Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Jul 25 - क्रांति का सूत्र: मेरा कुछ नहीं, जो है वो तेरा! जो इसे समझ गया, क्रांति घट गई! सत्य क्या है?
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- 0:12खूब राम बाबा, मैंने आपकी बात ग्राफी पड़ी है।
- 0:25आप गप्पे बहुत बोलते हैं। थोड़ा कम बोल लिया करो।
- 0:39ये भी खूब रही। खूब राम जी ये भी खूब रही।
- 0:52मैं गप बहुत बोलता हूँ, मैं गप ही बोलता हूँ तुमने घर तो कहा
- 1:05तुम्हारी समझ वहाँ तक जाती नहीं। सच तो ये है कि मैं गप ही बोलता
- 1:15हूँ खूब राम जी सच बोला नहीं जा सकता।
- 1:29जो आज तक मैंने बोला वो सब गप था क्योंकि सच वो जो बोला ना जा सके।
- 1:52मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा सत्य क्या है?
- 1:58सत्य वो है पुत्र जो आज तक में किसी वीडियो में बोल नहीं सका हो।
- 2:06सत्य है जो पीछे छूट गया। अधूरा रह गया।
- 2:17बोला नहीं गया बोला जाएगा भी नहीं, अब तो हार गया, थक गया।
- 2:31बोलते बोलते बोलने में वो आता नहीं, जो बोला जाता वो गप्पे है
- 2:44खूब राम जी तुमने ठीक कहा तुम सत्य बोल रहे हो।
- 2:54जो बोला वो झूठ बोला गप बोला मैं वो शय हूँ।
- 3:11जो सदा बोलने से परे रह जाता हूँ। तुम कुछ भी बोल, मैं कुछ भी बोल
- 3:28मैं सदा ही अनबोला रह जाऊंगा। मैं कुछ भी बोल दूँ, मैं सदा ही
- 3:38अनबोला। रहस्यम का भाषा की सीमा है तो छता
- 3:49है। क्या करें अलफाज़ों में अनुभवों
- 3:56को कहना होता है जो कहे नहीं जाते, अनुभव कहे नहीं जाते है जो
- 4:07सदा अन कहा रह जाता है। इसलिए मैं कहता हूँ शास्त्रों को
- 4:17आग लगा दो। सभी शास्त्रों को मेरे भी
- 4:25शास्त्रों को आग लगा दो। मुझे बहुत सुन लिया और सुनने का
- 4:43यही मतलब होता है कि सुन सुन के तुम यह।
- 4:51निष्कर्ष निकाल पाऊं कि वह सदा अनसुना रह गया।
- 5:01वह कभी सुना नहीं रह सकता। और वह कभी बोला नहीं जा सकता और
- 5:10मैं वो श्याम हूँ जो सदा अनकाहा रह जाऊंगा।
- 5:22खूब राम जी। ध्यान रहे मैं सदा ही कहता हूँ,
- 5:37मेरा बोलना सत्य पीछे छूट जाता है।
- 5:48और जो ज्यादा आक्रामक होते हैं, मैं उन्हें कह देता हूँ कि जो
- 5:53सत्य बोलता है उसके पास चले जाओ। मैं तो ना बोल पाऊंगा।
- 6:03दोनों हाथ खड़े हैं, हाथ ही ये नहीं खड़े।
- 6:07मैं तो दंडवत प्रणाम करता हूँ, तुम्हें नहीं बोला जाएगा बहुत
- 6:20लोगों ने पूछा फिर क्यों बोलते हो?
- 6:28बस इसीलिए बोलता हूँ कि शायद बोलने से कोई तुम्हें भनक लग जाए।
- 6:39लग जाती है कभी कभी ना वो लिखने में आता है।
- 6:46ना वो बोलने में आता ना वो समझने में आता वो अनुभव में आता लिखा
- 6:56लिखी की है। नहीं देखा देखी बात?
- 7:06हमारा बोलना, इशारा भर समझ लेना, ये सत्य है के बोलना जिसके प्रति
- 7:19इशारा है वहाँ तक पहुंचता नहीं। मैंने आपको बहुत बार समझाया,
- 7:32चंद्रमा तक इशारा जाता नहीं, सूरज तक इशारा जाता नहीं।
- 7:41जब हम कहते हैं वो रहा चंद्रमा तो तुम यहाँ टटोलने लगते हो नहीं है
- 7:49बाबा नहीं है नहीं है बेला शक नहीं है।
- 7:59फिर इशारा करने की क्या जरूरत है? इशारा करने की यही जरूरत है, शायद
- 8:10किसी भाग्यशाली क्षण में तुम इस इशारे की खेत में स्टेट लाइन में
- 8:17देख। तो चंद्रमा दिख जायेगा, बस इतना
- 8:25ही मंतव्य है अगर तुम इसका लाभ ले लो अन्यथा नहीं बोला जाता।
- 8:38बोलना भी नहीं पहुंचता और इशारे भी नहीं पहुंचते, इसलिए तुम सत्य
- 8:49कहते हो नहीं बोला जाएगा। जिसने भी बोला अगर वो कहता मैंने
- 8:57बोल दिया। पर ध्यान रखना उसने देखा नहीं
- 9:07अन्यथा वो कभी नहीं कहता कि मैंने बोल दिया जिसने देखा वो सदा
- 9:17पायेगा। कह कह के पाएगा वह सदा अन कह छूट
- 9:24जाता है पीछे कह तो जाता है कभी कहा जाएगा भी नहीं।
- 9:42अगर तुम शब्दों से ही जानना चाहते हो तो मैं आपको प्रणाम करता हूँ,
- 9:53खूब रंग हैं बहुत से लोग। जो शब्दों से तुम्हें जताने की
- 10:07चेष्टा ही नहीं करते वरना स्टैम्पिंग भी करते हो।
- 10:13मैं बता दूंगा तुम्हे लेकिन। ऐसी मूडताएं मैं नहीं किया करता,
- 10:29मैं आपसे क्षमा मांगता हूँ, ऐसा कुछ मैं कर नहीं सकता अगर कोई
- 10:38कहता है। मैं दिखा दूंगा, मैं वोट दूंगा तो
- 10:42उससे पूछ लो, उसके पास चले जाओ, यहाँ कोई जरिया नहीं है।
- 10:55अपूर्ण हाथ खड़े। मेरी समझ में जो बोला, जिसने बोला
- 11:19जीस रूप से बोला जैसे ढंग से बोला, वह बोला नहीं हो गया।
- 11:27और जो बोला गया और जो लिखा गया जो पढ़ा गया वो झूठ था, जो पढ़ा
- 11:36जायेगा जो लिखा जायेगा, जो बोला जायेगा वह झूठ होगा।
- 11:43ज्ञप होगा वो चाहे कोई भी अनुभव हो इसलिए मैं सदा कहता हूँ कि
- 11:59शास्त्रों को आग लगा दूँ। गंगा जी मैं बाहर हूँ।
- 12:06यह काम न पड़ेंगे शास्त्रों में शास्त्रों से कोई संगीत तुम्हारे
- 12:19हृदय में न बच रखा। कोई हृदय के तारों में ध्वनि नहीं
- 12:30पैदा होगी, कोई संगीत न निकलेगा, कोई हारमनी न पैदा होगी आनंद के।
- 12:44दो घड़ी का मोझ मिला है क्योंकि शब्द भी वहीं से टकरा के आते हैं
- 12:55इसलिए बोलते हैं। इसलिए बोलते हैं उसी तल से आते
- 13:05हैं शब्द टकरा के और तुम दो घड़ी के लिए उसे पीकर मस्त हो जाते हो।
- 13:20और इस दुख भरी दुनिया में इतना ही काफी है तुम्हारे विराट फोड़े के
- 13:32ऊपर कैंसरराइटिस के ऊपर थोड़ी सी मरहम लग जाती है कुछ देर के लिए।
- 13:42उससे थोड़ा चेन पड़ता है, सब को मिलता है, तुम उसी को समझ लेते
- 13:55हो। के बाबा ने बोल दिया बड़ा अधिकार
- 14:01दिया नहीं, नहीं बोला नहीं क्या मेरा हृदय उस दिन प्रश्न होगा जीस
- 14:15दिन तुम खुद उतरोगे उस। सरोवर में और नाचो क्या खुद
- 14:28उतरोगे पियोगे और अनंत करोगे? संगीत बजेगा।
- 14:39और ऐसा बजेगा कि फिर कभी बंद नहीं होगा।
- 14:45हमारे बोलने का संगीत तो दो घड़ी बाद बंद हो जाता है और तुम?
- 14:57इसे इतना ही बहुत समय के हो लेकिन हम इससे तृप्त नहीं होते हैं।
- 15:08ये आग हमारे भीतर जलती ही रहती है।
- 15:12नहीं बोला क्या? श्रियाकुमारी बाबा गीता का एक
- 15:35श्लोक पत्रम पुष्पम फ़िल्म तोयम। यौमे भक्त्या प्रक्षेत्र में इसका
- 15:45गहरा अर्थ क्या है? पत्ते चढ़ा दो, फूल चढ़ा दो फट
- 16:00चढ़ा दो पानी चढ़ा दो। सोना चढ़ा दो हीरे जोहरा चढ़ा दो,
- 16:13कुछ भी चढ़ा दो मेरे लिए वो सामान है क्यों?
- 16:27क्योंकि सब मैं हूँ, मेरे सिवा कुछ भी नहीं और मेरा मुझको अर्पण
- 16:41करते हुए। तुम्हारा कुछ है ही नहीं है तो
- 16:48डगेगा क्या तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा मेरा मुझको अर्पण करते
- 17:02हुए तुम्हारा क्या लगता है? सोना चढ़ा दो, सोना भी मैं हूँ
- 17:16पत्ते चढ़ा दो, फल चढ़ा दो, फूल चढ़ा दो, पानी चढ़ा दो और कुछ भी
- 17:23न चढ़ाओ। सिर्फ प्रणाम ही करते हो लेकिन
- 17:36श्रद्धा से करो। श्रद्धा का अर्थ क्या है?
- 17:44यह मार खा जाती हैं भक्त नकली भक्त कहते हैं तेरा तुझको अर्पण
- 18:00क्या लाके मेरा। कहते हैं मानते हैं मानते ये हैं
- 18:09कि मेरा तुझको अर्पण तेरा तुझको अर्पण जीस दिन ये हो गया उस दिन
- 18:201313। मिल गई सतौरी नानक को इसी 13 ने
- 18:33सतौरी दिला दी। 131313।
- 18:47अगर ये भाव प्रस्तुतित हो गया गहरा इस भाव को गहरे उतरने दो सब
- 18:56तेरा पत्ता भी चढ़ा दू तेरा। और सच में, अगर तुम देखोगे सच में
- 19:07अगर तुम देखोगे गहन दृष्टि से अगर तुम देखोगे तो तुम पाओगे सब उसका
- 19:16है तुम्हारा यहाँ कुछ भी नहीं। तुम्हारा सिर्फ दाबा है और दावे
- 19:29कभी किसी के सत्य नहीं होते। 1 दिन टूट जाते हैं।
- 19:41दाविक शीशा हो या दिल को आखिर टूट जाता है, टूट जाता है।
- 20:01टूट जाता है, टूट जाता है। दावे सभी के टूट जाते हैं, किसका
- 20:12रहा? तुम रोज़ देखते रहो फिर भी मुझे
- 20:19बताने की आवश्यकता है। कभी किसी का दावा यहाँ रहा है
- 20:27जिसे तुम कहते हो मेरा घर उसी घर से 1 दिन निकाल दिए जाते हैं तो
- 20:38क्या वो तुम्हारा था? दावे कब किसके रहे हैं?
- 20:52मौत? डेथ यूनिवर्सल ग्रोथ अत्यंतिक
- 20:59सिचाई है। वो तुम्हें आईना दिखा देती है,
- 21:03तुम्हारा कुछ नहीं था जीस घर को तुमने बनाया सजाया संवारा और विश
- 21:11किया संभाल के रखा रेत का कण तक नहीं जमने दिया।
- 21:19उसी मेरे घर से तुम्हें निकाल दिया जाता है।
- 21:25कथन पर वो ही लोग डरते हैं। तुम्हारी ही पैदाइश।
- 21:43तुमसे डरती है, मत रखो इससे सड़ाध मारेगी सर।
- 21:52बदबू फैलेगी, बैक्टीरिया से जन्म देंगे बिमारी का भर।
- 22:04कभी तुम्हारा दावा चला तुम्हारे सभी दावे झूठे होते हैं।
- 22:15दावा किसी का नहीं चला। तो कृष्ण कहते हैं पत्ता चढ़ा दो,
- 22:25फूल चढ़ा दो, पानी चढ़ा दो, फल चढ़ा दो, कुछ भी चढ़ा दो, सोने के
- 22:31छतर चढ़ा दो सोने के मुकुट चढ़ा दो, सोने के खड़ा हूँ दे दो।
- 22:41और शाक्त? लेकिन अगर इस स्वभाव से दिए कि
- 22:49मेरा है और तुझे अर्पण कर रहा हूँ तो वह पुण्य नहीं, वह साफ है।
- 23:00वह तुम्हें दुख देगा क्यों? क्योंकि एक झूठ का हाथ झूठ मानव
- 23:09और झूठ सदा ही दुख देता है। था तो नहीं तुम्हारा इसलिए तो लोग
- 23:19रोते हैं जब अलविदा कहते हैं संसार को तो इतने तड़पते हैं, वो
- 23:30तड़प होती है छोड़ने की जो मेरा था।
- 23:35वह मेरा न रहा, वह जा रहा है। हाथों से छूट रहा है यह दांव इसकी
- 23:44नींव हिली कृष्ण कहते हैं जिसने जीते जी।
- 23:55यह समझ लिया कि मेरा कुछ नहीं जो है वह तेरा है, वह एक क्रांतिकारी
- 24:07कदम है अगर तुम्हारी समझ में किसी दिन भी ये आ गया।
- 24:15कि मेरा यहाँ कुछ नहीं बुद्ध के जब समझा जाता है वो महल अटारियों
- 24:22को छोड़कर चले जाते है। समझ आ गया वृद्ध ने के जो कि कमर
- 24:31देखे, मुर्दा देखो। बीमार व्यक्ति देखा, चेतक से पूछा
- 24:39क्या मैं भी मर जाऊंगा? रथवान ने कहा, राजकुमार।
- 24:53बोलने के एजाज़ तो नहीं लेकिन इतने प्यार से पूछा रहा भी नहीं
- 25:00जाता। हाँ 1 दिन सभी मर जाने गए तो क्या
- 25:06मैं भी मर जाऊंगा? बुद्ध ने पूछा।
- 25:13चेतक बोला, हाँ महाराज तुम भी 1 दिन मर जाओगे, बस हृदय में बात
- 25:25उतर गई, फिर मेरा क्या है? शरीर तक मेरा नहीं और मैं तो शरीर
- 25:36ही मानने बैठा हूँ। तुम भी यही कहते हो, तुम्हें भी
- 25:42यही भ्रम है। यही ब्रह्मबुद्ध को था।
- 25:50और जीस दिन टूट जाता है उस दिन प्रज्ञा का जन्म होता है।
- 25:57नानक का यह भ्रम टूट गया, मेरा नहीं सब 1313131313 करते।
- 26:09सुरती लग गई और तेरा ही हो गया, मेरा कुछ न रहा तुम रोज़ देखते
- 26:19हो, लेकिन सत्य से तुम आँखें मूँद लेते हो।
- 26:35उन हकीमों से कहो। ये बोलकर करते थे दवा किताबें
- 26:40खोलकर ये दवा हार्गिज़ न खाली जाएगी।
- 26:47जब तेरी डोली उठा ली जाएगी, वे मुहूर्त के निकाली जाएगी।
- 27:01बड़े बड़े चक्रवर्ती सम्राट छाती ठोक के दावा करते हैं।
- 27:12मेरे चलने से चलती है, हवाएं मुस्कुराने से फूल खेलते हैं और
- 27:23उनको पता भी नहीं लगता कब वो धड़कन से घर जाते हैं।
- 27:30और वह जो दावा करता था वह हिलने तक की शक्ति नहीं रखता, दूसरे ही
- 27:38उठाती हैं उसे सत्य तो यह है बाकी सब झूठ है।
- 27:52पत्रम पुष्पम फ़िल्म तो कुछ भी जुड़ा दो लेकिन इस अभाव से चिड़ा
- 28:02दो के तुम्हारा कुछ नहीं। सब उसका है और एक दफ़े तुम्हारे
- 28:13भीतर ये भाव गहरा हो गया मेरा मुझमें कुछ नहीं तुम गाते रहो बस
- 28:21हृदय तक में नहीं उतरता इतनी ही कमी।
- 28:26जीस दिन हृदय में उतर गया उस दिन तुम्हारा कुछ न बचेगा उस दिन सब
- 28:33उसका हो जाएगा तेरा है। यह बात हृदय में उतर जानी चाहिए।
- 28:47जुबान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जुबान तक तो तुम सदा ही सीमित
- 28:55रखते हो भजन गाते हो इतने भजन गाने से क्या होगा?
- 29:06जो सत्य हृदय तक ना पहुंचा, जो वहाँ तक रह गया, उसका कोई प्रयोजन
- 29:16नहीं, उसका कोई अर्थ नहीं। बस ये क्रांति का सूत्र है।
- 29:2413। तुम्हें समझ आ जाए सब 13 पर ये
- 29:37सत्य भी है बाकी सब झूठ जिसे तुम मेरा कहते हो।
- 29:45बह झूठ तुम देख लेना न जाने कौन सा पल मौत की अमानत हो उजाले अपनी
- 29:59यादों के हमारे संग रहने दो। न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की
- 30:06शाम हो जाये कौन सी यादों के उजाले साथ रहने दो परमात्मा के न
- 30:15परमात्मा को तो तुमने बड़े उजाले बड़ा सुमरण कर लिया बड़ी मार।
- 30:23बड़े मन के घुमाले कुछ न मिला कौन सी यादों के उजाले हमारे साथ रहने
- 30:33दो, न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए?
- 30:46मौत कब आ जाएगा ये तुम्हें पता है।
- 30:53जब कोई मर जाता है तब भी उसे थोड़ी देर यकीन नहीं होता कि मैं
- 31:00मर गया। घर वाले रोते हैं पत्नी रोती
- 31:09बच्चे होते हैं, प्रिय मित्रगण रोते हैं और वह उन्हें दिलासा
- 31:17देता है, सांत्वना देता है। अरे नहीं, नहीं।
- 31:21ये देखो मैं हूँ तब तक भी तुम संभल नहीं पाते और कृष्ण कहते हैं
- 31:36तुम अब ही संभल जाओ। तुम तब तक भी नहीं संभल पाते मरने
- 31:43के बाद भी तुम दूसरों को दिलासा देते हो ये देखो मैं हूँ क्यों रो
- 31:49रहे हो छाती क्यों फिर रहा है ये आँखों से आशिक क्यों बह रहे हैं
- 32:03मेरे लिए मैं तो हूँ। तुम्हें तब तक भी पता नहीं चलता।
- 32:13बड़े खुश नसीब होंगे वो जो इस सत्य को जान लेते हैं जीते जी मर
- 32:20जीवड़े हो जाते हैं। क्या होता है मर जेउडा जो जीते जी
- 32:28जाने के 1 दिन यह जिसे मैं समझता हूँ यह जिसे मेरा समझता हो वह मर
- 32:39जाएगा जीते जी। यह बात की भनक लग यह बात हृदय में
- 32:47उतर जाए, बस हृदय तक में नहीं उतरती।
- 32:51यही कमी जुबान पर तो सदा रहती है और जुबान पर रहने से कुछ नहीं
- 33:01होता। क्रांति घटित होती है जब ये बात
- 33:06यह सत्य हृदय में उतर जाए। पता नहीं अगला पल अगला पल न जाने
- 33:18कौन सा पल मौत की अमानत हो? अगला पल ही मौत किया मानव हो सकता
- 33:27है और तुम इसे भूले भूले फिरते हो, वही कबीर कहते हैं भोला भोला।
- 33:40फिर जगत में कैसा नाता रे? दास कहते हैं, माटी को पुतरों
- 33:52कैसा नाचते है? लेकिन तुम अपने आप को जीवंत
- 33:58समेटते हो? तुम अपने आप को माटी का पुतरा
- 34:00नहीं समझते, सभी संत कहते हैं कि सत्य को हृदय में उतारो, सत्य को
- 34:12मान लो और सत्य क्या है? सत्य ये है कि तुम्हारा यहाँ कुछ
- 34:24नहीं, ये अकाट्य सत्य है, इसको काटा नहीं जा सकता।
- 34:34अनदेखा किया जा सकता है। सो तुम कर रहे हो और सभी करते हैं
- 34:42अनदेखा कृष्ण ने जब ये शब्द बोले सब मेरा है।
- 34:53पत्रम पुष्पम परम तोयम। यह माँ भक्त परिश्चित इस स्वभाव
- 35:00से जो भी कुछ अर्पण कर दो उसे खाली हाथ हो, पत्ता हो, फल हो,
- 35:10फूल हो, पानी हो। सोना हो हीरे जोहारा तो लेकिन
- 35:17भाग्य हो कि मेरा नहीं है, मेरा सिर्फ दावा है, आज नहीं, कल यह
- 35:26मेरा रहेगा भी नहीं, लेकिन वस्तुएं तो रहेंगे।
- 35:33यह पदार्थों का एक संगठन बिखर जाएगा स्कैटर हो जाएगा विखंडित हो
- 35:41जाएगा, पदार्थ रहेंगे, तुम नहीं रहोगे?
- 35:57बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया, यहीं रहेंगी, बिगड़ेगी और बनेगी।
- 36:14दुनिया यहीं रहेंगी, कोई ना साथ देगा, सब कुछ यहीं रहेगा, कोई ना
- 36:31साथ देगा। सब कुछ यही रहेगा होंगे यही झमेले
- 36:42होंगे यही झमेले ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे।
- 36:54अफसोस हम न होंगे ये जिंदगी के मेले ये जिंदगी के मेले अगर ये
- 37:06बात सच में समझा जाए तुम्हें सब रहेगा।
- 37:13तुम्हारे बिना भी रहेगा, तुम न रहोगे तो भी सब रहेगा।
- 37:22यही झमेले होंगे, यही दुनिया होगी, यही रंगीनियां होंगी, यही
- 37:30सुबह शाम होगी। यही हवाएं चलेंगी, कोई काम नहीं
- 37:37रुकेगा, संसार चलता ही रहेगा, तुम्हारे बिना चलता रहेगा अगर ये
- 37:47बात जीते जी समझा जाए बाबा को जीते जी समझा गई।
- 37:54नानक कहते हैं, मेरा कुछ नहीं 1313 और हृदय से पुकार उठे, तुम
- 38:01भी 1313 करते हो, लेकिन वो पुकार गिनती की होती है हृदय से।
- 38:10और खोपड़ी से आती है और तुम महज गिनती कर रहे हो।
- 38:19हृदय से बात नहीं आती की तेरा जीस दिन हृदय से ये बात उठी।
- 38:30फिर कृष्ण कहते हैं, जीस दिन तुम्हारा कुछ न रहा, उस दिन
- 38:36मिट्टी और सोना बराबर हो जायेगा। यही रावण मांगते हैं भगवान शंकर
- 38:45से। सोनी की लंका का मालिक भगवान शंकर
- 39:00से कहता है कदा नीलिम्प निर्झरी नेकुंज को डरे वसन बेमुख चतुर्मथी
- 39:07सदा शह समंजली वाहन। विलोल लोल लोचनो ललां भा लग्न कहा
- 39:15श्वेति मंत्रमुच्चरण कदा सुखी। वहाँ में हम तुम सोचते हो कि सोने
- 39:24की लंका हो तो खुश हो जाएंगे। पुष्पक विमान हो तो प्रसन्न हो
- 39:32जाएंगे, लेकिन रावण कहता नहीं गंगा तीर पर छोटी सी कोठियाँ और
- 39:44उसके किनारे। उस कुटिया में बैठा हुआ मैं सिर
- 39:53के ऊपर अंजलि बांधी, आँखों से अशरो धारा बहती हुई हे प्रभु तेरी
- 40:03याद करते हुए। मैं कब सुखी हूँ वे लोल लोल, लो
- 40:12चि नोल लां भा लग्न कहा शिविर की मंत्रमुच्छर में कला सुखी वहाँ
- 40:18व्याहम तुम तो अभी यह सोचते हो कि सोने की लंका कब हमारी हो जाएगी?
- 40:28अभी तो इन्हीं सपनों में तुम जी रहे हो लेकिन जिनकी सोने की लंका
- 40:37हो गई वो न हुए। वो कहता है कि मैं गंगा तीर पे
- 40:51बैठा गंगा के किनारे एक छोटी सी कुटियाँ हो कदा नीलिम् पण्डर झरी
- 40:57नुक्कुंज को टरे वसन विमुक्त धुरमति सदाशरह समंजली वाहन।
- 41:05और मैं सभी मान्यताओं को त्याग कर विमुक्त दोरमती सदा सबसे बुरी मत
- 41:18क्या है यह सब मेरा है। यह धुरमति है और रावण कहते हैं कि
- 41:26इससे मैं कब मुक्त होऊंगा। कब 1313 हो जाएगा मेरा मेरा न
- 41:33रहेगा? विमुक्त धुरमति सदा क्षयस्थमंजरी
- 41:39वाहन। और सिर के ऊपर अंजलि बनती हो गया
- 41:44बेलो लो लो चिन्ह प्यार के आगोश में, मेरी आँखें आंसुओं से भरेंगी
- 41:56हृदय रोयेगा तेरी याद में। ये वेला कब आएगा?
- 42:07ललाम भाल लगन कहें श्वेति मंत्र मूचरण कदा सुखी।
- 42:12वहाँ हम तेरी याद आएगी और तड़ पाएगी।
- 42:20और कब मैं तेरी याद में उन्मत्त तड़पता हुआ गंगा किनारे बैठा उस
- 42:32कुटिया में निहार लूँगा अश्रु पुरुष आँखों से।
- 42:41दुर्मती है, क्या यह मेरा है? जीस दिन तुम्हारी खोपड़ी से यह
- 42:53बात निकल गई। तुम कहते हो बाबा दुखी हैं, मैं
- 43:01जानता हूँ पर ये भी जानता हूँ कि तुम दुखी क्यों हो?
- 43:08तुम कहते हो, सुखी होना चाहते हो? बिलकुल ठीक है, मैं ये भी जानता
- 43:15हूँ कि सुखी तुम कैसे हो जाओगे? और मैं रोज़ कहता हूँ, लेकिन बस
- 43:24तुम सुन नहीं पाते, कान भी है, मैं भी बोलता हूँ, लेकिन तुम बहरे
- 43:31हो जाते। तो कृष्ण भी कहते हैं, जीस दिन
- 43:40तेरा कुछ न रहा, फिर तू चाहे पत्ता चढ़ा देना, चाहे सोने का
- 43:48छत्तर चढ़ा देना, मक्कुर चढ़ा देना तेरा कुछ है नहीं, कुछ भी
- 43:53चढ़ा दे। सब मेरा लेकिन यह भाव खत्म हो जाए
- 44:01तेरे भीतर यह दोरो मति समाप्त हो जाए के लंका मेरी है, सोने की
- 44:09लंका मेरी है, यही मांगता है रावण।
- 44:15और रावण शिव भक्त है। रावण कहता प्रभु इस मती को हर ले
- 44:24मैं कब इस दुर्मती से मुक्त हो जाऊंगा वे मुक्त दुर्मती सदा इस
- 44:31दुर्मती यह दुर्मती है सुमति ने। इससे मैं कब मुक्त होऊंगा कि मेरा
- 44:38है सोने के लंका मेरे तुम तो अभी पाना चाहते हो।
- 44:47जिसके पास है वो इस समिति को त्यागना चाहता है।
- 44:53यह मति कष्टकारी है, यह मति दुख देती है कि मेरा इसलिए मरते हुए
- 45:04व्यक्ति को देखना उसकी आकांक्षाएं।
- 45:121000 दिशाओं में दौड़ेंगे, कभी सोचा न था कि मरना भी होगा यही
- 45:23देखा था बस और मरेंगे, मैं न मरूँ, मरे सिन स्वरा।
- 45:32सारा संसार मर जाएगा मैं नंबर यही दुर्मती है और रावण कहते कि हे
- 45:44शिव, हे भगवान इस दुर्मती से मैं कब मुक्त होऊंगा?
- 45:52ये झूठ से मैं कब मुक्त होऊंगा कब मैं सत्य का उपवासक हो जाऊंगा।
- 45:59सत्य क्या है तुम्हारा है कुछ नहीं, ये सत्य है, आज नहीं जानते,
- 46:07लेकिन मौत तुम्हें जना देती है तुम्हारा कुछ।
- 46:19तुम्हारे अपने जो तुमने बाल पोस के बड़े किये है उन कंधों पे
- 46:31तुम्हारे मृत शरीर को डोते है। तेरा अपना खून ही आखिर तुझको आग
- 46:47लगाएगा आसमान पे। आसमान पे उड़ने वाले माति में मिल
- 47:11जाएगा। कसमें, वाध, प्यार व पाशा बातें
- 47:22हैं बातों का क्या कोई किसी का नहीं है, झूठे नाते हैं।
- 47:35नातों का क्या कोई किसी का नहीं है।
- 47:42झूठे नाते हैं नातों का क्या पहले तो अपना शरीर ही अपना नहीं, फिर
- 47:51तुम जो कहते हो कि ये मेरा है। वो तुम्हारा कैसे होगा, जो कहता
- 48:00है मेरा मकान, मेरे पुत्र पोत्रा, मेरा परिवार, मेरे मित्र, मेरे
- 48:10दुश्मन और तुम्हारे कहाँ। जिसके हैं शरीर के वो ही तुम्हारा
- 48:19नेम और 1 दिन मौत सच तुम्हारे सामने खड़ा कर देती है ये ले।
- 48:33तो बाबा कहते हैं जो चीज़ तू मर के भी ना जान पाएगा वो जीते जी
- 48:40जान ले। कबीर कहते हैं मर्जी बड़ा हो जा
- 48:48गौरख कहते हैं तू मर जा। मरो मरो हे जौगी मरो मरो मरण हे
- 48:56मीठा सत्य को स्वीकार करना सदा मीठा होता है।
- 49:02अभी तुम झूठ को स्वीकार किया और कितना ही कोई बोल ले?
- 49:13ये बोलने वाले उपदेशक खुद झूठे हैं।
- 49:17इन्हें खुद भी बताना ये तो सिर्फ आपको रोयेंगे आँखों से आंसू
- 49:25निकलेंगे। और 20 50,00,000 लेके हेलिकॉप्टर
- 49:30में बैठ के उड़ के चले जाएंगे कितने मोड़ हैं ये लोग?
- 49:41रावण कहता सोने की लंका, ये दुरमति कब खत्म होगी?
- 49:48कब गंगा तीर के किनारे कुटिया में बैठा हुआ मैं सर पर अंजलि बांधे
- 49:56आँखों में अश्क लिए रोता हुआ कब तुझे याद करूँगा याद करना है।
- 50:08तो मौत को याद कर लेना, वो सत्य है, परमात्मा का तो कोई भरोसा
- 50:16नहीं, वो है कि नहीं राम राधे का मत करना, जाप जाप करना तो मौत का
- 50:24कर लेना। वह सत्य है।
- 50:29वह तुमने देखी है न तुमने राधा देखी है न तुमने राम देखे हैं न
- 50:36तुमने कृष्ण मान्यताएँ हैं। मान्यताओं का क्या?
- 50:43मान्यताएँ 1 दिन टूट जाती हैं। 1 दिन सत्य तुम्हारे सामने होगा
- 50:49मृत्यु के रूप में उसको स्वीकार कर ले जीते जी वो आएगी और आएगी
- 50:59कबीर से वो जीते जी स्वीकार कर लेते है एक भिक्षु ने।
- 51:07द्वार पे दस्तक दी, माँ लोई निकली पुत्र क्या बात है कबीर जी का घर
- 51:15यही है हाँ पुत्र क्या बात है मेरे कबीर जीके दर्शन करने मेरे
- 51:22गुरुव्ण भेजा। कबीर जी इस वक्त शिव भूमि में
- 51:29मिलेंगे। पड़ोस में कोई मर गया है।
- 51:34शिव भूमि कहाँ है? माँ रोई ने बता दिया वह चला गया।
- 51:42जाके देखा लोग खड़े संस्कार हो रहा आग लग गई थी ऊंची ऊंची लपटें
- 51:53तो माँ लोई से पूछने लगा माता मैं पहचानूंगा कैसे?
- 51:58इससे पहले तो मैंने कबीर को कभी देखा है।
- 52:07माँ कहने लगी पुत्र एक ही पहचान है, उसके सर पर बड़ा ऊंचा मुकुट
- 52:14का बस यही पहचान है। चला शिवभूम में सभी खड़े तब तो
- 52:26मौत सभी को याद आती है। इसलिए हमारे संतों ने सनातन में
- 52:31यही कहा कि तुम रोज़ मुर्दे के पीछे पीछे जाना।
- 52:41वैसे तो तुम्हें मौत नहीं याद आएगी।
- 52:46मन की इस कोलाहल में मृत्यु का सच छुप जाएगा, लेकिन शिवभूमि में तुम
- 52:56मृत्यु का सच न छुपा सकोगे। वह तो मर गया है, वह तो कार्तक
- 53:02कहता था मैं हूँ करके दिखाएंगा कहते हो और आज मिट गया आज आग लग
- 53:14रही है, ये सत्य है। बाकी सपना था, कल्पना थी कुछ भी
- 53:26कहो, कल्पना थी सब सब कल्पना। मैंने यह मुकाम पाया, इतने साल की
- 53:39तप के बाद पाया कहाँ पाया मेरे पास अभी सर से लोग आ जाते हैं,
- 53:48बड़ी मुश्किल से मिला है किनारा मैंने कब मिल गया?
- 53:55तृप्त हुए बाबा उसी के लिए आया हूँ फिर कहाँ मुकाम मिल गया फिर
- 54:07मेहनत बेकार गई पुत्र तुम तो कहते हो बड़ी मुश्किल से 20 साल हो गए।
- 54:17मुकाम पाया। 20 साल की जद्दोजहद के बाद बड़ी
- 54:26मुसीबतें झेलें, बड़े ही प्रयास किए, लोगों को भी कहा तुम प्रयास
- 54:32करो। चरई वैती।
- 54:34न चलोगे तो मर जाओगे, मुर्दा नहीं चला करता, जीते जी तो चला ही जाता
- 54:43है, मैं कहता हूँ इतने साल की मशक्कत के बाद।
- 54:53तुम कहते हो मुकाम हासिल किया तो मुकाम हासिल किया तो यहाँ क्यों
- 54:59है बाबा गलती हो गई, मुकाम हासिल हुआ।
- 55:12सोचा था हासिल हो जाएगा आयास बन जाऊंगा, फिर सोचा था संत बन
- 55:21जाऊंगा, करोड़ों फॉलोवर जाऊंगा फिर मुकाम मिल जाए।
- 55:31लेकिन मौत तो कभी याद नहीं आई। मुकाम तो यही हुआ करता है असली
- 55:42मुकाम तुम कभी याद नहीं करते। असली मुकाम यही है जो सत्य है,
- 55:49इसको झुठलाया नहीं जा सकता। झूठों को तो तुम झूठ ला दोगे सत्य
- 55:59को कैसे झूठ लाओगे? मृत्यु पर हम सत्य इसका अर्थ ये
- 56:06नहीं कि तुम काम करना बंद कर दो। बस इसका अर्थ यही है कि तुम खुद
- 56:13भी समझलो और जो तुम्हारे पीछे लगे पूछ पकड़ के उनको भी समझा दो कि
- 56:21बस जितना जरूरत है उतना ही इकट्ठा करना।
- 56:25अपरिग्रह। और संतुष्ट रह जाना और और ये मत
- 56:35करना, काम करना, परिश्रम करना, मेहनत करना और सदा याद रखना मुकाम
- 56:47बाकी है। कुछ भी बन जाना सदा याद रखना
- 56:55मुकाम बाकी है मुकाम क्या है मुकाम ये है कि तुम्हारा यहाँ
- 57:02तुम्हारा शरीर भी। तुम जुठला सकते हो, सारी उम्र
- 57:08व्यक्ति जुठलाता है, इस शक्ति को जुठलाता है कृष्ण कहते हैं
- 57:15तुम्हारा कुछ नहीं, तू पत्ता दे, तू फल दे, तू फूल दे तू पानी दे।
- 57:25सब मेरा है, बस इस नीयत से यह भाव होना चाहिए कि तेरा नहीं है कुछ
- 57:32मेरा मुझको अर्पण कर रहा है। अगर यह भाव ना आया तो फिर कुछ भी
- 57:38ना आया क्या ख़ाक आया। फिर चाहे तो सोने के छत्र चुराते
- 57:50यह तो सत्यम या ये भी झूठ है सच्चा वह।
- 58:05जो खुद भी जान ले मेरा यहाँ कुछ नहीं और जो तुम्हारे पीछे पूछ
- 58:14पकड़ के लगे उन्हें भी समझा दे तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं ये शक्ति
- 58:20जान लो। फिर परिश्रम करो यही सत्य है
- 58:30अपरिग्रह जोड़ो मत जिसने जोड़ा किसके साथ गिरा किसी के साथ गया,
- 58:40सभी का यहीं पड़ा। सभी ने दावे किए।
- 58:44यह धरती मेरी यह धरती मेरी किसके साथ गई?
- 58:49बताओ तो कबीर कहते हैं इस दावे को छोड़ते हैं।
- 59:03कृष्ण कहते हैं इस दावे को छोड़ दे सब मेरा है और तू चाहे कुछ भी
- 59:10खाली हाथ अर्पण कर दे, ये हवाएं भी मैं हूँ, ये भी मेरी है तेरा
- 59:19कुछ भी सुना। अगर इस बात से तू कुछ भी चढ़ा
- 59:25देगा, वह सच्ची संपत्ति होगी, सन्मति होगी।
- 59:35अन्यथा तू कुछ भी चढ़ाते हैं। कुछ काम न पड़ेगा, सब दुख देने
- 59:40वाले होंगे। पाप लगेगा तू सोने की छत्र भी
- 59:45चढ़ा दे तो पाप लगेगा। खुद भी दंडवत हो जा तो पाप लगेगा।
- 59:50अगर तुझे ये है कि शरीर में हूँ, मेरा है तो कबीर कहते बाकी तो बात
- 59:57छोड़ सो। बाकी तो कल्पनाओं की बात है, तुम
- 1:00:02झुठला भी सकते हो, लेकिन मौत को तो कभी नहीं झुठला सकते हैं।
- 1:00:10कल तक छाती पीटते थे ये मेरा शरीर, मेरा महल, मेरे।
- 1:00:19ये चमचमाती कार्य मेरे ये जमीन का टुकड़ा मेरा आज कहाँ है आज चार
- 1:00:32तेरे बच्चे, तेरे पड़ोसी। तुझे कंधों से उठा के आग लगा देते
- 1:00:46ये भिक्षुक चला, क्या देखा, छत्र तो सब के सिर पे थे अब कबीर को।
- 1:00:58इसलिए कहा कि रोज़ जाना वहाँ मंदिर जाओ न जाओ, मंदिर तो मत
- 1:01:03जाना मंदिर जाने से कोई हल नहीं होता मंदिर जाने से तो वासनाएँ
- 1:01:09भड़केंगी तुम कुछ मांगोगे रोज़ तुम मांगते हो।
- 1:01:16मैं कहता हूँ मंदिर जाना, छोड़ देना, श्मशान जाना, मत छोड़ना,
- 1:01:26मुर्दे के पीछे जाना, मत छोड़ देना, जरूर जाना क्योंकि जीवन की
- 1:01:34वास्तविकता। वहीं नजर आती है।
- 1:01:37बुद्ध को भी वहीं नजर आई सबको वहाँ नजर आती है, नानक को भी तेरा
- 1:01:46मेरा कुछ नहीं कृष्ण भी कहते हैं कुछ भी अर्पण कर तेरा है नहीं कुछ
- 1:01:54यह समझकर अर्पण। और कबीर भी कहते हैं ये शरीर भी
- 1:02:03तेरा है मौत को सदा याद रख वह सत्य है।
- 1:02:08याद रखना तो राम और सीता को याद मत रख राधे और श्याम को याद मत
- 1:02:13रख। याद रख तो मौत को याद रख वो 1 दिन
- 1:02:17आएगी, दबे पांव आएगी और तेरा गला गवा देगी, तू लाख हाथ पांव मरना
- 1:02:29वो तेरा गला ना छोड़ेगी। जिसने इस सत्य को देख लिया मैं
- 1:02:44फिर जगह जगह भटकता हूँ जिसने तुम्हें याद कर दिया।
- 1:02:53कि बाकी असत्य कल्पना स्वप्न सत्य एक मृत्यु सत्य वहीं गुरु जिसने
- 1:03:05कह दिया नहीं, हम सत्य हैं, हमारे पांव पकड़ लो, वह झूठा है।
- 1:03:13वह पापु वह निर्दयी, लोभी लालची कुछ चाहता होगा तुमसे सच्चा गुरु
- 1:03:23तुम्हें कहेगा मृत्यु सत्य है, मैं भी 1 दिन चला जाऊंगा, मेरे भी
- 1:03:31पांव से मत चिपटा। मेरा भी नाम सिमरन मत कर स्मरण कर
- 1:03:41उसका जो सत्य है और सत्य है मृत्यु उल्टा नाम जपे ते जाना।
- 1:03:52वाल्मीक भय ब्रह्म समान और देखिये अगर वाल्मीकि राम राम करते तो कभी
- 1:03:59न पहुंचते ये बात तुम्हें हिलाएगी तो वाल्मीकि अगर राम राम करते तो
- 1:04:06कभी न पहुंचते। वाल्मीकि ने उल्टा नाम जबा तो
- 1:04:12पहुंचा मरा मरा मृत्यु ज्यादा आई और जो मृत्यु को याद करेगा वह
- 1:04:20पहुंचे ही जाएगा पक्का जो राम को याद करेगा कभी नहीं पहुंचेगा
- 1:04:26पक्का। मृत्यु सत्य किसकी नहीं होती और
- 1:04:37किसकी नहीं हुई, यह बता दो। वाल्मीकि ने सत्य को याद किया।
- 1:04:45सत्य को हृदय में उतारा मृत्यु सत्य है पहुँच गया तुम भी
- 1:04:54ज्योत्सना मृत्यु को सत्य जान के हृदय के अनुसार लोगे और जो गुरु
- 1:05:00तुम्हें मृत्यु समझा दे वह गुरु। शिव जहर पी लेते हैं, तुम्हें समझ
- 1:05:10नहीं आता जो जहर पी ले वो ही गुर जो अमृत पी ले वो कैसा गुर?
- 1:05:211 दिन तो इस शरीर ने तो जहर पी लेना, मृत्यु का जहर और मृत्यु के
- 1:05:29पीछे मृत्यु छिपा पड़ा। वह तो सदा से वहाँ तो मौत पहुंचती
- 1:05:36भी नहीं, उसकी फिक्र छोड़ दो। मृत्यु के पार है वो जो कभी मरता
- 1:05:46नहीं, लेकिन उसकी फिक्र छोड़ दो क्योंकि कभी मरता नहीं, उसकी काफी
- 1:05:52फिक्र करते हो। तुम दरबदर की खाक छानते रहो, अगर
- 1:06:04तुमने मृत्यु को सत्य करके नहीं समझा तो फिर सब तुम्हारा है, फिर
- 1:06:10तुम ताल तलैया में डोलते रहोगे। हमसपयो मानसरो ताल तलैया क्यों
- 1:06:45ढोल मन मस्त हुआ फिर? क्या बोले मन मस्त हुआ फिर क्यों
- 1:07:00बोले मस्त हुआ, फिर क्यों बोले? मस्त हुआ मस्त हुआ फिर क्यों
- 1:07:20बोलें मन मस्त हुआ हाँ फिर क्यों बोलें?
- 1:07:32जो मस्त हो जाता है वह तुम बोले हीरा पाययो कांट गठियायो।
- 1:07:53हीरो पायो ये जान लो कि तुम हो कौन तुम कौन हो?
- 1:08:01लेकिन समझ आएगी सत्य को स्वीकार कर के मृत्यु को स्वीकार करने के
- 1:08:08बाद। इसलिए मृत्यु पर संतो ने इतना
- 1:08:11ज़ोर दिया। ओह गोरखुम ओह कबीर ओह नाना ओह कसम
- 1:08:20हीरो पायो गांठ गठियायो बार बार बाको।
- 1:08:31क्यों खोले? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले मन
- 1:08:40मस्त हुआ फिर क्यों बोले फिर बोलने की जरूरत नहीं रह जाती।
- 1:08:48बोलता है तब तक आदमी। जब तक हिरण नहीं हो पाया, जिसने
- 1:08:56पा लिया वह मौन हो गया। यही पहचान है हृदय मौन हो गया
- 1:09:06उसका। लबों से चाहे बोलते रहे हृदय खाम
- 1:09:19अवसर है जिसने सत्य जान देखा सभी के मुकुट कबीर का पता नहीं।
- 1:09:34आग लगा दी गई। बहार धीरे धीरे सभी के मुकुटहाट
- 1:09:40नहीं लग रहा। देखता रहा भिक्षु सब के गाय मुंगी
- 1:09:47का के भाव भाई उड़द की आ रहे। सोने की भाव रहेगा।
- 1:09:57इन्हीं बातों में हो जाती है, लेकिन कबीर के सिर से ताज नहीं
- 1:10:06हटा। और लोई ने कहा था कबीर के सिर पर
- 1:10:13ताज यही पहचान कबीर सदा याद रखते हैं मौत को तुम तो कहते हो कबीर
- 1:10:19बनना चाहते हो बनोगे कैसे? ताज व्रत को याद रखने का ताज?
- 1:10:29जीसको याद करके वाल्मिकी पहुँच जाते हैं जीसको याद करके अंगुली
- 1:10:34माल पहुँच जाते हैं वह मृत्यु तुम्हारे यहाँ कुछ नहीं तुम गए
- 1:10:42मरे भूत ने देखा मृत व्यक्ति के लाश को।
- 1:10:48गया। बुद्ध गया विदा हो गया मृत्यु
- 1:10:52बड़ी अल्केमी है, रसायन है कीमियां छिपी है इसमें, लेकिन काश
- 1:11:02तुम इस सत्य को हृदय में उतार सकते गहरा।
- 1:11:08जश्न उतारनोगे फिर ताल तलैया में डोलोगे हंसा पायो मानसरोवरु।
- 1:11:26हंस पायो पायो हंस पायो मानसरोवरु।
- 1:11:43ताल तलैया क्यों डोले, क्यों डोलेगा?
- 1:11:51वह धन इकट्ठा करेगा, शोहरत इकट्ठी करेगा, पदार्थ इकट्ठा करेगा।
- 1:12:03डिग्री से इकट्ठा करेगा। क्यों चाहेगा?
- 1:12:08वो मेरे फलाओ से हो, तुम क्यों चाहेगा वो घना सा धन हो, बड़ी सी
- 1:12:16पूंजी हो, बड़ा सा साम्राज्य हो मेरा।
- 1:12:21तार तलैया क्यों ढोल मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलें मन मस्त हुआ फिर
- 1:12:35क्यों वो? धन्यवाद।