Latest / Baba ji Vijay Vats / 28/3/26 - कुंडली का रहस्य: पिछले जन्म की यात्रा और अधूरे कर्म!! अवतार और बुद्धत्व में क्या फर्क है?
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- 0:15प्रहलाद है भगवान अवतार और बुद्धत्व में क्या फर्क है?
- 0:54पहली बात तो मुझे भगवान कहो या शैतान कहो शब्दों का फर्क है।
- 1:09मेरे स्वरूप का कोई फर्क है क्योंकि मैं भगवान में भी उतना
- 1:16ही। शैतान में भी उतना है,
- 1:30त्यागी में भी उतना हूँ, डाकू में भी उतना हिरण्यकश्यप में भी, उतना
- 1:40ही पर हर में भी उतना है। प्रश्न बड़ा सुनता है और रामनवमीं
- 1:55के मौके पर इस तरह का प्रश्न आना प्यारा लगता है।
- 2:18जब कोई जन्म लेता है उसकी गृहस्थितियां बशर्ते को सर्जिकल
- 2:29ऑपरेटर के द्वारा जन्मने दिया गया स्वभाव।
- 2:37उसका जन्म हुआ। प्राकृतिक रूप से आर्टिफीसियल
- 2:44नहीं नैचुरल सामान्य प्रसव उस वक्त जो रहे होते हैं।
- 3:02जब व्यक्ति पिछले जन्म में संबोधि को प्राप्त करके वह अवतार कर लेता
- 3:14है। उसको इसी जन्म में सिर्फ जो कर्म
- 3:29भोंके नहीं थे, पिछले जन्म में वो भोगने के लिए आना पड़ता है।
- 3:43पता कैसे चलेगा व्यक्ति की जन्मपत्र से और स्कोप से जीस
- 3:57व्यक्ति की जन्मपत्रिका में? उच्च के ग्रह प्यार से जाता हूँ,
- 4:07पहले समझो अपनी यात्रा पूरी करके आया है, वह अवतार है।
- 4:23भगवान राम के मामले में यही हुआ है।
- 4:28पांच ग्रह उच्च कैसे? गुरु, मंगल, शुक्र, चंद्र?
- 4:54चार ग्रह अगर उच्च के हों तो वह अपनी यात्रा पूरी करके आया है
- 5:03निश्चित रूप से वह अवतार है। भगवान कृष्ण के मामले में भी ऐसा
- 5:16ही हुआ। उनके भी पांच ग्रह हो चूके हैं एक
- 5:26दो ग्रह स्वे क्षेत्र में। ऐसा ही राम की कुंडली में है तो
- 5:34इनको प्रयास नहीं करना पड़ता। पहुंचने के लिए बस यह जान गए जो
- 5:46व्यक्ति को जानना चाहिए। ओह एमआइ जो कलाओं की बात है, वो
- 6:02स्किल है कबीर में। बुनाई का शकिल है चादर भुने,
- 6:14भगवान राम में 12 कला संपूरण और कृष्ण 16 की 16 कला संपूरण ये कला
- 6:22हैं। इनका अवतार से या बुद्धत्व से कोई
- 6:31लेना देना यह कौशल है निपुणता है जो व्यक्ति ने यहाँ आके सिख ले।
- 6:48असल बताएगा आपका गुरुस्कोप तो राम और कृष्ण के जन्मपत्री में आपको
- 6:59पांच ग्रह उच्च के मिलेंगे। एक दो ग्रह स्वेक्षेत्र के
- 7:06मिलेंगे। लेकिन बौद्ध के जनपथरी में आपको
- 7:13दो ग्रह उच्छक्के मिलेंगे। इसका मतलब इसे यहाँ तब करना होगा।
- 7:32और यहाँ तप करके तपस्या करके उसे पहनना होगा, सत्य को जानना होगा।
- 7:48वास्तव में मैं हूँ और यही सबसे बड़ी उपलब्धि है विश्व का धनी हो
- 8:02जाना, विश्व का गुनी हो जाना। यह उपलब्धि नहीं होती, यह तो आप
- 8:20डाका भी मार सकते हो, यह तो आप लूटपाट भी में जा सकते हो, यह तो
- 8:28आप दहशत गृह से भी इकट्ठा कर सकते हो।
- 8:35इसलिए जो व्यक्ति राजा बनेगा है उसमें जरूरी नहीं है।
- 8:42गृह उच्चक्य है राजनीतिक व्यक्ति? ग्रह का उच्च होना जरूरी नहीं है।
- 9:00वह तानाशाह भी बन सकता है कि मैं जाऊं।
- 9:03उनके तरह वह जबर ज़ोर से भी राज़ कर सकता है।
- 9:17वह चतुराई से भी राज़ कर सकता है। वह धोखाधड़ी से डाका चोरी से भी
- 9:26राज़ कर सकता है। हॉरोस्कोप में जन्म के हिसाब से
- 9:40कृष्ण और राम में। आज राम नवमी भगवान राम का जन्म
- 9:51चित्र शुक्ल की नवमी के दिन हुआ था।
- 10:07और उनके पांच ग्रह चकित हैं। आप अपने बच्चों का होरोज़ को
- 10:14बुजुर्ग बना लिया कर आओ, यह बहुत कुछ बदला जाता है।
- 10:33मुझे लोग कहते हैं कि बाबा नानक ने ज्योतिष को नकारा।
- 10:42बिलकुल सही नकारा अपनी जगह ठीक है बाबा कहते हैं, जब होना ही है जो।
- 10:53उसको पहले से पूछना भी क्या होता है?
- 10:57जब हो जाएगा तो स्वीकार कर लेंगे। फिर ग्रह नक्षत्र को जानना और
- 11:05देखना इसकी आवश्यकता क्या यह तुम्हें महज उलझाएगी?
- 11:11ठग चोर ऐसे लोग पैदा हो गए जो आपके धनमाल को ठगेंगे भविष्य
- 11:20बताएंगे अभी एक 2 दिन पहले महाराष्ट्र में एक ऐसा है डाकू
- 11:30पकड़ के। उसकी 58 वीडियो चरित्रहीनता की
- 11:45वीडियो और इसने कब्जे में ले लिया।
- 11:57और वो कहता है। कि तुम मरो, कैसे तुम पर परमात्मा
- 12:03का कहर बरसे हो? ऐसे भी लोग होते हैं उल्टा चोर
- 12:12कोतवाल को डांट। ये फर्क ठीक तरह से समझना पड़ेगा।
- 12:26हमें जिसने पिछले जन्म में आत्मबोध कर लिया, प्रयास करता है।
- 12:43उसके जन्म के ग्रह बता देंगे तुम कि यह व्यक्ति पूज्य नहीं आए।
- 12:51बुद्ध के जन्म के वक्त उसके पिता के पास हिमालय से उतर के।
- 13:07एक संत आये। वो कहते हैं यह बच्चा चक्रवर्ती
- 13:13सम्राट बनेगा। एक चक्रवर्ती राजा या चक्रवर्ती
- 13:21संत? माँ बाप कभी स्वीकार नहीं कर सके
- 13:36कि मेरा बच्चा संत हो जाए। माँ बाप ये स्वीकार कर सकते हैं
- 13:44कि उसका बच्चा। भ्रष्टाचार हो जाए, तानाशाह हो
- 13:55जाए, उच्च पदस्थ हो जाए, चाहे कतलो गारथ करके हो जाए।
- 14:08लेकिन मेरा नाम रोशन कहते हैं, जबकि कभी किसी का नाम अमर रहता
- 14:23है। नाम सभी के मिट जाते हैं, वक्त के
- 14:30साये में ढल जाते हैं। तो स्पेशल जनम में जो अपने आप को
- 14:41जान के और यही आपका अंतिम लक्ष्य तुम्हारे पास क्या है या मायने
- 14:53नहीं रख? कितने धनी हो कितनी आपके पिता
- 15:11सूचनाएं हैं कितने पढ़े लिखे हो, किस कुर्सी पे हो कितनी?
- 15:20लोग तुम्हारी पूजा करते है, पाम धोके पीते है ये मायने नहीं रखता
- 15:29मायने रखता है कि तुम कितने सुख है संसार की धन दौलत।
- 15:43सोने के अंबार नरम, नरम गधों के ऊपर तुम भले ही सोए रहो, लेकिन
- 15:53नींद परमात्मा की देन। 3600 प्रकार के पदार्थ तुम्हारे
- 16:01पास खाने का है, लेकिन भूख परमात्मा के दिन वह तुमसे कुछ
- 16:09छुपा के रख लेता है। अगर तुम उसके योग्य नहीं हो तो
- 16:23पिछले जन्म में जिसने जान लिया तो नो द है, शायद कि मैं हूँ कौन।
- 16:36उसकी जन्म पत्रिका बता दें कि आज हमने चालाकियाँ सीख ली हैं।
- 16:45आज हमने दिखावे बाजक सीख लिया है। आज भी जन्म पत्रिकाएँ मैं लाई
- 16:51जाती हूँ। जब कि मेरे पास लोग आ जाते हैं,
- 16:57अच्छा समूह रथ निकाल दीजिए। मैं कहता हूँ कि मेकअप से कभी
- 17:04सुंदर नहीं हुआ जा सकता। मेकअप से सुंदरता की भ्रांति पैदा
- 17:09की जा सकती। तुम नॉर्मल डेलिवरी होने दो, ताकि
- 17:19परमात्मा ने इसे कैसा बना के भेजा है।
- 17:28उसको जानने का हमारे पास एक ही साधन है और हॉरोस का बड़ा
- 17:36साइंटिफिक है। यह विज्ञान के विरुद्ध नहीं है,
- 17:42यह भी एक विज्ञान है एस्टालिश। जैसे जूलोजी बायोलोजी ऐसे ही
- 17:53एस्ट्रोलॉजी बाबा का मत तर्क है। बाबा कहते हैं जो होना ही है उसको
- 18:03जानकर भी क्या करोगे? असली मतलब है जो हो जाए उसको
- 18:11स्वीकार कर रहा हूँ। फिर गमों की धूप तुम गर्माहट नहीं
- 18:18देखे फिर गमों का कष्ट तुम्हारे हृदय को।
- 18:26बेधर नहीं करेगा। फिर ये चुभते हुए शोर तुम्हें
- 18:35पीड़ा नहीं था बाबा इसलिए कहते हैं ये छोड़ो जब के बाबा जानते
- 18:46हैं। पाता ल पाता लख आगा स आगास ओडक
- 18:56ओडक भारत के वैदगण एक बात छः 118 गण क तेप असुलु एकतात लेखाव त
- 19:08लिखिए। लिखा कोई विनाश?
- 19:17बाबा कहते हैं क्या लिखा है तुम जान कर क्या करोगे?
- 19:26बस जब वो हैपनिंग हो जाए जब वो इंसिडेंट घट जाए।
- 19:35तो तुम उसको स्वीकार करो और यह मूल मंत्र है क्या होगा, यह जानने
- 19:46के लिए लोग अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं, जबकि वह होगा।
- 20:01मेरे जीवन की बड़ी घटना मुझे याद है 1985 में से पहले यही मार्च का
- 20:16महीना था। 2 मार्च को मैंने अपनी माता।
- 20:24और अपनी बड़ी भाभी को मैं गैलरी में बैठा रहता था जिसके छत छत
- 20:42मैंने माता से कहा और अपनी बड़ी भाभी से भी कहा कि कल।
- 20:51डॉक्टर साहब मेरा बड़ा भाई था। रोहतक के मेडिकल कॉलेज से
- 21:00उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की थी। मैंने माता से कहा तुम भी ख्याल
- 21:13रखो, भाभी से कहा तुम भी ख्याल रखो, यह मेरा बड़ा भाई डॉक्टर कल
- 21:27गाड़ी के नीचे आ के मर जाएगा। मुझे बाबा ने बताए थे मेरी माता
- 21:41तो चली गई 91 साल की उम्र में लेकिन मेरी बड़ी भाभी अभी जिंदा
- 21:46है। वह है साक्षीत का प्रमाण।
- 21:55कहते फिर क्या इलाज करे? मैंने कहा सिर्फ निगरानी निगरानी
- 22:02इसको कल के दिन कहीं मत जाने देना।
- 22:07मैंने उसे अबोहर जाना था। कोई बड़ा यजेन था उसमें
- 22:16पूर्णाहुति के लिए मुझे आमंत्रित किया गया था, मुख्य मेहमान की
- 22:26तरह। उसने कहा हम गाड़ी भेज देंगे और
- 22:38तुम जरूर आना। मैंने कहा ठीक है, कल मैं नहीं
- 22:43जाना है तुम इसका दोनों ख्याल रखना।
- 22:52और उन्होंने ख्याल रखा है, लेकिन हमारे ही शहर में एक रामलीला में
- 23:06राम जी का पाठ करते हुए प्यारे लालजी कर रखा है।
- 23:10चाचू कहते थे। उनका सारा प्रभाव दवाई हमसे लेता
- 23:17था यानी डॉक्टर से तो वह अचानक आ गए।
- 23:32उसने पूछा भाभी से डॉक्टर साहब कहा है, है तो यही लेकिन जाना
- 23:38नहीं है कहीं? मेरे देवर बोल के गए हैं कि इनको
- 23:43जाने नहीं देना है। वो मुझे जानते थे, वक्त वक्त पर
- 23:50कभी चुपके से मुझे पूछ लिया करते थे यह कैसे घटेगा?
- 23:55यह कैसे घटेगा? लेकिन वो प्यारीलाल घर बोले की
- 24:13तुम चिंता मत करो बैठे मैं इसको यहाँ छोड़ के जाऊंगा वापस क्योंकि
- 24:21दवाई हम किसी और से लेते नहीं है और मेरे बेटे की हालत।
- 24:27थोड़ी नाजुक है। इतना कहने के बाद उसने कहा ठीक
- 24:34है, छोड़ जाना है अपनी निगाह में रखना।
- 24:45वह गर्ग साहब डॉक्टर को ले गए। उसने निरीक्षण किया।
- 24:53डॉक्टर बहुत बढ़िया थे, कुछ नहीं चेक करना कोई ब्लड प्रेशर नहीं
- 25:01है। कोई कुछ दूर से देख कर बता देते
- 25:04थे कि इसको यह तो हमारी है। और इस दवाई से ये ठीक होगा।
- 25:23उसके बाद दवाई लिख के समझा के ये दवाई कैसे खानी?
- 25:33तो प्यारी लाल गर्द से कहने लगे डॉक्टर साहब, मैं आपको वापस छोड़
- 25:37के आउ कब? कैसे ठीक है तो प्यारेलाल गर्ग और
- 25:45मेरे बड़े भाई दोनों घर में आते हैं।
- 25:50घर के भीतर दो गेट थे, एक तो उनके कमरे का गेट, एक मेन दरवाजे का
- 25:57गेट। मेन दरवाजे का गेट वन नहीं खोला।
- 26:02मेरा भाई घर में एंटर कर गया और प्यारेलाल जी ने दरवाजा बंद कर
- 26:11लिया और संतुष्ट हुए। के ठीक।
- 26:20मैं घर में इनको छोड़ गया। बस गलती ये रह गई कि वो आवाज नहीं
- 26:29दे के गए कि बेटा मैं डॉक्टर साहब को छोड़ चला हूँ।
- 26:36अब इनकी निगरानी तुम रखो। भाभी अंतर बैठी थी और कमरा भीतर
- 26:44का जो दरवाजा था उसका कमरा भी दरवाजा बंद था।
- 26:55तो डॉक्टर ने देखा कि दरवाजा बंद है उसके कमरे का वहीं से चुपके से
- 27:03मेन गेट को खोलकर और स्टेशन पर चला गया।
- 27:12संयोग देखिए, गाड़ी तैयार थी। इधर भाभी को कुछ पता नहीं क्योंकि
- 27:25बता के नहीं गए कि इनको संभाल लो। मैं इन्हें छोड़ चलाऊ बस यही गलती
- 27:32रह गई। जब गाड़ी चलने लगी उन्होंने गाड़ी
- 27:38के नीचे। से रख दिया हीकमेटेड सुशांत अबोहर
- 27:54के लिए जो गाड़ी ले के आया था वह ड्राइवर आ गया था, उन्होंने अपना
- 28:02बेटा ही बेचा था। उस गाड़ी में मैं बैठ गया।
- 28:09जैसे ही वह गाड़ी को मोड़ने लगा तो मेरे ही शहर का एक लड़का उसने
- 28:18मुझे इशारे से रोका। कैसे रोको?
- 28:231 मिनट आप बाहर आओगे, मैंने कहा हाँ मैंने कार का दरवाजा खोला,
- 28:35मैं उसके पास चला के थोड़ी दूर खड़ा था, मैंने कहा बताओ।
- 28:43कहता है मुझे शक है कि गाड़ी के नीचे कोई मैंने कहा चुप हो जा बस
- 28:51मैं समझ गया शक नहीं है, यह होना ही चाहिए।
- 29:05कहते है आप मैंने कहा, देखिए शेष क्षण पर लाखों में तय करने चले
- 29:18तुम 1000 लाख बुद्धियों को लड़ा लो।
- 29:25राजनीति की गोटियां बस चाल, लेकिन तुम्हारी सब राजनीति के चाल तुमको
- 29:39जिता तो सकते हैं। लेकिन जो जीतोगे वह जहरीला होगा,
- 29:49कड़वा होगा, वह तुम्हें सुख नहीं दे पाएगा।
- 29:57घटनाएं सुख और दुःख से प्रभाव दिया करते हैं।
- 30:05मैंने पैसा क्यों? ऐसा नहीं है कि मुझे गोडसे ने मार
- 30:11दिया तो मैं इस जन्म में गोडसे में जानता हूँ।
- 30:15कहाँ है रोज़ मुझे सुनते हैं? तो मैं गोडसे को जब तक नहीं
- 30:24मारूंगा तब तक मुक्त नहीं हो सकता।
- 30:25नहीं ऐसा नहीं, फिर तो मैं बंध गया, मैं कभी मुक्त नहीं हो
- 30:30सकूंगा। मैं तो गोडसे से ही बंध गया, कब
- 30:34वो जन्म लेगा, कब मैं उसे मारूंगा?
- 30:42यह एक्शन रिएक्शन में बदलेगा तब मैं मुक्त होऊंगा नहीं, मेरी
- 30:46मुक्ति भी दूसरे के हाथ में हो गई।
- 30:51नहीं, गोडसे ने मुझे मारा। गोट से अपना कर्म फुकेगा मुझे
- 31:03अपने कर्मों का फल मिला, निस्वार्थ, पूरी, तनमयता, पूरी
- 31:13शांत और पूरी शक्ति के साथ। सरलता और ईमानदार मैंने देश की
- 31:29सेवा की। सभी देशवासियों ने अपना अपना
- 31:37प्रयास किया और पूर्ण प्रयास किया और हम आजाद हुए।
- 31:44सिर्फ मात्र मेरे कारण है ये तो कुछ लोगों की शरारत है।
- 31:53गाँधी ने कभी नहीं कहा मेरी वजह से आजादी में नहीं कभी नहीं कहा
- 31:58मुझे महात्मा कह दो, कभी नहीं कहा मुझे राष्ट्रपिता की उपाधि दे दो
- 32:04कभी नहीं कहा मेरा चित्र नोटों के ऊपर झांक दो नहीं।
- 32:1548 में उनके और नोट्स तो आपने उनके चित्र वाले नोट्स तो आपने
- 32:25शायद 66 से शुरू किए हैं। अगर मैं गलत नहीं हूँ तो।
- 32:35तो गाँधी ने ये सब बातें नहीं आती हैं।
- 32:39ये सब उन लोगों का प्रपगन्दर है जो राज़ सत्ता का स्वाद चखने जाते
- 32:48हैं। मैं तुम्हें पहले ही बता देता
- 32:54हूँ। राज्य सत्ता का स्वास्थ्य
- 32:58कड़वायें यकीन आय तो आजमा के देख लो।
- 33:08राज़ सत्ता का सुख भोगने के लिए तुम इतने पापड़ भेजते, लेकिन सुख
- 33:19मिलता नहीं, ये है सुख। बड़े दुखों के कांटों से भरा हुआ
- 33:29है। यह ऐसा क्षत्र है जो सर पर तो तुम
- 33:34रख लेते हो। लेकिन इस क्षेत्र में काँटे ही
- 33:38काँटे हैं। शुभ से वह होता है।
- 33:49राजनीतिज्ञ लोग दिमागों पर राज़ करते हैं, तानाशाह और कृष्ण जैसे
- 33:57लोग राम जैसे लोग वो असली राज़ करते है।
- 34:02कृष्ण हरज़ों पे राज़ करते है कृष्ण।
- 34:08प्रेम के अवतार हराम मर्यादा के अवतार हर कसौटी को कष्ट लेते हैं
- 34:26और दोनों ही दिलों के ऊपर राज़ करते हैं।
- 34:30राम हमारे हर्दों में बस गए हैं। कृष्ण हमारे हर्दों में चेतना में
- 34:35बस गए हैं। कोई भी दिमाग में नहीं बसता और जब
- 34:42हमारे अवतार हृदय से निकलकर हमारी बुद्धि में बस जाते हैं तो खूनी
- 34:48खुराफात होते हैं। बस यह राजनीतिज्ञों का एक छल का
- 34:57ड्रामेबाजी का एक ढांग है। धर्म के नाम के ऊपर जनता को
- 35:04गुमराह करना है। लोकतंत्र कहाँ रह गया?
- 35:10जहाँ आप ईमानदारी से अपना वोट प्रयोग न कर सके जहाँ आपको पक्का
- 35:18पता है कि जीसको आपने वोट दिया उसको जाएगा नहीं।
- 35:24रास्ते में ज्ञानचंद जी, लुटेरे खड़े।
- 35:31वह लूट लेंगे। यह राह बड़ी कटेली है टेढ़ी मेढ़ी
- 35:38है अज्ञात राणी है तुम्हें पता भी नहीं चलेगा।
- 35:46तो जब ज्ञान चंद जी लुटेरे खड़े हैं तो आपका वोट सही व्यक्ति के
- 35:51पास जाएगा, ये इसकी उम्मीद छोड़ देना।
- 35:56मैं ये भी कह रहा हूँ सत्ता का सुख।
- 36:06जीसको ज्ञान चंद डिक्लेर कर देगा, सुख से भी नहीं मिलेगा और जिसने
- 36:13पैसे के बदले कोई लोग तो हो गए ऐसे कोई बिकता है कुछ तो
- 36:20मजबूरियां रही होंगी, वहीं कोई बेवफा नहीं होता।
- 36:30राज़ करना है तो अपने विचारों पर कण काम, क्रोध, लोभ मो अहंकार मध
- 36:46मत्स्य वह। इन वेकारों पर राज़ करो, वह है
- 36:53सही राज़ वह तुम्हें अनंत आनंद देगा तुम्हारे जीवन को।
- 37:06खुशबुओं से बरदेगा साहब, होए दयाल त हर रंग मानिए साहब होए दयाल त
- 37:24हर रंग मानिए सब खुशी के रंग तुम्हारे ऊपर लुटा दिए जाएंगे।
- 37:34अगर किसी ने राज़ किया आज तलक वह मात्र संत ने किया, अवतार ने किया
- 37:44और उनके सिवा राजनेता। तो आग की भट्टी में जलते रहे।
- 37:52वह तो झुलसना है। उस पर कभी आनंद की शीतल वर्षा
- 37:59नहीं होती। वह भ्रम में है।
- 38:05कुछ लोगों का भ्रम टूट जाता है। यद्यपि यह संसार परमात्मा की लीला
- 38:14ही है, तथापि लीला भी बड़ी ईमानदारी से खेलता है।
- 38:22प्रत्येक व्यक्ति के कर्म जो करवाता है, वह ही।
- 38:27ईमानदारी से फल भी देता है यह भी उसके लिए रहा है एबी तेरी दांत
- 38:35एबी तेरी दांत तो राज़ कर गए कृष्ण आज भी हमारे घर तो।
- 38:47राज़ कर गए आराम आज भी हमारे हर्दों में सेवत है, अगर नाम ही
- 38:52अमर करना है तो ऐसे करो जीसको याद कर कर अश्क आँखों से बैठे है, झर
- 39:04झर आंसू आ जाए। पन गट पे नंदलाल छिड़ गयो रे
- 39:28मोरेपनघट पे। नन्द लाल छेड़ गयो रे मोरे पनघट
- 39:40हैं मोरी नाज़ुक गयो रे मोरेपन घट पे मोरेपन घट
- 40:09पे। नन्द लाल छेड़ गयो रे, मोहर बन के
- 40:22कंकरिया मोहे गगरिया फोर डारी।
- 40:47हो गगरिया फ़ोर डरी हो मोरी सारी हमारी भिगोय गरो रे हो मोरे सारी।
- 41:06अंगारी भिगोए गयो रे मोरे पनघट पे मोरे पनघट पे नंदलाल।
- 41:23छिड़ गयो रे और पनघट। पे।
- 41:31नैनो से जादू किया जी राम मोह लिया।
- 41:40नैनो से जादू किया जियारा मोलिया ओह जियारा मोलिया।
- 41:58मोरे घुंगटा नजरिया से तोड़ गयो रे मोरे घुंगटा नजरिया से तोड़
- 42:14गयो रे। मोरेपन घट पे मोरेपन घट पे नन्द
- 42:26लाल छिड़ गए होरे मोरेपन घट पे मोरी न झुक।
- 42:37कन्हैया मरोर गयो रे हो मोरे नाज़ुक कलैया मरोर गयो रे और बन
- 42:53घट पे। कृष्ण प्रेम का अवतार है और राम
- 43:06मर्यादा का अवतार है। मर्यादा बांध गए और बुध।
- 43:14करुणा का अवतार है। ओशो भी करुणा का अवतार है।
- 43:30ये बड़े प्यारे पुरुष हैं जिनको युगों युगों तक याद किया जायेगा।
- 43:42तत्कालीन लोग क्या कहते हैं उससे समाज के मान्यताओं पर यकीन मत
- 43:50करना। वो समाज की मान्यता है।
- 43:58बात तो ये है। क्यों उनके व्यक्तित्व से नूर
- 44:06बहता है, नहीं बहता। उनकी जादुई आवाज आपके हृदय को छू
- 44:13जाती है, नहीं छू जाती। बाबा नानक जब गाते हैं तो हवाएं
- 44:27ठहर जाती हैं, हवाएं ठहर के सुनते हैं, ये बाबा क्या कह रहे हैं?
- 44:39यह किसका उप सलाघा कर रहे हैं? यह किसके गुणों का वर्णन कर रहे
- 44:47हैं? बाबा ऐसे मस्त हो के गाते हैं तो
- 44:53राज़ ही करना है तो ऐसे ही करना है।
- 44:59कबीर सदा जिंदा रहेंगे। हमारे दिमागों में हमारे हर्जों
- 45:04में नान करियों पर राज़ करेंगे रान और कृष्ण हमारे हर्जों पर
- 45:12राज़ करेंगे। यह है अमर्त्य।
- 45:19लेकिन तुमने सब नकली नकली बना लिया है, तुमने नकली फूल बना लिया
- 45:32है तुमने नकली इतर बना लिया है जिनमें सुगंध नहीं होती।
- 45:40असली सुगंध धरती का गर्भ पाड़ते आया करते हैं।
- 45:45तब फूल खिला करते हैं और हैरानी की बात है जीस समिति में सुगंध
- 45:52नहीं है, उसमें से आया हुआ फूल सुगंध देता है, यह चमत्कार नहीं
- 45:59तो और क्या है तुम रोज़ कह देते हो चमत्कार दिखाओ।
- 46:08जो बीज बोया जाता है उसमें भी खुशबू नहीं, धरती में भी खुशबू
- 46:15नहीं, पानी में भी खुशबू नहीं, सूरज के रौशनी में भी खुशबू नहीं,
- 46:21खाद में भी खुशबू। फिर ये खुशबू आई कहाँ से?
- 46:29यह उस अज्ञात की खुशबू है जिसे राधा कहते हैं, राधा एक खुशबू है।
- 46:43चेतना की झंका है राधा नाचती हुई वह अस्तित्व की तलाक करती है,
- 46:52जिसमें सुगंधी ही सुगंधी बड़ी है। तुम्हें राधा के नाम से राधा के
- 47:08जीवन का अर्थ से तुम्हारी आँखों में अश्क नहीं बहते जितना राधा ने
- 47:16धैर्य दिया कृष्ण आएँगे। उतना धैर्य अगर आप में हो तो राधा
- 47:26की तरह आप भी पहुँच जाओगे। राधा धैर्य की मूर्ति है, राजा
- 47:39सुगंधी है। और चेतना में अपूर्व सुगंधी होती
- 47:43है सुंदर बाहर का सुंदर तो आज नहीं कल ढल जाएगा लेकिन चेतना का
- 47:59सुंदर है कभी ढलान पे नहीं आता, चेतना कभी ढलती नहीं।
- 48:05जितनी बलिंदियों को उसने छू लिया बस उससे कभी डिगेगी नहीं।
- 48:14मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा यह लोग कहते हैं कि अगर तुमने तप
- 48:21नहीं किया, तप नहीं किया? दान नहीं किया तो तुम अगले दिनम
- 48:28में बैल बनोगे, तुम भैस बनोगे तुम कुकर?
- 48:37शुकर बनोगे मैंने कन्हैया पुत्र। ये नियमों को जानते हैं इन्होंने
- 48:45प्रकृति का वो अपूर्व सौंदर्य न हराना।
- 48:51इन्होंने उस स्थल को छूआ नहीं, ये व्यापारिक है इनकी निगाह।
- 49:01गीत की तरह तुम्हारे दन पे होते है तुम्हारे तन पे होते है कैसे
- 49:10इस तन को चूसू कैसे इसके दन को चूसू ये व्यापारी है पुत्र।
- 49:22कृष्ण व्यापारी ने राम व्यापारी बुध नहीं नानक नहीं व्यापारी नहीं
- 49:31ये है सच्चा दाता, जिनको कोई आपसे उम्मीद भी नहीं है।
- 49:39जो आपको लुटाएंगे भी और आप उनको सुनोगे तो आपके कृतज्ञ भी होंगे।
- 49:49आपका धन्यवाद भी करेंगे कि आपने मुझे सुना, इसके लिए धन्यवाद।
- 49:57पहले ही परमात्मा को धन्यवाद करेंगे कि आपने मुझे बोलने के
- 50:03योग्य बनाया आपका धन्यवाद, फिर आपका धन्यवाद करेंगे।
- 50:11आपने मुझे सुना इतने प्रेम से। आपका धन्यवाद सर इनके धन्यवाद के
- 50:22सर उनकी चेतना से आते है, चेतना कभी गिरती नहीं।
- 50:30चेतना एक बार ऊपरी तलों को छू ले, गिरेगी भी क्यों?
- 50:36क्योंकि जितना ऊपर उठोगे चेतना आनंद मयी होती जाएगी, कौन अपने
- 50:43आनंद को खोना चाहता है? धरती पर ऐसा कोई मूर्ख नहीं।
- 50:51जो आनंद को खो जाने दे, तुम धन को तुम पद को तुम प्रतिष्ठा मान
- 51:04सम्मान खो जाने दोगे। तुम उसके साथ समझौता कर लोगे,
- 51:15लेकिन चेतना को लुत्फ को लज्जत को, आनंद को तुम छिन जाना नहीं
- 51:23चाहोगे। कोई भी व्यक्ति अपनी चेतना के
- 51:27लुत्फ को नहीं चाहता कि वह कम हो जाए।
- 51:32वर्ण सभी व्यक्ति यह चाहते हैं कि कैसे मेरी चेतना बढ़े, तरक्की
- 51:42करे, उत्थान करें। चेतना को तुम किसी भी कीमत पर
- 51:49नहीं गंवाना चाहते, इसलिए तुम्हें पता नहीं ये जो देश के ऊपर बलिदान
- 51:59होते हैं, तुम्हें इनका जज्बा समझ नहीं आया?
- 52:06उस बलिदान में इन्हें इतना सुखम मिलता है, इतना आनंद आता है चेतना
- 52:13का तुम, अगर कहो कि मैं तुम्हें माफ़ कर दूँ तो कहेंगे नहीं इस
- 52:22बलिदान में बड़ा मज़ा है। आज तो देश की मातृभूमि पर
- 52:31न्योछावर होने का वक्त आया है। आज वो घड़ी आई कि मुझे मातृभूमि
- 52:41पर न्योछावर होने का मौका मिला। तुम हट जाओ कुछ मुझे लोग कह देते
- 52:49है आपने भक्त सिंह के माफी क्यों नहीं करवाई?
- 52:56मैंने कहा वह खुद चाहता नहीं था। भगत सिंह राजपुरु सुखदेव कहते जो
- 53:08आनंद बलिदान में हैं, वो माफी में कहाँ है?
- 53:15माफी दो में शरीर को बचा लो, लेकिन कब तक?
- 53:20वह तो मौत क्षीण लगी? और किसको क्या पता अगली ही घड़ी
- 53:26वो आ जाये और आपका माफी नमः बेकार हो जाये तो बलिदान पुरुषों ने कभी
- 53:38माफी नहीं मांगी। माफी सदा कायर न का करते।
- 53:45बलिदानी तो कहते हैं कि तुम जहाँ कर फांसी देनी आज दे दो, क्योंकि
- 53:56हमने तो अपना चोला बसंती रंग में चुनना है।
- 54:02हमने पहना है तुम शीघ्रता करो यह समय अब हमें समय की देरी अब हमें
- 54:14बर्दाश्त नहीं होती कृष्ण प्रेम के अवतार।
- 54:23भगवान राम जिनका आज ही जन्मदिन भी है, जन्मतिथि है मर्यादा के अवतार
- 54:37बुद्ध करूण के अवतार। ओश करना के अवस्था में आज नहीं कल
- 54:48उष्पनो अवतरित पुरुषों में होगा जैसे फूल की सुगंध बता देती है।
- 55:03कि यह कली खिल गई है, इस कली की सहस्रर की पंखड़ियाँ खुल गई हैं
- 55:10और फूल बन गई है तभी तो सुगंध आया करती हैं, अन्यथा बंद करियों के
- 55:17मुख में सुगंध बाहर जा ही नहीं सकते।
- 55:23जो इतना लालची है जो इतना लोभी है, कलियों की तरह कलि बड़ी लोभी
- 55:30होती है और ये अच्छा भी है क्योंकि लोभ के उन क्षणों में
- 55:37अपनी पंखड़ियों को बंद करके। वह कल को जो बांटना है उसे जोड़ती
- 55:43है और फिर कल को जब वो भर जाती है, खुशबु से तो अपनी सारी
- 55:52पंखलियाँ से हितरार की तरह खोल देती है फिर वो लुटाती है फूल बन
- 55:57के। नैनो से जादू किया जियारा मोलिया
- 56:15हो? नैनो से।
- 56:16जादू किया जियारा। मोलिया।
- 56:23हो? जीरा मोलिया मोहे घोंघटा नजरिया
- 56:36से तोड़ गयो रे मोरे घोंघटा। नजरिया से तोड़ गयो रे मोहेपन घट
- 56:51पे मोहेपन घट। पे नन्द।
- 56:56लाल छेर गयो रे। मोरे पनघट पे नंदलाल छिड़ गयो रे
- 57:09मोरी नाजुक कलैया मरो गयो कलैया मरो गयो रे मोरे पनघट पे नन्द लाल
- 57:29छेर गयो रे। धन्यवाद।