Latest / Baba ji Vijay Vats / 16/3/26 - द्रष्टा और दृश्य का अंतर? अहंकार से मुक्ति और 'Just Being' की अवस्था
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- 0:15कुमारशाली बाबा जी प्रण गुरकी वाणी जीस मन बसे दुख दर्द सब ताकन
- 0:37से। गुर की वाणी जीस संबंध बसे दुख
- 0:45दर्द सब ताके नसे जब हरि नाम तिहाई है कारज आ
- 1:04बैरास। गुरु और हरी इनमें एक समानता है
- 1:27गुरु वह है जो हमारे भीतर बैठा है और हरी वह है जो हमारी सभी।
- 1:38दुख दर्द, तकलीफों को समस्याओं को हल लेता है।
- 1:47गुर की बाणी जीस संबंधों से दुख दर्द ताकि सब न से यह गुर की बाणी
- 2:00है क्या? वह वाणी जो अन्न आहत है, दो चीजों
- 2:18की टकराहट से नहीं बनते। मुझसे लोग पूछ लेते हैं परमात्मा?
- 2:30खुद से पैदा कैसे हो गया? जैसे अनहदनाथ इसको कोई पैदा थोड़ी
- 2:44करता है अनहदनाथ कहाँ से आता है? दो चीजों के टकराने से जो ध्वनि
- 2:57पैदा होती, उसे हम आहत नाद कहते हैं और बिना दो चीजों के टकराए जो
- 3:05ध्वनि पैदा होती है, उसे हम अनाहतनाद कहते हैं।
- 3:13बस यही गुर की वाणी है। गुर की वाणी जीस समान व से जिसके
- 3:22भीतर इसका गुंजार होना शुरू हो गया।
- 3:26दुख दर्द सब ताके नशे। उसके भीतर ना तो दुख रहता है, ना
- 3:35दर्द रहता है, सब भाग जाता है। नस्य नस्य जाता है, भाग जाता है
- 3:47पंजाबी भाषा। तुम तो हो गए हमारे भीतर तुम्हारा
- 3:58हाथ नाथ बहुत देर से चल रहा है, लेकिन बाबा हमारे दुख और दर्द
- 4:08यथावत बने हुए है। समस्याएं यथावत बनी हुई है।
- 4:16बिल्कुल ठीक कहा तुमने जब चीजें दूर पड़ी होती हैं और तुम उनको
- 4:31रोग में नहीं ले के आते। तो परिणाम बिल्कुल यही होता है जो
- 4:38आप कहते हो, जैसे आम्रत पड़ा है आपके पास शराब की बोतल पड़ी है,
- 4:48आपके पास विश्व पड़ा है आपके पास। दवा पड़ी है आपके पास, जब तक आप
- 4:59उसे खाओगे नहीं, अमृत को पियोगे नहीं, दवाई को प्रयोग नहीं करोगे।
- 5:12तो वह अपना असर दिखायेगा। केस लोग मुझे कह देते हैं बाबा
- 5:193530 वर्ष से अन्नतना लगातार घूम रहा है और गुरुवाणी में ये लिखा
- 5:27है गुरु की वाणी, जे मन वर्षा। दुख दर्द ताके सब अनस्य फिर ये
- 5:38अनंतनाथ की आवाज पैदा हुई लेकिन हमारे दुख और दर्द और तकलीफें
- 5:43समस्याएं यथावत बनी रही। क्या कारण है पुत्र?
- 5:52तुमने इन्हें पिया नहीं, सेवन नहीं किया था।
- 5:59दवाई का सेवन नहीं करोगे, रोग मुक्त नहीं हो सको, अमृत का सेवन
- 6:06नहीं करोगे। अमृत तत्वों का प्राप्त नहीं हो
- 6:08पाओगे। अगर कोई मरना चाहता है जहर का
- 6:13सेवन ना करे तो वह मरेगा नहीं। शराब का सेवन ना करे तो उसे
- 6:24मुरछनी आएगी और अगर अपने भीतर की पड़ी हुई उस आनंद रूप की शराब का
- 6:30सेवन कोई ना करे। तो आनंद की बारिश नहीं होगी।
- 6:36गुर की वाण जे मन वसा दुख दर्द तरकेसा बनुस्य बाबा जी
- 7:00कहते हैं, सिर्फ शब्दों से। समस्याएं हल नहीं हुआ करते हैं और
- 7:09जो समस्याएं शब्दों से हल हो जाती हैं, वह यथार्थ नहीं होती,
- 7:16मनोविज्ञानिक होती है, साइकोलॉजिकल होती है।
- 7:24बिमारी को दवा को खाने से ही दूर हुआ करती है।
- 7:36मनुष्य आज बीमार है। वह बिमारी उसे क्या है?
- 7:49उसे बिमारी है इल्युजन के भ्रम के।
- 7:55भ्रम क्या है? भ्रम ये है कि वह जिसे देखता है
- 8:01उसे अपना मान लेता है दृष्टा, वह खुद है दृश्य।
- 8:14उसे दिखता है नजारे की तरह, लेकिन दर्शक उस दृश्य से चिपक जाता है
- 8:27और उस दृश्य को अपना होना मान लेता है।
- 8:32बस यही दुख है सारी दुनिया में जिसने भी दृश्य को स्वयं माना
- 8:42अपना होना माना, उसे ये इल्ल्यूशन हो गया कि यह जो मैं देख रहा हूँ
- 8:50ये मैं। यहीं से उत्पत्ति होती है दुखों
- 8:58का, दर्दों का कष्टों का, कलशों का, समस्याओं का इसे अज्ञान भी
- 9:06कहते हैं। दूसरे भाषा में।
- 9:12घूर की वाणी जीस सामान बसा है दुख दर्दता कैसे बनुस्य अगर तुम दुखी
- 9:26हो। अगर तुम्हें अभी दर्द बने हुए
- 9:30हैं, लोगों ने जख्म दिए और तुम्हारा हृदय छलनी होगा तो समझ
- 9:40ली ना कि अभी तुम्हारे हृदय में गुरु की वाणी उतरी है।
- 9:46अभी संसार की वाणी तुम्हारी हद में है।
- 9:51जूं ही गुर की वाणी हद में उतरती है तो संसार की वाणी को तुरोहित
- 9:57होना पड़ता है और जैसे ही संसार की वाणी पुरोहित होती है, गुर की
- 10:03वाणी हद में प्रवेश करती है। गुर की वाणी जे मन बस है दुःख
- 10:11दर्दता के जैसे ही संसार की वाणी एवपोरते हो जाएगी।
- 10:26और परमात्मा की वनि हृदयस्त हो जाएगी, हृदयंगम हो जाएगी, वैसे ही
- 10:34तुम पाओगे उसकी क्षण उसी पल सभी दुख।
- 10:41दरिद्रता, अभाव, कष्ट, क्लेश, समस्तियाँ सब का फूल हो गया, एक
- 10:50साध है सब साध है। जैसे ही एक साध गया सब साध जाता
- 10:58है। वह ईक का सतना क्या है?
- 11:04गुरु की वाणी का हृदय में भासन गुरु की वाणी का है, गुरु की वाणी
- 11:14है कि जो तुम देख रहे हो वो तुमने।
- 11:20इसे अच्छे तरह से समझ लो जो तुम देख रहे हो जो तुम देख सकते हो जो
- 11:33तुम्हें नजर आता है। बस यही है फॉर्मूला वह तुम नहीं
- 11:45हो, जो तुम्हें नजर आता है वो ओब्जेक्ट है।
- 11:55सब्जेक्ट सब्जेक्ट तुम हो ऑब्जर्वर तुम हो दृश्य तुम नहीं
- 12:06दृश्य ओब्जेक्ट है ओब्जेक्ट को तुम देख सकते हो।
- 12:13सब्जेक्ट को तुम देख नहीं सकते। सब्जेक्ट देखने वाला है ओब्सर्वर
- 12:20देखने वाला है, वह स्वयं का अनुभव तो कर सकता है कि मैं हूँ लेकिन
- 12:27देख नहीं सकता। लेकिन तुम तो चीजों को देखते हो,
- 12:33यह मेरा पुत्र है, यह मेरा पिता है, मेरी माता है, मेरी पत्नी है,
- 12:38मेरे बाल बच्चे है, मेरा परिवार है, मेरा पड़ोसी है, मेरा शत्रु
- 12:42है, मेरा मित्र है, ये सब तुम देखते हो, पुत्र और जो भी तुम।
- 12:50इसे गले से नीचे उतार लेना जो भी तुम देख सकते हो वॉटेवर यू कैन सी
- 13:07यू आर नॉट दट। वह तुम नहीं।
- 13:15व्हाटएवर यू कैन सी इस डेफिनिशन को अच्छी तरह से समझ लेना तुम्हें
- 13:25जो भी दिख जाता है वह दूसरा है। जो तुम्हें नहीं दिखता मात्र
- 13:34अनुभव होता है वो तुम दर्द भी तुम्हें दिखता है।
- 13:47प्यास भी तुम्हें दिखती है, भूख भी तुम्हें दिखती है, लेकिन स्वयं
- 13:54का हूँ ना? देखने वाला है, दर्द देखने वाला
- 14:02नहीं, दर्द दिखता है, घृणा दिखती है, वह मनुष्य दिखता है, ईर्ष्या,
- 14:12द्वेष दिखता है। सुख दुख दिखता है लेकिन जो नहीं
- 14:19दिखता वो तुम हो जो मात्रा में महसूस करने वाला है, जो मात्र
- 14:29होता है। जस्ट बीइंग, जस्ट बीइंग।
- 14:34इसको अच्छी तरह से हृदय मतार होने वाला जिसकी मौजूदगी है, मात्र जो
- 14:45होता है, जो दिखता नहीं, जो होता है और वह अनुभव में आता है।
- 14:54वह अनुभव में आता है जो दिखता है। बात गहरी है ध्यान से समझना जो
- 15:00देखता है वह ओब्जेक्ट है, वह दूसरा है जो देखता है, जो देखता
- 15:09है वो तो। रात को घोर निद्रा में सुश्रुति
- 15:17की गहरी अवस्था में जब सारा शरीर सारा जहान घोर निद्रा में सोया
- 15:25होता है तो भी कोई तत्व जागता रहता है।
- 15:29सारी रात। और वही तत्व देखता है कि आज यह
- 15:37संरचना अच्छी तरह से इसे नींद आई। इस संरचना को अच्छी तरह से नींद
- 15:45आई। आज इसे बहुत आराम मिला।
- 15:49कोई रात भर जाग कर देख रहा था क्षण क्षण की खबर उसे थी ओब्जेक्ट
- 16:01जाने कि तुम उसके लिए ओब्जेक्ट हो तुम्हारा शरीर।
- 16:08तुम्हारा विचार, तुम्हारा भाव उसके लिए ऑब्जेक्ट है और वह वह
- 16:20सब्जेक्ट है, वह ऑब्जर्वर है, वह देखने वाला।
- 16:33और जो दिखता है जो दिखे सो शकल विनाशी जो दिखता है वह सब 1 दिन
- 16:43विनाश हो जाएगा जो दिखे सो शकल विनाश।
- 16:54जो उन्हें दिखे सो अविनाश जो दिखता नहीं मात्र होता है।
- 17:03ओब्सर्वर की तरह वह अविनाशी तत्व है, वह शाश्वत है।
- 17:10वह सदा से रहेगा। आध सच जुगाद सच है भी, सच नानक और
- 17:16सिम भी सच, दुख, दर्द सब बता के नक्ष तुम्हे
- 17:37दर्द होता है। कभी जाग के देखना क्या वास्तव में
- 17:42तुम्हे दर्द होता है जाग के तुम होते हुए दर्द को देख रहे होते है
- 17:52बहुत ही सिंपल विषय है, ज्यादा दिमाग लड़ाने की जरूरत नहीं है।
- 17:56सिम्पलेस्ट। जो दिखता है वह सब तुम नहीं हो
- 18:04बिनाशी का मतलब यही है जो दिखता है वो ऑब्जेक्ट है।
- 18:09वह तुम नहीं हो तो उसे एक फॉर्मूले के तरह ले लेना।
- 18:17दूसरा दिखता है स्वयं दिखता नहीं, स्वयं होता है इट्स जस्ट ए बीम
- 18:28इंक स्वयं होता है, दूसरा दिखता है।
- 18:41इसे एक सिम्पलेस्ट समझने का डंग मान लेना जो भी तुम्हारी।
- 19:02आँखों से दिग्ग्या वह दृश्य तो नहीं वह ओबजेक्ट है और ओबजेक्ट से
- 19:19दूसरा होता है तुम्हारा घर। घर में लगे हुए सारे
- 19:28इन्स्ट्रुमेंट तुम्हारे बच्चे, तुम्हारी पत्नी, तुम्हारे पति,
- 19:39फिर सारा घर, मकान। ये सड़क, खेत, खलिहान ये बाग़
- 19:47बगीचे ये वृक्ष ये जानदार है। ये शब्द में दिखता है और जो दिखता
- 19:59है जो दिखे। वह तुम नहीं हो क्योंकि तुम
- 20:08अविनाशी हो, जो दिखे सबर विनाशी एक तुम हो, जो विनाश को प्राप्त
- 20:19नहीं होता, कभी भी वह शाश्वत तत्व है।
- 20:25वह कभी नहीं मरेगा। नैनम सिद्धांत शास्त्राण नैनम
- 20:32दाहाती बाग का उसे आग जला नहीं सकती न चैनम के लिए दिन त्यापु ना
- 20:38सुस्यति मारू दहा। मैं न मरू मरै संसारा, मैं न
- 20:53मरूँ, मरै संसारा, मोहे मिला जिलाबन हारा मैं कभी नहीं मरूँगा।
- 21:05मैं कभी मरा हूँ आज सच जुगाद सच जुगों जुगों से मैं सच है भी सच
- 21:15आज भी हूँ और उसे भी सच और कल भी रहूँगा।
- 21:27यह तत्व जो है यह देखता नहीं जो दिखे सुसकल विनाशी जो देखने वाला
- 21:40है जो ऑब्सर्वर है। वह अविनाशी है, जो दिखता है वह
- 21:48ऑब्जेक्ट है और वह विनाशी है, वह 1 दिन बनेस्ट हो जाएगा इस
- 21:57सिम्पलेस्ट। डेफिनिशन को समझ लेना ईजीएस्ट जो
- 22:12दिखता है वो तुम नहीं अगर तुम सच में इस फॉर्मूला की।
- 22:23क्रियान्वयन करना शुरू कर दिया तो तुम धीरे धीरे सब छोड़ते चले
- 22:30जाओगे जो तुम नहीं हो और अब मैं कहते हूँ नो लाइफ सेल्फ हू आर यू?
- 22:45रेमेम्बेर यूरसेल्फ़ अपने आप को याद करो मतलब क्या तुम भूल गए हो
- 22:56अपने आप को बिल्कुल भूल गए हो। अपने आप को जानना, अपने आप को
- 23:14जानना अपने आप को याद करना है। फिर समझ लो अपने आप को जान लेना।
- 23:28अपने आप को जान लेना, अपने आप को याद करना, तुम तो याद करते हो
- 23:38दूसरे को। कोई धन को याद करता है, कोई बदबी
- 23:45को याद करता है, कोई डिग्रीज़ को याद करता है, कोई गद्दी को याद
- 23:53करता है, कोई सुख को याद करता है, कोई सन्नमान को याद करता है,
- 23:58लेकिन ये सब दूसरे है। तुम स्वयं को याद नहीं कर सकते,
- 24:11लेकिन शब्दों में तो ऐसा ही कहना पड़ेगा।
- 24:14अरे मेंबर यूरसेल्फ़ नो दाय सेल्फ।
- 24:20लेकिन तुम स्वयं को जान नहीं सकते, तुम हो कौन?
- 24:27तुम अपने आप का समन नहीं कर सकते बड़ी अजीब बात है, तुम हो सकते हो
- 24:38याद नहीं कर सकते याद करती है, खोपड़ी और खोपड़ी तुम नहीं।
- 24:47खोपड़ी न्यूरॉन है याद करना इन न्यूरॉन से होता है और न्यूरॉन से
- 24:55तुम हो नहीं जानते भी तुम इसी से हो।
- 25:03तुमसे कोई सवाल पूछ लेता है और दो दो कितने होते हैं तुम कहते हो
- 25:07चार, तुम जानते हो कि दो और दो चार होते हैं यह जानना है, लेकिन
- 25:17मैं तुम्हें कहता हूँ जानना वानना कुछ नहीं है होना है।
- 25:24और होने के लिए किसी न्यूरॉन की आवश्यकता नहीं होती।
- 25:29किसी खोपड़ी की आवश्यकता नहीं होती वरना खोपड़ी को तो त्यागना
- 25:34होता है। खोपड़ी बाधा है।
- 25:39अपने आप के होने में बाधा है कपड़े।