- 18:22पास वो है बाबा कहीं कुछ कमी लगते है कमी है।
- 18:35क्योंकि तुम पूर्णतः विलीन हो के भी सविकल्प समाधि तक जा सकते हो।
- 18:49पूर्ण श्रद्धा और पूर्ण विश्वास तुम्हें ज्यादा से ज्यादा सविकल्प
- 18:54समाधि में ले जायेगा। गर्भिकल्प पहनें।
- 19:00सब विकल्प से आगे की एक यात्रा और बाकी रह जाएगी वह है निर्विकाल बस
- 19:10वहाँ जाकर सब भ्रमित जाते हैं। प्रश्न बहुत हैं, जवाब देने वाला
- 19:27कोई मिलता नहीं और तुम्हारे प्रश्न इतने मूर्ताओं से भरे हुए
- 19:35हैं। कि जिसका जवाब होता ही नहीं क्या?
- 19:41देखो ओह रे ताल मिले नदी के जल में।
- 19:56डती मिले। सागर में सागर मिले कौन से जल में
- 20:05कोई जाने ना और ताल मिले नदी के जल में।
- 20:17नदी मिले, सागर में सागर मिले, कौन से जल में कोई जाने ना पहरे
- 20:32ताल मिले। नदी के जल में सूरज को धरती कर
- 20:40से, धरती को चंद्रमा, धरती को चंद्रमा।
- 20:51पानी। में सी पुजस प्यासी हर आत्मा
- 21:01प्यासी हर आत्मा उम्मीदवारें। पानी में से जैसे प्यासी हर आत्मा
- 21:23प्यासी हर आत्मा। बूंद।
- 21:29छिपी किस बादल में बूंद छिपी, किस बादल में कोई जाने ना और ताल मिले
- 21:44नदी के जल में। नदी।
- 21:49मिले सागर में सागर मिले कौन से जल में कोई जाने न और ताल मिले
- 22:04नदी के जल में। अनजाने होटों पर ये है अनजाने
- 22:14होटों पर ये पहचाने गीत हैं। कल तक जो वेगाने थे, जन्मो के मीत
- 22:31हैं, जन्मो के मीत हैं, उम्मीदवारें कल तक जो।
- 22:43थे बेगाने जन्मों के मित हैं, क्या होगा कौन से पल में कोई जाने
- 22:57ना क्या होगा कौन से पल में? कोई।
- 23:04जानें ना ओहरे ताल मिले, नदी के जल में नदी मिले, सागर में सागर
- 23:19मिले कौन से जनमे? कोई जाने ना और ताल मिले नदी के
- 23:29जल में। ईश्वर के शृहत संघ रचना को कोई
- 23:33नहीं जानता, जो कहता कि मैं जानता, अवश्य ही वह बेईमान है।
- 23:45वो सत्यनिष्ठ नहीं है, कोई नहीं जान पाया आज तक और कोई नहीं जानता
- 23:54आज और कोई नहीं जान पाएगा। कल तुमने पूछा पुत्र।
- 24:03क्या तुमने परमात्मा को देखा है? देखा तो नहीं है, पिया जरूर है पर
- 24:17वह देखा जा भी नहीं सकता। क्योंकि देखने के लिए यहाँ दूसरा
- 24:23आईना है नहीं, तुम अपने चेहरे को आईने के द्वारा देख सकते हो,
- 24:28क्योंकि तुम तुम्हारा चेहरा शुद्ध है, वह व्रत है, विराट को सिर्फ़
- 24:38पिया जाता है और पीकर। विराट का मज़ा लेना होता है।
- 24:45बस उस मज़े का कायल हूँ मैं और चाहता हूँ कि तुम भी उसके कायल हो
- 24:53जाओ तुम भी वो मज़ा वो सुरूर बपीलो रोज़ कहता हूँ तुम्हें?
- 25:00रोज़ पिलाता, कभी तो पीओगे, कभी तो जगह की भीतर से आकांक्षा।
- 25:20यह रोज़ बोलता है वुडा काहे बोलता है?
- 25:26चलो देखें तो कहीं सर्च में तो ऐसा नहीं है, बस ये ललक तुम्हारे
- 25:35भीतर जग जाए इसे मुख्या कहते हैं। तो मेरा प्रयास सफल हुआ, मेरी
- 25:49करुणा रंग लाई लेकिन मैं बोलता हूँ।
- 25:59अंत समय तक बोलता रहूँगा। जब तक ये यंत्र काम करता है बोलता
- 26:03रहूँगा तुम पुष्कर मैं बताता रहूँगा शायद।
- 26:16पुसते पुसते किसी एक का भ्रम टूट जाए और अगर किसी एक का भ्रम टूट
- 26:24गया तो ध्यान रखना एक दीया सारे संसार के दीयों को जला सकता है।
- 26:34बस एक दिया जलते हुए होना चाहिए वो तुम बन जाओ, दूसरे दीयों को
- 26:49जगाने के लिए तुम खुद जग जाओ। पूछो मत ढूँढो मत उसको पी लो पिया
- 27:08कैसे जाए मैं हर रोचन में बोलता हूँ ठहर जाओ छोटा सा सूत्र।
- 27:17जैसे रात को नींद में ठहरते हो, तुम जाने के लिए और नींद में चले
- 27:23जाते हो। ऐसे ही दिन में प्योर एनर्जेटिक
- 27:30हो फुल एनर्जेटिक हो। के।
- 27:38जैसे ही तुम अपने आप को रिलैक्स छोड़ दोगे तो तुम पाओगे कि तुम
- 27:43भीतर उतरना शुरू हो गए वक्त लग सकता है हो तो तुम परमात्मा।
- 27:57लेकिन कहीं दूर निकल गया हो और जितनी दूर निकल गए हो उतना वापस
- 28:08भी आना पड़ेगा। वक्त लग सकता है।
- 28:18बहुत सी बाधाएँ आएंगी तुम्हारे भीतर।
- 28:22अचेतन के भय सताएंगे। बास नहीं तुम्हें अटकाएंगे अब ही
- 28:31साए तुम्हें तंग करेंगे। इच्छाएं तुम्हें धकेलेंगी संसार
- 28:36में सब होगा, लेकिन तुम महावीर की तरह डगमगाना मत और 1 दिन तुम
- 28:53पाओगे। वर्धमान महावीर हो जाते हैं बस
- 29:04तुम निर्लेप बने रहना, कोई प्रतिक्रिया न करना, जागृति में
- 29:14सोते वक्त तो तुम रोज़ जाते हो उसके पास।
- 29:20जागते में कहीं जाना हो जाए तो बस एक बार ही जाना होता है।
- 29:26फिर से जरूरत नहीं पड़ती है, वह है हम आपको सिर्फ इतनी तसल्ली दे
- 29:38सकते हैं, गारंटी दे सकते हैं। ठहरना तुम्हें ही पड़ेगा बस मैं
- 29:52तुम्हें रोज़ कहता हूँ कुछ न करो ठहर जाओ एक छोटा सा सूत्र
- 29:58तुम्हारे हृदय में आज तक उतराने बा कमाल।
- 30:06तुम दौड़ते ही रहे, अगर तुम दौड़ते ही रहोगे, रात को नींद
- 30:18नहीं आएगी बहुत की नींदें हराम हो गई हैं हच इस दौड़ने के कारण वो
- 30:27रात को भी। पीछे गनते रहते हैं, व्यापार करते
- 30:31रहते हैं, फिकरमंद होते हैं मेरा वो कारखान कहीं कोई हड़ताल न कर
- 30:37दे मेरा वो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कहीं मुझसे सपोर्ट
- 30:45वापस न ले ले। ये भी कोई जी न होता है चरकपुर से
- 30:57समझना इसे जी न कहते हो तुम पहले। तुम दूसरों के गल काटते हो,
- 31:10जोड़तें हो खुद की जरूरत के लिए बिल्कुल ठीक है, लेकिन जोड़ने के
- 31:20लिए बिल्कुल गलत है। प्रयास करो, प्रशांत करो, परिश्रम
- 31:29करो अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए फिर बाकी मैं संभाल
- 31:41लूँगा। अणन्यास चिंतितों माम् ये जनह पर
- 31:46विपासते तेशाम नृत्य भक्ताना योग शेमं वहम्याहं मैं तुम्हारी रक्षा
- 31:55करूँगा बस तुम कर्तव्यप्राण हो जाओ।
- 32:04और कर्तव्य परायणता के साथ साथ युक्त आहार बिहार।
- 32:17जे सूत्र हैं उस मज़े में डूबने का।
- 32:24तो ठहर जाना तुम भीतर खिसकोगे धीरे धीरे और जैसे जैसे तुम गहरे
- 32:30खिसकोगे उस रहस्य के गरीब आओगे आओगे बुद्धि को छोड़कर ध्यान रखना
- 32:37सबसे पहली चीज़ बुद्धि को छोड़ना। बुद्धि दुड़ाती है प्रथम पड़ाव
- 32:46पूरा कर लेना दौड़ते दौड़ते तुम वहाँ नहीं पहुँच पाओगे दौड़ते
- 32:52दौड़ते तुम तीर्थ स्थान पहुँच जाओगे, मक्का मदीना, हज कराओगे?
- 32:59कुंभ पर स्नान करा होगा। लेकिन दौड़ते दौड़ते तुम अपने
- 33:04अस्तित्व तक नहीं पहुँच सकते। अस्तित्व तक पहुंचने के लिए
- 33:11तुम्हारी एग्ज़िस्टन्स तक पहुंचने के लिए ठहरना आवश्यक होता है।
- 33:20बुद्धि न पा सकेगी क्योंकि बुद्धि जुड़ाती है, बुद्धि शांत नहीं हो
- 33:30सकती। बुद्धि खोजबीन में लगी रहती है।
- 33:37बुद्धि को छोड़कर ठहर जाना तुम रहस्य में उतरना शुरू हो जाओगे,
- 33:44उससे लोग पूछ लेते हैं बाबा रहस्य में कैसे उतरें?
- 33:53बस ठहर जाओ, रहस्य तुम्हें खुद ही कहीं चलेगा।
- 33:59ये अनंतनाथ की सुरेली आवाज तुम्हारे किसी प्रयास से आई नहीं
- 34:08आई यह आनंद से बहते हुए गुंगरू जैसे मेरा नाच रहे हो।
- 34:20ये तुम्हारे किसी प्रयास से आए या भगवान कृष्ण की बजती हुई उम्र से
- 34:26या तुम्हारे किसी प्रयास से नहीं, तुम्हारे बिना प्रयास के आती है।
- 34:34ये स्वयं से आती है। जे भीतर और रडी बज ही रहे हैं।
- 34:41मस्जिद कोलो जोड़ा डरया जा ठकर दे डेरे वडिया बोले शा कहते हैं जेथे
- 34:51वैदे नाद 1000 लक्षण बताते हैं सभी।
- 34:55संत पुरुष लक्षण बताते रहे और निश्चित ही तुम्हारी दारनाओं को
- 35:03तोड़ने के लिए जो संत बोलते हैं तुम उन्हें बगावती घोषित कर देते
- 35:11हो। मोलवियों ने बोले शाह को काफी
- 35:22करार दे दिया, काफी करार दे दिया। बोले, शाह का देहांत हो गया, बोले
- 35:41शाह की पार्थिव शरीर कब्रिस्तान ले जाएगी।
- 35:50मौरवियों ने इंकार किया जब मैं बड़ा आके बैठ गया, भीड़ तो भीड़
- 35:55होती है, एक व्यक्ति भीड़ के सामने हार जाता है।
- 36:06उन्होंने कहा, हम इस कासिर को अपने कब्रिस्तान में देखिए,
- 36:14कब्रिस्तान भी तुम्हारे हो जाते हैं।
- 36:18कमाल की बात महल इदारे। ये सब तो तुम्हारे हैं, धन
- 36:31सम्पदा, ये अतुलनीय खजाने ये तो तुम्हारे हैं, लेकिन मज़े की बात
- 36:38है। कब्रिस्तान भी तुम्हारे हो जाते
- 36:40हैं। कब्रिस्तान जहाँ जा के राजा वो
- 36:46रंग बराबर हो जाता है, वो भी तुम्हारे हो जाते हैं।
- 36:52बोलेशाह के पार्थिव शरीर को बान्धापन करने की इजाजत नहीं दी
- 36:56गई मौलवियों के द्वारा। आखिर में किन्नरों ने बोले शाह के
- 37:12पार्थिव शरीर को दो कब्र स्थान से बहुत दूर एकांत में दफन किया।
- 37:24और आज। उस मजार पर इतनी रौनक है
- 37:29कब्रिस्तान में बिल्कुल आज बुरले शाह को हर कोई जानता है।
- 37:39उसको पीटा है तुमने जीसको काफी ठहराया वो परमात्मा के अल्लाह के
- 37:50दरबार में। उसको पारितोषिक मिला, इनाम मिला।
- 38:05तुमने पूछा बेटा क्या तुमने परमात्मा को देखा है?
- 38:12नहीं नहीं देखा? वह पीने की चीज़ है, देखने की
- 38:25चीज़ है ही नहीं और सभी संतोष और आज तो वैज्ञानिक भी बोलना शुरू हो
- 38:34गए, वह जाना नहीं जा सकता। बल्कि वह अगेवी है।
- 38:45इस नॉट ओनली अननोन बटाल अननोनबल अल्बर्ट ऑक्सस्टिन कल मेरे पास एक
- 38:57छोटी सी क्लिप किसने भेजी? मेरे प्रिय जन्म पता है दो 4 मिनट
- 39:06की क्लिप मैं देख लेता हूँ और अच्छे लोगों की क्लिप्स भेजते हैं
- 39:14जो समझदार हैं ध्यान रखना। मैंने शब्द प्रयोग किया, समझदार
- 39:21है और उस दुनिया में जाने के लिए सम्र को छोड़ के जाना होता है।
- 39:33वो कोचिंग दे रहे थे शायद यूपीएससी।
- 39:40बात परमात्मा की चल पड़े, क्या सब कुछ प्री डस्टैंड है जाके
- 39:50तुम्हारा अपना भी कोई वजूद है? इंडिपेंडेन्ट वजूद है तुम्हारा या
- 40:01और इस प्री डिस्टेंस देखिये बुद्धिमान व्यक्ति को जो जवाब
- 40:07देना चाहिए सुन्दर से सुन्दर। तब उन्होंने जवाब दे दिया वक्त दो
- 40:13धाराएं। अब ईमानदार लोग होते हैं, जाना है
- 40:22नहीं। इसलिए बुद्धि से ही उसकी व्याख्या
- 40:27गढ़ेंगे और शुभ है। एक धारा कहती है वह
- 40:38प्रीडिस्टाइन्ड है सब कुछ, अरे दी इवेंट्स अरे प्रीडिटरमाइन्ड और
- 40:49कुछ कहते हैं कि नहीं तुम्हारी अपनी एक स्वतंत्रता चेतना है।
- 40:56तुम ही स्वतंत्र हो तुम्हें सर बोले देखिए मैं जानता तो नहीं, बस
- 41:09यही ईमानदारी है तुम्हें सिखाने वाले सद्गुरु।
- 41:16अगर ऐसे बताने लग गए तुम्हें तो संसार की काय पलट हो जाए।
- 41:27उन्होंने कहा कि तुम दो तल पर दो तल पर जीने की चेष्टा करना।
- 41:38जैसे मैं जब क्लास में होता हूँ तो मैं और होता हूँ और जब मैं
- 41:48कलाश से बाहर आता हूँ तो मैं दूसरा व्यक्ति होता हूँ।
- 41:54बिल्कुल ठीक कहा, उन्होंने ईमानदारी से बोला है, मैं नहीं
- 42:00जानता फला ने ये कहा फला ने ये कहा बस मैंने पढ़ा है और उन्होंने
- 42:09सिर्फ पढ़ा ही होता है। मुझसे पूछा, उस बच्चे ने बाबा
- 42:17आपका क्या ख्याल है? मैंने कहा मेरा कोई ख्याल नहीं
- 42:21है, मेरा तो बस एक ही ख्याल है ये कहते दो दो रो भेजिओ।
- 42:27और मैं कहता हूँ दो नवों में पांव रखने वाला व्यक्ति कहीं नहीं
- 42:31फोंजता डूबता है और बुद्धि बुद्धि टू डाइमेंशनल नहीं है, बुद्धि
- 42:43मल्टीडाइमेंशनल है। जिनको तुम समझा रहे हो ये भी दो
- 42:51तल पे नहीं जी पायेंगे और देखिये ये सर जो बता रहे हैं ये भी दो तल
- 42:57पे नहीं जी सकते कितने ही चिष्टा कर लें मल्टी डाइमेंशनल होती
- 43:01होती। समझा सकते हैं कह सकते हैं और दो
- 43:09तनों पर अगर आप भी जाएं तो उससे उधार नहीं होगा।
- 43:17कभी कोई दो रास्तों पर चला 10 कदम आगे गया।
- 43:2210 कदम पीछे गया, कहीं पहुंचा 10 कदम दायें क्या 10 कदम बाएं, क्या
- 43:31फिर फिर दायें क्या? फिर फिर बाएं क्या पेंटुलम की तरह
- 43:34बताओ पेंटुलम कहाँ पहुंचता है? ये समझाने की बातें हैं, बुद्धि
- 43:42के समझ में आ जाती हैं और वो बुद्धि को ही समझा रहे हैं जैसा
- 43:47उनको ऐसे ही समझाना चाहिए। समझाने का सही रास्ता और कोई है
- 43:53भी नहीं लेकिन पूछा बाबा। मैं तुझे कहूँगा ये द्वैत है दो
- 44:05नाओ के पास जब तक तुम बुद्धि में हो तब तक तुम टू डायमेंशन नहीं
- 44:15तुम मल्टी डायमेंशन रहोगे। तुम्हारा मन कहाँ कहाँ भटकता है?
- 44:20दिन में नहीं रात को भटकता है सपने में तुम मल्टीडाइमेंशनल हो
- 44:28तुम्हारी बुद्धि। और संत बात मल्टीडाइमेंशनल की
- 44:34नहीं करता, टू डाइमेंशनल की नहीं करता।
- 44:38संत बात करता है एक ओंकार अद्वैत वन डाइमेंशन वन डाइमेंशन।
- 44:51इट मीन्स नो डायमेंशन ध्यान रखना वन डायमेंशन में नो डायमेंशन यहाँ
- 45:02सब खो जाए कोई इशारा करने को बाकी न रहे।
- 45:11सब जगह वो ही वो नजर आए। अच्छा है फॉर्मूला अगर ऐसे ही
- 45:23सिखाया जाता मैं कहूँगा अगर मेरी आवाज़ उन तक पहुँच जाए तो अवश्य
- 45:29मेरी इस वीडियो के इस बाप को जरूर देखें।
- 45:34सभी तो इन लोगों के पास वक्त नहीं होता, बहुत कुछ और भी करना होता
- 45:40है और उससे करने धरने में ही जीवन व्यतीत हो जाता है।
- 45:51पहुंचते कहीं भी नहीं। तो मैं कहूँगा मेरी ये बात जरूर
- 45:58समझना टू डाइमेंशनल हो के भी कहीं नहीं पहुंचा जाता।
- 46:09दो तलों पे जिया जा ही नहीं सकता। दो तनों पे जी शक्ति है बुद्धि और
- 46:18उसको तुम भी कहोगे दो डाइमेंशनल टू डाइमेंशनल वह तो होती तो मल्टी
- 46:25डाइमेंशनल है तुम्हारा चित्र कहाँ कहाँ भटकाता है, मैं बोलता हूँ।
- 46:31तुम सुनते हो तुम बंध जाते हो उस प्यार की शहनाई में तुम्हारे भीतर
- 46:41कोई संगीत जन्म पड़ता है तुम्हें बड़ा मज़ा आता है वह मज़ा क्या
- 46:48है? उस एक में उतरने का मज़ा है।
- 46:55अगर तुम भी दो रहे होते तो मज़ा न आता।
- 46:58बहुत से लोग हैं जो मेरी वीडियो को देख कर के कर देते होंगे।
- 47:04मैं जानता हूँ। सभी व्यक्ति या कसार पे नहीं
- 47:11होते। किसी को मीठा, छ, किसी को नमकीन,
- 47:17किसी को खट्टा, किसी को कड़वा सभी की अपनी अपनी पसंद होती है तो मैं
- 47:27उनसे कहूंगा। के दो तनों पर जिया जा ही नहीं
- 47:31सकता। इट इज़ इम्पॉसिबल टू लिव एंड टू
- 47:36डायमेंशन तुम जीके दखल दो नाव पे अगर तुम चढ़ोगे।
- 47:48तो किस के जाओगे कोई नाम जल्दी चलेगी, कोई धीमी चलेगी कोई बाएं
- 47:53मुड़ेगी कोई दाएं मुड़ेगी तुम डूब जाओगे, जियो तो एक पे जियो या तो
- 48:02बुद्धि पे है जियो या तो बुद्धि को छोड़कर अपने भीतर जियो।
- 48:09यही है असली मुकाम यही है असली इस बच्चे के सवाल का जवाब सभी प्री
- 48:19डस्टाइन्ड है या कि तुम्हारा अपना अपना वजूद है या बुद्धि नहीं?
- 48:27तय कर सकते हैं। बुद्धि का ये मसला ही नहीं है।
- 48:36बुद्धि का मजमुन नहीं है। ये सब्जेक्ट नहीं है।
- 48:44आज द इवेंट्स आर पी जचा माया। जया के तुम्हारा अपना अस्तित्व है
- 48:52स्वतंत्र यह बुद्धि का मसला है ही नहीं।
- 48:58फिर यह कहाँ का मसला है? बाबा यह मसला है वहाँ का।
- 49:07जहाँ मैं कहता हूँ कि बड़ा मज़ा आता है और मज़ा आता है मज़ा बताये
- 49:19तो जा सकता है, इसलिए संत बोलते हैं बड़ा मज़ा है।
- 49:29और ऐसा मज़ा कि दौड़ बट जाती है कुछ भी बनने की ऐसा मज़ा और तुम
- 49:42ये जो गद्दियाँ ये धन। ये मान, सम्मान, ये सारे पदार्थ
- 49:54इकट्ठा करते हो? इनके भीतर सिर्फ एक तमन्ना है
- 49:59मज़ा लेने की, अन्यथा कूड़ा कौन इकट्ठा करता है?
- 50:07तुम धन कमाते हो, तुम ध्यान में कुछ मज़ा देखते हो तोकमाते हो,
- 50:15शादी कराते हो, शादी में कुछ मज़ा दिखता है इसलिए शादी करा लेता
- 50:23हूँ। और जब बुद्धि का विषय ही नहीं टू
- 50:35डाइमेंशनल या मल्टी डाइमेंशनल होकर जीते हैं मोड उनके पास
- 50:43सूचनाएं बहुत होती हैं लेकिन एक बात समझ लेना।
- 50:49उनके पास ठहराव नहीं होता और मैं इसे समझता हूँ क्योंकि मैं इतना
- 51:03तो पारखी हूँ यह है, सर जैसे गंभीरता।
- 51:11और भीतर के प्राणों से बोल रहा था, मैं समझता हूँ यह योग्यता
- 51:17रखता है उस मज़े को पीने के लिए बेशर्ते के अपने जीवन का ढंग बदल
- 51:26रहा है मल्टी से। टू में आ गया और टू से अधवैत में
- 51:33चला जा जो ये भेद करती है टू डाइमेंशनल मल्टी डाइमेंशनल इसको
- 51:40छोड़ दे बुद्धि को छोड़ दे और ठहर जाए अपने भीतर उतरेगा उस मुकाम पे
- 51:46पहुँच जाएगा जीसको मैं मज़ा करता हूँ।
- 51:52मज़ा कौन नहीं चाहता हंसों मज़ा कौन नहीं चाहता किसी से पूछना।
- 52:12मज़ा सभी चाहता है बस इस मज़े के ही तलब है इस मज़े में तुम्हें
- 52:27मैं डुबा देना चाहता हूँ जैसे जैसे करीब जाओगे मजेदार का।
- 52:33और जैसे जैसे और करीब और करीब और करीब और फिर फिर तुम्हारा मज़ा
- 52:42बढ़ता जाएगा, फिर तुम्हें खुद से कोई यात्रा करने की जरूरत नहीं
- 52:46पड़ेगी। वह मज़े का बढ़ना ही तुम्हें।
- 52:51कैसे शराबी को शाम को मेखाना खींच लेता है ऐसे वो आनंद का तत्व है
- 53:03तो मैं खींच लेता जैसे मेखाना शाम को खींच लेता है तुम्हारे पांव
- 53:07मेखानी की तरफ। अपने आप स्वतः ही उठने लगते हैं
- 53:12और तुम कहते हो भाई बोतल देना बस बहुत बार बोला मैंने।
- 53:28दौड़ने से ठहराव में आ जाओ। सीधा सा फार्मूला है रोज़ बोलता
- 53:34हूँ रोज़ इसलिए बोलता हूँ कि तुम भूल जा क्या ह्यूमनिस्ट टु एरर्स
- 53:43और तुम्हें रोज़ याद कराना पड़ता है ब्लक्कड़ हो?
- 53:48इसलिए रोज़ बोलता हूँ वो ही वो ही बात बोलता हूँ गुमार फिराके बोलता
- 53:54हूँ, शब्द बदल लेता हूँ, ढंग बदल लेता हूँ, बात वही होती है मैं
- 54:06तुम्हें वो मज़ा शराब का जैसे जैसे तुम करीब जाओगे।
- 54:15मज़ा गहरा होता जाएगा और जैसे जैसे मज़ा गहरा होता जाएगा तुम और
- 54:22की डिमांड। करोगे और ज़रा सी दे सकी।
- 54:31और ज़रा सी और और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और कैसे रहूं
- 54:44चुप। के मैंने पी ही क्या है।
- 54:49जैसे जैसे करीब जाओगे और की डिमांड बढ़ती जाएगी।
- 54:58कैसे रहूं चुप के मैंने पी ही क्या है होश अभी तक है बाकी।
- 55:08अभी मदहोश ही आयी हुए हैं और ज़रा।
- 55:14सी दे दे सा। की और ज़रा सी और लोग मुझे कहते
- 55:22हैं परमात्मा है, मैंने कहा है। शेरमवाली के ऊपर तुम बैठा देते
- 55:30हो, दुर्गा गधे के ऊपर तुम शीतला बैठा देते हो, विष्णु के तुम चार
- 55:36हाथ लगा देते हो, चारों में शस्त्र पकड़ आते ऐसे हैं ये
- 55:40तुम्हारी कल्पना है तुम्हें दर्शन दे सकते हैं, लेकिन ये
- 55:44साइकोलॉजिकल है। मैंने बहुतों के आगे कृष्ण राधा
- 55:50के साथ नाचते देखे, मेरे पास आए बाबा मेरे पास कृष्ण भगवान रो
- 55:59जाते हैं, मैंने कहा ऐसे ही चलते रहो बेटा जल्दी पागल हो जाओ।
- 56:10माँ दुर्गा आती है मेरे पास विष्णु जी आते हैं, मैंने कहा हाँ
- 56:15चलते जाओ जैसे ही चले हो उस गुरु के पैर पकड़ लो जिसने सिखाया वह
- 56:22तो पागल है ही। तुम भी थोड़े दिनों में पागल हो
- 56:28जाओगे, वो कभी ऐसे नहीं आता जैसा तुमने चित्र बनाया, उस विराट को
- 56:36तुमने संकीर्णता में डाल दिया, अब कोई क्या कहे तुमसे?
- 56:44उस परम विराट, जिसका मापदंड नो मेजरमेंट इज़ देर उसको तुमने
- 56:50लिमिटेशंस में डाल दिया संकीरनता में बस यही है भगवान तो ऐसे तो
- 56:58कभी नहीं आएगा, भगवान भगवान आएगा। मज़े की तरह आका वह आता है।
- 57:09हवा की। झोंकी की तरह सुगंध लिए आता है।
- 57:13उसके कुछ लक्षण हैं और उन लक्षणों में मज़ा यही प्रमुख है।
- 57:22जैसे ही मज़ा आया और मज़ा बढ़ता गया, कुंवारी बढ़ती गई और तुम
- 57:27इतने मज़े में हो गए कि तुमने अपनी सुधबुध खोदी, परवाना क्षमा
- 57:33में बस में भूत हो गया, तुम अपना मसूद खोदे हो पहले तुम दूर थे।
- 57:44जैसे जैसे उसके करीब गए तुम पाओगे, उसकी वराठता ने तुम्हारी
- 57:56संकीर्णता को खेच लिया और तुम भी वराठ हो गए।
- 58:02सत्य को शब्दों में डाला तो नहीं जा सकता, लेकिन इशारे कर रहा हूँ।
- 58:13मैं कभी नहीं कहूंगा मैंने वो जान लिया नहीं मैंने वो देख लिया,
- 58:19मुझे परमात्मा के दर्शन हुए नहीं। इस रूप में नहीं, मेरे रूप में
- 58:25दक्षिण हुए और दर्शन रोए ऐसा नहीं, मैंने पी लिया उसे और मैंने
- 58:31पी लिया उसे और मैं वो ही हो गया तो उसको बुद्धि से।
- 58:42नहीं भकाना जा सकता बुद्धि अल्प है, शब्द अल्प है।
- 58:51विराट का कैसे करोगे? व्याख्या हौ यू विल डिफाइन?
- 59:00क्योंकि शब्द संकीर्ण है और शब्द गढ़ने वाली बुद्धि संकीर्ण है।
- 59:06वह विराट समायेगा कैसे? छोटी सी गगरिया में सागर कैसे
- 59:11कमाए समाज आएगा और प्रत्येक बुद्धि की यही कामना रहती है।
- 59:20कि वह मेरे में समा जाए। इट इज़ इम्पॉसिबल यह असंभव है।
- 59:30बुद्धि में विराट समाया नहीं करता इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ फिर
- 59:35बुद्धि को ही छोड़ दो। मैंने तुम्हें कहानी सुनाई छोटा
- 59:42बच्चा हाथ में प्याली रो रहा है, एथेंस के सागर के करीब एक वृद्ध
- 59:53बड़ी सी दाढ़ी, श्वेत श्वेत दाढ़ी।
- 59:58अपूर्व लावण्या चेहरे पे उसके पास आया पुत्र क्यों रो रहे हो?
- 1:00:06सुख्रात को अभी मिला नहीं था, तलाश थी, खोज थी, मिला नहीं था।
- 1:00:19छोटे बच्चे को रोते देखा तरस आ गया सुखरात बोले पुत्र क्यों रो
- 1:00:26रहे हो? भूखे हो कहता हाँ भुखा तो हूँ की
- 1:00:33चलो खाना गला देता हूँ तो मैं। बच्चा बोला नहीं जब तक मैं अपना
- 1:00:41काम पूरा नहीं करूँगा, मैं खाना नहीं खाऊंगा, सुबह से लगा हूँ
- 1:00:455:00 बजे बोर से क्या काम है पुत्र?
- 1:00:54मैं इस प्यारी में सागर को मुड़ैल देना चाहता हूँ बेटा ये तो कभी
- 1:01:09नहीं उसने। कहा।
- 1:01:14मैं सुबह से रखा हूँ। प्याली भरता हूँ, समुद्र खाली
- 1:01:20नहीं होता कितनी मशक्कत की? बस ऐसी ही मशक्कत तुम कर रहे हो
- 1:01:29तुम्हें पता नहीं प्याली में समुद्र का भी समाधान है और प्याली
- 1:01:33से समुद्र कभी खाली नहीं होता। तो सोकर लिखते हैं कि मैंने सोचा
- 1:01:48कि ऐसे ही तो हम हैं, हम भी तो इस छोटी सी बुद्धि में दार्शनिक था।
- 1:01:56अर्स्तो प्लेटों सोक्रेटिस और सोक्रेटिस और इशिता।
- 1:02:15उसने कहा पुत्र कैसी बातें कर रहा हो यह समुद्री कभी खाली हूँ कहते
- 1:02:23नहीं खाली होगा नहीं होगा पुत्र तुम भूखे हो खाना खा लो।
- 1:02:32तो सुकरात कहते कि उस छोटे बच्चे ने प्याली समुद्र में करा दी,
- 1:02:36फेंक कर मर और बोला चलो ठीक है, समुद्र तो प्याली मैं नहीं समा
- 1:02:51सकता। लेकिन प्यारी तो सुमित्र में सुना
- 1:02:54सकती है ना, ये तो हो सकता है और सोक्रती लिखते हैं कि मैं थर थरा
- 1:03:07गया। मैंने सोचा हम भी तो ऐसे हैं
- 1:03:13लेकिन आज ये बच्चा मुझे एक सूत्र देगा, कोई रास्ता तो है क्या हुआ?
- 1:03:24अगर प्यारी में समुद्र नहीं उतरता, समुद्र में तो प्यारी उतर
- 1:03:28सकती है ना? समुद्र में बूंद तो समा सकती है
- 1:03:32ना? बूंद में समुद्र न आए कोई बात
- 1:03:36नहीं तो उसका प्याली को फेंक करवाना ये तो समा सकती है समुद्र
- 1:03:48में। छंज नाटा हुआ मेरे सारे शरीर में
- 1:03:54और जैसे मुझे गुरु मिल गया, बच्चा छोटा उम्रों को मत देखना उम्रें
- 1:04:04ज्यादा काम नहीं आती। कई बार छोटी उम्र के प्रहलाद भी
- 1:04:09हिरण्यकश्यप को बहुत कुछ सीखा जाते हैं।
- 1:04:15कई बार छोटी उम्र के ध्रुव भी अपने पिता को बहुत कुछ सीखा देते
- 1:04:21हैं। उसने चरम छूए सुखरात ने मैं जिसे
- 1:04:36ढूंढ रहा था वो छोटे नन्हे बच्चे के रूप में मिलेगा।
- 1:04:42मुझे पता नहीं था, स्वप्न में भी कभी उम्मीद नहीं थी मैं बड़ी बड़ी
- 1:04:47खोपड़ियों से। जाके सीखना चाहता था और मिला एक
- 1:04:52छोटे से बच्चे से अद्भुत सूत्र सुकरात कहते बस मिल गया यूरेका
- 1:05:02यूरेका। सूत्र मिल गया प्यारी में स्मूत्र
- 1:05:11नहीं समा सकता, समुद्र में प्यारी समा सकती है, बस ऐसा ही होता है
- 1:05:16तुम्हारी बुद्धि जीने का रास्ता कभी नहीं चटुरे पाएगा।
- 1:05:22तुम्हारी सब कोशिशों बेकार हो जाएँगी।
- 1:05:27बुद्धि के सुझाए हुए दिखाए हुए सब रास्ते आज नहीं कल बेकार होने
- 1:05:32वाले हैं। बुद्धि से पार जाना होगा उस स्तर
- 1:05:39पर जाना होगा जहाँ प्यारी समुद्र में खाना हो जाती है।
- 1:05:47जहाँ परवाना क्षमा में पशु भूत हो जाता है, वहाँ जाना होगा, और फिर
- 1:05:54तुम अपने भीतर उतरते चला जाना मज़ा बढ़ता जाएगा मज़ा खींचता
- 1:05:59जाएगा तुम्हें और तुम 1 दिन मज़ा ही हो जाओगे।
- 1:06:10मैंने देखा ना मैंने पिया है और जीसको एक स्वाद लग गया बूंद का बस
- 1:06:24फिर वह ममुक्षु हो जाता है। वह तलाशेगा और जो तलाशेगा जिन
- 1:06:32खोजा तनपानी गहरे पानी, पेट ये गहरे पानी क्या है ये रहस्य को
- 1:06:40कहते हैं। कभी बुद्धि से नहीं मिलेगा बुद्धि
- 1:06:45को छोड़कर रहस्यमय भीतर गहरे उतर जाओ।
- 1:06:51मैं वो पूरा पूरे डरा क्या किनारे बैठ मैं कायर कमजोर सहज न कर सका
- 1:07:03डर गया, किनारे पे बैठा बैठा देखता रहा।
- 1:07:09देखो मत छलांग लगा जाओ अभी नहीं तो समझ लेना कभी नहीं बस यही
- 1:07:21मुक्कड़ चूक मत जाना। वैसी भी जिंदगानी छोटी होती है,
- 1:07:33लेकिन इतनी छोटी भी नहीं होती कि तुम उसे पी न सको।
- 1:07:40पी तो सकते ही हो। जा नहीं सकते पी तो सकते हो यारो
- 1:07:56ज़िन्दगी है 4 दिन के बहुत होते हैं यारो 4 दिन के कितनी ही छोटी
- 1:08:06हो ज़िन्दगी। लेकिन एक बात ध्यान में रखना,
- 1:08:09जेहरा मत हार जाना, सहस मत खो देना।
- 1:08:15तुम्हें एक बात बता दूँ, वो तुम्हारे हृदय में गुंजित रहनी
- 1:08:19चाहिए। वह एक पद में मिल जाता है।
- 1:08:24ज़िन्दगी कितनी भी छोटी हो। एक पल की तो होती ही है पर वो एक
- 1:08:32पल में ही मिल जाता है। क्या होगा कौन से पल में क्या हो?
- 1:08:44होगा कौन से पल में कोई जाने ना और ताल मिले।
- 1:08:55नदी के जल में नदी मिले सागर में। सागर मिले कौन से जल में कोई जाने
- 1:09:10ना। क्या होगा कौन से पल में कोई जाने
- 1:09:17ना इसलिए हौसला मत हारना। वह एक पल में ही मिलता है और शायद
- 1:09:27यही पल आपका वो पल हो जिसे मैं मजाक।
- 1:09:32कहता हूँ राधे राधे। शाम मिला दे राधे राधे श्याम मिला
- 1:09:52दे गोविंदा गोपाल हरे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:10:08गोपाल हरे मेरी नैया पार लगा दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम
- 1:10:27मिला दे गोविंदा गोपाल हर। मेरी नई अपार लगा दे गांव बिन्दा
- 1:10:44गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला दे।
- 1:10:55गोविंदा गोपाल हरे। ओह, धन्यवाद।